स्नो प्लाओ पेरैंट्स ऐसा ही सोचते हैं. स्नो प्लाओ का अर्थ है रास्ते में बिछी बर्फ को साफ करना ताकि उस पर आसानी से चला जा सके. स्नो प्लाओ पेरैंट्स ऐसे मातापिता होते हैं जो अपनी संतान के रास्ते में जो भी परेशानियां आती हैं, उन्हें स्वयं दूर करने में विश्वास रखते हैं ताकि उन के बच्चे बड़े होते समय किसी भी प्रकार की हार या निराशा से बचें.

ऐसे मातापिता इस हद तक जा सकते हैं कि बच्चे की अपने दोस्तों से लड़ाई हो जाने की स्थिति में टीचर से उस का गु्रप बदलने की बात कहें या फिर उस का होमवर्क खुद कर दें या उसे स्पोर्ट्स टीम में दाखिला दिलाने हेतु टीचर को घूस खिलाने का प्रयास करें. मगर ऐसे में वे यह भूल जाते हैं कि न्यूनतम संघर्ष का सामना करने वाले बच्चे अकसर कम खुश रहते हैं.

निर्देशक नागेश कुकुनूर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि हम ओवर पेरैंटेड और ओवर प्रोटैक्टेड बच्चे बना रहे हैं. सच, आज के पेरैंट्स बच्चों को न मिट्टी में खेलने देना चाहते हैं और न ही जिंदगी में निर्णय लेने देना. लंच में खाना खत्म नहीं किया तो इस विषय में टीचर से लंबी बात, होमवर्क पूरा नहीं हुआ तो एक ऐप्लिकेशन लिख देंगे, कालेज में ऐडमिशन नहीं मिल पा रहा तो मनपसंद कालेज में भारी डोनेशन दे देंगे...

पेरैंट्स यह भूल जाते हैं कि यदि बच्चों की जिंदगी में कोई उतारचढ़ाव नहीं आएगा तो वे आगे चल कर जिंदगी की परेशानियां कैसे हल कर सकेंगे? कई बार यह बात इतनी बढ़ जाती है कि कई पेरैंट्स अपने बच्चों की जौब में आ रही दिक्कतों को भी खुद ही सौल्व करना चाहते हैं.

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