Financial Equality in Couples : पहले के जमाने में माना जाता था कि घर का मर्द ही कमाने वाला होता और औरतें घर संभालती हैं. लेकिन आज के समय में यह समीकरण पूरी तरह बदल चुका है. आज कई रिश्तों में लड़कियां अपने बौयफ्रैंड या पति से ज्यादा कमा रही हैं. यह अच्छी बात है लेकिन सच यह भी है कि जब कमाई का बैलेंस बिगड़ता है तो रिश्ते में कुछ अनकहे यानी टकराव, ईगो और असुरक्षा अपनेआप आ जाते हैं. ये क्लेश पैसे को ले कर नहीं होते बल्कि ये होते हैं सोच, ईगो और समाज की उम्मीदों को ले कर.
अगर इसे समय रहते नहीं समझ गया तो छोटीछोटी बातें बड़े झगड़े का रूप ले लेती हैं. आइए, देखें कौनकौन से क्लेश आ सकते हैं और उन्हें कैसे हैंडल किया जाए :
ईगो का क्लेश: ‘मर्द कमाएगा’ वाली सोच का टकराव
हमारे समाज में सालों से लोगों के मन में यह बात फीड की गई है कि मर्द का काम है कमाना और घर चलाना जबकि लड़कियों को घर संभालना होता है. पर आज की पढ़ीलिखी लड़कियां खुद अच्छाखासा कमा रही हैं. कई दफा जब लड़की अपने बौयफ्रैंड से ज्यादा कमाने लगती है तो अनजाने में बौयफ्रैंड के दिमाग में आता है कि मैं फेल्योर साबित हो गया. मैं उसे वह लाइफ नहीं दे पा रहा जो वह खुद ले रही है. अब यह मेरा रिस्पैक्ट नहीं करेगी.
बौयफ्रैंड शायद मुंह से कुछ न बोले लेकिन उस के बरताव में इस सोच का असर दिखने लगता है. जैसे बिल पे करते टाइम अजीब फील करना, लड़की की प्रमोशन पर दिल से खुश न होना. ‘तुम्हें तो वैसे भी मु?ा से ज्यादा तनख्वाह मिलती है’ जैसे ताने मारना, छोटीछोटी बातों पर गुस्सा करना आदि.
इस से लड़की को लगता है कि मैं ने मेहनत की है तो इस में गलत क्या है और लड़के को लगता है कि मेरी वैल्यू कम हो गई.
ऐसे हालात में लड़के को यह फील कराना जरूरी है कि रिश्ता कोई कंपनी नहीं है जहां सीईओ एक ही होगा. आप दोनों एक टीम हो. लड़के की काबिलीयत सिर्फ सैलरी से नहीं मापी जा सकती. उसे घर के दूसरे कामों में, प्लानिंग में, मैनेजमैंट में, इमोशनल सपोर्ट में लीडर बनने दें. ईगो को प्यार से हैंडल करें तानों से नहीं.
पैसे के खर्च को ले कर क्लेश
जब लड़की ज्यादा कमाती है तो खर्चे को ले कर कई तरह की प्रौब्लम्स आती हैं:
ट्रिप/गिफ्ट वाला क्लेश: लड़की कहती है कि चलो गोवा चलते हैं 5 स्टार में रुकते हैं तो लड़का अंदर से प्रैशर फील करता है क्योंकि वह अफोर्ड नहीं कर सकता. अगर वह मना करे तो लड़की को लगता है कि मूड खराब कर दिया.
बिल बंटवारे वाला क्लेश: डेट पर बिल कौन दे? अगर हमेशा लड़की दे तो लड़के को लगता है वह छोटा बन रहा है. अगर हमेशा लड़का देने की जिद करे तो वह फाइनैंशियली स्ट्रैस में आ जाएगा.
तेरेमेरे का झगड़ा और ताने: झगड़े में सब से खतरनाक लाइन है कि इस फोन/घर/सामान के लिए भी तो मेरे ही पैसे लगे हैं. एक बार यह लाइन दोनों के बीच आ गई तो रिश्ता टूटने लगता है.
क्या करें
पहले दिन से पैसों को ले कर क्लीयर रहें. फिफ्टीफिफ्टी जरूरी नहीं है. आप प्रोपोर्शनल बंटवारा कर सकते हो जैसे लड़की 70त्न दे और लड़का 30त्न या बड़े खर्च लड़की करे और छोटे लड़का. सब से जरूरी है पैसा ‘मेरा और तुम्हारा’ नहीं बल्कि ‘हमारा’ बनाओ. गिफ्ट देते समय कभी कीमत न बताएं.
टाइम और प्रायोरिटी के क्लेशेज
आमतौर पर जो ज्यादा कमाता है उस की जौब ज्यादा डिमांडिंग होती है. उस की मीटिंग्स, ट्रैवल, लेट नाइट काल्स ज्यादा होती हैं.
जब लड़की ज्यादा कमा रही हो तो ऐसे में लड़के को लगता है कि लड़की को आफिस से ही फुरसत नहीं है. वह मु?ो टाइम ही नहीं देती. उधर लड़की सोचती है कि मैं इतनी मेहनत किस के लिए कर रही हूं? रिश्ते के लिए ही तो. फिर भी इसे प्रौब्लम है.
यहां क्लेश इस बात पर होता है कि रिश्ते में ज्यादा इंपौर्टैंट क्या है- कैरियर या साथ में बिताया टाइम?
ऐसी स्थिति में क्वालिटी टाइम फिक्स करें. हफ्ते में 2 दिन ‘नो फोन, नो लैपटाप’ वाले रखें. लड़के को भी समझना होगा कि ज्यादा कमाई का मतलब ज्यादा जिम्मेदारी भी है और लड़की को भी यह याद रखना होगा कि पैसा सबकुछ नहीं खरीद सकता. एकदूसरे का साथ चाहिए तो कुछ कंप्रोमाइज करने होंगे.
समाज और परिवार का दखल
लड़के के दोस्त पूछते हैं, ‘भाई बीवी/ गर्लफ्रैंड से पैसे लेता है क्या?’ लड़की के घर वाले बोलेंगे, ‘लड़की इतना कमाती है तो लड़का कैसा भी चलेगा बस उसे लड़की से दब कर रहना होगा.’ इधर शादी के बाद सास बोलेंगी, ‘घर देर से आती है. बहू तू नौकरी छोड़ दे.’’
ये बाहरी कमैंट्स कपल के बीच जहर घोल देते हैं. लड़का शर्म से दब जाता है और लड़की चिड़चिड़ी हो जाती है.
ऐसे में कपल को मिल कर काम करना होगा. दुनिया को जवाब देना बंद करें. जब कोई ताना मारे तो दोनों मिल कर हंस कर टाल दें कि हां यार पार्टनर अच्छा है अपना. इतना कहना काफी है. रिश्ता लोगों के लिए नहीं बल्कि आप दोनों के लिए है.
असुरक्षा का क्लेश कि कहीं वह मुझे छोड़ न दे
लड़का जो कम कमाता है उसे अंदर से डर लगता है कि लड़की इतनी सक्सैसफुल है, कहीं उसे मु?ा से बेहतर लड़का न मिल जाए. इस डर की वजह से वह पजैसिव हो जाता है, शक करता है, लड़की की हर सक्सैस को छोटा दिखाता है और लड़की सोचती है कि सक्सैसफुल होना गुनाह है क्या?
रिश्ते में रोज ‘तुम मेरे लिए स्पैशल हो’ यह बोलना जरूरी है. सक्सैस को साथ में सैलिब्रेट करें. बौयफ्रैंड को फील कराएं कि वह सिर्फ बौयफ्रैंड नहीं बल्कि हर खुशी, हर गम का पार्टनर है.
दरअसल, प्रौब्लम कमाई में नहीं है. प्रौब्लम उस ईगो, असुरक्षा और कम्युनिकेशन की कमी में है जो कमाई के साथ आती है.
एक हैल्दी रिश्ते की नींव 4 चीजों पर होती है:
इज्जत: चाहे वह 10 हजार कमाए या
1 लाख. उस की मेहनत की इज्जत करें.
टीमवर्क: दोनों मिल कर इस रिश्ते को चला रहे हैं. कोई मालिक या कोई नौकर नहीं है.
कम्युनिकेशन: जो भी फील हो सीधे बोलें. घुमाफिरा कर तानें न मारें.
फ्लैक्सिबिलिटी: आज के समय में कोई जैंडर रोल नहीं है. अब इंसान जिस काम में अच्छा है वही काम करता है.
रिश्ता बैलेंस शीट नहीं है. इस में प्रौफिटलौस नहीं देखा जाता. अगर लड़की ज्यादा कमा रही है तो यह लड़के की हार नहीं है. यह दोनों की जीत है.
इस का मतलब है आप के घर की फाइनैंशियल सिक्योरिटी ज्यादा है. आप ज्यादा घूम सकते हैं, ज्यादा सेव कर सकते हैं. बस जरूरत है मैच्योरिटी की, ईगो को साइड में रख कर बात करने की.
