गुफाएं मनुष्य के लिए पनाहगाह रहीं हैं. कई गुफाएं कुदरत ने उसे दी, तो कई उसने सभ्यता के विकास, दर्शन, कला साधना और एकांत के लिए भी बनाईं. ये गुफाएं इतनी बेहतरीन थीं कि वे आज की आधुनिक इंजीनियरिंग के लिए चुनौती बनी हुई हैं. भारत में भी गुफाओं का इतिहास लाखों और हजारों साल पुराना है.
वराह गुफाएं (महाबलीपुरम, तमिलनाडु)
तमिलनाडु में महाबलीपुरम में स्थित वराह गुफाएं बहुत फेमस हैं. यहां भगवान विष्णु का मंदिर है. इन गुफाओं की कलाकारी इतनी सुंदर है कि इसे यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनाया है. इस गुफा के अलावा सित्तनवसल और नार्थमलाई गुफा भी मशहूर है. महाबलीपुरम तक एयर, ट्रेन और बस से आसानी से जाया जा सकता है.
बोर्रा और बेलम की गुफाएं (विशाखापट्टनम)
बोर्रा गुफाओं की खोज 1807 में ब्रिटिश भूविज्ञानी विलियम जॉर्ज ने की थी. आंध्र प्रदेश में विशाखापट्नम जिले में स्थित बोर्रा गुफाएं अनंतगिरि पहाड़ियों में स्थित है. आंध्र में ही कुरनूल से 106 किमी दूर बेलम गुफाएं स्थित हैं. दोनों ही गुफाएं 10 लाख साल पुरानी हैं. विशाखापट्नम के लिए प्रमुख शहरों से विमान, ट्रेन और बस की सेवा उपलब्ध है.
बादामी गुफा (कर्नाटक)
कर्नाटक के बादामी में सुंदर और नक्काशीदार गुफाएं हैं. बादामी की चार गुफाओं में से दो गुफाएं भगवान विष्णु, एक शिव जी और एक जैन धर्म से संबंधित बताई जाती हैं. लाल पत्थर से बनाई गई ये गुफाएं सुंदरता के लिए जानी जाती हैं. कर्नाटक में एहिलो गुफा भी आकर्षण का केंद्र है. बादामी तक हवाई, सड़क या रेलमार्ग से पहुंचा जा सकता है.
