एक्सपर्ट के अनुसार दिल की बीमारियों के बारे में ऐसे पैदा करें जागरूकता

कार्डियोवैस्कुलर बीमारी और इससे जुड़े जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने से आबादी के इसके संपर्क में आने की सम्भावना कम हो जाती है, जिससे कि सीवीडी से संबंधित मौतों की संख्या में भी कटोती होती है. जागरूकता के साथ हर बीमारी को रोका जा सकता है, सही समय पर पता लगने से उचित इलाज देकर लाखो ज़िन्दगीयाँ बचाई जा सकती हैं.

जब किसी इंसान को बीमारी के बारे में पता चलता है, तो वे उस बीमारी के निवारक के लिए’ कदम उठाता है , जैसे स्क्रीनिंग और परीक्षणों के लिए सक्रिय रूप से जाना, जिससे कि बीमारी के हानिकारक प्रभावों को कम किया जा सके.  यह तभी संभव है जब वे रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाए.

ऐसा अनुमान है कि भारत में होने वाली 63 प्रतिशत मौतें नॉन -कम्युनिकेबल डिज़ीज़  के कारण होती हैं, जिनमें से 27 प्रतिशत मौतों का कारण हृदय रोग होता है.  इसके अतिरिक्त, 40 से 69 वर्ष की आयु के लोगों में होने वाली 45% मौतों, सीवीडी के कारण होती  है. इस बीमारी के लक्षणों में उच्च रक्तचाप, सीने में दर्द, और सांस लेने में कठिनाई शामिल है.  भारत में दिल के दौरे की घटनाएं इतनी खतरनाक दर पर हैं कि जागरूकता पैदा करना आवश्यक है. सीवीडी के लिए शारीरिक गतिहीन और अस्वस्थ जीवन शैली प्रमुख योगदानकर्ता हैं.  भारत में सीवीडी के मामले अस्वास्थ्य भोजन के सेवन, धूम्रपान और शराब पीने जैसे कारणों से भी बढ़ रहे हैं. इसके अलावा, COIVD-19 ने  सीवीडी के जोखिम को और तीव्र गति से बड़ा दिया हैं.

डॉ अंबू पांडियन, चिकित्सा सलाहकार, अगत्सा इस  खतरनाक बीमारी के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के कुछ तरीके साझा कर रहे हैं जिनसे  विश्वभर में लाखों लोगों की जान बच सकती हैं.

सीपीआर पर सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन –

अस्पताल के बाहर दिल का दौरा पड़ने से मरने वालों की संख्या 10 में से 8 है. अगर कार्डियक अरेस्ट के पहले कुछ मिनटों में ही मरीज़ को सीपीआर  दे दिया जाए तो इन नम्बर्स को कम किया जा सकता है.   जब दिल धड़कना बंद कर देता है तो किसी व्यक्ति की जान बचाने के लिए एक आपातकालीन प्रक्रिया –  सीपीआर दिया जाता है. अस्पताल के बाहर हजारों लोगों की जान बचाने के लिए पैरामेडिक्स और चिकित्सक भी कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित कर सकते हैं ताकि लाखों लोगो की जान बचाई जा सके.

नियमित जांच करवाना  –

हृदय रोग से पीड़ित लोगों का अज्ञानी होना भी आम बात है. ज्यादातर मामलों में, लक्षण अपरिचित लेकिन घातक होते हैं. उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप जैसे जोखिम कारक कार्डियक अरेस्ट के चेतावनी संकेत हैं. एक दूसरे को नियमित जांच के लिए प्र्रोत्साहन करने से सीवीडी से जुडी मौतों को कम किया जा सकता है.

फिटनेस बनाए रखें –

कार्डियक अरेस्ट का सबसे बड़ा कारण अनियमित शारीरिक गतिविधि हैं. बिना किसी शारीरिक गतिविधि के लम्भे समय तक बैठे रहने से दिल के दौरे का ख़तरा बढ़ जाता है.  इसलिए पूरे दिन में कम से कम एक बार एक्सेर्साइज़ करने की एडवाइस दी जाती है.  अगर एक्सेर्साइज़ न हो पाए तो कम से कम पूरे दिन में 30 मिनट के लिए पैदल चले.

भारत में, सीवीडी एक गंभीर खतरे के रूप में उभरा है. जिस प्रकार पच्छिमी देशों ने इस महामारी को नियंत्रण किया है ठीक उसी प्रकार भारत को भी इस बीमारी से बचने के लिए सख्त कदम उठाने का समय नज़दीक आगया हैं.  जनसंख्या स्तर पर सामान्य जोखिम कारकों और चिकित्सा उपचारों में परिवर्तन के कारण इन देशों में हृदय संबंधी मृत्यु दर में गिरावट आई है, जनसंख्या स्तर पर तंबाकू के उपयोग, कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप में परिवर्तन के कारण मृत्यु दर में आधे से अधिक कमी आई है. हृदय रोग के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के लिए पच्छिमी देशों में नेशनल वियर रेड डे मनाया जाता हैं.  ठीक उसी प्रकार हमारा देश भी  जागरूकता पैदा करने के लिए इसी तरह की पहल करने की आवश्यकता है.

पहली नजर का प्यार और अट्रैक्शन

यह पहली नजर का उफ क्या असर है. तुम्हारी कसम, डगमगाए से हम हैं… उंगलियों में चाबी का गुच्छा नचाते, फुल वौल्यूम में गाते हुए अतुल ने बंधु के कमरे में प्रवेश किया. मेज पर फैली अपनी किताबों को समेटते हुए बंधु ने अतुल से पूछा, ‘‘यार, क्या बात है, बड़ा खुश नजर आ रहा है?’’ ‘‘यार, बात ही ऐसी है,’’ कहते हुए अतुल गाने की फिर वही पंक्तियां दोहराने लगा.

बंधु ने अपनी बेचैनी दबाते हुए फिर पूछा, ‘‘अब कुछ बताएगा भी या यों ही गला फाड़ता रहेगा?’’ जब अतुल ने कालेज में ही पढ़ने वाली नीता के साथ अपनी पहली नजर में ही प्यार हो जाने का किस्सा सुनाया तो बंधु हंसने लगा और हंसतेहंसते बोला, ‘‘यार, तू इसे पहली नजर क्यों कह रहा है? मुझे तो लगता है यह शायद तेरी 26वीं नजर वाला प्यार है. एमए में हम दोनों को साथ पढ़ते हुए अभी सिर्फ एक साल ही बीता है, लेकिन इन 12 महीनों में तेरी नजरें 25 युवतियों से तो पहली नजर वाला प्यार कर ही चुकी हैं.

अपनी पहली नजर के प्यार की यों मखौल उड़ता देख अतुल चिढ़ सा गया, बोला, ‘‘मैं सब समझता हूं, तुझ से तो कुछ होता नहीं, बस, बैठाबैठा मेरी तरक्की देख कर जलता रहता है.’’ दोस्त को मनाते हुए बंधु बोला,’’ यार, तू तो नाराज हो रहा है. अरे, मैं क्यों तेरी तरक्की से जलने लगा, मैं तो चाहता हूं कि तू और तरक्की करे. लेकिन जिसे तू प्यार कह रहा है वह प्यार न हो कर मात्र आकर्षण है.’’

बंधु की बात बीच में ही काटता हुआ अतुल बोला, ‘‘यार, तेरी हर समय यह लैक्चरबाजी मुझे पसंद नहीं. अरे, दिलों की बात तू क्या जाने? नीता और मैं दोनों एकदूसरे को कितना चाहने लगे हैं, हम शादी भी करेंगे. तब तेरा मुंह बंद हो जाएगा.’’ कुछ दिनों बाद अतुल के नीता से चल रहे प्रेमप्रसंग का वही अंत हुआ जो उस के पिछले 25 का हुआ था. क्या सच में पहली नजर का प्यार प्रेमियों के अंदर पनपता है? अगर पहली नजर वाला प्यार उत्पन्न होता है तो कुछ समय बाद प्यार से लहराता दिल अचानक सूख क्यों जाता है.

विपरीत सैक्स के प्रति अपार आकर्षण पहली नजर में होने वाला प्यार काफी हद तक यौनाकर्षण से जुड़ा होता है. लड़केलड़कियां एकदूसरे से विपरीत सैक्स के कारण अपार आकर्षण अनुभव करने लगते हैं. उस आकर्षण को ही वे सच्चा प्यार समझने लगते हैं. वास्तव में यह प्यार नहीं होता. यह तो मात्र एक आकर्षण है, जो विपरीत सैक्स के बीच स्वाभाविक रूप से होता है.

विपरीत सैक्स की आपस में बहुत ज्यादा निकटता से कभीकभी प्यार होने जैसी गलतफहमी होने लगती है. 15 वर्ष की शालू को लगने लगा जैसे वह अपने मास्टर के बिना नहीं जी पाएगी. 25 वर्षीय मास्टरजी उसे घर में सितार सिखाने आते थे. एकांत कमरे में मास्टरजी की समीपता से उसे लगने लगा कि वह मास्टरजी से बहुत प्यार करने लगी है. वह तो अच्छा हुआ कि शालू पर चढ़ा मास्टरजी का आकर्षण सिर चढ़ कर बोलने लगा. रातदिन बेटी के मुंह से मास्टरजी के किस्से सुन कर शालू की मम्मी का माथा ठनका, बात बिगड़ने से पहले ही मम्मी ने संभाल ली. कुछ दिन तो शालू ने मास्टरजी को बहुत मिस किया, लेकिन धीरेधीरे वह मास्टरजी को भूलने लगी. अब तो मास्टरजी को देख कर उस का मन दुखी हो जाता है. वह स्वयं से प्रश्न करती है, आखिर इन बौनेकाले मास्टरजी में ऐसा क्या था जो मैं इन पर लट्टू हो गई थी. विपरीत सैक्स के आकर्षण का समीपता के अलावा और भी कारण हो सकते हैं जो दिल में प्यार पैदा कर देते हैं.

कल्पना के अनुरूप मिल जाना हर लड़का या लड़की की जीवनसाथी के बारे में जरूर कुछ न कुछ कल्पना होती है. कल्पना के अनुरूप कोई भी एक गुण मिल जाने पर प्यार हो जाता है. एक कौन्फ्रैंस में देवेश नागपुर गए थे. वहीं उन्होंने जींसटौप में सजी हंसमुख मीनाक्षी को देखा, तो उन्हें लगा वे उसे अपना दिल ही दे बैठे हैं. एक सप्ताह की कौन्फ्रैंस में 5 दिन दोनों ने साथसाथ बिताए. वहां आए सभी लोगों को भी देवेश और मीनाक्षी के प्रेम को प्रेमविवाह में बदलने का पूरा विश्वास था. लेकिन जाने से 2 दिन पहले की बात है. मीनाक्षी देवेश से मिलने उन के कमरे में आई.

देवेश उस समय चाय बना रहे थे. मीनाक्षी को आया देख कर उन्होंने उस के लिए भी चाय बनाई. 2 कपों में चाय बना कर देवेश ने मेज पर रखी, मीनाक्षी ने चाय उठाई. अपने कप में बाहर की ओर लगी चाय को उस ने रूमाल से नजाकत से पोंछा. देवेश इस उम्मीद में थे कि उन के कप में लगी चाय भी पोंछेगी, लेकिन उस ने उन के कप की ओर ध्यान ही नहीं दिया. चाय पी कर जूठे कपप्लेट वहीं छोड़ कर वह चली गई. देवेश मीनाक्षी के इस व्यवहार से आहत हो गए. मीनाक्षी के प्रति उन के मन में प्यार का छलकता सागर उसी समय सूख गया. यह अवश्य था कि उन की पसंद के अनुसार मीनाक्षी स्मार्ट थी, हंसमुख थी, लेकिन जिसे उन की जरा भी परवाह नहीं, ऐसी जीवनसाथी उन्हें जीवन में क्या सुख देगी.

उसी समय कई दिनों से बढ़ाई प्यार की डोर उन्होंने एक झटके से काट डाली. उस के बाद मीनाक्षी से उन्होंने कोई बात नहीं की. अगले दिन वे नागपुर से कानपुर लौट आए. जब मीनाक्षी की ही समझ में कोई कारण न आया तो औरों की समझ में क्या आता. आखिर सब ने देवेश के जाने के बाद उन्हें धूर्त, मक्कार तथा फ्लर्ट की संज्ञा दी.

अवगुण आकर्षण पर भारी प्यार हो जाने तथा प्यार के टूट जाने के पीछे मुख्य कारण है हमारी पंसद का बिखरी अवस्था में होना. हमारे दिमाग में जहां एक ओर गुणों की लंबीचौड़ी लिस्ट होती है, वहीं अवगुणों की लिस्ट भी मौजूद रहती है. हमारे इच्छित सभी गुणों का एकसाथ मिलना असंभव होता है.

जब किसी से प्यार होता है तो उस प्यार के पीछे हम उस के किसी गुण से आकर्षित हो कर उस से प्यार करते हैं. लेकिन प्यार में नजदीकी बढ़ने के साथ ही अगर कोई बुराई सामने आ जाती है, तो वह प्यार के आकर्षण को वहीं समाप्त कर देती है. एक श्रीमान हैं. उम्र 40 वर्ष के लगभग है. लेकिन अभी तक कुंआरे हैं. दिल हथेली पर लिए घूमते हैं. मौका मिलते ही दिल लड़की को सौंपने में नहीं हिचकिचाते, चाहे बदले में उन्हें जूते ही खाने पड़ें. लेकिन कई लड़कियों से दिल लगाने के बाद भी वे अकेले के अकेले हैं. कारण, एक न एक गुण तो उन्हें हर लड़की का आकर्षित कर ही लेता है. लेकिन प्यार में नजदीक आने के बाद कोई अवगुण उन के शादी के जोश को समाप्त कर देता है.

वैसे, दिल के साथ दिमाग का प्रयोग करने वाले प्रेमियों की संख्या काफी कम होती है. चूंकि प्यार अंधा होता है, इसलिए अवगुणों की ओर तो ध्यान जाता ही नहीं. प्यार में डूबे अकसर प्रेमीप्रेमिका एकदूसरे के अवगुणों के प्रति आंखें मूंद कर प्यार के अंधे होने को सत्य साबित करते हैं. किस की कौन सी अदा कब किस के दिल में

मुग्धा बस से दिल्ली जा रही थी. मुग्धा खिड़की से बाहर का दृश्य निहार रही थी अचानक सिगरेट का धुआं उस की नाक में घुसा. उस ने बुरा सा मुंह बनाते हुए पलट कर देखा. बगल की सीट पर ही बैठा नवयुवक बड़ी मस्ती से सिगरेट के छल्ले निकालनिकाल कर मंत्रमुंग्ध हो, उसे देख रहा था. मुग्धा बुरी तरह झल्लाई, ‘‘आप को कुछ तमीज है.’’ युवक ने सहम कर देखा और फौरन जली हुई सिगरेट अपने जूतों के नीचे मसल डाली. मुग्धा उसे देखती रह गई. अब बाहर के दृश्यों को देखने में उस का मन न लगा. रहरह कर आंखें उसी युवक पर टिक जातीं जो सिगरेट बुझा कर उदास सा बैठा था.

न जाने उस में मुग्धा को क्या लगा कि वह उस युवक के भोलेपन पर मुग्ध हो गई. कुछ देर पहले जितनी बेरुखी से उस ने उसे डांटा था, अब आवाज में उस से दोगुनी मिठास घोलते हुए उस ने युवक से पूछा, ‘‘आप इतनी सिगरेट क्यों पीते हैं?’’ फिर बातचीत का ऐसा सिलसिला चला कि कुछ ही घंटों में वे दोनों एकदूसरे के काफी करीब आ गए. इस घटना के कुछ ही समय बाद दोनों विवाहबंधन में भी बंध गए. ठीक इसी तरह निशा अंगरेजी वाले सर, आनंद की आवाज पर फिदा है. सहेलियों के बीच बैठी हो या परिवार वालों के, उस की बातों का केंद्रबिंदु आनंद सर ही रहते हैं.

‘‘क्या आवाज है उन की. लगता है जैसे कहीं बहुत दूर से आ रही है.’’ जितनी देर आनंद सर कक्षा में पढ़ाते, निशा पढ़ाईलिखाई भूल, मंत्रमुग्ध हो आनंद सर की आवाज के जादू में डूबी रहती. निशा अपने सर की आवाज की दीवानी है तो कक्षा में सब से स्मार्ट दिखने वाली शशि, ग्रामीण कैलाश को देखते न अघाती थी, उस के आकर्षण का केंद्रबिंदु था कैलाश की ठोड्डी में पड़ने वाला गड्ढा. इसी तरह न जाने किस की कौन सी अदा कब किसी के दिल में प्यार की चिनगारी सुलगा दे, यह बतलाना बहुत मुश्किल है.

सिंपल नहीं काफी फैशनेबल हैं छोटी Imlie, एक्ट्रेस की वायरल हुई फोटोज

हाल ही में टीवी सीरियल इमली में 20 साल का लीप देखने को मिला है, जिसके बाद सीरियल में नए लीड रोल्स की एंट्री हुई है. वहीं इमली और आर्यन की बेटी यानी छोटी इमली भी बड़ी हो गई है, जिस रोल में एक्ट्रेस मेघा चक्रवर्ती (Megha Chakraborty) नजर आ रही हैं. सादगी और मासूमियत से भरे रोल में एक्ट्रेस मेघा को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. वहीं सोशलमीडिया पर एक्ट्रेस की फैन फौलोइंग भी तेजी से बढ़ रही है. हालांकि सीरियल में सिंपल अंदाज में दिखने वाली एक्ट्रेस मेघा (Megha Chakraborty) काफी फैशनेबल हैं, जिसका अंदाजा उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को देखकर लगाया जा सकता है. आइए आपको दिखाते हैं छोटी इमली (Imlie 2.0) के औफस्क्रीन फैशन की झलक…

काफी मौर्डन हैं मेघा

जूनियर इमली यानी एक्ट्रेस मेघा चक्रवर्ती सीरियल में जहां सूट सलवार पहने सिंपल और सादगी भरे अंदाज में दिखती हैं तो वहीं असल जिंदगी में वह काफी मौर्डन अंदाज में नजर आती हैं. एक्ट्रेस मेघा को ड्रैसेस पहनना काफी पसंद है, जिसका अंदाजा उनके औफिशियल सोशलमीडिया अकाउंट को देखकर लगाया जा सकता है. एक से बढ़कर एक ड्रेसेस में एक्ट्रेस मेघा का लुक काफी खूबसूरत लगता है.

 

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इंडियन लुक भी करती हैं ट्राय

 

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वेस्टर्न ही नहीं एक्ट्रेस मेघा चक्रवर्ती इंडियन लुक्स को भी कैरी करती हुई नजर आती हैं. लहंगा हो या शरारा, एक्ट्रेस अपने सोशलमीडिया अकाउंट पर अपना हर लुक फ्लौंट करती हुई दिखती हैं. वहीं फैंस को भी उनका ये अंदाज काफी पसंद आता है और उनके लुक की फैंस काफी तारीफें भी करते हैं.

 

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ब्राइडल लुक से जीता फैंस का दिल

 

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एक्ट्रेस मेघा चक्रवर्ती अपनी पुराने सीरियल में ब्राइडल लुक भी कैरी कर चुकी हैं, जिसे फैंस ने काफी पसंद किया था. उनका हर लुक फैंस जहां फैंस को पसंद है तो वहीं दुल्हन की तरह सजे देखकर फैंस उनपर दिल दे बैठे थे. हालांकि सीरियल इमली में वह नए लीड एक्टर के साथ एक्ट्रेस का रोमांस देखने के लिए काफी बेताब नजर आ रहे हैं.

 

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दीनानाथ का वसीयतनामा: दीवानजी की वसीयत में क्या था

family story in hindi

बच्चों को सिखाएं सेविंग गुर, ताकि भविष्य बनें बेहतर

बच्चे भविष्य में बड़े हो कर अपनी आय का अच्छे ढंग से प्रबंधन करें एवं सुखी जीवन जिएं, इस के लिए जरूरी है कि वे धन प्रबंधन बचपन से सीखें.

बच्चों के अंदर धन प्रबंधन के प्रति संवेदना विकसित करने के लिए निम्न बिंदुओं के ऊपर उन से चर्चा की जा सकती है, जैसे धन की बचत से भविष्य में होने वाले लाभ, धन की बचत के तरीके आदि. इतना अवश्य ध्यान रखें कि अलगअलग उम्र के बच्चों की सोच और आवश्यकताएं अलगअलग होती हैं और उन्हीं के अनुसार उन के अंदर धन प्रबंधन की आदत विकसित की जा सकती है. बच्चों को उन की उम्र के आधार पर 3 वर्गों में विभाजित कर के उन में धन प्रबंधन की आदत विकसित की जा सकती है.

5 से 10 साल के बच्चे

इस उम्र के बच्चों में धन प्रबंधन की प्रवृत्ति पैदा करने हेतु इन के साथ ऐसे गेम्स खेलें, जिन में पैसे का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में हो. बच्चों का गेम्स में अच्छा करने का आधार यह हो कि वे अधिक से अधिक पैसे अर्जन करें और कम खर्च कर के अत्यधिक सामान खरीदें.

आप बाजार से खरीदारी कर के आएं तो बच्चों को रेजगारी गिनने के लिए दे दें. इस से बच्चों को मुद्रा की इकाइयों की जानकारी प्राप्त होगी.

यदि बच्चे कोई अच्छा काम करें तो उन्हें पैसे से भी पुरस्कृत करें. लेकिन उन से यह भी कहें कि उन्हें पुरस्कार स्वरूप जितने पैसे मिलें उन्हें वे गिन कर गुल्लक में डालें तथा अपने बचाए गए पैसों का हिसाब एक नोटबुक में अवश्य रखें.

इस उम्र के बच्चों के लिए एलआईसी जैसी बीमा कंपनियों के पास बचत की कुछ पौलिसियां भी हैं, जिन में कम से कम 5,000 प्रतिवर्ष का प्रीमियम दे कर बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है. इस की जानकारी बच्चों को जरूर कराएं ताकि उन्हें बचत से होने वाले फायदे का एहसास हो और बड़े हो कर बचत के महत्त्व को वे समझें.

10 से 15 साल के बच्चे

इस उम्र के बच्चे इस योग्य हो जाते हैं कि रुपएपैसे का लेखाजोखा रख सकें. संभव हो तो परिवार के सदस्य बाजार जाते हुए बच्चों को साथ ले जाएं. सामान की खरीदारी करते हुए वस्तुओं के ऊपर अंकित कीमत तथा दुकानदार द्वारा ली गई कीमत की जानकारी के लिए इन की सहायता अवश्य लें. साथ ही किस ब्रांड का सामान सब से सस्ता है, इस की जानकारी के लिए भी बच्चों से मदद लें. इस कार्य में बच्चों को मजा भी आएगा और उन के अंदर आत्मविश्वास की भावना भी पैदा होगी. साथ ही धन के समुचित उपयोग की क्षमता भी विकसित होगी.

घर में आय कितनी आ रही है तथा उस का उपयोग कहांकहां हो रहा है, यह बात बच्चों को जरूर बताएं. इस के जरिए उन्हें यह शिक्षा अवश्य दें कि कैसे बड़े हो कर जब वे नौकरीपेशा हो जाएंगे अपनी आमदनी का उपयोग और बचत कैसे करेंगे.

संभव हो तो बच्चों के नाम पास के बैंक में आवर्ती जमा खाता खोल दें और उन्हें भेज कर या साथ ले जा कर उन्हीं से फौर्म भरवाएं और धन जमा करवाएं. इस से उन के अंदर बचत की सही भावना पैदा होगी तथा बैंक के क्रियाकलापों की जानकारी भी होगी.

15 से 20 साल के बच्चे

घर के संपूर्ण धन प्रबंधन की जिम्मेदारी इस उम्र के बच्चों को दे दी जाए. इस से उन के अंदर न केवल एक जिम्मेदार पारिवारिक सदस्य होने का एहसास होगा, बल्कि धन प्रबंधन का समुचित कौशल भी पैदा होगा.

बच्चों में अर्थव्यवस्था, वाणिज्य और वित्त से संबंधित समाचारपत्र एवं पत्रिकाओं को नियमित पढ़ने की आदत डलवाएं. जहां तक शौपिंग करने की बात है, आप बच्चों से ही जानकारी प्राप्त करें कि किस जगह पर सामान खरीदने से कुछ छूट मिलेगी. इस से उन के अंदर धन के उचित तरीके से उपयोग करने की आदत पड़ेगी, जो उन में जीवनपर्यंत बनी रहेगी. बच्चों को यह जरूर बताएं कि उन के द्वारा की गई बचत का उपयोग उन की बड़ी या अकस्मात आई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकता है. उन्हें यह भी बताएं कि उन के द्वारा खरीदी गई वस्तुओं की गुणवत्ता ज्यादा महत्त्वपूर्ण है न कि ब्रांड.

धन प्रबंधन की जिम्मेदारी देते हुए यह अवश्य ध्यान रखें कि इस से उन की पढ़ाई में कोई बाधा न पड़े. इन बातों को व्यवहार में लाएं तो भविष्य में न केवल इन से बच्चों का ही फायदा होगा, बल्कि आप भी अपने बच्चों के आर्थिक मसलों को ले कर निश्चिंत रहेंगे.

निवेश की बजटिंग

आजकल प्रत्येक व्यक्ति इस बात पर चिंताग्रस्त रहता है कि अपनी आमदनी का बजट कैसे बनाए, जिस से घर की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथसाथ भविष्य में आने वाले बड़े खर्च की व्यवस्था आसानी से हो जाए.

बच्चे की उच्च शिक्षा और परिवार के किसी को अचानक होने वाली बीमारी पर होने वाला खर्च हर परिवार में खास है.

बच्चों की शिक्षा के ऊपर भविष्य में आने वाले खर्चों को ध्यान में रख कर प्रतिमाह क्व1000 बच्चों के भविष्य से जुड़ी किसी पौलिसी में निवेश करना ठीक रहता है. आजकल वित्तीय बाजार में बीमा कंपनियों की कई पौलिसी उपलब्ध हैं. किसी पौलिसी में निवेश न करना चाहें तो बैंक या पोस्ट औफिस में आवर्ती जमा के रूप में भी निवेश कर के बच्चों के उच्च शिक्षा हेतु आवश्यक खर्च की व्यवस्था की जा सकती है.

स्वास्थ्य के ऊपर बड़े खर्च के लिए सब से अच्छा रहेगा ऐसी कोई मैडिक्लेम पौलिसी लेना, जिस से परिवार के किसी सदस्य को अचानक अस्पताल में भरती होना पड़े तो उस वक्त आने वाले खर्च को बिना ऋण लिए पूरा किया जा सके.

इन के अलावा आमदनी के बचे हुए भाग को उचित विकल्पों में निवेश करना चाहिए, लेकिन निवेश करते वक्त कुछ सावधानी बरतनी चाहिए.

सोने और चांदी में थोड़े समय के लिए निवेश कभीकभी काफी फायदा तो कभीकभी भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है. लेकिन यदि लंबे समय के लिए इन धातुओं में निवेश किया जाए तो लाभ ही होगा.

इस वक्त म्यूचुअल फंड्स और कंपनियों के शेयर में निवेश काफी जोखिम भरा है, इसलिए इस तरह के विकल्पों के बारे में जब तक आप की पकड़ शेयर बाजार के उतारचढ़ाव की बारीकियों पर न हो तो न सोचें.

टैक्स बचाना प्रत्येक लोवर मिडिल क्लास और मिडिल क्लास के परिवारों की प्रमुख आवश्यकता बन गई है. इसलिए निवेश करते वक्त इस का अवश्य ध्यान रखें कि आप का टैक्स बचाने का उद्देश्य पूरा हो. ध्यान रहे कि आप 1 लाख 20 हजार तक के निवेश पर टैक्स बचत की सुविधा का लाभ उठा सकती हैं, जिस में क्व1 लाख से ऊपर के 20 हजार का निवेश सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त कंपनियों के इन्फ्रास्ट्राक्चर बौंड्स में हो. टैक्स की बचत से जुड़े निवेश बैंकों में 5 साल की अवधि की सावधि जमा योजनाओं में और पोस्ट औफिस में उपलब्ध पीपीएफ में भी किए जा सकते हैं.

प्रौपर्टी बाजार में निवेश लंबी अवधि में अच्छा लाभ कमाने के लिए किया जा सकता है. लेकिन इस के लिए प्रौपर्टी की बारीकियों की समझ बहुत जरूरी है. नहीं तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं.

अंत में आप यह बात अच्छी तरह समझें कि आमतौर पर हर घर में आमदनी कड़ी मेहनत करने से आती है, इसलिए इस का खर्च और निवेश इस तरीके से करना चाहिए कि वह परिवार की सुखसुविधा और संपन्नता में इजाफा करे. संभव हो तो इन बारीकियों को अपने घर के समझदार बच्चों को भी बताएं. इस से आने वाली पीढ़ी के अंदर आमदनी को स्मार्टली बजट और निवेश करने की कला विकसित होगी.

Festive Special: इस वीकेंड बनाएं ये हैल्दी स्नैक्स

इस वीकेंड शाम के नाश्ते में आप ये हेल्दी स्नैक्स ट्राई कर सकती हैं. इस वीकेंड आप बनाएं स्वर्ली सैंडविच, ड्रैगनफ्लाई सैंडविच और हैल्दी बाइट्स.

स्वर्ली सैंडविच

सामग्री

1 ब्रैड लोफ

60 ग्राम बटर

कलर्ड स्प्रिंकल्स जरूरतानुसार

विधि

ब्रैड लोफ के लंबाई में 4 टुकड़े कर बेलन से पतला करें. हर टुकड़े में बटर लगा कर कलर्ड स्प्रिंकल्स बुरक कर रोल करें. हर रोल को काट कर तुरंत सर्व करें.

ड्रैगनफ्लाई सैंडविच

सामग्री

1 पीटा ब्रैड

1 ककड़ी का अचार

2 गाजर

1/4 कप क्रीम चीज

2 बड़े चम्मच दही

1/2 छोटा चम्मच हलदी

1/4 छोटा चम्मच लहसुन पाउडर

2 स्लाइस सौसेज

4 स्लाइस औरेंज

4 स्लाइस सेब

नमक स्वादानुसार

विधि

पीटा ब्रैड को ओवल शेप में पतले टुकड़ों में काट लें. गाजरों को धो कर पतले लंबे टुकड़ों में काटें. डिल का 1/3 हिस्सा काट लें.

इस पर टूथपिक से 2 होल बना कर गाजर के टुकड़े लगाएं. एक बाउल में क्रीम चीज, दही, हलदी, लहसुन पाउडर मिला कर ब्रैडस्लाइस पर लगाएं.

सौसेज स्लाइस एक के ऊपर एक रख कर रोल कर सर्विंग ट्रे में रखें. गाजर वाला डिल का टुकड़ा सौसेज के ऊपर की तरफ और दूसरा भाग नीचे की तरफ रखें.

ब्रैडस्लाइस सौसेज रोल के दोनों तरफ रखें. ब्रैड के ऊपर औरेंज व सेब स्लाइस रख कर सर्व करें.

हैल्दी बाइट्स

सामग्री

2 कप ओट्स

1/2 कप किशमिश

1/3 कप क्रेनबैरी

1 छोटा चम्मच संतरे के छिलके कद्दूकस किए

1/4 कप शहद

विधि

एक बड़े बाउल में सारी सामग्री को अच्छी तरह मिला कर छोटीछोटी बौल्स बना कर 1800 पर पहले से गरम ओवन में सुनहरा होने तक बेक करें.

व्यंजन सहयोग : बेबी नरूला

समस्या का अंत- भाग 3: अंबर का क्या था फैसला

दूसरे दिन छुट्टी के बाद अंबर फिर रूपाली से मिला और उसे पूरी बात बताई. थोड़ी देर बाद रूपाली बोली, ‘‘यार, तुम्हारी समस्या वास्तव में गंभीर हो गई है. अच्छा, तुम्हारे जीजाजी काम क्या करते हैं?’’

‘‘स्टार इंडिया में यूनिट इंचार्ज हैं.’’

‘‘वहां के जनरल मैनेजर तो मेरे जीजाजी के दोस्त हैं.’’

‘‘तो क्या हुआ?’’

‘‘हुआ कुछ नहीं, पर अब होगा. रोज का उन के घर आनाजाना  है. रास्ता मिल गया, अब तुम देखते जाओ.’’

अंबर, रूपाली से मिल कर घर पहुंचा तो पूरे मेकअप के साथ इठलाती, बलखाती लाली चाय, नमकीन सजा कर ले आई.

‘‘चाय लीजिए, साहब.’’

‘‘नहीं चाहिए, अभी बाहर से पी कर आ रहा हूं.’’

‘‘तो क्या हुआ? अब यहां एक प्याली मेरे हाथ की भी पी लीजिए.’’

‘‘नहीं, और नहीं चलेगी,’’ इतना कह कर वह अपने कमरे में जा कर आगे के बारे में योजना बनाने लगा.

2-3 दिन और बीत गए. इधर घर में वही तनाव, उधर रूपाली का मुंह बंद. अंबर को लगा वह पागल हो जाएगा. चौथे दिन जब घर लौटा तो फिर सन्नाटा ही मिला. दीदी का बुरा हाल था. बिस्तर में पड़ी रो रही थीं. जीजाजी सिर थामे बैठे थे, मांबेटी की कोई आवाज नहीं आ रही थी. कमरे का परदा पड़ा था. उसे देख दीदी आंसू पोंछ उठ बैठीं.

‘‘मुन्ना, फ्रेश हो ले. मैं चाय लाती हूं.’’

‘‘नहीं, दीदी, पहले बताओ क्या हुआ, जो घर में सन्नाटा पसरा है?’’

‘‘साले बाबू, भारी परेशानी आ पड़ी है. तुम तो जानते ही हो कि हमारी बिल्ंिडग निर्माण की कंपनी है. बिलासपुर के बहुत अंदर जंगली इलाके में एक नई यूनिट कंपनी ने खोली है, वहां मुझे प्रमोशन पर भेजा जा रहा है.’’

‘‘जीजाजी, प्रमोशन के साथ… यह तो खुशी की बात है. तो दीदी रो क्यों रही हैं. आप का भी चेहरा उतरा हुआ है.’’

‘‘तुम समझ नहीं रहे हो साले बाबू, वह घनघोर जंगल है. वहां शायद टेंट में रहना पडे़गा…बच्चों का स्कूल छुड़ाना पड़ेगा, नहीं तो उन को होस्टल में छोड़ना पडे़गा. तुम्हारी बिन्नी दीदी ने जिद पकड़ ली है कि मेरे पीछे वह मां व लाली के साथ अकेली नहीं रहेंगी, अब मैं क्या करूं, बताओ?’’

‘‘इतनी परेशानी है तो आप जाने से ही मना कर दें.’’

‘‘तुम उस श्रीवास्तव के बच्चे को नहीं जानते. प्रमोशन तो रोकेगा ही, हो सकता है कि डिमोशन भी कर दे, मेरा जूनियर तो जाने के लिए बिस्तर बांधे तैयार बैठा है. और ऐसा हुआ तो वह आफिसर की नजरों में आ जाएगा.’’

‘‘तो फिर आप क्या चाहते हैं?’’

‘‘मैं बिन्नी से कह रहा था कि यहां जैसा है वैसा चलता रहे और मैं अकेला ही चला जाऊं.’’

‘‘जीजाजी, आप के और भी तो 2 भाई हैं, उन के पास भी ये दोनों रह सकती हैं.’’

‘‘कौन रखेगा इन को? यह तो मैं ही हूं जो इन के अत्याचार को सहन करती हूं,’’ बिन्नी का स्वर उभरा.

‘‘न, अब मैं ने भी फैसला ले लिया है कि इन को 4-4 महीने के हिसाब से तीनों के पास रहना होगा.’’

‘‘ठीक है, पर अब क्या होगा?’’

‘‘मैं साथ चलूंगी,’’ बिन्नी दीदी बोलीं, ‘‘तंबू क्या, मैं तो इन के साथ जंगल में भी रह लूंगी.’’

रात को खाने की मेज पर दीदी की सास बड़बड़ाईं, ‘‘यह सब इस करमजली की वजह से हो रहा है. जब से इस घर में आई है नुकसान और क्लेश…चैन तो कभी मिला ही नहीं.’’

लेकिन जीजाजी ने दीदी का समर्थन किया, ‘‘मां, अब तुम बारीबारी से अपने तीनों बेटों के पास रहोगी. मेरे पास 12 महीने नहीं. बिन्नी को भी थोड़ा आराम चाहिए.’’

‘‘ठीक है, मथुरा, हरिद्वार कहीं भी जा कर रह लूंगी पर लाली का ब्याह पहले अंबर से करा दे.’’

‘‘अंबर को लाली पसंद नहीं तो कैसे करा दूं.’’

इतना सुनते ही सास ने जो तांडव करना शुरू किया तो वह आधी रात तक चलता रहा था.

दूसरे दिन मिलते ही रूपाली हंसी.

‘‘हाल कैसा है जनाब का?’’

‘‘अरे, यह क्या कर डाला तुम ने?’’

‘‘जो करना चाहिए, घर बसाना है मुझे अपना.’’

‘‘दीदी का घर उजाड़ कर?’’

‘‘उस बेचारी का घर बसा ही कब था पर अब बस जाएगा…आइसक्रीम मंगाओ.’’

‘‘जीजाजी को जाना ही पडे़गा, ऐसे में दीदी का क्या हाल करेंगी ये लोग, समझ रही हो.’’

‘‘आराम से आइसक्रीम खाओ. आज जब घर जाओगे तब सारा क्लेश ही कट चुका होगा.’’

‘‘वह कैसे?’’

‘‘यह तो मैं नहीं जानती कि वह कैसे क्या करेंगे, पर इतना जानती हूं कि ऐसा कुछ करेंगे कि उस से हम सब का भला होगा.’’

अंबर चिढ़ कर बोला, ‘‘मुझे तो समझना पडे़गा ही क्योंकि समस्या मेरी है.’’

‘‘थोड़ा धैर्य तो रखो. मैदान में उतरते ही क्या जीत हाथ में आ जाएगी,’’ रूपाली अंबर को शांत करते हुए बोली.

घर पहुंच कर अंबर थोड़ा हैरान हुआ. वातावरण बदलाबदला सा लगा. दीदी खुश नजर आ रही थीं, तो जीजाजी बच्चों के साथ बच्चा बने ऊधम मचा रहे थे. मुंहहाथ धो कर वह निकला भी नहीं कि गरम समोसों के साथ दीदी चाय ले कर आईं.

‘‘मुन्ना, चाय ले. तेरी पसंद के काजू वाले समोसे.’’

‘‘अरे, दीदी, यह तो चौक वाली दुकान के हैं.’’

‘‘तेरे जीजाजी ले कर आए हैं तेरे लिए.’’

अंबर बात समझ नहीं पा रहा था. जीजाजी भी आ कर बैठे, उधर दीदी की सास कमरे में बड़बड़ा रही थीं.

‘‘जीजाजी, आप की ट्रांसफर वाली समस्या हल हो गई क्या?’’

‘‘समस्या तो अभी बनी हुई है पर उस का समाधान तुम्हारे हाथ में है.’’

‘‘मेरे हाथ में, वह कैसे?’’

‘‘तुम सहायता करो तो यह संकट टले.’’

‘‘ऐसी बात है तो मैं वचन देता हूं, मुझ से जो होगा मैं करूंगा.’’

‘‘पहले सुन तो लो, पहले ही वचन मत दो.’’

‘‘कहिए, मुझे क्या करना होगा?’’

‘‘ज्यादा कुछ नहीं…ब्याह करना होगा.’’

‘‘ब्याह…किस से?’’

‘‘हमारे बौस की एक मुंहबोली बहन है, वह चाहते हैं कि तुम्हारा रिश्ता उस के साथ हो जाए.’’

‘‘मैं…मेरे साथ…पर…न देखी…न भाली.’’

‘‘लड़की देखने में सुंदर है. बैंक में अच्छे पद पर है, यहां अपने जीजा के साथ रहती है. ग्वालियर से ही ट्रांसफर हो कर आई है.’’

अंबर ने चैन की सांस ली पर ऊपर से तनाव बनाए रखा.

‘‘आप के भले के लिए मैं जान भी दे सकता हूं पर जातपांत सब ठीक है न? मतलब आप अम्मां को तो जानते ही हैं न. पंडित की बेटी ही चाहिए उन को.’’

‘‘ठाकुर है.’’

‘‘तब तो…’’

‘‘तू उस की चिंता मत कर मुन्ना. तू बस, अपनी बात कह. बूआ को मैं मना लूंगी.’’

‘‘तुम्हारा भला हो तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूं.’’

‘‘तब तो समस्या का समाधान हो ही गया.’’

‘‘पर, आप की मां तो…’’

‘‘मेरा ट्रांसफर रुका, यही बड़ी बात है. अब परसों ही भाई के घर पहुंचा रहा हूं दोनों को. 4-4 महीने तीनों के पास रहना पड़ेगा…बिन्नी ने बहुत सह लिया.’’

दूसरे दिन रूपाली से मिलते ही अंबर ने कहा, ‘‘मान गए तुम को गुरु. आज जो चाहे आर्डर दो.’’

‘‘चलो, माने तो. अपना कल्याण तो हो गया.’’

‘‘साथ ही साथ दीदी का भी भला हो गया. नरक से मुक्ति मिली, बेचारी को. 4-4 महीने के हिसाब से तीनों के पास रहेंगी उस की सासननद.’’

GHKKPM: सई के साथ विराट को बदसुलूकी करना पड़ा भारी, पाखी संग रिश्ते पर उठे सवाल

सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी को दिलचस्प बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. हालांकि सोशलमीडिया पर सीरियल के सितारे और मेकर्स ट्रोलिंग का शिकार भी हो रहे हैं. जहां बीते दिनों पाखी ट्रोल हुई थी वहीं विराट भी लेटेस्ट एपिसोड के कारण ट्रोलिंग का शिकार हो गया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

सई से बदसूलूकी पड़ी भारी

 

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हाल ही के एपिसोड में आपने देखा था कि सई को जगताप के साथ देखकर विराट गुस्से में नजर आता है. इसी के चलते वह गुस्से में सई का हाथ पकड़ लेता है और उसकी बेइज्जती करता है. हालांकि सई दर्द के मारे चिल्लाती है. लेकिन विराट को कई फर्क नहीं पड़ता. इसी सीन के चलते अब सई के फैंस का गुस्सा सोशलमीडिया पर देखने को मिल रहा है. दरअसल, सई के साथ बदसुलूकी देखकर फैंस विराट और पाखी के रिश्ते पर सवाल उठा रहे हैं और उसकी क्लास लगा रहे हैं.

पाखी और विराट के रिश्ते पर उठे सवाल

यह पहली बार नहीं है जो विराट अपनी हरकतों पर ट्रोल हुआ है. इससे पहले भी फैंस ने पाखी संग विराट के रिश्तों पर सवाल उठाए हैं. इसी के साथ पाखी के भाभी से बीवी बनने की बात सई के फैंस को कुबूल नहीं हो रही है और वह सई की बजाय विराट की मौत होने की बात कहते दिख रहे हैं. हालांकि मेकर्स को इस ट्रोलिंग से कितना फर्क पड़ता है ये अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा.

 

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पाखी-विराट की बदलेगी जिंदगी

सीरियल के अपकमिंग एपिसोड की बात करें तो सई के जिंदा होने की खबर से अंजान चौह्वाण परिवार पाखी का बर्थडे सेलिब्रेट करता दिखेगा. वहीं सई, सवि को एक गुलाब देगी और आईलवयू कहेगी. दूसरी तरफ, सवि वह गुलाब विनायक को देगी और वह विराट को देगा ताकि पाखी और विराट करीब आ सके.

बच्चों को परिवार से जोड़ना है तो रखें इंटरनैट से दूर

कुछ वर्षों से सोशल मीडिया यानी सोशल नैटवर्किंग साइट्स ने लोगों के जीवन में एक खास जगह तो बना ली है परंतु इस का काफी गलत प्रभाव पड़ रहा है. इस में कोई शक नहीं कि डिजिटल युग में इंटरनैट के प्रयोग ने लोगों की दिनचर्या को काफी आसान बना दिया है. पर इस का जो नकारात्मक रूप सामने आ रहा है वह दिल दहलाने वाला है.

जानकारों का कहना है कि इंटरनैट और सोशल मीडिया की लत से लोग इस कदर प्रभावित हैं कि अब उन के पास अपना व्यक्तिगत जीवन जीने का समय नहीं रहा.

सोशल मीडिया की लत रिश्तों पर भारी पड़ने लगी है. बढ़ते तलाक के मामलों में तो इस का कारण माना ही जाता है, इस से भी खतरनाक स्थिति ब्लूव्हेल और हाईस्कूल गैंगस्टर जैसे गेम्स की है. नोएडा में हुए दोहरे हत्याकांड की वजह हाईस्कूल गैंगस्टर गेम बताया गया है. जानलेवा साबित हो रहे इन खेलों से खुद के अलावा समाज को भी खतरा है. अभिभावकों का कहना है कि परिजनों के समक्ष बच्चों को वास्तविक दुनिया के साथ इंटरनैट से सुरक्षित रखना भी एक चुनौती है. इस का समाधान रिश्तों की मजबूत डोर से संभव है. वही इस आभासी दुनिया के खतरों से बचा सकती है.

पहला केस : दिल्ली के साउथ कैंपस इलाके के नामी स्कूल में एक विदेशी नाबालिग छात्र ने अपने नाबालिग विदेशी सहपाठी पर कुकर्म का आरोप लगाया. दोनों ही 5वीं क्लास में पढ़ते हैं.

दूसरा केस : 9वीं क्लास के एक छात्र ने हाईस्कूल गैंगस्टर गेम डाउनलोड किया. 3-4 दिनों बाद जब यह बात उस के एक सहपाठी को पता चली तो उस ने शिक्षकों और परिजनों तक मामला पहुंचा दिया. परिजनों ने भी इस बात को स्वीकार किया कि बच्चे के व्यवहार में काफी दिनों से उन्हें परिवर्तन दिखाई दे रहा था. समय रहते सचेत होने पर अभिभावक और शिक्षकों ने मिल कर बच्चे की मनोस्थिति को समझा और उसे इस स्थिति से बाहर निकाला.

तीसरा केस : 12वीं कक्षा के एक छात्र की पिटाई 11वीं में पढ़ रहे 2 छात्रों ने इसलिए की क्योंकि वह उन की बहन का अच्छा दोस्त था. यही नहीं, उसे पीटने वाले दोनों भाई विशाल और विक्की उसे जान से मारने की धमकी भी दे चुके थे और ऐसा उन्होंने इंटरनैट से प्रेरित हो कर किया.

चौथा केस : 7वीं कक्षा की एक छात्रा ने मोबाइल पर ब्लूव्हेल गेम डाउनलोड कर लिया. उस में दिए गए निर्देश के मुताबिक उस ने अपने हाथ पर कट लगा लिया. उस की साथी छात्रा ने उसे देख लिया और शिक्षकों को पूरी बात बता दी. कहने के बावजूद छात्रा अपने परिजनों को स्कूल नहीं आने दे रही थी. दबाव पड़ने पर जब परिजनों को स्कूल बुलाया गया तो पता चला कि घर पर भी उस का स्वभाव आक्रामक रहता है. इस के बाद काउंसलिंग कर के उस को गलती का एहसास कराया गया.

एक छात्रा के अनुसार, ‘‘पढ़ाई के लिए हमें इंटरनैट की जरूरत पड़ती है. लगातार वैब सर्फिंग करने से कई तरह की साइट्स आती रहती हैं. यदि हमारे मातापिता साथ होंगे तो हमें अच्छेबुरे का आभास करा सकते हैं. इसलिए हम जैसे बच्चों के पास पापामम्मी या दादादादी का होना जरूरी है.’’

एक अभिभावक का कहना है, ‘‘डिजिटल युग में अब ज्यादातर पढ़ाई इंटरनैट पर ही निर्भर होने लगी है. छोटेछोटे बच्चों के प्रोजैक्ट इंटरनैट के माध्यम से ही संभव हैं. आवश्यकता पड़ने पर उन्हें मोबाइल फोन दिलाना पड़ता है. बहुत सी बातों की तो आप और हमें जानकारी भी नहीं होती. कब वह गलत साइट खोल दे, यह मातापिता के लिए पता करना बड़ा मुश्किल होता है.’’

एक स्कूल प्रिंसिपल का कहना है,  ‘‘एकल परिवार की वजह से बच्चों का आभासी दुनिया के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है. यदि बच्चे संयुक्त परिवार में रहते तो वे विचारों को साझा कर लेते. अभिभावकों को उन की गतिविधियों और व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए. हम ने अपने स्कूल में एक सीक्रेट टीम बनाई है जो बच्चों पर नजर रखती है. 14-15 साल के बच्चों में भ्रमित होने के आसार ज्यादा रहते हैं.’’

अपराध और गेम्स

इंटरनैट पर इन दिनों कई ऐसे खतरनाक गेम्स मौजूद हैं जिन्हें खेलने की वजह से बच्चे अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं. इस का सब से ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है. साइबर सैल की मानें तो विदेशों में बैठे नकारात्मक मानसिकता के लोग ऐसे गेम्स बनाते हैं. इस के बाद वे इंटरनैट के माध्यम से सोशल मीडिया पर गेम्स का प्रचारप्रसार कर बच्चों को इस का निशाना बनाते हैं.

साइबर सैल में कार्यरत एक साइबर ऐक्सपर्ट ने बताया कि हाईस्कूल गैंगस्टर और ब्लूव्हेल जैसे गेम्स से 13 से 18 साल के बच्चों को सब से ज्यादा खतरा है. इस उम्र में बच्चे अपरिपक्व होते हैं. इन को दुनियाभर के बच्चों में स्पैशल होने का एहसास कराने का लालच दे कर गेम खेलने के लिए मजबूर किया जाता है. गेम खेलने के दौरान बच्चों से खतरनाक टास्क पूरा करने के लिए कहा जाता है. अपरिपक्व होने के कारण बच्चे शौकशौक में टास्क पूरा करने को तैयार हो जाते हैं. वे अपना मुकाबला गेम खेलने के दौरान दुनिया के अलगअलग देशों के बच्चों से मान रहे होते हैं. गेम खेलने के दौरान वे सहीगलत की पहचान नहीं कर पाते. गेम के दौरान बच्चों में जीत का जनून भर कर उन से अपराध करवाया जाता है.

एक सर्वेक्षण में शामिल 79 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि इंटरनैट पर उन का अनुभव बहुत बार नकारात्मक रहा है. 10 में से 6 बच्चों का कहना था कि इंटरनैट पर उन्हें अजनबियों ने गंदी तसवीरें भेजीं, किसी ने उन्हें चिढ़ाया इसलिए वे साइबर क्राइम के शिकार हुए.

इन औनलाइन घटनाओं का वास्तविक जीवन में भी गहरा प्रभाव पड़ता है. इंटरनैट पर दी गई व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग होना, किसी विज्ञापन के चक्कर में धन गंवाना आदि बालमन पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं.

मानसिक विकारों के शिकार

सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर अपना खाता खोलने वाले 84 प्रतिशत बच्चों का कहना था कि उन के साथ अकसर ऐसी अनचाही घटनाएं होती रहती हैं जबकि सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर सक्रिय न रहने वाले बच्चों में से 58 फीसदी इस के शिकार होते हैं.

बाल मनोविज्ञान के जानकारों के अनुसार, आज के बच्चे बहुत पहले ही अपनी औनलाइन पहचान बना चुके होते हैं. इस समय इन की सोच का दायरा बहुत छोटा रहता है और इन में खतरा भांपने की शक्ति नहीं रहती. उन का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चों को अपने अभिभावक, शिक्षक या अन्य आदर्श व्यक्तित्व की जरूरत होती है जो उन्हें यह समझाने में मदद करें कि उन्हें जाना कहां है, क्या कहना है, क्या करना और कैसे करना है. लेकिन इस से भी ज्यादा जरूरी है यह जानना कि उन्हें क्या नहीं करना चाहिए.

सोशल नैटवर्किंग साइट्स का एक और कुप्रभाव बच्चों का शिक्षक के प्रति बदले नजरिए में दिखता है. कई बार बच्चों के झूठ बोलने की शिकायत मिलती है. 14 साल के बच्चों द्वारा चोरी की भी कई शिकायतें बराबर मिल रही हैं. मुरादाबाद के संप्रेषण गृह के अधीक्षक सर्वेश कुमार ने बताया, ‘‘पिछले 2 वर्षों के दौरान मुरादाबाद और उस के आसपास के इलाकों से लगभग 350 नाबालिगों को गिरफ्तार कर संप्रेषण गृह भेजा गया है. इन में से ज्यादा नाबालिग जमानत पर बाहर हैं लेकिन 181 बच्चे अभी संप्रेषण में हैं.’’

आक्रामक होते बच्चे

मनोचिकित्सक डाक्टर अनंत राणा के अनुसार, पहले मातापिता 14 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को काउंसलिंग के लिए लाते थे, लेकिन आज के दौर में

8 साल की उम्र के बच्चों की भी काउंसलिंग की जा रही है. अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले बच्चे ज्यादातर एकल परिवार से ताल्लुक रखते हैं. ऐसे परिवारों में मातापिता से बच्चों की संवादहीनता बढ़ रही है, जिस वजह से बच्चे मानसिक विकारों के शिकार हो रहे हैं. ऐसे में वे अपने पर भी हमला कर लेते हैं. काउंसलिंग के दौरान बच्चे बताते हैं कि परिजन अपनी इच्छाओं को उन पर मढ़ देते हैं. इस के बाद जब बच्चे ठीक परफौर्मेंस नहीं दे पाते तो उन्हें परिजनों की नाराजगी का शिकार होना पड़ता है. ऐसे हालात में ये आक्रामक हो जाते हैं.

8 से 12 साल के बच्चों की काउंसलिंग के दौरान ज्यादातर परिजन बताते हैं कि उन के बच्चों को अवसाद की बीमारी है. उन का पढ़ाई में मन नहीं लगता. टोकने पर वे आक्रामक हो जाते हैं और इस से अधिक उम्र के बच्चे तो सिर्फ अपनी दुनिया में ही खोए रहते हैं.

साइबर सैल की मदद लें

आप का बच्चा किसी खतरनाक गेम को खेल रहा है या उस की गतिविधियां मोबाइल पर मौजूद इस तरह के गेम की वजह से संदिग्ध लग रही हैं, तो तुरंत साइबर विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं. फोन पर भी आप साइबर सैल की टीम से संपर्क कर सकते हैं. इस के लिए गूगल एरिया के साइबर सैल औफिस के बारे में जानकारी लें. वहां साइबर सैल विशेषज्ञ के नंबर भी मिल जाएंगे.

ध्यान दें परिजन

–      परिजन बच्चों को समय दें और उन से भावनात्मक रूप से मजबूत रिश्ता बनाएं.

–      बच्चे की मांग अनसुनी करने से पहले उस की वजह जानें.

–      बच्चों के दोस्तों से भी मिलें ताकि बच्चे की परेशानी की जानकारी हो सके.

–      बच्चों को अच्छे व बुरे का ज्ञान कराएं.

–      बच्चों को व्यायाम के लिए भी उकसाएं.

–      बच्चों से अपनी अपेक्षाएं पूरी करने के बजाय उन की काबिलीयत के आधार पर उन से उम्मीद रखें.

 

इन 13 टिप्स से घर रहेगा हमेशा खूबसूरत

आज कल बिना सोचे समझे घर में सामान जोड़ते ही जाते हैं और वो सामान आपके सुंदर घर को कब कबाड़खाना बाना देता है आपको पता ही नहीं चलता है. पर ऐसा नहीं है कि आप उस सामान को बेहतर नहीं रख सकती अगर आप चाहे तो अपने ज्यादा सामान के साथ भी अपने घर को बेहतर रूप दे सकतीं हैं. कुछ आसान और किफायती टिप्स जो आपके घर को हमेशा खूबसूरत बनाने में आपकी मदद करेंगे.

1. कलर हैंडल सॉर्टिंग

जरूरी डॉक्युमेंट्स स्टोर करने के लिए रीडिंग लेबल नहीं लगाएं. सही कलर को पहचानें और अपनी जरूरत के कागजात तुरंत आसानी के साथ निकाल लें.

2. सीडी होल्डर

जो कॉम्पैक्ट डिस्क होल्डर आप नाइंटीज में लेकर आए थे वो अब धूल खा रहे होंगे. इस आउटडेटेड ऑर्गनाइजर को अब एक नया काम दें. माइक्रोवेव प्रूफ डिब्बे और स्टोरेज वाले डिब्बों के लिड्स इसमें बहुत अच्छे से स्टोर किए जा सकते हैं.

3. मैग्जीन होल्डर की करें री-यूज

हॉट टूल्स जैसे ड्रायर, रोलर, स्ट्रेटनर वगैरह को ठंडा हो जाने के बाद मैगजीन होल्डर में रखें.

4. हैंगर करें अटैच

दरवाजे पर एक हैंगर में ही एक और भी अटैच कर सकते हैं. इससे स्पेस का अच्छे से यूज कीया जा सकता है.

5. टिक-टैक बॉक्स

अपने किचन को ज्यादा खूबसूरत लुक देने के लिए इसमें से बड़े-बड़े मसाले के आधे खाली डिब्बे हटाकर वहां टिक-टैक की छोटी शीशी में मसाले भरकर रखें.

6. काउंटर-टॉप

अपने काउंटर-टॉप से गीले स्पॉन्ज और स्क्रबर हटाकर डेस्क ऑर्गनाइजर में रखें. ये डेस्क ऑर्गनाइजर कैबिनेट के साइड वाले हिस्से में फिक्स करें. अक्सर इस जगह को अनदेखा कर दिया जाता है.

7. टेबल को देखें

कहीं भी कुछ भी रख देना बहुत आसान होता है. इसे उलटा करके देखें. एक प्लांट, कोई खूबसूरत-सा फिगर या एक फ्रेम की गई फोटो अपने साइड टेबल पर रखें. या एक सेंटर पीस, टेबल रनर अपनी डाइनिंग रूम की टेबल पर बिछाएं.

8. ज्वेलरी की खूबसूरती

अपनी हर ज्वेलरी को अलग जगह देकर उसकी खूबसूरती बनाए रखें. पेग बोर्ड फ्रेम करें सॉफ्ट और इनवाईटिंग कलर से पेंट कर दें. ये बेहतरीन स्टोरेज के साथ ही एक क्रिएटिव वॉल आर्ट भी बन सकता है.

9. यूटिलिटी एरिया

हो सकता है कई यूटिलिटी एरिया गेस्ट की नजर से ओझल रहते हैं लेकिन आपको तो रोज देखने ही पड़ते हैं. इनको भी तरीके से और सलीके से जमाकर रखें. फर्नीचर लायक पीसेस चुनें. इंटीरियर को पैटर्न वाले कॉन्टैक्ट पेपर से रैप कर दें. ऐसा करने से आप खुद भी इस जगह को साफ सुथरा देखकर खुश होंगे.

10. वन इन वन आउट

बच्चों को ये समझाएं कि स्टोरेज की कोई सीमा नहीं होती. धीरे-धीरे ये घर में अटाला पैदा करता है. अच्छा हो कि जब आप एक नया खिलौना या नया कपड़ा लेते हैं तो साथ में एक पुराना आयटम डोनेट भी कर सकते हैं.

11. इंस्टेंट गारमेंट बैग

अपने तकिये के गिलाफ के बंद हिस्से में से एक स्लिट काट लें और यहां से अपना हैंगर हुक स्लिप कर लें. डेलिकेट कपड़ों को इस तरह से पैक करके वॉर्डरोब में हैंग किया जा सकता है.

12. प्लास्टिक बैग होल्डर

अगर ग्रोसरी स्टोर के प्लास्टिक बैग आपके कैबिनेट स्पेस को घेरते चले जा रहे हैं तो इन्हें खाली टिशू बॉक्सेस में स्टफ कर दें. ये एक बहुत ही हैंडी और कॉम्पैक्ट सॉल्यूशन होगा.

13. टॉवल बार

ये बहुत ही सहज लगता है. टॉवल बार को ठीक सिंक के ऊपर फिट करवा लें और इस पर मग्स और कप, चम्मचें, नैपकिन वगैरह टांग सकते हैं. इन्हें काम करते वक्त आसानी से उठाया और रखा जा सकता है.

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