ब्लैंक चेक: क्या सुमित्रा के बेटे का मोह खत्म हुआ

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इन 5 फलों की मदद से निखारें चेहरा

ये बात तो सभी जानते हैं सारे फल अच्छी सेहत के लिए फायदेमंद होते है, लेकिन हम आपको बता दे कि अगर आपको दमकती त्वचा चाहिए तो भी आप आज से ही फलों का उपयोग शुरू कर दें. ऐसा करने से आपको खुद ही असर कुछ ही समय में दिखने लगेगा.

आज हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ ऐसे फलों की सूची लेकर आए हैं, जो आपकी सेहत बनाने के साथ साथ आपको खूबसूरत बनाते हैं.

1. आम

फलो का राजा कहा जाने वाला आम सेहत ही नहीं आपकी सुंदरता को भी बढ़ाता है. आम में विटामिन ए, सी, ई, के, मिनरल्स, कैल्शियम और मैग्निशियम पाए जाते हैं, जो एंटी आक्सीडेंट होते हैं.

आम का फल आपकी त्वचा में ताजगी, यौवनपन और गोरापन लाने में मदद करता है. यह आपके चेहरे की त्वचा में झुर्रियां और बुढ़ापे को रोकने में भी मदद करता है.

2. नींबू

नींबू को विटामिन-सी और मिनरल्स का स्त्रोत माना जाता है. आपको नींबू के रस को पानी में मिलाकर ही उपयोग में लाना चाहिए, नहीं तो इससे आपकी त्वचा को नुकसान भी हो सकता है. हालांकि आपके घुटनों और कोहनियों में नींबू के छिल्कों को सीधे रंगड़कर फिर बाद में पानी से धोया जा सकता है. नींबू के लगातार प्रयोग से आपकी त्वचा साफ और गोरी बनती है.

3. सेब

सेब में एक तत्व पेक्टिन पाया जाता है, जो संवेदनशील त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है. सेब को एक तरह से स्किन टोनर भी माना जाता है, जो आपकी त्वचा को मजबूत बनाने और रक्त संचार में अहम भूमिका अदा करता है. सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं, जो त्वचा में ऑक्सीडेशन की होने वाली हानि को रोकने में प्रभावी भूमिका अदा करते हैं. सेब में एक फ्रूट एसिड भी होता है, जो त्वचा को साफ करने में अहम भूमिका अदा करता है. आपको चाहिए कि सेब के जूस को प्रतिदिन अपनी त्वचा पर 20 मिनट तक लगाए रखें और फिर इसे ताजे पानी से धो लें.

4. पपीता

पपीते में विटामिन ए, बी, सी, मैग्निशियम से परिपूर्ण एंटी आक्सीडेंट होता है. पपीते में पपेन नाम का एनजाईम होता है, जो त्वचा की मृतक कोशिकाओं को आपकी त्वचा से हटाने में मदद करता है. पपीते को रोज खाने से त्वचा की रंगत में भी निखार आता है. आप चाहें तो पके हुए पपीते को भी चेहरे पर लगा सकते हैं.

5. केला

केले में पोटैशियम और विटामिन-सी पाया जाता है. केले को फेस और हेयर पैक दोनों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है. बार-बार बालों को रंगने और कई अन्य रसायनिक उपचारों से बालों को पहुंची क्षति से, अपने बालों को उभारने में केला एक अहम भूमिका निभाता है. आपको चाहिए कि केले को मसलकर पैक की तरह बनाकर चेहरे पर लगालें और 20 मिनट बाद चेहरे को साफ पानी से धो डालें.

जानें कैसे पहचानें असली और नकली प्रसव

चूंकि, हर प्रेग्नेंसी अनोखी होती है, तो “सामान्य प्रसव” इससे जुड़ा एक शब्द है. ‘सामान्य’ संकुचन (कॉन्‍ट्रैक्‍शन) की परिभाषा महिला पर निर्भर करती है. संकुचन किसी भी अन्य चीज से बिलुकल अलग होता है, इसलिए इसकी व्याख्या उनसे कर पाना मुश्किल है जिन्होंने पहले ऐसा कभी अनुभव ना किया हो. यदि यह आपकी पहली प्रेग्नेंसी है, तो इस बात का ध्यान रखें कि कौन-सा संकुचन सामान्य है, इसका पता लगा पाना आपके लिये काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. और ये बता रही हैं डॉ. तनवीर औजला, सीनियर कंसल्‍टेंट, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, मदरहुड हॉस्पिटल, नोएडा.

ब्रैक्सटॉन हिक्स:-यह क्या होता है?

काफी महिलाओं को असली संकुचन से पहले ब्रैक्सटॉन हिक्स संकुचन होता है, जिसे आमतौर पर प्रैक्टिस संकुचन या नकली प्रसव के रूप में जाना जाता है.

यह कथित नकली प्रसव संकुचन, गर्भावस्था के दूसरे माह या तिमाही में शुरू हो सकता है. ऐसा माना जाता है कि सही प्रसव के पहले गर्भाशय खुद को तैयार कर रहा होता है. यह कसने जैसे अनुभव से लेकर झटका लगने जैसा हो सकता है, जोकि पूरी तरह से दर्दरहित होता है. इससे आप हांफ सकती हैं. जब दिन नजदीक आने लगते हैं तो सामान्यतौर पर यह जल्दी-जल्दी होने लगता है.

असली प्रसव संकुचन-

ब्रैक्सटन हिक्स संकुचन से अलग असली प्रसव संकुचन लयबद्ध होता है. जब यह शुरू होता है तो यह तब तक नहीं रुकता जब तक कि इसका अंतराल और तीव्रता बढ़ नहीं जाती. इसके साथ ही, यह सामान्य से ज्यादा तकलीफ देता है, खासकर जब संकुचन लगातार हो रहा हो. नकली संकुचन के उलट असली संकुचन आपके चलने-फिरने, जगह बदलने या लेटने से नहीं रुकता.

सांस लेना और मूत्रत्याग अचानक से आसान हो सकता है, क्योंकि बच्चा नीचे की तरफ आना शुरू हो जाता है, योनी डिस्चार्ज या म्युकस थोड़ा भूरा, गुलाबी या हल्के लाल रंग का हो सकता है, आपको पेट खराब या डायरिया का अनुभव हो सकता है, ब्लड प्रेशर हल्का बढ़ जाता है और आपका म्युकस प्लग बाहर आ सकता है या फिर कुछ दिनों में टूट सकता है. ये कुछ शुरूआती लक्षण होते हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत होती है.

अचानक से ऊर्जा का संचार महसूस होना और घर को नए बच्चे के आने के लिये तैयार करने की जरूरत महसूस होना, कुछ और आम परेशानयां होती हैं. इसे नेस्टिंग की सहज प्रवृत्ति मानी जाती है और इंसानों तथा जानवरों (एस्ट्राडियोल के ज्यादा मात्रा मे निर्माण की वजह से ऐसा होता है), दोनों में ऐसा होता है. हालांकि, गर्भावस्था के दौरान बच्चे के लिये घर तैयार करने की प्रवृत्ति किसी भी समय आ सकती है, लेकिन सामान्यतौर पर यह प्रसव शुरू होने के पहले होता है.

इस अंतर को समझें-

प्रसव के साथ हर महिला का एक अलग अनुभव होता है, जैसे प्रेग्नेंसी के साथ होता है. दूसरे दर्द या अन्य परिणामों का अनुभव नहीं करते. जब संकुचन का अनुभव हो रहा होता है, तो यह तारीख के काफी करीब या फिर आपकी तय तारीख से काफी पहले हो सकता है. इसके प्रकार की पहचान करने के सामान्यत: पांच तरीके हैं.

प्रसव: असली या नकली-

असली और नकली प्रसव के बीच अंतर को समझ पाना, संकुचन के समय पर निर्भर करता है. आपको यह ध्यान देने की भी जरूरत है कि जब आप अपनी स्थिति बदलती हैं, चलना रोकती हैं या फिर ब्रेक लेती हैं तो संकुचन में फर्क महसूस होता है. इसके साथ ही, संकुचन की तीव्रता में भी अंतर होता है, जैसा कि दर्द के स्थान में.

यदि संकुचन लगातार नहीं हो रहा है, एक साथ ना आए, चलने, आराम करने या करवट लेने पर रुक जाए, तो आप नकली प्रसव में हैं. यह दर्द आमतौर पर सामने की तरफ होता है और यह हल्के रूप में शुरू होकर और तेज हो जाता है या फिर तेज शुरू होता है और फिर कमजोर पड़ जाता है.

यदि आपको लगातार, 30-70 सेकंड का संकुचन हो रहा है, जोकि आ और जा रहा है, जो आप प्रसव पीड़ा में हैं. आप चल रही हों या नहीं, यह बना रहता है और समय के साथ बढ़ता जाता है. साथ ही यह सामान्यत: पीछे की तरफ शुरू होता है और फिर आगे की ओर आता है.

प्रसव के कुछ और संकेत-

5-1-1 का नियम:- कम से कम एक घंटे तक, यह संकुचन हर पांच मिनट पर होता है और हर बार एक मिनट तक बना रहता है.

तरल और अन्य लक्षण:-

थैली के जिस एम्योनॉटिक तरल में बच्चा होता है वह नजर आता है. हालांकि, यह सामान्यत: प्रसव का संकेत नहीं, बल्कि इस बात का संकेत हो सकता है कि वह आने वाला है.

एक “म्युकस प्लग” या खून का नजर आना गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले बदलाव का संकेत हो सकता है, जो बताता है कि प्रसव बस शुरू ही होने वाला है.

संकुचन काफी शक्तिशाली होने और शरीर में हॉर्मोनल बदलाव के कारण, मितली और/या उल्टी हो सकती है.

वजाइनल टियर्स यह संकेत दे सकते हैं कि काफी गंभीर असुविधा हो रही है और चीजें बिगड़ती जा रही हैं.

बताने वाला एक संकेत: केवल एक चिकित्सक ही यह निर्धारित कर सकता है कि क्या आप वास्तव में प्रसव पीड़ा में हैं, जो तब होता है जब संकुचन के परिणामस्वरूप गर्भाशय ग्रीवा में परिवर्तन होता है.

कब फिजिशियन से संपर्क करें-

यदि आपको ऐसा लग रहा है कि आप तरल पदार्थ लीक कर सकती हैं या कर रही हैं

यदि आप भ्रूण की गति में गिरावट देखें

गर्भावस्था के 37 हफ्ते से पहले, यदि आपको रक्तस्राव हो रहा है या यदि आपको कम से कम छह मिनट पीड़ादाई संकुचन का अनुभव हो रहा है.

यदि आप तय नहीं कर पा रहे हैं या काफी ज्यादा ब्लीडिंग, ऐंठन या असहजता महसूस हो रही है तो डॉक्टर को कॉल करें या फिर नजदीकी इमरजेंसी संस्था जाएं. यदि कुछ नहीं भी हो रहा है तो यह देखना जरूरी है कि कहीं आपको समय पूर्व प्रसव पीड़ा या कोई अन्य परेशानी तो नहीं है.

आखिर क्या है देश की प्राथमिकता

दिल्ली के राजपथ को फिर नए सिरे से सजाया गया है और हजारों करोड़ खर्च कर दिए गए हैं. हालांकि सरकारी आंकड़ा 477 करोड़ का है पर लगता नहीं कि यह काम इतने में हुआ होगा. 1947 के बाद कांग्रेस सरकारों ने इस के सुंदर कामों को मैंटेन तो किया पर बहुत ज्यादा रद्दोबदल नहीं किया था. इस पार्क पर न मूर्तियां थीं, न स्मारक. इंदिरा गांधी ने 1971 के बाद अमर जवान ज्योति जरूर जोड़ी थी पर इस के अलावा यह वैसे का वैसा ही था.

अब हजारों करोड़ क्यों खर्च किए गए. जनता की कौन सी कहां मांग थी, ट्रैफिक कंट्रोल की कौन सी आफत आन पड़ी थी, कहीं स्पष्ट नहीं है. यह मनमानी केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थी और उन के मंत्रियों ने पूरा किया. जीएसटी, आय कर और कंपनियां बेच कर आने वाले पैसे को लगा कर अपने नाम से जुड़ जाने वाला स्मारक बना दिया जाए इंडिया गेट के सादे पर आकर्षक लानों को.

लाल पत्थर से भरे नए राजपथ पर चारों और कर्तव्य नहीं पैसा बिखरा दिख रहा है. लग यही रहा है कि राजपथ जो सरकार का प्रतीक था, अब जनता के इस पर खर्च करने और देखभाल करने के कर्तव्य का पथ बन गया है.

दिल्ली के घुटन भरे इलाकों से आने वालों के राजपथ के लान दशकों से एक राहत थे जहां पेड़ों की छांवों में रात देर तक दरियां बिछा कर खाना खाया जा सकता था. अब इस पर जनता के कर्तव्य थोप दिए गए हैं कि आइसक्रीम नहीं खा सकते, लान पर चल नहीं सकते, पानी में पैर नहीं डाल सकते, पुलिस और प्राइवेट गार्ड व कैमरे पलपल की खबर रखेंगे.

अब इस का नक्शा ऐसा बन गया है कि बारबार प्रधानमंत्री के अपने घर से निकलते ही सुरक्षा के नाम पर रास्ते बंद हो जाएंगे. दिल्ली की ज्योग्राफी वैसे भी ऐसी है कि यह 2 तरफ की दिल्लयों को जोड़ती है और इतना करने पर भी रास्ते चौड़े नहीं हुए, बस स्टाप नहीं बने.

क्या उस देश की प्राथमिकता है यह जो गरीबी, बेरोजगारी से जूझ रहा है? कहने को हम विश्व की सब से बड़ी 5वीं अर्थव्यवस्था हैं पर वह इसलिए कि हम विश्व दूसरे नंबर के जनसंख्या वाले सिंगापुर, इंग्लैंड, अमेरिका, जापान की प्रति व्यक्ति आय 65,000 डौलर प्रति वर्ष के आसपास है हम 2000 डौलर को ले कर खुश हो रहे हैं. 1960 में हमारे बराबर के चीन व ङ्क्षसगापुर, थाईलैंड, इंडोनेशिया, जैसे देश आज हम से कहीं आगे है प्रतिव्यक्ति आय में पर हमें दिखावटी चीजों की लगी है.

नरेंद्र मोदी से पहले यही काम अंग्रेजों ने किया था वायसरौय हाउस और राजपथ जो पहले ङ्क्षकग्स वे कहलाता था वे चारों और रजवाड़ों के मेगा महल बने थे जो सब हमारी गरीबी का माखौल उड़ाते थे. आज वही दोहराया जा रहा है. मूर्तियों पर खर्च हो रहा हैं. मंदिरों पर बेहताथा अरबों लगाए जा रहे हैं. देश को टुकड़े करने वाले नाटक आनंद मठ के गीत को गवाया जा रहा है. यह लोगों को सरकार के प्रति कर देने के कर्तव्य का याद दिलाने का काम है. 26 जनवरी को सेना सैल्यूट करेगी, 364 दिन जनता को नए बन रहे संसद भवन, प्रधानमंत्री भवन को सैल्यूट करने को कहा जाएगा, पुलिस व चौकीदारों की निगाहों में.

Festive Special: बच्चों के लिए बनाएं राइस रोस्टी पिज़्जा

बड़े बच्चों सभी को खाद्य पदार्थों में विविधता पसन्द होती है यद्यपि आजकल फ़ास्ट फ़ूड और बाहर के खाद्य पदार्थों का चलन परिवारों में बहुत बढ़ गया है परन्तु फ़ास्ट फ़ूड और बाहर के भोज्य पदार्थों का बहुत अधिक सेवन सेहत के लिए तो नुकसानदेह होता ही है साथ ही बहुत महंगे होने के कारण हमारे मंथली बजट को भी बिगाड़ देता है तो क्यों न कुछ ऐसे उपाय किये जायें जो सेहतमंद भी हों और बजट फ्रेंडली भी. आज हम घर में उपलब्ध सामग्री से ही बच्चों के लिए पिज़्ज़ा बनाना बता रहे हैं जिसे बनाकर आप अपने बच्चों को खिला सकतीं हैं तो आइए देखते हैं कि इसे कैसे बनाया जाता है-

कितने लोगों के लिए          4

बनने में लगने वाला समय    20 मिनट

मील टाइप                         वेज

सामग्री(रोस्टी के लिए)

पके चावल                     2 कप

बारीक कटा प्याज           1

बारीक कटी गाजर            1/4 कप

बारीक कटी शिमला मिर्च   1/4 कप

कटी हरी मिर्च                    4

बारीक कटा हरा धनिया       1 टेबलस्पून

नमक                                स्वादानुसार

ब्रेड स्लाइस                       2

कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर 1/4 टीस्पून

सामग्री(पिज्जा के लिए)

पिज़्ज़ा सॉस                       1 टीस्पून

किसा मोजरेला चीज         1 कप

उबले कॉर्न                       1/4 कप

ऑलिव्स                          1/4 कप

चिली फ्लैक्स                     1/4 टीस्पून

ऑरिगेनो                           1/4 टीस्पून

विधि

ब्रेड स्लाइस के किनारे काटकर इन्हें पानी में भिगोकर निचोड़ लें और मैश करके एक बाउल में डाल दें. अब इस बाउल में रोस्टी की समस्त सामग्री को डालकर अच्छी तरह मिलायें. चिकने हाथों से रोटी से थोड़ी बड़ी लोई लेकर तवे पर उंगलियों की सहायता से रोटी जैसा फैला दें. दोनों तरफ चिकनाई लगाकर हल्का ब्राउन होने तक सेंक लें. अब एक चम्मच से पिज़्ज़ा सॉस लगाकर कटी ऑलिव्स, कॉर्न के दाने डालकर रोस्टी को पूरी तरह कवर करते हुए किसी चीज को अच्छी तरह फैला दें ऊपर से ऑरिगेनो और चिली फ्लैक्स डाल दें. अब एक नॉनस्टिक पैन में चिकनाई लगाकर रोस्टी को रख दें, ढककर एकदम धीमी आंच पर 5 मिनट तक चीज के पूरी तरह मेल्ट होने तक पकाएं. पिज़्ज़ा कटर से काटकर टोमेटो सॉस के साथ सर्व करें.

जो हंसे, वो फंसे, जो फंसे,पूछो,वो फिर क्या हँसे………?

गजोधर भईया और पुत्तन को लाइम लाइट में लाने वाले प्रसिद्ध कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने 58 वर्ष की उम्र में अलविदा कह गए. वे 10 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट के बाद से एम्स में भर्ती थे. राजू श्रीवास्तव 58 साल के थे, उन्हें उस समय कार्डियक अरेस्ट आया था, जब वे  दिल्ली के एक जिम में व्यायाम कर रहे थे. 41 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उन्होंने आखिर दम तोड़ दिया. इससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री शोक में डूब गई है.

मिली प्रेरणा

राजू श्रीवास्तव का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में 25 दिसंबर 1963 को हुआ था. बचपन में उनका नाम सत्य प्रकाश श्रीवास्तव था. राजू को बचपन से ही मिमिक्री और कॉमेडी का शौक था. उन्हें ये प्रेरणा उनके पिता रमेश चन्द्र श्रीवास्तव से मिली थी, जो एक हास्य कवि थे.हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है. उन्होंने तंगहाली में ऑटो भी चलाया, लेकिन कभी उनका कविता प्रेम कम नहीं हुआ. कानपुर में वह बर्थडे पार्टी में भी कॉमेडी करते थे, जिसके एवज में 50 या 100 रुपये तक का इनाम भी मिलता था.शुरू में कॉमेडी के बलबूते परही वे कानपुर में प्रसिद्ध हुए औरइसके बाद वह मुंबई चले आये और मेहनत के बल पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. जब भी उनसे मिलना हुआ, उन्होंने अपने बारें में खुलकर बातें की. उन्होंने वर्ष 1993 में अपनी प्रेमिका शिखा से शादी की और दो बच्चों के पिता बने.

किया हंसने पर मजबूर

उनकी कॉमेडी हमेशा सभी को हंसने पर मजबूर करती है, भले ही आज वे हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी कॉमेडी को लोग हमेशा सुनना पसंद करेंगे. कोविड 19 के समय उन्होंने अपने फ्लैट पर या दालान में अकेले बैठकर हमेशा कॉमेडी करते रहे, जिसे देखने पर हमेशा लगता रहा कि उनके आसपास कई लोग बैठे है और वे उनसे बातचीत कर रहे है, जबकि अकेले वे वहां कॉमेडी करते थे. उनकी हर बात में एक ह्युमर रहता था.

नहीं था गजोधर काल्पनिक

विनम्र और हंसमुख राजू श्रीवास्तव से एक इंटरव्यू से गजोधर भईया की उत्पत्ति के बारें में पूछने पर उन्होंने बताया था कि गजोधर भैया कोई काल्पनिक किरदार नहीं हैं, बल्कि गजोधर भैया वास्तविकता में थे. राजू का ननिहाल बेहटा सशान में था. वहां पर एक बुजुर्ग गजोधर रहते थे और रुक-रुक कर बोलते थे, उन्हीं का किरदार राजू ने अपनाया और उस किरदार को लोगों ने भी बहुत पसंद किया.मुंबई जाकर शुरुआती दौर में उन्हें काफी स्ट्रगल करना पड़ा.पहले उन्हें फिल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं मिला करती थी. इसके बाद उन्हें एक कामेडी शो में ब्रेक मिला, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा. उन्होंने डीडी नेशनल के शो टी टाइम मनोरंजन से लेकर द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज के माध्यम से लोगों के दिलों में अपनी खास पहचान बनाई और शो के सेकेण्ड रनरअप भी रहे. उनकी कॉमेडी को लोग इसलिए भी पसंद करते हैं, क्योंकि उसमे रोजमर्रा की जिंदगी का जिक्र होता है और कोई भी उससे रिलेट कर सकता है. इसकी वजह के बारें में उनका कहना था कि जिंदगी से और आसपास कई ऐसी बातें ऐसी होती है, जिससे आपको कॉमेडी मिलती है. कही उसे खोजना नहीं पड़ता.

खुले विचार

उनके संघर्ष के दिन तब ख़त्म हुए, जब उन्होंने स्टेज शो, टीवी के कॉमेडी शो और फिल्मों के अलावा अवॉर्ड शो होस्ट किया. राजू एक अकेले ही पूरे दर्शक को एंटरटेन करने में समर्थ रखते थे. उन्होंने लालू यादव, मुलायम सिंह यादव, आडवाणी, अमिताभ बच्चन आदि कईयों की मिमिक्री की थी. एक बार लालू यादव के सामने ही लालू यादव की मिमिक्री की, लेकिन लालू ने उनकी मिमिक्री को हंसते हुए ये कहकर टाल दिया था कि अगर उनकी मिमिक्री से किसी का पेट भरता है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं. राजू बिलो द बेल्ट मिमिक्री करना पसंद नहीं करते थे. एक जगह उन्होंने कहा था कि कॉमेडी करते समय किसी की भावना को आहत न करना और लोगों की आम जीवन से जुडी हुई बातों को व्यंगात्मक तरीके सेपेश करने पर खास ध्यान देते थे, ताकि पूरा परिवार उनकी कॉमेडी को साथ मिलकर देख सकें.

आज राजू श्रीवास्तव हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके व्यंग्यात्मक शो और कॉमेडी को सभी मिस करेंगे. लोगों को ख़ुशी देना ही उनका मुख्य उद्देश्य रहा. उनका बहुचर्चित जुमला, जिसे वे कई शोज पर कहते थे,जो हँसे, वो फंसे, जो फंसे, पूछों,वो फिर क्या हँसे………?

फिल्म का रिव्यू पढ़कर क्या गुस्सा होते हैं साउथ के ये एक्टर, पढ़ें इंटरव्यू

मलयालम सिनेमा के सुपर स्टार और पूरे विश्व में अपनी फिल्मों व अपनी अभिनय प्रतिभा के बल पर अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अभिनेता ममूटी के बेटे व मलयालम अभिनेता दुलकर सलमान को हमेशा लगता था कि वह अपने पिता व  मलयालम सुपरस्टार ममूटी के जूते में पैर रखने के योग्य नही है. इसी के चलते दुलकर सलमान ने खुद को अभिनय व फिल्मों से दूर रखते हुए एमबीए की पढ़ाई कर दुबई में नौकरी करनी शुरू की.  और लंबे समय तक फिल्मो से दूर रहे.  पर यह नौकरी उन्हे रास नही आ रही थी.  क्योकि उनाक मन कुछ रचनात्मक काम करने के लिए उकसा रहा था. अंततः  26 साल की उम्र यानी कि 2012 में मलयालम फिल्म ‘‘सेकेंड शो’’ में हरीलाल नामक गैंगस्टर का किरदार निभाते हुए अभिनय जगत में कदम रखा। और देखते ही देखते वह मलयालम सिनेमा में सुपरस्टार बन गए. पर उन्होने खुद को भाषा की सीमा में कैद नही किया. अब तक वह मलयालम के अलावा हिंदी,  तमिल और तेलुगु फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं. इतना ही नहीं दुलकर सलमान अब तक लगभग 35 फिल्मो में अभिनय, तेरह फिल्मों में गीत गाने के अतिरिक्त चार फिल्मों का निर्माण भी कर चुके हैं. बौलीवुड में इरफान खान के साथ फिल्म ‘कारवां’ से कदम रखा था. फिर वह सोनम कपूर के साथ फिल्म ‘‘द जोया फैक्टर’’में नजर आए थे. हाल ही में प्रदर्शित उनकी तेलुगू भाषा की हिंदी में डब फिल्म ‘‘सीता रामम’’ ने जबरदस्त सफलता हासिल की है. अब वह 23 सितंबर को प्रदर्शित होने वाली आर बालकी निर्देशित फिल्म ‘‘चुपः द रिवेंज आफ आर्टिस्ट’’ को लेकर उत्साहित हैं. , जिसमें उनके साथ श्रेया धंनवंतरी, सनी देओल, पूजा भट्ट भी हंै.

प्रस्तुत है दुलकर सलमान से हुई एक्सक्लूसिब बातचीत के अंश. .

आपकी परवरिश फिल्मी माहौल में हुई. आपको अभिनेता ही बनना था. फिर भी एमबीए की पढ़ाई कर दुबई में नौकरी करने के पीछे कोई सोच थी?

-यह सच है कि मैने पहले अभिनय को कैरियर बनाने के बारे में नही सोचा था. इसके पीछे मूल वजह यह थी कि मेरे पिता मलयालम सिनेमा के महान अभिनेता हैं. मैं जानता था कि मेरे अभिनेता बनने पर लोग मेरी तुलना उनसे करेंगें, जो कि मैं नहीं चाहता था. मैं अपने पिता के जूतांे मंे पैर डालने की हिमाकत कर ही नही सकता. उनकी बराबरी करना नामुमकीन है. दूसरी बात उन दिनों मलयालम सिनेमा में दूसरी पीढ़ी का कोई भी कलाकार कार्यरत नहीं था. इसलिए मेरे मन मंे विचार आया था कि लोग मुझे अभिनेता के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे. इसके अलावा उन दिनों मेरे सभी सहपाठी व मित्र बिजनेस फैमिली से थे. वह सभी एमबीए की पढ़ाई करने गए, तो मैं भी चला गया. मतलब यह कि मेरे सहपाठी व मित्र जो कर रहे थे, वही मैने भी किया. फिर नौकरी की. मगर नौकरी करते समय अहसास हुआ कि इसमें कुछ भी रचनात्मकता नही है. और मेरा मन बार बार क्रिएटिब काम करने के लिए उकसा रहा था. वैसे भी क्रिएटिब काम करने में जो आनंद मिलता है, जो मजा आता है, वह आफिस जॉब में नहीं मिलता. तो मैं अपने दोस्तों के साथ समय मिलने पर लघु फिल्में बनाने लगा. तब मुझे अहसास हुआ कि इसी में आनंद है. जब हम लघु फिल्म बना रहे थे, तो यह पूरा प्रोसेस क्रिएटिब और डायनामिक लग रहा था. फिल्म मेकिंग एक टीम वर्क है. हम एक सोच के साथ फिल्म बना सकते हैं. अपनी बात लोगांे तक पहुॅचा सकते हैं. इस बात ने मुझे काफी प्रेरित किया कि नौकरी छोड़कर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा जाए. फिर एक दिन निर्णय लिया कि अब मुझे अभिनय करना है और नौकरी छोड़कर भारत वापस आ गया. मैने सबसे पहले मंुबई आकर बैरी जॉन सर के एक्टिंग स्कूल से अभिनय की ट्ेनिंग हासिल की. अभिनय की ट्ेनिंग लेने के पीछे मेरा मकसद कुछ अनुभव लेना और खुद को अभिनय में निपुण करना था. इस एक्टिंग स्कूल मंे हमारे साथ करीबन 24 विद्यार्थी थे. हम सभी ने कई प्रोजेक्ट किए. काफी प्रैक्टिकल अनुभव मिला. मेरी ही तरह कई लड़के अभिनेता बनना चाहते थे. तो उनके साथ वार्तालाप करते हुए मैने काफी इंज्वॉय किया. जब मैं बिजनेस स्कूल में था, उस वक्त मुझे सिनेमा का शौक था और मेरे कुछ सहपाठियों को सिनेमा देखने का शौक था. पर उनसे फिल्म कैसे बनाते हैं या किसी किरदार को निभाते समय किस बात का ख्याल रखा जाए, इन बातों पर कोई विचार विमर्श बिजनेस स्कूल मेंनहीं होता था, पर हमने बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल में यह सारा विचार विमर्श आपस मंे भी काफी किया.

आप गायक भी हैं. संगीत कहां से सीखा?

-मैं खुद को बहुत बुरा गायक मानता हूं. शुरू में तो मुझे फिल्म प्रमोशन करने में भी बहुत डर लगता था. कैरियर की शुरूआत में हर पत्रकार मुझसे मेेरे पिता जी के संदर्भ में ही सवाल करता था. इसलिए भी मैं अपनी फिल्म के प्रमोशन से दूर भागता था. तभी एक मार्केटिंग हेड ने मुझसे सवाल किया कि, ‘ क्या आप गा सकते हो?हमारी फिल्म में गाना गाओगे?’ तब मैने ‘ऑटो ट्यून’ और कम्प्यूटर की मदद से एक गाना गाया था. यदि आपने मुझसे स्टेज पर गाने के लिए कहेंगें, तो मेरे लिए बहुत मुश्किल है. लेकिन मुझे संगीत सुनने का शौक जरुर है.  इसलिए मुझे इस बात की थोड़ी समझ है कि कौन सा या किस तरह का गाना दर्शकों को पसंद आ सकता है.

आप किस तरह के गाने सुनना पसंद करते हैं?

-मैं ज्यादातर फिल्म के गाने ही सुनता हूं. कभी कभी मूड़ होने पर कुछ दूसरे तरह का संगीत भी सुन लेता हूं. मैं तमिल व मलयालम के अलावा कभी कभी हिंदी व पंजाबी गाने भी सुनता हूं. एक ही तरह का संगीत नही सुनता. मुझे एक ही जॉनर का संगीत सुनने का शौक नही है. मैं अलग अलग तरह का संगीत सुनता रहता हूं.

बैरी जॉन से अभिनय की ट्रेनिंग लेने के बाद आपने अपने अंदर क्या बदलाव महसूस किया?

-बैरी जॉन सर के पास जाने से पहले मेरे अंदर डर व असुरक्षा की भावना बहुत ज्यादा थी. जैसा कि मैने पहले ही कहा कि मेरे पिता जी महान कलाकार व स्टार हैं, तो उनके साथ मेरी तुलना का डर भी था. पहली फिल्म से ही लोग मुझसे मेरे पिताजी की ही तरह बेहतरीन परफार्मेंंस की आपेक्षा करेंगें. तो यह एक्स्ट्रा दबाव मैं स्वयं अपने आप पर डालता था. बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल में भी मैने महसूस किया कि मैं खुद से अपने उपर दबाव डाल रहा हूं. जब वहां लोगो के सामने परफार्म करना होता था, तो मेरे अंदर डर रहता था. वहां पर हमारे एक्टिंग स्कूल के शिक्षकों ने इस बात को पहचान लिया. मेरे इस डर को खत्म करने के लिए उन्होने कई सलाह दी और मेरी काफी मदद की, जिससे मैं इस डर से उबर सका.  इसके बावजूद पहली फिल्म में अभिनय करना मेरे लिए काफी मुश्किल और काफी चुनौतीपूर्ण रहा. उस वक्त भी मैं बहुत ‘ओवर थिकिंग’ करता था. अब काफी सहज हो गया हूं. लेकिन आज भी यदि कोई बड़ा दृश्य है, जिसे तमाम लोगो के सामने करना हो, तो मेरे अंदर का डर उभर  जाता है. लेकिन यदि मैने अपना होमवर्क सही ढंग से किया है, संवाद ठीक से याद किए हैं, तो अब सहजता से अभिनय कर लेता हूं.

अक्सर देखा गया है कि हर नया कलाकार अपने कैरियर की शुरूआत रोमांटिक फिल्म में रोमांटिक किरदार निभाते हुए करता है, मगर आपने तो अपनी पहली ही फिल्म ‘सेकंड शो  ’ में हरीलाल नामक गैंगस्टर का किरदार निभाकर किया. बाद में इस फिल्म को सफलता भी नहीं मिली?क्या अलग राह पर चलने के मकसद से आपने ऐसा किया था?

-ऐसी कोई सोच नहीं थी. मुझे पहले फिल्म की कहानी पसंद आयी थी. दूसरी बात जब यह फिल्म मेरे पास आयी, उस वक्त फिल्म में सभी नए  कलाकार थे. यह बात मुझे ज्यादा अच्छी लगी थी. क्योंकि यह मेरे कैरियर की पहली फिल्म थी. मेरे दिमाग में आया कि जो भी गलती होगी, हम सभी एक साथ करेंगें. और एक साथ ही सीखेंगें भी. मुझे लगा था कि मैं एक बहुत बड़ी फिल्म से कैरियर की शुरूआत को डिजर्ब नहीं करता हूं. सिर्फ इसलिए मैं बड़ी फिल्म नहीं करना चाहता था कि मैं महान कलाकार ममूटी का बेटा हूं. इसलिए मैने तय किया था कि मैं एक नए कलाकार की ही तरह छोटे बजट की फिल्म के साथ ही शुरूआत करुंगा. फिल्म की कहानी व मेरे किरदार की लोगो ने प्रश्ंासा की थी. आज भी लोगों को यह फिल्म पसंद है. गैंगस्टर का किरदार करने की वजह यही थी कि मेरे मन में खुद को लेकर कोई पोजीशनिंग नहीं थी. सच तो यह है कि उस वक्त ही नही आज भी मेरे दिमाग में यह बात नही है कि मुझे इस तरह का किरदार नहीं करना है. मुझे हर वह किरदार करना है, जो मेरे अभिनेता को चुनौती दे.

अपने अब तक के कैरियर में टर्निंग प्वाइंट्स किसे मानते हंै?

-मेरी राय में मेरे कैरियर की दूसरी मलयालम फिल्म ‘‘उस्ताद होटल’’ थी. आज भी जब यह फिल्म केरला में टीवी पर आती है, तो लोग देखना पसंद करते हैं. इस फिल्म की वजह से केरला में लोग मुझे अपने घर का सदस्य मानते हैं. इसके बाद फिल्म ‘चार्ली’ भी टर्निंग प्वाइंट्स थी. इस फिल्म से मुझे परफार्मर के तौर पर काफी अच्छी पहचान मिली.  इस फिल्म के ही चलते मुझे तेलगू फिल्म महानटी’ और हिंदी फिल्म ‘कारवां’ में अभिनय करने का अवसर मिला. तो ‘चार्ली’ देखने के बाद निर्देशकों ने मुझे दूसरी भाषाओं की फिल्मों के लिए बुलाना शुरू किया. इसके बाद मेेरे कैरियर में टर्निंग प्वाइंट्स मणि रत्नम की फिल्में रहीं. मुझे नए दर्शकों का साथ मिला.

आपकी हिंदी भाषा की फिल्म ‘‘चुप’’ 23 सितंबर को प्रदर्शित होने जा रही है. इसमें आपको क्या खास बात नजर आयी?

-इसका कॉसेप्ट बहुत युनिक है. इसका ट्ेलर देखकर आपको भी इस बात का अहसास हुआ होगा. अब तक किसी ने भी इस विषय पर फिल्म नहीं बनायी है. पहली बार आर बाल्की सर ने यह हिम्मत दिखायी है. जब मेरे पास आर बाल्की सर की तरफ से फोन आया तो मुझे लगा कि उन्होने अब तक जिस तरह की फिल्में बनायी हैं, उसी तरह की यह भी एक फिल्म होगी. यह भी एक कलरफुल और हैप्पी फिल्म होगी. पर जब उन्होने मुझे ‘चुप’ का विषय बताया, तो मैने उनसे कहा, -‘सर, आप इस तरह की फिल्म बनाने वाले हो. ’जब कोई फिल्मकार अपना ट्ैक बदलकर कोई प्रयोगात्मक फिल्म बनाना चाहता है, तो मेरा उत्साह बढ़ जाता है.  मुझे ेयह बात उत्साहित करती है कि हम अपने दर्शकों को आश्चर्य चकित करने वाले हैं. मुझे इसका टॉपिक और पटकथा दोनों बहुत ही ज्यादा रोचक लगी. मैने पटकथा पढ़ते हुए पाया कि शुरू से अंत तक एक अच्छी सोच है. कहीं कोई भटकाव नही है. आर बाल्की सर के लिए यह एक पैशन प्रोजेक्ट है.

फिल्म ‘‘चुप’’ का रिफ्रेंस प्वाइंट गुरूदत्त और उनकी फिल्म ‘‘कागज के फूल’’ है. आपने ‘कागज के फूल’ देखी है या नहीं और गुरूदत्त को लेकर आपके दिमाग में पहले से क्या छवि रही है?

-मैने ‘कागज के फूल’ देखी है.  फिल्म ‘चुप’ की शूटिंग के दौरान दोबारा देखी. इसके अलावा ‘चुप’ में गुरूदत्त की फिल्म व उनके गानों के कई रिफ्रेंसेस हैं.  सच तो यही है कि मुझे गुरूदत्त की फिल्मों के बारे में ज्यादा जानकारी नही थी. पर मुझे पता है कि नई पीढ़ी के कलाकार गुरूदत्त के बहुत बड़े फैन हैं. जब हम लोगो ने ‘चुप’ का फस्ट लुक शेअर किया, जिसमें गुरूदत्त की फिल्म की झलकी है, तो लोग व युवा कलाकार काफी उत्साहित हुए. यह बात मुझे भी अच्छी लगी. यह जानकर मुझे अपार खुशी मिली कि वर्तमान पीढ़ी में भी गुरूदत्त साहब के प्रशंसकों की कमी नही है.  लोग उनकी फिल्में देखना चाहते हैं. पर मुझे गुरुदत्त की फिल्मों के गानों के बारे में पता था. क्योंकि मेरे पिता जी व माता जी दोनो ही पुराने गीत , खासकर गुरूदत्त की फिल्मों के गीत काफी सुनते थे. हम बचपन में जब ड्ाइव पर जाते थे, तो गाड़ी में यही पुराने गाने बजते थे. मैं गुरूदत्त की दूसरी फिल्में भी देखना चाहता हूं. मगर सच यह है कि अभिनेता बनने के बाद हमें फिल्में देखने का समय कम मिलता है. इसके अलावा जब से मैं बेटी का पिता बना हूं, तब से तो और कम समय मिलता है. घर पहुॅचते ही मेरी पांच वर्ष की बेटी ही तय करती है कि अब मुझे क्या करना है या टीवी पर मुझे क्या देखना है. पर ‘कागज के फूल ’ देखकर मैने काफी इंज्वॉय किया. वैसे फिल्म ‘चुप’ में भी एक दृश्य है, जिसमें मेरा किरदार फिल्म ‘कागज के फूल’ देख रहा है.

फिल्म में आपका अपना किरदार क्या है?

-विस्तार से बता पाना मुश्किल है. पर मैने इसमें ऐसे युवक का किरदार निभाया है, जिसकी अपनी फूल की दुकान है.

फिल्म ‘चुप’ की कहानी के केंद्र में कलाकार के कैरियर का उतार चढ़ाव और फिल्म समीक्षक की समीक्षा को रखा गया है. आपकी फिल्में भी सफल व असफल हुई हैं. तब क्या आपको भी समीक्षक की लिखी समीक्षा पढ़कर गुस्सा आया था?

-जी हां! ऐसा स्वाभाविक तौर पर हुआ. हम भी इंसान हैं. हमारी अपनी भावनाएं हंै. हम कई माह तक काफी मेहनत कर फिल्म बनाते हैं और फिल्म समीक्षक महज डेढ़ दो घंटे की फिल्म देखकर एक सेकंड में पूरी फिल्म को खारिज कर देता है. कुछ तो फिल्म देखते हुए लाइव रिव्यू डालते हैं. ऐसे में कई बार हमें भी गुस्सा आता है. दुःख भी होता है. कई बार मैने अपनी प्रतिक्रिया लिखी , पर उसे सामने वाले पत्रकार तक भेजा नही. मैं हमेशा समीक्षक की समीक्षा पढ़ने के बाद लिखता हूं कि मैने ऐसा अभिनय किस सोच के साथ किया है?पर भेजता नही हूं. लेकिन मेरी समझ से समीक्षा पढ़कर जहां वास्तव में हमारी गलती हो, उसमें सुधार करते रहें,  अपने काम से ही हम समीक्षक को जवाब देते रहें. अपनी प्रतिभा को लगातार साबित करते रहे. हम हमेशा अच्छी तथा चुनौतीपूर्ण किरदार निभाता रहूंगा. मैं अपने काम से आलोचक को गलत साबित करना चाहता हूं.

पर लोग यह मानते हैं कि आलोचना से इंसान को आगे बढ़ने में मदद मिलती है?

-यह एकदम सच है. मेरी फिल्मों के चयन में मेरे आलोचकों का बहुत बड़ा योगदान है. जब आलोचकों ने मेरे बारे में लिखा कि में सिर्फ रोमांटिककिरदार ही निभा सकता हूं, तो मैने कुछ अलग तरह के किरदार निभाए. सच कह रहा हूं मुझे जो आलोचनाएं मिलती हैं, उन्हीं से मैं अपनी फिल्मों के चयन को तय करता हूं. मैं तो आलोचनाओ को हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण से लेता हूं.

आलोचना पढ़ने के बाद कभी आपके अंदर कुछ बदलाव आया?

-जब परफार्मेंस को लेकर कोई कमेंट आता है, तब उस पर ध्यान देता हूं. इसी वजह से मैं परफार्मेंस वाले किरदार ही चुनता हूं. जब किसी को लगता है कि मैं अच्छा कलाकार नही हूं, तो मुझे खुद को अच्छा कलाकार साबित करना होता है. तो आलोचना पढ़ने के बाद अपनी परफार्मेंस को सुधारने के लिए काफी कोशिश करता हूं.

सभी जानते है कि मणि रत्नम की फिल्में पूरे देश व विदेशों में भी देखी जाती हैं. आपने हिंदी, मलयालम, तमिल व तेलुगू भाषा की फिल्मों में अभिनय कर लिया. पर आज की तारीख में कुछ दक्षिण भाषी कलाकार खुद को ‘पैन इंडिया’ कलाकार होने का ढिंढोरा पीट रहे हैं. यह क्या है?

-सच तो यही है कि ‘पैन इंडिया सिनेमा’ या ‘पैन इंडिया कलाकार’ की बात मेरी समझ से भी परे हैं. क्यांेकि पिछले कई दशकों से हम सभी बड़े कलाकारों या स्टार कलाकारों की फिल्में पूरे देश में देखते आए हैं. अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रजनीकांत, कमल हासन व मेरे पिता जी सहित कई कलाकारों की फिल्में पूरे विश्व में देखी जाती हैं. तो यह कोई नया कॉसेप्ट नही है. मगर आजकल कुछ लोग इसे ‘ओवर यूज’ कर रहे हैं. मेरे पास कई फोन आते है कि , ‘सर, आपके लिए मेरे पास ‘पैन इंडिया’ वाली स्क्रिप्ट है.  ’’ तो मैं उनसे कहता हूं कि यह बात मुझे समझ में नही आती. मैं तो अच्छी स्क्रिप्ट व अच्छे किरदार वाली फिल्म करना चाहता हूं. ऐसा हो सकता है कि किसी फिल्म की कहानी बहुत ही ज्यादा भारतीय हो, किसी खास जगह पर केंद्रित हो. मसलन-हाल ही में मेरी एक फिल्म ‘‘सीता रामम’’ आयी थी, जिसे काफी सराहा गया. यह फिल्म एक आर्मी आफिसर की कहानी है. आर्मी आफिसर देश के किसी भी हिस्से का हो सकता है . इस तरह की फिल्म को हिंदी या किसी भी भाषा में डब करने की बात समझ में आती है. क्योंकि यह कहानी हर भाषा के दर्शकों को पसंद आ सकती है. यह भी जरुरी है कि आप जिस कहानी पर फिल्म बना रहे हैं, वह किसी एक जगह की जड़ांे से जुड़ी हुई हो, इस तरह की फिल्म को डब करके हम लोगों को दिखा सकते हैं. पर ‘पैन इंडिया’ क्या होता है, मुझे पता नहीं.

आपकी कई गतिविधियां हैं. आप अभिनेता, गायक, निर्माता, एक अस्पताल के निदेशक भी हैं. आपका अपना एनजीओ भी है. इतने अलग अलग कामों को किस तरह से हैंडल करते हैं?

-इस तरह के कामों को करने के लिए मैनें कुछ टीम बना रखी हैं. मेरे पास कई अच्छे लोग हैं. मैं प्रतिभाशाली, अच्छे, इमानदार, लॉयल लोगों की पहचान कर उन्हें अपने साथ जोड़ता हूं. मेरी फिल्म प्रोडक्शन की जो टीम है, वह सभी मेरे दोस्त हैं और इनमें से एक भी फिल्म इंडस्ट्री से नही है. एमबीए कर बिजनेस करने वाले लोग सब कुछ छोड़कर मेरे साथ फिल्मों से जुड़े हैं. दूसरे व्यवसायों में मैं शेअर होल्डर हूं. मैं अति महत्वाकांक्षी इंसान हूं. मुझे बहुत कुछ करने की इच्छा है.

बिजनेस या फिल्म निर्माण से आप धन कमाते हैं. पर सोशल वर्क करके आप क्या कमाते या सीखते हैं?

-देखिए, जब जिंदगी में हमें कोई सफलता मिलती है, तो हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम समाज को अपनी तरफ से कुछ वापस दें. हम अपने प्रोडक्शन हाउस में नए लोगों को काम करने का अवसर देकर भी अपरोक्ष रूप से समाज को कुछ देता ही हूं. मैं अपनी चैरिटी को लेकर चर्चा करना पसंद नहीं करता. वैसे मेरे परिवार में मेरे पिता जी, मेरी बहन व भाई सभी लोग चैरिटी करते हैं, पर कोई इसकी चर्चा नहीं करता. मैं खुद जरुरतमंद को ढूढ़ने नही जाता. मगर जब लोग अपनी जरुरत के लिए संपर्क करते हैं, तो मैं उनकी मदद करने की पूरी कोशिश करता हूं.

10 वर्ष के कैरियर में आपके द्वारा निभाए गए किरदारों में से किसी किरदार ने आपकी जिंदगी पर कोई असर किया?

-जी हॉ! अक्सर ऐसा हुआ है. जब भी हम कोई इंटेंस संजीदा किरदार निभाते हैं, तो मेरा व किरदार की सोच या जजमेंट अलग होता है. कई बार किरदार निभाते हुए हमें लगता है कि मैं ऐसा कभी नहीं करुंगा, पर यह किरदार तो करेगा. तो मुझे इसके मन व दिमाग से सोचना पड़ेगा. ऐसे किरदार को निभाते समय एक्शन व कट के बाद भी कुछ समय तक उसका असर हमारी जिंदगी पर रहता है. जब हम अपनी निजी जिंदगी केा भूलकर किरदार में बहुत ज्यादा इंवालब हो जाते हैं, तब भी किरदार का मूड़ हमारे साथ ही रह जाता है.

 

Anupama के पास पहुंची किंजल तो तोषू ने उगलेगा मां के खिलाफ जहर

अनुपमा (Anupama) के मेकर्स सीरियल की कहानी को दिलचस्प बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. जहां हाल ही में तोषू के अफेयर को लेकर शाह परिवार में तमाशा खड़ा हुआ है तो वहीं एक बार फिर अनुपमा के खिलाफ बा, पाखी और तोषू खिलाफ खड़े होते दिख रहे हैं. हालांकि अपकमिंग एपिसोड में यह धमाका और बढ़ने वाला है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Anupama Written Update In Hindi)…

बा देती है किंजल को सुझाव

 

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अब तक आपने देखा कि अनुपमा, बा और पाखी की खरीखोटी सुनने के बाद कपाड़िया हाउस वापस जाती है. जहां वह अनुज से अपना दर्द बयां करती है. वहीं अनुज भी उसका साथ देते हुए हमेशा सपोर्ट करने की बात कहता है. वहीं बा एक बार फिर किंजल को बेटी के भविष्य की सोचने और तोषू को माफ करने का सुझाव किंजल को देती है, जिसे सुनकर काव्या और वनराज उन्हें चेतावनी देते हुए दिखते हैं.

 

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किंजल छोड़गी शाह हाउस

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देंखेंगे कि बा की बातों से परेशान होकर किंजल शाह हाउस छोड़ने का फैसला करेगी, जिसे लेकर पहले तो वनराज और शाह परिवार उसे समझाएगा. लेकिन वह मान जाएंगे. दूसरी तरफ किंजल की मां राखी दवे को उसके घर छोड़ने की बात पता चलेगी और वह उसे अपने घर ले जाने की बात कहेगी. हालांकि किंजल उसे अनुपमा के घर छोड़ने के लिए कहेगी, जिसे लेकर शाह परिवार उसे मना करेगा. लेकिन वह नहीं मानेगी.

अनुपमा के खिलाफ बोलेगा तोषू

 

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इसी के चलते आप आने वाले एपिसोड में देखेंगे कि वनराज, किंजल को खुद अनुपमा और अनुज के घर छोड़ कर आएगा. वहीं अनुपमा उसे अपना ख्याल रखने और फैसला लेने के लिए कहेगी. दूसरी तरफ, किंजल के कपाड़िया हाउस जाने की बात सुनकर तोषू गुस्से में दिखेगा और कहेगा कि अनुपमा ने जैसे अपना घर तोड़ा वह किंजल को भी वही सलाह देगी. दूसरी तरफ, किंजल, तोषू से बात करने के लिए मना करती दिखेगी.

कैसे PCOS एक महिला के रिप्रोडक्टिव हेल्थ को प्रभावित करता है

पॉलिसिस्टक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) एक ऐसी स्थिति है, जिससे आज के दौर में हर उम्र की महिलाएं गुजर रही हैं. इंटरनेट और सोशल मीडिया की वजह से इस समस्‍या के बारे में लोगों को काफी जानकारी हो गई है. पीसीओएस एक महिला के लिए गर्भधारण करने में भी आम फैक्‍टर बन गया है.

डॉ मनीषा तोमर, सीनियर कंसल्‍टेंट, ऑब्‍सटेट्रिशियन एवं गायनेकोलॉजिस्‍ट (प्रसूति एवं स्‍त्री रोग विशेषज्ञ), मदरहुड हॉस्पिटल, नोएडा का कहना है कि-

पीसीओएस एक ऐसी समस्या है, जिसकी वजह से अनियमित माहवारी की परेशानी होती है, क्योंकि इसमें मासिक ओव्यूलेशन नहीं होता है और एंड्रोजन (पुरुष हॉर्मोन) का स्तर बढ़ जाता है. एंड्रोजन के बढ़े हुए स्तर की वजह से चेहरे पर अत्यधिक मात्रा में बाल, एक्ने, और/या पुरुषों की तरह जड़ों से बाल कम होने लगते हैं. अधिकांशत:, लेकिन सभी महिलाएं पीसीओएस के कारण ओवरवेट या मोटी नहीं होतीं और उनमें डायबिटीज और ऑब्सट्रेक्टिव स्लीप एप्निया होने का खतरा बढ़ जाता है. पीसीओएस से पीड़ित जो भी महिलाएं गर्भवती होना चाहती हैं, उनके लिये प्रजनन की दवाओं की जरूरत होती है, जो ओव्यूलेशन को प्रेरित कर सके

पीसीओएस के संकेत और लक्षण

पीसीओएस से पीड़ित अलग-अलग महिलाओं में अलग-अलग तरह के लक्षण नजर आते हैं. सभी महिलाएं, जिन्हें पीसीओएस है, उनके अंडाशय में सिस्ट नहीं होता और ना ही अंडाशय में सिस्ट की समस्या होने पर सभी को पीसीओएस होता है. अधिकांश महिलाओं को निम्नलिखित में से कोई एक या दोनों लक्षण नजर आते हैं:

असामान्य माहवारी:

इसमें अधिक रक्तस्राव, माहवारी खत्म हो जाने के बीच में रक्तस्राव, माहवारी ना आना, हल्की माहवारी या साल में कुछेक बार ही माहवारी आना, शामिल है.

अत्यधिक एंड्रोजन का प्रमाण:

ये हॉर्मोन प्रजनन स्वास्थ्य और शरीर के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. लेकिन जिन महिलाओं में इनकी मात्रा काफी ज्यादा होती है, उनमें होने वाले लक्षण इस प्रकार हैं:-

टुड्डी, होंठ के ऊपरी हिस्से, स्तन के आस-पास और पेट के बीचोंबीच, अत्यधिक काले और सख्त बालों का उगना, इसे हिर्सूटिज्म कहा जाता है.

पुरुषों की तरह गंजा होना (बालों की संख्या कम होना) एक्ने.

पीसीओएस के अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

पेट का मोटापा या अधिक वजन बढ़ना. यह लक्षण पीसीओएस वाली लगभग डेढ़ से दो-तिहाई महिलाओं में मौजूद है, हालांकि, दुबली-पतली महिलाओं को भी पीसीओएस हो सकता है.

गर्दन के पीछे और कांख की त्वचा का काला पड़ना, जिसे एकेथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है. यह इंसुलिन प्रतिरोध और पीसीओएस से जुड़े अतिरिक्त इंसुलिन की वजह से होता है. गर्भधारण में परेशानी आना.

चूंकि, महिलाएं अनचाहे बालों को हटा सकती हैं या फिर एक्ने का इलाज करा सकती हैं, तो हो सकता है डॉक्टर्स अपने रोगियों में पीसीओएस की पहचान ना कर पाए, जब तक वे असामान्य माहवारी और अनचाहे बालों के बढ़ने के बारे में बात ना करें. इसी तरह, यदि आपको भी असामान्य माहवारी या अनचाहे बालों के बढ़ने की समस्या हो रही है तो अपने डॉक्टर से बात करना अच्छा है कि कहीं आपको पीसीओसएस तो नहीं.

किस तरह पीसीओएस, प्रजनन को प्रभावित कर रहा है

वैज्ञानिक रूप से कहा जाए तो हर महीने महिलाओं की गर्भधारण की उम्र में, छोटे-छोटे तरल से भरे सिस्ट, जिन्हें फॉलिकल्स कहा जाता है अंडाशय की सतह पर विकसित हो जाते हैं. एस्ट्रोजन सहित, फीमेल सेक्स हॉर्मोन, उनमें से एक फॉलिकल्स को एक परिपक्व एग तैयार करने का कारण बनते हैं. इसके बाद अंडाशय इस एग को रिलीज कर देता है और यह फॉलिकल से बाहर निकल जाता है. ऐसी महिलाएं, जिन्हें पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस है, उनमें फीमेल सेक्स हॉर्मोन का असंतुलन होता है. यह असंतुलन विकास और परिपक्व एग को रिलीज करने से रोक सकता है. एक परिपक्व एग के बिना, ना तो ओव्यूलेशन होता है और ना ही प्रेग्‍नेंसी होती है.

पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन होता है, जिसकी वजह से हॉर्मोन का स्तर अधिक हो सकता है, जिसे एंड्रोजन कहा जाता है. अंडाशय में छोटे, दर्दरहित,तरल से भरी थैलियों का निर्माण होता है

अंडाशय का बाहरी आवरण मोटा होने लगता है. आपके शरीर में इंसुलिन की काफी अधिक मात्रा होती है. ये सारी चीजें ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकती हैं. ऐसा होने का एक लक्षण है अनियमित माहवारी या माहवारी का ना आना.

पीसीओएस की पहचान कैसे करें-

वर्तमान में पीसीओएस का कोई इलाज नहीं है. हालांकि, इलाज से उन महिलाओं के लिये गर्भधारण करने की संभावना बढ़ जाती है, जोकि गर्भवती होना चाहती हैं. इससे महिलाओं को अपने लक्षणों को मैनेज करने में भी मदद मिल सकती है.

एक से दूसरे व्यक्ति के लक्षणों में फर्क हो सकता है और इसलिए इलाज भी हमेशा एक जैसा नहीं होता है. इसके विकल्प इस बात पर निर्भर करते हैं कि कोई महिला गर्भवती होना चाहती है या नहीं.

पीसीओएस के लक्षणों के उपचार में शामिल है:

हॉर्मोन संबंधी असंतुलन को ठीक करने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां देना

इंसुलिन-संवेदनशील दवाएं देना ताकि शरीर द्वारा इंसुलिन के इस्‍तेमाल में सुधार किया जा सके और टेस्टोस्टेरोन के  उत्पादन में भी सुधार हो पाए.

डायबिटीज के मामले में, ब्लड ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने के लिये दवा देना.

संपूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और वजन को नियंत्रित करने में मदद करने के लिये व्यायाम और स्वस्थ भोजन.

यदि दवाओं से प्रजनन में कोई सुधार नहीं है तो सर्जरी एक विकल्प हो सकता है. लैप्रोस्कॉपिक ओवेरियन ड्रिलिंग एक सर्जिकल विकल्प है. इस प्रक्रिया में, पेट में सर्जन छोटे-छोटे कट लगाता है और इलेक्ट्रिकल करंट के साथ एक सुई इंसर्ट की जाती है. वे इलेक्ट्रॉनिक करंट का इस्तेमाल करके उत्तकों की एक छोटी मात्रा को नष्ट करते हैं, जोकि अंडाशय पर टेस्टोस्टेरॉन का निर्माण करता है. टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम होने से नियमित ओव्यूलेशन होता है.

एक स्वस्थ वजन बनाए रखने से इंसुलिन और टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम करने में मदद मिलती है और लक्षणों में सुधार होता है.

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