कैसी हो आदर्श परवरिश

मातापिता की नजदीकी, प्यार और सहयोग बच्चों में न केवल आत्मविश्वास जगाता है, बल्कि उन्हें व्यावहारिकता भी सिखाता है. बच्चों की परवरिश का यह सब से बेहतर दौर है. आज उन्हें तमाम सुखसुविधाएं, साधन और आजादी मिली हुई है. उन्हें महंगी शिक्षा दिलाने में मांबाप लाखों रुपए खर्च करने से नहीं हिचकते क्योंकि उन की पहली प्राथमिकता संतान और उस का बेहतर भविष्य है. अभिभावकों की कमाई का आधे से ज्यादा पैसा बच्चों पर खर्च हो रहा है, यह कम हैरत की बात नहीं क्योंकि पहले ऐसा नहीं था, तब तसवीर कुछ और थी. अपने बच्चों के सुखसहूलियतों की खातिर मांबाप कोल्हू के बैल की तरह पैसा कमाने में जुटे हैं. इस की अहम वजह है अब बच्चे पहले की तरह थोक में नहीं 1 या 2 ही पैदा किए जा रहे हैं. मौजूदा मांबाप चाहते हैं कि जो उन्हें उन के मांबाप से नहीं मिल सका, वह सब वे किसी भी कीमत पर अपने बच्चों को दें. एमएनआईटी भोपाल के एक 46 वर्षीय प्राध्यापक आर के बघेल का कहना है, ‘‘आज की पीढ़ी को वह सब मिल रहा है जो हमारी पीढ़ी को नहीं मिला था. आज के बच्चे हमारी तरह तंगी में नहीं पढ़ रहे. वे कोर्स की 1 किताब मांगते हैं हम 4 ला कर देते हैं. कंप्यूटर, इंटरनैट, एसी, कार, गीजर जैसी चीजें हर उस घर में मौजूद हैं जिस की आमदनी 60-70 हजार रुपए है,’’ बघेल बात को स्पष्ट करते हुए आगे कहते हैं, ‘‘ऐसा महज संपन्न परिवारों में ही नहीं है बल्कि कम कमाई वाले मांबाप भी हैसियत से बढ़ कर बच्चों की जरूरतों और इच्छाओं पर खर्च कर रहे हैं और इस के लिए अधिकांश मांएं नौकरी भी कर रही हैं.’’

भोपाल के सीनियर पीडिएट्रिक ए एस चावला की मानें तो, ‘‘बच्चों की परवरिश पर आजकल के मांबाप उन के जन्म से पहले से ही पैसा खर्चने में कंजूसी नहीं करते. बच्चे अब वैज्ञानिक तरीके से पाले जा रहे हैं. पहले की तरह कुदरत के भरोसे नहीं पलते. बच्चे अब मांबाप की पहली प्राथमिकता हैं. उन के स्वास्थ्य से मांबाप कोई समझौता नहीं करते. उन्हें जरा सी बीमारी हो तो भी वे हमारे पास दौड़ते हैं और महंगे इलाज के लिए सोचते नहीं.’’ इन दोनों की ही बातें सच और हकीकत के काफी नजदीक हैं क्योंकि बच्चों को ले कर मांबाप कोई समझौता नहीं करते. पहले एक मांबाप के 4, 6 या उस से भी ज्यादा बच्चे होना आम बात थी. लिहाजा, उन की परवरिश पर कम खर्च किया जाता था. लोग ज्यादा कमाते भी नहीं थे. ऐसे में उन की परवरिश पर होने वाला खर्च उन की संख्या के हिसाब से बंट जाता था.

40 के ऊपर के अधिकांश मांबाप को याद है कि उन के दौर में चवन्नीअठन्नी का मिट्टी का खिलौना मांगने पर भी झिड़कियां और डांट मिलती थी. जेबखर्च के नाम पर महीने में 5 रुपए भी नहीं मिलते थे और बड़े भाईबहनों के कपड़ों को छोटा करवा कर पहना जाता था, उन की पुरानी कौपियों के कोरे पन्ने फाड़ कर रफ कौपी बनाई जाती थी और पुरानी किताबों से पढ़ाई करनी पड़ती थी. मौसम की सब से सस्ती सब्जी खरीदी जाती थी जिस से सभी पेट भर खा सकें और नातेरिश्तेदारी में एकाध बच्चे को ही ले जाया जाता था. यह और ऐसी कई बातें भले ही इन मांबाप के लिए मीठी यादें हों पर समानांतर एक कुंठा भी है कि हम अपने बच्चों को वह सब देंगे जिस के लिए हमें तरसना पड़ा था. किसी भी स्कूलकालेज में चले जाइए, संपन्नता बच्चों के चेहरों के अलावा महंगे कपड़ों और ब्रैंडेड सामान से भी झलकती है.

यह ठीक है कि संयुक्त परिवार खत्म हो चले हैं और एकल परिवारों का चलन बढ़ा है, लोग सामाजिक रूप से सिकुड़ते जा रहे हैं पर वे अपने छोटे दायरे में खुश हैं क्योंकि उस में कोई कमी या अभाव नहीं है. इस का सब से बड़ा फायदा बच्चों को मिला है जिन के पास जरूरत की हर चीज मौजूद है, तमाम आधुनिक गैजेट्स हैं, वक्त काटने के लिए मनोरंजन के तरहतरह के साधन हैं और अपने शौकों पर खर्च करने के लिए पैसे की तंगी नहीं. यानी बेहतर भविष्य और कैरियर बनाने में कोई अड़ंगा नहीं है. लेकिन इस के बाद भी कुछ बच्चों को शिकायत है कि मम्मीपापा उन्हें उतना वक्त नहीं देते जितने के वे हकदार हैं या जितना उन्हें चाहिए. इस शिकायत से यह बात महज कहने वाली साबित होती है कि नाजनखरों में पल रहे आज के बच्चे नाजुक और कमजोर हैं. मांबाप से वक्त की कमी की शिकायत बताती है कि वे जागरूक भी हैं.

कुछ वजहों से यह जागरूकता कभीकभी अवसाद और आक्रामकतायुक्त हो जाती है. भोपाल में बीती 25 अप्रैल को 12वीं कक्षा की 17 वर्षीय एक छात्रा महिमा राज ने दोपहर 1 बजे बाथरूम में जा कर फांसी लगा ली. अपने छोड़े सुसाइड नोट में महिमा ने अपने मम्मीपापा को संबोधित कर के लिखा था, ‘मम्मी, आप के पास हमारी बात सुनने का समय नहीं है, यह चेतावनी है, आप लोग अपने काम में लगे रहते हो, मैं कुछ कहना चाहती हूं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है, अब तो आप मेरी बात सुनेंगे.’ सागर पब्लिक स्कूल की छात्रा महिमा के पिता रवींद्र कुमार राज सिंडीकेट बैंक में अधिकारी हैं और मां रंजना राज भारतीय जीवन बीमा निगम में कार्यरत हैं. जाहिर है पतिपत्नी दोनों के नौकरी करने के कारण महिमा और उस की बहन को किसी तरह की कमी न थी. महिमा की खुदकुशी ने एक नई बहस मांबाप की भूमिका को ले कर छेड़ दी. अधिकांश ने व्यथित हो कर मांबाप को इस का जिम्मेदार ठहराया कि कैसे लापरवाह हैं, कमाने में इस तरह व्यस्त रहे कि बच्ची को वक्त नहीं दे पाए. बड़े पैमाने पर हुई इस चर्चा, जिस में लोग मुद्दे की बात नहीं पकड़ पाए, ने रवींद्र और रंजना का दुख दोगुना कर दिया. जाहिर है लगभग सभी ने महिमा के इस आत्मघाती कदम को उसी के नजरिए से देखा. यह कम ही लोगों ने सोचा कि उस के मांबाप दोनों आखिरकार नौकरी किस के लिए कर रहे थे. शाहपुरा इलाके के फौर्चून प्रैस्टिज अपार्टमैंट में रहने वाले इस दंपती की हर मुमकिन कोशिश यह थी कि बेटियों के लिए ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाया जाए ताकि वे बेहतर पढ़ाई कर सकें और उन की शादी में कोई दिक्कत पेश न आए. इन दोनों में से कोई एक नौकरी न करता तो भी सम्मानजनक तरीके से 4 सदस्यों के परिवार का गुजारा हो जाता.

यह है गड़बड़

आत्महत्या चूंकि महिमा ने की है इसलिए उस से सभी को सहानुभूति है और सोचा भी उसी के दिमाग से जा रहा है. हादसे के दिन दोपहर में रवींद्र घर आए थे. महिमा घर में नहीं मिली तो वे परेशान हो उठे, बाथरूम में झांक कर देखा तो बेटी को फांसी के फंदे पर लटकता देख उन के होश फाख्ता होना स्वाभाविक बात थी. अकेलापन इस पीढ़ी के किशोरों की एक बड़ी समस्या है जिसे आगे और बढ़ना ही है क्योंकि अधिकांश पतिपत्नी दोनों नौकरी करते हैं और केवल पैसा कमाने नहीं बल्कि बच्चों के सुख और सहूलियतों की खातिर हाड़तोड़ मेहनत करते हैं, खटते हैं, कार्यालय जाते हैं और तमाम दिक्कतें उठाते हैं यानी खुद वह सुख छोड़ते हैं जिसे वे भोग सकते थे. मांबाप की एक बड़ी गलती या भूल बच्चों को समझदार और परिपक्व मान लेने की है क्योंकि वे इंटरनैट इस्तेमाल करते हैं, टीवी देखते हैं. लड़कों के मामले में बात थोड़ी भिन्न है. वे मांबाप की गैरमौजूदगी में यारदोस्तों के साथ घूमतेफिरते, गपें लड़ाने में वक्त काट लेते हैं. अब हालांकि लड़कियों को भी यह आजादी मिलने लगी है पर वे भावनात्मक रूप से मांबाप के ज्यादा नजदीक रहती हैं और उन्हें चाहती भी हैं.

मिसाल महिमा जैसी लड़कियों की लें तो उन्हें इस बात का एहसास कराने वाला कोई नहीं था कि मम्मीपापा उस की बेहतरी के लिए नौकरी कर रहे हैं. उस के मन की यह गांठ खोलने वाला भी कोई नहीं था कि मांबाप उसे चाहते हैं पर चाहत व्यक्त करने के लिए उन के पास वक्त नहीं, और है भी तो उस की उम्र के चलते उसे परिपक्व मान व्यक्त नहीं कर रहे हैं. हो यह रहा है कि मांबाप बच्चों को उन की पाठ्यपुस्तकों, टीवी और इंटरनैट के हवाले कर बेफिक्र होने की गलती कर रहे हैं. पाठ्यपुस्तकें सिर्फ उत्तीर्ण करा सकती हैं, दुनियादारी का पाठ नहीं पढ़ा सकतीं. टीवी बच्चों के दिमाग में कचरा भर रहा है. तमाम पारिवारिक कहे जाने वाले धारावाहिक हिंसा, षड्यंत्र, कुटिलता और टूटन से भरे पड़े हैं. इन में व्यावहारिक शिक्षा का अभाव है व ऊंचनीच और समझ सिखाने वाले सबक नहीं हैं. नतीजतन, इन से घिरा बच्चा खुद को अकेला ही पाता है. टीवी की काल्पनिक दुनिया देख वह उसी को हकीकत मान घबरा उठता है. चूंकि कोई विकल्प उस के पास नहीं होता इसलिए वह एक काल्पनिक संसार में, जहां कदमकदम पर छलकपट है, खुद को घिरा पाता है.

परिणामस्वरूप, वह जिद्दी, चिड़चिड़ा और विद्रोही हो जाता है. मांबाप इस हालत में देख उसे समझाते हैं तो वे उसे दुश्मन से लगते हैं. बातबात में मांबाप की शिक्षाप्रद बातों के विरोध को ही बच्चे फैशन, जागरूकता व हक मानने लगते हैं और कुतर्क करने लगते हैं. एक हद तक समझाने के बाद भी बच्चा समझने की कोशिश नहीं करता, उलटे सुनने से ही इनकार कर देता उठता है. मांबाप थकहार कर चुप हो जाते हैं क्योंकि नौकरी या कारोबार करतेकरते ही वे पहले से काफी थके होते हैं. बच्चों में अच्छे, व्यावहारिक और शिक्षात्मक साहित्य को पढ़ने की आदत किशोरावस्था से ही डाली जानी चाहिए जिस से बच्चे आंख के बजाय दिमाग से सोचें, विश्लेषण करें और निष्कर्ष निकालें. इस से वे अपनी समस्याओं से निबटने में खुद को सक्षम पाएंगे. वे मांबाप की न सुनें पर पुस्तकों और पत्रिकाओं की जरूर सुनने को मजबूर होंगे जो व्यावहारिकता सिखाती हैं और प्रशिक्षित भी करती हैं. ऐसे में बच्चा पलायनवादी प्रवृत्ति से बचा रह कर रचनात्मक बना रहता है जो उस के आत्मविश्वास की बड़ी वजह होता है.

सेहत बनाने के लिए तो हम सभी टमाटर खाते हैं लेकिन क्या आपने कभी रूप निखारने और त्वचा की देखभाल के लिए टमाटर का इस्तेमाल किया है? टमाटर में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं.

Festive Special: ऐसे करें घर पर पेडीक्योर

पेडीक्योर पैरो को साफ,  स्वच्छ और कोमल बनाए रखने का एक आसान तरीका है. आप में से भी कई लोग अपने शरीर की सफाई तो कर लेते हैं, पर पैरों को गंदा देखकर भी अनदेखा कर देते हैं. हम आपको बता देना चाहते हैं कि आपके पैरों में जितनी भी, चाहे बहुत गंदगी हो या कम गंदगी हो है इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए.

जब आप घर से बाहर निकलते हैं तो धूप के साथ-साथ कई तरह की गंदगी पैरो में आकर लग जाती है और वहीं जम जाती है. इस पर हम बिल्कुल ध्यान नही देते हैं . पैर भी हमारे शरीर का एक हिस्सा है, जिस पर की पूरा शरीर टिका हुआ रहता है. आपके पैरों को साफ और खूबसूरत रखने के लिए आज हम आपको कुछ सस्ते घरेलू पेडीक्योर टिप्स बताने जा रहे हैं.

1. घर पर पेडीक्योर करने के लिए सबसे पहले नेल-रिमूवर से अपने पैरों के नाखूनों पर लगे नेलपेंट को निकाल देना चाहिए. अब एक टब जैसी चीज में कुनकुना पानी लेकर इसमें सेंधा नमक, शैम्पू, नींबू और थोड़ा फिटकिरी इन सभी को डालकर अच्छे से घोलकर, इसमें अपने पैरों को 10-15 मिनटों तक रखिए.

2. इसके आगे अब पैरों को साफ करने वाले फूट फाईल या स्पंज से चारों तरफ हल्के हाथों से रगड़ें. ऐसा करने से सारा मैल निकल जाएगा. इससे आपके पैर के नाखूनों के साइड में जो मृत त्वचा है वह भी साफ हो जाती है.

3. जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाये, तो फिर से पैरों को टब में डालकर पैर के निचले हिस्से को फिर से स्पंज से रगड़कर साफ करें. अब पैरों को बाहर निकाल कर इन्हें साफ तौलिये से पोछ लें.

4. पैरों को पोछने के बाद अब पैरों के नाखूनों को अपने पसंदीदा और उचित आकार में काट कर, पैरों में मोइस्चराईजर या अपनी क्रीम लगाएं .

5. कुछ देर बाद जब आपके पैर सूख जाते हैं, तो आपके पैरों का पेडीक्योर पूरा हो जाता है. इसके बाद अब आप वाकई पहले से ज्यादा फ्रेश फील करते हैं. अब आप अपने मन के पसंद की कोई भी नेलपेंट कलर अपने नाखूनों पर लगा सकते हैं.

ये 5 आदतें आपको अमीर नहीं बनने देती

फाइनेंशियल प्लैन के हिसाब से काम करना आसान नहीं है. हम सफलता के लिए हमेशा शाटकर्ट की तलाश में ही लगे रहते हैं. टैक्स, निवेश, कर्ज, बजट ये सब एक साथ मैनेज करना मुश्किल है, पर कुछ फाइनेंशियल गलतियों से आपको हमेशा बचना चाहिए.

1. फिजूलखर्ची

आकर्षक डिस्काउंट आफर और सेल से बाजार आपको अपनी ओर आकर्षित करता है. अगर आपके पास कोई फाइनेंशियस प्लैन नहीं है तो आप बिना सोचे समझे खर्च करेंगी. ज्यादा खर्च करने से आपका बजट बिगड़ जाएगा. अगर आपने अपनी यह आदत नहीं सुधारी तो आप किसी भी वित्तीय परेशानी में पड़ सकती हैं. आपका खर्च आपकी कमाई के आधार पर ही होना चाहिए.

2. निवेश में देरी

जितनी जल्दी आप निवेश की आदत डालेंगी आपको उतना ही फायदा होगा. आपने कुछ फाइनेंशियल गोल बनाए होंगे, निवेश में देरी से आपको अपने गोल हासिल करने में भी देर लगेगी. अपने शाट, मीडियम और लांग टर्म के गोल्स को ध्यान में रखकर निवेश करें.

3. क्रेडिट का सही इस्तेमाल न करना

क्रेडिट इंस्ट्रुमेंट का इस्तेमाल फाइनेंशियल गोल हासिल करने के लिए करना चाहिए. क्रेडिट का बिना सोचे समझे इस्तेमाल आपके क्रेडिट स्कोर को बिगाड़ सकता है. असुरक्षित कर्ज जैसे क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन का इस्तेमाल बहुत सोच समझकर करना चाहिए.

4. इमरजेंसी फंड न बनाना 

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि कोई भी आपदा आने पर सब मैनेज हो जाएगा. पर ऐसा होता नहीं. मुसीबत के वक्त दिमाग काम करना बंद कर देता है, और ऐसे मौके पर हम गलतियां कर बैठते हैं. इसलिए एक इमरजेंसी फंड बनाना बहुत जरूरी है. ताकि मुसीबत के वक्त आपको अपने एसेट्स गिरवी न रखने पड़े. इमरजेंसी फंड इस हिसाब से बनायें कि नौकरी चली जाने पर 6-12 महीनों तक आप आराम से रह सकें.

5. इंश्योरेंस न लेना

इंश्योरेंस लेने में बहुत से लोगों को हिचक महसूस होती है. पर अपनी सेहत और जिन्दगी से समझौता करना अच्छी बात नहीं है. आपको या आपके परिवार को कब, क्या हो जाए ये तो बस वक्त को ही पता है और अगर उस वक्त पर्याप्त पैसे न हुए तो आप मुश्किल में पड़ सकती हैं. इसलिए देर होने से पहले इंश्योरेंस ले लें.

भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध में वृद्धि के कारण और उपाय

झारखंड में 28 अगस्त 2022 को 18 साल की मासूम की नृशंस हत्या ने एक बार फिर भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय बना दिया है.

महिलाओं के खिलाफ बढ़ी हुई अपराध को पुरुष प्रधान और रूढ़िवादी समाज को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. सरकार ने ऐसे अपराधियों के मन में डर पैदा करने के लिए कई कानून बनाए और अपग्रेड किए हैं, लेकिन महिलाओं के खिलाफ सबसे जघन्य अपराधों की घटनाओं की आवृत्ति में कोई राहत नहीं मिली है.

भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध में वृद्धि के कारण –

कानून का डर नहीं: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, विशाखा दिशा-निर्देश जैसे विभिन्न कानून लागू हैं. दुर्भाग्य से, ये कानून महिलाओं की रक्षा करने और दोषियों को दंडित करने में विफल रहे हैं. यहां तक ​​कि कानून में भी कई खामियां हैं. उदाहरण के लिए, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत, कानून कहता है कि एक वार्षिक रिपोर्ट होनी चाहिए जिसे कंपनियों द्वारा दाखिल करने की आवश्यकता है, लेकिन प्रारूप या फाइलिंग प्रक्रिया के साथ कोई स्पष्टता नहीं है.

पितृसत्ता: बढ़े हुए शिक्षा स्तर और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे विभिन्न सरकारी प्रयासों के बावजूद, महिलाओं की स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ है. लोग अपनी पितृसत्तात्मक मानसिकता को नहीं छोड़ रहे हैं. पितृसत्तात्मक मानसिकता को चुनौती देने वाली महिलाओं की बढ़ती आवाज के कारण ऑनर किलिंग, घरेलू हिंसा बढ़ रही है.

सार्वजनिक सुरक्षा की कमी: महिलाएं आमतौर पर अपने घरों के बाहर सुरक्षित नहीं होती हैं. कई सड़कों पर खराब रोशनी है, और महिलाओं के शौचालयों की कमी है. जो महिलाएं शराब पीती हैं, धूम्रपान करती हैं या पब में जाती हैं, उन्हें भारतीय समाज में नैतिक रूप से ढीले के रूप में देखा जाता है, और ग्राम कबीले परिषदों ने बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि के लिए सेल फोन पर बात करने और बाजार जाने वाली महिलाओं में वृद्धि को दोषी ठहराया है.

महिलाओं के पक्ष में सामाजिक – सांस्कृतिक कारक: लिंग भूमिकाओं की रूढ़िवादिता युगों से जारी है. महिलाओं के लिए प्राथमिक भूमिका विवाह और मातृत्व की रही है. महिलाओं को शादी करनी चाहिए क्योंकि अविवाहित, अलग या तलाकशुदा स्थिति एक कलंक है. और दहेज प्रथा आज भी भारतीय शादियों में प्रचलित है.

परिवार द्वारा दिए गए संस्कार: लड़कियों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि उन्हें ढके हुए कपड़े पहनने चाहिए, उन्हें पुरुषों का सम्मान करना चाहिए, उन्हें विशेष रूप से सार्वजनिक वातावरण में जोर से नहीं हंसना चाहिए, आदि. लेकिन क्या लड़कों को भी यह सिखाया जाता है कि महिलाओं का सम्मान करें? लड़कियों के साथ कैसा व्यवहार करें? उन पर टिप्पणी न करें? उन्हें बुरी तरह से नहीं देखें अथवा छुएं? उनका रेप नहीं करना है? परोपकार अपने घर से ही प्रारंभ होता है. परिवार को अपने लड़कों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, अगर वे इस तरह के अपराध करते हैं.

महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए समाज के लिए कुछ सुझाव:

जवाबदेही बढ़ाने के लिए पुलिस का पुनर्गठन:

पुलिस बल के बारे में एक आम व्यक्ति की धारणा यही है कि वह पक्षपातपूर्ण, राजनीतिकरण है और आम तौर पर बहुत सक्षम नहीं है.

पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस स्टेशन महिलाओं के लिए शिकायत करने के लिए स्वागत स्थल हैं. क्यूंकि इन शिकायतों को दबाने से केवल व्यवस्था कमजोर होती है और अपराधियों का हौसला बढ़ता है.

महिलाओं के कार्यस्थल उत्पीड़न की रोकथाम:

कॉरपोरेट्स द्वारा बनाई गई प्रभावी नीतियां कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को प्रभावी ढंग से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. महिलाओं के लिए शत्रुतापूर्ण कार्य वातावरण को रोकने के लिए उन्हें अपनी संगठनात्मक संस्कृति पर भी काम करना चाहिए. यह भविष्य के लिए एक महान निवेश है यदि उनके कर्मचारी सहमति से नियमों का उल्लंघन किए बिना या सत्ता के खेल खेलने के बिना एक-दूसरे के साथ आराम से काम करने में सक्षम हैं.

मूल भारतीय नैतिकता को स्थापित करना:

एक बच्चे के प्रारंभिक वर्षों के दौरान चरित्र निर्माण माता-पिता और शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. इस संबंध में शिक्षा इस समय की आवश्यकता है कि इस मुद्दे के आसपास की वर्जनाओं को दूर किया जाए, और देश में पुरुषों को सम्मान, सीमाओं और सहमति के बारे में समझने में मदद की जाए ताकि वे महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन न करें.

किशोरों के खिलाफ अपराधों के लिए कठोर दंड:

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सजा दी जा सके.

वही ऐसे अपराधियों के मन में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा.

अपने देवर से परेशान हो गई हूं, मैं क्या करुं?

सवाल

मैं 23 साल की हूं. शादी को 2 साल हुए हैं. मैंने 6 महीने पहले अपने देवर के साथ कई बार हमबिस्तरी की, पर अब नहीं करना चाहती. अब देवर जबरदस्ती करता है. मैं उसे कैसे रोकूं?

जवाब

आप ने अपनी मरजी से भूखे को लजीज खाने का चसका लगा दिया और अब उस के आगे से प्लेट हटा रही हैं. ऐसे में वह झपट्टा मारेगा ही. अब बेहतर यही है कि उसे ऐसा मौका ही न दें कि वह खींचातानी कर सके. उस से अकेले में कतई न मिलें. यकीनन वह खुद चोर है, इसलिए किसी से नहीं कहेगा.

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जिस्म की भूख क्या न करा दे

‘यार, हौट लड़कियां देखते ही मुझे कुछ होने लगता है.’

मेरे पतिदवे थे. फोन पर शायद अपने किसी दोस्त से बातें कर रहे थे. जैसे ही उन्होंने फोन रखा, मैं ने अपनी नाराजगी जताई, ‘‘अब आप शादीशुदा हैं. कुछ तो शर्म कीजए.’’

‘‘यार, यह तो मर्द के ‘जिंस’ में होता है. तुम इस को कैसे बदल दोगी? फिर मैं तो केवल खूबसूरती की तारीफ ही करता हूं. पर डार्लिंग, प्यार तो मैं तुम्हीं से करता हूं,’’ यह कहते हुए उन्होंने मुझे चूम लिया और मैं कमजोर पड़ गई.

एक महीना पहले ही हमारी शादी हुई थी, लेकिन लड़कियों के मामले में इन की ऐसी बातें मुझे बिलकुल अच्छी नहीं लगती थीं. पर ये थे कि ऐसी बातों से बाज ही नहीं आते. हर खूबसूरत लड़की के प्रति ये खिंच जाते हैं. इन की आंखों में जैसे वासना की भूख जाग जाती है.

यहां तक कि हर रोज सुबह के अखबार में छपी हीरोइनों की रंगीन, अधनंगी तसवीरों पर ये अपनी भूखी निगाहें टिका लेते और शुरू हो जाते, ‘क्या ‘हौट फिगर’ है?’, ‘क्या ‘ऐसैट्स’ हैं?’ यार, आजकल लड़कियां ऐसे बदनउघाड़ू कपड़े पहनती हैं, इतना ज्यादा ऐक्सपोज करती हैं कि आदमी बेकाबू हो जाए.’

कभी ये कहते, ‘मुझे तो हरी मिर्च जैसी लड़कियां पसंद हैं. काटो तो मुंह ‘सीसी’ करने लगे.’ कभीकभी ये बोलते, ‘जिस लड़की में सैक्स अपील नहीं, वह ‘बहनजी’ टाइप है. मुझे तो नमकीन लड़कियां पसंद हैं…’

राह चलती लड़कियां देख कर ये कहते, ‘क्या मस्त चीज है.’

कभी किसी लड़की को ‘पटाखा’ कहते, तो कभी किसी को फुलझड़ी. आंखों ही आंखों में लड़कियों को नापतेतोलते रहते. इन की इन्हीं हरकतों की वजह से मैं कई बार गुस्से से भर कर इन्हें झिड़क देती.

मैं यहां तक कह देती, ‘सुधर जाओ, नहीं तो तलाक दे दूंगी.’

इस पर इन का एक ही जवाब होता, ‘डार्लिंग, मैं तो मजाक कर रहा था. तुम भी कितना शक करती हो. थोड़ी तो मुझे खुली हवा में सांस लेने दो, नहीं तो दम घुट जाएगा मेरा.’

एक बार हम कार से डिफैंस कौलोनी के फ्लाईओवर के पास से गुजर रहे थे. वहां एक खूबसूरत लड़की को देख पतिदेव शुरू हो गए, ‘‘दिल्ली की सड़कों पर, जगहजगह मेरे मजार हैं. क्योंकि मैं जहां खूबसूरत लड़कियां देखता हूं, वहीं मर जाता हूं.’’

मेरी तनी भौंहें देखे बिना ही इन्होंने आगे कहा, ‘‘कई साल पहले भी मैं जब यहां से गुजर रहा था, तो एक कमाल की लड़की देखी थी. यह जगह इसीलिए आज तक याद है.’’

मैं ने नाराजगी जताई, तो ये कार का गियर बदल कर मुझ से प्यारमुहब्बत का इजहार करने लगे और मेरा गुस्सा एक बार फिर कमजोर पड़ गया.

लेकिन, हर लड़की पर फिदा हो जाने की इन की आदत से मुझे कोफ्त होने लगी थी. पर हद तो तब पार होने लगी, जब एक बार मैं ने इन्हें हमारी जवान पड़ोसन से फ्लर्ट करते देख लिया. जब मैं ने इन्हें डांटा, तो इन्होंने फिर वही मानमनौव्वल और प्यारमुहब्बत का इजहार कर के मुझे मनाना चाहा, पर मेरा मन इन के प्रति रोजाना खट्टा होता जा रहा था.

धीरेधीरे हालात मेरे लिए सहन नहीं हो रहे थे. हालांकि हमारी शादी को अभी डेढ़दो महीने ही हुए थे, लेकिन पिछले 10-15 दिनों से इन्होंने मेरी देह को छुआ भी नहीं था. पर मेरी शादीशुदा सहेलियां बतातीं कि शादी के शुरू के महीने तक तो मियांबीवी तकरीबन हर रोज ही… मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर बात क्या थी. इन की अनदेखी मेरा दिल तोड़ रही थी. मैं तिलमिलाती रहती थी.

एक बार आधी रात में मेरी नींद टूट गई, तो इन्हें देख कर मुझे धक्का लगा. ये आईपैड पर पौर्न साइट्स खोल कर बैठे थे और…

‘‘जब मैं यहां मौजूद हूं, तो तुम यह सब क्यों कर रहे हो? क्या मुझ में कोई कमी है? क्या मैं ने तुम्हें कभी ‘न’ कहा है?’’ मैं ने दुखी हो कर पूछा.

‘‘सौरी डार्लिंग, ऐसी बात नहीं है. क्या है कि मैं तुम्हें नींद में डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था. एक टैलीविजन प्रोग्राम देख कर बेकाबू हो गया, तो भीतर से इच्छा होने लगी.’’

‘‘अगर मैं भी तुम्हारी तरह इंटरनैट पर पौर्न साइट्स देख कर यह सब करूं, तो तुम्हें कैसा लगेगा?’’

‘‘अरे यार, तुम तो छोटी सी बात का बतंगड़ बना रही हो,’’ ये बोले.

‘‘लेकिन, क्या यह बात इतनी छोटी सी थी?’’

कभीकभी मैं आईने के सामने खड़ी हो कर अपनी देह को हर कोण से देखती. आखिर क्या कमी थी मुझ में कि ये इधरउधर मुंह मारते फिरते थे?

क्या मैं खूबसूरत नहीं थी? मैं अपने सोने से बदन को देखती. अपने हर कटाव और उभार को निहारती. ये तीखे नैननक्श. यह छरहरी काया. ये उठे हुए उभार. केले के नए पत्ते सी यह चिकनी पीठ. डांसरों जैसी यह पतली काया. भंवर जैसी नाभि. इन सब के बावजूद मेरी यह जिंदगी किसी सूखे फव्वारे सी क्यों होती जा रही थी.

एक रविवार को मैं घर का सामान खरीदने बाजार गई. तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी, इसलिए मैं जरा जल्दी घर लौट आई. घर का बाहरी दरवाजा खुला हुआ था. ड्राइंगरूम में घुसी तो सन्न रह गई. इन्होंने मेरी एक सहेली को अपनी गोद में बैठाया हुआ था.

मुझे देखते ही ये घबरा कर ‘सौरीसौरी’ करने लगे. मेरी आंखें गुस्से और बेइज्जती के आंसुओं से जलने लगीं.

मैं चीखना चाहती थी, चिल्लाना चाहती थी. पति नाम के इस प्राणी का मुंह नोच लेना चाहती थी. इसे थप्पड़ मारना चाहती थी. मैं कड़कती बिजली बन कर इस पर गिर जाना चाहती थी. मैं गहराता समुद्र बन कर इसे डुबो देना चाहती थी. मैं धधकती आग बन कर इसे जला देना चाहती थी. मैं हिचकियां लेले कर रोना चाहती थी. मैं पति नाम के इस जीव से बदला लेना चाहती थी.

मुझे याद आया, अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके बिल क्लिंटन भी अपनी पत्नी हिलेरी क्लिंटन को धोखा दे कर मोनिका लेविंस्की के साथ मौजमस्ती करते रहे थे, गुलछर्रे उड़ाते रहे थे. क्या सभी मर्द एकजैसे बेवफा होते हैं? क्या पत्नियां छले जाने के लिए ही बनी हैं. मैं सोचती.

रील से निकल आया उलझा धागा बन गई थी मेरी जिंदगी. पति की ओछी हरकतों ने मेरे मन को छलनी कर दिया था. हालांकि इन्होंने इस घटना के लिए माफी भी मांगी थी, फिर मेरे भीतर सब्र का बांध टूट चुका था. मैं इन से बदला लेना चाहती थी और ऐसे समय में राज मेरी जिंदगी में आया.

राज पड़ोस में किराएदार था. 6 फुट का गोराचिट्टा नौजवान. जब वह अपनी बांहें मोड़ता था, तो उस के बाजू में मछलियां बनती थीं. नहा कर जब मैं छत पर बाल सुखाने जाती, तो वह मुझे ऐसी निगाहों से ताकता कि मेरे भीतर गुदगुदी होने लगती.

धीरेधीरे हमारी बातचीत होने लगी. बातों ही बातों में पता चला कि राज प्रोफैशनल फोटोग्राफर था.

‘‘आप का चेहरा बड़ा फोटोजैनिक है. मौडलिंग क्यों नहीं करती हैं आप?’’ राज मुझे देख कर मुसकराता हुआ कहता.

शुरूशुरू में तो मुझे यह सब अटपटा लगता था, लेकिन देखते ही देखते मैं ने खुद को इस नदी की धारा में बह जाने दिया.

पति जब दफ्तर चले जाते, तो मैं राज के साथ उस के स्टूडियो चली जाती. वहां राज ने मेरा पोर्टफोलियो भी बनाया. उस ने बताया कि अच्छी मौडलिंग असाइनमैंट्स लेने के लिए अच्छा पोर्टफोलियो जरूरी था. लेकिन मेरी दिलचस्पी शायद कहीं और ही थी.

‘‘बहुत अच्छे आते हैं आप के फोटोग्राफ्स,’’ उस ने कहा था और मेरे कानों में यह प्यारा सा फिल्मी गीत बजने लगा था :

‘अभी मुझ में कहीं, बाकी थोड़ी सी है जिंदगी…’

मैं कब राज को चाहने लगी, मुझे पता ही नहीं चला. मुझ में उस की बांहों में सो जाने की इच्छा जाग गई. जब मैं उस के करीब होती, तो उस की देहगंध मुझे मदहोश करने लगती. मेरा मन बेकाबू होने लगता. मेरे भीतर हसरतें मचलने लगी थीं. ऐसी हालत में जब उस ने मुझे न्यूड मौडलिंग का औफर दिया, तो मैं ने बिना झिझके हां कह दिया.

उस दिन मैं नहाधो कर तैयार हुई. मैं ने खुशबूदार इत्र लगाया. फेसियल, मैनिक्योर, पैडिक्योर, ब्लीचिंग वगैरह मैं एक दिन पहले ही एक अच्छे ब्यूटीपार्लर से करवा चुकी थी. मैं ने अपने सब से सुंदर पर्ल ईयररिंग्स और डायमंड नैकलैस पहना. कलाई में महंगी घड़ी पहनी और सजधज कर मैं राज के स्टूडियो पहुंच गई.

उस दिन राज बला का हैंडसम लग रहा था. गुलाबी कमीज और काली पैंट में वह मानो कहर ढा रहा था.

‘‘हे, यू आर लुकिंग ग्रेट,’’ मेरा हाथ अपने हाथों में ले कर वह बोला. यह सुन कर मेरे भीतर मानो सैकड़ों सूरजमुखी खिल उठे.

फोटो सैशन अच्छा रहा. राज के सामने टौपलेस होने में मुझे कोई संकोच नहीं हुआ. मेरी देह को वह एक कलाकार सा निहार रहा था.

किंतु मुझे तो कुछ और की ही चाहत थी. फोटो सैशन खत्म होते ही मैं उस की ओर ऐसी खिंची चली गई, जैसे लोहा चुंबक से चिपकता है. मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था. मैं ने उस का हाथ पकड़ लिया.

‘‘नहीं नेहा, यह ठीक नहीं. मैं ने तुम्हें कभी उस निगाह से देखा ही नहीं. हमारा रिलेशन प्रोफैशनल है,’’ राज का एकएक शब्द मेरे तनमन पर चाबुकसा पड़ा.

‘…पर मुझे लगा, तुम भी मुझे चाहते हो…’ मैं बुदबुदाई.

‘‘नेहा, मुझे गलत मत समझो. तुम बहुत खूबसूरत हो. पर तुम्हारा मन भी उतना ही खूबसूरत है, लेकिन मेरे लिए तुम केवल एक खूबसूरत मौडल हो. मैं किसी और रिश्ते के लिए तैयार नहीं और फिर पहले से ही मेरी एक गर्लफ्रैंड है, जिस से मैं जल्दी ही शादी करने वाला हूं,’’ राज कह रहा था.

तो क्या वह सिर्फ एकतरफा खिंचाव था या पति से बदला लेने की इच्छा का नतीजा था?

कपड़े पहन कर मैं चलने लगी, तो राज ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक लिया. उस ने स्टूडियो में रखे गुलदान में से एक पीला गुलाब निकाल लिया था. वह पीला गुलाब मेरे बालों में लगाते हुए बोला, ‘‘नेहा, पीला गुलाब दोस्ती का प्रतीक होता है. हम अच्छे दोस्त बन कर रह सकते हैं.’’

राज की यह बात सुन कर मैं सिहर उठी थी. वह पीला गुलाब बालों में लगाए मैं वापस लौट आई अपनी पुरानी दुनिया में…

उस रात कई महीनों के बाद जब पतिदेव ने मुझे प्यार से चूमा और सुधरने का वादा किया, तो मैं पिघल कर उन के आगोश में समा गई.

खिड़की के बाहर रात का आकाश न जाने कैसेकैसे रंग बदल रहा था. ठंडी हवा के झोंके खिड़की में से भीतर कमरे में आ रहे थे. मेरी पूरी देह एक मीठे जोश से भरने लगी.पतिदेव प्यार से मेरा अंगअंग चूम रहे थे. मैं जैसे बहती हुई पहाड़ी नदी बन गई थी. एक मीठी गुदगुदी मुझ में सुख भर रही थी. फिर… केवल खुमारी थी. और उन की छाती के बालों में उंगलियां फेरते हुए मैं कह रही थी, ‘‘मुझे कभी धोखा मत देना.’’

कमरे के कोने में एक मकड़ी अपना टूटा हुआ जाला फिर से बुन रही थी. इस घटना को बीते कई साल हो गए हैं. इस घटना के कुछ महीने बाद राज भी पड़ोस के किराए का मकान छोड़ कर कहीं और चला गया. मैं राज से उस दिन के बाद फिर कभी नहीं मिली. लेकिन अब भी मैं जब कहीं पीला गुलाब देखती हूं, तो सिहर उठती हूं. एक बार हिम्मत कर के पीला गुलाब अपने जूड़े में लगाना चाहा था, तो मेरे हाथ बुरी तरह कांपने लगे थे

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

पर्यटकों के लिए मिलेगी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधायें -जयवीर सिंह

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा कि उ0प्र0 में पर्यटन की असीमित संभावनायें एवं निवेशकों के रूचि को देखते हुए बड़े पैमाने पर अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आगामी पांच वर्षों मंे 30 प्रतिशत घरेलू तथा 20 प्रतिशत विदेशी पर्यटकों के वृद्धि की संभावना है. जिससे 25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. उन्होंने कहा कि प्रक्रियाधीन पर्यटन नीति 2022 के तहत 10,000 करोड़ रूपये से अधिक निवेश का लक्ष्य रखा गया है. इस लक्ष्य को एक जिला एक पर्यटन केन्द्र के तहत प्राप्त किया जायेगा.

पर्यटन मंत्री आज होटल डी-पोलो क्लब स्पा रिजार्ट, धर्मशाला, हिमांचल प्रदेश में पर्यटन एवं अवस्थापना सुविधाओं के विकास विषय पर आयोजित 03 दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने इस राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के लिए केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री जी किशन रेड्डी तथा केन्द्रीय पर्यटन विभाग के अधिकारियों को बधाई दी. इस राष्ट्रीय सम्मेलन मं् विभिन्न प्रदेशों के पर्यटन मंत्री, केन्द्रशासित प्रदेशों के एलजी, प्रशासक, वरिष्ठ अधिकारी, भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय के उच्चाधिकारी, राज्यों के पर्यटन विभागाध्यक्ष एवं सेवाक्षेत्र के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि उ0प्र0 देश का सबसे बड़ा राज्य है. यहां पर हर जनपद में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं पौराणिक स्थल मौजूद हैं. इन स्थानों पर पर्यटकों के पसंद के हिसाब से अवस्थापना सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है.

श्री जयवीर सिंह ने कहा कि उ0प्र0 में सड़क, रेल, वायु तथा जल मार्ग के माध्यम से सभी धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को जोड़ने के लिए अवस्थापना विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट में 940 करोड़ रूपये का प्राविधान किया गया है. पर्यटन के विकास की दृष्टि से प्रदेश को 12 सर्किट में बांटा गया है. सभी सर्किटों पर बुनियादी सुविधाओं के विकास पर कार्य तेजी से चल रहा है. बहुत से कार्य पूर्णता के अंतिम चरण में हैं.

पर्यटन मंत्री ने कहा कि ब्रज परिपथ में मथुरा, वृन्दावन, आगरा, रामायण परिपथ में लखनऊ, प्रयागराज के बीच के सभी स्थान एवं वन इको टूरिज्म, साहसिक पर्यटन स्थल, जल विहार, हेरिटेज आर्क के रूप में आगरा, लखनऊ एवं वाराणसी को जोड़कर बनाया जा रहा है. इसके अतिरिक्त महाभारत मेरठ, हस्तिनापुर, जैन परिपथ, सूफी परिपथ आदि शामिल हैं. इसके अलावा बौद्ध परिपथ के अंतर्गत लुम्बिनी, बोध गया, नालन्दा, राजगिरी, बैशाली, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कौशाम्बी जैसे स्थलों को जोड़ा गया है.

श्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारत की बौद्ध संस्कृति का प्रभाव दुनिया के अधिकांश देशों में है. इन देशो के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बौद्ध आस्था से जुड़े सभी स्थानों पर विश्वस्तरीय सुविधायें उपलब्ध कराई जा रही हैं. इसके अतिरिक्त हेरिटेज, टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बुन्देलखण्ड के 31 किलों को चिन्हित किया गया है. पर्यटन की दृष्टि से इन्हें सजाने एवं संवारने के लिए सेन्टर फॉर इनवायरनमेंटल प्लानिंग एण्ड टेक्नोलॉजी (सीईपीटी) विश्वविद्यालय अहमदाबाद से सहयोग लिया जा रहा है.

पर्यटन मंत्री ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन स्कीम की नई गाइडलाइन के अनुसार प्रदेश की वैभवशाली सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए विन्ध्याचल, नैमिषारण्य, प्रयागराज, चित्रकूट, संगिसा, आगरा, कानपुर, झांसी, महोबा, गोरखपुर एवं कुशीनगर को अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किये जाने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है. इसके अतिरिक्त प्रदेश में इको टूरिज्म बोर्ड के गठन के साथ वेलनेस टूरिज्म के लिए तैयार किया जा रहा है. इसके साथ ही ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अतिरिक्त उ0प्र0 पर्यटन एवं संस्कृति प्रोत्साहन परिषद का गठन किया गया है.

श्री जयवीर सिंह ने कहा कि उ0प्र0 में पर्यटन की अनंत संभावनायें हैं. इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने तथा रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से विभिन्न संभावनाओं को तलाशा जा रहा है. इसके साथ ही अध्यात्मिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक महत्व के स्थलों पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधायें विकसित की जा रही हैं. भगवान श्रीराम की अयोध्या नगरी, कृष्ण की मथुरा एवं काशी कॉरीडोर को अत्याधुनिक बनाया जा रहा है. श्री जयवीर सिंह ने कहा कि पर्यटन सेक्टर का अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है. प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने उ0प्र0 की अर्थव्यवस्था को एक अरब डॉलर बनाने का लक्ष्य रखा है. जिसमंे पर्यटन का अहम योगदान होगा. उन्होंने कहा कि अगले वर्ष जी-20 सम्मेलन में पर्यटन विभाग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेगा.

इस अवसर पर केन्द्रीय पर्यटन सचिव श्री अरविन्द सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, इसके पश्चात केन्द्रीय पर्यटन रक्षा मंत्री श्री अजय भट्ट, एफएआईटीएच फेडरेशन के चेयरमैन श्री नकुल आनन्द, अध्यक्ष भारतीय पर्यटन विकास निगम श्री संबित पात्रा ने सम्बोधित किया. इसके अलावा असम के पर्यटन मंत्री, प्रमुख सचिव पर्यटन गुजरात तथा पर्यटन सचिव दादरा एवं नागर हवेली, दमन द्वीव ने भी अपने विचार रखे. उ0प्र0 के प्रमुख सचिव पर्यटन श्री मुकेश मेश्राम एवं अन्य अधिकारी इस सम्मेलन में मौजूद थे.

खत्म हुई #fatejo की लव स्टोरी, ऐसे हुई फतेह और तेजो की मौत

सीरियल उड़ारियां (Udaariyan) की कहानी में जल्द ही जनरेशन गैप दिखने वाला है, जिसके चलते #fatejo यानी फतेह और तेजो की मौत के बाद उनकी लव स्टोरी खत्म हो जाएगी. वहीं सोशलमीडिया पर फतेह और तेजो की मौत का वीडियो सामने आ गया है, जिसे देखकर फैंस काफी इमोशनल हो गए हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

एक्सीडेंट में होगी #fatejo की मौत

सीरियल के अपकमिंग एपिसोड में फतेह और तेजो की एक्सीडेंट में मौत होते हुए दिखने वाली है. दरअसल, हाल ही में सीरियल के लीड रोल में नजर आने वाले फतेह यानी अंकित गुप्ता और तेजो यानी प्रियंका चहर के शो छोड़ने की खबरें थीं. वहीं अब दोनों के लास्ट सीन की वीडियो भी फैंस के सामने आ गई है. वीडियो में एक्सीडेंट के बाद तेजो और फतेह की मौत होते हुए दिख रही है. वहीं वीडियो देखकर फैंस काफी इमोशनल हो गए हैं.

 

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नए ट्रैक की होगी शुरुआत

 

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तेजो और फतेह की मौत के बाद जनरेशन गैप के चलते सीरियल की कहानी में कई बदलाव देखने को मिलेंगे. दरअसल, 16 साल के गैप के बाद नेहमत और अयकाम बड़े हो जाएंगे और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाएंगे. हालांकि अपने माता-पिता की मौत के पीछे की वजह जानते हुए दिखेंगे.

 

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बता दें, सीरियल में लीप के कारण लीड एक्टर्स ने शो छोड़ने का फैसला किया था क्योंकि वह कम उम्र में माता पिता के रोल में नजर नहीं आना चाहते थे. हालांकि सीरियल में फतेह और तेजो की जोड़ी को फैंस ने काफी पसंद किया था. वहीं दोनों को साथ देखने के लिए वह आज भी बेताब रहते हैं.

ऐसे संभालें मैरिड लाइफ

आजकल पढ़ीलिखी लड़कियां शादी के 2-3 साल बाद ही तलाक लेने के लिए मजबूर हो जाती हैं. आखिर क्यों तलाक की नौबत आती है, आइए जानते हैं:

तलाक के कारण

  1. पतिपत्नी को एकदूसरे का व्यवहार पसंद न आना.
  2. दोनों में से किसी एक के घर वालों की दखलंदाजी तथा उन के ऊपर उन का अत्यधिक प्रभाव.
  3. दोनों या किसी एक को छोटीछोटी बातों पर भी गुस्सा आना.
  4. अहं का टकराव.
  5. अच्छे संस्कारों की कमी.
  6. रिश्तों को दिमाग से तोलना.
  7. लड़के का सपनों का सौदागर न निकलना.
  8. कई बार लड़की या लड़का एकदूसरे का चेहरा या बाहरी दिखावा देख कर आकर्षित हो जाते हैं, परंतु शादी होते ही एकदूसरे का वास्तविक व्यवहार सामने आने पर लड़ाईझगड़ा शुरू हो जाता है.
  9. कुछ लड़कियां शादी के बाद तलाक को कमाई का जरीया भी बना लेती हैं.
  10. आजकल के लड़केलड़कियां प्रेम किसी और से करते हैं पर घर वालों के डर से शादी किसी और से कर लेते हैं.

तलाक के नुकसान

  1. पहली शादी में जैसा पति या पत्नी मिलती है दूसरी शादी में वैसा ही पति या पत्नी मिले यह जरूरी नहीं. कोई न कोई समझौता करना ही पड़ता है.
  2. चूंकि पहला रिश्ता बहुत सोचसमझ कर किया जाता है, इसलिए समाज में थोड़ी मानप्रतिष्ठा बढ़ जाती है. लोग भी बधाई देते समय कहते हैं कि बहुत अच्छा रिश्ता मिला. ऐसा दूसरी बार नहीं मिल पाता.
  3. दूसरी बार जो साथी होगा, हो सकता है वह पहले जितना पढ़ालिखा या अमीर न हो. दूसरी शादी में जो लड़की या लड़का होता है वह ज्यादातर उम्मीद से कम ही होता है.
  4. रिश्ता टूटने पर बहुत दुख भी होता है और यह बात वही जानता है जिस का रिश्ता टूटता है.
  5. जब तक दूसरी शादी नहीं हो जाती तब तक लड़की तथा उस के अभिभावकों को असुरक्षा की भावना घेरे रहती है.

तलाक समाधान नहीं

  1. मांबाप समाज में लोगों से नजरें नहीं मिला पाते.
  2. फिर दूसरी शादी करने पर इस बात की क्या गारंटी है कि वह सही चलेगी. दूसरी शादी करने पर लड़का या लड़की न चाहते हुए भी हर बात सहते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कुछ कहा तो कहीं यह शादी भी न टूट जाए.
  3. पहले पति या पत्नी की याद हमेशा दुख देती है.
  4. किसी भी तलाकशुदा लड़की को मांबाप ज्यादा समय तक घर में नहीं रखते. उस की जल्दी से जल्दी दूसरी शादी करवाना चाहते हैं. कई बार लड़की खुद भी मांबाप के घर में खुद को उन पर बोझ समझने लगती है.
  5. तलाकशुदा होने पर लड़की समाज में अकेला रहने पर असुरक्षित भी महसूस करती है.

समाधान

अगर तलाक के इतने नुकसान हैं तो फिर जहां तक हो सके रिश्ते को संभालने की कोशिश करनी चाहिए. अगर कोई पति मारपीट करता है, शक करता है या फिर साइकिक है, तो उस का कोई हल नहीं. उस के लिए आप एनजीओ की मदद लें या पुलिस की. तलाक लेना जायज है, परंतु आजकल ज्यादातर तलाक अहं के टकराव की वजह से हो रहे हैं.

  1. शादी से पहले लड़कालड़की को एकदूसरे से अकेले में मिलने दें. उन्हें एकदूसरे को समझने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए.
  2. अभिभावकों को अपने बच्चे की कमजोरियां पता होती हैं जैसे गुस्सा आना या कोई और कमी होना आदि. ऐसे में उन्हें अपने बच्चों से पूछते रहना चाहिए कि तुम्हारी इस बात पर तुम्हारी होने वाली पत्नी या पति ने कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त की.
  3. रिश्ते को दिमाग से नहीं दिल से जोड़ने की कोशिश करें. हर लड़कालड़की कहीं न कहीं एकदूसरे में अपना प्रेमी या प्रेमिका भी ढूंढ़ रहा होता हैं.
  4. अगर अपने मंगेतर को देख कर आप के दिल की धड़कनें नहीं बढ़तीं या आप को खुशी नहीं मिलती तो आप इस रिश्ते पर दोबारा विचार करें.

अच्छी सोच

अकसर देखा गया है कि लगभग सभी घरों में सासससुर आपस में बहुत अच्छी तरह से रिश्ते निभा रहे होते हैं और आप सोचती हो कि मेरा पति इन के जैसा क्यों नहीं? पहले वे भी आप की तरह लड़ते रहे होंगे, परंतु रिश्ता सींचने में उन्हें समय मिल गया. सोचो एक दिन आप का रिश्ता भी ऐसा ही हो जाएगा.

  1. रिश्ते को समय दें. कुछ सह लें तो कुछ मना लें.
  2. लड़केलड़की में परिपक्वता तथा तजरबे की कमी होती है, क्योंकि आजकल बच्चे ज्यादा समय पढ़ाई को देते हैं. फिर संयुक्त परिवार भी नहीं देखा होता, इसलिए किसी दूसरे के साथ घर में रहने के तौरतरीकों की समझ भी कम ही होती है. ऐसे में अभिभावकों को इन की मदद करनी चाहिए.
  3. समाज की एक दुविधा यह भी है कि लड़की को ही अपने मांबाप का घर छोड़ कर लड़के के घर जाना पड़ता है. इस बात से दुखी होने के बजाय आप इस के फायदे ढूंढें़.

दिल में जगह

  1. अपने रिश्ते तथा घर की हर बात अपने मांबाप या रिश्तेदारों को बताना सही नहीं. वे नहीं जानते कि आप जो बात कर रही हैं, उस में आप का क्या रोल था. उन की सलाह आप को महंगी भी पड़ सकती है.
  2. कुछ ही सालों में आप अपने पति का दिल जीत लेंगी और उसी घर में रानी के समान बन जाएंगी, क्योंकि समय रुकता नहीं है. एक समय ऐसा भी आता है जब सासससुर बुजुर्ग हो रहे होते हैं और आप के बच्चे जवान.
  3. शादी के बाद पति या पत्नी पर शक करना या उस की आजादी पर अंकुश लगाना रिश्ते को एक बंदिश बना देता है.
  4. आप रात को पति के साथ कमरे में अकेली होती ही होंगी. उस समय का सही उपयोग करें. पति के साथ बैठ कर भावनात्मक बातें करें. धीरेधीरे पति के दिल में जगह बनाएं, क्योंकि आप को यह जंग दिल तथा दिमाग से जीतनी है, तलवार से नहीं.

सब कुछ अनुरूप नहीं

  1. हर इंसान को सब कुछ नहीं मिलता. अत: जो अधूरा है उसे पूरा करने की कोशिश करें.
  2. अकेले में आप अपने पति या पत्नी की बुरी आदतों या फिर वे जो आप को पसंद नहीं हैं उन के बारे में उसे अवगत कराएं.
  3. अगर पति मौडर्न या पुराने विचारों का है तो थोड़ा आप भी बदलें, क्योंकि आप को उस घर में ऐडजस्ट होना है.
  4. अगर पति हर बात अपने मांबाप से करता है, तो आप वही बातें करें, जो मांबाप तक पहुंचें तो कोई गलत प्रतिक्रिया न हो.
  5. बातबात पर रिश्ते को तोड़ने की धमकी न दें. घर छोड़ कर न जाएं तथा जल्दी से नाराज न हों. अगर हों भी तो जल्दी मान जाएं.

घर की बात घर में

  1. ज्यादातर लड़की को ही ऐडजस्ट करना पड़ता है, क्योंकि लड़की को अपने घर में, चाहे हजार रुपए लेने में झिझक महसूस होती हो, परंतु शादी होते ही वह लड़के की आधी प्रौपर्टी की हकदार बन जाती है.
  2. अपने लड़ाईझगड़े की किसी तीसरे से शिकायत करने पर आप के रिश्ते की बागडोर अनजान हाथों में चली जाएगी, जैसे गांव की पंचायत, कोई एनजीओ ग्रुप इत्यादि. वे अपनी वाहवाही बटोरने के लिए आप की पत्नी या पति के स्वाभिमान को ठेस भी पहुंचा सकते हैं, जिस से आप के रिश्ते में गांठ पड़ जाएगी.
  3. अगर उसी घर में रहने की इच्छा हो तो किसी को बीच में न लें, क्योंकि डर से हो सकता है ससुराल वाले आप को तंग न करें, परंतु आप से कोई बात भी नहीं करेगा तो आप वहां पर अकेली पड़ जाएंगी.
  4. यह टीवी सीरियल नहीं है जहां कई शादियां होती हैं. यह आप का जीवन है और दूसरी शादी एक समझौता है.
  5. अगर आप अपनी अटैची पकड़ कर बसस्टैंड पर खड़ी हैं और पति का घर छोड़ आई हैं तो आप कोई भी बहाना बना कर वापस चली जाएं. क्या मालूम वे सब बहुत पछताए हों. औरत चूंकि हमेशा ही महानता की मूर्ति रही है, इसलिए इस रिश्ते को आप ज्यादा अच्छी तरह संभाल सकती हैं.

Festive Special: गिद्ध- क्यों परिवार के होते हुए भी अकेली पड़ गई भगवती

family story in hindi

Festive Special: साड़ी के फ्यूजन लुक में दिखें स्टाइलिश

मौका चाहे जो भी हो, साड़ी एक ऐसा आउटफिट है जिसे हर मौके पर पहना जा सकता है. अगर आपको सही तरीके से साड़ी पहननी आती है और अलग-अलग मौकों के लिए कुछ खास तरीके से साड़ी बांधने आती है तो कहीं जाने से पहले आपको चिंता करने की जरूरत ही नहीं.

साड़ी एक ऐसा आउटफिट है जिसका फैशन कभी पुराना नहीं होता है. सीधे पल्ले और उल्टे पल्ले की साड़ी पहनना तो आप जानती ही होंगी लेकिन कितना अच्छा हो जो आपको साड़ी पहनने के कुछ और स्टाइलिश तरीके पता हों.

साड़ी को फ्यूजन लुक में पहनकर आप स्टाइलिश तो नजर आएंगी ही साथ ही औरों से अलग भी. ये हैं साड़ी पहनने के कुछ नए और स्टाइलिश तरीके.

1. साड़ी के साथ ब्लाउज पहने की जगह कुर्ती पहनें. किसी भी बोल्ड ब्राइट कलर की साड़ी के साथ प्रिंटेड कुर्ती पहनिए. इस तरीके से साड़ी पहनने पर एक बात का खास ख्याल रखें कि साड़ी की प्लेट और पल्लू सलीके से बंधे हों.

2. अगर साड़ी पर हेवी वर्क है तो कुर्ती को प्लेन ही रखें और अगर कुर्ती पर काम हो रखा है तो साड़ी प्लेन ही अच्छी लगेगी.

3. कोरसेट या फिर जैकेट के साथ भी साड़ी पहनना काफी स्टाइलिश रहेगा. इसके साथ राउंड नेक पल्लू लेना ही सही रहेगा.

4. क्रॉप टॉप के साथ भी साड़ी पहनना अच्छा लगेगा. आजकल बाजार में क्रॉप टॉप की ढेरों वेरायटी उपलब्ध है. आप कोई सा भी क्रॉप टॉप चुन सकती हैं. चुनते समय साड़ी के पैटर्न और कलर का पूरा ध्यान रखें.

आजकल मटैलिक साड़ी काफी ट्रेंड में है. यकीन मानिए मटैलिक साड़ी फैशन जगत की फेवरेट बन चुकी है. अगर आप इस लुक को अपनाना चाहती हैं तो इन बातों का रखें ध्यान.

सिंगल मटैलिक रंग मतलब एक ही रंग की साड़ी (गोल्डन, सिल्वर, कॉपर, काला, लाल, हरा) पहनें. ज्यादा से ज्यादा उस पर पतला बॉर्डर हो.

हमेशा ध्यान रखें कि साड़ी कम से कम 6 मीटर लंबी हो ताकि ज्यादा प्लेट आ पाएं.

मटैलिक साड़ी तभी अच्छी लगती है जब उसे अच्छे और कसे हुए ढंग से पहना गया हो. ढीली बंधी मटैलिक साड़ी में आप अजीब लगेंगी.

मटैलिक रंग वाली साड़ियां ज्यादातर क्रेप और जॉर्जेट में आती हैं, लिहाजा उसके नीचे साटन का ही पेटीकोट पहनें. इससे साड़ी का लुक बेहद अच्छा आएगा.

मटैलिक रंग की साड़ी के साथ चटकीले नियॉन रंग या फिर कंट्रास्ट ब्लाउज पहनें. चाइनीज कॉलर पहनने से बचें.

जिनका शरीर स्लिम है, उनके लिए साड़ी के साथ कमर में चेन पहनना एक बेहतरीन विकल्प है.

जो महिलाएं मटैलिक साड़ी पहनने से कतराती हैं वे किसी भी प्लेन साड़ी के साथ मटैलिक ब्लाउज पहनें.

आपके लिए प्रयोग करने के कई विकल्प मौजूद हैं. मिसाल के तौर पर पंक लुक के लिए ब्लाउज के साथ चटकीले नीले रंग या फिर नियॉन ग्रीन कलर की साड़ी पहन सकती हैं.

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