समाज में हर पति है खलनायक नहीं

क्या आप ने कभी किसी पुरुष को फूटफूट कर रोते देखा है? यह प्रश्न अजीब लगता है क्योंकि पुरुष के साथ आंसुओं का कोई संबंध हो सकता है, यह बात आमतौर पर गले नहीं उतरती. लेकिन यह सत्य है कि पुरुष भी रोते हैं खासतौर पर तब जब पुरुष किसी ऐसी स्त्री से शादी कर लेता है, जिस से तालमेल तो नहीं बैठता, लेकिन जीवन निभाने वाली स्थिति में भी नहीं रह पाता क्योंकि पत्नी के रूप में उस के जीवन में आई स्त्री उस का जीना दूभर कर देती है. ऐसी पत्नियों को आतंकवादी पत्नियां कहना कोई गलत न होगा.

पत्नी द्वारा आतंकवाद क्या और कैसे होता है? पतियों की यह आम शिकायत होती है कि जब पत्नियां अपनी समस्याओं के बारे में बात करती हैं तो सारा दोष पतियों पर मढ़ देती हैं, साथ ही पुरुषों के लिए यह भी कहा जाता हैं कि वे पत्नियों को बिलकुल नहीं समझते और उन का केवल ‘सैक्स’ के लिए इस्तेमाल किया जाता है. तभी तो छोटी सी बात पर भी पत्नियों को मारने के लिए हाथ तक उठा देते हैं. यहां तक कि जला भी डालते हैं.

पुरुष ही विलेन क्यों

भारतीय पुरुषों को तो मीडिया ने काफी हद तक विलेन बना कर दिखाया है. ज्यादातर भारतीय पुरुषों को संवेदनशीलता से दूर क्रूर और दुष्ट माना जाता है, लेकिन जैसे अच्छे और बुरे दोनों पुरुष होते हैं वैसे ही अच्छी और बुरी दोनों तरह की स्त्रियां होती हैं.

प्रमोद कुमार एक सफल डाक्टर हैं. उन का खुशमिजाज स्वभाव उन के अपने मरीजों से बातचीत करते समय साफ पता चलता है. लेकिन घर में पहुंचते ही उनकी यह मुसकराहट गायब हो जाती है. एक भरेपूरे संपन्न परिवार से संबंध रखते हुए डा. प्रमोद घर पहुंचते ही पूर्णया चुप्पी साध लेते हैं.

उन के अनुसार, ‘‘घर की चारदीवारी में मैं जो झेलता हूं उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता. मेरी पत्नी ने शादी के बाद सब से पहले मेरी डाक्टरी की डिगरी देखने की मांग की. उसे शक था कि कहीं मेरे मातापिता झठ तो नहीं बोले थे. उसे मेरे खानेपीने, पहनने से ले कर मेरे बातचीत करने तक में कमी नजर आती है. उस का रौद्ररूप मेरे कपड़े तक फाड़ देता है, मेरी किताबें जला देता है. यहां तक कि कई बार वह अपने बढ़े हुए नाखूनों से नोच भी देती है.’’

पतियों के बीच यह डर आज बहुत ज्यादा घर कर गया है कि पत्नी दहेज की मांग का डर दिखा कर उन्हें ब्लैकमेल कर सकती है. विवाह की जरूरत सिर्फ पुरुष को ही नहीं होती बल्कि स्त्री को भी होती है और हर पुरुष अपनी पत्नी को खुश रखना चाहता है. ज्यादातर पत्नियों को किसी के भी आगे रोनेधोने की आदत होती है, जबकि पुरुष को अपनी परेशानी बयां करने में शर्म आती है. पत्नी अगर आंसू बहाती है तो पति आंसू पीता है क्योंकि अदालतें, पुलिस और कानून सभी स्त्री का साथ देते हैं.

अविनाश एक मल्टीनैशनल कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत है तथा 2 लाख रुपए महीना वेतन ले रहा है. उस की पत्नी एक फाइव स्टार होटल में उच्च प्रशासनिक अधिकारी है.

झगड़े की वजह

दिल्ली के सुंदर व संपन्न इलाके में अपने घर और 2 बच्चों का भरापूरा परिवार छोड़ कर अविनाश की पत्नी अकसर एक सहयोगी के साथ शाम गुजारने चली जाती है. अविनाश की मजबूरी है कि वह अपने बच्चों के आगे इस बात को जाहिर नहीं करना चाहता और न ही यह चाहता है कि उस के मातापिता को इस दुख का सामना करना पड़े. अविनाश कभी लड़ कर तो कभी रो कर इस स्थिति को झेल रहा है.

वैवाहिक मामलों के सलाहकार सुभाष वधावन कहते हैं कि इस तरह की पत्नियों के पति यह शिकायत करते मिलते हैं कि उन की पत्नियां उन्हें सिर्फ एक लेबल की तरह इस्तेमाल करना चाहती हैं. पति के नाम के लेबल के नीचे वे कुछ भी कर के सुरक्षित बच निकलती हैं. इस तरह की पत्नियां अपने तौरतरीकों में किसी भी तरह का दखल पसंद नहीं करतीं. वे कहां जा रही हैं, कब लौटेंगी पूछना झगड़े की शुरुआत का कारण बन जाता है.

विवाह सलाहकार डा. राखी आनंद के अनुसार, ‘‘अकसर युवा पुरुष जो अपने कैरियर पर विशेषतौर पर ध्यान देते हैं, पत्नियों द्वारा थोपी जाने वाली लड़ाई से बचे रहना चाहते हैं. लेकिन कैरियर की सफलता पत्नी के रोज चढ़तेउतरते पारे की भेंट चढ़ जाती है.’’

हमारा सामाजिक परिवेश हमें यह सिखाता है कि पुरुषों को चुप रहना चाहिए तथा उन में सहनशीलता भी ज्यादा होनी चाहिए. लेकिन ऐसा होता नहीं है. इस का प्रभाव पुरुष के मानसिक संतुलन पर पड़ता है, जिस के कारण वह गहरी उदासी में डूब जाता है.’’

पत्नी अत्याचार के विरोध में मोरचा

पारिवारिक मामलों में स्त्रियों की गलती पुरुषों से ज्यादा होती है. पुरुष समझौता करना चाहता है. वह क्लेश से भी बचना चाहता है, लेकिन आतंकवादी किस्म की पत्नियां क्लेश को बनाए रखना पसंद करती हैं.

सभी महिलाएं या पत्नियां बुरी नहीं होतीं, लेकिन पतिपत्नी या पारिवारिक विवादों में पुरुषों की बात भी सुनी जानी चाहिए. सुधीर के अत्यधिक धार्मिक मातापिता ने जन्मपत्री अच्छी तरह मिलाने व सारे धार्मिक रीतिरिवाजों के अनुसार अपने बेटे की शादी की थी. शादी के बाद कुछ रातें होटल में ठहरी बहू ने घर जाने से साफ इनकार कर दिया. उस का कहना था कि वह संयुक्त परिवार की भीड़ का हिस्सा नहीं बन सकती. मजबूरन सुधीर को अपनी पत्नी को होटल से सीधे किराए पर लिए गए फ्लैट में ले जाना पड़ा.

अजीबोगरीब सवाल

सुधीर का कहना है कि आज भी उस की पत्नी को मेरा अपने मातापिता से मिलना पसंद नहीं. कभी भी दफ्तर से देरी होने पर उस के प्रश्न कुछ इस प्रकार होते है कि मां से मिल कर आए हो? मां को कितने पैसे दिए? मुझे पहले क्यों नहीं बताया?

इस तरह प्रताडि़त पतियों का कहना है कि इस तरह की पत्नियों के शारीरिक और मानसिक व्यवहार की कोई गारंटी नहीं होती. यह मत करो, वह मत करो से बात शुरू हो कर कहां खत्म होगी इस का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है.

ऐसी पत्नियां अपने पति के संबंध किसी के साथ भी जोड़ देती हैं, फिर चाहे वह भाभी हो या रिश्ते की बहन. पत्नी को ‘बैटर हाफ’ कहने वाले यह जानने की कोशिश अवश्य करें कि क्या वह वाकई बैटर कहलाने के काबिल है?

Festive Special: घर पर बनाएं Cheese बर्स्ट गार्लिक ब्रेड

Cheese आजकल के बच्चों को बेहद पसंद होता है. बच्चे ही नहीं बल्कि आज की यंग जेनेरेशन की भी पहली पसंद है Cheese. बाजार में आज चीज क्यूब्स, चीज स्लाइस, मोजरेला Cheese, प्रोसेस्ड चीज जैसे विविध प्रकार के चीज उपलब्ध है. इन्हें पिज्जा, पास्ता, बर्गर, लजानिया, ब्रेड आदि में उपयोग किया जाता है. इन विदेशी डिशेज के अतिरिक्त चीज से कटलेट, परांठा और कचौरी जैसी देशी डिशेज भी बड़ी आसानी से बनाई जातीं हैं. आज हम आपको  Cheese से ही बनने वाली गार्लिक ब्रेड को बड़े ही आसान स्टेप्स में बनाना बता रहे हैं जिसे आप घर में उपलब्ध सामग्री से बड़ी आसानी से बना सकतीं है. घर पर बनाने से ये बाजार से काफी कम कीमत वाली और हाइजिनिक भी रहती है. तो आइए देखते हैं कि इसे कैसे बनाते हैं-

कितने लोगों के लिए            4

बनने में लगने वाला समय      40मिनट

मील टाइप                            वेज

सामग्री(आटे के लिए)

मैदा                                   2 कप

पिघला मक्खन                    2 टीस्पून

एक्टिव ड्राय यीस्ट               1/2 टीस्पून

नमक                                1/4 टीस्पून

शकर                                  1 टीस्पून

पानी                                   2-3 कप

सामग्री(फिलिंग के लिए)

किसा मोजरेला चीज                1 कप

दूध                                         3 टीस्पून

लहसुन                                   4 कली

पिघला मक्खन                        1 टीस्पून

चिली फ्लैक्स                         1/4 टीस्पून

ऑरिगेनो                               1/4 टीस्पून

विधि

यीस्ट को 1 टेबलस्पून गुनगुने पानी में डालकर एक्टिव कर लें. अब मैदा में नमक, मक्खन, चीनी और एक्टिव किया यीस्ट  डालकर पानी की सहायता से रोटी जैसा नरम आटा गूंथकर क्लिंग फ़िल्म से रेप करके अथवा अच्छी तरह से ढककर किसी गर्म स्थान पर 2 घण्टे के लिए रख दें ताकि आटा फर्मेंट हो जाये.

अब फिलिंग तैयार करने के लिए चीज और दूध को अच्छी तरह मिला लें. इसे 3 मिनट माइक्रोवेब कर लें. अब फर्मेंट हो चुके आटे को हाथों पर हल्का सा बटर लगाकर अच्छी तरह मसलकर  दो भागों में बांट लें. बेलन से दोनों लोइयों को हल्का सा बेलकर अलग रख लें. ध्यान रखें कि इसे पतला नहीं बेलना है. अब दोनों रोटियों में कांटे से छेद करें ताकि बेक होते समय फूले नहीं.  बेकिंग तवे पर एक रोटी रखकर ऊपर से चीज वाला मिश्रण डालें और दूसरी रोटी  ऊपर से रखकर चारों तरफ से किनारों को अच्छी तरह से पैक कर दें. पिघले मक्खन में लहसुन, हरा धनिया और चिली फकेक्स मिलाकर  ऊपर वाली रोटी के ऊपर इसे ब्रश से अच्छी तरह से कोट कर दें. ओवन को 5 मिनट तक प्रीहीट करें और तैयार ब्रेड के तवे को रखकर 20 से 25 मिनट तक बेक करें. 25 मिनट के बाद निकालकर काटें और सर्व करें.

Festive Special: जब देना हो घर को फ्रैश लुक

त्योंहारों के मौके पर घर की सजावट करना हर महिला के लिए चुनौती भरा काम होता है, जिस के लिए बजट और समय दोनों का ध्यान रखना जरूरी होता है. शहरों में बढ़ती आबादी और जगह की कमी की वजह से घरों, फ्लैटों की सजावट करना आसान नहीं होता. ऐसे में पहले यह तय करना जरूरी है कि आप सजावट पर कितना खर्च करना चाहती हैं. केवल रंगबिरंगी दीवारों से ही घर खूबसूरत नहीं लगता, बल्कि घर में रखे सामान से भी उस की खूबसूरती निखरती है. कमरे का रंग या फर्नीचर की जगह बदल कर भी घर के लुक में परिवर्तन लाया जा सकता है. आजकल का ट्रैंड पारंपरिक होने के साथसाथ आधुनिक भी है, जिसे फ्यूजन कहा जाता है. इसे हर उम्र के लोग पसंद करते हैं. घर की सजावट के संबंध में मुंबई की एसएस प्रोजैक्ट कंसलटैंट्स की इंटीरियर डिजाइनर सोनाली मोहाडीकर, जो 10 सालों से इस क्षेत्र में काम कर रही हैं, कहती हैं कि आजकल घरों की साजसज्जा पर लोग खूब पैसा खर्च करना पसंद करते हैं. मध्यवर्गीय लोग भी इस में पैसा खर्च करने से नहीं कतराते.

घर को नया और फ्रैश लुक देने के लिए आजकल 3 तरीकों की सजावट फैशन में है:

ड्राई डैकोरेशन:

इस के अंतर्गत फूलों, बैंबो ट्रीज, स्टोंस, डैकोरेशन की वस्तुओं आदि का प्रयोग कर घर की सजावट की जाती है. यह सजावट पानी का प्रयोग किए बिना की जाती है और किसी त्योहार से 3-4 दिन पहले करनी सही रहती है.

इको फ्रैंडली सजावट:

इस का आजकल बहुत चलन है. इस में कागज, थर्मोकोल, प्लास्टिक, बोतल, कांच की बर्नी आदि से सजावट की जाती है. इन के अलावा अगर घर बड़ा है तो बड़ीबड़ी वाल हैं हैंगिंग्स, फ्लौवर पौट्स और लाइट्स के द्वारा सजावट की जाती है. भिन्नभिन्न प्रकार के लैंप शेड्स, मोमबत्तियों आदि का समावेश कर घर के फर्नीचर को ध्यान में रखते हुए मिक्स ऐंड मैच थीम भी लोकप्रिय है. मुंबई में अधिकतर लोग ड्राई थीम और इको फ्रैंडली थीम पर आधारित सजावट को पसंद करते हैं. यह सजावट घरों में ही नहीं वरन दफ्तरों में भी पसंद की जाती है. इस सजावट को पसंद करने का उद्देश्य इस का नैचुरल लुक का होना है. सोनाली बताती हैं कि आजकल फर्श के लुक में भी बदलाव आया है. इपोक्सी फ्लोरिंग ट्रैंड में है. ऐसे फर्श पर किसी भी प्रकार की सजावट अच्छी दिखती है. इस के अलावा कलर थीम भी कुछ लोग पसंद करते हैं. इस में किसी एक रंग से पूरे घर को सजाया जाता है. समुद्र थीम भी काफी लोकप्रिय है, जिस में आप घर बैठे समुद्र के तट का एहसास कर सकते हैं. आप को बजट और कमरे के आधार पर 1 सप्ताह पहले से सजावट की तैयारी शुरू करनी चाहिए ताकि त्योहार वाले दिन सजावट फ्रैश दिखे.

निम्न टिप्स के आधार पर आप खुद भी घर की सजावट कर सकती हैं:

रौ थीम को अपनाएं. इस में किचन में प्रयोग की जाने वाली छलनी, सूप, बर्नी, चम्मच आदि से दीवार के रंग के आधार पर मिक्स ऐंड मैच स्टाइल अपनाते हुए सजावट करें. मसलन, छलनी या सूप को रंग कर उस में दीया या कैंडल रख कर सजाएं.

हैंडमेड लैंप शेड, जिसे बच्चे अधिकतर स्कूलों में बनाते हैं, में बल्ब का प्रयोग कर किसी कोने में रखें. घर के कोने को हमेशा हाईलाइट करें.

कलर थीम के तहत फूल या कागज से कमरों को अलगअलग रंग से सजाएं. बच्चों के कमरे में गहरे रंग का प्रयोग करें, जबकि बैडरूम और ड्राइंगरूम में हलके रंग का.

बैडशीट्स और परदे भी सजावट के आधार पर ही रखें.

त्योहारों में रंगोली का खास महत्त्व होता है, जिसे कलरपेपर, रंग और फूलों से बनाया जाता है. पीकौक पैटर्न, फ्लौवर पैटल्स रंगोली, अल्पना, वुडेन रंगोली, फ्लोटिंग रंगोली, ग्लास रंगोली, संस्कार रंगोली आदि त्योहारों पर बनाई जा सकती हैं. इन के पर दीयों या कैंडल्स से सजावट कर सकती हैं.

शाम को आरोमा औयल वाली कैंडल्स जलाने से घर की शोभा और बढ़ जाती है.

कहती हैं कि इन सब में सब से जरूरी है साफसफाई, जो त्योहार से 10-15 दिन पहले कर लेनी चाहिए ताकि सजावट के समय आप अपना पूरा ध्यान उस पर केंद्रित कर सकें.

Festive Special: अपने अपने जज्बात- क्या हुआ था खलील साहब के साथ

रात साढ़े 11 बजे मोबाइल बज उठा.

‘‘हैलो, कौन?’’

‘‘जी, मैं खलील, अस्सलाम अलैकुम.’’

‘‘वालेकुम अस्सलाम,’’ उतनी ही गर्मजोशी से मैं ने जवाब दिया, ‘‘जी फरमाइए.’’

‘‘आप बेटी की शादी कब तक करेंगी?’’

‘‘फिलहाल तो वह बीएससी फाइनल की परीक्षा दे रही है. फिर बीएड करेगी. उस के बाद सोचूंगी,’’ इस के बाद दूसरी बातें होती रहीं. जेहन के किसी कोने में बीती बातें याद हो उठीं…

6 सालों से मैं खलील साहब को जानती हूं. खलील साहब रिटायर्ड इंजीनियर थे. अकसर अपनी बीवी के साथ शाम को टहलते हुए मिल जाते. हम तीनों की दोस्ती, दोस्ती का मतलब समझने वाले के लिए जिंदा मिसाल थी और खुद हमारे लिए बायसे फक्र.

हमारी दोस्ती की शुरुआत बड़े ही दिलचस्प अंदाज से हुई थी. मैं खलील साहब की पोती शिबा की क्लासटीचर थी. एक हफ्ते की उस की गैरहाजिरी ने मुझे उस के घर फोन करने को मजबूर किया. दूसरे दिन बच्ची के दादादादी यानी खलील साहब और उन की बेगम क्लास के सामने खड़े थे. देख कर पलभर के लिए मुझे हंसी आ गई. याद आ गया जब मैं स्कूल जाने लगी तो मेरे दादाजान पूरे 5 घंटे कभी स्कूल के कैंपस के चक्कर लगाते, कभी पीपल के साए तले गजलों की किताब पढ़ते.

दादी शिबा को बैग थमा कर क्लास में बैठने के लिए कह रही थीं लेकिन वह दादा की पैंट की जेब से चौकलेट निकाल रही थी.

‘बुखार, सर्दी, खांसी हो गई थी. इस वजह से हम ने शिबा को स्कूल नहीं भेजा था,’ दादी का प्यार टपटप टपक रहा था.

‘आज शाम आप क्या कर रही हैं?’ खलील साहब ने मुसकरा कर पूछा.

‘जी, कुछ खास नहीं,’ मैं ने अचकचाते हुए कहा.

‘तो फिर हमारे गरीबखाने पर आने की जहमत कीजिए न. आप की स्टूडैंट का बर्थडे है,’ बेगम खलील की मीठी जबान ने आकर्षित किया.

इस मुलाकात के बाद पिछले 6 सालों में हमारे बीच स्नेह की ढेरों कडि़यां जोड़ती चली गई हर एक मुलाकात.

खलील साहब अपने तीनों बेटों के पास 4-4 महीने रह कर रिटायर्ड लाइफ का पूरा मजा लेते हुए उन के बच्चों के साथ खेल कर खुद को नौजवान महसूस करते थे. वे अपनी बेगम से सिर्फ नींद के वक्त ही अलग होते बाकी का वक्त बेगम के आसपास रह कर गुजारते. दो जिस्म एक जां. पूरे 34 साल का लंबा दुर्गम जिंदगी का सफर तय करते हुए दोनों एकदूसरे की रगरग में समा गए थे. शीरीफरहाद, लैलामजनू जैसे जाने कितने नामों से उन की मुहब्बत पुकारी जाती.

जब भी शिबा के घर आते, उन दोनों की हर शाम मेरे नाम होती. बहुआयामी शख्सीयत के मालिक खलील साहब शायरी, गणित, सियासत, इंसानी जज्बात की बारीकी, फिल्म, क्रिकेट और न जाने किनकिन विषयों पर बातें करते. शाम की चाय के बाद मिशन रोड से वर्कशौप तक की सैर हमें एकदूसरे को नजदीक से समझने के मौके देती. रास्ते के किनारे लगे अमलतास और गुलमोहर के फूल भी हवा के साथ झूमते हुए हमारे बेबाक ठहाकों में शामिल होते.

‘मैडम, आप की खामोशमिजाजी और सोचसोच कर धीमेधीमे बोलने का अंदाज मैं भी सीखना चाहती हूं,’ हर वक्त बोलने वाली बेगम खलील फरमातीं तो मैं सकुचा जाती.

‘आप क्यों मुझे शर्मिंदा कर रही हैं. मैं तो खुद आप की खुशमिजाजी और खलील साहब से आप की बेपनाह मुहब्बत, आप का समझौतावादी मिजाज देख कर आप की कायल हो गई हूं. किताबी इल्म डिगरियां देता है मगर दुनियाबी इल्म ही इंसानी सोच की महीन सी झीनीझीनी चादर बुनना सिखा सकता है.’

मेरी ये बातें सुन कर बेगम खलील मुझे गले लगा कर बोलीं, ‘सच शम्मी, खलील साहब के बाद तुम ने मुझे समझा. बहुत शुक्रगुजार हूं तुम्हारी.’

पूरे 4 साल इसी तरह मिलतेजुलते, मुहब्बतें लुटाते कब बीत गए, पता ही नहीं चला. वक्त ने खलील दंपती के साथ दोस्ती का तोहफा मेरी झोली में डाल दिया जिस की खुशबू से मैं हर वक्त खुशी से भरीभरी रहती.

उस दिन पौधों को पानी देने के लिए बगीचे में जा रही थी कि शिबा के अब्बू को बदहवासी से गेट खेलते पाया. उन का धुआंधुआं चेहरा देख कर किसी अनहोनी की आशंका होने लगी. मुझे देखते ही वे भरभरा कर ढह से गए. मुश्किल से उन के हलक से निकला, ‘मैडम, अम्माजान…’

यकीन नहीं आया, पिछले हफ्ते ही तो खलील साहब के साथ जबलपुर गई थीं, एकदम तंदुरुस्त, हट्टीकट्टी.

दर्द और आंसुओं के साए में पूरे 40 दिन बिता कर शिबा के अब्बू खलील साहब को अपने साथ ले आए थे. मुझ में हिम्मत नहीं थी कि मैं उन का सामना कर सकूं. दो हंस मोती चुगते हुए, अचानक एक हंस छटपटा कर दम तोड़ दे तो दूसरा…पत्थर, आंखें पत्थर. आंसू पत्थर, आहें पत्थर इस भूचाल को कैसे झेल पाएंगे खलील साहब? पिछले 35 साल एक लमहा जिस के बिना नहीं गुजरा, उस से हमेशा के लिए जुदाई कैसे सहेंगे वे?

खलील साहब से सामना हुआ, आंसू सूखे, शब्द गुम, आवाज बंद. पहाड़ से हट्टेकट्टे शख्स 40 दिनों में ही बरसों के बीमार लगने लगे. दाढ़ी और भौंहों के बाल झक सफेद हो गए थे. कमर से 45 डिगरी झुक गए थे. पपड़ाए होंठों पर फैला लंबी खामोशी का सन्नाटा. कुछ कहने और सुनने के लिए बाकी नहीं रहा था. काफी देर तक मैं खलील साहब को दर्द की भट्ठी में चुपचाप, बेबसी से जलता हुआ देखती रही.

स्कूल से लौटते हुए रोज खलील साहब की खैरियत जानने के लिए शिबा के घर जाना मेरी दिनचर्या में शामिल हो गया. सिनेमा, टीवी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गहरी दिलचस्पी रखने वाले खलील साहब पाबंदी से इबादत करने लगे थे. मुझे देख कर बरामदे में आ कर बैठते, चुप, बिलकुल चुप.

महीनों बाद खलील साहब ने धीरेधीरे मरहूम बीवी की खूबसूरत यादों की किताब का एकएक सफा खोलना शुरू किया. गुजरे हसीन लमहों की यादें, उन की आंखों में समंदर उतार लातीं, कतराकतरा दाढ़ी भरे गालों से फिसल कर सफेद झक कुरते का दामन भिगोने लगते. शिबा की अम्मी कौफी का प्याला थमाते हुए याचनाभरी निगाहों से मुझे देखतीं, ‘आंटी, आप प्लीज रोज आया कीजिए. अब्बू अम्मी की जुदाई का गम बरदाश्त नहीं कर पाए तो…’

अब खलील साहब पोती को छोड़ने के लिए स्कूल आने लगे थे. दोपहर को बाजार भी हो आते और कभीकभी किचन के काम में हाथ बंटाने लगे थे बहू का. शिबा के अब्बू रोज शाम अपने अब्बू को टहलने के लिए साथ ले जाया करते.

उस दिन स्कूल बंद होने से शिबा की अम्मी का फोन आया, ‘मैडम, स्कूल छूटते ही घर आइएगा, प्लीज.’

‘मगर क्यों?’ मैं ने विस्मय से पूछा.

‘आज सुबह से अब्बू बिस्तर पर पड़ेपड़े रो रहे हैं.’

‘क्यों रो रहे हैं?’

‘आज पूरे 3 महीने हो गए अम्मी की मृत्यु को.’

‘ओह,’ आज का दिन खलील साहब के लिए काफी गमगीन साबित हो रहा होगा.

घर जा कर मैं ने धीरे से आवाज लगाई, ‘खलील साहब,’ मेरी आवाज सुन कर थोड़ा सा कसमसाए, फिर मेरा खयाल करते हुए उठ कर बैठने की कोशिश करने लगे. मैं ने उन्हें थाम कर फिर लिटा दिया और उन के पास बैठ गई. बिस्तर की सिलवटें खलील साहब की बेचैनी की दास्तान बयान कर रही थीं. सफेद झक तकिए पर आंसुओं के निशान वफादारी की गजल लिख गए थे. मुझे देखते ही बेसाख्ता रो पड़े खलील साहब. मैं ने धीरे से उन के पैरों पर हथेली रख कर कहा, ‘खलील साहब, आप मर्द हो कर बीवी की याद में इतना रो रहे हैं. मुझे देखिए, मैं औरत हो कर भी अपनी पलकें भिगोने की सोच भी नहीं सकी.’

‘तो क्या आप के शौहर…?’

‘जी, 5 साल हो गए.’

‘लेकिन आप ने पहले कभी बताया नहीं.’

‘जी, मैं आप के मुहब्बतभरे सुनहरे पलों को अपना गमगीन किस्सा सुना कर बरबाद नहीं करना चाहती थी. शौहर ने 2 बच्चों की जिम्मेदारी मुझ पर छोड़ी है. उस को पूरा करने की जद्दोजहद में मैं अपने अकेले होने के दर्द को आंखों के रास्ते भी न बहा सकी. कितना मुश्किल होता है खलील साहब, खुद पर काबू रख कर बच्चों के आंसू पोंछना. घर की हर चीज में उन का साया नजर आता है, उन का वजूद हर वक्त मेरे आसपास रहता है. कैसे खुद को बहलाती हूं, यह मेरा दिल ही जानता है. अगर मैं भी आप की तरह रोती रहती तो क्या नौकरी, घर, और बच्चों की जिम्मेदारी उठा पाती? कितनी मुश्किल से उन के बगैर जीने का हौसला बनाया है मैं ने, खलील साहब,’ शौहर की जुदाई का दर्द मेरी आंखों में समा गया.

खलील साहब बिस्तर पर ही टिक कर बैठ गए और मुझे अपलक हैरतभरी निगाहों से देखते रहे.

धीरेधीरे हिम्मत कर के उठे, मेरे सिर पर हाथ रखा और बाथरूम की तरफ बढ़ गए. बाथरूम में से निकले तो बाहर जाने के लिए तैयार थे. मैं ने दिल ही दिल में       राहत की सांस ली और अपने घर की तरफ जाने वाली सड़क की तरफ मुड़ गई.

दूसरे का दर्द कम करने की इंसान पूरी कोशिश करता है, हमदर्दीभरे शब्द दूसरों से नजदीकियां बढ़ा देते हैं मगर वह खुद अपने से दूर चला जाता है. पिछले कई महीनों से मैं बिलकुल भूल गई थी कि शौहर की असामयिक मौत, 2 बच्चों की पूरी जिम्मेदारी, दूसरी जरूरतों की लंबी फेहरिस्त मेरी छोटी सी तनख्वाह कैसे पूरी कर पाएगी. मेरे आत्मविश्वास का पहाड़ धीरेधीरे पिघल रहा था मेरी मजबूरियों की आंच में. कैसे सामना कर सकूंगी अकेली जीवन के इस भीषण झंझावात का. पके फोड़े पर कोई सूई चुभा दे, सारा मवाद बाहर आ जाए. ऐसा कोई शख्स नहीं था मेरे आसपास जिस के सामने बैठ कर अपने अंदर उठते तूफान का जिक्र कर के राहत महसूस करती. मेरे साथ थी तो बस बेबसी, घुटन, छटपटाहट और समाज की नजरों में अपनी खुद्दारी व अहं को सब से ऊपर रखने के लिए जबरदस्ती होंठों से चिपकाई लंबी चुप्पी.

खलील साहब की स्थिति मुझ से बेहतर है. कम से कम अपनी शरीकेहयात की जुदाई का दर्द वे रिश्तेदारों, दोस्तों के सामने बयान कर के अपनी घुटन और चुभन को कम तो कर लेते हैं. मैं कहां जाती? बस, तिलतिल कर यों ही रात के वीराने में चुपचाप जलना मेरी मजबूरी है.

खलील साहब अब सामान्य होने लगे थे. पैंशन के सिलसिले में उन्हें जबलपुर वापस जाना पड़ा. अकसर फोन पर बातें होती रहतीं. अब उन की आवाज में उमड़ते बादलों का कंपन नहीं था, बल्कि हवाओं की ठंडक सा ठहराव था. जान कर सुकून मिला कि अब उन्होंने लिखनापढ़ना, दोस्तों से मिलनाजुलना भी शुरू कर दिया है.

कुछ दिनों के बाद शिबा के अब्बू का ट्रांसफर आगरा हो गया. मैं अपनी जिम्मेदारियों में उलझी बीमार रहने लगी थी. चैकअप के लिए आगरा गई तो स्टेशन पर शिबा के अब्बू से मुलाकात हो गई. इच्छा जाहिर कर के वे मुझे अपने घर ले गए. शिबा मुझ से लिपट गई और जल्दीजल्दी अपनी प्रोग्रैस रिपोर्ट और नई बनाई गई ड्राईंग, नई खरीदी गई जींस टौप, दिखाने लगी. सर्दी की शामों में सूरज बहुत जल्दी क्षितिज में समा जाता है. मैं वापसी की तैयारी कर रही थी कि कौलबैल बज उठी, दरवाजा खुला तो एक बेलौस ठहाका सर्द हवा के झोंके के साथ कमरे में घुस आया. खलील साहब कोटपैंट और मफलर में लदेफंदे आंखों पर फोटोक्रोमिक फ्रेम का चश्मा लगाए सूटकेस लिए दरवाजे के बीचोंबीच खड़े थे.

‘ओ हो, खलील साहब, आप तो बहुत स्मार्ट लग रहे हैं,’ मेरे मुंह से एकाएक निकल गया.

यह सुन कर शिबा की मम्मी होंठों ही होंठों में मुसकराईं.

‘आप की तबीयत खराब है और आप ने खबर तक नहीं दी. यह तो दोस्ताना रिश्तों की तौहीन है,’ खलील साहब ने अधिकारपूर्वक कहा.

‘खलील साहब, यह दर्द, यह बीमारी, बस यही तो मेरी अपनी है. इसे भी बांट दूंगी तो मेरे पास क्या रह जाएगा जीने के लिए,’ मैं कहते हुए हंस पड़ी लेकिन खलील साहब गंभीर हो गए.

स्टेशन तक छोड़ने के लिए खलील साहब भी आए. स्वभावतया बच्चों की पढ़ाई और दूसरे मसलों पर बात करने लगे. ट्रेन आने का एनाउंसमैंट होते ही कुछ बेचैन नजर आने लगे.

‘मैडम, मैं आप से कुछ कहना चाहता हूं, मगर न तो शब्द साथ दे रहे हैं, न जबान.’

‘65 साल के व्यक्ति को अपनी बात कहने में झिझक हो रही है,’ मैं हंस पड़ी.

ट्रेन आ गई, सामान रख कर मैं खिड़की से टिकी.

‘आप मुझ से शादी करेंगी?’

यह सुन कर क्षणभर को मैं अवाक् रह गई पर उन के मजाकिया स्वभाव से चिरपरिचित होने के कारण बेतहाशा हंस पड़ी. ट्रेन चल पड़ी और मुझे हंसता देख खलील साहब के चेहरे का रंग उड़ने लगा. ट्रेन ने प्लेटफौर्म छोड़ दिया मगर खलील साहब देर तक खड़े हाथ हिलाते रहे. खलील साहब के प्रपोजल को मैं ने मजाक में लिया.

आगरा से लौट कर मैं व्यस्त हो गई और खलील साहब के प्रपोजल को लगभग भूल ही गई. इस बीच, बेटे की नौकरी लग गई और बेटी ग्रेजुएशन करने लगी.

आज खलील साहब के टैलीफोन ने ठहरे हुए पानी में पत्थर फेंका. बीते वक्त की सब परतें खुल कर सामने आ गईं. उन की खनकती आवाज फिर मेरे कानों के रास्ते जेहन को खुरचने लगी.

‘‘ये तो बहुत लंबा वक्त हो जाएगा.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘दरअसल, आप ने कहा था कि मैं लिखनेपढ़ने में दिल लगाऊं. मैं ने मैथ्स का एक पेपर तैयार कर के अमेरिका भेजा था. वह सलैक्ट हो गया है. मुझे अमेरिका बुलाया गया है कौन्फ्रैंस में पेपर पढ़ने के लिए. मैं ने अपने साथ आप का नाम भी दे दिया है वीजा के लिए.’’

‘‘लेकिन मैं आप के साथ कैसे जा सकती हूं और आप ने अपने साथ मेरा नाम क्यों दिया?’’ मैं बौखलाई.

‘‘बाकायदा शादी कर के, लीगल तरीके से,’’ उन की आवाज में वही बर्फानी ठंडक थी.

मगर मेरे जेहन में अलाव दहकने लगे. उम्र के आखिरी पड़ाव में खलील साहब को शादी की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या जिस्मानी जरूरत के लिए? या किसी महिला के साथ दुखसुख बांटने के लिए? या बच्चों के तल्ख रवैये से खुद को अलग कर सहारा तलाशने के लिए? या तनहाई की सुलगती भट्ठी की आंच से खुद को बचाने के लिए? किसलिए शादी करना चाहते हैं? हजारों सवाल एकदूसरे में गुत्थमगुत्था होने लगे.

‘‘माफ कीजिएगा खलील साहब, अभी मेरी जिम्मेदारियां पूरी नहीं हुईं.’’

‘‘मैं यही तो चाहता हूं कि आप की तमाम जिम्मेदारियां, तमाम फर्ज हम दोनों साथ मिल कर निभाएं.’’

‘‘लेकिन खलील साहब, जिंदगी के 25 साल तनहा रह कर सारी मुसीबतें झेली हैं. इस उम्र में शादी का फैसला मुझे समाज में रहने लायक न छोड़ेगा.’’

‘‘आप जैसी बोल्ड लेडी समाज और बच्चों से डरती हैं. जिम्मेदारी की आड़ में अपनी जरूरतों, अपनी ख्वाहिशों का हर पल गला घोंटती हैं. क्यों कतरा रही हैं आप अपनेआप से?’’ खलील साहब की आवाज में चुनौती की तीखी चुभन थी, ‘‘मेरा फैसला गलत नहीं है, मैडम, आप ऐसा कह कर मेरे जज्बातों का मजाक उड़ा रही हैं,’’ उन की आवाज का खुरदरापन मुझे छीलने लगा.

‘‘खलील साहब, अगर आप इजाजत दें तो मैं किसी जरूरतमंद खातून की तलाश करूं जो हर लिहाज से आप के माकूल हो?’’

‘‘दूसरी खातून क्यों? आप क्यों नहीं?’’ मेरी बीवी की मौत से पहले और मौत के बाद आप ने मुझे जितना समझा उतना एक गैर औरत समझ पाएगी भला?’’

‘‘लेकिन आप मुझे नहीं समझ पाए, खलील साहब. मैं जानती हूं आप किसी से भी निकाह कर लें आप कभी भी उसे अपनी पहली बीवी का मकाम नहीं दे पाएंगे. उस की खासीयत में आप अपनी पहली बीवी की खूबियां ढूंढ़ेंगे. नहीं मिलने पर उस की खूबियां भी आप को कमियां लगेंगी. जरूरत की मजबूरी में किसी के साथ दिन गुजारना और सहज रूप से बगर्ज हो कर किसी के साथ जिंदगी बिताने में बड़ा फर्क होता है. और जिंदगी के उतारचढ़ाव, हालात के थपेड़ों ने मुझ में इतना ठहराव, हिम्मत और हौसला भर दिया है कि अब मुझे किसी सहारे की जरूरत नहीं, बल्कि मैं अपने चांदी होते बालों का तजरबा बांट कर टूटे हुए लोगों को संबल दे कर सुकून हासिल करना  चाहती हूं. मैं ने अपनी जरूरतों को खुद पर हावी नहीं होने दिया, मैं जिंदगी को अकेले ही खुशगवार बनाने के लिए सांस के आखिरी लमहे तक कोशिशमंद रहूंगी.’’

‘‘आप की यह सोच ही तो मेरे दिलोदिमाग के अंधेरे को मिटा कर मुझे रोशनी देगी. जिंदगी के कुछ बचे लमहों को किसी मकसद के लिए जीने की राह दिखाएगी. मैं अब अपने लिए नहीं आप के और आप के बच्चों के लिए जीना चाहता हूं, क्या अब भी आप का जवाब नहीं में होगा?’’

‘‘यकीनन, न में होगा, खलील साहब, मैं आप के खयालात की कद्र करती हूं, आप के जज्बातों का दिल से एहतराम करती हूं मगर दोस्त की हैसियत से. दुनिया के तमाम रिश्तों से अफजल दोस्ती का निस्वार्थ रिश्ता हमारी सांसों को खुशनुमा जिंदगी की महक से भर देगा और हमें टूटे, बिखरे, भटके लोगों को जिंदगी के करीब लाने की कोशिश करने का हौसला देगा.’’

दूसरी तरफ से खलील साहब की हिचकियों की मद्धम आवाज सीने में उतरती चली गई और मैं ने मोबाइल बंद कर के बोतलभर पानी गटगट कलेजे में उतार लिया.

क्या मर्द इतना निरीह, इतना कमजोर हो जाता है. पैदा होने से ले कर मरने तक मां, बहन, बीवी, बेटी के सहारे अपने दर्दोगम भुलाना चाहता है. क्यों नहीं जी सकता अपनी पूरी संपूर्णता के सहारे, अकेले.

6 महीने के बाद शिबा के पापा का फोन आया था, उन के शब्द थे कि अब्बू की दिनचर्चा ही बदल गई है. दिन के वक्त चैरिटी स्कूल में पढ़ाते हैं, शाम को मरीजों की खैरियत पूछने अस्पताल जाते हैं और दोपहर को एक वृद्धाश्रम की बिल्ंिडग बनवाने की कार्यवाही पूरी करने में गुजारते हैं.

जानें बालों की देखभाल से जुड़े 6 मिथक

अकसर बालों को ले कर तरहतरह के मिथक सुनने को मिलते हैं जैसेकि शैंपू बदलने से बाल स्वस्थ रहते हैं, सफेद बाल तोड़ने पर वहां के और भी बाल सफेद हो जाते हैं आदि. जबकि हकीकत कुछ और ही होती है. आइए जानते हैं कि बालों को ले कर और क्याक्या मिथक हैं और उन की हकीकत क्या है :

मिथक : बालों की नियमित कटाई से वे जल्दी बढ़ते हैं.

सच्चाई : विशेषज्ञों का मानना है कि बाल प्रति महीने 1/2 इंच बढ़ते हैं, फिर चाहे आप बालों को कटवाएं या नहीं. बाल गरमी के मौसम में ज्यादा बढ़ते हैं. इन का कटवाने से कोई लेनादेना नहीं. विशेषज्ञ हर 6 से 8 हफ्तों में बाल काटने की सलाह देते हैं ताकि उन्हें दोमुंहा होने से बचाया जा सके.

मिथक : अच्छे बाल पाने के लिए अच्छे तरीके से शैंपू करना जरूरी है.

सच्चाई : सही तरह से शैंपू करना बालों के लिए जरूरी है, जबकि बहुत ज्यादा शैंपू करने से बालों की नमी चली जाती है, जिस से वे रूखे हो जाते हैं.

मिथक : शैंपू बदलने से बाल स्वस्थ रहते हैं.

सच्चाई : आप चाहें तो तरहतरह के शैंपू इस्तेमाल कर सकती हैं जैसे रूसी को रोकने या घनेपन के लिए, पर यह काम पहले वाला शैंपू भी करता है जब आप उस का नियमित प्रयोग करती हैं.

मिथक : एक सफेद बाल तोड़ने से वहां के और बाल भी सफेद हो जाते हैं.

सच्चाई : यह आधारहीन मिथक है. हां, सफेद बाल तोड़ना बुरी आदत जरूर है. बाल तोड़ने से उन की जड़ों को नुकसान पहुंचता है. ऐलर्जी भी हो सकती है. इस से बाल कमजोर हो जाते हैं और दोबारा नहीं उगते. अत: बालों को स्वस्थ रखने के लिए उन से सौम्य तरीके से व्यवहार करें.

मिथक : रोजाना बालों को सौ बार कंघी करनी चाहिए.

सच्चाई : बालों को चाहे जितनी भी कंघी करें कोई फायदा नहीं. इस से उन के अच्छे होने के बजाय क्षति ही पहुंचती है. कंघी केवल बालों को संवारने के लिए की जाती है, क्योंकि ब्रशिंग बालों को उन के रोम से बाहर खींचती है और उपत्वचा को कमजोर करती है. ज्यादा कंघी करने से बाल कमजोर हो जाते हैं. यदि आप के बाल गांठदार हों तो चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करें.

मिथक : यदि बाल तैलीय हों तो तेल नहीं लगाना चाहिए.

सच्चाई : यह बिलकुल गलत है. बालों में निरंतर तेल लगाने से सूखे बालों को पोषण मिलता है. तेल बालों की उपत्वचा में आसानी से समा जाता है और उन्हें जड़ से सिरे तक स्वस्थ बनाता है. जब बालों में तेल लगाएं तो अच्छी तरह मसाज करें. इस से बालों में प्रवाह अच्छा होता है और वे कोमल हो जाते हैं.

सलाह

यदि आप के बाल झड़ रहे हों तो इस का कारण आप का गलत हेयरस्टाइल हो सकता

है जैसे कि

– तंग चोटी बांधना,

– वेव्स और पोनीटेल की वजह से लंबे समय तक बालों को नुकसान पहुंचता है. अत: बालों

को टूटने तथा कमजोर होने से बचाने के लिए तंग बैंड या क्लिप न लगाएं.

कंडीशनिंग व पोषण

लंबे बालों की नींव स्वस्थ स्कैल्प होती है. स्कैल्प को साफ रखना और गहरी कंडीशनिंग करना बालों को तेजी से बढ़ने के लिए महत्त्वपूर्ण है. गंदी और तैलीय स्कैल्प रूसी, ऐलर्जी, खुजली को बढ़ावा देती है, जो बालों के झड़ने का कारण बनती है.

गंजापन रोकने और लंबेघने बालों के लिए उन्हें धोने के बाद लटों को जैतून, अरंडी या और्गन के तेल से मौइश्चराइज करें.

बालों को रूखा और दोमुंहा होने से बचाने के लिए इन तेलों से अच्छी तरह स्कैल्प और लटों की मसाज करें.

अहम सलाह

– बालों को रोज नहीं धोएं. 2-3 दिन में 1 बार धोएं. निरंतर धोने से बालों का प्राकृतिक तेल लटों और स्कैल्प से निकल जाता है, जो उन्हें चमकदार और स्वस्थ रखता है.

– यदि आप अधिक मात्रा में कैमिकल युक्त शैंपू या कंडीशनर इस्तेमाल करती हैं, तो उन्हें तुरंत बंद कर दें. बाजार में मिलने वाले लगभग हर कौस्मैटिक में सस्ते और खतरनाक कैमिकल सोडियम लोरियल सल्फेट का इस्तेमाल होता है.

– कंघी या ब्रश का साफ होना बेहद जरूरी है. गंदे ब्रश में कीटाणु तथा जीवाणु पनपते हैं. कंघी या ब्रश करने के बाद उस में फंसे बालों को तुरंत निकाल दें तथा महीने में 1 बार उस की गहराई से सफाई करें.

– सूखी लटों से ज्यादा नम लटों को देखभाल की जरूरत होती है. गीले बालों की उपत्वचा नाजुक होती है और गीले बालों को कंघी करने से वे आसानी से उखड़ जाते हैं. इन्हें ज्यादा सतर्क हाथों की जरूरत होती है. गीले बालों को ब्रश करने के बजाय उन्हें धोने से पहले कंघी करना ज्यादा उचित है. गीले बालों में चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करें. सूखे बालों पर ब्रश करें. बालों को नुकसान से बचाने के लिए लटों को सिरे की तरफ से छुड़ाना चाहिए न कि जड़ों की तरफ से.

– हेयर स्टाइलिंग उपकरण जैसे ड्रायर, स्ट्रेटनर, कर्ल्स आदि लटों को जला देते हैं. ये न केवल बालों में रूखापन लाते हैं, बल्कि उन्हें पतला भी कर देते हैं. अत: बालों को नुकसान से बचाए रखने के लिए इन चीजों का जितना हो सके कम ही प्रयोग करें.

(लेखक – अमित शारदा, एम.डी., सनफ्लौवर इमेज)

बुद्धू: अनिल को क्या पता चला था

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ज्यादा एक्सरसाइज करना आपके दिल की हेल्थ को पहुंचा सकता है नुकसान, पढ़ें खबर

जब एक्सरसाइज करने की बात आती है तो हम अपने शरीर और दिमाग पर एक गतिहीन जीवन शैली के नकारात्मक प्रभावों के बारे में बहुत कुछ सुनते है. लेकिन अत्यधिक एक्सरसाइज? “बहुत ज्यादा बहुत बुरा है,” और यह एक्सरसाइज के लिए भी सच है. जबकि कम एक्सरसाइज  भी एक गंभीर समस्या है, यह एक्सरसाइज का दूसरा पहलू भी है, जो अधिक एक्सरसाइज के साथ आता है. डॉ. सुब्रत अखौरी, निदेशक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी एशियन हॉस्पिटल फरीदाबाद का कहना है- एक्सरसाइज, जब सही तरीके से किया जाता है, तो हमारे शरीर के लिए कई लाभ होते हैं – रक्त परिसंचरण में सुधार और आपके लसीका तंत्र को उत्तेजित करता है, हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता हैं. लेकिन यहां, हमें ‘पर्याप्त’ शब्द पर ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि अधिक प्रशिक्षण आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को पंगु बना सकता है और आपके दिल को तनाव में डाल सकता है.

एक अध्ययन से पता चला है कि बहुत अधिक एक्सरसाइज आपके हृदय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.

इससे पता चलता है कि जो लोग लंबे समय तक उच्च-तीव्रता वाले वर्कआउट में शामिल थे, उन्हें मध्य आयु तक पहुंचने तक कोरोनरी धमनी कैल्सीफिकेशन (CAC) विकसित होने का खतरा था. यह बताता है कि इतने सारे युवा और मध्यम आयु वर्ग के फिटनेस उत्साही अचानक दिल के दौरे से क्यों मर रहे हैं. जहां पर्याप्त एक्सरसाइज हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, वहीं अति-एक्सरसाइज आपके हृदय पर पूरी तरह से नकारात्मक प्रभाव डालता है.

जब आपके पास अपने स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त समय नहीं है तो आप अपने शरीर के सबसे अच्छे होने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?  आज बहुत से युवा अति-प्रशिक्षण और कम खाने के प्रति जुनूनी हैं जो उनके शरीर को और अधिक क्षति पहुँचाता है.

नियमित एक्सरसाइज हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी है. हमारे शरीर के लिए इसके अनगिनत लाभ हैं –

फिटनेस के स्तर को बढ़ाता है, और हमारे हृदय स्वास्थ्य में सुधार के अलावा स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है. इसके अलावा, यह हमारे मूड को को अच्छा करता है, नींद में सुधार करता है और हमारे दैनिक जीवन में तनाव को कम करता है. और इन सबसे बढ़कर यह हमारे शरीर को शेप में रखने का काम करता है.

बहुत अधिक एक्सरसाइज कितना है? यह एक ऐसा प्रश्न है जो कभी कभी एक्सरसाइज करने वालों और एथलीटों जैसे के मन में समान रूप से रहता है. हालांकि, ऐसा कोई एक उत्तर नहीं है जो सभी के लिए उपयुक्त हो. जो एक के लिए पर्याप्त हो, वह दूसरे के लिए नहीं हो सकता है. तो, आप कैसे जाने हैं कि आप सही दिशा में जा रहे हैं? कुछ संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए.

सबसे पहले, अपनी हृदय गति पर कड़ी नज़र रखें –

यदि यह आराम करते समय भी सामान्य से अधिक है, तो यह एक संकेत है कि आपको ध्यानकरने की आवश्यकता है. इसके बाद, अपने हृदय गति परिवर्तनशीलता (एचआरवी) की निगरानी करें. यह प्रत्येक दिल की धड़कन के बीच के समय का एक माप है और आपके दिल के समग्र स्वास्थ्य को दर्शाता है

कम एचआरवी का मतलब है कि आपका दिल एक्सरसाइज से स्वस्थ नहीं हो पा रहा है जिससे आगे समस्याएं हो सकती हैं. अपने शरीर पर ध्यान दे, यदि आप अत्यधिक थका हुआ या असामान्य रूप से बीमार महसूस करते हैं, तो अपना एक्सरसाइज कम करें और अपने शरीर को ठीक होने दें.

बहुत अधिक एक्सरसाइज आपके दिल को तनाव में डाल सकता है –

तीव्र एक्सरसाइज आपके हृदय गति को बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप तनाव हार्मोन का स्राव होता है जिसके परिणामस्वरूप दिल का दौरा और हृदय गति रुकने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, यदि आप हृदय रोग से पीड़ित हैं, तो बहुत अधिक एक्सरसाइज आपके लक्षणों और प्रभावी उपचारों को खराब कर सकता है. इसके अलावा, अति-एक्सरसाइज करने से अनियमित दिल की धड़कन तेज  होने का खतरा बढ़ सकता है, जो घातक हो सकता है. इसलिए, किसी भी नए एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है.

एक्सरसाइज और आराम- स्वस्थ संतुलन बनाए रखें

हम सभी नियमित एक्सरसाइज के स्वास्थ्य लाभों से सहमत हैं, यह भी महत्वपूर्ण है कि आप अपने शरीर को आराम देने   के लिए समय निकालें. अपने एक्सरसाइज दिनचर्या के साथ ओवरबोर्ड जाने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. एक्सरसाइज और आराम के बीच स्वस्थ संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ सुझाव है

  • अपने शरीर को स्वस्थ रखने लिए अपने एक्सरसाइज दिनचर्या से कम से कम एक दिन की छुट्टी लें.
  • अपने आप को कगार पर न धकेलें. यदि आप थकावट महसूस करते हैं, तो कुछ दिनों के लिए ब्रेक लेना आपके शरीर के लिए अच्छा हो सकता है.
  • एक्सरसाइज के दौरान अपनी हृदय गति और एचआरवी पर नजर रखें. अगर आपको सांस लेने में तकलीफ या सीने में किसी प्रकार का दर्द महसूस होता है, तो यह एक संकेत है कि आपको ब्रेक लेने की जरूरत है.

एक्सरसाइज और आराम के बीच सही संतुलन खोजना हर किसी के लिए अलग होता है लेकिन ये टिप्स आपको स्वस्थ रहने और अधिक एक्सरसाइज से बचने में मदद कर सकते हैं.

 मुख्य बात

एक नियमित एक्सरसाइज दिनचर्या आपके हृदय स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाती है, इसका बहुत अधिक वास्तव में अच्छे से अधिक नुकसान कर सकता है. यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि आपको फिट रहने के लिए सही मात्रा में एक्सरसाइज की आवश्यकता है या आप अपने हृदय स्वास्थ्य को ट्रैक करना चाहते हैं और समय के साथ बदलाव देखना चाहते हैं, तो नियमित रूप से इसकी निगरानी करने पर विचार करें. यह न केवल आपको वर्कआउट करते समय सुरक्षित रहने में मदद करेगा बल्कि आपके संपूर्ण हृदय स्वास्थ्य पर विभिन्न प्रकार के एक्सरसाइज के प्रभाव को समझने में भी आपकी मदद करेगा.

GHKKPM: विराट को गोली लगते ही लोगों का फूटा गुस्सा, मेकर्स की लगाई क्लास

स्टार प्लस के सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी अक्सर दर्शकों के निशाने पर आ जाती है. जहां सरोगेसी ट्रैक के चलते फैंस ने पाखी और विराट के किरदारों की धज्जियां उड़ाई थीं तो वहीं अब अपकमिंग ट्रैक का प्रोमो देखकर फैंस के बीच एक बार फिर मेकर्स के लिए गुस्सा बढ़ गया है और सोशलमीडिया पर वह ट्रोलिंग के शिकार हो रहे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

विराट को लगेगी गोली

 

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सीरियल में लीप के बाद इन दिनों विनायक के इलाज के लिए सई और विराट एक बार फिर साथ दिख रहे हैं. हालांकि सई, विराट से सवि की सच्चाई छिपाने की कोशिश करती दिख रही हैं. हालांकि नए प्रोमो में विराट को जहां सवि के बेटी होने का सच पता चलेगा तो वहीं विराट को इसी दौरान गोली लग जाएगी. दरअसल, गुलाबराव के आदमी सई और विराट पर हमला करेंगे. जहां वह सवि को गोली मारने वाले होंगे तो सई, विराट से सवि को बचाने के लिए कहेगी, जिसके चलते विराट को गोली लग जाएगी.

यूजर्स ने लगाई विराट की क्लास

गोली लगने का प्रोमो देखते ही सोशलमीडिया पर खबरें जोरों पर हैं कि विराट की मौत हो जाएगी, जिसके चलते फैंस का एक बार फिर गुस्सा दिख रहा है. दरअसल, इस नए ट्रैक का प्रोमो देखकर विराट का किरदार एक बार फिर ट्रोलिंग का शिकार हो गया है. दरअसल, फैंस का कहना है कि मेकर्स दर्शकों को बेवकूफ बना रहे हैं क्योंकि विराट को कुछ भी नहीं होने वाला है. वहीं एक यूजर ने लिखा कि हमारी इतनी अच्छी किस्मत कहां…. ये पनौती यानी विराट खुद तो मरेगा नहीं बल्कि ये तो दूसरों को मरवाएगा.

नए ट्रैक में होगा हंगामा


एक तरफ जहां अपकमिंग एपिसोड में विराट को सवि का सच पता लग जाएगा तो वहीं सई, विनायक को ठीक करेगी. इसके अलावा खबरों की मानें तो फेस्टिव सीजन में एक बार फिर चौह्वाण निवास में एंट्री करती हुई दिखने वाली हैं.

TMKOC: नए तारक मेहता के रोल में दिखे सचिन श्रॉफ, प्रोमो में दिखा फैंस का रिएक्शन

टीवी के फेवरेट शोज में से एक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (TMKOC) इन दिनों सुर्खियों में हैं. जहां दर्शक दयाबेन और तारक मेहता की शो में दोबारा एंट्री का इंतजार कर रहे हैं तो वहीं शो का लेटेस्ट प्रोमो देखकर फैंस के बीच गुस्सा दिखाई दे रहा है. दरअसल, प्रोमो में नए तारक मेहता के रोल में एक्टर सचिन श्रॉफ (Sachin Shroff As Taarak Mehta) की झलक दिखाई दी है, जिसके बाद फैंस गुस्से में हैं. हालांकि एक्टर ने अपने इस नए रोल को लेकर काफी नर्वस दिख रहे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

प्रोमो में दिखी तारक मेहता की झलक

हाल ही में तारक मेहता के मेकर्स ने नया प्रोमो रिलीज (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah Promo) कर दिया है, जिसमें अंजलि मेहता अपने पति का इंतजार करती दिख रही हैं. वहीं सचिन श्रॉफ गणपति सेलिब्रेशन में एंट्री करते हुए दिख रहे हैं. हालांकि प्रोमो में एक्टर सचिन श्रॉफ की केवल आंखे दिख रही है. लेकिन इसे देखते ही फैंस पुराने तारक मेहता के रोल में एक्टर शैलेश लोढा को लाने की मांग करते दिख रहे हैं.

एक्टर ने एंट्री पर कही ये बात

नए तारक मेहता के रोल में एक्टर सचिन श्रॉफ को केवल फैंस का गुस्सा ही नहीं बल्कि प्यार भी मिलता दिख रहा है. हालांकि एक्टर ने अपने एक इंटरव्यू में इस नई जर्नी के लिए एक्साइटमेंट होने की बात कही है. दरअसल, एक इंटरव्यू में Sachin Shroff ने कहा है कि वह जितने एक्साइटेड हैं. उतने ही अपने रोल के लिए नर्वस भी हैं. हालांकि वह अपने किरदार में एकदम फिट बैठने के लिए पूरी कोशिश करेंगे. वहीं उन्होंने टीम के सपोर्ट मिलने की बात भी कही है, जिसके चलते वह अपने रोल को पूरी शिद्दत से निभाने की बात कह रहे हैं.


बता दें, बीते कुछ सालों में तारक मेहता का उल्टा चश्मा को कई किरदारों ने अलविदा कहा है, जिनमें अंजलि, दयाबेन और तारक मेहता जैसे मेन किरदार शामिल हैं. हालांकि अंजलि मेहता और तारक मेहता के लिए मेकर्स को जहां नए एक्टर्स मिल गए हैं तो वहीं दयाबेन के लिए अभी भी एक्ट्रेस की तलाश जारी है.

विवाहेतर संबंध: कागज के फूल महकते नहीं

पतिपत्नी के शारीरिक संबंध जहां दांपत्य जीवन में प्रेम संबंध के मजबूत स्तंभ माने जाते है वहीं विवाहेतर पर स्त्री या पर पुरुष शारीरिक संबंध कई प्रकार की समस्याओं और अपराधों का कारण भी बनते हैं.

2011 का एनआरआई निरंजनी पिल्ले का उस के पति सुमीत हांडा द्वारा कत्ल का केस पुराना है. अपनी पत्नी को अपने बिस्तर पर मित्र कहलाने वाले पर पुरुष को साथ वासनात्मक शारीरिक संबंध की स्थिति में देखना सुमीत के लिए सदमा तो था ही, बरदाश्त से बाहर भी था. जलन, क्रोध और धोखे के एहसास ने उस के हाथों पत्नी की हत्या करवा दी.

नोएडा के निवासी मिश्रा को अपनी पत्नी पर संदेह था कि उस के पर पुरुष से संबंध हैं. मिश्रा ने पुष्टि करना भी आवश्यक नहीं समझ कि उस का संदेह केवल संदेह या वास्तविकता. संदेह के आधार पर ही मिश्रा ने पत्नी का कत्ल कर दिया.

एक मां के विवाहेतर शारीरिक संबंधों का पता उस के 20 वर्षीय बेटे को चल गया. उस ने जब इन संबंधों पर ऐतराज किया, तो मां ने अपने संबंध बरकरार रखने के लिए अपने ही बेटे की सुपारी दे कर मरवा दिया. यहां विवाहेतर संबंधों की वासना पर ममता की बलि चढ़ गई.

समस्या से उपजा असंतोष

ऐसे संबंधों से जुड़े इस प्रकार के कितने ही अपराध आए दिन सुनने को मिलते हैं. कत्ल के अतिरिक्त कारण से कितने ही तलाक और सैपरेशन के केस भी हो जाते हैं, जिन की गिनती ही नहीं. कितने परिवार ऐसे भी हैं जो सामाजिक सम्मान अथवा बच्चों के कारण मुखौटा लगाए जीए जा रहे हैं परंतु इस समस्या से उपजा असंतोष उन्हें भीतर ही भीतर खाए जा रहा है.

यदि हम अपनेअपने दायरे में अवलोकन करें तो कितने ही दंपतियों में यह समस्या दिखती है. भावना का पति तो भंवरा है. न जाने उस में वासना की इतनी भूख है या उच्छृंखलताकी अति है कि उस के एक नहीं कई लड़कियों से संबंध हैं. एक समय पर वह 1 से अधिक लड़कियों से संबंध बनाने को भी उत्सुक रहता है. भावना ने विरोध भी बहुत किया और बरदाश्त भी. अंतत: वही हुआ जिस के आसार बहुत पहले से दिख रहे थे. अपने मन की शांति पाने और अपने बच्चों को स्वस्थ वातावरण देने हेतु भावना पति से अलग हो गई.

सूरज की पत्नी ने न चाहते हुए भी सूरज के पर स्त्री संबंध स्वीकार किए. सूरज ने साफ  कह दिया कि वह दूसरी स्त्री से संबंध नहीं तोड़ेगा. पत्नी चाहे तो साथ रहे चाहे तो अलग हो जाए. वह किसी हाल में सूरज से अलग होना नहीं चाहती थी. इस मजबूर स्वीकृति से मन ने कितनी पीड़ा बरदाश की होगी.

टूटते हैं परिवार

भावना और सूरज के अतिरिक्त भी अन्य बहुत से उदाहरण हैं. यदि सब का वर्णन किया जाए तो ग्रंथ के ग्रंथ तैयार हो जाएंगे. प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि जब विवाह के रूप में शारीरिक संबंधों को सामाजिक मान्यता प्राप्त हो जाती है तो कभी पुरुष और कभी स्त्री क्यों विवाह से बाहर छिपछिपा कर संतुष्टि या तृप्ति ढूंढ़ते हैं?  सभी जानते हैं कि विवाहेतर संबंधों की कोई सामाजिक मान्यता नहीं है और उजागर हो जाने पर सुखी परिवार का सारा सुखसम्मान नष्ट हो जाता है.

मधुर दांपत्य संबंधों मं कटुता आ जाती है. इस सब जानकारी के होते हुए भी आए दिन इस तरह के संबंध बनते रहते हैं. इन संबंधों के कारण अनेक परिवार टूटते हैं, अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं और अनेक अपराध जन्म लेते हैं.

विचार करें तो अनेक कारण ऐसे हो सकते हैं जिन की वजह से विवाहेतर संबंध बनते हैं. इन में कुछ कारण तो ऐसे हैं जिन्हें बेहद खोखला कहा जा सकता है. जैसे- उच्छृंखलता, विलासिता, अहम आदि. ये ऐसे कारण हैं जिन्हें किसी भी प्रकार की कसौटी पर परखें, नैतिकता से गिरे हुए ही कहलाएंगे.

सम्मान खोने का भय

इस श्रेणी के स्त्री या पुरुष समाज में चरित्रहीन कहलाते हैं. ऐसे लोग न तो समाज में सम्मान योग्य माने जाते हैं और न ही परिवार में. इस श्रेणी के अधिकतर लोग बेशर्म होते हैं. ऐसे लोग या तो सबकुछ खुल्लमखुल्ला करते हैं या फिर जो अपने संबंध छिपा पाने में सक्षम होते हैं उन्हें उन के खुल जाने का कोई भय नहीं होता. उच्छृंखलता और विलासिता उन की प्राथमिकता होती है. इस के लिए चाहे कितना भी अपमान क्यों न झेलना पड़े. संस्कारहीनता, शिक्षा का अभाव, नैतिकता का अभाव, गलत माहौल, गलत संगीसाथी, गलत दृष्टिकोण ऐसे कारणों की नींव होते हैं.

इन के अतिरिक्त कुछ अन्य कारण भी होते हैं जिन्हें इन खोखले कारणों से अलग रख कर देखा जा सकता है. जैसे असंतुष्टि, अलगाव, विवश्ता, ब्लैकमेलिंग, भावनात्मक लगाव, आकर्षण, असंयम आदि.

शारीरिक क्षुधा की चाहत

वैवाहिक जीवन में पतिपत्नी के पारस्परिक शारीरिक संबंध विवाह का आवश्यक अंग होते हैं. ये संबंध पति और पत्नी दोनों की ही आवश्यकता होते हैं, परंतु कभीकभी पति पत्नी ये या पत्नी पति से अथवा दोनों एकदूसरे से इस रिश्ते में असंतुष्ट रहते हैं. यह असंतुष्टि दूसरे साथी में शारीरिक संबंधों के प्रति इच्छा के अभाव से भी उपजती है और किसी एक साथी में अत्यधिक अर्थात सामान्य से कहीं अधिक शारीरिक क्षुधा से भी. नैतिकता की दृष्टि से न चाहते हुए भी दोनों या कोई एक साथी शारीरिक क्षुधा की संतुष्टि हेतु विवाहेतर संबंध बना लेता है.

कई संबंधों में भावनात्मक अलगाव भी विवाहेतर संबंधों का कारण बन जाते हैं. कई बार घर वालों के दबाव के कारण या किसी प्रकार के लालच के कारण विवाह तो हो जाता है, परंतु पतिपत्नी में भावनात्मक स्तर पर प्रेम संबंध नहीं बन पाते. इस का कारण दोनों में बौद्धिक स्तर की भिन्नता, दृष्टिकोण की भिन्नता, आपसी समझ का अभाव या आर्थिक स्तर और लाइफस्टाइल में अत्यधिक अंतर आदि कुछ भी हो सकता है. एकदूसरे के प्रति अलगाव और अरुचि अकसर उन की दिशाएं बदल देती हैं.

भावनात्मक या शारीरिक आकर्षण

भावनात्मक अलगाव की भांति भावनात्मक लगाव भी अकसर विवाहेतर संबंधों का कारण बन जाता है. विवाहपूर्व के प्रेमीप्रेमिका जब अन्यत्र विवाह हो जाने के बाद भी एकदूसरे को भूल नहीं पाते तो चाहेअनचाहे उन का भावनात्मक लगाव उन्हें एकदूसरे के करीब ले आता है. ये नजदीकियां धीरेधीरे उन्हें इतना नजदीक ले आती हैं कि वे सामाजिक सीमाएं भूल कर एकदूसरे में खो जाते हैं.

कई बार पति या पत्नी का पर स्त्री या पर पुरुष पर मुग्ध और आकर्षित हो जाना भी विवाहेतर संबंधों का सूत्रपात कर देता है. एकतरफा आकर्षण भी कभीकभी सामने वाले को चुंबक की भांति आकर्षित कर लेता है और आकर्षण यदि दोतरफा हो तो परिणाम अकसर ऐसे संबंधों में परिवर्तित हो जाता है. अब आकर्षण का कारण शारीरिक सौंदर्य, प्रभावशाली व्यक्तित्व, वाकचातुर्य, आर्थिक स्तर अथवा उच्चपद आदि कुछ भी हो सकता है.

इन कारणों के अतिरिक्त भी विवाहेतर संबंधों के कई कारण होते है. जैसे कहीं बौस ने पदोन्नति का लालच दे कर या रिपोर्ट बिगाड़ने की धमकी दे कर किसी को विवश किया, तो कभी बास को प्रसन्न करने हेतु किसी ने अपनी इच्छा से स्वयं को परोस दिया. किसीकिसी को आर्थिक विवशता के कारण इच्छा के विरुद्ध भी यह अनैतिक कार्य करने को बाध्य होना पड़ता है.

कभीकभी परिस्थितियां और हालात 2 प्रेमियों या 2 लोगों को ऐसी स्थिति में डाल देते हैं कि उन्हें न चाहते हुए भी एकांत में परस्पर एकसाथ समय बिताना पड़ जाता है. ऐसे में एकांत वातावरण में कभीकभी कुछ लोग असंयम का शिकार हो जाते हैं और उन के विवाहेतर संबध बन जाते हैं.

विवाहेतर संबंध बनाते समय यह ध्यान रखें कि संबंध होने के बाद पति या पत्नी से संबंध तोड़ना आसान नहीं है. फरवरी, 2022 में केरल हाई कोर्ट ने एक मामले में डाइवोर्स ग्रांट करा क्योंकि पति के मना करने पर भी वह प्रेमी को फोन करती थी पर यह विवाद शुरू हुआ 2012 में. 10 साल बाद तलाक दिया, पत्नी ने हैरेसमैंट का केस 2012 में दायर किया था.

कारण और परिस्थितियां कुछ भी हों, ऐसे संबंधों के बन जाने और उन के खुलने के परिणाम अकसर विध्वंसक ही होते हैं. परिवारों का टूटना, सामाजिक प्रतिष्ठा का हनन, बच्चों की दृष्टि में मातापिता का सम्मान गिरना, बच्चों के लिए समाज में अपमानजनक स्थितियां उत्पन्न होना, विवाहेतर संबंधों से उत्पन्न बच्चों की उलझनें, संपत्ति व जायदाद के लिए झगड़ा, अलगाव, तनाव, मनमुटाव, सैपरेशन, तलाक, कत्ल आदि अनेक समस्याएं पगपग पर कांटे बन कर चुभने लगती हैं. सब से अधिक झेलना पड़ता है टूटे या तनावग्रस्त परिवारों के बच्चों को.

परिणाम विध्वंसक होते हैं

यद्यपि आज के युग में सामाजिक मान्यताएं बहुत बदल गई हैं, फिर भी जब गर्मजोशी का बुखार उतरता है तो व्यक्ति चाहे वह पुरुष हो या स्त्री स्वयं को अकेला ही पाता है. 2 नावों का सवार डूबता ही है. लिव इन रिलेशनशिप में कोई वादा या वचन नहीं होता फिर भी धोखा चोट देता है, फिर विवाह तो नाम ही सुरक्षा और विश्वास का है. अत: स्वयं से विवाह को ईमानदारी से निभाने का वादा करते हुए ही इस बंधन में बंधें. खुले जमाने का अर्थ विवाहेतर संबंध नहीं अपितु संबंध जोड़ने से पहले खुल कर अपने होने वाले साथी से चर्चा करें और एकदूसरे से अपनी आशाएं तथा कमजोरियां न छिपाएं और दोनों साथी एकदूसरे को भलीभांति परख लें कि दोनों एकदूसरे के लिए उचित हैं या नहीं. इस प्रकार समस्या का अंत भले ही संभव न हो परंतु समस्या में कमी तो अवश्य संभव है.

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