Festive Special: हाइड्रा फेशियल के फायदे

आज हर महिला अपनी स्किन को ग्लोइंग बनाना चाहती है ताकि उस की स्किन हर उम्र में अट्रैक्टिव बनी रहे. इस के लिए वह कभी चेहरे पर अलगअलग तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स अप्लाई करती है, कभी ब्लीच तो कभी तरहतरह के फेशियल का सहारा लेती है. फिर भी पैसे खर्च करने के बाद रिजल्ट वह नहीं आता, जो आना चाहिए.

ऐसे में अब जब त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है तो हम आप को हाइड्रा फेशियल के बारे में बताते हैं, जो आप की स्किन को डीप ऐक्सफौलिएट करने के साथसाथ आप के स्किन के टैक्स्चर, टोन को भी इंप्रूव करने का काम करता है.

हाइड्रा फेशियल

यह एक तरह की कौस्मैटिक प्रक्रिया होती है, जो स्किन को डीप क्लीन करने के साथसाथ हाइड्रेट करने का काम भी करती है. इस में एक खास तरह की डिवाइस की मदद से पोर्स से डैड स्किन को निकाला जाता है और स्किन में ऐंटीऔक्सीडैंट सीरम डाला जाता है, जिस से स्किन हाइड्रेट होने के साथसाथ एजिंग की समस्या भी दूर होती है. यह प्रक्रिया 30 मिनट की पूरी होती है, लेकिन उस के बाद स्किन का स्ट्रैस दूर होने के साथसाथ स्किन पूरी तरह से निखर भी उठती है.

और भी हैं कई फायदे

 एक्ने में असरदार:

जब स्किन डीप ऐक्सफौलिएट नहीं होती है, पोर्स क्लीन नहीं होते हैं, तो उस की वजह से स्किन पर एक्ने की समस्या होने के साथसाथ स्किन डल व बेजान सी भी लगने लगती है. लेकिन जब स्किन पर माइक्रोडर्माब्रेशन तकनीक की मदद से उसे डीप क्लीन करने की कोशिश की जाती है, तो यह बंद पोर्स को ओपन कर के स्किन सैल्स को पुनर्जीवित करने का काम करता है, जिस से एक्ने, उस के दागधब्बे एक प्रक्रिया के बाद ही काफी कम हो जाते हैं.

ब्लैकहैड्स में भी कारगर:

जब स्किन पर डैड सैल्स ज्यादा जमा हो जाते हैं, तो वह ब्लैकहैड्स का कारण बनता है. ये न तो चेहरे पर दिखने में अच्छे लगते हैं और साथ ही स्किन पर इन्फैक्शन होने के चांसेज भी काफी ज्यादा हो जाते हैं, जबकि हाइड्रा फेशियल में ऐक्सफौलिएटिंग व ऐक्सट्रैक्टिंग तकनीक का इस्तेमाल कर के एक्ने को कंट्रोल करने के साथसाथ ब्लैकहैड्स को भी काफी हद तक कम किया जाता है. इस से स्किन क्लीयर भी बनती है, साथ ही उस पर अलग शाइन भी नजर आने लगती है.

स्किन ऐजिंग को कम करे:

कोई भी महिला नहीं चाहती कि उस की स्किन पर झुर्रियां आएं. लेकिन एक रिसर्च में यह साबित हुआ है कि जिन महिलाओं ने स्किन पर समयसमय पर हाइड्रा फेशियल करवाया उन की स्किन ज्यादा शाइन करने के साथसाथ उन की स्किन में ऐजिंग का खतरा भी काफी कम देखने को मिला, साथ ही डीप क्लीनिंग से यह पोर्स को छोटा करने के साथसाथ हाइपर पिगमैंटेशन व फाइन लाइंस को भी कम करने में मदद करता है.

कैसे होता है

स्टैप 1: क्लीनिंग:

सब से पहले स्किन को स्मूद बनाने के लिए उस पर स्किन टाइप के हिसाब से क्लीनिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है ताकि स्किन से सारी गंदगी रिमूव होने के साथसाथ उस पर फेशियल का अच्छा रिजल्ट दिख सके. इस स्टैप के साथ स्किन को ऐक्सफौलिएट भी किया जाता है ताकि स्किन से ऐक्सैस औयल रिमूव होने के साथ पोर्स से डैड स्किन सैल्स भी रिमूव हो सकें.

स्टैप 2: कैमिकल पीलिंग:

इस प्रोसैस में सैलिसिलिक ऐसिड, ग्लाइकोलिक एसिड, सीरम का इस्तेमाल कर के स्किन पर क्लीनिंग की जाती है. स्किन की डीप लेयर्स तक इसे पहुंचाने की कोशिश की जाती है ताकि स्किन अंदर तक हाइड्रेट हो सके.

स्टैप 3: ऐक्सट्रैक्शन:

इस स्टैप में वैक्यूम ऐक्सट्रैक्शन टूल का इस्तेमाल कर के पोर्स के अंदर से गंदगी को निकाल कर लेयर्स को क्लीन करने की कोशिश की जाती है.

स्टैप 4: हाइड्रेटेड सीरम:

आखिर में स्किन में हाइड्रेटेड सीरम डाला जाता है ताकि स्किन हाइड्रेट होने के साथसाथ उस का टैक्सचर भी इव हो सके. इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही आप को अपनी स्किन में बदलाव दिखने लगता है.

सभी स्किन टाइप पर सूट करे:

खास बात यह है कि हाइड्रा फेशियल सभी स्किन टाइप पर सूट करता है. यह पिंपल्स, एक्ने के धब्बों को कम करने के साथ हाइपरपिगमैंटेशन में काफी कारगर है. इसलिए इसे चाहे टीनएजर्स की बात हो या यूथ की अथवा महिलाओं की, हरकोई इसे करवा कर अपनी स्किन को फैस्टिवल्स के लिए तैयार करने के साथसाथ स्किन पर अलग ही तरह का ग्लो भी पा सकती है.

क्या कैस्ट्रेशन से रुकेगा रेप

अमेरिका के ‘फैडरल ब्यूरो औफ इन्वैस्टिगेशन’ (एफबीआई) द्वारा 20 साल बाद ढूंढ़ निकाले गए एक बलात्कारी को कैस्ट्रेशन की सजा देने से इनकार करते हुए अमेरिका की संघीय अदालत के जज ने लिखा है कि कैस्ट्रेशन बलात्कार की समस्या से मुक्ति का वैज्ञानिक रास्ता नहीं है क्योंकि कैस्ट्रेशन से बलात्कार की चाहत खत्म नहीं होती और बलात्कार एक्ट से ज्यादा इंस्टिंक्ट है यानी यह हरकत से ज्यादा प्रवृत्ति है.

हमारे यहां बीभत्स बलात्कार कांड के बाद एक बड़े तबके द्वारा बलात्कारियों को कैस्ट्रेशन की सजा देने की मांग उठाई जाती है और अखबारों में नए व पुराने हवालों के साथ इस संबंध में एक राय बनाने की कोशिश दिखती है तब भी जस्टिम वर्मा समिति ने अपनी इस सलाह रिपोर्ट में इस प्रावधान को शामिल नहीं किया, जिस की बीना पर बलात्कारों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाता है.

मनोवैज्ञानिक इस बात को तार्किक ढंग से सिद्ध कर चुके हैं कि बलात्कार एक मानसिक उन्माद है. यह ताकतवर सैक्स गतिविधि के रूप में भले देखा और जाना जाता हो, मगर वास्तव में यह एक मानसिक गुस्सा और मानसिक भूख है. यही वजह है कि बलात्कार करने वालों के बारे में जो खुलासे होते हैं, उन में तमाम खुलासे ऐसे होते हैं जो पहली नजर में हैरान करते हैं.

सीरियल बलात्कारी का खौफ

1997-98 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक सीरियल बलात्कारी का खौफ था जो छोटीछोटी बच्चियों के साथ बलात्कार कर के उन्हें अकसर बीभत्स तरीके से मौत के घाट उतार देता था. जब यह मानसिक रूप से विकृत बलात्कारी हरियाणा के बहादुरगढ़ में पकड़ा गया तो पता चला कि वह नपुंसक है. उस को ले कर पता चला कि उस के अंदर की कुंठा हताशा और हीनभावना को ही व्यक्त करती थी. दरअसल, वह हर बार यह परखने की कोशिश करता था कि उस के लिए सैक्स संबंध बना पाना संभव है या नहीं और जब असफल होता था तो छोटी बच्यों की भी हत्या कर देता था.

नोएडा के सनसनीखेज निठारी हत्याकांड में भी कोली के बारे में यही हकीकत सामने आई थी. कहा जाता है वह भी यौन क्षमता से रहित और इसी कुंठा में अपने मालिक के साथ मिल कर छोटे बच्चों का यौन शिकार करता था और फिर उन की बेरहम तरीके से हत्या कर देता था.

कैस्ट्रेशन किस तरह बलात्कारों को रोकने में असमर्थ साबित हो सकता है, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बड़े पैमाने पर हिजड़े जो कैस्ट्रेशन का शिकार होते हैं, सैक्स गतिविधियों में लिप्त होते हैं, चाहे सक्रिय रूप में या निष्क्रिय रूप में. इस से भी यही साबित होता है कि कैस्ट्रेशन का बलात्कार में कारगर होना मुश्किल है. बलात्कार जैसी सामाजिक बुराई से मुक्ति तभी पाई जा सकती है जब सैक्स एक सामाजिक वर्जना न हो.

दरअसल, बलात्कार की समस्या से बचने के लिए कैस्ट्रेशन का विचार निर्भया कांड या हाथरस की घटना से ही नहीं आया था बल्कि इस के पहले ही इस बारे में चर्चा और बहस तब जोरदार ढंग से शुरू हो गई थी जब 17 फरवरी, 2012 को दिल्ली की एक तब अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कामिनी ला ने कहा था, ‘‘मेरे हाथ बंधे हुए हैं. इसलिए मैं वही सजा सुना सकती हूं जिस का प्रावधान है. लेकिन मेरी चेतना मु?ो यह कहने के लिए अनुमति देती है कि वक्त आ गया है कि देश के कानून बनाने वाले विद्वान बलात्कार की वैकल्पिक सजा के तौर पर रासायनिक या सर्जिकल बधियाकरण के बारे में सोचे जैसेकि दुनिया के तमाम देशों में यह मौजूद हैं.’’

यौन अपराध और कानून

रोहिणी जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी ला की इस टिप्पणी के बाद ही जो उन्होंने एक यौन अपराध के एक मामले में 30 वर्षीय बलात्कारी नंदन को उम्र कैद की सजा सुनाते हुए की थी, पर बहस गरम हो गई थी कि क्यों न मजिस्ट्रेट की इच्छा के मुताबिक बलात्कारी को कैस्ट्रेशन की सजा दी जाए.

यह बहस हर गैंगरेप के बाद फिर से सुर्खियों में आ जाती है. हालांकि न तो इस पर सुप्रीम कोर्ट न संसद महान हुई. फिर भी यह मांग तमाम महिलावादी संगठन, आम लोग, राजनीतिक पार्टियों के सदस्य निजी तौर पर और कई बड़े कद के राजनेता भी कर रहे हैं. पेशेवर डाक्टरों की तरफ से इस संबंध में औपत्ति हमेशा उठाई गई है.

जिन डाक्टरों को कैस्ट्रेशन यानी बधियाकरण पर औपित्त है, उन में से ज्यादातर को कैमिकल या रासायनिक बधियाकरण से ही आपत्ति है. उन का कहना है कि दुनिया में अभी तक कोई ऐसी दवा नहीं है जो स्थायी रूप से किसी को हमेशा के लिए नपुंसक बना सके यानी रासायनिक तरीके से नपुंसक बनाया गया व्यक्ति अधिक से अधिक 3 महीने ही नपुंसक रह सकता है. इस के बाद वह पहले जैसी स्थिति में आ जाएगा. कई बार तो सिर्फ 1 महीने तक ही रासायनों का असर रहता है.

कहने का मतलब यह कि जिस व्यक्ति को यह सजा दी जाएगी उसे हर 1 महीने के बाद उस के पुरुषत्व को निष्क्रिय रखने वाला इंजैक्शन लगाना पड़ेगा. पहली बात तो यह बेहद मुश्किल काम होगा और दूसरी बात यह एक बड़ा सिरदर्द भी होगा कि सरकारी ऐजेंसियां सुनिश्चित करें कि वह व्यक्ति हर महीने सही समय में किसी सज्जन पुरुष की माफिक अपने को नपुंसक बनाए जाने वाला इंजैक्शन लगवा ले. साथ ही डाक्टरों को यह भी आशंका है कि इस इंजैक्शन से तमाम तरह के साइड इफैक्ट हो सकते हैं. मसलन, इस इंजैक्शन के असर से व्यक्ति बहुत मोटा हो सकता है. उसे मधुमेह या दूसरी बीमारियां हो सकती हैं.

कानून और बहस

इसी तरह की और भी आशंकाएं डाक्टरों ने जाहिर की हैं. इसलिए चिकित्सक समुदाय कैमिकल कैस्ट्रेशन के पक्ष में नहीं है और कुछ डाक्टर तथा मानवाधिकार संगठनों ने भी सर्जिकल रिमूवल यानी उस तरह से लिंग काट देने जैसी सजा को भी अमानवीय, बर्बर और मध्यकालीन बताया है. इस कारण सर्जिकल या कैमिकल कैस्ट्रेशन पर बहस छिड़ गई है.

कानूनों के बनाए जाने के संबंध में एक पुरानी कहावत है कि कानून उस समय बनाए जाने चाहिए जब तत्काल उन की जरूरत न हो. मतलब यह कि जब हम किसी घटना के भावुक आवेश में कोई कानून बनाते हैं तो उस में तटस्थ नहीं रह पाते. हमारा झकाव या रुझन जिस तरह होता है उसी के अनुरूप हम कानून बनाते हैं.

पूरे देश में दिल्ली गैंगरेप के बाद पैदा हुए आक्रोश के चलते हरकोई बलात्कारियों से और औरतों के विरुद्ध अपराध करने वालों से बेहद खफा है. इसलिए हरकोई यही चाहता है कि बलात्कारियों को फांसी की सजा तो हर हाल में दी जानी चाहिए. लेकिन जब निर्भया गैंगरेप के मुख्य आरोपी रामसिंह की संदिग्ध हालत में तिहाड़ में मौत हो गई तो तमाम संगठनों के कार्यकर्ता उस की मौत पर कानून का संकट देखने लगे.

जाहिर है कैस्ट्रेशन की मांग के साथ भी ऐसी स्थिति बन सकती है. दिल्ली गैंगरेप के बाद गुस्साई आम जनता जिस जोरशोर तरीके से इस की मांग कर रही थी, अब वह गायब है. इस से यह बात सही साबित होती है कि कानून हमेशा शांतिपूर्ण माहौल में ही बनाए जाने चाहिए और शांतिपूर्ण माहौल कैस्ट्रेशन से न तो समस्या का समाधान देखता है और न ही इसे बेहद प्रभावशाली पाता है. इसलिए इस के बारे में न ही सोचा जाए तो ज्यादा ठीक है.

समस्या और समाधान

इस में कोईर् दो राय नहीं कि बलात्कार जैसे मामलों में महिलाओं के प्रति सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक सोचे जाने की जरूरत है क्योंकि आमतौर पर वे ही पीडि़त होती हैं. लेकिन कोई ऐसा कानून बनाना खतरे से खाली नहीं होगा

जिस के दुरुपयोग की जबरदस्त आशंकाएं मौजूद हों. हालांकि दुनिया के कई देश इस तरह का कानून रखते हैं, मगर देखने में यह कतई नहीं आया कि ऐसे कानून बना देने भर से बलात्कार जैसे यौन हिंसा के अपराधों में किसी तरह की कमी दिखी हो.

इस समय दुनिया में जिन देशों में सर्जिकल और कैमिकल कैस्ट्रेशन की सजा का प्रावधान है उन में अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, पोलैंड और जरमनी जैसे विकसित देश भी शामिल हैं. अमेरिका में कुछ राज्यों में स्वेच्छा से कैमिकल कैस्ट्रेशन के लिए राजी होने वाले यौन अपराधियों को कम सजा दी जाती है.

इसराईल ने भी बाल यौन उत्पीड़कों को ऐसी ही सजा देने का प्रावधान किया है. अमेरिका में लुसियाना के गवर्नर भारतीय मूल के बौबी जिंदल ने सीनेट बिल 144 पर हस्ताक्षर करते हुए जजों को दुष्कर्मियों के विरुद्ध कैस्ट्रेशन की सजा सुनाने की अनुमति दी थी. कैलिफोर्निया, अमेरिका का वह अकेला राज्य है जिस ने अपने यहां कैस्ट्रेशन का भी प्रावधान लागू करने के लिए अपनी पारंपरिक दंड संहिता बदल डाली.

यह उपाय कैसे चलेगा

भारत में अगर राजनीतिक पार्टियों में व्यापक रूप से इस के प्रति समर्थन नहीं है तो इस का मतलब यह है कि बलात्कार की दोनों ही सजाओं कैस्ट्रेशन यानी बधियाकरण और फांसी की सजा को ले कर कानून के जानकारों और राजनीतिक पार्टियों में हिचक है. जो लोग मौजूदा माहौल के प्रभाव में इन दोनों चीजों के साथ खड़े दिखते हैं, वे भी भविष्य में इस से छिटक सकते हैं क्योंकि तब तक हो सकता है उन में वह भावनात्मक आवेश न रह जाए. इसलिए जल्दबाजी में कानून बनाए जाने की जरूरत नहीं है.

दुनियाभर में केवल इंडोनेशिया, यूक्रेन, चैक रिपब्लिक और पाकिस्तान ने कैस्ट्रेशन को सजा के तौर पर कानून में शामिल किया है पर हर अपराधी को इस सजा के लिए सही पात्र माना जाएगा, इस में संदेह है. बलात्कार के हर मामले में ऐवीडैंस की भारी कमी होती है और केवल पीडि़ता के बयान पर सजा देने से जज हिचकते हैं.

बलात्कारों की संख्या जितनी दिखाई

जाती है वास्तव में उस से कहीं ज्यादा होती है क्योंकि अधिकांश मामलों में लड़की चुप रहना ही ठीक समझती है. यह अपराधी को बल देता है और बधियाकण यानी कैस्ट्रेशन ऐसी स्थिति में बेकार होगा. 2020 में 28,046 मामले दर्ज हुए जो बहुत कम प्रतीत होते हैं. घरों में होने वाले बलात्कार छिपा लिए जाते हैं. वैसे भी मुश्किल से 10-15% मामलों में सजा हो पाती है तो यह उपाय कैसे चलेगा?

Festive Special: फैमिली के लिए बनाएं काजू पिस्ता रोल

फेस्टिवल पर आप कई तरह के व्यंजन बनाती हैं. रसगुल्ला, सोन पापड़ी, गुलाब जामुन तो आप हर साल ही बनाती, खाती और खिलाती होंगी. तो क्यों ना इस दीवाली कुछ अलग ट्राई करें जिसे खाकर आपके परिवारजन, दोस्त रिश्तेदार सब खुश हो दाएं. तो इस दीवाली आप बनाएं काजू पिस्ता रोल.

काजू पेस्ट की कवरिंग और मेवों से भरे काजू पिस्ता रोल देखकर किसी का भी मन ललचाने लगे. फेस्टिवल के मोके पर इस स्वादिष्ट मिठाई को बनाकर सभी का मुंह मीठा कराएं.

सामग्री

कवरिंग के लिए

काजू- 1 कप (150 ग्राम)

चीनी- ⅓ कप (75 ग्राम)

स्टफिंग के लिए

पिस्ते- ⅓ कप (30 ग्राम)

बादाम- ⅓ कप (30 ग्राम)

पाउडर चीनी- 2 टेबल स्पून (20 ग्राम)

दूध- 2 से 3 छोटी चम्मच

इलाइची पाउडर- 1/4 छोटी चम्मच

ग्रीन फूड कलर- ¼ पिंच से कम

घी- 3 छोटी चम्मच

विधि

मिक्सर जार में काजू डालकर पीस लीजिए और पाउडर तैयार कर लीजिए. तैयार पाउडर को एक प्याले में निकाल लीजिए. फिर, इसे चावल छानने वाली मोटे छेद वाली छलनी से छान लीजिए.

इसके बाद, थोड़े से साबुत पिस्ते छोड़कर बाकी पिस्ते और बादाम मिक्सर जार में डालकर पाउडर बना लीजिए. पिसे हुए बादाम-पिस्तों को एक प्याले में निकाल लीजिए. साबुत पिस्तों को छोटा-छोटा काट लीजिए.

बादाम पिस्तों में कटे हुए पिस्ते और पाउडर चीनी डालकर अच्छे से मिक्स कर लीजिए. इस मिश्रण में ¼ छोटी चम्मच इलाइची पाउडर डाल दीजिए. 2 छोटी चम्मच दूध एक छोटी प्याली में लीजिए और इसमें ग्रीन फूड कलर डालकर घोल लीजिए. कलर वाला दूध मिश्रण में डाल दीजिए और अच्छे से मिलने तक मिक्स कर लीजिए. स्टफिंग को बिल्कुल अच्छे से बाइन्ड कर लीजिए.

पैन में चीनी और इतनी ही मात्रा यानिकि ⅓ कप पानी डाल दीजिए. चीनी के घुलने तक चाशनी को पका लीजिए. इसके बाद, गैस धीमी कर दीजिए और इसमें काजू का पाउडर तथा 3 छोटी चम्मच घी डाल दीजिए. इसे जमने वाली कन्सिस्टेन्सी तक लगातार चलाते हुए मध्यम आंच पर पका लीजिए. मिश्रण में बिल्कुल भी गुठलियां नही पड़नी चाहिए. मिश्रण पककर तैयार है, इसे बहुत ज्यादा न पकाएं वरना मिश्रण सख्त हो जाएगा.

थोड़ा सा पेस्ट लेकर प्याली में डालिए और ठंडा होने के बाद चैक कीजिए. ये बिल्कुल जमा हुआ लगना चाहिए और इससे गोला तैयार होना चाहिए. मिश्रण को एक अलग प्याले में निकाल लीजिए और हल्का ठंडा होने दीजिए.

कवरिंग बनाने के लिए एक बोर्ड पर पौलीथीन बिछा लीजिए. इस पौलीथीन को थोड़े से घी से चिकना कर लीजिए और हल्के गरम पेस्ट को पौलीथीन पर निकाल लीजिए. इसे हाथ से बाइन्ड करते हुए थोड़ा सा गोल कर लीजिए और पौलीथीन के बीच में रखकर इसे हाथ से बढ़ा लीजिए. फिर बेलन की मदद से पौलीथीन को घुमा-घुमाकर इसे चारों तरफ से चौकोर मोटा परांठे जैसा बेल लीजिए. रोल के लिए चौकोर शीट तैयार है.

इसके बाद स्टफिंग को दो भागों में बांट लीजिए. फिर एक भाग उठाकर हाथ से बाइन्ड कर लीजिए और बोर्ड पर रखकर हाथों से रोल करते हुए एक जैसी मोटाई का थोड़ा पतला रोल बना लीजिए. रोल इतना बढ़ा होना चाहिए कि शीट के अंदर पूरा आ सके. इसी तरह दूसरे हिस्से से भी लंबा रोल बना लीजिए.

काजू की चौकोर शीट को बीच से काटकर 2 हिस्सों में बांट लीजिए. फिर, एक स्टफिंग का रोल लेकर शीट के एक तरफ रखिए और पौलीथीन की सहायता से शीट को रोल करते जाइए. रोल करते समय ध्यान रखे कि ये ढीली न रोल हो, इसे हल्का सा कसके रोल कीजिए. फिर इसे हाथ से रोल करके थोड़ा और पतला कर लीजिए. दूसरे भाग को भी बिल्कुल इसी तरह रोल कर लीजिए और दोनों रोल्स को किसी प्लेट में रखकर फ्रिज में ठंडा होने रख दीजिए ताकि ये सैट हो जाएं.

सेट होने के बाद, इन्हें 2 से 2.5 इंच के बराबर बराबर टुकड़ों में काट लीजिए. काजू पिस्ता रोल खाने के लिए तैयार हैं. ड्राई फ्रूट्स से भरे काजू पिस्ता रोल को किसी भी त्योहार या शुभ अवसर पर बनाइए और सर्व कीजिए. आप इस मिठाई को फ्रिज में रखकर 15 से 20 दिनों तक खा सकते हैं.

ऐसे रोकें बच्चों की फुजूलखर्ची

आप ने उस प्यासे कौए की कहानी जरूर सुनी होगी, जिस ने घड़े की तली में थोड़ा सा पानी देखा. उस ने छोटेछोटे कंकड़ ला कर घड़े में डाले और इस तरह जब पानी ऊपर आ गया तो उस ने अपनी प्यास बुझई. कुछ यही कहानी है बचत की. पैसा बनाना कठिन है, पर बचत के महत्त्व को समझने के बाद सही दिशा में चल कर यह काम आसानी से किया जा सकता है. आप की ओर से उठाया गया छोटा कदम आगे चल कर बड़ी उपलब्धि बन सकता है.

अगर आप का बच्चा बचपन में ही बचत के महत्त्व को समझ ले तो अपने जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का सामना वह आसानी से कर लेगा. जो मातापिता अपने बच्चों में बचत की आदत बचपन में ही डाल देते हैं वे अपने बच्चे का भविष्य सुरक्षित बना देते हैं. बचत का महत्त्व समझने के बाद उन्हें पैसे का मोल मालूम पड़ता और उन के खर्च करने के तरीके में भी भारी बदलाव आता है.

अगर आप का बच्चा बचत के महत्त्व को नहीं जानता तो आज ही उसे इस बारे में शिक्षित करना शुरू कर दें. हाल की महामारी ने स्पष्ट कर दिया है कि  न जाने कब मोटी नकदी की जरूरत पड़ जाए और उस समय न तो पैसे मांगने की फुरसत होती है न होश. इसलिए एक बड़ी नकद बचत हर समय अपने पास रखना जरूरी है.

पैसे का मोल समझएं

महंगाई के इस दौर में जरूरी है कि बच्चे पैसों का मोल जानें. आप उन्हें यह समझएं कि आप पैसा कमाने के लिए दिनभर कितनी मेहनत करते हैं. उन्हें यह समझने की कोशिश करें कि वे जो भी मांग करते हैं उस के लिए पैसा इकट्ठा करने में आप दिन में कितने घंटे खटते हैं. उन्हें यह भी समझएं कि फुजूखर्ची की आदत उन्हें कर्ज के जाल में फंसा सकती है.

हर मांग पूरी न करें

हर मांबाप अपने बच्चे से अपनी जान से ज्यादा प्यार करते हैं और उन की हर ख्वाहिश को पूरा करना चाहते हैं. लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आप का बच्चा अनुशासन में रहे और मेहनत से कमाए पैसे की कीमत समझे तो उस की हर छोटीबड़ी मांग तुरंत पूरी करना उस के भविष्य के लिए अच्छा नहीं होगा.

अगर आप ऐसे पेरैंट्स हैं, जो अपने बच्चों की हर छोटीबड़ी मांग तुरंत पूरी करते हैं, तो आप को अपनी आदत बदलने की जरूरत है क्योंकि बाद में आप का यह रवैया आप के ही बच्चे के लिए मुसीबत बन सकता है. वह जिद्दी बन सकता है, अनुशासनहीन बन सकता है, अपनी जरूरतों पर काबू न रखने के कारण अपराधिक गतिविधियों में फंस सकता है. आप बचपन से ही अपने बच्चों को जरूरत और लग्जरी में फर्क करना सिखाएं यानी क्या खरीदना है या क्या खाना जरूरी है और किस खरीदारी को टाला जा सकता है, बच्चों को ये बातें समझना बहुत जरूरी है. यह बच्चों को एकदम से नहीं बल्कि धीरेधीरे समझएं.

बच्चों को गुल्लक दें

आप के घर आने वाले मेहमान जाते वक्त आप के बच्चों के हाथ में पैसा जरूर देते होंगे. नानी, चाचा, मामा से भी आए दिन बच्चों को कुछ न कुछ पैसे मिलते ही रहते हैं. आप भी उन्हें जेब खर्च के पैसे देते हैं. आप का बच्चा इन पैसों को बचा कर रखता है या सारे के सारे खर्च कर देता है? अगर वह बचा कर रखता है तो निश्चिंत रहें, उस का भविष्य सुरक्षित है, लेकिन यदि वह सारे पैसे मौजमस्ती या मनपसंद चीजों  की खरीदारी में उड़ा रहा है तो यह आदत आगे जा कर खतरनाक साबित हो सकती है.

अगर आप चाहते हैं कि आप का बच्चा बचत करना सीखे तो उसे बचपन से ही पैसों का सही इस्तेमाल सिखाएं. उसे बताएं कि कुछ पैसा खर्च करो और कुछ बचा कर रखो. बचत के प्रति आकर्षित करने के लिए आप उसे कार्टून कैरेक्टर वाली गुल्लक खरीद कर दें. गुल्लक में पैसे डालने से बचत की आदत आसानी से विकसित की जा सकती है. गुल्लक की खनखन हमेशा उसे उस में कुछ न कुछ पैसे डालने के लिए प्रेरित करेगी.

बचत खाता खुलवाएं

आप अपने बच्चों को बचत की आदत के फायदे बताएं. आप उन्हें बता सकते हैं कि किस तरह उन के ही महीने के बचाए गए पैसों का निवेश किया जा सकता है. उसे अपने साथ बैंक ले जाएं और बाकायदा अकाउंट खुलवाएं. आजकल बैंकों में बच्चों के नाम से बैंक खाते खोलने की सुविधा है. अपने खाते में उन्हें पैसे जमा करना सिखाएं. उन की आज की छोटीछोटी बचत उनकी कल की बड़ी जरूरत पूरा कर सकती है.

बरबादी के नुकसान समझएं

बहुत से बच्चे पैंसिल, पेपर, रबड़ या अन्य चीजें बरबाद करते हैं. पैंसिल थोड़ी से छोटी हुई नहीं कि गई डस्टबिन में या कापी में एकएक लाइन लिख कर बाकी पेज खाली छोड़ देते हैं. आप उन्हें यह समझने की कोशिश करें कि कागज पेड़ों को काटने से बनता है और अगर बच्चा कागज बरबाद कर रहा है तो वह एक नए पेड़ को काटने की तैयारी कर रहा है. पेड़ों से जीने के लिए आक्सीजन मिलती है, इसलिए उन का रहना जरूरी है. इस तरह कहानी के जरीए आप अपने बच्चे की चीजें बरबाद करने की आदतें ठीक करें.

फुजूलखर्ची के नुकसान बताएं

अपने बच्चों की बिस्कुट, चौकलेट, कोल्ड ड्रिंक, पिज्जाबर्गर, मोमोज या खिलौने की जिद पूरी करतेकरते आप का घर का बजट बिगड़ जाता है. फास्टफूड की आदतों से बच्चे का स्वास्थ्य भी बिगड़ता है. वे जिद्दी, थुलथुल शरीर वाले और आलसी हो जाते हैं. उन्हें लगने लगता है कि वे जो भी मांग करेंगे आप उसे पूरा करने के लिए सदैव सक्षम हैं. बच्चों को यह बताएं कि आप कितनी मेहनत से पैसे कमाते हैं.

उन्हें यह समझने में मदद करें कि पैसे नहीं होने की स्थिति में आप के कौन से जरूरी काम रुक जाएंगे. इन में बच्चों के स्कूल की फीस, दादादादी की दवा, पालतू जानवर का खानापीना, बिजलीपानी, ग्रौसरी का बिल आदि को शामिल करें. बच्चे अकसर अपने पैट्स या दादादादी से बहुत जड़े होते हैं, उन के खर्च रुकने की बात वे आसानी से समझ सकते हैं और खुद में बचत की आदत डैवलप कर सकते हैं.

बजट बनाने में बच्चों को भी शामिल करें

अगर आप अपने जीवनसाथी या मातापिता के साथ घर का मासिक बजट बनाते हैं तो इस प्रक्रिया में अब अपने बच्चों को भी शामिल करें. आप की चिंता, पैसे की दिक्कत या देनदारी की सही स्थिति समझने के बाद कुछ महीनों में संभव है कि आप का बच्चा फुजूलखर्ची की आदत छोड़ दे. वह अपनी पौकेटमनी बचा कर घर के खर्चों में हाथ बंटाने लगे. यह एक अच्छा साइन है.

बचत के पैसे से दिलाएं गिफ्ट

बच्चों के बचत के पैसों से उन्हीं की जरूरत की चीजें खरीदें. हो सकता है बहुत दिनों से आप के घर में टेबल लैंप के लिए बच्चा जिद कर रहा है या पढ़ाई के लिए अलग टेबल चेयर, स्टोरी बुक्स, वीडियो गेम्स आदि की मांग कर रहा है, तो उस की बचत के पैसे ही उसे ये चीजें दिलाएं. ऐसा करने से बच्चों में गर्व की भावना का उदय होगा और उन में बचत करने के लिए उत्साह बढ़ जाएगा. अपने पैसे से आई चीज की देखभाल भी वह जीजान से करेगा.

बच्चों को क्रिएटिव बनाएं

घर की पुरानी चीजों से कुछ न कुछ उपयोगी चीज बना कर बच्चों को दिखाएं और उन्हें भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें. कोल्ड ड्रिंक्स की खाली बोतल से पैन स्टैंड बनाना, आइस्क्रीम स्टिक से लैंप बनाना या टूटे खिलौने से क्राफ्ट बनाने जैसे काम बच्चे मजे से करते हैं. बच्चों को उन की पुरानी चीजों का दोबारा उपयोग करना सिखाएं.

पैंसिल या रबड़ को पूरा खत्म करने के बाद ही नई पैंसिल या रबड़ का उपयोग करने को कहें. पैंसिल छोटी हो गई हो तो उसे किसी पुराने पेन के आगे जोड़ कर प्रयोग करने के लिए दें. उन्हें यह समझने की कोशिश करें कि कैसे रद्दी चीजों से नई और आर्कषक चीजें बनाई जा सकती हैं. इस से बच्चा क्रिएटिव भी बनेगा और इस के साथ ही उस में बचपन से ही चीजों को अहमियत देने का गुण विकसित होगा.

जेबखर्च कमाना

प्रति महीने अपने बच्चों को दिए जाने वाले जेबखर्च के अलावा, उन्हें स्वयं भी जेबखर्च कमाने के लिए उत्साहित कीजिए. यह किसी भी तरह संभव हो सकता है. घर के कुछ काम कर लेने के बाद उन्हें पुरस्कार के तौर पर कुछ रुपए दे सकते हैं. कमरे को साफ करने के बाद या भाईबहन का होमवर्क कराने के बाद भी आप उन्हें उपहारस्वरूप कुछ पैसे दे सकते हैं, जिन्हें वे अपनी गुल्लक में डालें. किस काम के लिए कितने रुपये तय करने हैं, यह काम की कठिनता पर निर्भर होना चाहिए. पैसे मिलने से बच्चे बहुत उत्साहित होते हैं और उन्हें श्रम का महत्त्व और पैसे की कीमत भी पता चलती है.

बचत के लिए पुरस्कार

जब भी आप का बच्चा अपने आर्थिक लक्ष्य को प्राप्त कर ले, उसे पुरस्कार देने के बारे में जरूर सोचिए. चाहें तो इस उपलब्धि पर उसे कोई नई ड्रैस खरीद कर दें या केक अथवा आइसक्रीम खिलाने ले जाएं या फिर कंप्यूटर या टीवी देखने के लिए ज्यादा समय दें. जिस तरह कंपनी में पीएफ जुड़ता जाता है, ठीक उसी तरह आप भी बच्चे द्वारा बचत किए धन के बराबर का धन उस के खाते में डाल सकते हैं.

धर्म

धर्म के नाम पर आजकल सब से ज्यादा बरबादी हो रही है और परिवार सालों की बचत किसी धार्मिक कार्य पर  उड़ा देते हैं जिस का कोई लाभ नहीं होता. यही पैसा बचा लें तो घरपरिवार हर साल मोटी बचत कर लेगा, इसलिए हर समय चौकस रहें कि कहीं कोई आप को धर्म के नाम पर लूट तो नहीं रहा.

आहार से जुड़ी गलत आदतें

मई, 2022 के अंतिम सप्ताह में पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी अपने कार्यकर्ताओं के साथ बात कर रही थीं. उस में एक कार्यकर्ता कहने के लिए खड़ा हुआ था तो ममता से रहा नहीं गया. उन्होंने पूछ ही लिया, ‘‘तुम्हारा मध्य प्रदेश इतना बढ़ा हुआ है. क्या बीमार हो?’’

कार्यकर्ता बेचारा सफाई देता रहा पर ममता ने उस का पीछा नहीं छोड़ा. असल में मटके की तरह निकला पेट बहुतों की पर्सनैलिटी को चकनाचूर कर देता है.

ज्यादा खाना, पेट बढ़ना कई बीमारियों को जन्म देता है और एक पूरा फिटनैस उद्योग आज इस मोटापे को कंट्रोल करने के लिए दुनिया भर में चल रहा है और इस में खूब कमाई हो रही है.

हमारी भूख मिटाने वाला, हमारे शरीर को ऊर्जा देने वाला, शरीर का सुयोग्य पोषण करने वाला और पाक कुशलता साक्षात्कार करने वाला उचित आहार स्वस्थ, आनंदित और सब से महत्त्वपूर्ण फिट और फाइन रखता है. लेकिन कभीकभी अनजाने या उस समय की मानसिक या आसपास की परिस्थिति के अनुसार अथवा अन्य किसी वजह से अनुपात से ज्यादा खा लिया जाता है.

गलत तरीके का, गलत तरीके से और गलत समय पर खाना खाया जाता है जिस का परिणाम धीरेधीरे शरीर पर नजर आने लगता है. फिर अचानक आए इस बदलाव का न सिर्फ एहसास होता है बल्कि बदलाव भी नजर आता है और फिर शुरू होती है अपनी खुद की तलाश.

कई बार तो यह तलाश अर्थहीन, बोरियतभरी और कभी न खत्म होने वाली होती है. फिर उस के लिए ढूंढ़े जाते हैं कुछ भयानक उपाय. लेकिन इन भयानक उपायों से कई बार सिर्फ और सिर्फ निराशा हाथ लगती है. मोटापे से ले कर सुडौल काया यानी आज की आधुनिक भाषा में जीरो फिगर.

सुडौल, सुंदर और फिट दिखना किसे पसंद नहीं है? हरकिसी की यही चाहत होती है और इस का सपना दिखाने वाले और इसे सच करने का दावा करने वाले भी अनेक नाम जगमगाते हुए हमारे सामने आते रहते हैं. इन से हमें जो चाहिए वह तो हासिल होता नहीं है, पर दूसरा कुछ जरूर मिल जाता है.

कैसी हो जीवनशैली

आहार विशेषज्ञ का कहना है कि हमारे घर की रसोई में ही हमारे आहार का तरीका छिपा होता है. लेकिन घर के आहार का तरीका छोड़ कर गलत दिशा में निकल जाएं तो उस का शरीर भी बुरा प्रभाव दिखाईर् देने लगता है. आप जैसा खाते हैं वैसा ही बनते हैं. डाइट की कालावधी बहुत छोटी होती है क्योंकि केवल सूप्स, सलाद और फल और सब्जियों के जूस पर हम पूरी जिंदगी नहीं बिता सकते. हमारा आहार हमारी जीवनशैली होनी चाहिए. यह जीवनशैली केवल हमारे शरीर पर ही प्रभाव नहीं डालती इस का हमारे मन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है.

कई बार गलत कारणों के लिए वेट लौस करने की कोशिश की जाती है. स्वस्थ और फिट रहने के लिए आहार पर कंट्रोल करने वाले या उचित आहार के तरीके को अपनी जीवनशैली बनाने वाले लोग बहुत कम होते हैं. ऊंचाई और वजन का गलत तालमेल बैठा कर गलत जानकारी से डाइट या वेटलौस किया जाता है.

गलत धारणा

सच पूछो तो हमारा वजन हमारे शरीर का बहुत छोटा हिस्सा होता है. कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें फैट लौस करना है या वेट लौस. वजन कम होने से जीवन स्वस्थ और आरोग्यसंपन्न होता है आज ऐसी गलत धारणा सभी ओर प्रचलित है कि आप का वजन महत्त्वपूर्ण नहीं होता, आप खुद को कितना स्वस्थ, खुशहाल और आरोग्यसंपन्न महसूस करते हैं यह ज्यादा महत्त्वपूर्ण होता है.

खाने के विषय में अपना वैचारिक नजरिया हमेशा विशाल रखें. इस के लिए हमारा शरीर स्वस्थ और मन शांत होना चाहिए. जब हमारे द्वारा खाए गए आहार में अधिक मात्रा में पोषक घटक हों तब ही यह संभव होता है. हम जहां रहते वहां मौसम के अनुसार खाने से पेट समतल रहता है. हम जहां रहते है वहां उगने वाले अनाज, फल और सब्जियों में होने वाले पोषक घटक वहां के वातावरण द्वारा निर्मित खतरे से हमारी रक्षा करते हैं, इसलिए लोकल फूड को महत्त्व देना जरूरी होता है.

आप कितना खाना चाहते हैं यह अपने पेट को तय करने दें, डाक्टर, मां, प्रशिक्षक, आहारविशेषज्ञ या और किसी को नहीं. हम अपने पेट की मांग के अनुसार खाने लगें तो मोटे होने का डर नहीं और सब से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आप जो बचपन से खाते आए हैं या जो खा कर बड़े हुए हैं वही चीजें खाएं क्योंकि उन चीजों की आप के पेट को आदत होती है. उन से कोई तकलीफ नहीं होती.

ऐसे दिखें तरोताजा

एक  ही बार में पेटभर खाना और बाद में व्रत रखना ये दोनों ही बातें बहुत मुश्किल हैं. इस पर एक मात्र उपाय पाने के लिए आप अपने पेट और मन की सुने और आप की जितनी इच्छा हो उतना ही खाएं. हमारी भूख कभी 1 रोटी से मिट जाती है तो कभी 3 रोटियों से. ऐसे समय आप खाने की मात्रा निश्चित न करें.

हर 2 घंटे में कुछ न कुछ खाना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है. अगर हम यह नियम बना लें तो अपनेआप ही थोड़ा खाने से भी हमारा पेट भर जाएगा. कम खाना हमारा उद्देश्य नहीं है बल्कि पेट को जितने खाने की जरूरत हो उतना खाना ही महत्त्वपूर्ण होता है.

आवश्यकतानुसार खाना महत्त्वपूर्ण होता है. भूख लगना यह जवां बने रहने और स्वास्थ्य की निशानी है. इसलिए सही तरीके से खाएं और अपनी भूख बनाए रखें.

एक बात पर आप जरूर गौर करें कि आप को ठीक तरह से भूख लगती है या नहीं? अगर आप का जवाब हां है तो समझ लीजिए कि आप सही रास्ते पर आ रहे हैं. उचित समय पर खाएं, स्वस्थ और तरोताजा दिखें और इस के लिए अपनी हंगर को समयसमय पर ऊर्जा दे कर प्रदीप्त रखें.

आहार और व्यायाम

सुयोग्य आहार के साथ ही व्यायाम भी जरूरी है. व्यायाम करना हमारे शरीर को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए बहुत जरूरी होता है.  आप को जो व्यायाम अच्छा लगे वही करें.

चाहें तो मार्शल आर्ट के लिए जाएं, डांस करें, दौड़ लगाएं, वेट ट्रेनिंग करें या तैरने जाएं ताकि आप के जोड़ों, पेशियों और हड्डियों को गति मिले. व्यायाम करने के लिए प्रशिक्षण भी जरूरी होता है. हमारा शरीर जितना हलका होगा उतना ही स्वस्थ, मजबूत होगा.

सामान्य तौर पर ऐसा कहा जाता है कि वजन उठाने वाला व्यायाम केवल पुरुष ही करते हैं, लेकिन वजन उठाने वाले व्यायाम करना यानी अपनी मांसपेशियां मजबूत करना होता है. जब कोई महिला कहती है कि वह सुडौल, सुघड़ बनना चाहती है तब उस का संबंध सीधेसीधे मांसपेशियों की सुडौलता से होता है.

सिर्फ चलते रहना ऐसा कहना मानो पहली के बच्चे को अगले 10 सालों तक पहली में ही रहे ऐसा कहना होगा. केवल चलना पूरा नहीं व्यायाम कहलाया जा सकता. कोई चैलेजिंग ऐक्टीविटी करना ही पूरा व्यायाम कहलाएगा. सप्ताह में कम से कम 5 दिनों तक नियमित व्यायाम करें. व्यायाम हमेशा बदलते रहें ताकि आप और आप के शरीर को बोरियत महसूस न हो.

‘ब्रह्मास्त्र’ के कारण PVR और INOX निवेशकों के डूबे 800 करोड़, पढ़ें खबर

अयान मुखर्जी निर्देशित और रणबीर कपूर, आलिया भट्ट व अमिताभ बच्चन के अभिनय से सजी फिल्म ‘‘बम्हास्त्रः भाग एक -शिवा’’ नौ सितंबर को प्रदर्शित हुई और फिल्म को ज्यादातर आलोचकांे की तरफ से नगेटिब प्रतिक्रियाएं मिली. तथा बाक्स आफिस पर भी अच्छे हालात नही रहे. जिसके चलते पीवीआर और  आईनॉक्स के निवेशकों को 800 करोड़ से अधिक का नुकसान हो गया. ज्ञातब्य है कि भारत में पीवीआर और आयनॉक्स मल्टीप्लैक्स सिनेमाघर की सबसे बड़ी चेन है. और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस चेन को शुक्रवार, नौ जून को बाजार पूंजीकरण में कुल मिलाकर 800 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है.

अयान मुखर्जी ने भारतीय पौराणिक कथाओं में वर्णित अजेय विनाशरूपी अस्त्र के रूप में वर्णित  ब्रह्मास्त्र के नाम पर 410 करोड़ की लागत से बनी फिल्म ‘‘ब्रम्हास्त्रः भाग एक’’ का विनाश यह अस्त्र रोक न पाया. यह हालत तब हुई है, जब निर्माता और पीआर टीम दावे कर रही थी कि फिल्म को 23 करोड़ की अग्रिम बुकिंग मिल चुुकी है. सर्वाधिक आश्चर्य की बात यह रही कि हर फिल्म को चार तक की रेटिंग देने वाले फिल्म समीक्षक और विश्लेषक तरण आदर्श ने भी इस फिल्म को दो स्टार की रेटिंग देते हुए इसे सर्वाधिक निराशा वाली फिल्म बता दी.

इतना ही नही दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी फिल्म के बाक्स आफिस को निरायाा की ही तरफ ले जाती हैं. एक दर्शक ने फिल्म देखने के बाद कहा-‘‘यह फिल्म तो अति घटिया तरीके से लिखी गयी सीरियल ‘क्राइम पेट्रोल’ के संवाद और एकता कपूर की साजिशों का मिश्रध है. ’’

‘‘ब्र्रह्मास्त्रः भाग एक शिवा’’ का बाक्स आफिस पर उस वक्त सफाया हुआ है,  जब बौलीवुड अपने अस्तित्व को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रहा है. पिछले कुछ माह से बौलीवुड फिल्में लगातार असफल हो रही हैं और अब ‘ब्रह्मास्त्र’ सबसे बड़ी असफल फिल्म साबित होने जा रही है. अफसोस की बात यह है कि हर किसी को उम्मीद थी कि इस फिल्म से हिंदी फिल्म उद्योग का पुनरुत्थान होगा, पर इस उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है.

410 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ‘‘ब्रह्मास्त्र’’ के साथ रणबीर कपूर,  आलिया भट्ट,  अमिताभ बच्चन,  टॉलीवुड स्टार नागार्जुन, डिंपल कापड़िया, मौनी रौय व शाहरुख खान का नाम जुड़ा हुआ है. तो वहीं इसका निर्माण दिग्गज निर्माता करण जौहर ने किया है. हर किसी को उम्मीद थी कि यह फिल्म हिंदी फिल्म उद्योग का पुनरूत्थान करेगी, मगर यह तो विनायाक बनकर सामने आयी. जी हॉ!अयान मुखर्जी का दिग्भ्रमित करने वाली कहानी, पटकथा व निर्देशन ने फिल्म को डुबाते हुए पूरे फिल्म उद्योग को संकट के मुहाने पर पहुंचा दिया. फिल्म में कई स्तर पर काफी कमियां हैं, मगर इस फिल्म को डुबाने में पीआर टीम ने कम खेल नही खेला.

आज की तारीख में जरुरत इस बात की है कि हर फिल्मकार व कलाकार अपने अंदर स्वयं झांककर देखे कि वह कहां गलती कर रहे हैं. जिस मार्केटिंग  टीम, रचनात्मक टीम व पीआर टीम पर भरोसा कर वह निर्णय ले रहे हैं, उनकी वह टीम कितनी सक्षम व सही है. पीआरओ का काम होता है कि वह अपने ग्राहक (फिल्म व कलाकार)के पक्ष में सकारात्मक माहौल पैदा करते हुए फिल्म व कलाकार का एक ब्रांड बनाए. क्या पीआर टीम यह सब कर पा रही हैं?

वैसे ‘बौयकॉट’ मुहीम के चलते फिल्म विश्लेषकों और बाजार के विश्लेषको ने पहले ही मान लिया था कि यह फिल्म अपनी लागत वसूल नही पाएगी. एलारा कैपिटल ने दो सप्ताह पहले एक मीडिया नोट में कहा था – ‘‘फिल्म का लिए लाइफटाइम बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 130 से 200 करोड़ के बीच रहने का अनुमान है. ’’मगर किसी ने नहीं सोचा था कि फिल्म की इस कदर दुर्गति होगी.

‘‘ब्रह्मास्त्र’’ की असफलता से आम निवेशक अपने नुकसान को देखकर गुस्से में हैं. पीवीआर के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह अपने निवेशकों की नाराजगी को कैसे दूर करें.

GHKKPM: सीरियल के सेट पर ऐसे मस्ती करते हैं सवि और विनायक, फोटो और वीडियो वायरल

सीरियल गुम है किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी में इन दिनों सई और विराट के बीच गुस्सा देखने को मिल रहा है. जहां सई, सवि को विराट से दूर रखने की कोशिश कर रही है तो वहीं विराट, विनायक के इलाज का रास्ता ढूंढ रहा है. हालांकि सीरियल के औनस्क्रीन माहौल से परे सेट पर पर औफस्क्रीन मस्ती होती दिख रही है. दरअसल, सवि और विनायक सीरियल गुम है किसी के प्यार में की कास्ट के साथ मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

सवि है सेट पर लाडली

 

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सीरियल में जहां अभी सई चौह्वाण परिवार से दूर है तो वहीं सेट पर वह सभी के साथ औफस्क्रीन मस्ती करती दिख रही है. हर एक्टर्स सवि के रोल में अरिया सकारिया पर प्यार लुटाते हुए दिख रहे हैं. दरअसल, सीरियल के सेट से सवि यानी अरिया अपडेट्स फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं, जिसे लोग काफी पसंद करते हैं. वहीं इन फोटोज और वीडियोज में वह पाखी, सई ही नहीं बल्कि सीरियल की दूसरी कास्ट के साथ भी मस्ती करती हुई दिखती हैं.

 

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विनायक भी करता है मस्ती

 

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सवि ही नहीं बल्कि सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में के विनायक यानी एक्टर तन्मय ऋषि भी सेट पर मस्ती करने से नहीं कतराते. जहां वह औनस्क्रीन मां पाखी के साथ क्वौलिटी टाइम बिताते हैं तो वहीं सवि के साथ बचपन के खास पलों को एन्जौय करते दिखते हैं. वहीं विराट यानी एक्टर नील भट्ट के साथ भी मस्ती करते हुए नजर आते हैं.

 

 

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विराट पूछेगा सवि का सच

सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक की बात करें तो सई ने विनायक के इलाज के लिए जहां हामी भर दी है तो वहीं विराट के सामने कुछ शर्त रखी है. दरअसल, विनायक का इलाज करने के बाद सई ने उसे सवि और उसकी जिंदगी से जाने के लिए कहा है. हालांकि अपकमिंग एपिसोड में सई, विराट से सवि के पिता का सच पूछते हुए नजर आने वाला है.

Anupama में शिवांगी जोशी की एंट्री! फैंस ने किया ये काम

स्टार प्लस के हिट सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) में इन दिनों सेलिब्रेशन देखने को मिल रहा है. लेकिन इस सेलिब्रेशन के बीच जल्द ही तोषू के अफेयर का सच परिवार के सामने वाला है. वहीं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का सच खुलते ही उसकी गर्लफ्रेंड भी परिवार के सामने आती दिखाई देगी. हालांकि इसी बीच खबरें हैं कि एक्ट्रेस शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi), तोषू की गर्लफ्रैंड के रोल में दिखेंगी. वहीं इस खबर के आते ही शिंवागी जोशी के फैंस ने ऐसा काम कर दिया कि अनुपमा फैंस हैरान हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

शिवांगी संग तोषू की फोटोज हुई वायरल

 

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हाल ही में सीरियल अनुपमा में तोषू की गर्लफ्रैंड संजना की चर्चा चल रही है. हालांकि शो में अभी तक उसका चेहरा सामने नही आया है. लेकिन सोशलमीडिया पर खबरें जोरों पर है कि तोषू की गर्लफ्रैंड और कोई नहीं शिवांगी जोशी हैं, जिसका कारण तोषू के साथ शिवांगी जोशी की रोमांटिक फोटोज का वायरल होना है. दरअसल, इन फोटोज के वायरल होने के बाद शिवांगी के फैंस कयास लगा रहे हैं कि वह अनुपमा में एंट्री करने वाली हैं.

 

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झूठी है फोटोज

 

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शिवांगी जोशी की फोटोज देखकर अनुपमा फैंस एंट्री की खबर को सच मान रहे हैं. हालांकि ऐसा नही है. दरअसल, सोशलमीडिया पर तोषू और शिवांगी जोशी की फोटोज एडिट की गई हैं, जिसमें फोटोज को शिवांगी जोशी के पुराने सीरियल में मोहसिन खान के साथ रोमांटिक फोटोज के साथ एडिट करते हुए तोषू का चेहरा लगा दिया गया है.

अनुपमा को पता चलेगा अफेयर का सच

 

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सीरियल की बात करें तो किंजल की बेटी के नामकरण के सेलिब्रेशन के बीच तोषू के पास उसकी गर्लफ्रेंड का मैसेज आता है, जिसे अनजाने में अनुपमा सुन लेती है. वहीं सच जानने के लिए अनुपमा, तोषू को कमरे में ले जाएगी और अफेयर को लेकर सवाल करेगी. वहीं तोषू सच कुबूल करेगा और अनुपमा से कहेगा कि वह भी एक आदमी है और उसकी भी ज़रूरतें हैं, और चूंकि वह घर पर अपनी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकता था, इसलिए वह बाहर चला गया, जिसे सुनकर अनुपमा हैरान रह जाएगी.

थोड़ी सी जमीं थोड़ा आसमां- भाग 2: क्या थी कविता की कहानी

शाम के नारंगी रंग, स्याह रंग ले चुके थे. आकाश में तारों का झुरमुट झिलमिलाने लगा था, पर रंजन नहीं आया. अकेली बैठी कविता फोन की ओर देख रही थी. तभी फोन की घंटी बजी, ‘‘हैलो, कविता, राघव बोल रहा हूं, कैसी हो? और रंजन कहां है?’’

‘‘वह तो अब तक आफिस से नहीं लौटे.’’

‘‘चलो, आता ही होगा, तुम अपना और रंजन का खयाल रखना.’’

‘‘जी,’’ कहते हुए कविता ने फोन रख दिया.

न चाहते हुए भी कविता दोनों भाइयों की तुलना कर बैठी, कितना फर्क है दोनों में. एक नदी सा शांत तो दूसरा सागर सा गरजता हुआ. मेरी शादी रंजन से नहीं राघव से हुई होती तो…वह चौंक पड़ी, यह कैसा अजीब विचार आ गया उस के मन में और क्यों?

तभी रंजन घर में दाखिल हुआ. कविता ने घड़ी की ओर देखा तो रात के 10 बज चुके थे.

‘‘कविता, मुझे खाना दे दो, मैं बहुत थक गया हूं, सोना चाहता हूं.’’

कविता ने चौंक कर कहा, ‘‘मैं ने तो खाना बनाया ही नहीं.’’

‘‘क्यों…’’ रंजन ने पूछा.

‘‘तुम्हीं तो कह कर गए थे न कि खाना मत बनाना, कहीं बाहर चलेंगे.’’

‘‘ओह, मुझे तो इस का ध्यान ही नहीं रहा…आज तो मैं इतना थका हूं कि कहीं जाना नहीं हो सकता. चलो, तुम जल्दी से मेरे लिए कुछ बना दो,’’ इतना कह कर रंजन कमरे की ओर बढ़ गया और कविता अपना होंठ काट कर रसोई में चली गई.

एक सप्ताह में ही कविता अकेलेपन से घबरा उठी. रंजन रोज घर से जल्दी जाता और बहुत देर से वापस आता. कभी थकान से चूर हो कर सो जाता तो कभी अपने शरीर की जरूरत पूरी कर के. जब यह सब कविता के लिए असहाय हो जाता तो वह अनायास ही राघव की यादों में खो जाती. राघव ने उस से कहा था कि जब बहुत परेशान हो और किसी काम में मन न लगे तो वह करो जो तुम्हें सब से अच्छा लगता हो, यह तुम्हें मन और तन की सारी परेशानियों से मुक्त कर देगा. वह यही करती और सारीसारी शाम नाचते हुए बिता देती थी.

एक शाम रंजन को जल्दी घर आया देख कविता खुशी से चहक कर बोली, ‘‘अरे, आज तुम इतनी जल्दी कैसे आ गए? क्या मेरे बिना मन नहीं लग रहा था?’’

रंजन ने हंस कर कहा, ‘‘ज्यादा खुश मत हो और जल्दी से मेरा सामान पैक कर दो, आफिस के काम से मुझे आज शाम क ो ही दिल्ली जाना है.’’

कविता मायूस हो कर बोली, ‘‘रंजन, तुम भूल गए क्या, कल हमारी शादी की सालगिरह है.’’

रंजन अपने सिर पर हाथ मारते हुए बोला, ‘‘ओह…मैं तो भूल ही गया था, कोई बात नहीं, मेरे वापस आने पर हम सालगिरह मना लेंगे.’’

कविता ने पति को मनाते हुए कहा, ‘‘आप प्लीज, मत जाओ, मैं घर में अकेली कैसे रहूंगी?’’

रंजन ने झल्लाते हुए कहा, ‘‘तुम कोई छोटी सी बच्ची नहीं हो, जो अकेली नहीं रह सकतीं, मेरा जाना जरूरी है.’’

रंजन को जाना था सो वह चला गया. कविता अपनी उम्मीदों और सपनों के साथ अकेली रह गई. सालगिरह के दिन राघव ने फोन किया तो कविता की बुझी आवाज को भांपते हुए उन्होंने पूछा, ‘‘क्या हुआ, कविता, तुम उदास हो? रंजन कहां है?’’

राघव की बातें सुन कर कविता बोली, ‘‘वह आफिस के काम से दिल्ली गए हैं.’’

कविता को धैर्य बंधाते हुए राघव ने कहा, ‘‘तुम परेशान मत हो, मैं और मां कल ही वापस आ रहे हैं.’’

अगली शाम ही राघव और मां को घर के दरवाजे पर देख कविता खिल उठी. सामान रखते हुए राघव बोले, ‘‘कैसी हो कविता?’’ तो कविता ने उन के जाने के बाद रंजन से हुई सारी बातें बता दीं. राघव एक लंबी सांस ले कर बोले, ‘‘मैं तो यहां से यह सोच कर गया था कि इस तरह तुम दोनों को करीब आने का मौका मिलेगा, पर यहां तो सारा मामला ही उलटा दिखता है.’’

कविता ने चौंक कर कहा, ‘‘इस का मतलब आप बिना कारण यहां से गए थे? अब आप मुझे अकेला छोड़ कर कभी मत जाना. आप के होने से मुझे यह एहसास तो रहता है कि कोई तो है, जिस से मैं अपनी बात कह सकती हूं.’’

‘‘अच्छा बाबा, नहीं जाऊं गा.’’

कविता ने हंस कर कहा, ‘‘पर इस बार जाने की सजा मिलेगी आप को.’’

‘‘वह क्या?’’

‘‘आज आप को हमें आइसक्रीम खिलानी होगी.’’

उस शाम बहुत अरसे बाद कविता खुल कर हंसी थी. वह अपने को बहुत हलका महसूस कर रही थी. दोचार दिन में रंजन भी वापस आ गया. आते ही उस ने कविता को मनाने के लिए एक शानदार पार्टी दी. अब वह कविता को भी वक्त देने लगा था. कविता को लगा मानो अचानक सारे काले बादल कहीं खो गए और कुनकुनी धूप खिल आई हो.

तभी एक शाम आफिस से आते ही रंजन ने कहा, ‘‘कविता, मेरा सामान पैक कर दो. मुझे आफिस के काम से लंदन जाना है.’’

कविता ने खुश हो कर पूछा, ‘‘अरे, वाह, कितने दिन के लिए?’’

रंजन नजरें झुका कर बोला, ‘‘6 माह के लिए.’’

कविता के साथ राघव और मां भी अवाक् रह गए.

मां ने रंजन से कहा भी कि 6 माह बहुत होते हैं बेटा, कविता को इस वक्त तेरी जरूरत है और तू जाने की बात कर रहा है, ऐसा कर, इसे भी साथ ले जा.

रंजन ने झल्ला कर कहा, ‘‘ओह मां, मैं वहां घूमने नहीं जा रहा हूं, कविता वहां क्या करेगी? और फिर 6 माह कैसे बीत गए पता भी नहीं चलेगा.’’

कविता कमरे में जा कर शांत स्वर में बोली, ‘‘रंजन, प्लीज मत जाओ. इस वक्त मुझे तुम्हारी बहुत जरूरत है.’’

‘‘क्यों, इस वक्त में क्या खास है?’’

कविता ने सकुचाते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं.’’

रंजन चौंक कर बोला, ‘‘क्या… इतनी जल्दी…’’ फिर कुछ पल खामोश रह कर उस ने कहा, ‘‘सौरी कविता, इस के लिए मैं तैयार नहीं था, लेकिन अब किया क्या जा सकता है.’’

कविता रंजन के सीने पर अपना सिर टिकाती हुई बोली, ‘‘तभी तो कह रही हूं कि मुझे छोड़ कर मत जाओ.’’

रंजन ने उसे अपने से अलग किया और फिर बोला, ‘‘तुम अकेली कहां हो कविता, यहां तुम्हारा ध्यान रखने को मां हैं, भैया हैं.’’

कविता ने चिढ़ते हुए कहा, ‘‘तुम क्यों नहीं समझते कि औरत का घर परिवार उस के पति से होता है, वही न हो तो क्या घर, क्या घर वाले? तुम्हारी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता, रंजन.’’

‘‘तुम्हारे साथ बिताने को तो सारी उम्र पड़ी है, कविता,’’ रंजन बोला, ‘‘पर विदेश जाने का यह मौका फिर नहीं आएगा.’’

इस के बाद कविता कठपुतली की तरह रंजन का सारा काम करती रही, पर उस से एक बार भी रुकने को नहीं कहा. रंजन को एअरपोर्ट छोड़ने भी राघव अकेले ही गए थे. रंजन के जाने के बाद कविता सारा दिन काम करती और खुश रहने का दिखावा करती पर उस की आंखों की उदासी को भांप कर राघव उस से कहते, ‘‘कविता, तुम मां बनने वाली हो, ऐसे समय में तो तुम्हें सदा खुश रहना चाहिए. तुम उदास रहोगी तो बच्चे की सेहत पर इस का असर पड़ेगा.’’

जवाब में कविता हंस कर कहती, ‘‘खुश तो हूं, आप नाहक मेरे लिए परेशान रहते हैं.’’

मां और राघव भरसक कोशिश करते कि कविता को खुश रखें, पर रंजन की कमी को वे पूरा नहीं कर सकते थे. राघव कविता के मुंह से निकली हर इच्छा को तुरंत पूरी करते. इस तरह कविता को खुश रखने की कोशिश में वह कब उस को चाहने लगे, उन्हें खुद पता नहीं चला.

वार पर वार- भाग 2: नमिता की हिम्मत देख क्यों चौंक गया भूषण राज

नमिता किस मुसीबत में फंस गई थी? क्या करे, क्या न करे? वह रातदिन सोचती रहती. जब से भूषण राज ने उस की पीठ को सहलाना शुरू किया था और उस के गालों को उंगलियों के बीच फंसा कर कभी धीरे से तो कभी जोर से चिकोटी काट लेता था, तब से वह और ज्यादा डरने लगी थी.

भूषण राज जब इस तरह की हरकतें करता तो नमिता अपने शरीर को मेज पर टिका देती कि कहीं उस के हाथ उस गोलाइयों को न लपक लें. वह हर मुमकिन कोशिश करती कि भूषण राज उस के साथ कोई गलत हरकत न करने पाए, पर शिकारी भेडि़ए के पंजे अकसर उस के कोमल बदन को खरोंच देते.

एक दिन तो हद हो गई. भूषण राज ने उस के दोनों गालों पर हाथ फिराते हुए आगे की तरफ से ठोढ़ी और गरदन को सहलाना शुरू कर दिया, फिर धीरेधीरे हाथों को आगे बढ़ाते हुए उस के गालों की तरफ झुक आया. जब उस की गरम सांसें नमिता के बाएं गाल से टकराईं तो वह चौंकी, झटके से बाईं तरफ मुड़ी तो भूषण राज का मुंह सीधे उस के होंठों से जा लगा.

उस ने भूखे भेडि़ए की तरह नमिता के दोनों होंठ अपने मुंह में भर लिए. इसी हड़बड़ी में उस के हाथ नमिता की छाती को मसलने लगे. पलभर के लिए वह हैरान सी रह गई. जब उस की समझ में आया तो उस ने झटका दे कर अपनेआप को छुड़ाया और धक्का दे कर उसे पीछे किया.

भूषण राज पीछे हटते हुए मेज से टकराया और गिरतेगिरते बचा.

नमिता कमरे से बाहर जा चुकी थी. अपनी सांसें काबू करने में उसे बहुत देर लगी. उस की आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया था. उस का दिल और दिमाग दोनों सुन्न से हो गए थे. कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?

उधर भूषण राज अपनी सांसों को काबू में करते हुए मन ही मन खुश हो रहा था कि एक मंजिल उस ने हासिल कर ली थी, अब आखिरी मंजिल हासिल करने में कितनी देर लग सकती थी.

नमिता के पास अब 2 ही रास्ते बचे थे. या तो वह नौकरी छोड़ देती या भूषण राज के साथ समझौता कर उस के साथ नाजायज रिश्ता बना लेती. पहला रास्ता आसान नहीं था और दूसरा रास्ता अपनाने से न केवल बदनामी होती, बल्कि उस की जिंदगी भी तबाह हो सकती थी.

भूषण राज उस का ही नहीं, पूरे औफिस का बौस था. नमिता को अब जब भी बौस उसे अपने कमरे में बुलाता, जानबूझ कर देरी से जाती. बारबार कहने के बावजूद भी नमिता कुरसी पर नहीं बैठती, बल्कि खड़ी ही रहती, ताकि जैसे ही बौस अपनी कुरसी से उठ कर खड़ा हो और उस की तरफ बढ़े, वह दरवाजे की तरफ सरक जाए.

भूषण राज चालाक भेडि़या था. उस ने अपना पैतरा बदला. अब वह नमिता को किसी सैक्शन से कोई फाइल ले कर आने के लिए कहता. वह फाइल को ले कर आती तो कहता, ‘‘देखो, इस में एक लैटर लगा होगा… पिछले महीने हम ने मुंबई औफिस से कुछ जानकारी मांगी थी. उस का जवाब अभी तक नहीं आया है. एक रिमाइंडर बना कर लाओ… बना लोगी?’’ वह थोड़ी तेज आवाज में कहता, जैसे धमकी दे रहा हो.

नमिता जानती थी कि भूषण राज जानबूझ कर उसे तंग करने के लिए यह काम सौंप रहा था, ताकि काम न कर पाने के चलते वह उसे डांटडपट सके.

‘‘मैं कर लूंगी सर,’’ कहते हुए वह बाहर निकल गई.

भूषण राज अपनी कुटिल मुसकान के साथ मन ही मन सोच रहा था, ‘कहां तक उड़ोगी मुझ से? पंख काट कर रख दूंगा.’

नमिता ने सब्र से काम लिया. वह संबंधित अनुभाग के अधीक्षक के पास गई और अपनी समस्या बताई. कार्यालय अधीक्षक समझदार था. उस ने नमिता का रिमाइंडर तैयार करा दिया. वह खुशी खुशी फाइल के साथ रिमाइंडर ले कर भूषण राज के चैंबर में घुसी. वह किसी फाइल पर झुका हुआ था, चश्मा नाक पर लटका कर उस ने आंखें उठाईं और त्योरियां चढ़ा कर पूछा, ‘‘तो रिमाइंडर बन गया?’’

‘‘जी सर, देख लीजिए,’’ नमिता आत्मविश्वास से बोली. उस की अंगरेजी और टाइपिंग दोनों अच्छी थीं. भूषण राज ने सरसरी तौर पर लैटर को देखा और घुड़क कर बोला, ‘‘तो ऐसे बनाया जाता है रिमाइंडर? तुम्हें कोई अक्ल भी है.

‘‘यह देखो, यह फिगर गलत है. यह कौलम तो बिलकुल सही नहीं बना है. इस का प्रेजेंटेशन ठीक नहीं है… और यह कौन से फौंट में टाइप किया है… जाओ, दोबारा से बना कर लाओ, वरना समझ लो, अभी प्रोबेशन में हो.

‘‘मन लगा कर काम करो, वरना जिंदगीभर इसी ग्रेड में पड़ी रहोगी. कभी प्रमोशन नहीं मिलेगा.’’

नमिता कुछ देर तो सहमी खड़ी रही. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि ड्राफ्ट में क्या गलती थी. वह तकरीबन रोंआसी हो गई. 2 साल तक भूषण राज ने भले ही उस से एक पैसे का काम नहीं लिया था, पर बातें बहुत मीठी की थीं. अब अचानक उस के बरताव में आए इस बदलाव से नमिता हैरान थी.

अब यह रोज का नियम बन गया था. भूषण राज नमिता को रोज कोई न कोई मुश्किल काम बता देता. वह सही ढंग से काम कर भी देती, तब भी उस के काम में नुक्स निकालता, जोरजोर से सब के सामने उसे डांटता, उस को जलील करता.

‘‘तो यह है तुम्हारी परेशानी की वजह,’’ प्रीति ने लंबी सांस ले कर कहा, ‘‘समस्या बड़ी है… तो क्या सोचा है तुम ने? क्या तुम समझती हो कि इस तरह की लड़ाई से तुम खुद को बचा पाओगी? नामुमकिन है… मैं ने इस दफ्तर में तकरीबन 10 साल गुजारे हैं. मैं उस की एकएक हरकत से वाकिफ हूं.

‘‘मैं जब यहां आई थी, तब शादीशुदा थी. वह केवल कुंआरी लड़कियों पर नजर डालता है. 10 सालों में मैं ने बहुतकुछ देखा है… कितनी लड़कियों को मैं ने यहीं पर हालात से समझौता करते हुए देखा है, कितनी तो जबरदस्ती उस की हवस का शिकार हुई हैं.’’

‘‘मेरे लिए यह अच्छी नौकरी और इज्जत दोनों ही जरूरी हैं. मैं दोनों में से किसी को खोना नहीं चाहती. नौकरी जाने से मेरे मांबाप, भाई और बहन की जिंदगी पर असर पड़ेगा. इज्जत खो दी, तो फिर मेरे जीने का क्या मकसद…’’ नमिता की आवाज में हताशा टपक रही थी.

प्रीति ने उस के हाथ को थामते हुए कहा, ‘‘इस तरह निराश होने से काम नहीं चलेगा. क्या तुम किसी लड़के को प्यार करती हो?’’

नमिता ने चौंकती नजरों से प्रीति को देखा. उस के इस अचानक किए गए सवाल का मतलब वह नहीं समझी, फिर सिर झुका कर बोली, ‘‘उस हद तक नहीं कि उस से शादी कर लूं. कालेज में इस तरह के प्यार हो जाते हैं, जिन का कोई गंभीर मतलब नहीं होता. बस, एकदूसरे के प्रति खिंचाव होता है. ऐसा ही पहले कुछ था… 2 लड़कों के साथ, पर अब नहीं, लेकिन आप ने क्यों पूछा?’’

‘‘यही कि शिद्दत से किसी को प्यार करने वाली लड़की के कदम जल्दी किसी और राह पर नहीं चलते. मैं ऐसा समझ रही थी, शायद तुम अपने प्यार की खातिर भूषण राज के मनमुताबिक नरमदिल नहीं हो पा रही हो, वरना रुपएपैसे के साथसाथ जवानी का मजा कौन लड़की नहीं उठाना चाहती.’’

नमिता के सीने पर जैसे किसी ने घूंसा मार दिया हो. वह कराहते हुए बोली, ‘‘तो क्या मैं भूषण राज के नीचे लेट जाती?

क्या किसी को प्यार न करने वाली लड़की इज्जतदार नहीं होती?’

प्रीति आगे बोली, ‘‘अगर तुम्हारी नौकरी बनी रहेगी तो सारी सुखसुविधाएं तुम्हारे कदमों में बिछी रहेंगी. तुम्हारी सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा. अच्छे घर में शादी हो जाएगी. और क्या चाहिए तुम्हें?’’

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