न बनें डाइट मौम

9वर्षीय मिताली की जोरजोर से रोने की आवाज सुन कर वैशालीजी से रहा न गया. वे दौड़ कर कमरे में गईं, तो देखा उन की बहू सुलेखा मिताली को पीट रही थी. वैशालीजी ने पूछा तो पता चला कि मिताली कई दिनों से पाश्ता खाना चाह रही है, मगर सुलेखा रोज उसे नाश्ते में या तो 1 कटोरी उपमा या फिर दलिया दे रही है, जिस से मिताली पूरी तरह ऊब चुकी है. खाने में भी सुलेखा उसे रोज सिर्फ एक सब्जी जो कभी लौकी, कभी आलूपालक या फिर परवल की होती और रूखी रोटी देती.

सुलेखा हाल ही में अपने पीहर जा कर आई है. तभी से उस ने मिताली की डाइट में यह बदलाव किया है. वहां उसे एक पड़ोसिन से पता चला कि बच्चों को नापतोल कर, कैलोरी का हिसाब देख कर ही खिलाना चाहिए. बस तब से सुलेखा पर भी यह सनक सवार हो गई थी.

वैशालीजी को यह सब अजीब तो बहुत लगा पर कलह के डर से वे चुप रहीं. महीने भर तक ऐसा ही चलता रहा. तभी अचानक एक दिन मिताली बेहोश हो गई. उसे अस्पताल में भरती करवाना पड़ा. मिताली बेहद कमजोर हो चुकी थी. पूछताछ से पता चला कि रोज एकजैसा खाना देने के कारण मिताली को उलटियां आने लगी थीं. मम्मी के डर से कई बार खाना छिपा कर बाहर फेंक देती थी, इसीलिए वह कुपोषण का शिकार हो गई और उस की यह हालत हो गई.

अनावश्यक डाइट कंट्रोल

सुलेखा जैसी मानसिकता आजकल बहुत सी मांओं की मिलेगी. अपने बच्चों की सेहत के प्रति जरूरत से ज्यादा प्रोटैक्टिव नई पीढ़ी की मांओं का रवैया देख कर चिकित्सक और डाइटीशियन भी हैरान हैं.

कोलकाता के बेलव्यू अस्पताल में डाइटीशियन संगीता मिश्रा बताती हैं कि आजकल उन के पास बौडी कौंशस न्यू ऐज मांएं अपने 6-7 वर्षीय बच्चों को भी ला रही हैं और वे उन के भोजन की कैलोरी फिक्स किया हुआ डाइट चार्ट बनवाने में दिलचस्पी ले रही हैं.

मांओं की यह नई पीढ़ी बच्चों में बढ़ती ओबैसिटी के समाचारों से चिंतित हैं. इस के चक्कर में वे अपने अच्छेखासे सेहतमंद और ठीकठाक वजन वाले बच्चों की भी डाइट कंट्रोल करने में जुटी हुई हैं.

डाक्टर संगीता मिश्रा के पास ऐसी कई मांएं आती हैं, जो अपने बच्चों को बे्रकफास्ट के नाम पर सिर्फ 1 उबला अंडा या 2 इडली खाने को देती हैं और खाने में रूखी रोटी और उबली सब्जियां देने की कोशिश करती हैं.

मानसिक दबाव

कौरपोरेट वर्ल्ड भी मांओं के इस भय को खूब भुना रहा है. फैट फ्री फूड प्रोडक्ट्स की बहार है. बच्चों को बातबात पर टोका जा रहा है कि यह मत खाओ, यह मत पीओ. यह ज्यादा कैलोरी वाला फूड है. इस में बहुत फैट है, यहां कीटाणु हैं, वहां वायरस है आदि. हैल्थ ऐक्सपर्ट्स इस स्थिति से काफी चिंतित हैं. उन का मानना है कि बच्चों की वर्तमान पीढ़ी भोजन जैसी चीज, जो रुचिपूर्वक खानी चाहिए, को भी डरडर कर खा रही है. इस से भोजन का जो फायदा सेहत को मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता. बच्चे मानसिक दबाव में रहते हैं.

कुछ समय पहले अमेरिकी मीडिया में ऐसी ही एक डाइट मौम के किस्से खूब चर्चित हुए. मैनहट्टन की इस सोशलाइट महिला द्वारा लिन वीए ने फैशन मैगजीन के लिए लिखे लेख में माना कि वह अपनी बेटी की डाइट पर पहरा रखती थी. वह कई बार अपनी बेटी को खाना नहीं खाने देती थी. एक बार तो उस ने बेटी के हाथ से हौट चौकलेट का भरा गिलास छीन कर फेंक दिया, क्योंकि उसे पता नहीं था कि उस में कितनी कैलोरी है.

अत्याचार से कम नहीं

एक डाइटीशियन बताती हैं कि उन्हें यह देख कर हैरानी होती है कि जो मांएं अपने बच्चों को मेरे पास लाती हैं वे खुद ओवरवेट होती हैं. जब तक घर के बड़े खानपान में सावधानी नहीं बरतते और बच्चों के रोल मौडल नहीं बनते, तब तक बच्चों से ऐसी उम्मीद करना उन पर अत्याचार करने जैसा ही है.

बेहतर यह होगा कि बच्चों पर उन की पसंदीदा चीजें खाने पर पूरी तरह बैन लगाने या जबरदस्ती उन की मरजी के खिलाफ खिलाने के बजाय कुछ महत्त्वपूर्ण बातों पर ध्यान दिया जाए, जो बच्चे को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखेंगी.

इस संबंध में फायदेमंद निम्न बातें जानना जरूरी है:

मैक्रोबायोटिक थेरैपी

मैक्रोबायोटिक में मान्यता है कि शरीर हर 7 वर्ष में खुद को रिप्लेनिश करता है, इसलिए बढ़ते हुए बच्चों में शुरू के 21 साल ज्यादा महत्त्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान बच्चे को हैल्दी भोजन के लिए प्रेरित करने में मातापिता की अहम भूमिका होती है, जो बच्चे सब्जियों, साबूत अनाज, बींस, मेवे, बीज और फलों का नियमित सेवन करते हैं उन की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी होती है. इस से बच्चे क्रोनिक डाइजैस्टिव प्रौब्लम, सर्दीजुकाम, ऐलर्जी, हार्ट डिजीज, औस्टियोपोरोसिस आदि से बचे रहते हैं. इस के लिए मां को बच्चों के लिए रोज अलगअलग फ्लेवर और स्वाद वाला फूड तैयार करना चाहिए ताकि भोजन उन्हें रुचिकर लगे. इस के लिए बच्चों को किचन गार्डन या बागबानी में भी इन्वौल्व किया जा सकता है ताकि उन का मन फलसब्जियां खाने को करे.

टोटल बैन नहीं

बच्चा पिज्जा, बर्गर या अन्य फास्टफूड की जिद करे, तो टोटल बैन के बजाय उसे उस की पसंदीदा चीज दिला कर उस की कमियों के बारे में बताएं. साथ ही, ऐसी चीजों से मिलतेजुलते फूड घर पर तैयार करने की कोशिश करें ताकि उन में सब्जियां, मेवे आदि डाल कर उन्हें हैल्दी बना सकें.

बच्चे के खाने के लिए मार्केट से कुछ ऐसे पैकेज्ड फूड भी लाती रहें, जिन की पैकिंग बेहद आकर्षक होती है और वे खाने में भी फायदेमंद होते हैं. जैसे रैडी टु ईट उपमा, इंस्टैंट ढोकला, इडली मिक्स आदि. बच्चे को चीनी के बजाय मीठे के दूसरे औप्शन भी चखने को दें जैसे आम, खजूर का गुड़, तरबूज, अंगूर, अनार आदि.

फिजिकल ऐक्टिविटी की आदत

मोटापे की मूल वजह है बच्चों में फिजिकल ऐक्टिविटी की कमी. ज्यादातर बच्चे गैजेट्स से चिपके रहते हैं और खेलकूद भूल जाते हैं. एक जिम्मेदार मां के नाते आप को अपने बच्चों को शारीरिक गतिविधियों वाले खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जैसे क्रिकेट, फुटबौल, बैडमिंटन, कबड्डी, खोखो आदि. साथ ही, किसी न किसी बहाने उन्हें दिन में 1-2 बार छोटीमोटी चीजें लाने के लिए बाजार भी भेजना चाहिए. स्कूल बहुत दूर न हो तो पैदल आनेजाने की आदत या फिर साइकिल से आनेजाने की आदत डालें. इस प्रकार बच्चे पर स्ट्रैस न डालते हुए भी आप उसे हैल्दी और फिट रख सकती हैं.

हिसाब किताब: क्यों बदल गई थी भाभी

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डॉक्टर्स और पेशेंट के बीच मजबूत करे रिश्ते कुछ ऐसे

आये दिन डॉक्टर्स और रोगी के परिजन के बीच मारपीट अखबारों की सुर्ख़ियों में होती है, क्योंकि परिजन किसी अपने प्रियजन को आखिरी समय में डॉक्टर के पास ले जाने औरउसके ठीक होने की आस लिए जाते है, पर उसकी मृत्यु हो जाती है, जिसे वे डॉक्टर की लापरवाही समझते है. जबकि ऐसा कम ही होता है. डॉक्टर और मरीज के बीच ऐसा सम्बन्ध हमारे समाज और परिवार के लिए ठीक नहीं. आज डॉक्टर्स भी किसी गंभीर रोगी को इलाज करने से कतराते है, यही वजह है कि कई बार समय से इलाज न होने पर रोगी की मृत्यु हो जाती है. पश्चिम बंगाल, असम में आज गंभीर बीमार वाले रोगी को डॉक्टर्स इलाज नहीं करते और उन्हें किसी दूसरे राज्य में इलाज के लिए भेज देते है. जहाँ इतना सारा पैसा खर्च करने के बावजूद रोगी को इलाज देर से मिल पाती है और अधिकतर मरीज की मृत्यु हो जाती है. ये दुखद है, क्योंकि जितना कोशिश एक परिवार अपने प्रियजन को बचाने के लिए करता है, उतना ही एक डॉक्टर को भी करने की जरुरत होती है. इन संबंधों को सुधारने के लिए डॉक्टर्स और रोगी के परिजन सभी को धीरज धरने की जरुरत होती है.

मकसद है जागरूक करना

इसलिए हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मकसद बेहतर स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना और डॉक्टरों को उनकी समर्पित सेवा के लिए शुक्रिया अदा करना होता है. नेशनल डॉक्टर्स डे की शुरुआत के बारें मेंआइये जानते है.

पहला नेशनल डॉक्टर्स डे वर्ष 1991में मनाया गया था, क्योंकि दिन रात मेहनत कर एक डॉक्टर अपने मरीज को ठीक करता है. कोविड 19 में भी डॉक्टरों ने इलाज करते हुए पूरे भारत में 798 डॉक्टर्स ने अपनी जान गवाई. उस दौरानउन्होंने महीनों खुद को परिवार से दूर रखा, लेकिन वे लगे रहे. इतना ही नहीं, उन्हें आसपास के लोगों नेघर में घुसने नहीं दिया,पीपीए किट पहनकर घंटो अस्पताल में रहना और मरीजो का इलाज करना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन उन्होंने किया और आज भी कर रहे है, जिससे करोड़ों लोगों की जान बच पाई.

बदलती सोच है जिम्मेदार

दरअसल, इस दिन डॉक्टर बिधान चन्द्र राय की जन्मदिन और पूण्यतिथि दोनों ही है. उन्हें उस समय का सबसे बेहतर डॉक्टर माना जाता था. इसलिए इस दिन को डॉक्टर्स के महत्व को याद किया जाता है. मुंबई, अपोलो स्पेक्ट्रा केइंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट,डॉ तुषार राणे कहते है किकुछ वर्ष पहले मरीज, डॉक्टरों को भगवान के स्वरूप मानते थे और डॉक्टर मरीज को ठीक करने के लिए अपनी जान की बाजी लगाते थे, लेकिन बदलते समय के साथ-साथ डॉक्टर और मरीज दोनों की सोच बदली है. अब डॉक्टरों को मरीज, भगवान का दर्जा नहीं देते.ये कहना भी गलत नहीं होगा कि इधर कुछ डॉक्टरों की आकांक्षाएं भी बढ़ी है.वे पहले की तरह निष्ठापूर्वक काम नहीं करते. डॉक्टर्स और मरीज के परिवार के बीच तनाव या झगड़े के मामले जो काफी बढ़ चुके है उसे कम करना आज बहुत जरुरी है. इसका मुख्य कारण डॉक्टर और मरीजों केरिश्तों के बीच संवेदनहीनता का होना है. इसे ठीक करने के तरीके निम्न है,

• डॉक्टर मरीजों की सेवा करते है इसलिए उसके अंदर सहानुभूति और करूणा के साथ मरीजों की देखभाल का गुण होना चाहिए, क्योंकि डॉक्टर-मरीज का रिश्ता पवित्र और आपसी विश्वास, सम्मान पर आधारित होता है.इसका उदाहरण कोरोना महामारी के दौरान सामने आया.कोरोना की संक्रामक बीमारी ने मरीजों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने में डॉक्टरों के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी थी, ऐसी स्थिति में मरीजों को विश्वास दिलाकर उनका इलाज करना काफी मुश्किल था, लेकिन डॉक्टरोंने इस चुनौती पूरी की है. डॉक्टरों की कडी मेहनत से ही कोरोना संक्रमण पर लगाम लग पाया.

• कोविड-19 महामारी ने डॉक्टर और मरीज के रिश्ते में भारी बदलाव लाया है. डॉक्टरों के निदान और उपचार के साथ मरीजों से बातचीत करने का तरीका पूरी तरह से बदला है. इसके अलावा महामारी के दौरान टेलीमेडिसिन एक वरदान रहा है. यह विकल्प डॉक्टर को फोन पर या वीडियो के माध्यम से संवाद करने, मरीज की समस्या के बारे में जानने, उसके चेहरे के भाव, दृश्य संकेतों और शरीर की भाषा पर ध्यान देने और फिर उपचार के अगले कदम पर निर्णय लेने की अनुमति दिया है.इससे मरीजों को कोरोना संक्रमण के जोखिम को कम करने का एक अनोखा तरीका रहा. वे केवल अति आवश्यक होने पर ही अस्पताल गए. ये तभी संभव हो पाया, जब डॉक्टर्स और रोगी के बीच एक अच्छा तालमेल बैठा, जिससे उनकी जरूरतों और उनके समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिली.

• डॉक्टर के अच्छे व्यवहार से रोगी की बीमारी आधी हो जाती है. इलाज के दौरान चिकित्सक के प्रति आत्मीयता का भाव होने पर चिकित्सक के व्यवहार से मरीज मं ठीक होने का विश्वास जागृत होता है. चिकित्सक को मरीज के आर्थिक स्थति को देखते हुए सस्ता और बेहतर इलाज की व्यवस्था करना जरुरी है, ताकि गरीब मरीज दवा व इलाज के अभाव में स्वास्थ्य सेवा से बंचित न रह सके.

• डॉक्टर होने के कारण आपका शेड्यूल बिगड़ सकता है, लेकिनआपको मरीज के बीमारी को उसके लक्षणों सहित वर्णन को सुनना आवशयक है. अन्यथा वे समस्या का खुलकर नहीं बतायेंगे और डॉक्टर उचित उपचार नहीं कर पायेंगे.

• मरीज खुद कितना निर्णय ले सकता है, इसकी जानकारी पता करें, ताकि उसके इलाज की प्रक्रिया उसे समझ में आयें. मरीज की सभी शंकाओं को दूर करने का प्रयास करें. उपचार के फायदे और नुकसान की पहचान में भी उनकी मदद करे.

• डॉक्टरों को मरीज के चेहरे के भावों पर ध्यान देना चाहिए. जरूरत पड़ने पर उसे शांत करने की कोशिश करन जरुरी है. मरीज के वफादार साथी बनने की कोशिश करें. उनकी भावनाओं को सुलझाने में उनकी सहायता करें.

• मरीजों को यह जानकारी होनी चाहिए कि जटिलताएं मेडिकल प्रक्रिया का ही एक हिस्सा होती है और सरकार तथा चिकित्सकों को इन जटिलताओं जानकारी पहले ही मरीज और उनके परिजनों को उपलब्ध करवानी चाहिए इससे मरीजों तथा चिकित्सकों के बीच किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न ही ना हो. दोनों के बीच आपसी सामंजस्य और विश्वास बना रहे.

इसके अलावा डॉक्टर को मरीज का स्वागत मुस्कान के साथ कर मरीज की समस्या को ध्यान से सुनना आवश्यक है,इससे उन्हें कुछ राहत मिलती है. मरीजों को इलाज के बारे में झूठी उम्मीदें देने से बचें, उन्हें बीमारी के बारे में शिक्षित करें, उपचार के दुष्प्रभावों के बारे में बताएं और सुनिश्चित करें कि वे सुरक्षित है.ऐसी चीजे मरीज के साथ विश्वास और मजबूत बंधन बनाने में मदद करेगा. मरीजों को डॉक्टरों के मेडिकल इतिहास की स्पष्ट तस्वीर देनी चाहिए, ताकि उनका आप पर भरोषा हो.

Married Life को Happy बनाने के 11 टिप्स

क्या आप अपने रिलेशन को ले कर अकसर चिंतित रहते हैं? अगर हां तो इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. आप की चिंता का कारण आप का स्वयं का ऐटिट्यूड अथवा आप दोनों की कैमिस्ट्री हो सकती है. ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रख कर आप वैवाहिक जीवन को सुचारु रूप से चला सकते हैं:

1. कम्यूनिकेशन:

अपनी भावनाएं, विचार, समस्याएं एकदूसरे को बताएं. वर्तमान और भविष्य के बारे में बात करें. दूसरे को बताएं कि आप दोनों के बारे में क्या प्लान करते हैं. बोलने के साथ सुनना भी जरूरी है. मौन भी अपनेआप में संवाद है. अपने हावभाव, स्पर्श में भी साथी के प्रति प्यार व आदर प्रदर्शित करें.

2. सारी उम्मीदें एक ही से न रखें:

अगर आप अपने साथी से गैरवाजिब उम्मीदें रखेंगे तो आप का निराश होना लाजिम है. पार्टनर से उतनी ही उम्मीद रखें जितनी वह पूरी कर सके. बाकी उम्मीदें दूसरे पहलुओं में रखें. पार्टनर को स्पेस दें. उस की अच्छाइयोंबुराइयों को स्वीकारें.

3. बहस से न बचें:

स्वस्थ रिश्ते के लिए बहस अच्छी भी रहती है. बातों को टालते रहने से तिल का ताड़ बन जाता है. मन में रखी उलझनों को बढ़ाएं नहीं, बोल डालें. आप का साथी जब आप से झगड़ रहा हो तो चुप्पी न साधें और न ही बुरी तरह से प्रतिक्रिया दें. ध्यान से सुनें और इत्मिनान से समझें. हाथापाई या गालीगलौच तो कतई न करें.

4. खराब व्यवहार को दें चुनौती:

कभी भी साथी के खराब व्यवहार से आहत हो कर अपना स्वाभिमान न खोएं. कई बार हम साथी के व्यवहार से इतने हैरान हो जाते हैं कि अपनी पीड़ा बयां करने के बजाय स्वयं को अपराधी महसूस करने लगते हैं या मान लेते हैं. साथी आप को शारीरिक/मानसिक रूप से चोट पहुंचाता है तो भी आप उसे मना नहीं करते. यह गलत है. खराब व्यवहार न स्वीकारें. इस से रिश्ते में ऐसी दरार पड़ जाती है जो कभी नहीं पटती.

5. एकदूसरे को समय दें:

एकदूसरे के साथ समय बिताने और क्वालिटी टाइम शेयर करने से प्यार बढ़ता है. साथी के साथ ट्रिप प्लान करें. घर पर भी फुरसत के क्षण बिताएं. इस समय को सिर्फ अच्छी बातें याद करने के लिए रखें, इस में मनमुटाव की बातें न करें. फिर देखें इस वक्त को जब भी आप याद करेंगे आप को अच्छा महसूस होगा.

6. विश्वास करें और इज्जत दें:

क्या आप साथी की बहुत टांग खींचते हैं? क्या आप उस पर हमेशा शक करते हैं? यदि ऐसा हो तो रिश्ता कभी ठीक से नहीं चलेगा. एकदूसरे पर विश्वास करना सब से अधिक जरूरी है. एकदूसरे की इज्जत करना भी जरूरी है. विश्वास और इज्जत किसी भी रिश्ते की नींव है. अत: इन्हें मजबूत रखें.

7. कन फौर ग्रांटेड न लें:

शादी हो जाने के बाद भी टेकन फौर ग्रांटेड न लें. साथी की पसंदनापसंद पर खरे उतरते रहने का प्रयास करते रहें. उस के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश करते रहें. जैसे पौधा अच्छी तरह सींचे जाने के बाद ही मजबूत पेड़ बनता है, सही देखभाल से ही वह पनपता है, वैसे ही वैवाहिक जीवन को 2 लोग मिल कर ही सफल बना सकते हैं.

8. यह टीम वर्क है:

पतिपत्नी तभी खुशनुमा जीवन जी सकते हैं जब दोनों टीम की तरह काम करें. दोनों समझें कि एकदूसरे से जीतने के बजाय मिल कर जीतना जरूरी है. सुखी विवाह दोनों पक्षों की मेहनत का परिणाम होता है.

9. एकदूसरे का खयाल रखें:

जीवन की प्रत्येक चीज से ऊपर यदि आप एकदूसरे को रखेंगे तो सुरक्षा की भावना पनपेगी. यह भावना रिश्तों को मजबूत बनाती है. हर पतिपत्नी को एकदूसरे से बेपनाह प्यार और इज्जत चाहिए होती है.

10. ध्यान से चुनिए दोस्त:

आप के दोस्त आप के जीवन को बना या बिगाड़ सकते हैं. दोस्तों का प्रभाव आप के व्यक्तित्व व व्यवहार पर बहुत अधिक होता है. इसलिए ऐसे दोस्त चुनें जो अच्छे हों.

11. वाणी पर संयम:

वैवाहिक जीवन में कई बार आप की वाणी आप के विवाह को खत्म कर देती है. अपने शब्दों का प्रयोग कटाक्ष, गालीगलौच या फबतियां कसने में न करें वरन इन से तारीफ करें, मीठा बोलें. आप का शादीशुदा जीवन अच्छा बीतेगा.

बोया पेड़ बबूल का- भाग 3: क्या संगीता को हुआ गलती का एहसास

मैं अपना सारा सामान समेट कर मायके चली आई और मां को झूठीसच्ची कहानी सुना कर उन की सहानुभूति बटोर ली.

मां को जब इन सब बातों का पता चला तो उन्होंने संदीप को जम कर फटकारा और उधर मैं अपनी सफलता पर आत्मविभोर हो रही थी. भैया ने तो यहां तक कह डाला कि यदि उस ने दोबारा कभी फोन करने की कोशिश की तो वह दहेज उत्पीड़न के मामले में उलझा कर सीधे जेल भिजवा देंगे. इस तरह मैं ने संदीप के लिए जमीन का ऐसा कोई कोना नहीं छोड़ा जहां वह सांस ले सके.

एक दिन रसोई में काम करते हुए भाभी ने कहा, ‘संगीता, तुम्हारा झगड़ा अहं का है. मेरी मानो तो कुछ सामंजस्य बिठा कर वहीं चली जाओ. सच्चे अर्थों में वही तुम्हारा घर है. संदीप जैसा घरवर तुम्हें फिर नहीं मिलेगा.’

‘तुम कौन होती हो मुझे शिक्षा देने वाली. मैं तुम पर तो बोझ नहीं हूं. यह मेरी मां का घर है. जब तक चाहूंगी यहीं रहूंगी.’

उस दिन के बाद भाभी ने कभी कुछ नहीं कहा.

वक्त गुजरता गया और उसी के साथ मेरा गुस्सा भी ठंडा पड़ने लगा. मेरी मां का वरदहस्त मुझ पर था. मैं ने इसी शहर में अपना तबादला करा लिया.

एक दिन पिताजी ने दुखी हो कर कहा था, ‘संगीता, जिन संबंधों को बना नहीं सकते उन्हें ढोने से क्या फायदा. इस से बेहतर है कि कानूनी तौर पर अलग हो जाओ.’

इस बात का मां और भैया ने जम कर विरोध किया.

मां का कहना था कि यदि मेरी बेटी सुखी नहीं रह सकती तो मैं उसे भी सुखी नहीं रहने दूंगी. तलाक देने का मतलब है वह जहां चाहे रहे और ऐसा मैं होने नहीं दूंगी.

मुझे भी लगा यही ठीक निर्णय है. पिताजी इसी गम में दुनिया से ही चले गए और साल बीततेबीतते मां भी नहीं रहीं. मैं ने कभी सोचा भी न था कि मैं भी कभी अकेली हो जाऊंगी.

मैं ने अब तक अपनेआप को इस घर में व्यवस्थित कर लिया था. सुबह भाभी के साथ नाश्ता बनाने के बाद कालिज चली जाती. शाम को मेरे आने के बाद वह बच्चों में व्यस्त हो जातीं. मैं मन मार कर अपने कमरे में चली जाती. भैया के आने के बाद ही हम लोग पूरे दिन की दिनचर्या डायनिंग टेबल पर करते. मेरा उन से मिलना बस, यहीं तक सिमट चुका था.

जयपुर के निकट एक गांव में पति द्वारा पत्नी पर किए गए अत्याचारों की घटना की उस दिन बारबार टीवी पर चर्चा हो रही थी. खाना खाते हुए भैया बोले, ‘ऐसे व्यक्तियों को तो पेड़ पर लटका कर गोली मार देनी चाहिए.’

‘तुम अपना खाना खाओ,’ भाभी बोलीं, ‘यह काम सरकार का है, उसे ही करने दो.’

‘सरकार कुछ नहीं करती. औरतों को ही जागरूक होना चाहिए. अपनी संगीता को ही देख लो, संदीप को ऐसा सबक सिखाया है कि उम्र भर याद रखेगा. तलाक लेना चाहता था ताकि अपनी जिंदगी मनमाने ढंग से बिता सके. हम उसे भी सुख से नहीं रहने देंगे,’ भैया ने तेज स्वर में मेरी ओर देखते हुए कहा, ‘क्यों संगीता.’

‘तुम यह क्यों भूलते हो कि उसे तलाक न देने से खुद संगीता भी कभी अपना घर नहीं बसा सकती. मैं ने तो पहले ही इसे कहा था कि इस खाई को और न बढ़ाओ. तब मेरी सुनी ही किस ने थी. वह तो फिर भी पुरुष है, कोई न कोई रास्ता तो निकाल ही लेगा. वह अकेला रह सकता है पर संगीता नहीं.’

‘मैं क्यों नहीं घर बसा सकती,’ मैं ने प्रश्नवाचक निगाहें भाभी पर टिका दीं.

‘क्योंकि कानूनी तौर पर बिना उस से अलग हुए तुम्हारा संबंध अवैध है.’

भाभी की बातों में कितना कठोर सत्य छिपा हुआ था यह मैं ने उस दिन जाना. मुझे तो जैसे काठ मार गया हो.

उस रात नींद आंखों से दूर ही रही. मैं यथार्थ की दुनिया में आ गिरी. कहने के लिए यहां अपना कुछ भी नहीं था. मैं अब अपने ही बनाए हुए मकड़जाल में पूरी तरह फंस चुकी थी.

इस तनाव से मुक्ति पाने के लिए मैं ने एक रास्ता खोजा और वहां से दूर रहने लायक एक ठिकाना ढूंढ़ा. किसी का कुछ नहीं बिगड़ा और मैं रास्ते में अकेली खड़ी रह गई.

मेरी जिंदगी की दूसरी पारी शुरू हो चुकी थी. जाने वह कैसी मनहूस घड़ी थी जब मां की बातों में आ कर मैं ने अपना बसाबसाया घर उजाड़ लिया था. फिर से जिंदगी जीने की जंग शुरू हो गई. मैं ने संदीप को ढूंढ़ने का निर्णय लिया. जितना उसे ढूंढ़ती उतना ही गम के काले सायों में घिरती चली गई.

उस के आफिस के एक पुराने कुलीग से मुझे पता चला कि उस दिन जो युवती संदीप से मिलने घर आई थी वह उस के विभाग की नई हेड थी. संदीप चाहता था कि उसे अपना घर दिखा सके ताकि कंपनी द्वारा दी गई सुविधाओं को वह भी देख सके. किंतु उस दिन की घटना के बाद मैं ने फोन से जो कीचड़ उछाला था वह संदीप की तरक्की के मार्ग को बंद कर गया. वह अपनी बदनामी का सामना नहीं कर पाया और चुपचाप त्यागपत्र दे दिया. यह उस का मुझ से विवाह करने का इनाम था.

फिर तो मैं ने उसे ढूंढ़ने के सारे यत्न किए, पर सब बेकार साबित हुए. मैं चाहती थी एक बार मुझे संदीप मिल जाए तो मैं उस के चरणों में माथा रगड़ूं, अपनी गलती के लिए क्षमा मांगूं, लेकिन मेरी यह इच्छा भी पूरी नहीं हुई. न जाने किस सुख के प्रलोभन के लिए मैं उस से अलग हुई. न खुद ही जी पाई और न उस के जीने के लिए कोई कोना छोड़ा.

अब जब जीवन की शाम ढलने लगी है मैं भीतर तक पूरी तरह टूट चुकी हूं. उस के एक परिचित से पता चला था कि वह तमिलनाडु के सेलम शहर में है और आज इस पत्र के आते ही मेरा रहासहा उत्साह भी ठंडा हो गया.

कोई किसी की पीड़ा को नहीं बांट सकता. अपने हिस्से की पीड़ा मुझे खुद ही भोगनी पड़ेगी. मन के किसी कोने में छिपी हीन भावना से मैं कभी छुटकारा नहीं पा सकती.

पहली बार महसूस किया कि मैं ने वह वस्तु हमेशा के लिए खो दी है जो मेरे जीवन की सब से महत्त्वपूर्ण निधि थी. काश, संदीप कहीं से आ जाए तो मैं उस से क्षमादान मांगूं. वही मुझे अनिश्चितताओं के इस अंधेरे से बचा सकता है.

Monsoon Special: मानसून का मजा लें तवा राइस के साथ

मानसून के मौसम में हमेशा कुछ अलग खाने का मन करता है. बारिश में आप बाहर का खाना तो खा नही सकती हैं क्योंकि इससे आपकी तबियत खराब होने का डर रहता है. तो क्यों न इस मौसम में घर में ही कुछ स्पेशल बनाते हैं जो खाने में भी हेल्दी और टेस्टी हो. जिसे आप लंच या डिनर किसी भी समय बना सकते है. तो तैयार हो जाइए तवा राइस बनाने के लिए.

सामग्री

1.आधा कप पका चावल

2.दो चम्मच तेल

3.एक चम्मच सरसों

4.एक चम्मच उड़द दाल

5.चुटकी भर हींग

6.पांच-छ: कड़ीपत्ता

7.तीन सूखी टुकडे की हुई कश्मीरी लाल मिर्च

8.एक चौथाई हल्दी

9.स्वादानुसार नमक

10.दो चम्मच भूनी हुई मूंगफली का पाउडर

11.दो चम्मच भुने हुए तिल का पाउडर

यूं बनाए

एक कढ़ाई में तेल गर्म करें. गर्मं हो जाने पर उसमे सरसों और उड़द दाल डालिए. जब सरसों चटखने लगे, इसके बाद हिंग, कड़ीपत्ता और लाल मिर्च डालिए और धीमी आंच में एक मिनट भूनिए.

फिर इसमें चावल, हल्दी, मूंगफली-तिल का पाउडर और नमक डालिए औऱ ठीक ढंग से मिलाइए और धीमी आंच में चार से पांच मिनट तक फ्राई करें. आपका तवा राइस बन कर तैयार हो गया है . अब इसे आप गरमा-गनम सर्व करें और मानसून की मजा लें.

Charu Asopa और Rajeev Sen ने लिया तलाक का फैसला, एक-दूसरे पर लगाए आरोप

सुष्मिता सेन के भैया और भाभी यानी टीवी एक्ट्रेस चारू असोपा (Charu Asopa) और राजीव सेन (Rajeev Sen) की शादी शुरु से ही सुर्खियों में रही है. जहां एक दूसरे से लड़ाई और उसके बाद पैचअप की खबरों से फैंस परेशान हो गए हैं तो वहीं ट्रोलर्स ने ट्रोल करना शुरु कर दिया है. इसी बीच खबरे हैं कि दोनों ने कानूनी तौर पर अलग होने का फैसला ले लिया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

शादी तोड़ने का फैसला

 

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तलाक की खबरों के बीच एक्ट्रेस चारू असोपा ने एक इंटरव्यू में पति के आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा है कि 7 जून को राजीव सेन (Rajeev Sen) को कानूनी तौर पर नोटिस भेजा था, लेकिन राजीव ने उसके बदले में उनपर आरोप लगाते हुए दूसरा नोटिस भेज दिया है. वहीं इस पर अपनी बात रखते हुए एक्ट्रेस ने कहा, “मैं अपनी शादी में आई समस्याओं के बारे में कुछ नहीं बोलना चाहती, लेकिन राजीव के फैलाए झूठ की वजह से मैं इसपर बोलने पर मजबूर हुई हूं. क्योंकि वे झूठ मेरी छवि को खराब कर रहे हैं. हमने शादी को खत्म करने के लिए कानूनी रास्ता अपना लिया है और इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. हर कोई जानता है कि हमारी शादी में पिछले तीन सालों से उतार-चढ़ाव आ रहा है. लेकिन मैं लगतार उन्हें चांस देती रही. ये केवल मेरी बेटी जियाना के लिए है, लेकिन वो एक चांस देते देते तीन साल कब निकल गए कुछ पता नहीं चला. उन्हें मुझपर विश्वास नहीं है और मैं इस चीज को अब ज्यादा झेल नहीं सकती. हमारे बीच कुछ नहीं बचा है और अब मैं अपना रास्ता पूरी तरह से अलग करना चाहती हूं.”

वाइफ पर लगाए आरोप

एक्ट्रेस चारू असोपा ने पति द्वारा लगाए गए आरोपों का खुलासा करते हुए कहा, “राजीव का दावा है कि उन्हें मेरी पहली शादी के बारे में कुछ नहीं पता था. जबकि उन्हें पहली शादी के बारे में पता तो था ही, साथ ही उन्होंने आगे बढ़ने के लिए मेरी सराहना भी की थी. मेरी पहली शादी मात्र 18 साल की उम्र में हुई थी और 2016 में मैं उस शख्स से अलग हो गई थी. राजीव को लगता है कि मैं एक बुरी मां हूं. मैंने उन्हीं की वजह से काम करना छोड़ दिया था, क्योंकि उन्हें ज्यादा पसंद नहीं था.”

बता दें, एक्ट्रेस चारु असोपा और सुष्मिता सेन के भाई की शादी लंबे वक्त से सुर्खियों में रही है. जहां एक वक्त दोनों की लड़ाई की खबरें आती हैं तो वहीं सोशलमीडिया पर दोनों की रोमांटिक फोटोज फैंस को हैरान कर देती है.

अभिमन्यु-अक्षरा के बीच आएगा नया शख्स, Yeh Rishta Kya Kehlata Hai में हुई नई एंट्री

सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) की कहानी इन दिनों फैंस को पसंद आ रही है, जिसके चलते शो एक बार फिर टीआरपी चार्ट्स में अनुपमा को टक्कर देता नजर आ रहा है. हालांकि मेकर्स सीरियल को और भी दिलचस्प बनाने के लिए शो में अभिमन्यू अक्षरा की लाइफ में नए शख्स की एंट्री करवाने वाले हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

अक्षरा और अभि के बीच होगी गलतफहमी

अब तक आपने देखा कि अभिमन्यू और अक्षरा को पार्टी में जाने का न्योता मिलता है है, जिसके चलते दोनो पार्टी में पहुंचते हैं. हालांकि इस बीच दोनों के बीच गलतफहमी होती है कि वह पार्टी में नहीं आए. लेकिन ये गलतफहमी भी जल्द ही दूर हो जाती है.

 

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नया शख्स की पड़ेगी अक्षरा पर नजर

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि नील, अभिमन्यू और अक्षरा की लड़ाई को सुलझाने की कोशिश करेगा. हालांकि आरोही इन सबसे दूर ही रहेगी. इसी के साथ अक्षरा देखेगी कि अभिमन्यू पर सभी लड़कियों की नजर होगी, जिसके चलते उसे जलन महसूस होगी. इसके अलावा आप देखेंगे कि पार्टी में अभिमन्यू और अक्षरा साथ में डांस करेंगे. जहां अस्पताल में इमरजेंसी के कारण अभिमन्यू को जाना पड़ेगा और अक्षरा पार्टी में अकेली रह जाएगी. इसी के साथ एक शख्स अक्षरा के बारे में पूछता है कि वह कौन है, जिसके चलते उसे पता चलता है कि बिड़ला अस्पताल की फिजियोथैरेपिस्ट है, जिसे सुनकर वह खुश होता दिखेगा.

 

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अक्षरा-अभिमन्यू के बीच आएगा ये शख्स!

खबरों की मानें तो नया शख्स अक्षरा से दोस्ती करने की कोशिश करेगा, जिससे अभिमन्यू को जलन होगी. वहीं नया शख्स अक्षरा और अभिमन्यू के रिश्ते के बीच आने की कोशिश करता नजर आएगा. हालांकि अभी नए शख्स का खुलासा नहीं हुआ है कि वह कौन है. लेकिन दर्शक जानने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं.

‘विराट और भवानी’ संग मस्ती करती दिखी ‘पाखी’, नील भट्ट ने कही ये बात

सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की पाखी यानी एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा (Aishwarya Sharma) जहां सोशलमीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार होती हैं तो वहीं फनी Reels के चलते फैंस के बीच सुर्खियों में रहती हैं. वहीं हाल ही में एक्ट्रेस की एक वीडियो में विराट और भवानी भी मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

वीडियो पर विराट ने दिया ये रिएक्शन

 

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सीरियल के सेट से लगातार कॉमेडी Reels शेयर करने वाली एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा ने अपना नया वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह अपने औफस्क्रीन हस्बैंड विराट यानी नील भट्ट और भवानी यानी एक्ट्रेस किशोरी शहाने के साथ मस्ती करती दिख रही हैं. दरअसल, बाइक पर तीनों बैठे हुए पागल पंती करते दिख रहे हैं. वहीं इस फनी वीडियो पर नील भट्ट कमेंट करते हुए लिखते हैं कि पागलपंती भी जरुरी है. इसके अलावा एक्ट्रेस के फैंस भी वीडियो पर जमकर कमेंट कर रहे हैं.

 

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वाइफ को सेट पर इस नाम से बुलाते हैं नील भट्ट

 

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इस फनी वीडियो के अलावा सीरियल के सेट से एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें नील भट्ट अपनी वाइफ ऐश्वर्या शर्मा को सीरियल के सेट पर अजीब-अजीब नाम से बुला रहे हैं. दरअसल, वीडियो में नील भट्ट सेट पर सभी के सामने ऐश्वर्या शर्मा को कहते नजर आ रहे हैं, ‘निकलोडियन, पोगो चैनल और कार्टून नेटवर्क…सुनो..पूरी की पूरी पोगो चैनल है ये.’ एक्टर की इस वीडियो पर फैंस जमकर रिएक्शन दे रहे हैं और एक्ट्रेस की फनी पर्सन का टैग दे रहे हैं.

बता दें, सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में एक्टर नील भट्ट और एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद दोनों को प्यार हुआ और पिछले साल ही दोनों ने शादी के बंधन में बंधने का फैसला किया. फैंस को जहां दोनों की जोड़ी बेहद पसंद है तो वहीं एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा कई बार इस कारण ट्रोलिंग का शिकार भी होती रही हैं.

Monsoon Special: स्नैक्स में परोसें कौर्न कबाब

बारिश के मौसम में अगर आप स्नैक्स में कबाब परोसना चाहते हैं तो कौर्न कबाब की ये हेल्दी और टेस्टी रेसिपी ट्राय करना ना भूले.

सामग्री

250 ग्राम कौर्न

200 ग्राम आलू उबाल कर मसले हुए

चीनी स्वादानुसार

1 छोटा चम्मच कसूरी मेथी

1 बड़ा चम्मच देशी घी

पुदीना चटनी जरूरतानुसार

कालीमिर्च

लालमिर्च पाउडर व नमक स्वादानुसार.

विधि

कौर्न को उबले पानी में ब्लांच कर के मसले हुए आलुओं में मिला कर मिश्रण तैयार कर लें. अब इस मिश्रण में नमक, चीनी, कालीमिर्च, लालमिर्च पाउडर और कसूरी मेथी मिला कर छोटीछोटी टिकियां बना कर देशी घी में सुनहरा होने तक तल लें. फिर पुदीना चटनी के साथ सर्व करें.

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