43 की उम्र में शादी करेंगी टीवी के ये नागिन, 10 साल छोटे हैं बॉयफ्रेंड

पौपुलर सीरियल्स में से एक नागिन 3 (Naagin 3) का हिस्सा रह चुकीं एक्ट्रेस मृणाल देशराज (Mreenal Deshraj) जल्द ही शादी करने वाली है, जिसके चलते वह सुर्खियों में आ गई हैं. वहीं सोशलमीडिया पर उनकी मेहंदी सेरेमनी की फोटोज और वीडियो भी वायरल हो रही है, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं एक्ट्रेस के मेहंदी सेलिब्रेशन की झलक…

एक्ट्रेस की मेहंदी हुई शुरु

जल्द ही एक्ट्रेस मृणाल देशराज दुल्हन बनने वाली हैं, जिसके चलते उनकी शादी की रस्में शुरु हो चुकी हैं. वहीं एक्ट्रेस ने अपनी मेहंदी की एक वीडियो फैंस के साथ शेयर की है, जिसमें वह मेहंदी लगाए शरमाते हुए नजर आ रही हैं. फैंस, एक्ट्रेस की इस वीडियो पर जहां प्यार लुटा रहे हैं तो वहीं सेलेब्स उन्हें बधाई देते हुए नजर आ रहे हैं.

पिया के नाम की लगाई मेहंदी

 

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मेहंदी वीडियो की बात करें तो एक्ट्रेस मृणाल देशराज पिंक कलर के प्लाजो और सूट में बैठकर अपनी मेहंदी फ्लौंट करती हुई नजर आ रही हैं. हालांकि इस वीडियो में उनके दूल्हे राजा नहीं नजर आ रहे हैं. लेकिन फैंस जल्दी से शादी की फोटोज देखने का इंतजार कर रहे हैं.

ऐसे किया था बौयफ्रेंड ने प्रपोज

 

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मेहंदी के अलावा एक्ट्रेस मृणाल देशराज (Mreenal Deshraj) अपनी प्रपोजल की फोटोज भी फैंस के साथ शेयर की थी, जिसमें एक्ट्रेस के बौयफ्रेंड आशिम मथन उन्हें प्रपोज करते दिखे थे. वहीं 43 साल की एक्ट्रेस अपनी रिंग को फ्लौंट करती हुई नजर आई थीं.

बता दें कई सीरियल्स का हिस्सा रह चुकीं एक्ट्रेस मृणाल देशराज प्यार में कई बार धोखा खा चुकी हैं. हालांकि इस बार उन्हें अपना सच्चा प्यार मिल गया है. वहीं फैंस भी एक्ट्रेस की खुशी और शादी की फोटोज देखने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं.

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B Praak के नवजात बच्चे की हुई मौत, सिंगर ने बयां किया दर्द

बीते दिनों वाइफ मीरा बच्चन का बेबी शॉवर सेलिब्रेट करने वाली पौपुलर सिंगर बी प्राक (B Praak) के नवजात बच्चे की मौत हो गई है, जिसका दर्द शेयर करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए शेयर किया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

नवजात बच्चे की मौत पर शेयर किया पोस्ट

 

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हाल ही में डिलीवरी के बाद बी प्राक ने बच्चे की मौत की खबर अपने फैंस को दी है. दरअसल, सिंगर ने सोशलमीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया था, जिसमें लिखा था कि बहुत ही दर्द के साथ मैं बताना चाहता हूं कि हमारे दूसरे बच्चे का निधन हो गया है. जन्म के तुरंत बाद वह इस दुनिया से चल बसा. बतौर पैरेंट्स ये हमारे लाइफ की सबसे दुखद घटना है. हम सभी डॉक्टर्स और स्टाफ के एफर्ट्स का धन्यवाद करते हैं. मैं सभी से गुजारिश करता हूं कि इस दुखद समय में हमारी प्राइवेसी का ख्याल रखा जाए. सभी की प्रार्थना की जरूरत है. आपका प्यारा बी प्राक और मीरा.

 

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बेबी शॉवर किया था सेलिब्रेट

 

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पंजाबी गानों से फैंस का दिल जीत चुके सिंगर बी प्राक ने हाल ही में अपनी वाइफ मीरा बच्चन की प्रैग्नेंसी की न्यूज शेयर की थी, जिसके उन्होंने बेबी शॉवर भी सेलिब्रेट किया था. हालांकि बच्चे की मौत की खबर से सेलेब्स और फैंस उन्हें हौंसला रखने की बात कह रहे हैं और सांत्वना जता रहे हैं.

बता दें, सिंगर बी प्राक (B Praak Wife) ने साल 2019 में मीरा बच्चन के साथ शादी की थी, जिनसे उनका बेटा अदब है. वहीं प्रौफेशनल करियर की बात करें तो ‘रांझा’, ‘फिलहाल 2’, ‘मन भरया’, ‘बारिश की जाए’ जैसे गानों की म्यूजिक वीडियो के अलावा वह अक्षय कुमार की फिल्म केसरी में तेरी मिट्टी भी गा चुके हैं, जो फैंस को काफी पसंद आया था.

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हिसाब किताब- भाग 2: क्यों बदल गई थी भाभी

अस्पताल से लौटने में कभीकभी मुझे देर हो जाया करती थी. ऐसे ही एक रात मैं देर से घर लौटा तो पाया कि घर के फाटक पर ताला लटक रहा था. मैं ने पड़ोसी से चाबी ले कर फाटक खोला. कमरे की चाभी भैया एक खास जगह रख कर जाते थे जिस का सिर्फ मुझे पता था. वहां से चाभी ले कर मैं ने कमरा खोला. बहुत भूख लगी थी. रसोई में जा कर बरतन उलटापुलटा कर के देखे, खाने के लिए कुछ न मिला. खिन्न मन से भैया को फोन लगाया तो पता चला कि वे ससुराल में हैं. अगले दिन दशहरा था, सो मना कर ही लौटेंगे. मैं ने स्वयं रोटी बनानी चाही. जैसे ही गैस जलाई, कुछ सैकंड जली, फिर बंद हो गई.

रात 12 बज गए. अब इतनी रात मुझे बाहर भी कुछ खाने को मिलने वाला न था. ऐसा ही था तो भैया मुझे फोन कर देते, मैं बाहर ही खापी कर आ जाता. खुद तो ससुराल में दावत उड़ा रहे हैं और मुझे भूखा मरने के लिए छोड़ गए. यह सोच कर मुझे तीव्र क्रोध आया, वहीं अपने हाल पर रोना भी. भैया को मुझ से क्या अदावत है, जो इतना दुराव कर रहे हैं. भाभी ही उन की सबकुछ हैं, मैं कुछ नहीं. अगर इतना ही है, साफसाफ कह देते, मैं अपना खाना खुद बना लूंगा. यही सब सोच कर क दिन मैं ने स्वयं पहल की. तनाव में रहने से अच्छा है, मैं खुद ही अलग हो जाऊं.

दशहरा बीतने के बाद भैयाभाभी घर लौट आए.

‘‘आप लोग नहीं चाहते हैं तो मैं अपना खाना खुद बना लूंगा.’’

भाभी ने सुना तो तुनक गईं, बोलीं, ‘‘यह तो अच्छी बात हुई. 6 महीने से हमारा खा रहे थे, अब जब कमाने लगे तो अलग गुजारे की बात करने लगे.’’

‘‘अलग गुजारे के लिए आप लोगों ने विवश किया. वैसे भी 6 महीने खिला कर कोई एहसान नहीं किया. 2 लाख रुपए थे मां के खाते में जिसे आप लोगों ने छल से निकाल लिया.’’ मैं ने भी कहने में कोई कसर न छोड़ी. अब जब अलग रहना ही है तो मन की भड़ास निकालना ही मुझे उचित लगा.

‘‘बेशर्म, हम लोगों पर इस तरह इलजाम लगाते हुए शर्म नहीं आती,’’ भैया चीखे.

‘‘हकीकत है, भैया, आज वह रुपया होता तो मुझे अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ कर अस्पताल की मामूली नौकरी न करनी पड़ती.’’

‘‘तो क्या कलैक्टरी करते?’’

‘‘कलैक्टरी नहीं करता मगर ढंग से नौकरी तो करता. आप ने पिता का फर्ज निभाना तो दूर, मेरा हक मार लिया.’’ उन्हें मेरा कथन इतना बुरा लगा कि मुझे थप्पड़ मारने के लिए उठे. मगर न जाने क्या सोच कर रुक गए.

‘‘आज से तुम्हारा हमारा संबंध खत्म,’’ कह कर भैया अपने कमरे में चले गए. पीछेपीछे भाभी भी पहुंचीं, ‘‘ऐसा भाई मैं ने जिंदगी में नहीं देखा था. बड़े भाई पर इलजाम लगा रहा है. 6 महीने से खिलापिला रहे थे यह सोच कर कि भाई है. उस का यह सिला दिया, एहसानफरामोश.’’ भैया सुनते रहे. तभी बड़ी बहन गीता आ गईं. मैं ने भरसक माहौल बदलने की कोशिश की तो भी वे समझ गईं. जब तक मां जिंदा थीं भैयाभाभी ने उन की खूब आवभगत की. मां पैंशन का आधा हिस्सा उन्हीं लोगों को दे देती थीं. शेष अपने लिए रखतीं. गीता के बच्चों की डिमांड वही पूरा करतीं. भैयाभाभी सिर्फ समय से नाश्ताखाना खिला देते. भाभी को इतना भी फर्ज पहाड़ सा लगता. पीठ पीछे भैया से भुनभुनातीं. दोचार दिन के लिए गीता दीदी आतीं तो भाभी चाहतीं कि दीदी किचन में उन का हाथ बंटाएं. अपने बच्चों का एक भी सामान वे गीता दीदी के बच्चों को देना नहीं चाहती थीं.

एक दिन रात सोने के समय उन का बौर्नविटा खत्म हो गया. दीदी का बड़ा बेटा उस के बिना दूध नहीं पीता था. सो, वे भाभी के पास गईं, ‘भाभी, जरा सा बौर्नविटा ले लेती हूं अपने सोनू के लिए. कल सुबह मंगा लूंगी.’ भाभी हंस कर टालने की नीयत से बोलीं, ‘अपना भी यही हाल है, थोड़ा सा बचा है, खत्म हो जाएगा तो मुश्किल होगी. इन का हाल तो जानती हैं,’ भैया की ओर मुखातिब हो कर बोलीं, ‘कोई सामान लाने में ये कितने आलसी हैं?’ भैया नजरें चुराने लगे.

दीदी को सबकुछ समझते देर न लगी. उन का मन तिक्त हो गया. वे उलटे पांव लौट आईं. मां को पता चला तो उन की त्योरियां चढ़ गईं. भाभी को सुनाने के लिए उठीं तो दीदी ने रोक दिया, ‘क्यों मेरे लिए उन से बैर लेती हो? मैं आज हूं कल अपने ससुराल चली जाऊंगी. रहना तो तुम्हें इन्हीं लोगों के साथ है.’ मां मन मसोस कर रह गईं.

भाभी का मायका आर्थिक रूप से कमजोर था. पिता एक प्राइवेट स्कूल में ड्राइवर थे. मां यह सोच कर उन्हें लाईं कि गरीब घर की बहू रहेगी तो निबाह हो जाएगा. मगर हुआ उलटा. कुछ न देखने वाली भाभी को जब सरकारी नौकरी वाला आर्थिक रूप से संपन्न पति मिला तो वे स्वार्थी और अहंकारी हो गईं. उन्हें लगा कि अब उन्हें किसी की जरूरत नहीं. मायके से उन्हें शह मिलती. उन की मां चाहती थीं कि किसी तरह उन के बेटीदामाद अपना अचल हिस्सा ले कर स्वतंत्र गृहस्थी बसाएं. मां के मरने के बाद भरसक उन का यही प्रयास रहा कि किसी तरह मैं इस मकान का अपना हिस्सा उन्हें बेच दूं. मैं ने मन बना लिया था कि चाहे वे जो भी कर लें, मैं पिताजी की अमानत नहीं छोड़ूंगा. मुझे मानसिक रूप से प्रताडि़त करने के पीछे उन की यही मंशा थी. इस प्रताड़ना से बचने के लिए जब मुझे तनख्वाह मिलने लगी तो उन के यहां खाना छोड़ दिया. यह भी उन्हें बरदाश्त न हुआ. कभी बिजली तो कभी मकान के टैक्स के नाम पर वे मुझे जबतब परेशान करतीं. एक दिन मुझ से रहा न गया, बोला, ‘‘भाभी, सब से ज्यादा बिजली आप खर्च करती हैं. टीवी, फ्रिज, इन्वर्टर, प्रैस सभी आप के पास हैं.’’

‘‘आप भी खरीद लीजिए. मैं ने मना तो नहीं किया है,’’ उन की वाणी में व्यंग्य का पुट था, ‘‘मगर बिजली का बिल आधा आप को देना ही होगा.’’

‘‘आधा क्यों?’’

‘‘कनैक्शन पिताजी के नाम है. घर की आधी हिस्सेदारी आप की भी बनती है. तो बिल भी तो आधा देना होगा.’’

‘‘अच्छा तर्क है आप का. बराबर क्यों?’’ मैं उखड़ा, ‘‘आप ज्यादा खर्च करेंगी, तो ज्यादा देंगी. मैं कम खर्च करूंगा तो कम दूंगा. बिजली के नाम पर मैं सिर्फ एक 15 वाट का सीएफएल और एक पंखे का इस्तेमाल करता हूं.’’ उन्हें मेरा तर्क नागवार लगा. तुनक कर भैया के पास गईं. भैया चुपचाप सुन रहे थे. मुझे अस्पताल की जल्दी थी, सो जल्दीजल्दी कपड़े पहन कर निकल गया. मेरे जाने के बाद दोनों के बीच जो भी खुसुरफुसुर हुई हो, मुझे पता नहीं. हां, 2 दिनों बाद भैया ने मुझे अपना फैसला सुनाया.

ममता: भाग 4- कैसी थी माधुरी की सास

उस की बात सुन कर मम्मीजी ने मुंह बिचका दिया था लेकिन जो घर नौकरों के द्वारा चलने से बेजान हो गया था माधुरी के हाथ लगाने मात्र से सजीव हो उठा था. इस बात को पापाजी और पल्लव के साथ मम्मीजी ने भी महसूस किया था.पल्लव, जो पहले रात में 10 बजे से पहले घर में कदम नहीं रखता था. वही अब ठीक 5 बजे घर आने लगा. यही हाल उस के पापाजी का भी था. एक बार भावुक हो कर पापा ने कहा भी था, ‘बेटा, तुम ने इस धर्मशाला बन चुके घर को पुन:

घर बना दिया. सचमुच जब तक घरवाली का हाथ घर में नहीं लगता तब तक घर सुव्यवस्थित नहीं हो पाता है.’एक बार पापाजी उस के हाथ के बने पनीर के पकवान की तारीफ कर रहे थे कि मम्मीजी चिढ़ कर बोलीं, ‘भई, मुझे तो बाहर के कामों से ही फुरसत नहीं है. इन बेकार के कामों के लिए समय कहां से निकालूं?’‘बाहर के लोगों के लिए समय है, किंतु घर वालों के लिए नहीं,’ तीखे स्वर में ससुरजी ने उत्तर दिया था जो सास के जरूरत से अधिक घर से बाहर रहने के कारण अब परेशान हो उठे थे.‘मैं अपनी पूरी जिंदगी घर में निठल्ले बैठे नहीं गुजार सकती. वैसे ही अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा इस परिवार को भेंट कर ही चुकी हूं, लेकिन अब और नहीं कर सकती,’ आक्रोश में सास ने उत्तर दिया था.‘मम्मीजी, घर में भी दूसरे सैकड़ों जरूरी काम हैं, यदि किए जाएं तो,’ कहना चाह कर भी माधुरी कह नहीं सकी थी. व्यर्थ ही उन का गुस्सा बढ़ जाता और हासिल कुछ भी न होता.

हो सकता है वे अपनी जगह ठीक हों वरना कौन पढ़ीलिखी औरत फालतू के कामों में अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहेगी.मम्मीजी का निर्णय अपना है. पर वह उस सचाई को कैसे भूल सकती है जिस के पीछे उस का भोगा हुआ अतीत छिपा है, तनहाइयां छिपी हैं, रुदन छिपा है, जिस को देखने का, पहचानने का उस के पालकों के पास समय ही नहीं था. उस समय उसे लगता था कि ऐसे दंपती संतान को जन्म ही क्यों देते हैं, जब उन के पास बच्चों के लिए समय ही नहीं है. वह बेचारा उन की प्यारभरी निगाह के लिए जीवनभर तड़पता ही रह जाता है लेकिन वह निगाह उसे नसीब नहीं होती. आज इंसान पैसों के पीछे भाग रहा है, लेकिन पैसों से मन की शांति, प्यार तो नहीं खरीदा जा सकता.एक बच्चे को जब मां की कोख की गरमी चाहिए तब उसे बोतल और पालना मिलता है, जब वह मां का हाथ पकड़ कर चलना चाहता है,

अपनी तोतली आवाज में दुनियाभर के प्रश्न पूछ कर अपनी जिज्ञासा शांत करना चाहता है, तब उसे आया के हाथों में सौंप दिया जाता है या महानगरों में खुले के्रचों में, जहां उस का बचपन, उस की भावनाएं, उमंगें कुचल कर रह जाती हैं. वह एकाकीपन से इतना घबरा उठता है कि अकेले रहने मात्र से सिहर उठता है. उसे याद है कि वह 15 वर्ष तक अंगूठा पीती रही थी, अंगूठा चूसना उसे न केवल मानसिक तृप्ति देता था वरन आसपास किसी के रहने का एहसास भी कराता था. अचानक किसी को सामने पा कर चौंक उठना तथा ठीक से बातें न कर पाना भी उस की कमजोरी बन गई थी. इस कमजोरी के लिए भी सदा उसे ही दोषी ठहराया जाता रहा था.जब सब बच्चे स्कूल में छुट्टी होने पर खुश होते थे तब माधुरी चाहती थी कि कभी छुट्टी हो ही न, क्योंकि छुट्टी में वह और अकेली पड़ जाती थी.

मातापिता के काम पर जाने के बाद घर खाने को दौड़ता था. घर में सुखसुविधा का ढेरों सामान मौजूद रहने के बावजूद उस का बचपन सिसकता ही रह गया था. वह नहीं चाहती थी कि उस की संतानें भी उसी की तरह घुटघुट कर जीते हुए किसी अनहोनी का शिकार हों या मानसिक रोगी बन जाएं.बाद में पल्लव से ही पता चला था कि प्रारंभ में तो मम्मी पूरी तरह घरेलू ही थीं किंतु पापा के व्यापार में निरंतर मिलती सफलता के कारण वे अकेली होती गईं तथा समय गुजारने के लिए उन्होंने समाज सेवा प्रारंभ की. बढ़ती व्यस्तता के कारण घर को नौकरों पर छोड़ा जाने लगा और अब उन्होंने उस क्षेत्र में ऐसी जगह बना ली है कि जहां से लौटना उन के लिए न तो संभव है और शायद न ही उचित.‘‘बेटी, नाश्ता कर ले,’’ मम्मी का स्नेहिल स्वर उसे चौंका गया और वह अतीत की यादों से निकल कर वर्तमान में आ गई.‘‘न जाने तुम ने मम्मी पर क्या जादू कर दिया है कि सबकुछ छोड़ कर तुम्हारी तीमारदारी में लगी हैं,’’ मम्मीजी को आवश्यकता से अधिक उस की देखभाल करते देख पल्लव ने उसे चिढ़ाते हुए कहा था.‘‘क्यों नहीं करूंगी उस की देखभाल? तू तो सिर्फ मेरा बेटा ही है किंतु यह तो बहू होने के साथसाथ मेरी बेटी भी है तथा मेरे होने वाले पाते की मां भी है,’

’ मम्मीजी, जो पास में खड़े बेटे की बात सुन रही थीं, ने अपनी चिरपरिचित मुसकान के साथ कहा था.                  मम्मीजी जहां पहले एक दिन घर में रुकने के नाम पर भड़क जाती थीं, वहीं वह सप्ताहभर से अपने सारे कार्यक्रम छोड़ कर उस की देखभाल में लगी हैं. आज माधुरी को खुद पर ग्लानि हो रही थी. उस के मन में उन के लिए कितने कलुषित विचार थे. वास्तव में उन्होंने सिद्ध कर दिया था कि स्त्री पहले मां है बाद में पत्नी या अन्य रूपों को जीती है. मां रूपी प्रेम का स्रोत कभी समाप्त नहीं होता. ममता कभी नहीं मरती.मम्मीजी उन स्त्रियों में से नहीं थीं जो घरपरिवार के लिए अपना पूर्ण जीवन समर्पित करना अपना ध्येय समझती हैं, वे उन से कहीं परे थीं, अलग थीं. अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने समाज में अपनी एक खास पहचान बनाई थी.अब उस की यह धारणा धूमिल होती जा रही थी कि समाज सेवा में लिप्त औरतें घर से बाहर रहने के लिए ही इस क्षेत्र में जाती हैं. कुछ अपवाद अवश्य हो सकते हैं.उसे लग रहा था कि बच्चों की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद यदि संभव हो सका तो वह भी देश के गरीब और पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए अपना योगदान अवश्य देगी. फिलहाल तो उसे अपनी कोख में पलने वाले बच्चे की ओर ध्यान देना है,

जो उस की जरा सी असावधानी से मरतेरते बचा है. सोचतेसोचते उस ने करवट बदली और उसी के साथ ही उसे महसूस हुआ मानो वह कह रहा है, ‘ममा, जरा संभल कर, कहीं मुझे फिर से चोट न लग जाए.’‘नहीं बेटा, अब तुझे कुछ नहीं होगा. मैं हूं न तेरी देखभाल के लिए,’ माधुरी ने दोनों हाथों से बढ़े पेट को ऐसे थाम लिया मानो वह गिरते हुए अपने कलेजे के टुकड़े को पकड़ रही है. उस के चेहरे पर मातृत्व की गरिमा, अजन्मे के लिए अनोखा, अटूट प्रेम दिखाई दे रहा था.  द्य    मां अत्यंत ही महत्त्वाकांक्षी थीं. यही कारण था कि दादी के बारबार यह कहने पर कि वंश चलाने के लिए बेटा होना ही चाहिए, उन्होंने ध्यान नहीं दिया था. उन का कहना था कि आज के युग में लड़का और लड़की में कोई अंतर नहीं रह गया है.

Summer Special: ओडिशा की नेचुरल खूबसूरती

भारत में कुछ पर्यटन स्थल ऐसे हैं जो अपनी संस्कृति व विरासत के मामले में अनूठे हैं. ओडिशा राज्य उन्हीं में से एक है. आप को जान कर हैरानी होगी कि ओडिशा के 3 प्रमुख दर्शनीय स्थल मितरकर्णिका वन्यजीव अभयारण्य, चिलका झील तथा ऐतिहासिक शहर भुवनेश्वर को संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को की ऐतिहासिक धरोहरों की सूची में शामिल किया गया है.

एक ओर जहां ओडिशा का लहलहाता हरित वन आवरण फलफूलों तथा पशुपक्षियों की व्यापक किस्मों के लिए मेजबान का काम करता है वहीं वहां चित्रलिखित सी पहाडि़यों तथा घाटियों के मध्य अनेक चौंका देने वाले प्रपात तथा नदियां हैं जो विश्वभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. 500 किलोमीटर तटरेखा वाले ओडिशा में जहां बालेश्वर तट, चांदीपुर तट, कोणार्क तट, पारद्वीप तट, पुरी तट हैं जो उत्तर भारत के पर्यटकों को नया अनुभव देते हैं वहीं प्राकृतिक सौंदर्य, लहलहाते हरित वन आवरण, फलफूलों तथा पशुपक्षियों की मेजबानी करते अभयारण्य, जैसे नंदन कानन अभयारण्य, चिलका झील पक्षी अभयारण्य हैं, जो वनस्पतियों और जीवजंतुओं को कुदरती वातावरण में फलनेफूलने का मौका देते हैं.

चिलका झील

एशिया की सब से बड़ी खारे पानी की झील चिलका सैकड़ों पक्षियों को आश्रय  देने के साथसाथ भारत के उन कुछेक स्थानों में से है जहां आप डौल्फिन का दीदार भी कर सकते हैं. राज्य के समुद्रतटीय हिस्से में फैली यह झील अपनी खूबसूरती एवं वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है. अफ्रीका की विक्टोरिया झील के बाद यह दूसरी झील है, जहां पक्षियों का इतना बड़ा जमघट लगता है. चिलका झील ओडिशा की एक ऐसी सैरगाह है जिसे देखे बिना ओडिशा की यात्रा पूरी नहीं हो सकती. सूर्य की किरणें व झील के ऊपर मंडराते बादलों में परिवर्तन के साथ यह नयनाभिराम झील दिन के हर पहर में अलगअलग रूप व रंग में नजर आती है.

फूलबानी

पूर्वी भारत के मध्य ओडिशा राज्य में बसा फूलबानी शहर प्राकृतिक दृष्टि से काफी खूबसूरत स्थान है. चारों ओर पहाड़ों से घिरे फूलबानी के 3 ओर पिल्लसंलुकी नदी बहती है. फूलबानी, कंधमाल जिले का मुख्यालय है जहां आ कर पर्यटकों को सुकून मिलता है. भीड़भाड़ से दूर इस इलाके में अपूर्व शांति है. पहाडि़यों की चोटियों से फूलबानी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है. यहां सितंबर से मई के बीच कभी भी जाया जा सकता है. भुवनेश्वर यहां का निकटतम हवाई हड्डा है जबकि बहरामपुर निकटतम पूर्वीय तटीय रेलवेलाइन पर स्टेशन है जो भारत के मुख्य नगरों से जुड़ा हुआ है.

ओडिशा का कंधमाल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथसाथ हस्तशिल्प के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां के दरिंगबाड़ी को ओडिशा का कश्मीर कहा जाता है. दिलोदिमाग को तरोताजा करने के लिए यह नगर श्रेष्ठ है. यहां का वन्य जीवन, पहाड़ व झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं.

फूलबानी से 98 किलोमीटर दूर कलिंग घाटी है. इस घाटी के पास ही दशमिल्ला नामक स्थान है जहां पर सम्राट अशोक ने कलिंग का प्रसिद्ध युद्ध लड़ा था. यह घाटी सिल्वी कल्चर गार्डन व आयुर्वेदिक पौधों के लिए भी जानी जाती है.

चंद्रभागा समुद्री तट

ओडिशा का चंद्रभागा समुद्री तट सैरसपाटे, नौका विहार व तैराकी के लिए बेहतरीन जगह है. अगर आप अपने कुछ खास पलों को खूबसूरत यादगार का रूप देना चाहते हैं तो यहां जरूर आएं. कोणार्क का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर जिसे वहां से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस तट पर वार्षिक चंद्रभागा मेला लगता है. इस दौरान यह तट पर्यटकों, रंगों व प्रकाश से जीवंत हो उठता है. यहां पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर है. इस के अतिरिक्त यह पुरी, कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, विशाखापट्टनम आदि शहरों के रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है.

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Breast Cancer: स्थिति, लक्षण और उपचार जानकर इस तरह रहें सुरक्षित

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) हॉर्मोन, व्यवहार और पर्यावरण संबंधी अलग-अलग तरह के घटकों से जुड़ा रहा है. ब्रेस्ट कैंसर होने का सबसे संभावित कारण है व्यक्ति के जेनेटिक कोड और उनके आस-पास के परिवेश के बीच जटिल अंतःक्रिया. ब्रेस्ट कैंसर भारतीय महिलाओं को प्रभावित करने वाले सबसे प्रमुख कैंसर में से एक है. भारतीय महिलाओं को होने वाले सभी प्रकार के कैंसर में ब्रेस्ट कैंसर का अनुपात 14% है. भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों में से 60% कैंसर के बाद जीवित रहते हैं.

डॉ. मंजू गुप्ता, सीनियर कंसलटेंट और प्रसूति विशेषज्ञ बता रहीं है ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण और उपचार.

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण

1. लिंग के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं, पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की आशंका अधिक रहती है.

2. हमारी आयु की अवस्था से हमारे शरीर में ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम का काफी कुछ पता चलता है.

3. परिवार में ब्रेस्ट कैंसर होने का इतिहास या कोई वंशानुगत जीन जिससे कैंसर का खतरा बढ़ता है.

4. बहुत ज्यादा विकिरण (रेडिएशन) के संपर्क में रहने से ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है.

5. अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखना और मोटा होने से ब्रेस्ट कैंसर का आपका खतरा बढ़ जाता है.

6. अधिक उम्र में रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) से ब्रेस्ट कैंसर का आपका जोखिम बढ़ जाता है.

7. रजोनिवृत्ति पश्चात हॉर्मोन थेरेपी. रजोनिवृत्ति के संकेतों और लक्षणों के उपचार के लिए एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के संयोजन के साथ हॉर्मोन थेरेपी चिकित्सा कराने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होने का जोखिम अधिक रहता है.

ब्रेस्ट कैंसर के अनेक रूप होते हैं, लेकिन डक्टल कार्सिनोमा सबसे अधिक बार-बार होने वाला कैंसर है. ब्रेस्ट के निकट मिल्क डक्ट्स में उत्पन्न होने वाले ट्यूमर (गाँठ) को डक्टल कार्सिनोमा कहा जाता है. वे इनवेसिव या नॉन-इन्वासिव हो सकते हैं और उनमें शरीर के दूसरे हिस्सों में फ़ैल जाने की शक्ति होती है. कोई गाँठ, स्तन के आकार में बदलाव, या निप्पल के स्वरूप में बदलाव, ये सभी ब्रेस्ट कैंसर के प्रथम चरण के संकेत हैं, जो सबसे अधिक होता है. ट्यूमर निकालने की सर्जरी के बाद कैंसर की बची-खुची कोशिकाओं को मारने के लिए आम तौर पर रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) की जाती है.

दूसरे चरण में ब्रेस्ट कैंसर इतना बढ़ गया होता है कि यह शरीर के अन्य हिस्सों में फ़ैल जाता है. इस स्थिति में ट्यूमर को जितना संभव हो उतना काट कर निकालने के लिए सर्जरी, कैंसर के बची-खुची कोशिकाओं को मारने के लिए कीमोथेरेपी, और कैंसरग्रस्त उतकों को मारने के लिए रेडिएशन थेरेपी, ये सभी उपचार योजना के हिस्से हैं.

तीसरे चरण का ब्रेस्ट कैंसर प्राथमिक ट्यूमर के स्थान से बाहर जा चुका होता है और परम्परागत उपचार से इसके ठीक होने की संभावना कम होती है.

आस-पास के कुछ उतकों को निकालने के लिए सर्जरी, किसी बचे-खुचे कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने के लिए रेडिएशन थेरेपी, और कोई अन्य विकल्प न होने पर कीमोथेरेपी, ये सभी संभावित उपचार हो सकते हैं.

उपचार

ब्रेस्ट कैंसर के हर मामले के लिए एक समान उपचार काम नहीं आता है, क्योंकि यह रोग की अवस्था, रोगी की उम्र, स्वास्थ्य का इतिहास, और अन्य घटकों के आधार पर अलग-अलग होता है. ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर सम्बंधित रोगी के उपचार के लिए सर्जरी एक विकल्प है. उपचार के आधार पर अनेक प्रकार के ऑपरेशन उपलब्ध हैं. कुछ प्रकार की सर्जिकल प्रक्रिया में ब्रेस्ट को काट कर हटा दिया जाया है.

रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) – ट्यूमर की कोशिकाओं को रेडिएशन से मार दिया जाता है.

कैंसर की कोशिकाओं के लिए कीमोथेरेपी एक औषधीय उपचार है जो उन्हें मार देता है. हालांकि, यह उपचार आम तौर पर अन्य उपचारों के साथ-साथ किया जाता है.

हॉर्मोन थेरेपी – हॉर्मोन थेरेपी की अनुशंसा उन लोगों के लिए की जाती है जिन्हें हॉर्मोन को लेकर संवेदनशील ब्रेस्ट कैंसर है. यह उपचार ख़ास हॉर्मोनों के संश्लेषण को रोक कर क्रिया करता है, जो कैंसर की वृद्धि को धीमा कर देता है.

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Summer Special: मैक्सिकन कौर्न चीज चिली डाईनामाइट्स

अगर आप स्नैक्स में नई डिश ट्राय करना चाहते हैं तो मैक्सिकन कौर्न चीज चिली डाईनामाइट्स आपकी फैमिली को आसानी से बनाकर खिला सकते हैं.

सामग्री

– 4 बड़े चम्मच जैलेपीनो कटे

– 1 कप आलू उबले

– 3 बड़े चम्मच मैदा

– 1/2 कप चैडर चीज कसा

– 1/2 कप मोंटेरे जैक चीज

– 2 बड़े चम्मच पार्सले कटे

– 2 बड़े चम्मच अखरोट कटे

– 1 बड़ा चम्मच पैत्रिका पाउडर

– 1 बड़ा चम्मच कौर्न

– 1 कप ब्रैडक्रंब्स कोटिंग के लिए

– 500 एमएल तेल फ्राई करने के लिए

– कालीमिर्च व नमक स्वादानुसार

विधि

एक बाउल में सभी सामग्री को मिक्स कर 30 मिनट के लिए फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें. ठंडा होने पर सामग्री की बौल्स बनाएं और ब्रैडक्रंब्स से कोटिंग कर 1 घंटे के लिए फ्रीजर में रख दें. फिर गोल्डन ब्राउन होने तक तेल में फ्राई करें. कटे पार्सले से बौल्स की गार्निशिंग करें. मैयोनीज और कैचअप के साथ गरमगरम सर्व करें.

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GHKKPM: सई के साथ मिलकर सम्राट का बर्थडे मनाएगी पाखी, विराट का जीतेगी दिल

स्टार प्लस के सीरियल गुम है किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) के मेकर्स जहां इन दिनों ट्रोलिंग का सामना कर रहे हैं तो वहीं लेटेस्ट ट्रैक के कारण सीरियल की टीआरपी बढ़ती नजर आ रही है. इसी बीच सीरियल में कई नए ट्विस्ट और टर्नस आने वाले हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

सई का साथ देगी पाखी

 

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अब तक आपने देखा कि सरोगेसी के जरिए विराट के बच्चे की मां बनने के लिए पाखी, सई का दिल जीतने की कोशिश कर रही है. इसके कारण वह सई के हर फैसले में उसका साथ दे रही है, जिसमें भवानी का सामना करने के लिए भी वह तैयार है. इसी कारण वह सम्राट का बर्थडे मनाने के लिए भी तैयार हो जाती है.

 

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पाखी की साड़ी में लगेगी आग

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि भवानी के हां करने के बाद पूरा परिवार सम्राट का बर्थडे मनाएगा. इस दौरान पाखी की साड़ी में आग लग जाएगी और विराट आग बुझाने की कोशिश करता दिखेगा. इसी के चलते पाखी को विराट के साथ बिताए पुराने पल याद आएंगे और उसे पाने का इरादा पक्का कर लेगी. वहीं सई, सम्राट के बर्थडे के मौके पर सरप्राइज प्लान करेगी, जिससे विराट बेहद खुश होगा.

 

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पाखी को आएगी गुस्सा

इसके अलावा आप देखेंगे कि सई और विराट के एक कमरे में ना सोने का पाखी फायदा उठाने की कोशिश करेगी और विराट के लिए चाय लेकर जाएगी. सई की नाराजगी भूलकर विराट उसके साथ खूबसूरत पल बिताएगा. वहीं सई और विराट की नजदीकियां देखकर पाखी को गुस्सा आएगा और उसे लगेगा कि दोनों के बीच सब ठीक हो गया है, जिसके चलते वह दोनों के रिश्ते में दरार डालने की कोशिश करेगी.

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मायके की बेइज्जती से टूटेगी Anupama, क्या देगी ‘अनुज की भाभी’ को जवाब

सीरियल अनुपमा (Anupama) में इन दिनों फैमिली ड्रामा दर्शकों का दिल जीत रहा है. जहां अनुज की भाभी बरखा कपाड़िया हाउस में अपना हक जमाने की सोच रही है तो वहीं बा और वनराज, बरखा और उसके पति के इरादों को भांप गए हैं, जिसके चलते अपकमिंग एपिसोड में नया बवाल होते हुए दिखने वाला है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

वनराज ने दिया अंकुश को जवाब

 

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अब तक आपने देखा कि बरखा की पार्टी रोकने के बाद अनुपमा घर में पूजा करवाती है. वहीं अनुज, अनुपमा के नाम की नेमप्लेट घर के बाहर लगवाने के लिए कहता है, जिसे देखकर बरखा गुस्से में नजर आती है. वहीं बापूजी, अनुपमा से बात करते हुए नजर आती है और अनुज की तारीफ करती है. इसके अलावा, अंकुश और वनराज एक-दूसरे को बातों ही बातों में ताना मारते हुए नजर आते हैं.

 

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बापूजी का होगा अपमान

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि बापूजी को डकार आ जाएगी, जिसके बाद बरखा की मेहमान उनकी बेइज्जती करेगी. वहीं पिता के बेइज्जती होते देख वनराज को गुस्सा आ जाएगा, जिसके चलते बरखा-अंकुश से वनराज की बहस हो जाएगी. इसी बीच अनुपमा आकर बापूजी का साथ देती है और अतिथि और बरखा को बड़ों के साथ व्यवहार करने की चेतावनी देगी. साथ ही बापूजी से बरखा के मेहमान को माफी के लिए कहेगी.

मायके की बेइज्जती से टूटेगी अनुपमा

 

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इसके अलावा आप देखेंगे कि बरखा की मेहमान बापूजी से माफी मांगेगी, जिसके कारण बरखा गुस्से में नजर आएगी. वहीं अनुपमा, शाह को रात के खाने के लिए रुकने के लिए कहेगी. लेकिन वनराज कहेगा कि बरखा ने उनका अपमान करके खाना खिला दिया है. वहीं वह बापूजी और पूरे परिवार के साथ चला जाएगा. परिवार को जाता देख अनुपमा टूट जाएगी. हालांकि देखना होगा कि वह बरखा को कैसे सबक सिखाती है.

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दहकता पलाश: भाग-3

पूर्व कथा

प्रवीण से अचानक मुलाकात होते ही अर्पिता की कालेज के दिनों की यादें ताजा हो गईं. तब वह प्रवीण को चाहने लगी थी. उधर प्रवीण के दिल में भी उस के लिए प्यार उमड़ने लगा था. मगर प्रवीण के पिता के ट्रांसफर की खबर ने 2 दिलों को एक होने से पहले ही जुदा  कर दिया. कालेज की पढ़ाई के बाद अर्पिता की शादी आनंद के साथ हो गई. शादी के बाद आनंद का अकसर टुअर पर रहना उसे बेहद खलता था. मगर प्रवीण से मिल कर उस के दिल में दबी प्यार की चिनगारी भड़क उठी. एक रोज प्रवीण ने उसे सांस्कृतिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया तो वह मना न कर पाई. प्रवीण का साथ पा कर वह बेहद खुश थी.

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रात के लगभग 12 बजे दोनों वहां के गैस्ट हाउस वापस आ गए. चौकीदार दरवाजा बंद कर के अपने कमरे में सोने चला गया. अर्पिता अपने कमरे में जाने लगी तो प्रवीण भी उस के पीछे आ गया और दरवाजा बंद कर के उस ने अर्पिता को अपनी बांहों में भर लिया. अर्पिता के अंगअंग में पलाश की कलियां चटक कर फूल बनने लगीं और वह पलाश के दहकते फूलों की तरह पलंग पर बिछ गई.

2 दिन और 2 रातें प्यार की बड़ी खुमारी में बीत गईं. अर्पिता को लग रहा था कि जैसे वह हनीमून पर आई है. प्यार क्या होता है, कितना रोमांचक और सुखद होता है यह तो उस ने पहली बार ही जाना है. उस का अंगअंग निखर आया. तीसरे दिन सुबह प्रवीण और वह वापस आ गए.

इस के बाद अकसर ही शनिवार रविवार को आसपास के छोटे छोटे टूरिस्ट स्पौट्स, जहां ज्यादा लोगों का आनाजाना नहीं होता था, प्रवीण अर्पिता को ले कर चला जाता. दोनों गैस्ट हाउस या फिर होटल में रुकते. अब तो

2 कमरों की औपचारिकता भी समाप्त हो गई थी. अर्पिता के गले का मंगलसूत्र देख कर गैस्ट हाउस के चौकीदार उसे प्रवीण की पत्नी ही समझते. दोनों 2 दिन साथ रहते मौजमस्ती करते और वापस आ जाते. पड़ोसियों को लगता अर्पिता मां के यहां गई है और मां से अर्पिता किसी सहेली के घर जाने का बहाना कर देती.

धीरेधीरे 7 महीने निकल गए. अर्पिता और प्रवीण का मिलनाजुलना बदस्तूर जारी था. प्रवीण कभीकभी सरकारी काम से इंदौर या रायपुर चला जाता तो अर्पिता से जुदाई के ये दिन काटे नहीं कटते थे. ऐसे ही समय कटता रहा और आनंद को कैलिफोर्निया गए 10 महीने बीत गए. अर्पिता का मन कभीकभी घबरा जाता. वह प्रवीण के साथ इतनी आगे बढ़ गई है, अब लौट कर आनंद के साथ कैसे निभा पाएगी? अगर वह आनंद को तलाक दे दे तो क्या प्रवीण उस से शादी कर लेगा? अब प्रवीण के बिना जिंदगी बिताने के बारे में वह सोच भी नहीं सकती और ऐसी हालत में आनंद के साथ अपने रिश्ते को जबरन ढो भी नहीं सकती. अर्पिता रातदिन सोच में डूबी रहती. वह कैसे दोराहे पर आ कर खड़ी हो गई थी. एक ओर आनंद मम्मीपापा, समाज और दूसरी ओर प्रवीण का साथ.

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एक दिन प्रवीण इंदौर गया हुआ था. अर्पिता का मन उदास था. बुटीक में काम निबटा कर अर्पिता पार्लर चली गई. सोचा, फेस मसाज करवा कर थोड़ा रिलैक्स फील करेगी. पार्लर में भीड़ थी, अर्पिता बाहर के रूम में सोफे पर बैठ कर मैगजीन पढ़ने लगी.

‘‘कैसी हो अर्पिता?’’

अपना नाम सुन कर अर्पिता ने चौंक कर सिर उठाया. देखा तो सामने नीलांजना खड़ी थीं, जो उसे पचमढ़ी में मिली थीं. नीलांजना अर्पिता के पास ही सोफे पर बैठ गईं.

‘‘जी मैं ठीक हूं. आप कैसी हैं?’’ अर्पिता ने मुसकरा कर पूछा. 2 मिनट तक दोनों के बीच औपचारिक बातें होती रहीं, फिर अचानक नीलांजना असल बात पर आ गईं.

‘‘प्रवीण को कब से जानती हो?’’ उन्होंने पूछा.

‘‘जी वह मेरा कालेज के समय का दोस्त है,’’ अर्पिता को उन के हावभाव देख कर आशंका हो रही थी कि वे उस के बारे में ही बात करना चाह रही हैं.

‘‘मैं इधरउधर की बात न कर के सीधी बात पर आती हूं अर्पिता. प्रवीण ठीक आदमी नहीं है. उस का चरित्र अच्छा नहीं है. तुम उस से दूर ही रहो तो ठीक होगा. तुम्हारा उस के साथ अकेले पचमढ़ी जाना और वहां तुम दोनों के एकदूसरे के प्रति जो ऐक्सप्रेशंस थे उस से मैं समझ गई थी कि तुम उस की दोस्त से आगे बढ़ कर कुछ और भी हो,’’ नीलांजना की गहरी आंखें अर्पिता के मन में छिपे चोर को साफ देख रही थीं.

अर्पिता अपनी चोरी पकड़ी जाने से हड़बड़ा गई. नीलांजनाजी ने इतने दृढ़ और विश्वास भरे स्वर में यह बात कही थी कि क्षण भर को अर्पिता को समझ ही नहीं आया कि उन की बात कैसे झुठलाए.

क्षण भर बाद खुद को संयत कर के उस ने कमजोर स्वर में प्रतिवाद किया, ‘‘मैं उसे सालों से जानती हूं. वह तो किसी लड़की की ओर आंख उठा कर भी नहीं देखता था.’’

‘‘तब की बात मैं नहीं जानती. मैं तो आज के प्रवीण को जानती हूं. प्रवीण के कई शादीशुदा औरतों से संबंध हैं. रायपुर में जब यह 6 माह की ट्रेनिंग पर आया था तो वहां के भी एक अधिकारी की खूबसूरत बीवी को अपने जाल में फांस लिया था. यह अब भी वहां जा कर उस से मिलता है,’’ नीलांजना ने बताया तो अर्पिता को लगा कि जैसे उस के चारों ओर एकसाथ सैकड़ों धमाके हो गए हैं. वह सन्न सी बैठी रह गई.

‘‘लेकिन अगर ऐसा ही है तो उसे कुंआरी लड़कियों की क्या कमी, वह शादीशुदा औरतों के पीछे क्यों पड़ेगा भला?’’ अर्पिता ने नीलांजना को गलत साबित करना चाहा.

‘‘प्रवीण बहुत शातिर है. कुंआरी लड़की शादी के सपने देखने लगती है और फिर छोड़े जाने पर व्यर्थ का बवाल खड़ा करती है, जो उस की छवि को खराब करेगा. शादीशुदा औरतों को अगर वह छोड़ भी देता है तो वे आंसू बहा कर चुप रह जाती हैं. अपनी और पति व घर की इज्जत की खातिर वे तमाशा खड़ा नहीं करतीं. बस प्रवीण का काम बन जाता है. जैसा कि उस ने इंदौर के एक बिजनैसमैन की पत्नी के साथ किया.

‘‘पति की अनुपस्थिति में उस के साथ खूब घूमाफिरा, मौजमस्ती की और फिर भोपाल आ गया. वह बेचारी आज भी उस की याद में रो रही है. जहां तक शादी का सवाल है, उस की महत्त्वाकांक्षा बहुत ऊंची है. उस की इच्छा किसी बहुत बड़े अधिकारी की आई.ए.एस. बेटी से ही शादी करने की रही है. इसीलिए 2 महीने पहले उस ने इंदौर के एक उच्च अधिकारी की आई.ए.एस. बेटी नीलम से सगाई कर ली है,’’ नीलांजना ने संक्षेप में बताया.

‘‘क्या प्रवीण की सगाई हो गई?’’ अर्पिता बुरी तरह चौंक कर बोली. उसे लगा जैसे बिच्छू ने डंक मार दिया हो.

नीलांजना बोलीं, ‘‘तुम तो उस से दोस्ती का दम भरती हो, तुम्हें उस ने बताया नहीं कि उस की शादी पक्की हो गई है? तभी तो आजकल उस के इंदौर के टूर बढ़ गए हैं.’’

प्रवीण उस से इतनी बड़ी बात छिपाएगा, उसे धोखे में रखेगा, इस का उसे जरा भी अंदेशा नहीं था. उस का सिर चकराने लगा.

‘‘आप प्रवीण के बारे में इतना सब कैसे जानती हैं?’’ अर्पिता ने थके से स्वर में पूछा.

‘‘रायपुर वाली घटना तो मेरी आंखों के सामने की ही है और इंदौर वाली…’’ नीलांजना एक गहरी सांस भर कर बोलीं, ‘‘वह बिजनैसमैन और कोई नहीं मेरा भाई है. तभी प्रवीण मुझे देखते ही सकपका जाता है. प्रवीण के चक्कर में पड़ कर अपना घरसंसार व्यर्थ में बरबाद मत करो. आज नहीं तो कल वह वैसे भी तुम्हें छोड़ ही देगा. अच्छा है समय रहते ही तुम खुद उसे छोड़ दो.’’

अर्पिता शाम को घर लौटी तो उस का सिर बुरी तरह से चकरा रहा था. नीलांजना की बातों में सचाई झलक रही थी. वह भी देख रही थी कि पिछले 2 महीनों से प्रवीण कुछ बदल सा गया है. अब छुट्टियों में अर्पिता के साथ बाहर जाने के बजाय वह सरकारी काम का बहाना बना कर अकेला ही चला जाता है. यदि यह सच है कि प्रवीण को औरतों को फंसाने की आदत ही है तो वह कितनी बड़ी गलती कर बैठी है. उस के पद और प्रतिष्ठा की चकाचौंध में अंधी हो कर अपने पति के साथ बेवफाई कर बैठी. अब पता नहीं अपनी गलती की क्या कीमत चुकानी पड़ेगी. धोखे के एहसास से अर्पिता तिलमिला गई. उस ने प्रवीण को फोन लगाया.

‘‘तुम ने सगाई कर ली और मुझे बताया भी नहीं,’’ प्रवीण के फोन उठाने पर अर्पिता गुस्से से चिल्लाई.

‘‘ओह तो तुम्हें पता चल गया. अच्छा हुआ. मैं खुद ही सोच रहा था कि मौका देख कर तुम्हें बता दूं,’’ प्रवीण का स्वर अत्यंत सामान्य था.

‘‘तुम ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? तुम ने मुझे धोखा दिया है,’’ उस के सामान्य स्वर पर अर्पिता तिलमिला गई.

‘‘क्या किया है मैं ने?’’ प्रवीण आश्चर्य से बोला, ‘‘मैं ने तुम्हें कौन सा धोखा दिया है? मैं कुंआरा हूं और एक न एक दिन मेरी शादी होगी यह तो तुम जानती ही थीं. मैं ने कोई तुम से तो शादी का वादा किया नहीं था फिर धोखे की बात कहां से आ गई?’’

‘‘तुम ने मेरी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है. क्यों खेलते रहे मेरे जज्बातों से इतने दिन?’’ अर्पिता अब भी तिलमिला रही थी.

‘‘मैं ने तुम्हारी भावनाओं से नहीं खेला. जो कुछ हुआ तुम्हारी मरजी से हुआ. मैं ने कोई जबरदस्ती तो की नहीं. हम दोनों को एकदूसरे का साथ अच्छा लगा और हम ने साथ में जीवन के मजे लूटे. मैं ने जिंदगी भर साथ निभाने का कोई वादा तो किया नहीं है तुम से. हां, तुम कालेज के दिनों से मुझे पसंद थीं. तुम कुंआरी होती तो मैं तुम से शादी के बारे में सोच भी सकता था, लेकिन तुम तो शादीशुदा हो. ऐसा सोच भी कैसे सकती हो कि तुम से शादी करूंगा? मैं इतनी बड़ी पोस्ट पर हूं. शहर में मेरा नाम व रुतबा है. तुम से शादी कर के मुझे अपनी इज्जत खराब नहीं करवानी,’’ प्रवीण तल्ख स्वर में बोला, ‘‘हां, तुम चाहो तो हम ये रिश्ता ऐसे ही बरकरार रखेंगे वरना…’’

अपमान और पीड़ा से अर्पिता छटपटा गई. वह बिफर कर बोली, ‘‘मैं सोच भी नहीं सकती थी कि तुम इतने गिरे हुए होगे.’’ फिर उस ने उस से रायपुर और इंदौर वाले किस्सों का जवाब भी मांगा.

‘‘तुम औरतें पतियों से दुखी रह कर उन से ऐडजस्ट न कर पाने के कारण खुद ही बाहर किसी सहारे की तलाश में रहती हो. तुम लोगों को हमेशा एक ऐसे कंधे की तलाश रहती है, जिस पर सिर रख कर तुम अपना दुख हलका कर सको. अपने जीवनसाथी की थोड़ी सी भी कमी तुम लोगों से सहन नहीं होती और तुम लोग बाहर उसे पूरा करने को तत्पर रहती हो.

‘‘सच तो यह है कि मर्दों की बजाय औरतों को ऐसे संबंधों की ज्यादा जरूरत होती है और वे इन्हें ज्यादा ऐंजौय करती हैं. अगर औरतें ऐसे संबंधों को न चाहें तो मर्द की हिम्मत ही नहीं होगी किसी भी औरत की ओर आंख उठा कर देखने की. औरतें खुद ही यह सब चाहती हैं और मर्दों को फालतू बदनाम करती हैं. अपने पति से बेवफाई कर के उन्हें धोखा तुम ने दिया और धोखेबाज मुझे कह रही हो. तुम सोचो, बेवफा और धोखेबाज सही अर्थों में कौन है?’’

अर्पिता सन्न रह गई. प्रवीण ने उसे आईना दिखा दिया था. आनंद की जो कमियां उसे खलती थीं उन्हें प्रवीण के द्वारा पूरा कर के वह सुख पाना चाहती थी. गलत तो वही थी. पलाश की सुर्ख मादकता में डूबने से पहले उस ने कभी सोचा ही नहीं था कि सुर्ख रंग सिर्फ मादकता का ही नहीं खतरे का प्रतीक भी होता है. लेकिन अब क्या हो सकता था. उस ने खुद ही अपने ही संसार में आग लगा ली थी. अर्पिता कटे पेड़ की भांति पलंग पर गिर कर फूटफूट कर रोने लगी. दहकते पलाश ने इस का जीवन झुलसा दिया था.

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