रिश्तों से दूर न कर दें दोस्ताना, जानिए क्या हैं इसके नुकसान

आजकल युवाओं में अपने सगे रिश्तों को दरकिनार कर दोस्तोंसहेलियों को महत्त्व देने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. यह सच है कि दोस्ती का रिश्ता बेमिसाल होता है और अगर समझदारीपूर्वक निभाया जाए तो जीवनपर्यंत बना रहता है. किंतु खेद इस बात का है कि आज हम अपने इर्दगिर्द इकट्ठे हो गए कुछ चेहरों को ही अपना मित्र मानने लगे हैं और इन मात्र दिखावटी और टाइमपास मित्रों के लिए न केवल अपनों की अनेदेखी कर रहे हैं, बल्कि अपनों के प्रति निभाने वाली जिम्मेदारियों से भी मुंह मोड़ते जा रहे हैं.

अवंतिका अपने बेटे की जन्मदिन पार्टी का आमंत्रण देने के लिए रिश्तेदारों की सूची तैयार कर रही थी तो उसे देख कर बेटा पलाश बोल पड़ा, ‘‘अरे अम्मी, ये इतने रिश्तेदारों की सूची क्यों तैयार कर रही हैं? क्या करना है सब को बुला कर? मैं इस बार अपना बर्थडे अपने दोस्तों के साथ मनाऊंगा.’’

‘‘दोस्तों को तो हम हर साल बुलाते हैं, इस साल भी बुलाएंगे पर तुम रिश्तेदारों को बुलाने से क्यों मना कर रहे हो?’’

अवंतिका ने आश्चर्य से पूछा. इस पर पलाश ने कहा, ‘‘मम्मी, रिश्तेदार तो आप लोगों के होते हैं. उन के बीच मैं बोर हो जाता हूं. इस बार अपना बर्थडे मैं केवल अपने दोस्तों के साथ किसी मौल या रैस्टोरैंट में ही सैलिब्रेट करूंगा.’’

दोस्त हमारे रिश्तेदार तुम्हारे

पलाश के मुंह से ऐसी बातें सुन कर अवंतिका खामोश हो गई. ‘रिश्तेदार तो आप लोगों के होते हैं’ यह वाक्य काफी देर तक उस के कानों में गूंजता रहा और वह सोचती रही कि क्या अब बच्चों की दुनिया सिर्फ उन के दोस्तों तक ही सिमट कर रह जाएगी? बच्चों को चाची, बूआ, मौसी, भाभी जैसे रिश्तों से कोई लेनादेना नहीं रह गया है? अब वे केवल हमारे रिश्तेदार हैं?

दिल्ली की सुमन ने जब अपनी भतीजी से जोकि दिल्ली में ही किसी कंपनी में जौब करती है से पूछा कि वह न्यू ईयर पर अपने घर बनारस जा रही है या नहीं? तो उस ने जवाब दिया कि वह नहीं जा रही है, क्योंकि अगले ही महीने उस की एक सहेली का जन्मदिन है और इस बार वे सारी सहेलियां उस का जन्मदिन मनाने शिमला जाने वाली हैं. अत: अगर उस ने न्यू ईयर पर छुट्टी ले ली तो फिर सहेली के जन्मदिन में जाने के लिए उसे छुट्टी नहीं मिल पाएगी. इसलिए उस ने न्यू ईयर पर घर जाने का विचार त्याग दिया. यह सुन कर सुमन को क्रोध तो बहुत आया पर उस ने कहा कुछ नहीं, उस के सामने अपने भैयाभाभी का चेहरा घूम गया कि वे कितनी उत्सुकता से त्योहार पर बेटी के घर आने का इंतजार कर रहे हैं पर उस के न आने की खबर सुन कर वे कितने मायूस हो जाएंगे.

विरोधाभास क्यों

युवाओं के अलावा विवाहित महिलाओं और पुरुषों में भी आजकल पारिवारिक सदस्यों को दरकिनार कर तथाकथित दोस्तोंसहेलियों को अहमियत देने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. मैं अपनी एक पड़ोसिन की शादी की 25वीं सालगिरह में जब पहुंची तो वहां मौजूद लोगों में केवल सहेलियों और पड़ोसियों को देख कर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ और मैं उन से पूछ बैठी कि तुम्हारा कोई रिश्तेदार नजर नहीं आ रहा है?

तब उस ने हंसते हुए कहा, ‘‘तुम लोग किसी रिश्तेदार से कम हो क्या? यार जितनी मस्ती हम दोस्तों के साथ मिल कर कर रहे हैं उतनी क्या रिश्तेदारों के साथ हो पाती है? उन्हें बुलाती तो हजार समस्याएं होतीं. पहले तो उन्हें 1-2 दिन ठहराने और खिलानेपिलाने की व्यवस्था करनी पड़ती. पूरा समय आवभगत में लगा रहना पड़ता. उस के बाद तरहतरह के नखरे उठाने पड़ते वे अलग.’’

दोस्तों की अहमियत कितनी

मैं मन ही मन सोचने लगी कि इतनी बड़ी खुशी, लाखों का खर्च और इस खुशी में शरीक होने के लिए किसी अपने को कोई आमंत्रण नहीं. यह कैसा समय आ गया है? बिना पारिवारिक सदस्यों के कोई खुशी मनाने से अच्छा तो न ही मनाओ.

सारिका ने अपनी सोसायटी में किट्टी जौइन की. शुरूशुरू में उसे वहां नईनई सखियों के साथ बैठना और उन से बातें करना बहुत अच्छा लगा. वह सोचने लगी कि उसे बहुत अच्छी सहेलियां मिल गई हैं. लेकिन धीरेधीरे उस ने देखा कि उस की उन कथित सहेलियों के लिए अपनों से ज्यादा किट्टी पार्टी में शामिल होने वाली सहेलियों की अहमियत है.

सारिका ने देखा कि एक दिन उस की एक किट्टी मैंबर आयशा किट्टी में नहीं पहुंची. उस ने मैसेज भेजा था कि उस की सास की तबीयत खराब हो गई है, इसलिए वह नहीं आ पाएगी. सारिका यह देख हैरान रह गई कि आयशा के साथ सहानुभूति जताने और फोन कर के उस की सास का हाल पूछने के बजाय किट्टी में उस के खिलाफ बातें होने लगीं कि अरे, उस की सास तो रोज ही बीमार रहती है, यह तो किट्टी में न आने का एक बहाना है. आयशा आना चाहती तो दवा दे कर आ जाती.

धीरेधीरे सारिका यह नोट करने लगी कि उस की किट्टी से किस तरह महिलाएं अपने परिवारजनों की उपेक्षा कर के पहुंचती हैं और फिर उस बात को इस तरह बताती हैं जिस से यह सिद्घ हो सके कि उस की नजर में सहेलियों की अहमियत कितनी ज्यादा है जिन से मिलने वह अपने परिवारजनों से झूठ बोल कर आ गई.

सिक्के का दूसरा पहलू

दोस्त बनाना और दोस्ती करना बहुत अच्छी बात है, लेकिन दोस्तों के आगे परिवारजनों की उपेक्षा व उन की अनदेखी करना बहुत ही घातक है. हमारे आसपास दोस्तों की भीड़ भले ही नजर आए पर उन में सच्चा दोस्त एक भी हो यह कहना बहुत मुश्किल होता है. दोस्तों के साथ बैठना हंसनाहंसाना, समय व्यतीत करना अच्छा तो लगता है पर क्या इन चीजों से वे हमारे इतने अपने हो जाते हैं कि उन के आगे रिश्तों का महत्त्व नगण्य कर दिया जाए?

मोबाइल, व्हाट्सऐप और फेसबुक की आदी दुनिया के इस दौर में मित्रों की एक फौज तैयार कर लेना बहुत आसान हो गया है. घर बैठे दिनरात उन से चटरपटर करते रहने से मन में यह गलतफहमी बन जाती है कि हम बहुत अच्छे मित्र बन चुके हैं और फिर वही मित्र अपने सच्चे हितैषी लगने लगते हैं. जबकि हकीकत यह है कि ऐसे मित्र खुशियों में तो बहुत बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं, किंतु जब कभी मित्रता की कसौटी पर खरा उतरने का समय आता है तब टांयटांय फिस हो जाते हैं. दुखपरेशानी के समय में ऐसे मित्र 2-4 दिन तो साथ देते हैं, पर उस के बाद रिश्तेदारों का ही मुंह ताकने लगते हैं कि कब वे आएं और उन्हें छुट्टी मिले.

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Travel Special: भीड़-भाड़ से दूर जाना हो तो यहां जाएं

क्या आप भाग-दौड़ भरी जिन्दगी से परेशान हो गई हैं और कुछ दिन सूकून से गुजारना चाहती हैं? तो गांव से अच्छा और क्या होगा? आपको देश के सबसे कम आबादी वाले गांवों को जरूर देखना चाहिए. अगर आप ट्रेकिंग का भी शौक रखती हैं तो आपके लिए तो यह सबसे गांव बेस्ट डेस्टीनेशन हैं. ये गांव टूरिस्ट और यात्रियों की भीड़-भाड़ से भी अनछुए हैं. कहीं तो बस 250 लोग ही रहते हैं.

1. सांकरी, उत्तराखंड

आबादी: 270

ट्रेकिंग के शौकिनों और पर्वतारोहियों के बीच यह गांव मशहूर है. संकरी गांव के बाद हर की दून और केदारकांथा ट्रेक शुरू हो जाता है. यह टूरिस्ट की भीड़-भाड़ से दूर बसा एक शांत गांव है. इस गांव में 77 घर है जिसमें से कई घरों में आप ठहर सकती हैं.

2. हा, अरुणाचल प्रदेश

आबादी: 289

अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरती का तो कोई जवाब ही नहीं है. पर ‘हा’ गांव आकर आपको शांति मिलेगी. 5000 फीट की ऊंचाई पर बसा है कुरुंग कुमेय जिले के लोंगडिंग कोलिंग (पिपसोरंग) में आदिवासी गांव ‘हा’. यहां से ‘ओल्ड जिरो’ बेहद पास है. कुदरत को महसूस करने के अलावा आप ‘हा’ गांव के पास ही मेंगा गुफाओं में भी जा सकते हैं.

3. शांशा, हिमाचल प्रदेश

आबादी: 320

किन्नोर हिमाचल का बेहद खूबसूरत पर बहुत कम चर्चित इलाका है. यहां बसे हर गांवों की आबादी भी बहुत कम है. ऐसा ही एक गांव है ‘शांशा’ जो कैलोंग से बस 27 किमी की दूरी पर है. तांदी-किश्तवार रोड से सटे इस गांव में केवल 77 घर हैं. आमतौर पर यहां ट्रेवेलर्स आराम करने के लिए रुकते हैं और 1-2 दिन बिताकर चले जाते हैं.

4. गंडाउलिम, गोवा

आबादी: 301

गोवा के किसी क्षेत्र की इतनी कम आबादी? चौंकिए मत, यह सच है. गोवा के मशहूर बीच घूम कर अगर आप ऊबने लगे तो यहां का रुख कर सकती हैं. राजधानी पंजीम से 15 किमी की दूरी पर बसा है यह गांव. इस गांव से पास ही बहते कम्बुरजुआ कनाल में आप मगरमच्छ भी देख सकती हैं.

तो इंतजार किस बात का है. ऑफिस से छुट्टी लीजिए और सूकून का रुख करिए.

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आखिर क्या है अंतर हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट में, जानें यहां

53 साल के मशहूर सिंगर केके यानि कृष्णकुमार कुन्नथअब हमारे बीच नहीं है. कोलकाता कॉन्सर्ट के दौरान वे थोड़ी असहज महसूस कर रहे थे. इसके बावजूद उन्होंने करीब घंटे भर के अपने शो को पूरा किया और कॉन्सर्ट से होटल जाते हुए उनकी तबियत बिगड़ी और वे गिर पड़े. अस्पताल जाने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस को इंतजाम में किसी गड़बड़ी का शक था, तो किसी को ये हार्ट अटैक की संभावना बताई गयी, जबकि अंतिम पोस्टमार्टम और ऑटोप्सी के अनुसार गायक की मौत के कारण के रूप में ‘मायोकार्डियल इंफाक्र्शन’बताया गया.

ऐसी ही एक घटना मुंबई की पॉश एरिया में 38 साल के एक व्यक्ति की हुई. ऑफिस से घर लौटने पर उसकी पत्नी और बेटी ने उसकी घबराहट को देखा, उन्हें हवा के नीचे बैठाकर पानी दिया, व्यक्ति पानी पीने से पहले उसका गिलास हाथ से गिर गया और वह बेहोश हो गया. तुरंत डॉक्टर को भी बुलाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. इस व्यक्ति के पीछे घरेलू हाउसवाइफ और 2 छोटी-छोटी बेटियां बिना किसी सहारे के रह गई.

मायोकार्डियल इंफार्क्शन (एमआई) को साधारणत: हार्ट अटैक कहा जाता है, जब हार्ट में ब्लड फ्लो कम होने लगता है या हार्ट की कोरोनरी आर्टरी बंद हो जाती है, तब ऐसी अवस्था होती है. इस रोग में हृदय की धमनियों के भीतर एक प्लेक सा पदार्थ जमने लगता है, जिसकी वजह से ये धमनियां सिकुड़ने लगती है और हृदय तक खून का पहुंचना बंद हो जाता है.

क्या है अंतर

बहुत से लोग अक्सर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को समानार्थी समझ लेते है, लेकिन इन दोनों स्थितियों में काफी अंतर होता है. कुछ लोग कार्डियक अरेस्ट का मतलब दिल का दौरा समझ लेते है, परन्तु दिल का दौरा पड़ने का मतलब होता है हार्ट अटैक आना. दिल का दौरा तब होता है, जब हृदय में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता हैऔर कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब मनुष्य का हृदय अचानक कार्य करना बन्द कर देता है, जिससे दिल का धड़कना भीअचानक बंद हो जाता है.कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक की तुलना में अधिक घातक होता है, क्योंकि कार्डिएक अरेस्ट में व्यक्ति को बचाने का समय बहुत कम मिल पाता है.

बने जागरूक

इस बारें मेंमुंबई की कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की कार्डियोलोजिस्ट डॉ. प्रवीण कहाले कहते है कि दिल का दौरा (हार्ट अटैक) तब होता है, जब हृदय की धमनियों, यानि रक्त वाहिकाएं, जो हृदय की मांसपेशियों को पंप करने के लिए ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति करती है उनमे से एक ब्लॉक हो जाती है. ह्रदय मांसपेशी को उसका कार्य सुचारु रूप से कर पाने के लिए सबसे ज़रूरी होता है रक्त, लेकिन धमनी के ब्लॉक हो जाने पर वह नहीं मिल पाता हैऔर अगर इसका इलाज समय पर नहीं किया गया, तो पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से ह्रदय मांसपेशी का कार्य बंद पड़ने लगता है. जब किसी व्यक्ति का हृदय रक्त पंप करना बंद कर देता है तब ह्रदय की गति रुक जाती है, जिसे कार्डियक अरेस्ट कहते है.यह व्यक्ति सामान्य रूप से सांस नहीं ले पाता है. वयस्कों में कार्डियक अरेस्ट बहुत बार दिल के दौरे की वजह से होता है.जब दिल का दौरा पड़ता है, तब ह्रदय की धड़कन में खतरनाक अनियमितता आ जाती है, जिससे कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. कमज़ोर ह्रदय वाले लोगों को यह तकलीफ होती है, यानि उनके ह्रदय की पंपिंग क्षमता (इजेक्शन फ्रैक्शन) बड़े पैमाने पर कम हो जाती है (35% से कम) इसे अचानक होने वाली ‘कार्डियक डेथ’ भी कहा जाता है.

दिल के दौरे के लक्षण

चेस्ट में बेचैनी

दिल के दौरों की ज़्यादातर केसेस मेंचेस्ट के बीचोबीच बेचैनी महसूस होती है, जो कई मिनटों तक रहती है, फिर दूर होती है और फिर से होने लगती है. बेचैन कर देने वाला दबाव, छाती को निचोड़ा जा रहा हो, ऐसा दर्द, छाती भरी भरी सी महसूस होना या छाती में दर्द होना, इनमें से कुछ भी हो सकता है.

शरीर के दूसरे हिस्सों में बेचैनी

दोनों या किसी एक हाथ में, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट में दर्द या बेचैनी होना.

सांस लेने में तकलीफ

छाती में बेचैनी के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ होना दिल के दौरे का एक लक्षण हो सकता है.कई दूसरे लक्षण जिसे अधिकतर व्यक्ति समझ नहीं पाते, जिसमें बहुत सारा पसीना निकलना, मतली या चक्कर आना.

पुरुषों और महिलाओं में लक्षण कई बार अलगअलग हो सकते है, इसलिए इसे भी जान लेना जरुरी है.
पुरुषों की तरह महिलाओं में भी दिल के दौरे का सबसे प्रमुख लक्षण, छाती में दर्द या बेचैनी होना, लेकिन इसके दूसरे लक्षण पुरुषों से अधिक महिलाओं में दिखाई पड़ते है,जिसमे खास कर सांस लेने में तकलीफ, मतली, उल्टी होना, पीठ और जबड़े में दर्द आदि.

कार्डियक अरेस्टे (cardiac arrest) में अचानक दिल का काम करना बंद हो जाता है. कार्डियक अरेस्टेकिसी लंबी या पुरानी बीमारी का हिस्साक नहीं है, इसलिए कार्डियक अरेस्टा को दिल से जुड़ी बीमारियों में सबसे खतरनाक माना जाता है. लोग अकसर इसे दिल का दौरा पड़ना (heart attack) समझते है. इस बारें में डॉ.प्रवीण कहते है कि इसके लक्षण को जानना बहुत जरुरी है.

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण

• अचानक होश खो देना और उसे हिलाने पर भी वह कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दे पाता है,

• सामान्य रूप से सांस न ले पाना,

• अगर कार्डिएक अरेस्ट के व्यक्ति का सिर उठाकर कम से कम पांच सेकंड्स तक देखते है, तो पता चलेगा कि वह सामान्य तरीके से सांस नहीं ले पा रहे है. अगर किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट पड़ रहा है, तो तुरंत कुछ उपाय कर सकते है, जो निम्न है.

क्या करें अचानक उपाय

• कार्डियक अरेस्ट होते ही उस व्यक्ति को सुरक्षित स्थिति में रखें, उसकी प्रतिक्रिया की जांच करे,

• अगर उसकी प्रतिक्रियां महसूस नहीं कर पा रहे है, तो तुरंत मदद के लिए चिल्लाएं, अपने आस-पास के किसी व्यक्ति को अपने इमरजेंसी नंबर पर कॉल करने के लिए कहे,इसके अलावा उस व्यक्ति को एईडी (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफाइब्रिलेटर) लेकर आने को कहे, उन्हें जल्दी करने के लिए कहे, क्योंकि इसमें समय बहुत महत्वपूर्ण होता है. यदि आप किसी ऐसे वयस्क के साथ अकेले है,जिन्हें कार्डियक अरेस्ट के लक्षण दिखाई दे रहे है,तो इमरजेंसी नंबर पर कॉल करन सबसे जरुरी होता है.

• उस व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ, सिर्फ हांफ रहा है , सांस नहीं ले पा रहा है, तो कम्प्रेशन के साथ सीपीआर देना शुरू करें.

• हाई क्वालिटी सीपीआर देना शुरू करे, अपने हाथों को मिलाकर छाती को बीचोबीच रखें और छाती कम से कम दो इंच भीतर जाए, इस प्रकार दबाएं. एक मिनट में 100 से 120 बार दबाया जाना चाहिए. हर बार दबाए जाने के बाद छाती को उसकी सामान्य स्थिति में आने दें.

• एईडी का इस्तेमाल करें, जैसे ही एईडी आता है, उसे शुरू करें और संकेतों का पालन करें.

• सीपीआर देना जारी रखें. जब तक वह व्यक्ति सांस लेना या हिलना शुरू न कर दे, या ईएमएस टीम सदस्य जैसा अधिक उन्नत प्रशिक्षण लिया हुआ कोई व्यक्ति जब तक वहां न पहुंचे, तब तक सीपीआर को जारी रखना पड़ता है.

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Monsoon Special: बच्चों के लिए बनाएं चीज फ्राइज

आज हम आपके लिए लेकर आए हैं ऐसी क्विक ऐंड ईजी स्नैक रेसिपी जो मौनसून में बच्चों के साथ ही बड़ों को भी बहुत पसंद आएगी. इसे आप बच्चों के लंच के अलावा शाम के नाश्ते या घर में होने वाली मॉकटेल पार्टी के दौरान भी सर्व कर सकती हैं.

सामग्री

फ्रेंच फ्राइज 200 ग्राम

वाइट सॉस आधा कप

चेड्डार चीज आधा कप

नमक चुटकी भर

काली मिर्च पाउडर चुटकी भर

विधि

सबसे पहले फ्रेंच फ्राइज को एक शीट पर रहकर अवन में बेक कर लें. अब गैस पर एक पैन चढ़ाएं और उसमें वाइट सॉस डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें.

अब इसमें चीज डालें और क्रीमी सॉस बनने तक मिलाते रहें. जब फ्राइज बेक हो जाएं तो ऊपर से वाइट सॉस, नमक, काली मिर्च डालकर गर्मा गर्म सर्व करें.

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बेटे को इंजेक्शन लगते देख इमोशनल हुई Bharti Singh, वीडियो वायरल

पौपुलर कमीडियन भारती सिंह आए दिन सुर्खियों में बनी रहती हैं. जहां वह अपने शोज के चलते बिजी होती हैं तो वहीं अपनी पर्सनल लाइफ के चलते फैंस का ध्यान खींचती हैं. इसी बीच सोशलमीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने बेटे के लिए रोती दिखाई दे रही हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

बेटे को देख निकली चीख

भारती सिंह अपने बेटे का काम में बिजी होने के बावूजद पूरा ख्याल रख रही हैं. वहीं हाल ही में वह पति हर्ष लिम्बाचिया के साथ बेटे लक्ष्य को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचीं थी जहां बेटे को इंजेक्शन लगते ही एक्ट्रेस की चीख निकलते हुए नजर आ रही है. दरअसल, वीडियो में भारती सिंह (Bharti Singh) बता रही हैं कि उनके बेटे गोला यानी लक्ष्य (Laksh) को इंजेक्शन लग रहा है. इसी के साथ वह डॉक्टर से भी विनती करती हुई नजर आ रही हैं कि वो सबको हंसाती हैं, इसलिए उनके बच्चे को रुलाना मत. हालांकि डॉक्टर उन्हें दिलासा दे रहे हैं कि वो थोड़ी देर रोएगा, लेकिन गारंटी है कि घर जाने से पहले उसे चुप करा देंगे.

बेटे को देख नहीं थमें आंसू

 

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इसके अलावा वीडियो में बेटे को इंजेक्शन लगते भारती दूर खड़ी हो जाती है. वहीं इंजेक्शन लगते ही वह भी रोते हुए नजर आती हैं, जिसके चलते वह वीडियो बनाना भी बंद कर देती हैं. एक्ट्रेस की इस वीडियो पर फैंस जमकर रिएक्शन दे रहे हैं. बता दें, एक्ट्रेस भारती सिंह ने 3 अप्रेल को बेटे को जन्म दिया था, जिसके 12 दिन बाद से ही वह काम पर लौट गई थीं. वहीं इन दिनों वह शूटिंग में बिजी चल रही है. हालांकि फुर्सत मिलते ही वह बेटे के साथ वक्त बिता रही हैं.

 

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Anupama की ‘किंजल’ छोड़ेगी सीरियल! मेकर्स को लगा झटका

सीरियल अनुपमा  (Anupamaa)की कहानी को दलचस्प बनाने के लिए मेकर्स कड़ी मेहनत कर रहे हैं, जिसके चलते सीरियल की टीआरपी भी पहले नंबर पर बनी हुई है. वहीं सीरियल की फैन फौलोइंग भी बढ़ गई है. इसी बीच खबरे हैं कि किंजल के रोल में नजर आने वाली एक्ट्रेस निधि शाह सीरियल को अलविदा कहने वाली है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

किंजल की होगी मौत

हाल ही में जहां सीरियल में अनुपमा (Rupali Ganguly) की अनुज कपाड़िया (Gaurav Khanna) से दूसरी शादी हुई है, जिसके चलते इन दिनों सीरियल का ट्रैक चेंज करना पड़ा था. तो वहीं अनुपमा की बहू किंजल का किरदार निभा रहीं निधि शाह (Nidhi Shah) के शो से बाहर होने की खबरों से मेकर्स को कहानी में नया ट्विस्ट लाना पड़ेगा. दरअसल, कहा जा रहा है कि सीरियल में मेकर्स किंजल के रोल को हटाने यानी उसकी मौत का ट्विस्ट लाने वाले हैं.

एक्ट्रेस के हाथ लगा बड़ा सीरियल

 

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खबरों की मानें तो अनुपमा के मेकर्स, किजल के ट्रैक को खत्म करने के लिए जबरदस्त कार एक्सीडेंट कराने की तैयारी तक कर रहे हैं, जिसमें उसके और बच्चे में से किसी एक की ही जान बच पाएगी. दरअसल, कहा जा रहा है कि एक्ट्रेस निधि शाह तो एक बड़े सीरियल का ऑफर मिल गया है, जिसमें वह मोहसिन खान के साथ लीड रोल में नजर आएंगी. हालाकिं किंजल के सीरियल को अलविदा कहने पर अनुपमा फैंस को झटका लगने वाला है.

 

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पाखी के बदले भाव

 

सीरियल के अपकमिंग ट्रैक की बात करें तो जहां अनुज की भाभी बरखा कपाड़िया हाउस पर अपना हक जमाने का रास्ता ढूंढ रही है तो वहीं पाखी की अधिक से नजदीकी और शाह परिवार से बदतमीजी वनराज को परेशान कर रही है. वहीं अपकमिंग एपिसोड में किचन पर अनुपमा का राज देखकर बरखा को गुस्सा आने वाला है. हालांकि अनुज ने उसे वॉर्निंग दी है कि वह अनुपमा की खुशी का ख्याल रखे वरना अच्छा नहीं होगा.

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हिसाब किताब- भाग 3: क्यों बदल गई थी भाभी

‘‘मैं रोजरोज की किचकिच से ऊब चुका हूं. बेहतर होगा हम इस मकान को बेच कर अलग हो जाएं.’’

यह सुन कर मैं सन्न रह गया. मुझे सपने में भी भान नहीं था कि भैया पिताजी की विरासत के प्रति इस कदर निर्मम होंगे. आदमी जानवर पालता है तो उस से भी मोह हो जाता है. यहां तो पिताजी के सपनों का आशियाना था. इस से कितनी यादें हम लोगों की जुड़ी थीं. कितने कष्टों को झेल कर उन्होंने यह मकान बनवाया था. किराए के मकान में रह कर उन्होंने बहुत परेशानी झेली थी. 10 किराएदारों के बीच सुबह 4 बजे ही मम्मीपापा को उठना पड़ता था ताकि सब से पहले पानी भर सकें. साझा बाथरूम अलग सिरदर्द था. चीलकौओं को पानी देने वाला समाज व्यवहार में भैया जैसा ही होता है. लिहाजा, मैं ने मन मार कर उन के फैसले पर मुहर लगा दी.

मकान बिकने के बाद भैया ने दीदी को फूटी कौड़ी भी न दी. मामा ने मुझे सलाह दी कि अगर बड़े भैया गैरजिम्मेदार हो गए हैं तो तुम अपनी जिम्मेदारी निभाओ. उन्हीं के कहने पर मैं ने 50 हजार रुपए दीदी को पापा के हक के नाम कर दे दिए. उन्होंने भरसक मना किया. यहां तक कि रिश्तों की कसम देने की कोशिश की मगर मैं टस से मस नहीं हुआ. जीजाजी थोड़े रुष्ट हुए, कहने लगे, ‘किस चीज की हमारे पास कमी है. उस धन पर तुम दोनों भाइयों का हक है.’ भले ही उन्होंने मना किया पर मैं ससुराल वालों की मानसिकता को जानता था. पीठपीछे सासससुर जरूर ताना मारते. थोड़े रुपयों के लिए मैं नहीं चाहता था कि उन का सिर नीचा हो.

मैं एक किराए के मकान में रहने लगा. वक्त ने मुझे काफीकुछ सिखा दिया. दीदी के प्रयासों से मेरी शादी हो गई. मेरी शादी में भैया की तरफ से कोई नहीं आया. मैं ने भी मनुहार नहीं की. जब उन्हें अपने फर्ज की याद नहीं रही तो मैं क्यों पहल करूं. 10 साल गुजर गए. इस बीच भैयाभाभी का थोड़बहुत हालचाल अन्य स्रोतों से मिलता रहा. 1 लड़की पहले से ही थी, 2 और हो गईं. वे 3 बच्चियों के पिता बन गए. शायद यही वजह रही जो उन्हें शराब की लत लग गई. लड़कियों को पढ़ालिखा कर आत्मनिर्भर बनाने की जगह जिम्मेदारियों से भागने का उन का यह तरीका मुझे कायराना लगा. एक दिन दीदी से खबर लगी कि उन की हालत बेहद खराब है. वे अस्पताल में भरती हैं. मैं सपरिवार उन्हें देखने गया. भाभी ने हमें खास तवज्जुह न दी. उलटे उलाहना देने लगीं कि इस संकट की घड़ी में किसी ने साथ नहीं दिया. चाहता तो मैं भी कह सकता था कि आप ने कौन सा रिश्ता निभाया? कभीकभार दीदी उन से मिलने जातीं तो इन का मुंह टेढ़ा ही रहता.

भैया किसी तरह ठीकठाक हुए इस चेतावनी के साथ कि अगर उन्होंने शराब नहीं छोड़ी तो निश्चय ही उन का गुर्दा खराब हो सकता है, फिर उन्हें कोई भी नहीं बचा पाएगा. भाभी सहम गईं. वे इस कदर कमजोर हो गए थे कि ठीक से उठबैठ नहीं सकते थे. औफिस कहने के लिए जाते. उन से कोई काम हो नहीं पाता था. पीने की लत अभी भी नहीं छूटी थी. शाम पी कर घर आते तो लड़ाईझगड़ा करते. वे हद दरजे के चिड़चिड़े हो गए थे. अपनी लड़कियों को फूटी आंख भी देखना पसंद नहीं करते थे. जबकि उन की बड़ी बेटी ही उन की देखभाल करने में आगे रहती थी. वे उन्हें हमेशा लताड़ते रहते. कहते कि तुम लोग मेरे लिए बोझ हो. उन्हें एक पुत्र की आस थी. 3 पुत्रियां ही हुईं.

एक दिन उन के पेट में फिर दर्द उठा. डाक्टर के पास ले गए तो उस ने वही पुरानी नसीहत दी मगर भैया पर कोई असर नहीं पड़ा. शराब ने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया था. एक हफ्ते औफिस नहीं गए. जा कर करते भी क्या? एक दिन साहब ने भाभी को बुलाया, ‘‘मैडम, काम नहीं तो तनख्वाह कैसी?’’

यह सुन कर भाभी की आंखों से आंसू बहने लगे. साहब ने उन की परेशानी भांप ली. एक रास्ता सुझाया, ‘‘आप कितनी पढ़ी हैं?’’

‘‘इंटर.’’

‘‘नियमानुसार ठीक तो नहीं मगर मानवता के नाते मैं एक रास्ता सुझाता हूं. आप इन की जगह यहां आ कर 10 से 5 बजे तक ड्यूटी करें.

‘‘काम बेहद आसान है. आप को सिर्फ लिफाफों पर मुहर लगानी है व फाइलों को इधर से उधर ले जाना है.’’

भाभी राजी हो गईं. इस तरह घर में भैया की देखभाल बड़ी बेटी करती और वे नौकरी. भैया की देखभाल की वजह से बड़ी बेटी की पढ़ाईलिखाई हमेशाहमेशा के लिए छूट गई.? इन्हीं झंझावतों के बीच एक दिन खबर आई कि भैया नहीं रहे. सुन कर मुझे तीव्र आघात लगा. मैं अपनी बीवीबच्चों के साथ आया. भाभी का रोरो कर बुरा हाल था. तीनों लड़कियों के भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. एक तरह से वे असहाय हो गए थे. मेरी पत्नी ने ढाढ़स बंधाया. ‘सब ठीक हो जाएगा.’

वे अपना रुदन रोक बोलीं, ‘‘मैं अकेली औरत 3-3 बेटियों को ले कर कैसे पहाड़ जैसी जिंदगी काटूंगी? कैसे इन की शादी होगी?’’

मैं ने अपनी ओर से आश्वासन दिया कि भैया की कमी भरसक पूरी करने की कोशिश करूंगा. 15 दिन बाद जब मैं सपत्नी वापस आने लगा तो भाभी रुंधे कंठ से बोलीं, ‘‘अगर सब एकसाथ होते तो अच्छा होता. कम से कम बुरे वक्त में एकदूसरे के करीब होते. एकदूसरे के काम आते.’’ मुझे मौका मिला अपने भीतर वर्षों से जमे जज्बातों को उड़ेलने का. किंचित भावुक स्वर में बोला, ‘‘भाभी, नौकरी के दरम्यान मृत्यु होने पर सरकार, उन के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर इसलिए नौकरी देती है कि परिवार आर्थिक समस्या से न जूझे और वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को वैसे ही निभाएं जैसे मृतक. क्या भैया ने वैसा किया? उन्होंने तो नौकरी पा कर ऐसे मुख मोड़ लिया, जैसे उन्हें यह नौकरी उन की योग्यता पर मिली हो. वे यह भूल गए कि यह नौकरी उन्हें पिताजी की अधूरी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए मिली थी, न कि अपना घर बसा कर ऐश करने के लिए.’’ भाभी चुप थीं. क्या जवाब देतीं? आज विपत्ति आई है तब सब की याद आई. जब उन का सब ठीकठाक था तो मुझे ठीक से खाना तक नहीं देती थीं. बिजली के बिल तक का हिसाब लेती थीं. आज परिस्थिति प्रतिकूल हुई तो पता चला कि जिंदगी का हिसाबकिताब कितना जटिल होता है. क्या उन के पास इस जटिल हिसाब का कोई समाधान है? शायद नहीं.

ट्रोलिंग के बीच छाया Pandya Store की एक्ट्रेस का नया अंदाज, फोटोज वायरल

टीवी सीरियल ‘पांड्या स्टोर'(Pandya Store) की एक्ट्रेस सिमरन बुधरूप (Simran Budharup) को इन दिनों ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है है. एक्ट्रेस के नेगेटिव किरदार के चलते ट्रोलर्स उन्हें रेप की धमकी देते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि एक्ट्रेस ने धमकी की शिकायत पुलिस में कर दी है और ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है, जिसके चलते वह सुर्खियों में हैं. लेकिन आज हम उनके ट्रोलिंग या सीरियल की नहीं बल्कि एक्ट्रेस सिमरन बुधरूप के फैशन की बात करेंगे. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

सीरियल में दिखती हैं स्टाइलिश

पांड्या स्टोर में अपने नेगेटिव किरदार में सुर्खियां बटोरने वाली एक्ट्रेस सिमरन बुधरूप अपने लुक का बेहद ख्याल रखती हैं. वहीं सीरियल में एक से बढ़कर एक लुक में नजर आती हैं. फैंस को एक्ट्रेस का इंडियन हो या वेस्टर्न हर अंदाज पसंद आता है.

औफस्क्रीन है कुछ ऐसा लुक

सीरियल में जहां इंडियन अवतार में नजर आने वाली एक्ट्रेस सिमरन बुधरूप औफस्क्रीन हॉट अंदाज में नजर आती हैं. वहीं ड्रैसेस हो या वेस्टर्न लुक के अलग-अलग अंदाज हर किसी में एक्ट्रेस फैंस के बीच छाई रहती हैं. हालांकि एक्ट्रेस के फैंस उन्हें इंडियन अवतार में देखना ज्यादा पसंद करते हैं.

धरा को देती हैं टक्कर


सीरियल पांड्या स्टोर में धरा यानी शाइनी दोशी के फैशन को एक्ट्रेस सिमरन बुधरूप टक्कर देती नजर आती हैं. एक से बढकर एक आउटफिट में एक्ट्रेस का लुक फैंस को बेहद पसंद आता है. फैंस उन्हें नए-नए लुक में देखकर अपना दिल हार बेठते हैं.

बता दें, सीरियल पांड्या स्टोर में अपने रोल के चलते आए दिन सुर्खियों में रहती हैं. वहीं नेगेटिव किरदार के कारण एक्ट्रेस को ट्रोलर्स की खरी खोटी सुननी पड़ती हैं. हालांकि वह पहली एक्ट्रेस नहीं हैं, जो ट्रोलर्स के निशाने पर आई हैं. इससे पहले गुम हैं किसी के प्यार में की पाखी के रोल को निभाने वाली एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा भी रेप की धमकी और ट्रोलिंग का शिकार हो चुकी हैं.

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साइनोसाइटिस के सही इलाज का तरीका बताएं?

सवाल-

मैं 22 वर्षीय युवती हूं. बी.एससी. कर रही हूं. काफी समय से साइनोसाइटिस से परेशान हूं. मेरी नाक अकसर बंद रहती है, जिस का असर मेरे कानों पर भी होने लगा है. मुझे कम सुनाई देने लगा है. एक डाक्टर की देखरेख में काफी समय से दवा चल रही है पर आराम नहीं आ रहा. कृपया बताएं मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब-

हमारी नाक के पीछे के हिस्से और कानों के बीच एक लंबी नली होती है, जिसे यूसटेशियन ट्यूब कहते हैं. संक्रमण, ऐलर्जी, बारबार सर्दीजुकाम या फिर साइनोसाइटिस होने पर यह नली कभीकभी बंद हो जाती है. इस से कानों के भीतर हवा का संतुलन बिगड़ जाता है और सुनने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है.

साइनोसाइटिस के समुचित इलाज और कान के एक छोटे से औपरेशन से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है. अच्छा होगा कि आप इस संबंध में किसी योग्य ई.एन.टी. विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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बड़े और बच्चों, सभी में साइनस के लक्षण एक जैसे ही होते हैं. इसके अलावा, सर्दी-जुकाम, फ्लू, अस्थमा, क्रौनिक औबस्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज़ (COPD) और साइनस के काफी लक्षण करीब-करीब एक जैसे होते हैं. हालांकि इन सभी बीमारियों में कुछ फर्क भी होता है:

किसी को साइनस की प्रौब्लम अगर कुछ बरसों तक रहे तो वह आगे चलकर अस्थमा में बदल सकती है. हालांकि बच्चों में यह समय 8 से 10 साल का होता है.

ऐसे करें बचाव

1- एलर्जी से बचने के लिए बहुत ज्यादा भारी-भरकम और गद्देदार फर्नीचर से परहेज करें. अपने तकियों, बिस्तरों और कारपेट की नियमित सफाई करें. गलीचों और पायदानों की सफाई का भी ध्यान रखें. परफ्यूम आदि की गंध से दूर रहें. एयर पलूशन से बचें.

2-अपने घर के वेंटिलेशन सिस्टम को सुधारें. जहां तक हो सके, घर की खिड़कियां खोलकर हवा को आर-पार जाने दें.

3-जिन लोगों को जुकाम या कोई दूसरा वायरल इंफेक्शन हो, उनके संपर्क में जाने से बचें.

4-बहुत ज्यादा या बहुत कम तापमान में न रहें. तापमान में अचानक आने वाले बदलाव से बचें.

5-तनाव से दूर रहें. तनाव के कारण शरीर की रक्षा करनेवाले सफेद सेल कमजोर पड़ जाते हैं.

6-स्वीमिंग से बचें. अगर स्वीमिंग करनी ही हो तो नाक को ढक लें. ध्यान रखें कि स्वीमिंग के पानी में क्लोरीन जरूर हो.

7-नमक के पानी से अपनी नाक की सफाई करें.

8-सफाई का खास ख्याल रखें. बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन से बचें. अपने हाथों को हमेशा साबुन से साफ करें.

9-रोजाना 8-10 गिलास पानी पिएं.

10-सुबह उठते ही चाय या गर्म पानी पिएं. गर्म चीजें पीने से नाक या गले में बलगम जमा नहीं होता.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- ऐसे करें साइनोसाइटिस का इलाज

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

डायबिटीज कंट्रोल है मुमकिन

अनुमान है कि 2030 तक डायबिटीज मैलिटस भारत के 7.94 करोड़ लोगों को प्रभावित कर सकता है तो चीन के 4.23 करोड़ और अमेरिका के 3.03 करोड़ लोग इस रोग से पीडि़त होंगे. कई ऐसे फैक्टर्स हैं, जो देश भर में इस रोग की मौजूदगी के लिए जिम्मेदार हैं. मसलन, आबादी, शहरीकरण, मोटापा, श्रमरहित लाइफस्टाइल आदि.

डायबिटीज पीडि़त इन आशंकाओं के साथ जीने लगते हैं कि उन की आंखों की रोशनी चली जाएगी या उन की टांग अथवा पैर काटना पड़ सकता है या फिर किडनी फेल्यर के कारण उन की मौत हो जाएगी.

युवाओं में बढ़ते मामले

भारत में 22 से 30 साल की आयु वाले युवाओं की आबादी सब से अधिक है, जो ऊर्जावान एवं रचनाशील हैं, लेकिन इन युवाओं ने जिंदगी जीने के जिन तौरतरीकों को अपना लिया है, उन से कई तरह के रोगों का इन पर बुरा असर पड़ने लगा है.

भारत को डायबिटीज की राजधानी कहा जाने लगा है. दरअसल युवा अस्वास्थ्यकर खानपान की आदतों के कारण मोटापे का शिकार हो रहे हैं, जो डायबिटीज और अन्य कार्डियोवैस्क्युलर समस्याओं का मुख्य कारण है. पहले जहां ये रोग 40 से 45 साल की उम्र वाले लोगों को होते थे वहीं अब 22 से 25 साल के युवा भी इन की चपेट में आने लगे हैं और इस का कारण है आज की पीढ़ी द्वारा पश्चिमी लाइफस्टाइल अपनाना.

संक्रमण का खतरा

थोड़ा सा कटने से ही त्वचा में होने वाले खतरनाक संक्रमण को सैल्युलाइटिस कहा जाता है. यदि आप को डायबिटीज है, तो अपनी त्वचा के प्रति ज्यादा सावधान रहें, क्योंकि ब्लड ग्लूकोस लैवल अधिक रहने पर संक्रमण का अधिक खतरा रहता है.

सैल्युलाइटिस एक गंभीर संक्रमण है, जो त्वचा के अंदर फैलता है और त्वचा तथा उस के अंदर की चरबी को प्रभावित करता है.

लोग अकसर सैल्युलाइटिस को सैल्युलाइट मान बैठते हैं. दरअसल, दोनों बिलकुल अलग चीजें हैं. सैल्युलाइटिस चरबी की अंदरूनी परत डर्मीज और त्वचा के अंदर के टिशू का एक बैक्टीरियल संक्रमण होता है जबकि सैल्युलाइट त्वचा के अंदर चरबी जमने के कारण होता है, जो संतरे के छिलके की तरह दिखता है. सैल्युलाइटिस की सब से बड़ी खराबी यह है कि सही समय पर उचित इलाज न होने पर यह बड़ी तेजी से फैलता है. इस वजह से टिशू क्षतिग्रस्त होने लगते हैं और इस का बैक्टीरिया रक्तनलिकाओं के जरीए फैल जाता है.

सैल्युलाइटिस से सुरक्षा

– त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले कठिन

और अधिक कार्य करने से बचें. वही कार्य चुनें, जिन से आप को जल्दी थकान महसूस न हो. सब से महत्त्वपूर्ण बात यह कि ब्लड शुगर का संतुलित स्तर बनाए रखें. ब्लड शुगर लैवल बढ़ने का मतलब है कि शरीर का इम्यून सिस्टम निश्चित रूप से कमजोर होगा और जख्म को भरने में यह असमर्थ हो जाएगा.

– कम कार्बोहाइडे्रट वाला भोजन करें और फाइबरयुक्त फलों का भरपूर सेवन करें. अपने साथ ग्लूकोस टैस्ट मीटर रखने से आप को इस की वृद्धि पर नजर रखने में मदद मिलेगी.

– यदि आप सैल्युलाइटिस के ज्ञात छोटे से छोटे रिस्क फैक्टर की चपेट में हैं तो प्रतिदिन अपनी टांगों पर नजर रखें. जख्म पर भी पूरा ध्यान रखें. त्वचा की सूजन, लाली जैसे लक्षणों पर नजर रखें.

– जख्मों को ठीक करने के लिए डाक्टर से ही परामर्श लें. याद रखें कि नियमित जांच के अभाव में छोटा सा जख्म भी सैल्युलाइटिस का कारण बन सकता है. जख्म वाले हिस्से को अच्छी तरह साफ रखें ताकि उस में पानी न लगने पाए. कुछ समय के लिए उसे खुली हवा में सुखा लें. डाक्टर की सलाह के अनुसार ही जख्म को ड्रैसिंग से ढक कर रखें और स्वच्छ ड्रैसिंग ही इस्तेमाल करें.

ऐसा करने पर आप डायबिटीज होने के बावजूद स्वस्थ व्यक्ति जैसा जीवन जी सकते हैं. लाइफस्टाइल में मामूली बदलाव से आप अपना ब्लड शुगर लैवल भी नियंत्रित रख सकते हैं और बेहतर महसूस कर सकते हैं.

(डा. मीना छाबड़ा, डायबिटीज क्लीनिक, नई दिल्ली)

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