सिंगल मदर के लिए पेरैंटिंग टिप्स

आप ने ताउम्र अविवाहित रहने का निर्णय लिया. पति से विचारों का न मिलना या किसी और कारण से आप ने अकेले रहने का फैसला किया तो इस में कोई बुराई भी नहीं है आखिर अपने जीवन को अपनी तरह जीने का हक सभी को है. चूंकि बच्चा आप के साथ है, तो आप यह मान कर चलिए कि आप को अपने बच्चे के कुछ ज्वलंत प्रश्नों का सामना करना ही पड़ेगा. जाहिर है बच्चा अपने मन की बात आप से ही शेयर करेगा और यह उचित भी है क्योंकि किसी बाहर वाले से उसे पता नहीं क्या जवाब मिले जो उस के तनाव और आप के प्रति सोच को गलत बना दे.

इसलिए बच्चे के साथ आप का रिश्ता खुला और ईमानदारी का होना चाहिए और आपसी अच्छे संवाद का भी माहौल होना चाहिए जिस में बच्चा बे?िझक अपने दिल की बात आप से कह सके.

पहले से ही रखें प्रश्नों के उचित जवाब की तैयारी:

आप सिंगल मदर हैं तो कुछ सामान्य से प्रश्न आप का बच्चा आप से कभी भी पूछ सकता है जिस के लिए आप को पहले से ही तैयार रहना होगा जैसे मेरे पापा क्यों नहीं हैं? सब के पापा तो उन के साथ रहते हैं? मेरे दोस्त पूछते हैं पीटीएम में तेरी मां अकेली क्यों आती हैं?

ऐसे ही बहुत सारे सवालों की बौछार आप का बच्चा आप पर कर सकता है, जिन के जवाब कभी न कभी आप को देने ही होंगे. इन के लिए पहले से ही मानसिक रूप से तैयार रहें.

झंझलाएं नहीं प्यार से समझएं:

बच्चों का मन बहुत ही कोमल होता है. उन के बचपना भरे सवालों पर झंझलाने के बजाय उन्हें प्यार और मधुर आवाज में समझएं. कभी बच्चे के मन में उठने वाले सवालों पर डांट कर उसे चुप रहने के लिए दबाव न डालें. घर में थोड़ा हंसीमजाक या सैंस औफ ह्यूमर का भी माहौल रखने की कोशिश करें, ताकि बच्चा कुछ भी पूछने में हिचके नहीं. उस की कोई भी फ्रस्टे्रशन हो तो वे सवालों के माध्यम से आप के सामने आनी ही चाहिए.

आज के बच्चे बहुत ही समझदार और स्मार्ट हैं. वे कुछ समय में ही अपनेआप को माहौल के हिसाब से एडजैस्ट कर लेते हैं. बस आप को उन के लिए थोड़ा समय निकालना होगा.

बच्चे के सवालों के ठोस जवाब दें:

आप के जवाब से बच्चे का संतुष्ट होना जरूरी है नहीं तो समयअसमय वह अपने प्रश्न को कहीं भी आप से पूछने लगेगा. तब आप के लिए एक अजीब सी स्थिति भी आ सकती है जब बच्चा सब के बीच में आप से कुछ अटपटे सवाल पूछने लगे. बच्चे से भावनात्मक रूप से नजदीकी रखें और समझएं कि कौन सी परिस्थितियां थीं जिन में आप ने सिंगल रहने का निर्णय लिया. बच्चा धीरेधीरे अपने को हालात के हिसाब से एडजैस्ट अवश्य ही कर लेगा.

बच्चे को हमेशा सच बताएं:

बच्चे से कभी सचाई छिपाएं नहीं. कभी न कभी सच सामने आएगा ही तब आप के रिश्ते बहुत खराब हो सकते हैं. मेरी एक सहेली अपने पति के व्यवहार से शुरू से ही परेशान थी. आखिर वह अपने बच्चे को ले कर अलग रहने लगी. पैसे की कोई प्रौबलम नहीं थी सभी तरह की सुविधाओं के बावजूद अकसर बच्चे के सवालों को ले कर वह तनाव में रहती, खासतौर पर बच्चे के अपने पिता को ले कर प्रश्नों पर वह काफी असहज महसूस करती.

वह बच्चे को टालती रहती कि जब तुम बड़े हो जाओगे तब बताऊंगी, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, दोस्तों के साथ मस्ती करो. तुम्हें कोई कमी हो तो बताओ? इस तरह बच्चे को टालना ठीक  नहीं है वह कुंठित हो सकता है या अपने मन में उठते सवालों को किसी और पूछ सकता है जहां उसे गलत और गुमराह करने वाले जवाब भी मिल सकते हैं, जो आप और आप के बच्चे दोनों के जीवन में अशांति फैला सकते हैं, इसलिए बच्चे को खुद सही स्थिति से अवगत कराएं.

बड़ों की चुगली न करें

आप यदि सिंगल मदर हैं तो यकीनन आप पर कई जिम्मेदारियां होंगी. बच्चा आप के साथ है तो उसे अच्छे संस्कार और अच्छी परवरिश की जिम्मेदारी भी आप पर आ जाती है. आप उसे गलतियों के लिए डांटेगी भी और अच्छी परवरिश के लिए रोकटोक भी करेंगी. ये बातें अकसर बच्चों को बुरी लगती हैं पर उन्हें बाद में इस के फायदे समझ आते हैं. आप के प्रशंसकों के साथसाथ आप से जलने वाले भी आप के आसपास होंगे.

कई बार बच्चा बाहर से कुछ सुन कर आता है कि उस के पिता तो बहुत अच्छे थे या मां को ले कर कुछ नैगेटिव सोच बच्चे को प्रश्न पूछने पर विवश करती है. इस समय आप को किसी की बुराई नहीं करनी है धीरज से काम लेना है. कभी भी समाज, परिजनों या पति से मतभेदों का रोना बच्चे के सामने ले कर न बैठें. वो नकारात्कता से भर सकता है. सर्वप्रथम बच्चे को विश्वास में ले कर ऐसे लोगों से दूर रहने की सलाह देनी होगी. उसे सचाई से रूबरू कराएं ताकि वह तनाव में न रहे.

एक  बार और भी ध्यान में रखनी होगी कि बच्चे के किसी भी सवाल को अंतिम सवाल न समझें. वह अपने मैटल लैबल के हिसाब से सवाल पूछता रहेगा और आप को उस की जिज्ञासा को शांत करना ही होगा ताकि वह हमेशा तनावमुक्त रहे और आप की अच्छी परवरिश की छांव तले एक बेहतर इंसान बन सके.

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कथाओं और मान्यताओं पर प्रहार

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में औरतों को शेयर्ड हाउसहोल्ड में रहने का अधिकार दे कर एक नया दौर शुरू किया है. सताई हुई औरतें कहां जाएं, कौन सी छत ढूंढ़ें, यह सवाल बहुत बड़ा है. जो किसी कारण अकेली रह गई हों, पति हिंसक हो, बच्चे छोड़ गए हों, उम्र हो गई हो, लंबी बीमारी हो, पूजापाठी जनता ऐसी किसी भी बेचारी औरत को निकालने में जरा भी हिचकिचाती नहीं है.

सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि डोमैस्टिक वायलैंस ऐक्ट की धारा 17(1) ऐसी किसी भी औरत को, चाहे वह मां हो, बेटी हो, बहन हो, पत्नी हो, विधवा हो, सास हो, बहू हो घर में रहने का अधिकार रखती है चाहे उस के पास उस घर में संपत्ति का हक हो या न हो. यह अधिकार हर धर्म, जाति की औरत का है. कोई भी उस अनचाही औरत को घर से नहीं निकाल सकता, जो किसी अधिकार से उस घर में कभी आई थी.

एक पत्नी अपने पति के घर में रहने का हक रखती है चाहे घर पति का न हो, पति के मातापिता या भाईबहन का हो अगर पति वहां रह रहा है. उसी तरह घर की बेटी को घर से नहीं निकाला जा सकता. चाहे उस का विवाह हो गया हो और वह पति को छोड़ आई हो. कोई मां को नहीं निकाल सकता कि उसे अब दूसरे बेटे या बेटी के पास जा कर रहना चाहिए. कोई औरत छत से महरूम न रहे इस तरह का फैसला अपनेआप में क्रांतिकारी है.

सोनिया गांधी की सरकार के जमाने में 2005 में बना हुआ यह कानून व यह फैसला असल में उन पौराणिक कथाओं पर एक तमाचा है जिन में पत्नी को बेबात के बिना बताए घर से निकाल दिया गया क्योंकि कुछ लोगों को शक था. यह उन कथाओं और मान्यताओं पर प्रहार है जिन में औरतों को गलती करने पर पत्थर बना दिया जाता था, जो सड़क पर पड़ा रहे.

भारतीय संस्कृति में तो पापपुण्य का हिसाब रहता है. विधवा आमतौर पर पाप की भागी मानी जाती है कि वह पति को खा गई और उसे कैसे ससुराल में रहने की इजाजत दी जा सकती है. यह फैसला ऐसी औरतों को पौराणिक संस्कृति के विरुद्ध जा कर संरक्षण देता है.

विडंबना यह है कि इस समाज में वे औरतें ही धर्म की दुहाई देती हैं जो कभी न कभी उसी धर्म की मान्यताओं की शिकार बनती हैं. आजादी के बाद बहुत से कानून बने जिन में औरतों को हक मिले पर वे कट्टरपंथी सरकारों की देन नहीं हैं. कट्टरपंथी तो उन को पूजास्थलों तक ले जाने में व्यस्त रहते हैं.

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मैं कैंसर सर्वाइवल हूं, इससे मेरे बालों को झड़ने से रोकने का इलाज बताएं?

सवाल-

मैं कैंसर सर्वाइवल हूं. मेरे सारे बाल झड़ चुके हैं. बालों के साथसाथ मेरी आईब्रोज भी गायब हो चुकी हैं. अब मैं ठीक हूं और बिग लगा लेती हूं. पर आईब्रोज पर रोज पैंसिल लगानी पड़ती है जोकि पसीने से निकल जाती है. वैसे भी कभी ऊंची तो कभी नीची आईब्रोज बन जाती हैं. आईलैशेज के बिना मेरी आंखें सूनी लगती हैं. बताएं क्या करूं?

जवाब-

आप परमानैंट आईब्रोज बनवा लें. इस से आप की आईब्रोज एकजैसी और खूबसूरत बन जाएंगी तथा आप बिना किसी परेशानी के घर से बाहर जा सकती हैं. आंखों पर आईलैशेज न होने से जो सूनापन लगता है उस के लिए आप प्रौमिनैंट आईलाइनर और काजल लगवा सकती हैं. इस से आंखें खूबसूरत लगने लगती हैं. ध्यान रहे कि ऐसी जगह पर अपना काम करवाएं जहां हाइजीन पर बहुत ध्यान दिया जाता हो और करने वाला भी ऐक्सपर्ट हो क्योंकि यह प्रौमिनैंट है जो सारी उम्र के लिए हो जाएगा. अगर एक बार खराब हो गया तो सारी उम्र ही खराब लगेगा. इसलिए करने वाले का ऐक्सपर्ट होना बहुत जरूरी है. यह भी जरूर देख लें कि प्रोडक्ट भी अच्छी क्वालिटी का हो.

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आज हम इतने अधिक बिजी हैं कि खुद का ध्यान ही नहीं रख पाते हैं. ऐसे में अनजाने में अनेक बीमारियों की गिरफ्त में आते हैं. फिर चाहे बात हो उसमें कैंसर जैसी घातक बीमारी की. बता दें कि  दुनिया भर में वर्ष 2020 में 10 मिलियन के करीब लोगों की मृत्यु का कारण विभिन्न तरह के  कैंसर हैं. क्योंकि हम खुद का ध्यान नहीं रखने के कारण शुरुवाती लक्षणों को इग्नोर जो कर देते हैं और जब स्तिथि हमारे हाथ से निकल जाती है तब तक जान पर आ बनती है. आपको बता दें कि  सार्कोमा कैंसर भले ही आम नहीं है. लेकिन ये तेजी से बढ़ने वाला कैंसर है. इसलिए समय रहते इसके लक्षणों को पहचान कर इलाज करवाने की जरूरत होती है. आइए जानते हैं इस बारे में मणिपाल होस्पिटल के कंसल्टेंट ओर्थोपेडिक ओंको सर्जन डाक्टर श्रीमंत बी एस से.

क्या है सार्कोमा कैंसर

सोफ्ट टिश्यू सार्कोमा एक प्रकार का कैंसर है, जो शरीर के चारों और मौजूद टिश्यू में हो जाता है. इसमें मांसपेशियों , वसा , रक्त वाहिकाओं, तंत्रिकाओं के साथसाथ जोइंट्स भी शामिल होते हैं. वयस्कों की तुलना में इस बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे व उसके बाद युवा आते हैं. और ये कैंसर तब और अधिक घातक हो जाता है, जब ये अंगों में फैलना शुरू हो जाता है. इसलिए इसके लक्षण नजर आते ही तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए, वरना ये जानलेवा भी साबित हो सकता है.

कब होता है 

वैसे तो इसके किसी खास कारण के बारे में नहीं पता है. लेकिन ये आमतौर पर तब होता है , जब कोशिकाएं डीएनए के भीतर विकसित होने लगती हैं.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- सार्कोमा कैंसर: घबराएं नहीं करवाएं इलाज

Monsoon Special: मौनसून में जरूरी है इंटिमेट हाइजीन

महिलाएं आज सभी क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं. लेकिन वे शरीर से संबंधित किसी भी बात को खुल कर नहीं कहतीं, पति से भी नहीं. अंतरंग भाग की कुछ बीमारियों को वह किसी से नहीं कह पाती, इस का उदाहरण एक लेडी डाक्टर के पास मिला. 35 वर्षीय महिला डाक्टर से भी अपनी बात कहने से शर्म महसूस कर रही थी और डाक्टर पूरी तरह से उसे डांट रही थी जबकि उसे इंटरनली कुछ बड़ा इन्फैक्शन हो चुका था, जिस का इलाज जल्दी करना था.

इस बारे में नानावती मैक्स सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल की प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञा, डा. गायत्री देशपांडे कहती हैं कि आज भी छोटे शहरों की महिलाएं, किसी पुरुष स्त्रीरोग विशेषज्ञ से जांच नहीं करवातीं, उन के पास डिलिवरी के लिए नहीं जातीं.

असल में अंतरंग स्वच्छता और देखभाल का उन की शारीरिक व मानसिक हैल्थ पर काफी असर होता है, लेकिन जागरूकता के साथसाथ समय पर चिकित्सीय सहायता से वल्वोवैजाइनल इन्फैक्शन के मामलों में बढ़ोतरी हुई है खासकर गरमियों के मौसम में इंटिमेट हाइजीन को बनाए रखना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि पसीने और गरमी से इंटिमेट पार्ट में फंगल इन्फैक्शन बहुत जल्दी होता है, इसलिए महिलाओं को इस बात से अवगत होना चाहिए कि अंतरंग स्वच्छता केवल साफसफाई नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर उन की भलाई से जुड़ा विषय है.

धार्मिक और सामाजिक बाधाओं से दूर रहें

महिलाओं को उन सभी सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक बाधाओं को खुद से दूर रखना बेहद जरूरी है क्योंकि उन्हें इस विषय पर खुल कर बातचीत करने और अंतरंग देखभाल के सब से बेहतर साधनों का उपयोग करने से रोका जाता है और कुछ घरेलू नुस्खों का प्रयोग किया जाता है, जिस से बीमारी अधिक बढ़ती है और कई बार यह इन्फैक्शन इतना अधिक फैल जाता है कि उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. यहां तक कि उस महिला की मृत्यु भी हो सकती है.

इंटिमेट हाइजीन है क्या

डा. गायत्री कहती हैं कि गर्भाशयग्रीवा की बाहरी सतह से ले कर योनि के छिद्र तक की परत को वैजाइनल म्यूकोस (योनि श्लेष्मा) कहते हैं, जो कुदरती तौर पर निकलने वाले तरल पदार्थों की मदद से खुद को साफ करने में सक्षम होता है, खुद को साफ करने की क्षमता के बावजूद, योनि में कई स्वस्थ बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो संक्रमण की रोकथाम के साथसाथ माइक्रोबियल संतुलन भी बनाए रखते हैं. कई तरह के बाहरी या आंतरिक असंतुलन अथवा आदतों की वजह से स्वस्थ माइक्रोबियल की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है, जिस से योनि या मूत्र मार्ग में संक्रमण होने का डर रहता है.

इस के अलावा योनि को प्रतिदिन धोने, शौच के बाद टिशू पेपर या वेट वाइप्स का उपयोग करने, स्नान करने और अच्छी तरह सुखाने, अंडरगारमैंट्स की सफाई, मासिकधर्म के दौरान स्वच्छता बरकरार रखने और सब से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यौन संबंध बनाने से पहले और बाद में स्वच्छता का ध्यान रखने जैसी अच्छी आदतों से योनि और उस से संबंधित सभी अंतरंग अंगों की हिफाजत करने में काफी मदद मिलती है. इन बातों का ध्यान रखने से इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है:

रखें साफसफाई

हर बार पेशाब करने के बाद योनि को सामने की तरफ से ले कर पीछे तक सादे पानी से धोना जरूरी है. महिलाओं को समझना चाहिए कि योनि क्षेत्र भी उन की सामान्य त्वचा की तरह ही है, इसलिए नहाते समय इसे भी शरीर के दूसरे अंगों की तरह सामान्य साबुन या बौडी वाश से आगे से पीछे की ओर धोना चाहिए. पीछे के मार्ग (गुदा) पर बैक्टीरिया या जीवाणु मौजूद हो सकते हैं, जिन के संपर्क में आने से योनि में संक्रमण हो सकता है.

सही फैब्रिक का करें चुनाव

महिलाओं के लिए सूती पैंटी पहनना ही सब से बेहतर है, जो नमी को सोखने और इंटिमेट पार्ट को सूखा रखने में सहायक होती है. इसी तरह महिलाओं को बेहद तंग, गहरे रंग वाले या नम कपड़ों से परहेज करना चाहिए. अपने कपड़ों को पहनने से पहले उन्हें साफसुथरी जगह पर धूप में सुखाना जरूरी है ताकि अंतरंग भागों के आसपास नमी की मौजूदगी भी संक्रमण का एक प्रमुख कारण हो सकती है

सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग

सार्वजनिक शौचालयों में ईकोलाई, स्टै्रफिलोकोकी, स्ट्रेप्टोकोकी जैसे सक्रिय जीवाणु मौजूद होते हैं, जो महिलाओं के मूत्रमार्ग में संक्रमण (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन) का सब से आम कारण होते हैं. इन शौचालयों के साफसुथरे दिखने के बावजूद टौयलेट सीट, फ्लश, वाटर नोब्स या दरवाजे के हैंडल जैसी जगहों पर कीटाणु और बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं.

इन से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए. मसलन, टौयलेट सीट पर टिशू पेपर का इस्तेमाल करना, कपड़े या शरीर को छूने से पहले हाथ साफ करने के लिए सैनिटाइजर या साबुन का उपयोग करना चाहिए. बाहर के वाशरूम और टौयलेट का उपयोग करने के बाद लैक्टिक ऐसिड आधारित वैजाइनल वाश का उपयोग करना योनि की देखभाल के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है.

यौन संबंध से पहले  खुद को रखें स्वच्छ

यौन संबंध के दौरान साथी द्वारा साफसफाई नहीं रखने की वजह से महिलाओं के मूत्रमार्ग में संक्रमण या योनि में संक्रमण भी हो सकता है. यौन संबंध बनाने के बाद हमेशा मूत्र त्याग की कोशिश करनी चाहिए और योनि को आगे से पीछे की ओर साफ करना चाहिए. कंडोम और गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग करना यौन संबंधों से होने वाले संक्रमण की रोकथाम में बेहद मुख्य भूमिका निभा सकता है. 1 से अधिक साथी के साथ यौन संबंधों से परहेज करें और अपने साथी से भी प्राइवेट पार्ट की स्वच्छता बनाए रखने का अनुरोध करें.

रहें सावधान फीकी रंगत वाले स्राव से

माहवारी के दिनों में फीकी रंगत वाला मामूली स्राव होना बेहद सामान्य बात है. हारमोन में बदलाव की वजह से ऐसे स्राव में योनि तथा गर्भाशयग्रीवा की त्वचा की कोशिकाएं मौजूद होती हैं, लेकिन इस तरह के स्राव के बरकरार रहने, गंध और समयसारिणी को ध्यान में रखना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह माहवारी के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों को दर्शाता है. प्रीओव्यूलेटरी डिस्चार्ज (अंडोत्सर्ग से पहले का स्राव) अपेक्षाकृत गाढ़ा, कम और गोलाकार होता है, जबकि पोस्ट-ओव्यूलेटरी वैजाइनल डिस्चार्ज (माहवारी से 1 हफ्ता पहले) अधिक मात्रा में, बहुत पतला और चिपचिपा होता है. महिलाओं को यह समझना चाहिए कि इस तरह का स्राव बेहद सामान्य है और स्वस्थ अंडोत्सर्ग की प्रक्रिया का संकेत देता है.

अगर यह स्राव बेहद गाढ़ा है और इस के साथ लालिमा, खुजली या जलन की समस्या भी है और आप के माहवारी के दिनों के अलावा भी ऐसा होता है, तो इस समस्या पर तुरंत ध्यान देना और स्त्रीरोग विशेषज्ञा से परामर्श लेना बेहद जरूरी है.

प्यूबिक हेयर की वैक्सिंग या ट्रिमिंग

प्राइवेट पार्ट के बाल भी योनि के छिद्र की हिफाजत करते है, जो कई सूक्ष्म जीवों के लिए किसी रुकावट की तरह काम करते हैं, इसलिए वैक्सिंग कराने से न केवल योनि के ऐसे सूक्ष्म जीवों के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है बल्कि वैक्सिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अनुचित साधनों से योनि के आसपास सूजन या संक्रमण भी हो सकता है. अत: रैशेज और इन्फैक्शन से बचने के लिए प्यूबिक एरिया को साफ रखना जरूरी है.

इलाज से बेहतर रोकथाम

महिलाओं के लिए समस्याग्रस्त होने के बाद इलाज कराने के बजाय इस की रोकथाम पर ध्यान देना बेहतर है. साल में एक बार स्त्रीरोग विशेषज्ञा से परामर्श लेना, सर्विकल कैंसर से बचने के लिए समयसमय पर पीएपी स्मीयर टैस्ट आदि स्त्रीरोग विशेषज्ञा की सलाह पर कराने के साथसाथ उन के द्वारा दी गई दवाइयों का प्रयोग करें और अंतरंग स्वच्छता के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें.

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Father’s day 2022: Celebs से जानें उनके पिता के साथ बिताई खट्टी मीठी बातें  

हर साल Father”s Day जून महीने की तीसरे रविवार को मनाया जाता है. इसे मनाने का उद्देश्य पिता के प्रति आभार जताना है, क्योंकि एक बच्चे के पालन-पोषण में जितना जरुरी एक माँ की होती है, उतनी ही पिता की भी आवश्यकता होती है. इसलिए इस दिन को सभी बच्चे अपने हिसाब से पिता के पसंद के सामान, सरप्राइज डिनर, ट्रिप, फूल आदि देकर  सेलिब्रेट करते है.

फादर डे की शुरुआत कब और कैसे हुई इस बारें में लोगों के अलग-अलग मत है. कुछ का मानना है कि फादर्स डे 1907 में वर्जिनिया में पहली बार मनाया गया था, कुछ मानते है कि 1910 में वाशिंगटन में मनाया गया था, जबकि वर्ष 1916 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इसे मनाने की मंजूरी दी. साल 1966 में राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने इसे जून महीने की तीसरे रविवार को मनाने की आधिकारिक घोषणा की, इसके बाद से फादर्स डे को जून के तीसरे संडे को मनाया जाता है.

बच्चों के साथ पिता का सम्बन्ध बहुत ही प्यारा होता है, लेकिन आज की भाग-दौड़ की जिंदगी में बच्चों को पिता के साथ बातें करने या उन्हें समझने का वक्त नहीं होता, ऐसे में ये दिन बच्चों को एक बार फिर से उनके संबंधों को ताजा करने का अच्छा विकल्प है, इसलिए आम बच्चों से लेकर सेलेब्रिटी बच्चे भी शूटिंग पर फंसे रहने की वजह से पिता और फादर्स डे को मिस कर रहे है, आइये जाने पिता से उनके सम्बन्ध, उनकी नजदीकियां, प्यार और टकरार सब कैसा है. जानते है मिलीजुली प्रतिक्रिया उनकी जुबानी.

चारु मलिक

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अभिनेत्री चारू कहती है कि मैं पूरे साल फादर्स डे और मदर्स डे मनाना चाहती हूँ. पिता बेटियों के हमेशा ही बहुत स्पेशल होते है, क्योंकि माँ के साथ बातूनी रिश्ते का इक्वेशन होता है, जबकि पिता के साथ एक अलग ही प्यारा रिश्ता होता है. ये सही है कि उनसे हम अधिक बात नहीं करते, पर उनका प्यार हमेशा किसी न किसी रूप में मिलता रहता है. मैं और मेरी जुड़वाँ बहन पारुल दोनों ही पिता के बहुत करीब है. वे भी हम दोनों के साथ एक मजबूत सम्बन्ध रखते है. मेरे पिता इन्ट्रोवर्ट है और अधिक बात नहीं करते, लेकिन जो भी बात कहते है वह हमारे लिए बहुत उपयोगी होता है. वे एक वकील है और हमेशा अपने केसेज को लेकर व्यस्त रहते है. लाइब्रेरी में बैठकर इन केसेज की स्टडी करते है. उनका शांत और धैर्यवान होना हमारे लिए बहुत ही अच्छा रहा, क्योंकि जब वे बचपन में मुझे मैथ पढाया करते थे और मैं उसमे अच्छे अंक नहीं ला पाती थी. उन्होंने मुझे गणित की बेसिक चीजों को सिखाया. मेरी माँ की मृत्यु के बाद सभी उनके बहुत करीब हो चुके है, ताकि माँ की यादों को वे कुछ हद तक कम कर सकें. अभी वे अमेरिका में पारुल के साथ रहते है. मैंने पिता से कठिन समय में शांत रहना, धैर्य न खोना आदि सीखा है. इसके अलावा मेरे पिता बहुत अच्छा खाना बनाते है और हमें हमारे पसंद का व्यंजन बनाकर खिलाते है.

नसिर खान 

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फिल्म और टीवी अभिनेता नसिर खान का अपने पिता कॉमेडियन और अभिनेता जॉनी वाकर के साथ बहुत अच्छी बोन्डिंग थी. वे कहते है कि उन्होंने मुझे कभी डांटा नहीं. वे मेरे साथ बहुत ही सौम्य स्वभाव रखते थे, लेकिन वे अपने सिद्धांतो पर हमेशा अडिग रहे. मैं परिवार का छोटा बेटा होने की वजह से उन्होंने मुझे अपना कैरियर चुनने की पूरी आज़ादी दी थी. इसके अलावा परिवार के बच्चों के किसी भी निर्णय को वे कभी नहीं लेते थे, उसकी जिम्मेदारी मेरी माँ की थी. वे स्ट्रिक्ट पिता नहीं थे. बड़े होने पर मुझे उनके व्यक्तित्व को काफी हद तक समझ में आया. वे एक शांत इंसान थे और सबके लिए कुछ अच्छा करने की इच्छा रखते थे. मेरे हिसाब से पिता का बच्चों और पत्नी से हमेशा बातचीत करते रहना चाहिए , ताकि एक दूसरे की भावनाओं को समझने का अवसर मिले.

अनुज सचदेवा 

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अभिनेता अनुज का कहना है कि इमोशन को व्यक्त करने का तरीका पुरुषों में अलग होता है. बेटे के लिए उनके इमोशन 2 से 3 बातों के बाद ख़त्म हो जाती है, मसलन आप कैसे हो, क्या कर रहे हो या तबियत कैसी है? आदि. ऐसे कुछ प्रश्नों के उत्तर जान लेने के बाद बातें खत्म हो जाती है, जैसा मैंने अभी तक अपने पिता से सुना है और मुझे लगता है कि सभी पिता और बेटे में सम्बन्ध ऐसा ही होता होगा. मेरे पिता मेरे कैरियर में एक माइलस्टोन की तरह है. मेरे साथ मेरे पिता की सोच का कभी भी मेल नहीं हुआ, जो हर किसी के साथ होता है और ये जेनरेशन गैप का ही परिणाम है, लेकिन मेरे पिता ने हमेशा मेहनत करना सिखाया है, जिसमे शोर्ट कट की कोई जगह नहीं. 

अशोक कुमार बेनीवाल 

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अभिनेता अशोक कुमार बेनीवाल का कहना है कि पूरे विश्व में मैं अपने पिता के सबसे करीब हूँ. उनके साथ मेरा स्ट्रोंग ट्रेडिशनल सम्बन्ध और जुड़ाव है. इनका व्यक्तित्व मेरे लिए बहुत खास है, जब भी मुझे उनकी जरुरत होती है, वे हमारे साथ होते थे. मेरे किसी भी सन्देश को पिता तक पहुँचाने में मेरी माँ का हमेशा सहयोग रहा है. पिता ने अपनी सामर्थ्यता से अधिक किसी काम को करने में मुझे सहयोग दिया. उन्होंने मुझे इमानदारी, मेहनत और लगन से काम करने की सीख दी, जिसे मैंने अपने जीवन में उतारा है. आज वे हमारे बीच नहीं है, मैं उन्हें बहुत मिस करता हूँ. मुझे आज भी याद आता है जब मैंने अपने पिता, माँ, बड़ी बहन और 6 रिश्तेदारों को वर्ष 2013 को हुए केदारनाथ फ्लड में खो दिया.

सुधा चंद्रन 

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अभिनेत्री सुधा चंद्रन कहती है कि मेरे लिए फादर्स डे केवल एक दिन नहीं 365 दिन भी उनके लिए बात करूँ तो कम पड़ जायेंगे. मेरे हिसाब से हर लड़की के लिए उसका पहला हीरो उसका पिता होता है. मैने हमेशा से उनके जैसा बनना चाहती थी. वे एक विनम्र परिवार से थे. केवल 13 साल की उम्र से उन्होंने अपने परिवार को सेटल किया था.मेरे पिता की तरफ से दो पुरस्कार मेरे लिए बहुत माईने रखती है, जब मैं अस्पताल में थी और मुझे नकली पैर मिला था. उन्होंने कहा था कि मैं तुम्हारा वो पैर बनूँगा, जिसे तुमने खोया है. मैंने पूछा था कि ऐसा आप कब तक कर पाएंगे? इस पर उन्होंने कहा था कि मैं तुम्हारे साथ तब तक रहना चाहता हूँ, जब तक तुम्हे जरुरत है और ये सही था जब मैं कामयाबी की पीक पर थी, तब वे हमें छोड़ गए. दूसरा अवार्ड मुझे तब मिला जब मैंने पहली बार नकली पैर से डांस किया. परफोर्मेंस के बाद जब मैं घर आई तो उन्होंने मेरे पैर छू लिए. उनके इस व्यवहार के बारें में पूछने पर बताया था कि मैं उनके लिए कला की मूर्ति हूँ.

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ममता: भाग 1- कैसी थी माधुरी की सास

माधुरी को आज बिस्तर पकड़े  8 दिन हो गए थे. पल्लव के मित्र अखिल के विवाह से लौट कर कार में बैठते समय अचानक पैर मुड़ जाने के कारण वह गिर गई थी. पैर में तो मामूली मोच आई थी किंतु अचानक पेट में दर्द शुरू होने के कारण उस की कोख में पल रहे बच्चे की सुरक्षा के लिए उस के पारिवारिक डाक्टर ने उसे 15 दिन बैड रैस्ट की सलाह दी थी.

अपनी सास को इन 8 दिनों में हर पल अपनी सेवा करते देख उस के मन में उन के प्रति जो गलत धारणा बनी थी एकएक कर टूटती जा रही थी. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि मनोविज्ञान की छात्रा होने के बाद भी वह अपनी सास को समझने में चूक कैसे गई?उसे 2 वर्ष पहले का वह दिन याद आया जब मम्मीजी अपने पति पंकज और पुत्र पल्लव के साथ उसे देखने आई थीं. सुगठित शरीर के साथ सलीके से बांधी गई कीमती साड़ी, बौबकट घुंघराले बाल, हीरों का नैकलेस, लिपस्टिक तथा तराशे नाखूनों में लगी मैचिंग नेलपौलिश में वे बेहद सुंदर लग रही थीं. सच कहें तो वे पल्लव की मां कम बड़ी बहन ज्यादा नजर आ रही थीं तथा मन में बैठी सास की छवि में वह कहीं फिट नहीं हो पा रही थीं. उस समय उस ने तो क्या उस के मातापिता ने भी सोचा था कि इस दबंग व्यक्तित्व में कहीं उन की मासूम बेटी का व्यक्तित्व खो न जाए. वह उन के घर में खुद को समाहित भी कर पाएगी या नहीं. मन में संशय छा गया था लेकिन पल्लव की नशीली आंखों में छाए प्यार एवं अपनत्व को देख कर उस का मन सबकुछ सहने को तैयार हो गया था.

यद्यपि उस के मातापिता उच्चाधिकारी थे, किंतु मां को सादगी पसंद थी, उस ने उन्हें कभी भी गहनों से लदाफदा नहीं देखा था. वे साड़ी पहनती तो क्या, सिर्फ लपेट लेती थीं. लिपस्टिक और नेलपौलिश तो उन्होंने कभी लगाई ही नहीं थी. उन के अनुसार उन में पड़े रसायन त्चचा को नुकसान पहुंचाते हैं. वैसे भी उन्हें अपने काम से फुरसत नहीं मिलती थी.पापा को अच्छी तरह से रहने, खानेपीने और घूमने का शौक था. उन की  पैंटशर्ट में तो दूर रूमाल में भी कोई दागधब्बा रहने पर वे आसमान सिर पर उठा लेते थे. खानेपीने तथा घूमने का शौक भी मां के नौकरी करने के कारण पूरा नहीं हो पाया था, क्योंकि जब मां को छुट्टी मिलती थी तब पापा को नहीं मिल पाती थी और जब पापा को छुट्टी मिलती तब मां का कोई अतिआवश्यक काम आ जाता था. उन के घर रिश्तेदारों का आना भी बंद हो गया था, क्योंकि उन्हें लगता था कि यहां आने पर मेजबान की परेशानियां बढ़ जाती हैं तथा उन्हें व्यर्थ की छुट्टी लेनी पड़ती है.

अत: वे भी कह देते थे, जब आप लोगों का मिलने का मन हो तब आ कर मिल जाइए.मां का अपने प्रति ढीलापन देख कर पापा टोकते तो वे बड़ी सरलता से उत्तर देतीं, ‘व्यक्ति कपड़ों से नहीं, अपने गुणों से पहचाना जाता है और यह भी एक सत्य है कि आज मैं जो कुछ हूं अपने गुणों के कारण हूं.’ वेएक प्राइवेट संस्थान में पर्सनल मैनेजर थीं. कभीकभी औफिस के काम से उन्हें टूर पर भी जाना पड़ता था. घर का काम नौकर के जिम्मे था, वह जो भी बना देता सब वही खा लेते थे. मातापिता का प्यार क्या होता है उसे पता ही नहीं था. जब वे छोटी थीं तब बीमार होने पर उस ने दोनों में इस बात पर झगड़ा होते भी देखा था कि उस की देखभाल के लिए कौन छुट्टी लेगा? तब वह खुद को अत्यंत ही उपेक्षित महसूस करती थी. उसे लगता था कि उस की किसी को जरूरत ही नहीं है.मां अत्यंत ही महत्त्वाकांक्षी थीं. यही कारण था कि दादी के बारबार यह कहने पर कि वंश चलाने के लिए बेटा होना ही चाहिए, उन्होंने ध्यान नहीं दिया था. उन का कहना था कि आज के युग में लड़का और लड़की में कोई अंतर नहीं रह गया है.

बस, परवरिश अच्छी तरह से होनी चाहिए लेकिन वे अच्छी तरह परवरिश भी कहां कर पाई थीं? जब तक दादी थीं तब तक तो सब ठीक चलता रहा, लेकिन उन के बाद वह नितांत अकेली हो गई थी. स्कूल से लौटने के बाद घर उसे काटने को दौड़ता था, तब उसे एक नहीं अनेक बार खयाल आया था कि काश, उस के साथ खेलने के लिए कोई भाई या बहन होती.माधुरी को आज भी याद है कि हायर सेकेंडरी की परीक्षा से पहले मैडम सभी विद्यार्थियों से पूछ रही थीं कि वे जीवन में क्या बनना चाहते हैं? कोई डाक्टर बनना चाहता था तो कोई इंजीनियर, किसी की रुचि वैज्ञानिक बनने में थी तो कोई टीचर बनना चाहता था. जब उस की बारी आई तो उस ने कहा कि वह हाउस वाइफ बनना चाहती है. सभी विद्यार्थी उस के उत्तर पर खूब हंसे थे. तब मैडम ने मुसकराते हुए कहा था, ‘हाउस वाइफ के अलावा तुम और क्या बनना चाहोगी?’ उस ने चारों ओर देखते हुए आत्मविश्वास से कहा था, ‘घर की देखभाल करना एक कला है और मैं वही अपनाना चाहूंगी.’उस की इस इच्छा के पीछे शायद मातापिता का अतिव्यस्त रहना रहा था और इसी अतिव्यस्तता के कारण वे उस की ओर समुचित ध्यान नहीं दे पाए थे और शायद यही कारण था कि वह अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए पल्लव की तरफ आकर्षित हुई थी, जो उस की तरह कालेज में बैडमिंटन टीम का चैंपियन था.

वे दोनों एक ही क्लब में अभ्यास के लिए जाया करते थे. खेलतेखेलते उन में न जाने कब जानपहचान हो गई, पता ही न चला. उस से बात करना, उस के साथ घूमना उसे अच्छा लगने लगा था. दोनों साथसाथ पढ़ते, घूमते तथा खातेपीते थे, यहां तक कि कभीकभी फिल्म भी देख आते थे, पर विवाह का खयाल कभी उन के मन में नहीं आया था. शायद मातापिता के प्यार से वंचित उस का मन पल्लव के साथ बात करने से हलका हो जाता था.‘यार, कब तक प्यार की पींगें बढ़ाता रहेगा? अब तो विवाह के बंधन में बंध जा,’ एक दिन बातोंबातों में पल्लव के दोस्त शांतनु ने कहा था. क्या एक लड़की और लड़के में सिर्फ मित्रता नहीं हो सकती. यह शादीविवाह की बात बीच में कहां से आ गई?’ पल्लव ने तीखे स्वर में कहा था.‘मैं मान ही नहीं सकता. नर और मादा में बिना आकर्षण के मित्रता संभव ही नहीं है. भला प्रकृति के नियमों को तुम दोनों कैसे झुठला सकते हो? वह भी इस उम्र में,’ शांतनु ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा.शांतनु तो कह कर चला गया, किंतु नदी की शांत लहरों में पत्थर फेंक गया था. पिछली बातों पर ध्यान गया तो लगा कि शांतनु की बातों में दम है, जिस बात को वे दोनों नहीं समझ सके या समझ कर भी अनजान बने रहे, उस आकर्षण को उस की पारखी निगाहों ने भांप लिया था.

पिता के रूप में अभिनेता अनिल कपूर की सोच क्या है, पढ़ें इंटरव्यू

हॉलीवुड और बॉलीवुड में अपनी एक अलग छवि बनाने वाले अभिनेता अनिल कपूर ने हर शैली में काम किया है और आज भी नई-नई भूमिका निभाकर दर्शकों को चकित कर रहे है. कॉमेडी हो या सीरियस, हर अंदाज में वे फिट बैठते है. उन्होंने जिस भी फिल्म में काम किया, दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने, इसे वे अपनी उम्र के हिसाब से सही फिल्म और किरदार का चुनना बताते है, जो उन्हें सावधानी से करना पड़ता है, जिसमें वे अपने दिल की सुनते है. यही वजह है कि उन्होंने काम से कोई ब्रेक नहीं लिया. उनके साथ ‘कॉम बैक’ का कोई टैग नहीं लगा. हंसमुख और विनम्र स्वभाव के अनिल कपूर खुद को नकारात्मक चीजों से दूर रखना पसंद करते है, ताकि हर सुबह उन्हें नया और फ्रेश लगे. खुश रहना और किसी तनाव को पास न आने देना ही उनके फिटनेस का राज है. उन्होंने हर बार माना है कि जीवन एक है और इसमें उतार-चढ़ाव का आना स्वाभाविक है. अनिल कपूर पहली बार धर्मा प्रोडक्शन के साथ फिल्म ‘जुग-जुग जियो’ में पिता की भूमिका निभा रहे है. जो रिलीज पर है. कोविड की वजह से ये फिल्म रिलीज नहीं हो पाई थी, इसलिए सभी इसके आने का इन्तजार कर रहे है.

इतना ही नहीं अनिल कपूर एक अच्छे अभिनेता के अलावा अभिनेत्री सोनम कपूर, अभिनेता हर्षवर्धन कपूर और रिया कपूर के पिता भी है, उन्होंने बच्चों को एक दोस्त की तरह पाला, जिसमे साथ दिया उनकी पत्नी सुनीता कपूर ने. जिससेउन्होंने इमानदारी के साथ काम किया. आइये जानते है अनिल कपूर से उनके पिता बनने और उससे जुड़े कुछ अनुभव जो पेरेंट्स के लिए बहुत उपयोगी होगा, आइये जानते है, इस बारें में उनकी सोच क्या है.

सवाल – ये फिल्म पिता-पुत्र के संबंधों पर आधारित है, रियल लाइफ में आप किस तरह के पिता है ? क्या बच्चों को अनुसाशन में रखना पसंद करते है?

जवाब – फिल्मों का सम्बन्ध और रियल लाइफ का सम्बन्ध बहुत अलग होता है. (हँसते हुए) रियल पिता को समझने के लिए घर आना पड़ेगा. मैं कभी भी स्ट्रिक्ट पिता नहीं हूं, प्यार से उन्हें कुछ भी कराया जा सकता है, स्ट्रिक्ट होने से नहीं. साथ ही धैर्य की भी बहुत जरुरत पड़ती है, स्ट्रिक्ट होने से बच्चा कभी भी अच्छा नहीं बन सकता. तकनिकी युग के बच्चे पहले से ही सब जानते है, इसलिए उन्हें समझ कर पेरेंट्स को कोई सुझाव देनी चाहिए. बच्चों को अपना क्षेत्र चुनने की पूरी आज़ादी भी पेरेंट्स को देनी चाहिए.

सवाल – आपका और आपकी पत्नी सुनीता कपूर का एक कामयाब रिश्ता रहा है, इस बारें में क्या कहना चाहते है?

जवाब – किसी भी रिलेशनशिप में कॉम्प्रोमाइज करने की जरुरत होती है. इससे व्यक्तिदूसरे की तरफ से देख सकता है और कोई ऐसी बात किसी को कह नहीं पाता, जिससे वह व्यक्ति हर्ट हो. गलती हर इन्सान से होती है और उसे मान लेना सबसे सहज बात होती है.

सवाल – इतने सालों बाद भी जब आपकी फिल्म रिलीज पर होती है, तो क्या आपमें पहले जैसा एक्साइटमेंट होता है?

जवाब – ये फिल्म की बनावट पर निर्भर करता है कि फिल्म की कहानी क्या है और निर्देशक कौन है. अगर मैंने किसी डायरेक्टर के साथ पहले भी काम किया है, तो अधिक चिंता नहीं करता.

सवाल – अभिनेत्री नीतू कपूर के साथ काम करना कैसा रहा?

जवाब – नीतू मेरे परिवार की एक सदस्य है और पहली बार मैं उनके साथ फिल्म में काम कर रहा हूं, इसलिए काम करना सहज था, क्योंकि वह खूबसूरत, फ्रेश और नए लुक में सबके सामने आएगी. अभिनय के अलावा उन्हें डांस भी आता है, मैं उन्हें तब से जानता हूं, जब से वह ऋषि कपूर को डेट कर रही थी.

सवाल – सालों साल एक जैसे कद काठी होने का राज क्या है? फिल्मों को चुनते समय किस बात का ध्यान रखते है?

जवाब – मैं पहले जैसा था, वैसा अब नहीं लग सकता, लेकिन मैं खुद पर बहुत ध्यान देता हूं. साथ ही मैं कभी गलतफहमी में नहीं जीता, मैंने उन फिल्मों चुना जो मेरी उम्र के हिसाब से ठीक हो. दर्शक मुझे कुछ कहे, इससे पहले ही मैंने खुद को चुपचाप हीरों से चरित्र अभिनेता में बदल दिया. ये मेरे लिए सही था. मैंने उन फिल्मों को चुना, जिसमे मैं लीड भले ही न हूं, लेकिन जरुरी है. ये चुनाव मेरे लिए सफल रहा. आज मैं बहुत खुश हूं कि दर्शक आज भी मुझे देखना चाहते है. आज के दर्शकों को कोई मुर्ख नहीं बना सकता. इसके अलावा मैं नियमित वर्कआउट करता हूं. किसी प्रकार का नशा नहीं करता. मुझे दक्षिण भारतीय व्यजन में स्टीम्ड इडली बहुत पसंद है, क्योंकि ये बहुत सुरक्षित भोजन है.

सवाल – आप अभी भी किसी फिल्म में सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन बने रहते है, इस बारें में क्या कहना चाहते है? सोशल मीडिया पर आप कितने एक्टिव है?

जवाब – उम्र के हिसाब से हमेशा अभिनय करना चाहिए, अभी मैं वरुण धवन की भूमिका नहीं निभा सकता. मैं अपने उम्र की भूमिका निभा रहा हूं. इसलिए सभी मेरे चरित्र को पसंद करते है. हालाँकि इस फेज में आना कठिन था, पर मैंने खुद को समझाया.

सोशल मीडिया पर मैं अधिक एक्टिव नहीं, लेकिन मेरे काफी यंग फोलोअर्स है, जो अधिकतर मिम्स भेजते है. मैं उनका जवाब मिम्स से ही देता हूं. (हँसते हुए) यंग फोलोअर्स अधिक होने की वजह मेरी भूमिका है, जो यंग को भी आकर्षित करती है. फिल्म वेलकम में मेरी भूमिका मजनू भाई की थी, जो पेंटिंग बनाता है. मुझे जब पेंटिंग बनाकर निर्देशक अनीस बज्मी ने दी, तो किसी को पता नहीं था कि मेरी ये भूमिका इतनी पोपुलर होगी. यूथ को मेरा ये किरदार इतना पसंद होगा. मैं कई बार कुछ निर्देशक की कहानियां भी नहीं पढता, क्योंकि वे मेरे टेस्ट को जान चुके है. फिल्म अच्छी तरह बननी चाहिए, सफल हो या न हो ये तो दर्शकों की टेस्ट पर निभर करता है. मैं खुद निर्णय लेता हूं और अंत तक उसे पूरा करता हूं.

सवाल – कंट्रोवर्सी को आप कैसे लेते है और खुद को क्या समझाते है?

जवाब – मैं कंट्रोवर्सी को देखता नहीं हूं, उन लेखों को पढता हूं, जिन्होंने मेरी बातों को ठीक तरह से लिखा है. क्रिटिक सही है, क्योंकि इससे मैं खुद को इम्प्रूव कर सकता हूं, पर मेरे घर में बहुत सारे अच्छे आलोचक है, मैं उनकी अवश्य सुनता हूं.

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पौपुलर कौमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Tarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) लंबे समय से फैंस को एंटरटेन कर रहा है. वहीं हाल ही के एक प्रोमो में दयाबेन (Dayaben Entry) की एंट्री की खबर से शो की टीआरपी में भी उछाल आया है. इसी बीच खबर है कि शो के मेकर्स को नई दयाबेन मिल गई है, जिसके चलते फैंस खुश हो गए हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

शो को मिली नई दयाबेन

 

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जहां हाल ही में खबरे थीं कि दयाबेन के रोल में एक्ट्रेस दिशा वकानी (Disha Vakani) नहीं लौटेंगी तो वहीं अब कहा जा रहा है कि दयाबेन के रोल के लिए नई एक्ट्रेस का चुनाव हो गया है. रिपोर्ट्स की मानें तो इस बार दयाबेन के रोल के लिए 90s के ‘हम पांच’ सीरियल में स्वीटी माथुर का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस राखी विजान को मेकर्स ने चुन है. ‘देख भाई देख’, ‘बनेगी अपनी बात’, ‘नागिन 4’ जैसे शो का हिस्सा रह चुकी एक्ट्रेस राखी विजान (Rakhi Vijan) के दयाबेन की भूमिका निभाने पर अभी औफिशियल जानकारी नहीं मिली है. लेकिन सूत्रों का कहना है कि उन्हें मेकर्स ने अप्रोच किया है. हालांकि देखना होगा कि क्या वह इस रोल को स्वीकार करेंगी.

 

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दोबारा मां बनी हैं दिशा वकानी

हाल ही में एक्ट्रेस दिशा वकानी की वापसी की खबरों के बीच उन्होने बेटे को जन्म दिया है, जिसके चलते एक्ट्रेस की शो में वापसी की अटकलें खत्म हो गई हैं. वहीं निर्माता असित कुमार मोदी ने भी इस खबर पर उनके वापस न लौटने की पुष्टि की थी.

बता दें, ‘हे मां माताजी’ से लेकर ‘टप्पू के पापा’ तक जैसे डायलॉग के लिए फेमस एक्ट्रेस दिशा वकानी को फैंस दयाबेन के रोल के लिए पसंद करते है. हालांकि नई दयाबेन को फैंस कितना स्वीकार करेंगे ये देखने लायक होगा.

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Top 10 Best Father’s Day Story in Hindi: टॉप 10 बेस्ट फादर्स डे कहानियां हिंदी में

Father’s Day Story in Hindi: एक परिवार की सबसे अहम कड़ी हमारे माता-पिता होते हैं. वहीं मां को हम जहां अपने दिल की बात बताते हैं तो वहीं पिता हमारे हर सपने को पूरा करने में जी जान लगा देते हैं. हालांकि वह अपने दिल की बात कभी शेयर नहीं कर पाते. हालांकि हमारा बुरा हो या अच्छा, हर वक्त में हमारे साथ चट्टान बनकर खड़े होते हैं. इसीलिए इस फादर्स डे के मौके पर आज हम आपके लिए लेकर आये हैं गृहशोभा की 10 Best Father’s Day Story in Hindi, जिसमें पिता के प्यार और परिवार के लिए निभाए फर्ज की दिलचस्प कहानियां हैं, जो आपके दिल को छू लेगी. साथ ही आपको इन Father’s Day Story से आपको कई तरह की सीख भी मिलेगी, जो आपके पिता से आपके रिश्तों को और भी मजबूत करेगी. तो अगर आपको भी है कहानियां पढ़ने के शौकिन हैं तो पढ़िए Grihshobha की Best Father’s Day Story in Hindi 2022.

1. Father’s Day 2022: दूसरा पिता- क्या दूसरे पिता को अपना पाई कल्पना

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पति के बिना पद्मा का जीवन सूखे कमल की भांति सूख चुका था. ऐसे में कमलकांत का मिलना उस के दिल में मीठी फुहार भर गया था. दोनों के गम एकदूसरे का सहारा बनने को आतुर हो उठे थे. परंतु …

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2. Father’s day 2022: फादर्स डे- वरुण और मेरे बीच कैसे खड़ी हो गई दीवार

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नाजुक हालात कहें या वक्त का तकाजा पर फादर्स डे पर हुई उस एक घटना ने वरुण और मेरे बीच एक खामोश दीवार खड़ी कर दी थी. इस बार उस दीवार को ढहाने का काम हम दोनों में से किसी को तो करना ही था.

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3. Father’s day 2022: अब तो जी लें

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पिता के रिटायरमैंट के बाद उन के जीवन में आए अकेलेपन को दूर करने के लिए गौरव व शुभांगी ने ऐसा क्या किया कि उन के दोस्त भी मुरीद हो गए…

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4. Father’s day 2022: चेहरे की चमक- माता-पिता के लिए क्या करना चाहते थे गुंजन व रवि?

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गुंजन व रवि ने अपने मातापिता की खुशियों के लिए एक ऐसा प्लान बनाया कि उन के चेहरे की चमक एक बार फिर वापस लौट आई. आखिर क्या था उन दोनों का प्लान?

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5. Father’s Day 2022: वह कौन थी- एक दुखी पिता की कहानी?

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स्वार्थी बेटेबहू ने पिता अमरनाथ को अनजान शहर में भीख मांगने के लिए छोड़ दिया था. व्यथित अमरनाथ की ऐसे अजनबी ने गैर होते हुए भी विदेश में अपनों से ज्यादा सहयोग और सहारा दिया.

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6. Father’s Day 2022: त्रिकोण का चौथा कोण

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जीवनरूपी शतरंज के सभी मुहरों को अपनी मरजी से सैट करने वाले मोहित को किसी के हस्तक्षेप का अंदेशा न था. लेकिन उस के बेटे ने जब ऐसा किया तो क्या हुआ.

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7. Father’s Day 2022: पापा जल्दी आ जाना- क्या पापा से निकी की मुलाकात हो पाई?

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पापा से बातबात पर मम्मी झगड़तीं जबकि मनोज नाम के व्यक्ति के साथ खूब हंसतीबोलती थीं. नटखट निकी को यह अच्छा नहीं लगता था. समय वह भी आया जब पापा को मम्मी से दूर जाना पड़ा.

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8. Father’s day 2022: पापा मिल गए

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शादी के बाद बानो केवल 2-4 दिन के लिए मायके आई थी. उन दिनों सोफिया इकबाल से बारबार पूछती, ‘‘मेरी अम्मी को आप कहां ले गए थे? कौन हैं आप?’’

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9. Father’s day 2022: बाप बड़ा न भैया- पिता की सीख ने बदली पुनदेव की जिंदगी

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5 बार मैट्रिक में फेल हुए पुनदेव को उस के पिता ने ऐसी राह दिखाई कि उस ने फिर मुड़ कर देखा तक नहीं. आखिर ऐसी कौन सी राह सुझाई थी उस के पिता ने.

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10. Father’s Day 2022: परीक्षाफल- क्या चिन्मय ने पूरा किया पिता का सपना

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मानव और रत्ना को अपने बेटे चिन्मय पर गर्व था क्योंकि वह कक्षा में हमेशा अव्वल आता था, उन का सपना था कि चिन्मय 10वीं की परीक्षा में देश में सब से अधिक अंक ले कर उत्तीर्ण हो.

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शो ही नहीं रियल लाइफ में भी फैशनेबल हैं ‘जेठालाल’ की ‘बबीताजी’, देखें फोटोज

पौपुलर सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) इन दिनों सुर्खियों में हैं. जहां शो में इन दिनों दयाबेन का बसब्री से इंतजार हो रहा है तो वहीं शो का लेटेस्ट ट्रैक फैंस को पसंद आ रहा है. हालांकि ये शो सालों से फैंस का दिल जीत रहा है. इस शो से जुड़े सितारे हर घर में फेमस हैं. चाहे वह जेठालाल (Dilip Joshi) हो या उनकी बबीता जी (Munmun Dutta). फैंस हर किरदार के बारे में जानने के लिए बेताब रहते हैं. इसीलिए आज हम आपके लिए बबीता जी यानी एक्ट्रेस मुनमुन दत्ता के फैशन (Munmun Dutta Fashion) की झलक लेकर आए हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

बबीता जी के लुक्स हैं कमाल

अपने बयान और ट्रोलिंग के चलते सुर्खियों में रहने वाली बबीता जी यानी एक्ट्रेस मुनमुन दत्ता का सीरियल में फैशन सेंस काफी कमाल का है. वह शो में नए-नए आउटफिट पहने हुए नजर आती है, जिसे देखकर जेठालाल तारीफ किए बिना नहीं रुकते. हालांकि रियल लाइफ में भी वह एक से बढ़कर एक अवतार में नजर आती हैं.

रियल लाइफ में भी हैं फैशनेबल

सीरियल में बबीता जी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस मुनमुन दत्ता का फैशन सेंस काफी अच्छा है, जिसका अंदाजा उनके सोशलमीडिया पेज को देखकर लगाया जा सकता है. वह आए दिन अपनी फोटोज फैंस के साथ शेयर करती हैं, जिसमें एक्ट्रेस के खूबसूरत लुक देखकर फैंस फिदा हो जाते हैं.

हर लुक में लगती हैं कमाल

एक्ट्रेस मुनमुन दत्ता हर फैशन कैरी करती हुई नजर आती हैं. जहां वह ड्रैसेस के कलेक्शन फैंस को दिखाती हैं तो वहीं इंडियन लुक्स से फैंस को दिवाना बनाती हैं. एक्ट्रेस के हर लुक बेहद खूबसूरत होते हैं. हर आउटफिट में मुनमुन दत्ता अपना परफेक्ट फिगर फ्लौंट करती हुई नजर आती हैं.

बता दें, हाल ही में एक्ट्रेस ने अपनी सालों पुरानी फोटोज फैंस के साथ शेयर की थी, जिसमें एक्ट्रेस मुनमुन दत्ता के लुक को देखकर फैंस दिवाने हो गए हैं और फोटोज पर जमकर कमेंट कर रहे हैं.

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