धर्म की रक्षा में अपनों की बलि

पिता पुत्र के लिए अपनी जान देता है या पुत्र की जान ली जाती है ताकि पिता की जान बच जाए. हाल ही में पुलिस ने एक व्यक्ति को पकड़ा जिस ने खजाना मिलने की आशा में तांत्रिक के कहने पर अपने 16 वर्षीय पुत्र की बलि चढ़ा दी. मामला उरैयर, तमिलनाडु का 2014 का है और इस मामले में मां सौतेली थी.

पौराणिक कथाओं में भी पुत्रों को मारने, बलि चढ़ाने के किस्से अकसर आते हैं. भीम के हिडिंबा से हुए पुत्र घटोत्कच को कर्ण द्वारा एक स्ट्रैटेजी के अनुसार विशेष अस्त्र से मारने दिया गया क्योंकि वह अस्त्र वरना अर्जुन के विरुद्ध इस्तेमाल होता.

अंगरेजी में लिखी लेखिका अनुजा रामचंदन की महाभारत पर आधारित पुस्तक ‘अर्जुन’ में इस कहानी का पूरा वर्णन है. इंद्र ने कर्ण को वह अजेय ‘शक्ति’ अस्त्र दिया था और कर्ण ने उसे अर्जुन के विरुद्ध प्रयोग करने का निश्चय किया था परंतु उस अस्त्र का घटोत्कच पर प्रयोग जानबूझ कर युद्ध कौशल के अंतर्गत करवा दिया गया.

भीम के पुत्र की मृत्यु कितनी ही आवश्यक हो, यह जो संदेश देती है वह परेशान करने वाला है. युद्ध जीतने के लिए इस प्रकार की नीति को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता. युद्ध में मौत होती है पर बड़े हमेशा छोटों की रक्षा करते हैं.

महाभारत की ये कथाएं मिथक नहीं हैं, इन्हें कौमिक्स, प्रवचनों, टीवी धारावाहियों के जरीए लोगों तक रोजाना पहुंचाया जाता है और अवचेतना में बैठा दिया जाता है कि अपने स्वार्थ के लिए रिश्तेदारों का सफाया करना अनुचित नहीं है. तमिलनाडु के इस पिता के मन में भी ऐसा ही होगा.

महान संस्कृति का गुणगान करने वाले भूल जाते हैं कि हिंदू धर्मग्रंथों में ही नहीं हर धर्म के ग्रंथों की कथाओं में अनैतिकता के प्रसंग भरे हैं और लोग उन का उपयोग अपने गलत कामों को धर्म सम्मत सिद्ध करने के लिए करते हैं. जब भी कोई प्रभावशाली व्यक्ति जैसे कोई राजा, कोई सेठ, कोई अमीर जजमान अपने किए गलत काम के लिए धर्म के किसी दुकानदार से प्रश्न करता है तो इस तरह की कोई कथा सुन कर उसे बता दिया जाता है कि यह तो धर्म सिद्ध है.

अनैतिक कामों को बढ़ावा देने में धर्म का योगदान कम नहीं है और मानव की भूख को धर्म ने ही गलत तरीके से उकसाया है जिस की वजह से मंगोल राजा चंगेज खान, तैमूर लंग और एडोल्फ हिटलर जैसे आक्रांता हुए. आज व्लादिमीर पुतिन जिस तरह से यूक्रेन में अपने और्थोडोक्स चर्च की सलाह पर अत्याचार होने दे रहे हैं, वैसा ही भारत में न जाने कहांकहां हो रहा है और औरतों व निचलों को खासतौर पर पाप का जन्म से भागी मान कर उन से भेदभाव किए जाते हैं और फिर घटोत्कच की जैसी कथाएं सुना कर आपत्ति करने वालों के मुंह बंद कर दिए जाते हैं.

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का कथन ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को’ को दिल्ली उच्च न्यायालय ने हंसी में कही बात कह कर हलके में लिया है तो वैसा ही जैसा इस पूरे प्रसंग में पांडवों के सलाहकार कृष्ण का व्यवहार है जिसे अनुजा रामचंद्रन की किताब में पढ़ा जा सकता है.

अपनी रक्षा या अपने लिए धन के लिए अपनों की बलि भी देनी पड़े तो हंसने की बात नहीं है. देश में हर सरकार विरोधी गद्दार नहीं है, हर नागरिक अपना है. अपनों को गोली मारने की बात की कही जाए और उच्च न्यायालय उसे लाइट मूड वाली बात कह दे, समझ नहीं आता.

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Alopecia का क्या है इलाज

गंजापन को ऐलोपेसिया भी कहते हैं. जब असामान्य रूप से बहुत तेजी से बाल  झड़ने लगते हैं तो नए बाल उतनी तेजी से नहीं उग पाते या फिर वे पहले के बालों से अधिक पतले या कमजोर उगते हैं और उन का कम होना शुरू हो जाता है. ऐसी हालत में बालों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए क्योंकि स्थिति गंजेपन की ओर जाती है. अपोलो हौस्पिटल के सीनियर कंसल्टैंट (प्लास्टिक कौसमैटिक ऐंड रिकंस्ट्राक्टिव सर्जरी) डाक्टर कुलदीप सिंह के अनुसार:

गंजेपन के प्रकार ये हैं

ऐंड्रोजेनिक ऐलोपेसिया: यह स्थायी किस्म का गंजापन है और एक खास ढंग से खोपड़ी पर उभरता है. इस किस्म के गंजेपन के लिए मुख्यतया टेस्टोस्टेरौन हारमोन संबंधी बदलाव और आनुवंशिकता जिम्मेदार होती है.

यह महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में होता है. यह कनपटी और सिर के ऊपरी हिस्से से शुरू हो कर पीछे की ओर बढ़ता है और यह जवानी के बाद किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है.

ऐलोपेसिया ऐरीटा: इस में सिर के अलगअलग हिस्सों में जहांतहां के बाल गिर जाते हैं, जिस से सिर पर गंजेपन का पैच लगा सा दिखता है. यह स्थिति शरीर की रोगप्रतिरोधी शक्ति कम होने के कारण होती है.

टै्रक्शन ऐलोपेसिया: यह लंबे समय तक बालों को एक ही स्टाइल में बांधने के कारण होता है, लेकिन हेयरस्टाइल बदल देने से बालों का  झड़ना रुक जाता है.

हारमोन परिवर्तन से: यह किसी खास चिकित्सीय कारण जैसे कैंसर कीमोथेरैपी, अत्यधिक विटामिन ए के प्रयोग से, इमोशनल या फिजिकल स्ट्रैस की वजह से या गंभीर रूप से बीमार पड़ने अथवा बुखार होने की वजह से होता है.

गंजेपन की शुरुआत: पुरुषों में गंजेपन की शुरुआत कनपटी से होती है और वहीं महिलाओं में गंजेपन की शुरुआत बीच की मांग से होती है.

समय से पहले  झड़ते बाल: बालों के समय से पहले झड़ने का एक अन्य आनुवंशिक समस्या को ऐंड्रोजेनिक ऐलोपेसिया कहा जाता है, जिसे आमतौर पर पैटर्न बाल्डनैस के रूप में जाना जाता है. महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही बाल गिरने का यह सामान्य रूप है. लेकिन गंजेपन की शुरुआत होने का समय और पैटर्न लिंग के अनुसार अलगअलग होता है.

पुरुषों के  झड़ते बाल: पुरुषों में बाल गिरने की समस्या किशोरावस्था से ही शुरू हो जाती है और इस समस्या को सामान्य रूप से मेलपैटर्न बाल्डनैस के नाम से जाना जाता है. इस में हेयर लाइन पीछे हटती है और ऊपरी हिस्सा साफ हो जाता है.

महिलाओं के  झड़ते बाल: महिलाओं में ऐंड्रोजेनिक ऐलोपेसिया को फीमेल पैटर्न बाल्डनैस के नाम से जाना जाता है. इस समस्या से पीडि़त महिलाओं में पूरे सिर के बाल कम हो जाते हैं, लेकिन हेयर लाइन पीछे नहीं हटती, महिलाओं में ऐंड्रोजेनिक ऐलोपेसिया से शायद ही कभी पूरी तरह से गंजेपन की समस्या होती है. करीब एकतिहाई मेनोपौज के बाद दोतिहाई महिलाओं को सिर के किसी विशेष हिस्से में गंजेपन का सामना करना पड़ता है.

इस के अलावा गंजेपन की समस्या हारमोंस असंतुलन के कारण होती है. मेनोपौज के समय महिलाओं में सब से ज्यादा हारमोंस परिवर्तन होता है, जिस से गंजेपन की समस्या होती है. बालों की जड़ों का कमजोर हो जाना, पिट्यूटरी ग्लैंड में ज्यादा रूसी होना, बालों की जड़ों को जरूरी पोषक तत्त्व न मिलना, पर्याप्त नींद न लेना, ज्यादा टैंशन लेने आदि के  कारण महिलाएं गंजेपन का शिकार होती हैं.

गंजापन दूरकरने के उपाय: इस के कई तरीके हैं. आप प्रोफैशनल काउंसलिंग करवा लें, डाक्टर से बेहतर इलाज के बारे में पूछें.

हेयर ट्रांसप्लांट के वैज्ञानिक तरीके: यह गंजेपन के इलाज के लिए सब से अच्छा और आसान तरीका है. इस तकनीक के जरीए शरीर के एक हिस्से से हेयर फौलिकल्स को ले कर सिर में ट्रांसप्लांट किया जाता है. यह 2 तरह से करा जाता है- एक स्ट्रिप तकनीक और दूसरा फौलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांट.

वैज्ञानिकों ने स्टेम सैल के जरीए बालों को उगाने का तरीका खोज निकाला है. इस तकनीक में त्वचा के नीचे पाए जाने वाले फैट सैल से बालों को नए सिरे से उगाया जा सकता है. इस में मौजूद स्टेम सैल बालों को उगाने में मदद करेंगे. इस तरीक से उगाए गए बाल न सिर्फ स्थाई होंगे बल्कि देखभाल भी आसान साबित होगी.

लेजर ट्रीटमैंट: इस ट्रीटमैंट से सिर की ब्लड कोशिकाएं ऐक्टिव हो कर रक्तसंचार तेज कर देती हैं, जिस से बालों को उगाने में मदद मिलती है.

हेयर वीविंग: इस तकनीक में सामान्य बालों को या सिंथैटिक हेयर को खोपड़ी के उस भाग पर नीव कर दिया जाता है जहां गंजापन होता है. इस के लिए आमतौर पर हेयर वीविंग कराने के बाद जो बाल मिलते उन को हेयर मैन्युफैक्चरर के जरीए वीविंग के बाल में योग किया जाता है.

उपचार की प्रचलित विधियां

ऐलोपेसिया का उपचार: इस के लक्षणों के आधार पर इसे पहचानते हैं. इस में मरीज की मैडिकल हिस्ट्री का पूरा ब्योरा लिया जाता है.

इस दौरान गंजेपन का पैटर्न, सूजन या संक्रमण का परीक्षण, थायराइड और आयरन की कमी की पहचान के लिए ब्लड टैस्ट और हारमोनल टेस्ट आदि की मदद से इस की जांच हो सकती है. इस के उपचार के लिए दवाओं और विधियों का इस्तेमाल स्थिति की गंभीरता के आधार पर किया जाता है.

किनोरक्डिसडिल: इस दवा को हाई ब्लडप्रैशर के उपचार के लिए तैयार किया था, लेकिन इस का असर गंजेपन के उपचार में प्रभावी माना गया है. फूड एंड ड्रग्स ऐसोसिएशन ने इस दवा को महिलाओं में गंजेपन के उपचार के लिए प्रभावी माना है.

ऐंड्रोजन प्रतिरोधी दवाएं: ऐलोपेसिया के अधिकतर मामलों में शरीर ऐंड्रोजन हारमोन की अधिकता एक प्रमुख कारण है, इसलिए इसे कम करने की दवाओं का इस्तेमाल भी उपचार के लिए किया जाता है. कुछ मामलों में इन दवाओं से उन महिलाओं को फायदा मिला है जिन पर मिनोक्सिडिल का प्रभाव नहीं हुआ है.

आयरन की पूर्ति: कुछ मामलों में बाल  झड़ने की रोकथाम महज आयरनयुक्त सप्लिमैंट से ही हो जाती है. विशेष रूप से महिलाओं में गंजेपन के उपचार के लिए आयरन की गोलियां अधिक प्रभावी हैं.

प्लेटलेट रिच प्लास्मा थेरैपी (पीआरपी)

इस थेरैपी के दौरान सर्जरी की मदद से शरीर के रक्त की ही प्लेटलेट्स से उपचार किया जाता है, जिस से त्वचा को ऐलर्जी का रिस्क नहीं रहता और बाल उगने शुरू हो जाते हैं.

मेसोथेरैपी: इस थेरैपी के दौरान स्कैल्प की त्वचा पर विटामिन और प्रोटीन को सूई की मदद से डाला जाता है. इस से हेयर फौलिकल्स को ठीक कर दोबारा बाल लाने की कोशिश की जाती है.

लेजर लाइट: कम पावर की लेजर लाइट की मदद से बालों की जड़ों में ऊर्जा का संचार बढ़ाते हैं, जिस से बाल मजबूत हो दोबारा उग सकें.

हेयर ट्रांसप्लांट क्या है: साकेत सिटी हौस्टिपल के कंसल्टैंट (प्लास्टिक सर्जरी) डा. रोहित नैयर के अनुसार हेयर ट्रांसप्लांट आज के समय में सुरक्षित, सरल और सब से अधिक प्रचलित कौस्मैटिक सर्जरी की प्रक्रिया है. यह चिकित्सीय रूप से प्रमाणित है और दुनियाभर मेंकौस्मैटिक सर्जनों तथा डर्मैटो सर्जनों द्वारा की जाती है. यह केवल ऊपरी त्वचा से संबंधित है.

हेयर ट्रांसप्लांट में सिर के पिछले हिस्से के बालों को गंजे सिर वाली जगह पर लगा देते हैं. ट्रांसप्लांट किए गए बाल सिर के पिछले हिस्से के  लिए ही जाते हैं क्योंकि ये स्थाई बाल होते है और ये कभी  झड़ते नहीं और फिर जब इन बालों को सिर के अगले हिस्से में लगाते हैं तो इन के गुण पीछे वाले बालों जैसे रहते हैं और ये कभी नहीं  झड़ते. इसलिए ट्रांसप्लांट किए गए बाल जीवन भर रहते हैं.

हेयर ट्रांसप्लांट की 2 बेसिक तकनीकें हैं- पहली फौलिक्युलर यूनिट ऐक्स्ट्रैक्शन (एफयूई) और दूसरी फौलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांट (एफयूटी).

एफयूई तकनीक: इस तकनीक में 1-1 कर के सारे कूप हटाते हैं. इस में कोई टांका, निशान, चीरा और दर्द नहीं होता है. एक चरण में 300 तक कूप हटा सकते हैं. बाल निकालने के बाद यह पता नहीं चलता कि इन्हें ट्रांसप्लांट किया गया है.

एफयूटी तकनीक: इस में हेयर ब्रेकिंग स्किन की एक स्ट्रिप लेते हैं और पीछे से टांके लगाते हैं, जिन में 2 हफ्ते बाद हटा देते है. इस तकनीक में ज्यादा दर्द होता है. मगर इस में सिर के पिछले हिस्से में निशान नहीं रहता क्योंकि यह बालों से छिप जाता है.

इन दोनों तकनीकों के नतीजे एकजैसे मिलते हैं. इन में केवल कूप में बाल लगाने के तरीकों में अंतर है.

परिणाम दिखेंगे: ट्रांसप्लांट किए गए बाल 6 से 8 हफ्ते बाद बढ़ने लगते हैं. इन के बढ़ने की दर 1 से 1.5 सैंटीमीटर प्रतिमाह होती है. इसलिए यदि आप लंबे बाल चाहती हैं तो आप को 9 माह से ले कर 1 साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है.

बिना साइड इफैक्ट व निशान के : जहां बाल लगाए गए हैं वहां कोई निशान नहीं रहता और न ही कोई साइड इफैक्ट होता है. यह बहुत ही आसान प्रोसीजर है. इस में क्लांइट चल कर आता है और उसी दिन वापस जा सकता है. गाड़ी चला सकता है, खाना खा सकता. इस में किसी भी दवा की जरूरत नहीं पड़ती है.

कौनकौन सी जगह करवा सकते है हेयर ट्रांसप्लांट? आईब्रोज, पलकों, दाढ़ी और मूंछों के लिए. जलने या दुर्घटना के कारण यदि आप के बाल गिर गए हैं तो आप दोबारा ट्रांसप्लांट आसानी से करा सकते हैं.

सर्जरी की सफलता के कारण

शानदार परिणाम, आसान प्रोसीजर, अस्पताल में भरती होने की जरूरत नहीं, महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए की जा सकती है, उम्र की कोई सीमा नहीं, आप इन्हें सामान्य बालों की तरह करवा सकते है. शैंपू और कलर कर सकते हैं. यकीनन ये सामान्य बाल हैं और कोई भी व्यक्ति सामान्य और ट्रांसप्लांट किए गए बालों के बीच फर्क नहीं बता सकता.

सावधानी: ट्रांसप्लांट वाले भाग में कभीकभी खून निकलने व पपड़ी पड़ने की संभावना रहती है, पर वह कुछ ही दिन में ठीक हो जाती है. अगर ज्यादा समस्या हो तो ऐक्सपर्ट को दिखाएं.

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Shehnaaz को कार तक छोड़ने गए Salman, देखें क्यूट वीडियो

बीते दिन ईद सेलिब्रेशन में जहां बौलीवुड और टीवी के सितारे जश्न मनाते दिखे तो वहीं शहनाज गिल का एक्टर सलमान खान के साथ क्यूट अंदाज फैंस के बीच छा गया है. दरअसल, हाल ही में हुई ईद पार्टी में कंगना रनौत (Kangana Ranaut) से लेकर दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone)  से लेकर शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) तक हसीनाएं अपना जलवा बिखेरती नजर आईं. लेकिन सलमान संग शहनाज का बौंड मीडिया में छा गया. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

ईद पार्टी में पहुंची शहनाज

 

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बीते दिन बहन अर्पिता खान (Arpita Khan Sharma) और उनके पति आयुष शर्मा (Aayush Sharma) की पार्टी में पहुंचे सलमान खान, शहनाज गिल का खास ख्याल रखते हुए नजर आए, जिसमें दोनों की बौंडिग ने फैंस का दिल जीत लिया. दरअसल, ब्लैक कलर का पटियाला सूट पहनकर शहनाज पार्टी में पहुंची थीं. जहां एक्ट्रेस को देखते ही सलमान खुशी से उनका स्वागत करते हुए नजर आए. वहीं खबरों की मानें तो एक्टर सलमान खान ने पूरी पार्टी में शहनाज गिल का खास ध्यान रखा.

 

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सलमान सर को कही ये बात

 

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सलमान सर कहने वाली शहनाज गिल की बौंडिग बिग बौस 13 से ही बेहद खास है. वहीं पार्टी में मीडिया के सामने अपना प्यार दिखाते हुए शहनाज गिल ने एक्टर के गाल पर किस करते हुए हाथ भी फेरा. वहीं दोनों बहुत देर तक बाते भी करते हुए नजर आए, जिसे देखकर सभी हैरान थे. इसके अलावा शहनाज गिल ने ईद पार्टी से जाते वक्त सलमान खान का हाथ पकड़कर कार तक छोड़ने की बात भी कही, जिसके बाद वह सलमान खान का हाथ पकडकर आगे चलती दिखीं. दोनों की ये बौंडिग की वीडियो देखकर फैंस बेहद खुश हैं और सलमान खान की तारीफ कर रहे हैं.

 

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बता दें, बिग बौस 13 के पहले दिन से सलमान खान और शहनाज गिल की कैमेस्ट्री फैंस को पसंद आई थी. वहीं हाल ही में सिद्धार्थ शुक्ला के निधन के बाद बिग बौस 15 के सेट पर पहुंची शहनाज का सलमान खान ने खास ध्यान रखा था.

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वीडियो क्रेडिट- Viral Bhayani

पागल एक्स गर्लफ्रेंड की एंट्री होते ही गायब होगा आर्यन! क्या करेगी Imlie

स्टार प्लस का सीरियल इमली (Imlie) इन दिनों सुर्खियों में छाया हुआ है. जहां एक तरफ सीरियल के सितारे शो को अलविदा कह रहे हैं तो वहीं मेकर्स सीरियल में नए किरदारों की एंट्री करवाने के लिए तैयार हैं. इसी बीच सीरियल में आर्यन की एक्स गर्लफ्रैंड (Aryan Ex Girlfriend) की एंट्री से मजेदार ट्विस्ट देखने को मिलने वाला है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Imlie Serial Update)…

सीरियल में होगी नई एंट्री

 

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खबरों की मानें तो सीरियल के मेकर्स ने एक्ट्रेस वैभवी कपूर (Vaibhavi Kapoor) की एंट्री करवाने का फैसला किया है, जिसके चलते सीरियल के ट्रैक में बदलाव होने वाला है. दरअसल, एक्ट्रेस वैभवी सीरियल में आर्यन सिंह राठौड़ की एक्स गर्लफ्रेंड का रोल अदा करने वाली हैं.  वहीं अपकमिंग ट्रैक की बात करें तो एक्ट्रेस पागल एक्स होने के चलते इमली (Sumbul Tauqeer Khan) और आर्यन (Fehmaan Khan) की जिंदगी में जहर घोलेगी. वहीं आर्यन को किडनैप करने की भी कोशिश करेगी. इसी बीच सीरियल का नया प्रोमो भी सामने आ गया है, जिसमें आर्यन अचानक गायब हो जाता है और इमली उसे ढूंढती हुई नजर आ रही है.

 

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अर्पिता की होगी शादी

सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक की बात करें तो इन दिन अर्पिता और सुंदर की शादी के चलते इमली बिजी नजर आ रही है. वहीं दहेज देने के खिलाफ वह नीला और अपनी सास का सामना कर रही है. लेकिन अपकमिंग एपिसोड में आर्यन की मदद से इमली एक बार फिर नीला को सबक सिखाएगी और बिना किसी दहेज के सुंदर और अर्पिता की शादी करवाएगी.

 

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बता दें, सीरियल इमली में जल्द एंट्री करने वाली एक्ट्रेस वैभवी ठाकुर  ‘ये जादू है जिन्न का’, ‘नथ-जंजीर’ और ‘जेवर’ जैसे सीरियल्स में नजर आ चुकी हैं. हालांकि अब देखना है कि एक्ट्रेस अपनी एक्टिंग से इमली के फैंस का दिल जीत पाती हैं या नहीं.

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शुक्रगुजार- भाग 3: क्या अपने मकसद में कामयाब हो पाई अन्नया

अनन्या चुपचाप औफिस चली गई. उस की शादी को 6 महीने होने वाले थे. वह देखती कि अर्णव और मम्मीजी टीवी चला कर धार्मिक चैनल देखते और उन में बताए गए ऊटपटांग कर्मकांड करते. ये सब देख कर उसे उन लोगों की बेवकूफी पर हंसी भी आती और गुस्सा भी. उन दोनों का दिन टोनेटोटकों और गंडेताबीजों में बीतता.

एक दिन मम्मीजी ने उसे थोड़ा डपटते हुए एक कागज

दिया, ‘‘ध्यान रखा करो. सोम को सफेद, मंगल को लालनारंगी, बुद्ध को हरे, बृहस्पतिवार को पीले, शुक्रवार को प्रिंटेड, शनिवार को काले, नीले और रविवार को सुनहरे गुलाबी कपड़े पहना करो.’’

अनन्या ने कागज हाथ में ले कर सरसरी निगाह डाली और फिर बोली, ‘‘इस से कुछ नहीं होता.’’

अब उस ने मन ही मन सोचना शुरू कर दिया था कि वह इस घर में जड़ जमाए अंधविश्वास को यहां से निकाल कर ही दम लेगी.

जब अनन्या अर्णव से बात करने की कोशिश की तो वह भी मम्मीजी की भाषा बोलने लगा. नाराज हो कर बोला, ‘‘तुम जिद क्यों करती हो? मम्मीजी के बताए रंग के कपड़े पहनने में तुम्हें भला क्या परेशानी है?’’

उसे समझ में आ गया कि मर्ज ने मांबेटे दोनों के दिल और दिमाग को दूषित कर रखा है. इन लोगों का ब्रेन वाश करना बहुत आवश्यक है.

अर्णव की उंगलियों में रंगबिरंगे पत्थरों की अंगूठियों की संख्या बढ़ती जा रही थी.

वह देख रही थी कि अब सुबह 5 बजे से ही मम्मीजी की पूजा की घंटी बजने लगी है. घंटों चालीसा पढ़तीं, माला जपतीं. कभी मंगलवार का व्रत तो कभी एकादशी तो कभी शनिवार का व्रत. कभी गाय को रोटी खिलानी है तो कभी ब्राह्मणों को भोजन कराना है, कभी कन्या पूजन… वह मम्मीजी के दिनरात के पूजापाठ और भूखा रहने व व्रतउपवास देखदेख कर परेशान हो गई थी.

अर्णव भी बिना पूजा किए नाश्ता नहीं करता और घंटों लंबी पूजा चलती. अखंड ज्योति 24 घंटे जलती रहती.

मम्मीजी और अर्णव उस पर अपना प्यार तो बहुत लुटाते थे, लेकिन धीरेधीरे उन्होंने अपने अंधविश्वास और कर्मकांड की बेडि़यां उस पर भी डालने का प्रयास शुरू कर दिया, ‘‘अनन्या, गाय को यह चने की दाल और गुड़ खिला कर ही औफिस जाना… तुम से कहा था कि तुम्हें 5 बृहस्पतिवार का व्रत करना है… पंडितजी ने बताया है. इसलिए आज तुम्हारे लिए नाश्ता नहीं बनाया है.’’

‘‘मम्मीजी, मुझ से भूखा नहीं रहा जाता. भूखे रहने पर मुझे ऐसिडिटी हो जाती है. सिरदर्द और उलटियां होने लगती हैं,’’ और फिर उस ने टोस्टर में ब्रैड डाली और बटर लगा कर जल्दीजल्दी खा कर औफिस निकल गई.

अनन्या ने अब मुखर होना शुरू कर दिया था, ‘‘मम्मीजी, इस तरह भूखे रह कर यदि भगवान खुश हो जाएं तो गरीब जिन्हें अन्न का दाना मुहैया नहीं होता है, वे सब से अधिक संपन्न हो जाएं.’’

मम्मीजी का मुंह उतर गया.

जब वह शाम को लौटी तो मांबेटे के चेहरे पर तनाव दिखाई दे रहा था. उस ने देखा कि पंडितजी को मम्मीजी क्व2-2 हजार के कई नोट दे रही थीं.

अनन्या नाराज हो कर बोली, ‘‘मम्मीजी, ये पंडितजी आप का भला नहीं कर रहे हैं वरन अपना भला कर रहे हैं. यह तो उन का व्यवसाय है. लोगों को अपनी बातों में उलझाना, ग्रहों का डर दिखा कर उन से पैसे वसूलना… यह उन का धंधा है और आप जैसे लोगों को ठग कर इसे चमकाते हैं.’’

‘‘रामराम, कैसी नास्तिक बहू आई है. पूजापाठ के बलबूते ही सब काम होते हैं. माफ करना प्रभू, बेचारी भोली है.’’

शनिवार का दिन था. अनन्या की छुट्टी थी. काले लिबास में एक

तांत्रिक, जो अपने गले में बड़ीबड़ी मोतियों की माला पहने हुए थे, मम्मीजी ने उन्हें बुला कर उन से आशीर्वाद लेने को कहा तो अनन्या ने आंखें तरेर कर अर्णव की ओर देखा. उस ने उस का हाथ पकड़ कर उसे प्रणाम करने को मजबूर कर दिया. उसे अपने सिर पर तांत्रिक के हाथ का स्पर्श बहुत नगवार गुजरा.

अपना क्रोध प्रदर्शित करते हुए वह वहां से अंदर चली गई ताकि वहां से वह उन लोगों का वार्त्तालाप ध्यान से सुन सके.

‘‘माताजी महालक्ष्मी को सिद्ध करने के लिए श्मशान पर जा कर मंत्र सिद्ध करना होगा. उस महापूजा के बाद वहां की भस्म को ताबीज में रख कर पहनने से आप के सारे आर्थिक संकट दूर हो जाएंगे और आप के आंगन में नन्हा मेहमान भी किलकारियां भरेगा.

‘‘यह पूजा दीवाली की रात 12 बजे की जाएगी. इस पूजा में आप की बहू को ही बैठना होगा, क्योंकि लाल साड़ी में सुहागन के द्वारा पूजा करने से महालक्ष्मी अवश्य प्रसन्न होंगी.’’

अनन्या कूपमंडूक अर्णव का उत्तर सुनने को उत्सुक थी.

तभी मम्मीजी ने फुसफुसा कर उस तांत्रिक से कहा जिसे वह समझ नहीं पाई. लेकिन आज अर्णव से दोटूक बात करनी होगी.

वह तांत्रिक अपनी मुट्ठी में दक्षिणा के रुपए दबा कर जा चुका था.

आज वह मन ही मन सुलग उठी, ‘‘मम्मीजी, आप यह बताइए कि इस

पूजापाठ, तंत्रमंत्र से यदि महालक्ष्मी प्रसन्न होने वाली हैं, तो सब से पहले इन्हीं तांत्रिक महाशय के घर में धन की वर्षा हो रही होती. बेचारे क्यों घरघर भटकते फिरते.

‘‘मैं जब से आई हूं, देख रही हूं कि अर्णव का ध्यान अपने बिजनैस पर तो है नहीं… सारा दिन इन्हीं कर्मकांडों में लगा रहता है.

‘‘यदि कोई समस्या है तो उसे सुलझाने का प्रयास करिए. इस तरह की पूजापाठ से कुछ नहीं होगा.’’

मम्मीजी आ कर धीरे से बोलीं, ‘‘अनन्या, हम लोग बहुत बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. हमारी दुकान के अकाउंटैंट ने क्व20 लाख का गबन कर लिया. वह हेराफेरी कर के रुपए इधरउधर गायब करता रहा. अर्णव ने ध्यान ही नहीं दिया. अब बैंक ने हमारी लिमिट भी कैंसिल कर दी है. इसलिए हम लोग बहुत परेशानी में हैं.’’

‘‘अर्णव, यह बताइए कि ये पंडित लोग क्या सारे अनुष्ठान मुफ्त में कर देंगे? एक ओर तो आर्थिक संकट बता रहे हैं दूसरी ओर फुजूलखर्ची करते जा रहे हैं. आप लोग फालतू बातों में अपने दिमाग को लगाए हैं.

‘‘आप वकील से मिलें. वह आप को रास्ता बताएगा. आप ने पुलिस में शिकायत दर्ज की?

‘‘आप का किस बैंक में खाता है, मुझे बताएं? मैं बैंक के मैनेजर से बात कर के आप की लिमिट को फिर से करवाने की कोशिश करूंगी.

‘‘लेकिन आप दोनों को प्रौमिस करना होगा कि अब घर में इस तरह के कर्मकांड और अंधविश्वासों से भरी बातें नहीं की जाएंगी.

‘‘यदि आप का पूजापाठ, व्रतउपवास से ठीक होना होता तो रमेश क्यों गबन कर लेता? गबन इसलिए हुआ क्योंकि आप दोनों दिनरात हवन, व्रत, रंगीन कपड़ों, रंगीन पत्थरों में ही मगन रहे और वह आप की लापरवाही का फायदा उठा कर अपना घर भरता रहा, आप को खोखला करता रहा.

‘‘मैं सालभर से आप दोनों के ऊलजुलूल अंधविश्वास भरे कर्मकांडों को देखदेख कर घुटती रही. यदि आप का यही रवैया रहा तो मैं अपने भविष्य के निर्णय के लिए स्वतंत्र हूं.’’

आज पहली बार इस लहजे में इतना बोलने के बाद जहां वे एक ओर हांफ उठी थी वहीं दूसरी ओर आंखों से आंसू भी निकल पड़े थे. फिर वहां से उठ कर अपने कमरे में आ गई.

घर में सन्नाटा छाया था. काफी देर बाद मम्मीजी आईं, ‘‘बेटी तुम सही कह रही

हो. हम दोनों की आंखों पर अंधविश्वास की पट्टी बंधी थी. रमेश ने गबन करने के बाद अर्णव को मार डालने की भी धमकी दे दी… हम दोनों मांबेटे डर के मारे चुप रहे और इसी पूजापाठ के द्वारा समाधान पाने के लिए इसी पर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया.

‘‘इसी संकट से निबटने के लिए तुम्हें बहू बना कर लाए ताकि हर महीने घर खर्च चलता रहे.

‘‘लेकिन अब मैं स्वयं शोरूम में बैठा करूंगी, अर्णव बाहर का काम देखा करेगा.

‘‘अनन्या मैं तुम्हारी शुक्रगुजार हूं कि तुम ने हम लोगों को सही राह दिखाई,’’ उन्होंने उस का माथा चूम कर गले से लगा लिया.

अनन्या का मन हलका हो गया था. वह बहुत खुश थी कि अंतत: अंधविश्वास के दलदल में फंसे अपने परिवार को उस ने निकाल लिया.

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इन 5 तरीकों से संवारें बच्चों का भविष्य

एकल परिवारों के बढ़ते चलन और मातापिता के कामकाजी होने की वजह से बच्चों का बचपन जैसे चारदीवारी में कैद हो गया है. वे पार्क या खुली जगह खेलने के बजाय वीडियो गेम खेलते हैं. उन के दोस्त हमउम्र बच्चे नहीं, बल्कि टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल हैं. इस से बच्चों के व्यवहार और उन की मानसिकता पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है. वे न तो सामाजिकता के गुर सीख पाते हैं और न ही उन के व्यक्तित्व का सामान्य रूप से विकास हो पाता है.

क्यों जरूरी है सोशल स्किल सही भावनात्मक विकास के लिए सरोज सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल के मनोवैज्ञानिक, डा. संदीप गोविल कहते हैं, ‘‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. वह समाज से अलग नहीं रह सकता. सफल और बेहतर जीवन के लिए जरूरी है कि बच्चों को दूसरे लोगों से तालमेल बैठाने में परेशानी न आए. जिन बच्चों में सोशल स्किल विकसित नहीं होती है उन्हें बड़ा हो कर स्वस्थ रिश्ते बनाने में समस्या आती है. सोशल स्किल बच्चों में साझेदारी की भावना विकसित करती है और आत्मकेंद्रित होने से बचाती है. उन के मन से अकेलेपन की भावना कम करती है.’’

आक्रामक व्यवहार पर लगाम कसने के लिए डा. संदीप गोविल कहते हैं, ‘‘आक्रामक व्यवहार एक ऐसी समस्या है, जो बच्चों में बड़ी आम होती जा रही है. पारिवारिक तनाव, टीवी या इंटरनैट पर हिंसक कार्यक्रम देखना, पढ़ाई में अच्छे प्रदर्शन का दबाव या परिवार से दूर होस्टल वगैरह में रहने वाले बच्चों में आक्रामक बरताव ज्यादा देखा जाता है. ऐसे बच्चे सब से कटेकटे रहते हैं. दूसरे बच्चों द्वारा हर्ट किए जाने पर चीखनेचिल्लाने लगते हैं. अपशब्द कहते हुए मारपीट पर उतर आते हैं. ज्यादा गुस्सा होने पर कई बार हिंसक भी हो जाते हैं.’’ बचपन से ही बच्चों को सामाजिकता का पाठ पढ़ाया जाए तो उन में इस तरह की प्रवृत्ति पैदा ही नहीं होगी.

बच्चों को सामाजिकता का पाठ एक दिन में नहीं पढ़ाया जा सकता. इस के लिए बचपन से ही उन की परवरिश पर ध्यान देना जरूरी है.

1. जब बच्चा छोटा हो:

एकल परिवारों में रहने वाले 5 साल तक की उम्र के बच्चे आमतौर पर मांबाप या दादादादी से ही चिपके रहते हैं. इस उम्र से ही उन्हें चिपकू बने रहने के बजाय सामाजिक रूप से ऐक्टिव रहना सिखाना चाहिए.

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2. अपने बच्चों से बातें करें:

पारस ब्लिस अस्पताल की साइकोलौजिस्ट, डा. रुबी आहुजा कहती हैं, ‘‘उस समय से जब आप का बच्चा काफी छोटा हो, उसे उस के नाम से संबोधित करें, उस से बातें करते रहें. उस के आसपास की हर चीज के बारे में उसे बताते रहें. वह किसी खिलौने से खेल रहा है, तो खिलौने का नाम पूछें. खिलौना किस रंग का है, इस में क्या खूबी है जैसी बातें पूछते रहें. नएनए ढंग से खेलना सिखाएं. इस से बच्चा एकांत में खेलने की आदत से बाहर निकल पाएगा.’’ बच्चे को दोस्तों, पड़ोसियों के साथ मिलवाएं: हर रविवार कोशिश करें कि बच्चा किसी नए रिश्तेदार या पड़ोसी से मिले. पार्टी वगैरह में छोटा बच्चा एकसाथ बहुत से नए लोगों को देख कर घबरा जाता है. पर जब आप अपने खास लोगों और उन के बच्चों से उसे समयसमय मिलवाते रहेंगे तो बच्चा जैसेजैसे बड़ा होगा, इन रिश्तों में अधिक से अधिक घुलमिल कर रहना सीख जाएगा.

3. दूसरे बच्चों के साथ घुलनेमिलने और खेलने दें:

अपने बच्चे की अपने आसपास या स्कूल के दूसरे बच्चों के साथ घुलनेमिलने में मदद करें ताकि वह सहयोग के साथसाथ साझेदारी की शक्ति को भी समझ सके. जब बच्चे खेलते हैं, तो एकदूसरे से बात करते हैं. आपस में घुलतेमिलते हैं. इस से सहयोग की भावना और आत्मीयता बढ़ती है. उन का दृष्टिकोण विकसित होता है और वे दूसरों की समस्याओं को समझते हैं, दूसरे बच्चों के साथ घुलमिल कर वे जीवन के गुर सीखते हैं, जो उन के साथ उम्र भर रहते हैं. जब बच्चे बड़े हो रहे हों

4. परवरिश में बदलाव लाते रहें:

डा. संदीप गोविल कहते हैं, ‘‘बच्चों की हर जरूरत के समय उन के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से उपलब्ध रहें, लेकिन उन्हें थोड़ा स्पेस भी दें. हमेशा उन के साथ साए की तरह न रहें. बच्चे जैसेजैसे बड़े होते हैं वैसेवैसे उन के व्यवहार में बदलाव आता है. आप 3 साल के बच्चे और 13 साल के बच्चे के साथ एक समान व्यवहार नहीं कर सकते. जैसेजैसे बच्चों के व्यवहार में बदलाव आए उस के अनुरूप उन के साथ अपने संबंधों में बदलाव लाएं. गैजेट्स के साथ कम समय बिताने दें. गैजेट्स का अधिक उपयोग करने से बच्चों का अपने परिवेश से संपर्क कट जाता है. मस्तिष्क में तनाव का स्तर बढ़ने लगता है, जिस से व्यवहार थोड़ा आक्रामक हो जाता है. इस से सामाजिक, भावनात्मक और ध्यानकेंद्रन की समस्या हो जाती है. स्क्रीन को लगातार देखने से इंटरनल क्लौक गड़बड़ा जाती है. बच्चों को गैजेट्स का उपयोग कम करने दें, क्योंकि इन के साथ अधिक समय बिताने से उन्हें खुद से जुड़ने और दूसरों से संबंध बनाने में समस्या पैदा हो सकती है. एक दिन में 2 घंटे से अधिक टीवी न देखने दें.

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5. धार्मिक गतिविधियों से दूर रखें:

अपने बच्चों को शुरु से ही विज्ञान और तकनीक की बातें बताएं. उन्हें धार्मिक क्रियाकलाप, पूजापाठ, अवैज्ञानिक सोच से दूर रखें.

Summer Special: नैनों में नैनीताल…

नैनीताल उत्तराखण्ड राज्य का एक प्रमुख शहर है. कुमाऊँ क्षेत्र में नैनीताल जिले का विशेष महत्व है. देश के प्रमुख क्षेत्रों में नैनीताल की गणना होती है. यह ‘छखाता’ परगने में आता है. ‘छखाता’ नाम ‘षष्टिखात’ से बना है. ‘षष्टिखात’ का तात्पर्य साठ तालों से है. इस अंचल मे पहले साठ मनोरम ताल थे. इसीलिए इस क्षेत्र को ‘षष्टिखात’ कहा जाता था.

आज भी नैनीताल जिले में सबसे अधिक ताल हैं. इसे भारत का लेक डिस्ट्रिक्ट कहा जाता है, क्योंकि यह पूरी जगह झीलों से घिरी हुई है. ‘नैनी’ शब्द का अर्थ है आँखें और ‘ताल’ का अर्थ है झील. झीलों का शहर नैनीताल उत्तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटन स्‍थल है. बर्फ़ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों से घिरा हुआ है. इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा है. इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है. नैनीताल को जिधर से देखा जाए, यह बेहद ख़ूबसूरत है.

आकाश पर छाये हुए बादलों का प्रतिबिम्ब इस तालाब में इतना सुन्दर दिखाई देता है कि इस प्रकार के प्रतिबिम्ब को देखने के लिए सैकड़ो किलोमीटर दूर से प्रकृति प्रेमी नैनीताल आते-जाते हैं. जल में विहार करते हुए बत्तखों का झुण्ड, थिरकती हुई तालों पर इठलाती हुई नौकाओं तथा रंगीन बोटों का दृश्य और चाँद-तारों से भरी रात का सौन्दर्य नैनीताल के ताल की शोभा बढ़ाने में चार – चाँद लगा देता है. इस ताल के पानी की भी अपनी विशेषता है. गर्मियों में इसका पानी हरा, बरसात में मटमैला और सर्दियों में हल्का नीला हो जाता है.

1.नैना देवी मंदिर

नैनी झील के उत्‍तरी किनारे पर नैना देवी मंदिर स्थित है. १८८० में भूस्‍खलन से यह मंदिर नष्‍ट हो गया था. बाद में इसे दुबारा बनाया गया. यहां सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है. मंदिर में दो नेत्र हैं जो नैना देवी को दर्शाते हैं.

2.नैनी झील

नैनीताल का मुख्‍य आकर्षण यहाँ की झील है. स्‍कंद पुराण में इसे त्रिऋषि सरोवर कहा गया है. कहा जाता है कि जब अत्री, पुलस्‍त्‍य और पुलह ऋषि को नैनीताल में कहीं पानी नहीं मिला तो उन्‍होंने एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से पानी लाकर उसमें भरा.

इस खूबसूरत झील में नौकायन का आनंद लेने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक यहाँ आते हैं. झील के पानी में आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है. रात के समय जब चारों ओर बल्‍बों की रोशनी होती है तब तो इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है. झील के उत्‍तरी किनारे को मल्‍लीताल और दक्षिणी किनारे को तल्‍लीताल करते हैं. यहां एक पुल है जहां गांधीजी की प्रतिमा और पोस्‍ट ऑफिस है. यह विश्‍व का एकमात्र पुल है जहां पोस्‍ट ऑफिस है.

नैनीताल के ताल के दोनों ओर सड़के हैं. ताल का मल्ला भाग मल्लीताल और नीचला भाग तल्लीताल कहलाता है. मल्लीताल में फ्लैट का खुला मैदान है. मल्लीताल के फ्लैट पर शाम होते ही मैदानी क्षेत्रों से आए हुए सैलानी एकत्र हो जाते हैं. यहाँ नित नये खेल – तमाशे होते रहते हैं.

3.नैना पीक

सात चोटियों में चीनीपीक (नैना पीक या चाइना पीक) २,६११ मीटर की ऊँचाई वाली पर्वत चोटी है. नैनीताल से लगभग साढ़े पाँच किलोमीटर पर यह चोटी पड़ती है. यहां एक ओर बर्फ़ से ढ़का हिमालय दिखाई देता है और दूसरी ओर नैनीताल नगर का पूरा भव्य दृश्‍य देखा जा सकता है. इस चोटी पर चार कमरे का लकड़ी का एक केबिन है जिसमें एक रेस्तरा भी है.

4.हनुमानगढ़ी

हनुमानगढ़ी तल्लीताल के दक्षिण में है. यह मंदिर समुद्र तल 6,401 फीट की ऊंचाई पर है. धार्मिक महत्तव के साथ ही यहां पर सूर्योदय और सूर्यास्त का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है.

5.भवाली

भवाली से अल्मोरा और बागेश्वर आसानी से पहुंचा जा सकता है.

6.नौकुचियाताल

यह भीमताल से 4 कि मी दक्षिण-पूरब समुद्र की सतह से 1292 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इसे ‘नौ कोने वाले ताल’ भी कहा जाता है. इस ताल में विदेशी पक्षियों का बसेरा रहता है. नौका विहार के शौकीन लोगों की यह पसंदीदा जगह है.

7.सात ताल

सात ताल का अनोखा और नैसर्गिक सौंदर्य सबका मन मोह लेता है. इस ताल तक पहुँचने के लिए भीमताल से ही मुख्य मार्ग है. यहां माहरा गांव से भी पहुंचा जा सकता है. इसके आस-पास घने जंगल है. इस ताल की विशेषता है कि लगातार सात तालों का सिलसिला इससे जुड़ा हुआ है.

सात ताल की विशेषता है कि इससे लगातार सात तालों का सिलसिला जुड़ा हुआ है.

8.भीमताल

यह एक त्रिभुजाकर झील है. यह काठगोदाम से 10 कि. मी. की दूरी पर है. यह नैनीताल से भी बड़ा ताल है. नैनीताल से भीमताल की दूरी 22.5 कि. मी. है. इस ताल के बीच में एक टापू है.

कैसे पहुंचे

वायु मार्ग- निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर विमानक्षेत्र नैनीताल से ७१ किमी. दूर है. यहाँ से दिल्‍ली के लिए उड़ानें हैं.

रेल मार्ग- निकटतम रेलहेड काठगोदाम रेलवे स्‍टेशन (३५ किमी.) है जो सभी प्रमुख नगरों से जुड़ा है.

सड़क मार्ग- नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग ८७ से जुड़ा हुआ है. दिल्ली, आगरा, देहरादून, हरिद्वार, लखनऊ, कानपुर और बरेली से रोडवेज की बसें नियमित रूप से यहां के लिए चलती हैं.

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सम्मान की जीत- भाग 3: क्या हुआ था रूबी के साथ

इस के बाद करन बोला, ‘‘मैं ने तो गले में कंठी धारण कर रखी है. मैं तो ऐसा कर ही नहीं सकता. और सारा गांव जानता है कि जब रूबी काम पर जाती है, तो मैं अपनी बेटियों के साथ घर पर रहता हूं. अब अपनी बेटियों के सामने कोई भला ऐसा काम कैसे कर सकता है… फिर भी रूबी के पास मेरे खिलाफ कोई सुबूत हो तो वह अभी पेश करे. अगर आरोप सही निकलेगा, तो मैं तुरंत ही तलाक दे दूंगा.’’

पारस तो पहले से ही रूबी से बदला लेना चाहता था, पर ऐसा कर नहीं पा रहा था. आज उस के सामने रूबी को जलील करने का अच्छा मौका था और पंचायत में भी सभी पारस की मंडली के ही लोग थे.

पारस द्वारा पंचायत का फैसला सुनाया गया, ‘‘रूबी किसी भी तरह से अपने पति को गुनाहगार साबित नहीं कर पाई और न ही करन के खिलाफ कोई सुबूत ही पेश कर पाई है. पंचायत को लगता है कि करन बेकुसूर है, इसलिए पंचायत के मुताबिक दोनों को एकसाथ ही रहना होगा. इन का तलाक नहीं कराया जा सकता.

‘‘रूबी ने अपने बेकुसूर पति पर बेवजह आरोप लगाए और पंचायत का समय खराब किया, इसलिए रूबी को सजा भुगतनी होगी.

‘‘रूबी को यह पंचायत 30,000 रुपए बतौर जुर्माना जमा करने का हुक्म देती है. और पैसे न जमा कर पाने की हालत में रूबी पर कड़ी कार्यवाही भी हो सकती है. जुर्माना परसों शाम तक प्रधान के पास जमा हो जाना चाहिए.’’

यह फैसला सुन कर रूबी टूट गई थी. जो रूबी कुछ दिनों पहले तक महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जगा रही थी, वही रूबी जिस ने अपने मांबाप की मरजी के खिलाफ जा कर शादी की थी, उसे ही धोखा मिला.

और सब बातों के साथसाथ रूबी के सामने इतने पैसे जुर्माने के तौर पर जमा करने का हुक्म भी बजाना था, नहीं तो जालिम पंचायत न जाने क्या करवा दे.

एक दिन बीत गया था. पोस्ट औफिस में कुछ पैसे जमा थे और कुछ संदूक में थे, उन्हें मिला कर 20,000 रुपए ही हो सके. जब और पैसे का इंतजाम नहीं हो सका, तो तय समय पर रूबी इतने ही पैसों को ले कर पंचायत के सामने पहुंची और जुर्माने के पूरे पैसे जमा कर पाने में अपनी मजबूरी दिखाई.

प्रधान पारस ने बोलना शुरू किया, ‘‘रूबी हमारी भाभी लगती हैं… ये कहें तो हम सारा जुर्माना खुद ही जमा कर देंगे, पर क्यों करें, इंसाफ और धर्म के हाथों मजबूर हैं. हम ऐसा नहीं कर सकते… और हमारी रूबी भाभी जुर्माना नहीं जमा कर पाई हैं, इसलिए पंचों का फैसला है कि इन को बाकी के बचे 10,000 रुपयों के बदले दूसरी तरह का जुर्माना देना होगा.

‘‘और वह जुर्माना यह होगा कि हमारे खेत में जितना कटा हुआ गेहूं पड़ा हुआ है, उसे किसी भी तरह से हमारे आंगन तक पहुंचाना होगा.’’

एक बार फिर यह पंचायती फरमान सुन कर रूबी दंग रह गई थी,

हां, शायद भाग ही जाती, पर दो बच्चियों को छोड़ कर जाना संभव नहीं था. और फिर करन का क्या भरोसा?

‘‘बोलो… जुर्माने के तौर पर दी जाने वाली सजा मंजूर है तुम्हें?’’ प्रधान पारस की आवाज गूंजी. कोई चारा नहीं था उस अबला रूबी के पास, पर वह इस समय एक ऐसे दर्द में थी, जिस से एक दूसरी औरत ही समझ सकती है.

रूबी ने हिम्मत जुटाई और सभी के सामने बोल दिया, ‘‘फैसला मंजूर है, पर मैं अभी यह सजा नहीं झेल सकती.’’

‘‘पर क्यों?’’ एक पंच बोला.

‘‘क्योंकि, मैं रजस्वला हूं…’’

सारी बैठी औरतें सन्न रह गईं और आपस में खुसुरफुसुर करने लगीं.

‘‘मैं इस समय कोई भारी चीज नहीं उठा पाऊंगी, इसलिए मैं विनती करती हूं कि मेरी यह सजा माफ कर दी जाए.’’

प्रधान और पंचायत के कानों में जूं तक नहीं रेंगी. और नहीं किसी औरत के प्रति इस हालत में जरा भी हमदर्दी आई.

लिहाजा रूबी को पंचायत की बात माननी पड़ी. उस ने खेत में पड़ा गेहूं बोरियों में भरना शुरू किया और बोरी को लादलाद कर प्रधान के घर में रखना शुरू कर दिया, सूरज ऊपर तप रहा था, रूबी की आंखों में आंसू थे, पर वह अपने को किसी जाल में फंसा हुआ महसूस कर रही थी.

वह अभी कुछ ही बोरे रख पाई थी कि उस के पैर कांपने लगे. उस की जांघें छलनी हो गई थीं. उस की आंखों के सामने अंधेरा छा गया. वह और नहीं सह सकी और वहीं बेहोश हो गई.

रूबी की आंख जब खुली, तो उस ने अपने आसपास सभी साथियों को पाया, जो समाजसेवा के काम में रूबी के साथ ईरिकशे पर बैठ कर जाती थीं, उन लोगों ने ही रूबी को अस्पताल में भरती कराया और उस से बिलकुल भी चिंता न करने की सलाह दी.

जब अस्पताल से रूबी को छुट्टी मिली, तो वह वहां से अपनी साथियों की मदद से महिला आयोग पहुंची, जहां उस ने अपने ऊपर हुए जुल्म की दास्तां बताई और यह भी बताया कि किस तरह से उस का पति एक दूसरी औरत के साथ जिस्मानी संबंध रखे हुए है, जबकि उन दोनों ने आपसी सहमति से प्रेम विवाह किया था.

महिला आयोग ने रूबी से हमदर्दी तो दिखाई, पर यह भी कहा कि आप पढ़ीलिखी लगती हैं… और जब तक आप के पास अपने पति के खिलाफ दूसरी महिला के साथ संबंध होने का कोई सुबूत नहीं होगा. तब तक हम

चाह कर भी आप की कोई मदद नहीं कर पाएंगे.

रूबी निराश हो कर वहां से लौट आई और यह सोचने लगी कि सुबूत कैसे जुटाया जाए.

फिर कुछ दिन बीतने के बाद रूबी एक दिन दोपहर में चोरीछुपे अपने गांव के घर में पहुंची और दरवाजा खटखटाया.

दरवाजा करन ने खोला और रूबी को देखते ही बिफर गया, ‘‘तू फिर यहां आ गई अपनी शक्ल दिखाने के लिए.’’

‘‘करन… एक मिनट मेरी बात तो सुनो… हम ने तो प्रेम विवाह किया था, फिर मुझ से इतनी नफरत क्यों?’’ रूबी ने पूछा.

‘‘प्रेम विवाह… हुंह… क्या तुम नहीं जानती कि हम दोनों अलगअलग जाति से संबंध रखते हैं… और हमारे गांव में किसी भी छोटी जाति वाली लड़की से शादी करने वाले को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता… पूरे गांव ने मेरा बहिष्कार कर दिया… मैं अब और नहीं सह सकता… और फिर तुम्हारे अंदर भी मैं ने एक कमाऊ औरत होने का अहंकार देखा… तुम काम से आ कर मुझ पर अहसान दिखाती थी और अकसर ही मेरा बिस्तर बिना गरम किए ही सो जाती थी. और मैं रातभर करवट बदलता रहता था… और फिर तुम्हारे भी तो बाहर और भी कई मर्दों के साथ संबंध हैं, इसीलिए मैं ने भी इस औरत के साथ संबंध बना लिया है और आगे भी मैं इसी के साथ रहूंगा,’’ करन ने सब स्वीकार कर लिया.

‘‘पर, मैं ने तुम से प्रेम…’’ रूबी का स्वर बीच में ही रुक गया.

‘‘हट साली… गड़रिया की जाति… चली है एक ब्राह्मण से इश्क लड़ाने… भाग जा यहां से और दोबारा इस दरवाजे पर मत आना,’’ दहाड़ उठा था करन.

रूबी पीछे चल दी, आगे चल कर उस ने अपने हैंडबैग में छुपा खुफिया कैमरा निकाला और उस में होने वाली रिकौर्डिंग बंद की और अब उस के चेहरे पर विजयी मुसकान थी.

ये वीडियो रिकौर्डिंग उस ने कोर्ट में पेश की, जहां पर करन को अपने पत्नी को मानसिक रूप से प्रताडि़त करने के लिए और दूसरी महिला से संबंध रखने के आरोप में सजा सुनाई गई.

यही नहीं, पंचायत द्वारा एक स्त्री पर अमानवीय व्यवहार करने के जुर्म में पंचायत के सभी सदस्यों को भी सजा दी गई और प्रधान को तत्काल प्रभाव से उस के पद से भी हटा दिया गया.

ये एक औरत की जीत थी, उस के सम्मान की जीत…

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खुशी का गम- भाग 1: क्या परिवार को दोबारा पा सका वह

मेरे बेटे आकाश की आज शादी है. घर मेहमानों से भरा पड़ा है. हर तरफ शादी की तैयारियां चल रही हैं. यद्यपि मैं इस घर का मुखिया हूं, लेकिन अपने ही घर में मेरी हैसियत सिर्फ एक मूकदर्शक की बन कर रह गई है. आज मेरे पास न पैसा है न परिवार में कोई प्रतिष्ठा. चूंकि घर के नौकरों से ले कर रिश्तेदारों तक को इस बात की जानकारी है, इसलिए सभी मुझ से बहुत रूखे ढंग से पेश आते हैं.

बहुत अपमानजनक है यह सब लेकिन मैं क्या करूं? अपने ही घर में उस अपमानजनक स्थिति के लिए मैं खुद ही तो जिम्मेदार हूं. फिर मैं किसे दोष दूं? क्या खुशी, मेरी पत्नी इस के लिए जिम्मेदार है? अंदर से एक हूक  सी उठी. और इसी के साथ मन ने कहा, ‘उस ने तो तुम्हें पति का पूरा सम्मान दिया, पूरा आदर दिया, लेकिन तुम शायद उस के प्यार, उस के समर्पण के हकदार नहीं थे.’

खुशी एक बहुत कुशल गृहिणी है जिस ने कई सालों तक मुझे पत्नी का निश्छल प्यार और समर्पण दिया. पर मैं ही नादान था जो उस की अच्छाइयां कभी समझ नहीं पाया. मैं हमेशा उस की आलोचना करता रहा. उसे मानसिक रूप से प्रताडि़त करता रहा. अपने प्रति उस के लगाव को हमेशा मैं ने ढोंग समझा.

मैं सारा जीवन मौजमस्ती करता रहा और वह मेरी ऐयाशियों को घुटघुट कर सहती रही, मेरे अपमान व अवमाननापूर्ण व्यवहार को सहती रही. वह एक सीधीसादी सुशील महिला थी और उस का संसार सिर्फ मैं और उस का बेटा आकाश थे. वह हम दोनों के चेहरों पर मुसकराहट देखने के लिए कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहती थी लेकिन मैं अपने प्रति उस की उस अटूट चाहत को कभी समझ न पाया.

मैं कब विगत दिनों की खट्टीमीठी यादों की लहरों में बहता चला गया. मुझे पता भी नहीं चला था.

उन दिनों मैं कालिज में नयानया आया था. वरिष्ठ छात्र रैगिंग कर रहे थे. एक दिन मैं कालिज में अभी घुसा ही था कि एक दूध की तरह गोरी, अति आकर्षक नैननक्श वाली लड़की कुछ घबराई और परेशान सी मेरे पास आई और सकुचाते हुए मुझ से बोली, ‘आप बी.ए. प्रथम वर्ष में हैं न, मैं भी बी.ए. प्रथम वर्ष में हूं. वह जो सामने छात्रों का झुंड बैठा है, उन लोगों ने मुझ से कहा है कि मैं आप का हाथ थामे इस मैदान का चक्कर लगाऊं. अब वे सीनियर हैं, उन की बात नहीं मानी तो नाहक मुझे परेशान करेंगे.’

‘हां, हां, मेरा हाथ आप शौक से थामिए, चाहें तो जिंदगी भर थामे रहिए. बंदे को कोई परेशानी नहीं होगी. तो चलें, चक्कर लगाएं.’

मेरी इस चुटकी पर शर्म से सिंदूरी होते उस कोमल चेहरे को मैं देखता रह गया था. मैं अब तक कई लड़कियों के संपर्क में आ चुका था लेकिन इतनी शर्माती, सकुचाती सुंदरता की प्रतिमूर्ति को मैं ने पहली बार इतने करीब से देखा था.

उस के मुलायम हाथ को थामे मैं ने पूरे मैदान का चक्कर लगाया था और फिर ताली बजाते छात्रों के दल के सामने आ कर मैं ने उस का कांपता हाथ छोड़ दिया था कि तभी उस ने नजरें जमीन में गड़ा कर मुझ से कहा था, ‘आई लव यू’, और यह कहते ही वह सुबकसुबक कर रो पड़ी थी और मैं मुसकराता हुआ उसे छोड़ कर क्लास में चला गया था.

बाद में मुझे पता चला था कि उस सुंदर लड़की का नाम खुशी था और वह एक प्रतिष्ठित धनाढ्य परिवार की लड़की थी. उस दिन के बाद जब कभी भी मेरा उस से सामना होता, मुझ से नजरें मिलते ही वह घबरा कर अपनी पलकें झुका लेती और मेरे सामने से हट जाती. उस की इस अदा ने मुझे उस का दीवाना बना दिया था. मैं क्लास में कोशिश करता कि उस के ठीक सामने बैठूं. मैं उस का परिचय पाने और दोस्ती करने के लिए बेताब हो उठा था.

मेरे चाचाजी की लड़की नेहा, जो मेरी ही क्लास में थी, वह खुशी की बहुत अच्छी सहेली थी. मैं ने नेहा के सामने खुशी से दोस्ती करने की इच्छा जाहिर की और नेहा ने एक दिन मुझ से उस की दोस्ती करा दी थी. धीरेधीरे हमारी दोस्ती बढ़ गई और खुशी मेरे बहुत करीब आ गई थी.

मैं जैसेजैसे खुशी के करीब आता जा रहा था, वैसेवैसे मुझे निराशा हाथ लगती जा रही थी. मैं स्वभाव से बेहद बातूनी, जिंदादिल, मस्तमौला किस्म का युवक था लेकिन खुशी अपने नाम के विपरीत एक बेहद भावुक किस्म की गंभीर लड़की थी.

कुछ ही समय में वह मेरे बहुत करीब आ चुकी थी और मैं उस की जिंदगी का आधारस्तंभ बन गया था, लेकिन मैं उस के नीरस स्वभाव से ऊबने लगा था. वह मितभाषी थी, जब भी मेरे पास रहती, होंठ सिले रहती. जहां मैं हर वक्त खुल कर हंसता रहता था, वहीं वह हर वक्त गंभीरता का आवरण ओढे़ रहती.

दिन गुजरने के साथ जैसेजैसे उस के व्यक्तित्व का यह पहलू मेरे सामने आ रहा था वैसेवैसे उस के प्रति मेरा मोहभंग होता जा रहा था. जहां वह मानसिक रूप से दिन पर दिन मेरे करीब आती जा रही थी, वहीं मैं जानबूझ कर अपने को उस से दूर करता जा रहा था, क्योंकि मैं जानता था कि उस के और मेरे रिश्ते का कोई भविष्य नहीं है. मुझे एहसास होता जा रहा था कि यदि हम ने शादी कर ली तो मैं उस के साथ कभी सुखी नहीं रह पाऊंगा. यह सोच कर मैं ने धीरेधीरे उस से मिलना कम कर दिया. लेकिन नेहा से मुझे पता चला कि मेरे इस रवैये से वह बहुत दुखी और परेशान रहने लगी थी, क्योंकि वह मुझ से भावनात्मक तौर पर जुड़ चुकी थी.

नेहा ने तो मुझे यह भी बताया कि अगर मैं खुशी से शादी नहीं करूंगा तो वह अपनी जान दे देगी, लेकिन किसी और लड़के से शादी नहीं करेगी. नेहा की इस बात से मैं परेशान हो गया था, और एक दिन खुशी को मैं ने अपने और उस के विरोधाभास के बारे में बताया कि हम दोनों के स्वभाव में जमीनआसमान का अंतर होने की वजह से वह कभी मेरे साथ सुखी नहीं रह पाएगी. इसलिए बेहतर यही होगा कि हम अपने रास्ते  अलग कर लें.

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खुशी का गम- भाग 3: क्या परिवार को दोबारा पा सका वह

उसी दिन मैं शिलांग चला गया था. समय पंख लगा कर उड़ता चला गया और मेरा बेटा बड़ा हो चला था. जैसेजैसे वह समझदार होता जा रहा था, वह भी मुझ से दूर होता जा रहा था. मैं उसे अपने करीब लाने की भरसक कोशिश करता, पर वह मुझ से हमेशा अनमना सा रहता और अजनबियों की तरह पेश आता.

फ्लोरेंस से भी मेरा एक बेटा था जिसे मैं बेहद प्यार करता था. जैसेजैसे वह बड़ा हो रहा था वह भी मेरे नियंत्रण से बाहर होता जा रहा था.

इधर पिछले कुछ सालों से खुशी का कुछ दूसरा ही रूप मुझे देखने को मिल रहा था. गुवाहाटी वाला साडि़यों का शोरूम अब खुशी संभाल रही थी. उस के देखभाल करने के बाद वहां की बिक्री लगभग दोगुनी हो गई थी.

अब मेरा बेटा आकाश भी बड़ा हो चला था और कालिज के बाद वह भी शोरूम में बैठने लगा था, लेकिन एक बात जो मुझे खाए जा रही थी वह यह कि खुशी के प्रति मेरे अवमाननापूर्ण व्यवहार के प्रतिक्रियास्वरूप वह मुझ से बहुत कटाकटा सा रहने लगा था और दुकान की तिजोरी की चाबी भी वह अपने पास रखने लगा था. इस वजह से मैं रुपएपैसे के मामले में उन का मोहताज हो गया था. जब कभी मुझे रुपएपैसों की जरूरत होती, खुशी ही मुझे थोड़ेबहुत रुपए दे देती. इस तरह रुपयों के लिए पूरी तरह खुशी पर निर्भर होने की वजह से मेरे आत्मसम्मान को बहुत ठेस पहुंची थी और मुझ में धीरेधीरे हीनता की भावना घर करती जा रही थी.

उधर जिस जमीन के लालच में मैं ने फ्लोरेंस से रिश्ता जोड़ा था, उस जमीन के कागजों की फ्लोरेंस ने मुझे हवा तक नहीं लगने दी. न जाने वह उन्हें कहां छिपा कर रखती थी. उस पर कई महीनों से फ्लोरेंस से मेरी गंभीर अनबन चल रही थी. वह मुझ पर बहुत जोर डाल रही थी कि मैं खुशी को तलाक दे कर उस से अदालत में शादी कर लूं. लेकिन मैं खुशी को तलाक नहीं देना चाहता था. शायद इस की वजह यह थी कि मैं खुशी से भावनात्मक रूप से बहुत जुड़ा हुआ था. इस वजह से फ्लोरेंस और मुझ में झगड़ा बढ़ता ही गया और एक दिन फ्लोरेंस और उस के बेटे हनी ने मिल कर शिलांग वाले साडि़यों के शोरूम पर पूरी तरह से अपना कब्जा जमा लिया था. मैं जब भी शिलांग वाले शोरूम में जाता, हनी मुझे तिजोरी को हाथ तक न लगाने देता.

अब मुझे एहसास होने लगा था कि फ्लोरेंस के साथ रिश्ता कायम कर के मैं ने जिंदगी के हर क्षेत्र में नुकसान उठाया था. फ्लोरेंस की वजह से मैं ने खुशी और आकाश की उपेक्षा और अवहेलना की. मैं ने अपनी पत्नी की उपेक्षा की जिस की वजह से मेरे बेटे ने मुझे कभी पिता का आदरमान नहीं दिया और मैं अपने ही घर में बेगाना बन कर रह गया.

फ्लोरेंस से रिश्ता रखने की वजह से मेरे परिवार वालों ने मुझे पुश्तैनी संपत्ति से बेदखल कर उसे खुशी और आकाश के नाम कर दिया था. मेरी लापरवाही के चलते मेरा गुवाहाटी का शोरूम भी खुशी और आकाश के कब्जे में चला गया था. अब मुझे एहसास हो रहा था कि मैं जिंदगी की लड़ाई में बुरी तरह से हार गया था.

एक वक्त था जब कुदरत ने मुझे दुनिया की हर नियामत बख्शी थी. सुशील पत्नी, एक प्यारा सा बेटा, चलता हुआ व्यापार, सामाजिक प्रतिष्ठा, लेकिन मैं ने यह सबकुछ अपनी ही बेवकूफी से गंवा दिया था. शायद यही मेरी गलतियों की सजा है, लेकिन अब मुझे अपनी गलतियों का एहसास हो चला है और इस के लिए मैं खुशी और आकाश से माफी मांगूंगा. फ्लोरेंस से अपने सारे संबंध हमेशा के लिए तोड़ लूंगा. दोबारा से शोरूम में बैठ कर व्यापार संभालूंगा. खुशी बहुत अच्छी है. वह जरूर मुझे माफ कर देगी.

शोरूम में बैठ कर काम संभालने के खयाल ने मुझे बहुत सुकून दिया था. फिर भी मन के एक कोने में कहीं यह डर छिपा हुआ था कि क्या आकाश और खुशी मुझे फिर से व्यापार संभालने देंगे? क्या वे दोनों मेरी पिछली भूलों को नजरअंदाज कर पाएंगे?

इसी डर और आशंका के साथ मैं शोरूम पर पहुंचा और खुशी से बोला, ‘खुशी, मैं ने पूरी जिंदगी तुम्हारे साथ बहुत अन्याय किया. अपने गलत आचरण से तुम्हारे दिल को बहुत दुखाया. मैं वादा करता हूं कि पुरानी भूलों को अब कभी नहीं दोहराऊंगा. मैं ने फ्लोरेंस और हनी से सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं. बस…तुम मुझे एक बार माफ कर दो.’

खुशी तो कुछ नहीं बोली लेकिन आकाश बोल पड़ा, ‘अब आप को अपनी गलतियों का एहसास हो रहा है. मेरी मां ने कितने दिन और कितनी रातें आप की वजह से रोरो कर गुजारी हैं, यह मैं ने अपनी आंखों से देखा है और अब आप माफी मांग रहे हैं. नहीं, बिलकुल नहीं. आप हमारी माफी के बिलकुल भी हकदार नहीं हैं. इतने सालों तक हम ने बिना आप के सहारे के अकेले, अपने दम पर जिंदगी जी है, आगे भी जी लेंगे. अब आप कारोबार संभालने की बात कर रहे हैं, जबकि पहले आप ने ही सारा कारोबार चौपट कर दिया था. यह शोरूम बंद होने के कगार पर आ पहुंचा था. आप यहां से जाइए, हम दोनों की जिंदगी में अब आप की कोई जगह नहीं है.’

आकाश की इन कड़वी पर सच बातों को सुन कर मेरा दिल बैठ गया और मैं ने हताश कदमों व टूटे दिल से वापस लौटने के लिए कदम बढ़ाए थे कि तभी खुशी बोल पड़ी, ‘आकाश बेटा, पापा से ऐसा नहीं कहते. गलतियां किस से नहीं होतीं? पापा को अपनी गलतियों का एहसास हो गया, यही बहुत है. सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते. हां, पर अब आप को मेरी एक बात माननी पडे़गी कि आप भविष्य में फ्लोरेंस और हनी से कोई रिश्ता नहीं रखेंगे और न उन से मिलने शिलांग जाएंगे.’

‘खुशी, अगर तुम्हें मेरी बातों पर यकीन है तो मैं तुम्हारी कसम खा कर कहता हूं कि भविष्य में मैं उन से कोई संबंध नहीं रखूंगा. मैं ने उन से हमेशाहमेशा के लिए अपने रिश्ते तोड़ लिए हैं.’

यह सुन कर खुशी के चेहरे पर संतुष्टि के भाव परिलक्षित हुए. फिर अपनी कुरसी से उठते हुए उस ने मुझ से कहा, ‘यह जगह आप की है. आप आइए, यहां बैठिए.’

मैं एक बार फिर खुशी की अच्छाइयों के सामने नतमस्तक हो गया था. मुझ में एक बार फिर से जिंदगी जीने की तमन्ना जाग उठी थी.

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