बहार: भाग 1- क्या पति की शराब की लत छुड़ाने में कामयाब हो पाई संगीता

अपने सास ससुर के रहने आने की खबर सुन कर संगीता का मूड खराब हो गया. यह बात उस के पति रवि की नजरों में भी आ गई.

सप्ताहभर पहले संगीता की बड़ी ननद मीनाक्षी अपने दोनों बच्चों के साथ पूरे 10 दिन उस के घर रह कर गई थी. अब इतनी जल्दी सासससुर का रहने आना उसे बहुत खल रहा था.

‘‘इतना सड़ा सा मुंह मत बनाओ संगीता क्योंकि 10-15 दिनों की ही बात है. पहली बार दोनों अपने छोटे से कसबे में रहने आ रहे हैं, इसलिए मैं टालमटोल नहीं कर सकता था.’’

रवि के इन शब्दों को सुन कर संगीता का मूड और ज्यादा उखड़ गया. बोली, ‘‘मेरी खुद की तबीयत ठीक नहीं रहती है. उन की देखभाल के लिए नौकरानी ला दो, तो मुझे कोई शिकायत नहीं. फिर कितने भी दिन रुकें, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा,’’ तीखे स्वर में जवाब दे कर संगीता ने चादर से मुंह ढका और लंबी चुप्पी साध ली.

अपने मातापिता के आने से परेशान रवि भी था. मीनाक्षी के सामने संगीता के साथ उस का कई बार झगड़ा हुआ था. उन सब झगड़ों की खबर उस के मातापिता तक निश्चित रूप से मीनाक्षी ने पहुंचा दी होगी. वह जानता था कि मातापिता अपना पुरातनपंथी रवैया नहीं छोड़ेंगे और पूरी सोयायटी में उस की जगहंसाई हो सकती है.

शादी होने के सिर्फ 5 महीने बाद बेटाबहू खूब लड़तेझगड़ने लगे थे. इस तथ्य ने उस के मातापिता का दिल दुखा कर उन्हें चिंता से भर दिया होगा. अब रवि उन का सामना करने का हौसला अपने भीतर जुटा नहीं पा रहा था. वह कोविड-19 का बहाना बना कर उन्हें टालता रहा था पर अब वह बहाना चल नहीं रहा था.

लगभग ऐसी ही मनोस्थिति संगीता की भी थी. काम के बोझ का तो उस ने बहाना बनाया था. वह भी अपने सासससुर की नजरों के सामने खराब छवि के साथ आना नहीं चाहती थी. उन का चिंता करना या समझना उसे अपमानजनक महसूस होगा और वह उस स्थिति का सामना करने से बचना चाहती थी. रवि के मातापिता कोविड-19 के दिनों में अकेले ही रहे थे और अकेलेपन को सहज लेते रहे थे.

अगले दिन शाम को उस के सासससुर उन के घर पहुंच गए. दोनों में से किसी

ने भी रवि और उस के बीच 2 साल से चलने वाले झगड़ों की चर्चा नहीं छेड़ी. उसे 2 सुंदर साडि़यों का उपहार भी मिला. सोने जाने तक का समय इधरउधर की बातें करते हुए बड़ी अच्छी तरह से गुजरा और संगीता ने मन ही मन बड़ी राहत महसूस करी.

‘‘अपने सासससुर के सामने न मैं आप से उलझंगी, न आप मुझ से झगड़ना,’’ संगीता के इस प्रस्ताव पर रवि ने फौरन अपनी सहमति की मुहर सोने से पहले लगा दी थी.

अगले दिन शाम को जो घटा उस की कल्पना भी उन दोनों ने कभी नहीं करी थी.

रवि अपने दोस्तों के साथ शराब पीने के बाद घर लौटा. वह ऐसा अकसर सप्ताह में

3-4 बार करता था. इसी क ारण उस का संगीता से खूब झगड़ा भी होता.

उस शाम संगीता की नाक से शराब का भभका टकराया, तो उस की आंखों में गुस्से की लपटें फौरन उठीं, पर वह मुंह से एक शब्द नहीं बोली.

रवि के दोस्तों में से ज्यादातर पियक्कड़ किस्म के थे. रवि की जमात के लोगों को ऊंची जाति के लोग दोस्त नहीं बनाते थे और उसे सड़क छाप आधे पढ़े लोगों को अपना दोस्त बनाना पड़ता था जो सस्ती शराब भरभर कर

पीते थे.

उस की मां आरती मुसकराती हुई अपने

बेटे के करीब आईं, तो शराब की गंध उन्होंने

भी पकड़ी.

‘‘रवि, तूने शराब पी रखी है?’’ आरती ने चौंक कर पूछा.

‘‘एक दोस्त के यहां पार्टी थी. थोड़ी सी जबरदस्ती पिला दी उन लोगों ने,’’ उन से बच कर रवि अपने शयनकक्ष की तरफ बढ़ा.

आरती ने अपने पति रमाकांत की तरफ घूम कर उन से शिकायती लहजे में

कहा, ‘‘मेरे बेटे को यह गंदी लत आप की बदौलत मिली है.’’

‘‘बेकार की बकवास मत करो,’’ रमाकांत ने उन्हें फौरन डपट दिया.

‘‘मैं ठीक कह रही हूं,’’ आरती निडर बनी रहीं, ‘‘जब यह बच्चा था तब इस ने आप को शराब पीते देखा और आज खुद पीने लगा है.’’

‘‘मुझे शराब छोड़े 10 साल हो गए हैं.’’

‘‘जब ब्लडप्रैशर बढ़ गया और लिवर खराब होने लगा, तब छोड़ा आप ने पीना. मैं लगातार शोर मचाती थी कि बच्चे पर बुरा असर पड़ेगा, पर मेरी कभी नहीं सुनी आप ने. मेरा बेटा अपना स्वास्थ्य अब बरबाद करेगा और उस के जिम्मेदार आप होंगे.’’

‘‘अपनी बेकार की बकबक बंद कर, बेवकूफ औरत.’’

उन की गुस्से से भरी चेतावनी के बावजूद आरती ने चुप्पी नहीं साधी, तो उन के बीच झगड़ा बढ़ता गया. संगीता अपनी सास को दूसरे कमरे में ले जाना चाहती थी, पर असफल रही. रवि ने बारबार रमाकांत से चुप हो जाने की प्रार्थना करी, पर उन्होंने बोलना बंद नहीं किया.

रमाकांत को अचानक इतना गुस्सा आया कि नौबत आरती पर हाथ उठाने की आ गई. तब संगीता अपनी सास को जबरदस्ती खींच कर दूसरे कमरे में ले गई.

रवि देर तक अपने पिता को गुस्सा न करने के लिए समझता रहा. रमाकांत खामोशी से उस की बातें सिर झकाए सुनते रहे

उन के पास से उठने के समय तक रवि का नशा यों गायब हो चुका था जैसे उस ने शराब पी ही नहीं थी. सारा झगड़ा उस के पिता की शराब पीने की पुरानी आदत को ले कर हुआ था. कमाल की बात यह थी कि उसे दिमाग पर बहुत जोर डालने पर भी याद नहीं आया कि उस ने कभी अपने पिता को शराब पीते देखा हो.

शादी के बाद संगीता ज्यादा दिन अपने सासससुर के साथ नहीं रही थी. उन की आपस में लड़नेझगड़ने की क्षमता देख कर उसे अपने रवि के साथ हुए झगड़े बौने लगने लगे थे.

रविवार के दिन आरती और रमाकांत का एक

और नया रूप उन दोनों को देखने के लिए मिला.

संगीता ने आरती द्वारा पूछे

गए एक सवाल के जवाब में

कहा, ‘‘इन्हें घूमने जाने या फिल्म देखने को बिलकुल शौक नहीं है. मुझे फिल्म देखे हुए महीनों बीत गए हैं.’’

‘‘बकवास हिंदी फिल्में सिनेमाहौल पर देखने में 3 घंटे बरबाद करने की क्या तुक है?’’ रवि ने सफाई दी, ‘‘फिर केबल

पर दिनरात फिल्में आती रहती हैं. टीवी पर फिल्में देख कर यह अपना शौक पूरा कर लेती है, मां. नैट विलक्स भी है. बहुत सीरीज हैं, उन्हें देखे न.’’

‘‘असल में तुम बापबेटे दोनों को ही अपनीअपनी पत्नी के शौक पर खर्चा करना अच्छा नहीं लगता है,’’ आरती ने अपनी बहू का हाथ प्यार से अपने हाथ में ले कर शरारती स्वर में टिप्पणी करी.

‘‘तुम हर बात में मुझे क्यों बीच में घसीट लेती हो? अरे, मैं ने तो शादी के बाद तुम्हें पहले साल में कम से कम 50 फिल्में दिखाई होंगी,’’ रमाकांत ने तुनक कर सफाई दी.

‘‘फिल्में देखने का शौक आप को था, मुझे नहीं.’’

‘‘तू तो हौल में आंखें बंद कर के बैठी रहती होगी.’’

आगे पढ़ें- आरती की बात पर संगीता और…

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आर्थ्राइटिस के कारण मैं परेशान हो गई हूं, मैं क्या करुं?

सवाल-

मेरी उम्र 38 साल है. मैं टीबी का मरीज हूं. दरअसल, 6 महीनों से मेरी पीठ के निचले हिस्से में बहुत तेज दर्द होता है. एक्सरे कराने पर आर्थ्राइटिस का पता चला, लेकिन दवा के बाद भी बिलकुल राहत नहीं है. बैड पर लेटे हुए दर्द और तेज हो जाता है. बुखार भी जल्दीजल्दी आता है. बहुत परेशान हूं. कृपया कोई समाधान बताएं?

जवाब-

आप ने जिस प्रकार अपनी समस्या का जिक्र किया है उस के वास्तविक कारण की पुष्टि केवल सीटी स्कैन या एमआरआई से ही संभव है. हालांकि आप के द्वारा बताए गए लक्षणों से यह साफ पता चलता है कि यह सिर्फ आर्थ्राइटिस तो नहीं है, क्योंकि इस समस्या में सोते वक्त मरीज को दर्द में राहत मिलती है, जबकि आप के साथ उलटा है. इस के अनुसार आप को रीढ़ की टीबी हो सकती है, जो शरीर के अन्य हिस्सों में फैल कर उन्हें प्रभावित करती है. संभवतया आप के साथ भी यही हुआ है. जल्द से जल्द एमआरआई करा के उचित इलाज लेना आवश्यक है. हड्डी की टीबी के मामले में आराम, स्वस्थ आहार, दवा और फिजियोथेरैपी आदि मरीज को ठीक करने में सहायक हो सकते हैं. इलाज में देरी आप को लकवा का शिकार बना सकती है.

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रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस एक जटिल बीमारी है, जिस में जोड़ों में सूजन और जलन की समस्या हो जाती है. यह सूजन और जलन इतनी ज्यादा हो सकती है कि इस से हाथों और शरीर के अन्य अंगों के काम और बाह्य आकृति भी प्रभावित हो सकती है. रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस पैरों को भी प्रभावित कर सकती है और यह पंजों के जोड़ों को विकृत कर सकती है.

इस बीमारी के लक्षण का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है. रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस में सूजन, जोड़ों में तेज दर्द जैसे लक्षण होते हैं. पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं को अधिक देखने को मिलती है. वैसे तो यह समस्या बढ़ती उम्र के साथसाथ होती है, लेकिन अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान के कारण कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी देखने को मिल रही है.

रोग के लक्षण

वास्तव में रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस से पीडि़त 90% लोगों के पैरों और टखनों में रोग के लक्षण सब से पहले दिखाई देने लगते हैं. इस स्थिति का आसानी से उपचार किया जा सकता है, क्योंकि मैडिकल साइंस ने अब काफी प्रगति कर ली है और विकलांगता से आसानी से बचा जा सकता है.

रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस से ज्यादातर हाथों, कलाइयों, पैरों, टखनों, घुटनों, कंधों और कुहनियों के जोड़ प्रभावित होते हैं. इस रोग में शरीर के दोनों तरफ के एकजैसे हिस्सों में सूजन व जलन हो सकती है. रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस के लक्षण समय के साथ अचानक या फिर धीरेधीरे नजर आ सकते हैं. पैरों और हाथों में विकृति आना रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस का सब से सामान्य लक्षण है.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- महिलाओं में बढ़ती रह्यूमेटाइड आर्थ्राइटिस की समस्या

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Healthy रहने के अचूक टिप्स

आजकल हाई हील पहनना फैशन स्टेटमैंट बन चुका है. लेकिन इन्हें पहनने वाले यह नहीं जानते कि वे अपनी सेहत के साथ कितना खिलवाड़ कर रहे हैं यानी अनजाने में कई तरह की परेशानियों जैसे जौइंट प्रौब्लम, पैरों में दर्द आदि को न्योता दे रहे हैं. वरिष्ठ आर्थोपैडिक सर्जन डा. टी. शृंगारी का कहना है कि ऐसे में यह जरूरी है कि सैंडल खरीदते समय यह ध्यान रखें कि वे दोनों पैरों में आराम से फिट आएं. पैर के अंगूठों पर दबाव न पड़े. हाई हील को ज्यादा समय तक पहने रखने के बजाय थोड़ीथोड़ी देर के लिए इन्हें पैरों से निकालती रहें ताकि पैरों को रिलैक्स मिले. गाड़ी चलाते समय गाड़ी में 1 जोड़ी स्लीपर रखना न भूलें ताकि ड्राइविंग करते समय उन्हें पहन सकें. हील को रैग्युलर पहनने के बजाय खास अवसर पर ही पहनें. हील पहनने के बाद रात को सोते समय कुनकुने पानी में नमक गल कर थोड़ी देर के लिए पैरों को उस में रखें. रिलैक्स फील करेंगी.

पलकें झपकाना है जरूरी

सैंटर फौर साइट के डा. महिपाल सचदेव बताते हैं कि टीवी व कंप्यूटर देखते हुए पलकें झपकाना बहुत जरूरी है क्योंकि इस से आंखों में शुष्कता तथा जलन पैदा नहीं होती और पानी आता रहता है. अध्ययनों के अनुसार सामान्य स्थितियों के मुकाबले टीवी देखते हुए लोग पलकों को 5 गुना कम झपकाते हैं. पलकें न झपकाने की वजह से आंसू नहीं आते जिस से आंखें शुष्क हो जाती हैं. हर आधे घंटे बाद स्क्रीन से नजरें हटाएं और दूर रखी किसी चीज पर 5-10 सैकंड नजरें डालें. अपने फोकस को फिर से ऐडजस्ट करने के लिए पहले दूर रखी चीज पर 10-15 सैकंड तक नजरें टिकाए रखें. फिर पास की चीज पर 10-15 सैकंड तक फोकस करें. ऐसा 10 बार करें. इन दोनों व्यायामों से आप की दृष्टि तनावग्रस्त नहीं होगी और आप की आंखों की फोकस करने वाली मांसपेशियों में भी फैलाव होगा. इस के अलावा हर 20 मिनट बाद 20 सैकंड का बे्रक लें और 20 फुट दूर देखें. हर आधे घंटे में यह व्यायाम करें.

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स्मोकिंग, ड्रिंकिंग को कहें बायबाय

मेदांता मेडीसिटी, गुड़गांव के डा. विपुल गुप्ता के अनुसार कुछ साल पहले तक बे्रन स्ट्रोक जैसी बीमारी को बढ़ती उम्र का लक्षण माना जाता था, लेकिन आज यह किसी को भी कहीं पर भी अपना शिकार बना सकता है. यह हमारे देश में मौत का तीसरा सब से बड़ा कारण है और किसी और बीमारी की अपेक्षा शरीर के विकारग्रस्त होने का दूसरा बड़ा कारण है. स्ट्रोक के मरीजों में दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है. इस के मुख्य कारणों में एक कारण युवाओं में बढ़ रहा सिगरेट और शराब का चलन भी है. वैसे भी अगर एक बार स्ट्रोक हो जाए तो 4 में से 1 इंसान तो मौत के मुंह में चला ही जाता है और जो बच जाते हैं वे जीवन में कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते हैं. स्ट्रोक से बचना है तो अपने लाइफस्टाइल को ठीक रखें तथा सिगरेट व शराब को हमेशा के लिए बाय कहें. इस के अलावा दिमाग की तंदुरुस्ती के लिए सूखा मेवा, मछली, दही, साबूत अनाज आदि को अपने भोजन में शामिल करें.

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अंधेरे के हमसफर: क्या थी पिंकी के बदले व्यवहार की वजह

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Summer Special: अपने घर को बचाएं गर्मी की नजर से

गर्मियां दस्तक दे चुकी हैं. ऐसे में हम अपने कपड़ों के साथ ही थोड़ा बदलाव अगर घर की सजावट में भी लाएंगे तो ज्यादा बेहतर महसूस करेंगे. किस कुछ आसान से तरीकों से अपने घर को समर-फ्रेंडली लुक दिया जा सकता है. ये टिप्स आपके घर को शांत और ठंडा बनाने में आपकी मदद करेंगी.

1. वाज केवल फूल सजाने के लिए ही नहीं होते हैं. आप चाहें तो अपने किसी खूबसूरत से प्लांट की ब्रांच यानी डाली भी काटकर पानी भरकर इसमें सजा सकते हैं. इस तरह के मजेदार लेकिन जोरदार प्रयोग, जेड, यूकेलिप्टस और अन्य तरह के पौधों के साथ भी किए जा सकते हैं.

2. अपने किचन में पीले रंग की बहार लेकर आएं. एक सफेद बाउल या कांच का वाज लें और इसमें पीले नीबू भर दें. ये बेहद सस्ता डेकॉर साबित होते हैं. इसके अलावा जब ये आपकी नजर के बिल्कुल सामने रहेंगे तो आप जब इच्छा होगी तब इन्हें उठाकर काम में भी ले सकेंगे. सलाद में डालने के लिए या नीबू शर्बत बनाने के लिए ये बेहद हैंडी हो जाएंगे. पीले डैफोडिल्स किसी भी कमरे को जगमगा सकते हैं.

3. अपने वॉल फ्रेम में फ्लोरल पेंटिंग या फिर पिक्चर लगाएं. गर्मियों के मौसम में जब चिड़ियों का चहकना शुरू हो जाता है तब सीजनल प्लांट्स अंदर लेकर आ जाना चाहिए. इन्हें सबसे अच्छे तरीके से डिस्प्ले भी करना चाहिए. एक तरीका ये है कि प्रेस्ड फ्लॉवर को एक कलरफुल पेपर पर चिपका कर एक ब्राइट से फ्रेम में लगाकर सजा दें. फूल को प्रेस करने के लिए एक हेवी किताब के अंदर इसे एक हफ्ते के लिए दबा रहने दें. इस काम में पार्चमेंट पेपर का भी यूज करें.

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4. यहां कलर से ज्यादा बात टेक्स्चर की है. अपने वेलवेट पिलोज हटा दें. लाईट टेक्स्टाइल यूज करें. ज्यादा केयरफ्री अपील के लिए कॉटन फैब्रिक यूज करें.

5. हरियाली अपने घर के चारों ओर बिखरा दें. हाउज-प्लांट किसी भी घर के इंटीरियर को ज्यादा चीयरफुल बना देते हैं. प्लांट्स नैचरल एयर फिलटर्स का काम करते हैं इसलिए इन्हें रखने से घर के अंदर भी ताजी हवा चलती रहेगी. हर कमरे में दो प्लांट्स रखने की कोशिश करें. एक बड़ा प्लांट जमीन पर और दूसरा डेस्क या टेबल पर रखें. इंडोर प्लांट्स में फर्न्स और ऑर्किड्स सबसे अच्छे रहेंगे. ये लो-मेन्टेंनेंस प्लांट्स हैं जिन्हें आसानी से घर में जगह दी जा सकती है.

6. वाज का काम तो कोई भी कंटेनर कर सकता है. तो क्यों न कुछ नया ट्राय करें! आपके कलरफुल रेन-बूट्स जिन्हें अब यूज नहीं करते हैं उन्हें वाज की तरह यूज करें. इसी तरह मेसन जार, कैंडल होल्डर, टिन कैंस, बीकर्स, टी-कप्स या फिर पेंट की हुई बॉटल भी वाज की तरह यूज की जा सकती है.

7. एंट्री वे पर अपनी पुरानी बास्केट को प्लांट होल्डर की तरह लटका सकते हैं. इस तरह से अलग-अलग हाइट पर जब ये बास्केट लटकती हैं तो बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं. आप चाहें तो गेस्ट के आने से ठीक पहले इनमें पॉटेड प्लांट्स भी रखे जा सकते हैं.

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Married Life की डोर न होने दें कमजोर

पतिपत्नी का रिश्ता विश्वास की डोरी से बंधा होता है. अगर इस रिश्ते में विश्वास की गाड़ी जरा सी भी डगमगाई, तो फिर रिश्ते के टूटने में देर नहीं लगती. पूरा परिवार ताश के पत्तों की तरह बिखर जाता है. अत: एकदूसरे पर संदेह करना मतलब घर की बरबादी को न्योता देना है. फिर चाहे संदेह पति करे या पत्नी. ज्यादातर मामलों में जब पत्नी नौकरीपेशा होती है तब यह संदेह उत्पन्न होता है, जिस का कारण औफिस के लोगों से बातचीत, दोस्ती होती है. संदेह करने वाला पति यह नहीं समझता कि उस की भी औफिस में महिला दोस्त हैं. वह भी उन से हंसहंस कर बातें करता है. अगर औरत किसी से हंसतेबोलते दिख जाए तो हजारों लोगों की उंगलियां उठने लगती हैं. समाज के ठेकेदार पता नहीं उसे क्याक्या नाम देने लगते हैं.

एक सच्ची दास्तां से रूबरू कराना चाहता हूं. पतिपत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं. उन के परिवार में 4 लड़के भी हैं. बड़े लड़के की उम्र करीब 27 साल होगी. काफी सालों तक सब ठीक चलता रहा. फिर अचानक पति के स्वभाव में बदलाव आने लगा. वह बदलाव परिवार को बरबाद करने के लिए काफी था. पति सरकारी नौकरी करता है. पत्नी प्राइवेट जौब करती है. कुछ साल पहले पतिपत्नी के बीच मतभेद शुरू हो गए थे. मतभेद की वजह शक था. पतिपत्नी में रोज लड़ाई होती थी. पति पत्नी को गंदी गालियां देता. बेचारी पत्नी सहन करती रही.

पति को पत्नी के औफिस के एक आदमी पर शक था. पत्नी आखिर अपनी बेगुनाही को कैसे साबित करे, यह उस के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी थी. महल्ले में, रिश्तेदारों में परिवार की बदनामी हो रही थी. लेकिन पति को इस से क्या मतलब? उस पर तो धुन सवार थी. पति सुबह से शाम तक गायब रहे तो कुछ नहीं. लेकिन पत्नी के पास किसी का फोन भी आ जाए तो वह क्यों आया है? किस का है? कौन है? हजारों सवाल खड़े हो जाते हैं. ऐसा ही कुछ उस परिवार में चल रहा था. दरअसल, पत्नी एक दिन अपने सहकर्मी की गाड़ी में बैठ कर औफिस तक गई थी. बस पति को यही बात खाए जा रही थी. हर रोज इस बात पर ताना देता. यहां तक कि वेश्या तक कहा. पूरे घर में तनाव का माहौल बना रहता था.

57 साल की उम्र में पति का इस तरह से व्यवहार करना पत्नी और बच्चों को तनिक भी अच्छा नहीं लगता था. पूरे महल्ले में वह परिवार चर्चा का विषय बना हुआ था. पत्नी पर शक करने से कितना नुकसान परिवार झेल रहा था, पति को इस बात से कोई लेनादेना नहीं था. कहते हैं बेटा हो जब आप बराबर, तो समझो उसे बाप बराबर. लेकिन उस परिवार में पति को न अपने बच्चों का लिहाज था और न ही पत्नी का. पतिपत्नी का रिश्ता आपसी विश्वास पर टिका होता है. लेकिन उस परिवार में यह विश्वास डगमगा गया था, जिस से पूरा परिवार तबाह हो रहा था.

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1. रिश्ते पर भरोसा

पतिपत्नी के रिश्ते की डोर भरोसे पर टिकी होती है. भरोसा टूटा कि रिश्ता टूटा. घरपरिवार में एक बार कलह ने दस्तक दे दी तो फिर बाहर जाने वाली नहीं. धीरेधीरे लड़ाईझगड़े इतने बढ़ जाते हैं कि तलाक तक की नौबत आ जाती है, जिस से पूरा परिवार तबाह हो जाता है. जिंदगी भर इस रिश्ते की गाड़ी को चलाने के लिए एकदूसरे पर पूरा भरोसा करना जरूरी है.

2. सुनीसुनाई बातों को अनसुना करें

अकसर पति को पत्नी की बातें दूसरों से सुनने को मिलती हैं. अधिकतर मामलों में जब लोग कोई बात किसी से कहते हैं तो उस में कुछ बातें मिर्चमसाले के साथ खुद से भी जोड़ देते हैं. ऐसे में ये बातें आहत करती हैं. शक की गुंजाइश पैदा कर देती हैं. अत: इस रिश्ते में दूसरे की बातों को ज्यादा महत्त्व न दें जब तक कि आप अपनी आंखों से न देख लें.

3. भावनाओं की कद्र करें

पतिपत्नी के रिश्ते में एकदूसरे की भावनाओं की कद्र करना बहुत जरूरी है. कभीकभी छोटी सी बात भी काफी बड़ी बन जाती है. औफिस से लौट कर आने के बाद जो समय मिलता है, उसे एकदूसरे के साथ व्यतीत करें ताकि दिलों की बातें एकदूसरे से कह सकें. पतिपत्नी के रिश्ते में सैक्स का बहुत महत्त्व है. अधिकतर रिश्ते इस वजह से टूट जाते हैं कि इस क्रिया के लिए समय नहीं निकाल पाते. इस से संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है.

4. बच्चों के भविष्य की चिंता

पतिपत्नी के रिश्ते से जब आप मातापिता के रिश्ते में पहुंचते हैं तब आप एक अच्छा जोड़ा कहलाने के साथसाथ अच्छे मातापिता भी कहलाना पसंद करते हैं. जब आप बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के बारे में सोचेंगे तो फालतू बातों की ओर आप का ध्यान ही नहीं जाएगा.

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5. अफेयर से बचें

शादी के पहले आप का किस से क्या संबंध था, किस से अफेयर था, इस बात को भूलते हुए शादी के बाद अफेयर से बचें. कुछ मामलों में ऐसा होता है कि एकदूसरे से प्यार करने वालों की जब शादी दूसरी जगह हो जाती है और जब यह बात पत्नी या पति को पता चलती है तो संदेह की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. लेकिन कई बार शादी के बाद भी किसी के साथ अफेयर की बातें सामने आती हैं, जिस से पूरा परिवार बिखरने लगता है. अत: जब एक बार शादी के बंधन में बंध जाते हैं, तो फिर अपने जीवनसाथी और परिवार के विषय में ही सोचना चाहिए.

Summer Special: किसी भी अवसर पर बनाएं बेक्ड लेयर्ड राइस

किटी पार्टी, बर्थडे पार्टी या फिर अन्य किसी विशिष्ट अवसर की पार्टी हो हम हमेशा रूटीन से हटकर कुछ नया बनाना चाहते हैं. बाजार से मंगाई गई डिश जहां काफी महंगी होती है वहीं कोरोना काल के बाद से लोग आजकल रेडीमेड खाद्य वस्तुओं से परहेज भी करने लगे हैं. आज हम आपको एक ऐसी ही डिश को बनाना बता रहे हैं जिसे बनाकर आप पूरी पार्टी के मेन्यू को ही शानदार लुक दे सकतीं हैं. इसे हमने घर में उपलब्ध सामग्री से ही बनाया है तो आइए देखते हैं कि इसे कैसे बनाते हैं-

कितने लोगों के लिए         8

बनने में लगने वाला समय    30 मिनट

मील टाइप                        वेज

सामग्री(चावल के लिए)

चावल                      3 कप

तेजपात पत्ता            2

नमक                      1 टीस्पून

बड़ी इलायची           2

घी                           1 टीस्पून

पानी                        साढ़े पांच कप

सामग्री(ग्रीन राइस के लिए)

पालक प्यूरी               1 कप

उबले चावल                2 कप

बटर                          1 टीस्पून

ऑलिव ऑइल             1/2 टीस्पून

जीरा                           1/4 टीस्पून

ताजा दही                    1 टेबलस्पून

बारीक कटा प्याज           1

साबुत लाल मिर्च              2

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सामग्री(व्हाइट राइस के लिए)

उबले चावल                      2 कप

बारीक कटा प्याज               1

लहसुन बारीक कटा         4 कली

अदरक हरी मिर्च पेस्ट   1 टीस्पून

ऑरिगेनो                         1/2 टीस्पून

बटर                                  1 टीस्पून

ऑलिव ऑइल                 1/2 टीस्पून

चाट मसाला                      1/4 टीस्पून

सामग्री (रेड राइस के लिए)

उबले चावल                    2 कप

टोमेटो प्यूरी                    1कप

बटर                               1 टीस्पून

ऑलिव ऑइल                   1/2 टीस्पून

जीरा                               1/4 टीस्पून

कश्मीरी लाल मिर्च।            1/2 टीस्पून

गर्म मसाला                        1/4 टीस्पून

बारीक कटी शिमला मिर्च       1

बारीक कटा प्याज                 1

सादा नमक

सामग्री(बेकिंग के लिए)

मोजरेला चीज                   1 कप

चीज क्यूब्स                       4

ऑलिव्स                          1 टेबलस्पून

चिली फ्लैक्स                   1/2 टीस्पून

ऑरिगेनो                          1/4 टीस्पून

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विधि

सर्वप्रथम चावल को अच्छी तरह धोकर 20  मिनट के लिए पानी में भिगो दें. 20 मिनट के बाद नमक, इलायची, घी और तेजपात पत्ता के साथ प्रेशर कुकर में डालकर 1 सीटी लेकर पका लें. प्रेशर निकल जाने पर एक प्लेट में निकालकर ठंडा होने रख दें.

ग्रीन राइस बनाने के लिए एक पैन में बटर और ऑलिव ऑइल गर्म करें, जीरा, साबुत लाल मिर्च तड़काकर प्याज को सॉते करके पालक प्यूरी और दही डालकर 2 से 3 मिनट तक पकाएं. जब तेल ऊपर आ जाये तो उबले चावल डालकर अच्छी तरह चलाएं. 3-4 मिनट तक पकाकर गैस बंद कर दें.

व्हाइट राइस बनाने के लिए पैन में बटर और तेल को गर्म करके प्याज, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च के पेस्ट को अच्छी तरह भून लें. उबले चावल, ऑरिगेनो और चाट मसाला डालकर अच्छी तरह चलाएं. 2-3 मिनट धीमी आंच पर पकाकर गैस बंद कर दें.

रेड राइस बनाने के लिए पैन में तेल और मक्खन को गर्म करके जीरा तड़काकर प्याज को सॉते करें. अब टोमेटो प्यूरी डालकर चलाएं. शिमला मिर्च, कश्मीरी लाल मिर्च और गर्म मसाला डालकर चलाएं और 2-3 मिनट पकाकर गैस बंद कर दें.

बेकिंग करने के लिए एक चौकोर और गहरी डिश को ग्रीस करके पहले ग्रीन राइस, फिर व्हाइट राइस और अंत में रेड राइस की लेयर लगाएं. ऊपर से मोजरेला और चीज क्यूब्स को इस प्रकार से किसकर डालें कि चावल पूरी तरह से ढक जाएं. ऊपर से ऑलिव्स और चिली फ्लैक्स डालें. प्रिहीटेड ओवन में 5 मिनट के लिए 200 डिग्री पर बेक करें. आप इस डिश को डिनर, लंच या साइड डिश के रूप में सर्व कर सकतीं हैं.

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व्रत उपवास: भाग 3- नारायणी ने क्या किया था

अभी करवाचौथ बीते 4 दिन भी नहीं हुए थे कि अष्टमी आ पहुंची. इसी- लिए नारायणी को छोड़ कर सब कांप रहे थे. और जैसे ही नारायणी ने चेतावनी दी कि कोई खटपट न करे तो शत्रु दल में भगदड़ मच गई. तनाव के कुछ तार बाकी थे, वे सब एकसाथ झनझना उठे. जैसे ही देवीलाल ने कहा कि खटपट वह शुरू कर रही है तो रोनापीटना शुरू हो गया.

एक दिन पहले ही नारायणी सब बच्चों से पूछ रही थी कि अष्टमी के दिन क्या बनाएं. बच्चों ने बड़े चाव से अपनी- अपनी पसंद बताई थी. काफी तैयारी भी हो चुकी थी. बच्चे बेसब्री से अष्टमी की प्रतीक्षा कर रहे थे. मन ही मन कह भी रहे थे कि चाहे कुछ भी हो वे मां को प्रसन्न रखेंगे.

पर ऐसा न पिछले कई वर्षों से हुआ था और न इस साल होने के आसार दिखाई दे रहे थे. नारायणी तो आंसू टपका कर बिस्तर पर जा गिरी और घर का भार आ पड़ा निर्मला के नन्हेनन्हे नाजुक कंधों पर. उस ने जैसेतैसे चाय बनाई, नाश्ता बनाया और सब को खिलाया. पर उस के गले से कुछ न उतरा.

देवीलाल ने गला खंखारते हुए पूछा, ‘‘बाजार से कुछ लाना है?’’

नारायणी चुप रही.

‘‘अरे, बाजार से कुछ लाना है?’’

नारायणी फिर भी चुप रही.

निर्मला ने मां के पास जा कर कंधा हिलाते हुए कहा, ‘‘अम्मां, बाबूजी बाजार जा रहे हैं, कुछ मंगाना है क्या?’’

‘‘भाड़ में जाओ सब.’’

‘‘वह तो चले जाएंगे, पर अभी कुछ लाना हो तो बताओ,’’ देवीलाल ने कहा.

‘‘थोड़े मखाने ले आना. खरबूजे के बीज और एक नारियल. खोया मिले तो ले आना. जो सब्जी समझ में आए, ले लेना पर मटर लाना मत भूलना. आज आलूमटर की कचौडि़यां बनाऊंगी. सोनू का बड़ा मन था. मूंगदाल की पीठी ले आना, हलवा बनाना है. दहीबड़े खाने हों तो उड़द की दाल की पीठी और दही ले आना,’’ नारायणी एक सांस में बोल गई.

देवीलाल ने गहरी सांस भर कर कहा, ‘‘एकसाथ इतना सामान कैसे लाऊंगा?’’

‘‘सोनू को साथ ले जाओ.’’

‘‘चल बेटा, सोनू चल. बरतन और थैला उठा ले. पूछ ले अम्मां से घीतेल तो है न? कहीं ऐन मौके पर उस के लिए भी भागना पड़े.’’

‘‘अरे, अभी तो लाए थे करवाचौथ के दिन. सब का सब रखा है. खर्च ही कहां हुआ?’’

करवाचौथ के नाम से फिर एक बार दहशत छा गई. इस से पहले कि कुछ गड़बड़ हो, देवीलाल बाहर सड़क पर आ गए और सोनू की प्रतीक्षा करने लगे.

कुछ देर तक तो शांतिअशांति के उतारचढ़ाव में दिन निकला. पर जहां नारायणी जैसी धार्मिक तथा कट्टर व्रत वाली औरत हो, वहां तूफान न आए यह असंभव था. वह बारीबारी से देवीलाल और बच्चों को आड़े हाथों लेती रही. कभी इसे झिड़कती तो कभी उसे डांटती. देवीलाल को तो एक क्षण चैन नहीं लेने दिया.

बोली, ‘‘मेरी मां तो सीधी थी, एकदम गऊ. आज उसी की शिक्षा है कि मैं भी इतनी सीधी हूं. मुंह से एक शब्द नहीं निकलता. दूसरी औरतों को देखो, कितनी तेजतर्रार हैं. सारे महल्ले का मुंह बंद कर देती हैं, बस, एक बार बोलना शुरू कर दें.’’

देवीलाल ने बच्चों की ओर देखा. वे मुसकराने का असफल प्रयत्न कर रहे थे. ठंडी सांस भर कर देवीलाल ने कहा, ‘‘सो तो है. तुम्हारे जैसी सीधी तो अंगरेजी कुत्ते की पूंछ भी नहीं होती.’’

नारायणी पहले तो समझी कि उस की प्रशंसा हो रही है, पर जब उस की समझ में आया तो चिढ़ कर बोली, ‘‘तुम मेरी मां की हंसी तो नहीं उड़ा रहे?’’

‘‘तुम्हारी मां तो गऊ थीं. कोई उन की हंसी उड़ाएगा. मैं तो बैल की सोच रहा था.’’

नारायणी ने आंखें तरेर कर कहा, ‘‘क्या कुछ मजाक कर रहे हो?’’

‘‘नहीं तो,’’ देवीलाल ने बात बदल कर कहा, ‘‘बेटी निर्मला, खाली हो तो एक प्याला चाय ही बना दे.’’

कुछ देर शांति रही, पर कब तक? फिर वही शाम और पूजा की तैयारी. फिर वही चांद की प्रतीक्षा. लो कल सप्तमी के दिन तो ऐसी फुरती से निकल आया कि पूछो मत और आज अष्टमी है तो ऐसा गायब जैसे गधे के सिर से सींग. सारा परिवार पागलों की तरह चांद की तलाश में ऊपरनीचे, अंदरबाहर घूम रहा था.

9 बज गए. पिछली बार की तरह फिर एक बार खतरे की घंटी बजी. पर वह चांद न था, केवल उस की परछाईं थी.

‘‘अरे, जा न,’’ नारायणी ने सोनू को डांटा, ‘‘जाता है कि नहीं.’’

‘‘अभी तो देख कर आ कर बैठा हूं,’’ सोनू ने झल्ला कर कहा, ‘‘अब नहीं जाता.’’

‘‘जा, गोलू, तू ही जा. यह तो मेरी जान ले कर छोड़ेगा. मरा, न जाने किस घड़ी में पैदा हुआ था,’’ नारायणी ने कोसा.

‘‘अम्मां, मैं नहीं जाता. मेरी टांगें तो टूट गई हैं ऊपरनीचे होते,’’ गोलू ने घुटने दबाते हुए कहा, ‘‘सोनू को कहो. यह बीच सीढ़ी से ही लौट आता है.’’

‘‘सत्यानास,’’ नारायणी एकदम आपा खो बैठी, ‘‘एक तो तुम्हारे लिए भूखप्यास से तड़प रही हूं और तुम लोगों से इतना सा भी नहीं होता.’’

‘‘छोड़ो, अम्मां,’’ सोनू ने हलके से कहा, ‘‘जा कर पिताजी की चांद देख लो. असली चांद से ज्यादा चमकती है.’’

नारायणी ने चिल्ला कर कहा, ‘‘मर जाओ एकएक कर के. मजाल है कि तुम्हारा मुंह भी देखूं.’’

देवीलाल ने कहा, ‘‘क्या कह रही हो, नारायणी? बच्चों के लिए व्रत रख रही हो और उन्हें ही कोस रही हो? ऐसा व्रत रखने का क्या लाभ है?’’

‘‘करम फूट गए जो ऐसी औलाद पैदा हुई. इस से तो बिना संतान ही भली थी,’’ नारायणी ने क्रोध में कहा. वह तनाव के अंतिम क्षणों में पहुंच गई थी.

इतने में ‘चांद निकल आया’ का शोर आने लगा. नारायणी ने फिर से अपनी गोटे वाली साड़ी को ठीक किया और सजीसजाई पूजा की थाली को ले कर छत की भीड़ में गुम हो गई. सोचती जा रही थी कि बाईं आंख फड़क रही है, कहीं फिर कुछ बदशगुनी न हो जाए.

जब खाना खाने बैठे तो किसी की इच्छा खाना खाने की न हुई. सब थोड़ा- बहुत खापी कर उठ गए. इस तरह मंगल कामना करते हुए बच्चों के लिए अष्टमी का व्रत पूरा हुआ.

दूसरे दिन पड़ोस वाली शीला ने पूछा, ‘‘अरे, नारायणी चाची, कल श्याम चाचा के यहां खाने पर क्यों नहीं आईं?’’

‘‘खाने पर,’’ नारायणी ने पूछा, ‘‘कैसा खाना था श्याम के यहां?’’

‘‘अरे, क्या तुम्हें निमंत्रण नहीं मिला? उन के बेटे की सगाई थी न.’’

‘‘पता नहीं,’’ नारायणी ने मुरझा कर कहा.

सहसा शीला को याद आया, ‘‘पर वैसे भी तुम कहां आतीं. कल तो तुम ने अहोई अष्टमी का व्रत रखा होगा. सच, बड़ा कठिन है. मैं तो एक बार भी व्रत नहीं रख पाई. मुझे तो चक्कर आने लगते हैं.’’

नारायणी ने कहा, ‘‘अगर निमंत्रण आया होता तो मैं अवश्य आती.’’

‘‘क्यों, क्या व्रत नहीं रखतीं?’’

‘‘व्रत?’’ नारायणी ने क्रोध में कहा, ‘‘ऐसे नासपीटे बच्चों के लिए व्रत रखना तो महान अपराध है.’’

शीला अवाक् हो कर नारायणी का मुंह देख रही थी. उस ने कभी उसे इतना उत्तेजित नहीं देखा था.

सहज हो कर नारायणी ने पूछा, ‘‘क्याक्या बना था दावत में?’’

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शादी के 11 साल बाद पेरेंट्स बनें Debina-Gurmeet, शेयर की वीडियो

बीते दिनों अपनी गोदभराई की फोटोज शेयर करने वाली टीवी एक्ट्रेस देबीना बनर्जी (Debina Bonnerjee)  और एक्टर गुरमीत चौधरी पेरेंट्स बन गए हैं, जिसकी खबर फैंस ने वीडियो के जरिए फैंस को दी है. आइए आपको बताते हैं पूरा खबर…

पेरेंट्स बने कपल

 

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जहां बीते दिन कौमेडियन भारती सिंह ने अपने बेटे को जन्म दिया है तो वहीं अब एक्ट्रेस देबीना बनर्जी ने बेटी को जन्म दिया है. एक्ट्रेस के पति और एक्टर गुरमीत चौधरी ने सोशलमीडिया पर एक क्यूट वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि ‘ग्रैटिट्यूड के साथ हम अपनी बेबी गर्ल का इस दुनिया में स्वागत कर रहे हैं… 3-4-2022, आप सभी के प्यार और Blessings के लिए सभी को शुक्रिया.’

 

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गोदभराई की फोटोज हुई थी वायरल

हाल ही में देबिना बनर्जी ने गोद भराई की रस्मों की फोटोज शेयर की थीं, जिसमें वह नई दुल्हन की तरह तैयार होकर पोज देती नजर आईं. वहीं अपना बेबी बंप फ्लौंट करती हुई दिखीं. फोटोज देखने के बाद जहां फैंस और सेलेब्स एक्ट्रेस पर जमकर प्यार लुटाते दिखाई दिए.

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हो चुकी हैं ट्रोल

 

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सुर्खियों में रहने की बात करें तो एक्ट्रेस देबिना बनर्जी हाल ही में ट्रोलिंग का शिकार हो चुकी हैं. दरअसल, एक्ट्रेस प्रैग्नेंसी के दौरान हील्स पहनती हुई नजर आईं थीं, जिसके चलते वह ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई थीं. हालांकि एक्ट्रेस देबिना ने ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया था. वहीं उनका साथ पति गुरमीत चौधरी भी देते नजर आए थे.

शादी के 11 साल बाद बनेंगी मां

एक्टर गुरमीत चौधरी (Gurmeet Chaudhary) के साथ शादी करने वाली एक्ट्रेस देबिना बनर्जी  (Debina Bonnerjee) शादी के 11 साल बाद मां बनने वाली हैं. हालांकि इस दौरान दोनों के तलाक की खबरें भी सोशलमीडिया पर छाई हुई थीं. लेकिन कपल ने इन खबरों को केवल अफवाह बताया था. वहीं अब दोनों अपने पेरेंट्स बनने की खुशी का एहसास करते नजर आ रहे हैं, जिसका अंदाजा सोशलमीडिया पर शेयर की गई फोटोज से लगाया जा सकता है. फैंस दोनों को नजर ना लगने की बात कहते नजर आ रहे हैं.

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सपनों का महल- भाग 3: क्या हुआ था रितू के साथ

‘‘रितु तुम्हारा घरगृहस्थी में मन नहीं लगता है. आज तो कुछ ढंग का लंच बना देती.’’

‘‘सुबह से ही तो काम पर लगी हूं और क्या चाहते हो मुझ से?’’

‘‘3 समय का भोजन समय से मिल जाए और क्या चाहूंगा.’’

‘‘यह क्या है?’’ रितु ने अपनी प्लेट पटकते हुए कहा.

‘‘हफ्ते भर का मेनू बना कर रसोई में टांग लो, तुम्हें भी बनाने में सुविधा रहेगी और मुझे भी खिचड़ी से छुटकारा मिल जाएगा,’’ आदित्य ने गुस्से से कहा.

‘‘किसी महराजिन को रख लो, फिर सुबहशाम मनपसंद खाते रहना,’’ रितु ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया.

‘‘यहां कुक की पगार पता है? फिर तुम से शादी करने का क्या फायदा? तुम्हें सजाधजा कर ड्राइंगरूम की शोभा बढ़ाने तो नहीं लाया हूं,’’ आदित्य ऊंचे स्वर में बोला.

‘‘ऐसे कह रहे हो जैसे मैं दिनभर महारानी की  तरह राज करती हूं. कामवाली भी आधे दिन छुट्टी कर जाती है. घर की साफसफाई से ले कर खाना बनाने तक की सारी जिम्मेदारी मेरी ही तो है. तुम से शादी करने का मुझे क्या फायदा मिला? नौकरानी बन कर रह गई हूं.’’

‘‘कौन सी नौकरानी 10-15 हजार की ड्रैस पहनती है? अभी शादी में लिए कपड़े पहने भी नहीं गए हैं… तुम ने इतनी महंगी शौपिंग कर डाली.’’

‘‘ओह तो सारी आग उन कपड़ों को ले कर है. मुझे मौडलिंग के 2-3 औफर मिल गए हैं. तुम्हारे रुपए लौटा दूंगी. मुझे पता होता कि तुम इतने कंजूस हो तो कभी शादी नहीं करती,’’ रितु तमक कर बोली.

‘‘कुछ पता भी है कैसे खर्च किया जाता है. इस फ्लैट की किश्त, गाड़ी की किश्त देने के बाद जो बचता है. उसी में सेविंग भी करनी होती है. यह नहीं कि कार्ड घिसा और बिना सोचेसमझे और्डर कर दिया.’’

‘‘कौन से लाखों रुपए खर्च कर दिए. मुझे जैसे ही मौडलिंग करने से पैसे मिलेंगे तुम्हारी पाईपाई चुका दूंगी,’’ रितु भड़क चुकी थी.

‘‘ज्यादा हवा में न रहो. इतनी फ्रौड कंपनियां भरी हैं नैट में, तुम से कपड़ेगहनों पर खर्चा भी करवाएंगी. तुम्हीं से शूटिंग का पैसा भी लेंगी, फिर गायब हो जाएंगी.’’

‘‘तुम तो यही कहोगे.’’

‘‘हां यही सच है. मेरा कार्ड वापस कर दो. आइंदा इस घर में मुझ से पूछे बिना कुछ नहीं आएगा. मौडलिंग के सपने देखना बंद करो. दिमाग खराब कर के रख दिया है.’’

अगले ही पल रितु ने डैबिट कार्ड उस के सामने पटक दिया.

रात के खाने में भी दोनों के बीच सन्नाटा पसरा रहा. दोनों ही करवट बदलने में लगे हुए थे. आदित्य ने हाथ बढ़ा कर रितु के कंधे पर रख कर समझौता करना चाहा. रितु ने गुस्से से हाथ झटक दिया और ड्राइंगरूम के सोफे पर जा कर पसर गई.

दोनों के बीच अबोला हफ्तेभर चलता रहा. शनिवार की शाम आदित्य शराब की

बोतल खोल कर बैठ गया. उस ने 2 पैग ही लिए थे कि रितु ने बोतल बिना कुछ कहे, हटा कर अलमारी में संभाल दी. आदित्य फिर बोतल निकाल लाया. आदित्य को तीसरा पैग बनाते देख कर वह बोतल पर बाज की तरह झपट कर पलटी कि उस का पैर कालीन में उलझ गया और बोतल हाथ से छूट कर गिरी और फूट कर बिखर गई. रितु का सिर टेबल का किनारा लगने से चोटिल हो उठा. रितु अपनी बेइज्जती महसूस कर फूटफूट कर रोने लगी. तभी दरवाजे की घंटी बज उठी. आदित्य ने रितु को उस के हाल पर छोड़ दिया और दरवाजे की ओर बढ़ गया.

दरवाजे पर रितु का बड़ा भाई ऋ षभ उन दोनों को सरप्राइज देने का मन बना कर मिलने चला आया था. आदित्य उसे देख कर हड़बड़ा गया. ऋ षभ को गरमजोशी से स्वागत की उम्मीद थी मगर उसे घर के माहौल में गड़बड़ लगी.

रितु के माथे की चोट, टूटी बोतल देख ऋषभ के मन में शंका हुई. उस ने परोक्ष रूप से कुछ नहीं कहा, मगर उस के विश्वास को ठेस पहुंच गई थी. ऋ षभ ने दोनों की पसंद पूछ कर डिनर और्डर कर दिया.

भोजन करते समय उस ने रितु से कहा, ‘‘लगता है तुम्हें एक ब्रेक की जरूरत है. मैं तो बौएज हौस्टल में रहता हूं. तुम्हें अपने साथ नहीं रख सकता. तुम कहो तो अगले वीकैंड में तुम्हें कानपुर पहुंचा दूंगा. वहां रह कर ठंडे दिमाग से सोचना. तुम दोनों कुछ दिन एकदूसरे से दूर ही रहो तो बेहतर है. आगे साथ रहना है कि नहीं इस विषय में तुम दोनों को सोचने का समय मिल जाएगा,’’ ऋ षभ ने समझदारी के साथ खरीखरी सुना दी.

आदित्य यह सुन कर चौंक उठा. इस विषय की गहराई पर उस ने ध्यान ही नहीं दिया था. यदि दोनों भाईबहन मिल कर उस पर घरेलू हिंसा का आरोप लगा दें तो वह कोर्टकचहरी के चक्कर ही काटता रह जाएगा. उस के मित्र के साथ ऐसा ही हुआ जब मामूली धक्कामुक्की होने पर पत्नी ने पुलिस बुला ली और पुलिस ने उस के मित्र को

4 डंडे लगा कर ही छोड़ा. आदित्य का शादी को ले कर बनाया गया स्वप्नमहल भरभरा कर गिर गया.

यही रितु के दिमाग में भी चल रहा था कि मौडलिंग के चक्कर में वह अपनी गृहस्थी को बिखेर रही है. प्रत्यक्ष में ऋ षभ से इतना ही बोली, ‘‘मैं तुम्हें कल शाम तक बता दूंगी कि कानपुर कब चलना हैं.’’

रात बिस्तर पर लेटते ही रितु की आंखों के आगे अपनी शादी की तैयारी से

ले कर आज तक का दिन फिल्म की तरह घूम गया. उसे अपनी गलतियां साफ नजर आने लगीं. मगर उस का दंभ इसे स्वीकार नहीं करना चाह रहा था. उधर आदित्य सोच रहा था कि वह अपनी व्यस्तता के बीच रितु के मन की थाह लेना ही भूल गया. यदि वह उस के साथ खुल कर हर विषय पर चर्चा करता तो रितु उस से छिप कर, मौडलिंग के लिए उलटेसीधे हाथपैर नहीं मारती. आज भी अगर वह अपनी बात कहने से चूक गया तो उस की गृहस्थी उजड़ते देर नहीं लगेगी.

‘‘रितु क्या तुम सचमुच कानपुर लौट जाओगी?’’ आदित्य ने बात की शुरुआत करने के लिए पूछा.

‘‘हां क्या फायदा यहां आ कर जब मुझे मौडलिंग करने का मौका ही नहीं मिला. तुम भी पिताजी की तरह तानाशाही दिखाने लगे हो,’’ रितु ने अपनी भड़ास निकाली.

आदित्य ने उठ कर बैडरूम की लाईट जला दी और रितु की ओर देखा. रितु की आंखें रोने के कारण लाल हो रही थीं. उस ने रितु का हाथ पकड़ा और उसे सहलाते हुए बोला, ‘‘रितु, अगर तुम आत्मनिर्भर बनना चाहती हो तो इस में कोई बुरी बात नहीं है. मगर कौन सी कंपनी फ्रौड है कौन सी नहीं, यह तो मैं भी नहीं जानता. अखबार में इन से जुड़ी खबरे तो पढ़ी ही होंगी. तुम्हारी इतनी अच्छी पर्सनैलिटी है तुम चाहो तो प्रोफैशनल कोर्स में दाखिला ले लो. फिर तुम्हें आगे बढ़ने के कई अवसर मिल जाएंगे. मैं भी चाहता हूं कि तुम तरक्की करो मगर सही तरीके से. शौर्टकट के चक्कर में कहीं भटक कर न रह जाओ.’’

रितु आदित्य की बात सुन कर शर्मिंदा हो उठी और बोली, ‘‘सौरी आदित्य मैं ने तुम से कई सारी बातें छिपाईं. तुम ठीक कहते हो मैं प्रोफैशनल कोर्स करने को तैयार हूं. मुझे खाना बनाना नहीं आता, मगर नैट से सीख कर कुछ न कुछ नया बनाती तो हूं.’’

‘‘ठीक है रितु, गलती मेरी भी है मुझे तुम्हारी इच्छाओं का भी सम्मान भी करना चाहिए था. मैं तो बस शादी के बाद अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए उतावला हो गया,’’ आदित्य ने कहा.

‘‘नहीं गलती मेरी है. मुझे घर में रह कर भी इतनी अव्यवस्था नहीं फैलानी चाहिए कि समय से भोजन भी न मिल सके.’’

‘‘कोई बात नहीं रितु, जैसे ही मेरा इंसैंटिव बढ़ेगा मैं एक फुल टाइम मेड रख लूंगा,’’ आदित्य ने दिलासा दिया.

‘‘नहीं आदित्य जब तुम मेरे विषय में इतना सोचते हो तो मेरा भी कर्तव्य है कि हम अपने भविष्य के लिए बचत करें. मैं तुम्हें अब निराश नहीं करूंगी,’’ रितु ने कहा.

‘‘यह हुई न रोल मौडल वाली बात. तुम अपने बच्चों के लिए रोल मौडल बनो, मैं तो बस यही चाहता हूं,’’ कह आदित्य ने रितु को अपनी बांहों के घेरे में कसते हुए चुंबन जड़ दिया.

रितु ने कसमसा कर अपना हाथ टेबललैंप की तरफ बढ़ा कर स्विच औफ कर दिया. सपनों के महल से निकल कर वे वर्तमान की इमारत में हाथों में हाथ थामे बढ़ चले.

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