family story in hindi
family story in hindi
आजकल अगर आप पत्नियों से यह पूछें कि पति पत्नी से क्या चाहता है तो ज्यादातर पत्नियों का यही जवाब होगा कि सौंदर्य, वेशभूषा, मृदुलता, प्यार. जी हां, काफी हद तक पति पत्नी से नैसर्गिक प्यार का अभिलाषी होता है. वह सौंदर्य, शालीनता, बनावट और हारशृंगार भी चाहता है. पर क्या केवल ये बातें ही उसे संतुष्ट कर देती हैं?
जी नहीं. वह कभीकभी पत्नी में बड़ी तीव्रता से उस की स्वाभाविक सादगी, सहृदयता, गंभीरता और प्रेम की गहराई भी ढूंढ़ता है. कभीकभी वह चाहता है कि वह बुद्धिमान भी हो, भावनाओं को समझने वाली योग्यता भी रखती हो.
बहलाने से नहीं बनेगी बात
पति को गुड्डे की तरह बहलाना ही पत्नी के लिए पर्याप्त नहीं. दोनों के मध्य गहरी आत्मीयता भी जरूरी है. ऐसी आत्मीयता कि पति को अपने साथी में किसी अजनबीपन की अनुभूति न हो. वह यह महसूस करे कि वह उसे सदा से जानता है और वह उस के दुखसुख में हमेशा उस के साथ है. पतिपत्नी के प्यार और वैवाहिक जीवन में यह आत्मिक एकता जरूरी है. पत्नी का कोमल सहारा वास्तव में पति की शक्ति है. यदि वह सहृदयता और सूझबूझ से पति की भावनाओं का साथ नहीं दे सकती, तो वह सफल पत्नी नहीं कहला सकती. पत्नी भी मानसिक तृष्णा अनुभव करती है. वह भी चाहती है कि वह पति के कंधे पर सिर रख कर जीवन का सारा बोझ उतार फेंके.
बहुतों का जीवन प्राय:
इसलिए कटु हो जाता है कि वर्षों के सान्निध्य के बावजूद पति और पत्नी एकदूसरे से मानसिक रूप से दूर रहते हैं और एकदूसरे को समझ नहीं पाते हैं. बस यहीं से शुरू होती है दूरी. यदि आप चाहती हैं कि यह दूरी न बढ़े, जीवन में प्रेम बना रहे तो निम्न बातों पर गौर करें:
यदि आप के पति दार्शनिक हैं तो आप दर्शन में अपनी जानकारी बढ़ाएं. उन्हें कभी शुष्क या उदास मुखड़े से अरुचि का अनुभव न होने दें.
यदि आप कवि की पत्नी हैं, तो समझिए वीणा के कोमल तारों को छेड़ते रहना आप का ही जीवन है. सुंदर बनी रहें, मुसकराती रहें और सहृदयता से पति के साथ प्रेम करें. उन का दिल बहुत कोमल और भावुक है, आप की चोट सहन न कर पाएगा.
आप के पति प्रोफैसर हैं तो आटेदाल से ले कर संसार की प्रत्येक समस्या पर हर समय व्याख्यान सुनने के लिए प्रसन्नतापूर्वक तैयार रहें.
यदि आप के पति धनी हैं, तो उन के धन को दिमाग पर लादे न घूमें. धन से इतना प्रभावित न हों कि पति यह विश्वास करने लगे कि सारी दिलचस्पी का केंद्र उस की दौलत है. आप दौलत से बेपरवाह हो कर उन के व्यक्तित्व की उस रिक्तता को पूरा करें जो हर धनिक के जीवन में होती है. विनम्रता और प्रतिष्ठतापूर्वक दौलत का सही उपयोग करें और पति को अपना पूरा और सच्चा सान्निध्य दें.
यदि आप के पति पैसे वाले न हों तो उन्हें केवल पति समझिए गरीब नहीं. आप कहें कि आप को गहनों का तो बिलकुल शौक नहीं है. साधारण कपड़ों में भी अपना नारीसौंदर्य स्थिर रखें. चिंता और दुख से बच कर हर मामले में उन का साथ दें.
हमेशा याद रखें कि सच्चा सुख एकदूसरे के साथ में है, भौतिक सुखसुविधाएं कुछ पलों तक ही दिल बहलाती हैं.
क्या आप को हैरानी हुई है कि छरहरी महिलाएं भी कमजोर और अस्वस्थ क्यों हो जाती हैं?
क्या आप ने कभी सोचा है कि सब का खयाल रखने वाली परिवार की कोई सदस्य अकसर बीमार क्यों पड़ जाती है?
एक दशक पहले तक हैजा, टीबी और गर्भाशय का कैंसर महिलाओं को होने वाली सेहत से जुड़ी मुख्य समस्याएं थीं. इन दिनों नई बीमारियां, जैसे कार्डियो वैस्क्यूलर डिजीज, डायबिटीज और आस्टियोआर्थराइटिस जैसे रोग 30 वर्ष से अधिक आयुवर्ग की युवा महिलाओं में फैले हुए हैं.
आर्थराइटिस फाउंडेशन की ओर से हाल ही में हुए अध्ययन के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि 2013 तक देश में लगभग 3.6 करोड़ लोग आस्टियोआर्थराइटिस रोग से प्रभावित हो जाएंगे. कम आमदनी वाले वर्ग की 30-60 वर्ष की भारतीय महिलाओं के बीच हुए एक अध्ययन में अस्थि संरचना के सभी महत्त्वपूर्ण जगहों पर बीएमडी (अस्थि सघनता) विकसित देशों में दर्ज किए गए आंकड़ों से काफी कम थी, जिस के साथ अपर्याप्त पोषण से होने वाले आस्टियोपेनिया (52%) और आस्टियोपोरोसिस (29%) की मौजूदगी ज्यादा थी. अनुमान है कि 50 वर्ष से अधिक की 3 में से 1 महिला को आस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर का अनुभव होगा.
इन दिनों कम शारीरिक सक्रियता वाली जीवनशैली की वजह से दबाव संबंधी कारक और मोटापा जोखिम पैदा करने वाले कुछ ऐसे कारक हैं जिन का संबंध आस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याओं से माना जाता है. इसलिए, यदि कोई स्वस्थ जीवन जीना चाहता है तो जरूरी है कि वह अपनी हड्डियों की देखभाल पर विशेष ध्यान दे. आस्टियोआर्थराइटिस की रोकथाम और काम व जीवन के बीच स्वस्थ संतुलन कायम करने के लिए यहां ऐसे टिप्स बताए जा रहे हैं, जिन पर महिलाओं को ध्यान देना चाहिए.
1. भोजन के सही विकल्प
सब्जियों, जैसे लहसुन, प्याज और हरे प्याज से भरपूर आहार तकलीफदेह आस्टियोआर्थराइटिस के उपचार में मदद कर सकता है. ऐसा भोजन लें जो विटामिन ई से भरपूर हो, जैसे स्ट्राबैरी, बैगन, गोभी, पालक, बंदगोभी और खट्टे फल संतरा, मौसमी आदि.
2. जीवनशैली में बदलाव
कई बार महिलाएं ऊंची एड़ी के या गलत किस्म के सैंडल पहनती हैं, जिस के नतीजे के तौर पर घुटनों के जोड़ पर दबाव पड़ता है. घुटने के आस्टियोआर्थराइटिस से बचने के लिए, डाक्टरों द्वारा अंदरूनी सोल वाले विशेष जूते पहनने की सलाह दी जाती है, जो जल्दीजल्दी चलनेफिरने के लिए शरीर को जरूरी सहारा दे सकते हैं.
3. सुडौल शरीर
यह देखा गया है कि महिलाओं में आस्टियोआर्थराइटिस का प्रमुख कारण मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली है. इसलिए महिलाओं के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे गंभीरता से वजन घटाने के उपाय अपनाएं और उन्हें अपनी दैनिक जीवनशैली में शमिल करें. योग, हलके व्यायाम, जैसे पैदल चलना और बोलिंग (एक खेल) करना आदि बेहतर विकल्प हो सकते हैं. रोगग्रस्त महिला को बागबानी, सीढि़यां चढ़ने आदि जैसे कामों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये काम घुटनोें के जोड़ों पर भार डालते हैं.
4. घरेलू उपाय
कोई भी महिला खुद की देखभाल के तरीकों को भी अपना सकती है, जैसे गरम सिंकाई वाला पैड इस्तेमाल करना, गरम पानी से स्नान या जोड़ों के दर्द से राहत के लिए बर्फ के टुकड़ों से सिंकाई करना.
5. उपचार के वैकल्पिक तरीके
कई लोग रोग से जुडे़ दर्द, अकड़न, दबाव और बेचैनी से राहत पाने के लिए उपचार के वैकल्पिक तरीके, जैसे 5 इंजैक्शन का उपचार या विस्को सप्लीमैंटेशन अपनाते हैं. आस्टियोआर्थराइटिस के विरुद्ध भी हाएलगन जोड़ों के बीच घुटने में इंजैक्शन देना एक ऐसा तरीका है, जो रोगियों में आस्टियोआर्थराइटिस की शुरुआत और प्रगति को रोकता है. यह आस्टियोआर्थराइटस के उपचार के लिए दर्दमुक्त, गुणवत्ताशाली निदान विधि है. हाएलगन थेरैपी में 1 सप्ताह के अंतराल में 5 इंजैक्शन शामिल होते हैं, जिन्हें जोड़ों में सामान्य द्रव का लचीलापन व लुब्रिकेशन जैसी खूबियां दोबारा पैदा करने के लिए सीधे घुटने के जोड़ों में लगाया जाता है. हाएलगन आस्टियोआर्थराइटिस की 1-3 अवस्था के रोगियों के लिए एक आदर्श उपचार है.
6. अंतिम विकल्प
जब दर्द सहन से बाहर हो जाए और जब अवस्था में घुटने काम करने लायक न रहें तो पीडि़त व्यक्ति को घुटना बदलवाने की शल्यचिकित्सा करवानी पड़ती है. यह तब की जाती है जब दूसरे उपचार काम नहीं करते हैं. इस अवस्था में जोड़ों में हुई टूटफूट को एक्सरे में देखा जा सकता है.
– डा. ए.वी. शर्मा, प्रमुख आर्थोपैडिक सर्जन, आर. के. हौस्पिटल
बौलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा (Richa Chadha) अपने रिलेशनशिप को लेकर सुर्खियों में रहती हैं. वहीं बीते दिनों उनकी शादी की खबर भी सोशलमीडिया पर छाई हुई थी. इसी बीच एक्ट्रेस ने नया फोटोशूट फैंस के साथ शेयर किया है, जिसमें वह बोल्ड लुक में नजर आ रही हैं. वहीं फैंस का कहना है कि ऋचा चड्ढा ने काफी वजन कम कर लिया है. आइए आपको दिखाते हैं फोटोशूट की झलक…
वजन कम करके दिखाया बोल्ड अंदाज
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एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा के नए फोटोशूट की बात करें तो डीप ने क वाली थाई-हाई स्लिट ड्रेस में वह बेहद खूबसूरत लग रही हैं. फैंस को ऋचा चड्ढा का बोल्ड अवतार काफी पसंद आ रहा है. वहीं खबरों की मानें तो एक्ट्रेस ने लगभग 15 किलो वजन कम कर लिया है, जिसके चलते वह फोटोशूट में फिटनेस दिखाती नजर आ रही हैं. हालांकि फोटोज को देखकर फैंस भी उनके वेट ट्रांसफौर्मेशन का अंदाजा लगा रहे हैं.
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फैशन है खास
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इंडियन हो या वेस्टर्न ऋचा चड्ढा हर लुक कैरी करती हैं, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लगती हैं. हालांकि अब वेट ट्रांसफौर्मेशन के बाद ऋचा चड्ढा का लुक बेहद खास होने वाला है, जिसका अंदाजा एक्ट्रेस के इस बोल्ड फोटोशूट से लगाया जा सकता है.
फुकरे 3 में आएंगी नजर
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फिल्म ‘फुकरे’ में ‘भोली पंजाबन’ का किरदार निभाने वाली ऋचा चड्ढा अपने इस रोल के लिए काफी पौपुलर हैं. वहीं खबरे हैं कि जल्द ही ‘फुकरे’ 3 भी दर्शकों का दिल जीतने के लिए आने वाली है. हालांकि अभी फिल्म की शूटिंग चल रही हैं
रिलेशनशिप के चलते बटोरती हैं सुर्खियां
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एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा, अली फजल संग रिलेशनशिप में हैं, जिसके चलते वह सुर्खियों में रहती हैं. हालांकि सोशलमीडिया पर अक्सर उनकी शादी की खबरें आती रहती हैं. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि दोनों साल 2022 में शादी करने वाले हैं. लेकिन देखना होगा कि एक्ट्रेस कब शादी के बंधन में बंधती हैं.
अपने रोजमर्रा के खर्चों के बीच छोटीमोटी बचत तो हम सब कर ही लेते हैं, मगर फायदा तो तब है जब बचत के साथसाथ निवेश की भी आदत डाली जाए. जब निवेश की बात आती है तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में शेयर मार्केट में पैसे लगाने का खयाल आता है. जबकि असलियत तो यह है कि यदि आप को शेयर बाजार में पैसे लगाने का अनुभव नहीं है तो यह आप के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है. फाइनैंशियल प्लानर, अनुभव शाह के मुताबिक नए निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश करना एक बेहतरीन विकल्प है. ऐसा नहीं है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने में कोई जोखिम नहीं, पर शेयर बाजार में निवेश की तुलना में यह फिर भी कम जोखिम भरा है.
आइए, जानते हैं कि इक्विटी में निवेश की तुलना में म्यूचुअल फंड क्यों है बेहतर:
क्या है
आप म्यूचुअल फंड में निवेश करें इस से पहले आप को शेयर और म्यूचुअल फंड के बीच का फर्क पता होना चाहिए. जब आप शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं, तो इस का मतलब है कि आप एक सार्वजनिक कंपनी के शेयर तब खरीद रहे हैं जब उन की कीमत कम है और कीमत बढ़ने पर इन्हें बेच देंगे. हालांकि म्यूचुअल फंड में निवेश करने का मतलब यह है कि आप का फंड मैनेजर आप के द्वारा निवेश की गई रकम को बौंड, शेयर, डिबैंचर जैसे निवेश के अलगअलग विकल्पों में लगाता है. ऐसे में म्यूचुअल फंड का रिटर्न अलगअलग प्रतिभूतियों पर हो रहे मुनाफे पर निर्भर करेगा.
जोखिम
म्यूचुअल फंड और शेयर इक्विटी में निवेश दोनों में ही जोखिम है. हालांकि जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो यह जोखिम थोड़ा कम हो जाता है. जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आप के पास का निवेश विभिन्न प्रकार के निवेश उपकरणों में किया जाता है. यदि एक उपकरण का प्रदर्शन खराब है तो दूसरे का अच्छा हो सकता है. ऐसे में जोखिम कम हो जाता है. इक्विटी में निवेश का सब से बड़ा नुकसान यह है कि यदि शेयर बाजार नीचे जा रहा है तो आप को उसी अनुपात में नुकसान भी होता है. कुल मिला कर आप के निवेश का प्रदर्शन किसी एक कंपनी के शेयरों के प्रदर्शन तक ही सीमित रह जाता है.
नए निवेशकों के लिए बेहतर
जो लोग पहली बार निवेश कर रहे हैं और उन्हें शेयर बाजार का अनुभव नहीं, ऐसे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड बेहतर है. म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बाद इस के प्रबंधन की सारी जिम्मेदारी फंड मैनेजर की होती है. इस के लिए निवेशक को परेशान नहीं होना पड़ता. हालांकि इस के लिए निवेशक को समयसमय पर इस के प्रबंधन के लिए फीस चुकानी पड़ती है. जहां तक इक्विटी शेयर में निवेश की बात है तो इस के लिए पर्याप्त रिसर्च की जरूरत पड़ती है और यदि घाटा होता है तो सारी जिम्मेदारी आप की होती है.
जटिल
म्यूचुअल फंड की तुलना में इक्विटी शेयर में निवेश करना काफी जटिल है. साथ ही इस में समय भी काफी लगता है. शेयर में निवेश करने की स्थिति में हर पल बाजार की स्थिति और शेयर के भाव पर नजर रखनी पड़ती है. जबकि म्यूचुअल फंड में निवेश करने की स्थिति में यह काम फंड मैनेजर का होता है.
डाइवर्सिफिकेशन
एक अच्छा निवेशक वही होता है, जो मुनाफा कमाने के लिए केवल एक तरह के निवेश विकल्प और सैक्टर पर निर्भर न रहे. विभिन्न सैक्टरों और निवेश के विकल्पों में पैसा लगाना ही डाइवर्सिफिकेशन कहलाता है. म्यूचुअल फंड में निवेशक को डाइवर्सिफिकेशन का विकल्प मिलता है, जबकि ऐसा इक्विटी शेयर के साथ नहीं है.
सावधानी
अकसर देखा गया है कि म्यूचुअल फंड या फिर अन्य किसी विकल्प में निवेश के दौरान लोग लापरवाही से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं. ऐसा करने से आप मुसीबत में पड़ सकते हैं. लिहाजा, हस्ताक्षर करने से पहले पौलिसी से संबंधित दस्तावेज ध्यान से पढ़ें.
दस्तावेज जमा करते वक्त एड्रेस पू्रफ देते समय अपना स्थाई पता दें. सभी प्रकार के पत्राचार में यह काम आएगा.
आप के निवेश से संबंधित सारी स्टेटमैंट आप को बड़ी आसानी से ईमेल पर मिल सकती है. लिहाजा ईमेल एड्रेस का कौलम भरते वक्त सतर्क रहें.
म्यूचुअल फंड में निवेश के दौरान फंडों का प्रबंधन करना फंड मैनेजर की जिम्मेदारी होती है. इस का मतलब यह नहीं कि आप अपने निवेश की सुध ही न लें. समयसमय पर अपने निवेश की समीक्षा करते रहें. यदि आप इस के प्रदर्शन से संतुष्ट न हों तो फंड मैनेजर बदलने पर विचार करें.
म्यूचुअल फंड भी कई प्रकार के होते हैं. उदाहरण के तौर पर डेट, इक्विटी, लिक्विड म्यूचुअल फंड आदि. लिहाजा, इस में निवेश से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि आप ने जिस म्यूचुअल फंड में निवेश किया है वह कौन सा है और विभिन्न परिस्थितियों में इस का प्रदर्शन कैसा होगा.
अभिनेता विजय थलापति ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मास्टर’ और पूजा हेगड़े सुपरहिट फिल्म ‘मोस्ट एलिजिबल बैचलर’ में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया और अब ये दोनों पावरहाउस सितारें एक साथ पहली बार फिल्म ‘बीस्ट’ से दर्शकों की धड़कनों को और अधिक बढ़ा रहे है. जी हाँ, फिल्म ‘बीस्ट’ का हिंदी ट्रेलर आ गया है जिसे बॉलीवुड स्टार वरुण धवन द्वारा लॉन्च किया. फिल्म के दिलचस्प ट्रेलर को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि दर्शकों को पावरफुल एक्शन और मनोरंजन का पूरा मसाला देखने को मिलेगा. ट्रेलर से यह भी साफ नजर आ रहा है कि अभिनेता विजय इस फिल्म में एक रॉ एजेंट वीरा राघवन की भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे.
फिल्म ‘बीस्ट’ की कहानी आतंकवादियों द्वारा हाईजैक की गई एक घटना के इर्द गिर्द घूमती है, जिसका निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार द्वारा किया गया है. फिल्म के माध्यम से विजय थलापति और पूजा हेगड़े की एक नई जोड़ी दर्शकों के दिल में जगह बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. विजय-पूजा अभिनीत इस फिल्म को संगीत उस्ताद अनिरुद्ध रविचंदर ने दिया है जो कि सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेंड कर रहा है, चाहे वो फिल्म गाना अरेबिक कुथू हो या जॉली ओ जिमखाना दोनों ही लोगों को बेहद पसंद आ रहा है, जिसके बाद से दर्शक फिल्म को लेकर और अधिक उत्सुक हो गए है.
इस पर सन पिक्चर्स के एक प्रवक्ता ने कहा कि, “हमें ‘बीस्ट’ का हिंदी ट्रेलर रिलीज करते हुए खुशी हो रही है. विजय और पूजा दोनों के भारत भर में बहुत प्रशंसक है और प्रशंसको के पॉजिटिव रिस्पॉन्स से यह बात साफ है कि यह फिल्म सिनेमाघरों में हिट रहेगी. सच मानिये अब हम सिनेमाघरों में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए और अधिक इंतजार नहीं कर सकते.”
यूएफओ मूवीज, फिल्म सर्विसेज एंड डिस्ट्रीब्यूशन के सीईओ पंकज जयसिंह कहते है कि, “यह वास्तव में एक विशेष फिल्म है, जिसने सभी भाषाओं के दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ाया है. ‘मास्टर’ के बाद विजय थलापति के साथ यह हिंदी में हमारी दूसरी फिल्म है. हमने सन पिक्चर्स के साथ अन्नाथे, ईटी और अब बीस्ट के साथ हैट्रिक लगाई है. इस फिल्म को उत्तर भारत क्षेत्र के सिनेमाघरों में रिलीज करते हुए हमें बेहद गर्व हो रहा है.”
फिल्ममेकर नेल्सन दिलीपकुमार कहते है कि “विजय थलापति और पूजा हेगड़े के साथ ‘बीस्ट’ का निर्माण करके मुझे बेहद ख़ुशी हो रही है . एक फिल्म निर्माता के तौर पर ‘बीस्ट’ का हिंदी ट्रेलर रिलीज होने पर मुझे बेहद खुशी है. जो चीजें महत्व रखती वो सभी चीजें एक बेहतरिन सिनेमा में होती ही है , भले ही क्यों ना फिल्म की भाषा अलग हो . मुझे विश्वास है कि बीस्ट में वो सभी खासियत दिखाई देंगी.”
फिल्म ‘बीस्ट’ नेल्सन दिलीपकुमार द्वारा लिखित और निर्देशित है और सन पिक्चर्स द्वारा निर्मित है. फिल्म को संगीत से अनिरुद्ध रविचंदर ने सजाया है. विजय थलापति, पूजा हेगड़े, सेल्वाराघवन, योगी बाबू, लिलिपुट फारुकी और अंकुर अजीत विकल द्वारा अभिनीत ‘बीस्ट’ 13 अप्रैल, 2022 को रिलीज़ होगी. इसे यूएफओ मूवीज़ द्वारा हिंदी, तमिल और तेलुगु में उसी दिन पूरे उत्तर भारत में रिलीज़ किया जाएगा.
तीनों दोस्त बढ़चढ़ कर अपनीअपनी सास की बुराई में मशगूल थे कि रात के 9 बज गए.
‘‘मैं चला…’’ रूपम हड़बड़ा कर उठता हुआ बोला, ‘‘वरना मेरी बीवी मेरी सास की ही तो बेटी है,’’ कह कर वह बाहर निकल गया.
‘‘हमारी भी तो…’’ कह कर सौरभ, सुमित भी पीछेपीछे निकल गए.
नियत दिन तीनों की सासूमांएं पहुंच गईं.
रूपम की सास अघ्यापिका के पद से रिटायर हुईं थीं. इसलिए उन की बातचीत हमेशा उपदेशात्मक रहती थी. वे अपनी बेटी व रूपम को हमेशा नादान बच्चा ही सम झती थीं. बेटी को तो आदत थी पर रूपम जबतब झल्ला जाता.
‘‘जब मेरे मांबाप हमें कुछ नहीं बोलते तो तुम्हारी मम्मी क्यों हमेशा उपदेश देने के मूड में रहती हैं?’’
‘‘ठीक से बोलो रूपम, वे तुम्हारी भी मां हैं… हमारे भले के लिए ही बोलतीं हैं. इस में बुरा मानने वाली कौन सी बात है?’’ रिमी धीमी आवाज में सम झाती.
‘‘तो क्या इस बात पर भी सम झाएंगी कि मु झे अपनी पत्नी के साथ कैसे बात करनी चाहिए, उसे टाइम देना चाहिए, उस के साथ घूमना चाहिए, काम में हाथ बंटाना चाहिए, अब बच्चा पैदा कर लेना चाहिए? तुम्हें है कोई शिकायत मु झ से? अपनी शिकायतें हम खुद निबटा लेंगे.’’
‘‘तुम इतनी छोटीछोटी बातों को दिल से क्यों लगाते हो? मां ही तो हैं, बोल दिया तो क्या हुआ?’’
‘‘तो फिर बारबार क्यों बोलतीं हैं? उन के पास बैठना ही मुश्किल है. तुम्हें तो तब पता चले जब मेरी मां तुम्हें हर समय उपदेश देती रहें. जरा सा भी नहीं सुन पाती हो उन का बोला हुआ… और सही कहें या गलत… तुम सुनो,’’ उस की आवाज ऊंची होने लगती.
उधर सौरभ की सास बैंक से रिटायर्ड. सौरभ की पत्नी जिया उसे जब भी ठेलठाल कर मम्मीजी के सामने बैठने को कहती तो वे अपना वही टौपिक शुरू कर देतीं, ‘‘बेटा, प्राइवेट नौकरी है, जरा हाथ दबा कर खर्च किया करो तुम लोग. आज नहीं बचाओगे तो रिटायरमैंट के बाद क्या खाओगे? कई स्कीमों के बारे में बता सकती हूं मैं तुम्हें. उन में पैसा इन्वैस्ट करो. हमें तो कोई बताने वाला नहीं था, तुम्हें तो बताने वाली मैं हूं. फालतू का खर्च करते हो. शीना तो नौकरी और छोटे बच्चे के साथ व्यस्त रहती है, पर तुम तो मेड के साथ मिल कर किचन संभाल सकते हो. कपड़ेजूतों से अलमारी भरी है, फिर भी खरीदते रहते हो. जरूरतों को जितना बढ़ाओ, बढ़ती हैं और शौक जितने कम करो कम हो जाते हैं.’’
‘‘सही कहती हैं मम्मीजी, यह सादा जीवन उच्च विचार वाला फलसफा इस बार जिया को रटवा देना,’’ कह कर सौरभ पतली गली से अपना बचाव करता हुआ बिना कारण बताए घर से बाहर निकल जाता और बेमतलब इधरउधर टाइम पास कर घर आ जाता. उसे 1 महीना बिताना पहाड़ जैसा लग रहा था.
उधर सुमित भी अपनी सास से बचने के लिए औफिस से घर जाने में जानबू झ कर देर करता और फटाफट खाना खा कर सो जाता.
मगर खाना खातेखाते भी मम्मीजी अपनी बात कहने से बाज नहीं आतीं, ‘‘कितना दुबला और थका हुआ लग रहा है बेटा… इतनी जान मारने की क्या जरूरत है? तुम लोग तो वहीं आ जाओ, जो भी नौकरी मिले वहीं कर लो… आखिर शानिका हमारी इकलौती बेटी है. तुम्हें तो गर्व होना चाहिए जो उन्हें इतनी सुंदर, सुगड़ और योग्य पत्नी मिली है, जो इतनी धनसंपत्ति की अकेली वारिश भी है… फिर हमारे प्रति भी तो तुम्हारा कुछ फर्ज बनता है.’’
सुमित का दिल करता कि कहे मम्मीजी ये सब पता होता तो शानिका के सलोने मुखड़े, पर फिदा होने से पहले 10 बार सोचता. पर प्रत्यक्ष
में कहता, ‘‘मम्मीजी, आप की उम्र में इतनी देर भूखा रहना ठीक नहीं, आप जल्दी खा कर सो जाया कीजिए.’’
‘‘कैसे सो जाऊं बेटा, तुम से बात किए बिना दिल ही नहीं मानता. हमारे सबकुछ तुम्हीं तो हो, थोड़ा जल्दी आ जाया करो,’’
सुन कर सुमित कुढ जाता. कहना चाहता कि आप की बेटी तो मेरे मातापिता की कुछ भी नहीं बन पा रही, मैं कैसे बन जाऊं आप का सबकुछ. फिर कहता, ‘‘ठीक है मम्मीजी कल से जल्दी आने की कोशिश करूंगा.’’
उधर साहिल बीवी के साथ विदेश भ्रमण पर था और बेहद रोमांटिक अंदाज के
फोटो फेसबुक पर अपलोड कर देता. कभी कुछ फोटो व्हाट्सऐप पर भी भेज देता. तीनों दोस्त अपना गुस्सा अपना मोबाइल पटक कर निकालते.
साहिल तीनों को जलाजला कर खुश होता. सुबह बड़ी प्यारी गुड मौर्निंग भेजता और रात में हालचाल पूछना न भूलता. तीनों दोस्तों का दिल करता कि उस की सासूमां का भी टिकट कटा कर उसी के पास भेज दें.
ऐसे ही वे किसी तरह दिन निकाल रहे थे. एक दिन तीनों समुद्र किनारे बैठे सासूपुराण में फिर व्यस्त थे और काफी चर्चा के बाद अब थक कर गहन सोच में डूबे समुद्र की लहरें गिन रहे थे.
‘‘अभी तो आधे ही दिन बीते हैं, मु झे तो घर और बीवी दोनों ही पराए लगने लगे हैं,’’ रूपम खिन्न स्वर में बोला.
‘‘यार अब सम झ में आ रहा है कि बहुएं अपनी सासों से क्यों भागा करती हैं. बेसिरपैर की बातें और बिन मौके के उपदेश भला किसे अच्छे लगते हैं,’’ सौरभ ने विश्लेषण दिया.
‘‘असल में हर पुरानी पीढ़ी अपनी नई पीढ़ी को नादान सम झती है और अपनी सम झ के अनुसार उपदेश देती रहती है और हर नई पीढ़ी को लगता है पुरानी पीढ़ी को कोई सम झ नहीं. वह क्या जाने नए जमाने की बातें,’’ आवाज सुन कर तीनों दोस्तों ने चौंक कर पीछे देखा तो साहिल खड़ा मुसकरा रहा था.
‘‘अरे तू कब आया?’’
‘‘मेरा ट्रिप तो 2 हफ्ते का ही था, सुबह ही पहुंचा हूं. आज छुट्टी थी, मु झे पता थार दोस्त लोग यहां पर गुप्त मंत्रणा कर रहे होंगे.’’
‘‘अरे इस की सोच यार. एक तरफ अपनी सास और दूसरी तरफ अपनी बीवी और बीवी की सास, खूब पिसेगा अब बाकी दिन बेचारा. सारी छुट्टियों की मस्ती निकल जाएगी,’’ सुमित ठहाका लगाता हुआ बोला.
‘‘मैं तुम्हारी तरह समस्याओं से पलायन नहीं करता,’’ साहिल दार्शनिक अंदाज में बोला, ‘‘जैसे सम झदार व सहनशील बहू होती है, वैसे ही मैं सम झदार व सहनशील अच्छे वाला दामाद हूं. बस थोड़ा ‘हैंडल विद केयर’ की जरूरत पड़ती है, आखिर मां तो मां ही होती है फिर चाहे बीवी की हो या अपनी,’’ साहिल रहस्यात्मक तरीके से मुसकराया.
आगे पढ़ें- साहिल ने तीनों के साथ…
‘मिस यूनिवर्स 2021’ (Miss Universe 2021) का खिताब जीतने वालीं हरनाज कौर संधू (Harnaaz Kaur Sandhu) इन दिनों सुर्खियों में हैं, जिसका कारण जहां हाल ही में उनका बढता वजन था तो वहीं अब रिएलिटी शो ‘इंडियाज गॉट टैलेंट 9’ (India’s Got Talent 9) में जाना चर्चा का कारण बन गया है. हालांकि इस बार वह खुद ट्रोलिंग का शिकार नहीं बल्कि दूसरे स्टार्स ट्रोलिंग का सामना करते नजर आ रहे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…
इस शो के सेट पर पहुंची हरनाज
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लैक्मे फैशन वीक के बाद हरनाज कौर ‘इंडियाज गॉट टैलेंट 9’ (India’s Got Talent 9) के सेट पर नजर आईं थीं, जिसकी उन्होंने शो के जज से मिलते हुए एक BTS वीडियो फैंस के साथ शेयर की. हालांकि वीडियो देखकर जहां फैंस हरनाज की तारीफ की तो वहीं शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) और सिंगर बादशाह (Badshah) को खूब खरीखोटी को ट्रोल करते नजर दिखे.
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इस वीडियो के कारण बढ़ा फैंस का गुस्सा
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वीडियो की बात करें तो हरनाज के फैंस का कहना है कि शो के जज उन्हें इग्नोर करते दिख रहे हैं. दरअसल, वीडियो में हरनाज स्टेज से जजेस की तरफ जाते हुए किरण खेर, बादशाह और शिल्पा शेट्टी को नमस्ते कहती दिख रही हैं. लेकिन जहां एक तरफ हरनाज उन्हें बहुत प्यार से मिलती नजर आ रही हैं तो वहीं तीनों जज कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं. इसी बीच वीडियो में बादशाह ने मजाक करते हुए कहते दिख रहे हैं कि ‘ये तीसरा कोई आया है पंजाब से’. हरनाज कौर के साथ ये बर्ताव देखकर फैंस का गुस्सा बढ़ गया है और वह जमकर स्टार्स की क्लास लगाते नजर आ रहे हैं. हालांकि यह वीडियो पुराना है. लेकिन फैंस इस पर अपना गुस्सा जाहिर करते दिख रहे हैं.
फैंस ने लगाई क्लास

वीडियो देखकर हरनाज कौर के फैंस जमकर स्टार्स को लताड़ते हुए दिख रहे हैं. वहीं एक यूजर ने कमेंट में लिखा है कि, ‘इन जजेस के पास बेसिक मैनर्स नहीं है… पूरे फेस और कोई दिलचस्पी नहीं है… इतनी अच्छी लड़की है हरनाज… देश का नाम किया है… कोई रिस्पेक्ट कुछ नहीं.. शेमफुल.’ वहीं वीडियो देखकर ट्रोलर्स शिल्पा शेट्टी के हावभाव पर भी सवाल उठाते दिख रहे हैं.
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सीरियल अनुपमा (Anupama) में इन दिनों शादी की तैयारियां देखने को मिल रही हैं. जहां अनुज (Gaurav Khanna) , मालविका (Aneri Vajani) के साथ मिलकर अपनी शादी की तैयारियां कर रहा है तो वहीं बा से लेकर तोषू तक अनुपमा (Rupali Ganguly) की बेइज्जती करते नजर आ रहे हैं. इसी बीच मालविका का एक फैसला शाह परिवार को हैरान करने वाला है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…
बापूजी लौटाते हैं बा के पैसे
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अब तक आपने देखा कि बापूजी और किंजल के अलावा अनुपमा की मां और भाई भी कपाड़िया परिवार के साथ शादी की तैयारियों में लग जाते हैं. वहीं बापूजी, वनराज और बा को पैसे लौटाते हुए कहते हैं कि उन्हें जरुरत नहीं है, जिसे सुनकर सभी हैरान रह जाते हैं. दूसरी तरफ अनुज और अनुपमा क्वालिटी टाइम बिताते नजर आते हैं. इसी बीच परितोष के दोस्त दोनों की शादी का मजाक उड़ाते हैं, जिसे सुनकर तोषू गुस्सा हो जाता है और मारपीट करता है. उसे लड़ता हुआ देख अनुपमा और अनुज मदद करने के लिए जाते हैं.
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मालविका करेगी फैसला
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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि तोषू, अनुपमा और अनुज से कहेगा कि अब हर दिन उन्हें ये बेइज्जती और आरोप झेलने पड़ेंगे, जिसका कारण उनकी शादी है. वहीं मालविका को अनुपमा को बद्दुआ देने की बात पता चलेगी, जिसके बाद वह शाह हाउस पहुंचेगी और काव्या, वनराज और परितोष को कंपनी से निकालने की बात बताएगी. वहीं वनराज गुस्से में मालविका को घर से बाहर निकाल देगा. हालांकि अनुपमा और अनुज उसकी मदद करते हुए नजर आएंगे.
बता दें, जल्द ही डिज्नी हॉटस्टार पर सीरियल अनुपमा का प्रीक्वल नजर आने वाला है, जिसमें नए कलाकार समेत सभी सितारे नजर आएंगे. हालांकि शो की कहानी अनुपमा और वनराज की शादी से जुड़े हुए अनकहे किस्सों से होगी. वहीं ये प्रीक्वल एक सीरीज होगा, जिसमें केवल 11 एपिसोड होंगे.
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लेखक- विनय कुमार सिंह
रोरो कर जरीना का बुरा हाल था. बेटी कल से वापस नहीं लौटी थी. शाम जैसेजैसे रात की तरफ बढ़ रही थी, उस का दिल बैठा जा रहा था. रोज की ही तरह वह घर से कालेज के लिए निकली थी. घर से कालेज वैसे तो ज्यादा दूर नहीं था लेकिन औटो और बस दोनों लेने पड़ते थे उसे वहां पहुंचने के लिए. उस ने बेटी को गेट तक छोड़ा था और जब वह औटो में बैठ गई थी तो जरीना वापस आ गई थी.
तकरीबन रोजाना ही अखबार में अपहरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की खबरें छपती रहती थीं. पढ़ कर जरीना कई बार बहुत दुखी भी हो जाती थी और अकसर उसे गुस्सा भी आ जाता था. कोसने लगती थी सब को, कानून व्यवस्था, समय, लड़कों और सब से ज्यादा अपनेआप को. वजह थी, उस का लड़की की मां होना और ऐसी लड़की की जिस का पिता नहीं है.
यह इंसानी फितरत ही है जिस में कमजोर व्यक्ति अकसर अपनेआप को सब से पहले कारण मान लेता है किसी घटना के लिए, चाहे वह उस के लिए जिम्मेदार हो या न हो. यह स्वभावगत कमजोरी होती है, खासतौर से महिलाओं की, क्योंकि उन के पास ज्यादा विकल्प नहीं होते. और यही वजह थी कि जरीना भी अपनेआप को इस का जिम्मेदार मानने लगी थी.
रात आंखों में ही बीती और हर खटके पर उसे लगता जैसे बेटी आ गई हो. लेकिन सुबह की रोशनी ने जब उस के कमरे में प्रवेश किया. वह कुरसी पर ही औंधी पड़ी हुई थी. अब तक पड़ोसियों को भी खबर हो चुकी थी और हर कोईर् अपने हिसाब से कयास लगा रहा था. सब की अपनीअपनी राय और अलगअलग सलाह.
जरीना को कुछ समझ नहीं आ रहा था. आखिरकार, लोगों के कहने पर वह पुलिस स्टेशन गई. आज पहला अवसर था वहां जाने का और उस का अंतस बुरी तरह कांप रहा था. वैसे भी किसी भी सामान्य व्यक्ति को अगर पुलिस स्टेशन जाना पड़े तो उस की मनोदशा दयनीय हो जाती है. यही कुछ हुआ था जरीना के साथ भी. कहने को तो पड़ोसी इस्माइल साथ था, लेकिन जरीना से ज्यादा वह खुद भी घबराया हुआ था.
जैसे ही वह थाने के गेट पर पहुंची, बेहद अजीब निगाहों से उस को गेट पर खड़े संतरी ने घूरा. उसे देख कर वह उस की हालत समझ गया था.
‘‘क्या हुआ, क्यों चली आई यहां,’’ उस के सवाल के लहजे और उस की बंदूक पर उस के कसे हुए हाथ को देख कर जरीना थर्रा गई.
‘‘साहब, बेटी कल से कालेज से वापस नहीं लौटी है,’’ किसी तरह घबराते हुए उस ने कहा. ‘‘अपनी रिश्तेदारी में पूछा सब जगह?’’ उस ने बेहद रूखे तरीके से कहा.
‘‘हां साहब, सब जगह फोन कर लिया है, कहीं भी नहीं है.’’
‘‘अच्छा, क्या उम्र थी उस की,’’ अभी भी वह संतरी सवाल दागे जा रहा था. इस्माइल बिलकुल खामोशी से थोड़ी दूर पर खड़ा था. उसे अब समझ में आ गया था कि सब बात उस को ही करनी है.
‘‘साहब, 18 साल की है, मुझे रिपोर्ट लिखवानी है, किस से मिलूं,’’ बोलते हुए वह अंदर की तरफ चली.
‘‘18 साल की है, तो अपनी मरजी से कहीं भाग गई होगी. जाओ, अंदर साहब बैठे हैं.’’ संतरी की आंखों और चेहरे पर अजीब सा लिजलिजापन था और अंदर जाते समय उसे उस की निगाह अपना पीछा करती लग रही थी.
अंदर एक टेबल के सामने एक पुलिस वाला बैठा था. टोपी उस ने टेबल पर ही रखी थी और उस के शर्ट के सामने के बटन खुले हुए थे. अब हिम्मत जवाब दे गई जरीना की, यह आदमी उस की मदद क्या करेगा जो खुद ही किसी मवाली जैसा लग रहा हो. उस पुलिस वाले ने आंखों से उस के सारे बदन का एक्सरे किया औैर बेहद भद्दे अंदाज में दांत को एक सींक से खोदते हुए बोला, ‘‘क्या हुआ, किसलिए आई यहां पर?’’
जरीना ने फिर से वही सब दोहराया और इस ने भी वही सवाल पूछा. उस की ज्यादा दिलचस्पी जरीना को घूरने में थी. जब जरीना ने एक बार फिर हाथ जोड़ कर कहा कि उस की रपट लिख ले, तो उस ने टरका दिया.
‘‘उस की कोई फोटो लाई है, तो दे जा और उस के सब यारदोस्तों से पूछ. ऐसी उम्र में कोई प्यारवार का चक्कर ही होता है, भाग गई होगी किसी यार के साथ. कुछ दिन देख ले, अगर नहीं लौटी तो हम लोग पता लगाएंगे,’’ कहते हुए वह वापस अपने दांत खोदने लगा.
जरीना ने उसे बेटी की एक फोटो दी और एक कागज पर अपना नाम व फोन नंबर लिख कर दिया. फिर टूटे कदमों से बाहर निकली. आज तक उस की जो भी धारणा पुलिस के प्रति थी, वह पुख्ता हो गई थी. वहीं एक दीवार पर लिखा एक वाक्य, ‘‘पुलिस आप की मित्र है,’’ उसे अपना भद्दा मजाक उड़ाता लगा.
वापसी के समय इस्माइल बोल रहा था कि अपने एरिया के नेता के पास चलेंगे, वे जरूर मदद करेंगे. जरीना ने सुन के भी अनसुना कर दिया, पता नहीं कितने सवाल वहां भी पूछे जाएं और आंखों से उस के जिस्म का एक्सरे फिर से हो.
घर वापस आ कर उस ने एक बार फिर सब रिश्तेदारों के यहां फोन किया, जवाब हर जगह से नकारात्मक ही था. शाम तक वह लगभग हर परिचित और उस की सब सहेलियों के यहां हो आईर् थी, कहीं कुछ पता नहीं चल रहा था. अब करे तो क्या करे. पति था नहीं और इकलौती लड़की गायब थी.
अब तो एक ही उम्मीद लगी थी कि शायद कोई फोन आए फिरौती के लिए और वह सबकुछ बेच कर भी उसे छुड़ा ले.
3 दिन बीत गए, फिरौती के लिए कोई फोन नहीं आया, हां सब रिश्तेदार और परिचित जरूर फोन करते और कहते कि कोई जरूरत हो तो बताना. सब को पता था कि अभी उसे किस चीज की जरूरत है लेकिन उस के लिए कोईर् भी मदद नहीं कर पा रहा था. चौथे दिन फिर वह पुलिस स्टेशन गई. लेकिन टका सा जवाब मिला कि कुछ पता नहीं चला है, जब पता चलेगा, खबर कर देंगे.
खानापीना सब छूट गया था, पूरीपूरी रात जाग कर बीत रही थी उस की. जहां भी उम्मीद होती, भागती चली जाती कि शायद कुछ पता चले. जब भी बाहर निकलती, लोग सहानुभूतिपूर्वक ही पूछते कि कुछ पता चला, लेकिन उन के लहजे से लगता जैसे व्यंग्य ज्यादा कर रहे हों. और पीछे से कई बार वह सुन चुकी थी कि बेटी को ज्यादा पढ़ाने का नतीजा देख लिया, भाग गई किसी के साथ. कुछ लोगों ने कहा कि अखबार भी देखते रहो, कभीकभी कोई खोया इस में भी मिल जाता है.
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