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इन 25 बीमारियों से बचाएगी ग्रीन टी, पढ़ें खबर

ग्रीन टी अपने स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध होती जा रही है. ग्रीन टी के प्रयोग से विभिन्न बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है. यहां हम बता रहे हैं कि ग्रीन टी कौनकौन सी बीमारी में किसकिस तरह सहायक होती है और उस में कौनकौन से लाभदायक तत्त्व होते हैं.

1. कैंसर

इस के अंदर पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट कैंसर का जोखिम को कम करने के लिए विटामिन सी के मुकाबले 25 गुणा और विटामिन बी के मुकाबले 100 गुना ज्यादा प्रभावकारी होते हैं. ये ऐंटीऔक्सीडैंट आप के शरीर के सैल्स को डैमेज होने से बचाए रखते हैं, जिस से कैंसर से बचाव होता है.

2. हृदयरोग

ग्रीन टी कोलेस्ट्रौल के स्तर को कम कर के हृदयरोगों और स्ट्रोक्स से होने वाले जोखिम को भी कम करने में सहायक है. यहां तक कि हार्टअटैक के बाद मृत पड़े हार्ट सैल्स को रिकवर कर दूसरे हार्ट सैल्स के संरक्षण में भी मदद करती है.

3. ऐंटीएजिंग

ग्रीन टी में पोलीफिनोल्स नामक ऐंटीऔक्सीडैंट होते हैं, जो फ्री रैडिकल्स से लड़ने की क्षमता रखते हैं. इस का अर्थ यह है कि ग्रीन टी बढ़ती उम्र से लड़ने में सहायक होती है और आप को ज्यादा समय तक जवां बनाए रखती है.

4. वेट लौस

शरीर से फैट बर्न कर के वजन को नियंत्रित करने में भी ग्रीन टी सहायक होती है. यह ऐक्स्ट्रा फैट को बर्न करने में भी मदद करती है और मैटाबोलिक रेट को प्राकृतिक तरीके से बढ़ाती है. यह एक दिन में शरीर से 70 कैलोरी तक बर्न करने की क्षमता रखती है.

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5. त्वचा

ग्रीन टी में पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट त्वचा को फ्री रैडिकल्स के हानिकारक दुष्प्रभावों से भी संरक्षित रखते हैं. त्वचा पर आई झुर्रियों और ढलती उम्र में त्वचा पर होने वाले प्रभाव इन्हीं फ्री रैडिकल्स के कारण उत्पन्न होते हैं.

6. आर्थराइटिस

ह्यूमेटायड आर्थराइटिस के जोखिम को भी ग्रीन टी कम करती है और इस के दुष्प्रभावों से बचाव करती है. यह शरीर के ऐंजाइम्स को ब्लाक कर के कार्टिलेज को संरक्षित रखती है. ये ऐंजाइम कार्टिलेज को कमजोर बना कर उन्हें नष्ट करते हैं.

7. बोंस (हड्डियां)

ग्रीन टी का फ्लूअराइड नामक तत्त्व हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है. यदि आप प्रतिदिन ग्रीन टी पीते हैं, तो यह आप के शरीर में हड्डियों की डैंसिटी (स्थिरता) को बरकरार रखती है.

8. कोलेस्ट्रौल

यह कोलेस्ट्रौल के स्तर को कम करने में सहायक है. यह बुरे कोलेस्ट्रौल के स्तर को कम कर के अच्छेबुरे कोलेस्ट्रौल के अनुपात को भी नियंत्रित करती है.

9. ओबेसिटी

फैट सैल्स में ग्लूकोज की बढ़ती सक्रियता को रोक कर ओबेसिटी पर भी ग्रीन टी नियंत्रण रखती है.

10. डायबिटीज

ग्रीन टी लिपिड प्रोफाइल को बेहतर बनाती है. ग्लूकोज मैटाबोलिज्म रेट में शुगर लैवल को बढ़ने से रोकता है और शरीर के मेटाबोलिक रेट को भी नियंत्रित करता है.

11. अलजाइमर

ग्रीन टी आप की मैमोरी को बढ़ाने में भी मदद करती है. हालांकि यह अलजाइमर से बचाव नहीं करती, लेकिन यह ब्रेन में मौजूद एसेटिलकोलिन नामक तत्त्व की सक्रियता को कम करने में मदद करती है. यह तत्त्व ही अलजाइमर होने के मुख्य कारण बनता है.

12. पार्किंसन

ग्रीन टी में पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट मस्तिष्क में होने वाले सैल डैमेज से बचाव में मदद करती है. यह डैमेज पार्किंसन होने की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाता है.

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13. लीवर डिजीज

रिसर्च से पता चलता है कि ग्रीन टी शरीर की फैटी लीवर में मौजूद हानिकारक फ्री रैडिकल्स को नष्ट कर देती है. यह लीवर फेल होने के कारणों से बचाव कर के ट्रांसप्लांट के जोखिम को भी कम करती है.

14. हाई ब्लडप्रैशर

यह हाई ब्लडप्रैशर से बचाव में मदद करती है. ग्रीन टी पी कर ब्लडप्रैशर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. यह एंगोएटेनसिन पर दबाव बनाए रखती है, जिस से ब्लडप्रैशर पर नियंत्रण बना रहता है.

15. फूड पौइजनिंग

इस में पाया जाने वाला कैटेचिन नामक तत्त्व शरीर के उन बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है, जो फूड पौइजनिंग की वजह बनते हैं. साथ ही, यह उन टौक्ंिसस को भी नष्ट करती है, जो इन बैक्टीरिया के कारण पनपते हैं.

16. ब्लड शुगर

यों तो बढ़ती उम्र के साथ शरीर में ब्लड शुगर लैवल बढ़ने की प्रवृत्ति होती है, लेकिन ग्रीन टी में पाए जाने वाले पौलीफिनोल्स ब्लड शुगर लैवल को कम करने में मदद करते हैं.

17. इम्यूनिटी

ग्रीन टी में मौजूद पोलीफिनोल्स और फ्लेवनौइड्स शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

18. कोल्ड और फ्लू

इस में मौजूद विटामिन सी सामान्य कोल्ड और फ्लू से लड़ने में मदद और शरीर को अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है.

19. अस्थमा

ग्रीन टी मसल्स को रिलैक्स करती है, इस से अस्थमा अटैक की तीव्रता में भी कमी आती है.

20. ईयर इन्फैक्शन

ग्रीन टी कानों में होने वाले इन्फैक्शन से भी बचाव करती है. रुई के फाहे को ग्रीन टी में भिगो कर उस से संक्रमित कान की सफाई करें. यह गंदगी को भी साफ कर देगा और कीटाणु भी नहीं पनपने देगा.

21 हरपीज

ग्रीन टी हरपीज के विशेष ट्रीटमैंट टौपिकल इंटरफेरन ट्रीटमैंट के प्रभाव को और अधिक बढ़ाने में मदद करती है. इस ट्रीटमैंट से पहले यह संक्रमित हिस्से पर दबाव या प्रभाव बनाती है और उस के बाद उस क्षेत्र के आसपास की त्वचा को ड्राई छोड़ देती है, जिस से ट्रीटमैंट का असर ज्यादा होता है और ट्रीटमैंट में भी सहूलियत रहती है.

22. सांसों की दुर्गंध

ग्रीन टी कई तरह के ऐसे वायरस और बैक्टीरिया को भी खत्म करती है, जो कई तरह की डैंटल प्रौब्लम्स का कारण होते हैं. साथ ही उन बैक्टीरिया को भी पनपने से रोकती है, जो सांस में दुर्गंध पैदा करते हैं.

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23. स्ट्रैस

ग्रीन टी एंग्जाइटी और स्ट्रैस से मुक्ति में सहायक होती है. इसलिए ग्रीन टी से स्ट्रैस पर नियंत्रण पाया जा सकता है.

24. ऐलर्जी

ग्रीन टी में मौजूद ईजीसीजी किसी भी तरह की स्किन ऐलर्जी से मुक्ति में सहायक है. इसलिए यदि आप को ऐलर्जी है, तो ग्रीन टी आप के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.

25. एचआईवी

जापान के वैज्ञानिकों ने पाया है कि ग्रीन टी शरीर के हैल्दी इम्यून सैल्स को आपस में इकट्ठा कर के एचआईवी संक्रमण को रोक सकती है.q

मुझसे कोई प्यार करता है, लेकिन मैं उससे प्यार नहीं करती, मैं क्या करुं?

सवाल

मैं एक लड़के से प्यार करती हूं. वह भी मुझे प्यार करता है. पर समस्या यह है कि मेरा चचेरा भाई भी मुझे बहुत प्यार करता है, मैं उसे नहीं चाहती. लेकिन यह बात कह कर मैं उसे दुखी भी नहीं करना चाहती हूं. फिर यदि मैं ने अपने बौयफ्रैंड से इस प्रेम संबंध को समाप्त करने की बात कही तो उसे तो दुख होगा ही, साथ ही मैं भी उस से जुदा हो कर जी नहीं पाऊंगी. मैं अजीब उलझन में हूं. किसी का भी दिल नहीं तोड़ना चाहती. कृपया मेरा मार्गदर्शन करें.

जवाब

आप को अपने चचेरे भाई को किसी मुगालते में नहीं रखना चाहिए. उस से साफ साफ कह दें कि आप दोनों भाईबहन हैं और आप का खून का रिश्ता है. आप की उस के प्रति जो चाहत है वह सिर्फ एक बहन की अपने भाई के प्रति है. यह सुन कर वह दुखी होगा, हो सकता है कि आप से नफरत भी करने लगे, पर इस के अलावा आप के पास कोई चारा भी नहीं है. प्यार के इस भ्रम को जितनी जल्दी तोड़ देंगी, तकलीफ उतनी ही कम होगी.

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एक हार्ट केयर हौस्पिटल के शुभारंभ का आमंत्रण कार्ड कोरियर से आया था. मानसी ने पढ़ कर उसे काव्य के हाथ में दे दिया. काव्य ने उसे पढना शुरू किया और अतीत में खोता चला गया…

उस ने रक्षित का दरवाजा खटखटाया. वह उस का बचपन का दोस्त था. बाद में दोनों कालेज अलगअलग होने के कारण बहुत ही मुश्किल से मिलते थे. काव्य इंजीनियरिंग कर रहा था और रक्षित डाक्टरी की पढ़ाई. आज काव्य अपने मामा के यहां शादी में अहमदाबाद आया हुआ था, तो सोचा कि अपने खास दोस्त रक्षित से मिल लूं, क्योंकि शादी का फंक्शन शाम को होना था. अभी दोपहर के 3-4 घंटे दोस्त के साथ गुजार लूं. जीभर कर मस्ती करेंगे और ढेर सारी बातें करेंगे. वह रक्षित को सरप्राइज देना चाहता था.

उस के पास रक्षित का पता था क्योंकि अभी उस ने पिछले महीने ही इसी पते पर रक्षित के बर्थडे पर गिफ्ट भेजा था. दरवाजा दो मिनट बाद खुला, उसे आश्चर्य हुआ पर उस से ज्यादा आश्चर्य रक्षित को देख कर हुआ. रक्षित की दाढ़ी बेतरतीब व बढ़ी हुई थी. आंखें धंसी हुई थीं जैसे काफी दिनों से सोया न हो. कपड़े जैसे 2-3 दिन से बदले न हों. मतलब, वह नहाया भी नहीं था. उस के शरीर से हलकीहलकी बदबू आ रही थी, फिर भी काव्य दोस्त से मिलने की खुशी में उस से लिपट गया. पर सामने से कोई खास उत्साह नहीं आया.

‘क्या बात है भाई, तबीयत तो ठीक है न,’ उसे आश्चर्य हुआ रक्षित के व्यवहार से, क्योंकि रक्षित हमेशा काव्य को देखते ही चिपक जाता था.

कमजोर को गुलाम बना दिया जाता है

रूस के व्लादिमीर पुतिन ने छोटे से देश यूक्रेन पर बुरी तरह कहर ढा दिया है और लगभग 15 लाख लोग तो अभी यूके्रन से भाग कर पड़ोसी देशों में पहुंच गए हैं, रूस की न मानने की सजा हजारों घरों को बमों से तोडक़र, परिवारों को नष्ट कर के औरतों और बच्चों को दी जा रही है और पूरा विश्व स्तब्ध है कि वह क्या करें. अमेरिका और यूरोप अपनी ओर से जो कर सकते थे वे कर रहे हैं पर एटमबमों से लैस रूस पर हमला करना एक और बड़ा जोखिम है.

यूक्रेन की मुसीबत की वजह है कि यूक्रेनियों ने एक की गुंडई को सहने से इंकार कर दिया. हजारों सालों से यह होता रहा है कि अपने बच्चों, घरवालों और अपनी जान बचाने के लिए लोग अपनी आजादी को कुरबान करते रहे हैं. इस कुरबानी का कोई लंबाचौड़ा फायदा नहीं होता क्योंकि इस के बाद कमजोर को गुलाम बना दिया जाता है और वह मरे से भी बुरी हालत में जीता है.

यूक्रेन का अंत कैसा भी हो, यूक्रेनी लड़ाकू चाहे मारे जाएं पर यूक्रेन की औरतों की कुरबानी, अपने बेटों और पतियों को लड़ते को भेजने को राजी होना और खुद अपना बसाबसाया घर छोडक़र कहीं विदेश में बस जाना असल में पूरी दुनिया को कर्जदार बना रहा है. वे औरतें असल में भीषण अधिकारों की पहली पहरेदार साबित हो रही है.

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अगर ये औरतें अपने बेटों और पतियों के सामने खड़ी हो कर उन्हें सरेंडर करने को कहतीं तो उन की जान बच जाती पर पूरी दुनिया में रूसी पैने फैलने लगते. जो यूक्रेन में हो रहा है, वही पड़ोसी भोलटोवा, एस्टोनिया, लटाविया, लिशूनिया में होता. रूसी मंसूबे तब तक नहीं रखते जब तक पश्चिमी देश एटमी युद्ध तक के लिए तैयार नहीं हो जाते. यूके्रन की औरतों ने अपनी दृढ़ता से एक संदेश दिया है कि जुल्म का हिम्मत से मुकाबला करना होता है, भीख मांग कर.

भारत में सैंकड़ों सालों से मुट्ठी भर लोग बहुसंख्यक शूद्रों और दलितों पर सदियों से भक्ति, पिछले जन्मों के कर्मों के फल के नाम पर राज करते आ रहे हैं. संविधान के बावजूद, आरक्षण के बावजूद ऊंचे घरों की औरतों और निचले घरों की औरतों में एक साथ विभाजन दिख रहा है. निचले घरों की औरतों, बेटियों को जब मर्जी रेप कर दिया जाता, वेश्याघरों में भेज दिया जाता है, कमरतोड़ मेहनत करने को मजबूर करा जाता है क्योंकि वे औरतें अपने बेटों और पतियों को यूक्रेनी औरतों की तरह अपनी जमीन, अपनी सरकार, अपने हकों के लिए लडऩे को नहीं भेजती.

जब तक यूक्रेन विशाल सोवियत संघ का हिस्सा था, मास्को ने यूक्रेन में ही एटमिक स्टेशन बना रखे थे. यहीं लक्ष्य बम जमा हो ताकि अगर कुछ हो तो यूक्रेनी ही मरें, बाकि रूस के लोग नहीं. अब यूक्रेनी जनता इस मनमानी को फिर से दोहरा देने को तैयार नहीं है. वह एक मास्को की कठपुतली को अपने राष्ट्रपति की तरह देखने को तैयार नहीं चाहे इस की कोई कीमत देनी न पड़े.

यूक्रेनी औरतें आज जो बलिदान कर रही है जिस में अपनों को खोना भी है, अपनी मेहनत से जुटाई गृहस्थी को रूसी हमलों में नष्ट होते देखना भी है, उस का फायदा आने वाली पीढिय़ों को मिलेगा. यूक्रेनी औरतों की इज्जत दुनियाभर में बढ़ जाएगी. उन्हें कष्ट भोगने की आदत होगी तो वे और कर्मठ बन जाएंगी.

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जहां भी औरतों ने यह बलिदान नहीं दिया वहां उन्हें सदियों तक गुलामी सहनी पड़ी है. मुसलिम देशों में औरतों को आज भी आजादी नहीं है क्योंकि वे उसी समय की सुरक्षा के चक्कर में अपने हकों को कुर्बान करती है, हकों के लिए कुर्बानी नहीं देती. अफगानिस्तान में औरतों ने बेटों और पतियों को लडऩे जाने दिया पर गलत हक के लिए, अपने परिवार की सुरक्षा के लिए नहीं. इसलिए तालिबानी सरकार बनते ही सब से पहला जुल्म औरतों पर शुरू हुआ. यूक्रेन की औरतों का निशाना एक विदेशी सरकार अपने लोकतांत्रिक हकों के लिए है और चाहे फिलहाल यूक्रेन पर रूसी कब्जा हो जाए, यह इलाका रूस के लिए हमेशा सिरदर्द बना रहेगा.

लड़ाई जारी है: भाग 1- सुकन्या ने कैसे जीता सबका दिल

‘बुआ, दादीं की तबियत ठीक नहीं है. वह तो एम्बुलेंस मिल गई वरना लॉक डाउन के कारण आना भी कठिन हो जाता. उन्हें मेडिकल कॉलेज में एडमिट करवा दिया है. पल्लव भी नहीं आ पा रहा है, माँ को तो आप जानती ही है, ऐसी स्थिति में नर्वस हो जाया करती हैं, यदि आप आ जायें तो….’ फोन पर परेशान सी सुकन्या ने कहा.

क्या, माँ बीमार है…पहले क्यों नहीं बताया ? शब्द निकलने को आतुर थे कि मनीषा ने अपनी शिकायत मन में दबाकर कहा …

‘ तू चिंता मत कर, मैं शीध्र से शीध्र पहुँचने का प्रयत्न करती हूँ….’

सुदेश जो आफिशियल कार्य से विदेश गये थे,  कल ही लौटे थे. उन्हें चौदह दिन का क्वारेंन्टाइन पूरा करना है. मनीषा ने उनके लिये खाना, पानी तथा फल इत्यादि कमरे के दरवाजे पर रखे स्टूल पर रख दिया तथा सुकन्या की बात उन्हें बताते हुये उनसे कहा कि वह जल्दी से जल्दी घर लौटने का प्रयत्न करेगी. आवश्यकता के समय लॉक डाउन में एक व्यक्ति तो जा ही सकता है…सोचकर उसने गाड़ी निकाली और चल पड़ी…. गाड़ी के चलने के साथ ही बिगड़ैल बच्चे की तरह मन अतीत की ओर चल पड़ा….

सुकन्या, उसकी पुत्री न होकर भी उसके दिल के बहुत करीब है. वह उसके भाई शशांक और अनुराधा भाभी की पहली संतान है. घर में बीस वर्ष पश्चात् जब बेटी ने जन्म लिया तो सिवाय माँ के सबने उसका उत्साह से स्वागत किया था. भाई की तो वह आँखों का तारा थी….नटखट और चुलबुली….अनुप्रिया भाभी के लिये वह खिलौना थी. माँ की एक ही रट थी कि उन्हें घर का वारिस चाहिये. उनकी जिद का परिणाम था कि एक वर्ष पश्चात् वारिस आ भी गया. माँ तो पल्लव के आने से अत्यंत प्रसन्न हुई. भाभी पल्लव का सारा काम करके यदि सुकन्या की ओर ध्यान देती तो माँ खीज कर कहती, ‘न जाने कैसी माँ है, जो बेटे पर ध्यान ही नहीं देती है, अरे, बेटी तो पराया धन है, ज्यादा लाड़ जतायेगी तो बाद में पछतायेगी….’

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‘ माँ इसीलिये तो इसे ज्यादा प्यार देना चाहती हूँ. बेटा तो सदा मेरे पास रहेगा…तब इसके हिस्से का प्यार भी तो वही पायेगा….’ कहकर वह मुस्करा देती और माँ खीजकर रह जाती.

कहते हैं कि खुशी की मियाद कम होती है, यही भाभी के साथ हुआ…तीस वर्ष की कमसिन उम्र में ही राजन भइया दो फूल उनकी झोली में डाल कर, एक एक्सीडेंट में चल बसे. भाभी की अच्छी भली जिंदगी बदरंग हो गई थी. कच्ची उम्र में विवाह हो जाने के कारण, भाभी की शिक्षा अधूरी रह गई थीं. मामूली नौकरी कर शहर में रहना पिताजी, उनके ससुरजी को नहीं भाया था. वैसे भी वे उन लोगों में थे जिन्हें औरतों का घर से निकलना पसंद नहीं था.

पिताजी भाभी और बच्चों को अपने साथ गाँव ले आये. यह सच है कि उन्होने भाभी को किसी तरह की कमी नहीं होने दी किन्तु माँ उन्हें सदा भाई की मृत्यु का दोषी मानतीं रहीं इसलिये उनके कोप का भाजन भाभी के साथ नन्हीं सुकन्या भी होती. यह सब पापा की अनुपस्थिति में होता…नतीजा यह हुआ कि भाभी तो चुप हो ही गई जबकि नन्हीं दस वर्षीया सुकन्या डरी-डरी अपने ही अंतःकवच में कैद होने लगी थी.

पिताजी के सामने खुश रहने का नाटक करते-करते भाभी थक गई थीं. रात के अँधेरे में मन चीत्कार कर उठता तो वह अवश बैठी चीत्कार को मन ही मन में दबाते हुए अपनी खुशी सुकन्या और पल्लव में ढूँढने का प्रयास करती. उसकी जिंदगी एक ऐसी कटी पतंग के समान बन गई थी जिसकी कोई मंजिल नहीं थी…बस दूसरों की सोच एवं सहारे जीना ही उनका आदि और अंत हो चला था. ससुराल के अलावा उनका कोई और था भी नहीं, माता पिता बचपन में चल बसे थे, जिन चाचा ने उन्हें पाला पोसा, विवाह किया, वे भी नहीं रहे थे. चाची अपने बेटों के सहारे जीवन बसर कर रही थीं. शशांक भाई की मृत्यु पर वह शोक जताने आई थीं…साथ में अपनी विवशता भी जता गईं. आज के युग में जब अपने भी पराये हो जाते हैं तो किसी अन्य से क्या आशा…!! भाभी ने स्वयं को वक्त के हाथों सौंप दिया था.

जब भी मनीषा जाती तो भाभी दिल का दर्द उसके साथ बाँटकर हल्की हो लेती थी. भाभी के लाइलाज दर्द को वह भी कैसे कम कर पाती…? माँ से इस संदर्भ में बात करती तो वह कह देतीं कि तू अपना घर देख, मुझे अपना घर देखने दे. वह पापा को सारी बातें बताकर घर में दरार नहीं डालना चाहती थी अतः चुप ही रहती.

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माँ सदा से ही डोमिनेंटिग थी. उन्हीं की इच्छा के कारण वह भी ज्यादा नहीं पढ़ पाई थी किन्तु उसका भाग्य अच्छा था जो पिता की मजबूत स्थिति के कारण उसके ससुर ने अपने आई.आई.टियन बेटे के लिए न केवल उसे चुना वरन उसकी इच्छानुसार पढ़ने की इजाजत भी दी थी. आज वह पी.एच.डी करके महिला विद्यालय में प्रोफेसर है.

पल्लव अपने पिता के समान तीक्ष्ण बुद्धि का था. वह इंजीनियर बनना चाहता था. जब वह पढ़ने बैठता तो दादी का प्यार उस पर उमड़ आता. वह स्वयं उसे अपने हाथ से खिलातीं जबकि सुकन्या को कुछ खिलाना तो दूर, जब भी वह पढ़ने बैठती, माँ कहतीं,‘ अरे, घर का काम सीख, किताबों में आँखें न फोड़, हमारे घर की लड़कियाँ नौकरी नहीं करतीं, हाँ, ससुराल वाले करवाना चाहें तो बात दूसरी है.’

एक बार मनीषा घर गई…सुकन्या सो गई थी तथा ननद भाभी अपने सुख-दुख बाँट रहीं थीं तभी सुकन्या बड़बड़ाने लगी…मुझे कोई प्यार क्यों नहीं करता…मुझे कोई प्यार नहीं करता… है भगवान मुझे पैदा ही क्यों किया…इसके साथ ही उसका पूरा शरीर पसीने से लथ-पथ हो गया था…. अस्फुट स्वर में कहे उसके शब्द मनीषा के मर्म को चोट पहुंचाने लगे. उसकी ऐसी हालत देखकर मनीषा ने अनुराधा से पूछा तो उसने कहा पिछले एक वर्ष से इसकी यही हालत है दीदी…शायद माँजी के व्यवहार ने इसे भयभीत कर दिया है. यह डरपोक और दब्बू बनती जा रही है…अब तो बात करने में हकलाने भी लगी है.

सुकन्या की हालत देखकर मनीषा ने माँ को समझाते हुये कहा, ‘ माँ तुम्हारा अपने प्रति ऐसा रवैया मैं आज तक नहीं भूली हूँ…. सुकन्या तुम्हारी पोती है तुम्हारे बेटे का अंश…. क्या तुम उसे दुख पहुँचकर अपने बेटे की स्मृतियों के साथ छल नहीं कर रही हो…? अगर भइया आज जीवित होते तो क्या वह अपनी बेटी के साथ तुम्हारा व्यवहार सह पाते ?  इस बच्ची से तुमने इसकी सारी मासूमियत छीन ली है…देखो कैसी डरी, सहमी रहती है. भाई की असामयिक मृत्यु तथा तुम्हारी प्रताड़ना से भाभी का जीवन तो बदरंग बन ही गया है, अब इस मासूम का जीवन बदरंग मत बनाओ.’

‘ तू अपनी सीख अपने पास ही रख, मुझे शिक्षा मत दे….’ तीखे स्वर में माँ ने कहा.

‘ माँ अब मैं पहले वाली मनीषा नहीं हूँ, मुझे पता है पापा को कुछ पता नहीं होगा…मैं तुम्हारी सारी बातें पापा को बता दूँगी.’

मनीषा की धमकी काम आई थी. माँ का सुकन्या के प्रति रवैया बदला था किन्तु अनु भाभी पर माँ बेटी में दरार डालने का आरोप भी लगा दिया.

मनीषा ने जाते हुए पल्लवी से कहा था, ‘बेटा, रो-रोकर जिंदगी नहीं जीई जाती…मेहनत कर…पढ़ाई में मन लगा, अच्छे नम्बर ला…. जब तू कुछ बन जायेगी तो तेरी यही दादी तुझे प्यार करेंगी. वह तुझे कमजोर करने के लिये नहीं वरन् मजबूत बनाने के लिये डाँटती हैं.’

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मनीषा ने उसके नन्हें दिल में विश्वास की नन्हीं लौ जगाई थी. वह जानती थी कि वह झूठ बोल रही है पर सुकन्या में आशा का संचार करने के लिये उसे यही उपाय समझ में आया था. सुकन्या ने उसकी बात कितनी समझी किन्तु अनुराधा कहती कि अब वह पढ़ाई में मन लगाने लगी है.

परिस्थतियों ने पल्लव को समय से पहले परिपक्व बना दिया था. पल्लव अपने पापा के समान इंजीनियर बनना चाहता था अतः दादाजी ने उसका दाखिला शहर के बोर्डिंग स्कूल में करवा दिया था. सुकन्या भी धीरे-धीरे अपने डर से निजात पाकर पढाई में मन लगाने की कोशिश करने लगी थी.

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नेशनल टीवी पर शादी करेंगे Mika Singh, प्रोमो हुआ वायरल

बॉलीवुड के पौपुलर सिंगर मीका सिंह (Mika Singh) जल्द ही नेशनल टीवी पर स्वयंवर रचाने जा रहे हैं, जिसके चलते वह सुर्खियों में छाए हुए हैं. वहीं अब शो का प्रोमो सामने आ गया है, जिसमें वह दूल्हा बनकर अपनी दुल्हन तलाशते नजर आ रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं ‘मीका दी वोटी’ (Mika Di Vohti) के प्रोमो की झलक…

मीका बनेंगे दूल्हा

 

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स्टार भारत के शो ‘मीका दी वोटी’ (Mika Di Vohti Promo) में मीका सिंह का स्वयंवर रचाया जाने वाला है. वहीं प्रोमो की बात करें तो वीडियो में मीका सिंह अकेलेपन से परेशान होकर घोड़ी चढ़ने की बात कहते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं प्रोमो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया है कि ‘मीका दी वोटी’ के लिए रजस्ट्रेशन भी शुरू हो चुका है, जिसकी आखिरी तारीख 8 मई यह की गई है. हालांकि शो के ऑनएयर होने की डेट अभी नहीं बताई गई है. लेकिन फैंस को शो के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार करते नजर आ रहे हैं.

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ये सेलेब्स कर चुके हैं टीवी पर शादी

 

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मीका सिंह पहले ऐसे स्टार नहीं हैं, जो टीवी पर शादी कर चुके हैं. इससे पहले पारस छाबड़ा, शहनाज गिल, राहुल महाजन, मल्लिका शेरावत भी टीवी पर अपना स्वयंवर रचा चुकी हैं. हालांकि जहां कुछ को अपना जीवनसाथी नहीं मिला तो वहीं कुछ शादी करने के बाद तलाक ले चुके हैं. लेकिन देखना हा कि क्या मीका सिंह इस रिश्ते को निभा पाएंगे.

बता दें, मीका सिंह बौलीवुड और पंजाबी इंडस्ट्री के जाने माने सिंगर हैं. सिंगर के कई गाने हिट साबित हुए हैं. इनमें सलमान खान के फिल्मों के गाने भी शामिल है.

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Anupama के एक बुलावे पर शाह हाउस आएगा अनुज, वनराज को लगेगा झटका

सीरियल अनुपमा (Anupama) में वनराज (Sudhanshu Panday) कदम कदम पर चाले चलता हुआ नजर आ रहा है. वहीं किंजल के कारण अनुपमा (Rupali Ganguly) और अनुज (Gaurav Khanna) के बीच दूरियां होती हुई नजर आ रही हैं. इसी बीच अनुपमा का शाह हाउस रहने का फैसला सीरियल की कहानी में नया मोड़ लाने वाला है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Anupama Latest Update)…

अनुज होगा परेशान

 

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अब तक आपने देखा कि किंजल के कारण अनुपमा के लिए अनुज परेशान होता है और सोचता है कि कहीं अनुपमा एक बार फिर उसकी जिंदगी से दूर ना हो जाए. वहीं परितोष, अनुपमा से कहता है कि किंजल को उसकी जरूरत है और वह वहां थी. वहीं बा और वनराज, अनुपमा से किंजल की तबीयत ठीक होने तक रुकने के लिए कहते हैं. हालांकि बापूजी और समर उसे खुद फैसला लेने के लिए कहते हैं.

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वनराज से लड़ती है काव्या

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुपमा को रोकने के वनराज के फैसले पर काव्या उससे लड़ती है. हालांकि वनराज, उससे कहेगा कि अगर उसे अनुपमा से दिक्कत है तो घर छोड़ दे. वहीं अनुज को पता चलेगा कि अनुपमा ने शाह हाउस में  रहने का फैसला किया है और वह अनुपमा को किंजल के साथ रहने की अनुमति दे देगा. लेकिन वह अनुपमा से वादा करने के लिए कहेगा कि वह उसे भी समय दे.

 

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शाह हाउस पहुंचेगा अनुज

इसी के साथ आप देखेंगे कि महाशिवरात्रि के मौके पर अनुपमा, अनुज से बात करेगी और उसे बैग पैक करके शाह हाउस आने के लिए कहेगी. लेकिन वनराज उसे धमकी देगा कि वह हिम्मत भी ना करे. हालांकि वनराज की धमकी का जवाब देने के लिए अनुज, अनुपमा के साथ आरती करने के लिए पहुंचेगा.

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नीड़ का निर्माण फिर से: भाग 2- क्या मानसी को मिला छुटकारा

लेखक- श्रीप्रकाश

मानसी कहती रही, ‘किसी औरत के लिए पहला प्यार भुला पाना कितना मुश्किल होता है, शायद तुम सोच भी नहीं सकते हो. वह भी तुम्हारा अचानक चले जाना…कितनी पीड़ा हुई मुझे…क्या तुम्हें इस का रंचमात्र भी गिला है?’ ‘मानसी, परिस्थिति ही ऐसी आ गई कि मुझे एकाएक चेन्नई नौकरी ज्वाइन करने जाना पड़ा. फिर भी मैं ने अपनी बहन कविता से कह दिया था कि वह तुम्हें मेरे बारे में सबकुछ बता दे.’ थोड़ी देर बाद राज ने सन्नाटा तोड़ा, ‘मानसी, एक बात कहूं. क्या हम फिर से नई जिंदगी नहीं शुरू कर सकते?’ राज के इस अप्रत्याशित फैसले ने मानसी को झकझोर कर रख दिया. वह खामोश बैठी अपने अतीत को खंगालने लगी तो उसे लगा कि उस के ससुराल वाले क्षुद्र मानसिकता के हैं. सास आएदिन छोटीछोटी बातों के लिए उसे जलील करती रहती हैं, वहीं ससुर को उन की गुलामी से ही फुर्सत नहीं. कौन पति होगा जो बीवी की कमाई खाते हुए लज्जा का अनुभव न करता हो.

‘क्या सोचने लगीं,’ राज ने तंद्रा तोड़ी. ‘मैं सोच कर बताऊंगी,’ मानसी उठ कर जाने लगी तो राज बोला, ‘मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा.’ आज मानसी का आफिस में मन नहीं लग रहा था. ऐसे में उस की अंतरंग सहेली अचला ने उस का मन टटोला तो उस के सब्र का बांध टूट गया. उस ने राज से मुलाकात व उस के प्रस्ताव की बातें अचला को बता दीं. ‘तेरा प्यार तो मिल जाएगा पर तेरी 3 साल की बेटी का क्या होगा? क्या वह अपने पिता को भुला पाएगी? क्या राज को सहज अपना पिता मान लेगी?’ इस सवाल को सुन कर मानसी सोच में पड़ गई.  ‘आज तुम भावावेश में फैसला ले रही हो. कल राज कहे कि चांदनी नाजायज औलाद है तब. तब तो तुम न उधर की रहोगी न इधर की,’ अचला समझाते हुए बोली.

‘मैं एक गैरजिम्मेदार आदमी के साथ पिसती रहूं. आफिस से घर आती हूं तो घर में घुसने की इच्छा नहीं होती. घर काट खाने को दौड़ता है,’ मानसी रोंआसी हो गई. ‘तू राज के साथ खुश रहेगी,’ अचला बोली. ‘बिलकुल, अगर उसे मेरी जरूरत न होती तो क्यों लौट कर आता. उस ने तो अब तक शादी भी नहीं की,’ मानसी का चेहरा चमक उठा. ‘मनोहर के साथ भी तो तुम ने प्रेम विवाह किया था.’ ‘प्रेम विवाह नहीं समझौता. मैं ने उस से समझौता किया था,’ मानसी रूखे मन से बोली. ‘मनोहर क्या जाने, वह तो यही समझता होगा कि तुम ने उसे चाहा है. बहरहाल, मेरी राय है कि तुम्हें उसे सही रास्ते पर लाने का प्रयास करना चाहिए. वह तुम्हारा पति है.’

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‘मैं ने उसे सुधारने का हरसंभव प्रयास किया. चांदनी की कसम तक दिलाई.’ ‘हताशा या निराशा के भाव जब इनसान के भीतर घर कर जाते हैं तो सहज नहीं निकलते. तू उसे कठोर शब्द मत बोला कर. उस की संगति पर ध्यान दे. हो सकता है कि गलत लोगों के साथ रह कर वह और भी बुरा हो गया हो.’ ‘आज तू मेरे घर चल, वहीं चल कर इत्मीनान से बातें करेंगे.’

इतना बोल कर अचला अपने काम में जुट गई. अचला के घर आ कर मानसी ने देर से आने की सूचना मनोहर को दे दी. ‘राज के बारे में और तू क्या जानती है?’ अचला ने चाय का कप बढ़ाते हुए पूछा. ‘ज्यादा कुछ नहीं,’ मानसी कप पकड़ते हुए बोली. ‘सिर्फ प्रेमी न, यह भी तो हो सकता है कि वह तेरे साथ प्यार का नाटक कर रहा हो. इतने साल बाद वह भी यह जानते हुए कि तू शादीशुदा है, क्यों लौट कर आया? क्या वह नहीं जानता कि सबकुछ इतना आसान नहीं. कोई विवाहिता शायद ही अपना घर उजाड़े?’ अचला बोली, ‘जिस्म की सड़न रोकने के लिए पहले डाक्टर दवा देता है और जब हार जाता है तभी आपरेशन करता है. मेरा कहा मान, अभी कुछ नहीं बिगड़ा है.

अपने पति, बच्चों की सोच. शादी की है अग्नि के सात फेरे लिए हैं,’ अचला का संस्कारी मन बोला. मानसी की त्योरियां चढ़ गईं, ‘क्या निभाने की सारी जिम्मेदारी मेरी है, उस की नहीं. क्या नहीं किया मैं ने. नौकरी की, बच्चे संभाले और वह निठल्लों की तरह शराब पी कर घर में पड़ा रहता है. एक गैरजिम्मेदार आदमी के साथ मैं सिर्फ इसलिए बंधी रहूं कि हमारा साथ सात जन्मों के लिए है,’ मानसी का गला भर आया. ‘मैं तो सिर्फ तुम्हें दुनियादारी बता रही थी,’ अचला ने बात संभाली.

‘मैं ने मनोहर को तलाक देने का मन बना लिया है,’ मानसी के स्वर में दृढ़ता थी. ‘इस बारे में तुम अपने मांबाप की राय और ले लो. हो सकता है वे कोई बीच का रास्ता सुझाएं,’ अचला ने कह कर बात खत्म की.  मानसी के मातापिता उस के फैसले से दुखी थे.

‘बेटी, तलाक के बाद औरत की स्थिति क्या होती है, तुम जानती हो,’ मां बोलीं. ‘मम्मी, इस वक्त मेरी जो मनोस्थिति है, उस के बाद भी आप ऐसा बोल रही हैं,’ मानसी दुखी होते हुए बोली. ‘क्या स्थिति है, जरा मैं भी तो सुनूं,’ मानसी की सास तैश में आ गईं. वहीं बैठे मनोहर के पिता ने इशारों से पत्नी को चुप रहने के लिए कहा. ‘तलाक से तुम्हें क्या हासिल हो जाएगा,’ मानसी के पापा बोले. ‘सुकून, शांति…’ दोनों शब्दों पर जोर देते हुए मानसी बोली. ‘अब आप ही समझाइए भाई साहब,’ मानसी के पापा उस के ससुर से हताश स्वर में बोले. ‘मैं ने तो बहुत कोशिश की.

पर जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो कोई क्या कर सकता है,’ उन्होंने एक गहरी सांस ली. मनोहर वहीं बैठा सारी बातें सुन रहा था. ‘मनोहर तुम क्या चाहते हो? मानसी के साथ रहना या फिर हमेशा के लिए अलगाव?’ मानसी के पापा वहीं पास बैठे मनोहर की तरफ मुखातिब हो कर बोले. क्षणांश वह किंकर्तव्यविमूढ़ बना रहा फिर अचानक बच्चों की तरह फूटफूट कर रोने लगा. उस की दशा पर सब का मन द्रवित हो गया.

‘मैं क्या हमेशा से ऐसा रहा,’ मनोहर बोला, ‘मैं मानसी से बेहद प्यार करता हूं. अपनी बेटी चांदनी को एक दिन न देखूं तो मेरा दिल बेचैन हो उठता है.’

‘जब ऐसी बात है तो उसे दुख क्यों देता है,’ मानसी की मां बोलीं.

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‘मम्मी, मैं ने कई बार कोशिश की पर चाह कर भी अपनी इस लत को छोड़ नहीं पाया.’

मनोहर के इस कथन पर सब सोच में पड़ गए कि कहीं न कहीं मनोहर के भीतर भी अपराधबोध था. यह जान कर सब को अच्छा लगा. मनोहर को अपने परिवार से लगाव था. यही एक रोशनी थी जिस से मनोहर को पुन: नया जीवन मिल सकता था.

मानसी की मां उसे एकांत में ले जा कर बोलीं, ‘बेटी, मनोहर उतना बुरा नहीं है जितना तुम सोचती हो. आज उस की जो हालत है सब नशे की वजह से है. नशा अच्छेअच्छे के विवेक को नष्ट कर देता है. मैं तो कहना चाहूंगी कि तुम एक बार फिर कोशिश कर के देखो. उस की जितनी उपेक्षा करोगी वह उतना ही उग्र होगा. बेहतर यही होगा कि तुम उसे स्नेह दो. हो सके तो मां जैसा अपनत्व दो. एक स्त्री में ही सारे गुण होते हैं. पत्नी को कभीकभी पति के लिए मां भी बनना पड़ता है.’

मानसी पर मां की बातों का प्रभाव पड़ा. इस बीच उस की सास ने कुछ तेवर दिखाने चाहे तो मनोहर ने रोक दिया, ‘आप हमारे बीच में मत बोलिए.’

‘क्या तुम शराब पीना छोड़ोगे?’ अपने पिता के यह पूछने पर मनोहर ने सिर झुका लिया.

‘तुम्हारे गुरदे में सूजन है. तुम्हें इलाज की सख्त जरूरत है. मैं तुम्हें दिल्ली किसी अच्छे डाक्टर को दिखाऊं तो तुम मेरा सहयोग करोगे?’ वह आगे बोले.

मनोहर मानसी की तरफ याचना भरी नजरों से देख कर बोला, ‘बशर्ते मानसी भी मेरे साथ दिल्ली चलेगी.’

‘मेरे काम का हर्ज होगा,’ मानसी बोली.

‘देख लिया पापा. इसे अपने काम के अलावा कुछ सूझता ही नहीं,’ मनोहर अपने ससुर की तरफ मुखातिब हो कर कुछ नाराज स्वर में बोला.

‘बेटी, उसे तुम्हारा सान्निध्य चाहिए. तुम पास रहोगी तो उसे बल मिलेगा,’ मानसी के पिता बोले.

मानसी 10 दिन दिल्ली रह कर आई तो मनोहर काफी रिलेक्स लग रहा था. उस ने शराब पीनी छोड़ दी थी. ऐसा मानसी का मानना था लेकिन हकीकत कुछ और थी. मनोहर अब चोरी से नशा करता था.

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जानें कैसी हो इकलौते की परवरिश

आस्ट्रेलिया के मोनाश और क्लेयटन विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिकों द्वारा हाल में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक इकलौते बच्चे दूसरे बच्चों के मुकाबले 16% कम जोखिम उठाना पसंद करते हैं. साथ ही उन में स्वार्थ की भावना भी ज्यादा होती है. यह निष्कर्ष चीन में 1979 में ‘एक परिवार एक ही बच्चा’ की नीति लागू होने के पहले और उस के बाद के वर्षों में पैदा हुए बच्चों का आपसी तुलनात्मक अध्ययन कर के निकाला गया है. इकलौते बच्चों को परिवार में बेहद लाड़प्यार मिलता है, जिस की वजह से उन में बादशाही जिंदगी जीने की आदत पड़ सकती है. मनोवैज्ञानिक दृष्टि से इस का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. वे स्वार्थी तो होते ही हैं, भाईबहनों के अभाव की वजह से बचपन से इन में प्रतियोगी भावना की कमी पाई जाती है. यही नहीं यूरोप में किए गए एक शोध के मुताबिक इकलौती संतान के मोटे होने की संभावना भी भाईबहन वाले बच्चों की तुलना में 50% अधिक होती है. यह निष्कर्ष यूरोप के 8 देशों के 12,700 बच्चों पर किए गए एक सर्वेक्षण में सामने आया.

ऐसे बच्चे अन्य बच्चों की तरह घर से बाहर निकल कर कम खेलते हैं और टीवी देखने के ज्यादा आदी होते हैं. वे खानेपीने में भी मनमानी करते हैं. मांबाप प्यारदुलार में उन की हर मांग पूरी करते जाते हैं. इन वजहों से उन में मोटे होने की संभावना ज्यादा पाई जाती है.

एकल परिवार

आज के संदर्भ में देखा जाए तो इस तरह के शोधों और उन से निकाले गए निष्कर्षों पर गौर करना लाजिम है. आज बढ़ती महंगाई और बदलती जीवनशैली ने सामाजिक संरचना में परिवर्तन ला दिया है. संयुक्त परिवारों के बजाय अब एकल परिवारों को प्रमुखता मिल रही है. पतिपत्नी दोनों कामकाजी हैं. पत्नी को घर के साथ दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है. ऐसे में कभी परिस्थितिवश तो कभी सोचसमझ कर लोग एक ही बच्चे पर परिवार सीमित करने का फैसला ले लेते हैं. हाल ही में भारत में एक मैट्रिमोनियल साइट (शादी.कौम) द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक महिलाओं की तुलना में पुरुष एक से अधिक बच्चों की इच्छा अधिक रखते हैं. सर्वे में जहां 62% पुरुषों ने एक से ज्यादा बच्चों की जरूरत पर बल दिया, वहीं सिर्फ 38% महिलाओं ने ही इस में रुचि दिखाई.

दरअसल, पुरुष सोचते हैं कि बच्चे उन के जीवन के केंद्र हैं और एक सफल शादी के सूचक हैं, इसलिए वे ज्यादा बच्चे पसंद करते हैं. इस के विपरीत महिलाएं, जिन्हें मूल रूप से बच्चों के देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, कम बच्चे चाहती हैं. मैट्रोज के कपल्स पर आधारित इस सर्वे में पाया गया कि 42% मैरिड कपल्स के पास सिंगल चाइल्ड थे, जबकि 28% मैरिड कपल्स के 1 से ज्यादा बच्चे थे. इस सर्वे में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि लव मैरिज करने वाले कपल्स सिंगल चाइल्ड तो अरैंज मैरिज वाले कपल्स 1 से ज्यादा बच्चे पसंद करते हैं. लव मैरिज करने वाले कपल्स में से 49% ने सिंगल चाइल्ड की इच्छा जताई, जब कि अरैंज मैरिज करने वाले कपल्स में से 62% एक से अधिक बच्चों के ख्वाहिशमंद थे, क्योंकि वे बेटा और बेटी दोनों ही चाहते थे.

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सोच में बदलाव

इस संदर्भ में मैट्रो हौस्पिटल की कंसल्टैंट साइके्रटिस्ट, अवनि तिवारी कहती हैं कि आजकल की बढ़ती महंगाई और टूटते संयुक्त परिवारों की परंपरा ने लोगों की सोच में बदलाव पैदा किया है. अब लोग बच्चे को जन्म देने का फैसला बहुत सोचविचार कर लेते हैं, क्योंकि पतिपत्नी दोनों को अपना कैरियर भी देखना होता है. उधर घर में सास, मां, मौसी, बूआ आदि की कमी रहती है. ऐसे में सारी जिम्मेदारी स्वयं उठानी पड़ती है. फिर अधिक उम्र में विवाह की वजह से भी रिप्रोडक्टिव कैपिसिटी घट रही है. बड़े शहरों में रहने वाले ज्यादातर कपल्स किसी तरह एक बच्चा तो मैनेज कर लेते हैं, क्योंकि ऐसा उन्हें समाज के लोगों का मुंह बंद करने और खुद भी मांबाप बनने का आनंद उठाने के लिए जरूरी लगता है. पर दूसरे बच्चे की बात पर उन्हें सोचना पड़ता है. अकसर यह भी होता है कि एक पार्टनर यदि इच्छुक भी है, तो दूसरा बढ़ती जिम्मेदारियों और खर्चों का वास्ता दे कर दूसरे को चुप करा देता है. ऐसे घरों में अब चूंकि बच्चा इकलौता होता है तो मांबाप की सारी उम्मीदें उसी से जुड़ी होती हैं. उन के पास यह विकल्प नहीं होता कि चलो एक बच्चा डाक्टर बनना चाहता है तो कोई बात नहीं, दूसरा मेरी मरजी के मुताबिक इंजीनियर या वकील वगैरह बन जाएगा. पतिपत्नी की सारी उम्मीदों का केंद्र वह इकलौता बच्चा रहता है.

बच्चा सोचता है कि सब कुछ तो मेरा ही है. इस से उस में न तो प्रतियोगी भावना पैदा होती है और न ही वह अच्छा पीयर रिलेशनशिप यानी हमउम्र साथियों से दोस्ती ही डैवलप कर पाता है. यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो संभव है कि बच्चा आत्मकेंद्रित हो जाए. पर मांबाप बचपन से उस में सही संस्कार और सोच पैदा करें तो इस स्थिति से बचा जा सकता है. मांबाप को चाहिए कि वे बच्चे को रिश्तेदारों और पड़ोसियों के हमउम्र बच्चों के साथ मिक्सअप होना सिखाएं. उस के हाथ से दूसरों को चीजें दिलवाएं. बच्चे को अकेला न छोड़ें. बड़े भाईबहन के रहने से छोटा बच्चा अकसर सारे काम जल्दी सीख जाता है, क्योंकि बड़ा भाई/बहन उसे सब सिखाता जाता है. पर चूंकि यहां बच्चा अकेला है, तो मांबाप को ही यह भूमिका निभानी होगी. बच्चे के साथ बच्चा बन कर रहना होगा, उस के साथ खेलना होगा और उसे अच्छी आदतें सिखानी होंगी.

मिथक और वास्तविकताएं

वैसे यह कहना कि बच्चा इकलौता है तो वह हमेशा ही हठी, स्वार्थी या आत्मकेंद्रित होगा, जरूरी नहीं है. यह बात महत्त्वपूर्ण है कि उस की परवरिश कैसे की गई है. आप महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध या फिर आइजैक न्यूटन का उदाहरण ले सकते हैं. ये भी इकलौते बच्चे थे पर मानवता और देशसेवा के नाम अपनी जिंदगी उत्सर्ग कर दी. दुनिया को नया ज्ञान दिया. बच्चे में आप शुरू से मिलजुल कर रहने और दूसरों के लिए परवाह करने की आदत डालें तो बड़े होने पर बच्चे का व्यक्तित्व संतुलित और उदात्त होगा. अकसर कहा जाता है कि अकेला बच्चा अकेलेपन का शिकार हो सकता है और आगे चल कर वह असामाजिक प्रवृत्ति का इंसान बनता है, पर यह भी जरूरी नहीं. ‘किंग औफ रौक ऐंड रौल’ कहे जाने वाले एल्विस प्रेश्ले को ही लीजिए. वे अपने असंख्य प्रशंसकों एवं दोस्तों के बीच काफी लोकप्रिय रहे. न सिर्फ गाने की वजह से वरन उदात्त और मिलनसार स्वभाव की वजह से भी. वे अपने दोस्तों की बहुत मदद करते थे और उन्हें हर तरह से सपोर्ट देते थे.

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रखें कुछ बातों का खयाल

  1. बच्चे से दोस्ताना व्यवहार करें. घर में उसे अकेला महसूस न होने दें.
  2. जब भी वक्त मिले, बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं. उसे अच्छी किताबें पढ़ने को दें.
  3. बच्चे को थोड़ा स्पेस भी दें. उस की जिंदगी में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप न करें.
  4. जब बच्चा भाईबहन न होने की शिकायत करे तो उसे समझाएं कि चचेरेममेरे भाई बहन भी उतने ही करीबी हो सकते हैं. उसे रिश्तेदारों के बच्चों से मिलाने ले जाएं. आसपास के बच्चों से दोस्ती करने को प्रेरित करें.
  5. बच्चे में स्कूल में दोस्तों और घर में रिश्तेदारों के बच्चों के साथ मिल कर रहने, अपनी चीजें शेयर करने और अच्छा बरताव करने की आदत डालें.
  6. बच्चे पर जरूरत से ज्यादा प्रैशर न डालें. अकेला बच्चा है तो आप उसे हर क्षेत्र में परफैक्ट देखना चाहेंगे. उस के जरीए अपना सपना पूरा करना चाहेंगे. पर ध्यान रखें, इस चक्कर में उस पर अनावश्यक दबाव न बनाएं. उसे अपना बचपन जीने दें.
  7. अपने बच्चे की केयर करने और उस की खुशियों की परवाह करने के साथ उसे अनुशासन में रहना भी सिखाएं. उस की हर जायज व नाजायज मांग पूरी न करें. उस की इच्छा का खयाल रखें. पर वह गलत बात की जिद करे तो मना करें.
  8. अपने बच्चे में अच्छे मानवीय गुणों, नैतिक मूल्यों और संस्कारों की नींव डालने का प्रयास करें.
  9. किसी भी चीज का सकारात्मक पक्ष देखने की आदत भी डालें.
  10. बच्चा आप के लिए अनमोल है पर उसे यह एहसास न दिलाएं कि वह दूसरों से बढ़ कर  है या उस की खुशी के लिए आप किसी भी हद तक जा सकते हैं. बच्चे को सामान्य जिंदगी जीने दें. उसे घमंडी या बदतमीज न बनाएं. कभीकभी उसे गलत काम करने पर डांटें और सजा भी दें.
  11. बच्चे में सदैव मखमली बिस्तर पर रहने की आदत न डालें. उस में अपना काम स्वयं करने की आदत बचपन से डालें. यही नहीं घरेलू कामों में भी उसे अपनी मदद के लिए बुलाएं. इस से जहां उसे काम में सहयोग देने की आदत पड़ेगी, वहीं आप के साथ अधिक वक्त बिताने का मौका भी मिलेगा.

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जानें Bigg Boss 15 फेम विधि पांड्या के फिटनेस सीक्रेट्स

टीवी सीरियल तुम ऐसे ही रहना बालिका वधू, एक दूजे के वास्ते, उड़ान, लाल इश्क, क्राइम पेट्रोल, बिग बॉस 15 में नजर आ चुकी एक्ट्रेस विधि पांड्या अब सोनी टीवी के सीरियल ‘मोसे छल किए जाए’ में एक लेखिका सौम्या का किरदार निभाती नजर आ रही हैं. जो अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए घिसे-पिटे रिवाजों को तोड़ती हुई नजर आएंगी.

आपको बता दे विधि ने टीवी सीरियल तुम ऐसे ही रहना से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी. हालांकि, विधि को सफलता सीरियल उड़ान में चकोर की बहन के किरदार से मिली. उन्होंने सीरियल में निगेटिव किरदार निभाया था. मुंबई में जन्मी विधि सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अक्सर अपनी फ़ैशनेबल फोटोज शेयर करती रहती है.

शो के प्रमोशन पर दिल्ली के ललित होटल आई विधि पांड्या ने शो के अलावा अपनी फिटनेस के बारे में कुछ सीक्रेट्स शेयर किए.

एक्ट्रेस विधि पांड्या के फिटनेस सीक्रेट्स

सुबह की शुरुआत

सुबह उठते ही मैं एप्पल इन सीडर विनेगर वार्म वाटर के साथ लेती हूं. नाश्ते में मूसली या पोहा लेती हूं.

डाइट

मैं कोई डाइट फॉर्मेट में बिलीव नही करती  मेरी कुछ बेसिक चीजे है सब कुछ खाओ लेकिन कम कॉन्टिटी में खाओ. रात को सोने से 2-3 घंटे पहले  अपना डिनर फिनिश कर लो ताकि डाइजेशन बेटर हो. मैं जंक फूड नही खाती, घर का खाना खाती हूं और खूब सारा पानी पीती हूं.

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लंच

लंच के समय मैं रोज मक्के की रोटी के साथ डिफरेंट टाइप की वेजिटेबल और दाल खाती हूं.

हाइड्रेशन

मैंअपनी बॉडी को हाइड्रेट करने के लिए खूब सारा पानी पीती हूं. जिसमें लाइम वाटर, कोकोनेट वाटर, और टर्मनिक वाटर रोज़ लेती हूं.

एक्सरसाइज

फिट रहने के लिए एक टाइम पर मैं योगा करती थी लेकिन अब मैं एक्सरसाइज करती हूं मेरी बॉडी एक्सरसाइज के लिए कंफरटेबल है. मुझे रनिंग करना पसंद है. मैं 5 से 6 किलोमीटर रन करती हूं. रोज  एक घंटा जिम करती हूं जिसमें20 मिनट कार्डियो, 20 मिनट वेट् ट्रेनिंग और 20 मिनट दूसरी एक्सरसाइज करती हूं.

डिनर

डिनर मैं लाइट ही लेती हूं जिसमे पनीर सैलेड लेती हूं या मूसली, सूप लेती हूं जिससे रात में डाइजेशन सही रहे.

चीट डे

चीट डे में मैं कभी- कभी पिज़्जा, ब्राउनी और चॉकलेट खा लेती हूं क्योंकि ये मुझे बहुत पसंद है.

अगर आप भी रहना चाहती है फिट तो एक्ट्रेस विधि पांड्या के फिटनेस टिप्स को जरूर फॉलो करें. ….

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