बच्चे को बचाएं Allergy से

बच्चों में विभिन्न प्रकार की ऐलर्जी होने की प्रवृत्ति होती है और ऐलर्जी उत्पन्न करने वाले कारण कई होते हैं. जैसे- धूल के कण, पालतू जानवर की रूसी और कुछ भोज्य पदार्थ. कुछ बच्चों को कौस्मैटिक्स मिलाए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधनों, कपड़े धोने वाले साबुन, घर में इस्तेमाल होने वाले क्लीनर्स से भी ऐलर्जी हो जाती है. ऐलर्जी अकसर जींस के कारण भी पनपती है. लेकिन आप अगर इस के उपचार का पहले से पता लगा लें तो इस की रोकथाम कर सकती हैं.

ऐलर्जी के लक्षण

लगातार छींकें आना, नाक बहना, नाक में खुजली होना, नाक का बंद होना, कफ वाली खांसी, सांस लेने में परेशानी और आंखों में होने वाली कंजंक्टिवाइटिस. अगर बच्चे की सांस फूलती है या सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगे तो वह श्वास रोग का शिकार हो सकता है.

ऐलर्जी का इलाज

यदि बच्चे में 1 हफ्ते से अधिक समय तक ये लक्षण नजर आएं अथवा साल में किसी एक खास समय में लक्षण दिखाई दें तो डाक्टर की सलाह लें. डाक्टर आप से इन लक्षणों के बारे में कुछ प्रश्न पूछेगा और उन के जवाब पर बच्चे के शारीरिक परीक्षण के आधार पर उसे दवाएं देगा. अगर जरूरत पड़े तो ऐलर्जी के विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श व दवा लेने के लिए कहेगा या रेफर करेगा.

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ऐलर्जी की तकलीफ का वास्तव में कोई इलाज नहीं है. लेकिन इस के लक्षण को कम कर के आराम मिल सकता है. मातापिता को अपने बच्चों को ऐलर्जी से मुकाबला करने के लिए शिक्षित करना होगा और उन के शिक्षकों, परिवार के सदस्यों, भाईबहन, दोस्तों आदि को इन के लक्षणों से अवगत करा कर निबटने की अनिवार्य जानकारी देनी होगी.

ऐलर्जी से बचाव

अपने बच्चों के कमरे से पालतू जानवर को दूर रखें और ऐसे कौस्मैटिक्स वगैरह को भी दूर रखें, जिन से ऐलर्जी की संभावना हो. कालीन को हटाएं जिस से मिट्टी न जमा हो. ज्यादा भारी परदे न टांगें जिन में धूल जमा हो. तकिया के सिरों को ठीक से सिल कर रखें. जब पराग का मौसम हो तो अपने कमरे की खिड़कियां बंद रखें. बाथरूम को साफ और सूखा रखें और उन्हें ऐसे खाद्यपदार्थ न दें जिन से उन्हें ऐलर्जी होती हो.

-डा. अरविंद कुमार

 एचओडी, पीडिएट्रिक्स विभाग, फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग 

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पैठणी साड़ी के नए अंदाज

2 हजार साल पुरानी महाराष्ट्र की पैठणी साड़ी को ‘साडि़यों की रानी’ कहा जाता है. हर दुलहन के पास ऐसी साड़ी उस के वार्डरोब में अवश्य देखने को मिलती है. यह साड़ी हर महिला को किसी भी रूप में पसंद है. बदलते समय के साथ इस के रंग, पैटर्न और पहनावे में अंतर आया पर आज भी यह साड़ी अपनी उस मर्यादा और शान को समेटे हुए है जो सालों पहले हुआ करती थी.

दरअसल, पैठणी साड़ी की एक वैराइटी है जो औरंगाबाद के एक शहर पैठन से उत्पन्न हुई है. यह हाथ से बुनी हुई ‘फाइन सिल्क’ है, जो भारत की सब से उत्तम प्रकार की साड़ी मानी जाती है. इस के किनारे और पल्लू अपनी खास डिजाइन के लिए प्रसिद्व हैं. चौकोर और तिरछे आकार वाले पल्लू में तोतामैना, कमल, हंस, नारियल, मोर आदि खास होते हैं.

दूसरी साड़ियों से अलग

ये साडि़यां हर अवसर पर पहनने वाली को खास अनुभव कराती हैं. पहले ये साडि़यां असली सोने और चांदी के तार से बनाई जाती थीं, जो काफी हैवी होने के साथ साथ महंगी भी होती थीं और बनाने में 6 महीने से ले कर साल भर तक का समय लगता था. पेशवाओं में ऐसी साडि़यों का खास महत्त्व हुआ करता था. उस समय की साडि़यां असली सोने और चांदी के तार से बनाई जाती थीं. 1 किलोग्राम सोने में एक तोला तांबे के तार मिला कर फिर बुनी जाती थी. ‘नार्ली’ और ‘पांखी’ पल्लू उस समय खास प्रचलित थे.

समय के साथसाथ महिलाओं का टेस्ट भी बदला और आज ये साडि़यां सूती से ले कर सिल्क सभी तरह की बाजार में उपलब्ध हैं. ये साडि़यां 200-250 ग्राम जरी, 700 ग्राम सिल्क के साथ बनाई जाती हैं जो वजन में 800 से 900 ग्राम तक होती हैं. अधिक हैवी नहीं होती. ये साडि़यां कुछ इस तरह से बुनी जाती हैं कि इन का बहुमूर्तिदर्शी रूप दिखे. ये दूसरी साडि़यों से अलग पहचान रखती हैं.

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बढ़ रही है मांग

इस बारे में डिजाइनर श्रुति संचेती कहती हैं, ‘‘समय के साथ इन साडि़यों ने भी अपना रूप बदला. इन की बुनाई काफी कठिन होती है. अलगअलग रंगों के धागों को मिला कर इन्हें बुना जाता है, जो थ्री डाइमैंशन लुक देती हैं. आजकल की महिलाएं हैवी साड़ी नहीं पहनना चाहतीं और महंगी होने की वजह से भी खरीदना नहीं चाहतीं. ऐसे में मैं ने उसी रूप में जरी की जगह ‘टेस्टेड गोल्ड’ का प्रयोग कर पैठणी डिजाइन बनाई. यह साड़ी सस्ती होने के साथसाथ ग्लैमर और ऐलिगैंसी को भी दिखाती है. ऐसी डिजाइन की साडि़यों की मांग आजकल खूब है.’’

श्रुति कहती हैं, ‘‘ये डिजाइनें सूती और सिल्क दोनों में समान रूप से बनाई जाती हैं. साथ ही, पहले जो बौर्डर 6-7 इंच चौड़ा होता था अब उसे कम कर 3 इंच कर दिया गया है. आज के ‘कंटैंपरेरी मोटिफ्स’ जो अधिक डैलिकेट होते हैं, उन का प्रयोग किया जाता है ताकि साड़ी हलकी रहे. इस के अलावा ये साडि़यां एक बार खरीद लेने पर हर अवसर पर अलगअलग तरीके से ‘मिक्स ऐंड मैच’ कर पहनी जा सकती

है. जिस में जैकेट, अलग चोली, ब्लाउज आदि सभी उपयोगी होते हैं. साथ ही, साड़ी को नया रूप दिया जा सकता है. ये साडि़यां अधिकतर डार्क कलर की होती हैं, जिन में नीला, लाल, औरेंज, गुलाबी मोरपंखी, पीला आदि रंग काफी पौपुलर हैं.’’

फ्यूजन है उपयोगी

 

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साडि़यां हमेशा महिलाओं के व्यक्तित्व को उभारती हैं. कितनी भी मौडर्निटी आ जाए, पर साडि़यां हमारे देश में हमेशा पहनी जाएंगी. डिजाइनर गौरांग कहते हैं, ‘‘मैं पैठणी की प्राचीन कला को नए रूप में पेश करने की कोशिश करता हूं या फिर कंटैंपरेरी डिजाइन बनाता हूं ताकि सभी आयुवर्ग की महिलाओं को पसंद आएं. डिजाइन में नयापन लाने के लिए टैक्सचर, कलर और क्रौस बौर्डर का इन्फ्लुएंस काफी महत्त्व रखता है. पैठणी के बुनकर पूरे महाराष्ट्र में हैं. मेरे साथ करीब 100 बुनकर काम करते हैं. वे मेरी ही बताई डिजाइनों को बुनते हैं.’’

‘‘हमेशा नई डिजाइन किसी को भी आकर्षित करती है, इसलिए मैं ने पैठणी में बंगाल की जामदानी का मिश्रण कर नई तकनीक से महिलाओं का परिचय करवाया है. इसलिए मुझे डिजाइन को एक्स्प्लोर करने में आसानी होती है. कोई भी डिजाइन अलग और सुंदर होने पर आप को आकर्षित कर सकती है. मैं अलगअलग टेक्स्चर, रंग और मोटिफ्स से हमेशा नया लुक देने की कोशिश करता हूं. विदेश में रहने वाले भारतीय भी इस की कद्र जानते हैं और मंगवा कर पहनते हैं. हां, विदेशी इसे नहीं पहचान पाते, पर अब धीरेधीरे ‘इंडियन टैक्सटाइल’ दुनियाभर में पहुंच रहा है.’’

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पैठणी साडि़यां महिलाओं के बीच और अधिक पौपुलर हों, इसलिए फैशन शो के साथसाथ कई प्रदर्शनियां भी समयसमय पर लगाई जाती हैं. ‘न्यूवैब पैठणी’ साडि़यों का फैस्टिवल हर साल मुंबई या आसपास के क्षेत्र में लगाया जाता है. इस फैस्टिवल के आयोजक सनिंदा भिडे कहती हैं, ‘‘हर साल महिला खरीदारों की संख्या बढ़ रही है. इसलिए साडि़यों के बनाने वाले कारीगर भी अच्छा कमा रहे हैं.’’

ध्यान रहे

साड़ी के पहनने के बाद खुली हवा में सुखा कर ही अलमारी में रखें.

अगर साड़ी पर कुछ गिर जाए तो तुरंत साफ कर सुखाएं.

सीलन और नमीयुक्त हवा से बचाएं.

मलमल के कपड़े में पैक कर रखें.

साल में 1 बार हलकी धूप में सुखाएं.

जरी को हरे रंग के मलमल के कपड़े से ढक कर रखें. जरी काली नहीं पड़ेगी.

जिए तो जिए कैसे संग आपके

स्नेहा मेरी बचपन की सहेली और हमराज है. आज वह पूना में है और मैं दिल्ली में. विवाह से पहले हम एक दिन भी एकदूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे. अब एकदूसरे को देखे 16 साल बीत गए हैं. उस से मिलने की इच्छा हो रही थी. गरमियों की छुट्टियों में मुंबई गई तो स्वयं को रोक न पाई. अगले दिन पूना के लिए रवाना हो गई. साथ में 14 वर्षीय बेटा और पति भी थे. स्टेशन पर वह भी सपरिवार आई हुई थी. हम आपस में ऐसे मिले कि एकदूसरे को छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था. हंसतेबतियाते हम उस के घर पहुंचे. खाना खाया तो पता चला कि हमारी फिल्म के टिकट आए हुए हैं. स्नेहा और मैं ने तो साथ जाने को मना कर दिया, पति और बच्चों को भेज दिया. हम दोनों एकांत में यादों की पोटली खोल कर बैठ गईं. सोचा, बच्चों व पति के वापस आने पर ही घूमने जाएंगे. लेकिन स्नेहा ने बताया कि वहीं से दूसरी फिल्म देखने जाने का प्रोग्राम है और शाम को डिनर के बाद फिर नाइट शो देखा जाएगा. यह सुनते ही मैं बिफर उठी, ‘‘तेरा दिमाग खराब है क्या? एक दिन में 3 शो देखने की क्या तुक है? मेरे पति क्या सोचेंगे? घर नहीं बैठाना था तो ऐसे ही कहती मैं आती ही नहीं.’’ मैं बोलती रही और वह बुत बनी सुनती रही. एकाएक उस की आंखों में आंसू देख कर मैं चुप हो गई.

अचानक वह मुझ से लिपट कर फूटफूट कर रोने लगी. लग रहा था जैसे बरसों का बांध टूट कर बह रहा हो. थोड़ा संभलने पर उस ने जो बताया, उसे सुन कर मैं हैरान रह गई.

शक का कीड़ा

उस ने बताया कि उस के पति उसे पुरुषों से बात करते देख नहीं सकते थे, उस पर शक करते थे. यहां तक कि जब विवाह के बाद चचेरा भाई मिलने आया और उस ने स्नेहा की कलाई पकड़ ली तो उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया. उसे अकेले मायके जाने की भी परमिशन नहीं थी. जब जाते, साथ जाते. यदि रुकना भी होता तो होटल में रुकते ताकि किसी को उन के शहर में होने की खबर न हो. इस बीच उन की 2 बेटियां भी हो गईं. वे उसे बेटियों के सामने भी जलील करते. कोठी तो शानदार थी, लेकिन छत या बालकनी का दरवाजा तभी खुलता जब वे खुद खोलते. यदि कभी दरवाजा खुले और रिकशेवाला भी खड़ा हो तो कहते कि तुम्हारे लिए खड़ा होगा. यह तो उस की परमानेंट जगह है. आज तुम्हारे पति और बेटे को भी इसीलिए घर में नहीं रहने दिया कि कहीं वे मेरे साथ बात न करें.

यह सुन कर मैं तिलमिला उठी. उसे कोसने लगी कि उस ने बगावत क्यों नहीं की? जानवरों की तरह जुल्म क्यों सहती रही? उस का जवाब था कि वह जब भी अपनी सफाई में कुछ कहती, झगड़ा हो जाता. नौबत मारपीट तक पहुंच जाती. मैं ने पूछा कि आखिर कब तक यह चलता रहेगा तो उस का जवाब था, ‘‘जब 16 साल बीत गए तो बाकी भी काट लूंगी. 2 बेटियों की मां हूं. अकेले संघर्ष नहीं कर सकती. यहीं ठीक हूं. शायद कभी दिन फिर जाएं.’’ उस का जवाब सुन कर समझ नहीं आया कि क्या करूं. उस की सहनशीलता के आगे नतमस्तक हो जाऊं या गूंगी जबान खुलवाने के लिए उसे 2 झापड़ रसीद कर दूं.

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कैसी त्रासद स्थिति है यह. जब दांपत्य जीवन में अविश्वास हो, पति चरित्र पर संदेह करे तो पत्नी की जिंदगी नारकीय बन जाती है. कभीकभी ऐसा भी होता है कि पतिपत्नी तो एकदूजे पर जान छिड़कते हों, लेकिन सासससुर (दोनों के मातापिता) उन का जीना दूभर कर देते हों जैसा कि तरुणी और तेजस के साथ हुआ. दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई, जो प्रेम में तबदील हो गई. दोनों ने विवाह करने का निश्चय कर लिया, लेकिन परिस्थितियां प्रतिकूल थीं. तेजस के पिता शाम होते ही शराब की बोतल ले कर बैठ जाते थे. नशे में चूर अनापशनाप भी बकते थे. जब उन्हें तेजस के प्रेम का पता चला तो जायदाद से बेदखल करने की धमकी दे दी. उधर तरुणी की मां कर्कशा थीं, गालियों के बिना बात नहीं करती थीं. जब उन्हें तरुणी के प्रेम का पता चला तो उन्होंने तेजस के पूरे खानदान पर गालियों की बौछार कर दी. बेटी को भी कुलच्छिनी, वेश्या जैसी गालियां दीं.

स्पष्ट है कि प्रेम कितना भी अटूट हो, ऐसी स्थिति में विचलित होना स्वाभाविक है. किसी तरह मन को पक्का कर के दोनों ने कोर्टमैरिज कर ली. सोचा, अलग हो कर जुदाई का दुख भी तो सहना पड़ेगा. अत: मिल कर दुख बांटें तो बेहतर है. मन को पक्का कर के तेजस तरुणी को घर ले गया. तरुणी को देखते ही उस के पिता चिल्लाने लगे, ‘‘ले आया अपनी माशूका को. अब क्या लेने आया है? दफा हो यहां से.’’

यह था तरुणी का अपने ससुर के साथ पहला साक्षात्कार. उधर तेजस भी अपनी सासूमां की गालियां खाने के लिए तैयार था. जब वह अपनी ससुराल पहुंचा तो उस की मां उसे देखते ही चिल्लाई, ‘‘कुलच्छिनी कहीं की. ले आई खसम को. मर्द के बिना रह नहीं सकती थी?’’ पतिपत्नी एकदूसरे पर कितनी भी जान छिड़कते हों, लेकिन ऐसे हालात में बेडरूम में प्रेमालाप की जगह सन्नाटा होता है, जहां दोनों अपने मातापिता के कारण एकदूसरे को सांत्वना भी नहीं दे पाते या यों कहें कि हालात पर शोक प्रकट करने के लिए शब्द जुटाने भी मुश्किल हो जाते हैं.

दांपत्य जीवन और विपरीत हालात

विवाह 2 अपरिचित प्राणियों का संयोगवश आपस में मिलन है, जिस में सारी जिंदगी साथ निभाने की अपेक्षा की जाती है. विवाह बेशक एक इंद्रधनुषी सपने के समान रंगीन लगे, लेकिन जब हालात विपरीत हों तो सपने बिखरने में देर नहीं लगती. जैसा कि तरुणी, तेजस और स्नेहा के साथ हुआ. इन की त्रासद स्थिति कोई एक दिन की नहीं है, जो कट जाएगी. ये कोई साधारण जख्म नहीं हैं, जो समय के साथ भर जाएंगे. ये तो कैंसर के फोड़े हैं जो मरते दम तक सालते रहेंगे. लेकिन मरना भी आसान नहीं होता और न ही यह कोई सार्थक हल है. ऐसे हालात में एक ही रास्ता बचता है कि या तो चुपचाप सब कुछ सह लिया जाए या फिर तलाक ले कर एकाकी जिंदगी की नई शुरुआत की जाए.

एकाकी जिंदगी : समस्याएं ही समस्याएं

तलाक लेना इतना आसान नहीं होता. इस के लिए कोर्टकचहरियों के धक्के खाने पड़ते हैं, पैसा पानी की तरह बह जाता है, सालों गुजर जाते हैं. किसी तरह तलाक हो भी जाए तो उस के बाद की जिंदगी भी कम दुष्कर नहीं होती. तलाक के साथ ही जहां पुरुष पर तलाकशुदा का लेबल लग जाता है, वहीं स्त्री को संदेह की नजर से देखा जाता है. यदि दोबारा विवाह करना हो तो पहले तलाक के बारे में सफाई देनी पड़ती है, खासी जलालत झेलनी पड़ती है. पुनर्विवाह के बाद भी समझौते करने पड़ते हैं. यदि बच्चे हों तो उन की समस्याएं और भी बढ़ जाती हैं. स्त्री के लिए स्थिति और भी दुखद होती है. वह तो कटीपतंग के समान होती है, जिसे लूटने के लिए कई हाथ आगे बढ़ते हैं, जिन का उद्देश्य कुछ पल मजे लेना होता है.

तलाकशुदा औरत को मायके में सामंजस्य न होने पर और रास्ते ढूंढ़ने पड़ते हैं. यदि पढ़ीलिखी है तो नौकरी कर के अपना गुजारा कर सकती है, लेकिन सिर छिपाने के लिए उसे सुरक्षित जगह की जरूरत तो पड़ती ही है. उसे पेइंगगेस्ट के तौर पर, विमन होस्टल या किराए पर जगह ले कर रहना पड़ता है. किराए का मकान ढूंढ़ने में उसे परेशानी उठानी पड़ सकती है. आतेजाते लोगों की कुत्सित निगाहों को झेलना पड़ता है. उस पर छींटाकशी होती है, चरित्र पर लांछन लगाए जाते हैं, उसे शक की नजरों से देखा जाता है. यदि कभी स्वास्थ्य खराब हो तो अकेले जूझना पड़ता है.

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तलाकशुदा अभिभावकों के बच्चे भी कम परेशान नहीं करते. वे मांबाप के आगे हठधर्मिता से पेश आते हैं, ब्लैकमेल करते हैं. कानूनी तौर पर वे बेशक अपने माता या पिता के साथ रहते हों लेकिन छोड़े गए मातापिता के प्रति उन के मन में सौफ्ट कौर्नर अवश्य होता है, जो कभी भी रंग दिखा सकता है. इस का कारण यह है कि बच्चों को भी कम ताने नहीं सुनने पड़ते. आर्थिक अभाव बेशक उन की समस्या न हो लेकिन मातापिता का अभाव कहीं अधिक गंभीर होता है. तलाकशुदा स्त्री हो या पुरुष दोनों को ही अपने बच्चों के तानों, क्रोध और अवहेलना का शिकार होना पड़ता है.

तलाक कोई हल नहीं

स्पष्ट है कि दांपत्य संबंधों में आई दरार का हल तलाक कदापि नहीं हो सकता. वैवाहिक जीवन में समस्याएं जहां एक तरफ कुआं हैं, वहीं तलाक खाई के समान है. तलाक किसी भी परिस्थिति में कारगर नहीं हो सकता. अगर तलाक के बाद के कुछ महीने सुख से निकल भी जाएं तो भी आजीवन कष्ट उठाने पड़ते हैं. जीवन भर का सुखदुख आप के हाथ में है. अत: दांपत्य जीवन की समस्याओं का इलाज ढूंढि़ए. यदि परिस्थितियां लाइलाज हों तो भी कष्ट सहते रहने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि कष्टों का अंत करना आप के हाथ में नहीं है, लेकिन कष्टों को स्वीकार कर के जीना आप के हाथ में है. कुछ समस्याएं अनदेखी भी की जा सकती हैं. उदाहरण के लिए तरुणी और तेजस की समस्या, जो अभिभावकों की वजह से है, इसे अनदेखा करने में ही भलाई थी. यदि दंपती में आपस में प्रेम हो तो अभिभावकों को छोड़ कर अकेले रहा जा सकता है, बशर्ते मेहनतमशक्कत कर के दालरोटी कमाने और घर बनाने की क्षमता हो. यदि छोड़ना किसी कारण से संभव न हो तो भी अनदेखा करना ठीक है. आखिर कोई कब तक बोलता रहेगा. यदि बोलता भी रहे तो भी एक कान से सुन कर दूसरे से निकालने मे ही भलाई है.

यदि पति या पत्नी का किसी परस्त्री या परपुरुष से संबंध भी हो जाए तो भी लड़नेझगड़ने या अलग होने से समस्या हल नहीं होगी. आमतौर पर ये संबंध आएगए होते हैं, लेकिन यदि प्रेम संबंध प्रगाढ़ हो, जिसे तोड़ पाना असंभव हो तो भी अनदेखा करने में ही भलाई है. फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र की पत्नी प्रकाश ने हेमामालिनी को बेशक घर में स्वीकार नहीं किया, लेकिन होहल्ला नहीं मचाया, न ही तलाक की मांग की. आज उन के बच्चे भी तनावमुक्त हैं. धर्मेंद्र और हेमामालिनी का विवाह वस्तुत: उदाहरण है, जहां समस्याएं न होने का पूरा श्रेय धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश को जाता है, जिस ने सच को स्वीकारा. बगावत का रास्ता चुने बगैर निभाया. दूसरी तरफ हेमा की सहनशीलता और त्याग भी कम नहीं है, जिस ने प्रेम की खातिर एकाकी जीवन को आदर से जीया. धर्मेंद्र की एडजस्टमेंट की कुशलता काबिलेतारीफ है ही, जिस ने दोनों हाथों में लड्डू ले कर मजे किए. आजकल टीवी पर दिखाए जा रहे कई धारावाहिक भी यही दर्शाते हैं.

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साउथ इंडियन स्टाइल में दुल्हन बनीं Mouni Roy, शादी की फोटोज हुई वायरल

कोरोना में कई बौलीवुड और टीवी सितारों ने शादी की. वहीं अब इस लिस्ट में टीवी की नागिन यानी एक्ट्रेस मौनी रौय  (Mouni Roy) का नाम भी शामिल हो गया है. 27 जनवरी को गोवा में मौनी रॉय अपनी लौंग टाइम बौयफ्रेंड सूरज नांबियार संग शादी के बंधन में बंध गई हैं. आइए आपको दिखाते हैं मौनी रॉय की वेडिंग फोटोज (Mouni Roy Wedding Photos) की झलक…

मौनी रॉय की हुई शादी

टीवी की पौपुलर एक्ट्रेसेस में से एक मौनी रॉय की शादी का फैंस को बेसब्री से इंतजार था. इसी के चलते शादी की लेटेस्ट फोटोज सोशलमीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. वाइट औऱ रेड कलर की साड़ी में ब्राइडल ज्वैलरी पहनें मौनी बेहद खूबसूरत लग रही थीं. वहीं उन्हें देखते ही पति सूरज नांबियार हैरान रह गए.

 

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सेलेब्स की दिखी झलक

मौनी रॉय की शादी कोरोना के कारण जहां कम लोग नजर आए तो वहीं सेलेब्स की भी झलक देखने को मिली. दरअसल, मौनी रॉय की शादी में उनके करीब दोस्त और रिश्तेदार नजर आए, जिनमें मंदिरा बेदी (Mandira Bedi), एक्टर अर्जुन बिजलानी (Arjun Bijlani) और Meet Bros नजर आए.

कुछ ऐसी थी हल्दी-मेहंदी सेरेमनी

 

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मौनी रॉय की हल्दी सेरेमनी की बात करें तो खास दोस्त मंदिरा बेदी और अर्जुन बिजलानी फंक्शन में मस्ती करते नजर आए, जिसका अंदाजा वायरल फोटोज और वीडियो से लगाया जा सकता है. इसके अलावा मेहंदी सेरेमनी की बात करें तो मौनी रॉय अपनी शादी में जमकर ठुमके लगाती नजर आईं. वहीं इसमें जहां उनका साथ दोस्त देते नजर आए तो वहीं पति सूरज नांबियार भी उनके साथ ताल मिलाते नजर आए.

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बता दें, मौनी रॉय  (Mouni Roy) और उनके पति सूरज नांबियार की मुलाक 2019 में हुई थी, जिसके बाद दोनों लौकडाउन में दुबई में साथ क्वालिटी टाइम बिताते नजर आए थे.

GHKKPM: सई ने दिखाया बेबी बंप, क्या है प्रैग्नेंसी की सच्चाई?

सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी में इन दिनों सई (Ayesha Singh) और विराट (Neil Bhatt) के तलाक का सीन दिखाया जा रहा है. हालांकि श्रुति और उसके बच्चे के बारे में जानने के बाद परिवार सई का साथ देता नजर आ रहा है. इसी बीच सीरियल के सेट से कुछ फोटोज वायरल हो रही हैं, जिसमें सई अपना बेबी बंप फ्लौंट करती नजर आ रही हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

प्रैग्नेंट हुई सई?

 

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दरअसल, हाल ही में गुम है किसी के प्यार में की सई यानी आयशा सिंह (Ayesha Singh Instagram) ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम पेज पर कुछ फोटोज फैंस के साथ शेयर की हैं, जिसमें वह बेबी बंप फ्लौंट करती नजर आ रही हैं. वहीं फैंस जहां उनकी फोटोज वह जमकर कमेंट कर रहे हैं तो वहीं सीरियल के सितारे अपकमिंग ट्विस्ट का जिक्र करते नजर आ रहे हैं. वहीं कुछ फैंस का कहना है कि सई, विराट के बच्चे की मां बनने वाली है. हालांकि यह ट्विस्ट नहीं बल्कि सई का सपना साबित होते हुए नजर आने वाला है.

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पाखी देगी सई को सलाह

 

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सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक की बात करें तो विराट के नौकरी पर खतरे की बात सुनते ही वह चौह्वाण हाउस आएगी और विराट को तलाक के पेपर्स देगी. हालांकि भवानी और अश्विनी सई को समझाने की कोशिश करेंगे. वहीं पाखी इस बात का फायदा उठाकर सई को दूसरी शादी करने की सलाह देगी, जिसके चलते सम्राट और पाखी का झगड़ा होता नजर आएगा. इसी बीच सई भी पाखी पर बरसती नजर आएगी.

विराट करेगा श्रुति से दिल की बात

 

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सई के तलाक लेने की खबर के बाद विराट टूट जाएगा. वहीं श्रुति उसे सपोर्ट करती नजर आएगी और उसका हौंसला बढ़ाती दिखेगी, जिसके चलते विराट, सई के लिए अपने प्यार को श्रुति के सामने बयां करेगा.

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किशमिश ही नहीं, इसका पानी भी है सेहत के लिए फायदेमंद

लेखिका- दीप्ति गुप्ता

सूखे मेवों में शामिल किशमिश न केवल अपने स्वाद बल्कि गुणों के लिए भी खूब जानी जाती है. किशमिश से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में हर कोई जानता है. यही वजह है कि, अक्सर लोग वजन कम करने और शरीर में खून बढ़ाने के लिए इसका सेवन करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं केवल किशमिश से ही नहीं, बल्कि इसका पानी पीने से भी हेल्द को बहुत फायदा होता है. हर रोज सुबह खाली पेट किशमिश का पानी पीने से एक दर्जन बीमारियों का इलाज हो सकता है. यह न केवल आपको एसिडिटी से बचाता है, बल्कि एंटी एजिंग का बेहतरीन घरेलू उपाय भी है. तो चलिए, जानते हैं किशमिश का पानी पीने के फायदों के बारे में.

किशमिश का पानी पीने से मिलेंगे ये  फायदे

खून की कमी दूर करे- 

कई लोगों के शरीर में खून की कमी होती हैं, खासतौर से यह समस्या महिलाओं से जुड़ी होती है. इसकी कमी को पूरा करने के लिए कई महिलाएं दवाओं का सहारा लेती हैं, लेकिन हर रोज सुबह अगर वे किशमिश का पानी पीना शुरू कर दें, तो ये उनके शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ा देगा. दरअसल, किशमिश के पानी में आयरन, कॉपर और बी-कॉम्प्लेक्स भरपूर मात्रा में होता है. ये खून की कमी को दूर करके रेड ब्लड सेल्स को हल्दी बनाता है.

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किडनी बनाए हेल्दी- 

शरीर के ठीक से काम करने के लिए किडनी का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है. ऐसे में इसे हेल्दी बनाने के लिए किशमिश का पानी बहुत फायदेमंद साबित होता है. किशमिश के पानी में पोटैशियम और मैग्रीशियम जैसे मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं. ये बॉडी से विषाक्त टॉक्सिन को निकालकर किडनी को हेल्दी बनाने का काम करते हैं.

कब्ज से बचाए- 

अगर आपको अक्सर ही कब्ज की समस्या रहती है, तो रोज सुबह उठकर सबसे पहले किशमिश का पानी पीना आपके लिए बहुत लाभदायक हो सकता है. दरअसल, जब आप किशमिश को पानी में भिगोते हैं, इसके बाद किशमिश पानी में फूलकर नेचुरल लेक्सेटिव का काम करती है. विशेषज्ञों की मानें, तो नियमित रूप से रोज सुबह इसका पानी पीने से पेट की अच्छी सफाई हो जाती है और लंबे समय तक कब्ज से भी छुटकारा मिलता है.

एसिडटी की समस्या करे दूर-

जिन लोगों को एसिडिटी रहती है, उनके लिए किशमिश का पानी बहुत अच्छा घरेलू उपाय है. किशमिश में मौजूद सॉल्यूबल फाइबर्स पेट की सफाई करके गैस और एसिडिटी से बहुत राहत दिलाते हैं.

आंखों की रोशनी तेज करे-

प्रतिदिन सुबह किशमिश का पानी पीने से आंखों की रोशनी बहुत तेज होती है. अगर आपकी नजर  कमजोर हैं, तो आपको ये घरेलू उपाय तो जरूर आजमाना चाहिए. दरअसल, इस पानी में विटामिन ए, बीटा कैरोटीन और आंखों के लिए फायदेमंद फाइटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं. इससे नजर की कमजोरी दूर करने में मदद मिलती है.

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सर्दी-जुकाम से बचाए- 

सर्दी-जुकाम होने पर आप किशमिश का पानी पी सकते हैं. इसके एंटी बैक्टीरियल गुण सर्दी-जुकाम के साथ बुखार से बचाने में भी बहुत मददगार हैं. इस पानी में पॉलीफेनिक फाइटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं, जो संक्रमण से भी आपका बचाव करते हैं.

ऐसे तैयार करें किशमिश का पानी-

किशमिश खाने से उम्र बढ़ती है, लेकिन इसका पानी पीने से आपको और ज्यादा लाभ मिलता है. किशमिश का पानी आप कैसे बना सकते हैं, जानिए यहां-

– सबसे पहले मीडियम आंच पर एक बर्तन में पानी गर्म करें.

– एक उबाल आने पर गैस बंद कर दें.

– अब इस पानी में 150 ग्राम किशमिश इस पानी में रातभर भिगोने के लिए छोड़ दें.

– अगले दिन सुबह पानी को छान लें और दोबारा हल्की आंच पर गर्म करें इसे खाली पेट पी जाएं. ध्यान रखें, किशमिश का पानी पीने के आधे घंटे तक नाश्ता न करें.

किशमिश एक बेहतर सुपरफूड है. भले ही किशमिश का पानी आपके स्वस्थ रहने के लिए अच्छा है, लेकिन यह किसी दवा का विकल्प नहीं है. यदि आपको ह्दय, रक्तचाप या शरीर के किसी अंग में समस्या है, तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें.

Winter Special: सर्दियों में स्किन को कैसे संभालें 

सर्दियों के मौसम में स्किन को अतिरिक्त केयर की जरूरत होती है. क्योंकि मौसम व तापमान में आए बदलाव के कारण हमारी स्किन बहुत अधिक ड्राई हो जाती है और ड्राई स्किन कई अन्य चुनौतियों जैसे फटे होंठ, स्किन की ऊपरी लेयर निकलना , स्किन का रूखापन जैसी समस्याओं को न्यौता दे सकती है. इसलिए ऐसे समय में स्किन को पोषण देने की खास आवश्यकता होती है, ताकि वह स्किन में मोइस्चर को लौक करके उसकी नमी को बनाए रख सके. डर्मटोलोजिस्ट वैशाली श्रद्धा के अनुसार तापमान में गिरावट के साथ हमारी स्किन अधिक शुकस हो जाती है और अगर इसे सही से , सही इंग्रीडिएंट्स से बने मॉइस्चराइजर से मॉइस्चराइज नहीं किया जाता तो यह परतदार स्किन का कारण बन सकती है. इसलिए सर्दियों में एक अच्छे स्किनकेयर रूटीन का पालन करते हुए नेचुरल इंग्रीडिएंट्स से युक्त उत्पादों का उपयोग करना फायदेमंद साबित होता है. तो जानते हैं सर्दियों में कैसे करें केयर.

1. मॉइस्चराइजर है जरूरी 

वैसे तो सभी जानते हैं कि स्किन को नमी प्रदान करने के लिए बारह महीने स्किन को मॉइस्चराइजर की जरूरत होती है, लेकिन इसकी खास तौर पर जरूरत तब महसूस होती है , जब तापमान में गिरावट देखने को मिलती है.  मॉइस्चराइजर से स्किन हाइड्रेट रहती है. वरना नमी के अभाव व रूखेपन की वजह से स्किन में इंफेक्शंस व ऑउटब्रेक्स की समस्या भी खड़ी हो जाती है. इसलिए स्किन को करें  मॉइस्चराइज .

 इंग्रीडिएंट्स इन गुड मॉइस्चराइजर

– हुमेक्टेंट्स , आपकी स्किन की टोप लेयर में जिसे एपिडर्मिस कहते हैं , हवा से और आपकी स्किन की गहरी परतों से पानी खींचते हैं. जिससे स्किन हाइड्रेट रहती है.  हुमेक्टेंट्स में शामिल हैं , ग्लिसरीन, ह्यलुरोनिक एसिड और प्रोपाइलिन ग्लाइकोल.

– एमोलिएंट्स जैसे शिया बटर, कोको बटर एपिडर्मिस में होने वाले क्रैक्स को हील करके स्किन में मोइस्चर को लौक करने में मदद करता है.

बेस्ट टाइम 

– नहाने के तुरंत बाद व रात को सोने से पहले मॉइस्चराइजर अप्लाई करने से स्किन को ज्यादा फायदा मिलता है.

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2. लिप बाम है जरूरी 

सर्दियों में लिप्स का ड्राई होना आम है. क्योंकि लिप्स में आयल ग्लैंड्स नहीं होते हैं , जिसके कारण  ठंड , हवा का सीधा व पहला असर लिप्स पर ही पड़ता है, जबकि लिप बाम आपके लिप्स और सर्द हवाओं के बीच एक प्रोटेक्टिव लेयर बनाने का काम करता है.  इसलिए ही लिप्स की खास केयर के लिए लिप बाम की खास जरूरत होती है.

इंग्रीडिएंट्स इन गुड लिप बाम 

– शिया और कोको बटर नेचुरल टाइप के फैट्स होने के कारण ये आपके लिप्स में मोइस्चर को होल्ड करने के साथ उन्हें फटने से बचाने का काम करते हैं.

– हनी को हुमेक्टैंट के रूप में जाना जाता है. जो मोइस्चर को अपनी ओर खींचने का काम करता है. साथ ही इस इंग्रीडिएंट से युक्त लिप बाम अपनी एक्सफोलिएशन प्रोपर्टीज के कारण लिप्स को एक्सफोलिएट करने के साथ उसे हाइड्रेट रखने का  काम करती है.

– कैस्टर आयल स्किन में आसानी से घुसकर उसे हाइड्रेट रखने का काम करता है. तभी तो लिप्स की ड्राईनेस को दूर करने के लिए  कैस्टर आयल युक्त लिप बाम लगाने की सलाह दी जाती है.  क्योंकि इसमें है जरूरी फैटी एसिड्स , जो एन्टिओक्सीडैंट्स में रिच होते हैं.

3. प्रोटेक्शन के लिए सनस्क्रीन 

सिर्फ गर्मियों में ही नहीं बल्कि सर्दियों में भी स्किन को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाव के लिए सनस्क्रीन की जरूरत होती है. क्योंकि सर्दियों में यूवीए किरणों के प्रभाव से स्किन पर डार्क स्पोट्स , टैनिंग व यहां तक कि झुर्रियां तक पड़ जाती है. इसलिए भूलकर भी सर्दियों में सनस्क्रीन से स्किन को प्रोटेक्ट करना न भूलें.

बेस्ट इन सनस्क्रीन 

मामा एअर्थ इंडियन सनस्क्रीन विद कैरेट सीड, टर्मेरिक एंड एसपीएफ

बता दें कि कैरेट सीड आयल स्किन में अंदर तक जाकर न सिर्फ सनप्रोटेक्शन देने का काम करता है बल्कि स्किन को मॉइस्चराइज भी करता है. वहीं हलदी में एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होने के कारण ये स्किन को हील करने के साथसाथ सभी तरह की स्किन के लिए परफेक्ट है. वहीं ऑरेंज आयल नोन ग्रीसी होने के साथ इसमें हैं एंटीइंफ्लेमेटरी प्रोपर्टीज , जो यूवीए और यूवीबी किरणों से प्रोटेक्ट करने का काम करता है.

न्यूट्रोजेना हाइड्रो बूस्ट सनस्क्रीन 

इसका हाइड्रो बूस्ट फार्मूला , जिसमें है ह्यलुरोनिक एसिड और ग्लिसरीन. जो स्किन को हाइड्रेट रखने के साथ उसकी यूवी किरणों से प्रोटेक्शन करने का भी काम करता है.

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4. बोडी लोशन 

सिर्फ फेस को ही नहीं बल्कि सर्दियों में पूरे शरीर को मोइस्चर प्रदान करने की जरूरत होती है. ऐसे में अकसर लोग फेस क्रीम व बोडी लोशन को एक ही समझ कर अप्लाई करने लगते हैं. लेकिन आपको बता दें कि बोडी लोशन क्रीम के मुकाबले में कम गाढ़ा होता है. इसमें प्यूरीफाई पानी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण ये काफी पतले होते हैं. ये शरीर पर आसानी से फैलने के साथसाथ उसके रूखेपन को दूर करने का काम करते हैं. हमेशा ऐसे बोडी लोशन का इस्तेमाल करना चाहिए , जो डेड स्किन को रिमूव करने के साथ पोर्स को ब्लोक न करे.

इंग्रीडिएंट्स इन गुड बोडी लोशन 

– जरूरी फैटी एसिड्स , जो स्किन को हैल्दी व ग्लोइंग बनाने का काम करते हैं. बता दें कि शरीर खुद से फैटी एसिड्स नहीं बनाता है बल्कि इसे डाइट व स्किन क्रीम्स के जरिए प्राप्त किया जाता है. ऐसे में जरूरी फैटी एसिड्स के लिए आपके बोडी लोशन में शिया बटर, ओलिव आयल , एवोकाडो , आलमंड आयल जैसे इंग्रीडिएंट्स का होना बेहद जरूरी है, ताकि वे स्किन में मोइस्चर को लौक कर सके.

– ग्लिसरीन, ग्ल्य्कोल्स और पोलियोल्स ये तीनों हुमेक्टेंट्स फैमिली के सदस्य होते हैं. ये तीनों स्किन में एक्स्ट्रा मोइस्चर को लौक करते हैं.

– ह्यलुरोनिक एसिड की त्वरित और प्रभावी हाइड्रेटेड क्रिया कोलेजन और इलास्टिन को नम और कार्यशील रखती है. जिससे स्किन सोफ्ट, स्मूद व यंग बनती है. इस तरह से आप सर्दियों में अपनी स्किन का खास खयाल रख सकते हैं.

हर औरत का अपना आत्मसम्मान है

औरतों के सदियों से शिक्षा दी जाती रही है कि उन्हें सहनशीलता अपनानी चाहिए और अगर कोई उन के विरुद्ध कुछ कहे तो वे उसे चुपचाप सुन लें. इस सहनशीलता की आड़ में औरतों पर अत्याचार किए जाते रहे हैं और सासससुर, पति ही नहीं, देवर, जेठजेठानी और दूर के रिश्तेदार हर औरत, खासतौर पर नई बहू के खिलाफ एक मोर्चा बना लेते और रातदिन न केवल औरत के कामकाज की आलोचना का अधिकार रहता है, उस के घरवालों, बहन, पिता, भाई के चरित्र व व्यवहार को बखिया उधडऩे का जन्मसिद्ध अधिकार रहता है.

आजकल वे कानूनों ने और नई बहूओं की कमाई ने इस पर थोड़ा अंकुश लगाया है पर यह बिमारी समाप्त नहीं हुई है. यह तब है जब सरकार और धर्म के मालिक अपने खिलाफ बोले 2 शब्दों पर भी बेचैन हो उठते हैं. देश में कानूनों की भरमार है जिसमें धर्म या सरकार को सही या गलत कुछ कहने पर पुलिस वाले रात 12 बजे भी किसी को घर में उठा सकते हैं. जब से टिवट्र और इंस्टाग्राम जैसे एप बने हैं और कोई भी कुछ भी बड़ी संख्या में लोगों तक अपने विचार पहुंचा सकता है, सरकार और धर्म सत्ता औरतों से भी ज्यादा तुनकमिजाज हो गई है.

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सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त जज रोहिंदन नरीमन ने कहा है कि इस देश में, युवाओं, छात्रों, स्टेंडअप कौमेडियनों, समाचारपत्रों, वेबसाइटों पर बोले शब्दों पर राष्ट्रद्रोह के मुकदमे चला दिए जाते हैं और बहुत बार उन्हें महिनों जेलों में सडऩे को मजबूर किया जाता है. अब तक शायद ही कोई मामला हुआ तो जिसमें इन छात्रों, युवाओं, कौमेडियनों को देश के कानूनों के अनुसार अंतिम न्यायालय से अपराधी माना गया हो पर ट्रायल के दौरान ही उन्हें यातनाएं जेलों में मिल जाती है और उनके परिवार अदालतों और वकीलों पर पैसा बरसाते थकते रहते हैं. जो सहनशीलता औरतों में होने का उदपदेश दिया जाता है वह असल में सरकार व धर्म के मालिकों को दिया जाना चाहिए.

औरतों को भी हेट स्पीच का मुकाबला करना पड़ता है. शादी के तुरंत बाद से लेकर 10-20 साल तक उस के पीहर को लेकर टीका टिप्पणी चलती रहती है. वे ही लोग जो अपने धर्म या अपनी प्रिय पार्टी की सरकार के खिलाफ 4 शब्द नहीं सुन सकते, घर की सदस्या बनी बहू को वर्षों तक नहीं छोड़ते. सहनशीलता को जो सलाह औरतों को दी जाती है असल में सरकार और धर्मों को चलाने वालों को दी जानी चाहिए.

जहां बात औरतों के बारे बोलने का हक है, यह स्पष्ट है कि यह हक किसी को नहीं है, पति को भी नहीं. हर औरत का अपना आत्मसम्मान है, अपना परिवार है, पैतृर्क संबंध हैं और किसी को कुछ कहने का हक है और न उस से कुछ मिलता है. औरतों को दासी समझ कर उन्हें ताउम्र का अधिकारी मानना धर्मग्रंथों में लिखा है तो उस धर्म को घर में नहीं घुसने देना चाहिए.

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इन 4 नेचुरल तरीके से धोएं फल और सब्‍जियां

यह कोई बताने वाली बात नहीं है कि फल और सब्‍जियों को पकाने या खाने से पहले अच्‍छी तरह से धो लेना चाहिये. कीटाणु और कीटनाशक से भरे फल और सब्‍जियां खाने से फूड प्वाइजनिंग के साथ दूसरी बीमारियां होने का चांस रहता है.

अच्‍छा होगा कि आप फल और सब्‍जियों को इस तरह से धोएं कि उसमें कीटनाशक का एक भी अंश ना रहे. आप बाजार से चाहे जितना भी सोंच कर अच्‍छी साग सब्‍जियां ले कर आएं, लेकिन अगर किसान ने उसे कीटनाशक छिड़क कर पैदा किया होगा, तो आप दूर दूर तक नहीं बच पाएंगी.

ये पेस्‍टीसाइड कैंसर की बीमारी पैदा कर सकते हैं साथ ही यह होने वाले शिशु में बर्थ डिफेक्‍ट पैदा कर सकते हैं. गंदी साग साब्‍जी खाने से आपका शरीर भी कमजोर हो जाएगा. इसलिये फल और सब्‍जियों को हमारे बताए गए तरीको से धोएं तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. आइये जानते हैं कौन से हैं वे नेचुरल तरीके…

1. सिरके द्वारा

सिरके द्वारा कीटाणु और कीटनाशक आराम से साफ किये जा सकते हैं. एक कटोरे में पानी और 1 कप वाइट वेनिगर डालें और उसमें फल या सब्‍जियों को धोएं. जब ये दोनों चीजें धुल जाए तब इन्‍हें साफ कटोरे में रखें और आगे के लिये प्रयोग करें.

2. बेकिंग सोडा

यह कीटनाशक को पूरी तरह से साफ करता है. बडे़ कटोरे में 5 गिलास पानी भरें फिर उसमें 4 चम्‍मच बेकिंग सोडा मिलाएं. अब इस पानी में सब्‍जियां और फल डुबो दें और 15 मिनट के बाद निकाल कर सुखा लें. ये खाने के लिये सेफ हैं.

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3. हल्‍दी वाला पानी

हल्‍दी में एंटीबैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो कीटाणुओं का नाश करती है. एक खौलते हुए पानी के कटोरे में 5 छोटे चम्‍मच हल्‍दी मिक्‍स करें. फिर उसमें सब्‍जियां और फल मिलाएं. इन्‍हें एक बार हल्‍दी वाले पानी से साफ करें और बाद में साफ पानी से धो लें.

4. नमक वाला पानी

सेंधा नमक को पानी में मिला कर प्रयोग करने से कीटनाशक का सफाया होता है. एक साफ पानी के कटोरे में 1 कप नमक मिक्‍स करे. फिर इसमें फल और सब्‍जियां डाल कर 10 मिनट तक भिगो कर रखें. कुछ देर के बाद इन्‍हें निकाल कर साफ पानी से 5 मिनट धोएं.

अच्‍छा है कि छिलका निकाल दें अगर आप फल और सब्‍जियों के छिलके निकाल देंगे तो समझिये कि उनमें से 90 प्रतिशत के कीटनाशक अपने आप ही निकल जाएंगे.

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थोड़ा सा ब्रेक ले कर तो देखें

रिश्तों में स्पेस उतनी ही जरूरी है जितनी जीने के लिए औक्सीजन जैसे अगर वातावरण में औक्सीजन की कमी हो जाए तो घुटन होती है ठीक उसी तरह रिश्तों में भी बिना स्पेस के प्यार कहीं खोने लगता है. यदि आप भी अपने सब से प्यारे रिश्ते को ताउम्र तरोताजा रखना चाहती हैं, तो आप को देना होगा अपने बैटर हाफ को एक छोटा सा ब्रेक.

उन के इस स्वभाव को समझें, लेकिन साथ न छोड़ें. यकीनन इस ब्रेक के बाद जब वे लौट कर आप के पास आएंगे, तो आप का यह मिलन निश्चित रूप से जादुई होगा. उस में अपनेआप पहले वाली ताजगी लौट चुकी होगी. निश्चित ही ब्रेक के बाद रिश्ते में पहले से कहीं ज्यादा मिठास होगी और ताजगी भी.

‘‘एक वक्त ऐसा आया था, जब हम दोनों को लगने लगा कि हमारा यह रिश्ता अब ज्यादा दिन नहीं चलेगा, लेकिन आज एकदूसरे की कीमत हम से ज्यादा कोई नहीं जानता. यह कमाल है एक छोटे से ब्रेक का,’’ चेहरे पर कौन्फिडैंस लिए यह कहना था करुणा शर्मा का.

पता नहीं पहले कभी आप ने सुना हो या नहीं, लेकिन सच्चे और लंबे समय के मिलन के लिए जुदाई बहुत जरूरी है. अगर आप के रिश्ते में कभी ब्रेक नहीं लगा, तो यकीनन आप कुछ खो रहे हैं. आज के हर युवा को चाहिए रिलेशनशिप में थोड़ी सी स्पेस और एक छोटा सा ब्रेक. कई लोगों ने इसे आजमाया और यही पाया कि कुछ समय बिछुड़ने के बाद मिलना बहुत सुखदायक होता है.

लिव इन रिलेशनशिप, आसानी से मिलने वाला प्यार और इन दिनों आम हो रहे प्रेम प्रसंगों ने ही इस नए चलन को जन्मा है. आइए मिलते हैं, ऐसे ही कुछ लोगों से जिन की जिंदगी में इस ब्रेक की बहुत जरूरत थी :

इम्तिहान के वे 5 महीने

जयपुर की रहने वाली स्मिता कहती हैं, ‘‘हमारे रिश्ते को अब पूरे 5 साल हो गए. इन 5 सालों में करीब 5 महीने की एक लंबी जुदाई आई. करीब 3 साल लगातार हमारा प्यार परवान चढ़ा रहा. पहले एकदूसरे में कभी कोई कमी नजर नहीं आती थी, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब रिश्ता घुटन बनने लगा. किसी को जब आप बहुत ज्यादा जान लेते हैं, तो भी मुसीबतें खड़ी होने लगती हैं. जिन बातों को पहले हम नजरअंदाज कर दिया करते थे, वही अब बड़ी लग रही थीं.

‘‘आखिरकार वही हुआ, जिस का हमें अंदाजा था. एकदूसरे की सहमति से हम ने

इस रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला किया. दोनों ने वादा किया कि अब

कभी फोन, किसी संदेश और दूसरी तरह से संपर्क नहीं होगा. हुआ भी ऐसा ही. मैं भी अपनी दुनिया में व्यस्त हो गई और वे भी. कभीकभी उन की याद भी आती, तो उसे मैं दिल में ही दबा देती.

‘‘पूरे 5 महीने बाद मौसम बदला और दिल में किसी की कमी महसूस होने लगी. उस से कभी बात न करने का वादा किया था, लेकिन नजरों को फिर उसी की तलाश थी. कुदरत ने साथ दिया और हम वापस मिले, लेकिन इस बार हमेशा के लिए. इतने बड़े अंतराल में एक बात साबित हो गई थी कि रिश्ता भले कोई भी हो, उस में थोड़ी स्पेस जरूर हो.’’

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रबड़बैंड थ्यौरी

रिश्ते की इन उलझनों को समझने के लिए आप का रबड़बैंड थ्यौरी को समझना बहुत जरूरी है. जान ग्रे की बुक ‘मैन्स आर फ्रौम मार्स ऐंड विमन आर फ्रौम वीनस’ स्त्रीपुरुष की रिलेशनशिप को समझने और सुधारने के लिए एक बेहतर किताब है. इस में साफतौर पर पुरुष की मनोस्थिति को बताते हुए उन की तुलना एक रबड़बैंड से की गई है.

पुरुषों का यह स्वाभाविक अंदाज है कि वे किसी महिला के पूरी तरह पास आने के कुछ समय बाद दूर जाने लगते हैं. चाहे महिला कितना भी प्रेम करे. ऐसा होना स्वाभाविक है. अपनी आजादी और अस्तित्व को तलाशने के लिए वे ऐसा करते हैं. लेकिन यह भी सच है कि जब वे पूरी तरह से दूर जाते हैं. तभी लौट कर आते भी हैं. जब वे वापस आते हैं, तो उन का प्यार और अपने पार्टनर के प्रति आस्था कहीं ज्यादा हो चुकी होती है. महिलाएं अकसर उन के इस स्वभाव से धोखा खा कर उन का साथ छोड़ देती हैं.

जानबूझ कर लिया ब्रेक

फीके पड़ते रिश्तों में फिर से पहले वाली मिठास भरने के लिए कुछ कपल जानबूझ कर भी ब्रेक लेने लगे हैं. वे जानना चाहते हैं कि क्या वे वाकई एकदूसरे के बिना नहीं रह सकते? उन के बीच सच में प्यार है या महज आकर्षण? उन्हें लगने लगा है कि दूरी ही वह राह है, जो उन्हें सही मंजिल का पता दे सकती है.

एमबीए स्टूडैंट विकास शर्मा कहते हैं, ‘‘अगर हम रोजरोज दाल खाएंगे, तो एक दिन ऐसा जरूर होगा जब हमें उस से नफरत हो चुकी होगी. जिस तरह हम रोज एक स्वाद का खाना नहीं खा सकते, ठीक उसी तरह रोजाना एक

ही पैटर्न पर जिंदगी भी नहीं चल सकती.

कोई आप से हमेशा के लिए दूर हो जाए, उस से तो अच्छा है कि उसे कुछ दिन के लिए ही दूर करें.

‘‘मैं निशा को बहुत प्यार करता हूं. जब वह मुझे मिली नहीं थी, तो मैं उसे पाने के लिए कुछ भी कर सकता था, लेकिन जब वह मेरी हो गई तो धीरेधीरे उस की कद्र भी कम हो गई. उस की हर बात मेरे लिए इतनी गंभीर नहीं होती थी, क्योंकि मुझे मालूम था कि वह मुझ से प्यार करती है और मुझे छोड़ कर कहीं नहीं जाएगी. अपने इस रवैए से मैं खुद परेशान होने लगा. अपने प्यार के एहसास को फिर से वापस पाने के लिए मैं ने निशा से एक छोटा सा ब्रेकअप किया. वह उस समय बहुत रोई, लेकिन मैं ने अपने दिल पर पत्थर रखते हुए उसे अपने से अलग कर दिया. शुरुआत में उस के फोन भी रिसीव नहीं किए.

‘‘करीब 1 साल बाद उसी तारीख को जब हम जुदा हुए थे, मेरे अंदर प्यार और पागलपन फिर से वापस आने लगा. मेरे पास उस का जो नंबर था, वह बदल गया था. उस की कोई खबर नहीं थी, लेकिन मैं चाहता था कि मुझे दिलोजान से प्यार करने वाली निशा फिर से मेरी जिंदगी में आ जाए. उस के दोस्तों से मिल कर उस के घर का नंबर लिया. उस समय शायद वह मुझे बेवफा समझ रही थी, इसलिए फोन पर आने को भी तैयार नहीं थी. काफी कोशिश कर के उस से फिर मुलाकात हो पाई. जब अपने दूर होने का कारण उसे बताया, तो उस की नम आंखें मुझे घूर रही थीं. मैं उस की एक हां के लिए फिर से तरस रहा था. उस दिन पता चला कि अगर यह ब्रेकअप न होता, तो हम कभी इस प्यार की गहराई को नहीं समझ सकते थे.’’

हम भी आजमाते हैं इसे

विशाल और कविता का प्रेमविवाह हुआ है. दोनों सेम प्रोफैशन के तो हैं ही, साथ ही उन के विचार भी एकजैसे हैं. वे कहते हैं, ‘‘अकसर लोग हमें कहते हैं कि प्यार का जोश कुछ समय में ठंडा हो जाता है. पहले जैसा जोश और प्यार उन के रिश्ते में नहीं रहता. हमें मालूम है कि हमें लंबे समय तक अपने प्यार को जिंदा रखने के लिए क्या करना है? प्यार को ताजा रखने के लिए हमें एकदूसरे को जगह और आजादी देना जरूरी है. हर वक्त यह उम्मीद लगाए नहीं बैठना चाहिए कि हम साथ हों.’’

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विशाल कहते हैं, ‘‘मैं अपनी पत्नी को उस के दोस्तों के साथ और परिवार वालों के साथ भी समयसमय पर भेजता हूं. यह वह वक्त होता है, जब मैं उसे एक भी फोन नहीं करता. हर वक्त वह भी मुझ से सवाल नहीं करती. ऐसा करते हुए हम एकदूसरे का लगातार खयाल रखते हैं. जब हम अपने इस अकेलेपन के मूड से निकल कर फिर एक होते हैं, तो प्यार अपनेआप ताजा हो जाता है.’’

जरूरी है थोड़ी सी स्पेस

राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर में समाजशास्त्र की प्रोफैसर अंजलि सिन्हा कहती हैं, ‘‘काम की थकान के बाद नींद अच्छी आती है. अच्छी नींद अच्छे ख्वाब लाती है. रिश्ते भी इसी तरह के मीठे ख्वाब हैं, जिन्हें सुकून होने पर ही महसूस कर पाते हैं. लेकिन यह तब होता है जब आप रिश्तों को जीते हैं. ब्रेक लेने का मतलब यह नहीं कि आप अपने साथी को बिसरा दें, बल्कि तनहाई में सोचें कि कितना पाया है आप ने इस रिश्ते में. साथ ही यह भी कि दिया कितना है? दोनों पलड़ों का संतुलन देखें और सोचें अगर कहीं संतुलन नहीं बन पा रहा है, तो वजह क्या है?

‘‘आप से दूर रहना आप के जीवनसाथी को भी इतनी मोहलत देगा कि वे सोच सकें कि आप उन की जिंदगी में कितने अहम हैं. उन्हें हर समय खुद में उलझाए रखा तो आप उन से वह समय भी ले लेंगी, जिस में वे आप के बारे में सोचना चाहते हैं और यह समय छोटे से ब्रेक से उन्हें दे सकती हैं. जरूरी नहीं कि यह महीनों लंबा हो, लेकिन इतना जरूर हो कि आप एक जिम्मेदारी की तरह उन्हें याद न आएं. याद आएं तो इस तरह कि वे फिर बस आप के पास लौट आने के लिए बेकरार हो उठें.’’

गौरतलब है कि हर पतिपत्नी के बीच झगड़े की खास वजह असुरक्षा और ईगो होता है. यदि आप अपने पार्टनर को प्रौपर स्पेस देते हैं,

तो उस के मन में किसी तरह की असुरक्षा की भावना नहीं रहेगी और न ही आप के मन में रहेगी. आप दोनों हमेशा प्यार से रहें, हंसीमजाक करे, लेकिन शक के घेरे में ले कर हजार सवाल न पूछें. किसी भी रिश्ते में स्पेस देने से भरोसा और भी ज्यादा बढ़ता है. इतना ही नहीं, आप के पार्टनर आप से ज्यादा खुल कर बात कर सकते हैं. साथ ही इस से आप दोनों के बीच सम्मान और प्यार बढ़ता है. ऐसे में पतिपत्नी को पर्सनल स्पेस का ध्यान रखना चाहिए. जिस से कि रिश्ते में प्यार बना रहे.

इन सब के बावजूद भी रिश्ते में सही तालमेल नहीं बैठ रहा है, तो अलगअलग समय बिताने की कोशिश करें. 1 या 2 सप्ताह के लिए एकदूसरे को नहीं देखने की सहमति लें और यह तय करने के बाद स्पष्ट करें कि आप अभी भी एकसाथ हैं और अपना रिश्ता इस समय के दौरान खास रहेगा. ऐसे वक्त में एकसाथ समय नहीं बिताएं न एकदूसरे को मैसेज भेजें. न ही फोन पर बात करें. यह जुदाई आप के लिए यह जानने में मददगार साबित होगी कि आप इस रिश्ते को कितना महत्त्व देते हैं.

यह पहली बार में मुश्किल जरूर हो सकता है. लेकिन यदि आप अपने जीवन में अपने पार्टनर के बिना सुकून महसूस करते हैं, तो शायद ब्रेक ले लेना एक अच्छा विचार है. इसे आप रिश्ते को बेहतर बनाने का एक बेहतरीन विकल्प भी कह सकते हैं. अब यदि आप शुरुआती कुछ दिनों में ब्रेकअप में आनंद महसूस करते हैं, लेकिन उस के बाद आप अपने पार्टनर को मिस करने लगते हैं और अपना जीवन उस के बिना अधूरा महसूस करते हैं, तो आप को रिश्ते को फिर से सुधारने की पहल करनी चाहिए.

निजी आजादी का सम्मान

– विनिता छाबड़ा

‘‘रिश्तों में निजी आजादी के लिए घट रहे स्पेस की वजह से परिवार टूट रहे हैं. आए दिन ऐसे मामले बढ़ रहे हैं. आजादी की जितनी दरकार एक देश को, एक समाज को, हमारे विचारों को और हमारी अभिव्यक्ति को है, उतनी ही आजादी की मांग एक मजबूत रिश्ता भी करता है. इस तरह के मामलों को बढ़ने से आ रही दरार को खत्म कर यदि मजबूत रिश्ता चाहते हैं, तो यह बेहद जरूरी है कि एकदूसरे की निजी आजादी का सम्मान करना होगा.’’

स्पेस में भी रिश्ता रहे मजबूत

– डा. सावित्री सराधना, प्रोफैसर, समाजशास्त्र, राजस्थान विश्वविद्यालय मनोचिकित्सक, एसएमएस अस्पताल, जयपुर

‘‘हर इनसान को अपनी आजादी प्यारी होती है, क्योंकि कोई भी रिश्ता सिर्फ प्यार से ही नहीं चलता, बल्कि उसे चलाने के लिए कई ऐसी चीजें हैं, जो अपनी जगह माने रखती हैं. कई बार जरूरत से ज्यादा रोकटोक रिश्ते में दरार पैदा कर देती है. ऐसे में रिश्ते में स्पेस देना जरूरी हो जाता है. खासतौर से शादीशुदा जिंदगी में स्पेस बहुत जरूरी हो जाता है. ज्यादा दखलंदाजी रिश्ते को खराब कर सकती है. ऐसे में जरूरी है कि सब से पहले अपने पार्टनर को समय दें. साथ ही उस की जिंदगी में ज्यादा ताकझांक या रोकाटोकी न करें. ऐसे में पार्टनर को अकेला छोड़ने के बजाय उसे उस की सोच को कायम रखने के लिए सोचने का मौका दिया जाए. इस दौरान अपने साथी को हमेशा उस की गलतियां बताने में न रहे, क्योंकि ऐसे वक्त में सही बात भी गलत लगने लगती है.’’

फायदे फैमिली ब्रेक के

कैरियर और निवेश ने आप का कल तो सुरक्षित कर दिया, लेकिन आज की खुशियों का क्या? कल की चिंता में कई बार हम आज की खुशियों के छोटेछोटे पलों को नजरअंदाज कर देते हैं. अब ऐसा न हो, इस के लिए फैमिली ब्रेक लेने के कुछ मौके बिलकुल न गंवाएं.

त्योहार हमें परिवार के साथ समय बिताने का पूरा मौका देते हैं लेकिन हम तीजत्योहार की रीतिरस्म निभाने में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि त्योहार की छुट्टियां कब आईं और चली गईं, हमें पता ही नहीं चलता. यदि इन सब चीजों को दरकिनार कर क्वालिटी फैमिली टाइम बिताना है तो फैमिली डिनर, शौर्ट ट्रिप इत्यादि ऐसे विकल्प हैं, जो न सिर्फ आपसी रिश्तों को ताजगी से सराबोर करेंगे, बल्कि फैमिली के हर सदस्य के बारे में करीब से जानने का मौका भी देंगे.

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फैमिली डिनर आउटिंग पत्नी को रोज के घरेलू कामों से थोड़ा ब्रेक देगी, तो वह भी रिलैक्स हो कर आप के साथ क्लालिटी टाइम बिता पाएगी और फिर पत्नीबच्चों के साथ शौर्ट ट्रिप या लौंग ड्राइव पर जाने से बेहतर तो शायद और कुछ न हो, क्योंकि ऐसे पल आपसी बौंडिंग को मजबूत करने के साथ यादगार पलों का तोहफा भी दे जाते हैं.

किसी विज्ञापन की एक लाइन यहां याद आती है कि दूर जाओगे तभी तो अपनों के करीब आओगे.

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