जब पति तोड़े भरोसा

आयशा अपने पति से तलाक चाहती है. वजह है उस के पति के किसी और महिला से संबंध. आयशा ने 2 साल पहले ही आयुश से शादी की थी. शादी के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, मगर एक दिन आयशा को पता चला कि उस के पति औफिस से निकल कर किसी और महिला के पास जाते हैं. आयशा अभी मां नहीं बनी है. आयुश से अलग होने में उसे कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन बहुत सारी ऐसी महिलाएं हैं जो सब कुछ जानते हुए भी अपने परिवार और बच्चों की खातिर तलाक नहीं ले पातीं.

यह सच है कि बेवफा साथी कभी सच्चा साथी नहीं हो सकता. एक बार भरोसा टूट जाने के बाद रिश्तों में हमेशा के लिए कड़वाहट आ जाती है. एक बात और ध्यान देने वाली है कि पति की बेवफाई झेलने वाली औरत सिर्फ पत्नी नहीं होती, मां भी होती है, इसलिए पति से संबंध बिगड़ने का बच्चों की देखरेख पर भी बुरा असर पड़ता है. बेवफाई हर औरत को अखरती है भले ही उस की उम्र कुछ भी हो. बेवफा साथी के साथ कैसे पेश आएं, इस का फैसला बहुत सोचविचार कर और समझदारी से करना चाहिए.

सही निर्णय लें

जब आप को एहसास होता है कि आप के साथ धोखा हो रहा है तो एक मां होने के नाते कभीकभी आप को कठिन फैसला लेना पड़ता है. आप अविश्वास भरे माहौल में रहने के बजाय अलग रहना पसंद करेंगी और रिश्ता तोड़ना चाहेंगी. मगर आप अपने बच्चों के सामने अपने असफल रिश्ते का उदाहरण भी नहीं रखना चाहतीं. परिवार के लोग भी नहीं चाहते कि आप अपना रिश्ता खत्म करें. आप घुटन व अवसाद में जी रही हैं और आप की जिंदगी बदतर हो गई है तो समझ लीजिए अब फैसले की घड़ी है. अब या तो आप पति से वादा लीजिए कि भविष्य में वे कभी आप के साथ धोखा नहीं करेंगे या फिर उन से अलग होने का फैसला. आप का सही फैसला आप की जिंदगी पुन: पटरी पर ला सकता है.

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बच्चों को आश्वस्त करें

अगर आप अपने पति के बरताव और उन की बेवफाई से तंग आ कर उन से अलग होने का फैसला कर रही हैं तो आप का यह निर्णय आपसी सहमति पर होना चाहिए. अपने बच्चों को भरोसा दिलाएं कि आप के तलाक के फैसले का उन की जिंदगी से कोई लेनादेना नहीं है. उन्हें पहले से बेहतर जिंदगी देने का आश्वासन दें. उन्हें बताएं कि अगलअलग घर में रह कर भी वे उन्हें पहले जैसे ही भरपूर प्यार करेंगे. याद रखिए, आप का रिश्ता टूटने पर जितनी तकलीफ आप को होगी उस से कहीं अधिक आप के बच्चों को होगी. एक तो अपनी मां का तलाक होने का दर्द और दूसरा अपने पिता से दूर होने का, यदि बच्चे मां के पास हैं तो.

बच्चों के सवालों के लिए रहें तैयार

याद रखें बच्चे इस बात को पहले सोचते हैं कि उन के मातापिता के अलग हो जाने पर उन की जिंदगी कैसी होने वाली है. इसलिए उन के सवालों के जवाब देने के लिए पहले से ही तैयार हो जाएं. जैसे घर छोड़ कर कौन जाएगा? हमारी छुट्टियां कैसे बीतेंगी? पापा के हिस्से का काम कौन करेगा? आदिआदि.

क्या आप माफ कर सकती हैं

अगर आप के पति को अपने किए पर पछतावा है और वे आप को बारबार लगातार सौरी बोल रहे हैं, तो एक बार ठंडे दिमाग से सोच कर देखें कि क्या आप उन्हें माफ कर सकती हैं? क्या आप भविष्य में उन पर भरोसा कर सकती हैं? क्या आप बीती बातों को भुला सकती हैं? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिन के उत्तर आप को देने हैं और अपनी भावनाओं के प्रति ईमानदार रह कर फैसला करना है. याद रखें सब कुछ भुला कर रिलेशनशिप में बने रहने का फैसला लेने के बाद आप अपने पति को उन के किए की सजा नहीं दे पाएंगी.

रिश्ता बचाने की कोशिश करें

अगर आप के पति ने सिर्फ एक बार गलती की है और वे इस के लिए खेद जता रहे हैं तो तलाक जैसा कठिन फैसला आप की जिंदगी के लिए बैस्ट नहीं हो सकता. यह भले ही आप को सुनने में अच्छा न लगे, लेकिन सच यही है. कुछ लोगों का कहना होता है कि जिस ने एक बार धोखा किया है वह हमेशा देगा. मगर ऐसा सोचना गलत है. आप अपना रिश्ता बचा कर अपनी और अपने बच्चों की जिंदगी में बहुत कुछ बचा सकती हैं.

बच्चों को न बताएं

अपने बच्चों से यह कतई न कहें कि आप उन के पापा के किसी और से अफेयर के कारण अलग होना चाहती हैं. हो सकता है कि वे आप के लिए एक अच्छे पति न बन पाए हों, मगर अपने बच्चों के लिए वे एक अच्छे पापा हों. इसलिए अगर आप उन से उन के पापा के अफेयर के बारे में बताएंगी तो उन के बालमन को आघात लगेगा और इस से निकलने में उन्हें बहुत समय लग सकता है.

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बच्चों को जरीया न बनाएं

ऐसी परिस्थितियों में आप अपने पति को हर्ट करने के लिए अपने बच्चों का इस्तेमाल कर सकती हैं, जो ठीक नहीं है. ऐसा कर के आप बच्चों का उन के पापा के साथ संबंध भी बिगाड़ रही हैं. बच्चों को खुद फैसला करने दें कि उन का अपने पापा के प्रति क्या विचार है. थोड़ा बड़ा होने पर वे ऐसा कर सकते हैं. आज शहरों में तलाक के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है. इस में 80 फीसदी कारण पार्टनर की बेवफाई होती है. आज महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं. रिश्तों में ऐसी कड़वाहट के साथ जीना उन्हें हरगिज गवारा नहीं है. यह सच है कि बेवफा साथी के साथ रहने का फैसला करना बहुत कठिन है, लेकिन एक रिश्ते की चिता पर कई रिश्तों की अर्थी न चढ़ जाए, यह सोच कर अगर संभव हो तो रिश्ता बचाने की एक कोशिश जरूर करनी चाहिए. पति से अलग होने के फैसले के साथ पति का पूरा परिवार भी अकसर अलग हो जाता है. बच्चों से उन का पिता छिनने के साथ ही उन के दादादादी, बूआ, चाचा यानी पूरा परिवार छिन जाता है. तलाक के कठिन फैसले से सिर्फ आप ही अकेली नहीं होतीं, कई जिंदगियां छिन्नभिन्न हो जाती हैं. इसलिए रिश्ते को बचाने की कोशिश किए बिना तलाक के लिए आवेदन करना ठीक नहीं है. यकीन मानिए, जो खुशी सब के साथ जीने में है, वह अकेले में कतई नहीं.

डैंड्रफ से चेहरे को भी होता है नुकसान

डैंड्रफ सिर पर होने वाली एक बेहद आम समस्या है जो बैक्टीरिया या सिर पर फंगल इन्फेक्शन की वजह से होती है. अक्सर सिर की त्वचा ज्‍यादा तैलीय या चिकनाई वाली होने पर यह समस्या हो जाती है. इस समस्या के कारण न सिर्फ बालों की मजबूती पर नकारात्मक असर पड़ता है, बल्कि डैंड्रफ की इस समस्या की वजह से अकसर शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता है. लेकिन इसके नुकसान सिर्फ इतने ही नहीं हैं, डैंड्रफ के कई अन्‍य साइड इफेक्‍ट्स भी होते हैं. जैसे इससे चेहरे को भी कई नुकसान होते हैं. चलिए जानें डैंड्रफ के कारण चेहरे पर होने वाले नुकसान क्या होते हैं.

मुंहासों की समस्या का कारण

डैंड्रफ की समस्या से प्रभावित लोगों को मुंहासों की समस्या से जूझना पड़ता है. रूसी का सबसे प्रमुख लक्षण रूखी त्वचा के छिलके या पपड़ी जैसा गिरना होता है. इनके कारण रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और चेहरे तथा शरीर पर मुंहासे होने लगते हैं. जो लोग पहले से ही मुहांसों की समस्या से जूझ रहे होते हैं उनके लिए डैंड्रफ और भी ज्यादा समस्या का कारण बन सकती है. मुंहासे होने के कारणों में डैंड्रफ भी एक प्रमुख कारण होता है.

चेहरे पर यदि मुंहासे अधिक हो तो मुंहसों के साथ डैंड्रफ का भी उपचार करना चाहिए, क्योंकि जब तक डैंड्रफ साफ नहीं होंगे, तब तक मुंहासों का पूरी तरह उपचार नहीं किया जा सकता है. त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, पीठ पर होने वाले मुंहासे का सबसे बड़ा कारण भी अकसर डैंड्रफ ही होता है. इसलिए पीठ के मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए डैंड्रफ को खत्म करना जरूरी है.

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डैंड्रफ के इलाज के तरीके

डैंड्रफ के कारण बोलों व चेहरे आदि को होने वाले नुकसान से बचने के लिए आप इन उपायों को अपना सकती हैं. हफ्ते में कम से कम दो बार एंटी डैंड्रफ शैंपू लगायें और डैंड्रफ प्रभावित क्षेत्र जैसे सिर की त्वचा, कान, चेहरे आदि को भी अच्छे से साफ करें. इसके अलावा बालों को चेहरे से दूर रखें, क्योंकि अगर रूसी वाले बाल आपके चेहरे पर आएंगे तो इसकी वजह से मुंहांसे होने की संभावना भी अधिक हो जाती है.

आप हफ्ते में एक बार बालों की गर्म तेल से मालिश भी करें इसके कारण रूसी व इसके कारण होने वाले मुंहासों से छुटकारा पाया जा सकता है. इससे सिर की त्वचा स्वस्थ रहती है और सिर की त्वचा में रक्त का प्रवाह बेहतर बनता है. साथ ही अपने चेहरे को नियमित तौर पर साफ करें. मुंहासे अधिक होने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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कैसे बढ़ती उम्र हड्डियों की सेहत पर डालती है असर

उम्र और हड्डियों का अनोखा खट्टा-मीठा रिश्ता होता है. जब हम छोटे होते हैं तो हमारी हड्डियां सबसे बेहतर आकार में होती हैं. लेकिन जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हड्डियों का स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है. इसलिये, हम सबको अपने जीवन के हर पड़ाव में हड्डियों के स्वास्थ्य के महत्व के बारे में सजग होना चाहिये. डॉ आर एस वशिष्ट के मुताबिक जब हमारी उम्र कम होती है हम हड्डियों की मजबूती को उतना महत्व नहीं देते हैं, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ इसे प्राथमिकता देनी चाहिये. खासकर महिलाओं को, क्योंकि 30 साल की उम्र के बाद इनमें हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के बढ़ने की आशंका अधिक होती है.

फैक्ट: जन्म के समय और नवजातों, शिशुआ की हड्डियां नरम तथा लचीली होती हैं

बच्चों की हड्डियां नरम और लचीले मटेरियल से बनी होती हैं, जिन्हें कार्टिलेज कहते हैं. यह बच्चे को बढ़ने और वयस्क कद तक पहुँचने में मदद करती हैं. जैसा कि हम जानते हैं कि इसके बाद इस कार्टिलेज में कैल्शियम जमा होने लगता है और मजबूत हड्डियों के रूप में यह सख्त होने लगता है.

फैक्ट : बचपन (1-9 वर्ष): यह बेहद महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि स्‍केलेटन विकसित होता है और उसका घनत्व बढ़ता है

बचपन में हमारी हड्डियां आकार और घनत्व में बढ़ती हैं, क्योंकि हड्डियों में कैल्शियम और अन्य खनिज जमा हो रहे होते हैं. जिन छोटे बच्चों को कैल्शियम और विटामिन डी3 नहीं मिल रहा है, उनमें हड्डियों में कमजोरी, पैर मुड़े हुए और अन्य समस्याएं हो सकती हैं.

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फैक्ट 3: किशोरावस्था (10-20 वर्ष): यह बढ़ने का समय होता है. इस समय हड्डियां विकसित हो रही होती हैं, जीवन के आखिरी समय तक के लिये

हड्डियों के विकास के लिये किशोरावस्था एक महत्वपूर्ण समय है. लड़कियों की ऊंचाई 11-12 साल के बीच बढ़ती है और लड़कों को 13-14 साल में इसका अनुभव होता है. किशोरावस्था के दौरान हड्डियों की ताकत का लगभग 90% हासिल कर लिया जाता है, इससे भविष्य में हड्डियों की सेहत तय होती है.

फैट 4: वयस्क अवस्था (20-30 वर्ष): हड्डियों की अच्छी सेहत का एक और मौका होता है

इस उम्र तक, शरीर अब इतनी आसानी से नई हड्डी नहीं बना रहा होता है, लेकिन तीस की उम्र के पहले तक यह हड्डी के घनत्व और ताकत के चरम तक पहुँचने का समय होता है. इन वर्षों के दौरान महिलाओं को गर्भावस्था और स्तनपान का भी अनुभव होता है. गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान कैल्शियम की उच्च मांगों को पूरा करने के लिये एक अच्छा आहार महत्वपूर्ण है. चूँकि, आपका दैनिक आहार आपकी कैल्शियम की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता, इसलिये कैल्शियम सप्लीमेंट और विटामिन डी के साथ आने वाला विकल्प चुनना महत्वपूर्ण है. कई ऐसे ब्रांड भी हैं जो कैल्शियम की चबाने योग्य गोलियाँ देते हैं जिनका स्वाद अच्छा होता है और इनका आसानी से सेवन किया जा सकता है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हड्डियों के कमजोर होने का खतरा अधिक होता है. इसलिये, हड्डी से जुड़ी कोई भी समस्या होने से पहले उससे निपटने के लिये हमेशा तैयार रहना बेहतर होता है.

फैक्ट 5: प्रौढ़ावस्था (30-50 वर्ष): जब उम्र हड्डी की सेहत पर धीरे-धीरे और धीमी गति से प्रभाव डालने लगती है

30 साल की उम्र से पुरुषों और महिलाओं दोनों में हड्डियों की ताकत और यहां तक कि मांसपेशियों की टोन में लगातार कमी आने लगती है. हमारे पूरे जीवनकाल में हड्डियां बदलती रहती हैं. हालांकि, 40 की उम्र के बाद, हड्डियों में बदलाव कम होता है. इसलिये, रीमॉडलिंग के बाद ना केवल मजबूत हड्डियों के लिये बल्कि हड्डियों के नुकसान को रोकने के लिये भी डाइट में कैल्शियम और विटामिन डी3 महत्वपूर्ण होता है.

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फैक्ट 6: 50 वर्ष के बाद: हड्डियां पतली होने लगती हैं और खनिज खोने लगती हैं

महिलाओं को 42-55 साल के बीच मेनोपॉज का अनुभव होता है, जो उनमें हड्डियों के नुकसान की गति को बढ़ा देता है. हड्डियां खनिजों को खोने लगती हैं और संरचना में परिवर्तन होने लगता है. फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. ऑस्टियोपोरोसिस, एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों के खनिज घनत्व में कमी के कारण हड्डियां आसानी से टूट सकती हैं, यह आम है. झुकने या छींकने जैसी छोटी गतिविधियाँ भी ऑस्टियोपोरोसिस वाले व्यक्ति में फ्रैक्चर का कारण बन सकती हैं.

फैक्ट 7: 70 वर्ष की उम्र के बाद हड्डी की सेहत: हड्डियां काफी कमजोर होती हैं और फ्रैक्चर आम होता है

70 साल की उम्र के बाद हड्डियों की मजबूती कम होती जाती है. बुजुर्गों में हड्डी की चोट का एक सामान्य कारण नीचे गिरना है और इसलिये गिरने से बचाव जरूरी है. व्यायाम की एक सामान्य दिनचर्या, संतुलन और लचीलेपन को बनाये रखने में मदद कर सकती है.

कुल मिलाकर, भरपूर मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी3 के साथ संतुलित आहार लेना, विशेष रूप से बढ़ती उम्र के साथ महत्वपूर्ण होता है. 30 की उम्र के बाद की महिलाओं को आहार के साथ पर्याप्त कैल्शियम का सप्लीमेंट लंबे समय तक एक सक्रिय जीवन जीने में मददगार होता है.

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Balika Vadhu 2 में एंट्री की खबरों के बीच वायरल हुआ Mohsin Khan का ये वीडियो

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ से पहचान बनाने वाले शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) और मोहसिन खान (Mohsin Khan) की जोड़ी फैंस के दिलों पर राज करती है, जिसके चलते हर कोई दोनों की औनस्क्रीन कैमेस्ट्री को दोबारा देखने के लिए बेताब हैं. वहीं जहां बालिका वधू 2 (Balika Vadhu 2) में शिवांगी जोशी की एंट्री के बाद एक्टर मोहसिन खान के भी शो में हिस्सा लेने की खबरें जोरों पर हैं. इसी बीच मोहसिन खान का एक वीडियो वायरल हो रहा है. आइए आपको बताते है पूरी खबर…

डांस करते दिखे मोहसिन खान

 

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जहां खबरें थीं कि मोहसिन खान और शिवांगी जोशी को दोबारा औनस्क्रीन लाने के लिए ‘बालिका वधू 2’ (Balika Vadhu 2) के मेकर्स कोशिश कर रहे हैं तो वहीं हाल ही में मोहसिन खान ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह डांस करते नजर आ रहे हैं. दरअसल, वीडियो में मोहसिन खान, सिंगर हार्डी संधू के लेटेस्ट गाने ‘Bijlee Bijlee’ गानें पर डांस करते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं इसमें उनका साथ  ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) के कोरियोग्राफर हिमांशु गडानी साथ दिख रहे हैं.

 

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सेलेब्स कर चुके हैं डांस

 

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‘Bijlee Bijlee’ गाने पर डांस की बात करें तो शिवांगी जोशी, ऐश्वर्या शर्मा, श्वेता तिवारी समेत कई सेलेब्स इस गाने पर डांस करते हुए फैंस के साथ वीडियो शेयर कर चुके हैं. वहीं सोशलमीडिया पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहे हैं.

आनंदी जाएगी कौलेज

 

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सीरियल बालिका वधू 2 की बात करें तो जिगर, आनंदी के साथ सुहागरात मनाने के लिए जबरदस्ती करता है. हालांकि आनंदी अपने हक के लिए आवाज उठाती है और जिगर के साथ एक कमरे में न रहने की बात कहती है. वहीं अपकमिंग एपिसोड में आंनदी को कौलेज में एडमिशन मिल जाएगा और वह कौलेज जाने के लिए खुश होगी. लेकिन जिगर एक बार फिर आनंदी के सपने को तोड़ता नजर आएगा.

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अनुज की बहन मालविका संग मस्ती करती दिखी Anupama, सीरियल में आएगा नया ट्विस्ट

सीरियल अनुपमा एक बार फिर टीआरपी चार्ट्स में धमाल मचाता नजर आ रहा है, जिसके चलते मेकर्स अनुपमा और अनुज की जिंदगी में नए ट्विस्ट लाने के लिए तैयार हैं. वहीं मालविका की एंट्री के बाद अनुज-अनुपमा की कहानी पूरी होगी या नहीं ये देखने लायक होगा. इसी बीच वायरल हुई फोटोज में अनुपमा और मालविका की बौंडिंग साफी नजर आ रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं वायरल फोटोज…

अनुपमा ने शेयर की फोटोज

 

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हाल ही में रुपाली गांगुली यानी अनुपमा ने मालविका और अनुज संग कुछ फोटोज शेयर की हैं, जिसमें वह दोनों के साथ मस्ती करते हुए और मालविका का वेलकम करती नजर आ रही हैं. वहीं इन फोटोज को शेयर करते हुए रुपाली गांगुली ने लिखा कि शो में आपका स्वागत है @vajanianeri. हर किसी को इंतजार है कि आपकी एंट्री के बाद शो में आप क्या ट्विस्ट और टर्न लाने जा रही हैं.

 

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अनुज की बहन होगी मालविका

 

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सीरियल की बात करें तो वनराज, मालविका संग अपने बिजनेस की नई शुरुआत करने जा रहा है. इसी के चलते उसने एक बड़ी पार्टी भी रखी. लेकिन इस दौरान अनुज के साथ मालविका की नजदीकी देखने को मिली, जिसके चलते अनुपमा का चेहरा उतर जाता है. वहीं अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज और मालविका साथ में डांस करेंगे, जिसके बाद मालविका, अनुपमा से पूछेगी कि क्या वह उसके बारे में नहीं जानती है. हालांकि अनुज, अनुपमा से कहेगा कि वह कुछ भी छिपाना नहीं चाहता था. लेकिन अनु कहेगी कि उसे भरोसा है और कई सवाल भी हैं. इसी के साथ दर्शकों को देखने के लिए मिलेगा कि मालविका, अनुज की बहन होगी, जो उससे कई सालों बाद मिलेगी. हालांकि मालविका का रोल देखना होगा कि वह अनुपमा और अनुज के प्यार की कहानी को पूरा करती है या कोई नया ट्विस्ट लाती है.

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उम्र भर रहें जवान

कुछ दिनों से आलोक कुछ बदलेबदले से नजर आ रहे हैं. वे पहले से ज्यादा खुश रहने लगे हैं. आजकल उन की सक्रियता देख कर युवक दंग रह जाते हैं. असल में उन के घर में एक नन्ही सी खुशी आई है. वे पिता बन गए हैं. 52 साल की उम्र में एक बार फिर पिता बनने का एहसास उन को हर पल रोमांचित किए रखता है. इस खुशी को चारचांद लगाती हैं उन की 38 वर्षीय पत्नी सुदर्शना. सुदर्शना की हालांकि यह पहली संतान है लेकिन आलोक की यह तीसरी है.

दरअसल, आलोक की पहली पत्नी को गुजरे 5 साल बीत चुके हैं. उन के बच्चे जवान हो चुके हैं और अपनीअपनी गृहस्थी बखूबी संभाल रहे हैं. कुछ दशक पहले की बात होती तो इन हालात में आलोक के दिल और दिमाग में बच्चों के सही से सैटलमैंट के आगे कोई बात नहीं आती. इस उम्र में अपनी खुशी के लिए फिर से शादी की ख्वाहिश भले ही उन के दिल में होती लेकिन समाज के दबाव के चलते इस खुशी को वे अमलीजामा न पहना पाते. अब जमाना बदल चुका है. लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हो गए हैं, एंप्टी नैस्ट सिंड्रोम से बाहर निकल रहे हैं. और अपनी खुशियों को ले कर भी वे ज्यादा स्पष्ट और मुखर हैं. अब लोग 70 साल तक स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं.

जब आलोक ने देखा कि उन के बच्चों का उन के प्रति दिनप्रतिदिन व्यवहार बिगड़ता जा रहा है. अपने कैरियर व भावी जिंदगी को बेहतर बनाने की आपाधापी में बच्चों के पास उन की खुशियों को जानने व महसूस करने की फुरसत नहीं है तो आलोक ने न केवल उन से अलग रहने का निर्णय लिया बल्कि एक बार फिर से अपनी जिंदगी को व्यवस्थित करने का मन बनाया.

एक दिन इंटरनैट के जरिए उन की मुलाकात सुदर्शना से हुई जो उन्हीं की तरह अच्छी जौब में थी. आर्थिक नजरिए से सैटल थी, लेकिन कैरियर के चक्कर में सही उम्र में शादी न हो सकी थी. वह 37 साल की हो चुकी थी. उस ने एक खूबसूरत नौजवान का जो ख्वाब देखा था, उसे अब भूल चुकी थी. उसे अब एक व्यावहारिक दोस्त चाहिए था.  सुदर्शना को आलोक में व्यावहारिक जीवनसाथी के सभी गुण नजर आए. दोनों ने झटपट कानूनी तरीके से शादी कर ली. कोकशास्त्र में कहा गया है कि पुरुषों की सैक्स क्षमता पूरी तरह से उन के अपने हाथों में होती है. दरअसल, जवानी में जो अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं उन के लिए अधेड़ावस्था जैसी कोई चीज ही नहीं होती. सच बात तो यह है कि इस युग में अधेड़ उम्र के माने वे नहीं रहे जो आधी सदी पहले तक हुआ करते थे. महिलाएं जरूर अभी तक रजोनिवृत्ति के चलते कुदरत के सामने अपने मातृत्व को लंबे समय तक कायम रखने को ले कर विवश हैं लेकिन स्त्रीत्व का आकर्षण उन में भी उम्र का मुहताज नहीं रहा.

सैक्स का सुख लें

आज पुरुष चाहे 50 का हो या 55 का या फिर 60 वर्ष का, स्वस्थ रहने की सजगता ने उसे इस उम्र में भी फिट बनाए रखा है, हालांकि इस में उसे कुदरत का भी साथ मिला है. वास्तव में उम्र ढलने के साथसाथ उस के परफौर्मैंस में कुछ गिरावट तो आती है, लेकिन उस की यह क्षमता बिलकुल खत्म नहीं होती.

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यहां कनफ्यूज न हों, पहले भी यह सब सहजता से होता रहा है. मगर इस तरह की क्षमताएं आमतौर पर राजाओं, महाराजाओं और अमीरउमरावों तक ही सीमित होती थीं क्योंकि वही आमतौर पर स्वस्थ होते थे और स्वास्थ्य के प्रति सजग होते थे. आम आदमी के लिए पहले न तो इतनी सहजता से स्वस्थ रहने के साधन उपलब्ध थे, न ही इस का ज्ञान था, इसलिए उन में बुढ़ापा जल्दी आ जाता था.

वैसे लंबे समय तक सैक्स में सक्षम और सक्रिय बने रहने का एक आसान उपाय है हस्तमैथुन. हस्तमैथुन एक ऐसी प्रक्रिया है जिस में किसी दूसरे की जरूरत नहीं होती. शरीर विज्ञान की सीख कहती है कि शरीर के जिस अंग को आप सक्रिय बनाए रखेंगे उस की उम्र उतनी ही लंबी होगी और वह उतनी ही देर तक सक्षम रहेगा. वास्तव में यह बात सैक्स के मामले में भी सही है. असल में जो व्यक्ति जितना ज्यादा सैक्स करता है वह उतनी ही देर तक सैक्स कर सकता है.

मशहूर विशेषज्ञ डा. जौनसन का भी कहना था और आज के सैक्सोलौजिस्ट भी इस बात को मानते हैं कि लंबे समय तक सैक्स क्षमता बरकरार रखने के लिए युवावस्था में सैक्स सक्रियता जरूरी है. अगर यह सक्रियता रहती है तो 50 वर्ष की उम्र के बाद भी पुरुष को नपुंसक होने का डर नहीं रहता. यही नहीं, वह 70 साल तक पिता बनने का सुख भी प्राप्त कर सकता है.

सैक्सोलौजिस्ट हस्तमैथुन को विशेष महत्त्व देते हैं. असल में जो पुरुष अपने लिंग को जितना सक्रिय रखता है, उस की उतनी ही सैक्स की चाहत बढ़ती है क्योंकि इस प्रक्रिया में लिंग की अच्छीखासी ऐक्सरसाइज होती है.

कई बार पुरुष इसलिए भी अपनी पत्नियों को संतुष्ट नहीं कर पाते क्योंकि वे सैक्स के मामले में लगातार सक्रिय नहीं रहते. इस से उन के अंग विशेष की ऐक्सरसाइज भी नहीं हो पाती और ऐन मौके पर शर्मिंदगी उठानी पड़ती है. कहने का मतलब यह है कि इस मामले में निष्क्रियता सैक्ससुख से वंचित कर देती है.

सैक्सोलौजिस्टों की मानें तो हस्तमैथुन सैक्स क्षमता बनाए रखने का एक कारगर तरीका है. यह न सिर्फ पुरुषों को स्वस्थ रखता है बल्कि अच्छीखासी प्रैक्टिस भी कराता है. इतना ही नहीं, उम्र ढलने के साथ सैक्स की चाहत को बढ़ाने में मदद करता है.

खानपान व जीवनशैली सुधारें

इन तमाम बातों के साथसाथ यह भी ध्यान देने योग्य है कि अपने खानपान व मोटापे को भी नजरअंदाज न करें. सैक्स जीवन पर सब से ज्यादा कुप्रभाव मोटापा ही डालता है. मोटापे का अतिरिक्त वजन विटामिन बी-1 के लिए जिगर और थायराइड से प्रतिस्पर्धा करता है और इन दोनों ही अंगों को खराब कर देता है, जबकि सैक्स क्षमता के लिए दोनों ही अंग महत्त्वपूर्ण हैं. मोटा व्यक्ति पतले व्यक्ति की तुलना में सैक्स की कम इच्छा करता है. जब वह इच्छा करेगा भी, न तो वह पार्टनर को संतुष्ट कर पाता है और न खुद ही संतुष्ट हो पाता है. इस में दोराय नहीं है कि सैक्स सब के जीवन का अभिन्न हिस्सा है. ऐसे में न सिर्फ खानपान, जीवनशैली आदि का खयाल रखना होता है बल्कि कुछ सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो नशीले पदार्थों के आदी होते हैं.

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लब्बोलुआब यह है कि भविष्य को आनंदमय बनाना है तो युवावस्था से ही इस का ध्यान रखना होगा. इतना ही नहीं, अपने भावनात्मक रिश्तों को भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है. आज के दौर में बच्चे अपने कैरियर के लिए घर से दूर चले जाते हैं. ऐसे में मातापिता घर में अकेले रह जाते हैं. ऐसे पतिपत्नी के लिए सैक्स जीवन को ऊर्जावान बनाए रखता है. कहने की बात नहीं है कि सैक्स शारीरिक क्रिया के अलावा मानसिक संतुष्टि भी है. इसलिए चैन और सुकून से जीने के लिए अपने लाइफस्टाइल को बदल डालें और 60 वर्ष की उम्र के बाद भी गुनगुनाएं, अभी तो मैं जवान हूं…

उन दोनों का सच: क्या पति के धोखे का बदला ले पाई गौरा

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Winter Special: सर्दियों में जरा ध्यान से करें मेकअप

क्या आपको अपनी फ्रेंड की शादी अटेंड करनी है और आप सर्दियों में होने वाली स्किन प्रॉब्लम्स से परेशान हैं? परेशान होने से बेहतर है कि आप अपनी त्वचा का ख्याल रखें.

सर्द हवाओं से स्किन ड्राई हो जाती है. ऐसे में कोल्ड क्रीम लगाने को आदत बना लें. इससे स्किन स्मूथ रहेगी और चमकदार भी. होंठों पर लिप बाम लगाकर रखें ताकि होंठ फटे नहीं. त्वचा अच्छी रहेगी तो मेकअप भी अच्छा लगेगा. हर मौसम का अलग मेकअप होता है. ठंड में मेकअप थोड़ा ब्राइट होता है. जिन कलर्स से हम गर्मी में परहेज करते हैं, उन रंगों को विंटर में यूज कर सकते हैं.

मेकअप टिप्स

– आंखों के दो लुक इस समय खासे पसंद किए जा रहे हैं. कैट और स्मोकी आई. आप डबल आईलाइनर के ऑप्शन पर भी चुन सकती हैं. आप जो भी लुक कैरी करें, उसे मस्कारे से उभारें. इस समय आप ब्राइट कलर भी लगाएंगी तो अच्छा लगेगा. ब्लू, पर्पल और ऑरेंज जैसे कलर के ऑप्शन चुन सकती हैं.

– आई लाइनर में ब्लैक कलर को अवाइड करें. इसमें चॉकलेट ब्राउन, फॉरेस्ट ग्रीन और नेवी ब्लू कलर के ऑप्शन पर जाएं. अगर आप इन कलर्स को यूज करने जा रही हैं तो, लिपस्टिक का कलर लाइट रखें. इससे ये कलर उभरकर आएंगे.

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– ब्रॉन्जर का यूज करें, लेकिन बेहद कम. थोड़ा सा ही ब्रॉन्जर त्वचा पर लगाने से चेहरा खिला सा लगता है.

– नेलपॉलिश में जो कलर आप समर में नहीं लगा पाई हैं, वह इस सीजन में लगाएं. डार्क रेड, बरगंडी, पर्पल और नेवी ब्लू जैसे कलर इस मौसम में शानदार लुक देते हैं. हां, इनको लगाने से पहले नेल्स को कोई शेप दे देंगी, तो अच्छा रहेगा. वैसे, आपको बता दें कि इस समय फ्रेंच शेप नाखून खासे ट्रेंड में हैं.

– ज्यादा बेस मेकअप का इस्तेमाल ना करें क्योंकि इससे सुन्दर दिखने की बजाय कुछ और ही असर पड़ेगा. कितनी भी ठंड हो, फाउंडेशन और मॉश्चराइजर का प्रयोग करें, जिसमें एपीएफ की मात्रा अधिक हो.

– ठण्ड में भी परफ्यूम लगाना ना भूलें.

– मैरिज सेरेमनी में बोल्ड और ब्राइट कलर्स के ऑप्शन पर जाएं. ये आपको लंबे समय तक फ्रेश लुक देंगे.

– मैट फिनिश के लिए मॉइश्चराइजर फाउंडेशन का यूज करें. यह स्किन को स्मूथ लुक भी देगा.

– शिमर और ग्लिटर की जगह हाईलाइटर का यूज करें. इससे स्किन शिमरी नहीं, ब्लकि ग्लो करेगी.

– गोल्ड आई मेकअप ही चुनें. आपका लहंगा फुशिया, रेड, ग्रीन किसी भी कलर का होगा, उसके साथ गोल्ड आई मेकअप ग्लैमरस लुक देगा. यही नहीं, किसी भी तरह की हैवी साड़ी के साथ भी आप गोल्ड आई मेकअप ही करें.

अगर फंक्शन दिन में है, तो मेकअप मिनिमम रखें. कोशिश करें कि लुक नेचरल लगे. अगर फंक्शन नाइट का है तो, मेकअप को कलरफुल रखने के साथ हैवी भी रखें. अगर शादी का समय सुबह है, तो आई मेकअप में पेस्टल शेड्स का इस्तेमाल करें.

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सजावट भी हो सकती है ऑर्गेनिक

त्योहारों का सीजन ढेरों खुशियां ले कर आता है. अकसर हम त्योहारों पर घर के लिए नई चीजें खरीदने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि इस बात पर ध्यान ही नहीं देते कि कहीं ये हमारी सहेत के लिए नुकसानदायक तो नहीं हैं. इसीलिए हम आप के घर को और्गैनिक बनाने के 10 तरीके बता रहे हैं.

लकड़ी की फिनिश मन और दिमाग को बदलने की क्षमता रखती है: लकड़ी एकमात्र ऐसी सामग्री है जिसे फिनिशिंग दे कर घर की चमक कई गुना बढ़ाई जा सकती है. यह न केवल घर की भीतरी खूबसूरती बढ़ाती है, बल्कि घर को प्राकृतिक एहसास भी देती है. फर्श से ले कर छत के बीम तक लकड़ी से सजाए जा सकते हैं. पुरानी इमारतों को लकड़ी से फिनिश दे कर कई सालों के लिए स्थाई बनाया जा सकता है.

1. पेड़ पौधे

घर में लगे पौधे हमें यह एहसास दिलाते हैं कि हरित एवं स्वच्छ वातावरण की शुरुआत घर से ही होती है. ये न केवल आकर्षक दिखते हैं, बल्कि आसपास की हवा को भी शुद्घ कर के हमें रिलैक्स करते हैं. पौधे तनाव और चिंता से राहत दिलाने और अच्छी नींद लाने में मदद करते हैं. घर में लगाने के लिए पौधों के सर्वश्रेष्ठ विकल्प हैं- ऐलोवेरा, लैवेंडर, जैसमिन व स्नेक प्लांट.

2. विंडो ब्लाइंड्स

जब आप सोना या आराम करना चाहते हैं तो आप को कमरे में अंधेरे की जरूरत होती है. इस के लिए बांस या जूट से बने प्राकृतिक ब्लाइंड्स या शेड्स चुनें. आप के परदे और्गैनिक कौटन, हैंप या लिनेन के हों. आकर्षक रंग और डिजाइन चुन कर आप अपने बैडरूम को नया लुक दे सकते हैं.

3. फर्नीचर

फर्नीचर का सही चुनाव आप के कमरे के लिए बहुत अधिक माने रखता है, क्योंकि यह ऐसी जगह है जहां आप सब से ज्यादा समय बिताते हैं. फर्नीचर ऐसा चुनें जो वातावरण के अनुकूल एवं प्राकृतिक हो और स्थाई लकड़ी या बांस का बना हो. अगर आप पेंट किया या स्टेंड फर्नीचर चुन रहे हैं तो ध्यान रखें कि इस में वीओसी रहित पेंट का इस्तेमाल किया गया हो.

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4. चादरें

क्या आप जानते हैं कि कौटन की जिन चादरों पर आप अपने जीवन का एकतिहाई हिस्सा बिताते हैं, वे रसायनों से बनी होती हैं? कौटन की चादरों में फौर्मैल्डिहाइड और कैंसर पैदा करने वाले कारक होते हैं. ये रसायन अनिद्रा, छींकों, छाती में घरघराहट और सांस की समस्याओं का कारण बन सकते हैं. अत: कौटन की बनी और्गैनिक चादरें ही खरीदें. ये बेहद मुलायम होने के साथसाथ आराम का भी एहसास देती हैं.

साथ ही गद्दे भी ऐसे चुनें जो प्राकृतिक लैटेक्स से बने हों. मैमोरी फोम और इसी तरह के अन्य पैट्रो रसायन न केवल नींद में बाधा पैदा करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक होते हैं.

5. फूल

क्या आप को वे दिन याद हैं जब लोगों के घरों में हरियाली के नाम पर कृत्रिम पौधे लगे होते थे, जो धूल की परतों से ढके होते थे? अब एक बार फिर से लोग प्रकृति की ओर रुख कर रहे हैं. घर की भीतरी साजसज्जा में प्राकृतिक फूल अपनी जगह बना रहे हैं. फूल डाइनिंग टेबल, कौफी व साइड टेबल को अनूठा प्राकृतिक एहसास देते हैं.

6. पेंट

घर की दीवारों का रंग बदलना घर को नया लुक देने का सब से आसान तरीका है. पेंट का चुनाव करते समय वीओसी रहित पेंट चुनें, जिस में हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल न किया गया हो. सुनिश्चित करें कि पेंटिंग क्षेत्र में हवा का आवागमन अच्छी तरह से हो और जब पेंट का काम पूरा हो जाए तो इसे ठीक तरह से स्टोर किया जाए.

7. रोशनी

एलईडी लाइट सामान्य बल्ब की तुलना में कई गुना प्रभावी होती है. अत: अपने पुराने बल्ब की जगह एलईडी लाइट से कमरे की चमक को बढ़ाएं. ऊर्जा की भी बचत होगी.

8. कारपेट

अगर ठंड से परेशान हैं और कमरे में कुछ गरमाहट चाहते हैं तो फर्श को गलीचे या कालीन से ढक दें. फर्श पर बिछा कालीन गरमी को कमरे से बाहर नहीं जाने देता और कमरे को गरम बनाए रखता है. कालीन कई रंगों और डिजाइनों में उपलब्ध हैं.

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9. इको फ्रैंडली मोमबत्ती

मोमबत्ती बनाने में बड़ी मात्रा में पैराफिन का इस्तेमाल होता है. पैराफिन एक पैट्रोलियम वैक्स है, जो प्राकृतिक नहीं है. यह पर्यावरण के अनुकूल नहीं है.

मोमबत्ती बनाने का ईको फ्रैंडली तरीका है ग्रीन कैंडल वैक्स का चुनाव. बी वैक्स 100 फीसदी प्राकृतिक है, इस में किसी तरह के हानिकर रसायन नहीं होते. आप इसे पिघलाए बिना ही मोमबत्ती बना सकते हैं. बी वैक्स शीट्स आसान और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है.

अमी साता, फाउंडर, अमोव

Christmas Special: फैमिली के लिए बनाएं आटे की पिन्नी

सर्दी दस्तक दे चुकी है. कुछ ही दिनों में कड़ाके की ठंड आ जाएगी. वैसे तो सर्दियों के मौसम में तरह तरह के व्यंजन खाने का अलग ही मजा है लेकिन पिन्नियों का जवाब नहीं. इस सर्दी बनाइए टेस्टी आटे की पिन्नी और रखिए ठंड से खुद को सुरक्षित.

सामग्री

गेहूं का आटा – 1/2 किलो

चीनी पिसी हुई – 250 ग्राम

देसी घी – 250 ग्राम

मावा – 250 ग्राम

खाने वाला गोंद – एक चौथाई कप

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बादाम – टूटी हुई 1/3 कप

पिस्ता – 1/4 कप

किशमिश –  1/4 कप

विधि

गोंद को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ कर एक कड़ाही में धीमी आंच पर गर्म घी में तल लें. गोंद फूलेगा. इसे कड़ाही से निकालकर एक तरफ ठंडा होने को रख दें.

अब बचे घी में आटा कुछ देर भूनें और इसमें कटे हुए मेवे भी मिलाकर कुछ और देर तक भूनें. जब आटे के सिंकने की खुशबू आने लगे तो गैस ऑफ कर दें और कुछ देर तक लगातार चलाते रहें, ताकि आटा नीचे लगकर जल ना जाए.

अलग से मावा भी सुनहरा होने तक भून लें. भूनी गोंद को दरदरा कूट लें. अब जब आटा इतना गर्म रह जाए कि पिसी चीनी डालने पर पिघले नहीं, तो इसमें बूरा चीनी, गोंद व मावा अच्छी तरह मिलाएं और हाथ में घी लगाकर मनचाहे आकार में गोल लड्डू बना लें.

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