फटाफट काम के लिए ऐसे करें किचन तैयार

रसोईघर किसी भी घर का बेहद अहम हिस्सा होता है. त्योहारी मौसम में अपने रसोईघर को किनकिन चीजों से सजाएं आइए जानते हैं.

रसोईघर की सजावट

रंग

अपनी किचन के लिए उपयुक्त कलर का चुनाव करना बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इस से उस की पूरी छवि निर्धारित होती है. बैगनी या हरे जैसे गहरे और गंभीर रंगों से परहेज करें. मनभावन वातावरण बनाने के लिए इन की जगह पीला, मटमैला, नारंगी आदि तटस्थ रंगों का चयन करें.

टाइल्स

सजावटी टाइल्स किचन की दीवारों को दागधब्बों से बचाने के साथसाथ उन का आकर्षण और ज्यादा बढ़ा देती हैं. इन दिनों औनलाइन और औफलाइन दोनों तरीकों से किचन टाइल्स उपलब्ध हैं. पसंदीदा वैराइटीज हैं- मोजेक, सिरैमिक और प्रिंटेड सिरैमिक, रस्टिक, मैट वाल टाइल्स और ग्लौसी सीरीज डिजिटल वाल टाइल्स आदि. आप फलों एवं अन्य भोजन सामग्री के चित्र उकेरी टाइल्स भी पसंद कर सकती हैं.

खिड़कियां

खिड़कियां किसी भी रसोईघर का महत्त्वपूर्ण हिस्सा होती हैं. इसलिए सर्वोत्तम वैराइटी में ही पैसे लगाएं. विंडोज का किचन में प्राकृतिक रोशनी को प्रवेश देने का महत्त्वपूर्ण काम होता है. आजकल झिलमिल सी दिखने वाली खिड़कियां बहुत पसंद की जा रही हैं. रसोईघर को आकर्षक बनाने के लिए कई इंटीरियर डिजाइनर इन का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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चिमनी

किचन चिमनी में हर साल बहुत बदलाव आ रहे हैं और इस की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि यह मौड्यूलर किचन का अनिवार्य हिस्सा बन गई है. किचन चिमनी मुख्यरूप से 3 प्रकार के फिल्टर्स के साथ आ रही हैं- कैसेट फिल्टर, कार्बन फिल्टर और बैफल फिल्टर. इन में बैफल फिल्टर भारतीय किचन के लिए सर्वोत्तम है.

किचन काउंटर टौप: उपयुक्त किचन

टौप का चयन करने से किचन की उत्पादकता तो बढ़ती ही है, साथ ही इस का आकर्षण भी बढ़ जाता है. यों तो ग्रेनाइट किचन टेबल या टौप बहुत लोकप्रिय हैं, लेकिन आप संगमरमर (काला और सफेद) और विभिन्न प्रकार की चीनीमिट्टी का भी पसंद कर सकते हैं. किचन काउंटर टौप्स में अब तो कौंपैक्ट क्वार्ट्ज का भी जलवा है और नए जमाने के लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं.

रोशनी

रसोईघर में प्रकाश की व्यवस्था बेहद अनिवार्य है. इसलिए अपनी किचन के संपूर्ण सौंदर्यीकरण के लिए अच्छी क्वालिटी के लैंप, बल्ब आदि लगाने चाहिए. एलईडी और हैलोजन किचन लाइट्स भी काफी पसंद की जा रही हैं.

किचन कैबिनेट

जब बात स्टोरेज की आती है, तो किचन कैबिनेट्स बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं. प्रीलैमिनेटेड पार्टिकल बोर्ड्स, हार्डवुड, मरीन प्लाई, हाइब्रिड वुड प्लास्टिक कंपोजिट आदि कुछ बेहतरीन किचन कैबिनेट्स हैं.

रसोईघर की सजावट के इन साधनों के अलावा आप किचन केरौसेल का भी इस्तेमाल कर सकती हैं और जगह बचाने के लिए किचन में काम के लिहाज से ऐडजस्ट होने योग्य टेबल भी खरीद सकती हैं.

रसोईघर का सामान

चलिए अब मौजूदा वक्त में रसोईघर में इस्तेमाल हो रहे विभिन्न प्रकार के सामान की जानकारी देते हैं, जो आप के रसोईघर को और भी आकर्षक बना देंगे.

एअर फ्रायर

यह ऐसा भोजन तैयार करता है, जिस में तेल के जरिए फ्राई किए गए भोजन की तुलना में 80% कम फैट होता है और साथ ही इस के स्वाद में भी कमी नहीं आती है. घर पर एअर फ्रायर होने से पारंपरिक डीप फ्रायर के विपरीत अधिक तेल का इस्तेमाल किए बिना आप पोटैटो चिप्स, चिकन, फिश या पेस्ट्रीज आदि को फ्राई कर सकती हैं.

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जूसर

ताजा जूस पैक्ड जूस की तुलना में बेहतर रहता है. यह आप को न सिर्फ तरोताजा बनाए रखेगा, बल्कि उमस वाले इस मौसम में पानी की कमी से भी बचाए रखेगा.

स्मार्ट कुकी ओवन

10 मिनट के कम से कम वक्त की तैयारी में फ्रैश बेकिंग के लिए स्मार्ट कुकी ओवन शानदार है.

शावरमा ग्रिलर

शावरमा ग्रिलर के साथ घर पर ही शावरमा बनाएं. ये न सिर्फ स्वादिष्ठ होते हैं, बल्कि इन में कई स्वास्थ्यवर्धक गुण भी मौजूद होते हैं. अच्छी तरह से तैयार शावरमा प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के मजबूत स्रोत हैं. इन में स्वस्थ फैट होता है.

सुनील गुप्ता

संस्थापक एवं निदेशक, ऐक्सपोर्ट्स इंडिया डौट कौम

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Winter Special: सर्दियों में बनाएं ये टेस्टी और हैल्दी Recipe

सर्दियों में हमारी पाचन क्षमता बढ़ जाती है इसीलिए सर्दियों को सेहत बनाने वाला मौसम भी कहा जाता है. इसके अतिरिक्त इन दिनों में भांति भांति की सब्जियां और फल भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहते हैं जिनसे भांति भांति के व्यंजन बनाना भी बहुत आसान हो जाता है. आज हम आपको ऐसे ही कुछ व्यंजन बनाना बता रहे हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ साथ हैल्दी भी हैं, तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाते हैं-

-चिली मूंगलेट

कितने लोगों के लिए         4

बनने में लगने वाला समय     45 मिनट

मील टाइप                          वेज

सामग्री

धुली मूंगदाल                        1 कप

दही                              1 टेबलस्पून

अदरक, हरी मिर्च पेस्ट     1 टीस्पून

प्याज बारीक कटा           1

पनीर किसा                     1 कप

नमक                              स्वादानुसार

ईनो फ्रूट साल्ट                 1 सैशे

बटर                               2 टेबलस्पून

राई के दाने                     1/2 टीस्पून

करी पत्ता                       6

विधि

मूंगदाल को 4-5 घण्टे के लिए भिगो दें. 5 घण्टे बाद दाल का पानी निकालकर मिक्सी में पीस लें. अब इसमें दही और नमक डालकर 20 मिनट के लिए रख दें. 20 मिनट बाद अदरक, हरी मिर्च पेस्ट, प्याज, और पनीर मिलाएं. अब इसमें ईनो फ्रूट सॉल्ट डालकर अच्छी तरह चलाकर स्टीमर में रखकर 20 मिनट तक पकाएं. ठंडा होने पर डिश से निकाल लें. अब एक नॉनस्टिक पैन में बटर गर्म करके राई और करी पत्ता डालकर तैयार मूंगलेट को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंककर हरी चटनी और टोमेटो सॉस के साथ सर्व करें.

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-बथुआ बूंदी रायता

कितने लोंगों के लिए             6

बनने में लगने वाला समय     20 मिनट

मील टाइप                         वेज

सामग्री

ताजा दही                            500 ग्राम

बूंदी                                     100 ग्राम

उबला बथुआ                        500 ग्राम

पानी                                    2 कप

काला नमक                          1/2 टीस्पून

काली मिर्च पाउडर                 1/2टीस्पून

हींग                                     1चुटकी भर

जीरा                                    1/4 टीस्पून

चाट मसाला                        1/2 टीस्पून

हरी मिर्च पेस्ट                       1/2 टीस्पून

सरसों का तेल                       1/4 टीस्पून

विधि

बथुए को मिक्सी में पीस लें. दही को पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंटकर पिसा बथुआ और बूंदी  मिलाकर 30 मिनट के लिए ढककर रख दें. 30 मिनट बाद तेल को बघार पैन में गर्म करके हींग, जीरा तड़काकर दही में डालें. अब हरी मिर्च पेस्ट, चाट मसाला, काला नमक और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह चलाकर गरम गरम रोटी परांठा के साथ सर्व करें.

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-बाजरा कटलेट

कितने लोगों के लिए               6

बनने में लगने वाला समय        30 मिनट

मील टाइप                             वेज

सामग्री

बाजरे का आटा                    2 कप

उबले आलू                         4

उबली मटर                          1/2 कप

बारीक कटी हरी मिर्च             4

बारीक कटा प्याज                  1

नमक                                   स्वादानुसार

अमचूर पाउडर                     1 टीस्पून

गरम मसाला                        1/2 टीस्पून

लाल मिर्च पाउडर                  1/2 टीस्पून

चाट मसाला                          1/2 टीस्पून

तलने के लिए तेल              पर्याप्त मात्रा में

विधि

आलू को छीलकर मैश कर लें. एक बाउल में समस्त सामग्री को एक साथ अच्छी तरह मिला लें. तैयार मिश्रण से 1 टेबलस्पून मिश्रण लेकर हथेली पर रखकर चपटा करें.इसी प्रकार सारी टिक्कियां तैयार कर लें. अब इन्हें गर्म तेल में मंदी आंच पर सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें. बटर पेपर पर निकालकर हरी चटनी या टोमेटो सॉस के साथ सर्व करें.

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गुप्त रोग लाइलाज नहीं

सैक्स का जिक्र आते ही युवा मन में एक विशेष प्रकार की सरसराहट होने लगती है. मन हसीन सपनों में खो जाता है, क्योंकि यह प्रक्रिया है 2 जवां दिलों के आपसी मिलन की.

रमेश का विवाह नेहा से तय हो गया था. रमेश नेहा की खूबसूरती देख पहली ही नजर में उस का दीवाना हो गया था. नेहा को ले कर उस ने हसीन सपने बुन रखे थे. बस, इंतजार था शादी व मिलन की रात का.

रमेश ने पहले कभी शारीरिक संबंध नहीं बनाए थे, इसलिए उस के लिए तो यह नया अनुभव था. मिलन की रात जब रमेश ने नेहा को अपने आगोश में लिया तो उस का धैर्य जवाब देने लगा. उस ने जल्दी से नेहा के कपड़े उतारे और सैक्स को तत्पर हो गया, पर अभी वे एकदूसरे में समा भी न पाए थे कि वह शांत हो गया.

नेहा अतृप्त रह गई. जिस आनंद के सपने उस ने संजो रखे थे सब धराशायी हो गए. रमेश अपने को बहुत लज्जित महसूस कर रहा था.

रमेश जैसी स्थिति किसी भी युवा के साथ आ सकती है. अकसर युवा इसे अपनी शारीरिक कमजोरी या गुप्त रोग मान लेते हैं और उन्हें लगता है कि वे कभी शारीरिक संबंध स्थापित नहीं कर पाएंगे.

बहुत से युवा अपने मन की बात किसी से संकोचवश कर नहीं पाते और हताशा का शिकार हो कर आत्महत्या तक कर लेते हैं. कुछ युवा नीमहकीमों के चक्कर में पड़ जाते हैं जो उन्हें पहले नामर्द ठहराते हैं और फिर शर्तिया इलाज की गारंटी दे कर लूटते हैं. युवाओं को समझना चाहिए कि ऐसी समस्या मानसिक स्थिति के कारण उत्पन्न होती है.

प्रसिद्ध स्किन व वीडी स्पैशलिस्ट डा. ए के श्रीवास्तव का कहना है कि ‘पहली रात में सैक्स न कर पाना एक आम समस्या है, क्योंकि युवाओं को सैक्स की जानकारी नहीं होती. वे सैक्स को भी अन्य कामों की तरह निबटाना चाहते हैं, जबकि सैक्स में धैर्य, संयम और आपसी मनुहार अत्यंत आवश्यक है.

डा. श्रीवास्तव कहते हैं कि सैक्स से पहले फोरप्ले जरूरी है, इस से रक्त संचार तेज होता है और पुरुष के अंग में पर्याप्त कसाव आता है. कसाव आने पर ही सैक्स क्रिया का आनंद आता है और वह पूर्ण होती है. इसलिए युवाओं को सैक्स को गुप्त रोग नहीं समझना चाहिए. यदि फिर भी कोई समस्या है तो स्किन व वीडी विश्ेषज्ञ की राय लें.

आइए, एक नजर डालते हैं कुछ खास यौन रोगों पर :

शीघ्रपतन

अकसर युवाओं में शीघ्रपतन की समस्या पाई जाती है. यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि दिमागी विकारों की वजह से ऐसा होता है. इस समस्या में युवा अपने पार्टनर को पूरी तरह से संतुष्ट करने से पहले ही स्खलित हो जाते हैं. यह बीमारी वैसे तो दिमागी नियंत्रण से ठीक हो जाती है, लेकिन अगर समस्या तब भी बनी रहे तो किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श ले कर इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है.

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नपुंसकता

नपुंसकता एक जन्मजात बीमारी है. इस रोग से ग्रसित लोग स्त्री को शारीरिक सुख देने में सक्षम नहीं होते और न ही संतान पैदा कर पाते हैं. कुछ युवाओं में क्रोमोसोम्स की कमी भी नपुंसकता का कारण होती है. युवाओं को शादी से पहले पता ही नहीं चलता कि उन के क्रोमोसोम्स या तो सक्रिय नहीं हैं या उन में दोष है. कुछ युवा शुरू में नपुंसक नहीं होते पर अन्य शारीरिक विकारों की वजह से वे सैक्स क्रिया सही तरीके से नहीं कर पाते. इसलिए उन को नपुंसक की श्रेणी में रखा जाता है. आजकल तो इंपोटैंसी टैस्ट भी उपलब्ध हैं. अगर ऐसी कोई समस्या है तो इस टैस्ट को अवश्य कराएं.

पुरुष हारमोंस की कमी

पुरुषों में टैस्टेटोरोन नाम का हारमोन बनता है. यही हारमोन पुरुष होने का प्रमाण है. कभीकभी किन्हीं वजहों से टैस्टेटोरोन स्रावित होना बंद हो जाता है तो वह व्यक्ति गुप्त रोग का शिकार हो जाता है. 50 से 55 वर्ष की आयु के बाद इस हारमोन के बनने की गति धीमी पड़ जाती है इसलिए ऐसे व्यक्ति सैक्स क्रिया में जोश से वंचित रह जाते हैं.

सिफलिस

यह वाकई एक गुप्त रोग है जो किसी अनजान के साथ यौन संबंध बनाने से होता है. अकसर यह रोग सफाई न रखने या ऐसे पार्टनर से सैक्स संबंध कायम करने से होता है जो अलगअलग लोगों से सैक्स संबंध बनाता है. इस रोग में यौनांग पर दाने निकल आते हैं. कभीकभी इन दानों से खून या मवाद का रिसाव तक होता रहता है. यदि आप के यौन अंग पर ऐसे दाने उभरते हैं तो तुरंत त्वचा व गुप्त रोग विशेषज्ञ से राय लें और इलाज कराएं. इस का इलाज संभव है.

जिस तरह पुरुषों में यौन या गुप्त रोग होते हैं, उसी तरह महिलाओं में भी गुप्त रोग हो सकते हैं. अकसर बहुत सी युवतियों की सैक्स में रुचि नहीं होती. सैक्स के नाम से वे घबरा जाती हैं ऐसी युवतियां या तो बचपन में किसी हादसे का शिकार हुई होती हैं या फिर किसी गुप्त रोग से पीडि़त होती हैं, यहां तक कि वे शादी करने तक से घबराती हैं.

महिलाओं के कुछ खास गुप्त रोग

बांझपन

युवतियों में 12-13 वर्ष की उम्र से माहवारी आनी शुरू हो जाती है. कभीकभी यह 1-2 साल आगेपीछे भी हो जाती है पर ऐसी भी युवतियां हैं जिन के माहवारी होती ही नहीं. ऐसी युवतियां बांझपन का शिकार हो जाती हैं. स्त्री बांझपन भी पुरुष नपुंसकता की तरह जन्मजात रोग है. बहुतों में अनेक शारीरिक व्याधियों के चलते भी हो जाती है लेकिन वह अस्थायी होती है और इलाज से ठीक भी हो जाता है. अगर किसी किशोरी को माहवारी की समस्या है तो उसे तुरंत किसी योग्य स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.

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जननांगों में खुजली

जब से समाज में खुलापन आया है युवा मस्ती में कब हदें पार कर देते हैं पता ही नहीं चलता. चूंकि इन्हें जननांगों की साफसफाई कैसे रखी जाए, यह पता नहीं होता इसलिए ये खुजली जैसे यौन संक्रमणों का शिकार हो जाते हैं. यदि बौयफ्रैंड को कोई यौन संक्रमण है तो गर्लफ्रैंड को इस यौन संक्रमण से बचाया नहीं जा सकता. अत: दोनों को ही शारीरिक संबंध बनाने से पहले अपने यौनांगों की अच्छी तरह सफाई कर लेनी चाहिए.

एंड्रोजन हारमोन का अभाव

जिस तरह पुरुषों में पुरुष हारमोन टैस्टेटोरोन होता है, उसी तरह युवतियों में एंड्रोजन हारमोन होता है. जिन युवतियों में इस हारमोन की कमी होती है, उन में सैक्स के प्रति उत्साह कम देखा गया है, क्योंकि यही हारमोन सैक्स क्रिया को भड़काता है. यदि कोई युवती एंड्रोजन हारमोन की कमी का शिकार है तो उसे तुरंत गाइनोकोलौजिस्ट से राय लेनी चाहिए. यह कोई लाइलाज रोग नहीं है.

लिकोरिया

लिकोरिया गंदगी की वजह से होने वाला एक महिला गुप्त रोग है. इस रोग में योनि से सफेद बदबूदार पानी का स्राव होता रहता है, जिस से शरीर में कैल्शियम व आयरन की कमी हो जाती है. इस रोग से बचने के लिए युवतियों को अपने गुप्तांगों की नियमित सफाई रखनी चाहिए और किसी दूसरी युवती के अंदरूनी वस्त्र नहीं पहनने चाहिए. लिकोरिया की शिकार युवतियों को तुरंत लेडी डाक्टर से सलाह लेना चाहिए, वरना यह रोग बढ़ कर बेकाबू हो सकता है.

सैक्स में भ्रांतियां न पालें

सैक्स की अज्ञानता की वजह से अकसर युवकयुवतियां सैक्स को ले कर तरहतरह की भ्रांतियां पाल लेते हैं.

हस्तमैथुन

यह एक स्वाभाविक क्रिया है. अकसर युवकों को हस्तमैथुन की आदत पड़ जाती है. ज्यादा हस्तमैथुन करने वाले युवकों को लगता है कि उन का अंग छोटा या टेढ़ा हो गया है और वे विवाह के बाद अपनी पत्नी से शारीरिक संबंध बनाने में कामयाब नहीं होंगे. कई नीमहकीम भी युवकों को डरा देते हैं कि हस्तमैथुन से अंग की नसें कमजोर पड़ जाती हैं और वे अपनी पत्नी को खुश नहीं रख सकेंगे, पर वास्तव में ऐसा नहीं है. हस्तमैथुन शरीर की आवश्यकता है. शरीर में वीर्य बनने पर उस का बाहर आना भी जरूरी है. इस में किसी प्रकार की कोई बुराईर् नहीं है. युवक ही नहीं युवतियां भी हस्तमैथुन करती हैं. डाक्टरों का भी मत है कि हस्तमैथुन का कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता.

ज्यादा सैक्स सेहत के लिए हानिकारक

अकसर लोगों को यह कहते सुना जाता है कि ज्यादा सैक्स सेहत के लिए हानिकारक है पर ऐसा बिलकुल भी नहीं है. बल्कि सैक्स से महरूम रहना सेहत पर असर डालता है. सैक्स से मानसिक थकावट कम होती है, चित्त प्रफुल्लित रहता है जो सेहत के लिए अत्यंत जरूरी है.

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साइनोसाइटिस के कारण मैं काफी परेशान हूं, कृपया बताएं मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल-

मैं 22 वर्षीय युवती हूं. बी.एससी. कर रही हूं. काफी समय से साइनोसाइटिस से परेशान हूं. मेरी नाक अकसर बंद रहती है, जिस का असर मेरे कानों पर भी होने लगा है. मुझे कम सुनाई देने लगा है. एक डाक्टर की देखरेख में काफी समय से दवा चल रही है पर आराम नहीं आ रहा. कृपया बताएं मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब-

हमारी नाक के पीछे के हिस्से और कानों के बीच एक लंबी नली होती है, जिसे यूसटेशियन ट्यूब कहते हैं. संक्रमण, ऐलर्जी, बारबार सर्दीजुकाम या फिर साइनोसाइटिस होने पर यह नली कभीकभी बंद हो जाती है. इस से कानों के भीतर हवा का संतुलन बिगड़ जाता है और सुनने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है.

साइनोसाइटिस के समुचित इलाज और कान के एक छोटे से औपरेशन से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है. अच्छा होगा कि आप इस संबंध में किसी योग्य ई.एन.टी. विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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बड़े और बच्चों, सभी में साइनस के लक्षण एक जैसे ही होते हैं. इसके अलावा, सर्दी-जुकाम, फ्लू, अस्थमा, क्रौनिक औबस्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज़ (COPD) और साइनस के काफी लक्षण करीब-करीब एक जैसे होते हैं. हालांकि इन सभी बीमारियों में कुछ फर्क भी होता है:

किसी को साइनस की प्रौब्लम अगर कुछ बरसों तक रहे तो वह आगे चलकर अस्थमा में बदल सकती है. हालांकि बच्चों में यह समय 8 से 10 साल का होता है.

ऐसे करें बचाव

1- एलर्जी से बचने के लिए बहुत ज्यादा भारी-भरकम और गद्देदार फर्नीचर से परहेज करें. अपने तकियों, बिस्तरों और कारपेट की नियमित सफाई करें. गलीचों और पायदानों की सफाई का भी ध्यान रखें. परफ्यूम आदि की गंध से दूर रहें. एयर पलूशन से बचें.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Balika Vadhu 2 की ‘आनंदी’ ने दिखाईं अदाएं, Shivangi Joshi पर फैंस ने लुटाया प्यार

टीवी के पौपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) से घर घर में पहचान बनाने वाली शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) इन दिनों कलर्स के सीरियल बालिका वधू 2 (Balika Vadhu 2) में आनंदी के किरदार में फैंस का दिल जीत रही हैं. नायरा से अलग आनंदी के रोल में शिवांगी धमाल मचा रही हैं. इसी बीच शिवांगी जोशी ने अपना नया अवतार शेयर किया है. आइए आपको दिखाते हैं शिवांगी जोशी की लेटेस्ट फोटोज…

शिवांगी ने शेयर किया नया लुक

हाल ही में एक्ट्रेस शिवांगी जोशी ने अपने नए टीवी सीरियल बालिका वधू 2 की आनंदी बनकर कुछ फोटोज शेयर की हैं, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही हैं. दरअसल, शिवांगी जोशी ने मल्टीकलर लहंगा कैरी किया है, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही हैं. इस लुक के साथ मैचिंग ज्वैलरी उनके लुक पर चार चांद लगा रहा है. वहीं फैंस शिवांगी जोशी का ये नया लुक देखकर फोटोज पर जमकर कमेंट पर तारीफें कर रहे हैं.

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आनंदी बनकर आनंद संग शरमाईं शिवांगी

इसके अलावा हाल ही में शिवांगी जोशी ने अपने आनंदी के नए रोल में आनंद संग कुछ फोटोज शेयर की थीं, जिसमें वह बेहद सिंपल. लेकिन खूबसूरत लग रही थीं. फैंस को उनका ये लुक काफी पसंद आया था. वहीं बालों में गुलाब लगाए वह शरमाते हुए पोज देती नजर आईं थीं.

 

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सीरियल की बात करें तो इन दिनों शिवांगी जोशी के सीरियल बालिका वधू 2 में इन दिनों आनंदी कौलेज जाती नजर आ रही हैं. वहीं आनंद, आनंदी की मदद कर सके. लेकिन आनंदी की जिंदगी में परेशानियां आती जा रही हैं. इसी बीच खबरें थीं कि सीरियल में मोहसिन खान की एंट्री भी होने वाली है. हालांकि अभी तक कोई औफिशियल अनाउंसमेंट नही हुई हैं.

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Anupama को मालविका के खिलाफ भड़काएगी काव्या, देखें वीडियो

स्टार प्लस का सीरियल अनुपमा (Anupama) एक बार फिर टीआरपी चार्ट्स में पहले नंबर पर पहुंच गया है. वहीं शो में अनुज (Gaurav Khanna) की बहन मालविका (Aneri Vajani) की एंट्री भी हो चुकी है, जिसके चलते अनुज  (Gaurav Khanna) और अनुपमा (Rupali Ganguly) के बीच दूरियां भी दिख रही हैं. लेकिन अब इन दूरियों का फायदा काव्या उठाती हुई नजर आने वाली हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Anupama Latest Update)…

मालविका के खिलाफ भड़काएगी काव्या

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि मालविका, अनुज का हाथ पकड़कर उसे घर चलने के लिए कहेगी. वहीं काव्या, अनु को ताना मारेगी कि अनुज उसे अकेला छोड़कर अपनी बहन के साथ घर चला गया. लेकिन काव्या को करारा जवाब देते हुए अनुपमा कहेगी कि उसे चिंता करने की जरुरत नहीं है बल्कि वह उसके और उसके पति वनराज के रिश्ते के बारे में सोचने के लिए कहेगी. इसी बीच, बा, परिवार से कहेगी कि अनु के अनुज के घर में रहने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मालविका को हो सकती है.

 

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काव्या करती है सवाल

अब तक आपने देखा कि काव्या, अनुपमा से मालविका के बारे में पूछती है. लेकिन अनुपमा उसे कहती है कि वह नहीं जानती है कि कौन है. वहीं इसी के चलते काव्या उससे कहती है कि अनुज ने न केवल उससे अपने प्यार को 26 साल तक छुपाया बल्कि मालविका के बारे में भी नहीं बताया, सभी पुरुष एक समान ही होते हैं. काव्या की ये बात सुनकर अनुपमा परेशान नजर आती है.

 

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अनुज मांगता है माफी

दूसरी तरफ, अनुज सभी को बताता है कि मालविका उसकी बहन है, जिसके बाद जहां पूरा परिवार खुश होता है तो वहीं काव्या एक बार फिर अपने लिए परेशान हो जाती है कि कहीं मालविका उसके और वनराज की जिंदगी में प्रौब्लम न ला दे. वहीं समर, अनुपमा के लिए परेशान होता है कि उसे मालविका के बारे में खबर नहीं थी. इसी बीच अनुज, अनु से माफी मांगता है. लेकिन वह कहती है कि उसके पास सवाल है और भरोसा भी है क्योंकि वह जानती है कि वह कभी भी कुछ भी नहीं छिपाएगा,  जो जरुरी हो.

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दहेज माने क्या

लेखक -अमन दीप   

दहेज कहूं या सरेआम दी जाने वाली रिश्वत, बात तो एक ही है. चलिए, सारी लड़ाई ही खत्म कर देते हैं आज. आज सवाल भी खुद कर लेते हैं और उस का जवाब भी खुद दे देते हैं.

तर्क : शादी एक सम  झौता है.

जवाब : चलिए, मान लिया कि शादी एक ‘सम  झौता’ है. ‘डील’ कह लीजिए. सम  झौता करने में शर्म आए न आए, सम  झौता बोलने में शर्म जरूर आती है.

तो भैया, यह कौन सी डील हुई? डील में तो एक हाथ से लेना, एक हाथ से देना होता है. आप तो लड़की भी दे रहे और उस के साथ उस का ‘पेमैंट’ भी आप कर रहे. ऐसे कैसे चलेगा मायके वालो?

तर्क : लड़की पराया धन होती है.

जवाब : भई, जब लड़की है ही उन की, जिन को आप सौंप आए तो किस बात की ‘भुगतान राशि’ भर आए भाईसाहब?

लड़की है कि आप की पौलिसी? भरे जा रहे हैं बिना सोचेसम  झे?

अपना धन भी आप देंगे, पराए लोगों का धन भी आप देंगे और   झुकेंगे भी आप ही जीवनभर? खुद के लिए तालियां भी खुद ही बजा लेंगे न?

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तर्क : हम यह सब सामान अपनी बेटी की सुखसुविधा के लिए दे रहे हैं.

जवाब : एक बात बताइए, जब सुखसुविधा का सामान आप को ही जुटा कर देना पड़ रहा है, तब या तो आप ने लड़का ही ऐसा देखा है जिस के पास खुद का कुछ सामान नहीं है तब तो ठीक है क्योंकि अपनी जिंदगी में लड़का पैदा कर के बस उन्होंने आप ही के ट्रक भर सामान भेजने का इंतजार किया है.

और अगर आप कहेंगे, लड़का तो संपन्न है, तो भैया, दोदो बार फ्रिज, डबलबैड, डाइनिंग सैट दे कर क्या करिएगा?

तर्क : देना पड़ता है, सामने वाले क्या सोचेंगे?

जवाब : एक काम करिए, सामने वाले की सोच की ही चिंता कर लीजिए आप. अपने बच्चे की खुशी, स्वाभिमान आदि सब बाद में. सब से पहले समाज और ससुराल.

बेहतर होगा, आप सामने वाली ‘पार्टी’ ही बदल लें. हो सकता है इस से अच्छी ‘डील’ आप को मिल जाए.

तर्क : लोग क्या कहेंगे?

जवाब : सब से बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग!

यह बताइए, जो कुछ सामग्री आप वहां डिस्प्ले में लगाने वाले हैं, उन में से कितने का पेमैंट आप के ‘लोग’ करने वाले हैं?

या उन में से कुछ भी उन के घर जाने वाला है? नहीं न. तो वे क्या सोचेंगे, इस से फर्क पड़ने की एक वजह बता दीजिए, बस.

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सचाई यह है कि- दहेज न उपहार है न उपकार.

समय आ गया है, सच अपनाने की हिम्मत रखें.

सरासर गलत इस परंपरा को अपने रिवाज, समाज, लिहाज, मुहताज जैसे शब्दों की दीवार के पीछे छिपाना बंद कीजिए.

Christmas Special: घर पर बनाएं क्रिसमस ट्री

क्रिसमस दुनिया के हर कोने में उल्लास के साथ मनाया जाता है. इस मौके पर लोग घरों में तरह-तरह के पकवान बनाते हैं, उपहार बांटते हैं और अपने घरों को विशेष तौर पर सजाते हैं. रोशनी और लड़ियों से सजे घर बेहद आकर्षक नजर आते हैं.

बहुत से लोग मार्केट से घर सजाने का सामान लेते है जिसमें बहुत खर्च होता है. आज हम आपको ऐसे तरीके बताएंगे जिससे आप घर बैठे ही क्रिसमस डेकोरेशन का सामान तैयार कर सकती हैं. इससे आपका खर्चा भी कम होगा और घर भी डेकोरेट हो जाएगा.

इस दिन एक चीज जो सबसे खास होती है, वो है क्रिसमस ट्री. लोग अपने घरों में क्रिसमस ट्री को तरह-तरह से सजाते हैं. कुछ लोगों के घरों में नेचुरल क्रिसमस ट्री होते हैं तो कुछ आर्टिफि‍शियल क्रिसमस ट्री को विभिन्न तरीकों से सजाते हैं.

बिना क्रिसमस ट्री के क्रिसमस पर्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. यूं तो बाजार में पहले से ही सजे-सजाए क्रिसमस ट्री भी मिलते हैं लेकिन अगर आप इन्हें घर लाकर सजाएं और बनाएं तो अपनी पसंद के अनुसार इसमें चीजों को सुसज्ज‍ि‍त कर सकती हैं. तो आइए जानते हैं कि कैसे हम इस दिन अपने घर को सजा सकते हैं.

क्रिसमस ट्री

क्रिसमस ट्री को बहूत ही आसानी से घर पर बनाया जा सकता है. सबसे पहले क्ले की मदद से क्रिसमस ट्री की तीन लेयर बनाएं. इन लेयर को और्गेनिक ग्लू से आपस में जोडें, फिर परतों को अलग-अलग रंगों से सजाएं.

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सांता क्लौज

घर में पड़ी बेकार ऊन से सांता क्लौज बनाएं. सफेद मोजो और धागों से भी सांता क्लौज बनाया जा सकता है. सबसे पहले क्ले की मदद से सांता क्लौज का मुंह बनाएं. जूट का कपड़े से उसकी हैट बनाएं और बाद में पुरानी ऊन को लेकर सांता की दाढ़ी बनाएं.

पालना

पालना बनाने के लिए मिट्टी में पानी डालकर उसको अच्छे से आटे की तरह मिला लें. उसके बाद मिट्टी से पालना बनाएं. आप चाहे तो इस मिट्टी से सांता क्लौज के परिवार की छोटी-छोटी मूर्तियां भी बना सकती हैं.

स्नो मैन

स्नो मैन बनाने के लिए सफेद रंग के दो मोजे लें. आंखे बनाने के लिए बटन लें. अब मोजो को सिलें या आपस में जोड़े. मोजो को सिलने के बाद उसमें रूई भरें और मोजों को नीचे से सिल दे. अब बटन से आंखे बनाएं. इस तरह घर पर ही स्नो मैन तैयार करें.

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सांता के स्टौकिंग्ज

सांता के स्टौकिंग्ज बनाने के लिए लाल रंग के पुराने पडे मोजे लें. मोजे को किनारों से अलग रंग की सोक्स से गांठ लगाएं. इस गांठ को बो शेप दें. अब आप इसको घर में कहीं पर भी बांध सकती हैं.

Christmas Special: किड्स का फेवरेट चॉकलेट पराठा

मम्‍मियों के लिये बच्‍चों को खाना खिलाना मानों एक जंग लड़ने के समान होता है. इस बात से लगभग हर छोटे बच्‍चे की मम्‍मी सहमत होंगी. आपने अपने बच्‍चे को खाना खिलाने के नए नए तरकीब जरुर निकाले होंगे, लेकिन बच्‍चों को तो कुछ अच्‍छा ही नहीं लगता.

अगर आप चाहें तो उनके लिये चॉकलेट पराठा बना सकती हैं क्‍योंकि चॉकलेट तो वैसे भी बच्‍चों को काफी पसंद होती है. चॉकलेट पराठा टेस्‍ट में काफी अच्‍छा होता है इसलिये बच्‍चों को वह जरुर पसंद आएगा

कितने- 4 सदस्‍यों के लिये

तैयारी में समय- 15 मिनट

पकाने में समय- 10 मिनट

सामग्री-

– चॉकलेट पेस्‍ट- 1 कप

– गेहूं का आटा- 3 कप

– तेल

– नमक

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विधि-

– एक कटोरे में आटा, नमक और पानी मिला कर नरम गूथ लें.

– अब गूथे हुए आटे में से थोड़ा सा हिस्‍सा निकालें और उसे मसल कर बेल लें.

– बेले हुए हिस्‍से में चॉकलेट पेस्‍ट बीच में रख कर फैलाएं.

– अब आटे को सब तरफ से बंद करें और दुबारा बेलें.

– फिर गरम तवे पर तेल लगा कर पराठे सेकें.

– पराठे को दोंनो ओर गोल्‍डन ब्राउन होने तक सेंके.

– आपका पराठा सर्व करने के लिये तैयार है.

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ओवेरियन कैंसर क्या आनुवंशिक रोग है, मैं क्या करुं?

सवाल-

मेरी मां को डिंबाशय का कैंसर था. लेकिन अब वे उपचार से ठीक हो चुकी हैं. हाल ही में मेरी चाची को भी डिंबाशय के कैंसर का पता चला है. मैं ने सुना है कि डिंबाशय का कैंसर आनुवंशिक रोग है, जिस के कारण मुझे इस की चपेट में आने की आशंका है. कृपया बताएं कि मुझे किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और क्या मुझे किस प्रकार की जांच करानी चाहिए?

जवाब-

डिंबाशय के कैंसर के कुल मामलों में 5 से 10% मामले ही आनुवंशिक होते हैं. इस रोग का पारिवारिक इतिहास होने के कारण आप के समक्ष जीन के उत्परिवर्तित होने का उच्चस्तरीय खतरा रहता है. कैंसर के शीघ्र डाइग्नोसिस के लिए कुछ जांचें कराना जरूरी होता है. डिंबाशय के कैंसर के शुरू के चरणों में कोई लक्षण प्रकट नहीं होता, लेकिन यदि आप श्रोणिक्षेत्र अथवा आमाशय अथवा गैस, पेट फूलने जैसी आंत्रजठरीय समस्याओं जैसे लक्षणों को महसूस करती हैं, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें. अल्ट्रासाउंड के जरीए इस का डाइग्नोसिस किया जा सकता है.

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भारत में हर वर्ष करीब 1,60,00 महिलाओं में स्त्री रोग संबंधी कैंसर का पता चलता है. सब से व्यापक सर्वाइकल कैंसर है लेकिन इस के अन्य प्रकार भी हैं- अंडाशय, गर्भाशय, योनी या जननांग संबंधी. कैंसर की वजह से ज्यादातर मौतें गैरजरूरी रूप से लक्षणों व जांच की जरूरत के बारे में जागरूकता की कमी के चलते होती हैं. ऐसे में इन कैंसरों के बारे में अपनी समझ को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की जरूरत है.

क्या है कैंसर

कैंसर एक भयावह शब्द है लेकिन इसे अच्छी तरह समझा नहीं जाता है. कैंसर शब्द का प्रयोग बीमारियों के एक संग्रह को परिभाषित करने के लिए किया जाता है जिस में एक अनोखी बात होती है-कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि जिस में शरीर के अन्य हिस्से तक फैलने की क्षमता होती है. प्रसूति संबंधी कैंसर महिलाओं के जननांगों से फैलता है. जब कैंसर की शुरुआत अंडाशय से होती है तो इसे अंडाशय के कैंसर के तौर पर जाना जाता है.

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