पति के वर्कहोलिज्म को समझना है जरुरी

भावना शाह का विवाह एक मल्टीनैशनल कंपनी में कार्यरत ऐग्जीक्यूटिव से हुआ था, जो 2 साल से अधिक नहीं चला. वजह थी पति का काम से अत्यधिक प्यार. अपने वर्कहोलिक पति से दुखी भावना 16 घंटे अकेले गुजारती थी, क्योंकि उस का पति आधी रात को घर आता था. उस की जिंदगी में न कोई उत्साह रहा था, न रोमांस के लिए समय बचा था. इस कारण उन की सैक्स लाइफ पूरी तरह से प्रभावित हो रही थी. भावना चाहती थी कि कुछ घंटे तो कम से कम पति के साथ बिताए और इसीलिए उस ने अपनी नौकरी भी छोड़ी थी ताकि दोनों की व्यस्तता उन के वैवाहिक जीवन में कड़वाहट न घोल दे.

हफ्ते के 5 दिन मुश्किल से दोनों में कुछ मिनट बात हो पाती और शनिवार, रविवार घर के किसी काम, मेहमानों की आवभगत में गुजर जाते. तब भावना ने तंग आ कर अपने पति से तलाक ले लिया. हालांकि तलाक लेना समस्या का समाधान नहीं है, पर पति की हर समय काम करने की आदत से अधिकांश पत्नियां परेशान रहती हैं. वर्कहोलिक पति वे होते हैं, जिन के लिए उन का काम सब से पहले होता है और उस के सामने पूरा परिवार या अन्य सामाजिक सरोकार गौण होता है. ऐसे पति की पत्नी उस के साथ के लिए तरसती रहती है और वह काम में डूबा रहता है वर्कहोलिक पति की पत्नी अकसर तनाव में रहती है या पति का साथ न मिल पाने की वजह से हर समय चिड़चिड़ी रहती है. बातबात पर लड़ाई करना उस की आदत बन जाता है, जिस से चिढ़ कर पति और देर तक घर से बाहर रहने लगता है.

‘‘मैं अपने पति की हर समय काम में डूबे रहने की आदत से इस कदर परेशान हो गई थी कि कभीकभी तो मुझे लगता था कि जैसे मैं शोकेस में रखी कोई चीज हूं, जिसे 5-10 मिनट के लिए मेरे पति नजर उठा कर देख लेते हैं. वे घर में होते तब भी मैं उन से बात न कर पाने के कारण बोरियत महसूस करती. कितनी ही छोटीछोटी बातें मैं उन से करना चाहती, पर उन के पास टाइम ही कहां था मेरी बातोें के लिए.लड़ाईझगड़ा करने का भी जब उन पर कोई असर नहीं हुआ तो मुझे एहसास हुआ कि वे भी टाइम इज मनी के इस दौर का शिकार हैं. मैं ने धीरेधीरे जब उन के वर्कहोलिज्म को समझना शुरू किया तो मुझे उन का काम करना अब उतना बुरा नहीं लगता, बल्कि अब मैं उन्हें काम में सहयोग देने की कोशिश भी करती हूं,’’ यह कहना है हाउसवाइफ शालू का.

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मैरिड टू वर्क

आज के समय में हम अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति करने में इतने व्यस्त हैं कि हमारी सारी भावनात्मक ऊर्जाएं काम की ओर लगी हैं. हम काम के प्रति इतने आसक्त हो जाते हैं कि अपने निजी संबंधों के बारे में सोचना तक भूल जाते हैं. काम इस तरह हावी हो जाता है कि यह भी याद नहीं रहता कि पत्नी भी साथ व समय चाहती है. मैरिड टू वर्क की वजह से कई युगलों का वैवाहिक जीवन खतरे में पड़ जाता है दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के मनोविज्ञान विभाग की सीनियर कंसल्टैंट डा. स्वाति कश्यप का कहना है, ‘‘अगर आप का पति वर्कहोलिक है, तो उसे इस बात के लिए ताना देने या उस से लड़ने के बजाय उस के साथ बैठ कर बातचीत करें. फिर ऐसा समाधान ढूंढ़ें, जो आप दोनों के लिए उपयुक्त हो. जब बात करने बैठें तो आमनेसामने बैठने के बजाय साथसाथ बैठें और मैं या तुम के बजाय हम का प्रयोग करें. बात करते हुए अपने पति को उन की इस आदत के लिए दोष न दें, न ही अपने प्रश्नों से उन्हें आहत करने की कोशिश करें. आप कह सकती हैं कि उन का साथ आप को अच्छा लगता है और आप उन के साथ अधिक से अधिक समय गुजारना चाहती हैं.’’

स्थिति का पता लगाएं

सब से पहले पति के वर्कहोलिक होने के कारण को समझना जरूरी है. क्या यह व्यवहार स्थायी है या कुछ समय के लिए? हो सकता है पति को प्रोमोशन मिलने वाला हो और इस के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही हो या किसी प्रोजैक्ट की डैडलाइन हो या फिर उन के बौस का दबाव उन पर ज्यादा हो. बौस को खुश करने और उन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए वे काम में डूबे रहते हों. यह देखें कि किसी एक महीने या त्योहारों के समय वे ज्यादा काम करते हैं क्या? अगर ऐसा है तो यह स्थिति अस्थायी हो सकती है. यह समझने का प्रयास करें कि वे क्या सचमुच काम को ले कर गंभीर हैं या झगड़ालू बीवी से तंग आ कर ज्यादा समय औफिस में बिताते हैं. जब पति को घर में सुकून नहीं मिलता है, तो वह जल्दी घर आने से कतराता है. अगर पत्नी उस के वर्कहोलिज्म का कारण है तो समाधान मिलने में ज्यादा देर नहीं लगेगी. अगर सचमुच पति को काम की लत है और वे आप को नजरअंदाज करने या आप से बचने के लिए काम में नहीं डूबे रहते तो यह स्वीकार कर लें कि आप अपने पति को नहीं बदल सकती हैं. आप स्वयं को बदल सकती हैं. आप के व्यवहार के बदले में आप के पति में परिवर्तन आ सकता है.

कैसे निबटें पति के Workaholism से

पति के काम की कद्र करें:

अगर आप के पति ही अकेले कमाने वाले हैं और उन पर पूरे परिवार का दायित्व है, तो यह समझना आवश्यक है कि उन का काम उन के लिए कितना महत्त्वपूर्ण है. वे आप की और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही दिनरात मेहनत करते हैं. अगर आप उन के काम में सहयोग दे सकती हैं तो दें, लेकिन उन्हें उलाहने देते हुए परेशान न करें. दिन में 1-2 बार फोन कर के उन का हालचाल पूछें ताकि उन्हें एहसास हो कि आप उन की चिंता करती हैं और उन के काम की कद्र भी. काम शेयर करें: अगर पति औफिस के काम में उलझे रहते हैं, तो घर के अन्य कामों को करने के लिए उन पर जोर न डालें. घर के अन्य दायित्व अपने ऊपर ले लें ताकि वे निश्चिंत हो कर काम कर सकें.

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पानी या बिजली का बिल आदि जमा करने या घर के लिए खरीदारी का काम अपने हाथ में ले कर उन के काम को शेयर करें. आप के इस सहयोग को वे समझेंगे और आप के लिए समय निकालने का प्रयास अवश्य करेेंगे. घरपरिवार या बच्चों की छोटीछोटी समस्याओं का समाधान खुद कर लें. पति को परेशान न करें. घर का माहौल सुखद बनाएं: अकसर पत्नी के तानों व हर समय बड़बड़ाने की आदत से परेशान हो कर पति काम को उस से दूर रहने का जरिया बना लेता है. अगर घर में शांति का माहौल नहीं होता तो उस का घर आने का मन नहीं करता. घर का वातावरण सुकून भरा हो और अपनेपन की खुशबू उस में बहती हो, ऐसा करना पत्नी का दायित्व होता है. अगर घर में उसे प्यार मिलेगा तो वह घर आने के लिए लालायित रहेगा. कोई हौबी अपनाएं : अगर पति के लिए इतना काम करना अनिवार्य है, तो अपने समय को काटने के लिए किसी हौबी को अपनाएं. किताबें पढ़ें, अपने दोस्तों का दायरा बढ़ाएं. कुछ ऐसा करें, जिस में आप को खुशी मिले. इस से आप पति को ताने देने से भी बच जाएंगी और कुछ रचनात्मक काम करने का भी मौका मिलेगा. फिर जितना भी समय आप साथ होंगे, वह दोष देने व शिकायतें करने में ही नहीं बीतेगा.

बड़े शहरों की सस्ती लेकिन उम्दा मार्केट

जब भी आप कहीं घूमने जाते हैं तो बिना शॉपिंग आपकी ट्रिप अधूरी रहती है. शॉपिंग का असली मजा किसी मॉल में नहीं बल्कि शहर की लोकल और भीड़-भाड़ वाली मार्केट में होता है और यहां चीजें सही दामों पर मिल जाती हैं. यहां आपको शहर के कल्चर के बारे में भी बहुत कुछ पता चलता है. यहां जानिए कुछ बड़े शहरों की सस्ती लेकिन उम्दा मार्केट.

1. कोलाबा कॉजवे मार्केट, मुंबई

इस स्ट्रीट मार्केट में आपको किताबों से लेकर, हैंडीक्रॉफ्ट्स, कपड़ों और फुटवियर्स तक सबकी वैराइटी मिलेगी. यहां की सबसे खास बात है कि यहां ट्रेडिशनल और मार्डन दोनों ही तरह के कपड़ें अवेलेबल होते हैं.

2. सरोजिनी मार्केट, दिल्ली

दिल्ली यूं तो काफी मंहगी जगह है लेकिन यहां स्ट्रीट शॉपिंग काफी सस्ती है. यहां कम बजट के बावजूद आप दिल खोलकर शॉपिंग कर सकते हैं. इंडियन से लेकर वेस्टर्न कपड़े तक मिल जाते हैं.

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3. लाड बाजार, हैदराबाद

हैदराबाद का मोती मशहूर है. हैदराबाद के लाड बाजार पर्ल से लेकर बैंगल, ज्वैलरी और कपड़ों तक की शॉपिंग के लिए जाना जाता है लाड बाजार. शायद ही ऐसी कोई चीज है जो यहां न मिलती हो.

4. जोहरी बाजार, जयपुर

राजस्थान हैंडीक्राफ्ट के लिए जाना जाता. जयपुर के जोहरी बाजार सोने और चांदी की ज्वैलरी के लिए काफी फेमस हैं. इतना ही नहीं यहां के मार्केट में सस्ते दामों पर ज्वैलरी के साथ-साथ महंगी-महंगी साड़ियां और लहंगे भी लोग किराये पर ले जाते हैं.

5. गरियाहाट मार्केट, कोलकाता

कोलकाता की इस मशहूर मार्केट में कपड़े, ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, साड़ियों, फर्नीचर सब मौजूद है. यहां सड़क के दोनों ओर दुकानों सजी रहती हैं.

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Makeup में क्‍यों जरूरी है Primer

मेकअप से न केवल खूबसूरती में चार चांद लगता है बल्कि इससे व्‍यक्तित्‍व में आसानी से निखार भी आता है. मेकअप करने के कई तरीके बाजार में ईजाद हो चुके हैं.

मेकअप सही ढंग से करने की भी सलाह आपको बाजार से या फिर इंटरनेट से आसानी से मिल जाती है. प्राइमर भी मेकअप का एक हिस्‍सा है. लेकिन क्‍या आप जानती है मेकअप में प्राइमर की क्‍या जरूरत होती है.

प्राइमर से आपको एक स्मूद बेस मिलता है और ऑयली हिस्सों की चमक कम होती है. लेकिन जानकारी के अभाव में आप प्राइमर की जगह बेस के लिए बीबी क्रीम लगाती हैं तो आप गलत है. हम आपको बता रहे हैं मेकअप में प्राइमर की जरूरत क्‍यों होती है.

क्‍यों जरूरी है प्राइमर

प्राइमर आपके पसंदीदा फाउंडेशन या मॉश्चराइजर को पूरे दिन टिके रहने के लिए बेस प्रदान करता है. मेकअप से पहले प्राइमर लगाने से मेकअप आसानी और समान रूप से फैलने और टिके रहने में मदद करता है.

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अगर आप प्राइमर को और प्रभावी बनाना चाहती हैं तो इसमें लैवेंडर, जैस्मिन और एलोवेरा का इस्तेमाल करें, इससे त्‍वचा फ्रेश बनी रहती है.

प्राइमर त्वचा को पाउडर और फाउंडेशन को सोखने से रोकते हैं. साथ ही ये त्वचा को ऑयली होने से बचाते हैं.

प्राइमर चेहरे की हल्की झुर्रियों और फाइन लाइन्स को छुपाने का भी काम करते हैं. सिलिकॉन-बेस्ड पॉलिमर से बने प्राइमर आपकी त्वचा को स्मूद इफेक्ट भी देते हैं.

 कैसे प्रयोग करें प्राइमर

चेहरे को साफ करने के बाद, अच्छा मॉश्चराइजर या सनस्क्रीन लगाएं. फिर अपने पूरे चेहरे, गले, पलकों और आंखों के नीचे की त्वचा पर छोटे-छोटे बिंदुओं में प्राइमर लगाएं. अब इसे धीरे-धीरे मसाज करते हुए त्वचा के साथ मिलने दें. अब आपको मिलेगा एक साफ-सुथरा और स्मूद बेस. इसके बाद अब आप अपने मेकअप की शुरुआत कर सकते हैं.

चेहरे की झुर्रियों और फाइन लाइन्स को छुपाने के लिए प्राइमर को कंसीलर के साथ मिलाकर प्रयोग करें.

मैट फिनिश लुक के लिए प्राइमर और फाउंडेशन को अच्छी तरह मिलाएं. टी-ज़ोन (माथा, नाक और ठुड्डी का क्षेत्र) को ऑयल मुक्‍त  दिखाने और वहां की चमक छुपाने के लिए थोड़ा प्राइमर लगाएं.

अगर आपको बिना मेकअप वाला चेहरा पसंद है तो वहां भी प्राइमर आपकी मदद कर सकता है. यह उत्पाद आपके लिए एक हल्के फाउंडेशन के तौर पर काम आ सकता है.

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यूरीन इन्फेक्शन से छुटकारा दिलाएंगे ये 4 आसान होममेड टिप्स

यूरीन इन्फेक्शन का प्रमुख कारण ज्यादा देर तक पेशाब रोके रहना है. पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में इसकी संभावना ज्यादा होती है. कई बार लोग ज्यादा देर तक पेशाब से रोके रहते हैं, जिसके कारण पित्ताशय में बैक्टीरिया इकट्ठे हो जाते हैं और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. पित्ताशय में होने वाले इसी संक्रमण को यूरीन इन्फेक्शन कहते हैं. यूरीन इन्फेक्शन की वजह से किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है. ऐसे में किडनी फेल होने की भी संभावना रहती है.

लक्षण

यूरीन इन्फेक्शन की वजह से पेशाब में जलन, गुप्तांगों में खुजली, रुक रुककर पेशाब आना, मूत्र का रंग गहरा पीला होना, मूत्र से बदबू आना, मू्त्र के साथ खून का आना, थकान और कमजोरी महसूस होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं.

इलाज

1. खूब पानी पिएं

यूरीन इन्फेक्शन से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिए. दिनभर में लगभग छ: से सात लीटर पानी पीना जरूरी होता है. आयूरीन इन्फेक्शन ब्लैडर में बैक्टीरिया के जमाव की वजह से होता है. ऐसे में खूब पानी पीने से ब्लैडर में बैक्टीरिया जमा नहीं होने पाता है और संक्रमण से बचाव होता है.

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2. खट्टे फलों का करें सेवन

खट्टे फलों का सेवन करें क्योंकि इनमें साइट्रिक एसिड होता है. ये साइट्रिक एसिड बैक्टीरिया को खत्म करने में मददगार होते हैं, इसलिए पेशाब में इंफेक्शन होने पर खट्टे फलों का सेवन करना चाहिए या फिर उनका रस पीना चाहिए. इसके लिए आप नींबू, संतरा और आंवला जैसे खट्टे फलों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

3. लस्सी पिएं

दिन में कम से कम दो बार लस्सी पीएं. लस्सी ब्लैडर में पनप रहे बैक्टीरिया को बाहर करने में मदद करता है. इसके अलावा लस्सी पीने से पेशाब में जलन की समस्या से भी राहत मिलता है. ये यूरीन इंफेक्शन की समस्या को कम करने में भी सहायक है.

4. सेब का सिरका

एप्पल साइडर विनेगर यानी कि सेब का सिरका यूरीन इन्फेक्शन में बेहद लाभकारी है. इसके लिए एक गिलास पानी में 2-3 चम्मच सेब का सिरका और आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार पिएं. इससे आपको बहुत जल्द ही असर दिखाई देगा.

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इसके अलावा पेशाब में संक्रमण रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की कोशिश करें. तेज पेशाब लगे तो उसे ज्यादा देर तक रोके नहीं. शारीरिक संबंध बनाने के बाद पेशाब करना न भूलें. बाथरूम को हमेशा साफ सुथरा रखें और खुली जगहों पर पेशाब करने से बचें.

बेटे की कस्टडी पाने के लिए Karan Mehra की वाइफ Nisha Rawal ने कही ये बात

पौपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) में नैतिक का किरदार निभा चुके एक्टर करण मेहरा (Karan Mehra) इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं. जहां बीते दिनों बेटे के बर्थडे पर करण ने एक मैसेज शेयर किया है तो वहीं अब बेटे की कस्टडी और ऐलेमनी की बात करते हुए उनकी वाइफ निशा रावल (Nisha Rawal) ने नया बयान देते हुए सवाल पूछे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

कस्टडी को लेकर कही बात

बीते दिनों घरेलू हिंसा के केस पर करण मेहरा ने दावा किया था कि निशा रावल लालची है और वो उनसे मोटी एलुमनी मांगना चाहती है. लेकिन अब निशा रावल ने एक इंटरव्यू में खुलकर बात करते हुए कहा है कि ‘मैंने करण मेहरा से किसी तरह की एलुमनी नहीं मांगी है. मैं केवल करण मेहरा से अपने बच्चे की कस्टडी लेना चाहती हूं. काविश मेरे साथ रहेगा. हालांकि इस दौरान वह उससे मुलाकात कर सकता है. लेकिन करण मेहरा मेरी ये बात मानने को राजी नहीं है.

ये चाहती हैं करण की वाइफ

कमाई को लेकर निशा रावल का कहना है कि हमने सब कुछ साथ मिलकर कमाया है. मैंने छोटी उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. मैंने सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है में काम करने से पहले कई बार करण मेहरा को भी सपोर्ट किया है. मैं उससे अपनी मां के घर के कागज लेना चाहती हूं और करण मेहरा से केवल अपना सामान मांग रही हूं. रही बात बेटे के लिए करण मेहरा के प्यार की तो उन्होंने काविश को उसके जन्मदिन के बाद से एक बार भी फोन नही किया है. वहीं तोहफे की बात करें तो काविश को कोई तोहफा नही मिला है. मैं पूछना चाहती हूं कि वो तोहफे आखिर गए कहां?’

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शादीशुदा जिंदगी को लेकर कही ये बात

करण मेहरा के बिहेवियर पर निशा रावल ने कहा, ‘करण मेहरा शुरूआत से ही मेरे साथ बदतमीजी करता था. समय के साथ उसका व्यवहार और भी खराब होता चला गया. उसकी वजह से मुझे 2014 में अबॉर्शन करवाना पड़ गया था. उस समय करण मेहरा मेरे साथ नहीं था. साल 2016 में मैं बीमार हो गई. उसके बाद से ही मेरा इलाज चल रहा है. मैंने उसे बहुत प्यार किया है लेकिन उसने बदले में मुझे धोखा दिया. मैं अपनी शादी को बचाने की कोशिश कर रही थी. इसी बीच मुझे करण मेहरा के एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर के बारे में पता चला. इस खबर ने हम दोनों के रिश्ते को तबाह कर दिया.’

बता दें, बीते दिनों घरेलू हिंसा के केस के चलते एक्टर करण मेहरा जेल भी चले गए थे, जिसके बाद दोनों ने एक दूसरे पर कई आरोप भी लगाए थे. हालांकि दोनों सेलेब्स के सपोर्ट में कई सितारे भी खड़े हुए थे.

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स्टार प्लस के सीरियल ‘अनुपमा’ TRP चार्ट्स में धमाल मचा रहा है. वहीं सीरियल में रिश्तों में दिखने वाली बौंडिग के भी सभी कायल हैं. इसी बीच रक्षाबंधन के मौके पर हम आपको अनुपमा के सितारों की रियल और रील लाइफ बौंडिग की झलक दिखाएंगे, जिसके फैंस कायल हैं. आइए आपको दिखाते हैं सीरियल अनुपमा के पौपुलर भाई बहन की जोड़ी…

बा-मामा जी

 

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अनुपमा सीरियल में बा और मामाजी की भाई-बहन की जोड़ी काफी मजेदार है. दोनों हर कदम पर एक-दूसरे का साथ देते हैं और मजाक मस्ती की ये जोड़ी फैंस को काफी एंटरटेन भी करती है, जिसके कारण दर्शक इस जोड़ी को देखना पसंद करते हैं.

किंजल-समर

देवर और भाई की ये जोड़ी फैंस के बीच काफी पौपुलर है. अनुपमा में समर हर कदम पर किंजल का साथ देता है, जिसके कारण फैंस इस जोड़ी को देखना पसंद करते हैं. वहीं सोशलमीडिया पर भी रियल लाइफ में काफी अच्छे दोस्त हैं, जिसके चलते यह अपनी काफी फोटोज मस्ती करते हुए फैंस के साथ शेयर करते हैं.

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तोषू-समर-स्वीटी

तोषू और समर अपनी छोटी बहन स्वीटी यानी पाखी पर जान छिड़कते हैं. हां कभी-कभी तीनों की लड़ाई भी फैंस को देखने को मिलती हैं. लेकिन वह बाद में फिर एक साथ हो जाते हैं. भाई बहन की यह तिगड़ी साथ में अक्सर मस्ती करती हुई नजर आती है, जिसे फैंस काफी पसंद करते हैं.

वनराज- डॉली

 

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सीरियल अनुपमा में भाई-बहन की जोड़ी में नजर आ रहे वनराज और डौली की जोड़ी भी काफी पौपुलर है. सोशलमीडिया पर दोनों की फोटोज साथ में अक्सर वायरल होती है, जिसके चलते शो में भी इनकी जोड़ी काफी दर्शकों को पसंद आती है.

अनुपमा-डॉली के पति

 

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सीरियल में अनुपमा की जिंदगी में कई परेशानियां आती हैं. हालांकि डौली के पति एक भाई की तरह उनका हर कदम पर साथ देते हैं, जिसके चलते फैंस इस जोड़ी को देखना पसंद करते हैं. हालांकि कुछ दिनों से दोनों की जोड़ी को काफी मिस कर रहे हैं. लेकिन जल्द ये जोड़ी फैंस को देखने को मिलेगी.

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Top 10 Best Raksha Bandhan Story in Hindi: टॉप 10 बेस्ट रक्षा बंधन कहानियां हिंदी में

Raksha Bandhan Stories in Hindi: इस आर्टिकल में हम आपके लिए लेकर आए हैं गृहशोभा की 10 Raksha Bandhan Stories in Hindi 2021. इन कहानियों में भाई-बहन के प्यार और रिश्तों से जुड़ी 10 दिलचस्प कहानियां हैं जो आपके दिल को छू लेगी और जिससे आपको रिश्तों का नया मतलब जानने को मिलेगा. इन Raksha Bandhan Stories से आप कई अहम बाते भी जान सकते हैं कि आखिर भाई-बहन के प्यार की जिंदगी में क्या अहमियत है और क्या होता है जब किसी की जिंदगी में ये प्यार नही होता. तो अगर आपको भी है संजीदा कहानियां पढ़ने का शौक तो यहां पढ़िए गृहशोभा की Raksha Bandhan Stories in Hindi.

1. समय चक्र- अकेलेपन की पीड़ा क्यों झेल रहे थे बिल्लू भैया?

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शिमला अब केवल 5 किलोमीटर दूर था…य-पि पहाड़ी घुमाव- दार रास्ते की चढ़ाई पर बस की गति बेहद धीमी हो गई थी…फिर भी मेरा मन कल्पनाओं की उड़ान भरता जाने कितना आगे उड़ा जा रहा था. कैसे लगते होंगे बिल्लू भैया? जो घर हमेशा रिश्तेदारों से भरा रहता था…उस में अब केवल 2 लोग रहते हैं…अब वह कितना सूना व वीरान लगता होगा, इस की कल्पना करना भी मेरे लिए बेहद पीड़ादायक था. अब लग रहा था कि क्यों यहां आई और जब घर को देखूंगी तो कैसे सह पाऊंगी? जैसे इतने वर्ष कटे, कुछ और कट जाते.

कभी सोचा भी न था कि ‘अपने घर’ और ‘अपनों’ से इतने वर्षों बाद मिलना होगा. ऐसा नहीं था कि घर की याद नहीं आती थी, कैसे न आती? बचपन की यादों से अपना दामन कौन छुड़ा पाया है? परंतु परिस्थितियां ही तो हैं, जो ऐसा करने पर मजबूर करती हैं कि हम उस बेहतरीन समय को भुलाने में ही सुकून महसूस करते हैं. अगर बिल्लू भैया का पत्र न आया होता तो मैं शायद ही कभी शिमला आने के लिए अपने कदम बढ़ाती.

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2. चमत्कार- क्या बड़ा भाई रतन करवा पाया मोहिनी की शादी?

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‘‘मोहिनी दीदी पधार रही हैं,’’ रतन, जो दूसरी मंजिल की बालकनी में मोहिनी के लिए पलकपांवडे़ बिछाए बैठा था, एकाएक नाटकीय स्वर में चीखा और एकसाथ 3-3 सीढि़यां कूदता हुआ सीधा सड़क पर आ गया.

उस के ऐलान के साथ ही सुबह से इंतजार कर रहे घर और आसपड़ोस के लोग रमन के यहां जमा होने लगे.

‘‘एक बार अपनी आंखों से बिटिया को देख लें तो चैन आ जाए,’’ श्यामा दादी ने सिर का पल्ला संवारा और इधरउधर देखते हुए अपनी बहू सपना को पुकारा.

‘‘क्या है, अम्मां?’’ मोहिनी की मां सपना लपक कर आई थीं.

‘‘होना क्या है आंटी, दादी को सिर के पल्ले की चिंता है. क्या मजाल जो अपने स्थान से जरा सा भी खिसक जाए,’’ आपस में बतियाती खिलखिलाती मोहिनी की सहेलियों, ऋचा और रीमा ने व्यंग्य किया था.

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3. भैया- 4 बहनों को मिला जब 1 भाई

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कीर्ति ने निशा का चेहरा उतरा हुआ देखा और समझ गई कि अब फिर निशा कुछ दिनों तक यों ही गुमसुम रहने वाली है. ऐसा अकसर होता है. कीर्ति और निशा दोनों का मैडिकल कालेज में दाखिला एक ही दिन हुआ था और संयोग से होस्टल में भी दोनों को एक ही कमरा मिला. धीरेधीरे दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई.

कीर्ति बरेली से आई थी और निशा गोरखपुर से. कीर्ति के पिता बैंक में अधिकारी थे और निशा के पिता महाविद्यालय में प्राचार्य.

गंभीर स्वभाव की कीर्ति को निशा का हंसमुख और सब की मदद करने वाला स्वभाव बहुत अच्छा लगा था. लेकिन कीर्ति को निशा की एक ही बात समझ में नहीं आती थी कि कभीकभी वह एकदम ही उदास हो जाती और 2-3 दिन तक किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी.

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4. तोबा मेरी तोबा- अंजली के भाई के साथ क्या हुआ?

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मेरे सिगरेट छोड़ देने से सभी हैरान थे. जिस पर डांटफटकार और समझानेबुझाने का भी कोई असर नहीं हुआ वह अचानक कैसे सुधर गया? जब मेरे दोस्त इस की वजह पूछते तो मैं बड़ी भोली सूरत बना कर कहता, ‘‘सिगरेट पीना सेहत के लिए हानिकारक है, इसलिए छोड़ दी. तुम लोग भी मेरी बात मानो और बाज आओ इस गंदी आदत से.’’

मुझे पता है, मेरे फ्रैंड्स  मुझ पर हंसते होंगे और यही कहते होंगे, ‘नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली. बड़ा आया हमें उपदेश देने वाला.’ मेरे मम्मीडैडी मेरे इस फैसले से बहुत खुश थे लेकिन आपस में वे भी यही कहते होंगे कि इस गधे को यह अक्ल पहले क्यों नहीं आई? अब मैं उन से क्या कहूं? यह अक्ल मुझे जिंदगी भर न आती अगर उस रोज मेरे साथ वह हादसा न हुआ होता.

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5. रेतीला सच- शिखा की बिदाई के बाद क्या था अनंत का हाल

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‘तुम्हें वह पसंद तो है न?’’ मैं  ने पूछा तो मेरे भाई अनंत  के चेहरे पर लजीली सी मुसकान तैर गई. मैं ने देखा उस की आंखों में सपने उमड़ रहे थे. कौन कहता है कि सपने उम्र के मुहताज होते हैं. दिनरात सतरंगी बादलों पर पैर रख कर तैरते किसी किशोर की आंखों की सी उस की आंखें कहीं किसी और ही दुनिया की सैर कर रही थीं. मैं ने सुकून महसूस किया, क्योंकि शिखा के जाने के बाद पहली बार अनंत को इस तरह मुसकराते हुए देख रही थी.

शिखा अनंत की पत्नी थी. दोनों की प्यारी सी गृहस्थी आराम से चल रही थी कि एक दर्दनाक एहसास दे कर यह साथ छूट गया. शिखा 5 साल पहले अनंत पर उदासी का ऐसा साया छोड़ गई कि उस के बाद से अनंत मानो मुसकराना ही भूल गया.

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6. मेरे भैया- अंतिम खत में क्या लिखा था खास

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सावनका महीना था. दोपहर के 3 बजे थे. रिमझिम शुरू होने से मौसम सुहावना पर बाजार सुनसान हो गया था. साइबर कैफे में काम करने वाले तीनों युवक चाय की चुसकियां लेते हुए इधरउधर की बातों में वक्त गुजार रहे थे. अंदर 1-2 कैबिनों में बच्चे वीडियो गेम खेलने में व्यस्त थे. 1-2 किशोर दोपहर की वीरानगी का लाभ उठा कर मनपसंद साइट खोल कर बैठे थे.  तभी वहां एक महिला ने प्रवेश किया. युवक महिला को देख कर चौंके, क्योंकि शायद बहुत दिनों बाद एक महिला और वह भी दोपहर के समय, उन के कैफे पर आई थी. वे व्यस्त होने का नाटक करने लगे और तितरबितर हो गए.

महिला किसी संभ्रांत घराने की लग रही थी. चालढाल व वेशभूषा से पढ़ीलिखी भी दिख रही थी. छाता एक तरफ रख कर उस ने अपने बालों को जो वर्षा की बूंदों व तेज हवा से बिखर गए थे, कुछ ठीक किए. फिर काउंटर पर बैठे लड़के से बोली, ‘‘मुझे एक संदेश टाइप करवाना है. मैं खुद कर लेती पर हिंदी टाइपिंग नहीं आती है.’’

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7. तृप्त मन- राजन ने कैसे बचाया बहन का घर

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पिछले दिनों से थकेहारे घर के सभी सदस्य जैसे घोड़े बेच कर सो रहे थे. राशी की शादी में डौली ने भी खूब इंज्वाय किया लेकिन राजन की पत्नी बन कर नहीं बल्कि उस की मित्र बन कर.

अमेरिका में स्थायी रूप से रह रहे राजन के ताऊ धर्म प्रकाश को जब खबर मिली कि उन के भतीजे राजन ने आई.टी. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है तो उन्होंने फौरन फोन से अपने छोटे भाई चंद्र प्रकाश को कहा कि वह राजन को अमेरिका भेज दे…यहां प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण के बाद नौकरी का बहुत अच्छा स्कोप है.

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8. राखी का उपहार

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इस समय रात के 12 बज रहे हैं. सारा घर सो रहा है पर मेरी आंखों से नींद गायब है. जब मुझे नींद नहीं आई, तब मैं उठ कर बाहर आ गया. अंदर की उमस से बाहर चलती बयार बेहतर लगी, तो मैं बरामदे में रखी आरामकुरसी पर बैठ गया. वहां जब मैं ने आंखें मूंद लीं तो मेरे मन के घोड़े बेलगाम दौड़ने लगे. सच ही तो कह रही थी नेहा, आखिर मुझे अपनी व्यस्त जिंदगी में इतनी फुरसत ही कहां है कि मैं अपनी पत्नी स्वाति की तरफ देख सकूं.

‘‘भैया, मशीन बन कर रह गए हैं आप. घर को भी आप ने एक कारखाने में तबदील कर दिया है,’’ आज सुबह चाय देते वक्त मेरी बहन नेहा मुझ से उलझ पड़ी थी. ‘‘तू इन बेकार की बातों में मत उलझ. अमेरिका से 5 साल बाद लौटी है तू. घूम, मौजमस्ती कर. और सुन, मेरी गाड़ी ले जा. और हां, रक्षाबंधन पर जो भी तुझे चाहिए, प्लीज वह भी खरीद लेना और मुझ से पैसे ले लेना.’’

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9. स्लीपिंग पार्टनर- मनु की नजरों में अनुपम भैया

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मनु को एक दिन पत्र मिलता है जिसे देख कर वह चौंक जाती है कि उस की भाभी यानी अनुपम भैया की पत्नी नहीं रहीं. वह भैया, जो उसे बचपन में ‘डोर कीपर’ कह कर चिढ़ाया करते थे.

पत्र पढ़ते ही मनु अतीत के गलियारे में भटकती हुई पुराने घर में जा पहुंचती है, जहां उस का बचपन बीता था, लेकिन पति दिवाकर की आवाज सुन कर वह वर्तमान में लौट आती है. वह अनुपम भैया के पत्र के बारे में दिवाकर को बताती है और फिर अतीत में खो जाती है कि उस की मौसी अपनी बेटी की शादी के लिए कुछ दिन सपरिवार रहने आ रही हैं. और सारा इंतजाम उन्हें करने को कहती हैं.

आखिर वह दिन भी आ जाता है जब मौसी आ जाती हैं. घर में आते ही वह पूरे घर का निरीक्षण करना शुरू कर देती हैं और पूरे घर की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले लेती हैं. पूरे घर में उन का हुक्म चलता है.

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10. मत बरसो इंदर राजाजी

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भाई की चिट्ठी हाथ में लिए ऋतु उधेड़बुन में खड़ी थी. बड़ी  प्यारी सी चिट्ठी थी और आग्रह भी इतना मधुर, ‘इस बार रक्षाबंधन इकट्ठे हो कर मनाएंगे, तुम अवश्य पहुंच जाना…’

उस की शादी के 20 वर्षों  आज तक उस के 3 भाइयों में से किसी ने भी कभी उस से ऐसा आग्रह नहीं किया था और वह तरसतरस कर रह गई थी.  उस की ससुराल में लड़कियों के यहां आनाजाना, तीजत्योहारों का लेनादेना अभी तक कायम था. वह भी अपनी इकलौती ननद को बुलाया करती थी. उस की ननद तो थी ही इतनी प्यारी और उस की सास कितनी स्नेहशील.  जब भी ऋतु ने मायके में अपनी ससुराल की तारीफ की तो उस की मंझली भाभी उषा, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ रहती थीं, कहने लगीं, ‘‘जीजी, ससुराल में आप की इसलिए निभ गई क्योंकि आप की सासननद अच्छी हैं, हमारी तो सासननदें बहुत ही तेज हैं.’’

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Hemoglobin की सही मात्रा है जरूरी

हीमोग्लोबिन हमारे शरीर की सभी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से काम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. लेकिन जब रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है तो हम एनीमिया का शिकार हो जाते हैं. यानी शरीर में रेड ब्लड सेल्स की मात्रा कम होने लगती है, जिस से शरीर के अंगों तक औक्सीजन फ्लो काफी कम हो जाता है. जिससे न सिर्फ हमारी शारीरिक बल्कि मानिसक हैल्थ पर भी काफी प्रभाव पड़ता है. इसके कारण थकान होना, चक्कर आना, स्किन का पीला पड़ना, सांस लेने में दिक्कत महसूस होना, सिर दर्द, ठंड लगना, दिल की धड़कन का तेज होना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं. इसलिए जरूरी है शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा का सही होना.

हीमोग्लोबिन का नार्मल स्तर

नार्मल हीमोग्लोबिन इन वूमन- 12-15 ग्राम/डीएल

नार्मल हीमोग्लोबिन इन प्रैगनैंट  वूमन- 12-16 ग्राम/डीएल

नार्मल हीमोग्लोबिन इन मैन- 14-17 ग्राम/डीएल

नार्मल हीमोग्लोबिन इन 6-12 ईयर किड्स- 13.5 ग्राम/डीएल

लो हीमोग्लोबिन लेवल इन वूमन- 12 से कम मतलब आयरन की कमी और 10 से कम का मतलब आप एनिमिक हैं.

लो हीमोग्लोबिन लेवल इन मैन- 12 से कम मतलब शरीर में खून की कमी है.

कौन से कारण हैं जिम्मेदार

–  संतुलित आहार नहीं लेना.

–  शरीर में विटामिंस और मिनरल्स की कमी हो जाना.

–  पीरियड्स के दौरान नोर्मल से ज्यादा ब्लीडिंग होना.

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क्या है उपचार

शरीर में जब हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने लगती है, तब डाक्टर जरूरी जांचों जैसे ब्लड टेस्ट, विटामिन बी-9, विटामिन बी-12, विटामिन डी जैसे जरूरी टेस्ट्स करवा कर उसके रिजल्ट के आधार पर ही उपचार देते हैं. लेकिन आपको बता दें कि शरीर में खून की कमी होने पर हेमाटीनिक्स एजेंट्स जो न्यूट्रिएंट होते हैं, जो शरीर में ब्लड को बनाने का काम करते हैं. जिसमें मुख्य रूप से आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 का समावेश होता है, दिया जाता है ताकि शरीर की कमियां दूर हो कर हम पहले जैसा जीवन जी सके. इसके साथ ही विटामिन डी भी लेना जरूरी होता है. जानते हैं इनके बारे में:

कैसे काम करता है

आयरन:

शरीर में हीमोग्लोबिन को बनाने के लिए आयरन की जरूरत होती है. जो रेड ब्लड सेल्स में पाया जाता है. ऐसे में हेमाटीनिक्स से शरीर को आयरन मिलने से ये औक्सीजन को अंगों व ऊतकों तक पहुंचाने का काम करता है. जिस से शरीर में आयरन की कमी भी दूर हो जाती है और शरीर के विभिन्न अंगों को औक्सीजन भी मिल जाता है.

विटामिन बी-12:

शरीर में विटामिन  बी-12 की कमी होने से थकान व कमजोरी महसूस होती है. यहां तक कि शरीर में विटामिन बी-12 की कमी एनीमिया का कारण बनने के साथसाथ इससे नर्वस डैमेज होने के साथ आपकी सोचने, समझने की क्षमता पर भी असर पड़ता है. जबकि हेमाटीनिक्स शरीर में विटामिन बी-12 के लेवल को बनाए रखने का काम करता है. क्योंकि इसका रेड ब्लड सेल्स को बनाने में अहम रोल जो होता  है.

फोलेट:

फोलिक एसिड की जरूरत हैल्दी सेल्स को बनाने के लिए की जाती है. खासकर के रेड ब्लड सेल्स को. लेकिन अगर शरीर में फोलिक एसिड की कमी होने लगती है, तो शरीर असामान्य रूप से बड़े रेड ब्लड सेल्स बनाना शुरू कर देता है, जिससे वे सही ढंग से काम नहीं करने के कारण शरीर में खून की कमी होने लगती है. लेकिन हेमाटीनिक्स शरीर में फोलिक एसिड के स्तर को बनाए रखने का काम करता है.

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विटामिन डी भी जरूरी:

बता दें कि शरीर में विटामिन डी आयरन, कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम, फास्फेट को अवशोषित करने में अहम भूमिका निभाता है. साथ ही इससे हड्डियों व मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है. वरना शरीर में विटामिन डी की कमी होने से थकान, हड्डियां कमजोर होने के साथसाथ आप डिप्रेशन की भी गिरफ्त में आ सकते हैं. इसलिए शरीर की सभी कमियों को दूर करें हेमाटीनिक्स न्यूट्रिएंट से.

Satreetha and Shikakai Benefits: सतरीठा और शिकाकाई से बालों की देखभाल

सतरीठा और शिकाकाई से बालों की देखभाल

Satreetha and Shikakai Benefits. आज बाजार में हेयर केयर से जुड़े तमाम तरह के औयल और शैंपू मौजूद है. बहुत सारे प्रोडक्ट्स ऐसे होते  हैं जो बालों की ऊपर से देखभाल करते हैं. उनको कुछ समय  के लिए काले और चमकदार बना देते हैं. जिससे वह हेल्दी नजर आने लगते हैं. इनमें से जो प्रोडक्ट्स केमिकल बेस्ड बने होते हैं उनका खराब प्रभाव कुछ दिनों के बाद बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचाने लगते हैं. बाल रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं. बहुत सारे लोग अब हेयर केयर के लिए घरेलू उपाय करना लोग बेहतर समझने लगे हैं. इसके साथ ही साथ सतरीठा ओर शिकाकाई से बने प्रोडक्ट्स शैंपू और हेयर औयल ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं. इनके उपयोग को समझना जरूरी है.

सतरीठा का प्रयोग बालों को धोने में किया जाता  है. इस कारण इसको शैंपू के रूप में ज्यादा प्रयोग किया जाता है. सतरीठा का एक पेड़ होता है. सतरीठा के पेड़ पर गर्मियों में फूल आते हैं. जोकि आकार में बहुत छोटे हैं. इनका रंग हल्का हरा होता है. सतरीठा का फल जुलाई और अगस्त तक आ जाता है जोकि नवंबर और दिसंबर तक पकता है. इस फल को लोग मार्केट में बेच देते हैं. सुखाया गया फल शैंपू, डिटर्जैंट या फिर हाथ धोने वाले साबुन के रूप में प्रयोग किया जाता है. इसके प्रयोग से बालों को मजबूत बनाने, चमकदार और घना बनाने में किया जाता है.

सतरीठा से औयल भी निकलता है. इसका प्रयोग को शैंपू में एक खास तत्व के रूप में किया जाता है. यह बालों के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है. अगर बालों में जुंएं हैं तो सतरीठा के प्रयोग से जुंएं एक दम खत्म हो जाएंगे. सूखे सतरीठा को पेस्ट के रूप में प्रयोग करने के लिए उसमें 1 अंडा, 1 चम्मच आमला पाउडर, सूखा रीठा और शिकाकाई पाउडर मिलाइए. इसे सिर की त्वचा पर मसाज करें और 30 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर किसी हलके शैंपू से सिर को धोएं. 2 माह तक सप्ताह में 2 बार ऐसा करने से बाल झड़ना कम हो जाएंगे. सतरीठा का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि यह आंखों से दूर रहे.

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बालों के लिए बड़े काम का शिकाकाई

सतरीठा की ही तरह से शिकाकाई का प्रयोग भी बालों की केयर के लिए किया जाता है. कई बार दोनों आपस में मिलाकर भी प्रयोग किया जाता है. शिकाकाई एक जड़ी-बूटी है. शिकाकाई का वैज्ञानिक नाम एकेशिया कॉनसिना है. इसका पेड़ जल्दी बढ़ने वाला और छोटे-छोटे कांटों से भरा होता है. यह भारत के गर्म मैदानों में पाया जाता है. शिकाकाई में एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन जैसे पोषक तत्व होते हैं जो बालों के स्वास्थ्य और मजबूत करने का काम करते हैं. शिकाकाई का प्रयोग बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री-रेडिकल्स से लड़ने में  मदद करते हैं.

हेल्दी स्कैल्प बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है. शिकाकाई में एंटी-बैक्टीरियल और एंटिफंगल गुण होते हैं. यह स्कैल्प में इंफ्लेमेशन को  कम करता है और इस के स्वास्थ्य को बेहतर करता है साथ ही स्कैल्प के पीएच स्तर को बनाए रखने में भी मदद करता है जिससे बाल भी हेल्दी रहते हैं. रूसी यानि डैंड्रफ का खतरा भी नहीं रहता है. बालों का झड़ना कम हो जाता  है. शिकाकाई से बने शैंपू या हेयर मास्क में शिकाकाई पाउडर का इस्तेमाल करने से बाल को कोमल और मुलायम हो जाते हैं. बाल घने और मजबूत हो जाते हैं. यह बालों को जड़ों को मजबूत करके टूटने से रोकता है.

दो मुंहे बालों की परेशानी

दो मुंहे बालों की परेशानी से बचने में भी शिकाकाई मदद करती है. केमिकल हेयर ट्रीटमेंट, स्ट्रेटनिंग और फ्री-रेडिकल के कारण बालों में स्प्लिट एंड्स यानि दो मुंहे बाल हो जाते हैं. एक बार जब स्प्लिट एंड्स हो जाते हैं, तो इन्हें ठीक करने के लिए बालों को काटने के अलावा और कोई उपाय नहीं है. उसके बाद भी, जब आपके बाल बढ़ते हैं तो ये फिर से आ सकते हैं. शिकाकाई के प्रयोग से यह परेशानी काफी कम  जाती है. शिककाई में भरपूर सैपोनिन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो आपके बालों को शाइनी बनाते हैं. शिकाकाई आपके स्कैल्प में सीबम को रिलीज करने में भी मदद करता है जिससे बाल मॉइस्चराइज होते हैं और स्प्लिट एंड्स को रोकने में मदद मिलती है.

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शिकाकाई का हेयर मास्क बनाने के लिए शिकाकाई पाउडर, आंवला पाउडर और सतरीठा पाउडर को 2 अंडे, 2-3 चम्मच नीबू का रस और थोड़ा गुनगुने पानी के साथ मिला लें. इस मास्क को बालों और उसकी जड़ों तक आधे घंटे के लिए लगाएं. जब यह सूख जाए तो इसे धो लें और बालों की कंडीशनिंग कर लें. इस तरह से शिकाकाई और सतरीठा से बने प्रोडक्ट्स भी हेयर केयर के लिए बहुत उपयोगी होते हैं.

Raksha Bandhan 2021: एक अटूट बंधन है राखी

हर रिश्ते का कोई ना कोई नाम होता है, ठीक उसी प्रकार एक पावन रिश्ता भी होता है एक औरत और आदमी के बीच. वो रिश्ता सब से पवित्र और अनूठा होता है, जिसे हम भाई बहन का रिश्ता कहते है. यह रिश्ता हर रिश्ते से मीठा होता है ,और सच्चा होता है, यह रिश्ता केवल धागे से बंधी डौर पर ही निर्भर नही करता, उस डौर में छुपा होता है एक अटूट विश्वास और स्नेह. यह रिश्ता भले ही कच्चे  धागे से बंधा हो लेकिन इसकी मिठास दोनों के दिलो में पक्के विश्वास से बंधी होती है. जो हर रिश्ते से मजबूत डौर होती है. यही प्यार रक्षाबंधन के दिन भाई को अपनी बहन के पास खीच लाता है. राखी के अटूट बंधन पर प्रकाश डाल रहे है –

सभी त्यौहार में रक्षाबंधन एक अनूठा त्यौहार है. यह केवल त्यौहार ही नही बल्कि हमारी परम्पराओ का प्रतीक है, जो आज भी हमें अपने देश,, परिवार व संस्कृति से जोड़े रखे हुए है. चाहे भाई विदेश में हो या बहन लेकिन वह राखी के इस त्यौहार पर एक दुसरे को याद जरुर करते है. बहन  राखी भी भेजना नही भूलती. यही सब त्यौहार आज भी हमें अपने देश की मिटी से जोड़े हुए है.

रक्षाबंधन बहन की प्रतिबद्धता का दिन है, जिस दिन भाई अपनी बहन को हर मुसीबत से बचाने का  वचन देता है. उसका साथ निभाने का और उसका ख्याल रखने का वचन देता है. साल भर बहन   अपने भाई से मिलने के लिए इस दिन की रहा तकती है, क्योंकि जब बहन की शादी हो  जाती है या भाई कही दूर रहता है तो उनके मिलन का दिन यही होता है. इस दिन वो सब काम छोड़ कर एक दुसरे  से मिलते है, और बहन  भाई की कलाई पर राखी बांध कर अपने रिश्ते को और भी मजबूत  बनती है और भाई सदा उसका साथ निभाने का वादा करता है.

कब और कैसे मनाते है राखी का त्यौहार

यह त्यौहार श्रवण मास की पूर्णिमा (जुलाई -अगस्त ) को मनाया जाता है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बंधती है और उसके माथे पर रोली का तिलक लगाती  है और उसे मीठा खिलाती है तथा सदैव  उसकी दीर्घ आयु की कामना करती है व विजयी होने  की कामना करती है. भाई अपनी लाडली बहन को कोई ना कोई तोहफा या पैसे देता है ,लेकिन असल तोहफा  उसका वह  वचन ही होता है कि वह हर प्रकार के अहित से उसकी रक्षा करेगा और अपनी बहन का सदैव ख्याल रखेगा और हर दु:ख सुख मे उसका साथ निभाएगा.

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गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने 1905 में शान्तिनिकेतन रक्षाबंधन की शुरुआत की थी.  और यह परम्परा आज भी शांति निकेतन  मे चल रही है, लेकिन वहा भाई बहन के बीच राखी नही बल्कि मित्रो के बीच यह त्यौहार मनाया जाता है. ताकि उनके बीच मधुर सम्बन्ध  बने रहे.

बदलता ट्रेंड

इस साल यह त्यौहार 03 अगस्त को मनाया जायेगा. हर साल दुकानों पर नये नये डिजाईन की राखी आती है, जो सभी बहनो को खूब लुभाती है.  सभी बहन चाहती है कि वो अपने भाई को ऐसी राखी बांधे जो सब से सुन्दर हो और मजबूत हो जो पुरे साल उसके भाई की कलाई पर सजी रहे. बाज़ार मे रेशम के धागे से लेकर सोने चांदी की राखी उपलब्ध है और अब तो हीरे   की राखी भी बजारों मे मिल रही है. वैसे देखा जाये तो असल राखी कलावे की होती है. लेकिन आज-कल नई  चीजो का दौर  है, तो त्यौहार को ही क्यों ना नये जमाने के चार चाँद लगाएं.  पहले बहन   मिठाई का डब्बा दिया करती थी, लेकिन अब वो  अपने भाई को चाकलेट, अप्पी, फ्रूटी ,बिस्कुट के पक्केट भी देने लगी है क्योंकि आज कल के लोगो को स्नैक्स  जैसी चीजे अधिक पसंद होती है, इसलिए वो भी चाहते  है की जो उनके भाई को पसंद हो और यही नया ट्रेंड बनता जा रहा है.

मुहबोली बहन अथवा भाई बनाने का फैशन ही भाई बहन के पवित्रता से बने  रिश्ते को संदेहस्पद  बनाता है. बहनों और भाइयों दोनों को रिश्तों कि नाजुकता को ध्यान मे रखना चाहिये, नये पीढ़ी अभी इन बातों से वंचित है कि भावनओं का अनादर एवं विश्वास के साथ घात अशोभनीय है.

इतिहास के पन्नो में 

रक्षा बंधन का जिक्र इतिहास की कहानियों में भी मिलता है महाभारत में द्रौपदी ने श्री क्रषण के हाथ में अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा था. जब श्री कृष्ण ने खुद को घायल कर लिया था और उनके हाथों से खून बहने लगा था. तब द्रौपदी ने ही अपना पल्ला फाड़ कर बांधा इसी प्रकार उन दोनों के बीच भाई- बहन का रिश्ता विकसित  हुआ. श्री कृष्ण  ने उसकी रक्षा करने का वचन दिया था. इस त्यौहार को विश्वास की डौर ने परस्पर आज भी बांधा हुआ है. रक्षा का अर्थ होता है- बचाव करना.

हुमायूँ के समय  मे चित्तोड़  की रानी कर्मावती ने दिल्ली   के मुग़ल बादशाह हुमांयू को राखी भेज कर भाई बनाया था. उस समय चित्तोड़ पर गुजरात के राजा ने आक्रमण किया था. तब कर्मावती ने हुमांयू को राखी भेज कर मद्दद की गुजारिस की थी.  इस राखी से भावुक हुआ हुमायूँ फ़ौरन रानी की मदद के लिये पहुचा और राखी की इज्ज़त  और सम्मान के लिये गुजरात के बादशाह से युद्ध किया.

पुरु बने ग्रीक की रानी के भाई

300 बीसी में अलेक्ज़ेन्डर की पत्नी ने भारत में राखी के महत्व को जानकर पुरु को अपना भाई बनाया था. जो की पश्चिमी  भारत के एक महान युधा  थे. उन्हे राखी बांधी और अलेक्ज़ेन्डर पर हमला ना करने की गुजारिश की. पुरु ने भी ग्रीक की रानी को बहन मानते हुए उनके सुहाग की रक्षा की और उनकी राखी का सम्मान किया.

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राजपूतों का इतिहास

कहा जाता है कि जब राजपूत युद्ध के लिए निकलते थे, तो पहले औरते उनके माथे पर तिलक और हाथों  मे कलाई पर रक्षा का धागा बंधती थी.   यह धागा जीत का शुभ चिन्ह माना जाता था. कई बार राजपूत और मराठी रानियों ने मुस्लिम राजाओं को अपना भाई बनाया था, जिससे वो उनके पति के खिलाफ युद्ध  करने से रुक जाएँ. वो उस  धागे को  भेज कर राजाओं से भाई बनने की पेशकश करती थी  और उन्होने अपने सुहाग की रक्षा की गुहार लगाई.

भाई बहन का लगाव व स्नेह  ताउम्र बरकरार रहता है, क्योंकि बहन कभी बाल सखा तो कभी माँ तो कभी पथ प्रदर्शक बन भाई को सिखाती है. हमेशा उसकी विपत्ति मे, उसको हर मुश्किल का सामना करना सिखाती है, उसे जिन्दगी मे आगे बढऩा सिखाती है.  इस उत्सव का मुख्य उदेश्य  परिवारों को जोडऩा है हमेशा रिश्ते बनाये रखना है.

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