Family Story: यादों के साए- क्या थी मां-बाप की जरुरत?

Family Story: डोरबैल बजी. थके कदमों से नलिनी ने उठ कर देखा, रोज की तरह दूध वाला आया था. आज देखा तो उस का 15 साल का लड़का दूध देने आया था. एक चिंता की लकीर उस मासूम चेहरे पर झलक रही थी.

नलिनी आखिर पूछ ही बैठी, “क्या बात है, आज तुम्हारे पिताजी नही आए?”

“वो…वो…मैडम, कल रात अचानक पाप की तबीयत खराब हो गई, वे अस्पताल में भरती हैं. अब जब तक पापा ठीक नहीं हो जाते, रोज मैं ही दूध देने आऊंगा,” कह कर वह दूध देने लगा.

नलिनी के शरीर में अजीब सी उदासी की लहर दौड़ गई. वह गहरी सांस भर कर अंदर आ गई. अकेलेपन का नाग रहरह कर उसे डस रहा था. वह अपने पुराने दिनों को याद कर अकसर उदास रहती. वह चाय प्याले में ले कर और दूध गैस पर रख खिड़की के पास आ खड़ी हो गई. खिड़की से आते ठंडे झरोखों को अंतर्मन में महसूस करती नलिनी अतीत के साए में खो सी गई. उसे वो दिन याद आने लगे जब अस्पताल के चक्कर लगा कर नरेंद्र कभी थकते नहीं थे.

नलिनी की हंसी से घर हमेशा खिलखिलाहट से भरा रहता. जैसे कल ही कि बात हो नरेंद्र जैसे ही अस्पताल से घर आए, तो उन का उतरा चेहरा देख कर नलिनी घबरा गई. रिपोर्ट हाथ में पकड़े नरेंद्र ख़ामोशी से सोफे पर बैठ गए. उन की सांसों का वेग इतना तेज था, मानो वे अभीअभी मीलों दौड़ कर आ रहे हों.

नलिनी ने पानी का गिलास देते हुए पूछा, ‘क्या बात है, क्या लिखा है रिपोर्ट में, सब नौर्मल ही होगा, तुम भी न…?’

‘नहीं नलिनी, कुछ भी नौर्मल नहीं है.’

‘क्या कहा डाक्टर ने, रिपोर्ट क्या कहती हैं? बताओ न प्लीज़?’

‘थोड़ा दम तो लेने दो, कहां भागा जा रहा हूं,’ निस्तेज सी सांस छोड़ते हुए नरेंद्र ने कहा, ‘नलिनी, क्या तुम्हारा दर्द बढ़ता जा रहा है?’

नलिनी चहकती हुई बोली, ‘नहीं तो, आप यों क्यों पूछ रहे हैं?’

लिफाफे से रिपोर्ट निकाल कर टेबल पर पड़े चश्मे की धूल पोंछते हुए नरेंद्र रिपोर्ट को ध्यान से नजर डाल कर उदास आंखों से नलिनी को देखते हुए कहते हैं, ‘नलिनी, तुम्हें ब्रेस्ट कैंसर है. और जल्दी ही इसे रिमूव करवाना होगा, वरना पूरे शरीर में इस के बैक्टीरिया फैलने के चांस हैं.’

‘क्या..??’

नलिनी के चेहरे पर आई चिंता की लकीरें साफ बयां कर रही थीं कि वह अपने लिए चिंतित नहीं है. उम्र का पड़ाव उस की परीक्षा ले रहा था. नरेंद्र को हार्ट प्रौब्लम थी. पिछले साल ही औपरेशन करवाया था. उन को पेसमेकर लगवाया था. डाक्टर ने आराम करने की सलाह दी थी. ऊपर से खानपान का परहेज भी चल रहा था. बड़ी मुश्किलों से तो वह अपनेआप को योगा वौक के जरिए स्वस्थ रखना चाहती थी ताकि नरेंद्र की देखभाल अच्छे से हो सके.

विनय तो आज से 7 साल पहले ही लंदन में सैट हो गया था. व्हाट्सऐप और वीडियोकौल के जरिए क्या यहां की समस्याएं हल हो सकती हैं, उम्र के ढलते दोनों के शरीर बीमार हो गए. यह सोच कर नलिनी वहीं कुरसी पर जड़ हो गई. दोनों एकदूसरे को देख रहे थे. कुछ देर के लिए यों ही मौन ने अपना आतंक जमा लिया था.

कुछ देर में नरेंद्र ने मौन तोड़ा, ‘इस तरह घबरा कर काम नहीं चलेगा, नलिनी. हमें अपने बचे हुए लमहों को खुद ही संभालना होगा. मैं कल ही तुम्हारे औपरेशन करने की बात कर आया हूं. आज ही सारे काम निबटा लो. मैं ने ग्रेच्युटी में से पैसे भी निकाल लिए हैं. खर्चे का कुछ कहा नहीं जा सकता,’ हांफतेहांफते एक ही सांस में नरेंद्र और न जाने क्याक्या कह गए.

नलिनी को कुछ सुनाई ही नहीं दिया. वह रात होने का इंतजार करने लगी. उसे विनय से बात करनी थी.

नलिनी को उदास देख कर नरेंद्र ने वहां पड़ी एक कैसेट लगा दी. गीत बज रहा था, ‘कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन…’ अचानक उन्हें लगा कि इस गीत को सुन कर नलिनी और परेशान हो जाएगी, तभी वहां पड़ी एक नई फिल्म की कैसेट उस में डाली तो गाना बज उठा- ‘ओ मेरी छम्मक छल्लो…’ यह गाना सुनते ही नलिनी के चहरे पर स्मित मुसकान उभर आई.

विनय को जब पता चला, उस ने कहा, ‘पापा के इलाज के लिए अभी पिछले साल ही तो 20 लाख रुपए के आसपास खर्चा हो चुका है.’ और अब मां की बीमारी सुन कर वह कुछ ज्यादा न बोल सका, ‘मां, आप खर्चा बता दो, मैं भेज दूंगा.’

नरेंद्र पास बैठे उस की बातें सुन रहे थे. रिश्तों से बढ़ कर तो पैसा है. यदि पैसा नहीं होता, तो शायद आज मैं जीवित ही न होता. कुछ देर बात कर नलिनी ने राहत की सांस ली.

नलिनी का औपरेशन सक्सैस हुआ. लेकिन नरेंद्र की इस उम्र में अकेले ही भागदौड़ ज्यादा हो चुकी थी. जब रूम में शिफ्ट किया तो नलिनी से ज्यादा नरेंद्र ही थके लग रहे थे. नर्स ने आ कर कहा कि बाबूजी अब घबराने की कोई बात नहीं, आप के साथ कोई है क्या? कुछ दवाएं मंगवानी हैं, ये दवाएं इमरजैंसी हैं, प्लीज जल्दी ले आइए.

नरेंद्र की शारीरिक क्षमता भी अब दम तोड़ चुकी थी. गहरी सांस ले कर वे खांसने लगे. तभी वहां का वार्ड बौय आया. उसे नरेंद्र की हालत पर तरस आया, बोला, ‘बाबूजी, आप माताजी के पास बैठिए, मैं आप को दवाई ला कर देता हूं. मगर यहां किसी से कहिएगा मत, हमें ड्यूटी पर दूसरे काम करने की अनुमति नहीं है.’

नरेंद्र संतोष की सांस ले कर नलिनी के पास बैठे रहे.

नलिनी ठीक हो चुकी थी. उसे हर 15 दिन में कीमो के लिए जाना पड़ता था. उस के बाद उसे दोचार दिनों की कमजोरी का सामना करना पड़ता था. नरेंद्र ने उस की देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी थी.

कुछ दिनों बाद रात को नरेंद्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई. वे नलिनी का साथ छोड़ गए. नलिनी इस सदमे को सहन नहीं कर पा रही थी. धीरेधीरे अकेलेपन से उस की हालत गिर रही थी. विनय ने आ कर अपना पुत्रधर्म निभा दिया था. कुछ महीनों के लिए मां को साथ ले गया था. लेकिन नलिनी को वहां का हवापानी रास नहीं आ रहा था. एक कैदी की भ्रांति जीवन व्यतीत हो रहा था.

नलिनी वापस अपने घर आ गई. उस छोटे से घर में नरेंद्र के साथ बीते दिनों की यादें उसे बहुत सुकून दे रही थीं. उसे प्रतीत हो रहा था जैसे वह अपनी पुरानी दुनिया में वापस आ गई हो, अकेलेपन ने नलिनी को जीना सिखा दिया था. बेटा परिदों की तरह परदेश उड़ चुका था. उस के वापस आने की उम्मीद के दीये का तेल अब धीरेधीरे कम होता जा रहा था. उस ने कभी सोचा नहीं था कि जिंदगी कभी इस मोड़ पर ला कर अकेला छोड़ देगी.

आज वह दूध वाले के बेटे को देख मन में उपजे विचारों के नन्हे कपोलो को खिलते देख सोच रही थी, काश, हम ने भी अपने बच्चों को बड़े सपने न दिखाए होते. लेकिन यह भी सच था कि बच्चे जब बड़े हो कर स्वनिर्णय लेने लगते हैं तो मांबाप उस घर के किसी स्टोररूम के दरवाजे की तरह हो जाते हैं जो सारा समय बंद रहते हैं, जरूरत पड़ने पर ही खुलते हैं.

चाय का कप ले कर नलिनी चाय पीने लगी. उसे याद ही नहीं रहा, गैस पर रखा दूध उफन चुका था. उस ने जल्दी से गैस बंद की. अब उस के विचारों का सैलाब भी थम चुका था. कैसेट लगाई तो वही आखरी गीत बज उठा- ‘ओ मेरी छम्मक छल्लो…’ यह गीत सुन वह मुसकराती हुई बालकनी से आती सुबह की हवा का आनंद लेने लगी. आखिर, उसे अब जीना आ गया था.

Family Story

Drama Story: हैप्पी न्यू ईयर- नए साल में आखिर क्या करने जा रही थी मालिनी

Drama Story: दिसंबर का महीना था. किट्टी पार्टी इस बार रिया के घर थी. अपना हाऊजी का नंबर कटने पर भी किट्टी पार्टी की सब से उम्रदराज 55 वर्षीय मालिनी हमेशा की तरह नहीं चहकीं, तो बाकी 9 मैंबरों ने आंखों ही आंखों में एकदूसरे से पूछा कि आंटी को क्या हुआ है? फिर सब ने पता नहीं में अपनाअपना सिर हिला दिया. सब में सब से कम उम्र की सदस्या थी रिया. अत: उसी ने पूछा, ‘‘आंटी, आज क्या बात है? इतने नंबर कट रहे हैं आप के फिर भी आप चुप क्यों हैं?’’

फीकी हंसी हंसते हुए मालिनी ने कहा, ‘‘नहींनहीं, कोई बात नहीं है.’’

अंजलि ने आग्रह किया, ‘‘नहीं आंटी, कुछ तो है. बताओ न?’’

‘‘पवन ठीक है न?’’ मालिनी की खास सहेली अनीता ने पूछा.

‘‘हां, वह ठीक है. चलो पहले यह राउंड खत्म कर लेते हैं.’’

हाऊजी का पहला राउंड खत्म हुआ तो रिया ने पूछा, ‘‘अरे, आप लोगों का न्यू ईयर का क्या प्लान है?’’

सुमन ने कहा, ‘‘अभी तो कुछ नहीं, देखते हैं सोसायटी में कुछ होता है या नहीं.’’

नीता के पति विनोद सोसायटी की कमेटी के मैंबर थे. अत: उस ने कहा, ‘‘विनोद बता रहे थे कि इस बार कोई प्रोग्राम नहीं होगा, सब मैंबर्स की कुछ इशूज पर तनातनी चल रही है.’’ सारिका झुंझलाई, ‘‘उफ, कितना अच्छा प्रोग्राम होता था सोसायटी में… बाहर जाने का मन नहीं करता… उस दिन होटलों में बहुत वेटिंग होती है और ऊपर से बहुत महंगा भी पड़ता है. फिर जाओ भी तो बस खा कर लौट आओ. हो गया न्यू ईयर सैलिब्रेशन. बिलकुल मजा नहीं आता. सोसायटी में कोई प्रोग्राम होता है तो कितना अच्छा लगता है.’’

रिया ने फिर पूछा, ‘‘आंटी, आप का क्या प्लान है? पवन के पास जाएंगी?’’

‘‘मुश्किल है, अभी कुछ सोचा नहीं है.’’

हाऊजी के बाद सब ने 1-2 गेम्स और खेले, फिर सब खापी कर अपनेअपने घर आ गईं.मालिनी भी अपने घर आईं. कपड़े बदल कर चुपचाप बैड पर लेट गईं. सामने टंगी पति शेखर की तसवीर पर नजर पड़ी तो आंसुओं की नमी से आंखें धुंधलाती चली गईं…

शेखर को गए 7 साल हो गए हैं. हार्टअटैक में देखते ही देखते चल बसे थे. इकलौता बेटा पवन मुलुंड के इस टू बैडरूम के फ्लैट में साथ ही रहता था. उस के विवाह को तब 2 महीने ही हुए थे. जीवन तब सामान्य ढंग से चलने ही लगा था पर बहू नीतू अलग रहना चाहती थी. नीतू ने उन से कभी इस बारे में बात नहीं की थी पर पवन की बातों से मालिनी समझ गई थीं कि दोनों ही अलग रहना चाहते हैं. जबकि उन्होंने हमेशा नीतू को बेटी जैसा स्नेह दिया था. उस की गलतियों पर भी कभी टोका नहीं था. बेटी के सारे शौक नीतू को स्नेह दे कर ही पूरे करने चाहे थे.

पवन का औफिस अंधेरी में था. पवन ने कहा था, ‘‘मां, आनेजाने में थकान हो जाती है, इसलिए अंधेरी में ही एक फ्लैट खरीद कर वहां रहने की सोच रहा हूं.’’ मालिनी ने बस यही कहा था, ‘‘जैसा तुम ठीक समझो. पर यह फ्लैट किराए पर देंगे तो सारा सामान ले कर जाना पड़ेगा.’’

‘‘क्यों मां, किराए पर क्यों देंगे? आप रहेंगी न यहां.’’

यह सुन मालिनी को तेज झटका लगा, ‘‘मैं यहां? अकेली?’’

‘‘मां, वहां तो वन बैडरूम घर ही खरीदूंगा. वहां घर बहुत महंगे हैं. आप यहां खुले घर में आराम से रहना… आप की कितनी जानपहचान है यहां… वहां तो आप इस उम्र में नए माहौल में बोर हो जाएंगी और फिर हम हर हफ्ते तो मिलने आते ही रहेंगे… आप भी बीचबीच में आती रहना.’’

मालिनी ने फिर कुछ नहीं कहा था. सारे आंसू मन के अंदर समेट लिए थे. प्रत्यक्षत: सामान्य बनी रही थीं. पवन फिर 2 महीने के अंदर ही चला गया था. जाने के नाम से नीतू का उत्साह देखते ही बनता था. मालिनी आर्थिक रूप से काफी संपन्न थीं. उच्चपदस्थ अधिकारी थे शेखर. उन्होंने एक दुकान खरीद कर किराए पर दी हुई थी, जिस के किराए से और बाकी मिली धनराशि से मालिनी का काम आराम से चल जाता था. मालिनी को छोड़ बेटाबहू अंधेरी शिफ्ट हो गए थे. मालिनी ने अपने दिल को अच्छी तरह समझा लिया था. यों भी वे काफी हिम्मती, शांत स्वभाव वाली महिला थीं. इस सोसायटी में 20 सालों से रह रही थीं. अच्छीखासी जानपहचान थी, सुशिक्षित थीं, हर उम्र के लोग उन्हें पसंद करते थे. अब खाली समय में वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी थीं. उन का अच्छा टाइम पास हो जाता था.

नीतू ने बेटे को जन्म दिया. पवन मालिनी को कुछ समय पहले ही आ कर ले गया था. नीतू के मातापिता तो विदेश में अपने बेटे के पास ही ज्यादा रहते थे. नन्हे यश की उन्होंने खूब अच्छी देखरेख की. यश 1 महीने का हुआ तो पवन उन्हें वापस छोड़ गया. यश को छोड़ कर जाते हुए उन का दिल भारी हो गया था. पर अब कुछ सालों से जो हो रहा था, उस से वे थकने लगी थीं. त्योहारों पर या किसी और मौके पर पवन उन्हें आ कर ले जाता था. वे भी खुशीखुशी चली जाती थीं. पर पवन के घर जाते ही किचन का सारा काम उन के कंधों पर डाल दोनों शौपिंग करने, अपने दोस्तों से मिलने निकल जाते. जातेजाते दोनों उन से कह चीजें बनाने की फरमाइश कर जाते. सारा सामान दिखा कर यश को भी उन के ही पास छोड़ जाते. यश को संभालते हुए सारे काम करते उन की हालत खराब हो जाती थी. काम खत्म होते ही पवन उन्हें उन के घर छोड़ जाता था. यहां भी वे अकेले ही सब करतीं. उन की वर्षों पुरानी मेड रजनी उन के दुखदर्द को समझती थी. उन की दिल से सेवा करती थी. इस दीवाली भी यही हुआ था. सारे दिन पकवान बना कर किचन में खड़ेखड़े मालिनी की हिम्मत जवाब दे गई तो नीतू ने रूखे धीमे स्वर में कहा पर उन्हें सुनाई दे गया था, ‘‘पवन, मां को आज ही छोड़ आओ. काम तो हो ही गया है. अब वहां अपने घर जा कर आराम कर लेंगी.’’

जब उन की कोख से जन्मा उन का इकलौता बेटा दीवाली की शाम उन्हें अकेले घर में छोड़ गया तो उन का मन पत्थर सा हो गया. सारे रिश्ते मोहमाया से लगने लगे… वे कब तक अपने ही बेटेबहू के हाथों मूर्ख बनती रहेंगी. अगर उन्हें मां की जरूरत नहीं है तो वे क्यों नहीं स्वीकार कर लेतीं कि उन का कोई नहीं है अब. वह तो सामने वाले फ्लैट में रहने वाली सारिका ने उन का ताला खुला देखा तो हैरान रह गई, ‘‘आंटी, आज आप यहां? पवन कहां है?’’ मालिनी बस इतना ही कह पाई, ‘‘अपने घर.’’ यह कह कर उन्होंने जैसे सारिका को देखा था, उस से सारिका को कुछ पूछने की जरूरत नहीं थी. फिर वही उन की दीवाली की तैयारी कर घर को थोड़ा संवार गई थी. बाद में थाली में खाना लगा कर ले आई थी और उन्हें जबरदस्ती खिलाया था.

उस दिन का दर्द याद कर मालिनी की आंखें आज भी भर आई हैं और आज जब वे किट्टी के लिए तैयार हो रही थीं, तो पवन का फोन आया था, ‘‘मां, इस न्यू ईयर पर मेरे बौस और कुछ कुलीग्स डिनर र घर आएंगे, आप को लेने आऊंगा.’’दीवाली के बाद पवन ने आज फोन किया था. वे बीच में जब भी फोन कर बात करना चाहती थीं, पर पवन बहुत बिजी हूं मां, बाद में करूंगा, कह कर फोन काट देता था.

नीतू तो जौब भी नहीं करती थी. तब भी महीने 2 महीने में 1 बार बहुत औपचारिक सा फोन करती थी. अचानक फोन की आवाज से ही वे वर्तमान में लौट आईं. वे हैरान हुईं, नीतू का फोन था, ‘‘मां, नमस्ते. आप कैसी हैं?’’

‘‘ठीक हूं, तुम तीनों कैसे हो?’’

‘‘सब ठीक हैं, मां. आप को पवन ने बताया होगा 31 दिसंबर को कुछ मेहमान आ रहे हैं. 15-20 लोगों की पार्टी है, मां. आप 1 दिन पहले आ जाना. बहुत सारी चीजें बनानी हैं और आप को तो पता ही है मुझे कुकिंग की उतनी जानकारी नहीं है. आप का बनाया खाना सब को पसंद आता है, आप तैयार रहना, बाद में करती हूं फोन,’’ कह कर जब नीतू ने फोन काट दिया तो मालिनी जैसे होश में आईं कि बच्चे इतने चालाक, निर्मोही क्यों हो जाते हैं और वे भी अपनी ही मां के साथ? इतनी होशियारी? कोई यह नहीं पूछता कि वे कैसी हैं? अकेले कैसी रहती हैं? बस, अपने ही प्रोग्राम, अपनी ही बातें. बहू का क्या दोष जब बेटा ही इतना आत्मकेंद्रित हो गया. मालिनी ने एक ठंडी सांस भरी कि नहीं, अब वे स्वार्थी बेटे के हाथों की कठपुतली बन नहीं जीएंगी. पिछली बार बेटे के घरगृहस्थी के कामों में उन की कमर जवाब दे गई थी. 10 दिन लग गए थे कमरदर्द ठीक होने में. अब उतना काम नहीं होता उन से.

अगली किट्टी रेखा के घर थी. न्यू ईयर के सैलिब्रेशन की बात छिड़ी, तो अंजलि ने कहा, ‘‘कुछ प्रोग्राम रखने का मन तो है पर घर तो वैसे ही दोनों बच्चों के सामान से भरा है मेरा. घर में तो पार्टी की जगह है नहीं. क्या करें, कुछ तो होना चाहिए न.’’

रेखा ने पूछा, ‘‘आंटी, आप का क्या प्रोग्राम है? पवन के साथ रहेंगी उस दिन?’’

‘‘अभी सोचा नहीं,’’ कह मालिनी सोच में डूब गईं.

उन्हें सोच में डूबा देख रेखा ने पूछा, ‘‘आंटी, आप क्या सोचने लगीं?’’

‘‘यही कि तुम सब अगर चाहो तो न्यू ईयर की पार्टी मेरे घर रख सकती हो. पूरा घर खाली ही तो रहता है… इसी बहाने मेरे घर भी रौनक हो जाएगी.’’

‘‘क्या?’’ सब चौंकी, ‘‘आप के घर?’’

‘‘हां, इस में हैरानी की क्या बात है?’’ मालिनी इस बार दिल खोल कर हंसीं.

रिया ने कहा, ‘‘वाह आंटी, क्या आइडिया दिया है पर आप तो पवन के घर…’’

मालिनी ने बीच में ही कहा, ‘‘इस बार कुछ अलग सोच रही हूं. इस बार नए साल की नई शुरुआत अपने घर से करूंगी और वह भी अच्छे सैलिब्रेशन के साथ. डिनर बाहर से और्डर कर मंगा लेंगे, तुम लोगों में से जो बाहर न जा रहा हो वह सपरिवार मेरे घर आ जाए… कुछ गेम्स खेलेंगे, डिनर करेंगे… बहुत मजा आएगा. और वैसे भी हमारा यह ग्रुप जहां भी बैठता है, मजा आ ही जाता है.’’

यह सुन कर रिया ने तो मालिनी के गले में बांहें ही डाल दीं, ‘‘वाह आंटी, क्या प्रोग्राम बनाया है. जगह की तो प्रौब्लम ही सौल्व हो गई.’’ सारिका ने कहा, ‘‘आंटी, आप किसी काम का प्रैशर मत लेना. हम सब मिल कर संभाल लेंगे और खर्चा सब शेयर करेंगे.’’

मालिनी ने कहा, ‘‘न्यू ईयर ही क्यों, तुम लोग जब कोई पार्टी रखना चाहो, मेरे घर ही रख लिया करो, तुम लोगों के साथ मुझे भी तो अच्छा लगता है.’’

‘‘मगर आंटी, पवन लेने आ गया तो?’’

‘‘नहीं, इस बार मैं यहीं रहूंगी.’’

फिर तो सब जोश में आ गईं और फिर पूरे उत्साह के साथ प्लान बनने लगा. कुछ दिनों बाद फिर सब मालिनी के घर इकट्ठा हुईं. सुमन, अनीता, मंजू और नेहा तो उस दिन बाहर जा रही थीं. नीता, सारिका, रिया, रेखा और अंजलि सपरिवार इस पार्टी में आने वाली थीं. सब के पति भी आपस में अच्छे दोस्त थे. मालिनी का सब से परिचय तो था ही… जोरशोर से प्रोग्राम बन रहा था. 30 दिसंबर को सुबह पवन का फोन आया, ‘‘मां, आज आप को लेने आऊंगा, तैयार रहना.’’

‘‘नहीं बेटा, इस बार नहीं आ पाऊंगी.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘कुछ प्रोग्राम है मेरा.’’

पवन झुंझलाया, ‘‘आप का क्या प्रोग्राम हो सकता है? अकेली तो हो?’’

‘‘नहीं, अकेली कहां हूं. कई लोगों के साथ न्यू ईयर पार्टी रखी है घर पर.’’

‘‘मां आप का दिमाग तो ठीक है? इस उम्र में पार्टी रख रही हैं? यहां कौन करेगा सब?’’

‘‘उम्र के बारे में तो मैं ने सोचा नहीं. हां, इस बार आ नहीं पाऊंगी.’’

पवन ने इस बार दूसरे सुर में बात की, ‘‘मां, आप इस मौके पर क्यों अकेली रहें? अपने बेटे के घर ज्यादा अच्छा लगेगा न?’’

‘‘अकेली तो मैं सालों से रह रही हूं बेटा, उस की तो मुझे आदत है.’’

पवन चिढ़ कर बोला, ‘‘जैसी आप की मरजी,’’ और गुस्से से फोन पटक दिया. पवन का तमतमाया चेहरा देख कर नीतू ने पूछा, ‘‘क्या हुआ?’’

‘‘मां नहीं आएंगी.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘उन्होंने अपने घर पार्टी रखी है.’’

‘‘क्या? क्यों? अब क्या होगा, मैं तो इतने लोगों का खाना नहीं बना पाऊंगी?’’

‘‘अब तो तुम्हें ही बनाना है.’’

‘‘नहीं पवन, बिलकुल नहीं बनाऊंगी.’’

‘‘मैं सब को इन्वाइट कर चुका हूं.’’

‘‘तो बाहर से मंगवा लेना.’’

‘‘नहीं, बहुत महंगा पड़ेगा.’’

‘‘नहीं, मुझ से तो नहीं होगा.’’

दोनों लड़ पड़े. जम कर बहस हुई. अंत में पवन ने सब से मां की बीमारी का बहाना कर पार्टी कैंसिल कर दी. दोनों बुरी तरह चिढ़े हुए थे. पवन ने कहा, ‘‘अगर तुम मां के साथ अच्छा संबंध रखतीं तो मुझे आज सब से झूठ न बोलना पड़ता. अगर मां को यहां अच्छा लगता तो वे आज अलग वहां अकेली क्यों खुश रहतीं?’’ नीतू ने तपाक से जवाब दिया, ‘‘मुझे क्या समझा रहे हो… तुम्हारी मां हैं, बिना मतलब के जब तुम ही उन्हें फोन नहीं करते तो मैं तो बहू हूं.’’

दोनों एकदूसरे को तानेउलाहने देते रहे. दूसरे दिन भी दोनों एकदूसरे से मुंह फुलाए रहे.

हाऊजी, गेम्स, म्यूजिक और बढि़या डिनर के साथ न्यू ईयर का जश्न तो मना, पर कहीं और.

Drama Story

Love Story: समझौता- आगे बढ़ने के लिए वैशाली ने कैसे समझौता किया

Love Story: वेल्लूर से कोलकाता वापस आ कर राजीव सीधे घर न जा कर एअरपोर्ट से आफिस आ गया था. उसे बौस का आदेश था कि कर्मचारियों की सारी पेमेंट आज ही करनी है.

पिछले कई दिनों से उस के आफिस में काफी गड़बड़ी चल रही थी. अपने बौस अमन की गैरमौजूदगी में सारा प्रबंध राजीव ही देखता था. कर्मचारियों को भुगतान पूरा करने के बाद राजीव ने तसल्ली से कई दिनों की पड़ी डाक छांटी. फिर थोड़ा आराम करने की मुद्रा में वह आरामकुरसी पर निढाल सा लेट गया. राजीव ने आंखें बंद कीं तो पिछले दिनों की तमाम घटनाएं एक के बाद एक उसे याद आने लगीं. उसे काफी सुकून मिला.

वैशाली को अचानक आए स्ट्रोक के कारण उसे आननफानन में वेल्लूर ले जाना पड़ा था. कई तरह के टैस्ट, बड़ेबड़े और विशेषज्ञ डाक्टरों ने आपस में सलाह कर कई हफ्तों की जद्दोजहद के बाद यह नतीजा निकाला कि अब वैशाली अपने पैरों पर कभी खड़ी नहीं हो सकती क्योंकि उस के शरीर का निचला हिस्सा हमेशा के लिए स्पंदनहीन हो चुका है. वह व्हील चेयर की मोहताज हो गई थी. पत्नी की ऐसी हालत देख कर राजीव का दिल हाहाकार कर उठा, क्योंकि अब उस का वैवाहिक जीवन अंधकारमय हो गया था.

एक तरफ वैशाली असहाय सी अस्पताल में डाक्टरों और नर्सों की निगरानी में थी दूसरी तरफ राजीव को अपनी कोई सुधबुध न थी. कभी खाता, कभी नहीं खाता.

एक झटके में उस की पूरी दुनिया उजड़ गई थी. उस की वैशाली…इस के आगे उस का संज्ञाशून्य दिमाग कुछ सोच नहीं पा रहा था.

मोबाइल बजने से उस की सोच को दिशा मिली.

लंदन से बौस अमन का फोन था. वैशाली के बारे में पूछ रहे थे कि वह कैसी है?

‘‘डा. सुरजीत से बात हुई? वह तो बे्रन स्पेशलिस्ट हैं,’’ अमन बोले.

‘‘हां, उन को भी सारी रिपोर्ट दिखाई थी. मैं ने अभी डा. अभिजीत से भी बात की है. उन्होंने भी सारी रिपोर्ट देख कर कहा कि ट्रीटमेंट तो ठीक ही चल रहा है. पार्किन्सन का भी कुछ सिम्टम दिखाई दे रहा है.’’

‘‘जीतेजी इनसान को मारा तो नहीं जा सकता. जब तक सांस है तब तक आस है.’’

‘‘जी सर.’’

अपने बौस अमन से बात करने के बाद राजीव का मन और भी खट्टा हो गया. घर लौट कर कपड़े भी नहीं बदले, अपने बेडरूम में आ कर लेट गया. मां ने खाने के लिए पूछा तो मना कर दिया. बाबूजी नन्ही श्रेया को सुला रहे थे. आ कर पूछा, ‘‘बेटा, अब कैसी है, वैशाली? कुछ उम्मीद…’’

राजीव ने ना की मुद्रा में गरदन हिला दी तो बाबूजी गमगीन से वापस चले गए.

राजीव के मानसपटल पर वैशाली के साथ की कई मधुर यादें चलचित्र की तरह चलने लगीं.

उस दिन एम.बी.ए. का सेमिनार था. राजीव को घर से निकलने में ही थोड़ी देर हो गई थी. इसलिए वह सेमिनार हाल में पहुंचने के लिए जल्दीजल्दी सीढि़यां चढ़ रहा था. इतने में ऊपर से आती जिस लड़की से टकराया तो अपने को संभाल नहीं सका और जनाब चारों खाने चित.

लड़की ने रेलिंग पकड़ ली थी इसलिए गिरने से बच गई पर राजीव लुढ़कता चला गया. वह तो शुक्र था कि अभी 5-6 सीढि़यां ही वह चढ़ा था इसलिए उसे ज्यादा चोट नहीं आई.

लड़की ने उस के सारे बिखरे पेपर समेट कर उसे दिए तो राजीव अपलक सा उस वीनस की मूर्ति को देखता ही रह गया. उस का ध्यान तब टूटा जब लड़की ने उसे सहारा दे कर उठाना चाहा. औपचारिकता में धन्यवाद दे कर राजीव सेमिनार हाल की ओर चल दिया.

सेमिनार के दौरान दोनों नायक- नायिका बन गए.

सेमिनार के बाद राजीव उस लड़की से मिला तो पता चला कि जिस मूर्ति से वह टकराया था उस का नाम वैशाली है.

राजीव का फाइनल ईयर था तो वैशाली भी 2-4 महीने ही उस से पीछे थी. एक ही पढ़ाई, एक जैसी सोच, रोजरोज का मिलना, एकसाथ बैठ कर चायनाश्ता करते. दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. कसमें, वादे, एकसाथ खाना, एक ही कुल्हड़ में चाय पीना. प्रोफेसरों की नकलें उतारना, बरसात में भीग कर भुट्टे खाना उन की दिनचर्या बन गई.

एक बार पुचके (गोलगप्पे) खाते वक्त वैशाली की नाक बहने लगी तो राजीव बहुत हंसा…तब वैशाली बोली, ‘खुद तो मिर्ची खाते नहीं…कोई दूसरा खाता है तो तुम्हारे पेट में जलन क्यों होती है?’

‘अरे, अपनी शक्ल तो देखो. ज्यादा तीखी मिर्ची की वजह से तुम्हारी नाक बह रही है?’

‘तो पोंछ दो न,’ वैशाली ठुनक कर बोली.

और अपना रुमाल ले कर सचमुच राजीव ने वैशाली की नाक साफ कर दी.

पढ़ाई खत्म होते ही राजीव ने तपसिया के लेदर की निजी कंपनी में सहायक के रूप में कार्यभार संभाल लिया और वैशाली को भी एक प्राइवेट फर्म में सलाहकार के पद पर नियुक्ति मिल गई.

सुंदर, तीखे नैननक्श की रूपसी वैशाली पर सारा स्टाफ फिदा था पर वह दुलहन बनी राजीव की.

मधुमास कब दिनों और महीनों में गुजर गया, पता ही नहीं चला.

वैशाली अपने काम के प्रति बहुत संजीदा थी. उस की कार्यकुशलता को देखते हुए उस की कंपनी ने उसे प्रमोशन दिया. गाड़ी, फ्लैट सब कंपनी की ओर से मिल गया.

इधर राजीव का भी प्रमोशन हुआ. उसे भी तपसिया में ही फ्लैट और गाड़ी दी गई. अब दिक्कत यह थी कि वैशाली का डलहौजी ट्रांसफर हो गया था.

सुबह की चाय पीते समय वैशाली बुझीबुझी सी थी. प्रमोशन की कोई खुशी नहीं थी. उस ने राजीव से पूछा, ‘राजीव, हम डलहौजी कब शिफ्ट होंगे?’

‘हम?’

‘हम दोनों अलग कैसे रहेंगे?’

‘नौकरी करनी है तो रहना ही पड़ेगा,’ राजीव बोला.

‘राजीव, यह मेरे कैरियर का सवाल है.’

‘वह तो ठीक है,’ राजीव बोला, ‘पर वहां के सीनियर स्टाफ के साथ तुम कैसे मिक्स हो पाओगी?’

‘मजबूरी है…और कोई चारा भी तो नहीं है.’

राजीव चाय पीतेपीते कुछ सोचने लगा, फिर बोला, ‘तपसिया से डलहौजी बहुत दूर है. दोनों का सारा समय तो आनेजाने में ही व्यतीत हो जाएगा. मुझे एक आइडिया आया है. बोलो, मंजूर है?’

‘जरा बताओ तो सही,’ बड़ीबड़ी आंखें उठा कर, वैशाली बोली.

‘देखो, तुम्हारे प्रजेंटेशन से मेरे बौस बहुत प्रभावित हैं, वह तो मुझे कितनी बार अपनी फर्म में तुम्हें ज्वाइन कराने के लिए कह चुके हैं. पर अचानक तुम्हारा प्रमोशन होने से बात दब गई.’

‘जरा सोचो…अगर तुम हमारी फर्म को ज्वाइन कर लेती हो तो कितना अच्छा होगा. तुम्हारा सीनियर स्टाफ का जो फोबिया है उस से भी तुम्हें मुक्ति मिल जाएगी.’

वैशाली कुछ सोचने लगी तो राजीव फिर बोला, ‘इसी बहाने हम पतिपत्नी एकसाथ कुछ एक पल बिता सकेंगे और तुम्हारा कैरियर भी हैंपर नहीं होगा. अब सोचो मत…कुछ भी हो, कोई भी कारण दिखा कर वहां की नौकरी से त्यागपत्र दे दो.’

वैशाली ने तपसिया में मार्केटिंग मैनेजर का पद संभाल लिया. बौस निश्ंिचत हो कर महीनों विदेश में रहते. अब तो दोनों फर्म के सर्वेसर्वा से हो गए. 6 महीने में ही लेदर मार्केट में अमन अंसारी की कंपनी का नाम नया नहीं रह गया. उन के बनाए लेदर के बैग, बेल्ट, पर्स आदि की मार्केटिंग का सारा काम वैशाली देखती तो सेलपरचेज का काम राजीव.

देखतेदेखते अब कंपनी काफी मुनाफे में चल रही थी और सबकुछ अच्छा चल रहा था. दोनों की जिंदगी में कोई तमन्ना बाकी नहीं रह गई थी. 2 साल यों ही बीत गए. सुख के बाद दुख तो आता ही है.

वैशाली को मार्केटिंग मैनेजर होने की वजह से कभी मुंबई, दिल्ली, जयपुर तो कभी विदेश का भी टूर लगाना पड़ता था. 2-3 बार तो राजीव व वैशाली यूरोप के टूर पर साथसाथ गए. फिर जरूरत के हिसाब से जाने लगे.

इसी बीच कंपनी के मालिक अमन अंसारी लंदन का सारा काम कोलकाता शिफ्ट कर के तपसिया के गेस्ट हाउस में रहने लगे. पता नहीं कब, कैसे वैशाली राजीव से कटीकटी सी रहने लगी.

कई बार वैशाली को बौस के साथ काम की वजह से बाहर जाना पड़ता. राजीव छोटी सोच का नहीं था पर धीरेधीरे दबे पांव बौस के साथ बढ़ती नजदीकियां और अपने प्रति बढ़ती दूरियां देख हकीकत को वह नजरअंदाज भी नहीं कर सकता था.

उस दिन शाम को वैशाली को बैग तैयार करते देख राजीव ने पूछा, ‘कहां जा रही हो?’

‘प्रजेंटेशन के लिए दिल्ली जाना है.’

‘लेकिन 2-3 दिन से तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है. तुम्हें तो छुट्टी ले कर डाक्टर स्नेहा को दिखाने की बात…’

बात को बीच में ही काट कर वैशाली उखड़ कर बोली, ‘तबीयत का क्या, मामूली हरारत है. काम ज्यादा जरूरी है, रुपए से ज्यादा हमारी फर्म की प्रतिष्ठा की बात है. वर्षों से मिलता आया टेंडर अगर हमारी प्रतिद्वंद्वी फर्म को मिल गया तो हमारी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा. मैं नहीं चाहती कि मेरी जरा सी लापरवाही से अमनजी को तकलीफ पहुंचे.’

दिल्ली से आने के बाद वैशाली काफी चुपचुप रहती. उस के व्यवहार में आए इस बदलाव को राजीव ने बहुत करीब से महसूस किया.

इसी बीच वैशाली की वर्षों की मां बनने की साध भी पूरी हुई. बड़ी प्यारी सी बच्ची को उस ने जन्म दिया. श्रेया अभी 2 महीने की हुई भी तो उसे सास के सहारे छोड़ वैशाली ने फिर से आफिस ज्वाइन किया.

‘वैशाली, अभी श्रेया छोटी है. उसे तुम्हारी जरूरत है,’ राजीव के यह कहने पर वैशाली तपाक से बोली, ‘आफिस को भी तो मेरी जरूरत है.’

देर से आना, सुबह जल्दी निकल जाना, काम के बोझ से वैशाली के स्वभाव में काफी चिड़चिड़ापन आ गया था लेकिन उस की सुंदरता, बरकरार थी. एक दिन आधी रात को ‘यह गलत है… यह गलत है’ कह कर वैशाली चीख उठी. वह पूरी पसीने में नहाई हुई थी. मुंह से अजीब सी आवाजें निकल रही थीं. जोरजोर से छाती को पकड़ कर हांफ रही थी.

राजीव घबरा गया, ‘क्या हुआ, वैशाली? ऐसे क्यों कर रही हो? क्या गलत है? बताओ मुझे.’

वैशाली उस की बांहों में बेहोश पड़ी थी. उस की समझ में नहीं आया कि क्या हुआ? उसे फौरन अस्पताल में भर्ती किया गया. डाक्टरों ने बताया कि इन का बे्रन का सेरेब्रल अटैक था, जिसे दूसरे शब्दों में बे्रन हेमरेज का स्ट्रोक भी कह सकते हैं. कई दिनों तक वह आई.सी.यू. में भरती रही. अमन ने पानी की तरह रुपए खर्च किए. डाक्टरों की लाइन लगा दी. वैशाली के शरीर का दायां हिस्सा, जो अटैक से बेकार हो गया था, धीरेधीरे विशेषज्ञ डाक्टरों व फिजियोथैरेपिस्ट की देखरेख में ठीक होने लगा था.

‘अरे, आज तो तुम ने श्रेया को भी गोद में उठा लिया?’ राजीव बोला तो ‘हां,’ कह कर वैशाली नजरें चुराने लगी. यानी कोई फांस थी जिसे वह निकाल नहीं पा रही थी.

राजीव वैशाली से बहुत प्यार करता था. उस की ऐसी हालत देख कर उस का दिल खून के आंसू रो पड़ता.

वेल्लूर ले जा कर महीनों इलाज चला. डाक्टरों की फीस, इलाज आदि सभी खर्चों में बौस ने कोई कमी नहीं रखी. राजीव का आत्मसम्मान आहत तो होता था, पर वैशाली को बिना इलाज के यों ही तो नहीं छोड़ सकता था.

कितनी बार सोचा कि अब यह नौकरी छोड़ कर दूसरी नौकरी कर लूंगा, लेकिन लेदर उद्योग में अमन अंसारी का इतना दबदबा था कि उन के मुलाजिम को उन की मरजी के खिलाफ कोई अपनी फर्म में रख कर उन से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहता था. इसलिए भी राजीव के हाथ बंधे थे, आंखों से सबकुछ देखते हुए भी वह खामोश था.

श्रेया अपनी दादी के पास ज्यादा रहती थी इसलिए वह उन्हें ही मां कहती.

दवा और परहेज से वैशाली अब सामान्य जीवन जीने लगी. उस के ठीक होने पर बौस ने पार्टी दी. इसे न चाहते हुए भी राजीव ने बौस का एक और एहसान मान लिया. अपने कुलीग के तीखे व्यंग्य सुन कर उस के बदन पर सैकड़ों चींटियां सी रेंग गई थीं.

उस पार्टी में वैशाली ने गुलाबी शिफौन की साड़ी पहनी थी जिस पर सिल्वर कलर के बेलबूटे जड़े थे. उस पर गले में हीरों का जगमगाता नेकलेस उस के रूप में और भी चार चांद लगा रहा था. सब मंत्रमुग्ध आंखों से वैशाली के रूपराशि और यौवन से भरे शरीर को देख रहे थे और दबेदबे स्वर में खिल्ली भी उड़ा रहे थे कि क्या नसीब वाला है मैनेजर बाबू्. इन के तो दोनों हाथों में लड्डू हैं.

शर्म से गड़ा राजीव अमन अंसारी के बगल में खड़ी अपनी पत्नी को अपलक देख रहा था.

‘अब तुम घर पर रहो. तुम्हें काम करने की कोई जरूरत नहीं है. श्रेया को संभालो. मांबाबा अब उसे नहीं संभाल सकते. अब वह बहुत चंचल हो गई है.’

वैशाली बिना नानुकूर किए राजीव की बात मान गई तो सोचा, बौस से बात करूंगा.

एक दिन अमनजी ने पूछ लिया, ‘अरे, राजीव. मेरी मार्केटिंग मैनेजर को कब तक तुम घर में बैठा कर रखोगे?’

‘सर, मैं नहीं चाहता कि अब वैशाली नौकरी करे. उस का घर पर रह कर श्रेया को संभालना बहुत जरूरी हो गया है. यहां मैं सब संभाल लूंगा.’

‘अरे, ऐसे कैसे हो सकता है?’ अमन थोड़े घबरा गए. फिर संभल कर बोले, ‘राजीव, मैं ने तो तुम्हारे लिए मुंबई वाला प्रोजेक्ट तैयार किया है. इस बार सोचा कि तुम्हें भेजूंगा.’

‘पर सर, वैशाली व श्रेया को ऐसी हालत में मेरी ज्यादा जरूरत है,’ वह धीरे से बोला, ‘नहीं, सर, मैं नहीं जा सकूंगा.’

‘देख लो, मैं तुम्हारे घर की परिस्थितियों से अवगत हूं. सब समझता हूं और मुझे बहुत दुख है. मुझ से जो भी होगा मैं तुम्हारे परिवार के लिए करूंगा. यार, मैं ही चला जाता पर मेरे मातापिता हज करने जा रहे हैं. इसलिए मेरा उन के पास होना बहुत जरूरी है.’

अब नौकरी का सवाल था…मना नहीं कर सकता था.

2 दिन बाद बाबा का फोन आया कि वैशाली आफिस जाने लगी है, देर रात भी लौटी. राजीव ने बात करनी चाही तो अपना मोबाइल नहीं उठाया. दोबारा किया तो स्विच औफ मिला.

लौट कर राजीव ने पूछा, ‘वैशाली, मैं ने तुम्हें काम पर जाने के लिए मना किया था न?’

‘मेरा घर बैठे मन नहीं लग रहा था,’ वैशाली का संक्षिप्त सा उत्तर था.

राजीव की समझ में नहीं आ रहा था कि अमन अंसारी के चंगुल से कैसे वह वैशाली को छुड़ाए. आज वह मान रहा था कि पत्नी को अपनी फर्म में रखवाना उस की बहुत बड़ी भूल थी जिस का खमियाजा आज वह भुगत रहा है.

उसे यह सोच कर बहुत अजीब लगता कि साल्टलेक के अपने आलीशान बंगले को छोड़ कर अमनजी जबतब गेस्ट हाउस में कैसे पड़े रहते हैं? सुना था कि उन की बीवी उन्हें 2 महीने में ही तलाक दे कर अपने किसी प्रेमी के साथ चली गई थी. कारण जो भी रहा हो, यह बात तो साफ थी कि अमन एक दिलफेंक तबीयत का आदमी है.

वैशाली का जो व्यवहार था वह दिन पर दिन अजीब सा होता जा रहा था. कभी वह रोती तो कभी पागलों की तरह हंसती. उस की ऐसी हालत देख कर राजीव उसे समझाता, ‘वैशाली, तुम कुछ मत सोचो, तुम्हारे सारे गुनाह माफ हैं, पर प्लीज, दिल पर बोझ मत लो.’

तब वह राजीव के सीने से लग कर सिसक पड़ती. जैसे लगता कि वह आत्मग्लानि की आग में जल रही हो?

राजीव की समझ में नहीं आ रहा था कि वह पत्नी को कैसे समझाए कि वह जिस हालात की मारी है वह गुनाह किसी और ने किया और सजा उसे मिली.

अपने ही खयालों में उलझा राजीव हड़बड़ा कर उठ बैठा, उस के मोबाइल पर घर का नंबर आ रहा था. उस ने फोन उठाया तो मां ने कहा, ‘‘बेटा, वैशाली बाथरूम में गिर गई है.’’

अस्पताल में भरती किया तो पता चला कि फिर मेजर स्ट्रोक आया था. यहां कोलकाता के डाक्टरों ने जवाब दे दिया, तब उसे दोबारा वेल्लूर ले जाना पड़ा. बौस अमन अंसारी भी साथ गए. इस बार भी सारा खर्चा उन्होंने किया. राजीव के पास जितनी जमापूंजी थी वह सब कोलकाता में ही लग चुकी थी. क्या करता? इलाज भी करवाना जरूरी था. वह अपनी आंखों के सामने वैशाली को बिना इलाज के मरते भी तो नहीं देख सकता? बिना पैसे के वह कुछ भी नहीं कर सकता था. न उस के पास सिफारिश है न पैसा. आजकल बातबात पर पैसे की जरूरत पड़ती है.

लाखों रुपए इलाज में लगे. 2 महीने से वैशाली वेल्लूर के आई.सी.यू. में थी जिस का रोज का खर्च हजारों में पड़ता था. डाक्टरों की विजिट फीस, आनेजाने का किराया, कहांकहां तक वह चुकाता? इसलिए पैसे की खातिर राजीव ने अपनी वैशाली के लिए हालात से समझौता कर लिया. उसे इस को स्वीकार करने में कोई हिचक महसूस नहीं होती.

अब तो वैशाली बेड पर पड़ी जिंदा लाश थी, जो बोल नहीं सकती थी, पर उस की आंखें, सब बता गईं जो वह मुंह से न कह सकी. राजीव रो पड़ा था. मन करता था कि जा कर अमन को गोली मार कर जेल चला जाए पर वही मजबूरियां, एक आम आदमी होने की सजा भोग रहा था.

वैशाली के शरीर का निचला हिस्सा निर्जीव हो चुका था लेकिन राजीव ने तो उसे अपनी जान से भी ज्यादा प्यार किया है…करता है और ताउम्र प्यार करता रहेगा. उस से कैसे नफरत करे?

Love Story

Handcare: उंगलियों की स्किन सर्दियों में फट जाती है, बताएं क्या करूं?

Handcare: मेरी उंगलियों की स्किन सर्दियों में फट जाती है. उस में दर्द भी होता है. कई तरह की क्रीमों का उपयोग करने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ा. बताएं क्या करूं?

सर्दियों में रूखी त्वचा बारबार हाथ धोने से, कठोर कैमिकल वाले साबुन या अन्य उत्पाद का इस्तेमाल करने से, सनबर्न होने आदि से फटने लगती है. विटामिन ए का अधिक सेवन करने से या विटामिन बी-3 की कमी से भी त्वचा छिल सकती है. इस के उपाय के लिए आप सेंधे नमक का यूज कर सकती हैं. इस के लिए एक बालटी में कुनकुना पानी लें. इस पानी में 1 चम्मच सेंधा नमक मिलाएं. दोनों हाथों को 10-15 मिनट के लिए इस पानी में भिगोएं. नमक से हाथों को ऐक्सफौलिएट भी कर सकती हैं. इस प्रक्रिया को सप्ताह में 3 बार दोहरा सकती हैं.

और भी सौंदर्य समस्याएं पढ़ें: 

सेंधा नमक त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है. यह त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करता है. सेंधे नमक के पानी में हाथ भिगोने से मृत कोशिकाएं हटती हैं, जिस से फटी उंगलियों को राहत मिलती है. इस के अलावा ठंड के मौसम में बाहर जाते समय अपने हाथों को ढक कर रखें. हमेशा अपने हाथों को मौइस्चराइज कर के रखें. खूब पानी पीएं और खुद को हाइड्रेट रखें. पानी से हाथ धोएं. हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल न करें. इस से त्वचा और रूखी होती है. अपने घर के अंदर ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें.

मेरे बाल कम उम्र में ही सफेद होने लगे हैं. बताएं बालों को सफेद होने से रोकने के लिए क्या करूं?

दरअसल, बालों का काला रंग बालों के फौलिकल्स में पाए जाने वाले मैलानिन पिगमैंट की वजह से होता है. जब यह पिगमैंट बनना बंद हो जाता है या फिर कम बनता है तो बाल सफेद होने लगते हैं. बाल सफेद होने से रोकने के लिए आप मेथीदाने का यूज कर सकती हैं. मेथीदाने में भी कई न्यूट्रिऐंट्स पाए जाते हैं, जो बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकते हैं. इस के लिए आप मेथीदाने को पानी में भिगो कर पीस लें. फिर इस पेस्ट को नारियल या बादाम के तेल में मिला कर बालों की जड़ों में लगाएं. सफेद बालों की समस्या से जल्दी छुटकारा मिल जाएगा.

मेरी आईलैशेज घनी नहीं हैं, साथ ही टूट भी जाती हैं. मैं क्या करूं कि मेरी यह समस्या दूर हो जाए?

घनी आईलैशेज के लिए अरंडी का तेल काफी फायदेमंद माना जाता है. इस में रिसिनोलिक ऐसिड पाया जाता है, जो बालों की जड़ों में रक्तप्रवाह को बढ़ाता है और पलकों के विकास के लिए उत्तेजित करता है. अरंडी के तेल से न सिर्फ आप की पलकें घनी होंगी, बल्कि यह पलकों को टूटने से भी बचाएगा. इसे लगाने के लिए अपने चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें. ध्यान रहे कि आंखों पर किसी तरह का मेकअप न हो. अब साफ मसकारा ब्रश लें. इस ब्रश को अरंडी के तेल में डुबोएं और पलकों पर लगाएं. इसे रातभर पलकों पर लगा रहने दें. सुबह गुलाबजल या फिर मेकअप वाइप की मदद से साफ कर लें.

मेरे बाल बहुत रूखे, हार्ड और साथ में उन में रूसी भी है. इसे दूर करने के लिए कोई उपाय बताएं?

अगर आप के बाल काफी रूखे या हार्ड हैं तो सर्दियों में डैंड्रफ से बचने के लिए औलिव औयल यानी जैतून के तेल से बालों की मसाज कर सकती हैं. इस से बाल चिपचिपे भी नहीं होते हैं और डैंड्रफ भी दूर होता है. आप इसे शहद के साथ मिक्स कर के हेयर मास्क बना कर भी यूज कर सकती हैं. यह मास्क लगाने के 30 मिनट बाद शैंपू कर लें. सप्ताह में 2 बार ऐसा करने पर डैंड्रफ साफ हो जाएगा.

आंखों में काजल लगाने के बाद वह कुछ समय बाद ही फैल जाता है. आंखों में काजल लंबे समय तक टिका रहे, बताएं इस के लिए क्या करूं?

काजल लगाने से पहले बहुत जरूरी है कि आप अपना चेहरा टोनर से साफ कर लें. इस से त्वचा पर मौजूद तेल साफ हो जाएगा और काजल नहीं फैलेगा. पसीने से बचने के लिए चेहरे और आंखों के आसपास बर्फ भी रगड़ सकती हैं. काजल का रोजाना यूज करती हैं तो आंखों के नीचे ट्रांसलूसैंट पाउडर लगाएं. इस से काजल लंबे समय तक टिका रहेगा.

काजल लंबे समय तक टिका रहे, इस के लिए अपनी आंखों के बाहरी कोनों पर अच्छी तरह पाउडर लगाएं. इस से आंखों के बाहरी कोने ड्राई हो जाएंगे. अब काजल लगाएं. काजल लगाने के बाद आईलिड पर जरा सा न्यूट्रल कलर का आईशैडो ब्रश से फैला लें. इस से काजल जल्दी सूख जाएगा और देर तक टिका रहेगा. सब से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आप लंबे समय तक टिका रहने वाला काजल लगाएं. इस से आप जो भी आई मेकअप करेंगी, उस में आप का लुक निखर कर आएगा. काजल हमेशा अच्छी कंपनी का ही लगाएं.

Handcare

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें :

गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055

कृपया अपना मोबाइल नंबर जरूर लिखें.

SMS, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो

से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

Back Pain: पीठ के निचले हिस्से में दर्द, इस का कारण और समाधान बताएं?

Back Pain: मेरी उम्र 60 साल है. पिछले महीने स्ट्रोक के कारण मैं जमीन पर सीने के बल गिर पड़ा, जिस के बाद मेरे सीने और रीढ़ में असहनीय दर्द उठा था. हालांकि एक अच्छे अस्पताल में इलाज कराया गया, लेकिन इलाज के बाद भी मेरी पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द हो रहा है, जिस के कारण न तो मैं बैठ कर खापी रहा हूं और न ही करवट बदल पा रहा हूं. कृपया मुझे इस का कारण और समाधान बताएं?

आप के इस दर्द का कारण आर्थ्राइटिस या पुराने इलाज की कोई गलती हो सकती है. आप ने जिस अस्पताल में इलाज कराया है उन्हें इस समस्या की जानकारी दें. अस्पताल में आप की पीठ की एमआरआई की जाएगी. उस से दर्द का कारण पता चल जाएगा. कारण के अनुसार आप का उचित इलाज किया जाएगा. चूंकि आप को स्ट्रोक की समस्या थी और उम्र भी ज्यादा है, इसलिए किसी भी प्रकार के दर्द को हलके में न लें. समस्या हलकी होने पर सिर्फ मैडिकेशन से काम बन जाएगा. अनदेखा करने पर यह दर्द वक्त के साथ गंभीर हो सकता है. इसलिए बिना देर किए इस की जांच कराएं.

और भी समस्याएं पढ़ें: 

मेरी उम्र 70 साल है. मेरे जोड़ों में अकसर दर्द बना रहता है. इलाज चल रहा है, लेकिन कोई खास फायदा नहीं मिल रहा है. परिवार वालों का कहना है कि इस उम्र में तो दर्द होना आम बात है, लेकिन मेरे लिए यह दर्द बरदाश्त करना मुश्किल हो रहा है. क्या इस से छुटकारा पाने का कोई और तरीका है?

इस उम्र में शरीर कई बीमारियों की चपेट में आने लगता है. इस उम्र में दर्द की शिकायत सभी को होने लगती है लेकिन इस का मतलब यह नहीं है कि इस से छुटकारा नहीं पाया जा सकता है. आप ने बताया कि आप का इलाज चल रहा है. हर इलाज की एक प्रक्रिया होती है, जिस का असर होने में समय लगता है. हालांकि आज दर्द से नजात पाने के कई नौन इनवेसिव विकल्प मौजूद हैं, जैसेकि रेडियोफ्रीक्वैंसी ट्रीटमैंट, जौइंट रिप्लेसमैंट, रीजैनरेटिव मैडिसिन आदि. अपने डाक्टर से सलाह कर जरूरत के अनुसार उचित विकल्प का चुनाव कर सकती हैं. इस के साथ ही अपनी जीवनशैली और आहार में सुधार करें. अच्छा खाना खाएं, व्यायाम करें, हफ्ते में 2 बार जोड़ों की मालिश कराएं, शराब और धूम्रपान से दूर रहें, नियमित रूप से जोड़ों की जांच कराएं.

मैं 50 साल का हूं. मैं एक फोटोग्राफर हूं, इसलिए मुझे पूरापूरा दिन खड़े हो कर फोटोशूट करना पड़ता है. कई बार बाहर भी जाना पड़ता है, जहां आराम के लिए वक्त ही नहीं मिल पाता है. ऐसे में मेरा शरीर दर्द से टूटने लगता है और सिरदर्द भी होता है, जिस के कारण मुझे पेनकिलर लेनी पड़ती है. मुझे डर है कि कहीं पेनकिलर मेरे स्वास्थ्य पर भारी न पड़ जाए. कृपया मुझे समस्या से छुटकारा पाने का समाधान बताएं?

इस प्रकार की व्यस्त जीवनशैली के कारण युवा अकसर ऐसी समस्याओं की चपेट में आ जाते हैं. पूरा दिन एक ही मुद्रा में खड़े या बैठे रहने के कारण नसों पर दबाव पड़ता है, जिस से दर्द की शिकायत होती है. थकावट, भूखा रहने, कम पानी पीने और आराम न मिलने के कारण सिरदर्द की समस्या होती है. इस के जिम्मेदार हम खुद होते हैं. कामकाज को महत्त्व देने के चक्कर में खुद के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. समस्या से छुटकारा पाना है तो सब से पहले शरीर को आराम देना सीखें. काम के बीच में कुछ वक्त निकाल कर शरीर को स्ट्रैच करें, समय पर खाना खाएं, पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और बीचबीच में बैठ कर शरीर को आराम दें. इस के अलावा रूटीन में ऐक्सरसाइज, पौष्टिक आहार आदि शामिल करें. समस्या ज्यादा होती है तो डाक्टर से परामर्श लें. इसे हलके में लेना भारी पड़ सकता है. किसी भी समस्या के लिए खुद से दवा कभी न लें. डाक्टर के परामर्श पर ही दवा का सेवन करें.

मेरी उम्र 65 साल है. 2010 में मेरी पीठ और पैर में तेज दर्द उठा था. इलाज के लिए रीढ़ की 5 बार सर्जरी की गई. हालांकि सर्जरी की मदद से मुझे पैर के दर्द से राहत तो मिल गई है लेकिन पीठ दर्द अभी भी परेशान करता है. यहां तक कि मेरा उठनाबैठना तक दूभर हो गया है. कृपया इस का इलाज बताएं?

सही इलाज के लिए समस्या का कारण पता होना जरूरी है. इसलिए सब से पहले इस की जांच कराएं. रेडियोफ्रीक्वैंसी एब्लेशन आरएफए, रीढ़ के जोड़ों में होने वाली दर्द से छुटकारा पाने के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है. दिल्ली में ऐसे कई अस्पताल हैं, जहां इस तकनीक का उपयोग किया जाता है. इस इलाज की मदद से आप को 18 से 24 महीनों के लिए दर्द से पूरी तरह से राहत मिल जाएगी. रीढ़ की जिन नसों में दर्द होता है उन के पास खास प्रकार की सूइयां लगाई जाती हैं. खास उपकरणों की मदद से रेडियो तरंगों द्वारा निकले करंट का उपयोग कर के इन नसों के पास एक छोटे हिस्से को गरमाहट दी जाती है. यह नसों से मस्तिष्क तक जाने वाले दर्द को कम करता है, जिस से आप को दर्द से राहत मिल जाएगी. इस इलाज के कई फायदे हैं जैसेकि आप को अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल जाएगी, तेज रिकवरी होगी और कामकाज भी तुरंत शुरू कर पाएंगी.

Back Pain

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें :

गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055

कृपया अपना मोबाइल नंबर जरूर लिखें.

SMS, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो

से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

Rise of Women Investors: वूमन इनवैस्टर्स का बढ़ता दबदबा

Rise of Women Investors: ऐसा कहा जाता है कि 8 में से सिर्फ 1 महिला ही अपने वित्तीय फैसले खुद  लेती है बाकी 7 महिलाएं अपने वित्तीय फैसलों के लिए पुरुषों पर निर्भर रहती हैं. सर्वे से भले ही ऐसे तथ्य सामने आए हों, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाएं अच्छी निवेशक होती हैं. लउअन्न लौटफ्न ने अपनी किताब वारेन बफेट इनवैस्ट्स लाइक ए गर्ल में यह बताया है कि महिलाएं अच्छी निवेशक होती हैं और समय के साथसाथ उन्होंने भी इनवैस्ट पर ध्यान देना आज शुरू कर दिया है. यही वजह है कि पहले की तुलना में महिला निवेशकों की संख्या भी बढ़ी है.

2016 में ईटी मनी के यूजर्स में सिर्फ 10 फीसदी ही महिलाएं थीं लेकिन 2021 तक यह आंकड़ा बढ़ कर 26 फीसदी हो गया है जो अच्छी बात है. इस की खास वजह महिलाओं का वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होना है जो उन्हें एक मजबूत भविष्य की प्लानिंग करने में सहायक होता है.

शेयर मार्केट में भी बढ़ती हिस्सेदारी

अब महिलाएं शेयर मार्केट में भी निवेश के जरीए अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, महिला निवेशकों का एयूएम यानी ऐसेट्स अंडर मैनेजमैंट 2019 में 4.59 लाख करोड़ रुपए से बढ़ कर 2024 में 11.25 लाख करोड़ रुपए हो गया है.

निवेश के लिए कमाना जरूरी

इस बारे में सूर्यवंशी फिनसर्व के फंड मैनेजर जयेश भानुशाली कहते हैं कि पुरुष अधिकतर इनवैस्ट करने में आगे रहते है, जबकि महिलाएं पहले कम इनवैस्ट करती थीं क्योंकि वे कमाती नहीं थीं लेकिन आज की नारी आत्मनिर्भर और काफी जागरूक है और भविष्य का प्लान करने से पीछे नहीं हटती. हजार से ले कर लाखों में वे इनवैस्ट करती है जो अच्छी बात है लेकिन बेहतर रिटर्न पाने के लिए इन बातों पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है-

लक्ष्य निर्धारित करें

हर निवेशक को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने निवेश को किसी लक्ष्य के साथ जोड़ कर देखे. अधिकतर स्त्रियों के निवेश से कोई न कोई लक्ष्य जुड़ा होता है या तो वे रिटायरमैंट के लिए पैसे निवेश करती हैं या छुट्टियों के लिए या फिर कुछ खास चीज खरीदने के लिए निवेश करती हैं जो पुरुष नहीं कर पाते. यही बात स्त्रियों के लिए लाभदायक होती है.

धैर्य बनाए रखना

अधिकतर वूमन बाजार के उतारचढ़ाव से घबरा जाती हैं और तुरंत कोई फैसला ले लेती हैं जबकि पुरुष ऐसा नहीं करते. स्त्रियों को धैर्य रखना सीखने की जरूरत है. बाजार के उतारचढ़ाव में घबरा कर पैसे न निकालें या जल्दबाजी में कभी निवेश न करें. निवेश के बाजार में घुसने का मतलब है कि आप को धैर्य रखना होगा और अपने शेयर के बेहतर स्थिति में आने का इंतजार करना होगा, तभी आप मुनाफा कमा सकती हैं.

निवेश से पहले रिसर्च जरूरी

निवेश से पहले सही रिसर्च करना आवश्यक होता है ताकि आप बाजार के उतारचढ़ाव के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त कर लें. पुरुषों की तुलना में स्त्रियां जल्दबाजी में निवेश नहीं करती हैं और कहीं भी पैसे लगाने से पहले अच्छे से रिसर्च करती हैं. वे अपने फैसलों को ले कर ओवर कौन्फिडैंट नहीं होत है, अगर उन्हें कनफ्यूजन होता है, तो दूसरों से सलाह लेने से भी नहीं कतरातीं जबकि पुरुषों में ऐसा बहुत ही कम देखा गया है.

बचना पड़ता है रिस्क से महिलाएं रिस्क को अच्छे से समझने के बाद ही पैसे लगाती हैं. अगर उन्हें कोई निवेश रिस्की लगता है तो वे उस से दूर ही रहना पसंद करती हैं जो अच्छी बात है. आज के सब से अधिक रिस्की बाजार क्रिप्टो करंसी की बात करें तो इस में सिर्फ 15 फीसदी ही महिलाएं पैसा लगाती हैं, जबकि बाकी के 85 फीसदी पुरुष हैं. शेयर बाजार में भी कम ही महिलाएं इंट्रा डे और डेरिवेटिव्स में पैसे लगाती हैं. महिलाएं सट्टेबाजी करना पसंद नहीं करतीं.

विशेषज्ञ की लें सलाह

निवेश करते वक्त अगर कोई समस्या है तो वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए खासकर यदि वे निवेश के बारे में नई हैं या उन्हें जटिल निवेश विकल्पों के बारे में जानकारी नहीं है.

समयसमय पर निवेश की करें समीक्षा

निवेश करने के बाद समयसमय पर निवेश की समीक्षा करनी चाहिए और अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार बदलाव करना चाहिए. इस के अलावा निवेश को विभिन्न प्रकार के निवेश विकल्पों में विभाजित करना चाहिए ताकि जोखिम कम हो सके.

सही विकल्प है क्या

निवेश के लिए सही विकल्प आप के वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम सहनशीलता और निवेश अवधि पर निर्भर करता है. कुछ आम निवेश विकल्प निम्न हैं-

सावधि जमा (एफडी)

पैसे बैंक में जमा किए जाते हैं और एक निश्चित अवधि के लिए निश्चित ब्याज दर देते हैं. महिलाएं महिला सम्मान बचत पत्र, फिक्स्ड डिपौजिट, म्यूचुअल फंड, गोल्ड और सुकन्या समृद्धि योजना जैसे निवेश विकल्पों पर विचार कर सकती हैं.

सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ)

यह एक सरकारी निवेश योजना है जो लंबी अवधि के लिए निवेश करने के लिए उपयुक्त होती है.

म्यूचुअल फंड

यह एक निवेश पोर्टफोलियो है, जिस में विभिन्न प्रकार के ऐसेट्स शामिल होते हैं जैसे शेयर, बौंड आदि.

शेयर बाजार

इस में आप कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं और उन के मूल्य में वृद्धि से लाभ कमा सकते हैं.

रियल ऐस्टेट

यह एक संपत्ति है जो मूल्य में बढ़ सकती है और किराए पर भी दी जा सकती है.

सोना

यह एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है और इस की कीमत में तेजी से वृद्धि होती है.

राष्ट्रीय पैंशन प्रणाली (एनपीएस)

यह एक पैंशन योजना है जो आप को सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय प्रदान करती है.

रिस्क फैक्टर पर दें ध्यान

सही निवेश विकल्प चुनने के लिए आप का इन कारकों पर भी विचार करना आवश्यक है-

– अपने वित्तीय लक्ष्य को देखना पड़ता है. इस में आप किस चीज के लिए निवेश कर रहे हैं उसे देखें. मसलन, सेवानिवृत्ति, शिक्षा आदि

– रिस्क फैक्टर कितना है और आप कितना रिस्क उठाने को तैयार हैं, उसे भी जांच लें जैसेकि शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है.

– निवेश की अवधि का आकलन कर लें. मसलन, पीपीएफ और म्यूचुअल फंड में निवेश लंबी अवधि के लिए फायदेमंद होता है.

वित्तीय सलाहकार जयेश कहते हैं कि अगर आप इस फील्ड में नए हैं तो निवेश शुरू करने से पहले एक सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से सलाह ले सकते हैं. वे आप को आप के लक्ष्यों और जोखिम सहिष्णुता के आधार पर सब से उपयुक्त निवेश विकल्प चुनने में मदद कर सकते हैं. एक अनुमान के आधार पर अगर एक व्यक्ति हर महीने 5 हजार रुपए म्यूचुअल सिप में जमा करता है तो 15 साल बाद उसे करीब 30 लाख रुपए मिलते हैं.

इस प्रकार हर व्यक्ति के लिए भविष्य निधि के रूप में निवेश करना अच्छा होता है लेकिन इस के लिए जरूरत होती है सही जानकारी प्राप्त होना ताकि आप किसी व्यक्ति द्वारा ठगी का शिकार न हो जाएं और इस के लिए आवश्यक है सही सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार की, जिसे आप औनलाइन या मैगजीन के जरीए प्राप्त कर सकते हैं जो आप को हर प्रकार की सुविधा और रिस्क फैक्टर से परिचित करा सकता है.

Rise of Women Investors

Eyelashes: घनी पलकों का राज

Eyelashes: आप की आंखों का रंग कहीं हलकी पलकों से फीका न पड़ जाए. आंखों पर आईलाइनर और आईशैडो के रंगों की चमक को बिखेरने के लिए अच्छी घनी पलकों की भी जरूरत होती है वरना आई मेकअप कितना भी बोल्ड क्यों न किया हो, उस में कुछ तो कमी खलेगी ही. इसलिए आई मेकअप में आईलैशेज का भी ध्यान रखें.

बहुत सी लड़कियों और महिलाओं की पलकें हलकी होती हैं, जिस वजह से उन का आई मेकअप बहुत आकर्षित नहीं बन पाता. उन्हीं महिलाओं और लड़कियों के लिए आर्टिफिशियल पलकें या आईलैशेज एक बेहतरीन विकल्प है. इन्हें आप अपने नैचुरल आईलैशेज से जोड़ अपनी पलकों को और भी घना और खूबसूरत दिखा सकती हैं. बहुत सी महिलाएं इसे अपने रैग्युलर मेकअप में यूज करती हैं और कुछ कभीकभार किसी फंक्शन या त्योहार पर.

आईलैश के 2 टाइप्स हैं- एक आईलैश ऐक्सटैंशन और दूसरा है फाल्स आईलैश.

आईलैश ऐक्सटैंशन: एक बनावटी आईलैश जिसे सिंथैटिक, सिल्क, मिंक, ह्यूमन हेयर या नैचुरल फाइबर से बनाया जाता है. ये आईलैश एक प्रक्रिया या प्रोसीजर से पलकों से जोड़ी जाती हैं. इन आईलैश पर एक तरह का ग्लू होता है. इस प्रोसीजर में हर एक नैचुरल लैश को ऐक्सटैंशन लैशेज से जोड़ कर सैट किया जाता है. इस सैटिंग में थोड़ा समय लगभग 1 से 2 घंटे लगते हैं, साथ ही इस प्रोसीजर को प्रोफैशनल मेकअप आर्टिस्ट से कराया जाता है.

आईलैश ऐक्सटैंशन के विशेष टिप्स

– ये सेमी परमानैंट यानी कुछ समय तक के लिए बना रहता है. (4-6 हफ्ता) थोड़ा खर्चीला है.

– रोज का टचअप जरूरी है.

– कस्टमाइज है. आप अपने लुक और चौइस के हिसाब से हिसाब से बदल सकती हैं.

– ये प्रोफैशनल आर्टिस्ट से लगवाने चाहिए.

टाइप्स औफ आईलैश ऐक्सटैंशन

क्लासिक: क्लासिक आईलैश में एक ऐक्सटैंशन ही नैचुरल लैश पर लगाया जाता है जो आप के नैचुरल लुक को और निखार देता है.

वौल्यूम: वौल्यूम लैशेज में एक नैचुरल लैश पर 2 से 5 लैशेज लगाई जाती हैं, जिस से आप की पलकों को एक फुलर लुक मिलता है. किसी भी स्पैशल इवेंट में एक ड्रौमैटिक स्टाइल क्रिएट करने के लिए यह बैस्ट चौइस है.

हाइब्रिड: हाइब्रिड आईलैशेज क्लासिक और वौल्यूम लैशेज का मिक्सचर हैं. ये मल्टीपल लैशेज के साथ आप को एक बैलेंस्ड क्लासिक ब्यूटी लुक देता है.

मेगा वौल्यूम: जिन्हें बोल्ड लुक पसंद है, उन के लिए मेगा वौल्यूम आईलैश एक बहुत बढि़या विकल्प है. यह आप की पलकों को गहरा रिच बना, आप की आंखों को एक ग्लैमरस लुक देता है.

कलर आईलैश: अपने लुक को थोड़ा फंकी और कूल लुक देने के लिए आजकल यंग गर्ल्स कलर आईलैशेज को बेहद पसंद कर रही हैं. ब्लू, ग्रीन, पिंक लगभग हर कलर में लैशेज मिल जाते हैं.

काश्मेर: यह फ्लैट बेस के साथ पलकों को मोटा और गहरा लुक देता है.

डौल: इस में सैंटर लैशेज की लैंथ लंबी होती है जो पलकों के किनारे तक जातेजोते छोटी हो जाती है, जिस से आप की आंखें डौल की आंखों सी दिखती हैं. अपनी इसी खासीयत से इसे यंग गर्ल्स में सब से अधिक पसंद किया जाता है.

फाल्स आईलैशेज: ये टैंपरैरी आईलैशेज हैं जो एक स्ट्रिप या क्लस्टर्स रूप में होती हैं.

ये सिंथैटिक, मिंक, फौक्स मिंक और सिल्क से बनती हैं. इन्हें लगना और निकालना दोनों ही आसान हैं. इन्हें लगाने के लिए किसी ऐक्सपर्ट की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए आप किसी भी वक्त, किसी भी फंक्शन में बड़े आराम से इन्हें लगा अपनी पलकों को आकर्षित बना सकती हैं.

Eyelashes

Breast Ironing: महिलाओं के लिए कितने ही नियम और रिवाज

Breast Ironing: अकसर सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं. इन में से कुछ रिवाज तो महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रख कर भी बनाए जाते हैं जो आखिर में उन के अधिकारों और स्वतंत्रता का हनन ही करते हैं. भले ही आज हम देखते हैं कि महिलाओं की जिंदगी बदल रही है, वहीं दूसरी ओर हमें किसी ऐसे रिवाज के बारे में पता चल जाता है जहां महिलाओं के साथ रीतिरिवाजों के नाम पर बेरहमी होती है जो आप को सोचने पर मजबूर कर दे कि क्या वाकई दुनिया आगे बढ़ रही है? क्या वाकई नियमकानून महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं? इन्हीं में से एक प्रथा है ‘ब्रैस्ट आयरनिंग.’

‘ब्रैस्ट आयरनिंग’ की इस प्रथा को लड़की की मां या कोई अन्य औरत (बहन, मामी, चाची, दादी आदि) अंजाम देती है. मान्यता यह है कि गरम चीजों से ब्रैस्ट दागने से लड़कियों की छाती चपटी हो जाती है और उन पर पुरुषों का ध्यान नहीं जाता. लड़कियां जब प्यूबर्टी के करीब आती हैं तो खुद उन की मां, पत्थर या लोहे को गरम कर उन की छाती पर दाग देती हैं और उन को इलास्टिक बैंडेज से बांध देती हैं.

ऐसा हफ्ते में 2 या 3 बार किया जाता है. यह प्रैक्टिस काफी दर्दनाक होती है क्योंकि प्यूबर्टी में ब्रैस्ट की ग्रोथ होना शुरू हो जाती है और इस प्रोसैस में लड़कियों के ब्रैस्ट में पहले ही कुछ दर्द होता है. ऐसे में गरम पत्थर से दागे जाने पर यह और भी भयानक हो जाता है.

यह प्रैक्टिस सब से ज्यादा अफ्रीकी देश कैमरून में प्रचलित है. कैमरून की महिलाओं का मानना है कि अगर लड़कियों में जवानी के लक्षण जल्दी दिखाई देने लगें तो पुरुषों का ध्यान उन पर जाता है और ऐसे में लड़कियों के शादी से पहले ही गर्भवती होने का डर बना रहता है. इस के अलावा बेनिन, आइवरी कोस्ट, चाड, गिनीबिसाऊ, केन्या, टोगो, जिंबाब्वे और गिनीकोनाक्री में भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं.

मानसिक दर्द

ब्रैस्ट आयरनिंग की वजह से लड़कियों को न सिर्फ दर्द झेलना पड़ता है बल्कि इस से टिशू भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं. इतना ही नहीं, इस से ब्रैस्ट कैंसर होने की आशंका भी बढ़ जाती है और ब्रैस्ट फीडिंग कराने में भी दिक्कत आती है.

यूनाइटेड नेशंस ने ब्रैस्ट आयरनिंग को लिंग आधारित हिंसाओं की कैटेगरी में रखा है और इस बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए काफी कोशिशें की जा रहीं हैं. यूनाइटेड नेशंस और अफ्रीकी हैल्थ और्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 3.8 करोड़ लड़कियों को इस परेशानी से गुजरना पड़ता है. रिपोर्ट मानती है कि 58% बार यह मां के द्वारा ही की जाती है.

ब्रैस्ट आयरनिंग के अलावा ऐसी कई मान्यताएं और परंपराएं हैं जो महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर बनाई गई हैं लेकिन ये प्रैक्टिसेज केवल महिलाओं को प्रताडि़त करती हैं और कई बार तो उन्हें जीवनभर के लिए अपंग बना देती हैं. इन में महिलाओं का खतना, वर्जिनिटी टैस्ट, बाल विवाह आदि शामिल हैं. जी हां, ये सभी रीतिरिवाज इसलिए बनाए गए हैं ताकि शादी से पहले लड़की का सैक्सुअल ऐनकाउंटर या प्रैगनैंसी न होने पाए. हालांकि इन्हें दुनियाभर में बहुत पहले ही बैन किया जा चुका है इस के बावजूद आज भी ऐसे कई मामले सुनने में आ जाते हैं.

महिलाओं का खतना हो या ब्रैस्ट आयरनिंग ये सभी पूरी तरह से लड़कियों की पर्सनैलिटी को किल कर देते हैं. किसी भी व्यक्ति को खुद को ऐक्सप्रैस करने का सब से अच्छा तरीका है अपनी पर्सनैलिटी को शो करना चाहे वह लड़का हो या लड़की.

चौकाने वाला सर्वे

आज की दुनिया में कई लड़कियां अपने शरीर को फ्लौंट करना कौन्फिडैंस का प्रतीक मानती हैं. वे अपने लुक्स और स्टाइल को ले कर काफी सहज होती हैं और अपने शरीर को किसी भी तरह के संकोच या शर्मिंदगी के बिना अपनाती हैं और उन्हें फ्लौंट करने से बिलकुल नहीं संकुचाती हैं. अकसर लड़कियां या महिलाएं अपनी ब्रैस्ट साइज को अट्रैक्शन के साथ जोड़ कर देखती हैं. वहीं एक सर्वे में पाया गया है कि अधिकांश महिलाएं अपनी ब्रैस्ट के साइज से खुश नहीं रहतीं.

जिन के साइज छोटे होते हैं वे खुद को अंडरकौन्फिडैंट महसूस करती हैं और जिन के बड़े होते हैं उन्हें कई बीमारियों और फिजिकल मूवमैंट से जूझना पड़ता है. बड़ी ब्रैस्ट फिजिक को इन्हांस कर सकती है लेकिन कई बार यह परेशानी का कारण भी बन जाती है. ज्यादा बड़ी ब्रैस्ट से कई हैल्थ प्रौब्लम्स का सामना करना पड़ता है, इसलिए आज इस का समाधन ब्रैस्ट रिडक्शन सर्जरी के तौर पर निकला है. इसे रिडक्शन मैमप्लास्टी भी कहा जाता है. अगर इस की तुलना ब्रैस्ट आयरनिंग से की जाए तो यह सर्जरी पेनलैस और काफी हद तक सेफ मानी जाती है.

व्यक्तिगत पसंद का विषय

लड़कियों द्वारा अपने शरीर को फ्लौंट करना व्यक्तिगत पसंद का विषय है और इसे किसी भी तरह की जजमैंट के बिना देखने की जरूरत है. हर व्यक्ति को अपने शरीर को अपनाने का अधिकार है. किसी भी व्यक्ति के आत्मविश्वास, बौडी पौजिटिविटी और स्वतंत्रता का सम्मान करना ही एक डैवलपड सोसायटी की पहचान है.

मगर समाज में आज भी कई लोग इसे गलत नजरिए से देखते हैं. हैरानी की बात यह है कि ऐसा केवल पिछड़े गांवों या शहरों में ही नहीं बल्कि सभ्य समाज में भी खासा देखा जा सकता है. महिलाओं को उन के कपड़ों और बौडी शो करने के आधार पर आंका जाता है. लेकिन यह जरूरी है कि लोग व्यक्तिगत पसंद और अभिव्यक्ति के अधिकार को समझें और महिलाओं को उन की मरजी के अनुसार जीने का अवसर दें.

Breast Ironing

Miss Teen Universal 2025: अक्षिता- हौसले से मिलती है उड़ान

Miss Teen Universal 2025: अक्षिता इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि कैसे गरिमा, प्रतिभा और सहानुभूति एक साथ मिलकर सार्थक प्रभाव पैदा कर सकती हैं. कोलंबिया में अपनी पेजेंट यात्रा के दौरान उन्होंने उल्लेखनीय सफलता हासिल की और ऐसे प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किए जो उनकी क्षमताओं के साथसाथ उन के व्यक्तित्व को भी दर्शाते हैं. उन्हें मोस्ट टैलेंटेड, मिस टीन यूनिवर्सल एशिया 2025 और मिस टीन सिम्पैथी जैसे सम्मान से नवाजा गया. एक ऐसा खिताब जो उन की करुणामयी भावना को सुंदर रूप से सम्मानित करता है.

मिस टीन सिम्पैथी का खिताब केवल मंच पर दिखाई देने वाली सुंदरता तक सीमित नहीं है. यह एक ऐसी युवा नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है जो दयालुता, भावनात्मक समझ और दूसरों के प्रति सच्ची संवेदनशीलता को दर्शाता है. अक्षिता को न केवल उनके आत्मविश्वास और शालीनता के लिए सराहा जाता है, बल्कि लोगों की बात दिल से सुनने, कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने और अपने आसपास के लोगों को उत्साहित करने की उनकी क्षमता के लिए भी प्रशंसा मिलती है. उनकी उपस्थिति आशा, उपचार और एकता को प्रेरित करती है, यह सिद्ध करते हुए कि सहानुभूति नेतृत्व की एक शक्तिशाली शक्ति है.

पेजेंट की दुनिया से आगे बढ़ते हुए, अक्षिता एक उद्देश्य-प्रेरित उद्यमी भी हैं. वह चेरी कॉस्मेटिक्स (उच्चारण: शेरी, हिंदी में शेरी) की संस्थापक हैं, एक ऐसा ब्रांड जो अर्थपूर्ण सुंदरता की उनकी सोच से जन्मा है. अक्षिता के लिए सौंदर्य प्रसाधन केवल बाहरी सुंदरता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव लाने का एक माध्यम है.

चेरी कॉस्मेटिक्स का अंतिम उद्देश्य एक ट्रस्ट की स्थापना करना है, जो अनाथ बच्चों के समर्थन के लिए समर्पित होगा. इस पहल के माध्यम से अक्षिता शिक्षा, सामाजिक जागरूकता तथा मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सहयोग प्रदान करना चाहती हैं ताकि अनाथ बच्चों को समाज में सभी के समान आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें. उनका यह मिशन इस विश्वास को दर्शाता है कि सच्ची सुंदरता करुणा, समावेशन और सेवा में निहित होती है.

आगे की ओर देखते हुए, अक्षिता की यात्रा वैश्विक मंच पर निरंतर आगे बढ़ रही है. वह मिस टीन यूनिवर्सल 2026 प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पेरू जाने वाली हैं, जिसका आयोजन संभावित रूप से अगस्त, 2026 में किया जाएगा. इससे वह अपना क्राउन 2026 की मिस यूनिवर्सल को सौंपेंगी. अपनी प्रतिभा, सहानुभूति और सशक्त उद्देश्य के साथ, अक्षिता युवा महिलाओं की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो महत्त्वाकांक्षा को मानवता के साथ संतुलित करना जानती हैं.

अक्षिता की कहानी केवल ताज और खिताबों की नहीं है, बल्कि हृदय, दृष्टि और जिम्मेदारी की कहानी है. वह दुनियाभर के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, यह सिद्ध करते हुए कि सच्ची सफलता वही है जो दयालुता और दूसरों को सशक्त बनाने की भावना से संचालित हो.

Miss Teen Universal 2025

Healthy Superfoods: खास सर्दियों के लिए

Healthy Superfoods: सर्दियों का आगमन हो गया है. मौसम में ठंडक की शुरूआत हो गई है. यह मौसमी बदलाव आप के लिए किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या पैदा न करे, इस के लिए अपनी जीवनशैली और खानपान में भी थोड़ा बदलाव आवश्यक है ताकि आप इस सर्दी के मौसम में भी बेहतर स्वास्थ्य पा सकें और अपनी इम्युनिटी को बढ़ा सकें. इस के लिए कुछ सुपरफूड्स को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. इन का सेवन कर हम सर्दियों में भी अच्छा स्वास्थ्य पा सकते हैं और सर्दियों में होने वाली आम बीमारियों जैसे सर्दी, खांसी, इन्फैक्शन आदि से खुद को दूर रख सकते हैं.

1. गोंद

पेड़ों से मिलने वाली काली और सफेद गोंद को सर्दियों में सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, यह टेस्टी होने के साथसाथ कैल्सियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस जैसे पोषक तत्त्वों से भरपूर होती है जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मदद कर सकती है. सर्दियों में शरीर को गरम रखती है. सर्दियों में गोंद को अपनी डाइट में शामिल कर इम्यूनिटी को मजबूत बना सकते हैं.

प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और ऐंटीऔक्सीडैंट गुणों से भरपूर गोंद का सेवन हार्ट से ले कर कैंसर जैसी बीमारियों की संभावनाओं को कम करता है. सर्दियों में इसे खाने से पुरानी खांसी, जुकाम, फ्लू और इन्फैक्शन जैसी समस्याओं से दूर रहने में मदद मिलती है. इसे अपनी डाइट में शामिल कर के आप अपनी हैल्थ के साथसाथ सुंदरता को भी बढ़ा सकती हैं.

कुछ इस तरह करें शामिल

गोंद को कई तरह की रैसिपीज में इस्तेमाल किया जाता है आप गोंद को लड्डू मिठाई, हलवा, घी आदि में डाल कर या मिला कर शामिल कर सकती हैं. सर्दियां आते ही मिठाई की दुकानों पर गोंद के लड्डू मिलने लगते हैं जो स्वाद में तो बहुत टेस्टी होते ही हैं, साथ ही सभी को बहुत पसंद भी आते हैं.

गोंद खाने के फायदे

– गर्भवती महिलाओं के लिए गोंद का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है साथ ही ब्रैस्ट मिल्क भी बढ़ता है.

– कब्ज या ऐसिडिटी होने पर भी गोंद का सेवन लाभकारी है.

– गोंद जौइंट पेन को काफी हद तक कम करती है. यह हमारे जौइंट्स को ल्यूब्रिकैट करती है, साथ ही साथ अगर आप की हड्डियों में कुछ समस्या हो रही है, तो उसे भी ठीक कर सकती है.

– गोंद से बनी चीजें खाने से दिल की बीमारियों का खतरा भी कम होता है.

२. अदरक

सर्दियों में अदरक रोजाना सभी घरों में उपयोग किया जाता है. शायद ही ऐसा कोई घर होगा जिस में अदरक वाली चाय न बनाई जाती हो. यह औषधीय गुणों से भरपूर मसाला है इसलिए कुछ घरों में सब्जी में भी इस्तेमाल किया जाता है.

ऐंटीइनफ्लैमेंटरी और ऐंटीऔक्सीडैंट से भरपूर अदरक एक जड़ीबूटी भी है और पाचनतंत्र, सूजन, शरीर के दर्द, सर्दीखांसी जैसी बीमारियों में अदरक के इस्तेमाल से फायदे  मिलते हैं. इतना ही नहीं, हृदय रोग, रक्तविकार, बवासीर आदि रोगों में भी अदरक के औषधीय गुण से लाभ मिलता है.

फायदे

– डाइजैशन दुरुस्त होता है.

– इम्यूनिटी बूस्ट होती है, जिस के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल बीमारियों का रिस्क काफी हद तक घट जाता है.

– दिल की सेहत बेहतर होती है.

– अदरक से कोलैस्ट्रौल लैवल कम होता है,

जिस से हाई ब्लड प्रैशर की शिकायत घट जाती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो जाता है. इस से हार्ट अटैक जैसी बीमारियों का रिस्क कम होता है.

– जिन लोगों को डायबिटीज की बीमारी है उन्हें अदरक का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इस से इंसुलिन सैंसिटिविटी बेहतर होती है और ब्लड में शुगर लैवल मैंटेन हो जाता है.

३. हलदी

आयुर्वेद के अनुसार हलदी औषधीय गुणों से भरपूर है. यह एक सुपर हैल्दी मसाला है जो आप को कई फायदे दे सकता है खासकर सर्दियों के मौसम में. हलदी खाने में रंग भरने के साथसाथ स्वाद भी बढ़ाती है. यह ऐंटीइनफ्लैमेटरी और ऐंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है जो प्राकृतिक रूप से कई हैल्थ प्रौब्लम्स से लड़ने में आप की मदद कर सकती है.

सर्दियों के दौरान शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हम कई तरह के मसालों और हर्ब्स से युक्त खाना खाते हैं. इसी दौरान आप को कच्ची हलदी भी अपनी डाइट में शामिल जरूर करनी चाहिए.

हलदी का दूध

हलदी वाला दूध या हलदी का दूध ऐंटीऔक्सीडैंट का एक शक्तिशाली स्रोत है. आप सोने से पहले 1 कप हलदी वाला दूध पी सकते हैं. यह आप को गरम रखेगा और सर्दी, खांसी के लक्षणों को कम करेगा.

फायदे

– यह जोड़ों के दर्द को कंट्रोल करने में आप की मदद कर सकता है.

– यह आप को सूजन से लड़ने में मदद करता है.

– यह आप की स्किन हैल्थ के लिए फायदेमंद है

– हलदी को अपनी डाइट में शामिल करने से आप को साइनस के लक्षणों से राहत मिल सकती है.

– यह मधुमेह रोगियों के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि यह ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है.

४.. गुड़

आयुर्वेद के अनुसार गुड़ की तासीर गरम होती है इसलिए सर्दियों में इस का सेवन शरीर को गरमी प्रदान करने के लिए बहुत लाभकारी है. यह आप के शरीर को अंदर से गरमी प्रदान करता है और आप को गरम महसूस कराता है. गरमियों के मौसम में इस का बहुत सीमित मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इस का सेवन करने से शरीर में गरमी बढ़ती है.

गुड़ में आयरन, कैल्सियम, फास्फोरस, पोटैशियम और विटामिन जैसे पोषक तत्त्व पाए जाते हैं. इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण लोगों के सर्दीजुकाम, बुखार और अन्य वायरल संक्रमणों से ग्रस्त होने का जोखिम बहुत बढ़ जाता है. लेकिन गुड़ खाने से इम्यूनिटी मजबूत होती है. यह न सिर्फ आप को वायरल संक्रमण से बचाने में मदद करता है बल्कि उन के उपचार में भी सहायक है.

फायदे

– गुड़ के नियमित सेवन से पेट से जुड़ी सभी परेशानियां दूर होती हैं और पाचन बेहतर होता है.

– गुड़ में पाए जाने वाले आयरन, फास्फोरस, जिंक, पोटैशियम और ऐंटीऔक्सीडैंट्स शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं.

– ऐनीमिया से पीडि़त महिलाओं को नियमित तौर पर गुड़ का सेवन करना चाहिए फायदा मिलता है.

– गुड़ आप के ब्लड को प्यूरिफाई करने में मदद करता है, जिस से आप की स्किन साफ और चमकदार बनती है और कई बीमारियों से बचती है.

– गुड़ खाने से शरीर को डिटौक्सिफाई करने में मदद मिलती है

५. खजूर

सर्दियों में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक खानपान की जरूरत होती है. दरअसल, सर्दियों में इम्यूनिटी काफी कमजोर हो जाती है, जिस कारण हम बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं. ठंड के मौसम में डाइट में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए, जिन से शरीर को पर्याप्त पोषण मिल सके.

ऐसे में सर्दियों में सेहतमंद रहने के लिए खजूर का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है. खजूर को सर्दियों का सुपरफूड कहा जाता है  खजूर पोषक तत्त्वों जैसे पोटैशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, फाइबर से भरपूर होता है जो शरीर के लिए जरूरी हैं. सर्दियों में खजूर खाने से शरीर  गरम रहता है और इम्यूनिटी भी बढ़ती है.

कुछ इस तरह करें शामिल

सर्दियों में रोजाना सुबह गरम दूध के साथ इस का सेवन करने की सलाह दी जाती है. सर्दियों में खजूर का सेवन दूध के साथ करने से दोगुने फायदे मिलते हैं. दूध में विटामिन, प्रोटीन, कैल्सियम और आयरन आदि पोषक तत्त्व पाए जाते हैं, साथ ही आप लड्डुओं में भी इस का इस्तेमाल कर सकते हैं.

फायदे

– खजूर की तासीर गरम होती है और यह सर्दीजुकाम की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं.

– सर्दियों में अस्थमा की समस्या काफी बढ़ जाती है. ऐसे में  दूध में खजूर डाल कर खाने से छाती में जमा कफ आसानी से बाहर निकल जाता है.

– दूध में खजूर डाल कर पीने से पाचनतंत्र दुरुस्त रहता है. खजूर में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पाचनक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है.

– ऐनीमिया की शिकायत होने पर दूध के साथ खजूर का सेवन बहुत फायदेमंद माना जाता है. खजूर में आयरन काफी मात्रा में होता है जो शरीर में खून की कमी को दूर करता है. दूध के साथ खजूर खाने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है.

६. बाजरा

सर्दी का सुपरफूड बाजरा शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. यह ग्लूटेन फ्री होता है और शरीर को अंदर से गरम रखता है. सर्दियों में इसे कई तरह से जैसे रोटी, लड्डू, खिचड़ी, दलिया आदि बना कर खाया जाता है. बाजरा में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और फोलेट आदि पाए जाते हैं.

कैसे करें शामिल

बाजरे को अपनी डाइट में शामिल करने के लिए आप भाकरी, बाजरे के लड्डू, बाजरे की खिचड़ी, भाजनी थालीपीठ आदि को ले सकते हैं.

फायदे

– बाजरे की रोटी में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जिसे खाने से पाचनतंत्र हैल्दी रहने के साथसाथ गैस, ऐसिडिटी, कब्ज और अपच जैसी समस्याएं भी आसानी से दूर होती हैं.

– बाजरे की रोटी में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है, जिस से वजन कम करने में मदद मिलती है.

– बाजरे के आटे में ग्लाइसेमिक इंडैक्स कम होता है, जिस कारण डायबिटीज के रोगी इसे आसानी से खा सकते हैं. बाजरे की रोटी खाने से डायबिटीज कंट्रोल रहने में मदद मिलती है.

७. खट्टे सीजनल फल

सर्दियों में कई तरह के खट्टे फल आते हैं जैसे संतरा, नीबू, कीवी जो इम्यूनिटी को स्ट्रौंग बनाने का काम करते हैं, जिस से आप के बीमार होने का खतरा कम होता है. ये विटामिन सी का बेहतरीन सोर्स माने जाते हैं. सर्दियों में इन्हें डाइट में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है

कैसे करें शामिल

आप इन फलों से चाट, सलाद, जूस आदि बना कर अपने आहार में शामिल कर सकते हैं.

क्या हैं फायदे

सीजनल फल न्यूट्रिशन से भरपूर होते हैं. इन में आयरन, कैल्सियम, पोटैशियम, विटामिन और मैग्नीशियम होता है.

– ये आप के मैटाबोलिज्म को बूस्ट और ब्लड शुगर लैवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं.

– ऐंटीबैक्टीरियल एजेंट होने के नाते सीजनल फल आप की त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होते हैं.

८. तिल

काले और सफेद तिल को सर्दियों में पोषण पावरहाउस माना जाता है. इन में ओमेगा 3 फैटी ऐसिड भरपूर मात्रा में होता है, साथ ही इन में आयरन, फाइबर, कैल्सियम, मैग्नीशियम, विटामिन ई और फास्फोरस भी अच्छी मात्रा में मौजूद होता है. इन सभी पोषक तत्त्वों से भरपूर तिल हमारी सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं.

कैसे खाएं

– सर्दियों में गुड़ के साथ तिल मिला कर  कई चीजें जैसे तिल के लड्डू, तिल की पट्टी हर किसी के घर में सर्दियों में बनाई जाती है.

– सलाद में इन का तेल उपयोग कर सकते हैं.

– कुछ लोग सब्जियों में भी इन का सेवन करते हैं.

फायदे 

– तिल में मोनोसैचुरेटेड फैटी ऐसिड्स होते हैं जो शरीर में कोलैस्ट्रौल लैवल नियंत्रित करते हैं.

– ब्लड प्रैशर भी नियंत्रण में रहता है.

– तिल में मौजूद जिंक, सेलेनियम, मैग्नीशियम, कैल्सियम और आयरन दिल की मांसपेशियों को स्ट्रौंग बनाते हैं और उन्हें ऐक्टिव बनाते हैं.

– हड्डियों की मजबूती बढ़ाने के लिए भी तिल का सेवन फायदेमंद होता है. काले और सफेद तिल में कैल्सियम पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है.

– तिल के दानों में ऐंटीऔक्सीडैंट की मात्रा बहुत अधिक होती है जो शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति यानी इम्यूनिटी बढ़ती है. इस के अलावा तिल में पाया जाने वाला समीन नामक ऐंटीऔक्सीडैंट्स कैंसर सैल्स को बढ़ने से रोकता है.

Healthy Superfoods

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें