अरहान खान के खिलाफ बोलना Devoleena Bhattacharjee को पड़ा भारी, मिली जान से मारने की धमकी

टीवी की गोपी वहू यानी देबोलीना भट्टचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) इन दिनों सुर्खियों में हैं. कभी ट्रोलिंग तो कभी धमकियों का शिकार हो रही हैं. देबोलीना भट्टचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) को अपनी खास दोस्त और बिग बॉस 13 (Bigg Boss 13) कंटेस्टेंट का साथ देना मुसीबत में डाल दिया है. दरअसल हाल ही में टीवी की इस हसीना को जान से मारने की धमकी मिली है, जिसका खुलासा उन्होंने सोशल मीडिया पर किया है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

अरहान खान के खिलाफ बयानबाजी पर मिली धमकी

देबोलीना भट्टचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) को शबीना अमीन नाम की एक महिला ने सोशल मीडिया पर धमकी दी है. धमकि देते हुए महिला ने लिखा है कि देबोलीना भट्टचार्जी ने कभी भी अरहान खान (Arhaan Khan) के खिलाफ बयानबाजी की तो वह दिन उनका आखिरी दिन होगा. साथ महिला ने अपनी धमकी में रश्मि देसाई और सिद्धार्थ शुक्ला का भी नाम लिया है.

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देबोलीना ने साइबर क्राइम में शिकायत

धमकी भरे मैसेज आने के बाद देबोलीना भट्टचार्जी ने साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज करवाई और इस महिला के मैसेज को सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ शेयर भी किया. जिसमें उन्होंने पुलिस को भी टैग किया है.

पहली बार नहीं मिली है धमकी

 

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Requesting everyone to quarantine for atleast 2weeks.B safe Be happy

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देबोलीना भट्टचार्जी को सोशल मीडिया पर पहले भी धमकियां मिली हैं. सिडनाज के खिलाफ बात करने के चलते भी देबोलीना भट्टचार्जी को धमकी भरे मैसेज मिल थे, जिसके बाद अब ये धमकी उन्हें परेशान कर रही है.

 

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#devoshami 🥰 @imrashamidesai ❤️ . . . #devoshamiforever #devotheomggirl #devoleena #rashmidesai #bb13 #bff

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बता दें, पिछले कुछ दिनों से रश्मि देसाई की बैंक स्टेटमेंट वायरल हो रही है और खबरों की माने तो उस बैंक स्टेटमेंट में ये साफ साफ नजर आ रहा है कि अरहान खान ने रश्मि देसाई के अकाउंट से काफी ज्यादा पैसे निकाले हैं. रश्मि देसाई की बैंक स्टेटमेंट की फोटोज देख रश्मि के फैंस काफी भड़क उठे हैं और अरहान खान को काफी खरी-खोटी सुना रहे हैं. इतना ही नहीं बल्कि रश्मि के फैंस ने सोशल मीडिया पर #FraudArhaanKhan भी ट्रेंड किया.

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रिश्ता कागज का: भाग-3

प्रिया ने पता नहीं क्या समझा और फिर मेरे गले लग कर बोली, ‘‘डोंट वरी मां आप के सपने को आप की बेटी पूरा करेगी,’’ फिर अपने भाई का कान पकड़ कर बोली, ‘‘सुन नालायक मैं अब डाक्टर नहीं बनूंगी तू बनेगा और पापा का हौस्पिटल संभालेगा. मैं तो अपनी मम्मा का सपना पूरा करूंगी.’’

उस दिन के बाद से वह जैसे नए जोश में भर गई. तुरंत विज्ञान विषय को बदल कर हिस्ट्री, इंग्लिश और इकौनोमिक्स ले लिया. मेरा मार्गदर्शन तो था ही. जल्दी ही वह दिन आ गया जब एमए करने के बाद उस ने यूपीएससी की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में कुछ कम नंबर आने पर दोबारा परीक्षा में बैठी. इस बार शुरू के 50 लोगों में नंबर था. मसूरी से ट्रेनिंग करने के बाद उस की रायपुर में ही अतिरिक्त कलैक्टर के पद पर प्रशिक्षु के रूप में नियुक्ति हो गई. उस के बैच के 6 और लड़के थे. उन को हम ने खाने पर बुलाया. सभी बहुत खुशमिजाज थे. खाना खाने के बाद भी बड़ी देर बातचीत चलती रही. मैं ने महसूस किया कि उन में से एक की नजर प्रिया पर ही थी. प्रिया भी उस को अलग नजर से देख रही थी. पूछताछ करने पर पता चला कि वह गुजरात का रहने वाला था. उस के पापा आर्मी में थे. उस का नाम शरद था. मैं लड़की की मां की तरह सोच रही थी कि लड़का अच्छा है. बराबर के पद पर है और सब से बड़ी बात कि प्रिया को पसंद भी कर रहा है. प्रिया भी शायद उसे पसंद करती है. मैं ने इन से बात करनी चाही पर इन्होंने मुझे मीठी झिड़की दी कि अरे कुछ तो सोच बदलो. आजकल का जमाना नया है. लड़केलड़की बराबरी से हंसीमजाक करते हैं. जरूरी नहीं कि वे आपस में प्यार करते हों. मुझे गुस्सा आ गया और मैं करवट बदल कर सो गई. पर मेरा अंदाजा कितना सही था, यह मुझे दूसरे दिन पता लग गया. शाम को जब प्रिया औफिस से आई तब कार में उस के साथ शरद भी था. मैं ने तुरंत चायनाश्ता लगवाया. कुछ देर इधरउधर की बातें करने के बाद मैं ने देखा दोनों एकदूसरे को कुछ इशारे कर रहे हैं. मुझे भी हंसी आने लगी. मैं जानबूझ कर औफिस और राजनीति की बातें करती रही.

आखिर प्रिया ने कहा, ‘‘मां, शरद को आप से कुछ कहना है.’’

मेरे कान खड़े हो गए. जब कोई बात मनवानी होती थी तब दोनों बच्चे मुझे मां कहते थे. अत: मैं ने कहा, ‘‘हां, बोलो बेटा क्या बात है?’’

शरद ने धीरेधीरे पर बड़े विश्वास से मुझे अपने और परिवार के बारे में बताया. उस के पापा आर्मी में ब्रिगेडियर थे. वह अकेला लड़का था. प्रिया उस को पसंद थी. मसूरी में ही उन की अच्छी दोस्ती हो गई थी. उस के मातापिता को शादी पर कोई ऐतराज नहीं. प्रिया को मेरी मंजूरी चाहिए थी.

मुझे इस शादी पर तो कोई ऐतराज था ही नहीं और मैं तो कल रात से ही सपने देख रही थी पर मुझे एहसास हुआ कि शरद को सच बता देना चाहिए. कुछ सोचने के बाद मैं ने कहा कि मैं उस से अकेले में बात करना चाहती हूं. यह सुन कर प्रिया ने हंसते हुए कहा, ‘‘मम्मी जरूर तुम्हें अपनी लड़की का पीछा छोड़ने के लिए पैसे देने वाली हैं. तुम फिल्मी हीरो की तरह पैसे ठुकरा मत देना. अच्छीखासी रकम मांग लेना. फिर हम दोनों खूब शौपिंग करेंगे.’’

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मैं ने उस के इस मजाक का कोई जवाब नहीं दिया. बस उसे वहीं रुकने की बोल शरद को अपने कमरे में ले गई. कमरा बंद कर मैं ने अपनी अलमारी से वे बरसों पुराने कोर्ट के कागज निकाल कर उसे दिखाए और बताया कि प्रिया हमारी अपनी बच्ची नहीं, गोद ली हुई है, पर वह है इसी घर की बच्ची. संक्षेप में उसे प्रिया की कहानी बताई.

अंत में मैं ने कहा, ‘‘हम इस बात को भूल चुके हैं, पर तुम उसे जीवनसाथी बना रहे हो तो इस के लिए यह जरूरी है कि तुम सच जान लो. अब तुम्हारा जो फैसला हो बता दो,’’ कह कर मैं आंखें बंद कर बैठ गई. दिल धकधक कर रहा था कि पता नहीं मैं ने अपने ही हाथों अपनी बेटी का बुरा तो नहीं कर दिया.

थोड़ी देर बाद महसूस हुआ कि शरद मेरे आंसू पोंछ रहा है. शरद ने सारे कागज वापस अलमारी में रखे और मेरे हाथों को अपने माथे से लगाते हुए बोला, ‘‘अब तो किसी भी कीमत पर मैं इस घर से रिश्ता जोड़ कर रहूंगा.’’

बस इस के बाद शरद के मम्मीपापा आए. बड़े ही अच्छे माहौल में सारी बातें तय हुईं और सगाई तय कर दी. प्रियंक भी अमेरिका से अपनी एमएस की पढ़ाई पूरी कर वापस आ गया. शहर के बड़े होटल में हम ने प्रिया की सगाई रखी. पापा के बहुत पुराने दोस्त आर्मी से रिटायर हो कर गवर्नर बन गए थे. पापा ने उन्हें भी बुलाया. वे सहर्ष आए. शहर के कुछ प्रमुख लोग, कुछ परिचित और प्रिया और शरद के औफिस के अधिकारी सब मिला कर करीब सौ मेहमान हो गए थे. गवर्नर साहब के आने से फोटोग्राफर्स ने तो बस मौका ही नहीं छोड़ा. हजारों फोटो ले डाले और उन्हीं में से एक फोटो समाचारपत्रों में छपा था, जिसे मैं उस दिन देख रही थी. तभी वह फोन आया था.

मैं वापस वर्तमान में लौट आई. पता नहीं क्याक्या हुआ होगा. प्रिया को सब पता लग गया क्या? क्या वह मुझ से नाराज हो गई? यदि नहीं तो वह यहां क्यों नहीं दिख रही? मुझे कुछ हो और प्रिया पास न हो ऐसा कभी हो सकता है?

तभी रूम की घड़ी ने सुबह के 6 बजाए. बेटा झटके से उठा और मेरी तरफ बढ़ा. मुझे आंखें खोले देख खुशी से चिल्ला पड़ा, ‘‘ओह मां, आप जाग गईं. पता है तुम्हारी बेटी ने तो मेरा 4 दिन से जीना मुश्किल कर दिया था. कल रात जब मैं ने बोला कि अब मां ठीक हैं सुबह तक ठीक हो जाएंगी तब पापा को घर ले जाने के बहाने उसे घर भेज पाया हूं. दोनों बोल गए थे चाहे कितनी रात को तुम्हें होश आए उन्हें जरूर बुला लूं,’’ फिर दरवाजे की तरफ देख कर बोला, ‘‘लो, आप के देवदास और आप की चमची दोनों हाजिर हैं. बिना बुलाए सुबह 6 बजे आ धमके.’’

मैं ने भी दरवाजे की तरफ देखा. प्रियांशु और प्रिया भागे चले आ रहे थे. दोनों आ कर बैड की एक तरफ खड़े हो गए. प्रिया तो मेरे गले लग कर रोने ही लगी, ‘‘क्या मां, आप ने तो डरा ही दिया. मेरी शादी का इतना दुख है, तो मैं नहीं करती शादी.’’

मेरा बेटा फौरन बोला, ‘‘अरे, जाओ, मम्मी तो खुशी बरदाश्त नहीं कर पाईं… और अटैक तो मुझे आना था खुशी का कि अब कम से कम घर पर मेरा राज होगा.’’

प्रिया ने तुरंत उस का कान पकड़ा, ‘‘बड़ा आया… विदेश से क्या पढ़ कर आया है. 4 दिन लगा दिए मम्मी को ठीक करने में… पहले डाक्टरी तो ठीक से कर, फिर घर पर राज करना.’’

दोनों की नोकझोंक सुन कर मैं निहाल हुई जा रही थी. प्रिया पहले की तरह ही थी. लगता है वह नहीं आया होगा. मैं ने चैन की सांस ली.

1 सप्ताह बाद मैं अपने घर की राह पर थी. कार में प्रियांशु और शरद आगे बैठे थे. प्रिया मुझे संभाले पीछे थी. अचानक प्रिया ने कहा, ‘‘मुझे पता है आप को किस बात का सदमा लगा. वह आदमी आया था जिस के कारण आप हौस्पिटल पहुंची.’’

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मैं ने चौंक कर उसे देखा. तभी प्रियांशु ने बात संभाली और बोला, ‘‘हां पारुल वह आया था. मुझे तो समझ ही नहीं आया कि क्या करूं पर अच्छा हुआ तुम ने शरद को सब बता दिया था. उस ने ही प्रिया को तुम्हारे कमरे में ले जा कर कोर्ट के सारे कागज दिखाए और फिर बाकी कहानी मैं ने प्रिया को बताई. इन दोनों ने उस का वह हाल किया कि मजा आ गया. मेरी बहन और पापा के मन को भी शांति मिल गई होगी.’’

सारी बात जानने को उत्सुक हो गई तब इन लोगों ने बताया कि प्रिया ने उसे बहुत खरीखोटी सुनाई. उस के बेटे निकम्मे निकले. सारी संपत्ति पहले ही खो चुका था, इसलिए सोचा होगा कि तुम्हें डरा कर कुछ पैसे ऐंठ लेगा, पर तुम तो उस का फोन सुनते ही बेहोश हो गईं. वह जब घर आया तब तुम हौस्पिटल में थीं. उस ने यह नहीं सोचा था कि उस का सामना प्रिया से ही हो जाएगा. वह अपनी बेटी के आधार पर भरणपोषण का दावा करने की सोच रहा था पर प्रिया ने सारे कागज उस के सामने लहरा दिए और धमकी भी दे डाली कि यह सोच कर आए थे कि मेरे मम्मीपापा से पैसे वसूल करोगे? तुम हो कौन? मेरी मां से तो तुम्हारा कोई संबंध ही नहीं, यह तो तुम कई बरस पहले कोर्ट में बता चुके हो. मैं तुम्हारी बेटी नहीं. फिर कैसे मुझ से भरणपोषण मांगने का केस करोगे और केस तो अब मैं करूंगी… मेरे परिवार को तुम ने नुकसान पहुंचाया है. मेरी मां तुम्हारे कारण हौस्पिटल में हैं. अब जाते हो या पुलिस को बुलाऊं?’’ और फिर तुरंत एसपी साहब को फोन भी कर दिया कि एक आदमी धमकी देने आया है. अब वह इस शहर में दिखना नहीं चाहिए. तुरंत पुलिस आ गई और उसे यह कह कर चले जाने को कहा कि दोबारा इस शहर में पैर रखा तो सीधे जेल में दिखोगे.

प्रिया ने मेरे गले लगते हुए कहा, ‘‘आप की बेटी इतनी कमजोर नहीं मां और न हमारा रिश्ता इतना कमजोर है जो किसी के कुछ कहने से खत्म हो जाए, फिर आप क्यों दिल से लगा कर बैठ गईं उस की धमकी को? उस की तो शक्ल देखने लायक थी… अब पता चलेगा बच्चू को. सुना है भूखे मरने की नौबत आ गई है उस की.’’

मैं ने राहत की सांस ले कर प्रिया को गले लगा लिया. घर आ गया था, पर फिर मेरा भावुक मन यह सोच कर परेशान हो गया कि आखिर है तो प्रिया का पिता ही… भूखों मर रहा है यह तो ठीक नहीं…

प्रिया ने जैसे मेरे मन की बात जान ली. बोली, ‘‘आप चिंता न करो मां. मैं ने और शरद ने मेरठ के कलैक्टर से बात कर के उसे वृद्धाश्रम भेजने का प्रबंध कर लिया है. जब तक जीवित है निराश्रित पैंशन भी उसे मिलती रहेगी. वह भूखा नहीं मरेगा.’’

मैं ने जब नजर भर कर उसे देखा तो मेरे गले लग कर बोली, ‘‘मुझे धरती पर लाने का एहसान तो किया था उस ने वरना इतनी प्यारी मां कैसे मिलतीं, इसलिए वह कर्ज चुका दिया. अब और इस से ज्यादा की आशा मत रखना कि मैं कभी उस से मिलने जाऊंगी या और कुछ करूंगी.’’

मैं ने हंस कर अपनी बेटी को गले लगा लिया. हमारा रिश्ता कागज से बना था पर खून के रिश्ते से ज्यादा गहरा और प्यारा था. मैं ने अपनी प्यारी बिटिया को गले लगाए घर में प्रवेश किया.

#coronavirus: घर पर कपड़े से ऐसे बनाएं मास्क

कोरोना के कारण मास्क की डिमांड काफी बढ़ गई है लेकिन मार्केट में मेडिकल स्टोर्स पर या तो स्टौक नहीं है और अगर है भी तो इसकी प्राइस काफी ज्यादा है. दोस्तों, अगर आप चाहें तो घर पर ही बड़ी आसानी से मास्क बना सकते हैं. यह मास्क काफी लोगों को संक्रमण से बचा सकता है. इसलिए इस वीडियो में हम आपको कुछ ऐसी ट्रिक्स बता रहे हैं जिसे फौलो कर आप घर पर ही कपड़े से एक बढ़िया मास्क बना सकते हैं. इस मास्क की खासिय यह है कि इसे आप जितनी बार चाहें यूज कर सकते हैं और

इसे धो भी सकते हैं. बिना देरी आइये शुरू करते हैं.-

इसके लिए आपके पास चाहिए, साफ कॉटन का कपड़ा, कैंची, स्टेपलर और रबरबैंड

सबसे पहले अपने हाथों को अच्छे से धो लें

इसके बाद घर में रखा कौटन का साफ कपड़ा लें

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कपड़ा किसी भी रंग या साइज का ले सकते हैं

अब कपड़े को इस साइज में काट लें जिससे ये आपके नाक और मुंह को अच्छी तरह से कवर कर सकें

ध्यान रहे अगर कपड़ा ज्यादा मोटा हो तो उसे बीच से काट लें और पतला हो तो उसे बीच से मोड़ लें

अब कैंची से कपड़े को किनारे को सफाई से काट लें

इसके बाद रबर बैंड लें और कपड़े के एक किनारे पर इसे लगाकर स्टेपल कर दें

कपड़े के ठीक दूसरे किनारे पर भी रबर बैंड लगाकर स्टेपल कर दें

अगर आपके पास स्टेपलर नहीं है तो सुई धागे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं

ध्यान रहे रबरबैंड कमजोर नहीं होना चाहिए

लीजिए आपका मास्क बनकर तैयार है

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इस्तेमाल करने से पहले इसे धो लें

साथ ही मास्क का इस्तेमाल करने से पहले अपने हाथों को धो लें, अगर आपने ऐसा नहीं किया तो मास्क पहनने का कोई फायदा नहीं मिलेगा.

याद रखें यह मास्क हेल्थवर्क्स या उनके लिए नहीं है जो कोरोना के मरीजों की देखभाल कर रहे हैं या खुद मरीज हैं.

#lockdown: quarantine में अपनी खूबसूरती का कैसे रखें ध्यान

पूरा देश लगभग 22-23 दिनों से अपने घर पर ही है और इस अनदेखी भयानक वायरस से लड़ने की कोशिश कर रहा है.  ऐसे में कुछ लोग ऑफिस का काम घर से ही कर रहे है. पूरे देश में लॉकडाउन है तो अधिकतर चीज़े बंद है. इस लॉकडाउन के चलते हमारे पास घर पर ही काफी समय है और यही सही वक़्त है की हम जो काम करने से कतराते थे या जो काम हम समय की कमी की वजह से नहीं कर पाते थे करें.

अपने मेकअप ब्लैंडर स्पंज को आप घर पर रहकर ही बड़े आराम से धो सकती है.  जिस स्पंज  को आलास और समय की कमी के कारण महीना-महीना नहीं धोती थी.  सबसे पहले आप एक बड़े बर्तन में हल्का गुनगुना पानी भर लें .फिर उसमें डिश लिक्विड सोप लें. अब आप इसमें अपने सारे ब्लैंडर स्पंज  डाल दें और कम से कम घंटा भर उसे छोड़ दे.  आप देखेंगे की आपको ब्लैंडर स्पंज अच्छे से साफ़ हो चुका होगा और स्पंज पर लगा हुआ मेकअप पानी में घुल जायेगा. गलती से किसी पर थोड़ा सा मेकअप लगा हुआ हो तो आप उसे हाथ से रगड़ कर साफ़ कर लें.  अंत में अब आप एक साफ़ पानी में सभी मेकअप ब्लैंडर स्पंज को एक साफ़ में धो लें ताकि वह और अच्छे से साफ़ हो जाए. सूखने दें  पहले की ही तरह इस्तेमाल करें.

अब  हम अधिकांश सभी काफी दिनों से घर है और वर्क  फ्राम होम कर रहे हैं. डेली रूटीन में बदलाव आया है. देर से सोना और देर से उठना जिसकी वजह से आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ते जा रहे हैं.  यदि आप भी जाती हैं इन डार्क सर्कल्स को हटाना तो अपनाएं यह घरेलू टिप्स.

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आपको अपने डार्क सर्किल हटाने के लिए सिर्फ दो चीज़ो की ज़रूरत होगी, विटामिन-ई कैप्सूल और एलोवेरा जेल. एक छोटी सी डिब्बी में आप दो विटामिन-ई कैप्सूल और दो चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं.  अब एक टूथपिक की मदद से आप इन दोनों को अच्छे से मिलाये लगभग 2 से 3 मिनट.  आप देखेंगी कि यह मिलाते- मिलाते सफ़ेद रंग का हो गया होगा. इसका मतलब यह पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए तैयार है.  अब इस जेल को रोज़ाना  रात को सोने से पहले डार्क सर्कल पर लगा कर मसाज करें फिर फेस वॉश कर लें. जल्दी ही इन डार्क सर्कल से छुटकारा मिलेगा.

मैकेट्रेस बाई पारुल (पारुल बुद्धिराजा अरोड़ा)

क्या हंसने को व्यायाम के रूप में देखना सचमुच विवेकपूर्ण है?

सवाल-

मेरे पति और मैं रोजाना सुबह पास के पार्क में घूमने जाते हैं. वहां हर दिन हमारा कुछ ऐसे लोगों से सामना होता है, जो सामूहिक रूप से कई मिनटों तक खूब जोरजोर से हंसते हैं. मुझे उन का यह बनावटी हंसना कुछ समझ में नहीं आता, पर मेरी एक मित्र का कहना है कि यह हास्य योग है जो स्वास्थ्य के नजरिए से बेहद लाभकारी सिद्ध होता है. क्या यह सोच वैज्ञानिक है? क्या हंसने को व्यायाम के रूप में देखना सचमुच विवेकपूर्ण है?

जवाब-

यह बात बिलकुल सच है कि हंसना स्वास्थ्य के लिए हर लिहाज से बहुत अच्छा है. हास्य योग की सोच सदियों से जीवित है. समाज में इसी सोच के अंतर्गत लाफ्टर थेरैपी की बात कही गई है और आधुनिक वैज्ञानिक शोध से भी हंसने के शरीर और मन पर पड़ने वाले सद्प्र्रभावों की पुष्टि हो गई है.

भौतिक स्तर पर हंसना एक भरपूर व्यायाम है. उस से छाती, पेट और हाथों की पेशियों की कसरत तो होती ही है, दिल, फेफड़ों और रक्तसंचार व्यवस्था का भी खूब अच्छा व्यायाम हो जाता है. दिल और संचरण की गति तेज हो जाती है और सांस नलियों में कहीं बलगम हो तो वह बाहर आ जाता है. यह मन के लिए भी बहुत अच्छा टौनिक है. खुल कर हंस लेने से आदमी जीवन की नीरसता, एकाकीपन, तनाव, अवसाद और थकान से भी छुटकारा पाता है.

इतना ही नहीं शोध चिकित्सकों ने हंसने के उपयोगी गुणों का जैव रासायनिक आधार भी तलाश किया है. पाया गया है कि हंसने से मस्तिष्क में अनेक महत्त्वपूर्ण जैव रसायन उत्पन्न होते हैं. उन में स्ट्रैस में काम आने वाले कुछ प्राकृतिक पीड़ाहारी जैव रसायन प्रमुख हैं.

बात यहीं खत्म नहीं हो जाती. हंसने के बहुपयोगी गुणों को देखते हुए आधुनिक चिकित्सा में हास्य का प्रयोग रोगोपचार औषध के रूप में होने लगा है. बीते कई दशकों से लाफ्टर थेरैपी अमेरिका में कई अस्पतालों में उपचार का अंग बनी हुई है.

स्वस्थ बने रहने के लिए आप और आप के पति भी लाफ्टर थेरैपी क्लब के सदस्य बनें और खूब हंसें. इस से सस्ती, अच्छी चिकित्सा भला और क्या हो सकती है.

  -डा. यतीश अग्रवाल 

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#coronavirus: किलर वायरस पर भिड़ते सुपरपावर्स

आलोचनाओं के मद्देनजर, विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अदनोम घेबरियिसस ने कहा है कि कृपया कोरोना वायरस को राजनीति से अलग रखें. यदि हम इससे जीतना चाहते हैं तो हमें उंगलियों को इंगित करने में समय बरबाद नहीं करना चाहिए. वहीं, संयुक्त राष्ट्र संघ यानी यूएनओ के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने सदस्य देशों से डब्लूएचओ को समर्थन देते रहने का आग्रह किया है. संयुक्त राष्ट्र ने जानलेवा वायरस के फैलाव के बारे में ग़लत सूचना देने व प्रकाशित करने पर सचेत करने के साथसाथ दुनिया के सभी देशों से अपील की है कि वे एकता और एकजुटता के साथ इसका मुक़ाबला करें.

दरअसल, वायरस से उभरी कोविड-19 की महामारी में संदिग्ध भूमिका को लेकर चीन पूरी दुनिया में घिरने लगा है. दुनिया के तमाम देश वायरस के पीछे चीन की साज़िश महसूस कर रहे हैं जिसे वे तरहतरह से बयान भी कर रहे हैं. कुछ देश तो डब्लूएचओ पर भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि नोवल कोरोना वायरस के लिए चीन जिम्मेदार निकला तो उसे गंभीर सजा भुगतनी होगी. वहीं, आस्ट्रेलिया ने भी चीन पर पारदर्शिता न बरतने का इल्ज़ाम लगाते वायरस के क्रिएशन की अंतरराष्ट्रीय जांच किए जाने की मांग की है. आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री मैरिस पाइन ने कहा है कि कोरोना के संदर्भ में उनकी चिंता स्वाभाविक है. आस्ट्रेलिया इस वैश्विक महामारी को लेकर जांच चाहता है, जिसमें वुहान में कोरोना संक्रमण का पहला मामला आने के बाद चीन के ऐक्शन की भी जांच की जाए.

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ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमनिक रौब ने कड़े शब्दों में कहा कि चीन को बताना होगा कि कोरोना महामारी कैसे फैली और उसे रोकने के लिए क्या कोशिशें की गईं.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वायरस के चलते चीन में होने वाले संक्रमण और मौतों के लिए चीन द्वारा बताई गई संख्या पर संदेह जताया है.

उधर, जरमनी ने वायरस से हुआ अपना नुकसान तो बाकायदा गिनाया ही, साथ ही, चीन को इसका बिल भी भेज दिया है. जरमनी ने चीन को 149 बिलियन यूरो का बिल भेजा है ताकि कोरोना से हुए उसके नुकसान की भरपाई हो सके.

इसी बीच, आस्ट्रेलिया और जरमनी ने अपने देशों में चीनी कंपनियों के नए निवेश पर रोक लगा दी है, ताकि वे उनके देशों की कमजोर कंपनियों को टेकओवर न कर सकें. वहीं, चीन को अपना कड़ा प्रतियोगी मानने वाले भारत ने चीन से आने वाले विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी एफडीआई की जांच के लिए कड़े कदम उठा लिए हैं.

इस सबके बीच, चीन के हुबेई प्रांत के शहर वुहान में स्थित इंस्टिट्यूट औफ वायरोलौजी की लैबोरेट्री के डायरेक्टर युवान ज़ीमिंग, जो वायरोलौजिस्ट हैं, ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यह असंभव है कि कोरोना वायरस हमारी प्रयोगशाला से बाहर आया हो.

चीनी वायरोलौजिस्ट ज़ीमिंग ने कहा कि कोरोना वायरस के फैलने में वुहान प्रयोगशाला की कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी तरह मालूम है कि इस प्रयोगशाला में क्या रिसर्च हो रही है और वहां सैंपल और वायरसों को किस तरह संभाला जाता है.

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बहरहाल, सब देशों के कथनों में उनके अपने कारण छिपे हैं. वास्तविकता पर संदेह है. वे चीन को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं तो चीन उनके बयानों को झूठ करार दे रहा है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि चीन की अपेक्षा दूसरे ताकतवर देश कोरोना से लड़ने में पीछे रह गए हैं.

ऐसी हालत में कुछ विश्लेषकों का कहना है कि महामारी से निपटने में अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की नाकामी चीन को अगुआई करने का मौका देगी जबकि कुछ का कहना है कि कोरोना संकट की वजह से चीन के प्रति दुनिया में अविश्वास पैदा होगा और तमाम देशों के साथ उसके रिश्ते कमजोर हो जाएंगे.

बेटी के साथ घर लौटीं Meri Aashiqui Tum Se Hi फेम Smriti Khanna, फैंस के लिए शेयर की फोटो

लॉकडाउन के बीच टीवी सीरियल ‘मेरी आशिकी तुमसे ही’ फेम स्मृति खन्ना (Smriti Khanna) के घर नन्ही परी आई है, जिसकी खबर स्मृति (Smriti Khanna) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था. लेकिन अब एक्ट्रेस स्मृति खन्ना (Smriti Khanna) और उनके पति गौतम गुप्ता बेटी को घर ले आए हैं, जिसकी फोटोज वायरल हो रही है. आइए आपको दिखाते हैं स्मृति खन्ना की बेटी की फोटोज…

Smriti Khanna की बेटी की पहली झलक

हाल ही में स्मृति खन्ना (Smriti Khanna) ने फोटो शेयर करते हुए बेटी होने की फैंस को खुशखबरी दी थी, जिसके बाद घर वापस आने से पहले स्मृति खन्ना ने बेटी के साथ अस्पताल में एक मिरर सेल्फी भी ली. जो वायरल हो रही है.

 

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Time to go home 💎🥳 Please ignore the swollen face and puffy eyes 🥱🥺🥴😴 #newmom #welcomeprincess

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बेटी के साथ दिखे स्मृति के पति

 

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Friday Night Jazz with his dancing partner ❤️

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स्मृति खन्ना के साथ-साथ उनके पति बेटी के आने से काफी खुश हैं, जिसके चलते गौतम गुप्ता बेटी को सुलाते-सुलाते डांस भी करने लगे. वहीं बेटी के साथ घर वापस आने के बाद गौतम गुप्ता अपनी बेटी के साथ जमकर क्वालिटी टाइम बिता रहे हैं.

फैंस को जरुरी जानकारी

 

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Our princess has arrived 💗 15.04.2020

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स्मृति खन्ना को बीते दिनों उनकी डिलीवरी से जुड़े कई सवालों के मैसेज भी आए. इस पोस्ट के जरिए स्मृति खन्ना ने खुलासा किया है कि उनकी बेटी नॉर्मल डिलीवरी से हुई है.

 

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Not a prank but I did scare you @mistergautam 😂😂😂 #couplevideos #stayhome #staysafe

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बता दें, गौतम ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में बताया है कि मां और बच्चे दोनों स्वस्थ है. इसी के साथ उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि लॉकडाउन होने के बावजूद भी मैं बहुत आराम से अस्पताल पहुंच गया. गौतम ने बताया हम जुहू में रहते हैं और अस्पताल खार में है. इस दौरान हमने फैसला लिया कि हम दोनों अकेले ही अस्पताल में जाएंगे. बहुत आसानी से हम अस्पताल पहुंच गए. मैं स बात से बहुत खुश हूं कि लॉकडाउन होने के बावजूद सबकुछ ठिकठाक से हो गया.

यादों का अक्स: भाग 2

वह तो दवा ले कर गहरी नींद सो गया था पर मैं रवि की याद में तड़प कर रह गई थी. बारबार सोचती कि काश, आज समीर की जगह रवि होता तो इस हनीमून का, इस बारिश का मजा ही कुछ और होता.

वैसे समीर ने हनीमून पर मुझे पूरा मजा दिया था, लेकिन मैं चाह कर भी पूरे मन से उस का साथ नहीं दे पाई थी. में

जब भी समीर मेरे पास होता मुझे ऐसा लगता मानो मेरा शरीर तो समीर के पास है, लेकिन मन कहीं पीछे छूट गया है, रवि के पास.

मुझे हमेशा ऐसा लगता कि हम दोनों के बीच रवि का वजूद आज भी बरकरार है, जो मुझ से रहरह कर अपना हक मांगता है.

यह शायद रवि के वजूद का ही असर था कि मैं चाह कर भी समीर से खुल नहीं पाई. मेरे मन का एक कोना अभी भी रवि की याद में तड़पता रहता था.

जब भी बादल बरसते समीर बारिश में भीगते हुए उस का आनंद लेता, मगर मैं दरवाजे की ओट में खड़ी रवि को याद कर रोती.

तब अचानक समीर का चेहरा रवि का रूप ले लेता और फिर मेरी यह बेचैनी तड़प में बदल जाती. तब मैं सोचने लगती कि काश, मेरी इस तड़प में रवि भी मेरा हिस्सेदार बन पाता तो कितना अच्छा होता.

बारिश की ठंडी फुहारों के बीच अगर मैं अपनी इस तड़प से रवि को अपना दीवाना बना देती और टूट कर उसे प्यार करती तो शायद मेरा मन भी इस मौसमी ठंडक से सराबोर हो उठता.

वैसे मैं ने अपने मन की सारी बातें अपने मन के किसी कोने में छिपा रखी थीं तो भी समीर की पारखी नजरों ने मेरे मन की बेचैनी को भांप लिया था.

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‘‘घर से बाहर निकलो, नएनए दोस्त बनाओ. घर की चारदीवारी में कैद हो कर क्यों बैठी रहती हो?’’ एक दिन समीर मुझे समझाते हुए बोला.

समीर की बात मुझे जंच गई और मैं अपनी सोसाइटी की किट्टी पार्टी की सदस्य बन गई.

नएनए लोगों से मिलने से मेरा अकेलापन कम होने लगा, जिस कारण मन में छाई निराशा आशा में बदलने लगी.

अपनी जिंदगी में आए इस बदलाव से मैं खुश थी. धीरेधीरे मुझे ऐसा लगने लगा शायद अब मेरी जिंदगी में एक ठहराव आ गया है.

पर यह ठहराव ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया, क्योंकि शांत नदी में अचानक रवि ने आ कर अपने प्यार का पत्थर जो फेंक दिया था, जिस कारण मेरी जिंदगी में फिर से तूफान आ गया.

मैं उस दिन अकेली पिक्चर देखने गई थी. वैसे समीर भी मेरे साथ आने वाला था, लेकिन अचानक जरूरी काम आने से वह नहीं आ आ सका. अत: अकेली पिक्चर देखने आई थी. लेकिन पिक्चर शुरू होने से पहले ही अचानक रवि से मुलाकात हो गई.

जब हम एकदूसरे के सामने आए तब न जाने कितनी देर तक हम दोनों एकदूसरे को बिना कुछ बोले निहारते रहे.

‘‘मैं कोई सपना देख रही हूं क्या?’’ मैं ने चुप्पी तोड़ते हुए पूछा.

‘‘हां, शायद यह सपना ही है,’’ कहतेकहते रवि का गला भर आया.

फिर हम दोनों भीड़ से दूर एक तरफ ओट में जा कर खड़े हो गए.

‘‘कहां थे? न कोई फोन…जाओ, मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी,’’ मैं लगभग रो पड़ी थी.

‘‘नेहा, आज तक कोई पल ऐसा नहीं बीता होगा, जब मैं ने तुम्हें याद न किया हो. बस यह समझ लो कि मेरा तन मेरे पास था पर मन हमेशा तुम्हारे पास रहा है,’’ रवि भरे गले से बोला.

इस से पहले कि मैं कुछ और बोल पाती, रवि ही बोल पड़ा, ‘‘अच्छा, अब ये गिलेशिकवे छोड़ो और अंदर चलो, आज की पिक्चर में मेरा हीरो का रोल तो नहीं है नैगेटिव है पर हीरो के रोल से ज्यादा दमदार है,’’ कह कर उस ने मेरा हाथ पकड़ा और दोनों हौल के अंदर चले गए.

वाकई रवि का अभिनय दमदार था. इतने सालों की उस की मेहनत नजर आ रही थी. जब वह हौल से बाहर निकला तो उस के प्रशंसकों की भीड़ ने उस का रास्ता रोक लिया.

उस के बाद से तो रवि का जादू मेरे सिर चढ़ कर बोलने लगा. अब मुझे न दिन की सुध थी और न रात की.

मेरा अब ज्यादा समय रवि के साथ ही बीतने लगा था. कभीकभी तो मैं शूटिंग के समय भी उस के साथ होती. मैं ने कई बार उस से कहा कि वह चल कर समीर से मिल ले पर हर बार टाल जाता.

जब भी मैं उस के सामने समीर का जिक्र करती, वह गमगीन हो उठता और तड़पते हुए कहता, ‘‘मेरे उस दुश्मन का नाम मेरे सामने ले कर मेरे जख्मों को हरा मत किया करो.

‘‘नेहा, बस यह समझ लो कि तुम से मेरी शादी न हो पाना मेरी सब से बड़ी हार है, जिसे मैं एक दिन जीत में बदल कर ही रहूंगा.’’

तब मेरा मन करता कि मैं उस से लिपट जाऊं और अपना सर्वस्व उसे सौंप दूं पर लोकलाज के भय से अपने बढ़े कदम रोक लेती.

कई बार मेरे मन में आया कि उस से पूछूं कि वह मेरी शादी के समय कहां था, पर यह सोच कर चुप रह जाती कि इस से रवि को दुख पहुंचेगा और मैं उसे दुखी नही करना चाहती.

एक दिन शाम के 5 बजे थे जब मेरे पास रवि का फोन आया.

‘‘क्या कर रही हो जान?’’

‘‘कुछ भी तो नहीं.’’

‘‘तो चली आओ, आलीशान होटल में,’’

‘‘पर अचानक…’’

‘‘ज्यादा सवाल न पूछो एक सरप्राइज है.’’

रवि का इतना कहना था कि मैं उस के प्यार में खिंची होटल के लिए निकल पड़ी. उस दिन समीर टूअर पर था और मैं ने अपने बेटे बंटू को अपनी सहेली राधिका के यहां छोड़ दिया.

जब रवि के पास पहुंची तो देखा वह एक सजे कमरे में मेरी प्रतीक्षा कर रहा है.

‘‘जान, बहुत देर कर दी आने में…’’

‘‘यह सब क्या है?’’ मैं अचकचाते हुए उस से पूछ बैठी.

‘‘आज मुझे एक बहुत बड़ा रोल मिला है. अगर यह पिक्चर हिट हुई तो समझो मैं रातोंरात स्टार बन जाऊंगा,’’ कहतेकहते उस ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया.

‘‘यह सही नहीं है, रवि,’’ मैं ने खुद को उस से छुड़ाते हुए कहा.

‘‘प्यार में कुछ भी सही या गलत नहीं होता. प्यार तो सिर्फ प्यार होता है जो कुरबानी मांगता है. वैसे भी तुम्हारा और मेरा प्यार तो सच्चा प्यार है जो न जाने कब से एकदूसरे का साथ पाने को तड़प रहा है,’’ यह कह उस ने मुझे पैकेट थमा दिया.

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जब मैं ने पैकेट खोला तो हैरान रह गई, उस में एक गुलाबी रंग की झीनी नाइटी थी.

इधर मैं कपड़े बदलने चली गई तो उधर रवि सारे बिस्तर पर लाल गुलाबों की बरसात करने लगा.

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यादों का अक्स: भाग 1

पहला प्यार तो सावन की उस पहली बारिश के समान होता है, जिस की पहली फुहार से ऐसा लगता है मानो मन की सारी तपिश दूर हो गई हो.

मेरा पहला प्यार रवि जब मुझे अचानक मिला तो ऐसा लगा जैसे मैं ने उस क्षितिज को पा लिया, जहां धरती व आसमान के सिरे एक हो जाते हैं. वैसे मैं चाहती नहीं थी कि रवि और मेरे बीच शारीरिक संबंध स्थापित हों पर जब सारे हालात ही ऐसे बन जाएं कि आप अपने प्यार के लिए सब कुछ लुटाने के लिए तैयार हो जाएं तब यह सब हो ही जाता है.

सच, रवि से एकाकार होने के बाद ही मैं ने जाना कि सच्चा प्यार क्या होता है. रवि के स्पर्श मात्र से ही मेरा दिल इतनी जोरजोर से धड़कने लगा मानो निकल कर मेरे हाथ में आ जाएगा.

रवि से मिलने के बाद ही मुझे एहसास हुआ कि अब तक की जितनी भी रातें मैं ने अपने पति समीर के साथ बिताई हैं वह मात्र एक शारीरिक उन्माद था या फिर हमारे वैवाहिक संबंध की मजबूरी.

शादी से ले कर आज तक जबजब भी समीर मेरे नजदीक आया, तबतब मेरा शरीर ठंडी शिला की तरह हो गया. वह अपना हक जताता रहता, लेकिन मैं मन ही मन रवि को याद कर के तड़पती रहती.

यह शायद रवि के प्यार का ही जादू था कि शादी के इतने साल बाद भी मैं उसे भुला नहीं पाई थी. तभी तो मेरे मन का एक कोना आज भी रवि की एक झलक पाने को तरसता था.

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‘‘मैं शादी करूंगी तो सिर्फ रवि से वरना नहीं,’’ शादी से पहले मैं ने यह ऐलान कर दिया था.

‘‘हां, वह तो ठीक है, पर जनाब मिलने आएं तो पता चले कि वे भी यह चाहते हैं या नहीं,’’ भैया के स्वर में व्यंग्य था.

‘‘हांहां, मैं जानती हूं कि आप का इशारा किस तरफ है? वह हीरो बनना चाहता है, इसीलिए तो दिनरात स्टूडियो के चक्कर काटता है. बस एक ब्रेक मिला नहीं कि उस की निकल पड़ेगी. इसीलिए वह मुंबई चला गया है.’’

‘‘न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी,’’ भैया न हंसते हुए कहा और बाहर चले गए.

‘‘देखो मां, भैया कैसे रवि का मजाक उड़ाते रहते हैं. देख लेना वह एक दिन बहुत बड़ा आदमी बन कर दिखाएगा,’’ मैं यह कहतेकहते रो पड़ी थी.

‘‘बेटी, वह हीरो जब बनेगा तब बनेगा, असली बात तो यह है कि वह अभी कर क्या रहा है?’’ पापा ने चाय पीते हुए मुझ से पूछा.

अब उन से क्या कहती. मैं खुद नहीं जानती कि वह आजकल मुंबई में क्या कर रहा है. मुझे तो बस इतना मालूम था कि शायद अभी फिर से विज्ञापन की शूटिंग कर रहा है.

जब सब कुछ धुंधला सा था तब भला कोई सटीक निर्णय कैसे लिया जाता? फिर मैं ने हथियार डाल दिए यानी समीर से शादी के लिए हामी भर दी.

मेरे इस निर्णय से घर के सभी लोग बहुत खुश थे पर मेरे भीतर अवश्य कुछ दरक कर टूट गया था.

मैं ने न जाने कितनी बार रवि को फोन किया पर वह शायद मुंबई से बाहर था. एक बार तो मैं ने भावावेश में मुंबई जाने का मन भी बना लिया पर तब मातापिता के रोते चेहरे मेरी आंखों के आगे घूम गए और तब मैं ने हथियार डाल दिया. वैसे भी रवि मुंबई में कहां है, यह पता तो मुझे नहीं था.

समीर से शादी हुई तो मैं उस के जीवन की महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन गई. समीर ने मुझे वह सब दिया, जिस पर मेरा हक था. पर शायद मैं समीर के साथ पूरी तरह न्याय न कर पाई.

जिस मन पर किसी और का अधिकार हो, उस मन पर किसी और के अरमानों का महल बनना मुश्किल ही था.

मैं जब भी अकेली होती रवि को याद कर के रो पड़ती. मुझे उस की ज्यादा याद तब आती जब बारिश आती. मुझे आज भी याद है वह दिन जब बहुत ज्यादा उमस के बाद अचानक काले बादल घिर आए थे और देखते ही देखते मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी. उस समय रवि और मैं पिक्चर देख कर मोटरसाइकिल पर लौट रहे थे.

बारिश तेज होती देख कर रवि मोटरसाइकिल रोक कर सड़क की दूसरी ओर मैदान में जा कर बारिश का मजा लेने लगा.

उसे ऐसा करते देख मुझे बहुत अजीब लगा. मैं एक पेड़ के नीचे खड़ी बारिश का मजा ले रही थी. तभी अचानक वह आया और मुझे खींच कर मैदान में ले गया.

‘‘नेहा, अपनी दोनों बांहें खोल कर इस रिमझिम का मजा लो. इन बूंदों में भीगने का मजा लोगी तभी तुम्हें लगेगा कि शरीर की तपिश कम हो रही है और तुम्हारा तनमन हवा की तरह हलका हो गया है.’’

पहले तो मुझे रवि का ऐसे भीगना अजीब लगा पर फिर मैं भी उस के रंग में रंग गई.

जब मैं ने अपने दोनों हाथ फैला कर बारिश की ठंडी बूंदों को अपने में आत्मसात करने की कोशिश की तो ऐसा लगा मानो मैं किसी जन्नत में पहुंच गई हूं. बहुत देर तक बारिश में भीगने के बाद मुझे हलकी ठंड लगने लगी और मैं कांपने लगी.

तब रवि मेरा हाथ पकड़ मुझे सड़क किनारे बने एक छोटे टीस्टाल में ले गया. रिमझिम बारिश के बीच गरमगरम चाय पीते हुए हम ने अपने कपड़े सुखाए और फिर अपनेअपने घर चले गए.

उस के बाद न जाने कितनी बारिशों में मैं और रवि साथसाथ थे. भीगे बदन पर जबजब रवि के हाथों का स्पर्श हुआ तबतब मैं एक नवयौवना सी चहक उठी.

समीर को भी रवि की तरह तेज बारिश में भीगना पसंद है. मुझे याद है जब हम लोग हनीमून के लिए मसूरी गए थे. मालरोड पर घूमते हुए अचानक बारिश शुरू हो गई. समीर तो वहीं खड़ा हो कर बारिश का मजा लेने लगा पर मैं एक पेड़ की ओट में खड़ी हो गई.

‘‘नेहा, आओ मेरे साथ इस बारिश में भीगो. देखो, कितना मजा आ रहा है.’’

‘‘न बाबा न, ठंड लग गई तो? तुम भी यहां आ जाओ,’’ मैं अपना छाता खोलते हुए बोली.

‘‘जानेमन, ठंड लगने के बाद मैं तुम्हें ऐसी गरमी दूंगा कि मेरे प्यार में पिघलपिघल जाओगी.’’

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समीर की इस बात पर आसपास खड़े लोग हंस रहे थे पर मैं शर्म से लाल हुई जा रही थी. हिल स्टेशन की बारिशों में देर तक भीगने से समीर को ठंड लग गई थी और फिर वह 3 दिन तक बिस्तर से नहीं उठ पाया था.

आगे पढ़ें- मैं रवि की याद में तड़प कर रह गई थी….

#coronavirus: हाइजीन और साफ-सफाई है अब ज़माने की मांग 

कोविड 19 को फैलने से रोकने के लिए सबसे अधिक हाइजीन की जरुरत होती है, जिसकी आदत देश में आधे से अधिक लोगों को नहीं है. सरकार ने भी इसे मजबूत करने के लिए सार्वजनिक जगहों पर थूकने पर जुर्माना या कैद की सजा का प्रावधान किया है, ऐसे में हैदराबाद के लूकैफे के फाउंडर अभिषेक नाथ ने स्पेशल सैनिटेशन की पद्यति को अपनाकर पिछले कई सालों से लूकैफे की स्थापना हैदराबाद के कई जगहों पर किया और अवार्ड जीते. उन्होंने रेस्टरूम को अच्छी तरह से सेनिटाइज कर बेक्टेरिया और वायरस से दूर रखा . इसे पब्लिक के लिए मुफ्त रखा गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका प्रयोग कर सके.

इस बारें में अभिषेक का कहना है कि साफ़ सफाई और हाइजीन हमारे देश में एक चुनौती है. मैंने माल्स और शौपिंग क्पम्प्लेक्स क्लीनिंग और सेनिटाइजेशन के क्षेत्र में 20 सालों तक काम करने के बाद पाया कि हमारे देश में क्लीनिंग एक बड़ी समस्या है, इसलिए मैंने इसमें कुछ नया करने को सोचा और कंपनी एक्जोरा कॉर्पोरेट सर्विसेज में मेरा लूकैफे मेरा पहला प्रोजेक्ट रहा, जिसमें शिपिंग कंटेनर को दो भाग में विभाजित कर आधे में कैफे और आधे में वाशरूम बनाया. ये सभी महिला, पुरुष और हैंडीकैप्ड सभी के लिए बनाया गया है.

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इसमें वाटरलेस यूरिनल्स होते है. ये इकोफ्रेंडली होने के साथ-साथ सैनीटरी नैपकिन डिकॉमपोजर भी है. सभी वाशरूम लोगों के लिए फ्री है. इसमें जो पैसा कैफे से मिलता है, उससे साफसफाई करने वाले लोगों का वेतन, वाशरूम की देखरेख, सब मैंनेज होता है. इसमें सरकार कोई पैसा नहीं देती सारा खर्चा मैं उठाता हूँ. सरकार केवल जगह मुहैया करवाती है. इस काम के लिए साल 2019 में मुझे बेस्ट इनोवेशन का अवार्ड भी मिल चुका है.

इसके आगे अभिषेक कहते है कि कोरोना वायरस की वजह से मैंने सोसाइटी में कुछ अलग करने के बारें में सोचा और डॉक्टर की सलाह पर हॉस्पिटल क्लीनिंग का काम करना शुरू किया, फिर मैंने पूरी टीम को प्रशिक्षित कर क्लीनिंग पर जोर दिया और सोशल डिस्टेंस को फोलो करते हुए काम शुरू किया. एक अच्छी तकनीक को देश में लाने के लिए मैंने यू के के डॉक्टर से भी संपर्क किया,  जिसमें मैंने टीम मेम्बर्स को उस तकनीक से परिचय करवाया. इसमें खासकर, हाइजीन, क्लीनिंग और सेनिटाइजेशन को महत्व दिया गया. यहाँ के सारे वर्कर्स बेस्ट क्लीनिंग की पूरी प्रक्रिया को फोलो करते हुए काम कर रहे है. इसमें सेनिटेशन डी टनल को स्थापित करना मेरा काम है. जिसे 24 घंटे में बनाया गया है. इसमें से जाने वाला व्यक्ति पूरी तरह से अपने आपको सेनिटाइज कर, वेंडिंग मशीन से मास्क निकाल कर पहनकर बाहर जा सकता है. इसमें व्यक्ति का पूरा डेटा आ जाता है, जिससे उसकी किसी भी बीमारी का पता आसानी से बाद में भी लगाया जा सकता है. ये मशीन पब्लिक ऑफिसेस, अस्पतालों,घरों और फार्मासीज आदि किसी भी स्थान पर लगाया जा सकता है. सबसे पहले इस डी टनल को हैदराबाद के अधिकतर अस्पतालों में लगाया गया है. हैदराबाद के बाद इसे मुंबई दिल्ली,कश्मीर, जम्मू आदि कई बड़ी शहरों में लगाये जाने का प्रावधान है.

इनदिनों अस्पतालों में साफसफाई का काम जोरो पर है. यहाँ काम करने वाले वर्कर्स के डाइट भी अभिषेक ने बना कर दिए है, ताकि उनकी इम्युनिटी अच्छी रहे. वे कहते है कि सावधानी बड़ी चीज है. हर जगह अगर वेंडिंग मशीन में मास्क मिलने लगे, तो लोगों को उसे निकालकर पहनने में आसानी होगी. डी टनल के साथ उसे भी लगाया जा रहा है. इस काम में समस्या है सही स्टाफ का मिलना, लोगों को समझाना, वीडियो पर लोगों को ट्रेनिंग देना आदि. इसके अलावा जो गाइड लाइन इस टनल को लगाने के बाद है, उसे सही तरीके से 100 प्रतिशत फोलो, लोगों को और स्टाफ को करवाना भी चुनौती है, जिसके लिए लगातार काम चल रहा है.

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आगे अभिषेक की प्लानिंग है कि किसी भी मॉल या शोपिंग काम्प्लेक्स में जाने पर वहां व्यक्ति की पूरी जांच केवल दो हाथों से हो, ऐसी व्यवस्था हो, ताकि ऐसे किसी भी बीमारी से लोग आसानी से बच सकें.

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