coronavirus: लॉकडाउन खत्म होने के बाद सबसे पहले ये काम करेगी ‘कार्तिक’ की ‘नायरा

भारत में जहां कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं तो वहीं जल्द ही 21 दिन का लौकडाउन खत्म होने वाला है. वहीं बौलीवुड और टीवी सितारे जो अपने घरों में बंद हैं वह लौकडाउन खत्म होने के बाद क्या करें इसका प्लान बनाने में लग गए है. दरअसल, ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) की नायरा यानी शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) देहरादून में हैं और लौकडाउन खत्म होने के बाद का प्लान बना रही हैं. आइए आपको बताते हैं क्या है शिवांगी जोशी का प्लान…

फैन ने पूछा ये सवाल

एक्ट्रेस शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) से एक औनलाइन इंटरव्यू के दौरान जब एक फैन ने पूछा कि वो लौकडाउन खत्म होने के बाद सबसे पहले क्या करना पसंद करेंगी? तो शिवांगी जोशी ने मजाक में कहा कि, ‘मैं अपने पसंदीदा चाइनीज रेस्तरां में जाऊंगी और जी भरकर चाइनीज फूड खाऊंगी. अच्छा खाना खाने से मुझे खुशी मिलती है. यह मुझे बहुत-बहुत खुश करता है, इसलिए यह मेरे दिमाग में है.’

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दोबारा शूटिंग के लिए तड़प रही हैं शिवांगी

लौकडाउन के दौरान देहरादून में फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम बिता रही शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) ने कहा कि वह मुंबई वापस जाने के लिए तड़प रही हैं. साथ ही वह ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata) के सेट और को स्टार्स को भी बहुत मिस कर रही हैं.

 

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Doll 💞 @shivangijoshi18 #shivangijoshi

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बता दें, हाल ही में नायरा के रोल में नजर आने वाली शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) की टिकटौक (Tik-Tok) वीडियो सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. वह अपना टाइम पास करने के लिए अपने परिवार के सदस्यों के साथ टिक टौक पर वीडियो बना रही हैं, जो उनके फैंस को काफी पसंद आ रही हैं. साथ ही शिवांगी अपने परिवार के संग वर्क फ्रौम होम यानी शो की शूटिंग करने की भी कोशिश कर रही हैं.

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Lockdown में मस्ती के मूड नें नजर आईं पारस छाबड़ा की Ex गर्लफ्रेंड, देखें Photos

बिग बॉस-13 (Bigg Boss 13)के हैंडसम और चर्चित कंटेस्टेंट में से एक रहे पारस छाबड़ा (Paras Chhabra) की एक्स गर्लफ्रेंड आकांक्षा पुरी (Akanksha Puri) आए दिन सुर्खियों में नजर आती रहती हैं. हाल ही में आकांक्षा अपने एक लेटेस्ट वीडियो की वजह से सुर्खियों में आ गई हैं. आकांक्षा लॉकडाउन पीरियड को अपने तरीके से इंजॉय करती दिख रही हैं। इस वीडियो में आकांक्षा फुल मस्ती के मूड में नजर आ रही हैं.

अपने पुराने रिलेशनशिप को लेकर आए दिन चर्चा में बने रहते हैं. कभी वो किसी वीडियो में अपनी एक्स गर्लफ्रेंड  आकांक्षा पुरी को भला-बुरा बोल देते हैं तो कभी इंटरव्यू में उनकी तारीफें कर देते हैं. वहीं शायद इसीलिए आकांक्षा भी खबरों में छाई रहती हैं. हाल ही में अपने आकांक्षा अपने एक लेटेस्ट वीडियो की वजह से सुर्खियों में आ गई हैं. इस वीडियो में आकांक्षा मस्ती के मूड में नजर आ रही हैं. इस वीडियो में आकांक्षा लॉकडाउन पीरियड को इंजॉय करती दिख रही हैं.

 

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Take me back 😍❤️ #throwback #actionmovieshoot #bts

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आकांक्षा पुरी ने ये वीडियो अपने ट्विटर एकाउंट पर शेयर किया है.  वीडियो को शेयर करते ही जम कर कमेंट्स मिल रहे हैं  इस वीडियो में आकांक्षा पुरी हाथ में गिलास लेकर मस्ती के आलम में झूमती नजर आ रही हैं. उनके पीछे टीवी स्क्रीन पर कोई गाना चल रहा है और आकांक्षा इस गाने पर मस्ती करती नजर आ रही हैं. उन्होंने ब्लैक रंग की ड्रेस पहन रखी है और इसके साथ ही उन्होंने ब्लैक शेड्स भी लगा रखे हैं. जिसमें वो बहुत ग्लैमरस दिख रही हैं. अपने इस वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा है- ‘लॉकडाउन के बाद मैं..’.

आपको बता दें कि इन दिनों कोरोना वायरस के चलते  लॉकडाउन पीरियड को  आकांक्षा खूब इंजॉय कर रही हैं. जिस तरह गाने पर आकांक्षा झूमती दिख रही हैं.

कुछ समय पहले पारस छाबड़ा की गर्लफ्रेंड आकांक्षा पुरी के जबरदस्त मेकओवर की फोटोज सोशल मीडिया पर  तहलका मचा रही थी. आकांक्षा पुरी ने अपने  मेकओवर के साथ टॉपलेस फोटोशूट करवाया था. आकांक्षा पुरी अपनी इन तस्वीरों में बेहद हॉट नजर आ रही थी.

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हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए आकांक्षा पुरी ने अपने फैंस को बताया था कि वो पारस छाबड़ा के साथ अपना हर रिश्ता खत्म कर रही हैं. आकांक्षा पुरी के पारस छाबड़ा को लेकर इस ऐलान के बाद पारस छाबड़ा ने भी बिग बॉस 13 के एक एपिसोड में आकांक्षा के साथ कोई भी रिश्ता नहीं रखने का ऐलान किया था. आकांक्षा ने अपनी हाथ की कलाई पर बने टैटू को हटवाकर तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर  की थी. जो खूब वायरल हुई थी.

#lockdown की वजह से घर में फंसी श्वेता तिवारी की बेटी तो 3 साल के भाई को ही बना लिया डंबल, देखें VIDEO

टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी की तस्वीर अक्सर शेयर करती हैं. अभी श्वेता ने पलक की एक वीडियो शेयर की है. वीडियो में पलक तिवारी वर्कआउट करने का एक फनी तरीका बता रही है. पलक के साथ वीडियो में श्वेता का छोटा बेटा रेयांश कोहली भी नजर आ रहा है.

पलक बताती हैं कि आप अगर घर में हैं और आपके बाइसेप्स कम हो रहे हैं तो आप इन्हें घर में बैठे-बैठे बढ़ा सकते हैं. घर में लोगों के पास अक्सर वेट की कमी होती है जिससे वह वेटलिफ्टिंग कर सकते हैं.

पलक तिवारी अपने छोटे भाई रेयांश कोहली को उठाती हैं और उससे बाइसेप्स की एक्सरसाइज करने लगती हैं. पलक दर्शकों को रेयांश को उठाकर बताती हैं कि इससे बैक की एक्सरसाइज भी की जा सकती है और यह बिल्कुल आसान है.

 

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A quick demonstration of my daily upper body workout by @palaktiwarii #nanhayatri 💪🏼💪🏼💪🏼😂😅

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पलक तिवारी रेयांश कोहली को उठाकर फिर बैक की एक्सरसाइज करती हैं. रेयांश भी इस दौरान काफी खुश नजर आते हैं. बाद में पलक, रेयांश से पूछती हैं कि उन्हें कैसा लगा तो वो कहते हैं मजा आया.

आपको बता दे मां श्वेता तिवारी की तरह उनकी बेटी पलक भी काफी बोल्ड और ब्यूटीफुल हैं. पलक सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और अक्सर अपनी फोटोज और वीडियोज शेयर करती रहती हैं. पलक के इंस्टाग्राम पर 291k फॉलोअर्स हैं.

 

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Watch out for the green sky

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पलक के बोल्ड फोटोशूट अक्सर वायरल होते रहतें हैं. कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर पलक ने अपना एक बाथरूम वीडियो शेयर किया था.

वीडियो में पलक शीशे पर देखते हुए पोज देती हुईं अपना ऐब्स  दिखा रही थीं । पलक ने तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा, इस पोज को उल्टा पुल्टा हेयर कहते हैं। जिसमें पलक ने बताया कि यह वीडियो उनके बाथरूम की  है.

पलक के इस वीडियो को उनके फैन्स ने बहुत पसंद किया था और उनकी तारीफ भी की कुछ लोगों को उनके बाल अच्छे लग रहे है. वह बेहद खूबसूरत भी नजर आ रही थीं. पलक तिवारी के बॉलीवुड डेब्यू पर लगातार चर्चा होती रहती है.

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#lockdown: बर्थडे पर घर से दूर दिल्ली में फंसी जया बच्चन, बच्चों ने शेयर किया इमोशनल पोस्ट

हिंदी फिल्मों की बेहतरीन अदाकारा और सांसद जया बच्चन (Jaya Bachchan) का 9 अप्रैल यानी आज जन्मदिन है इस खास दिन जया कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने की वजह से अपने घर से दूर दिल्ली में फंसी हैं. जया बच्चन (Jaya Bachchan) के जन्मदिन पर उनके दोनों बच्चों अभिषेक-श्वेता ने उनके लिए इमोशनल पोस्ट लिखा है.

आज  जया बच्चन (Jaya Bachchan) का 72वां जन्मदिन हैं. 9 अप्रैल 1948 को मध्यप्रदेश के जबलपुर में जया का जन्म हुआ था.जन्मदिन के खास मौके पर वो अपने घर परिवार से दूर है लेकिन उनके दोनों बच्चों अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan) और श्वेता बच्चन (Shweta Bachchan Nanda) ने  अपनी मां के जन्मदिन को इस बार सोशल मीडिया पर खास मनाया है. जिससे उनको परिवार की कमी न महसूस हो.

बेटे अभिषेक ने शेयर किया इमोशनल पोस्ट

अभिषेक ने सोशल मीडिया पर मां जया बच्चन की एक फोटो शेयर कर दिल की बात लिखकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी. अभिषेक बच्चन ने मां की तस्वीर के साथ इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट किया और लिखा, ‘हर बच्चा आपको बताता है कि उसका फेवरेट शब्द, मां होता है. हैप्पी बर्थडे मां. हालांकि, आप दिल्ली में हैं, लॉकडाउन लगा हुआ है और हम सब मुंबई में हैं. लेकिन आपको पता है न कि हम आपको ही याद करते रहते हैं. आप हमारे दिल में रहती हैं. आई लव यू…’

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बेटी ने कही ये बात

बेटी , श्वेता बच्चन ने एक पुरानी फोटो शेयर कर लिखा- ‘मैं अपने साथ आपका दिल लेकर चलती हूं (अपने दिल के अंदर आपका दिल). मैं आपके बिना कुछ भी नहीं हूं (मैं जहां जाती हूं आप साथ होती हैं). हैप्पी बर्थडे मम्मा. आई लव यू.’

 

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Happy Anniversary to the parentals! Love you both eternally. #46andcounting

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आपको बता दे जया बच्चन ने अपने करियर में एक से एक बेहतरीन किरदार निभाए. साल 1963 में सत्यजीत रे की फिल्म महानगर से अपने करियर की शुरुआत की थी. सत्तर के दशक में उन्होंने फिल्म ‘कोरा कागज’ (1975) और ‘नौकर’ (1980) में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त किए थे. जया बच्चन को आज भी लोग उनके फिल्मी किरदार ‘गुड्डी’ और ‘मिली’ के लिए याद करते हैं.

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जया बच्चन को  फिल्‍मों में अपने शानदार अभिनय  के लिये  9 बार फिल्‍म फेयर पुरस्‍कारों से नवाजा जा चुका है साथ ही वह 1992 में पद्मश्री से सम्‍मानित हो चुकीं हैं और 3 बार IIFA अवार्ड से भी सम्‍मानित हो चुकी हैं.

जया बच्चन और बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ  का परिचय ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्म ‘गुड्डी’ के सेट पर कराया था. जया ने अमिताभ बच्चन के साथ पहली बार फिल्म ‘बंसी बिरजू’ में काम किया और उसके बाद दोनों की कई फिल्में साथ में आई. अमिताभ और जया ने ‘जंजीर’, ‘अभिमान’, ‘चुपके चुपके’, ‘मिली’, ‘शोले और कभी खुशी कभी गम’ जैसी फिल्मों में साथ काम क‍िया. अमिताभ बच्चन ने जया के साथ 1973 में शादी की थी.

#coronavirus: क्या 15 अप्रैल से खुलेगा Lockdown?

अब जबकि 21 दिनों का Lockdown डाउन अपने आखिरी सप्ताह में है, तो हर हिंदुस्तानी एक दूसरे से यही सवाल पूछ रहा है. जो यह सवाल किसी और से नहीं पूछता उसके भी जहन में इस समय यही सवाल घूम रहा है, क्या 21 दिनों के बाद 15 अप्रैल से Lockdown डाउन खुल जायेगा? सच बात तो यह है कि इस सवाल का अंतिम जवाब 15 अप्रैल को ही मिलेगा. उसकी वजह यह है कि पिछले 15 दिनों में इस सवाल का जवाब हर दिन ‘हां’ और ‘न’ के दायरे में झूलता रहा है. हालांकि पीएमओ ने पिछले हफ्ते पूरी दृढ़ता से इस बात से इंकार कर दिया था कि Lockdown डाउन 21 दिन के बाद भी जायेगा. पीएमओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से आकर कहा था कि सरकार का फिलहाल Lockdown डाउन आगे बढ़ाने का इरादा नहीं है. लेकिन पिछले तीन दिनों से जिस तरह से हर गुजरते दिन के साथ कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है, उससे लगातार यह आशंका मजबूत हो रही है कि अव्वल तो 14 अप्रैल के बाद शायद ही Lockdown डाउन खत्म हो, अगर होगा भी तो बहुत कम दिनों के लिए, बहुत सारी शर्तों के साथ.

निश्चित रूप से इसकी वजह यही है कि Lockdown डाउन जिस मकसद से किया गया था, वह मकसद अभी पूरी तरह से हासिल नहीं हुआ है. हालांकि यह भी अंदरखाने से खबरें आ रही हैं कि Lockdown डाउन खत्म करने के तमाम उपाय किये जा रहे हैं. इसकी तमाम संभावनाओं पर काम हो रहा है. लेकिन अगर संक्रमित लोगों की संख्या में स्थिरता या पिछले संक्रमित लोगों के मुकाबले, नये लोगों की संख्या में कुछ कमी नहीं आती तो शायद ही Lockdown डाउन खत्म किया जा सके. वैसे भी Lockdown डाउन तो आगे बढ़ना ही है, अब सवाल यह है कि सूत्रों के जरिये जो बातें बाहर आ रही हैं, उनमें कई फार्मूले हैं. एक तो यह कि 15 अप्रैल से 5 दिनों के लिए हिदायतों के साथ Lockdown डाउन खोल दिया जाए और 5 दिनों के बाद इसे फिर 28 दिन के लिए लगा दिया जाए.

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कुल मिलाकर जो तमाम किंतु परंतु सामने हैं, उनसे मिलकर जो एक समीकरण बन रहा है, उससे तो यही लग रहा है कि Lockdown डाउन में थोड़ी बहुत ढील या कुछ दिनों की ढील जरूर मिले लेकिन

Lockdown डाउन फिलहाल अगले 2 महीने तक आंख-मिचैली करता रहेगा. इसकी भनक सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों में लिये गये समयावधि से भी मिलती है. मसलन- रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया ने बैंकों से ईएमआई पर जो छूट देने के लिए कही थी, वे छूटें 31 मई तक हैं. सरकार के अगर एफसीआई द्वारा खाद्यान्न वितरण योजना पर ध्यान दें तो वहां पर भी 2 महीने का खाद्यान्न वितरण की बात हो रही है. कुछ जानकार कह रहे हैं Lockdown डाउन तीन किस्तों का होगा. पहली किस्त पूरी होने के बाद पांच दिन की मोहलत मिलेगी. फिर 28 दिन का Lockdown डाउन होगा, 28 दिन खत्म होने के बाद फिर पांच की मोहलत मिलेगी. फिर उसके बाद 18 दिनों का Lockdown डाउन होगा.

जब 21 दिनों का Lockdown डाउन शुरु हुआ था तो कम से कम मेडिकल एक्सपर्ट को लग रहा था कि इससे कोरोना के संक्रमण में काफी कमी आयेगी. संक्रमण की चेन टूट जायेगी. लेकिन दुर्भाग्य से जिस तरह से मरकज फैक्टर इस योजना के आडे़ आ गया, उसके चलते लग रहा है कि पुरानी सारी सोच बदल चुकी है. लेकिन इसका एक दूसरा और कहना चाहिए भयावह पहलू यह भी है कि हर गुजरते दिन के साथ देश की बहुत बड़ी जनसंख्या का आर्थिक जीवन बहुत दूभर हो जायेगा. लगातार लोगों की आर्थिक परेशानियां बढ़  रही हैं. सरकार ने जितनी घोषणाएं की हैं, वे आमतौर पर या तो महज भोजन तक सीमित हैं या महज तात्कालिक कर्ज देनदारियों तक. देश की 92 फीसदी वर्कफोर्स अनआर्गेनाइज्ड क्षेत्र से रोजगार पाती है और Lockdown डाउन के चलते हर दिन यह असंगठित क्षेत्र भयानक रूप से चिंताग्रस्त होता जा रहा है.

अगर अर्थशास्त्रियों के अलग अलग अनुमानों को आपस में जोड़कर एक औसत निष्कर्ष निकालें तो अब तक के Lockdown डाउन से यानी 5 अप्रैल 2020 तक Lockdown डाउन से ढाई करोड़ नौकरियां खत्म हो गई हैं. ऐसा नहीं है कि ये ढाई करोड़ लोग इस Lockdown डाउन की अवधि में काम कर रहे थे और अब इन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है. नहीं, यह आंकलन 14 अप्रैल के बाद नौकरी न पाने वाले आशंकित कामगारों का है. भले कहा जा रहा हो कि हर ठीक ठाक आर्थिक स्थिति वाला व्यक्ति 40 लोगों की जिम्मेदारी ले, लेकिन यह न तो व्यवहारिक रूप से संभव है और न ही सैद्धांतिक रूप से भी. आखिरकार देश दान या खैरात से स्थायी व्यवस्थाओं की कल्पना नहीं कर सकते.

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दरअसल अब तक के लौक डाउन के चलते ही करीब 10 लाख करोड़ रुपये की मैन्यूफैक्चरिंग और दूसरे आर्थिक क्षेत्र ध्वस्त हो चुके हैं. जब एक दिन की तालाबंदी होती है तभी औसतन एक लाख काम के घंटों का नुकसान होता है और अब तो पूरी तरह से Lockdown डाउन है. इसलिए हर दिन 3 करोड़ 20 लाख काम के घंटे बर्बाद हो रहे हैं. हर दिन करीब 60 हजार करोड़ रुपये की बनने वाली संपत्ति इस समय शून्य पर नहीं बल्कि नकारात्मक दिशा में है. इस सबके चलते इस बात पर भी सबकी नजर है कि क्या भारत की अर्थव्यवस्था इतना भयानक आर्थिक नुकसान झेलने की स्थिति में है? सच बात तो यही है कि Lockdown डाउन के बारे में सोचते समय हमारी स्थिति, आगे कुआं और पीछे खाईं वाली है. इसलिए 14 अप्रैल की रात या 15 अप्रैल की सुबह ही पता चलेगा कि Lockdown डाउन खुलेगा या नहीं खुलेगा? तब तक हम सब आपस में ही इस यक्ष प्रश्न को एक दूसरे से पूछेंगे और अपने-अपने मन के हिसाब से इसका जवाब देंगे.

#coronavirus:  हाथ धोएं बार–बार, पर स्किन का भी रखें ख्याल

कोरोना वायरस की वजह से लगातार हाथ धोने की सलाह आज सभी को दी जा रही है, क्योंकि रिसर्चर्स ने पाया है कि साबुन या हैंड सेनेटाइजर से इस वायरस को खत्म किया जा सकता है, इसलिए हाथों को बार-बार 20 सेकेण्ड साबुन से धोने पर इस महामारी के संक्रमित होने से बहुत हद तक बचा जा सकता है, लेकिन जब आप साबुन से बार बार हाथ धोते है, तो हाथों की स्किन रुखी और बेजान हो जाती है. खासकर ड्राई स्किन वालों को इस बात का अधिक ध्यान देना पड़ता है, ऐसे में हाथ की स्किन की नमी को बनाये रखने के लिए क्यूटिस स्किन क्लिनिक की डर्मेटोजिस्ट डॉ. अप्रतिम गोयल कहती है कि बार-बार साबुन से हाथ धोने से स्किन रुखी हो जाती है, जिससे इचिंग और कट्स हो जाया करती है, ऐसे में मोयस्चराइजर अधिक लगाने की जरुरत होती है, ताकि किसी भी प्रकार की एलर्जी और इन्फेक्शन से बचा जा सकें.

यहाँ कुछ टिप्स निम्न है, जिसकी वजह से आप हाथों की नमी और खूबसूरती को बार-बार हाथ धोने के बाद भी बनाये रख सकती है,

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  • जब भी आप हाथ धोये उचित मात्रा में मोयस्चराइजर अवश्य लगाये,ताकि आपकी खोयी नमी वापस आ सके,
  • अगर आप बार-बार बर्तन, कपड़े धोने, पोछा करने के लिए साबुन पानी का इस्तेमाल नहीं कर पाती, तो ग्लव्स पहनकर काम करें, इससे कुछ हद तक आपकी स्किन साबुन के केमिकल से बच सकती है,
  • अगर किसी प्रकार की एग्जिमा या एलर्जी है, तो दवा की जरुरत होती है, जो किसी स्किनरोग विशेषज्ञ से संपर्क करके ही लें, ऐसे में ट्रांसपेरेंट हैंड या नॉन पाउडर युक्त ग्लव्स पहनना अच्छा होता है,
  • डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा बताये गए हाइड्रोकोर्टीसोन क्रीम, इन्फ्लेमेशन में स्किन के घाव को जल्दी भरने में समर्थ होती है,
  • रात को सोने से पहले हैंड क्रीम की मोटी लेयर हाथ पर लगाकर ग्लव्स या सॉक्स पहन लें, इससे स्किन जल्दी स्मूथ हो जाएगी,
  • तनाव को भगाए और खुश रहने की कोशिश करें, क्योंकि एक्जिमा का तनाव से गहरा रिश्ता होता है, इसके लिए योगा, मैडिटेशन, वर्कआउट और अपने हॉबी को करने की कोशिश करें.

हालाँकि अभी सभी लोग घर पर है और घर में कई ऐसे पदार्थ है, जिसका प्रयोग कर आप अपने हाथों को मुलायम बना सकते है.

होम रेमिडीस

  • सोने से पहले ओलिव आयल या वेजिटेबल आयल हाथों पर लगायें,
  • सी साल्ट और लेमन को हाथो पर लगाकर पुराने ब्रश से हाथों से डेड स्किन को उतार लें ,इसके बाद मोयास्चराइजर लगायें,
  • ग्लिसरीन, लेमन जूस और रोज वाटर की कुछ बूंदे मिलाकर हर दूसरे दिन हाथों पर लगा लें, इससे स्किन की खोयी नमी वापस आ सकती है,
  • मोम और हल्दी पाउडर को गर्म करें, हाथों और पांव पर जहाँ भी कट्स और एलर्जी है वहां लगा लें, इससे समस्या दूर हो जाएगी.

इन सावधानियों पर ध्यान दें, पर हाथों को धोना बंद न करें और स्वस्थ रहे.

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रहनुमा: भाग-3

फिर कांपते हाथों से चाय बना, 2 बिस्कुट के साथ चाय गटकने के बाद संध्या ने बुखार, बदनदर्द की टैबलेट खा ली थी और बुखार की खुमारी में पता नहीं कितनी देर यों ही पड़ी थी कि अचानक दरवाजे की घंटी की आवाज से तंद्रा टूटी थी. दरवाजा खोला तो आगंतुक को देख बुखार की खुमारी में बंद आंखें चौंक कर फैल गईं थीं और उसे तुरंत नारीसुलभ लज्जा ने घेर लिया था. वह अपने अस्तव्यस्त कपड़े और बिखरे बाल समेटने लगी थी.

‘‘आप…?’’ वह बोली थी.

‘‘भीतर नहीं आने देंगी क्या?’’ शेखर बोला था.

वह सकपका कर दरवाजे के बीच से हट गई थी.

‘‘ऐक्सीडैंट जबरदस्त हुआ है. अरे आप को तो बुखार भी है,’’ कहते हुए शेखर ने पहले संध्या की कलाई थामी, फिर ललाट का स्पर्श किया. संध्या पत्ते की तरह थरथरा उठी थी. छुअन का रोमांच विचित्र था.

‘‘चलिए, डाक्टर से दवा ले आते हैं.’’

संध्या विरोध न कर सकी थी. वापस घर आ कर शेखर ने किचन में जा कर संध्या के लिए दलिया बनाया था और अपने सामने उसे खिलाया था.

‘‘अच्छा अब मैं चलता हूं. दवा आप ने ले ली है, आराम आ जाएगा. फिर मदद की जरूरत हो तो याद कर लीजिएगा,’’ कह कर जवाब की प्रतीक्षा किए बिना शेखर जा चुका था.

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शेखर का घर आना, क्षणिक मधुर स्पर्श, उस का केअरिंग ऐटिट्यूट संध्या के नीरस जीवन में मधुर स्मितियां सजा गया. इस उम्र में भी निगोड़ा मन अशांत होने लगा है. आईने पर बरबस नजर चली जाती है और अधरों पर लजीली मुसकान थिरकने लगती है, संध्या सोचती फिर सिर को झटक कर वर्तमान में लौट आती. फिर सोचने लगती कि इस निगोड़े मन में यही खराबी है कि जरा सी ढील दे दो तो कहांकहां डोलने लगता है. क्या सचमुच उम्र बुढ़ा जाती है, मन नहीं? संध्या स्वस्थ हो गई थी धीरेधीरे. एक दिन सपना के फोन ने उस के मन में उत्साह भर दिया था. वह भारत आ रही थी अपने बेटे के साथ. वह अपने 5 वर्ष के नाती बौबी के साथ खूब मस्ती करेगी, यह सोच कर वह बहुत उत्साहित थी. उस ने तुरतफुरत घर में सभी जरूरत का सामान जुटाना शुरू कर दिया था. सपना के आने से घर का कोनाकोना जीवंत हो उठा था.

‘‘ममा, ये शेखर कौन है?’’ एक रोज सपना के अप्रत्याशित प्रश्न ने संध्या को झकझोर दिया था.

‘‘कुलीग है…’’ संक्षिप्त सा उत्तर दे उस ने बात खत्म करनी चाही थी.

‘‘आप के मोबाइल पर इन की कौल्स देखीं इसलिए…’’

संध्या ने कोई जवाब नहीं दिया किंतु मां के चेहरे के हावभाव सपना देखनेसमझने का प्रयास कर रही थी. एक दिन रात के सन्नाटे को तोड़ता अचानक संध्या का मोबाइल घनघना उठा, तो उस ने तुरंत मोबाइल उठाया और बोली, ‘‘आजकल बच्चे आए हुए हैं…’’

उस ने फोन काटना चाहा पर शेखर उधर से बोला, ‘‘ठीक है, बहुत अच्छा है. आप बिटिया से हमारे संबंध के विषय में बात कर लीजिए. अगर आप कहें तो मैं स्वयं आ कर उस से मिल लेता हूं.’’

‘‘नहींनहीं,’’ कह कर संध्या ने घबरा कर फोन काट दिया था.

मां के कांपते हाथ और चेहरे के थरथराते भाव देख सपना ने तुरंत पूछा था, ‘‘कौन था ममा, रात के 11 बजे हैं?’’ स्थिर खड़ी संध्या चुपचाप बिस्तर की ओर बढ़ गई थी.

‘‘क्या हुआ ममा, कुछ परेशान हैं आप. कोई टैंशन है क्या…?’’

संध्या ने अचकचा कर इनकार कर दिया था. संध्या के मन में उधेड़बुन चल रही थी. सपना की प्रतिक्रिया क्या होगी? सब कुछ जान लेने के बाद क्या मांबेटी एकदूसरे के प्रति सहज रह पाएंगी? मां के जीवन में किसी दूसरे पुरुष की उपस्थिति बच्चों को स्वीकार्य नहीं होगी शायद. किंतु अपने मन की बात बच्चों से न शेयर कर पाने के एहसास से स्वयं उस का हृदय घुटन महसूस करता. अपने नए एहसास, नई मैत्री को वह किसी अपने से बांटना भी चाहती थी किंतु परिवार व समाज की बंदिशों का डर, अपनी स्वयं की सीमाओं के टूट जाने का भय उसे ऐसा करने नहीं दे रहा था.

सपना के बारबार कुरेदने पर संध्या ने उसे शेखर के बारे में सब कुछ बता दिया था. लेकिन सपना के चेहरे पर कठोरता और नागवारी के भाव देख वह सकपका गई थी. ‘‘मम्मी, आप को कोई ‘इमोशनल फूल’ बना रहा है. आप बहुत सीधी हैं, आप की नौकरी, पैसे के लालच में आ कर कोई भी आप को बेवकूफ बना रहा है. अब उस का फोन आए तो मुझे बताना, मैं उस का दिमाग ठिकाने लगाऊंगी.’’

‘‘लेकिन बेटा, आर्थिक रूप से वह भी संपन्न है. मेरे पैसे, मेरी प्रौपर्टी से उसे कुछ लेनादेना नहीं है.’’

‘‘लेकिन मम्मी, इस उम्र में आप को ऐसा बेतुका खयाल आया कैसे? बहुत सी औरतें हैं, जो आप ही की तरह अकेली रहती हैं, लेकिन बुढ़ापे में शादी नहीं करतीं. यह बात मेरी ससुराल में और रिश्तेदारों को पता चलेगी तो उन का क्या रिऐक्शन होगा? सब मजाक उड़ाएंगे और हम हैं तो सही आप के अपने बच्चे. कोई दुख, तकलीफ अगर हो तो आप हम से कहो. बाहर वाले लोगों के सामने अपनी परेशानी बता कर क्यों हमदर्दी लेना चाहती हो?’’ सपना की आवाज के तार कुछ और कस गए थे, ‘‘राहुल को जब पता चलेगा कि उस की सास ऐसा कुछ करना चाहती हैं, तो कितना बुरा लगेगा उसे…’’

संध्या अपराधबोध से कसमसा उठी थी. स्वयं पर ग्लानि अनुभव हुई थी उसे. सपना की वापसी का दिन आ गया तो वह बोली, ‘‘ममा, मैं जल्दी ही अपना दूसरा ट्रिप बना लूंगी आप के पास आने के लिए. रिटायरमैंट के बाद आप मेरे साथ रहेंगी बस…’’ एक फीकी मुसकान संध्या के बुझे चेहरे पर फैल गई थी.

‘‘मैं ने कोमल से भी कह दिया है. वह भी यहां आने का प्रोग्राम बना रही है.’’

‘‘हां बेटा ठीक है.’’

सपना चली गई तो घर में सन्नाटा पसर गया. संध्या स्वयं को संयत कर अपने रोजमर्रा के कार्यों में लीन हो गई. शेखर का फोन आता तो वह रिसीव न करती. जब उस की बेटी कोमल आई, तो एक बार फिर घर का कोनाकोना महक उठा. छुट्टी के दिन सुबह से शाम तक घूमना, खरीदारी. औफिस जाती तो घर जल्दी लौटने का मन होता.

‘‘ममा, ये शेखर कौन हैं?’’ कोमल के चेहरे पर रहस्यमयी मुसकान थी. संध्या का चेहरा उतर गया था.

‘‘सपना दीदी ने मुझे बताया था.’’

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संध्या के हाथ रुक गए थे. कदम ठिठक गए थे… अब कोमल अपना रोष व्यक्त करेगी. ‘‘ममा, यह तो बहुत अच्छी बात है. हम दोनों बहनें तो बहुत दूर रहती हैं आप से. फिर गृहस्थी की तो बीसियों उलझनें हैं. ऐसे में जरूरत पड़ने पर हम आप की कब और कितनी मदद कर सकती हैं. मुझे तो खुशी होगी अगर आप… हां, सपना दीदी को समझाना होगा. उन्हें मनाना मेरा काम होगा. आप शेखर अंकल और उन के बेटे को घर पर बुलाइए. हम सभी एकदूसरे से मिलना चाहेंगे.’’ संध्या टकटकी लगाए बेटी का मुंह देखती रह गई थी. शेखर अपने बेटे के साथ संध्या के घर आ गया था. वहां सहज भाव से सब ने एकदूसरे से बातचीत की थी और कोमल व उस का पति नीरज शेखर के बेटे से बहुत प्रभावित हुआ था. शेखर का डाक्टर पुत्र वास्तव में एक समझदार लड़का था. डाक्टरी पेशे में अत्यधिक व्यस्त रहने की वजह से वह अपने पिता को समय नहीं दे पाता था, इसलिए उन के जीवन में एक संगिनी की आवश्यकता को बेहद जरूरी समझता था. उस के प्रगतिशील विचार जान कर और पिता के प्रति उस का प्रेम और आदर का भाव देख संध्या हैरान थी.

संध्या के मन में चल रही कशमकश को उस ने यह कह कर एकदम दूर कर दिया था, ‘‘आंटी, आप अपने मन में चल रही कशमकश और शंका को दूर कर लें और हम पर विश्वास कर जीवन के इस मोड़ पर नई राह का खुले दिल से स्वागत करें. मैं और मेरी 2 बहनें कोमल और सपना आप के साथ हैं.’’ ‘‘मम्मी, आप इतनी टैंशन में न आएं. अब तो मुसकरा दें प्लीज. आप की खुशी में ही हम बच्चों की खुशी है,’’ दामाद के मुंह से यह सुन कर संध्या के मन में चल रही कशमकश समाप्त हो गई थी. दुविधा के बादल छंट चुके थे.

Fashion Tips: गरमियों में ऐसे चेंज करें लुक

हर सीजन के बदलने के साथ फैशन भी बदलता है. जिसकी वजह से आपको भी हर टाइम फैशन से अप टू डेट रहना पड़ता होगा. लेकिन आजकल के बिजी लाइफस्टाइल में आप कैसे फैशन के बारे में अपडेट रहे. तो आप परेशान न हों. आज हम आप नए फैशन ट्रैंड के बारे में 5 टिप्स बताएंगे, जो आपके को बेहतर दिखाएगा.

1. ट्रैंडी लोफर्स फुट वियर को अपनी ड्रैस के साथ पहनें

जहां बात इन दिनों फुट वियर की बात करें तो महिलाओं के बीच लोफर काफी ट्रेंड में है. इसकी खास बात है कि यह फुट वियर आप किसी ड्रेस के साथ भी पहन सकती हैं.

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2. अपनाएं रेट्रो लुक वाली लूज जींस का फैशन…

आपके पास कई सारी टाइट फिटिंग जींस होंगी. लेकिन अब लूज जींस का क्रेज अधिक रहने वाला है. इसलिए अपनी वार्डरोब को लूज जींस से जरूर अपडेट करें. यह कंफर्टेबल होने के साथ-साथ आपको रेट्रो लुक भी देती हैं, जो आजकल यंग जनरेशन में काफी पौपुलर है.

3. टाई-डाई यानी कलरफुल टी शर्ट का फैशन

फैशन वर्ल्ड में इस समय सबसे कूल और ग्लैमरस ट्रेंड टाई-डाई टी शर्ट्स है. ये टी शर्ट्स काफी कलरफुल होती हैं. इन टी शर्ट्स के वाइब्रेंट कलर किसी के भी मन को खुश कर देते हैं.

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4. लुक को पूरा करता है स्ट्रौ बैग

पिछले कुछ महीनों में डिजाइनर स्ट्रौ बैग महिलाओं के बीच काफी पौपुलर रहे हैं. बैग ऐसी चीज हैं, जो महिलाओं की लुक को पूरा करते हैं. बास्केट शैप बैग से राउंड बैग तक स्ट्रौ बैग हर तरह से आपकी लुक में ग्लैमर का तड़का लगाते हैं.

5. न्यूट्रल शेड यानी कपड़ों के कलर का हो बैलेंस

2019 में लोगों के बीच सबसे ज्यादा क्रेज न्यूट्रल शेड्स का है. न्यूट्रल कलर के कपड़े हों या फिर लिपस्टिक, समर ट्रेंड है. अगर आप लोगों की भीड़ में सबसे अलग दिखना चाहती हैं, तो सिर से पैरों तक न्यूट्रल कलर की लुक ट्राई कर सकती हैं.

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रहनुमा: भाग-2

फिर बातों ही बातों में संध्या को पुनर्विवाह की सलाह सभी ने दे डाली थी. संध्या को बहुत अटपटा लगा था यह हासपरिहास, लेकिन 2-4 दिन बाद उसे फिर ऐसे ही वाक्य सुनने को मिले थे. एक रोज तो अचानक ही संध्या के औफिस का सहकर्मी उस के समक्ष अपने एक मित्र शेखर को ले कर उपस्थित हो गया था और बिना किसी भूमिका के उस ने विवाह प्रस्ताव उस के सम्मुख रख दिया था. शेखर ने उस के सामने बैठ कर स्वयं ही अपना परिचय दिया था कि वह प्रतिष्ठित और उच्च पद पर है और पत्नी की मृत्यु हुए कई वर्ष बीत चुके हैं. एक डाक्टर पुत्र है, जो विवाहित है और 2 छोटे बच्चों का पिता है. पिता के अकेलेपन की त्रासदी पुत्र को भीतर ही भीतर बेचैन किए हुए है. इसलिए उस का आग्रह है कि वे अपनी जीवनसंध्या में अपने लिए उपयुक्त साथी खोज लें.

शेखर का यह आकस्मिक प्रस्ताव संध्या को असंतुलित कर गया था, लेकिन उस के बाद से शेखर के फोन संध्या के पास बराबर आने लगे थे. संध्या कभी तो संक्षिप्त वार्तालाप कर फोन बंद कर दिया करती थी, तो कभी रिसीव ही नहीं करती थी. कभी फोन उठाती लेकिन मुंह से बोल न निकलते. खामोशी की भी अपनी ही जबान होती है, जिसे फोन करने वाला तुरंत समझ जाता है. लेकिन जिस ‘हां’ को शेखर सुनना चाहता था वह सहमति नदारद रहती. संध्या की ससुराल की तरफ से तो कोई रिश्तेदारी थी नहीं, मायके में पिताजी थे और 2 भाई थे. उस ने अपनी भाभी से शेखर के प्रस्ताव के विषय में बात की थी, तो बात पूरे घर में फैल गई थी. किसी की तरफ से अच्छा रेस्पौंस नहीं मिला था. संध्या के पिताजी तो इस बात को जान कर क्रोध में फोन पर बरस पड़े थे, ‘‘अब तुम्हारी उम्र मोहमाया के बंधनों से नजात पाने की है या बेसिरपैर के संबंध से बंधने की है? कुछ अध्यात्म की ओर मन लगाओ और अच्छा साहित्य पढ़ो. समय फालतू है तो समाजसेवा की सोचो. रिटायरमैंट के बाद खाली समय बिताने की समस्या अभी से क्यों है तुम्हारे दिमाग में? इस उम्र में स्वयं को बंधन में बांधना एकदम वाहियात बात है.’’

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घर वालों का नकारात्मक रवैया शेखर को संध्या ने बता दिया था और फिर बोली थी कि आप अपने लिए किसी अन्य साथी की खोज करिए, मैं ऐसे ही ठीक हूं. संध्या की बेरुखी के बाद भी शेखर ने उसे समझाने का असफल प्रयास किया था. फिर स्वयं भी मौन साध लिया था. उस के फोन आने बंद हो गए थे और दिन गुजरते जा रहे थे. शुरू में तो संध्या ने राहत की सांस ली थी, किंतु 1 हफ्ता बीत गया तो उस की फोन की प्रतीक्षा में बेचैनी बढ़ने लगी थी. मन एक नई उलझन में उलझता जा रहा था कि क्या हो गया? मेरी बेरुखी से ही फोन आने बंद हो गए शायद? या शायद शेखर ने भी अपना बचकाना विचार छोड़ दिया होगा और यही उचित भी है. इस उम्र में किसी के साथ जुड़ने, संग रहने का क्या मतलब?

लेकिन उस का अधीर मन यह भी कहता कि वह स्वयं ही फोन कर ले. किंतु संस्कारी चित्त राजी न होता. एक दिन मन के हाथों हार कर संध्या ने मोबाइल पर शेखर का नंबर पंच कर हलकी सी मिस्ड कौल दे दी थी. ऐसा करने से उस का हृदय जोरों से धड़क उठा था. उस के मोबाइल पर तुरंत यह संदेश आ गया था, ‘मैं बहुत परेशान हूं, अभी बात नहीं कर पाऊंगा.’

‘क्या हुआ? कैसी परेशानी?’ उस ने सवाल भेजा था पर उस का कोई जवाब नहीं आया था. अगले दिन संध्या यह सोच कर अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो गई थी कि व्यर्थ ही उस ने अपने मन को बेकार के झंझट में फंसाया. किंतु भावनाओं के ठहरे हुए दरिया में अचानक एक पत्थर आ गिरा था. एक दिन मोबाइल की घंटी बजी, तो संध्या ने स्क्रीन पर नजर डाली. उस पर शेखर का नाम था. उस ने कांपते हाथों से मोबाइल हाथों में थामा तो शेखर का अक्स उभर आया था. शेखर ने बताया था कि उन का इकलौता बेटा डाक्टरों और सहायकों की टीम के साथ किसी गांव में फैली महामारी का इलाज करने और बीमारों की तीमारदारी के लिए गया था. लेकिन मरीजों को भलाचंगा करतेकरते वह स्वयं भी रोग की चपेट में आ गया था. इसलिए वह उस के बेहतर इलाज के लिए उसे तुरंत दिल्ली ले कर गया था. वहां बढि़या मैडिकल सेवा की बदौलत उस की सेहत में सुधार होने लगा और अब वह धीरेधीरे पूर्ण स्वस्थ हो रहा है. मैं बहुत परेशान और व्यस्त रहा, क्योंकि बहुत भागदौड़ रही. और कैसी हैं आप? अच्छा फोन बंद करता हूं. डाक्टर के पास जा रहा हूं.

संध्या ने फिर कभी कोशिश नहीं की फोन करने की, न ही दूसरी तरफ से कोई समाचार आया. एक दिन संध्या औफिस से निकल अपने दुपहिया वाहन पर सवार विचारों में खोई चली जा रही थी कि उस की आंखों के सामने अंधेरा छा गया. उस की एक चीख निकली और वह वाहन समेत सड़क पर जा गिरी. उस के बाद उसे नहीं मालूम कि क्या हुआ. आंखें खुलीं तो उस ने स्वयं को अस्पताल में पाया. कोई भलामानुस उसे अस्पताल ले आया था और फिर घर भी छोड़ गया था. उस के पूरे शरीर में दर्द था और चलनेफिरने में भी दिक्कत थी. जैसेतैसे दूध गरम कर ब्रैड के 2 पीस खा कर उस ने दवा ले ली थी. फिर जल्दी ही उसे नींद आ गई थी. सुबह आंख खुली तो समूचा जिस्म अकड़ा हुआ था. अपनी सहकर्मी मित्र को फोन कर उस ने हादसे की सूचना दी थी और अवकाश के लिए कह दिया था. सांझ होते ही उस की कुलीग्स उस का हालचाल जानने के लिए घर आ गई थीं और उस के खानेपीने का प्रबंध कर गई थीं.

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अगले दिन जब नींद से जागी तो सिर दर्द से फटा जा रहा था और सारा शरीर ताप से जल रहा था. वह बिस्तर से उठने के प्रयास में लड़खड़ा गई थी, लेकिन फोन बज रहा था इसलिए जैसेतैसे उस के पास जा कर रिसीवर कान से सटाया था.

‘‘हैलो संध्याजी, आप कैसी हैं?’’ उधर से शेखर की आवाज थी.

‘‘बस तबीयत ठीक नहीं है, बुखार है शायद. ऐक्सीडैंट…,’’ संध्या का कंठ भर्रा गया था, रिसीवर हाथ से छूट गया था.

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रहनुमा: भाग-1

मोबाइल की सुरीली सी खनक सुन संध्या ने स्क्रीन पर उभरे नंबर और नाम को देखा, तो उस का हृदय तेजी से धड़क उठा. लेकिन मोबाइल बजता रहा और वह खामोश बैठी रही. 10 मिनट बाद लैंडलाइन की घंटी बजी तो उस ने कौलर आईडी पर नंबर चैक किया. पल भर को उस का जी चाहा कि रिसीवर उठा कर बात कर ले, किंतु अपने मनोभाव को संयत कर उस ने फोन काल को नजरअंदाज करना ही ठीक समझा. फिर संध्या अपने दैनिक क्रियाकलाप निबटाने लगी. सुबह घर की साफसफाई करना, चायनाश्ता बना कर खाना फिर औफिस चले जाना और सांझ ढले थकेमांदे घर लौटना यही उस की दिनचर्या रहती. लेकिन घर लौटने पर खालीखाली सूना घर देख उस का मन उदास हो जाता. देह को ठेलती वह किचन में जा कर चाय बनाती और टीवी औन कर देती. देर रात तक टीवी चलता रहता तो टीवी के शोर से घर का सन्नाटा जैसे समाप्त हो जाता.

रात के सन्नाटे में जरा सी आहट होते ही वह कांप जाती. एक रात जब वह सो रही थी तब मुख्यद्वार के बाहर लगी घंटी बज उठी थी. उस की नींद टूटी तो इतनी रात गए कौन होगा, सोच कर वह सिहर उठी थी. फिर घबरा कर वह चीख उठी थी कि कौनहै? लेकिन कोई उत्तर न पाने पर कांपते हाथों से खिड़की का पल्ला खोला था. लेकिन बाहर कोई नजर नहीं आया था. जब गेट के बाहर की घंटी लगातार बजती रही तो वह कांपते हाथों से दरवाजा खोल लौन में आ गई. गेट की घंटी पूर्वत बज ही रही थी. शायद राह चलते किसी मनचले ने मसखरी करने के लिए घंटी बजा दी थी, जो घंटी का स्विच दबा रह जाने की वजह से लगातार बजती चली जा रही थी. उस ने घंटी का स्विच औफ किया था और तुरंत भीतर जा कर दरवाजेखिड़कियां बंद कर दी थीं. किंतु उस के बाद सारी रात वह सो नहीं सकी थी.

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संध्या के पति की मृत्यु हुए बरसों बीत गए हैं. 2 बेटियां हैं जिन का विवाह उस ने स्वयं ही किया है. एक बेटी विदेश में है और दूसरी भारत में ही है. लेकिन कोसों दूर. वैसे संध्या की बढि़या नौकरी है, इसलिए अच्छाखासा वेतन और घर में सभी सुविधाएं हैं. सुबह से शाम कैसे हो जाती है संध्या को पता नहीं चलता, लेकिन सांझ ढले एकांत घर में आना उसे तनमन से थका देता है. बेटियों से रोज बातचीत होती है किंतु वे दोनों अपनी गृहस्थी में व्यस्त हैं, इसलिए ज्यादा समय नहीं दे पातीं. जब कभी वह बीमार हो जाती है तो अपना अकेलापन उसे और भी भयावह लगता है.

उस दिन जब वह सांझ ढले घर लौटी तो देखा कि लैटर बौक्स में एक पत्र पड़ा था. उसे निकाल वह ताला खोल सोफे पर पसर गई थी और उसे पढ़ते ही उस का दिल तेजी से धड़कने लगा था. उस में लिखा था:

संध्याजी,

फोन पर आप से बात न हो सकी, इसलिए मैं पत्र लिखने को विवश हो गया. फिर मेरे हृदय में भावनाओं का जो ज्वार उमड़ रहा है उस की सच्ची अभिव्यक्ति पत्र द्वारा ही संभव है.

मात्र 4 वर्षों के वैवाहिक जीवन के बाद मेरी पत्नी का देहांत हो गया था. तब से अपनी एकमात्र संतान अपने बेटे की परवरिश अकेले ही करी. मन में कभी ब्याह का खयाल नहीं आया. लेकिन जीवन के इस मोड़ पर आप से मिला, तो इच्छा जाग उठी कि अपने जीवन में आप को शामिल कर सकूं. मैं ने अपने बेटे के बारबार आग्रह करने पर ही इस जीवनसंध्या में किसी साथी के विषय में सोचना शुरू किया है. अगले वर्ष नौकरी से रिटायर हो जाऊंगा तो अच्छीखासी पैंशन मिलेगी. इस के अलावा काफी चलअचल संपत्ति का भी मालिक हूं और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी पूर्णतया स्वस्थ और फिट हूं.

आजकल आप के विषय में ही सोचता रहता हूं. मैं जानता हूं कि दुनिया क्या कहेगी, परिवार क्या सोचेगा. मात्र इस सोच के चलते चुप्पी साधे हुए हूं, जबकि प्रसन्न रहना, हंसना और नीरस जिंदगी में बहार लाना कोई पाप नहीं है.

-शेखर

संध्या ने पत्र बंद कर एक ओर सरका दिया था, लेकिन लिखने वाले ने अपनी भावनाओं को खुलेपन से व्यक्त किया था, इसलिए उस में संवेदना के तार झनझना उठे थे. रात में भोजन के बाद वह टीवी देखने में मगन थी कि मोबाइल बज उठा था. वह बोल उठी थी, ‘‘क्षमा कीजिएगा. आप जैसा सोचते हैं वैसा होना बिलकुल भी संभव नहीं है. मैं अपने जीवन में खुश और संतुष्ट हूं. मैं अकेली नहीं हूं, मेरा भरापूरा परिवार है,’’ इतना कह कर उस ने फोन काट दिया था और टीवी बंद कर बिस्तर पर लेट गई थी. काफी देर तक वह जागती रही फिर न जाने कब उस की छटपटाहट को निद्रा ने दबोच लिया था. अगले दिन रोज की तरह औफिस के काम को तत्परता से निबटा वह सांझ ढले घर के लिए निकलने को ही थी कि अपने सामने एकाएक उपस्थित हो गए शख्स को देख चौंक गई थी.

‘‘आप?’’

‘‘हां मैं, मुझे आना ही पड़ा. आप को अचानक क्या हो गया? पहले ‘हां’ और फिर एकदम चुप्पी साध लेना. आप ने स्वयं ही तो पहले मौन स्वीकृति दी थी.’’

संध्या नजरें नहीं मिला पा रही थी. फिर भी बोली थी, ‘‘मुझ से भूल हो गई थी. यह सब इस उम्र में अच्छा नहीं. मुझे घर जल्दी पहुंचना है.’’ उस के शब्द इस के बाद गले में अटक कर रह गए थे.

‘‘आप क्यों संदेहों, आशंकाओं से घिर कर अपनेआप को आहत कर रही हैं?’’

‘‘प्लीज मुझे किसी रिश्ते, संबंध के दलदल में नहीं फंसना है,’’ संध्या झुंझला उठी थी.

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घर वापस आ कर वह निढाल सी सोफे पर बैठ गई थी. चाय पीने की इच्छा तो थी, किंतु बनाने का मन नहीं कर रहा था. वह सोच रही थी कि जीवन के शून्याकाश में एकाकी तारे जैसी स्थिति है उस की. वैसे जीवन में आए एकाकीपन के कष्टों की धूप उस के लावण्य को झुलसा नहीं सकी थी. एक दिन औफिस की एक पार्टी के दौरान संध्या ने अपने लंबे बाल खुले रख छोड़े थे, जिन्हें देख उस की सहकर्मी सखियां हैरान हो गई थीं. उस के नित्यप्रति बंधे जूड़े से उन्मुक्त लंबे बाल जो कंधों पर बिखरे थे. उन्हें देख कर एक बोली थी, ‘‘ये आप के बाल हैं या लहराताबलखाता झरना. संध्याजी, आप अपनी उम्र से छोटी और स्मार्ट दिखती हैं. शारीरिक रूप से भी आप बिलकुल फिट हैं.’’

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