44 की उम्र में दूसरी बार मां बनीं शिल्पा शेट्टी, हटकर है बेटी का नाम

शिल्पा शेट्टी ने महाशिवरात्री के मौके पर एक गुड न्यूज दी है. दरअसल, शिल्पा (Shilpa Shetty) और उनके राज कुंद्रा (Raj Kundra) दूसरी बार माता-पिता बने हैं. 15 फरवरी को दोनों की बेटी का जन्म हुआ है और शिल्पा (Shilpa Shetty) ने खुद इसकी जानकारी सोशल मीडिया के ज़रिए दी है. शिल्पा ने बेटी की फ़ोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘ओम गणेशाय नम:, हमारी प्राथर्नाओं का  जवाब मिल गया है. हमें ये बताते हुए खुशी हो रही है कि लिटिल एंजेल ने हमारे घर पर कदम रखा है. समीषा शेट्टी कुंद्रा. समीषा ने 15 फरवरी 2020 को जन्म लिया. घर में जूनियर एसएसके आ गई हैं.’

सेरोगेसी से शिल्पा बनी हैं मां

शिल्पा के इस पोस्ट पर उनकी करीबी दोस्त, मशहूर कोरियोग्राफर और निर्देशक फराह खान (Farah Khan) ने सबसे पहले इस पोस्ट पर कमेंट किया. फराह के इस कमेंट से लग रहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी पहले से ही थी. फराह ने कमेंट में लिखा- ‘भगवान जी आपका शुक्रिया, अब मैं इससे ज्यादा इसे सीक्रेट नहीं रख सकती थी.’  हालांकि शिल्पा ने जो फोटो शेयर की है उसमें बच्ची का चेहरा नजर नहीं आ रहा है. लेकिन शिल्पा को फैन्स और बॉलीवुड सेलेब्स सभी बधाई दे रहे हैं. शिल्पा की बेटी सेरोगेसी के जरिए हुई है.

 

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||Om Shri Ganeshaya Namah|| Our prayers have been answered with a miracle… With gratitude in our hearts, we are thrilled to announce the arrival of our little Angel, ???????? ?????? ??????? Born: February 15, 2020 Junior SSK in the house? ‘Sa’ in Sanskrit is “to have”, and ‘Misha’ in Russian stands for “someone like God”. You personify this name – our Goddess Laxmi, and complete our family. ⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀ ⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀ ⠀⠀⠀⠀⠀⠀ ~ Please bestow our angel with all your love and blessings??❤ ~ Ecstatic parents: Raj and Shilpa Shetty Kundra Overjoyed brother: Viaan-Raj Kundra . . . . . . . . . #SamishaShettyKundra? #gratitude #blessed #MahaShivratri #daughter #family #love

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शिल्पा का एक बेटा भी है

शिल्पा शेट्टी का एक बेटा भी है जिसका नाम वियान है. वियान की उम्र सात साल है. शिल्पा सोशल मीडिया पर वियान के साथ अक्सर फोटोज शेयर करती रहती हैं. इसके साथ ही वह कई बार बेटे वियान के साथ पार्टी करती हुई भी नजर आती हैं.

बता दें कि शिल्पा (Shilpa Shetty) और राज ने वर्ष 2009 में शादी की थी. 2012 में शिल्पा ने पहले बच्चे (बेटा वियान) को जन्म दिया था. शिल्पा की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो दलित की वह बॉलीवुड मैं वापसी कर रही हैं. उनकी 2 फिल्में निकम्मा और हंगामा 2 रिलीज़ होने वाली हैं.

Bhoot Part One: फिल्म देखने से पहले यहां पढ़ें विकी कौशल की ‘भूत’ का Review

रेटिंगः ढाई स्टार    

निर्माताः धर्मा प्रोडक्शंस

निर्देशकः भानु प्रताप सिंह

कलाकारः विक्की कौशल, सिद्धांत कपूर, भूमि पेडणेकर, आशुतोष राणा व अन्य.

अवधिः एक घंटा 54 मिनट

लंबे समय के अंतराल के बाद बतौर निर्माता करण जोहर लोगों को डराने के लिए हौरर फिल्म‘‘ भूत पार्ट वनः द हंटेड शिप’’ लेकर आए हैं, जिसके निर्देशक भानुप्रताप सिंह हैं. मगर निर्माता निर्देशक इस सच को नजरंदाज कर गए कि किसी भी इंसान को हंसाना कठिन मगर डराना बहुत आसान है. इसके बावजूद फिल्म को देखते समय दर्शक डर के मारे खुद को सीट से चिपका कर नही रखता.

कहानीः

यह कहानी है मर्चेंट नेवी में काम करने वाले युवक पृथ्वी (विक्की कौशल) की, जो कि अपनी प्रेमिका सपना (भूमि पेडणेकर) को भगाकर उससे कोर्ट मैरिज कर लेते हैं और उनकी बेटी मेघा हो जाती है. पर एक हादसे में मेघा व पत्नी की मौत हो जाती है. उसके बाद वह मर्चेंट नेवी से स्वेच्छा से अवकाश लेकर डी जी शिपिंग में नौकरी करने लगते हैं. वह अभी तक पत्नी व बेटी को खोने के गम से उबरे नहीं है, मगर लोगों के सामने न दिखाते हैं कि वह सब कुछ भूलकर सामान्य इंसान बन गए हैं. एक दिन पृथ्वी एक कंटेनर से अपनी जान पर खेलकर तमाम छोटी बच्चियों को उनकी तस्करी होने से बचाता है. अचानक एक दिन ‘सी बर्ड’ नामक एक हंटेड शिप मुंबई के जुहू समुद्री तट पर आकर लगता है. अब सर्वेयर होने की वजह से पृथ्वी इस शिप के अंदर जाते हैं और उनके साथ कुछ ऐसा हादसा होता है, जिसे देखकर दर्शक डरता है, मगर वह निडर हैं. पृथ्वी इस शिप के साथ छिपे रहस्य की तह तक पहुंचना चाहते हैं. इस प्रयास में इंटरवल के बाद एक अजीब सी कहानी सामने आती है.

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लेखन व निर्देशनः

इस फिल्म में भूत, प्रेम कहानी, प्रेमिका को उसके घर से भगाकर कोर्ट में शादी करना, नफरत की कहानी, बदले की कहानी, गुड़िया, ड्ग्स आदि की स्मगलिंग तस्करी, चाइल्ड ह्यूमन ट्रेफीकिंग, लाल रंग के कपड़े, चर्च, निडर हीरो, कुछ मंत्र आदि सारे मसाले मौजूद हैं. मगर इस बेसिर पैर की कहानी में डराने का जिम्मा ‘साउंड इफेक्ट’के हिस्से ही रहा. निर्देशक के अनुसार हौंटेड शिप के अंदर कई वर्षों से कोई नही है, मगर भूत मृत इंसान की आत्मा ने एक बच्ची को जरुर कैद करके रखा है, वह बच्ची जिंदा है और समय के साथ बड़ी भी होती गयी. तो फिर यह बच्च्यी शिप से बाहर क्यों नहीं निकल पायी? इसे भोजन पानी किसने दिया? क्या यह सब भूत ने दिया? हंटेड शिप के समुद्री तट पर पहुंचने पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होती है और लोग उसके पास नहीं जा सकते, फिर भी एक दंपति दस मंजिला शिप के उपर पहुंच कैसे जाता है? कहने का अर्थ यह कि फिल्म में अविश्वसनीय घटनाक्रमों की भरमार है. लेखक व निर्देशक ने पृथ्वी के अतीत की कहानी को भी बताने का प्रयास किया है, मगर पृथ्वी की अतीत की कहानी को वह हौरर जौनर के साथ जोड़ नही पाए. इंटरवल के बाद फिल्म एकदम विखर जाती है. हौरर का स्थान एक्शन ले लेता है. क्लायमेक्स में भी अनसुलझे सवालों के जवाब नही है.

जहां तक निर्देशन का सवाल है तो भानुप्रताप सिंह की यह पहली फिल्म है. उन्होने अपनी तरफ से बेहतर काम करने का प्रयास किया है. मगर कहानी में झोल और पटकथा की कमजोरी के चलते फिल्म आपेक्षित मापदंडों पर खरी नहीं उतरती. फिल्म के कुछ दृश्य टुकड़ो टुकड़ों में अच्छे बन पड़े हैं, मगर पूरी फिल्म के रूप में बात नहीं बनी. फिल्म की शुरूआत में वह दर्शकों को डराने में सफल रहते हैं, मगर जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, फिल्म पर से निर्देशक की पकड़़ ढीली होती जाती है और फिर यह हौरर की बजाय रहस्य व एक्शन वाली फिल्म बनकर रह जाती है.

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अभिनयः

जहां तक अभिनय का सवाल है तो पृथ्वी के किरदार में विक्की कौशल ने जानदार अभिनय किया है. भूमि पेडणेकर और आशुतोष राणा की प्रतिभा को जाया किया गया है. इसके अतिरिक्त एक भी कलाकार अपनी प्रतिभा से प्रभावित नहीं करता.

ट्रोलर्स को माहिरा शर्मा का करारा जवाब, आलिया जैसी ड्रेस पहनने की वजह से हुई थीं TROLL

‘बिग बॉस 13’ की कंटेस्टेंट रहीं माहिरा शर्मा (Mahira Sharma) जब बिग बौस में रहीं तब उनके और पारस छाबड़ा (Paras Chhabra) रिश्ते पर कई सवाल उठे थे. लेकिन अब बिग बौस से निकलने के बाद भी वो फिर से सवालों के घेरे में आ गईं जब आलिया भट्ट जैसी ड्रेस पहनने के कारण वो सोशल मीडिया पर ट्रोल्स के निशाने पर आ गई थीं. लेकिन अब उन्होंने अपने ट्रोलर्स को करारा जवाब देते हुए सबकी बोलती बंद कर दी है. आइए जानते हैं क्या कहा माहिरा ने…

ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब

माहिरा शर्मा (Mahira Sharma) ने ट्रोल्स को अब करारा जवाब दिया है. उन्होंने कहा, ‘मुझे समझ नहीं आता कि आखिर इसमें ट्रोल करने वाला क्या है? आलिया भट्ट एक यूथ आइकन हैं और अगर मैंने उनके जैसा ही आउटफिट और लुक ट्राई किया भी तो इसमें नुकसान वाला क्या है? बल्कि मैं तो इसे एक ‘इंस्पिरेशन’ कहूंगी.’ ‘जिन्हें ट्रोल करना है, करते रहें’

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Happy IIFA to me ?

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माहिरा ने कही ये बात

माहिरा (Mahira Sharma) ने आगे कहा, ‘जो लोग मुझे ट्रोल करना चाहते हैं वे ट्रोल करते रहे. दुख की बात है कि अब सोशल मीडिया तारीफ के बजाय गुस्सा और आलोचना करने का प्लैटफॉर्म बन गया है. यहां लोग सिर्फ गुस्सा निकालने आते हैं. सोशल मीडिया का इस्तेमाल पर गालियां देने और अपशब्द बोलने के लिए किया जाता है. उम्मीद करती हूं कि इसके लिए भी जल्द ही कोई फिल्टर लगे.’

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यूजर ने कही थी ये बात

दरअसल, बिग बॉस के ग्रैंड फिनाले में माहिरा शर्मा (Mahira Sharma) ने डेजी ब्लू कलर की एक ऑफ शोल्डर ड्रेस पहनी थी लेकिन लोगों का कहना है की माहिरा शर्मा (Mahira Sharma) की यह ड्रेस एक्ट्रेस आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की ड्रेस से कॉपी की हुई है. ड्रेस के अलावा उन्होंने आलिया की फिश टेल वाली हेयरस्टाइल भी कॉपी किया है. इस बात से वो ट्रोल्स के निशाने पर आ गई. एक यूजर ने लिखा गरीबों की आलिया भट्ट तो दूसरे ने लिखा सिर्फ ड्रेस.

बता दें, ‘बिग बॉस 13’ (Bigg Boss 13) को वह अपनी लाइफ का सबसे यादगार सफर मानती हैं. हालांकि उन्हें इस बात का भी दुख है कि फिनाले के नजदीक आकर वह इसकी रेस से बाहर हो गई थीं. माहिरा के अब तक के करियर की, तो उन्होंने ‘कुंडली भाग्य’ (Kundali Bhagya) के अलावा ‘नागिन 3′(Nagin3), ‘यारों का टशन’ और ‘बेपनाह प्यार’ में काम किया. माहिरा कई म्यूजिक वीडियो (Panjabi Music Video) में भी काम कर चुकी हैं.

तालमेल: भाग-2

आप मेरे रहने न रहने की परवाह मत करिए जीजाजी, बस जब फुरसत मिले ऋतु को कंपनीदे दिया करिए.’’

घर में वैसी ही महक थी जैसी कभी रचना की रसोई से आया करती थी. ऋतु डब्बा ले कर आई ही थी कि तभी घंटी बजी.

‘‘लगता है ड्राइवर आ गया.’’

गोपाल ने बढ़ कर दरवाजा खोला और ऋतु से डब्बा ले कर ड्राइवर को पकड़ा दिया.

‘‘खाने की खुशबू से मुझे भी भूख लग आई है ऋतु.’’

‘‘आप डाइनिंगटेबल के पास बैठिए, मैं अभी खाना ला रही हूं,’’ कह ऋतु ने फुरती से मेज पर खाना रख दिया. राई और जीरे से

बघारी अरहर की दाल और भुनवा आलू, लौकी का रायता.

‘‘आप परोसना शुरू करिए जीजाजी,’’ उस ने रसोई में से कहा, ‘‘मैं गरमगरम चपातियां ले कर आ रही हूं.’’

‘‘तुम भी आओ न,’’ गोपाल ने चपातियां रख कर वापस जाती ऋतु से कहा.

‘‘बस 1 और आप के लिए और 1 अपने लिए और चपाती बना कर अभी आई. मगर आप खाना ठंडा मत कीजिए.’’

‘‘तुम्हें यह कैसे मालूम कि मैं बस 2 ही चपातियां खाऊंगा?’’ गोपाल ने ऋतु के आने के बाद पूछा, ‘‘और भी तो मांग सकता हूं?’’

‘‘सवाल ही नहीं उठता. चावल के साथ आप 2 से ज्यादा चपातियां नहीं खाते और अरहर की दाल के साथ चावल खाने का मोह भी नहीं छोड़ सकते. मुझे सब पता है जीजाजी,’’ ऋतु ने कुछ इस अंदाज से कहा कि गोपालसिहर उठा. वाकई उस की पसंद के बारे में ऋतु को पता था. खाने में बिलकुल वही स्वाद था जैसा रचना के बनाए खाने में होता था. खाने के बाद रचना की ही तरह ऋतु ने अधभुनी सौंफ भी दी.

गोपाल ने कहना चाहा कि रचना के जाने के बाद पहली बार लगा है कि खाना खाया है, रोज तो जैसे जीने के लिए पेट भरता है. और जीना तो खैर है ही मनु के लिए, पर कह न पाया.

‘‘टीवी देखेंगे जीजाजी?’’

तो ऋतु को मेरी खाना खाने के बाद थोड़ी देर टीवी देखने की आदत का भी पता है, सोच गोपाल बोला, ‘‘अभी तो घर जाऊंगा साली साहिबा. स्वाद में ज्यादा खा लिया है. अत: नींद आ रही है.’’ हालांकि खाते ही चल पड़ना शिष्टाचार के विरुद्ध था, लेकिन न जाने क्यों उस ने ज्यादा ठहरना मुनासिब नहीं समझा.

‘‘आप अपनी नियमित खुराक से कभी ज्यादा कहां खाते हैं जीजाजी, मगर नींद आने वाली बात मानती हूं. कल भी आधी रात तक रोके रखा था हम ने आप को.’’

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‘‘तो फिर आज जाने की इजाजत है?’’

‘‘इस शर्त पर कि कल फिर आएंगे.’’

‘‘कल तो हैड औफिस यानी दिल्ली जा रहा हूं.’’

‘‘कितने दिनों के लिए?’’

‘‘1 सप्ताह तो लग ही जाएगा… आ कर फोन करूंगा.’’

‘‘फोन क्या करना स्टेशन से सीधे यहीं आ जाइएगा. सफर से आने के बाद पेट भर घर का खाना खा कर आप कुछ देर सोते हैं और फिर औफिस जाते हैं. आप बिना संकोच आ जाना. मैं तो हमेशा घर पर ही रहती हूं गोलू जीजाजी.’’

गोपाल चौंक पड़ा. रचना उसे गोलू कहती थी यह ऋतु को कैसे मालूम, लेकिन प्रत्यक्ष में उस की बात को अनसुना कर के वह विदा ले कर आ गया. घर आ कर भी वह इस बारे में सोचता रहा. रचना कभी भी कुंआरी ऋतु से अपने

पति के बारे में बात करने वाली नहीं थी. उस का और ऋतु का परिवार एक सरकारी आवासीय कालोनी के मकान में ऊपरनीचे रहता था. मनु तो ज्यादातर ऋतु की मम्मी के पास ही रहता था. रचना भी उस के औफिस जाने के बाद नीचे चली जाती थी और जिस रोज ऋतु के पापा उस के औफिस से लौटने के पहले आ जाते थे तो उसे अपने पास ही बरामदे में बैठा लेते थे, ‘‘यहीं बैठ जाओ न गोपाल बेटे, तुम्हारे बहाने हमें भी एक बार फिर चाय मिल जाएगी.’’

छुट्टी के रोज अकसर सब लोग पिकनिक पर या कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने जाते थे. कई बार रचना के यह कहने पर कि आंटीजी और ऋतु फलां फिल्म देखना चाह रही हैं, वह किराए पर वीसीआर ले आता था और ऋतु के घर वाले फिल्म देखने ऊपर आ जाते थे. ऋतु का आनाजाना तो खैर लगा ही रहता था. दोनों में थोड़ीबहुत नोकझोंक भी हो जाती थी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जिसे देख कर लगे कि

ऋतु उस में हद से ज्यादा दिलचस्पी ले रही है. तो फिर अब और वह भी शादी के बाद ऋतु ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है? माना कि राहुल व्यस्त है और नवविवाहिता ऋतु के साथ उतना समय नहीं बिता पा रहा जितना उसे बिताना चाहिए, लेकिन वह ऋतु की अवहेलना भी तो नहीं कर रहा? ऋतु को समझना होगा और वह भी बगैर उस से मिले.

गोपाल दिल्ली से 2 दिन बाद ही लौट आया, मगर उस ने ऋतु से संपर्क नहीं किया. 1 सप्ताह के बाद ऋतु को फोन किया.

‘‘आप कब आए जीजाजी?’’

‘‘कल रात को.’’

‘‘तो फिर आप घर क्यों नहीं आए? मैं ने कहा था न,’’ ऋतु ठुनकी.

‘‘रात के 11 बजे मैं सिवा अपने घर के कहीं और नहीं जाता,’’ उस ने रुखाई से कहा.

‘‘यह भी तो आप ही का घर है. अभी आप कहां हैं?’’

‘‘औफिस में.’’

‘‘वह क्यों? टूर से आने के बाद आराम नहीं किया?’’

‘‘रात भर कर तो लिया. अभी मैं एक मीटिंग में जा रहा हूं ऋतु. तुम से फिर बात करूंगा,’’ कह कर फोन बंद कर दिया.

शाम को ऋतु का फोन आया, मगर उस ने मोबाइल बजने दिया. कुछ देर के बाद फिर ऋतु ने फोन किया, तब भी उस ने बात नहीं की.मगर घर आने पर उस ने बात कर ली.

‘‘आप कौल क्यों रिसीव नहीं कर रहे थे जीजाजी?’’ ऋतु ने झुंझलाए स्वर में पूछा.

‘‘औफिस में काम छोड़ कर पर्सनल कौल रिसीव करना मुझे पसंद नहीं है.’’

‘‘आप अभी तक औफिस में हैं?’’

‘‘हां, दिल्ली जाने की वजह से काफी काम जमा हो गया है. उसे खत्म करने के लिए कई दिनों तक देर तक रुकना पड़ेगा.’’

‘‘खाने का क्या करेंगे?’’

‘‘भूख लगेगी तो यहीं मंगवा लेंगे नहीं तो घर जाते हुए कहीं खा लेंगे.’’

‘‘कहीं क्यों यहां आ जाओ न जीजाजी.’’

‘‘मेरे साथ और भी लोग रुके हुए हैं ऋतु और हम जब इकट्ठे काम करते हैं तो खाना भी इकट्ठे ही खाते हैं. अच्छा, अब मुझे काम करने दो, शुभ रात्रि.’’

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उस के बाद कई दिनों तक यही क्रम चला और फिर ऋतु का फोन आया कि चंडीगढ़ से पापा आए हुए हैं और आप से मिलना चाहते हैं. अंकल से मिलने का लोभ गोपाल संवरण न कर सका और शाम को उन से मिलने ऋतु के घर गया. कुछ देर के बाद ऋतु खाना बनाने रसोई में चली गई.

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समलैंगिकता पर जागरूकता फैलाएगी ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’- मानवी गगरू

डिजिटल सनसनी के तौर पर मशहूर मानवी गगरू (Maanvi Gagroo) ने बतैार हीरोईन फिल्म‘‘अमावस’’से कैरियर की शुरूआत की थी. पर बाद में वह ‘नो वन किल्ड जेसिका’ और‘पी के’ सहित कई फिल्मों में छोटे किरदार निभाते हुए नजर आयी. कुछ समय पहले मानवी गगरू फिल्म ‘‘उजड़ा चमन’’ में मेनलीड में नजर आयी थीं तो अब वह फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ में नजर आ रही हैं. आइए पेश है उनसे खास बातचीत…

बौलीवुड की खास परंपरा है कि आपने पहली फिल्म में जिस तरह के किरदार निभाते हैं,उसी तरह के किरदार बार बार दिए जाते हैं.जब आपने छोटे किरदार स्वीकार किए,तो आपको नहीं लगा था कि आगे भविष्य में आपके साथ ऐसा ही होगा?

-ऐसा ही हुआ मेरे साथ.‘नो वन किल्ड जेसिका’ और ‘पीके’ के बाद मुझे हीरोइन की बेस्ट फ्रेंड या हीरो की बहन जैसे ही किरदार मिले.इतना ही नही मुझे हर बार उसी तरह से अभिनय करने के लिए कहा गया.कुछ भी नया करने को नही मिल रहा था.तब कुछ दिन के लिए मैने औडीशन देना बंद कर दिया. कुछ दिन आराम किया.उसके बाद जब टीवीएस की वेंब फिल्म‘‘पिच्चर’में मुझे श्रेया का किरदार निभाने को मिला,तब सारे समीकरण बदले. इसकी एक वजह यह भी है कि  वेब की वजह से फिल्में बदली.अब कंटेंट आधारित फिल्में बन रही हैं. जहां रीयल किरदार चाहिए.मतलब अब वह स्टीरियोटाइप होने का डर नहीं है. उसके बाद मैने वेब की दुनिया में काफी बेहतर काम किया.इसके अलावा फिल्म‘‘उजड़ा चमन’’में मुझे अप्सरा का मेन लीड किरदार निभाने का अवसर मिला. अब फिल्म‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’में गॉगल त्रिपाठी का किरदार निभाया है,जो कि बहुत ही अलग तरह का है.

पर आपने ‘‘नो वन किल्ड जेसिका’’ में छोटा किरदार न निभाया होता,तो आज आपका कैरियर किसी अन्य पड़ाव पर होता?

-लेकिन उस वक्त मेरे पास इसी तरह के आफर आ रहे थे.मैं अपनी तरफ से दीपिका पादुकोण बनने के लिए पूरी कोषिष कर रही थी.लोगों ने मुझे सलाह दी कि घर पर बैठने की बनिस्बत कुछ काम करते हुए अपनी प्रतिभा से लोगों को परिचित कराते रहना चाहिए.लोग चाहते थे कि मैं एक हीरोईन की तरह दुबली पतली व जीरो फिगर में नजर आउं.जिसमें मैं कभी भी फिट नहीं हुई. मेरा षरीर ‘बिकनी बॉडी’का नही रहा.लोग ऐसी हीरोईन चाहते थे जो कि बिकनी और साड़ी दोनो में हॉट लगे.मैं तो अपना फेमेनिज्म का झंडा उठाकर चल रही थी.

तो क्या फेमीनिज्म का झंडा उठाना नुकसान कर गया आपको?

-जी हां! मैं तो बॉलीवुड में काम करते हुए स्विटजरलैंड में शिफॉन की साड़ी पहनकर हीरो के साथ डांस करना चाहती थी.पर किसी ने मुझे ऐसे किरदार नहीं दिए. पर मैंने कुछ सषक्त किरदार जरुर निभाए.

सिनेमा के बदलाव और डिजिटल मीडिया से आपको फायदा मिल रहा है?

-मिल रहा है.लोग मुझे वेब सेंषेषन मानते हैं.डिजिटल मीडिया के चलते हर कलाकार,लेखक,निर्देषक व तकनीषियन को भरपूर काम मिल रहा है. इस नए माध्यम में हर कोई नए नए प्रयोग कर रहा है. अब हर प्रोडक्शन हाउस व हर चैनल का एक डिजिटल विंग है.सभी भीड़ से अलग दिखने के प्रयास में लगे हुए हैं. परिणामतः बोल्ड चीजें वेब पर ज्यादा परोसी जा रही हैं. अब हम लोग आपस में मजाक करते हैं कि आज की तारीख में अगर आपके पास काम नहीं है,तो आप बहुत ही बुरे कलाकार हैं. अन्यथा इन दिनों सभी अति व्यस्त है.

किस वेब सीरीज ने आपको ज्यादा पापुलैरिटी दी?

-टीवीएस पिच्चर्स में श्रेया का किरदार निभाकर सबसे ज्यादा षोहरत पायी.यह किरदार सही तरीके सेे डिफाइन किया गया था.इस किरदार को निभाते हुए रचनात्मक इंसान के तौर पर मुझे बहुत मजा आया था. पापुलैरिटी के हिसाब से अगर देखे तो ‘फोर मोर शॉट्स’से मिली.इस वेब सीरीज को देखकर कई लड़कियां रोईं.कुछ ने मेरे पास आकर इसमें सिद्धि का किरदार निभाने के लिए मेरा धन्यवाद अदा किया.एक लड़की ने कहा कि उसकी पूरी जिंदगी सिद्धि की तरह गुजरी.उसको भी शायद कुछ स्किन का प्रॉब्लम था.

वेब /डिजिटल में आपको जो लोकप्रियता मिली,उससे फिल्मकारों की सोच बदली. आपके प्रति उनके नजरिए में बदलाव आया?

– ऐसा हुआ.वहीं अब मेरे पास भी च्वाॅइस है.अब मजबूरी में काम करने की मेरी जरुरत खत्म हो गयी. फिल्मेकर्स का नजरिया भी बदला है. अब यह अच्छा ट्रेंड है या बुरा ट्रेंड है.मुझे नहीं पता.पर अब फिल्मकार इस बात की जानकारी रखते है कि किस कलाकार के इंस्टाग्राम पर कितने फॉलोवर्स हैं. उसके आधार पर आपको काम मिलता है. मसलन-किसी किरदार के लिए दो कलाकार उपयुक्त है, दोनो का आडीशन भी बेहतर है,तब उनमे से किसी एक का चयन उनके इंस्टाग्राम फालोअवर्स के आधार पर किया जाता है.इंस्टाग्राम के फालोअवर्स की संख्या बढ़ने पर कलाकार को चर्चित माना जाता है.तो वहीं आप विश्वास नहीं करेंगे, बॉलीवुड में एक बहुत बड़ा सेक्शन है, जो वेब व डिजिटल को महत्व नही देता. यह ओल्ड स्कूल औफ बौलीवुड है. ऐसे लोग अपनी फिल्म के रिलीज के लिए अमेजौन और नेटफ्लिक्स नाम जानते हैं.

पर सवाल यह है कि इंस्टाग्राम के फालोवअर्स कितने जायज है और उनमें से कितने भारतीय हैं,जो कि आपकी फिल्म देखने जाएंगे?

– पहले की तरह आज भी टैलेंट के आधार पर बहुत कम लोगों को काम मिलता है.पहले बाक्स आफिस के आंकड़े देखकर स्टार माना जाता था. सुना है कि उसमें भी घपले हुआ करते थे.एक बार मैने एक निर्देषक से कह दिया था कि अच्छा आप अच्छी अदाकारा नही तलाश रहे हैं.
फिल्म के फ्लौप होने पर मत कहना कि यह बहुत बुरी कलाकार है. अच्छी षक्ल सूरत के साथ अभिनय प्रतिभा भी हो यह जरुरी नही है.
आप पहले टैलेंट को नजरअंदाज करते हैं,फिर रोते हो.

कभी आपके साथ ऐसा हुआ कि कोई फिल्म आपके हाथ से सिर्फ इसलिए चली गई?

-जी हां! दो बार हुआ था.पहले षरत जी के साथ फिल्म‘‘दम लगा के हाइशा’’ के लिए मेरी बात हुई थी.उन्होंने मुझसे वजन बढ़ाने के लिए कहा.मैंने उसे कहा कि अगर आप पक्का करते हो,कि मुझे फिल्म मिलेगी,तो मैं अपना वजन बढ़ा लूंगी.पर मैं वजन बढ़ा लूं, उसके बाद आप सौरी मत कह देना. तो बात खत्म हो गयी. इसी तरह फिल्म ‘‘बैंड बाजा बारात’’ के तमिल रीमेक के लिए मुझसे बात की गयी. पर बाद में वजन को लेकर बात नही बनी थी.

फिल्म‘‘उजड़ा चमन’’में मेन लीड करने के बाद आपने फिल्म‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’में दूसरे हीरो की बहन का किरदार क्या सोचकर स्वीकार किया?

-पहली बात तो इसमें न कोई हीरो है और न कोई हीरोईन. यह फिल्म दो समलैंगिक पुरूषों की प्रेम कहानी है. दूसरी बात मुझे इसकी स्क्रिप्ट व मेरा किरदार पसंद आया. मैने यह फिल्म ‘‘उजड़ा चमन’’ के प्रदर्शन से पहले ही साइन कर ली थी. मेरी राय में इस फिल्म के बाद लोग खुलकर ‘गे’ पर बात करेंगे.

फिल्म के अपने किरदार को कैसे परिभाषित करेंगी?

-मैने इसमें अमन की बहन गौगल त्रिपाठी का किरदार निभाया है, जो कि हमेशा चश्मा पहनकर रहती है. उसकी नजर में बिना शादी उसका कोई वजूद नही है.वह चाहती है कि किसी तरह उसकी शादी हो जाए. अब उसे इस बात से फर्क नही पड़ता कि किससे और कैसे शादी होती है. इस फिल्म में हर किरदार प्यार की बात कर रहा है.

फिल्म की कहानी होमोसेक्सुअलिटी को लेकर है.इसमें आपके कैरेक्टर की कितनी अहमियत है?

-गौगल अपने परिवार की इकलौती  सदस्य है, जो अपने समलैंगिक भाई अमन को उनको सपोर्ट करती है. बाकी किसी को भी होमोसेक्सुआलिटी समझ में नहीं आता. यह सभी अमन के खिलाफ हैं. पर वह भाई के साथ है. उसे लगता है कि मेरा भाई कुछ गलत तो नहीं कर रहा. प्यार ही तो कर रहा है.

अब होमोसेक्सुअलिटी को लेकर कानून बन गया है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे मंजूरी दे दी है. ऐसे मे अब इस फिल्म की कितनी अहमियत है?

-मेरी राय में कानून बदने के बाद बौलीवुड की यह पहली मेन स्ट्रीम फिल्म है, जिसकी आज ज्यादा जरुरत है. यह फिल्म लोगो के बीच जागरूकता पैदा करेगी. पर मैं यह दावा नही कर रही कि इस एक फिल्म से ही हर इंसान का माइंड सेट बदल जाएग.लेकिन लोगों के बीच इस पर बातचीत शुरू होगी. एक बेटा या बेटी अपने माता पिता से इस मुद्दे पर खुलकर बात कर सकेगा. दोस्तों व पड़ोसियों के बीच बात होगी. तो माता पिता को गे की स्वीकृति की लड़ाई है.

निजी जिंदगी में आपके लिए प्यार क्या है?

– मैंने लाइफ में प्यार तो बहुत सारा किया है. हर तरह का प्यार है. एक प्यार आपका आपके बेस्ट फ्रेंड के साथ होता है.एक प्यार मम्मी पापा के साथ. एक प्यार भाई व बहन के बीच होता है. मेरे लिए एक ही प्यार है.यही बात मुझे नीना गुप्ता जी ने भी सिखाया. यह सच है. पूरे संसार में एक ही प्यार है जो सच्चा है अनकंडीशनल है वह है माता पिता का बच्चों के प्रति या बच्चे को माता पिता के प्रति. क्योंकि अगर आप खून भी कर के अपने माता पिता से सच बयां करोगे तो भी वह स्वीकार कर लेंगे.उनका प्यार कम नहीं होगा. लेकिन बॉयफ्रेंड या बेस्ट फ्रेंड के साथ ऐसा नहीं होता हैं,वहां हमेशा एक षर्त रहती है.मसलन तुमने मुझे उपहार नहीं दिया? तुम उस लड़की से बात क्यों कर रहे हो? तुम ऐसा क्यों कर रहे हो ?तुम मुझे स्पेशल फील नहीं करवाते हो? वगैरह..वैसे सच यह है कि मेरा कोई ब्वौयफ्रेंड नही है.

सोशल मीडिया पर क्या लिखना पसंद करती है?

-जो भी अच्छे ख्याल आते हैं,वह सब लिख देती हूं. हमेशा पौजीटिव बातें ही करती हूं.निजी जीवन में मैं बहुत ज्यादा पौजीटिव हूं .

मैं सफलता और असफलता को ठग मानता हूं – विकी कौशल

फिल्म ‘मसान’ से हिंदी फिल्मों में चर्चित होने वाले विकी कौशल (Vicky Kaushal), एक्शन डायरेक्टर श्याम कौशल के बेटे है. बचपन से ही फ़िल्मी माहौल में पले और बड़े हुए विकी ने इंजिनीयरिंग की पढ़ाई पूरी की, पर उसे उस क्षेत्र में काम करने की रूचि नहीं थी. उसने थिएटर और नमित किशोर की एक्टिंग क्लासेज में ज्वाइन किया और फिल्मों की और बढ़े. पहले उसने कई छोटी-छोटी भूमिकाएं निभाई. फिल्म मसान उनके जीवन की टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसमें उनके अभिनय को प्रसंशकों ने काफी तारीफ की, पुरस्कार मिले. इसके बाद फिल्म उरी- द सर्जिकल स्ट्राइक में भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. आज वे सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे है और हर नयी प्रोजेक्ट में कुछ अलग ढूंढने की कोशिश कर रहे है. उनकी फिल्म भूत – हौंटेड शिप रिलीज पर है, उनसे मिलकर बात करना रोचक था, पेश है कुछ अंश.

सवाल-इस फिल्म को करने की खास वजह क्या है और भूत- प्रेत आदि पर कितना विश्वास रखते है?

जब मुझे इसकी स्क्रिप्ट सुनाई गयी थी तो मुझे लगा था कि ये कोई होरर रोमांटिक फिल्म होगी. मैं अधिकतर रात को कोई भी स्क्रिप्ट पढता हूं, मैंने इस स्क्रिप्ट को 3 घंटे तक पढ़ा और इतना डर गया था कि पानी लाने किचन तक नहीं गया. मैं किसी भी होरर फिल्म को अकेले नहीं, दोस्तों के साथ देखता हूं. इससे वह मजेदार हो जाती है. मैंने कुछ समय पहले एक भुतिया अंग्रेजी फिल्म ‘एनाबेल’ देखी थी, जो बहुत डरावनी थी. मैं पंजाब में अपने गाँव होशियारपुर जाने पर कई बार महसूस होता है कि भूत-प्रेत आसपास है, क्योंकि वहां लोग कई ऐसी कहानियां सुनाते है. इसके अलावा बचपन में ऐसा अनुभव होता था और डर भी लगता था. अब मैं विश्वास नहीं करता.

सवाल-आजकल आपकी फिल्में काफी सफल हो रही है, अलग-अलग फिल्मों में भी काम कर सफल हो रहे है, इसकी वजह क्या मानते है?

मेरी फिल्मों की सफलता को लोगों से सुनकर बहुत अच्छा लगता है. मेरा चरित्र ही सबको बहुत पसंद आता है. इससे मुझे और अच्छा करने की इच्छा होती है. असल में आज के दर्शक नयी चीजो को देखना पसंद करती है. उन्हें मेरा नया प्रयोग पसंद आता है और मेरे लिए ये जरुरी है. नए प्रयोग कर मुझे अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाना है.

सवाल-ऐसी फिल्मों को करने का अनुभव कैसा रहा?

सालों से होरर यहां कम बनती है, पर मुझे कुछ नया करने में पसंद आता है. मेरा कोई को- एक्टर इसमें नहीं है और शिप पर मैं अकेले ही चल रहा हूं, लेकिन एक भूत है जो मेरे साथ है. ऐसी फिल्मों के करने में एक सस्पेंस होता है, जिसमें रिएक्शन अंजान बने रहने की देना पड़ता है, जो मुश्किल होता है, इसलिए मैंने अपनी भूमिका को करने के बाद बार-बार परफोर्मेंस को देखा है.

सवाल-इंजीनियरिंग की पढाई के बाद फिल्मों में आना कैसे संभव हुआ?

मैं एक पढ़ाकू इंजीनियर हूं. काम मैं बहुत कुछ उस क्षेत्र में नहीं कर सकता था.  जॉब मिलने पर उसे नहीं किया, क्योंकि मुझे अभिनय करना था. स्टेज पर मैं एक्टर था. मैंने अपनी ख़ुशी को अपना प्रोफेशन बनाया.

सवाल-परिवार का सहयोग कितना रहा?

फ़िल्मी परिवार है, पर उनका कहना था कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी करूं. मैंने ग्रेजुएशन पूरा किया और अभिनय की बात कहने पर पिता ने एक्टर बनने का कारण पूछा, क्योंकि यहां कलाकार की  हार्डवर्क, धैर्य और लगन सबकी परीक्षा ली जाती है. यहाँ बहुत लोग है जो इसी क्षेत्र में काम करना चाहते है. मुझे मेरे पिता के सहयोग से आगे नहीं आना था, क्योंकि मेरा बोझ मैं उनपर लादना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने मेहनत की है और आज मैं अपने निर्णय से संतुष्ट हूं.

सवाल-स्टारडम को आप कितना एन्जॉय करते है?

मैं सफलता और असफलता को ठग मानता हूं. ये दर्शकों की देन है. इसे जितना आसानी से वह देती है उतना ही आसानी से उसे ले भी सकती है. ये काम पर निर्भर होता है. मैं अपनी जर्नी को सीरियसली लेता हूं. इससे ख़ुशी बहुत मिलती है. खुद से अधिक मैंने अपने माता-पिता की आँखों में ख़ुशी से आँखे नम होते हुए देखा है. मैंने अपने पिता को कहते हुए सुना है कि जब वे कामयाब हुए थे, तो उनके पिता उसे देखने के लिए जिन्दा नहीं थे, उन्होंने बेटे को संघर्ष करते हुए ही देखा था. मुझे इस बात की ख़ुशी है कि मुझे सफलता जल्दी मिली और मेरे माता-पिता भी इसके भागिदार बने.

सवाल-सफलता मिलने के बाद अपने आपको ग्राउंडेड रखना कितना मुश्किल होता है?

सुबह टाइम से न उठने पर मुझे जगाने के लिए माँ की बुलंद आवाज मुझे ग्राउंडेड रखने के लिए काफी होता है. वह अभी भी वैसा ही है. यह जरुरी है कि आप के आसपास रहने वाले आपको सच्चाई से जोड़े रखे, जो परिवार और दोस्त होते है. आज भी मैं अपने पुराने दोस्तों के साथ मिलकर समय बिताना पसंद करता हूं. हर फिल्म की पहली स्क्रीनिंग पर मेरे 15 कॉलेज के दोस्त पहली लाइन में आज भी बैठते है. असल जिंदगी में आने के लिए मैं अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताता हूं.

सवाल-आगे की योजनायें क्या है?

अभी उधम सिंह की शूटिंग ख़त्म हुई है. आगे और कई फिल्मों का काम चल रहा है. फिल्म तख़्त के बाद मानिक शॉ बनेगी. काम चलता रहता है.

सवाल-बायोपिक बनाना कितना मुश्किल होता है?

जिम्मेदारी बहुत होती है. जिसे लोग जानते है, उसके बारें में आप फ़िल्मी आज़ादी को नहीं ले  सकते. इसका दायरा लिमिट होता है. श्याम मानिक शॉ की बायोपिक बनाने की घोषणा करने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया मुझे मिलने लगी. इससे ये साबित होता है कि हर कोई इसे ठीक से करने की सलाह देते है और यही सबसे बड़ी चुनौती होती है.

अगर मुझे अपनी बेटी ही बनाये रखना था तो मुझे किसी की पत्नी क्यों बनने दिया?

इस लेख के माध्यम से आपको यह बताना चाहती हूं कि लड़की की शादी के बाद उसके मायके वालों की उसके वैवाहिक जीवन में क्या भूमिका होनी चाहिए. ये बताने से पहले मै आपको ये कहानी सुनाना चाहती हूँ .शायद बहुत से लोगों ने ये कहानी सुनी होगी. मेरी आप सबसे गुज़ारिश है की आप मेरा ये लेख पढ़े और इस पर अमल भी करें-

दोस्तों भारत में नियमित सास-बहू गाथा सुनना आम है और उनमें से अधिकांश एक बहू की तरफ से होती है.  जिसकी सास हस्तक्षेप करती है. इस रिश्ते के टूटने और इसे सुधारने के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है. यह किस्सा एक दामाद के बारे में है जिसे अपनी सास से परेशानी है और वह उसके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करती है.

“रोमा और शोभित एक दूसरे को बहुत चाहते थे .उन दोनों के परिवारों ने भी ख़ुशी-ख़ुशी उनकी इस चाहत पर शादी की मुहर  लगा दी .दोनों शादी के बाद सुखी जीवन बिता रहे थे. रोमा शोभित के साथ खुश तो थी पर उसे अपने ससुराल में एडजस्ट होने में बहुत प्रॉब्लम हो रही थी.वो अपनी सारी बातें अपनी माँ को बताती थी.आज साँस ने क्या कहा….आज नन्द ने क्या comment किया….यहाँ तक की अपने और शोभित की छोटी छोटी बातें भी अपनी माँ को बताती थी.और उसकी माँ उसको समझाने के बजाय बहुत emotional सपोर्ट करती थी. वो उसकी हर गलत बात में अपनी सहमती दिखाती थी.

शादी को अभी 3  महीने  ही हुए थे ,की रोमा और शोभित के बीच किसी बात को लेकर बहसा-बहसी हो गयी.रोमा ने तुरंत अपनी माँ को phone किया और रो रोकर सारी बातें अपनी माँ को बताई .उसकी माँ ने कहा-की तुम तुरंत अपना सामान पैक करो और मेरे पास आ जाओ. तब इनको सबक मिलेगा और फिर  ये तुमसे कभी भी ऊँची आवाज़ में बात करने की कोशिश नहीं करेंगे.

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रोमा ने ऐसा ही किया.सब उसको रोकते रह गए ,यहाँ तक की शोभित की आँखों में आंसू भी आ गए .पर रोमा कहाँ रुकने वाली थी उसके दिमाग में तो अपनी माँ के कहे हुए शब्द गूँज रहे थे.उसने तो शोभित को सबक सिखाने की ठान रखी थी.

अब रोमा अपने मायके में थी . रोमा शोभित को छोड़कर अपने मायके  आ तो  गयी थी पर न जाने क्यूँ उसे एक बेचैनी सी हो रही थी .जिस शोभित से बात किये बगैर वो रह नहीं सकती थी आज वो उसे छोड़ कर आ गयी थी.वो बार -बार अपना phone उठाती .शोभित का नंबर डायल करती और फिर phone काट देती.

शोभित भी रोमा के बगैर रह नहीं पा रहा था. वो बहुत दुखी था उसके इस कदम से क्यूंकि ये कोई पहली बार नहीं हुआ था ,शादी से पहले भी वो एक दूसरे से रूठते रहते थे पर एक दूसरे के बिना रह भी नहीं पाते थे .पर उसको समझ नहीं आ रहा था की आखिर ऐसा क्या हो गया की रोमा ने इतना बड़ा कदम उठा लिया.

उधर रोमा की माँ की कुछ दोस्तों ने उन्हें सलाह दी की एक बार इन सबकी पुलिस में रिपोर्ट करा दो फिर सब अपनी लिमिट में रहेंगे और दोबारा  हिम्मत नहीं करेंगे रोमा से तेज़ आवाज़ में बात करने की.

रोमा की माँ  ने रोमा को अपने साथ पुलिस स्टेशन चलने को कहा .रोमा भौचक्की रह गयी .उसने पूछा -किसलिए?रोमा की माँ ने कहा की तुम्हारे पति और ससुराल वालों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट करनी है .जब पुलिस स्टेशन आना पड़ेगा न तब उन्हें पता चलेगा .फिर वो अपनी लिमिट में रहेंगे .

रोमा का दिल बैठा जा रहा था वो सबकुछ छोड़ कर अपने शोभित के पास लौटना चाह रही थी.उसने अपनी माँ से कहा की माँ इसकी क्या जरूरत है?

उसकी माँ ने कहा –अगर तुझे नहीं चलना है तो ठीक है,फिर मत आना मेरे पास रोते हुए. देख क्या शोभित ने तुझे एक भी बार phone किया?उसे तेरी कोई पड़ी ही नहीं है.वो तो अपने माँ बाप के हाथों की कठपुतली है.तू इन लोगों को नहीं जानती .आज बहस हुई है कल को हाथ भी उठा सकते है.तू मेरी बेटी है .इतने नाजों से पाला है तुझको.मुझसे ज्यादा तेरा कोई ख्याल नहीं रखेगा.

रोमा न चाहते हुए भी  अपनी मां के साथ पुलिस स्टेशन जाने को तैयार हो गयी . रास्ते  भर रोमा का मन बेचैन था.पूरे रास्ते  उसका ध्यान सिर्फ अपने mobile पर था.वो सोच रही थी कि –काश !शोभित एक बार मुझे कॉल कर लो .मै तुम्हारे बिना नहीं रह सकती.

अब रोमा पुलिस स्टेशन पहुँच चुकी थी.उसकी दिल की धडकने बहुत तेज़ हो रही थी.वहां की ऑफिसर ने रोमा  से पूछा ….

क्या तुम्हारा पति तुम्हें मारता है ?

क्या वह तुमसे अपने मां- बाप से कुछ मांग कर लाने को कहता है ?

क्या वह तुम्हें खाने पहनने को नहीं देता ?

क्या तुम्हारे ससुराल वाले तुम्हे कुछ भला बुरा कहते हैं ?

क्या वह तुम्हारा ख्याल नहीं रखता?

इन सब सवालों का जवाब रोमा  ने नहीं में दिया !

इस पर रोमा  की मां बोली कि मेरी बेटी बहुत परेशान है !

इसके ससुराल वाले इसे  घर की हर छोटी-छोटी बातों पर टोका टोकी करते हैं .मोबाइल पर बात करने पर भी आपत्ति करते हैं. वह इसे टॉर्चर करते हैं !

पुलिस अफसर समझ गई! उसने रोमा  की मां से पूछा- क्या आप बेटी से दिन में 4-5 बार फोन पर बात करती  हैं?

मां ने कहा- हां, मैं अपनी बेटी का पराए घर में ध्यान तो रखूंगी न , कितने नाजों  से पाला है उसे!!

पुलिस अफसर सारा मामला समझ गई और फिर उसने पूछा -बहन जी क्या आप घर में दही जमातीं  हैं?

रोमा  की मां ने कहा -हां इसमें कौन सी बड़ी बात है!

अफसर बोली : तो जब आप दही जमाती हैं  तो बार-बार दही को उंगली मार कर जांचती है .

रोमा  की मां बोली: जी अगर मैं बार-बार उंगली मार करजाचूंगी   तो दही कैसे जमेगा? वो तो खराब हो जाएगा

तो बहन जी इस बात को समझिए शादी से पहले लड़की दूध थी! अब उसको जमकर दही बनना है ! आप बार-बार उंगली मारेगी तो  आपकी लड़की ससुराल में कैसे बसेगी  ?वहां के रहन-सहन को सीखेगी  कैसे? आप की लड़की ससुराल में परेशान नहीं है! आप की दखलअंदाजी ही उसके घर की परेशानी का कारण है!

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उसे उसके ससुराल में एडजस्ट होने की शिक्षा दीजिए ! उसको वहां के हिसाब से रचने -बसने दीजिए.

रोमा ये सब सुनकर पुलिस स्टेशन से बहार आ गयी .पीछे से उसकी माँ ने आकर कहा ,”चलो अन्दर रिपोर्ट नहीं लिखवानी है क्या? फिर मत आना मेरे …… ! ये शब्द पूरे होने से पहले ही रोमा ने कहा ,”नहीं आऊँगी  माँ… कभी नहीं आउंगी.

बस मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहती हूँ की ‘अगर मुझे अपनी लड़की ही बनाये रखना था तो मुझे किसी की पत्नी क्यों  बनने दिया’?

शायद रोमा की माँ ये बात समझ चुकी थी .रोमा की माँ रोमा को उसके ससुराल ले गयी . रोमा के दिल में एक सुकून का भाव था. अब वो अपने घर पहुँच चुकी थी.वो जाकर शोभित के गले लग गयी.शोभित बहुत खुश  था क्योंकि उसने जिसको दिल से चाहां था आज वो सही रूप में उसके पास थी….”

दोस्तों ये तो सिर्फ एक कहानी थी.शोभित और रोमा की तरह सभी लोग सौभाग्शाली नहीं होते हैं.

एक कहावत है कि “विवाह दो लोगों का मिलन नहीं है बल्कि दो परिवारों का मिलन  है”. जब एक लड़की  और एक लड़के  की शादी होती है, तो दोनों परिवारों के बीच एक नया बंधन बनता है. यह बंधन दूल्हा और दुल्हन दोनों के जीवन में नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है, जिसमें एक-दूसरे के प्रति प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी होती है. दुल्हन के लिए, यह उसके जीवन में  अपने साथी के साथ एक पूरी नई ज़िंदगी की शुरुआत है, जब वह दुल्हन अपने ससुराल की दहलीज़ पर  कदम रखती है न ,तब उसके नाज़ुक कंधो पर -एक बहू की – एक पत्नी की  और कुछ समय  बाद एक माँ की ज़िम्मेदारी आ जाती है. उसे एक साथ बहुत सारे रिश्ते निभाने होते है.

ऐसे में उस लड़की को उन रिश्तों की सबसे ज्यादा ज़रुरत होती है जो उसका आत्मविश्वास बढ़ाएं और उसको सही और गलत के बीच का फर्क बताये.

इसलिए आप न केवल  अपनी लड़की को  एक अच्छी पत्नी या बहू बनने के लिए सशक्त बनाएं, बल्कि एक समझदार दोस्त, एक साथी, एक अच्छी माँ के दायित्वों को भी समझाए.

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कर्वी फिगर वाली दुल्हन के लिए परफेक्ट है मोनालिसा का ये लुक

टीवी के पौपुलर रियलिटी शो बिग बौस से फैंस के बीच जगह बनाने वाली मोनालिसा अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं. चाहे उनकी सीरियल हो या उनकी फोटोज. हाल ही में मोनालीसा एक पंजाबी ब्राइड लुक में नजर आई, जिसमें वह खूबसूरत लग रही हैं. मोनालिसा का ब्राइडल लुक कर्वी गर्ल्स के लिए बेस्ट औप्शन है. आज हम आपको मोनालिसा के ब्राइडल लुक के बारे में बताएंगे, जिसे कोई भी लड़की अपनी शादी के लिए ट्राय कर सकती हैं. आइए आपको बताते हैं मोनालिसा के ब्राइडल लुक के बारे में….

1. मोनालिसा के पंजाबी दुल्हन ब्राइडल लुक करें ट्राय

अगर आप पंजाबी ब्राइड की तरह ब्राइडल लुक ट्राय करना चाहती हैं तो मोनालिसा का ये लुक आपके लिए परफेक्ट रहेगा. महरून कलर हर दुल्हन के लिए बेस्ट औप्शन होता है. अगर आप भी ब्राइडल लहंगे के लिए महरून कलर ट्राय करने की सोच रही हैं तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट है.

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2. मोनालिसा की ज्वैलरी है परफेक्ट

आजकल हैवी ज्वैलरी का फैशन पुराना हो गया है. हर कोई लाइट ज्वैलरी ट्राय कर रहा है. अगर आप भी लाइट ज्वैलरी, लेकिन अपने ब्राइडल लुक को हैवी दिखाना चाहती हैं तो मोनालिसा का ये ज्वैलरी औपशन आपके लिए परफेक्ट रहेगा. साथ ही हल्की ज्वैलरी के साथ सिंपल चूड़ा और कलीरे ट्राय करना न भूलें.

3. मेहंदी कलर का लहंगा करें ट्राय

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अगर आप अपने ब्राइडल लहंगे के लिए कुछ नया कलर ट्राय करना चाहते हैं तो मोनालिसा का ये मेहंदी कलर आपके लिए बेस्ट औप्शन है. साथ ही मेहंदी कलर के साथ गोल्डन शाइन इस लुक को रौयल लुक दे रहा है.

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4. मेहंदी कलर के लहंगे के साथ ट्राय करें मोनालिसा की ये ज्वैलरी


मेहंदी कलर के लहंगे के साथ मोनालिसा की ये कुन्दन की चोकर वाली ज्वैलरी आपके लिए बेस्ट औप्शन है. कुंदन की ज्वैलरी लोगों के बीच काफी पौपुलर है, जिसे आप ब्राइड लुक के साथ-साथ किसी शादी में ट्राय कर सकती हैं.

7 टिप्स: प्लास्टिक के डिब्बों को साफ करें ऐसे

आज के समय में ज्यादातर लोग स्टील और एल्युमिनियम के डिब्बों की जगह प्लास्टिक के डिब्बों का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ये डिब्बे काफी हल्के होते हैं और इनके टूटने का डर भी नहीं होता.

आजकल बाजार में ऐसे कंटेनर भी आ गए हैं जिन्हें माइक्रोवेव में भी रखा जा सकता है. इनमें खाना फ्रेश बना रहता है और साथ ही यह देखने में काफी आकर्षक भी लगता है. हालांकि प्लास्टिक के कंटेनर का इस्तेमाल बहुत लंबे समय तक नहीं करना चाहिए साथ ही इनकी सफाई का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए, वरना ये नुकसानदेह हो सकते हैं.

जब प्लास्ट‍िक का रंग बदलना शुरू हो जाए उसे बदल देना चाहिए. यह वो पहला संकेत है जिसे देखकर आपको ये समझ लेना चाहिए कि कंटेनर बदलने का समय हो गया है. इसके साथ ही अगर कंटेनर में रखा खाना कुछ ही देर में बदबू देने लगे या फिर कंटेनर से ही बदबू आने लगे तो उसे फेंक देना ही बेहतर होगा.

एक ओर जहां हर चीज की तरह प्लास्ट‍िक कंटेनर्स के इस्तेमाल की भी एक समय-सीमा होती है वहीं ये भी सुनिश्च‍ित करना जरूरी है कि आप उनकी सही से सफाई करें. अगर आप प्लास्ट‍िक के कंटेनर्स का इस्तेमाल कर रही हैं तो आपको उनकी देखरेख का सही तरीका भी पता होना चाहिए. ऐसा करने से आपके कंटेनर लंबे समय तक आपके साथ रहेंगे.

कई बार प्लास्टिक के डिब्बों को अच्छे से साफ न करने पर उनमें से बदबू आने लगती है और चिकनाहट बनी रह जाती है. ऐसे में यह जरूरी है कि आपको इन्हें साफ करने का सही तरीका पता हो.

1. बदबू दूर करने के लिए

अगर आपके प्लास्टिक के बौक्स से बदबू आ रही है तो यह घरेलू उपाय आपके लिए उपयोगी रहेगा. एक बाल्टी गर्म पानी ले लें और उसमें तीन चम्मच बेकिंग सोडा डाल दें. प्लास्टिक के इन बौक्स को बाल्टी में डाल दें. कुछ देर बाद इन्हें निकालकर साफ करें. आप चाहें तो बाल्टी के इस पानी में नींबू का रस और सिरका भी मिला सकती हैं.

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2. जिद्दी दाग

अगर आपके प्लास्टिक के डिब्बों पर जिद्दी दाग हैं तो उन्हें साफ करने के लिए क्लोरीन ब्लीच का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहेगा. दाग लगे डिब्बों को ब्लीच के इस मिश्रण में डालें. कुछ देर बाद इन्हें निकालकर साबुन से धो लें. दाग दूर हो जाएंगे.

3. रख-रखाव

अगर आप नहीं चाहतीं कि प्लास्टिक के डिब्बों से बदबू आए तो एक बात का ख्याल हमेशा रखें कि इनमें लंबे समय तक खाना न रखें. साथ ही हर कंटेनर माइक्रोवेव फ्रेंडली हो, यह जरूरी नहीं. ऐसे में बिना जांचें इन्हें माइक्रोवेव में न रखें.

अगर आपके पास भी प्‍लास्‍टिक के डिब्‍बे हैं तो आप भी उसे घरेलू सामग्रियों से साफ कर सकती हैं. यह बहुत ही सस्‍ता और टिकाऊ उपाय है.

इन घरेलू तरीकों को अपनाकर आप अपने प्लास्ट‍िक कंटेनर्स को लंबे समय तक खराब होने से बचा सकती हैं.

4. न्‍यूजपेपर

बड़े से न्‍यूजपेपर के टुकड़े को मोड़ कर प्‍लास्‍टिक कंटेनर में भर कर रख दीजिये. दूसरे दिन न्‍यूजपेपर को निकाल कर डिब्‍बे को गरम पानी से धो लीजिये. इससे उसमें से आने वाली महक खत्म हो जाएगी.

5. बेकिंग सोडा

आपको बेकिंग सोडा और पानी का पेस्‍ट बनाना होगा. फिर इससे प्‍लास्‍टिक कंटेनर को साफ करना होगा. ऐसा करने से जिद्दी दाग झट से छूट जाते हैं.

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6. नींबू

प्‍लास्‍टिक कंटेनर को अच्‍छी तरह से साफ करने और उसमें से बदबू दूर करने के लिये ताजे नींबू का प्रयोग करें. नींबू के छिलके से कंटेनर को रगड़ कर साफ करें. इससे दाग हल्‍का हो जाता है.

7. काफी

बदबूदार प्‍लास्‍टिक के डिब्‍बे को साफ करने के लिये उसमें काफी पाउडर चाहे तो सूखा या गीला कर के रखें. काफी पाउडर को कंटेनर में ही रहने दें. हो सके तो काफी को पूरे डिब्‍बे के अदंर रगड़ दें.

शिवांगी जोशी से ब्रेकअप के बाद ‘ये रिश्ता’ के सेट पर इस शख्स के साथ टाइम बिताते हैं मोहसिन, शेयर की PHOTOS

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है'(Yeh Rishta Kya Kehlata Hai)  में लव और कुश के कारण सिंघानिया परिवार में सीरियस माहौल चल रहा है, जो फैंस को काफी पसंद आ रहा है. वहीं परदे के पीछ की बात करें तो सीरियस माहौल से दूर नायरा (Shivangi Joshi) और कार्तिक (Mohsin Khan) अपनी मस्तियों के चलते सुर्खियां बटोर रहे हैं. हाल ही में ब्रेकअप के बाद जहां एक तरफ नायरा यानी शिवांगी (Shivangi Joshi) अपनी चाची सास के साथ औफस्क्रीन मस्ती करती हुई नजर आईं थी तो वहीं अब कार्तिक यानी मोहसिन (Mohsin Khan) भी अपने औफस्क्रीन बेटे के साथ मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं मोहसिन खान की लेटेस्ट फोटोज…

औनस्क्रीन बेटे संग की जमकर मस्ती

हाल ही मोहसिन खान (Mohsin Khan) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ फोटोज शेयर की हैं, जिससे वह  सीरियल के सेट पर खाली समय में अपने ऑनस्क्रीन बेटे कायरव यानी तन्मय ऋषि के साथ मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं. साथ ही इन फोटोज से साथ पता चल रहा है कि औफस्क्रीन बाप-बेटे की कैमिस्ट्री कितनी परफेक्ट है.

 

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नायरा भी आ चुकीं हैं मस्ती करते हुए नजर

 

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नायरा का किरदार अदा करने वाली एक्ट्रेस शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) की फोटोज सोशल मीडिया पर हाल ही में वायरल हुईं थीं, जिसमें वह त्रिशा के गुनहगारों की औनस्क्रीन मां यानी एक्ट्रेस शिल्पा एस रायजादा (Shilpa S Raizada) संग शो के सेट पर मस्ती करते हुए फोटोज क्लिक करवाती दिखीं थीं.

लव-कुश की सच्चाई आएगी नायरा के सामने

खबरों की मानें तो जल्द ही शो में नायरा (Shivangi Joshi) को ये पता चल जाएगा कि लव-कुश ने ही त्रिशा को मॉलेस्ट करने की कोशिश की थी, जिसके बाद नायरा लव और कुश को कानून के हवाले कर देगी, जिसके कारण कार्तिक (Mohsin Khan) नायरा (Shivangi Joshi) के खिलाफ होकर लव-कुश के साथ खड़ा हो जाएगा.

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बता दें, इन दिनों शो का लेटेस्ट ट्रेक फैंस को खुश नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण शो की टीआरपी भी गिरती जा रही है. अब देखना ये है कि क्या मेकर्स शो की टीआरपी को गिरता देख कोई नया ट्विस्ट लाएंगे.

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