7 टिप्स: मौसम में बदलाव के साथ भी टिका रहेगा मेकअप

सर्दियां विदा हो रही है. आने वाले इस मौसम में अगर आप बाहर कहीं घूमने जा रही हैं या किसी पार्टी में जा रही हैं तो आपको खास मेकअप टिप्स का आवश्यकता है. तो फिर देर किस बात की आइए जानें गालों पर ब्लश और लिपस्टिक लगाने से लेकर पूरे चेहरे के मेकअप टिप्स के बारें में. बेहतरीन मेकअप बेस के लिए प्राइमर का इस्तेमाल करने से पहले अपनी स्किन की क्लीजिंग, टोनिंग और मौइश्चराइजिंग करें.

1. दाग-धब्बों के लिए

कंसीलर के इस्तेमाल से स्किन के दाग-धब्बों को छिपाएं फिर स्पौन्ज से थोड़ा सा मैट क्ले फाउंडेशन लगाएं. गालों को ज्यादा उभार देने के लिए ब्रौन्जिंग पाउडर का इस्तेमाल करें लेकिन पहले गालों पर ब्लश लगाएं. खूबसूरत दिखने के लिए ब्लश केक लगाएं व अट्रैक्टिव लुक के लिए सेम ब्लश हाइलाइटिंग शेड से चीक बोन को हाइलाइट कर सकती हैं.

2. फेस के लिये

चेहरे को नेचुरल  लुक देने के लिए आप क्रीम बेस या लिक्विड बेस प्रोडक्ट का इस्तेमाल भी कर सकती हैं .जो इस मौसम के लिए उपर्युक्त हैं .इससे आपको मिलेगी नेचुरल लुक क्योंकि यह आपकी स्किन में आसानी से घुल मिल जाता है.

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3. आंखों के लिए

आंखों के मेकअप के लिए आईशैडो लगाने से पहले थोड़ा सा मैट आई बेस मेकअप लगायें. या फिर आंखों की खूबसूरती में चांर-चांद लगाने के लिए बोल्ड कलर का जेल पेन या आईलाइनर इस्तेमाल करें.वैसे आंखों की खूबसूरती के लिए आफ डिफरेंट कलर ट्राई कर सकती हैं. यदि आपको बोल्ड ब्लू या वाइब्रेंट कलर पसंद है तो यह आईलाइनर आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देंगे इन्हें जरूर प्रयोग करें.

4. आईलैशेस के लिए

अगर आप आईलैशेस को सुंदर दिखाना चाहते हैं तो इसके लिए कलर्ड मस्‍कारा का प्रयोग करें .क्योंकि लैशेस पर कलर को खूबसूरती  से अप्‍लाई करने के लिए सब से पहले बेस मस्कारा अप्लाई करना जरूरी होता है. चलिए इसको इस्तेमाल करना  न भूलें.आखिर में आंखों पर फाइबर लैश एक्सटेंशन मस्कारा लगाएं.

5. होठों के लिए

होंठ से डेड स्किन हटायें फिर लिपस्टिक और बाद में लिप प्राइमर लगाएं. अब होठों पर लिप डिफाइनर लगाने के बाद चमक के लिए शाइन लिप लिक्विड लगाएं. वैसे तो आप इस मौसम के लिए खासतौर पर आए सेटिंग फिनिश प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी कर सकती हैं.या फिर अप्लाई कीजिए पेस्टल, पिंक या पीच टोन को .

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6. इमीडिएट इफेक्ट के लिए

यदि आप इमीडिएट इफेक्ट चाहती हैं तो एक अच्छा हाइलाइटर एक अच्छी ऑप्शन है इसकी लगाने से आपके फेस पर तुरन्त ग्लो आएगी. अपने गालों , होंठों के ऊपर,  माथे के किनारों और अपने फेस की इनर लाइन पर हाइलाइटर का प्रयोग कर सकती हैं. यही नहीं अपने चेहरे को अधिक सुंदर दिखाने के लिए, आप टी ज़ोन पर भी  हाइलाइटर भी लगा सकती हैं.

7. मेकअप रिमूवल के लिए

रात को सोने से पहले मेकअप हटाने के लिए रूई के फाहे पर जोजोबा आयल या मेकअप रिमूवर की कुछ बूंदे लेकर पूरे चेहरे पर अच्छे से साफ करें.यह रोमछिद्रों में समाकर गहराई से स्किन को साफ करता है और इससे मेकअप भी आसानी से निकल जाता है.

8 टिप्स: सजाना है मुझे साजन को

हर धड़कते दिल की यही तमन्ना होती है कि अपने जीवनसाथी के साथ उन्मुक्त गगन की छांव में बेफिक्र मस्त उड़ान भरता रहे, उफनती नदी की लहरों में खुशियों की फुहारों का मजा लेता रहे. लेकिन शादी पूरी एक जिंदगी का लंबा सफर होता है. हनीमून पीरियड औफ होते ही प्यार में उड़ते प्रेमी जोड़े का सामना जब जिंदगी की सचाई से होता है तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे किसी ने उन के प्यार के पंछी के बेदर्दी से पर कतर दिए हों, लेकिन ऐसा नहीं है. अगर दंपती शादी के सही अर्थ यानी गृहस्थ जीवन के कर्म का ज्ञान रखें तो शादीशुदा जीवन में खुशियां ही खुशियां हैं. बस कुछ बातों को समझना है. सिर्फ समझाना ही नहीं व्यवहार में भी लाना जरूरी है.

शादी एक पार्टनरशिप

शादी एक 50-50 की पार्टनरशिप है, जहां दोनों के बीच आपसी समझदारी, एकदूसरे के प्रति विश्वास और सम्मान का होना निहायत जरूरी है. तभी वे बेझिझक और बेफिक्र हो कर अपने दिल की चाहत शेयर कर सकेंगे और एकदूसरे की जरूरत या तकलीफ, परेशानी को समझ सकेंगे.

कमल और समर आपस में बहुत अच्छे दोस्त हैं. दोनों बचपन से साथ रहे, साथ पढ़े और अब एक ही कंपनी में साथ जौब भी करते हैं. लेकिन घर हो या औफिस कमल को सभी लोग पसंद करते हैं. वह जहां भी जाता है वहां का माहौल खुशनुमा और सकारात्मक हो जाता है. सभी कमल को सफल और स्मार्ट मैन के रूप में जानते हैं.

उधर समर किसी पर भी अपने व्यक्तित्व की छाप नहीं छोड़ पाता. उस के अंदर ज्ञान बहुत है, फिर भी वह बहुत कम कार्यों में ही सफल हो पाता है, बहुत कम लोग उसे पसंद करते हैं.

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एक दिन एक सेमिनार के दौरान किसी ने कमल से उस की स्मार्टनैस का राज पूछा तो उस ने हंस कर उत्तर दिया, ‘‘मेरी पत्नी.’’

कमल का उत्तर चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन सचाई से परिपूर्ण है. विवाह के समय जो पति स्मार्ट, सुंदर और फिट दिखते हैं शादी के 1 साल बाद ही उन का चेहरा कांतिहीन और शरीर थुलथुल हो जाता है. थकावट इस कदर हावी रहती है कि औफिस से लौट कर मुंह से प्यार के दो बोल तक नहीं निकलते. बेचारे इस इंतजार में रहते हैं कि कब शनिवार या इतवार आए और वे चादर मुंह तक ओढ़ कर पलंग पर लेट जाएं और पूरा दिन कमरे से बाहर न निकलें. कुछ मैले कुरतेपाजामे में पूरा दिन बिस्तर पर लेटे रहते हैं, तो कुछ बदरंग से बरमूडा में किसी पार्क या मौल में टहलते दिखाई देते हैं.

यदि गहराई से विश्लेषण किया जाए तो इस परिवर्तन का कारण हो सकता है पत्नी. शादी से पहले जो पत्नी अपने भावी पति की ड्रैस, हेयरस्टाइल, फिट बौडी के प्रति सतर्क रहती थी, शादी के बाद इन सब बातों के प्रति एकदम उदासीन हो जाती है. कुछ प्यार जताने के चक्कर में पति को इतना खिलाती रहती हैं कि कमर का घेरा कई इंच बढ़ जाता है तो कुछ इस ओर कतई ध्यान ही नहीं देतीं. उन्हें देख कर ऐसा लगता है जैसे उन का शादी करने का एकमात्र ध्येय अब पूरा हो गया. अब तुम अपनी चिंता खुद करो हम अपनी करेंगे. ऐसे में इन सुझावों पर अमल कर के पत्नी ताउम्र पति को सुंदर, सजीला और स्मार्ट बना सकती है:

1. ड्रैस सैंस पर ध्यान दें

स्मार्ट दिखने के लिए सब से पहले जरूरी यह है कि आप पति के पहनावे पर ध्यान दें. इस का मतलब बेवजह टोकाटाकी या मीनमेख निकालने से कतई नहीं है. उसे बच्चों की तरह समझाने के बजाय अपने सुझाव अवश्य दे सकती हैं. मसलन, इस पैंट के साथ यह शर्ट और टाई मैच करेगी जो आप पर फबेगी भी खूब. फिर जब पति तैयार हो कर घर से निकले तो आप के प्रशंसा के दो बोल भी जादू का काम करेंगे और आप दोनों और पास आएंगे.

2. हमेशा अपडेट रखें

घरबाहर की बातों से पति को हमेशा अपडेट रखें. हो सकता है काम की अधिकता या व्यस्तता के कारण अखबार या टीवी न्यूज का कोई पहलू पति की नजर से छूट गया हो. ऐसे में आप अपने सामान्य ज्ञान से उसे अपडेट कर सकती हैं. घरपरिवार की छोटीबड़ी बातों की जानकारी पति को अवश्य देती रहें.

3. फिटनैस का रखें ध्यान

स्मार्ट दिखने के लिए बौडी का फिट होना जरूरी है. अत: पति को मौर्निंग वाक, जिम या फिर किसी अन्य व्यायाम के लिए प्रेरित करें. यदि आनाकानी करे तो खुद भी साथ जाने का प्रयास करें. कुछ व्यायाम तो कितनी भी व्यस्तता के बावजूद कुरसी पर भी बैठेबैठे किए जा सकते हैं.

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4. व्यवहार और सोच परिपक्व हो

कुछ पति शादी के बाद बचकाना व्यवहार करने लगते हैं. यदि आप का पति भी ऐसा करता है तो समय पर टोकना जरूरी होगा वरना वह स्वयं तो जगहंसाई का कारण बनेगा ही, लोग आप की भी खिल्ली उड़ाने से बाज नहीं आएंगे.

5. बौडी लैंग्वेज पर भी ध्यान दें

किसी भी व्यक्ति की बौडी लैंग्वेज ऐसी होनी चाहिए जो लोगों को इंप्रैस कर सके. यदि आप के पति की बौडी लैंग्वेज में कुछ कमी है तो पति का इस ओर ध्यान दिलाएं. स्मार्ट दिखने और कैरियर में सफलता के लिए पौजिटिव बौडी लैंग्वेज का होना बहुत जरूरी है.

6. खुश रहना भी जरूरी

एक प्यारी सी मुसकान आप के पति की पर्सनैलिटी में चार चांद लगा देगी. वह जहां भी जाएगा वहां का वातावरण खुशनुमा हो जाएगा. लोग उसे बहुत पसंद करेंगे. मगर यह तभी होगा जब आप स्वयं खुश रहेंगी और घर का माहौल सुंदर और सुखद होगा.

7. सफाई और हाइजीन जरूरी

आजकल कंपीटिशन का जमाना है. गंदे नाखून, अधपके खिचड़ी बाल, मुंह की दुर्गंध किसी को प्रभावित करने के बजाय उलटे आप के पति को दूर कर देगी. बालों को ढंग से ट्रिमिंग करवा कर डाई करना, नाखून काटना, माउथ फ्रैशनर का इस्तेमाल करने से पति के व्यक्तित्व में निखार आएगा.

8. दिल को दिल से जोड़ता है प्रेम

मैरिड लाइफ का गहना प्यार है. जब पतिपत्नी के बीच प्रेम की गंगा निरंतर प्रवाहित होती रहती है तब वे एकदूसरे में केवल अच्छाइयों को ही देखते हैं, बुराइयां उन्हें नजर नहीं आतीं. प्यार से भरे दो दिलों के लिए तो रोज ही वैलेंटाइन डे होता है. लेकिन अफसोस आज दांपत्य में प्रेम कम नफरत का भाव ज्यादा पनप रहा है. अत: जहां तक संभव हो इस नफरत को मिटाने का प्रयास करें.

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पड़ोसी के झगड़े में क्यों दें दखल

आ ए दिन पड़ोस से आती लड़ाईझगड़े की आवाजें सुरभि को परेशान कर देती थीं. उस दिन भी सुरभि झगड़ने की आवाजें सुन कर परेशान हो उठी. कुछ दिनों पहले ही एक जोड़ा पड़ोस के घर में किराए पर रहने आया था. 2-3 बार मुलाकात भी हुई थी सुरभि से उन की. वे पढ़ेलिखे सभ्य नागरिक जान पड़ते थे. दोनों की उम्र 30 वर्ष के आसपास थी. दोनों ही नौकरी करते थे. पत्नी होटल में रिसैप्शनिस्ट व पति मल्टीनैशनल कंपनी में मैनेजर था. सुरभि को विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि आवाजें उन के घर से ही आ रही हैं. परेशान हो कर उस ने शाम को अपने पति रचित से बात की तो उस ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए पड़ोसी होने के नाते कोई कदम उठाने की आवश्यकता जताई.

रात को सुरभि रचित के साथ उस कपल के घर जा पहुंची. वंशिका और गौरव नाम के ये पतिपत्नी किसी भी सामान्य जोड़े की तरह खुश दिख रहे थे. उन के विवाह को 2 वर्ष हुए थे और अभी कोई संतान नहीं थी. वंशिका जब चाय बनाने किचन में गई तो सुरभि ने बातचीत के दौरान उस से गौरव के साथ हो रही अनबन के विषय में जान लिया. इसी दौरान रचित ने गौरव को विश्वास में लेते हुए उस की वंशिका के प्रति शिकायतों का अंदाज लगा लिया. इस के बाद कुछ दिनों तक वे वंशिका तथा गौरव से बराबर मिलते रहे और उन के विश्वासपात्र बन उन के विषय में काफी कुछ जान गए.

इस बीच वे उन दोनों की बताई समस्याओं पर चर्चा करते रहते. वंशिका व गौरव द्वारा एकदूसरे की शिकायतों से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वास्तविक समस्या दोनों में आपसी समझ की है. छोटेछोटे मुद्दों को ले कर दोनों के बीच बहस छिड़ जाती और फिर उग्र होने लगते. दोनों अपनीअपनी जगह स्वयं को सही समझते हुए एकदूसरे को सुधरने की शिक्षा देने लगते. अपने को सही दिखाने के लिए दोनों गुस्से का सहारा लेते. दोनों में से कोई भी झगड़े को निबटाने का प्रयास नहीं करता था. गौरव अपने गुस्सैल स्वभाव के कारण जल्द ही आपा खो देता और फिर वंशिका पर हाथ उठा देता.

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सुरभि और रचित ने अपने कुछ परिचितों से पड़ोसी जोड़े की पहचान छिपाते हुए उन की समस्याओं पर बातचीत की और हल खोजने के लिए उन सभी के विचार जाने. सही मौका पा कर एक दिन उन दोनों ने वंशिका व गौरव को उन के बीच उपज रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए कुछ सुझाव दिए.

पहला व सब से महत्त्वपूर्ण सुझाव यह था कि घरेलू हिंसा से गौरव को पूरी तरह दूर रहना होगा. यदि वह अपने वैवाहिक जीवन को शांतिपूर्ण तरीके से जीना चाहता है और नहीं चाहता कि उस का और वंशिका का साथ कभी छूटे तो उसे गुस्सा आने पर हाथ उठाने की अपनी आदत को पूरी तरह से छोड़ना होगा. एक अन्य सुझाव के रूप में दोनों से कहा गया कि उन्हें अब अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकल कर एकदूसरे के अनुसार ढलने की कोशिश करनी होगी.

कुछ अन्य मुद्दों पर सुझाव

समस्या: गौरव जब कभी औफिस में देर तक काम कर घर लौटता तो वंशिका उसे घर के प्रति लापरवाह कहते हुए तंज कस दिया करती. ऐसे में गौरव बुरी तरह तिलमिला उठता.

सुझाव: प्रतियोगिता के इस युग में प्राइवेट कंपनियां एकदूसरे से आगे निकलने की होड़ में अपने कर्मचारियों पर दबाव डालती हैं. ऐसे में टारगेट पूरा करने के लिए वर्कर्स को औफिस में अतिरिक्त समय देना ही पड़ता है. गौरव का व्यस्त रहना उस के उत्तरदायित्व को दर्शाता है. लेकिन गौरव को यह नहीं भूलना चाहिए वह कंपनी का मैनेजर होने के साथसाथ एक पति भी है. उसे अब अपना समय वंशिका को भी देना चाहिए और निश्चित समय पर औफिस से घर आने का प्रयास करना चाहिए. मजबूरी में यदि रुकना पड़े तो इस की जानकारी विनम्र शब्दों में वंशिका को देनी चाहिए.

समस्या: वंशिका की शिकायत थी कि गौरव लोगों का हमदर्द बनता है, मित्रों की सहायता को सदैव तत्पर रहता है, लेकिन उस पर हमेशा रोब गांठता है. इतना ही नहीं कभीकभी वह दोस्तों व रिश्तेदारों के सामने भी वंशिका को बेइज्जत कर देता है. गौरव की अपमानित करने की आदत से हताश वंशिका यद्यपि सब के सामने तो उसे अपमानित नहीं करती थी, किंतु अकेले में गौरव से उस बात की शिकायत करते हुए वह उत्तेजित हो जाती. इस का परिणाम यह होता कि गौरव का गुस्सा बढ़ जाता और फिर वंशिका मारपीट की शिकार हो जाती.

सुझाव: विवाह के बाद पतिपत्नी दोनों को यह सोचना चाहिए कि एकदूसरे का सम्मान करना न केवल एक कर्तव्य है, अपितु यह समाज में उन की प्रतिष्ठा भी बढ़ाता है. इस के अलावा यह दोनों के बीच प्रेम उपजाने का कार्य भी करता है. गौरव जैसे पतियों को यह समझना होगा कि जो लोग गौरव पत्नी पर भड़कता देख उस समय चुप रहते हैं, वे बाद में उस के स्वभाव की निंदा अवश्य करते होंगे. दूसरों के सामने पत्नी पर गुस्सा दिखाने से कोई भी समस्या सुलझने के बजाय बढ़ती ही जाएगी. लोगों के सामने अपने रिश्ते का तमाशा बनाने से बेहतर है कि अकेले में अपने मन की बात जीवनसाथी के समक्ष रख हल खोजा जाए.

समस्या: वंशिका को जब गौरव अपने बौस या किसी कुलीग के दुर्व्यवहार से जुड़ी कोई बात बताता तो वंशिका बहुत कुछ पूछने लगती, जबकि गौरव सीमित शब्दों में अपनी बात समाप्त कर किसी भी प्रकार की चर्चा से दूर ही रहना चाहता था. ऐसे में वह वंशिका की बात बीच में काट देता और वहीं चर्चा खत्म करने को कहता. अगली बार जब गौरव ऐसी कोई समस्या बताने लगता तो वंशिका सुनने से इनकार कर देती.

सुझाव: कुछ लोग स्वभाव से कम बोलने वाले होते हैं, तो कुछ बहुत बोलते हैं. गौरव हर बात सीमित शब्दों में कहने वाला व्यक्ति था. वंशिका की प्रवृति हर बात की तह तक जाने व किसी भी विषय को समझ कर विस्तार से अपने विचार प्रकट करने की थी. स्वभाव के इस अंतर को स्वीकार कर दोनों को आपसी तालमेल विकसित करना चाहिए. गौरव द्वारा चर्चा को आगे न बढ़ाए जाने का एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है.

कभीकभी व्यक्ति केवल अपनी समस्या बता कर मन हलका करना चाहता है. गौरव भी ऐसे समय में केवल इतना ही चाहता था कि वंशिका उस की प्रौब्लम को समझे और उस की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगा पाए. वंशिका जजमैंटल हो जाए, ऐसा वह नहीं चाहता था.

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ऐसे में वंशिका को उस समय केवल गौरव की बात सुनने व किसी अन्य अवसर पर उस विषय में अपने विचार प्रकट करने की सलाह दी गई.

समस्या: गौरव वंशिका की कभी प्रशंसा नहीं करता था, जबकि वंशिका छोटी सी बात में भी उस का शुक्रिया अदा कर तारीफ के दो शब्द बोल ही देती थी. उस के हाथ के बने खाने में तो गौरव अकसर कमियां ही निकालता रहता था.

सुझाव: पार्टनर की कमियों को नजरअंदाज कर प्रशंसा करने के कई लाभ होते हैं. एक तो इस से एकदूसरे में गुणों को ढूंढ़ने की आदत पड़ती है और दूसरा इस से पार्टनर को खुशी मिलती है. इस प्रकार एकदूसरे को स्पैशल फील करवाने से प्रेम का बढ़ना तय होता है.

समस्या: वंशिका को तब बहुत खराब लगता था जब गौरव उस की सीधीसादी बात का गलत मतलब निकाल लेता था. इस संबंध में वंशिका ने एक घटना का जिक्र भी किया. गौरव को अपनी प्रमोशन पर औफिस के साथियों द्वारा दिए गए उपहारों में से वंशिका को एक मग का सैट बहुत सुंदर लगा था. उस में एक मग को पुरुष तो दूसरे को स्त्री का रूप दिया गया था. इस सैट को ‘ओपन माइंडेड कपल’ का नाम दिया गया था. जब वंशिका ने पूछा कि उसे वह मग सैट किस ने दिया, तो गौरव का जवाब था किसी दोस्त ने.

वंशिका द्वारा दोस्त का नाम पूछे जाने पर गौरव ने उस पर आरोप मढ़ दिया कि वह उसे संदेह की नजर से देख रही है और इसे किसी स्त्री द्वारा दिया हुआ गिफ्ट समझ रही है. जब वह उस के सभी मित्रों को जानती ही नहीं तो यह प्रश्न पूछना इस ओर ही इशारा कर रहा है.

सुझाव: पतिपत्नी का रिश्ता केवल विश्वास पर ही टिका रह सकता है. यदि वंशिका ने कभी भी गौरव पर उस के चरित्र को ले कर कोई आरोप नहीं लगाया तो गौरव को सोचना चाहिए कि उस के मन में गौरव के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है. उसे वंशिका की बातों का गलत अर्थ निकाल कर विश्वास की नींव को हिलाना नहीं चाहिए. उस समय गौरव को उपहार देने वाले मित्र का परिचय वंशिका को देना चाहिए था.

समस्या: कभीकभी गौरव औफिस से सीधा किसी काम या पार्टी अथवा फंक्शन में चला जाता. वंशिका को उस समय वह फोन करना भी जरूरी नहीं समझता था.

सुझाव: यदि वंशिका भी ऐसा ही करने लगे तो गौरव कैसा महसूस करेगा? इसी प्रश्न के माध्यम से वंशिका की मानसिक स्थिति गौरव के सामने रखी तो उस ने भी स्वीकार किया कि भविष्य में फोन या मैसेज द्वारा वंशिका को औफिस से कहीं और जाने की सूचना देना सही कदम होगा.

समस्या: गौरव को वंशिका से एक शिकायत यह थी कि उस की रखी गई वस्तुओं को वह उठा कर किसी अन्य जगह रख देती है, जिस से उसे अकसर असुविधा होती है.

सुझाव: वंशिका सफाईपसंद स्त्री थी, किंतु जरूरत से कुछ अधिक ही. गौरव की मेज पर सामान देख वह उसे अलमारी में रख देती और फिर गौरव ढूंढ़ता रह जाता. वंशिका को समझाया गया कि यदि मेज पर सामान बिखरा हो तो खराब लगेगा, किंतु करीने से लगा सामान सफाई का ही अंग समझा जाएगा.

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अंत में दोनों से कहा गया कि पतिपत्नी के विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है. विभिन्न विचारधाराएं अपने अलग अस्तित्व की पहचान हैं. वैवाहिक जीवन में अलगअलग सोच एकाकार हो जीवन में संपूर्णता ला सकती है. लेकिन जिस समय विचार टकराएं व दोनों में से किसी को गुस्सा आ रहा हो तो दूसरे को उस समय बहस को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए. यह सुझाव दोनों के लिए था.

अब सुरभि को पड़ोस के उस घर से पहले की तरह मारपीट और लड़ाईझगड़े की जगह हंसीठहाकों की आवाजें आती हैं, तो उन्हें सुन सुरभि और रचित मुसकरा देते हैं.

दुनियाभर में खुशियां बांटता डिलीवरी ब्वौय

आज की तारीख में तकरीबन 20 लाख नौजवान हैं जो डिलीवरी ब्वाय के रूप में काम कर रहे हैं.एक अनुमान के मुताबिक ये डिलीवरी ब्वाय हर दिन  50 लाख से ज्यादा डिस्पैच लोगों के घर पहुंचाते हैं. त्योहारों के आसपास इनकी तादाद बढ़कर 80 लाख से 1 करोड़ डिस्पैच तक हो जाती है.इनमें 15 से 20 लाख डिस्पैच देश के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में भी पहुंच रहे हैं.दीवाली,क्रिसमस नया साल और आजकल युवाओं के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय वैलेंटाइन डे जैसे मौकों में डिलीवरी ब्वाय का काम काफी ज्यादा बढ़ जाता है.डिलीवरी ब्वाय हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक बड़ा और महत्वपूर्ण चरित्र बनकर उभरा है.

ऐसा सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं हुआ बल्कि पूरी दुनिया में हुआ है.पूरी दुनिया में डिलीवरी ब्वाय बाजार और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है.आज हमारे तमाम महत्वपूर्ण मौके डिलीवरी ब्वाय की परर्फोमेंस के भरोसे हैं. इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के एक अध्ययन अनुमान के मुताबिक त्यौहारों की करीब 50 फीसदी खरीदारी अब ऑनलाइन होती है, जिसे घर तक पहुंचाने का काम यही डिलीवरी ब्वाय करते हैं.आज ये हमारी जीवनशैली का एक अभिन्न हिस्सा हैं. मुंबई में हर दिन 6 लाख से ज्यादा डिलीवरी मैन लोगों के घरों का बना बनाया गर्मागर्म खाना दफ्तरों तक पहुंचाते हैं.

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डिलीवरी ब्वाय वास्तव में अपनी पीट में अपने आकार से भी काफी बड़ा बैग बांधे मोटरसाइकिल में दौड़ता भागता वह नौजवान है जिसके  पैरों के नीचे 24 घंटे में से 12 से 16 घंटे तक बाइक होती है.वह भीड़ भरी सड़कों में ही नहीं कम भीड़ वाली गलियों में भी कहीं, जल्द से जल्द पहुंचने के लिए बेचैन दिखता है. डिलीवरी ब्वाय को आप गलियों में पता पूछते, लोगों की डोर बेल बजाते और फोन में बातें करते अपने इर्दगिर्द इन दिनों हर तरफ देख सकते हैं.वैसे हमारे जीवन में भले डिलीवरी ब्वाय अभी 5-7 सालों पहले या अधिकतम एक दशक के भीतर ही दस्तक दी हो, लेकिन दुनिया में यह पिछले 60 से 70 सालों से मौजूद है. हमारे यहां डिलीवरी ब्वाय की जो भूमिका इन दिनों है, अमरीका उस भूमिका को पिछली सदी के 60 के दशक में देख चुका है.दरअसल आधुनिक डिलीवरी ब्वाय के काम का तरीका और उसकी अवधारणा अमरीका से ही आयी है.

अमरीका में यह पेशा उन दिनों तेजी से उभरा जब डोमिनो पिज्जा ने अपने ग्राहकों को घर बैठे पिज्जा की डिलीवरी देनी शुरु की.हालांकि इस दावे पर कुछ विवाद भी हैं.अमरीका में ही तमाम कंपनियों ने डोमिनो पिज्जा के संस्थापक टॉम  मोनाघन के इस दावे का खंडन किया है कि वही इस चलन के सूत्रधार हैं.फिर भी तमाम दावों प्रतिदावों के बीच जो सबसे लोकप्रिय अवधारणा डिलीवरी ब्वाय की यही है कि 1960 में टॉम मोनाघन ने ही पहली बार बाजार को डिलीवरी ब्वाय का कंसेप्ट दिया.बहरहाल भारत में पिछली सदी के 80 के दशक के पहले तक डिलीवरी ब्वाय नहीं था.

दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में इक्का दुक्का खाने पीने की खानदानी दुकानों में जरूर ऐसा थोड़ा बहुत चलन था कि वह अपने पुराने और जाने पहचाने ग्राहकों को कभी कभार घर तक सामान पहुंचाने की सुविधा देते थे. लेकिन इसके लिए अलग से कोई पोस्ट नहीं थी जिसके जिम्मे यह काम होता हो. दुकानदार अपने यहां के किसी कामगार के जरिए ही यह सुविधा मुहैय्या कराया करते थे. मगर न तो यह नियमित रूप से बाजार का और न ही उनके व्यवसाय का हिस्सा था. साथ ही यह उस दौर के चलन का भी हिस्सा नहीं था. सही मायनों में भारत में डिलीवरी ब्वाय का कंसेप्ट 80 के दशक के उत्तरार्द्ध में आया जब महानगरों में ऐसे रेस्त्रां काफी बड़ी संख्या में खुल गए जिन्होंने ग्राहकों को उनके घरों तक खाना पहुंचाने की सुविधा शुरु की.लेकिन तब भी डिलीवरी ब्वाय शब्द न तो चलन में आया था और न ही बाजार इसके इस कदर अधीन हुआ था कि यह बाजार की गतिविधि का आईना बन सके.

वास्तव में हमारे यहां डिलीवरी ब्वाय शब्द 21वीं सदी की शुरुआत में में ही प्रचलन में आया.डिलीवरी ब्वाय को हमारी जिदंगी में सबसे जाना पहचाना शब्द बनाने का काम ई-शोपिंग कंपनियों, अमेजान फ्लिपकार्ट, मंत्रा और स्नैपडील ने किया. आज हमारी जीवनशैली में डिलीवरी ब्वाय एक ऐसा शब्द नहीं है कि उसका मतलब समझने के लिए हमें डिक्शनरी देखना पड़े या कि किसी से उसके बारे में कुछ पूछना पड़े. आज डिलीवरी ब्वाय हमारी जीवनशैली का एक बेहद परिचित किरदार है. इस क्षेत्र में रोजगार खोजने वाला भले बहुत मामूली ही पढ़ा हो लेकिन उसे को हर हाल में दो पहिया गाड़ी चलानी आनी चाहिए.इसके साथ ही उसे हिंदुस्तानी शहरों की भीड़ भरी सड़कों में इधर उधर से रास्ता बनाकर जल्द से जल्द अपनी मंजिल तक पहुंचने में महारत हासिल होनी चाहिए.

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. हालांकि आजकल हर पेशे में तमाम खूबियों की खोज होने लगी है और अगर सैद्धांतिक रूप से देखें तो हर प्रोफेशन इसी तरह की मांग भी अपने यहां आने वाले लोगों से करता है. लेकिन तमाम दूसरे क्षेत्रों की मांगे जहां सिर्फ सैद्धांतिक होती हैं,वहीं डिलीवरी ब्वाय के संबंध में मांगे प्रैक्टिकल होती हैं यानी उससे उनमें खरे उतरने की पूरी उम्मीद की जाती है. क्योंकि डिलीवरी ब्वाय एक ऐसा सौ तालों की चाबी वाला प्रोफेशन बनकर उभरा है,जिसमें हर क्षेत्र कहीं न कहीं आकर जुड़ता है. इस लिहाज से देखें तो डिलीवरी ब्वाय में वो तमाम गुण चाहिए जो किसी एक प्रोफेशन के लिए भी जरूरी हो सकते हैं और तमाम प्रोफेशन के साझे गुण भी हो सकते हैं.

डिलीवरी ब्वाय सिर्फ एक पेशा भर नहीं है बल्कि बदलती हुई दुनिया, बदलती हुई जीवनशैली और बदलती हुई अर्थव्यवस्था का साझा प्रतीक है.डिलीवरी ब्वाय एक साथ किसी समाज की तस्वीर भी पेश करता है और उस समाज के भविष्य की दिशा को भी इंगित करता है. यह दुनिया के सबसे ज्यादा लोकप्रिय टाप 10 पेशों में शुमार होता है.दुनिया में जितना सक्रिय कार्यबल है उसमें से तकरीबन 8-10 फीसदी इस प्रोफेशन से जुड़ा है. अगर डिलीवरी ब्वाय न हों तो आज की तारीख में पूरी दुनियावी अर्थव्यवस्था एक हफ्ते में बैठ जाए.क्योंकि 200 ट्रिलियन डालर का कारोबार हर साल डिलीवरी ब्वाय के कंधों पर ही निर्भर है. आर्थिक आंकड़ों के नजरिए से देखें तो डिलीवरी ब्वाय कंप्यूटर इंजीनियरों, डॉक्टरों, सिविल इंजीनियरों से कहीं ज्यादा बड़ी अर्थव्यवस्था को अपने कंधों पर ढो रहा है.

डिलीवरी ब्वाय दुनिया की चाल में यानी जीवनशैली की रफ्तार में सालाना तकरीबन 300 घंटों का इजाफा करते हैं. कहने का मतलब यह है कि अगर डिलीवरी ब्वाय न हों तो दुनिया में कामकाज की रफ्तार लगभग एक घंटे औसतन हर दिन कम हो जाए.डिलीवरी ब्वाय ने एक तरफ जहां हमारी अर्थव्यवस्था को रफ्तार दिया है, वहीं हमारी रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में थोड़ा चैन, थोड़ा सुकून लाया है.इनके चलते हर दिन 10 करोड़ से ज्यादा लोग अपनी भागदौड़ में आधे से एक घंटे की कटौती कर लेते हैं और सुकून से अपने परिवार के लोगों, दोस्तों आदि के साथ बिता पाते हैं.

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जानें क्या हैं मसल बिल्डिंग से जुड़े मिथ

लेखक- मेहा गुप्ता

मसल बिल्डिंग से स्त्री मर्दाना लगती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि मसल बिल्डिंग में टेस्टोस्टेरौन हारमोन का खास योगदान होता है, पर आप यह जान लें कि स्त्रियों में यह हारमोन पुरुषों की तुलना में काफी कम होता है. इस वजह से वे पुरुषों की तरह मसल नहीं बना सकती हैं तो मर्दाना लगने का तो प्रश्न ही नहीं उठता है.

लंबे समय तक जिम जाने से जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ती है?

सच तो यह है कि ऐक्सरसाइज और वेट लिफ्टिंग मसल्स को मजबूत बनाती है. मसल्स जौइंट्स को सहारा देने का काम करती हैं. हमारे शरीर के जोड़ों को मसल्स और लिगामैंट्स की जरूरत होती है. इस के बिना हड्डियां टूट सकती हैं. यही कारण है कि उम्र बढ़ने के साथ जरा सा गिरने या चोट लगने पर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए जिमिंग जोड़ों के दर्द की समस्या को घटाता है बढ़ाता नहीं.

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हैवी ऐक्सरसाइज से हैवी पीरियड्स फ्लो की समस्या बढ़ती है?

63% टौप फीमेल ऐथलीट्स का मानना है कि वर्कआउट से पेल्विक एरिया में रक्तप्रवाह बढ़ जाता है, जिस से पीरियड्स में होने वाले दर्द से राहत मिलती है. इस के अलावा इन दिनों कई बार डिप्रैशन या मूड स्विंग की समस्या देखी जाती है जैसाकि पहले ही कहा जा चुका है कि वर्कआउट से हारमोंस स्रावित होते हैं, जो मूड को अच्छा रखने में सहायक होते हैं. इस के अलावा नियमित ऐक्सरसाइज पीरियड्स को नियमित करती है. अगर आप को इन दिनों जिम में असुविधा महसूस हो तो वाकिंग की जा सकती है.

वर्कआउट से प्रजनन अंगों और प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है?

आधुनिक जीवनशैली के चलते हमारे भोजन में पेस्टिसाइड्स और दवाइयों का प्रयोग बढ़ गया है. कई बार स्त्रियों में 35 की उम्र के आसपास ऐस्ट्रोजन का स्राव बढ़ने से ब्रैस्ट कैंसर की समस्या जन्म लेती है. नियमित वर्कआउट ऐस्ट्रोजन के स्तर को कम करता है. ऐस्ट्रोजन की बढ़ी मात्रा ब्रैस्ट कैंसर के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है. यही नहीं ऐस्ट्रोजन के संतुलित रहने से ओव्युलेशन और प्रजनन क्षमता में वुद्धि होती है.

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ब्रेकफास्ट में बनाएं टेस्टी मक्के का परांठा

अक्सर सुबह का नाश्ता लोग हेल्दी बनाना और खाना पसंद करते है, जिसके लिए वह जल्दी में कार्नफ्लेक्स का ही नाश्ता करते हैं. लेकिन कार्नफ्लेक्स से आपका पेट नही भरता और न ही वह आपके टेस्ट के अनुसार होता है. इसीलिए आज हम आपको मक्के के पराठे की रेसिपी के बारे में बताएंगे. जिससे आपका नाश्ता हेल्दी और टेस्टी होगा.

हमें चाहिए…

1 कप (150 ग्राम) मक्का आटा

1 कप (150 ग्राम) गेहूं का आटा

1-2 टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ)हरा धनिया

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2-3 टेबल स्पून घी

1 (बारीक कटी हुई) हरी मिर्च

½ छोटी चम्मच जीरा

¾ छोटी चम्मच या स्वादानुसार नमक

1-2 छोटी चम्मच तेल

बनाने का तरीका

– मक्का आटे को प्याले में निकाल लीजिए साथ में इसमें गेहूं का आटा, 3/4 छोटी चम्मच नमक, 1/2 छोटी चम्मच जीरा, 1 हरी मिर्च बारीक कटी हुई, बारीक कटा हरा धनिया,  1-2 छोटी चम्मच तेल डाल दीजिए. सभी चीजों को अच्छे से मिक्स करते हुए मिलाएं.

-आटे में थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लीजिए. इतना आटा गूंथने के लिए 1 कप पानी का उपयोग हुआ है. गूंथे हुये आटे को ढककर 15-20 मिनिट के लिये रखिये, आटा सैट हो जायेगा.

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-20 मिनिट बाद आटे के सैट होने पर, हाथ पर थोड़ा सा घी लगाकर आटे को मसल लीजिए. गुंथे हुये आटे से थोड़ा सा आटा निकालिये और गोल लोई बना लीजिये (लोई को आप अपनी पसंद अनुसार छोटा या बड़ा जैसे चाहें बना सकते हैं).

-लोई को सूखे आटे में लपेटकर पतला परांठा बेल लीजिये, बेले हुये परांठे पर  थोड़ा सा घी लगाकर चारों और फैला दीजिए. अब इस पर थोड़ा सा सूखा आटा डालकर इसे भी चारों ओर फैला दीजिए.

-चपाती को पतले-पतले स्टैप्स में काट लीजिए. स्टैप्स को उठाकर एक के ऊपर एक करके रखते जाएं. अब इसे रोल करके लोई जैसा बना लीजिए. अब इसे सूखे आटे में लपेट कर गोल हल्का सा मोटा बेल कर तैयार कर लीजिए.

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-परांठा सिकने के लिए तवे को गरम कीजिये. थोड़ा घी डालकर चारों और फैलाइये. परांठे को तवे पर डालिये, परांठे को  मीडियम आंच पर सिकने दीजिए. परांठे के ऊपर की सतह का कलर डार्क होने पर परांठे को पलट दीजिये, और निचली सतह सिकने पर परांठे की ऊपर की सतह पर घी डालकर परांठे के ऊपर फैलाइये.

-परांठे को पलटिये और दूसरी सतह पर भी घी डालकर फैलाइये. परांठे को दोनों ओर से ब्राउन चित्त्ती आने तक सेकिये. सिका परांठा तवे से उतारकर प्लेट पर रखिये. सारे परांठे इसी प्रकार सेक कर तैयार कर लीजिए. इतने आटे से 4 परांठे बनकर तैयार हो जाते हैं. गरमा गरम मक्का परांठा बनकर तैयार है. परांठे को चटनी, अचार, दही या अपनी मनपसंद सब्जी के साथ परोसिये और खाइये.

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फेमिनिज्म का मतलब आदमियों को थप्पड़ लगाना या गालियां देना नहीं है- ताहिरा कश्यप खुराना

नाटकों का लेखन और निर्देशन से एक लेखिका के तौर पर पहचान बनाने के बाद ताहिरा कश्यप खुराना ने मुंबई पहुंचने के बाद कालेज में प्रोफेसर की हैसियत से पढ़ाना शुरू किया, तो वहीं लेखन भी करती रहीं. सबसे पहले ‘‘आई प्रॉमिस’’ नामक उपन्यास लिखा. उसके बाद कई कहानियां लिखीं. ‘कै्रकिंग द कोड़’और ‘माई जर्नी इन बौलीवुड’ जैसी किताबें लिखी. उन्होने रेडियो पर भी काम किया. फिर फिल्मों की पटकथाएं लिखना शुरू किया.

अपनी लिखी कहानी पर ‘‘ईरोज इंटरनेशनल’’ के लिए लघु फिल्म ‘‘टौफी’’का निर्देशन किया. अब वह लघु फिल्म ‘‘पिन्नी‘’ का लेखन व निर्देशन किया है, जो कि ‘‘जिन्दगी इन शॉर्ट एन्थोलॉजी’’ की छह फिल्मों में से एक हैं. यह फ्लिपकार्ट के डिजिटल स्क्रीन पर रिलीज हो रही है. फिल्म ‘पिन्नी’ में मुख्य किरदार नीना गुप्ता का है और उनके पति के किरदार में शिशिर शर्मा हैं.

सवाल- किताब लिखना और फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने में कितना फर्क महसूस करती हैं?

-किताब लिखना एक अलग बात है. उसमें आपके पास अपनी बात को कितने ही शब्दों या पन्ने में कहने की आजादी होती है. किताब लिखते समय हम सिर्फ एक कहानी पर फोकस नहीं करते,बल्कि हर किरदार की निजी जिंदगी, उसकी पृष्ठभूमि में भी उसकी जो छोटी-छोटी चीजें होती हें,उन पर भी ध्यान देते हैं. मसलन-किरदार कैसा खाना खाता हैं, उनकी आदतों की गहराई तक जा सकते हैं.

 

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He checks me out. I check him out. And we kiss…isliye merry Christmas ?? (with my skinnier half @ayushmannk )

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मगर फीचर फिल्म में हमें दो घंटे की समय सीमा के अंदर ही सब कुछ समाहित करना होता है. दो घंटे में आपको वह सब कुछ बताना है. ऐसे में फीचर फिल्म की पटकथा लिखते समय हम कहानी बताने के लिए बहुत ही छोटा क्रिस्पर जरिया अपनाते हैं. किताब में हमारे पास आजादी है. हम आराम से जितना चाहे लिखते रहें.

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सवाल- आपने पहले किताबें लिखी हैं. अब जब आप फिल्म की पटकथा लिखने बैठती होंगी,उस वक्त भी आपका दिमाग उसी हिसाब से दौड़ता होगा,तो उस पर विराम कैसे लगाती हैं?

-सच कहूं, तो मुझे लिखना बहुत पसंद है. मैंने कई अलग-अलग चीजें लिखी हैं. मैने किताब, उपन्यास,लघु कथाएं भी लिखी हैं. मैंने अपना अभी अमैजौन के लिए जो ब्राडकास्ट किया था, उसके एपीसोड लिखे हैं. वहीं फीचर फिल्म और लघु फिल्म के लिए स्क्रीनप्ले लिखा है. यह सभी अलग -अलग फौर्मेट है. इनमें सिर्फ एक ही सामानता है ‘लिखने के प्रति प्यार’. तो मुझे लगता है यह मेरे साथ एकदम ही नेचुरल तरीके से आता है. क्योंकि मुझे लिखना बहुत पसंद है. मैं हर मीडियम और उनकी जो बाउंड्री है, उसकी रिस्पेक्ट करती हूं. मुझे यह भी पता है कि जिस भी मीडियम में लिखना है, उसकी सीमा का आदर करते हुए मुझे अपनी कहानी को सही तरीके से बताना है. ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक वह पहुंच सके. मेरे अंदर यह बेंचमार्क रहते हैं कि यह करना या क्या करना है. उसी के हिसाब से अपने आप काम हो जाता है.

सवाल- आपके अंदर लेखन के प्रति प्यार कैसे उमड़ा?

-मैं लिख तो बचपन से ही रही हूं. कौलेज में मैंने नाटकों का लेखन व निर्देशन किया. फिर किताबें लिखी. पर कभी सोचा नहीं था कि यह मेरा कैरियर बन सकता है. मैं मध्यम वर्गीय परिवार से आती हूं. जहां मेरे माता पिता ने हमेशा काम किया है. तो मेरे घर के लिए फाइनेंशली स्टेबिलिटी बहुत जरूरी थी. मेरे दिमाग में था कि मुझे पैसे कमाने हैं. जबकि मेरा हमेशा से रुझान थिएटर और लेखन की तरफ ही था. पर लेखन से पैसे कमा सकते हैंं,ऐसा कभी नहीं लगा. मेरे अंदर डर था कि आखिर मैं लेखन से कितना कमा लूंगी. इसलिए मेरे दिमाग में था कि मुझे अपने आपको ग्राउंड करना है. उस ग्राउंडिंग के चक्कर में मैं एक ऐसी इंसान बन गई, जो मैं नहीं थी. मैं बहुत ज्यादा हार्ड वर्किंग हो गयी. जब मैने रेडियो पर काम किया, तो इतना अच्छा काम किया कि प्रोग्राम हेड के अवार्ड भी मिले. कौलेज में बतौर शिक्षक पढ़ाना शुरू किया, तो बाकी शिक्षकों व प्रिंसिपल से बहुत आदर सम्मान मिला.

मैं हमेशा एक दो साल के बाद नौकरी छोड़ देती थी. क्योंकि मुझे खुशी नहीं मिल रही थी. फिर बाद में मैंने एक फिलोसाफी को फॉलो किया. मैंने चैंटिंग शुरू की, जहां मुझसे कहा गया कि, ‘आप जो करना चाहते हैं करें. अपने ऊपर कभी भी शक मत करें. अपनी क्षमता पर, अपने ख्वाब पर आप बाधा ना डालें.’ जब मैंने अपने आप पर शक करना कम किया, लिखना शुरू किया. लघु फिल्म ‘पिन्नी’’की स्क्रिप्ट तो मैंने दो साल पहले लिखी थी. मेरे पास कई स्क्रिप्ट कब की लिखी हुई पड़ी हैं, क्योंकि लिखने का शौक था. किताब व उपन्यास लिखते लिखते मुझे स्क्रिप्ट नजर आने लगी. सब कुछ ‘लाइव’ होने लगा. जब मैंने सबसे पहले लघु फिल्म ‘टॉफी’ लिखी, जिसका निर्देशन भी किया. उसके बाद मैंने ‘पिन्नी’ लिखी, इसका भी निर्देशन किया. अब अपनी ही लिखी हुई एक फीचर फिल्म का निर्देशन करने जा रही हूं. ऐसे में अब मेरी चीजें दर्शकों को देखने को मिल रही हैं. जबकि मैं तो कई वर्षों से लिखती आयी हूं.

सवाल- लेखन के साथ अब आप निर्देशक बन गयी हैं. लेखक बहुत कुछ लिखना चाहता है. उसे अपने लिखे शब्दों से प्यार होता है. लेकिन निर्देशक की अपनी सीमाएं हो जाती हैं. ऐसे में सेट पर कौन हावी रहता है?

-मुझे लगता है कि मेरा जो थिएटर का बैकग्राउंड है, उससे मुझे बहुत मदद मिल रही है. मैंने थिएटर में नाटक लिखे व निर्देशित भी किए हैं. बतौर लेखक हम लिखते ही रहना चाहते हैं, पर बतौर निर्देशक मुझे पता है कि मैं सीन को खो नहीं सकती हूं. सिर्फ अपनी ईगो को सटिस्फाई करने के लिए मुझे कुछ चीजें काटने से खुद को नही रोकना है. एडीटिंग के वक्त मैं और भी ज्यादा लाचार हो जाती हूं. उस वक्त मैं सोच लेती हूं कि मेरी नजर में यह दृश्य बहुत अच्छा बना है, मगर जरुरी नही कि यह दृश्य पचास लोगों को पसंद आ जाए. तो मुझे यह भी देखना पड़ता है. जो लोग देखना चाहते हैं, मैं उस चीज को छोड़ देती हूं. मैं हमेशा एक दर्शक के नजरिए से सही निर्णय लेती हूं.

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सवाल- लघु फिल्म‘‘पिन्नी’’की कहानी का प्रेरणा स्रोत?

-‘‘इसकी प्रेरणा स्रोत तो मेरी सास यानी कि मेरे पति आयुष्मान खुराना की मां हैं. मेरी सासू मां पूरे परिवार को एक साथ जोड़कर रखती हैं. वह बहुत अच्छी फैट फ्री पिन्नी बनाती हैं. इस फिल्म की कथा के लिए मैंने उनसे प्रेरणा ली है, हालांकि कुछ फिक्शन भी जोड़ा है. मगर फिल्म के सुधा के किरदार में जो मिठास है, वह मेरी सास से आई है. इसमें रूढ़िवादिता को तोड़ने का मसला भी है. महिलाओं से जुड़े कई मुद्दों पर बात की है. नारीवाद पर भी कुछ कहने का प्रयास किया है.

सवाल- आपके लिए फेमिनिजम (नारीवाद) क्या है?

-मैने पहले ही कहा कि फेमिनिज्म मेरे लिए इक्वालिटी समानता है. मेरे लिए यह नहीं है कि हम महिलाएं बेहतरीन हैं. मेरे लिए फेमिनिज्म के मायने पुरूषों आदमियों को थप्पड़ लगाना या उन्हें गालियां देना बिलकुल भी नहीं है. मेरे लिए फेमिनिज्म (नारीवाद) का मतलब है कि आप उतनी ही अपॉर्चुनिटी, उतने ही प्यार से हर काहनी देखना चाहें.

आजकल हम देखें तो 10 में से साढ़े नौ कहानियां पुरूषों की होती है. मैं चाहती हूं कि हम और कहानियां देखें. ऐसा नहीं है कि औरत की कहानी होगी, तो उसमें ज्यादा ट्रेजेडी होगी. औरत फनी भी हो सकती है. नारी प्रधान कहानी में भी हंसी मजाक हो सकता है. मैं चाहती हूं कि हम लोग औरतों के यह सारे पहलुओं को देखें.

सवाल- आप दो लघु फिल्में निर्देशित कर चुकी हैं. क्या अनुभव रहे? लेखन व निर्देशन में से किसमें   ज्यादा सैटिस्फैक्शन मिला?

-मुझे तो दोनों में सटिस्फैक्शन मिला. ऐसा नहीं है कि लिखने से ज्यादा निर्देशन में सटिस्फैक्शन मिल रहा है. जिस दिन मैं पांच पन्ने लिखती हूं, उस दिन मैं इतना खुश होती हूं कि मुझे अहसास होता है कि लेखन में ही सबसे अधिक सटिस्फैक्शन है. पर मुझे लगता है कि जो मैने लिखा है, उस पर अगर मैं कुछ निर्देशित कर लेती हूं, तो उससे मुझे और ज्यादा खुशी मिलती है. इस तरह मुझे दोनों से ही बराबर खुशी मिलती है. संतुष्टि मिलती है.

 

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Happy Diwali from our family to yours ❤️ #chandigarhdiwali

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सवाल- जब आप लिखने बैठती हैं, तो कौन सी बात आपको लिखने के लिए प्रेरित करती हैं?आपके निजी अनुभव या कोई घटनाक्रम. . ?

-इसमें दो बाते हैं. बतौर लेखक हमारी लेखन की शुरुआत तो निजी अनुभवों के आधार पर ही होती है. फिर हम अनुभवों से प्रेरणा लेने लग जाते हैं कि आपके साथ क्या हो रहा है. तो मेरी जिंदगी में भी दोनों ही चीजों का मिश्रण है. काफी चीजें निजी अनुभव की हैं, तो वहीं काफी चीजें मैंने होते हुए भी देखा है. मुझे लगता है कि कान और आंखें दोनों चैकन्ना हो जाते हैं. क्योंकि जब आप अखबार में कुछ देखते हैं या आपके दोस्त के साथ कुछ घटित होता है, तो मैं सोचती हूं कि हां यह चीज तो मैं अपनी कहानी में डाल सकती हूं. किस संवाद को मैं अपनी कहानी का हिस्सा बना सकती हूं, इस नजरिए से सोचना शुरू कर देती हूं. हम इसी नजरिए से अपनी जिंदगी को देखने लग जाते हैं.

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BIGG BOSS: रश्मि से लेकर हिना खान तक गेम हारकर भी जीत गए ये कंटेस्टेंट, विनर्स को ऐसे दी मात

बिग बॉस भारतीय टेलीविजन पर सबसे प्रसिद्ध रियलिटी शो में से एक है. बिग बॉस के सात अलग-अलग भाषाओं में सात संस्करण हैं. Bigg Boss रियलिटी शो ने 2006 में हिंदी में डेब्यू किया, अब तक बिग बॉस के 13 सीज़न आ चुके हैं. इस शो में भाग लेने वाले कई प्रतियोगी रातोंरात फेमस होकर स्टार बन गए. शो बिग बॉस ने कई महत्वाकांक्षी अभिनेताओं और प्रतियोगियों के करियर को बनाया है. आइए हम कुछ बिग बौस के प्रतियोगियों के बारे में पता करते हैं, जिन्होंने बिग बॉस के विजेताओं से अधिक प्रसिद्धि और सफलता अर्जित की.

1-Bigg Boss Season 1

चलिए बात करते हैं Bigg Boss के सीजन 1 की. वैसे तो इस सीजन के विनर राहुल राय थे लेकिन लोगों को ये निर्णय काफी निराशा जनक लगा था. इस सीजन की 1 st runnerup रहीं कैरोल ग्रसीअस और 2 nd runnerup रहे रवि किशन को लोगों ने ज्यादा सराहा था. इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की

अमित साध

अमित साध बिग बॉस सीज़न 1 के प्रतियोगी थे, जिसे 2006 में अरशद वारसी ने होस्ट किया था. आज वे बॉलीवुड के चमकते अभिनेताओं में से एक हैं और उन्होंने सुल्तान, गोल्ड, सरकार 3, सुपर 30 आदि कई फिल्में की हैं.

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राखी सावंत

 

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राखी सावंत ने भी Bigg Boss के बाद काफी सुर्खियाँ बटोरी .वो Bigg Boss के बाद ‘राखी का स्वयंवर’ रियलिटी शो में नज़र आई .इसके बाद इन्होने कई मूवीज में आइटम नंबर भी किये.

2-Bigg Boss Season 2

Bigg Boss सीजन 2 की बात करें तो यह सीजन बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुआ था. इस सीजन के विनर थे आशुतोष कौशिक. इस सीजन के 1st रनरअप राजा चौधरी थे. इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की

राहुल महाजन

राहुल महाजन Bigg Boss सीजन 2 के प्रतियोगी थे .ये भी इस शो से काफी पॉपुलर हुए थे . Bigg Boss के बाद राहुल महाजन न्द्त्व के शो राहुल का स्वयंवर में नज़र आये थे जहाँ उन्होंने डिम्पी गांगुली से शादी की. इसके बाद राहुल अक्सर सुर्ख़ियों में बने रहते थे .

मोनिका बेदी

 

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So, tell me more about you??✨

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Bigg Boss सीजन 2 की प्रतियोगी रही मोनिका बेदी राहुल महाजन के साथ अपने रिश्ते को लेकर काफी सुर्ख़ियों में रहीं. Bigg Boss से बहार आने के बाद मोनिका बेदी भी कई रियलिटी शो में दिखाई दी.उनका कहना था की Bigg Boss ने उनकी लाइफ बदल दी. इनके आलावा की पायल रोहतगी ,राजा चौधरी और  संभावना सेठ को भी कई shows ऑफर हुए.

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3- Bigg Boss Season 3

Bigg Boss का तीसरा सीजन 2009 में टेलीकास्ट हुआ था और इसके विनर थे बिंदु दारा सिंह . इनकी जीत को लेकर लोगों में मिली जुली प्रतिक्रिया थी. इस सीजन के 1 st  runnerup प्रवेश राना थे. इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की

प्रवेश राना

bigg boss से निकलने के बाद प्रवेश राना  ने भारत के बहुत से फैशन वीक्स जैसे लैक्मे फैशन वीक, विल्स इण्डिया फैशन वीक, मेन्स फैशन वीक, कूटर फैशन वीक इत्यादि में सभी शीर्ष डिज़ायनरों जैसे रोहित बाल, मनीष मलहोत्रा, वरुण बेहल, विक्रम पण्डित, रॉकी एस, मनीष गुप्ता इत्यादि के कलेक्श्न पहनकर ramp  walk  किया  हैं. राना ने ZOOM और स्टार वन जैसे टीवी चैनलों पर भी एंकरिंग का काम किया है.

4- Bigg Boss Season 4

Bigg Boss का चौथा सीजन 2010  में टेलीकास्ट हुआ था और इसकी विनर थी ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी .इस सीजन के 1 st runnerup दलीप सिंह राना (खली ) थे. लोगों ने खली की पॉपुलैरिटी को देखकर कयास लगा रखे थे की वो ही इस सीजन के विनर होंगे.पर श्वेता तिवारी ने बाज़ी मार ली.

श्वेता तिवारी

इस सीजन के बाद सबसे ज्यादा जिस contestant ने प्रसिद्धि पायी है वो खुद श्वेता तिवारी ही है. 2013 में, उन्होंने परवरिश – कुछ खट्टी कुछ मीठी : में स्वीटी अहलूवालिया की भूमिका निभाई.  2015 में, उन्होंने  TV शो बेगूसराय में बिंदिया रानी की भूमिका निभाई. इन दोनों shows के लिए इन्हें best actress का अवार्ड भी मिला था. आज कल श्वेता तिवारी sony चैनल पर प्रसारित  एक tv शो ‘मेरे डैड की दुल्हन’ में नज़र आ रही हैं.

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5- Bigg Boss Season 5

Bigg Boss  का पांचवा सीजन 2011 में टेलीकास्ट हुआ था और इसकी विनर थी एक्ट्रेस जूही परमार .इस सीजन की 1st runnerup थी एक्ट्रेस महक चहल. इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की….

सनी लियोनी


हां, हम सभी सनी लियोन को जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिग बॉस सीजन 5, 2011 में सनी लियोन की वाइल्ड कार्ड एंट्री थी.उन्होंने 49 वें दिन घर में प्रवेश किया था और 91 वें दिन वो घर से evicted हो गयी थी. बिग बॉस में रहने के दौरान, महेश भट्ट घर के अंदर गए थे और उन्होंने सनी को अपनी फिल्म में शाइन  किया था . सनी लियोन ने 2012 में प्रदर्शित फिल्म जिस्म 2 से डेब्यू किया.इस फिल्म के बाद से सनी के लिए बॉलीवुड के दरवाजे खुल गए.और उन्होंने बहुत सी फिल्मों में काम किया.

6-Bigg Boss Season 6

Bigg Boss का छठा सीजन 2012 में टेलीकास्ट हुआ था और इसकी विनर थी एक्ट्रेस उर्वशी ढोलकिया. इस सीजन के 1st  runnerup  इमाम सिद्दीकी थे.

सना खान

 

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इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की सना खान-सना खान  को 2012 में बिग बॉस सीजन 6 से बहुत लोकप्रियता मिली. Bigg Boss से बहार आने के बाद सना खान को सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ में एक रोल मिला. इसके बाद उन्हें फिल्म ‘वज़ह तुम हो’ में भी मुख्य भूमिका मिली .

7- Bigg Boss Season 7

Bigg Boss का सातवाँ सीजन 2013 में टेलीकास्ट हुआ था और इसकी विनर थी एक्ट्रेस गौहर खान. इस सीजन की 1st runnerup थी एक्ट्रेस तनीषा मुख़र्जी.

गौहर खान

इस सीजन के बाद सबसे ज्यादा जिस contestant  ने प्रसिद्धि पायी है वो खुद गौहर खान है.गौहर खान ने Bigg Boss के बाद ‘राहत फ़तेह अली खां ‘के एल्बम में काम किया था. जिसमे उनके co-star कुशाल tondon थे. इसके बाद वो रोमांटिक कॉमेडी फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनिया (2017) और बेगम जान (2017) जैसी फिल्मों में भी नज़र आई.

8- Bigg Boss Season 8

Bigg Boss  का आठवां सीजन 2014 में टेलीकास्ट हुआ था और इसके विनर थे एक्टर गौतम गुलाटी. इस सीजन की 1 st runnerup थी करिश्मा तन्ना .

 

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इस सीजन के विजेता भले ही गौतम गुलाटी रहे हो लेकिन Bigg Boss के बाद करिश्मा तन्ना के  करियर ग्राफ में एक बड़ा उछाल आया. बिग बॉस के बाद, उन्होंने झलक दिखला जा 9, नागिन 3, क़यामत की रात, खतरों के खिलाड़ी 10 जैसी कई टीवी परियोजनाओं को चुना, जो 2020 में प्रसारित होंगी.वह फिल्म संजू में भी दिखाई दी.

9– Bigg Boss Season 9

Bigg Boss का नौवां सीजन 2015 में टेलीकास्ट हुआ था और इसके  विनर थे प्रिंस नरूला. इस सीजन के 1 st runnerup थे रिशभ सिन्हा. इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की

नोरा फतेही

 

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SHOW TIME TONIGHT?? A Ce Soir Paris ?? باريس واش نايضة اليوم بالليل؟

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2015 में नोरा फतेही बिग बॉस सीजन 9 में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट थीं. नोरा एक कनाडाई डांसर हैं . उनके पास दिलबर दिलबर, साकी साकी जैसे सुपरहिट गाने हैं. सलमान खान अभिनीत भारत में उन्हें एक छोटी भूमिका भी मिली.नोरा फिल्म एबीसीडी 3 में भी  नजर आई .उन्होंने और भी कई मूवीज में आइटम song किये हैं और जो बहुत ज्यादा पोपुलर भी हुए है.

10- Bigg Boss Season 10

Bigg Boss  का दसवां  सीजन 2016  में टेलीकास्ट हुआ था और इसके विनर थे मनवीर गुर्जर. इस सीजन की 1 st runnerup बानी j थी. इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की

मोनालिसा

 

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Just Between “You And Me “…. #posers #happy #greatbonding #bffs #saturday #vibes #weekend #loveyou @niyatifatnani

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मोनालिसा एक भोजपुरी अभिनेत्री हैं जो 2016 में सीजन 10 में बिग बॉस की प्रतियोगी थीं. bigg boss से निकलने के बाद मोनालिसा ने कई tv shows किये. वो स्टार प्लस के tv शो ‘नज़र’ में भी नज़र आई. उन्होंने अपने लॉन्ग टर्म बॉयफ्रेंड विक्रम सिंह राजपूत के साथ घर के अंदर शादी की. मोना लिसा का असली नाम अंतरा बिस्वास है और उन्होंने 125 से अधिक भोजपुरी फिल्में की हैं.

मनु पंजाबी

एक और कॉमनर जो बिग बॉस में अपनी उपस्थिति के साथ प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे, वह मनु पंजाबी हैं. जयपुर का रहने वाले  ये contestant  इस शो में काफी आगे निकल गया और अब उसका अपना यूट्यूब चैनल ’मैं मनु हूँ ‘ है जहाँ वह सेलेब्रिटी मेहमानों और आम लोगों के साथ बातचीत करते  हुआ दिखाई देते है.

11- Bigg Boss Season 11

Bigg Boss  का ग्यारहवां सीजन 2017 में टेलीकास्ट हुआ था. एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे इसकी विनर थी. इस सीजन की 1st runnerup हिना खान थी. हिना ने शिल्पा शिंदे को कड़ी टक्कर दी थी. इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की

हिना खान

Bigg Boss में जाने के बाद हिना खान की पॉपुलैरिटी और भी बढ़ गयी. Bigg Boss से बाहर आने के बाद हिना खान ने ‘कसौटी ज़िन्दगी की 2’ में कोमोलिका का किरदार निभाया. हाल ही में उन्होंने अर्जित सिंह की एल्बम रांझना में लीड रोल किया, जिसमें उनके co-star थे प्रियांक शर्मा. उन्होंने एक बॉलीवुड मूवी ‘hacked ‘ से डेब्यू भी किया है.

सपना चौधरी

एक डांसर और गायिका, सपना चौधरी अपने गृह राज्य हरियाणा में पहले से ही काफी लोकप्रिय थीं. वह 2017 में में बिग बॉस 11 के घर में आई थीं. लेकिन इस  रियलिटी शो मेंने उन्हें एक अलग पहचान दी. अपने शानदार डांस मूव्स और मुखर स्वभाव के साथ, सपना ने पूरे देश में दिल जीतने में कामयाबी हासिल की .सपना अब बड़े बड़े shows में अक्सर उत्साह के साथ स्टेज पर परफॉर्म करती हैं. सपना चौधरी ने बिग बॉस के कुछ म्यूजिक वीडियो पोस्ट भी किए हैं.

12- Bigg Boss Season 12

Bigg Boss  का बारहवां सीजन 2018 में टेलीकास्ट हुआ था. इसकी विनर थी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़. इस सीजन के 1st runnerup थे. S. श्रीसांत. दीपिका कक्कड़ निस्संदेह सबसे लोकप्रिय भारतीय टीवी अभिनेत्रियों में से एक हैं.वो  TV के पोपुलर शो ‘ससुराल सिमर का’ में सिमर भारद्वाज के  किरदार में काफी लोकप्रिय हुई .bigg boss के बाद दीपिका को ‘कहाँ हम कहाँ तुम’ सीरियल में लीड रोल मिला.

दीपक ठाकुर

‘बिग बॉस सीजन 12’ का फिनाले खत्म होते ही दीपक ठाकुर को ‘खतरों के खिलाड़ी सीजन 10’ ऑफर हुआ था. दीपक को ‘बिग बॉस’ के ही कंटेस्टेंट रहे करणवीर बोहरा ने अपने प्रोडक्शन हाउस में बन रही फिल्म में गाने का ऑफर दिया. इस फिल्म का नाम ‘हमें तुमसे प्यार इतना’ हैं. इस फिल्म के हीरो खुद करणवीर हैं. इसके अलावा दीपक के पास रियलिटी शो का अगला सीजन भी है. ऐसे में इतना तो साफ है ‘बिग बॉस’ के सभी 13 कंटेस्टेंट में से जिस कंटेस्टेंट को सबसे ज्यादा फायदा मिला है वह दीपक ठाकुर ही हैं.

13-Bigg Boss Season 13

सिद्धार्थ शुक्ला, जो 2019 के सबसे अधिक खोजे जाने वाले भारतीय टीवी अभिनेताओं में से एक थे, ने बिग बॉस 13 का खिताब जीता . पर इनकी जीत को लेकर लोगों में मिली जुली प्रतिक्रिया भी थी. अगर बात 1 st runnerup की करें तो आसिम रिआज़ ने सिद्धार्थ शुक्ल को कड़ी टक्कर दी थी. इस सीजन के ऐसे भी contestant है जिन्होंने विनर से ज्यादा शोहरत हासिल की

शहनाज़ गिल और परस छाबरा

इन contestant ने भले ही विनर का ख़िताब न जीता हो पर इन्होने लोगों के दिल जरूर जीते है.इनकी बढती फैन फोल्लोविंग के कारण कलर्स चैनल bigg boss ख़त्म होने के 1 दिन बाद ही एक नया शो लेकर आये हैं.जिसमे ये दोनों अपने अपने लाइफ पार्टनर ढूंढते नज़र आयेंगे.

मजबूत बनेंगी तो सुंदर दिखेंगी

लेखक- मेहा गुप्ता

कोई भी स्त्री तब तक संपूर्ण रूप से सुंदर नहीं कहला सकती जब तक वह मानसिक या अंदर से मजबूत न हो. हौलीवुड की अभिनेत्रियां की जिम फ्रिकनैस सर्वविदित है. प्रसिद्ध अभिनेत्रियों जेसिका अल्बा, जेनिफर गार्नर और 76 साल की जेन फोंडा काफी हैवी वेट ऐक्सरसाइज करती हैं. इस से इन की खूबसूरती में आंच नहीं आई है और इन की खूबसूरती का सारा जमाना दीवाना है.

हमारे देश में फैशन और बौलीवुड भी इस से अछूता नहीं है. अब बौलीवुड अभिनेत्रियां हौलीवुड अभिनेत्रियों से प्रभावित हो कर अपनी दैनिक दिनचर्या में से 1-2 घंटे जिम के लिए निकालती हैं. इस में सिर्फ साइक्लिंग, जौगिंग, हलकीफुलकी फ्लोर ऐक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि वेट लिफ्ंिटग जैसी मसल बिल्डिंग ऐक्सरसाइज भी शामिल हैं. आजकल इस के लिए ‘पाइलौक्सिंग’ शब्द का समावेश हुआ है, जिस में मसल बिल्डिंग ऐक्सरसाइज और बौक्सिंग सम्मिलित है. शारीरिक मजबूती कितनी जरूरी है और इस का सुंदरता से कितना गहरा नाता है, आइए, जानें:

1. स्वास्थ्य

बढ़ती टैक्नोलौजी ने इंसान की जिंदगी को आरामदेह बना दिया है. पहले औरतें सारे काम हाथ से करती थीं. मगर अब सारा काम मशीनों से होने लगा है. इसलिए कसरत करना जरूरी हो गया है. शारीरिक कार्यों की कमी से मोटापे की समस्या बढ़ी है जो हाई ब्लड प्रैशर और डायबिटीज के लिए जिम्मेदार है. 40 की

उम्र के बाद या मैनोपौज के समय स्त्रियों में औस्टियोपोरोसिस की समस्या आम बात है, जिस का कारण बढ़ती उम्र के साथ बोन डैंसिटी का कम होना है. कैल्सियम की गोलियां राहत दे सकती हैं पर लंबे समय तक इन का सेवन पथरी का कारण बन सकता है. वेट लिफ्टिंग एक बेहतर विकल्प है.

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2. मानसिक स्वास्थ्य

नियमित व्यायाम से शरीर की अधिक कैलोरी की आवश्यकता बढ़ती है, जिस से शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और नींद अच्छी आती है. अच्छी नींद मानसिक स्वास्थ्य के लिए पहली शर्त है. अच्छी नींद लेने से आधी मानसिक बीमारियां दूर हो जाती हैं. नियमित वर्कआउट टैंशन को घटाने में मदद करता है.

‘हार्वर्ड स्कूल औफ पब्लिक हैल्थ’ की रिसर्च के अनुसार नियमित कसरत 26% तक डिप्रैशन को थामने में मदद करती है. यह अटैंशन डैफिसिट हाईपर ऐक्टिविटी सिंड्रोम नामक मानसिक बीमारी के इलाज में प्रयुक्त दवाइयों रैटेनिल और ऐनाड्रोल के समान कार्य करती है. यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों और टीनऐजर्स को अपना शिकार बना रही है. वर्कआउट से हारमोंस डोपामाइन और सैरोटोनिन का स्तर बढ़ता है. ये हमें खुश रखते हैं, साथ ही सकारात्मक सोच को भी बढ़ाते हैं.

3. खूबसूरती

नियमित वर्कआउट से रक्तप्रवाह बढ़ता है, जिस का खूबसूरती से सीधा संबंध है. लगभग सभी स्त्रियां पार्लर जा कर फेशियल करवाती हैं, क्योंकि इस से रक्तप्रवाह बढ़ता है, जिस से वे खूबसूरत नजर आती हैं. संपूर्ण वर्कआउट से पूरा शरीर खूबसूरत बनता है. त्वचा टोन होती है. डर्मैटोलौजिस्ट के अनुसार वर्कआउट से स्ट्रैस संबंधित हारमोन कोर्टिसोल का लैवल कम होता है, जिस से सिरम का नियंत्रित निर्माण होता है जो कीलमुंहासों के लिए जिम्मेदार होता है. इस के अलावा अधिक कोर्टिसोल कोलोजन का निर्माण बढ़ाता है, जिस से त्वचा कसी रहती है, चेहरे पर  झुर्रियां नहीं पड़ती हैं और लंबी उम्र तक जवां दिख सकते हैं.

4. सैक्सुअल लाइफ

डेली वर्कआउट लिबिडो किलर है. लिबिडो में सैक्स इच्छा कम हो जाती है. वर्कआउट से उन हारमोंस का कौकटेल बनता है जो आप के शरीर में ऐडे्रनलिन और ऐंडोर्फिन का स्तर बढ़ाते हैं. ऐस्ट्रोजन सब से महत्त्वपूर्ण सैक्स हारमोन है, जो प्रमुख स्त्री जननांग जैसे स्तन का निर्माण और प्रजनन क्षमता के लिए आवश्यक है. हमारे सैक्सुअल और्गेज्म में रक्तप्रवाह बढ़ने से सैक्स ड्राइव में इजाफा होता है. इस के अलावा और्गेज्म तक पहुंचने में भी अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिस के लिए वर्कआउट उपयोगी साबित हो सकता है. अब वह समय नहीं रह गया है जब स्त्री अपने पति को दांपत्य सुख देना भर अपना कर्तव्य सम झती थी, बल्कि आज की स्त्री अपनी संतुष्टि के प्रति भी सजग रहती है.

5. आत्मरक्षा

एक समय था जब स्त्री को पुरुष के मुकाबले शारीरिक रूप से कमजोर माना जाता था, पर आज की स्त्री कमजोर नहीं है. स्त्री के लिए आत्मरक्षा खूबसूरती से भी अधिक आवश्यक हो गई है. डेली वर्कआउट से ही

मसल मास और बोन डैंसिटी बढ़ेगी जो किसी पुरुष के अचानक आक्रमण का विरोध करने में कवच का काम करेगी और इस के लिए कोई शौर्टकट नहीं है.

6. आत्मनिर्भरता

सब से बड़ी बात शारीरिक मजबूती से आप की आत्मनिर्भरता में इजाफा होगा. फिर गैस सिलैंडर खत्म हो जाने पर या टू व्हीलर चलाते समय स्लिप होने या संतुलन बिगड़ जाने पर मदद के लिए आप को किसी का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा या फिर रात को 8-9 बजे घर से निकलने पर घर के बड़ों का यह जुमला कि साथ में भैया या पापा को लेती जाओ, नहीं सुनना पड़ेगा.

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7. सावधानियां

– धीरेधीरे शुरुआत करें. ऐसा न हो कि एकदम से हैवी ऐक्सरसाइज या वेट लिफ्टिंग शुरू कर दें. इस से उलटे परिणाम यानी जौइंट्स पेन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

– हलके वजन वाले डंबल्स से ज्यादा रैप्स करें न कि जोश में आ कर भारी डंबल्स के कम रैप्स करें.

– हैवी वर्कआउट से पहले 10 मिनट वार्मअप करना न भूलें. इस के लिए स्ट्रैचिंग आदि कर सकती हैं. इस से जौइंट्स लुब्रिकैंट्स बनाते हैं, जिस से वे आसानी से मूव करेंगे.

– पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, जिस से अधिक मात्रा में कैलोरी जलती है और वेट लौस जल्दी होता है.

– वर्कआउट नियमित रूप से करें. ऐसा नहीं कि हफ्ते में एक बार कर के छोड़ दिया. हफ्ते में कम से कम 3 दिन घंटेभर का वर्कआउट पर्याप्त है.

– अगर वर्कआउट के दौरान या बाद में जौइंट पेन की शिकायत होने लगे तो वर्कआउट करना बंद कर दें.

– सब से महत्त्वपूर्ण कोई भी वेट ट्रेनिंग ऐक्सपर्ट की निगरानी में ही करें.

– शरीर की बड़ी मसल्स जैसे ऐब्स, बटक और चैस्ट से वर्कआउट की शुरुआत करें और बाद में प्लैंक्स करें.

ठंड में मेरे जोड़ों में कसाव और दर्द महसूस होता है, मै क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 40 साल है. ठंड में मेरे जोड़ों में कसाव और दर्द महसूस होता है. आराम के बाद भी दर्द कई बार गंभीर हो जाता है, जिस के कारण कोई काम नहीं कर पाती हूं. कृपया इस समस्या का समाधान बताएं?

जवाब-

आप की उम्र में हड्डियों की समस्याएं होना सामान्य बात है. ठंड में धूप की कमी के कारण हड्डियों और जोड़ों से संबंधित समस्याएं बढ़ जाती हैं. तापमान में गिरावट के साथ हड्डियों का लचीलापन कम हो जाता है, जिस के कारण जकड़न और दर्द की समस्या होती है. ठंड के मौसम में दर्द से बचने के लिए खास ध्यान रखना पड़ता है. गरम कपड़े पहन कर रखें, हड्डियों व जोड़ों की सिंकाई करें, कुनकुने तेल से मालिश करें. हलकी ऐक्सरसाइज की मदद से हड्डियों में जकड़न की समस्या दूर होगी. हड्डियों में लचीलापन आने से दर्द में खुदबखुद राहत मिल जाएगी. चूंकि आप की उम्र ज्यादा है, इसलिए आप को मैडिकल ट्रीटमैंट की आवश्यकता भी है. किसी अच्छे हड्डी विशेषज्ञ से परामर्श लें.

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फरीदाबाद, हरियाणा के एशियन इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल साइंसैस के सीनियर कंसल्टैंट और और्थोपैडिक्स विभाग के प्रमुख डा. मृणाल शर्मा का कहना है कि युवतियों को समस्याओं पर गौर करना चाहिए ताकि वे स्वस्थ जिंदगी जी सकें.

मीनोपौज की मार

आमतौर पर दुनियाभर में महिलाओं को मीनोपौज 45 से 55 वर्ष की उम्र में होता है, लेकिन हाल ही में द इंस्टिट्यूट फौर सोशल ऐंड इकोनौमिक चेंज के सर्वे से पता चला है कि करीब 4 फीसदी भारतीय महिलाओं को मीनोपौज 29 से 34 साल की उम्र में ही हो जाता है, वहीं जीवनशैली मेें बदलाव के चलते 35 से 39 साल के बीच की महिलाओं का आंकड़ा 8 फीसदी है.

एस्ट्रोजन हार्मोन महिलापुरुष दोनों में पाया जाता है और यह हड्डियों को बनाने वाले औस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं की गतिविधियों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मीनोपौज के दौरान महिलाओं का एस्ट्रोजन स्तर गिर जाता है, जिस से औस्टियोब्लास्ट कोशिकाएं प्रभावित होती हैं. इस से महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं.

शरीर में एस्ट्रोजन की कमी से कैल्शियम सोखने की क्षमता कम हो जाती है और हड्डियों का घनत्व गिरने लगता है. इस से महिलाओं को औस्टियोपोरोसिस और औस्टियोआर्थ्राइटिस जैसी हड्डियों से जुड़ी बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है.

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