बारिश के समय क्या आपकी मांसपेशियों में भी होता है दर्द?

बारिश के दिनों कई लोगों को थकान, मांसपेशियों में दर्द और शरीर में काफी दर्द होता है. इसलिए इन दिनों अपनी सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है.

आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही तरीके जो इस मौसम में आपकी मांसपेशियों की अकड़न को रोक सकते हैं.

1. व्हे प्रोटीन का सेवन

इससे आपकी मांसपेशियों का दर्द तो कम नहीं होगा लेकिन मांसपेशियों को जल्दी से ठीक होने में मदद मिलेगी, इसलिए आपको ज़्यादा समय तक दर्द महसूस नहीं होगा. कसरत के पहले और बाद में 10 ग्राम व्हे प्रोटीन लेने से मांसपेशियों में दर्द के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है.

2. स्नान में समुद्री नमक का उपयोग

यह दादी-का-नुस्खा मांसपेशियों की पीड़ा को दूर करने के लिए प्रभावी उपाय है. यह शरीर की मांसपेशियों को आराम देनेवाले खनिज मैग्नीशियम की आपूर्ति करके मांसपेशियों को आराम दिलाता है.

3. खाने में विटामिन सी से भरपूर चीजें करें शामिल

क्योंकि यह मांसपेशियों के दर्द को रोकने के लिए प्रभावी है. मिर्च, अमरूद और खट्टे फल भी खाएं जो आपके आहार में विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने का काम करेगा. यह आपके शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने और मांसपेशियों में दर्द से राहत दिलाने का करता है.

4. एक्सरसाइज पर विशेष दें ध्यान

ध्यान रखें कि आप नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करते रहें क्योंकि यह रक्त प्रवाह को सुधारने और सूजन को कम करने में सहायता करता है. नियमित रूप से स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज और दैनिक शारीरिक गतिविधियां आपको ऐसी परेशानियों से बचाएंगी. दिन में 2 बार स्ट्रेचिंग करने की कोशिश करना अच्छा होता है.

5. इसेंशियल ऑयल की मसाज

इसेंशियल ऑयल से अपनी मांसपेशियों की मालिश करने से आपको मांसपेशियों की पीड़ा से राहत पाने में मदद मिलती है. आप इलांग-इलांग (ylang ylang), पेपरमिंट, लैवेन्डेर, जीरियम और रोज़मेरी जैसे इसेंशियल तेलों से अपनी मांसपेशियों की मालिश कर सकते हैं.

मॉनसून में भी दमकती रहेगी आपकी त्वचा

मॉनसून में ऑयली और पसीने से तरबतर चेहरे व स्किन पर गंदगी जल्दी जमती है, जिससे मुहांसे हो जाते हैं या लाल दाने पड़ जाते हैं. हालांकि रोजाना अच्छी तरह शरीर और त्वचा की सफाई और सही उत्पादों के इस्तेमाल से इन समस्याओं से दूर रहा जा सकता है.

हम बता रहे हैं मॉनसून के मौसम में त्वचा की समस्याओं से निजात पाने के उपाय.

– त्वचा के रोम छिद्रों को हार्ड ऑयल से बचा कर रखें और चेहरे के तैलीयपन को दूर करना न भूलें. चेहरे की सफाई के बाद एस्ट्रिंजर टोनर लगाएं. रूई के फाहे से फिर चेहरे को पोछ ले. आप गुलाब जल और विच हेजल को समान मात्रा में मिलाकर भी चेहरे पर लगा सकती है और फिर थोड़ी देर बाद रूई के फाहे से चेहरे को पोछ लें.

– अगर चेहरे पर दाने, मुहांसे या चकत्ते पड़ गए हैं तो मेडिकेटेड साबुन या क्लिंजर से दिन में दो बार चेहरे को धोएं. दिन में कई बार सादे पानी से चेहरे को धोएं. आप गुलाब के तत्व से युक्त स्किन टोनर भी लगा सकती हैं, जो न सिर्फ त्वचा की सफाई करता है, बल्कि सामान्य एसिड एल्कालाइन बैलेंस भी बनाए रखता है.

– चेहरे पर अगर धब्बे हैं तो धब्बे वाली जगह पर फेशियल स्क्रब लगाएं, लेकिन कील, मुहांसे या दाने होने पर स्क्रब का इस्तेमाल न करें. धब्बे वाली जगह पर गुलाब जल में चावल का पाउडर मिलाकर रोज लगाएं और हल्के हाथों से मलें. पांच मिनट के लिए लगा रहने दें और फिर इसे पानी से धो लें. यह हर सुबह चेहरे को साफ करने के बाद करना चाहिए.

– मॉनसून में बालों में अच्छी कंपनी का शैम्पू और कंडीशनर लगाएं, जिससे बालों में नमी बरकरार रहे. नियमित तौर पर तेल से अच्छे से मसाज करें, जिससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं. आप स्टीमिंग भी कर सकती हैं.

– मॉनसून के दौरान नाखूनों को साफ रखें, ताकि किसी प्रकार की बीमारी या इंफेक्शन नहीं हो. सावधानी के साथ मैनीक्योर और पैडीक्योर कराएं. इस दौरान एंटीसेप्टिक पानी में ही हाथ या पैरों को डुबोएं और उपकरण भी साफ होने चाहिए.

– मॉनसून में पैरों की देखभाल भी करें, ताकि फंगल इंफेक्शन न हों. पैरों को अच्छे से धुलकर व पोछकर टैल्कम पाउडर लगाएं. गर्मी और उमस के दौरान ओपन फुटवेयर पहनें, ताकि ज्यादा पसीना नहीं निकले, इससे आपके पैरों में फंगल इंफेक्शन नहीं होगा.

ये हैं आपके पसंदीदा कॉमेडियन्स के सीक्रेट्स

हर रोज की वही एक सी जिंदगी और बोरियत के बीच जीवन में कॉमेडी शोज हंसी के साथ-साथ सुकून के कुछ पल भी लाते हैं.

इन दिनों हर चैनल पर इनकी धूम मची हुई है. तो आइए, छोटे पर्दे के कुछ पाप्युलर कॉमेडियन्स की कही-अनकही बातों को जानने की कोशिश करते हैं.

कपिल शर्मा

कई बार मीडिया से बात करते हुए कपिल ने अपने जीवन से चुड़ी कई सारी बातें शेयर की हैं. यहां हम आपके लिए, उनके द्वारा कही गई ऐसी ही कुछ बातें और पुराने इंटरव्यूज के कुछ अंश लेकर आए हैं.

कपिल कहते है कि कई बार न चाहते हुए भी आपको अपने आत्मसम्मान के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है और मैंने भी यही किया. मुझे कॉमेडी नाइट्स विद कपिल शो खत्म होने की खुशी हुई थी, क्योंकि तभी मुझे ‘द कपिल शर्मा शो’ में नया करने का मौका मिला. तब मैंने बिना ब्रेक के शो के लिए दिन-रात मेहनत की. हमने एक अलग तरह का शो बनाया और दर्शकों का इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला.

मैंने अपने जीवन में अनगिनत उतार-चढ़ाव देखे, पर कभी हारा नहीं. फिर चाहे, वो पिता की बीमारी व देहांत हो, अपनी पहचान बनाने का संघर्ष हो या आज इसे बरकरार रखने की कोशिश ही क्यों न हो.

कपिल आगे कहते हैं कि मैं अपने शो में नरेंद्र मोदीजी को बुलाने का बहुत इच्छुक हूं. एक बार मैंने एलेन के शो में अमेरिका के प्रेसिडेंट बराक ओबामा को देखा था, जो बहुत मजेदार था. हमारे यहां भी शो में नेताओं को बुलाना चाहिए, इससे दर्शकों को उन्हें करीब से जानने का मौका मिलेगा. यदि मोदीजी मेरे शो पर आते हैं, तो हम राजनीति की बजाय अन्य विषयों पर उनसे बात करेंगे. खासतौर पर यह जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे एक छोटे से शहर का शख्स लंबा सफर तय करते हुए, हमारे देश का प्रधानमंत्री बन गया, ये एक दिलचस्प व प्रेरणादायक कहानी होगी.

शो में मैं और मेरी टीम अक्सर अलग-अलग फील्ड से लोगों को लेकर सरप्राइजेस देने की कोशिश करते रहते हैं, जो सभी को पसंद भी आता है.

शायद आप ये बात नहीं जानते होंगे कि कपिल के पिता पुलिस डिपार्टमेंट में हेड कॉन्स्टेबल थे. फरवरी साल 2013 में कपिल शर्मा फोर्ब्स इंडिया मैगजीन में शीर्ष 100 सेलिब्रिटीज के बीच में चुने गए थे और वे उस लिस्ट में 96वें स्थान पर थे.

कपिल को जानवरों से खास लगाव है. इन्होंने पुलिस के रिटायर्ड डॉगी ‘जंजीर’ को गोद भी लिया हुआ है. कपिल के साथ विवादों का सिलसिला भी कुछ कम नहीं रहा है. कभी बीएमसी ऑफिसर द्वारा उनसे रिश्‍वत मांगने के मुद्दे को लेकर, तो कभी उनके घर पर गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन को लेकर. उस पर ओम पुरी का उन पर पाकिस्तानी कलाकारों की नकल करने का कटाक्ष. यानि आरोप-प्रत्यारोप की उनके जीवन में भी लंबी फेहरिस्त है. लेकिन इन सबसे परे इस सच्चाई को नहीं नकारा जा सकता कि उनका शो जबरदस्त हिट है.ट

भारती सिंह

भारती ने एक दफा मीडिया से बात करते हुए कहा था कि सात साल पहले जब वे मुंबई आई थी, तब वे इस बात से नफरत करती थीं कि उनका वजन अधिक है, पर यही बात उनके लिए वरदान साबित हुई. आगे वे कहती हैं कि उन्होंने कभी भी वजन घटाने के बारे में नहीं सोचा.

कपिल शर्मा से उनके कॉमपटीशन को लेकर उनका कहने है कि जहां तक कपिल से मुकाबले की बात है, तो मैं एक बात स्पष्ट करना चाहती हूं कि कपिल से मेरा कोई मुकाबला नहीं है.

भारती ने ये भी बताया कि उनके पिता नेपाल के थे. जब वे दो साल की थी, तब उनका देहांत हो गया था. अपनी रियल लाइफ में भी वे बहुत बोलती हैं. ऐसे में उनकी ख्वाहिश थी कि उनका जीवनसाथी उनकी बातों को धैर्य के साथ सुनें.

वे कहती हैं कि आज सफल होने के बावजूद मैं नहीं बदली हूं. आज भी मुझे अपनी सहेलियां, टीचर्स, गोलगप्पे व आम पापड़वाला सभी याद हैं. उन सभी से मिलने की इच्छा है, पर मेरी सफलता ने मेरी आजादी छीन ली है. मैं जब कुछ नहीं थी, तब भी हंसती थी और आज भी हंसती व खुश रहती हूं. ज़िंदगी के संघर्ष के हर दौर में मैंने खुशी का साथ कभी नहीं छोड़ा.

सुदेश लहरी

अधिकतर पंजाबी फिल्में व कॉमेडी शोज करने वाले सुदेश ने द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज से अपने कॉमेडी करियर की शुरुआत की थी. लेकिन सही मायने में उन्हें पहचान कॉमेडी सर्कस व कॉमेडी क्लासेस से मिली.

सुदेश देश की यंग जेनरेशन से ख़ुद को नशे में न झोंकने की गुजारिश करते हैं.

कृष्णा अभिषेक

कृष्णा मीडिया से बात करते हुए कहते हैं कि माना कि मेरे शो को उतनी अच्छी ओपनिंग नहीं मिली थी, पर मैं अपने शो को आगे बढ़ाने के लिए और भी अधिक मेहनत करूंगा. मैं इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि कपिल का शो हमें अच्छी टक्कर दे रहा है. मुझे लगता है कि कपिल भी इस टक्कर को एंजॉय कर रहे हैं.

हमारे आपसी कॉम्प्टीशन की वजह से हम अच्छा करने की कोशिश कर रहे हैं, जो दोनों शोज के लिए फायदेमंद है. कृष्णा टीवी के साथ-साथ फिल्मों में भी एक्टिव रहना चाहते हैं. वैसे फिल्म हाउसफुल 3 में वे अक्षय कुमार व अभिषेक बच्चन के साथ कॉमेडी करता नजर आ चुके हैं. इसके अलावा भी वे बॉलावुड की कुछ फिल्मों में नजर आए हैं.

शोहरत की बुलंदियों पर अकेली थीं ये अभिनेत्रियां

बॉलीवुड अभिनेत्रियों के कई चाहने वाले होते हैं पर खास वो होते हैं जिन्‍हें वो चाहती हैं और अपना जीवनसाथी बनाती हैं. कुछ बॉलीवुड अभिनेत्रियों पर तो प्यार का ऐसा जादू चला की किसी ने अपने से छोटे तो किसी ने अपने से कई साल बड़े पार्टनर से शादी कर ली. कुछ सितारे या लोग तो तब चर्चा में आएं जब उन्होंने किसी बॉलीवुड अभिनेत्री से शादी रचाई.

लेकिन बॉलीवुड में कुछ ऐसी भी अभिनेत्रियां हैं जिनका प्यार तो परवान चढ़ा लेकिन शादी की पटरी पर वह प्यार नहीं उतर सका. मसलन सिने जगत की कई एक्‍ट्रेसेज शोहरत के शिखर पर रहने के बाद भी कुंवारी ही रहीं. आइये जानें इन कामयाब कुंवारी नायिकाओं के बारे में.

आशा पारेख

1959 से 1973 तक बॉलीवुड इंडस्ट्री में राज करने वाली आशा पारेख ने आज तक शादी नहीं की. अपने दौर में आशा ने लगभग सारे अभिनेताओं के साथ काम किया. उनकी शादी ना होने के पीछे उनका तेज तर्रार व्यक्तित्व ही था. फिल्म निर्देशक नासिर हुसैन के साथ उनके संबंध की अफवाहें भी खूब उड़ीं. अब यह महज अफवाह था या सच ये तो आशा ही जानें.

नंदा

नंदा बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार थीं. 50 और 60 के दशक में नंदा बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रयों में गिनी जाती थीं. नंदा के पास शादी के कई प्रपोजल आएं लेकिन उन्होंने सबको ना कर दिया. अंत में 1992 में मनमोहन देसाई से उनकी सगाई हुई, लेकिन शादी से पहले ही एक एक्सिडेंट में उनकी मौत हो गई जिसके बाद नंदा शादी नहीं की.

सुलक्षणा पंडित

सुलक्षणा ने अपने समय के कई बड़े सितारों के साथ काम किया लेकिन उनकी जिंदगी तन्हा ही गुजरी. सुलक्षणा संजीव कुमार को अपना दिल दे बैठी थीं, लेकिन संजीव ने उनके इस प्रपोजल को ठुकरा दिया. इस बात का सुलक्षणा को गहरा सदमा लगा और उन्होंने शादी नहीं की.

सुरैया

सुरैया ने देवानंद से प्यार किया, उनसे शादी भी करनी चाही लेकिन घरवालों की नामंजुरी के कारण यह रिश्ता नहीं हो सका. और फिर क्या सुरैया कभी विवाह के बंधन में बंधी ही नहीं.

परवीन बॉबी

बॉलीवुड की बेहतरीन और ग्लैमरस अभिनेत्रियों में शुमार परवीन बॉबी शादी के बंधन में नहीं बंधीं, लेकिन वह कई शादीशुदा अभिनेताओं के साथ रिलेशनशिप में थीं. लगभग हर फिल्म के को-स्टार के साथ उनके रिश्ते ने खूब सुर्खियां बटोरी. महेश भट्ट से लेकर अमिताभ बच्चन तक के साथ उनका नाम जुड़ा.

नगमा

साउथ की इस अभिनेत्री ने बॉलीवुड में भी अपना जलवा बिखेर दिया. नगमा ने बॉलीवुड के कई बड़े अभिनेताओं के साथ काम किया. नगमा का नाम क्रिकेट दिग्गज सौरव गांगुली के साथ जुड़ा. लेकिन दोनों का रिश्ता किसी अंजाम तक नहीं पहुंचा.

तब्बू

तब्बू को उनके बेहतरीन एक्टिंग के लिए जाना जाता है. चांदनी बार में उनके अभिनय के लिए उन्हें आज भी सराहा जाता है. तब्बू का नाम साउथ के सुपरस्टार नागार्जुन के साथ जुड़ा. तब्बू नागार्जुन के प्यार में इस कदर पागल हो गईं कि वह आज तक कुंवारी हैं.

सुष्मिता सेन

मिस युनिवर्स सुष्मिता सेन कई दिलों पर राज करती हैं, लेकिन आज तक कोई ऐसा नहीं आया जो सुष्मिता के दिल पर राज कर सके. सुष्मिता आज तो बच्चों की मां हैं लेकिन उन्होंने शादी नहीं की.

अमीशा पटेल

कहो ना प्यार से डेब्यु करने के बाद गदर जैसे हिट फिल्म का हिस्सा बनने वाली अमीशा पटेल फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट के साथ रिलेशनशिप में रहीं. लेकिन बाद मे दोनों अलग हो गएं और फिर अमीशा ने शादी नहीं की.

एकता कपूर

टीवी पर सबकी जोड़ी बनाने वाली एकता कपूर आज तक खुद का कोई जोड़ीदार नहीं ढूंढ पाईं. टीवी और फिल्म प्रोडक्शन में महारत हासिल कर चुकी एकता कब शादी करेंगी इसका जवाब तो शायद वही दे पाएंगी.

‘जीवन के एक पड़ाव पर आपको एक साथी की जरूरत होती है’.  बॉलीवुड की इन दिग्गज अभिनेत्रियों ने इस कथन को गलत साबित कर दिया और दिखा दिया की अकेले भी शान से जिंदगी गुजारी जा सकती है.

जुआ खेल रहे हैं इमरान हाशमी!

14 साल के अभिनय करियर में पिछले कुछ वर्षों से उनका करियर काफी डांवाडोल चल रहा है. ‘घनचक्कर’, ‘राजा नटवरलाल’, ‘उंगली’, ‘मि.एक्स’, ‘हमारी अधूरी कहानी’, ‘अजहर’, ‘राज रीब्यूट’ जैसी असफल फिल्मों के बाद अब इमरान हाशमी की सारी उम्मीदें मिलन लूथरिया निर्देशित फिल्म ‘बादशाहो’ पर टिकी हुई है. तो दूसरी तरफ उन्होंने अपने करियर को गतिशील करने के लिए खुद निर्माता बनने का निर्णय लिया है. वह युद्ध के खिलाफ बात करने वाली एक्शन प्रधान नाटकीय फिल्म ‘कैप्टन नवाब’ का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें वह स्वयं कैप्टन नवाब का किरदार निभाएंगे. इस फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी इमरान हाशमी ने टोनी डिसूजा को सौंपी है.

फिल्म ‘कैप्टन नवाब’ के निर्देशक का नाम सामने आने के बाद से बॉलीवुड में कई तरह की चर्चाएं गर्म हो गयी हैं. टोनी डिसूजा ने अब तक ‘अजहर’ सहित जितनी भी फिल्में निर्देशित की हैं, उन सभी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से असफल रही हैं. इसि के चलते बॉलीवुड में चर्चाएं हैं कि इमरान हाशमी अपने डांवाडोल हो रहे और निरंतर नीचे गिर रहे करियर को संवारने के लिए यदि फिल्म का निर्माण कर रहे हैं, तो अपनी फिल्म के निर्देशन के लिए एक असफल निर्देशक को क्यों चुना? कुछ लोग शंका व्यक्त कर रहे हैं कि कोई भी सफल निर्देशक इमरान हाशमी के साथ काम करने को तैयार नहीं है. इसलिए इमरान हाशमी को टोनी डिसूजा के साथ हाथ मिलाना पड़ा. अब सच क्या है, यह तो इमरान हाशमी ही जानते होंगे.

फिल्म ‘कैप्टन नवाब’ की शूटिंग अभी शुरू नहीं होने वाली है. इमरान हाशमी के नजदीकी सूत्र दावा कर रहे हैं कि इस फिल्म की शूटिंग अक्टूबर माह के आसपास शुरू होगी. इतना ही नहीं इमरान हाशमी से जुड़े लोग मानते हैं कि इमरान को टोनी डिसूजा की प्रतिभा पर पूरा यकीन है और वह अपनी इस फिल्म को उच्च कोटि की बनाने के लिए सारे प्रयास कर रहे हैं.

इस बीच टोनी डिसूजा ने घोषणा की है कि फिल्म ‘कैप्टन नवाब’ के एक्शन दृष्यों को फिल्माने के लिए हॉलीवुड एक्शन निर्देशक डान ब्राडले की सेवाएं ली जाएंगी. डान ब्राडले अब तक हॉलीवुड की ‘इंडीपेंडेंस डे’, ‘स्पाइडरमैन 2’, ‘स्पाइडरमैन 3’, ‘द बॉर्ने सुपरमैसी’, ‘सुपर मैन रिटर्न’, ‘इंडियाना जोन्स’, क्वांटम आफ सोलेस’,‘मिशन इंम्पॉसिबल’ जैसी सुपर डुपर हिट फिल्मों के एक्शन निर्देशित कर चुके हैं.

क्या आप टैक्स बचाने के ये तरीके जानती हैं?

जब बात टैक्स बचाने की आती है, तो आप अपनी जानकारी के अनुसार आईटी एक्ट की धारा 80सी के तहत मिलने वाले विकल्प खंगालती हैं. लेकिन क्या आप जानती हैं कि टैक्स बचाने के कुछ और ऐसे रास्ते भी हैं, जिस पर ज्यादा लोग ध्यान नहीं देते. आइए, हमारे साथ जानिए क्या हैं वो तरीके…

चैरिटेबल संस्‍थान को दान

आप पैसे को दान दे सकती हैं बशर्ते जिस भी धर्मार्थ संस्‍थान को आप राशि दान दे रही हैं, वह डोनेशन के लिए मंजूर की गई संस्‍थानों की सूची में होना चाहिए.

आश्रित सदस्य के इलाज या रखरखाव पर खर्च

आप अपने आश्रितों पर खर्च करके भी टैक्स बचा सकती हैं. लेकिन ध्यान रहे ये व्यक्ति पूरी तरह और सिर्फ आप पर आश्रित होना चाहिए. साथ ही यह तब भी लागू होता है जब आपने इलाज के खर्च से निपटने के लिए विकलांग कर्मचारी के तौर पर टैक्स कटौती का आवेदन ना किया हो.

आश्रित सदस्य की किसी खास बीमारी का इलाज

इसके लिए शर्त यह है कि जो भी इलाज में खर्च आया है, उसके बदले आपको अपनी कंपनी या फिर बीमा कंपनी से कोई रकम ना मिली हो. इसके अलावा ये छूट सिर्फ कैंसर और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के मामले में मिलती है.

होम लोन पर ब्याज

अगर आप मकान में रहती हैं, केवल तभी इस विकल्प का फायदा उठा सकती हैं. अगर यह मकान किराए पर दिया हुआ है, साल का पूरा ब्याज टैक्स बचत के रूप में क्लेम किया जा सकता है.

NPS में निवेश

इसमें निवेश की शर्त यह है कि सेक्‍शन 80सी, 80सीसीसी और 80सीसीडी के तहत जिस राशि पर टैक्स बचत क्लेम की जा रही है, वो साल में 1.5 लाख रुपये से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए.

किराया भरकर

अगर आपकी सैलरी में हाउस रेंट अलाउंस यानि कि HRA नहीं मिलता है, तो इसका भी लाभ लिया जा सकता है. इन सभी तरीकों से आप आराम से टैक्स बचा सकती हैं.

खास आपके लिए हैं ये ऑरगैनिक ब्यूटी टिप्स

अगर आप ध्यान दें तो आजकल सभी महिलाएं केमिकल्स की जगह केमिकल फ्री प्रोडक्ट्स की ओर आकर्षित हो रही हैं.

ये बात तो आपको पता ही होगी कि कुदरती खूबसूरती महंगे प्रोडक्ट्स की मोहताज नहीं होती, जैविक पदार्थों से भी आप अपनी ब्यूटी को सुरक्षित रख सकती हैं. ऑरगैनिक प्रोडक्ट्स यानि कि प्राकृतिक तत्व, कुदरती तरीके से आपकी त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं .

जब से ऑरगैनिक इन्ग्रीडिएंट्स की मदद से ब्यूटी ट्रीटमेंट का ये ग्रीन ब्यूटी कॉनसेप्ट ट्रेंड में आया है तब से ब्यूटी की दूनिया में खूब धूम मची हुई है.

किगेलिया फ्रूट

अफ्रीका में उगने वाला ये फ्रूट स्किन के लिए बेहद लाभकारी है . इससे निकलने वाला तेल सदियों से पावरफुल एंटी इन्फ्लेमेटरी एजेंट के तौर पर इस्तेमाल होता आ रहा है, जिसमें मौजूद हैं फार्मिंग प्रोपर्टीज. अफ्रीका की लगभग सभी महिलाएं काफी लंबे समय से इस तेल को नेचुरल ब्रेस्ट फर्मर के तौर पर इस्तेमाल करती आ रही हैं. इसके अलावा ये मैजिकल तेल आपको दाग धब्बों रहित त्वचा देने में भी सक्षम है.

हल्दी

बरसों से हल्दी भारतीय संस्कृति में खूबसूरती निखारने के लिए जानी जाती है . हल्दी ना सिर्फ आपके स्किन टोन को निखारने के काम है आती है बल्कि चेहरे पर हेल्दी ग्लो भी लाती है. इसमें मौजूद एंटी इनफ्लेमेटरी तत्व और एंटी आक्सिडेंट्स स्किन की रक्षा करते है और डैमेज से भी बचाते हैं.

ब्लू कैमोमाईल

एंटी बैक्टेरियल होने के कारण ब्लू कैमोमाईल सेंस्टिव स्किन के लिए बेहद उपयोगी है. ये स्ट्रेस से बचाता है और स्किन में होने वाली जलन को भी शांत करता है

ग्रेप फ्रूट

ग्रेप फ्रूट आजकल सभी ब्यूटी कॉन्शस महिलाओं की पसंद बना हुआ है. हालीवुड से लेकर बालीवुड तक ज्यादातर एक्ट्रेसेस ग्रेप फ्रूट से बने एसेंशियल आयल का प्रयोग करती हैं. ग्रेप फ्रूट में खास बात ये है कि इसके प्रयोग से आपकी स्किन ऐजलेस लगने लगती है.

रोज एंड हनी

रोज और हनी का कॉम्बिनेशन स्किन के लिए बेहद फायदेमंद हैं. ये स्किन को डीप क्लीन करते हुए उसे सौम्य बनाता है. स्किन के लिए इससे बेहतर टॉनिक और कोई नहीं हो सकता.

आपका बच्चा कुपोषण का शिकार तो नहीं?

स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार देश की 13 फीसदी आबादी 6 साल से कम उम्र के बच्चों की है और उन में से 12.7 लाख बच्चों की पोषण की कमी के चलते रोजाना मौत होती है. इन गंभीर तथ्यों में यह जोड़ना भी जरूरी है कि जिस शुरुआती दौर में शिशुओं को प्रचुर मात्रा में माइक्रोन्यूट्रिएंट की सब से ज्यादा जरूरत होती है, उसी दौर में 75 फीसदी शिशुओं की मृत्यु का कारण पोषक तत्त्वों की कमी पाया गया है.

6 माह की उम्र के बाद ज्यादातर बच्चों में पोषक तत्त्वों की कमी उन के लिए घातक साबित हो रही है. आइए, जानते हैं इस समस्या से निपटने के तरीके…

विटामिन और मिनरल की कमी

किसी भी शिशु के शुरुआती 1000 दिन उसके जीवन का आधार होते हैं. इसी समय के पोषण से उस के भविष्य की नींव बनती है. लेकिन भारत में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर काफी सुधार होने के बावजूद लाखों बच्चे अपने 5वें जन्मदिन से पहले विटामिन और मिनरल की कमी से जूझ रहे होते हैं.

विटामिन और मिनरल की कमी को माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी भी कहा जाता है और यह शिशुओं में बीमारियां होने व मृत्यु दर बढ़ने का सब से बड़ा कारण है.

पोषक तत्त्वों की कमी

स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, विटामिन व मिनरल की कमी का सबसे भयावह परिणाम यह है कि प्रतिवर्ष पैदा होने वाले 26 लाख मिलियन बच्चों में से 7 लाख से ज्यादा शिशु शुरुआती समय तक भी जीवित नहीं रह पाते.

स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार देश की 13 फीसदी आबादी 6 साल से कम उम्र के बच्चों की है और उन में से 12.7 लाख बच्चों की पोषण की कमी के चलते रोजाना मौत होती है. इन गंभीर तथ्यों में यह जोड़ना भी जरूरी है कि जिस शुरुआती दौर में शिशुओं को प्रचुर मात्रा में माइक्रोन्यूट्रिएंट की सब से ज्यादा जरूरत होती है, उसी दौर में 75 फीसदी शिशुओं की मृत्यु का कारण पोषक तत्त्वों की कमी पाया गया है.

शारीरिक विकास के लिए

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के नियोनेटोलौजिस्ट, डा. सतीश सलूजा के अनुसार, ‘‘6 से 24 महीने की उम्र के बीच के शिशुओं में कमजोर विकास और संक्रमण होने के मामले सब से ज्यादा आते हैं और इस का कारण उन्हें सही पोषण न मिलना है.

शिशुओं के सामान्य विकास के लिए सही मात्रा में विटामिन और मिनरल डाइट देना बहुत जरूरी है. 5 साल से कम उम्र के शिशुओं में निमोनिया, डायरिया, खसरा और मलेरिया होने की मुख्य वजह कुपोषण है.’’

अगर किसी भी शिशु को शुरुआती 1000 दिनों के दौरान पोषक तत्त्वों से युक्त आहार दिया जाए तो उस का बेहतर शारीरिक विकास होता है और उस की सोचने व याद करने की क्षमता में भी वृद्धि होती है. इतना ही नहीं वह बच्चा वयस्क होने पर कम बीमार होता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जब शिशु स्तनपान से ठोस आहार की ओर बढ़ता है तो उसे माइक्रोन्यूट्रिएंट देने का गैप सब से ज्यादा होता है, क्योंकि उस की जरूरतें बढ़ती हैं, पर उसी दौरान उसे पोषक आहार देना कम होता जाता है.

ध्यान दें

डा. सतीश सलूजा के अनुसार, ‘‘6 महीने की उम्र के बाद शिशुओं में पोषक तत्त्वों की कमी न हो, इसके लिए जरूरी है कि इस उम्र में उन्हें भरपूर पोषक तत्त्व दिए जाएं. इस उम्र में शिशओं के स्तनपान के साथ पोषक तत्त्वों से युक्त आहार (विटामिन, मिनरल, फोर्टीफाइड अनाज/भोजन, आयरन, मल्टी विटामिन ड्रौप सप्लिमैंट) दिया जाना चाहिए.’’

विद्या बालन और उनके पिता की ये फिल्म देखी आपने?

यूं तो हम हर रोज बहुत सारी शॉर्टस फिल्म्स देखते हैं. जिनमें से कुछ बहुत अच्छी होती हैं और कुछ हमे खास पसंद नहीं आती. हाल ही में फरहान अख्तर ने एक ऐसी ही शॉर्टस फिल्म रिलीज की है, जिसे पूरे बॉलीवुड द्वारा पसंद किया जा रहा है.

फरहान अख्तर की ये फिल्म आज के समय की होनहार अभिनेत्रियों की लिस्ट में शुमार, बेहद खूबसूरत विद्या बालन और उनके पापा पी.आर बालन के जीवन पर आधारित है.

ये फिल्म पिछले महीने फादर्स डे पर रिलीज की गई थी. अब इसे यूट्यूब पर भी अपलोड किया जा चुका है. इस फिल्म को महिलाओं के समर्थन और उनके साथ हो रहे भेदभाव के विरोध में ‘बस बहुत हो गया’ नाम से पहचाना जा रहा है.

सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने ट्वीट करते हुए इस फिल्म को हर किसी के लिए एक चलता-फिरता, उचित और ताकतवर संदेश बताया है. इनके अलावा भी बॉलीवुड के कई और अव्वल कलाकारों ने इस फिल्म के लिए फरहान को धन्यवाद दिया और सबने अपने-अपने ढंग से इस फिल्म की तारीफ की और लोगों से इसे देखने की गुजारिश की.

इस वीडियो में विद्या के 71 वर्षीय पिता ने अपने जीवन के संघर्ष और उस कठिन समय पर उन्हें मिले अपनी बेटी के साथ पर, पहली बार सबके सामने बात की. फिल्म में विद्या ने इस बात का भी खुलासा किया कि फिल्मों में आने को लेकर, उनके सपने की शुरुआत कैसे हुई और उन्होंने कैसे अपने परिवार के सहयोग से अपने इस लक्ष्य को प्राप्त किया. ये बात तो हर कोई जानता है कि पहले सिनेमा को पुरुष प्रधान माना जाता था और यहां अपने करियर की शुरुआत करना किसी भी महिला के लिए आसान नहीं था.

फिल्म में विद्या ने अपने पिता का उन पर अटूट विश्वास और कैसे उनके पिता ने हमेशा उन्हें सहयोग दिया, इस बात का भी खुलासा किया है.

ऐसी कई और बातें इस फिल्म में कहीं गई हैं जो वाकई हम सभी को जाननी चाहिए. इस फिल्म में एक बेटी और पिता के बीच के संबंध को बखूबी दिखाया गया है. साथ ही समाज को एक दिशा देने के लिए, एक बहुत ही बेहतरीन माध्यम के रूप में ये फिल्म सभी को प्रेरित करती है.

यहां देखे फिल्म…

नैतिकता पर भारी नकल

7 मई को देशभर में आयोजित नैशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रैंस टैस्ट यानी नीट की परीक्षा इसलिए सुर्खियों में रही थी कि इस में नकल रोकने के लिए निरीक्षक बेहद सख्ती से पेश आए थे. लग ऐसा रहा था मानो परीक्षार्थी आतंकवादी हों

जो अपने शरीर में नकल के बजाय गोलाबारूद छिपा कर लाए हैं. तमाम परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की बारीकी से तलाशी ली गई थी. छात्रों के जूतेमोजे उतरवाए गए थे, जो छात्र पूरी बांहों की टीशर्ट पहन कर आए थे उन्हें फाड़ दिया गया, यहां तक कि और उन की बैल्ट्स व चैन्स तक उतरवा ली गई थीं.

सब से ज्यादा दिक्कत छात्राओं को हुई जिन की कान की बालियां और नाक की लौंग तक उतरवाई गईं, मेहंदी लगा कर आई छात्राओं की मेहंदी तक हटा दी गई. उन के घने बालों को भी शक की नजर से देखा गया. प्रतिबंध न होने के बाद भी कई शादीशुदा छात्राओं के मंगलसूत्र तक उतरवा लिए गए. दुपट्टा तो नीट की परीक्षा के ड्रैसकोड के तहत बाहर रखवाया ही गया, छात्राओं के हाथों और गले में बंधे धागे तक काट दिए गए.

इस कड़ाई पर हर जगह छात्रों ने एतराज जताया. केरल के कन्नूर के एक केंद्र पर तो हंगामे की सी स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक छात्रा ने उस के अंडरगार्मेंट्स उतरवाने का आरोप लगाया. एक और छात्रा को तब तक परीक्षाहाल में नहीं जाने दिया गया जब तक उस ने अपनी जींस की पैंट का मैटल बटन निकाल कर निरीक्षकों को नहीं दे दिया.

अंडरगार्मेंट्स का सच

परीक्षाएं प्रतियोगी हों या स्कूली, अंडरगार्मेंट्स अब नकल का बड़ा जरिया बनते जा रहे हैं क्योंकि इन की तलाशी लेने में निरीक्षक हिचकते हैं. बात जब लड़कियों की हो तो मामला और भी संजीदा हो उठता है. लेकिन यह सच है कि लड़कियां अंडरगार्मेंट्स पर सवालों के जवाब लिख कर ले जाती हैं.

नवंबर-दिसंबर 2016 में इस आशय की एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी जिस में दिखाया गया था कि एक लड़़की अपनी कुरती पर लिखे जवाबों को पलटपलट कर देख रही है. दरअसल, तलाशी के दौरान अंडरगार्मेंट्स आमतौर पर उतरवाए नहीं जाते, जिस का फायदा लड़कियां जम कर उठाती हैं.

भोपाल के नूतन कालेज की एक प्राध्यापक की मानें तो लड़कियां ब्रापैंटी पर जवाब लिख कर लाती हैं और फिर बाथरूम में जा कर उन्हें उतार कर पढ़ लेती हैं. चूंकि आजकल की परीक्षाओं में बाथरूम जाने के लिए केवल 5 मिनट ही मिलते हैं, इसलिए कई बार हड़बड़ाहट में वे अंडरगार्मेंट्स टौयलेट में ही छोड़ देती हैं.

ऐसे में परीक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अंडरगार्मेंट्स की तलाशी ली जानी एतराज की बात नहीं. पर दिक्कत यह है कि हरेक परीक्षा में हरेक लड़की की तलाशी इस तरह ले पाना मुमकिन नहीं. दूसरे, हंगामा खड़े होने की आशंका भी मुंहबाए खड़ी रहती है. आजकल लड़कियां अंडरगार्मेंट्स और सलवार सूट सहित साड़ी में नकल की परची चिपका कर ले जाती हैं. ऐसे में बगैर सख्ती किए उन्हें पकड़ पाना आसान नहीं है.

तकनीक का दुरुपयोग

‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’  फिल्म में तो अभिनेता संजय दत्त को मोबाइल के जरिए नकल करते दिखाया गया था लेकिन अब परीक्षा में मोबाइल फोन प्रतिबंधित है तो ‘तू डालडाल मैं पातपात’ की तर्ज पर छात्र तकनीक के दूसरे तरीके अपनाने लगे हैं.

मैजिक पैन की खूबी अब किसी सुबूत की मुहताज नहीं रही है जिसकी खासियत यह होती है कि उस का लिखा हुआ तभी दिखता है जब उस पर अल्ट्रावायलेट किरणें फेंकी जाएं. नकलची छात्र अपने प्रवेशपत्र, कंपास बौक्स और क्लिपबोर्ड तक पर उत्तर लिख कर ले जाते हैं और मौका देखते ही इसी पैन के ऊपर लगे एक बल्ब की मदद से उसे उत्तरपुस्तिका पर लिख डालते हैं. इस बल्ब से अल्ट्रावायलेट किरणें निकलती हैं.

ब्लूटूथ एक छोटी सी डिवाइस है, जिस का बेजा इस्तेमाल नकल करने में खूब होता है. यह डिवाइस लौकेट, घड़ी वगैरा में आसानी से छिपा कर ले जाई जा सकती है. इसलिए छात्रछात्राओं की बैल्ट, कंगन, चूड़ी, चैन आदि उतरवाए जाने लगे हैं.

बाजार में धड़ल्ले से मिलने वाली खास तरह की घडि़यां नकलचियों के लिए

वरदान सरीखा साबित हो रही हैं जिन में खासी तादाद में डाटा भरा जा सकता है. इस घड़ी को एक खास तरीके से हिलानेडुलाने पर उस में भरा डाटा आसानी से दिखने लगता है, जिसे निरीक्षक नहीं भांप पाते. जब इन घडि़यों के जरिए नकल की शिकायतें आम हो गईं और पकड़ी भी जाने लगीं तो तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं में घड़ी भी उतरवाई जाने लगी.

नकल पकड़ पाना कभी आसान नहीं रहा है. परीक्षाओं में नई टैक्नोलौजी का बेजा इस्तेमाल परीक्षाओं में किया जाता है. ऐसे में सख्ती जरूरी है पर इस के बाद भी नकल नहीं रुकती तो इस की एक अहम वजह नकल की पनपती प्रवृत्ति है जो नैतिकता पर भारी पड़ती है.

शौर्टकट की मानसिकता

इस में शक नहीं कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में कामयाब होना अब आसान नहीं रह गया है. कामयाबी सिर्फ मेहनत की मुहताज होती है पर नकल कर कुछ बन जाने का सपना देखने वाले छात्र निश्चितरूप से मेहनती छात्रों का हक मारने का अपराध करते हैं. इस के लिए किसी भी नजरिए से वे छूट या माफी के हकदार नहीं माने जा सकते.

ये वे छात्र हैं जो मेहनत की अहमियत नहीं समझते और काबिल तो कहीं से नहीं होते. जितनी खुराफात ये नकल करने में दिखाते हैं अगर उस का 10वां हिस्सा भी मेहनत में लगाएं तो ईमानदारी से कामयाब हो सकते हैं. यही वे छात्र हैं जो सख्त जांच और तलाशी पर कड़ा एतराज जताते हैं.

नकल की बढ़ती प्रवृत्ति दरअसल यह बताती है कि केवल समाज से ही नहीं, बल्कि परिवारों से भी नैतिकता का हृस हो रहा है. हर कोई कम मेहनत या मुफ्त में काफीकुछ हासिल करने की जुगाड़ में लगा हुआ है. नकलची छात्रों के कारण पढ़ाकू और प्रतिभाशाली छात्र पिछड़ते हैं तो हताशा और अवसाद का माहौल बनना स्वाभाविक बात है.

चिंता की एक बात अब अभिभावकों की भूमिका है जो गलत और अनुचित कामों के बाबत बच्चों को रोकना तो दूर की बात है, उलटे उन्हें प्रोत्साहित करने लगे हैं. भोपाल के एक नामी स्कूल की एक शिक्षिका की मानें तो उन्होंने

7वीं कक्षा के एक बच्चे को चिट से नकल करते पकड़ा. चूंकि बच्चे के भविष्य और स्कूल की प्रतिष्ठा के मद्देनजर कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की जा सकती थी, इसलिए बच्चे की करतूत उन्होंने उस के अभिभावकों को बताई.

 

इस शिक्षिका का रोना यह है कि पेरैंट्स ने इसे बेहद हलके में लेते यह कहा कि कोई बात नहीं, बच्चा है. फिर नकल तो आजकल पीएससी, यूपीएससी और कर्मचारी चयन आयोग तक की परीक्षाओं में होती है, उन का कोई क्या बिगाड़ लेता है.

 

यह जवाब सकते में डाल देने वाला है जिस के तहत मांबाप ही अव्वल दरजे का नकलची छात्र तैयार करते नजर आ रहे हैं. होना यह चाहिए था कि वे बेटे को रोकते, नैतिकता और मेहनत का महत्त्व बताते, पर हुआ उलटा. तो बात भविष्य के लिहाज से चिंता की तो है कि समाज कहां जा रहा है और उस के जिम्मेदार वही लोग हैं जिन की जिम्मेदारी एक अच्छे समाज के निर्माण की है. उस का रास्ता ईमानदार और मेहनती युवा पीढ़ी से हो कर जाता है.

कैसे मांबाप बच्चों को सही की जगह गलत सिखा रहे हैं, इसे भोपाल के ही एक ट्रैफिक इंस्पैक्टर की बातों से भी समझा जा सकता है. इस ट्रैफिक इंस्पैक्टर के मुताबिक, वह हर रोज 2-4 ऐसे अवयस्क बच्चों को पकड़ता है जो गलत तरीके से बाइक या कार चला रहे होते हैं. जब इन युवकों को पकड़ कर कानूनी कार्यवाही की जाती है तो वे

अपने रसूखदार पिता का हवाला देते रोब झाड़ते हैं. इस पर जब उन के अभिभावकों को बुलाया जाता है तो वे कुछ लेदे कर बात रफादफा करने की गुजारिश करते हैं. हैरानी और चिंता की बात इन अभिभावकों की यह दलील रहती है कि अरे, तो क्या हुआ, बच्चे हैं, वक्त रहते समझ जाएंगे, यही तो दिन हैं इन के मौजमस्ती करने के.

यह बचाव बच्चे को गलत रास्ते पर चलने को बढ़ावा देने वाला है जो उन से उन का आत्मविश्वास छीन उन्हें उद्दंड बनाता है. इस से बच्चों को जो नुकसान होते हैं, उस से आज बच्चों का बचाव कर रहे मांबाप भी कल को परेशान होते हैं.

रही बात परीक्षाओं में नकल की, तो अभिभावक इसे गलत मानते हैं, ऐसा लगता नहीं. बहुत बड़े पैमाने पर हो रही नकल उन्हें भी कठघरे में खड़ा करती है. यही माहौल शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सैंटरों का है जहां बजाय छात्रों को नसीहत देने के, उन्हें नकल करने के हथकंडे सिखाए जाते हैं. कई कोचिंग संस्थानों में तो नकल करने के तौरतरीकों की क्लास ही अलग से लगती है.

मेहनत बनाम टोटके

जरूरत इस बात की है कि छात्रों को पढ़ने व मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. उन के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें अच्छागलत बताया जाए. पर नकल का बढ़ता माहौल साबित करता है कि हर स्तर पर उन्हें गलत करने के लिए ही शह दी जा रही है.

बिहार के टौपर्स घोटाले का सच अब सामने है कि मांबाप और शिक्षक फर्जीवाड़े के ज्यादा जिम्मेदार हैं जो अपने निकम्मे बच्चों के नंबर बढ़वाने के लिए घूस देते हैं, छलकपट का सहारा लेते हैं और बच्चों में गलत संस्कार रोपते हैं. ऐसे में नैतिकता और निष्पक्षता की बात किसकिस से की जाए, यह सोचना बेमानी है. नकल को ले कर किसी ठोस कानून का न होना भी इस की

वजह है. इसलिए बेहतर यही लगता है कि नकलची बच्चों के पकड़े जाने पर सजा उन के अभिभावकों को दी जाए जो बच्चों को बिगाड़ने के बड़े जिम्मेदार हैं.

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