क्या अलग करने जा रहे हैं करण जौहर

मशहूर निर्देशक और निर्माता करण जौहर को भारतीय सिनेमा में पारिवारिक फिल्मों के लिए जाना जाता है, उनकी सभी पारिवारिक फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर हमेशा सफलता मिली है. लेकिन खबर मिली है कि अब करण जौहर अपने बैनर तले सेक्स कॉमेडी फिल्म बनाने जा रहे हैं जिसके निर्देशन की बाग डोर करण जौहर ने सोनम नायर के हाथों में सौप दी है. इसके पहले करण जौहर के लिए सोनम ‘गिप्पी’ नामक फिल्म बना चुकी हैं.

बीतें हुए कुछ समय में सेक्स कॉमेडी फिल्में बुरी तरह फ्लॉप रही हैं. क्या कूल हैं हम, ग्रेट ग्रैंड मस्ती, मस्तीजादे जैसी फिल्मों को दर्शक नहीं मिले. हालांकि यह फिल्में सेक्स कॉमेडी थी भी नहीं, ये फिल्में द्विअर्थी संवादों से भरपूर अश्लील फिल्में थीं.  

सुत्रों से पता चला है कि करण की फिल्म इन फिल्मों से अलग हो सकती है क्योंकि फिल्म का निर्देशन एक महिला निर्देशक के हाथ में है. सुना गया है कि करण जौहर की सेक्स कॉमेडी फिल्म ऐसे दो लोगों की कहानी है जो सेक्स के बारे में बात करते हैं लेकिन उनका इरादा बुरा नहीं है. 

धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर तले बन रही सेक्स कॉमेडी फिल्म में नए चेहरों को अवसर दिया जाएगा.

एंजलीना ने पहली बार तलाक पर तोड़ी चुप्पी

सिनेमा की गपशप के साथ, मनोरंजन की दुनिया मे पिछले साल की सबसे आश्चर्यचकित कर देने वाली खबर थी, ‘हॉलीवुड अभिनेत्री एंजलीना जोली और सुपरस्टार ब्रैड पिट की शादी की समाप्ति’. 41 वर्षीय एंजलीना जोली ने हाल ही में एक साक्षात्कार में अपनी शादी से संबंधित बातों पर चुप्पी तोड़ी है. अमेरिका की एक साप्ताहिक मैगजीन के अनुसार अभिनेत्री एंजलीना जोली ने एक साल बाद पहली बार अपने बहुचर्चित तलाक पर बात की है.

एंजलीना कहती हैं कि वे कभी भी इस विषय पर ज्यादा बात नहीं करना चाहती. उन्होंने कहा कि वे ज्यादा कुछ भी कहना नहीं चाहती हैं सिवाए इसके कि ‘मेरे लिए, मेरे पूरे परिवार के लिए और हम सभी के लिए वो वाकई एक बहुत मुश्किल समय था, जब हमने एक-दूसरे से अलग होने का फैसला लिया था’.

एंजलीना जोली और ब्रैड पिट के 6 बच्चे हैं. एंजलीना के अनुसार वे, पिट और उनके बच्चे, आज भी हम एक ही परिवार हैं और हमेशा हम एक परिवार ही रहेंगे. वे उम्मीद करती  हैं कि समय के साथ उनका ये परिवार और अधिक मजबूत परिवार हो. आज की बात करें तो उनका पूरा ध्यान उनके बच्चों की तरफ है और वही उनकी प्राथमिकता हैं.

हम आपको बता दें कि पिछले साल यानि कि 2016 के सितंबर में दोनों ने अलग होने को फैसला लिया था और तलाक के लिए आवेदन दिया था. 

एंजलीना जोली अपनी आने वाली फिल्म ‘फर्स्ट दे किल्ड माय फादर’ के प्रचार के लिए हाल ही में कंबोडिया पहुंची थीं.

एंजलीना जोली के अनुसार वे जल्दी ही इन सारी चीजों से बाहर आने की कोशिश कर रही हैं और बहुत जल्दी बाहर वे इस समय से भी बाहर निकल जाएंगी. वे उम्मीद करती हैं कि इस समय से बाहर निकलने के बाद हम एक, और मजबूत परिवार के तौर पर उभर कर आएंगे और पहले से कहीं अधिक करीब होंगे.

25 की उम्र में इस तरह बनिए फाइनेंशियली स्मार्ट

इंजीनियरिंग कॉलेज से पास आउट होते ही 23 साल की उम्र में ही श्रेया को बैंगलुरू की आईटी कंपनी में नौकरी मिल गई थी. श्रेया का पैकेज काफी बढि़या था. नौकरी लगते ही उसकी लाइफस्‍टाइल ही बदल गई. लेकिन नौकरी लगने के साल भर के भीतर ही उसकी यूएस बेस्‍ड कंपनी बंद हो गई. श्रेया की नौकरी चली गई, लाइफस्‍टाइल पर खर्च तो क्‍या उसे अपने जरूरी खर्च के लिए पैसे भी अपने माता-पिता से मांगने पड़े.

नौकरी करते वक्‍त उसे लगता था कि अब कभी भी घर वालों से पैसे नहीं मांगने पड़ेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. श्रेया ने इस बारे में काफी सोचा. अंत में जाकर उसे उन बातों का एहसास हुआ, जहां उसने गलती की. आज हम आपको बताते हैं कि किस तरह 25 की उम्र में आप स्‍मार्ट तरीके से निवेश कर अपना भविष्य सुरक्षित कर सकती हैं.

70 फीसदी का रूल फॉलो करना

एक अच्छी वेल टू डू फैमली में परवरिश होने की वजह से कभी श्रेया को खर्चों की दिक्कत नहीं हुई. लेकिन बड़े शहर में नौकरी करने के बाद उसे इस बात का पता चला कि उसकी सैलरी से केवल रोजमर्रा के खर्चे ही हो पा रहे थे. उसके बाद श्रेया ने नौकरी छोड़ी तो पता चला कि अगर वह अपनी सैलरी का 70 फीसदी खर्च करता और अपने बेफिजूल खर्चों पर लगाम लगाता. तो जरूरत के दिनों में उसके पास एक अच्छी खासी सेविंग्स होती. नौकरी के शुरुआती दिनों में आप पर जिम्‍मेदारियां कम होती हैं. ऐसे में आप आसानी से 30 फीसदी सैलरी को बचा सकते हैं.

इमरजेंसी फंड का निर्माण करना

शुरुआती वर्षों में पार्टी और मूवीज में अनावश्यक खर्चे के कारण कभी भी बचत नहीं कर पाया. इन सब के बाद उसे समझ आया कि हर महीने अपनी सैलरी का 20 फीसदी से 30 फीसदी तक की सेविंग करनी चाहिए. यदि आप भी अपनी सेविंग्‍स का एक हिस्‍सा इमरजेंसी फंड के रूप में बचाते हैं तो नौकरी जाने जैसी स्थिति में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं होती.

सामान्‍य मामलों में आपकी करीब 6 महीने की सैलरी के बराबर आपके पास इमर्जेंसी फंड होना चाहिए. इमर्जेंसी फंड होने के चलते आप अपने लंबे समय के लक्ष्यों पर फोकस कर सकते हैं. साथ ही होम लोन लेने या फिर बड़े खर्चों के लिए भी आपके पास कॉर्पस इकट्ठा हो जाता है.

बिना सोचे समझे बड़ी राशि से खरीदारी न करें

ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन से खुद को उनकी आकर्षक डील्स में फंसने से रोक पाना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन खरीदारी से पहले श्रेया ने इस पर और विचार किया और सोचा कि ये सब वे खर्चे हैं जिसकी कोई खास जरूरत नहीं है. 50 फीसदी डिस्काउंट देखते ही लोग अक्सर अपनी सेविंग्स के लिए जुटाई गई राशि खर्च कर देते हैं. यदि आप भी ऐसा करते हैं, तो अपने को रोकें, आपकी आज की बचत ही आपको लंबे समय के लिए फाइनेंशियली सिक्‍योर बनाते हैं. इसलिए जरूरी है कि अपनी मंथली सैलरी आने के 3 से 5 दिनों के भीतर ही आवश्‍यक निवेश जैसे एसआईपी में इंवेस्‍ट कर दें.

अपने क्रेडिट कार्ड के बिलों का समय पर भुगतान करना

श्रेया को जब उसका पहला क्रेडिट कार्ड मिला तो यह सोचकर बहुत खुश हुई कि अब उसे अपने माता पिता पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. वह जब चाहे शॉपिंग कर सकती है. ऐसे में कई बार उसने अपनी लिमिट भी एक्सीड कर दी. जिसकी वजह से उसके पिता को उसके एकाउंट में पैसे ट्रांस्फर करने पड़े. तब जाकर उसे एहसास हुआ कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए. इससे वह बेफिजूल के खर्चों से बच सकेगी.

सिर्फ सेविंग्स ही नहीं निवेश भी जरूरी है

जब तक श्रेया सीनियर एग्जेक्यूटिव बनी तब तक उसकी अच्छी खासी सेविंग्स हो गई थी. उसे लगा कि पैसों को बढ़ाने के लिए सेविंग्स ही काफी नहीं है. समय के साथ-साथ महंगाई की वजह से पैसों की कीमत कम होती जाती है. सरल भाषा में 5 फीसदी का कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स रेट (यानि कि जनवरी में सीपीआई 5.69 फीसदी था), तो साल की शुरुआत के 100 रुपए की कीमत साल के अंत तक 95 फीसदी रह जाती है. इसलिए आप चाहे तो एफडी में निवेश करें या म्युचुअल फंड्स में आपका लक्ष्य महंगाई को मात देने वाले रिटर्न्स पर होना चाहिए.

चाइनीज वैज हक्का नूडल्स

सामग्री

1 बड़ा चम्मच औलिव औयल

1 बड़ा चम्मच अदरक बारीक कटी हुई

1 बड़ा चम्मच लहसुन बारीक कटा हुआ

1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती बारीक कटी हुई

1 प्याज कटा

1 कप गाजर जूलियन कट

1 कप फ्रैंचबींस कटी हुई

1 कप पत्तागोभी कटी हुई

1 छोटा चम्मच चिली सौस

1 छोटा चम्मच सोया सौस

1 छोटा चम्मच चीनी

1/2 कप वैजिटेबल स्टौक

1/2 छोटा चम्मच कालीमिर्च कुटी हुई

1 पैकेट नूडल्स उबले हुए

1/4 कप हरा प्याज 2 इंच टुकड़ों में कटा हुआ

नमक स्वादानुसार

विधि

एक पैन में तेल गरम कर के अदरक, लहसुन व धनियापत्ती भूनें. अब इस में प्याज, गाजर, पत्तागोभी और बींस व नमक डाल कर सौते करें.

फिर चिली सौस, सोया सौस, चीनी, वैजिटेबल स्टौक मिला कर सब्जियां आधी पक जाने तक ढक कर पकाएं. अब इस में नूडल्स, नमक, कालीमिर्च और हरा प्याज डाल कर अच्छी तरह मिलाएं. पक जाने पर गरमगरम परोसें.

-व्यंजन सहयोग : शैफ रनवीर बरा

इयरिंग्स जो दें आपको ट्रेन्डी लुक

खूबसूरत दिखने के लिए आप हमेशा अपने ड्रेसेज या कपड़ों पर ही ज्यादा ध्यान देती हैं और ज्यादातर दूसरी चीजों पर ध्यान देना भूल जाती हैं. आपको सुंदर बनाने के लिए अगर हम आपकी ज्वैलरी की बात करें तो आपके चेहरे पर खूबसूरत और एलिगेंट इयरिंग, आपको और खूबसूरत बना सकते हैं. कई लोगों को अलग-अलग ड्रेसेज के साथ अलग-अलग इयरिंग्स पहनने का शौक होता है. कई बार आपकी ड्रेस बहुत ही सिंपल और साधारण सी होती है लेकिन अगर आप इस पर बहुत ही प्यारे और मैचिंग और हेवी इयरिंग पहने होंगे तो आप ज्यादा आकर्षक दिख सकती हैं.

आज हम आपको बता रहे हैं कि आपको ज्यादातर अपने कबर्ड या वार्डरोब में किस-किस तरह के इयरिंग्स रखने चाहिए, जिन्हें आप लगभग हर अवसर पर पहन सकती हैं. बदलते ट्रेंड के साथ इयरिंग्स का टेस्ट भी बदलता रहता है पर इन कुछ इयरिंग्स को आप हमेशा अपने पास रख सकती हैं. ये हमेशा ही आपको ट्रेन्डी लुक देंगे.

डेंगलर्स:

कान में लटकने वाले इयरिंग्स कई ड्रेसेज के साथ अच्छे लगते हैं. आप इन्हें कहीं भी, किसी भी पार्टी या किसी भी बड़े-छोटे फंक्शन में पहन सकते हैं. ये लटके हुए इयरिंग्स किसी भी मौसम में, किसी भी तरह के कपड़ों के साथ चल जाते हैं.

मोती के इय़रिंग्स :

अब ये तो देखा ही गया है कि हर किसी के पास एक जोडी तो मोती के इयरिंग्स होते ही हैं. ये पर्ल्स या मोती के इयरिंग्स हर ड्रेस के साथ अच्छे लगते हैं. मोती के इयरिंग्स तब ज्यादा खास लगते हैं जब आप कोई कॉरपोटेरट पार्टी में जाते हैं या फिर आप किसी ऑफिशियल विजिट पर होते हैं.

झुमका :

आपकी खूबसूरती में चार चांद लगाने में सबसे खास भूमिका अदा करने वाला इयरिंग झुमके वाली इयरिंग ही तो हैं. झुमके वाली इयरिंग्स आपकी सभी भारी ड्रेसेज, साड़ी, लहंगे में पर पहनी जाती हैं. इनमें आने वाले कुंदन के इयरिंग्स भी आप पहन सकते हैं.

क्योंकि ये इयरिंग्स अपेक्षाकृत जरा भारी होते हैं, इसीलिए आप इन्हें रोजाना नहीं पहन सकते हैं. किन्हीं खास इवेंट्स, बड़े आयेजनों, पार्टी या शादी में ऐसे भारी इयरिंग्स पहनने पर बहुत खूबसूरत लगते हैं.

डायमंड स्टड :

आपने डायमंड के चमकने वाले छोटे-छोटे इयरिंग्स तो देखे ही होंगे. डायमंड्स के ये छोटे-बड़े स्टड इयरिंग्स बहुत ही खूबसूरत लगते हैं. देखने पर इनका लुक बहुत ही एलीगेंट आता है. आपकी रोजमर्रा की जिंदगी जैसे ऑफिस में, आप रोजाना इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.

चांदबाली :

इस प्रकार के इयरिंग्स आकार में बडे होते हैं. लेकिन लटकन या झुमके जैसे बिल्कुल नहीं होते हैं. ये मल्टी स्टोन्ड होते हैं. और स्टोन के अलावा ये कुंदन और मोती से भी बने होते हैं. आप इन्हें सलवार सूट्स और अन्य भारतीय परिधानों के साथ पहन सकती हैं.

इयर कफ :

इयर कफ तरह के इयरिंग्स आपके पूरे कान को कवर कर लेते हैं. ये आपके कान में थोड़े बड़े से भी लगते हैं. आज के समय की बात करें तो ये थोड़े मॉर्डन किस्म के इयरिंग्स हैं. आजकल आप में से कई लोग इसे पहनने के लिए प्रिफर करती हैं. कलरफुल होने की बजाए अगर ये इयर कफ, ब्लैक और ग्रे रंग में हो, तो ये आपके चेहरे पर ज्यादा खूबसूरत और ट्रेण्डी दिखेंगे.

क्या होगा सोनम की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ का

फिल्म ‘नीरजा’ की सफलता के बावजूद सोनम कपूर को एक भी फिल्म नहीं मिली. ऐसे में सोनम कपूर के पिता अनिल कपूर व बहन रिया कपूर ने सोनम कपूर के करियर को आगे बढ़ाने के मकसद से डेढ़ साल पहले पंजाब की पृष्ठभूमि पर फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ बनाने की घोषणा की थी. इस फिल्म में सोनम कपूर के साथ करीना कपूर और स्वरा भास्कर भी हैं. मगर किसी न किसी वजह से इस फिल्म की शूटिंग अब तक शुरू नहीं हो पायी.

जबकि रजत बक्शी, राजेश बक्शी, चंदन बक्शी और प्रमोद गोंबर मिलकर दिलीप शुक्ला के लेखन व निर्देशन में पंजाब की ही पृष्ठभूमि पर रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ का निर्माण शुरू कर दिया है. फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ में पंजाब की मशहूर अदाकारा दिलजोत के साथ जिम्मी शेरगिल की रोमांटिक जोड़ी है. इस फिल्म की लगातार दस दिन तक मनाली में शूटिंग भी हो चुकी है. और दिलीप शुक्ला इस फिल्म को 2017 में ही प्रदर्शित करना चाहते हैं.

अब देखना होगा कि रिया कपूर अपनी बहन सोनम कपूर वाली फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ को शुरू करती हैं या हमेशा के लिए बंद कर देती हैं.

रिमूवर से नहीं, ऐसे हटाएं नेल पॉलिश

कई बार ऐसा होता है कि आपको किसी खास मौके पर जाना होता है और नेल पॉलिश का रंग आपकी ड्रेस के साथ मेल नहीं खा रहा होता है. और इतना ही नहीं आपका नेल पॉलिश रिमूवर भी खत्म हो जाता है. ऐसे मौके पर आप उदास हो जाती हैं. लेकिन आपको उदास होने की कोई जरूरत नहीं है. कुछ उपायों को अपनाकर आप बिना नेल पॉलिश रिमूवर के नाखूनों से नेल पॉलिश हटा सकती हैं.

अल्कोहल

अगर आपके घर में अल्कोहल है तो आप इसकी मदद से नेल पॉलिश छुड़ा सकती हैं. कॉटन बॉल को लेकर अल्कोहल में डुबा लें और उसे धीरे-धीरे नाखून पर रगड़ें. ऐसा करने से नेल पॉलिश उतर जाएगी.

नेल पॉलिश

क्या आपको पता है हर नेल पॉलिश में रिमूवल का गुण होता है. अगर आपके पास नेल पॉलिश रिमूवर नहीं है तो आप किसी दूसरे नेल पॉलिश को पुराने नेल पॉलिश पर लगाकर तुरंत पोछ लें. ऐसा करने से पुराना पॉलिश उतर जाएगा.

सिरका

सिरके की मदद से भी आप नेल पॉलिश उतार सकती हैं. इसे भी कॉटन बॉल की मदद से नाखूनों पर लगाएं. अगर आपको और बेहतर रिजल्ट चाहिए तो सिरके को एक कटोरी में लेकर उसमें कुछ बूंद नींबू के रस की मिला लें. इस घोल से नेल पॉलिश साफ करें.

टूथपेस्ट

ये सुनने में भले ही बहुत मजेदार लग रहा हो लेकिन टूथपेस्ट एक बहुत कारगर उपाय है. थोड़ा सा टूथपेस्ट लेकर नाखूनों पर लगा लें. अब इसे कॉटन की मदद से धीरे-धीर रगड़ें. कुछ ही देर में नाखून साफ हो जाएंगे.

गर्म पानी

नेल पॉलिश छुड़ाने का ये सबसे आसान तरीका है. एक कटोरी में गर्म पानी ले लें और अपने नाखूनों को 10 मिनट तक उसमें डुबो कर रखें. उसके बाद कॉटन से मल लें. पुराना नेल पॉलिश उतर जाएगा.

बीएमसी चुनाव में परेशान हुए सेलेब्स

खबर है कि अभिनेता वरुण धवन बी एम सी चुनाव के लिए वोट डालने जब बांद्रा वेस्ट में पोलिंग बूथ पर पहुंचे तो उनका नाम वोटिंग लिस्ट से गायब था. वे काफी परेशान हुए, पर निराश होकर वापस बिना वोट दिए ही लौट गए.

उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि देश का नागरिक होने के नाते सबको वोट देना जरुरी है और वे खुद भी जयपुर से मुंबई वोट देने ही आये थे. लेकिन अब वे इस बात की खोजबीन करेंगे कि आखिर उनका नाम वोटिंग लिस्ट में क्यों नहीं है?

इसके अलावा शेफ संजीव कपूर, डिजाइनर शाइना एन सी और फिल्म मेकर अशोक पंडित ने भी इसी तरह की परेशानियों का सामना किया. इतना ही नहीं हर बूथ पर नाम न मिलने या फिर गलत नाम से लोग परेशान दिखें.

कैम्पेनिंग पर करोड़ों खर्च करने से पहले नेताओं को ये देख लेना चाहिए कि वोटर का नाम उनके लिस्ट में सही तरह से है या नहीं. ताकि वे सही मतदान कर सकें.

लाहुल-स्पीति का अथाह सौंदर्य

चारों तरफ झीलों, दर्रों और हिमखंडों से घिरी, आसमान छूते शैल शिखरों के दामन में बसी लाहुल-स्पीति की घाटियां अपने सौंदर्य और प्रकृति की विविधताओं के लिए विख्यात हैं. जहां एक तरफ इन घाटियों की प्राकृतिक सौंदर्यता निहारते आंखों को सुकून मिलता है वहीं दूसरी तरफ हिंदू और बौद्ध परंपराओं का अनूठा संगम आश्चर्यचकित कर देता है. वैसे तो लाहुल-स्पीति दोनों को मिला कर एक जिला बनता है, लेकिन ये दोनों ही जगह अपनेअपने नाम के आधार पर सौंदर्य की अलगअलग परिभाषाएं गढ़ती हैं.

स्पीति 

स्पीति हिमाचल प्रदेश के उत्तरपूर्वी भाग में हिमालय की घाटी में बसा है. स्पीति का मतलब बीच की जगह होता है. इस जगह का यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह तिब्बत और भारत के बीच स्थित है. यह जगह अपनी ऊंचाई और प्राकृतिक सुंदरता के लिए लोकप्रिय है. स्पीति क्षेत्र बौद्ध संस्कृति और मठों के लिए भी प्रसिद्ध है.

इतिहास : हिमालय की गोद में बसी इस जगह के लोगों को स्पीतियन कहते हैं. स्पीतियन लोगों का एक लंबा इतिहास है. इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि स्पीति पर वजीरों का शासन था जिन्हें नोनो भी कहा जाता था. वैसे तो समयसमय पर स्पीति पर कई लोगों ने शासन किया लेकिन स्पीतियन लोगों ने किसी की गुलामी ज्यादा दिनों तक नहीं सही. वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद यह पंजाब के कांगड़ा जिले का हिस्सा हुआ करता था. 1960 में यह लाहुल-स्पीति नामक जिले के रूप में एक नए प्रदेश यानी हिमाचल प्रदेश के साथ जुड़ा. बाद में स्पीति को सब डिवीजन बनाया गया और काजा को मुख्यालय. 

आबादी : स्पीति और उस के आसपास के क्षेत्रों को भारत में सब से कम आबादी वाले क्षेत्रों में गिना जाता है. इस क्षेत्र के 2 सब से महत्त्वपूर्ण शहर काजा और केलोंग हैं. कुछ वनस्पतियों और जीव की दुर्लभ प्रजातियां भी स्पीति के महत्त्व को बढ़ाती हैं. यहां के लोग गेहूं, जौ, मटर आदि फसलें उगाते हैं. 

यातायात : स्पीति जाने के लिए सब से निकटतम हवाई अड्डा भुंतर है, जो नई दिल्ली और शिमला जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा है. अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक भुंतर एअर बेस के लिए दिल्ली से जोड़ने वाली उड़ानों का लाभ ले सकते हैं. स्पीति से निकटतम रेलवे स्टेशन जोगिंद्रनगर है, जो छोटी लाइन का रेलवे स्टेशन है. इस के अलावा स्पीति से चंडीगढ़ और शिमला नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जो भारत के प्रमुख शहरों से जुड़े हैं.

यात्री रेलवे स्टेशन से स्पीति के लिए टैक्सियों और कैब की सुविधा आसानी से ले सकते हैं. सड़क से स्पीति राष्ट्रीय राजमार्ग 21 के माध्यम से पहुंचा जा सकता है. स्पीति तक रोहतांग दर्रा और कुंजम पास दोनों से पहुंचा जा सकता है.

मौसम : नवंबर से जून तक भारी बर्फबारी के कारण स्पीति जाने वाले सभी मार्ग बंद हो जाते हैं. इसलिए वहां सर्दियों को छोड़ कर साल भर कभी भी आया जा सकता है. गरमी के मौसम में मई से अक्तूबर तक का महीना स्पीति आने के लिए अनुकूल है क्योंकि यहां का तापमान 15 डिगरी सैल्सियस से ऊपर नहीं जाता है. स्पीति बारिश के छाया क्षेत्र में स्थित है, इसलिए यहां ज्यादा बारिश नहीं होती है. सर्दियों के दौरान यह जगह बर्फबारी से ढक जाती है औैर तापमान शून्य डिगरी से नीचे चला जाता है.

दर्शनीय स्थल

स्पीति एक ऐसी घाटी है जहां सदियों से बौद्ध परंपराओं का पालन हो रहा है. यह घाटी अपने कई मठों के लिए देश और विदेश में विशेष स्थान रखती है. यहां कई मठ ऐसे हैं जिन की स्थापना सदियों पहले की गई थी. इन में तबो और धनकर मठ प्रमुख हैं.

तबो :  तबो मठ को स्पीति घाटी में 996 में खोजा गया. यह स्थान बहुत ही सुंदर है. यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. बताया जाता है कि यह मठ हिमालय पर्वतमाला के सब से पुराने मठों में से एक है. यहां की सुंदर पेंटिंग्स, मूर्तिंयां और प्राचीन ग्रंथों के अलावा दीवारों पर लिखे गए शिलालेख यात्रियों को बहुत आकर्षित करते हैं.

धनकर : यह मठ धनकर गांव में है जोकि हिमाचल के स्पीति क्षेत्र में समुद्र तल से 3,890 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह जगह तबो और काजा 2 प्रसिद्ध जगहों के बीच में है. स्पीति और पिन नदी के संगम पर स्थित धनकर, दुनिया की ऐतिहासिक विरासतों में भी स्थान रखता है.

काजा : काजा स्पीति घाटी का उप संभागीय मुख्यालय है. यह स्पीति नदी के बाएं किनारे पर खड़ी चोटी की तलहटी पर स्थित है. काजा में रैस्ट हाउस और रहने के लिए कई छोटेछोटे होटल बने हुए हैं. यहां से हिक्किम, कोमोक और लांगिया मठों पर घूमने जाया जा सकता है. 

अन्य दर्शनीय स्थल

स्पीति आने वाले लोगों के लिए घूमने के स्थान की कमी नहीं है. यहां किब्बर, गेट्टे, पिन वैली, लिंगटी वैली, कुंजम पास और चंद्रताल कुछ ऐसी जगहें हैं जहां जाए बिना स्पीति की यात्रा पूरी नहीं होती.

लाहुल 

कुछ लोग इसे हिमालयन स्कौटलैंड कहते हैं. वैसे लाहुल को लैंड विद मैनी पासेस भी कहा जाता है क्योंकि लाहुल से दुनिया का सब से ऊंचा हाईवे गुजरता है जो इसे मनाली, लेह, रोहतांग ला, बारालाचा ला, लचलांग ला और तंगलांग ला से जोड़ता है.

नदियां : हिमालय की पर्वत शृंखलाओं से घिरे लाहुल में जो शिखर दिखाईर् देते हैं उन्हें गयफांग कहा जाता है. साथ ही, यहां चंद्रा और भागा नाम की 2 नदियां बहती हैं. इन्हें यहां का जलस्रोत माना जाता है. चंद्रा नदी को यहां के लोग रंगोली कहते हैं. इस के तट पर खोक्सर, सिसु, गोंढला और गोशाल 4 गांव बसे हुए हैं जबकि भागा नदी केलौंग और बारालाचा से बहती हुई चंद्रा में मिल जाती है. जब ये दोनों नदियां तांडी नाम की नदी में मिलती हैं तो इसे चंद्रभागा कहा जाता है. 

भाषा और रोजगार : लाहुल की जमीन बंजर है, इसलिए यहां घास और झाडि़यों के अलावा ज्यादा कुछ नहीं उगता. स्थानीय लोग खेती के नाम पर आलू की पैदावार करते हैं. पशुपालन औैर बुनाई ही यहां के लोगों का प्रमुख रोजगार है. यहां के घर लकड़ी, पत्थर और सीमेंट के बने होते हैं. लाहुल के निवासियों की भाषा का वैसे तो कोई नाम नहीं है लेकिन इन की  भाषा लद्दाख और तिब्बत से प्रभावित है. 

यातायात : लाहुल पहुंचने के लिए भी स्पीति की तरह भुंतर हवाई अड्डा एकमात्र साधन है. वैसे टैक्सियों औैर कैब के जरिए भी लाहुल पहुंचा जा सकता है. लाहुल का कोई अपना रेलवे स्टेशन नहीं है, इसलिए यात्रियों को पास में स्थित जोगिंदर नगर रेलवे स्टेशन उतरना पड़ता है. फिर वहां से टैक्सी और कैब से सड़क मार्र्ग द्वारा लाहुल जाया जाता है. 

प्रमुख स्थल

लाहुल के आसपास घूमने के लिए केलौंग, गुरुकंटाल मठ, करडांग, शाशुर, तैयुल, गेमुर, सिसु और गोंढाल जैसे प्रमुख स्थल हैं जो किसी न किसी विशेषता की चादर ओढ़े हुए हैं. 

ये 10 सीरियल दिलाएंगे आपको बचपन की याद

आपके बचपन की यादों को ताजा करने के लिए हम लाये है 10 पुराने लेकिन आपके ऑल टाइम फेवरिट हिंदी सीरियल जो अभी भी आपकी यादो में बसे हुए हैं.

मालगुडी डेज

आर के नारायण की कहानियों पर आधारित दूरदर्शन पर आने वाला सीरियल मालगुडी डेज दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय था. इस सीरियल का बच्चा स्वामी सबका मनपसंद था.

विक्रम और बैताल

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने अपने समय में यह सीरियल ना देखा हो. यह प्राचीन भारतीय कहानियों पर आधारित सीरियल था जिसका प्रमुख उद्देश्य बच्चो को मनोरंजन के साथ साथ शिक्षित भी करना था.

महाभारत

भारतीय इतिहास का सबसे लोकप्रिय और चर्चित सीरियल था महाभारत जो महान भारतीय ग्रन्थ महाभारत पर आधारित था. आज भी लोग बी आर चोपड़ा की सीरियल महाभारत का नाम सुनते ही खुश हो जाते हैं.

रामायण

यह पुरे भारतीय इतिहास का सबसे चर्चित और प्रसिद्ध सीरियल रहा, जिसे रामानंद सागर ने लिखा और डायरेक्ट किया. यह 78 एपिसोड का सीरियल दूरदर्शन पर 25 जनवरी 1987 से 31 जुलाई 1988 तक प्रत्येक रविवार सुबह 9.30 बजे आता था.

चंद्रकांता

यह प्रसिद्ध धारावाहिक देवकीनंदन खत्री के उपन्यास पर आधारित था. इसके मुख्य पात्र क्रूर सिंह और जाबांज तो इसे देखने वालो के जेहन में आज भी ताजा है.

भारत एक खोज

यह भारत की 5000 वर्षो की गाथा का 53 एपिसोड का सीरियल था. इसमें भारत की प्राचीन सभ्यता से लेकर भारत की आजादी तक की प्रमुख घटनाओं का वर्णन किया गया था.

ब्योमकेश बक्शी

ब्योमकेश बक्शी, बासु चटर्जी ने डायरेक्ट किया था. यह सीरियल जासूसी घटनाओं पर आधारित था. इसमें रजत कपूर ने ब्योमकेश बक्शी का किरदार निभाया, जिसके लिए काफी प्रशंसा मिली.

तहकीकात

यह जासूसी रोमांचक सीरियल विभिन्न अपराध जांचों पर आधारित रहा था. विजय आनंद ने इसमें सैम डिसिल्वा और सौरभ शुक्ला ने गोपीचंद की भूमिका निभाई.

सुरभि

दूरदर्शन के शुरूआती दिनों में सुरभि सबसे चर्चित और लोकप्रिय सांस्कृतिक कार्यक्रम था.  इस कार्यक्रम को होस्ट किया था रेणुका शहाने और सिद्धार्थ कक ने.

परमवीर चक्र

यह भारतीय युद्ध गाथाओं पर आधारित सीरियल उन सैनिकों को समर्पित था जिन्हें अत्यधिक बहादुरी के लिए भारत सरकार द्वारा परमवीर चक्र प्रदान किया गया. इसे चेतन आनंद ने डायरेक्ट किया, अमरिंदर पाल ने आवाज दी और संगीत दिया प्यारे मोहन ने.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें