क्या आपको भी नहीं लगती है भूख!

क्या आपको भी भूख नहीं लगती, अगर हां तो आप कुछ कुदरती नुस्खें अपनाकर अपनी भूख बढ़ा सकती हैं. मुनक्का के सेवन से आप अपनी भूख बढ़ा सकती हैं.

जानिए मुनक्का के सेवन के फायदे…

1. अगर आपको भूख कम लगती है तो रात को दूध में 30-40 मुनक्‍का को उबालकर नियमित रूप से पीएं भूख बढ़ जाएगी. इससे शरीर की कमजोरी भी दूर होगी.

2. कई बार कब्ज की वजह से भी भूख नहीं लगती है. कब्ज बहुत ज्यादा है तो मुनक्का के दूध के साथ ईसबघोल भी मिला लें. इससे कब्ज भी दूर होगी और पेट भी साफ रहेगा.

3. जिन लोगों को बार-बार घबराहट होती है और हृदय में दर्द होता है तो उनके लिए भी रामबाण है मुनक्का.

4. 8 से 10 मुनक्का को 2 लौंग के साथ पानी में उबालें. बाद में मुनक्का को पीसकर छानकर चाय की तरह पीएं. ये नुस्खा डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छा है.

“मैंने हमेशा नई चुनौतियां स्वीकार की”

फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से चर्चा में आयी अदाकारा हुमा कुरैशी ने अच्छी खासी शोहरत बटोर ली है. उनकी ‘एक थी डायन’ जैसी इक्का दुक्का फिल्मों को नजरंदाज कर दें, तो अब तक प्रदर्शित सभी फिल्में सुपरहिट रही हैं. हुमा इन दिनों जोश खरोश से भरी नजर आती हैं. इसकी वजह भी है. हुमा कुरैशी की अक्षय कुमार के साथ आने वाली फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ 17 फरवरी को प्रदर्शित होने जा रही है. जबकि उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘वायसराय हाउस’  मार्च माह में प्रदर्शित हो रही है.

अब तक के अपने करियर की यात्रा को किस तरह से देखती हैं?

बहुत ही अच्छा लग रहा है. मैंने कभी सोचा नहीं था कि बॉलीवुड में मुझे इतनी जल्दी इतनी सफलता मिल सकेगी. पर पांच साल के अंदर बहुत कुछ रोचक तरीके से बदल गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे हर फिल्म में एकदम अलग तरह के किरदार निभाने के मौके मिले और हर बार लोगों ने मुझे पसंद किया. यूं तो काम करते हुए मजा आ रहा है. लेकिन जब भी मेरे पास नयी फिल्म का ऑफर आता है, तो मुझे इस बात का ख्याल रखना पड़ता है कि मैं कुछ नया कैसे करूंगी. वैसे भी अब सिनेमा काफी बदल चुका है. एक कलाकार के तौर पर मैं इस बात में यकीन करती हूं कि वह काम करो, जो आपको चुनौती दे. मैंने हमेशा नई नई चुनौतियां स्वीकार की हैं. मेरे लिए हर दिन रोचक होना जरुरी है.

संघर्ष के दिन तो याद आते ही होंगे?

आज मैं जिस मुकाम पर पहुंची हूं, वहां तक पहुंचने के लिए मुझे बड़ी मेहनत करनी पड़ी है. मुझे अच्छी तरह से याद है कि मुझे मुंबई में अपने करियर को बनाने के लिए मेरे पिता ने मुझे सिर्फ एक वर्ष का समय दिया था. बॉलीवुड के बारे में सभी को पता है कि यहां किस ढंग से काम होता है. मैंने तमाम रिजेक्शन सहे. ऑडिशन के लिए लंबी कतारों में खड़ी हुई हूं. पर मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है. अंततः मेरी मेहनत मेरे अंदर के अभिनय क्षमता ने मुझे सफलता दिला दी.

आपको नहीं लगता कि गैंग्स ऑफ वासेपुर से जिस अंदाज में आपका करियर शुरू हुआ था, उसे देखते हुए तो आपका करियर काफी आगे जाना चाहिए था?

पता नहीं, सर! पर यदि आपको ऐसा लगता है, तो मैं इससे बहुत खुश हूं. आपकी बातों से यह जाहिर होता है कि मेरी क्षमता में आपको विश्वास है. मैंने भी अपनी तरफ से बेहतर काम करने की कोशिश की. मैं किसी भी तरह की प्लानिंग करने में यकीन नहीं करती. मेरे पास जिन फिल्मों के ऑफर आते हैं, उनमें से जो फिल्में मुझे पसंद आती हैं, वह मैं कर लेती हूं. जिनका कथानक मुझे पसंद नहीं आता, उन्हें मैं नहीं करती. मुझे उम्मीद है कि ‘जॉली एलएलबी 2’ के प्रदर्शन के बाद स्थितियां बदलेंगी.

जॉली एलएलबी 2’ करने के लिए किस बात ने आपको इंस्पायर किया?

इसकी कहानी बहुत अच्छी है, फिर मुझे सुभाष कपूर के साथ काम करना था. इस फिल्म के हीरो अक्षय कुमार हैं, जिनके साथ मुझे काम करना था. मैं अक्षय कुमार से काफी प्रभावित हूं. वह पिछले कुछ वर्षों से एक के बाद एक बहुत ही अच्छी अलग तरह की फिल्में कर रहे हैं. वह चरित्रों को पकड़ कर उन्हें बाखूबी निभा रहे हैं. मैंने उनके अनुशासन और उनके फोकस को लेकर भी कई कहानियां सुनी थी. इसलिए भी मैं उनके साथ काम करना चाहती थी. मैंने जितना सोचा था, इस फिल्म को करते हुए उससे कही ज्यादा बेहतर अनुभव हुए फिल्म के दो टे्लर और तीन गाने बाजार में आ चुके हैं, जिनका बहुत अच्छा रिस्पांस मिला है.

आपके अनुसार जॉली एलएलबी 2’ है क्या?

लोग इसे कोर्ट रूम ड्रामा कह रहे हैं. मैं भी मानती हूं कि यह कोर्ट रूम ड्रामा है. पर बहुत अलग तरह का है. इस फिल्म में ऐसा कोर्ट रूम ड्रामा है, जो बहुत अलग है. इससे पहले ‘जॉली एलएलबी’ में कोर्ट रूम ड्रामा एक लैंड मार्क था. मगर हमारी फिल्म की कहानी का जॉली एलएलबी से कोई संबंध नहीं है. उस फिल्म में अलग जॉली था, अलग कहानी थी. इस फिल्म में अलग जॉली है. अलग कहानी है. हम लोग एक विचार को आगे लेकर जा रहे हैं, अब फिल्म में अक्षय कुमार हैं. इसलिए कहानी थोड़ी बड़ी और बेहतरीन हो गयी है. फिर मैं इस फिल्म का हिस्सा हूं. फिल्म में मनोरंजन के साथ साथ संदेश भी है.

फिल्म का संदेश या विचार क्या है?

इस फिल्म में कोर्ट रूम ड्रामा तो कोर्ट रूम के अंदर होता है, पर किसी मुकदमे को लेकर अदालत से बाहर जो ड्रामा चलता है, उसका भी चित्रण है. फिल्म की कहानी में कुछ रहस्य भी है.

आपने जॉली एलएलबी देखी होगी. जॉली एलएलबी 2’ उसी का सिक्वअल है, तो दोनों फिल्मों में क्या फर्क पाती हैं?

बहुत फर्क है. कहानी में अंतर है. यह बड़े बजट की फिल्म है. इसका कैनवास बड़ा है. इसमें कॉमेडी, ड्रामा, ह्यूमर, सब कुछ बहुत अलग स्तर पर है. इसके साथ ही इस बार तो इस फिल्म में मैं हूं.

इसके अलावा क्या कर रही हैं?

मैंने गुरिंदर चड्ढा के निर्देशन में एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘वायसराय हाउस’ की है, जिसमें वायसराय हाउस के अंदर कार्यरत एक हिंदू लड़के व एक मुस्लिम लड़की की प्रेम कथा है. मैंने इसमें मुस्लिम लड़की आलिया नूर का किरदार निभाया है, जो कि उर्दू अनुवादक है. यह फिल्म 1947 के देश के बंटवारे से पहले के चार पांच माह की कहानी है.

‘वायसराय हाउस’ तो पीरियड व ऐतिहासिक फिल्म है. इसके लिए आपने कोई शोधकार्य किया था?

जी हां! इतिहास मेरा प्रिय विषय रहा है. मैंने इतिहास में ऑनर्स किया है, जब मैं इस फिल्म का हिस्सा बनी, तो शूटिंग करने से पहले मैंने काफी पढ़ाई की. काफी रिसर्च किया. ‘इंडिया रिमेंम्बर्ड’, ‘चिल्ड्रेन इन द मिड नाइट’ सहित कई किताबें पढ़ी. उस दौर के कुछ लोगों से मिली, बातचीत की. उस दौर में जब एक कैबिनेट मंत्री थी, राजकुमार निर्मित कौर उनकी नीस ही उर्दू अनुवाद थी, जो कि अब 98 साल की हैं, उनसे मिली बहुत कुछ उनसे जानने का मौका मिला. लंदन में गुरिंदर ने ही उनसे मेरी मुलाकात करवायी, मुझे यह जानना था कि उस वक्त यह टीनएजर लड़की कैसी होती है, किस तरह से बात करती है.

इस फिल्म में तमाम विदेशी कलाकारों के साथ आपने काम किया है, क्या अनुभव मिले?

मुझे लगा कि कलाकार कलाकार होता है, फिर चाहे वह भारतीय हो या विदेशी. हां! बहुत अनुशासन प्रिय होते है. मैंने देखा कि उनके अंदर भारत को लेकर जानने की इच्छा है. उनके अंदर भारत को लेकर बहुत उत्सुकता है.

फिल्म वायसराय हाउस को कहां फिल्माया गया है?

जोधपुर और दिल्ली में इसे फिल्माया है. फिल्म देश के बंटवारे की पृष्ठभूमि में भारत की कहानी है. इस फिल्म को करना बहुत कठिन था, फिल्म बहुत निजी भी है. इस फिल्म को करके मैं उत्साहित भी हूं. मुझे गर्व हैं कि मैंने ‘वायसराय हाउस’ जैसी फिल्म की है.

गुरिंदर चड्ढा को लेकर क्या कहेंगी?

गुरिंदर चड्ढा से मिलने के बाद मैंने सीखा कि एक पंजाबन को कही भी ले जाओ, वह हमेशा पंजाबन रहेगी. गुरिंदर चड्ढा के माता पिता भारतीय पंजाबी हैं, पर उनका जन्म ब्रिटेन के साउथ हॉल में हुआ, जहां उनके पिता काम करते थे, तो वह पूरी तरह से ब्रिटिश हैं. पर वह बहुत देशी हैं, भारतीय हैं, दिल से तो वह पंजाबन ही हैं. मैं भी पंजाबन हूं. मैं पंजाबी समझ लेती हूं. पर बोल नहीं पाती. पर पता नहीं क्यों गुरिंदर को लगता था कि मैं पंजाबी बहुत अच्छा बोलती हूं, तो वह मुझे हमेशा पंजाबी में ही बात करती थीं. उनके साथ काम करते हुए मैंने पाया कि गोरों के बीच वह मेरे अंदर अपना घर पाती थी. फिल्म भी खूबसूरत बनी है. आप यह मान लें कि यह फिल्म एक ब्रिटिश पंजाबी भारतीय देश के बंटवारे को किस नजरिए से देखे, उसकी कथा हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर बहुत ही बैलेंस्ड नजरिया पेश किया है. किसी एक देश या भावना पर आधारित यह फिल्म नहीं है. उन्होंने किसी को अच्छा बुरा दिखाने की बजाए, जो वास्तव में घटित हुआ था, उसको उसके सही परिप्रेक्ष्य रूप में पेश किया है.

तमाम कलाकार वेब सीरिज कर रहें हैं और आप?

जो वेब सीरिज कर रहे हैं, उन्हें मैं बधाई देती हूं. पर फिलहाल मैं उससे दूर हूं.

आपने गौहर खान के साथ एक लघु फिल्म एक दोपहर की है. क्या कहेंगी?

इस फिल्म की निर्देशक स्वाती, हबीब फैजल की सहायक हैं. एक दिन हबीब फैजल ने मुझे फोन किया कि उनकी सहायक एक फिल्म बना रही हैं, और वह चाहती हैं कि मैं यह फिल्म करूं. जब कोई मुझसे कहता है कि वह फिल्म मैं ही करूं, तो मेरी उत्सुकता बढ़ जाती है कि आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है? इसी उत्सुकता के साथ जब मैं स्वाती से मिली, तो उसमें मुझे जोश नजर आया. कहानी अच्छी लगी. हमने एक दिन में ही पूरी फिल्म की शूटिंग पूरी की.

अब तक आपने जो किरदार निभाए हैं, उनमें से किस किरदार ने आपकी निजी जिंदगी पर प्रभाव डाला है?

किसी किरदार ने मेरी जिंदगी पर असर डाला या नहीं डाला, यह तो नहीं बता सकती. पर ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ मेरे करियर की बहुत खास फिल्म है. इसी फिल्म से मैंने अपनी जिंदगी व करियर में बहुत कुछ पाया है. इस फिल्म से पहले मुझे भी नहीं पता था कि मैं किस तरह का अभिनय कर सकती हूं. मुझे सिर्फ यह पता था कि मुझे अभिनय करना है. पर मेरे अंदर अभिनय की गुणवत्ता को इस फिल्म ने उजागर किया, इस फिल्म ने मुझे अपने अंदर के कलाकार को जानने पहचानने का मौका दिया. वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति भी दिलायी.

आपके सपने क्या हैं?

कई सपने हैं. एक बायोपिक फिल्म करनी है. एक्शन फिल्में करनी हैं. एक मेंटल लड़की का किरदार निभाना चाहती हूं. क्षेत्रीय फिल्मों में भी काम करना चाहती हूं. मैं अच्छा काम करना चाहती हूं और इंज्वॉय करना चाहती हूं. मेरे सपनों का कोई अंत नहीं है.

आइटम नंबर को लेकर आपकी क्या सोच है?

मेरा मानना है कि यदि फिल्म में आइटम नंबर की जरूरत है, तो आइटम नंबर होने चाहिए. कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि आइटम नंबर की वजह से नारियों के साथ हिंसा हो रही है, नारियों के साथ बलात्कार हो रहे हैं, तो यह गलत है.

बर्थडे स्पेशल: सिंगर से एक्टर बनीं श्रुति

अक्‍सर लोग कहते हैं कि जिस फील्‍ड में डिग्री हासिल हो, पढ़ाई हो उसी में करियर बनाना चाहिए. जिससे सफलता मिल सके लेकिन शायद बॉलीवुड एक्‍ट्रेस श्रति हासन के मामले में ऐसा नहीं है. श्रुति ने डिग्री तो दूसरे विषय में ली लेकिन करियर एक्‍टिंग में बना रही हैं.

सबसे खास बात तो यह है कि 28 जनवरी 1986 में जन्‍मीं श्रुति को एक्‍टिंग में सफलता भी मिल रही है. ऐसे में आइए आज इस खास दिन पर जानें एक्‍ट्रेस श्रुति की लाइफ के बारे में…

श्रुति का जन्‍म 28 जनवरी 1986 को चेन्नई में हुआ था. श्रुति उन अभिनेत्रियों में से हैं जो गायिका भी हैं. एक्‍टर कमल हासन और एक्‍ट्रेस सारिका ठाकुर की बड़ी बेटी श्रुति आज बॉलीवुड में खास पहचान बना चुकी हैं.

आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्‍होंने 6 साल की उम्र में ही सिंगिंग करियर की शुरुआत कर दी थी. श्रुति ने सबसे पहले अपने पिता कमल हासन की फिल्म ‘तेवर मगन’ में आवाज दी. उसके बाद उन्होंने फिल्म ‘चाची 420’ में भी गाना गाया.

आठ भाषाएं बोलने वाली श्रुति एक अच्छी डांसर भी हैं. श्रुति ने 14 साल की उम्र में स्क्रिप्‍ट लिखना भी शुरू कर दिया था. फिल्मों में आने से पहले श्रुति मॉडलिंग करती थीं.

स्‍कूल में श्रुति नहीं चाहती थीं कि कोई उन्‍हें एक्‍टर की बेटी समझे. इसलिए वह अपना नाम पूजा रामचरन बताती थीं. साइकोलॉजी की स्‍टूडेंट रहीं श्रुति हासन ने कैलिफोर्निया के म्यूजिशियन इंस्टिट्यूट से म्‍यूजिक में डिग्री ली है.

कुछ इस तरह बनेगा अब हर घर डिजाइनर

घर ही एक ऐसी जगह होती है जहां हर व्यक्ति अपनी सारी चिंताओं, परेशानियों को भूल कर कुछ पल सुकून के गुजारता है. पर घर में सुकून के पल तभी मिलेंगे जब आप का घर सुविधाजनक और डिजाइनर होगा. काली कट के डिजाइनर और वास्तुकार सिंधु कृष्णा कुमार कहते हैं, ‘‘आज हर घर डिजाइनर घर है. घर में डिजाइनर फैक्टर असली हीरो है.’’

ईकोफ्रैंडली घर का क्रेज

केरल हमेशा ईकोफ्रैंडली आर्किटैक्चर के लिए आगे रहा है पर कुछ समय से ईकोफ्रैंडली आर्किटैक्चर को पीछे रख कर वैस्टर्न स्टाइल के आर्किटैक्चर की नकल की जाने लगी है. साथ ही इस बात पर भी ध्यान दिया जाता है कि ऐसी संरचनाओं का निर्माण करने से जमीन पर असर न पड़े. बहुत से लोग तो आजकल पुराने व नए जमाने के स्टाइल के फ्यूजन वाले घर बनवा रहे हैं. मगर सब से जरूरी और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आजकल बहुत से लोग विशेषरूप से ऐसे घरों में पैसा लगाना चाहते हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से भी सुरक्षित हों.

कोचीन के वास्तुकार शिंटो वर्गीस कहते हैं कि अब समकालीन शैली केरल पहुंच गई है. यह शैली समय और पैसा बचाने में काफी प्रभावी है. अब यूरोपियन निर्माण शैली में भी केरल एनआरआई संख्या की वजह से काफी आगे है.

जिन डिजाइनों में अधिक ऊर्जा की बचत का विकल्प होता है और जो ईकोफ्रैंडली सामग्री से बने होते हैं, उन का चलन अधिक है. इस बात को मानना होगा कि किसी भी सोसाइटी का आर्किटैक्चर वहां के सांस्कृतिक, राजनीतिक व आर्थिक प्रभावों को दर्शाता है. केरल में एनआरआई का पैसा ही वहां स्टाइल्स का निर्धारण कर रहा है.

अंधविश्वासमुक्त घर

आजकल कुछ लोग 100 वर्गफुट में भी रह कर खुश हैं, क्योंकि उन्हें उसी में मौडर्न समय की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे घर भी भारत में बहुत लोकप्रिय होते जा रहे हैं.

शिंटो वर्गीस कहते हैं कि आजकल कुछ लोग घर बनवाते समय वास्तु पर भी ध्यान देने लगे हैं. वास्तु का पागलपन इतना अधिक बढ़ गया है कि धर्म के पागलपन से भी आगे निकल गया है. लोग इस पर आंख मूंद कर विश्वास कर रहे हैं. अब यह भी एक तरह से अंधविश्वास बनता जा रहा है. इस तरह के खोखले अंधविश्वासों पर यकीन करने की बजाय घर को सुंदर व सुविधाजनक बनाने में ही समझदारी है.

आजकल ईकोफ्रैंडली व ऐनर्जी फ्रैंडली घरों की लोकप्रियता दोबारा बढ़ने लगी है. रेनवाटर, हार्वैस्ट स्ट्रक्चर, सोलर, वाटर हीटर सिस्टम व ऐसी खिड़कियां जिन से अधिक से अधिक सूर्य की रोशनी अंदर आ सके, ऐसी तकनीकों पर आजकल के डिजाइनर जोर दे रहे हैं.

ताकि नर्म मुलायम रहें आपके हाथ

रोजाना घर के काम काज से आपके हाथ अपनी नर्मी खो देते हैं. रफ स्किन के और भी कई कारण हो सकते हैं. पर आप घर पर ही आसानी से बेबी सॉफ्ट स्किन पा सकती हैं. अब पार्लर का खर्चा और समय बचायें और इन घरेलु टिप्स को अपनायें.

1. ऐग योल्क

अंडे से ऐग योल्क अलग कर लें. अब ऐग योल्क को एक बाउल में डालें. इसमें 1 चम्मच शहद और ½ चम्मच बादाम पाउडर और गुलाबजल की कुछ बूंदें मिलायें. अच्छे से मिक्स करें. मिश्रण को हाथों पर अच्छे से लगायें. 10 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें.

2. ऑलिव ऑयल और शक्कर

ऑलिव ऑयल त्वचा के लिए एक अच्छा मॉश्चराइजर है. ½ चम्मच ऑलिव आयल अपने हाथों में लें. अब हाथों में ½ चम्मच शक्कर लें. अब इस मिश्रण को हाथों पर अच्छे से लगायें. कुछ देर बाद ठंडे पानी से हाथों को धो लें.

3. बटर और आमंड क्रीम

2 चम्मच बटर और 1 चम्म्च आमंड ऑयल को एक बाउल में मिक्स करें. अब इस क्रीम को दोनों पर अच्छे से लगायें. 20 मिनट के लिए छोड़ दें. रात में लगा के सोने से ज्यादा फायदे होगा तो क्रीम को रात में लगाने की कोशिश करें.

4. ग्लीसरीन, गुलाबजल और लेमन

1 चम्मच ग्लीसरीन और 1 चम्मच गुलाबजल एक बाउल में मिक्स करें. अब ½ नींबू का रस इसमें मिलायें. अच्छे से मिक्स करें. अब इस मिश्रण को हाथों पर अच्छे से लगायें. इस मिश्रण को दिन में दो बार लगायें. पर इस मिश्रण को स्टोर कर के न रखें.

5. लेमन और शक्कर

1/2 नींबू का रस और ½ चम्मच शक्कर एक बाउल में मिला लें. अब इस मिश्रण को दोनों हाथों पर लगायें. 5-10 मिनट बाद पानी से धो लें.

राकेश रोशन बहा रहे हैं घड़ियाली आंसू

तमाम खींचतान के बाद अंततः 25 जनवरी को शाहरुख खान की फिल्म ‘रईस’ और रितिक रोशन की फिल्म ‘काबिल’ एक साथ सिनेमा घरों में पहुंच ही गयी. इन फिल्मों के प्रदर्शन के दो माह पहले से ही शाहरुख खान प्रयास कर रहे थें कि फिल्म ‘काबिल’ के निर्माता राकेश रोशन अपनी फिल्म के प्रदर्शन की तारीख बदल दें. इसी मकसद से शाहरुख खान ने खुद ही राकेश रोशन से कई मुलाकातें की, मगर राकेश रोशन ने अपने अंधविश्वास व एथिक्स सहित कई तरह की बातें कर अपनी फिल्म के प्रदर्शन की तारीख बदलने से साफ इंकार कर दिया था.

यहां तक कि राकेश रोशन ने मीडिया से बात करते हुए बार बार इस बात को दोहराया था कि फिल्म के बनने के बाद जब वह फिल्म देखते हैं तो वह फिल्म की सफलता या असफलता को लेकर जो भविष्यवाणी करते हैं, वह भविष्यवाणी हमेशा सच निकलती है. राकेश रोशन ने दावा किया था कि वह अपनी फिल्म ‘काबिल’ देख चुके हैं और उनकी भविष्यवाणी थी कि फिल्म ‘काबिल’ जबरदस्त सफलता बटोरते हुए बॉक्स ऑफिस पर कमाई के कई रिकार्ड तोड़ेगी.

मगर अफसोस कि पहले ही दिन ‘काबिल’ व ‘रईस’  की टक्कर के चलते बॉक्स ऑफिस के जो परिणाम आए, उससे राकेश रोशन घड़ियाली आंसू बहाने लगे हैं. वास्तव में पहले दिन ‘काबिल’ ने महज आठ करोड़ रूपए से कुछ अधिक और ‘रईस’ ने बीस करोड़ रूपए से कुछ अधिक कमाए. इन आंकड़ो के सामने आते ही राकेश रोशन का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने शाहरुख खान पर कई तरह के आरोप लगा डाले.

राकेश रोशन ने कहा है कि ‘‘शाहरुख खान की टीम ने गलत तरीके अपनाकर फिल्म ‘रईस’ के लिए ज्यादा स्क्रीन हासिल कर लिए. उनकी गलत हरकतों की ही वजह से मेरी फिल्म ‘काबिल’ को डेढ़ सौ करोड़ का नुकसान हुआ है. जब राकेश रोशन से पूछा गया कि अब फिल्म ‘काबिल’ को लेकर उनकी अपनी भविष्यवाणी का क्या हुआ, तो राकेश ने ये तक कह दिया कि ‘मैं फिल्म काबिल दुबारा देखूंगा.’

अब इसे क्या कहा जाए. इससे तो कई बातें साबित होती है कि राकेश रोशन का अपना आत्मविश्वास डगमगाया हुआ है.

‘रईस’ से गाना हटाए जाने पर भी नाराज नही हैं श्रेया घोषाल

बॉलीवुड फिल्मों में गीत संगीत की अहमियत होती है, इसके बावजूद गीतकार या गायक हमेशा कलाकार से डरता रहता है और कलाकार के खिलाफ कोई बयान नहीं देता. अब तक जब भी किसी गायक ने किसी कलाकार को लेकर कुछ सच भी कहा, तो भी उसे नुकसान उठाना पड़ा है. पानी में रहकर मगरमच्छ से दुश्मनी ठीक नहीं होती. इसी वजह से श्रेया घोषाल भी चुप हैं. वह अपनी नाराजगी व्यक्त नहीं कर पा रही हैं.

वास्तव में संगीतकार राम संपत के निर्देशन में श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज में शाहरुख खान निर्मित व अभिनीत फिल्म ‘रईस’ के लिए एक साल पहले एक गाना रिकॉर्ड किया था. मगर जब फिल्म प्रदर्शित हुई, तो पता चला कि श्रेया घोषाल का यह गाना फिल्म में रखा ही नहीं गया. इससे श्रेया घोषाल का नाराज होना स्वाभाविक है. मगर वह अपनी नाराजगी जाहिर नहीं कर रही हैं.

जब सोशल मीडिया व ट्विटर पर कुछ प्रशंसकों ने नाराजगी जाहिर की, तो श्रेया घोषाल ने खुद ट्विटर पर लिखा ‘‘एक गाने को अंततः फिल्म या अलबम का हिस्सा बनाने में कई फैक्टर काम करते हैं. यह निर्णय सिर्फ कुछ रचनात्मक इंसानों के हाथ में नहीं होता है. इसलिए गाने के न होने पर किसी का दिल नहीं टूटना चाहिए.’’

बॉलीवुड से जुड़े सूत्र दावा कर रहे हैं कि श्रेया घोषाल इससे अधिक कुछ कर ही नहीं सकती. इतना ही नहीं सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि राम संपत ने श्रेया घोषाल द्वारा स्वरबद्ध गीत के अलावा एक अन्य गीत भी ‘रईस’ के लिए रिकॉर्ड किया था, पर वह गाना भी फिल्म में नहीं है.

ऑडिशन देने पर हुमा को होता है गर्व

अमूमन जब भी कोई फिल्मकार किसी कलाकार को अपनी फिल्म के साथ जोड़ने से पहले उसके सामने ऑडिशन देने का प्रस्ताव रखता है तब कलाकार विफर जाता है और साफ साफ कह देता है कि वह कलाकार के रूप में फलां फलां फिल्मों में अपनी प्रतिभा को साबित कर चुका है और अब वह ऑडिशन नहीं देगा.

मगर ‘गैंग्स आफ वासेपुर’, ‘डीडे’, ‘डेढ़ इश्कियां’ व ‘बदलापुर’ सहित कई फिल्मों में अभिनय कर अपना जलवा दिखा चुकीं और इन दिनों फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ को लेकर उत्साहित अभिनेत्री हुमा कुरैशी का दावा है कि उन्हें तो ऑडिशन देने पर गर्व महसूस होता है. मशहूर अंतर्राष्ट्रीय फिल्मकार गुरिंदर चड्ढा की फिल्म ‘वायसराय हाउस’ भी उन्हें ऑडिशन देने के बाद ही मिली.

खुद हुमा कुरैशी ने बताया कि ‘‘मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने अब तक अपने करियर में जो भी बड़े कार्य किए हैं, वह सारे काम मुझे ऑडिशन से ही मिले हैं. मैं तो इस बात को गर्व के साथ स्वीकार करती हूं, अन्यथा यहां लोग कहते हैं कि वह ऑडिशन नहीं देते जबकि मैं ऑडिशन को बहुत जरूरी मानती हूं. ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ हो या ‘डेढ़ इश्कियां’, मैंने हमेशा ऑडिशन दिया है. इसकी वजह यह है कि मुझे कोई चीज विरासत में नहीं मिली है और ना ही किसी चीज को मेरे लिए सेटअप किया गया है. मैंने अपनी हर फिल्म के लिए मेहनत की और ऑडिशन के वक्त भी मेहनत की.”

आगे हुमा ने कहा कि “गुरिंदर चड्ढा ने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ देखी थी. वह मेरी प्रतिभा से वाकिफ थीं, लेकिन मैंने ‘वायसरस हाउस’ के लिए ऑडिशन दिया. लंदन में गुरिंदर से मेरी मुलाकात हुई. हमने वहां पटकथा को भी पढ़ा. मेरे लिए खुशी की बात है कि मैं एक भारतीय कलाकार हूं. पर इसलिए नहीं बल्कि उन्हें लगा कि मैं उनकी इस फिल्म के किरदार में फिट बैठूंगी, इसलिए उन्होंने मुझे चुना. मुझे खुशी है कि जो भी भारतीय कलाकार पश्चमी देशों की फिल्में कर रहे हैं वे सीख रहे हैं कि एक स्टूडियो सिस्टम में कैसे काम किया जाता है क्योंकि इन फिल्मों में आपको अपनी प्रतिभा के अनुसार काम मिलता है.”

फिल्मी दुनिया के कुछ अनसुने किस्से

सौ साल से भी ज्यादा का हो चुका बॉलीवुड आज भी करोड़ो लोगों के दिल की धड़कन है. बॉलीवुड अपने आप में कई किस्से समेटे हुए है. यहां इतने सालों में बहुत कुछ हुआ, कभी कोई एक्टर किसी से नाराज, तो कोई किसी के लिए पागल, कभी किसी का प्यार परवान चढ़ा तो किसी ने किसी से किया ब्रेकअप. बॉलीवुड कई किस्सों का साक्षी है.

आज हम आपको बॉलीवुड के कुछ ऐसे ही अनसुने किस्से के बारे में बताने जा रहे हैं जो शायद आपने कभी नहीं सुना होगा.

गलतियां करने के लिए लाइटमैन को देते थें पैसे

फिल्म शोले की शूटिंग के वक्त धर्मेंद्र और हेमा मालिनी का प्यार परवान चढ़ रहा था. फिल्म के एक सीन में धरम पाजी हेमा मालिनी को बंदूक चलाना सिखा रहे थें, उस सीन को फिल्माने के दौरान धर्मेंद्र लाइटमैन को बार-बार गलतियां करने के लिए अलग से पैसे दिया करते थें.

गजानना के रिलीज ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ का गाना ‘गजानना’ को पुणे के बालेवाडी स्टेडियम में रिलीज किया गया था. रिलीज के वक्त लगभग 5000 से ज्यादा बच्चों ने भगवान गणेश के आकार की सबसे बड़ी ह्यूमन चेन बनाई थी. इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया था.

शाहरुख नहीं सैफ को मिला था राज का किरदार

दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे में राज मल्होत्रा का किरदार पहले किंग खान नहीं सैफ अली खान को ऑफर किया गया था.

गांव का कर दिया मेकओवर

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार ने सिंह इज ब्लिंग की शूटिंग के दौरान, मलोमल गांव, पंजाब को लाल, नारंगी और पीले रंग से रंग दिया था. अक्षय ने पूरे गांव की सूरत ही बदल दी थी.

सिर्फ एक्टर नहीं सिंगर भी हैं फवाद

खूबसूरत फेम फवाद खान एक पाक रॉक बैंड, ‘एनटिटी पैराडाइम’ के लीड सिंगर थे. उनका पहला एलबम ‘इरटिका’ 2003 में रिलीज किया गया था.

जिंदगी ना मिलेगी दुबारा ने बढ़ाया स्पेन का टूरिज्म

जिंदगी ना मिलेगी दुबारा के रिलीज के बाद स्पेन जाने वाले भारतीय में 32% का इजाफा हुआ.

रॉकस्टार रिवर्स ऑर्डर में हुआ शूट

रॉकस्टार एक ऐसी फिल्म है जिसका क्लाइमेक्स पहले शूट हुआ था मसलन फिल्म रिवर्स ऑर्डर में शूट हुआ था.

लगान, चाइना में रिलीज हुई पहली फिल्म

लगान पहली बॉलीवुड फिल्म है जो चाइना में रिलीज की गई थी. शांघाई, बीजिंग में इसका प्रीमियर हुआ था.

13 साल की उम्र में मां का किरदार

श्रीदेवी ने 13 साल की उम्र में तमिल फिल्म ‘मूंडरू मुडिचु’ में रजनीकांत की सौतेली मां का किरदार निभाया था.

चेन्नई एक्सप्रेस का क्या था टाइटल

रोहित शेट्टी को फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस का टाइटल पसंद नहीं था. वह इस फिल्म का टाइटल रेडी स्टेडी पो रखना चाहते थे.

क्रिकेटर बनना चाहते थे आतिफ

मशहूर पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम बचपन में सिंगर नहीं क्रिकेटर बनना चाहते थे. इतना ही नहीं आतिफ एक बार अंडर-19 पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए सेलेक्ट किए गए थे.

फेमस साधना कट हेयर स्टाइल

इतने सालों बाद, आज भी अभिनेत्री साधना का हेयर स्टाइल ‘साधना कट’ फेमस है. यह आइडिया ‘लव इन शिमला’ के डायरेक्टर आर के नय्यर का था. बाद में दोनों शादी के बंधन में बंध गए.

“वह एक फिल्म करते हैं और मैं कई”

नौसेना अधिकारी से लेकर गैंगस्टर की भूमिका में नजर आ चुके बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार का कहना है कि वह किसी भूमिका के लिए खुद को तैयार करने के बजाय निर्देशक की तैयारी में यकीन करते हैं.

एक संवाददाता सम्मेलन में अक्षय कुमार ने कहा, “मैं खुद को किसी भूमिका के लिए तैयार नहीं करता. मुझे लगता है कि मेरे निर्देशक मुझसे ज्यादा तैयारी करते हैं. मेरा मानना है कि मैं निर्देशक की तैयारी से मुकाबला नहीं कर पाऊंगा, क्योंकि वह साल में एक फिल्म कर रहे हैं और मैं एक से ज्यादा फिल्में कर रहा हूं, इसलिए मेरी समझ कहती है कि मुझे सिर्फ निर्देशक की तैयारी के अनुसार, काम करना चाहिए. मैं निर्देशक के सामने खुद को ज्यादा होशियार दिखाने की कोशिश नहीं करता हूं.”

आगामी फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में अक्षय वकील की भूमिका में नजर आएंगे. फिल्म ‘खिलाड़ी’ के अभिनेता का कहना है कि निर्देशक सुभाष कपूर के पास सारी केस फाइलें थीं और वह बखूबी जानते थे कि अदालत को कैसे दिखाना है.

अक्षय कहते हैं कि लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा नहीं उठा है, लेकिन न्याय मिलने में देरी होने से लोग जरूर निराश हैं. यह फिल्म 2013 में आई ‘जॉली एलएलबी’ की सीक्वल है. ‘जॉली एलएलबी 2’ 10 फरवरी को रिलीज होगी.

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