पब्लिक रोती रहे सरकार को क्या

देश के सारे शहर पटरियों पर लगने वाली दुकानों और खाने के ढाबों से परेशान हैं. कुछ शहरों में तो बेहद भीड़भाड़ वाले इलाके में पहले तो दुकानदार अपना सामान दुकान से निकाल कर 5-7 फुट तक पटरी पर सजा देते हैं और फिर उस के आगे जगह बचती है तो असली पटरी वाले दुकानें लगा लेते हैं. कहीं भी एक बार दुकान लग गई और 4-5 दिन चल गई तो इस जगह पर परमानैंट कब्जा समझिए, चाहे उस से गंद फैले, ट्रैफिक रुके, सड़क पर चलने को मजबूर होना पड़े.

आम संभ्रांत मध्यवर्गीय शहरी इन पटरी वालों को जम कर कोसता है और इन्हें राजनीतिबाजों और पुलिस वालों की देन समझता है. औरत किट्टी पार्टियों में और आदमी ग्रुपों में इन पर हल्ला मचाते रहते हैं और लगता है कि मानो इतने विरोध के बावजूद सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगती.

सरकार सुने या न सुने, पहली बात तो यह समझ लेनी चाहिए कि पटरी की दुकानें चलती तभी हैं जब वहां बिक्री हो. इसलिए दोषी दुकानदार नहीं, खरीददार हैं, जो इन से सामान खरीदते हैं और इन्हें दानापानी देते हैं. लंबी गाडि़यों में चलने वाले अकसर इन पटरी दुकानों से ड्राइव इन शौपिंग करते नजर आ सकते हैं और इस दौरान जहां वे दुकानदार से ज्यादा पैसे दे कर सामान खरीदते हैं, क्योंकि यह सुविधाजनक है, वहीं वे सड़क पर ट्रैफिक रोकते समय यह भूल जाते हैं कि चाय की चुसकियों के समय वे ही पौलीटिशियनों और अफसरों को गालियां देते हैं.

पटरियों पर दुकानें इस वजह से भी पनप रही हैं कि हर शहर में गांवोंकसबों से आने वाले फटेहाल से लोगों की गिनती बढ़ रही है, जिन्हें बड़ी दुकानों और एअरकंडीशंड मौलों में जाने में हिचक होती है.

शहरों को जिंदा रखने के लिए करोड़ों लोग गांव छोड़ कर शहरों में छोटेमोटे काम करने आ रहे हैं और वहां झोंपडि़यों और छोटे मकानों में ठुंसठुंस कर रह रहे हैं. उन्हें सामान तो चाहिए पर सामान किस ब्रैंड का और किस क्वालिटी का है, इस से उन्हें कोई मतलब नहीं. उन्हें सामान मुहैया कराना दुकानों के बस का नहीं, क्योंकि शहरों में दुकानों की कीमतें बेहद बढ़ गई हैं और जहां खाली जगह मिले वहीं बनी दुकानें ही उन्हें सामान दे सकती हैं.

दुकानदार भी बहुत होते हैं, क्योंकि ज्यादातर के पास कोई हुनर होता ही नहीं. वे थोक बाजार से सामान ले कर पटरी पर बेचते हैं और एक ही सामान 1 मील की दूरी पर 20-25 पटरी दुकानों पर मिल जाएगा. जब तक शहरों के प्रबंधक दुकानों का प्रबंध न करेंगे, पटरी दुकानें लगेंगी ही. यह साफसुथरी सड़क पर चाहे कब्जा हो, इस का कोई सरल उपाय नहीं है.   

 

भारत के प्रसिद्ध मछलीघर

भारत में जानवरों और पक्षियों के लिए कई खुले और संरक्षित क्षेत्र मौजूद हैं. चिड़ियाघरों, राष्ट्रीय उद्यानों और अभ्यारण्यों के साथ-साथ मछलीघर और सर्प उद्यान जैसे क्षेत्रों में विलुप्त होते जा रहे प्रजातियों को संरक्षित किया जाता है.

भारत में कई ऐसे मछलीघर स्थित हैं जहां जल जीवों को संरक्षित रखा गया है. हालांकि इस काम को बनाये रखना बहुत ही मुश्किल है, फिर भी कई संगठनों ने इस शानदार काम के जरिये जलीय जीवन को भोजन प्रदान कर उनके लिए उचित वास बनाया है. पर्यटकों का आकर्षक स्थल होने के साथ-साथ कई मछलीघर ऐसे भी हैं जो इन जलीय जीवों को बेचते हैं और इसके लिए उन्हें पर्याप्त खरीददार भी मिल जाते हैं.

चलिए आज हम ऐसे ही कुछ भारत में सबसे प्रसिद्ध मछलीघरों की सैर पर चल जलीय जीवन का लुफ्त उठाते हैं.

बाग-ए-बहु एक्वेरियम, जम्मू

जम्मु का बाग-ए-बहु एक्वेरियम भारत का सबसे बड़ा भूमिगत मछलीघर है. मछली के आकार वाले प्रवेश द्वारा के अंदर घुसते ही आपको विदेशी मछलियों की कई सुन्दर प्रजातियां देखने को मिलेंगी जो आपकी आंखों में एक नई चमक लेकर आएगी. पहाड़ की चोटी पर स्थित इस मछलीघर के आसपास का नजारा भी बहुत ही खूबसूरत है.

तारापोरवाला एक्वेरियम, मुंबई

मुंबई का तारापोरवाला एक्वेरियम भारत का सबसे पुराना मछलीघर है. मरीन ड्राइव के पास ही स्थित होने की वजह से यहां कई समुद्री और ताजे पानी की मछलियां आती हैं. इस मछलीघर में एक खास पूल बना हुआ है जहां दर्शक इन मछलियों को छू कर इनका अनुभव कर  सकते हैं और यह मछलियों को हानि भी नहीं पहुंचाता. यहां मछलियों के 400 से अधिक प्रजातियां हैं.

सरकारी मछलीघर, बेंगलुरु

बेंगलुरु का सरकारी मछलीघर, बैंगलोर मछलीघर के नाम से भी जाना जाता है. यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा मछलीघर है. शहर में स्थित कब्बन उद्यान के प्रवेश द्वार में ही स्थित यह मछलीघर कृषि योग्य मछलियों और सजावटी मछलियों की विशाल विविधता का वास स्थल है.

सी वर्ल्ड एक्वेरियम, रामेश्वरम

रामेश्वरम बस स्टैंड के विपरीत ही स्थित सी वर्ल्ड एक्वेरियम रामेश्वरम के प्रसिद्ध आकर्षणों में से एक है जिसे देखना आप मिस न करें. यह समुद्री मछलीघर अपने तरह का इकलौता मछलीघर है जहां आप समुद्री जीवन को देख एक अलग और नए अनुभव का आनंद ले सकेंगे.

मरीना पार्क एंड एक्वेरियम, पोर्ट ब्लेयर

अंडमान निकोबार द्वीप के अनेक आकर्षणों में से यह मछलीघर भी एक है. संग्रहालय की तरह यहां कई मछलियों को संरक्षित कर रासायनिक घोलों में रखा गया है. अगर आप जलीय जीवन के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं तो भारतीय नौसैनिकों द्वारा संरक्षित इस मछलीघर की यात्रा करना न भूलें.

‘‘मेरी मरजी के बिना मुझे कोई छुए यह पसंद नहीं’’

मेघालय की राजधानी शिलौंग की रहने वाली 24 वर्षीय एंड्रिया तरियंग ने फिल्म ‘पिंक’ से डेब्यू किया. इस से पहले वे मौडल और सिंगर रह चुकी हैं. फिल्मों में आने की उन की कोई इच्छा नहीं थी. वे सिंगर बनना चाहती थीं. सुजीत सरकार की स्क्रिप्ट उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने तुरंत हां कह दी. फिल्म का मिलना और उस में काम करना खास था.

एंड्रिया शिलौंग से डेढ़ साल पहले मुंबई आई थीं, मेकअप का काम सीखने. 5 महीने काम सीखा पर उस में खास मजा नहीं आया. फिर एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के साथ 3 महीने इंटर्न के तौर पर काम किया. उस के बाद सोचा कि अब घर लौट जाएंगी. लेकिन इसी बीच उन के पिता का फोन आया कि क्या वह बौलीवुड फिल्म करना चाहती है? इस पर एंड्रिया ने पूछा वे ऐसा क्यों पूछ रहे हैं, क्योंकि न तो उन्हें हिंदी आती है, न ही बौलीवुड सर्कल से परिचित थीं लेकिन उन के कहने पर औडिशन के लिए गईं.

फिर उन की बड़ी बहन भी उन के साथ रहती हैं. उन्हें भी किसी ने इस फिल्म के औडिशन के लिए बुलाया था. इस तरह दोनों बहनें साथ गईं. मजेदार बात यह थी कि दोनों को ही पता नहीं था कि वे दोनों एक ही फिल्म के औडिशन के लिए जा रही हैं. फिर औडिशन हुआ और एंड्रिया को यह फिल्म मिल गई. पेश हैं, एंड्रिया से हुई बातचीत के कुछ अंश.

फिल्म ‘पिंक’ आप को कैसे प्रेरित करती है?

यह एक साहसी फिल्म है. इसे करने के बाद मैं ने सीखा है कि मुझे कैसे किसी परिस्थिति में खड़ा होना है, मैं कैसे खुद को सुरक्षा दूं और जिस बात पर मैं विश्वास करती हूं उस के लिए मैं कैसे लड़ूंगी?

अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

मैं अपनेआप को गर्वित महसूस करती हूं. मुझे उन के साथ अभिनय करने में बड़ी सहजता महसूस हुई. जब मैं उन से मिलने उन के औफिस गई तो पूरी दीवार पर उन के अवार्ड देख कर चौंक गई. वे मुझे पूरापूरा सहयोग करते रहे. इस से काम करना और आसान हो गया.

इस फिल्म का चरित्र आप से कितना मिलता है?

यह चरित्र बिलकुल मेरे चरित्र जैसा है. फिल्म में मुझे वैसी ही दिखाया गया है जैसी मैं हूं. इसलिए मुझे किसी को कौपी नहीं करना पड़ा. केवल कोर्ट का दृश्य मेरे लिए अलग था, क्योंकि मैं ने कभी कोर्टकचहरी देखी नहीं है.

क्या रियल लाइफ में आप को कभी ऐसी स्थिति से गुजरना पड़ा?

हर महिला ऐसी स्थिति से गुजरती है. लोग राह चलते आप से बुरा व्यवहार करते हैं. मेरे साथ ऐसी 2 घटनाएं हुईं. मैं टीनएजर थी. एक शो में गाना गाने के बाद भीड़ में जा रही थी तभी एक व्यक्ति ने मुझे गलत जगह छुआ. मैं ने पलट कर उसे 2 थप्पड़ जड़ दिए. मुझे पसंद नहीं कि कोई मेरी मरजी के बगैर मुझे छुए. मेरा शरीर मेरा है. किसी को हक नहीं कि मेरे मरजी के बिना कोई उसे टच करे.

दूसरी घटना शाम के समय जब मैं अपनी बहन के साथ शिलौंग कुछ खरीदने जा रही थी तब की है. कुछ लोग वापस घर जा रहे थे. तभी अचानक एक ने मुझे पीछे से पकड़ लिया. मैं पीछे मुड़ी तो मेरा पैर उस की चप्पल पर पड़ा, जिस से वह गिर गया. मैं ने उसे खूब पीटा.

फिल्म मैं काम करने के बाद आप के जीवन में क्या बदलाव आया?

सब से पहले तो लोगों का रिस्पौंस बदल गया. मैं इस फिल्म के बाद घर गई. वहां हमारा एक स्कूल है. मेरे चाचा और स्कूल के बच्चे मुझे देख कर बहुत खुश हुए. उन्होंने इस फिल्म को देखा था. पूरा हौल शिलौंग में बुक किया गया था.

आप खुद को कैसे ऐक्सप्लेन करना चाहतीं हैं?

मैं एक शर्मीली और रिजर्व्ड लड़की हूं. मुझे गाना बहुत पसंद है. हर वक्त मैं गा सकती हूं. अब मुझे ऐक्टिंग भी पसंद है. मुझे दोस्तों से अधिक मिलना पसंद नहीं. मुझे बिल्ली पालना पसंद है.

कितनी फैशनेबल हैं और मेकअप कितना पसंद करती हैं?

मुझे आरामदायक पोशाकें अच्छी लगती हैं. हील्स कभी कभी पहनती हूं. इस फिल्म के बाद मुझे अच्छे कपड़े पहनने का शौक हो गया है, मुझे मेकअप बहुत पसंद नहीं है. इस फिल्म में मेरा मेकअप बहुत कम है. लेकिन मेकअप अच्छा लगता है. बाहर जाने पर मैं मेकअप करती हूं. मुझे शौपिंग पसंद नहीं.

नौर्थईस्ट के होने की वजह से आप को कोई समस्या आई?

कोई खास नहीं. लेकिन जिस से भी मैं मिलती थी, वही मुझे नेपाली या चाइनीज कहता था. यह बहुत गलत है.

किसे अपना आइडियल मानती हैं?

अपने पिता रुडिवाला को. इस के अलावा दादी को बहुत मानती हूं. मेरे पिता भारत के एकमात्र ब्लू गिटारिस्ट हैं. बचपन में ही मां की मौत के बाद उन्होंने ही हमें पाला है. वे मेरे सुपर हीरो, सुपर फादर हैं.

अब कटरीना ने बढ़ाई करण की मुश्किलें

बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ कई मुश्किलों के बाद 28 अक्टूबर को रिलीज तो हो गई है, लेकिन लगता है करण की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं.

दरअसल, करण अब धर्मा प्रोड्क्शन बैनर तले ‘रात बाकी’ बनाने की प्लैनिंग कर रहे हैं. इस फिल्म को आदित्य धर डायरेक्ट करने वाले हैं. इस फिल्म के लिए करण ने पहले कटरीना के अपोजिट फवाद खान को फाइनल किया था, लेकिन अब पाकिस्तानी कलाकारों के विरोध को देखते हुए करण, फवाद को फिल्म में ले नहीं सकते. इस कारण करण के सामने नए हीरो के चयन की मुश्किल खड़ी हो गई.

करण अब कटरीना के अपोजिट सिद्धार्थ मल्होत्रा को लेना चाहते हैं, लेकिन दोनों की फिल्म ‘बार बार देखो’ के बॉक्स ऑफिस पर बुरे हाल को देखते हुए वह सोच में पड़ गए हैं.

सूत्रों की मानें तो करण अपनी फिल्म की मुश्किलें कम करने के लिए कटरीना को फिल्म से निकाल सकते हैं. कटरीना के बारे में बात करें तो वह जल्द ही ‘जग्गा जासूस’ में नजर आने वाली हैं. फिल्म में उनके साथ रणबीर कपूर लीड रोल में हैं. फिल्म अगले साल रिलीज होगी.

करण संग काम करना चाहती हैं उर्वशी

अभिनेत्री उर्वशी रौतेला फिल्मकार करण जौहर के साथ काम करना चाहती हैं. अभिनेत्री के मुताबिक, “करण जौहर बेहद शानदार निर्देशक हैं. मैं करण के साथ काम करने का सपना देखती हूं.”

निर्देशक की हालिया रिलीज फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की तारीफ करते हुए अभिनेत्री ने कहा, “ऐ दिल है मुश्किल आज के दौर की फिल्म है. रणबीर कपूर ने बहुत अच्छा काम किया है. अनुष्का शर्मा सच में प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं. ऐश्वर्या राय बच्चन की भूमिका भले ही छोटी है, लेकिन वह हमेशा से एक प्रेरणा रही हैं.”

‘ऐ दिल है मुश्किल’ के साथ रिलीज हुई अजय देवगन की फिल्म ‘शिवाय’ के बारे में पूछे जाने पर उर्वशी ने कहा कि वह फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर सकतीं, क्योंकि उन्होंने अभी तक फिल्म नहीं देखी है.

..इस बात से डरती हैं आलिया

अपनी आने वाली फिल्म ‘डियर जिंदगी’ की रिलीज के लिए तैयार अभिनेत्री आलिया भट्ट का कहना है कि असफलता का डर एक ऐसी चीज है जो उन्हें एक्टिव बनाए रखती है.

एक फैन ने आलिया से असफलता के डर के बारे में पूछा. इस पर आलिया ने कहा, “असफलता का डर मुझे काम में लगाए रखता है. तो, मैं इससे डरती हूं लेकिन यही मुझे इंसपायर करता है.”

ट्विटर पर एक फैन ने पूछा कि अपने खिलाफ बोलने वालों का वह किस तरह सामना करती हैं? इस पर उन्होंने कहा, “सभी को आपके बारे में विचार रखने का अधिकार है. इसलिए किसी का सामना करने की जरूरत नहीं है. आप पॉजिटिव रहें और खुद के बारे में जानें कि आप कैसे इंसान हैं. बस, इसी बात का महत्व है.”

गौरी शिंदे की निर्देशित ‘डियर जिंदगी’ में बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान प्रमुख भूमिका में हैं. यह पहली बार होगा, जब आलिया 51 वर्षीय शाहरुख के साथ दिखाई देंगी. अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें शाहरुख की ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘चक दे इंडिया’ और ‘डियर जिंदगी’ जैसी फिल्में पसंद हैं.

ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस खरीदने के फायदे

जीवन बीमा कराने का सबसे सरल तरीका टर्म इंश्योरेंस होता है. इसे किसी एजेंट से खरीदने की जरूरत नहीं होती है. तमाम जीवन बीमा कंपनियों के टर्म इंश्योरेंस ऑनलाइन उपलब्ध रहते हैं, इसलिए जीवन बीमा प्रोडक्ट की खरीदारी ऑनलाइन करना ज्यादा फायदेमंद रहता है. ऑनलाइन माध्यम के जरिए ग्राहक एक क्लिक में किसी भी समय दुनिया की किसी भी जगह से पॉलिसी खरीद सकते हैं. ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने से पहले प्रोडक्ट को अच्छे से समझ लेना जरूरी होता है. साथ ही आपको पूरी रिसर्च करनी चाहिए कि यह आपकी जरूरतों के अनुरूप है या नहीं.

जानिए टर्म इंश्योनरेंस कंपनियों की वेबसाइट से ही लेना क्यों है फायदेमंद

– ऑनलाइन माध्यम से जीवन बीमा कंपनियों के खर्चे बचते हैं. इससे एजेंट के कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च की बचत होती है. इस बचत का लाभ कंपनियां ऑनलाइन ग्राहकों को देती है. यह पूरी प्रक्रिया वर्चुअल और पेपरलैस होती है जिस वजह से यह सस्ती हो जाती है. ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि ग्राहकों को किसी पर भी निर्भर रहने की जरूरत नहीं होती है.

– ध्यान रखें कि कोई भी एजेंट कभी भी ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस लेने की सलाह नहीं देगा ऐसा इसलिए क्योंकि उस पर कमीशन सबसे कम होता है. किसी एजेंट के जरिए टर्म इंश्योरेंस खरीदना कम से कम 25 फीसदी महंगा पड़ता है.

– ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीदने के लिए निश्चित कंपनी की वेबसाइट पर जाएं जिससे टर्म इंश्योरेंस लेना चाहते हैं. सभी जरूरी जानकारी देने के बाद डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर दें और नेट बैंकिंग, डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भुगतान करें.

– यदि मेडिकल जांच के लिए कहा जाता है तो अपनी सुविधानुसार स्थान का चयन कर सकते हैं. मेडिकल जांच ठीक रहने पर पॉलिसी दस्तावेज कुछ ही दिनों में दिए गए पते पर पहुंचा दिए जाते हैं.

– अधिकांश पोर्टल ग्राहकों को ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम की तुलना करने की भी सुविधा उपलब्ध कराते हैं. इस सुविधा का लाभ जरूर उठाएं.

– तुलना के बाद जिन कंपनियों की पॉलिसी सस्ती लगती हैं उनका क्लेम रेश्यो देखें. क्लेम रेश्यो का मतलब होता है कि कंपनी 100 क्लेेम करने वालों में से कितने लोगों को बीमा के पैसों का भुगतान करती है. इसके बाद वेबसाइट के रिव्यूज और कमेंट्स सेक्शन पर जाकर ग्राहकों के रिव्यूज पढ़ें. इससे इंश्योरर की सर्विसेज के बारे में पता मौजूदा ग्राहकों से पता चलता है.

– इंश्योरेंस कंपनियों की वेबसाइट पर लाइव चैट का भी प्रावधान होता है जहां ग्राहक अपने संदेह दूर कर सकते हैं. साथ ही साइट पर दिए गए टोल फ्री नंबर की मदद से फोन पर भी बात की जा सकती है.

– क्लेम के समय दी गई जानकारी गलत पाए जाने पर कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है. यह कंपनी का अधिकार होता है.

रात को ये आजमायें और कमर घटायें

रात हमारी दिनभर की थकान को दूर करने का सबसे अच्छा टाइम होता है. रात में अक्सर लोग संगीत सुनना पसंद करते हैं. वहीं बुक्स पढ़ने का मजा भी तो रात की खामोशी में आता है और अगर कोई हमराही मिल जाए तो लेट नाइट डेट पर जाने का आइडिया भी बुरा नहीं है.

जब रात की इतनी सारी बातें हो रही हैं तो क्यों न हेल्थ से जुड़ी कुछ बातों पर भी नजर डाल ली जाए. अगर आप बढ़ते वजन से परेशान हैं तो रात के समय आपको खुद पर ध्यान रखने की ज्यादा जरूरत है.

आइए जानें, रात में इन 6 बातों का ध्यान रखना आपको कैसे बनाता है सेहतमंद.

1. रात के खाने में नमक हो कम

अगर आप वजन तेजी से कम करना चाहते हैं तो रात के खाने में नमक की मात्रा को कम कर दें. डिनर में चाइनीज फूड को पूरी तरह न कहें और जितना हो सके उबली सब्जियां और सूप लें.

2. रात में एक्सरसाइज करना है फायदेमंद

2013 में हुए एक सर्वे का मानना है कि रात के समय वर्कआउट करने से नींद अच्छी आती है जिससे वजन संतुलित रहता है और सुबह के समय शरीर में एनर्जी भी बनी रहती है.

3. लंच टाइम से करें

कई बार काम की वजह से या फिर खाना न बना पाने की वजह से हम लंच स्किप कर देते हैं. हाल में हुए एक शोध का मानना है कि लंच को समय पर करने की आदत डालें. ये आपके वजन को मेंटेन रखने का काम करता है.

4. पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं

पानी आपके शरीर से तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है. लेकिन रात के समय ढेर सारा पानी पीने से बचें. सोने से पहले बस एक ग्लास पानी पिएं ताकि रात भर वॉशरूम जाने से बच सकें.

5. बेडरूम को रखें रात के समय पूरी तरह डार्क

एक स्टडी के अनुसार हमारी बॉडी में बनने वाला मेलाटॉनिन शरीर से ब्राउन फैट को घटाने में मदद करता है. जब आप पूरी तरह अंधेरे में होते हैं तो मेलाटॉनिन ज्यादा बनता है. इसलिए आप इस बात का ध्यान रखें कि आपके बेडरूम की सारी लाइट्स बंद हों और कमरे में अंधेरा हो.

6. रूम टेम्परेचर का रखें खास ख्याल

National Institute of health clinical center study के मुताबिक जो लोग 66 डिग्री रूम टेम्परेचर पर सोते हैं, वह 7 प्रतिशत ज्यादा कैलोरी बर्न करते हैं उन लोगों के मुकाबले जिन्हें 75 डिग्री रूम टेम्परेचर पर सोने की आदत होती है.

खजुराहो के अजब-गजब मंदिर

खजुराहो, मध्य प्रदेश राज्य में स्थित एक प्रमुख शहर है, जो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिये विश्वविख्यात है. खजुराहो मंदिर की आश्चर्यजनक वास्तुकला और कामुक मूर्तियां पर्यटकों का ध्यान अपनी और खिंचती हैं. यूनेस्को की विश्व धरोहर सूचि में शामिल यह मंदिर मध्य प्रदेश के छत्तरपुर जिले में स्थित है. खजुराहो, भारतीय आर्य स्थापत्य और वास्तुकला की एक नायाब मिसाल है.

खजुराहो के कलात्मक मंदिर दुनिया के लिए एक अनमोल तोहफा हैं. यहां की कलाकृतियां उस समय की कारिगरी का नायाब नमूना है. खजुराहो के मंदिरों को देखने के बाद कोई भी इन्हें बनाने वाले हाथों की तारीफ किए बिना नहीं रह सकता. खजुराहो में चंदेल राजाओं द्वारा बनवाए गए खूबसूरत मंदिरो में की गई कलाकारी इतनी सजीव है कि कई मूर्तियां सजीव प्रतीत होती हैं.

इन्हीं खूबियों के साथ खजुराहो के मंदिर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें भी हैं जिन्हें जान आपकी उत्सुकता और बढ़ जाएगी और आप अपने अगला वेकेशन में यहां जरूर आना चाहेंगे. चलिए जानते हैं खजुराहो के बारे में ऐसी ही कुछ दिलचस्प बातें.

नाम की उत्पत्ति

‘खजुर’ शब्द से खजुराहो का नाम रखा गया क्योंकि शहर की बाहरी दीवारें खजूर के पेड़ों से घिरी हुई थीं. प्राचीन समय में खजुराहो, खजूरपुरा के नाम से भी जाना जाता था.

बलुई पत्थर से निर्मित मंदिर

खजुराहो के ज्यादातर मंदिर गुलाबी, बादामी और पीले रंग के साथ बलुई पत्थरों से बने हुए हैं.

विकृत मंदिर

मध्यकालीन युग में यहां 85 मंदिर हुआ करते थे, जिनमें से अभी यहां सिर्फ 22 मंदिर बचे हैं. बाकि मंदिर प्राकृतिक आपदाओं के कारण ध्वस्त हो गए.

कामुक मूर्तियां

जैसा कि खजुराहो के मंदिरों के बारे में आम धारणा है कि ये मंदिर कामुक मूर्तियों से भरे पड़े हैं, पर यहां सिर्फ 10% ही ऐसी कामुक मूर्तियां वर्णित हैं, बाकि मूर्तियों में मनुष्य की रोजमर्रा की जिंदगी और दिनचर्या को दर्शाया गया है, जैसे कुम्हार और किसान काम करते हुए, संगीतकार गीत गाते हुए,स्त्रियां वस्त्र पहनती हुईं आदि. कामसूत्र के देश में ऐसी मूर्तियों का होना स्वभाविक है. कामुक मूर्तियां उस समय की अग्रणी सोच को भी दर्शाती हैं.

मंदिरों के अंदर का भाग

मंदिरों के अंदर सारे कमरे पूर्व से पश्चिम की ओर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. हर एक कमरे में एक प्रवेश द्वार, एक हॉल, एक मंदिर और एक गलियारा बना हुआ है.

देवी देवताओं की छवियां

खजुराहो मंदिर में बनी देवी देवताओं की छवियां विभिन्न अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित करती हैं जैसे, शिव और शक्ति, येन और यांग, महिला और पुरुष सिद्धांत आदि.

मंदिरों का विभाजन

खजुराहो के मंदिरों के समूह को तीन भागों में विभाजित किया गया है- पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी.

मंदिरों की खोज

खजुराहो के मंदिर जिनका निर्माण मध्यकाल में हुआ था, इन्हें फिर से 20वीं सदी में पुनः खोज निकाला गया जिसके बाद इन्हें संरक्षित किया गया.

वास्तु प्रतिभा का सबसे बेहतरीन नमूना  

खजुराहो के मंदिरों को मध्यकालीन काल के दौरान का भारतीय वास्तु प्रतिभा का सबसे बेहतरीन नमूना माना जाता है.

बड़े पर्दे पर वापसी करेंगे बॉबी देओल

बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र के बेटे बॉबी देओल जल्द ही बड़े पर्दे पर वापसी करने वाले हैं. हाल ही में बॉबी से जुड़ी कई खबरें आई थीं कि वो डीजे बनने वाले हैं. लेकिन अब सुनने में आया है कि वो बॉलीवुड में वापसी कर रहे हैं.

आखिरी बार अपनी सनी देओल और पापा धर्मेंद्र के साथ यमला पगला दीवाना 2 में नजर आए बॉबी अब एक नए प्रोजेक्ट में दिखाई देने वाले हैं. जिस फिल्म से बॉबी वापसी कर रहे हैं उसे बॉबी खुद ही प्रोड्यूस भी कर रहे हैं.

यह फिल्म यूके में शूट की जाएगी. इस फिल्म को करीब एक महीने के अंदर शूट किया जाएगा. बताया जा रहा है कि यह फिल्म एक एक्शन थ्रिलर फिल्म होगी. यह बॉबी के अब तक के करियर से हटकर बताई जा रही है.

बता दें कि, बॉबी ने बरसात, सोल्जर, बादल आशिक जैसी हिट फिल्में दे चुके हैं. बॉबी के करीबियों का कहना है कि यह फिल्म बॉबी को फिर एक बार बॉलीवुड में एक नया मुकाम दिलाएगी. अब एक बार दोबारा इंडस्ट्री पर छा जाने की तैयारी में लगे बॉबी ने पहली बार बतौर चाइल्ड एक्टर कैमरा फेस किया था. वह साल 1977 में आई फिल्म धर्म वीर में नजर आए थे.

इसके बाद साल 1995 में उन्होंने ट्विंकल खन्ना के साथ फिल्म बरसात के जरिए बतौर हीरो अपनी शुरुआत की थी. इस फिल्म में बॉबी बादल के किरदार में थे. इस फिल्म की शूटिंग के दौरान बॉबी को चोट आई थी. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए लंदन जाना पड़ा था. इस फिल्म के लिए बॉबी को बेस्ट डेब्यू अवॉर्ड भी मिला था.

इसके बाद साल 1997 में बॉबी गुप्त फिल्म में नजर आए थे. राजीव राय के डायरेक्शन नें बनी ये सस्पेंस थ्रिलर की काफी तारीफ हुई थी. हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी. अब लंबे अर्से से पर्दे से गायब रहने वाले बॉबी ने वापसी का प्लान बना लिया है. उम्मीद है कि यह फिल्म अच्छा करे और हमें उनका नया रूप देखने को मिले.

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