लाजवाब है चौकलेट रसभरी केक

सामग्री

– 300 ग्राम डार्क चौकलेट

– 12 बड़े चम्मच नमकरहित मक्खन

– 1/4 छोटा चम्मच नमक

– 6 अंडे

– 11/2 कप चीनी

– 1 बड़ा चम्मच कोको पाउडर

– 200 ग्राम ताजी रसभरी

– थोड़ी मथी हुई क्रीम सर्व करने के लिए

विधि

एक माइक्रोवेव बाउल में चौकलेट, मक्खन और नमक डालें और 2 मिनट तक चौकलेट को पिघलाएं और अलग रख दें. अब अंडे और चीनी को गाढ़ा होने तक फेंटे और फिर इस मिश्रण में चौकलेट वाला मिश्रण डाल दें. अब इस घोल को 9 इंच के नौनस्टिक बेकिंग पैन में रखें और 180 डिग्री पर ओवन को गरम करें और उस में पैन रख दें. 1 घंटे तक सामग्री को बेक करें. अब एक टूथपिक को किनारे से डाल कर देखें कि सामग्री बेक हुई या नहीं. यदि टूथपिक साफसुथरी बाहर आए तो समझ जाएं कि केक बेक हो चुका है. अब इसे 8-10 मिनट के लिए रख दें . फिर केक पर कोको पाउडर बुरकें और ताजा रसभरी से गार्निश करें. ऊपर क्रीम डालें और सर्व करें.

व्यंजन सहयोग:

शैफ आशीष राय

बारबेक्यू नैशन हौस्पिटैलिटी

महाराष्ट्र में बसे समुद्री किले

जब भी हम किसी पुरानी रचना को देखते हैं तो हमारे मन में यह प्रश्न जरूर उठता है कि, उस समय बिना किसी आधुनिक तकनीक के इतने विशाल और भव्य इमारत बनाए कैसे जाते थे? महाराष्ट्र के ऐसे ही कुछ समुद्री किलों की कहानी भी रहस्यमय और दिलचस्प है. इनमें से कुछ जर्जर हालत में हैं पर ये अभी भी किसी नई इमारत की तरह मजबूत हैं.

आज की इस आधुनिक दुनिया में भी हम पानी के किसी वाहन के बिना किसी द्वीप या समुद्री तट पर नहीं पहुंच सकते. तो जरा सोचिए, यह पुराने जमाने में कैसे होता होगा? ये समुद्री तट पर बने किले हमे आराम के कुछ क्षण देते हैं जब हम यहां से इसके लोकेशन का नजारा देखते हैं. खैर यह तो स्पष्ट है कि ये किले दुश्मनों को अपने क्षेत्र से दूर रखने के लिए बनाए गये थे.

मुरुद जंजीरा किला

विशाल काले रंग की यह रचना तट पर बसे मुदूर गांव में देखी जा सकती है. राजपुर के घाट से नौका की सवारी आपको भारत की सबसे मजबूत समुद्री किले की ओर ले जाएगी. मुरुद जंजीरा किला निजामशाही राजवंश की रचना है, जिन्होंने कभी अपने दुश्मनों को इससे अंदर आने नहीं दिया. बड़े-बड़े तोप, प्राकृतिक झीलें, ध्वस्त महल आदि इस किले के अंदर आपको देखने को मिल जाएंगे. मुरुद जंजीरा की अपनी अलग ही शान है.

अलीबाग किला

अलीबाग का किला उन स्थानों में से एक है जिसे छत्रपति शिवाजी ने कोंकण तट को अधिग्रहित करने के लिया चुना था. इस छोटे से समुद्री किले ने अंग्रेजों से लड़ाई के वक्त बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. अलीबाग जिसे कोलाबा किले के नाम से भी जाना जाता है, एक बहुत ही प्रसिद्ध स्मारक है जो पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा लोकप्रिय है.

सुवर्णदुर्ग किला

‘सुवर्ण’ मतलब ‘सोना’ और ‘दुर्ग’ मतलब ‘किला’, यह किला मराठा वंश का गौरव हुआ करता था. इस स्वर्ण किले को भी दुश्मनों से रक्षा करने के लिए बनाया गया था और इस किले की दीवार समय की कसौटी पर खरी भी उतरी. किले का इंटीरियर अब उतनी अच्छी तरह से संरक्षित नहीं है पर यह मराठाओं की आर्किटेक्चरल कौशल को और मराठा के सेनाओं की उस समय की तकनीकों को दर्शाता है.

सिन्धुदुर्ग किला

बाकी समुद्री किलों से अगर तुलना की जाए तो, सिन्धुदुर्ग किला उनसे ज्यादा बेहतर हालत में है. यह महाराष्ट्र के मालवान तटीय रेखा पर मजबूती से खड़ा है. एक ऐसा भी समय हुआ करता था जब यहां बहुत सारे लोग निवास करते थे पर अब सुविधाओं के अभाव में सारे लोग धीरे धीरे यहां से बाहर चले आए हैं. हालांकि सिन्धुदुर्ग किला भी शिवाजी महाराज की भव्य योजनाओं में से एक था.

ये समुद्री किले अरब सागर के तटीय रेखा पर, एक ताज में रत्नों के समान हैं. इन पुराने धरोहरों की यात्रा आपको महाराष्ट्र के प्राचीन और विजयकारी काल में ले जाएगी.

ठंडे पानी से नहाने से कम होता है मोटापा…

वजन कम करना एक लंबी और थका देने वाली प्रक्रिया है. वजन कम करने के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते हैं. कुछ डाइटिंग का सहारा लेते हैं तो कुछ घंटों दौड़ते हैं. कुछ योग करते हैं. पर क्या आप जानते हैं बिना दौड़े-भागे और बिना डाइटिंग किए भी आप वजन कम कर सकते हैं. ठंडे पानी से नहाकर आप अपना वजन कम कर सकते हैं.

हो सकता है आपको इस बात पर यकीन नहीं हो लेकिन सच्चाई यही है कि ठंडे पानी से नहाने से वजन कम होता है. दरअसल ये पूरी तरह वैज्ञानिक क्रिया है. हमारे शरीर में दो तरह के फैट होते हैं. व्हाइट फैट और ब्राउन फैट. व्हाइट फैट वो फैट होता है जिसकी आवश्यकता नहीं होती है. ये फैट तब जमा हो जाता है जब हम आवश्यकता से अधिक कैलोरी इनटेक करते हैं और ये फैट बर्न नहीं हो पाता. ये व्हाइट फैट कमर, पीठ के निचले हिस्से, गर्दन और जांघों पर जमा हो जाता है.

वहीं ब्राउन फैट शरीर के लिए अच्छा होता है. ये हीट जेनरेट करने का काम करता है जिससे हमारा शरीर गर्म बना रहता है. जब भी हमें ठंड लगती है, ब्राउन फैट सक्रिय हो जाता है. जब हम ठंडे पानी से नहाते हैं तो तेजी से फैट गलना शुरू हो जाता है. जिसका सीधा मतलब है कि आपकी बढ़ी हुई चर्बी कम हो रही है.

ठंडे पानी से नहाने के फायदे:

1. ठंडे पानी से नहाने पर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है. जिससे चर्बी गलती है. इसके साथ ही ठंडे पानी से नहाने से इम्यून सिस्टम भी बेहतर होता है.

2. ठंडे पानी से नहाने से तनाव भी कम होता है.

3. अगर आपको डिप्रेशन की शिकायत है तो भी ठंडे पानी से नहाना आपके लिए फायदेमंद रहेगा.

4. ठंडे पानी से नहाने से दिमाग तेज होता है.

कामसूत्र कंडोम का ‘हनीमून सरप्राइज पैक’

भारत में पहली बार कामसूत्र कंडोम ने ‘हनीमून सरप्राइज पैक’ का लौंच इसके सिल्वर जुबली के मौके पर किया. 25 साल तक इस उत्पाद ने ‘फॉर द मेकिंग ऑफ़ लव’ के क्षेत्र में अच्छा काम किया है. हनीमून सरप्राइज पैक 7 अलग-अलग वैरायटी में उपलब्ध होगा.

चेयरमैन और मैनेजिंग डिरेक्टर गौतम हरी सिंहानिया कहते हैं कि आज से 25 साल पहले इसे लौंच करना आसान नहीं था. मेरे लिए बड़ी चुनौती थी. इसके लौंच ने भारत में सेक्स और उससे जुड़े टैबू को बदल कर रख दिया है.

मॉडल और एक्ट्रेस पूजा बेदी अपने पुराने दिनों को याद करती हुई कहती हैं कि जब मैंने इसके लिए मॉडलिंग की थी तो मुझे बोल्ड और कामुक कहा गया, यह एड काफी कंट्रोवर्सियल थी, पर मैंने इसे जरुरी समझ कर किया और यह मेरी सबसे बेस्ट कैम्पेन थी जिसके साथ मैं जुडी.

एड फिल्म मेकर अलिक पद्मसी कहते हैं कि 90 के दशक में कंडोम के एड चुनौतीपूर्ण थी. लोग इस बारे में बात करने से भी कतराते थे. जबकि यह ‘सेफ मेकिंग लव’ और फैमिली प्लानिंग का एक जरिया है. आज लोगो में जागरुकता आ चुकी है. इस तरह जो हमारा मकसद था, वह अब पूरा हो चुका है. आज हर गांव और शहर के लोग खुलकर इस बारें में बात करने से हिचकिचाते नहीं है.

 

ब्राइडल लुक को खास बना देगी नथ

दुल्हन बनने की तैयारी कर रहीं हैं और कपड़ों के साथ ही ज्वैलरी डिजाइंस को चुनना आपके लिए बहुत बड़ी मुसीबत का काम बन गया है तो चलिए हम आपकी थोड़ी सी मदद कर देते हैं.

ज्वैलरी का सबसे खास हिस्सा होती है नाक की नथ और इसके कई सारे डिजाइन आपको मार्केट में मिल जाएंगे.

आइए जानें इसके सबसे लेटेस्ट डिजाइंस के बारे में…

1. बंगाली स्‍टाइल: अगर आप बंगाली है तो हल्‍के क्रॉफ्टवर्क वाले और चैन से जुड़ी हुई नथ आप पर बहुत जंचेगी.

2. रिंग वाली नथ: अगर आप बहुत सिम्‍पल सी नथ पहनना चाहती हैं तो रिंग वाली नथ ट्राई कर सकती हैं.

3. जड़ाऊ नथ: राजस्थानी और मारवाड़ी दुल्हनों में इस नथ को पहनने का रिवाज है. जड़ी हुई नथ शादी के दिन बेहद खास लुक देती है. आप इसे जड़ाऊ लंहगे के साथ पहन सकती है.

4. मल्‍टीपल चेन वाली नथ: ऐसी नथ खासकर सॉउथ इंडियन कल्चर में ज्यादा देखी जा सकती हैं. लेकिन अगर आप ज्वैलरी डिजाइन के साथ एक्सपेरिमेंट करना चाहती हैं तो तीन चैन वाली नथ को पहनकर देखिए यह आपके चेहरे का लुक ही बदल देगी. इसके साथ हैवी मांगटीका भी बहुत अच्‍छा लगता है.

5. ब्रांज नथ: राजस्‍थान का ही एक और लुक है इस नथ का ये खास डिजाइन. इसे प्योर गोल्‍ड से बनाया जाता है जो हल्‍का सा डल लुक देता है.

6. हूप नथ: बड़ी सी नथ पहनने से अच्‍छा है कि आप छोटी सी ही नोज रिंग पहनें. यह पहनने और कैरी करने में आसान रहती है. हाल में दृष्टि धामी ने इस नथ को अपनी शादी में पहना था.

त्योहार के उपहार जो बन जाएं यादगार

यूं तो भारत में कई त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन दीवाली एक ऐसा त्योहार है, जिस में अपनों से मिलने के साथ-साथ उन्हें उपहार देने का मौका भी मिलता है. तो क्यों न अपनों के घर जाते समय और अपनों की अपने घर से बिदाई करते वक्त इस खास मौके पर दें उन्हें यादगार उपहार.

ड्राईफ्रूट्स: अपनों को हैल्दी और टेस्टी तोहफा देने का मन बना रही हैं तो ड्राईफ्रूट्स से बढि़या विकल्प और कोई नहीं. हैल्दी होने के साथसाथ ये टिकाऊ भी होते हैं. मिठाई की तरह इन के बेस्वाद यानी खराब होने का डर भी नहीं होता है. किसी एक के बजाय मिक्स ड्राईफ्रूट्स का पैक खरीदें, जिस में काजू, बादाम, किशमिश, अखरोट आदि हों.

चौकलेट्स: अगर आप के घर नन्हें मेहमान आए हुए हैं या आप जिस घर में जा रही हैं वहां नन्हें मेजबान आप की आवभगत करने वाले हैं तो बिना ज्यादा कुछ सोचेसमझे उन के लिए चौकलेट बौक्स बतौर उपहार खरीद लें. बच्चों को भेंटस्वरूप देने के लिए इस से अच्छा तोहफा और कुछ नहीं हो सकता.

मिठाई: जब बिना मीठे के डिनर और लंच मेन्यू पूरा नहीं होता, तो भला मीठे के बिना त्योहार कैसे पूरा हो सकता है? इस खास पर्व पर अपनों को मिठाई की सौगात दे कर रिश्तों में मिठास घोलें. काजूकतली, गुलाबजामुन, सोनपापड़ी, रसगुल्ले, बरफी जैसी मिठाई आप अपनों को उपहार में दे सकती हैं. मिठाई लोगों द्वारा सब से ज्यादा पसंद किया जाने वाला तोहफा है.

कौइन: अगर आप अपने किसी खास को न सिर्फ यादगार, बल्कि ताउम्र महफूज रहने वाला कोई उपहार देना चाहती हैं, तो उन्हें सिल्वर या गोल्ड का कौइन गिफ्ट में दे सकती हैं. यह आप के रिश्ते को सदैव जीवित रखेगा. कौइन को आकर्षक बनवाने के लिए उस पर ‘शुभ दीवाली’ या ‘ढेरों शुभकामनाएं’ लिखवाएं.

यकीन मानिए आप का यह तोहफा अपनों का दिल जीत लेगा.

पटाखे: दीपों के त्योहार को पटाखों के उपहार से भी रोशन किया जा सकता है. नन्हें मेहमानों के लिए पटाखों का उपहार बेहद खास होगा, मगर पर्यावरण और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तोहफे के लिए ईको फ्रैंडली और बहुत ही साधारण पटाखों का चुनाव करें.

आउटफिट्स: अपनों की पसंद-नापसंद का ख्याल रखते हुए आप मेहमानों के लिए कपड़े भी खरीद सकती हैं. आप जिन्हें बतौर तोहफा कपड़े दे रही हैं उन की उम्र, रंग, पर्सनैलिटी, प्रोफैशन आदि का ध्यान रखते हुए कपड़े खरीदें ताकि आप का तोहफा उन के दिल को छू ले.

होम ऐप्लाएंसेस: होममेकर्स का दिल जीतने के लिए होम एप्लाएंसेस सब से बेहतर तोहफा है. इस से कम समय में वे अपना सारा काम आसानी से निबटा कर खाली समय में आप को याद करेंगी. ओस्टर, जूसर, माइक्रोवेव, रोटी मेकर आदि होममेकर्स के लिए बतौर गिफ्ट खरीदे जा सकते हैं.

मेकअप किट: किसी खास सहेली को भेंटस्वरूप देने के लिए मेकअप किट भी खरीदी जा सकती है, लेकिन तब जब आप की सहेली या आप जिन्हें मेकअप किट तोहफे में दे रही हैं वे मेकअप प्रोडक्ट्स यूज करने की शौकीन हों वरना यह तोहफा उन के किसी काम नहीं आएगा.

ज्वैलरी: अपनी लेडी लव को गिफ्ट करने के लिए जरूरी नहीं कि आप सोने-चांदी की ज्वैलरी खरीदें. आर्टिफिशियल ज्वैलरी खरीद कर भी आप उन्हें भेंटस्वरूप दे सकती हैं. नैकलैस सैट, हैवी इयररिंग्स, ब्रेसलेट, बैंगल्स आदि खरीदी जा सकती हैं. ज्वैलरी की जगह ज्वैलरी बौक्स भी दे सकती हैं.

क्रौकरी: डिनर सैट, टी सैट, बाउल्स सैट जैसी क्रौकरी भी दीवाली के दिन घर आए मेहमानों को बतौर गिफ्ट दी जा सकती है. मार्केट में क्रौकरी के ढेरों स्टाइल और डिजाइन आसानी से मिल जाएंगे. अपने बजट के अनुसार चुनाव करें. चाहें तो स्टील या मैटल के बरतन भी गिफ्ट में दे सकती हैं.

डैकोरेटिव आइटम्स: कैंडल स्टैंड, लैंप, वाल क्लौक, हैंगिंग वाल पीस, वुडन डैकोर ऐक्सैसरीज, मैटल के शोपीस, पेंटिंग्स, सीनरी भी गिफ्ट में दी जा सकती है. आप के रिश्ते को मजबूत करने के साथ-साथ यह तोहफा उन के घर को सजाने के भी काम आएगा.

गैजेट गिफ्ट्स: महिलाओं के लिए तोहफा खरीदना आसान होता है, लेकिन पुरुषों के लिए क्या खरीदें, समझ नहीं आता. दीवाली के खास मौके पर पुरुषों के लिए आप मोबाइल, वाच, लैपटौप जैसे गैजेट्स खरीद सकती हैं और अगर गैजेट्स नहीं खरीद सकतीं तो मोबाइल कवर, लैपटौप बैग या गैजेट ऐक्सैसरीज, कार्ड होल्डर आदि भी खरीदा जा सकता है. 

क्रिएटिव आइडिया

अपनी इच्छा और सुविधानुसार चाहे जो गिफ्ट खरीदें, उसे गिफ्ट रैप पेपर से पैक करना न भूलें. इस से तोहफा और भी आकर्षक नजर आता है.

स्मार्ट टिप

एक साथ कइयों को गिफ्ट देना हो तो 1-1 कर गिफ्ट खरीदने के बजाय बल्क में गिफ्ट खरीदें. इस से आप के काफी पैसे बच जाएंगे.

कौरपोरेट गिफ्ट आइडियाज

अगर आप किसी कंपनी की मालिक हैं, तो जाहिर है आप के कर्मचारियों को भी आप से तोहफे की उम्मीद होगी. मिठाई, चौकलेट्स और ड्राईफ्रूट्स के अलावा आप उन्हें ये चीजें भी गिफ्ट में दे सकती हैं:

स्पा वाउचर: अपने कर्मचारी को स्पा वाउचर बतौर गिफ्ट दें ताकि उन की सारी थकावट दूर हो जाए और वे दिल खोल कर दीवाली का पर्व मनाएं.

स्टेशनरी: डायरी, पैन सैट, फोल्डर, फाइल जैसी स्टेशनरी भी आप अपने कर्मचारियों को तोहफे में दे सकती हैं.

जिम मैंबरशिप: अपने कर्मचारियों की सेहत का खयाल रखते हुए आप उन्हें जिम मैंबरशिप भी दिलवा सकती हैं.

इंश्योरैंस पौलिसी: कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उन्हें इंश्योरैंस पौलिसी का तोहफा भी दिया जा सकता है.

बुक्स: अपने कर्मचारियों की जानकारी बढ़ाने के लिए उन्हें बुक्स भी दी जा सकती हैं.

गिफ्ट वाउचर: तोहफे के तौर पर गिफ्ट वाउचर भी अच्छा विकल्प है. इस से वे अपनी मनपसंद चीज खुद खरीद सकते हैं.

अपनाने की हिम्मत तो करो

सर्वोच्च न्यायालय इन दिनों ट्रिपल तलाक यानी तलाक तलाक तलाक कह कर मुसलिम शादीशुदा औरत को छोड़ देने वाले धार्मिक कानून पर विचार कर रहा है. भारतीय जनता पार्टी थोड़े असमंजस में है. चुनाव जीतने से पहले तो वह ढोल पीटपीट कर सामान्य विवाह कानून की वकालत करती थी पर अब मुसलिम धार्मिक कानून के बारे में कुछ भी कहने से कतरा रही है. उस का कहना है कि मामला औरत के अस्तित्व का है, धर्म का नहीं, पर यह दलील लचर है, क्योंकि सरकार तो खुद सैकड़ों फैसले हिंदू संस्कृति समाज को ले कर करती फिर रही है.

कांग्रेस सरकार भी यही करती रही है पर भाजपा सरकार कुछ ज्यादा ही उत्साहित रहती है और कभी योग, कभी वंदेमातरम, कभी भारत माता को हिंदू देवी का रूप दे कर, तो कभी धर्म का सा रूप दे कर जनता को कुछ करने पर मजबूर करती रहती है. मुसलिम कानून में परिवर्तन की आवश्यकता है, क्योंकि यह पुराना और आज के युग के लायक नहीं पर सवाल है कि यह परिवर्तन करे कौन? कठमुल्ले तो उलटा चाहते हैं कि जो थोड़ाबहुत बदलाव आया है वह भी बंद हो जाए और समाज हदीस के अनुसार चले. उन्हें मोबाइल, कारों, हवाईजहाजों, मिसाइलों से शिकायत नहीं है, जो धर्म की स्थापना के समय नहीं थीं पर रोजमर्रा के व्यवहार में पुराने चिपके रहना चाहते हैं.

अदालतें समझती हैं 3 बार तलाक कह कर पत्नी से छुटकारा पाना गलत है पर उसे अवैध घोषित करने पर धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जाएगा, जो भारत के ही नहीं दुनिया के सभी संविधानों में किसी न किसी रूप में है. औरत मुसलिम हो या हिंदू अथवा ईसाई जब धर्म से बंध जाती है तो उस के पास चौइस रहती ही नहीं कि वह धर्म के एक हिस्से को माने और दूसरे को नहीं. अदालत में जिन औरतों ने दुहाई दी है वे एक तरफ तो कह रही हैं कि वे मुसलिम हैं, पर मुसलिम कानून के अनुसार हुए विवाह के एक नियम को गलत मान रही हैं. यह दोगलापन है.

व्यक्तिगत कानूनों का पर्याय कम से कम भारत में तो मौजूद है. यहां कानूनों की भरमार है, जो विवाह, विरासत, जन्म, मृत्यु पर धर्म को नकारने का हक देते हैं. जो औरतें मुसलिम ट्रिपल तलाक के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट गई हैं उन्हें तार्किक स्पैशल मैरिज ऐक्ट जैसे कानूनों का रास्ता अपनाने से कोई नहीं रोकता.

धर्म से छिटक कर अधार्मिक या नौनबिलीवर बनना आसान नहीं है पर यही उपाय है जिस से धर्म की मोटी दीवारों को तोड़ा जा सकता है. धर्म प्रचारक तो लगे रहेंगे कि धर्म की दुकानें चलती रहें. न हिंदू पंडे चाहेंगे कि घंटों चलने वाले फेरे बंद हों, न पादरी चाहेंगे कि उबाऊ खड़े हों, बैठे हों वाली कवायद के बिना ईसाई विवाह हों और न ही मुल्ला चाहेंगे कि मुसलिम विवाह के उलझे कानूनों में कोई कमी की जाए.

रास्ता तो एक ही है कि धर्म की जंजीरों से मुक्त हों. सुप्रीम कोर्ट यह कहेगा नहीं और ट्रिपल तलाक पर मामला अधर में लटका रहेगा या गेंद संसद की तरफ लुढ़का दी जाएगी. अदालतों का हस्तक्षेप वहां जरूरी है जहां रास्ता न हो. भारत में तो मौजूद है, उसे अपनाने की हिम्मत करो मुहतरिमाओ.

यह कैसी 21वीं सदी है

दुनिया आज फिर तनाव, युद्धों के बादलों, तेज होती सेनाओं, नए नए बारूदी केंद्रों को झेल रही है. उरी में आतंकवादियों के हमले के बाद भारतीय सेना का दावा कि उस ने पाकिस्तान की सीमा में चल रहे आतंकवादी कैंपों को नष्ट कर दिया है, एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है. सरकारें, सेनाएं लड़ती रहें, कम फर्क पड़ता है. फर्क पड़ता है तब जब लड़ाई का परिणाम आम घरों, परिवारों, बच्चों, औरतों, बूढ़ों को झेलना पड़ता है.

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारतपाक सीमा के निकट रह रहे लगभग 10 हजार गरीब किसानों और मजदूरों को अपने ठिकाने बदलने को कहा गया है. ये अब अपने देश में अपने ही लोगों के बनाए शरणार्थी हो गए हैं. इन की गिनती दुनिया भर के उन 20-25 करोड़ शरणार्थियों में तो नहीं हो रही है, जिन्हें युद्ध, गोलाबारी, भूख से बचने के लिए अपने खुशहाल घर छोड़ कर दूसरे देशों में कच्चेपक्के मकानों, टैंटों, सड़कों पर पनाह लेनी पड़ रही है पर उन की अपने ही देश में हालत बहुत अच्छी नहीं है.

शरणार्थियों के जत्थों में एक बात हर जगह सामान्य है और वह है औरतों की मुसीबत. जब सिर पर छत न हो, चूल्हा, गैस न हो, खाने का सामान न हो, ठंड में गरम कपड़े न हों, मैले कपड़े हों, तो इन सब समस्याओं को हल औरतों को ही करना पड़ता है. उन्हें न केवल अपनी इज्जत की रक्षा करनी होती है, बेटियों को भी लूटे जाने से बचाना होता है, रात का खाना भी तैयार करना होता है.

इन शरणार्थी शिविरों में जब भी सरकार का, किसी समाजसेवी संगठन का या फिर संयुक्त राष्ट्र संघ का राहत देने वाला ट्रक पहुंचता है तो मर्दों से ज्यादा औरतें भाग कर कुछ पाने के लिए भीड़ में कुचले जाने तक का जोखिम लेती हैं. लड़ाइयां देशों के नेता करवाते हैं, धर्म प्रचारक करवाते हैं, भाषा या रंग भेद के नाम पर उकसाने वाले करवाते हैं पर असली शिकार न सेनाएं होती हैं, न सरकारें, न धर्म प्रचारक और न ही नीति निर्धारक: शिकार तो बस औरतें होती हैं.

हर रिफ्यूजी कैंप के टैंटों के सामने खाली बैठे मर्द और कमरतोड़ मेहनत करती औरतें देखी जा सकती हैं. सुबह उठ कर खाने का प्रबंध करने से ले कर शाम तक हर आतंक का निशाना औरतें ही होती हैं. इसलामिक स्टेट के कारण हजारों औरतों को अगवा कर के देहव्यापार में बेचा जा रहा है और उन की नंगी तसवीरें इंटरनैट पर डाल कर बोलियां लगवाई जा रही हैं. उन्हें न केवल अपने मातापिता, भाईबहनों, बच्चों से अलग करा जा रहा है, उन्हें सैक्स स्लेव बना कर हर रोज बीसियों को सहना भी पड़ रहा है, क्योंकि लड़ाकू मर्दों को पेट की भूख के साथ सैक्स की भूख भी होती है.

इलाका चाहे एशिया का हो, दक्षिणी यूरोप का हो, उत्तरी अफ्रीका का हो; केंद्रीय दक्षिणी अमेरिका का हो या फिर दक्षिणपूर्व एशिया का, बिना धर्म, रंग, कद, भाषा के भेद के औरतों को रिफ्यूजी होने की कीमत चुकानी पड़ रही है, मेहनत कर के या टांगें फैला कर. यह कैसी 21वीं सदी है? यह कैसी इंटरनैट क्रांति है? यह कैसा चांद और मंगल पर पहुंचने का दावा है? यह कैसा लोकतंत्र है? औरतें किसी भी देश, समाज, धर्म में सुरक्षित नहीं हैं. लानत है उन पर जो आधुनिक तकनीक का अंतिम निशाना औरतों को बना रहे हैं.

फाइव स्टार होटल में लीजिये देशी मिठाई का स्वाद

फेस्टिवल सीजन में फाइव स्टार होटल्स में भी देशी मिठाई, केक और दूसरे गिफ्ट पैक मिलने लगे हैं. लखनऊ में मैरिअॅट के फेयर फील्ड और रेनेंसा ने अपने ग्राहकों के लिये 800 रूपये से लेकर 2000 रूपये तक के गिफ्ट पैक तैयार किये हैं. इसमें देशी स्वाद वाली मिठाई से लेकर, केक, ड्राई फ्रूट और फ्लेवर्ड चाकलेट जैसे बहुत सारे गिफ्ट पैक शामिल हैं. 

होटल फेयर फील्ड में मार्केट नाम का एक अलग कॉर्नर है. जहां पर ग्राहक खरीददारी कर सकते हैं. होटल के डायरेक्टर सेल्स विक्रम सिंह ने बताया ‘होटल में रूकने के लिये आने वाले कस्टमर अपने दोस्त और रिश्तेदारों को गिफ्ट पैक देना चाहते हैं. अब उनको इसके लिये बाजार में जाने की जरूरत नहीं है. वह होटल से ही अपने लिये सुविधाजनक गिफ्ट पैक ले सकते हैं. हमारे होटल में तैयार इन चीजों में शुद्वता और स्वाद की गांरटी है.’

होटल के चीफ शेफ प्रशांत उत्तम राव सूर्यवंशी कहते हैं ‘हम पहली बार ग्राहकों के लिये कलाकंद, चाकलेट बरफी,मावा बरफी, अंजीर रोल, अंजीर बरफी, चमचम और गुझिया जैसे प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं. इसके साथ ही साथ केक और ड्राई फ्रूट जैसे दूसरे कई गिफ्ट पैक भी यहां पर तैयार हैं. कस्टमर की डिमांड पर उसकी जरूरत के हिसाब से हम गिफ्ट पैक तैयार कर रहे हैं. एक बार हमारे यहां से गिफ्ट पैक ले जाने वाले बारबार डिमांड करते हैं.’ विक्रम सिंह कहते है ‘दिवाली में केक और ड्राई फ्रूट के बाद क्रिसमस तक के आर्डर काफी समय पहले से मिलने लगे हैं. हमारे यहां तैयार ‘रम केक’ काफी डिमांड में रहता है.’

असल में फाइव स्टार होटल भी अब कस्टमर की जरूरत के हिसाब से अपनी सेवायें देने लगे हैं. मैरिअॅट के फेयर फील्ड होटल में कावा रेस्ंत्रा में ही अब 15 से 20 लोगों को घर जैसी जगह पर बैठा कर दावत देने के लिये एक खूबसूरत सा हॉल बना दिया गया है. 2 घंटे कह बुकिंग के लिये यह आपको पूरी तरह से घर जैसा अनुभव कराता है.अच्छी बात यह है कि इस तरह के खाने के समय पूरी तरह की प्राइवेसी रहती है.खाने वाले को अपने घर जैसा अनुभव होता है.

होटल रेनेंसा की अस्सिटेंट मैनेजर मार्केटिंग एंड कम्यूनिकेशन फातिमा अब्बास कहती हैं ‘होटल रेनेंसा में अवधी फूड में को लेकर हमने ट्रेडिशनल प्रयोग किये हैं. अवध के राजाओं, नवाबों और तालुकेदारों से बात कर पुराने स्वाद वाले अवधी खाने को तैयार कराया है. जिससे लखनऊ आने वाले को यहां का एक अच्छा स्वाद मिल सके. अब केक, मिठाईयों और ड्राईफ्रूट के गिफ्ट पैक मिलने से कस्टमर को सुविधा होने लगी है. हमारे यहां का फ्लेवर्ड चाकलेट बहुत पसंद किया जाता है.’ 

इस एक्ट्रेस का करियर बर्बाद करना चाहते थे करण

ऐ दिल है मुश्किल में अनुष्का शर्मा को अपनी फिल्म में काम देने वाले करण जौहर एक समय उनका करियर बर्बाद करना चाहते थे. ये बात किसी और ने नहीं बल्कि खुद करण ने बताई है. करण ने मामी फेस्टिवल के दौरान इस बात का खुलासा किया.

करण ने बताया कि अनुष्का का करियर बर्बाद करने के लिए उन्होंने कोशिश भी की थी. लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाए. उन्होंने बताया कि उन्हें अनुष्का की इमेज बिल्कुल पसंद नहीं थी और वह चाहते थे कि रब ने बना दी जोड़ी में अनुष्का की जगह किसी और एक्ट्रेस को लिया जाए. इसके लिए उन्होंने आदित्य से बात भी की थी. लेकिन आदित्य ने उनकी बात नहीं मानी और अनुष्का को फिल्म से नहीं हटाया.

करण ने बताया कि जब उन्होंने यह फिल्म देखी तो उन्हें अनुष्का का काम पसंद नहीं आया था. लेकिन फिल्म बैंड बाजा बारात देखने के बाद अनुष्का को लेकर उनकी सोच बदल गई. करण के कन्फेशन पर ऐश्वर्या ने कहा कि अपनी बात को इस तरह सबके सामने मानना बेहद बड़ी बात है और यही करण की खासियत है. लेकिन अनुष्का ने करण की इस बात पर कोई रिएक्शन नहीं दिया.

बता दें कि करण जौहर के डायरेक्शन में बनी फिल्म ऐ दिल है मुश्किल 28 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है. इस फिल्म में रणबीर कपूर, ऐश्वर्या राय बच्चन और अनुष्का शर्मा हैं. फिल्म में फवाद खान के कैमियो को लेकर काफी विवाद रहा था.

उरी हमले के बाद से इस पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने की मांग हो रही है. इसी के चलते इस फिल्म का काफी विरोध हुआ था. लेकिन अब फिल्म को हरी झंडी मिल गई है. साथ ही एमएनएस ने भी कहा है कि वो फिल्म का विरोध नहीं करेंगे.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें