रिलीज से पहले ही ‘धोनी..’ ने कमाए 100 करोड़ से ज्यादा

भारत में क्रिकेट और बॉलीवुड में से किसका क्रेज ज्यादा है. यह शायद कोई नहीं बता सकता. लेकिन जब क्रिकेट और बॉलीवुड दोनों जुड़ जाएं तो फैंस का पागलपन आप समझ ही सकते हैं. ऐसा ही कुछ हो रहा है आने वाली बॉयोपिक फिल्म ‘एम एस धोनी: दि अन्टोल्ड स्टोरी’ को लेकर.

फिल्म 30 सितंबर को रिलीज होने वाली है. फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत मुख्य किरदार निभा रहे हैं. जी हां, बता दें धोनी की यह फिल्म 104 करोड़ के भारी भरकम बजट पर बन रही है.

हमेशा छोटी बजट की फिल्में बनाने वाले निर्देशक नीरज पांडे ने इस बार 100 करोड़ का आंकड़ा पार करने की ठान ही ली है. जाहिर है अब जबकि फिल्म का बजट 100 करोड़ से ऊपर रखा गया है तो फिल्म की कमाई भी 150 करोड़ से ज्यादा ही होनी चाहिए.

खुशी की बात यह है कि धोनी की जिंदगी पर बनी फिल्म ने रिलीज से पहले ही 100 करोड़ की कमाई कर ली है. फिल्म की सैटेलाइट राइट्स 55 करोड़ में बेची गई है, जो कि सलमान खान की फिल्म से भी ज्यादा है.

फिल्म के मेकर्स ने सुशांत सिंह राजपूत के ब्राण्ड इंर्डोसमेंट से भी 20 करोड़ कमाए हैं, जिनका चेहरा महेन्द्र सिंह धोनी हैं. वहीं, म्यूजिक और ओवरसीज डिस्ट्रिब्यूशन राइट्स से फिल्म ने 5 और 10 करोड़ की कमाई की है.

एक हॉलीवुड स्टूडियो ने फिल्म की रीमेक राइट्स 10 करोड़ में खरीदे हैं. फिल्म अब अंग्रेजी भाषा में भी बनेगी. बता दें, इस फिल्म के लिए महेन्द्र सिंह धोनी ने खुद 45 करोड़ लिए हैं, जबकि सुशांत सिंह राजपूत को 2 करोड़ फीस मिली है.

धोनी के बिजनेस मैनेजर अरूण पांडे को फिल्म के लिए 5 करोड़ दिए गए हैं. इस फिल्म के लिए सुशांत सिंह राजपूत ने 13 महीनों तक ट्रेनिंग ली है. ताकि वे धोनी जैसी बैटिंग स्टाइल और बॉडी लैंग्वेज सीख सकें.

बुरका बनाम बुरकिनी

किसी भी औरत को अपनी मरजी के कपड़े पहनने का मौलिक अधिकार है. समाज ने कपड़े पहनना लगभग अनिवार्य कर दिया. इसे सभ्यता का विकास कहें या शरीर की मूलभूत आवश्यकता पर न पहनने का अधिकार पूरी तरह छिन जाए, यह भी गलत है.

हरेक के साथ कुछ सामान्य व्यावहारिक नियम बंधे होते हैं और इसीलिए दफ्तर में बिकिनी पहन कर जाना गलत होगा और स्विमिंग पूल में साड़ी पहन कर कूद जाना भी गलत होगा. यूरोप में इस बात पर जंग छिड़ी है कि मुसलिम औरतों को समुद्री तटों पर बुरका और बिकिनी का सम्मिश्रण बुरकिनी पहनना, जिस में पूरा बदन स्किन टाइट ड्रैस से ढका होता है, उन के निजी अधिकारों में आता है या नहीं. फ्रांस के कई शहरों के मेयरों ने इस पर पाबंदी लगाई है और एक अदालत ने इसे अवैध भी कहा है. फिर भी पूरे यूरोप में बुरके को ले कर विवाद छिड़ा है.

बुरका पहनना अगर निजी अधिकार की बात होती तो शायद किसी को आपत्ति नहीं होती. बुरका इसलिए नहीं पहना जा रहा कि औरतों को लगता है कि वे उस में सुंदर लगती हैं या यह फैशन स्टेटमैंट है. बुरका तो इसलिए पहना जाता है, क्योंकि यह धार्मिक कानून है और मुसलिम औरतें आजाद फ्रांस में भी रह कर मुसलिम कानून को वरीयता देती हैं.

बुरकिनी बिकिनी का पर्याय हो पर है यह औरतों पर धार्मिक बंदिश ही. इसे किसी भी तरह से औरतों के निजी अधिकारों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. इसे न पहनने पर परिवार और समाज जम कर आपत्ति करता है जैसे भारत में आज भी परदा न करने पर औरतों को बुराभला कहा जाता है. एक युग था जब भारत के अनेक इलाकों में औरतों को जबरन ऊपरी वस्त्र पहनने से मनाही थी.  केरल में इसे ले कर आंदोलन हुए. आज ऊपरी वस्त्र न पहन कर स्तन खुले दिखाने के हक पर पश्चिम में भी लड़ाई लड़ी जाती है.

सवाल यह है कि इस तरह की बंदिशें औरतों पर ही ज्यादा क्यों? आदमियों पर तो बहुत थोड़ी सी रोकें लगती हैं. वे सिर्फ कच्छा पहने बाजार में बैठे रहें और औरतें बुरके में रहें. इस का क्या प्राकृतिक, व्यावहारिक, शारीरिक कारण हो सकता है?

औरतों पर बंदिशें इसलिए होती हैं कि उन्हें रैजिमैंटेशन की लत डाली जा सके. वे वही करें जो दूसरे कहें. फिर चाहे पिता हो, पति हो, बेटा हो, समाज हो, पंडा हो, पादरी हो या शहर का मेयर किसी को हक नहीं कि औरतों को अव्यावहारिक पोशाक पहनने को मजबूर करे.

बुरकिनी बैन या बुरका बैन महिलाओं को आजादी दिलाने का एक कदम है. इस में कुछ कानूनी अति भी हो तो भी इस का समर्थन करा जाना चाहिए, क्योंकि यह औरतों की इच्छा नहीं कि वे बुरका पहनें, यह उन के धर्म के कठमुल्ले उन पर लादते हैं जैसे भारत में ससुर के सामने बहू का परदा लादा जाता रहा है.

किराए की कोख पर कानून का पहरा

किराए की कोख पर कानून बना कर सरकार ने औरतों के शरीर पर उन के अपने हक को एक बार फिर कम किया है. गर्भपात पर नियंत्रण, अल्ट्रासाउंड पर कंट्रोल, शरीर दिखाने को अश्लीलता कहना आदि औरतों के निजी हकों को कम करना है और किसी समाज और सरकार को मूलभूत तौर पर इस तरह के कानून एक जैंडर के लिए बनाने का खुद को हक देना गलत है.

जरा गिनती कर के बताइए कि इस प्रकार के कितने कानून आदमियों के बारे में हैं? क्या दौड़ने की गति सीमा तय करने वाला कोई कानून आदमियों पर लागू होता है? क्या अपने सिक्स पैक बनाने पर कानून बनाएगी सरकार? आदमी सिर्फ लंगोट पहने कहीं भी घूम सकते हैं पर औरतें नहीं.

कोख को किराए पर देने पर कानून में चाहे कहा जाए कि यह औरतों की सुरक्षा के लिए है ताकि उन का व्यापार न किया जाए पर इस बहाने उन की एक आय पर अंकुश लगा है.

औरत की कोख आराम से जीवन में 10-12 बच्चे जन सकती है. अगर उसे सही मुआवजा मिले तो कोख में किसी और के भू्रण को रखने में क्या हरज है? यह कोई जोरजबरदस्ती का मामला नहीं है. यह बलात्कार भी नहीं है.

यह तो टैस्ट ट्यूब बेबी वाला मामला है, जिस में पुरुष शुक्राणु और महिला एग को बाहर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है और फिर किसी तीसरी की कोख में डाला जाता है. किराए पर कोख देने वाली को पता भी नहीं होता कि यह बच्चा है किस का.

ठीक है इस तरह का काम धंधे का रूप ले चुका है पर बहुत काम हैं जो धंधे की शक्ल ले चुके हैं. धर्मांध मानते हैं कि विवाह के जोड़े ऊपर वाला बनाता है पर कोनकोने में विवाह बिचौलिए दिख जाएंगे. धर्मांध कहते हैं कि ईश्वर सब कुछ जानता है पर हर गली के नुक्कड़ पर धर्म का धंधा करने वाली दुकानें दिख जाएंगी, जो जोरशोर से ढोलनगाड़े पीट रही होंगी कि और ग्राहक आएं.

न्याय दिलाना अदालतों और समाज का काम है पर वकालत का धंधा चमक रहा है. मौत होने पर दाह का धंधा भी चमक रहा है. अमेरिका में तो अब रोना रोया जा रहा है कि कौफिन बनाने वालों का धंधा कम हो रहा है, क्योंकि लोग मुरदों को जलाने लगे हैं. इन मुरदों को जलाने के लिए दुकानें खुली हैं और 1-2 मामले तो ऐसे भी वहां मिले हैं, जिन में अधूरी जली लाशें फेंक दी गईं ताकि ईंधन बचाया जा सके.

इन सब पर कानून नहीं पर औरत की निजी कोख पर कानून. यह अनैतिक है. उतना ही अनैतिक जितना कि कल कहा जाए कि कोई मां अपने बच्चे को आया को सौंप नहीं सकती, क्योंकि बच्चे को पालना तो मां का काम है किराए की औरत का नहीं.

चॉकलेट फेशि‍यल: अब त्वचा से शि‍कायत नहीं

चॉकलेट फेशियल से त्वचा में न केवल निखार आता है बल्क‍ि इससे त्वचा को पोषण भी मिलता है. चॉकलेट फेशियल भी कई प्रकार का होता है. अगर आपको आपका स्क‍िन टाइप पता है तो आपके लिए सही फेशियल चुनना काफी आसान हो जाएगा.

अच्छी बात ये है कि अगर आप चाहें तो घर पर ही अपना चॉकेलट फेशियल कर सकती हैं. कुछ मात्रा में कोकोआ पाउडर को दही को मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लीजिए और इसे चेहरे पर लगाइए. ये एक बेहतरीन किस्म का चॉकलेट फेशियल है. इसका एक दूसरा फायदा ये भी है कि चॉकलेट की अपनी एक खास सुगंध होती है, जो लगाने के बाद आपको रीलेक्स होने में मदद करती है.

अगर आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है तो चॉकलेट फेशियल से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता है. चॉकलेट फेशियल से होने वाले ये फायदे आपको हैरत में डाल देंगे:

1. उच्च मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट

चॉकलेट फेशियल में उच्च मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होता है जिससे त्वचा पर मौजूद झुर्रियां और बारीक रेखाएं समाप्त हो जाती हैं. इसके अलावा अगर आपका चेहरा साफ नजर नहीं आता है तो भी ये फेशियल आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा.

2. बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने के लिए

चॉकलेट फेशियल इस्तेमाल करने का ये दूसरा बड़ा फायदा है. चॉकलेट फेशियल का इस्तेमाल करने से बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम किया जा सकता है. डार्क चॉकलेट में पर्याप्त मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं और ये किसी भी दूसरे फेशियल की तुलना में ज्यादा कारगर होता है.

3. दाग धब्बे से आजादी

चेहरे पर दाग-धब्बे हो जाना एक बहुत आम समस्या है. चॉकलेट फेशियल के इस्तेमाल से त्वचा के दाग-धब्बे बहुत आसानी से दूर हो जाते हैं और त्वचा दाग-रहित, खूबसूरत नजर आती है.

कामयाबी के लिए बदले करीब आधा दर्जन नाम

बॉलीवुड में एक गोविंदा ही ऐसे एक्टर हैं जो एस्ट्रोलॉजी पर भरपूर भरोसा रखते हैं. इन दिनों गोविंदा अपनी होम प्रोडक्‍शन फिल्म ‘आ गया हीरो’ पर दिन-रात काम कर रहे हैं. उन्होंने अपने स्ट्रगल के दिनों के कुछ सीक्रेट शेयर किए हैं.

गोविंदा का असली नाम गोविन्द अरुण आहूजा है. गोविंदा ने बताया कि स्ट्रगल के दिनों में उन्होंने सफलता पाने के लिए करीब आधा दर्जन नाम बदले थे. आखिरकार गोविंदा नाम पर उन्हें सक्सेस मिलना शुरू हुई. गोविंदा का कहना है कि हीरो बनने में उनके नाम का बड़ा योगदान है.

वो और उनका परिवार शुरू से ही ज्योतिष और नामांकन शास्त्र की खूब जानकारी रखता था. गोविंदा कहते हैं, “आपका नाम आपके काम में बहुत योगदान करता है. मैंने भी करीब आधे दर्जन नाम बदले हैं. जैसे गोविन्द राज, राज गोविंद, गोविन्द, अरुण गोविन्द और गोविंदा.” जैसे ही उन्होंने अपना नाम गोविंदा रखा वैसे ही आठ दिन के अंदर कई फिल्में साइन कर लीं थी.

गोविंदा ने 14 साल की उम्र से स्ट्रगल करना शुरू कर दिया था. लोग ये कहकर काम देने से मना कर देते थे कि तुम तो अभी ठीक से जवान भी नहीं हुए हो. जाओ अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी करो. कॉलेज खत्म होने के बाद उन्होंने फिर से फिल्मों में आने की कोशिश शुरू की जो कामयाब हुई.

गोविंदा आगे बताते हैं कि उन्हें पहले तीन-चार फिल्मों के लिए विलेन की भूमिका में लिया गया, लेकिन स्क्रीन टेस्ट के बाद उनकी हंसी को देखकर हीरो बना दिया गया. उन दिनों गोविंदा पहले ऐसे स्ट्रगलर थे जो अपना वीडियो बना कर प्रोड्यूसर्स को देते थे. उनका ये आइडिया एक समय काम कर गया.

क्रेडिट कार्ड पर ईएमआई के जाल से बचें

आपने क्रेडिट कार्ड से खरीदारी की है तो आपको भी बैंक की ओर से फोन आता है कि आप क्रेडिट कार्ड पेमेंट को आसान ईएमआई में कनवर्ट करा लें. आजकल बैंक कम अमाउंट को भी ईएमआई में बदलने का ऑफर देते हैं. अगर आप क्रेडिट कार्ड का पूरा पेमेंट ड्यू डेट तक नहीं कर सकते हैं तो आपके लिए यह बेहतर ऑप्‍शन है. वहीं बैंक को यह फायदा होता है कि इससे डिफॉल्‍ट कम होता है और उन्‍हें अतिरिक्‍त इंटरेस्‍ट इनकम होती है.

ईएमआई ऑप्‍शन चूज करने में रहें सतर्क

हालांकि एक्‍सपर्ट ईएमआई ऑप्‍शन चूज करने में सतर्कता की सलाह देते हैं. आपको ईएमआई ऑप्‍शन चूज करने में ईएमआई की अवधि और रेट ऑफ इंटरेस्‍ट को जरूर ध्‍यान में रखना चाहिए. रेट ऑफ इंटरेस्‍ट कस्‍टमर टू कस्‍टमर और बैंक टू बैंक अलग अलग होता है. एक ही कस्‍टमर के लिए बैंक अलग अलग समय में अलग अलग इंटरेस्‍ट की पेशकश करते है.

ईएमआई ऑप्‍शन का फायदा यह होता है कि आप अनपेड अमाउंट पर इंटरेस्‍ट लागत बचा सकते हैं. ईएमआई ऑप्‍शन पर इंटरेस्‍ट रेट पर्सनल लोन से थोड़ा अधिक होता है. इसके अलावा यह सुविधाजनक होता है क्‍योंकि पर्सनल लोन की तरह इसमें किसी तरह के डाक्‍यूमेंटेशन की जरूरत नहीं होती है.

ईएमआई के लिए इंटरेस्‍ट रेट 12 से 20 फीसदी तक हो सकता है और ईएमआई की अवधि तीन माह से लेकर तीन साल तक हो सकती है. जितनी ज्‍यादा अवधि होगी इंटरेस्‍ट रेट भी उतना अधिक होगा. ऐसे में बेहतर होगा कि आप कम से कम अवधि के लिए ईएमआई ऑप्‍शन चुनें.

ज्‍यादा ईएमआई ऑप्‍शन लेने से कमजोर हो जाती है क्रेडिट प्रोफाइल

हालांकि आपको बैंक की ओर से बार बार ऑफर किए जाने वाले क्रेडिट कार्ड पर ईएमआई ऑप्‍शन के जाल में नहीं फंसना चाहिए. बैंक आपको कई ईएमआई ऑप्शन का ऑफर दे सकते हैं लेकिन ज्‍यादा ईएमआई ऑप्‍शन चूज करने से आपकी क्रेडिट प्रोफाइल  कमजोर हो जाती है. अगर ऐसे में आपने किसी बैंक लोन के लिए अप्‍लाई किया है तो बैंक इस आधार पर भी आपकी लोन अप्‍लीकेशन को खारिज कर सकता है कि आपने पहले ही कई पेमेंट ईएमआई ऑप्‍शन पर डाले हुए हैं.

नागिन को टक्कर देने आई एक और नागिन

टेलिवीजन पर जहां एक ओर नागिन के सीजन 2 का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर नागिन को टक्कर देने के लिए एक और नागिन आने वाली हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं प्रियल गौर की.

प्रियल गौर सब टीवी के आगामी शो ‘इच्छा प्यारी नागिन’ में एक बेहद अलग लुक में नजर आयेंगी. यह युवा अभिनेत्री आकार बदलने वाले आधुनिक सांप की भूमिका निभायेगी. वह इच्छाधारी नाग एवं नागिनों की अवधारणा को बदलने के लिये पृथ्वी पर आई है.

वह गोल्डन लहंगा, चोली और एक स्कर्ट पहनेगी, जिसमें साइड स्लिट होगा. कॉस्ट्यूम के साथ हेवी ऐसेसरीज भी होंगे. इनमें दोनों हाथों के लिये सांपों के आकार की चूड़ियां शामिल हैं. साथ ही प्रियल चोकेर भी पहनेंगी, जो एक सांप के आकार में होगा. इसके अलावा बैठे हुये कोबरा के आकार में एक ‘मांग टीका’ उनके सिर की शोभा बढ़ाएगा.

प्रियल गौर ने कहा, ”इच्छा एक प्यारी नागिन है और पारंपरिक नागिनों से बिल्कुल अलग है. मैं बेहद अनूठा और अलग कपड़े पहन रही हूं, क्योंकि मेरे लुक को वास्तविक दिखाया जाना है. मैं हल्के रंग का लहंगा और उसके साथ ढेरों मैचिंग एसेसरीज पहनुंगी. मुझे उम्मीद है कि दर्शक शो में मेरे नये लुक को पसंद करेंगे, क्योंकि यह बेहद अलग है.”

अब देखना यह है कि किस तरह यह शो कलर्स के शो को ‘नागिन’ को टक्कर देता है, या फिर वह अपने हास्य अंदाज में सबका मनोरंजन करने में कामयाब होता है.

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