Hindi Fictional Story: इस मोड़ पर

Hindi Fictional Story: आशी की आंखें अभी आधी नींद में और आधी खुली हुई थीं. उस के जेहन में बारबार एक शब्द गूंज रहा था, ‘‘ठंडीठंडी.’’

आशी अधखुली आंखों के साथ ही वाशरूम चली गई. चेहरे पर पानी के छींटे पड़ते ही आंखों के नीचे की कालिमा और स्पष्ट रूप से उभर गई. आशी बराबर खुद का चेहरा आईने में देख रही थी. उसे लग रहा था जैसे उस का जीना बेमानी हो गया है. शायद गौरव सच ही कह रहा था कितनी थकी हुई और बूढ़ी लग रही थी वह आईने में.

कैसे बरदाश्त करता होगा गौरव उसे रात में. तभी गौरव की उनींदी आवाज आई, ‘‘आशु चाय बना दो.’’

आशी ने विचारों को  झटका और रसोई में घुस गई. अभी आशी चाय बना ही रही थी कि पीछे से सासूमां बोली, ‘‘आशी, तेरे बाल रातदिन इतने  झड़ रहे हैं, देख कितने पतले हो गए हैं. पहले कितनी मोटी चोटी होती थी. यह सब इन बालों को कलर कराने का नतीजा है.’’

तभी पीछे से गौरव बोला, ‘‘मम्मी, तुम्हारी बहू अब बूढ़ी हो गई है.’’

सासूमां हंसते हुए बोली, ‘‘चुप कर बेवकूफ.’’

गौरव बोला, ‘‘मु झ से बेहतर कौन जान पाएगा, क्यों आशी?’’

आशी कट कर रह गई. आंखों में आंसुओं को पीते हुए उस ने गौरव को चाय का प्याला पकड़ा दिया.

गौरव नहाने घुस गया तो आशी फिर से आईने के सामने अपने को देखने लगी, उस के बाल आगे से कितने कम हो गए थे. तभी आशी ने देखा बाएं गाल पर 3-4 धब्बे भी नजर आ रहे थे.

तभी कार्तिक आया और बोला, ‘‘मम्मी, नाश्ते में क्या बनाया है?’’

आशी को एकाएक ध्यान आया कि वह कितनी पागल है. पूरे आधे घंटे से आईने के सामने खड़ी है.

सासूमां रसोई में पहले से ही परांठे सेंक रही थी. आशी बोली, ‘‘मम्मी, मैं सेंक लेती हूं.’’

सासूमां प्यार से बोली, ‘‘आशी, तू तैयार हो जा, मैं बना दूंगी. वैसे भी पिछले 3-4 महीनों से तुम बेहद थकीथकी लगती हो, आज गौरव के साथ डाक्टर के पास चली जाना.’’

आशी प्यार में भीगी हुई अंदर चली गई. जब नहा कर बाहर निकली तो उस का मन फूल जैसा हलका लग रहा था.

रास्ते में गौरव आशी से बोला, ‘‘आज

आने में देर हो जाएगी, हम पुराने दोस्तों

का रियूनियन है.’’

आशी ने धीमे स्वर में कहा, ‘‘मैं सोच रही थी आज डाक्टर के पास चलते, मम्मी कह रही थी मु झे अपना ध्यान रखना चाहिए.’’

गौरव हंसते हुए बोला, ‘‘अरे यार ढलती उम्र का क्या कोई इलाज होता है? कल चल पड़ेंगे.’’

दफ्तर में जैसे ही आशी घुसी उस ने कनकियों से देखा, ‘‘पायल और निकिता एकदूसरे को अपने बालों के हाईलाइट्स दिखा रही थीं,’’ आशी का भी कितना मन करता है मगर अब उस के बाल इतने रूखे और बेजान हो गए हैं कि वह सोच भी नहीं सकती है.’’

आशी को सुबहसुबह ही ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उस की ऊर्जा किसी ने सोख ली हो.

तभी आशी की सीट पर प्रियशा आई, ‘‘क्या सोच रही है आशी और यह चेहरे पर 12 क्यों बज रहे हैं?’’

आशी बोली, ‘‘अभी तुम बस 38 साल की हो, तुम्हें सम झ नहीं आएगा कि 50 वर्ष की महिला को कैसा प्रतीत होता है जब उस का अस्तित्व उस से जुदा हो रहा होता है.’’

प्रियाशा बोली, ‘‘आशी, क्या आंटियों की तरह पहेलियां बुझा रही हो.’’

आशी बिना कुछ बोले अपने लैपटौप में डूब गई. जब आशी दफ्तर से वापस आई तो सासूमां उस का चाय पर इंतजार कर रही थी.

आशी को शादी के बाद कभी अपनी मम्मी की कमी नहीं खली थी. सासूमां ने हमेशा आशी से बेटी की तरह ही व्यवहार किया था. चाय का घूंट पीते हुए आशी सोच रही थी कि सबकुछ तो कितना अच्छा चल रहा था, मगर फिर न जाने यह मेनोपौज का मोड़ अचानक कहां से आ गया.

सासूमां सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोली, ‘‘क्या बात है, देख रही हूं पिछले कुछ दिनों से बहुत थकीथकी रहती… इस गौरव के मिजाज का भी कुछ ठीक नहीं है. वह क्यों इधरउधर बिना तेरे दोस्तों के साथ घूमता रहता है.’’

आशी बोली, ‘‘वह न जाने मम्मी आजकल क्यों मेरा मन उखड़ाउखड़ा रहता है जिस कारण गौरव अपसैट हो जाते हैं.’’

सासूमां तोलती सी नजरों से बोली, ‘‘आशी, तुम शायद मेनोपौज के मोड़ पर खड़ी हो मगर इस मोड़ पर गौरव को तुम्हारा साथ देना चाहिए न कि इधरउधर फुदकने लगे.

रात में काफी देर तक आशी गौरव की प्रतीक्षा करती रही और फिर थक कर सो गई थी.

आधी रात को अचानक आशी की आंख खुली. उस का गाउन खराब हो गया था. पहले तो उसे अपनी डेट का हमेशा आभास भी हो जाता था और वह कभी इधरउधर भी नहीं होती थी. वह वाशरूम में जा कर जब वापस आई तो गौरव की खीज भरी आवाज कानों से टकराई, ‘‘क्या प्रौब्लम है तुम्हारा… न दिन में चैन और न ही रात में.’’

आशी को एकाएक खुद पर शर्म सी आ गई. 50 साल की उम्र में उस के कपड़े खराब हो गए हैं, कितनी फूहड़ है वह. दफ्तर में भी आशी को बहुत दिक्कत हो रही थी. इसलिए बीच में ही घर चली आई थी.

शाम को गौरव आया और तैयार होते हुए बोला, ‘‘आज मेरा डिनर बाहर है.’’

आशी बोली, ‘‘गौरव हम डाक्टर के पास कब चलेंगे?’’

गौरव बोला, ‘‘मेरी क्या जरूरत है आशी… पढ़ीलिखी हो खुद चली आओ.’’

आशी फिर पूरी शाम ऐसे ही लेटी रही. शाम को सासूमां आई और फटकार लगाते हुए बोली, ‘‘क्या हो गया है तुम्हें? क्या तुम्हारी कोई अपनी जिंदगी नहीं है, चलो उठो डाक्टर के पास जाओ, कब तक खुद को इग्नोर करती रहोगी.’’

डाक्टर ने आशी से बात करी और फिर बोला, ‘‘इस उम्र में यह सब नौर्मल है. जरूरी है आप इसे सहजता से लें. अगली बार अपने पति के साथ आइए. आप के साथसाथ उन की काउंसलिंग भी जरूरी है, और फिर आशी को कुछ दवाइयां लिख दीं.’’

जब गौरव वापस आया तो औपचारिक तौर से पूछा, ‘‘क्या कहा डाक्टर ने?’’

आशी बोली, ‘‘अगली बार तुम्हें बुलाया है.’’

गौरव हंसते हुए बोला, ‘‘भई बूढ़ी तुम हो रही हो मैं नहीं, मु झे किसी डाक्टरवाक्टर की जरूरत नहीं है.’’

आशी को सम झ नहीं आ रहा था कि गौरव इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है. अगर वह 50 साल की हो गई है तो गौरव भी 52 साल का हो रहा है फिर यह उम्र का ताना क्यों बारबार उसे मिल रहा है, इसलिए क्योंकि वह एक औरत है. जो गौरव पहले भौंरे की तरह उस से चिपका रहता था अब उस के संपूर्ण जीवन का रस सोखने के बाद ऐसे व्यवहार कर रहा है मानो यह उस का कोई अपराध हो.

अगले दिन दफ्तर में जब आशी ने प्रियांशी से इस बारे में बातचीत करी तो प्रियांशी हंसते हुए बोली, ‘‘यह बस जीवन का एक मोड़ है. जैसे हम लड़कियों की जिंदगी में मासिकधर्म का आरंभ होना भी एक मोड़ होता है वैसे ही रजनोवृत्ति भी बस एक मोड़ ही है, जिंदगी खत्म होने का संकेत नहीं है.’’

आशी बोली, ‘‘तुम अभी सम झ नहीं पाओगी. ऐसा लगता है जैसे तुम्हारा वजूद खत्म हो रहा है. जब तुम अपने पति की नजरों में एक फालतू सामान बन जाते हो, तब सम झ आता है कि यह मोड़ है या डैड एंड है.’’

प्रियांशी बोली, ‘‘मैडम, मैं 35 साल की उम्र से इस मोड़ पर खड़ी हूं.’’

आशी आश्चर्य से प्रियांशी की तरफ देखने लगी तो प्रियांशी बोली, ‘‘देखो क्या

मैं तुम्हें बुढि़या लगती हूं? मेनोपौज को तो मैं कंट्रोल नहीं कर सकती थी मगर खुद को तो कर सकती हूं. मेरी स्त्री होने की पहचान बस इस एक प्रक्रिया से नहीं है और हम स्त्रियों का स्त्रीत्व बस इसी पर क्यों टिका हुआ हैं? क्या तुम्हारे पति की परफौर्मैंस पहले जैसी ही है अभी भी? पर पुरुषों के पास स्त्रियों की तरह ऐसा कोई इंडिकेटर नहीं है इसलिए आज भी अधिकतर मर्द इस गलतफहमी में जीते हैं कि मर्द कभी बूढ़े नहीं होते हैं.’’

आशी सोचते हुए बोली, ‘‘बात तो सही है तुम्हारी.’’

प्रियांशी और आशी फिर बहुत देर तक बात करती रही. प्रियांशी से बात करने के बाद आशी सोच रही थी कि वह कितनी बुद्धू है.

उस रात को जब आशी ने पहल करी तो गौरव बोला, ‘‘अरे, आज इतना जोश कैसे आ गया तुम्हें?’’

आशी मुसकराते हुए बोली, ‘‘अब तुम्हारे अंदर भी पहले जैसा जोश कहां रह गया है?’’

गौरव घमंड से बोला, ‘‘मर्द और घोड़े कभी बूढ़ा नहीं होता है.’’

आशी बोली, ‘‘यह मु झ से बेहतर कौन जान सकता है.’’

आशी के स्वर में उपहास देख कर गौरव चुपचाप किताब के पन्ने पलटने लगा. उस का मन जानता था कि आशी की बातों में सचाई है और इसी सचाई को  झुठलाने के लिए वह आशी को रातदिन कोसता रहता था. मगर आशी उसे इस तरह बेपरदा कर देगी उस ने सोचा भी नहीं था.

Hindi Fictional Story

Social Story: गर्विता- क्या अपने सपनों को पंख दें पाएगी वो?

Social Story: ‘‘दवाखा लो मां,’’ गर्विता ने अपनी बीमार मां को पानी का गिलास थमाते हुए कहा, ‘‘तुम कभी समय से दवा नहीं खातीं.’’

मां कोई जवाब दे पातीं उस से पहले ही गर्विता का फोन बजने लगा. उस ने देखा धीरज का फोन था.

गर्विता अभी कुछ सोच ही रही थी कि मां बोल उठीं, ‘‘वह इतने दिनों से फोन कर रहा है उठा कर बात क्यों नहीं कर लेती.’’

कुछ सोच कर उस दिन गर्विता ने फोन

उठा लिया.

‘‘तुम्हें कितने दिनों से फोन मिला रहा हूं उठाती क्यों नहीं?’’ उधर से तड़क कर धीरज ने पूछा, ‘‘मां बीमार हैं अपने पोते को बहुत याद कर रही हैं. तुम वापस कब आओगी? कल ही आ जाओ युग को ले कर और हां अब अपनी मां की बीमारी का बहाना मत बनाना. तुम ने 2 साल निकाल दिए… कभी पापा बीमार हैं, कभी मां. ऐसे भी कोई मांबाप अपनी बेटी को घर बैठा लेते हैं. मेरा बेटा भी मु झे ठीक से नहीं जानता. मु झे कुछ नहीं सुनना… कल के कल ही आ जाओ,’’ कह कर धीरज ने फोन काट दिया.

न सलाम न किसी का हालचाल ही पूछा. गर्विता न कुछ बोल सकी न उस ने कुछ बोलने का मौका ही दिया. बस एक हुक्म सा सुना कर फोन काट दिया.

गर्विता ने आंगन में खेलते युग की तरफ देखा तो पुरानी सब यादें ताजा हो गईर्ं. धीरज का फोन जैसे उस के पुराने जख्मों को हरा कर गया. उसे वह दिन याद आ गया जब शादी के 7 साल बाद उसे और धीरज को पता चला था कि वे मातापिता बनने वाले हैं. वे दोनों बेहद खुश थे, वो ही क्या परिवार में सभी खुश थे. सभी को इस खुशखबरी का कब से इंतजार था आने वाले नन्हे मेहमान के लिए.

रोज नए सपने सजातेसजाते 9 महीने कब बीत गए गर्विता को पता ही नहीं चला

और फिर उस के जीवन में वह खूबसूरत दिन आया जब उस ने एक नन्हे से राजकुमार को जन्म दिया. सासससुर तो अपना वंशज पा कर बेहद खुश थे. पोते के जन्म पर धीरज की मां बहू की बालाएं लेती नहीं थक रही थीं.

गर्विता युग को ले कर अस्पताल से घर

आई तो घर वालों ने उस का जोरदार स्वागत किया. उस ने सोचा सबकुछ है मेरे पास एक बच्चे की कमी थी वह भी युग ने पूरी कर दी.

वह मन ही मन बुदबुदाई कि यों ही कहते हैं कि कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता.

उस का मन कर रहा था कि जोर से चिल्ला कर सब से कहे कि मेरी दुनिया देख लो यहां कोई कमी नहीं.

मगर गर्विता नहीं जानती थी कि उस की दुनिया कैसे उलटपलट होने जा रही थी. उस की खुशी को जैसे उस की अपनी ही नजर लगने वाली थी.

अभी युग को पैदा हुए 1 हफ्ता ही हुआ

था कि गर्विता को धीरज का व्यवहार कुछ बदलाबदला सा लगने लगा. गर्विता खुद भी

नई परिस्थितियों में ढलने की कोशिश कर रही

थी और इस वक्त उसे सब से ज्यादा धीरज के साथ की जरूरत थी, लेकिन वह तो रोज एक

नई शिकायत करने लगा था. कभी कहता

तुम्हारे पास तो मेरे लिए वक्त ही नहीं है, कभी कहता इस कमरे में हर समय बच्चों के डायपरों और दूध की बदबू आती रहती है. उस ने

गर्विता का हाथ बंटाना बिलकुल बंद कर

दिया था.

एक दिन बोला, ‘‘मैं तुम्हारे साथ इस

कमरे में नहीं रह सकता. युग के रोने की वजह से मेरी नींद बहुत खराब होती है,’’ और अपना तकिया ले कर दूसरे कमरे में सोने चला गया. वह भूल चुका था कि गर्विता भी नईनई मां बनी है और उसे युग के साथसाथ अपना भी खयाल रखना है क्योंकि उस के प्रसव को अभी सिर्फ 1 ही हफ्ता हुआ था.

धीरज में अचानक आए इस बदलाव से गर्विता अचंभित थी, फिर भी उस ने सोचा कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा. एक दिन उस ने

युग के लिए कुछ सामान मंगवाया पर जब वह पहुंचा तो धीरज ने कहा, ‘‘तुम कुछ कमाती तो

हो नहीं बस दिनरात मेरा पैसा उड़ा रही हो. मेरे पास तुम्हारे फुजूल खर्च के लिए पैसे नहीं हैं.

खुद कमाओगी तो पता चलेगा. पैसे पेड़ पर

नहीं उगते.’’

धीरज की यह बात गर्विता को अंदर तक तोड़ गई. उसे सम झ नहीं आ रहा था कि उस

की गलती क्या है. क्यों धीरज उस से इस तरह पेश आ रहा. यों ही कशमकश में कुछ दिन और बीत गए. गर्विता को आभास हो रहा था कि रोज धीरज उस से दूर होता जा रहा है फिर भी वह

खुद को धैर्य बंधा रही थी कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा.

मगर उस रोज गर्विता के सब्र का बांध

टूट गया जब धीरज ने शराब पी कर गुस्से में उस से कहा, ‘‘खुद को आईने में देखो कितनी मोटी होती जा रही हो. दिनभर बैठ कर बस खाती ही रहती हो. कुछ काम भी किया करो. मैं ने तुम से शादी कर के बहुत बड़ी गलती की. न तुम से शादी करता और न ही यह मुसीबत पैदा होती. जा कर अपनी मां से अपनी सेवा करवाओ. जितना दूध यहां अपने और अपने बेटे के लिए मंगवाती हो वहां अपनी मां के घर में मंगवाना. सब लड़कियां प्रसव के समय मायके जाती हैं. एक तुम हो यहां मेरी छाती पर मूंग दल रही हो. कल तुम्हें तुम्हारी मां के घर छोड़ आऊंगा. जब यह

6 महीने का हो जाए लौट आना. जब से पैदा

हुआ है एक रात चैन से नहीं सोया, ऊपर से

इतना खर्चा.’’

गर्विता तो यह सब सुन कर सन्न रह गई. उस से कुछ कहते नहीं बना. बस रोती ही जा रही थी. उस की सास ने उसे सम झाया कि अभी धीरज नशे में है मैं सुबह उस से बात करूंगी.’’

यह क्या तरीका है अपनी पत्नी से बात करने का और कौन सा बाप अपने बेटे के बारे में इस तरह सोचता है.

सुबह हुई तो धीरज के मांबाप ने उसे सम झाने की, कोशिश की लेकिन वह नहीं माना और गर्विता को उस के मायके छोड़ आया. उस ने वहां से चलतेचलते अपनी बात फिर दोहराई कि जब युग 6 महीने का हो जाए खुद लौट आना. यह कह कर चला तो आया लेकिन उसे इस बात का जरा भी एहसास नहीं हुआ कि वह जिसे अपने घर से ले कर चला था और जिस गर्विता को छोड़ कर जा रहा है. वह तो अलग गर्विता थी. ससुराल से मायके तक आतेआते गर्विता ने कभी न लौटने का निश्चय कर लिया था. उस ने सोच लिया था कि वह अपने पैरों पर खड़ी होगी और अपने बेटे को खुद अकेली पालेगी साथ ही यह भी कि उस के बेटे को ऐसी घटिया सोच वाले बाप की जरूरत नहीं है.

मायके आ कर गर्विता ने अपने मातापिता को सारी बात बताई तो उन्होंने भी उस का पूरा साथ देने का वादा किया. अब उसे युग की चिंता नहीं थी क्योंकि उस की देखभाल करने के लिए उस की नानी जो थीं. गर्विता ने कुछ दिनों में खुद को समेटा. धीरज से शादी कर के वह भूल गई थी कि उस ने एमबीए किया है. वह जानती थी इतने लंबे समय के बाद उसे कहीं नौकरी नहीं मिलेगी इसलिए उस ने अपना ही कुछ काम करने का मन बनाया.

उसे अपनी एक सहेली का खयाल आया

जो कैलिफोर्निया में इंडियन स्टोर चलाती

थी और कई बार गर्विता को बता चुकी थी कि वहां हिंदुस्तानी चीजों की कितनी मांग है. उस ने अपनी सहेली को फोन लगाया और उस से बात की कि वह हिंदुस्तान से उसे हस्तशिल्प और हथकरघा का सामान भेजेगी जिसे वह सीधे कारीगरों से खरीदेगी ताकि उन की बनाई हुई चीजें सीधी विदेश भेजी जाएं और उन्हें भी अच्छा मुनाफा हो.

गर्विता की सहेली को उस की बात पसंद आई और उस ने मदद का वादा किया. धीरेधीरे गर्विता का काम चल निकला. दूसरे शहरों और देशों में भी उस के सामान की मांग होने लगी. ज्यादा फायदा होने के कारण काफी कारीगर उस के साथ जुड़ गए थे. अब वह अपना एक ऐक्सपोर्ट हाउस शुरू करने जा रही थी.

इन सालों में गर्विता को धीरज का खयाल तो कई बार आया, लेकिन वह कभी यह फैसला नहीं कर सकी कि उसे उस रिश्ते का करना क्या है. कभीकभी सोचती थी कि कहीं वह युग के साथ अन्याय तो नहीं कर रही. आखिर एक बच्चे को मांबाप दोनों की जरूरत होती है.

आज धीरज का बरताव देख कर वह फैसला करने ही जा रही थी कि पापा ने आवाज लगाई, ‘‘बेटा. बावर्ची ने खाना परोस दिया है,

आ जाओ.’’

पापा की आवाज जैसे उसे वर्तमान में वापस खींच लाई. उस ने नजर उठा कर देखा तो नन्हा युग अपने नाना के कंधे पर बेसुध सो रहा था. उसे देख कर वह उठी उस के सिर पर हाथ फेर कर मन ही मन बोली कि इसे उस घटिया बाप की जरूरत नहीं. इस के पास मेरे पापा हैं, जिन्होंने मु झे इस लायक बनाया कि आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं.

अगले दिन सुबह अपनी अलमारी से कुछ कागज निकाल कर गर्विता जींसटौप

और पैंसिल हील पहन कर धीरज के घर पहुंची तो वह उसे देख कर चकित रह गया फिर भी खुद को संभाल कर कड़क कर बोला, ‘‘अकेली आई हो, मेरा बेटा युग कहां है? तुम से कहा था उसे ले कर आना.’’

तभी धीरज के मातापिता भी आ गए. गर्विता ने आदर से उन्हें नमस्ते की और अपनी सास की तबीयत पूछी.

तभी धीरज बोल पड़ा, ‘‘मां बीमार हैं तुम्हें यहां आ कर उन की सेवा करनी चाहिए. अब उन से घर का काम नहीं होता.’’

आज गर्विता से चुप न रहा गया. अत: बोली, ‘‘मेरे मातापिता भी बीमार थे. तुम उन्हें एक बार भी देखने आए? आना तो छोड़ो तुम ने तो फोन पर भी उन का हाल तक नहीं पूछा, फिर मु झ से यह उम्मीद तुम्हें क्यों है कि मैं तुम्हारे घर आ कर उन की देखभाल करूंगी और आज जिसे तुम बारबार अपना बेटा कह रहे हो याद करो उस के दूध तक का खर्चा तुम उठाना नहीं चाहते थे. एक बात बता दूं धीरज सिर्फ जन्म देने से कोई आदमी बाप नहीं बन जाता.’’

हमेशा चुप रहने वाली गर्विता के मुंह से इतनी बात सुन कर धीरज सकते में आ गया, लेकिन पुरुष होने का कुछ अहं अभी बाकी था सो उस ने अपना तुरुप का पत्ता निकाला, ‘‘ठीक है, अगर तुम्हें इतनी शिकायतें हैं तो मैं तलाक के कागज बनवा कर तुम्हारे घर भेज दूंगा, दस्तखत कर देना.’’

इस के लिए तो गर्विता तैयार

ही थी. अपने पर्स से एक कागज निकाल कर धीरज से बोली, ‘‘इतनी तकलीफ करने की कोई जरूरत नहीं. कागज मैं ने बनवा लिए हैं, दस्तखत भी कर दिए हैं. तुम भी दस्तखत कर देना और हां न ही मु झे तुम से कुछ चाहिए न ही मैं तुम्हें कुछ दूंगी, युग भी नहीं,’’ कह कर वह वापस जाने के लिए मुड़ी ही थी कि उस ने दोबारा अपने पर्स में हाथ डाला और एक निमंत्रणपत्र निकाल कर धीरज के हाथ में थमा दिया, ‘‘तुम ने कहा था न खुद कमाओ, कल मेरे ऐक्सपोर्ट हाउस का उद्घाटन है, युग ऐक्सपोर्ट्स, सपरिवार आना, मु झे अच्छा लगेगा.

‘‘यों तो तुम्हारे दिए जख्मों को कभी भूल नहीं पाऊंगी लेकिन सिर्फ एक बात के लिए हमेशा तुम्हारी शुक्रगुजार रहूंगी. अगर तुम मु झे मेरे मायके छोड़ कर नहीं आए होते तो मैं आज वह नहीं होती जो हूं. मेरे मातापिता ने मु झे नाम दिया था गर्विता लेकिन तुम ने मु झे गर्विता बनाया है. आज मु झे अपनेआप पर गर्व है,’’ कह कर गर्विता पलट कर बाहर निकल गई.

धीरज अपना सिर पकड़ कर वहीं बैठा रह गया. उस की मां ने उस के सिर पर हाथ रखा और धीरे से बोलीं, ‘‘बेटा जो बोया पेड़ बबूल का तो फूल कहां से होय.’’

इधर गर्विता अपनेआप को आजाद और बहुत हलका महसूस कर रही थी, लेकिन धीरज के घर से निकलतेनिकलते उसे आज फिर 2 पंक्तियां याद आ गईं?

‘‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कहीं जमीन नहीं मिलती कहीं आसमां नहीं मिलता…’’

Social Story

Winter Hair Care: सर्दियों में बालों की देखभाल ऐसे करें

Winter Hair Care: सर्दियों में बालों से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं. शुष्क हवाएं खासकर बालों के लिए नुकसानदायक साबित होती हैं. जानिए, इस मौसम में कैसे करें बालों की देखरेख :

हेयर औयलिंग करें

सर्दियों के मौसम की वजह से सिर की त्वचा रूखी हो जाती है और खुजली की समस्या होने लगती है. इस के साथ ही बालों से जुड़ी कई अन्य समस्याएं भी खड़ी हो जाती हैं. सेहतमंद और मजबूत बालों के लिए बालों में तेल लगाना सब से जरूरी है. यह आप के स्कैल्प और बालों को नमी देता है, स्कैल्प पर रक्तसंचार को बेहतर बनाता है और डैंड्रफ हटाता है. आप टीट्री औयल, आंवला, भृंगराज और राइस ब्रान जैसे नैचुरल औयल का इस्तेमाल कर सकते हैं.

तेल को हलका गुनगुना कर लें.उंगलियों से धीरेधीरे स्कैल्प की मालिश करें. रातभर छोड़ दें और सुबह माइल्ड शैंपू से धो लें. हफ्ते में 2 बार तेल मालिश करने से बालों का रूखापन खत्म होता है और बाल मजबूत, मुलायम और शाइनी बनते हैं.

हेयर औयलिंग के बाद हेयर वाश करें

सर्दियों में बाल धोने के लिए बहुत गरम पानी का उपयोग न करें. यह स्कैल्प की नैचुरल मोइस्चर परत को हटा देता है. गुनगुने या ताजा पानी से बाल धोना सब से बेहतर रहता है.

साथ ही सर्दियों में बाल बहुत जल्दीजल्दी न धोएं. इस से बालों की नैचुरल नमी छिन सकती है. साथ ही हेडवाश के लिए आप माइल्ड शैंपू का ही इस्तेमाल करें. हेयरवाश से पहले औयलिंग जरूर करें.

माइक्रोफाइबर तौलिए से बाल सुखाएं

अपने बालों को सुखाने के लिए कौटन बाथ टौवल के बजाय माइक्रोफाइबर तौलिए का इस्तेमाल करें. यह आप के बालों पर सख्त नहीं होता और ज्यादा पानी भी सोखता है. यह फ्रिक्शन और बालों के सूखने के समय को कम करने में भी मदद करता है. इस से बाल ज्यादा उलझते भी नहीं हैं.

बालों की डीप कंडीशन करें

हफ्ते में 1 बार बालों को डीप कंडीशन भी कर सकते हैं. इस से खोया हुआ पोषण बालों में लौटता है. इस से बाल की चमक बनी रहती है और बालों में नमी बरकरार रहती है. आप अंडे का हेयर मास्क लगा सकते हैं.

हेयर मास्क लगाएं

फेस मास्क की तरह ही हेयर मास्क भी बालों के लिए बेहद जरूरी स्टेप है. यह बालों को चमकदार, मुलायम और मजबूत बनाने में मदद करते हैं.

अगर आप अपने बालों का पोषण बरकरार रखना चाहते हैं तो हौट औयल से मसाज करना बेहतर विकल्प है, हालांकि सर्दियों के सख्त मौसम में इतना करना काफी नहीं है. ऐसी स्थिति में बालों पर मास्क लगाना जरूरी हो जाता है.

हेयर मास्क बालों को पहले की तरह बनाने और स्कैल्प को साफ करने में मदद करते हैं. ये आप के बालों को मोइस्चराइज करते हैं, जिस से वे कम उलझते हैं और बालों का टूटनाझड़ना कम हो जाता है.

पार्लर में तरहतरह के हेयर मास्क लगाएं जाते हैं :

केराटिन हेयर मास्क (Keratin Hair Mask) : यह रूखे और डैमेज बालों के लिए बहुत अच्छा होता है. यह बालों को मजबूती देता है और उन्हें चमकदार बनाता है.

प्रोटीन हेयर मास्क (Protein Hair Mask) : यह बालों के टूटने और झड़ने को कम करने में मदद करता है.

हाइड्रेटिंग या मोइस्चराइजिंग हेयर मास्क (Hydrating/Moisturizing Hair Mask) : यह सूखे और बेजान बालों में नमी लौटाता है, जिस से वे मुलायम और स्वस्थ दिखते हैं. इस में अकसर शिया बटर, नारियल तेल या एलोवेरा जैसे तत्त्व होते हैं.

कलर प्रोटैक्शन मास्क (Colour Protection Mask) : रंगीन (coloured) बालों के लिए विशेष रूप से बनाया जाता है. यह रंग को जल्दी फीका होने से बचाता है और बालों को पोषण देता है.

डीप कंडीशनिंग हेयर मास्क (Deep Conditioning Hair Mask) : यह बालों को गहराई से पोषण देता है और उन्हें सिल्की और स्मूद बनाता है.

स्कैल्प प्यूरीफाइंग मास्क (Scalp Purifying Mask) : यह तेल या गंदगी से भरी स्कैल्प को सही करता है.

बालों की ट्रिमिंग करवाएं

सर्दी में बालों के सूखने और टूटने से बचाने के लिए नियमित रूप से बालों की ट्रिमिंग करवाएं. इस से बाल स्वस्थ और चमकदार रहेंगे. इस से आप को डैंड्रफ जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है. ट्रिमिंग करने से बालों के बढ़ने में भी मदद मिलती है.

विटामिन डी की कमी न होने दें

विटामिन डी हेयर फौलिकल्स की हैल्थ के लिए जरूरी है. इस की कमी से मेलानिन प्रोडक्शन प्रभावित होता है और बाल समय से पहले सफेद हो सकते हैं. सनलाइट से मिलने वाला यह विटामिन आजकल की इंडोर लाइफस्टाइल से बहुत कम हो रहा है.

इसलिए अगर आप की स्किन रूखी है या हड्डियां कमजोर हो रही हैं तो विटामिन डी की कमी हो सकती है. इसे पूरा करने के लिए रोज 15-20 मिनट सनलाइट में बिताएं.

इस कमी को दूर करने के लिए विटामिन डी के लिए फिश, एग्स और फोर्टिफाइड मिल्क लें. डाक्टर से कंसल्ट कर के इस के लिए जरूरी सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं.

ह्यूमिडिफायर यूज करें

सर्दियों के दौरान तापमान में अचानक गिरावट से बालों की नमी खत्म हो सकती है. तापमान गिरने पर रूम हीटर आप को गरमी तो दे सकता है, लेकिन यह आप के कमरे के अंदर की हवा को भी सुखा देता है, जिस से आप के बालों को नुकसान पहुंचता है.

ह्यूमिडिफायर कमरे के अंदर नमी के लेवल को बचाने और हवा को ड्राई होने से रोकने में मदद करता है.

बालों की स्टाइलिंग रैगुलर न करें

ठंड के मौसम में बालों की स्टाइलिंग थोड़ी कम करें और अपने हेयर स्ट्रैंड्स को टूटने से बचाने के लिए अपने बालों की चोटी या जूड़ा बना कर रखें. यह आप के बालों को तेज हवाओं से भी बचाएगा.

बालों को स्टेटिक से बचाएं

सर्दियों में स्टेटिक बाल सब से ज्यादा परेशान करते हैं. नमी की कमी, स्वेटर, स्कार्फ, हुडी और हेयर ब्रश के कारण होने वाला फ्रिक्शन आप के बालों को रूखा और स्टेटिक बना देता है. इस से बचने के लिए और बालों को स्मूद बनाए रखने के लिए लीवइन कंडीशनर लगाएं. आप अपने साथ ऐंटी स्टैटिक लाउंड्री ड्रायर शीट या ऐंटी फ्रिज हेयर वाइप भी रख सकते हैं.

Winter Hair Care

Tia Bajpai: धर्मेंद्र की फिल्म ‘अनपढ़’ की रीमेक में काम करने की इच्छा है

Tia Bajpai: टिया बाजपेयी सिंगर और ऐक्ट्रैस हैं. कैरियर की शुरुआत उन्होंने विक्रम भट्ट की फिल्म ‘हौंटेड 3डी’ से की थी. फिल्मों के अलावा टिया ने कई टीवी सीरीज में भी काम किया है. टिया सिंगर बनना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने साल 2005 में ‘सारेगामापा चैलेंज’ में भी भाग लिया था.

लखनऊ के आरटिस्टिक परिवार में जन्मीं टिया को बचपन से ही अपनी इच्छानुसार काम करने की आजादी मिली है, जिस से वे यहां तक पहुंच पाई हैं. उन की मां आरती बाजपेयी और पिता मदन बाजपेयी दोनों ही सिंगर रह चुके हैं.

इन दिनों टिया हौलीवुड में पहली बार डैब्यू कर रही हैं और हौरर फिल्म ‘लिली रोज’ को ले कर काफी ऐक्साइटेड हैं, जिस की शूटिंग चल रही है. यह फिल्म अंगरेजी के अलावा हिंदी में भी डब की जाएगी.

टिया की नानी और मां सभी लोग गृहशोभा पढ़ती हुई आगे बढ़ी हैं. वे इसे एक बेहतरीन मैगजीन बताती हैं, जिसे हर वर्ग की महिलाएं पढ़ना पसंद करती हैं.

उन्होंने खास गृहशोभा के लिए बात की. आइए, जानते हैं, उन की कहानी उन की ही जबानी.

हौरर फिल्म पहली पसंद

इस फिल्म को करने की खास वजह के बारे में पूछने पर टिया बताती हैं कि यह एक इंटरनैशनल हौरर थ्रिलर फिल्म है. इस की शूटिंग विदेशों में शुरू हो चुकी है. यह मेरी पहली इंटरनैशनल फिल्म है, इसलिए मैं बहुत ऐक्साइटेड हूं. इस के अलावा बहुत दिनों से लोग हौरर फिल्मों की डिमांड मुझ से सोशल मीडिया पर कर रहे थे, क्योंकि वे एक बार फिर से मुझे हौरर फिल्म में देखना चाहते हैं. इस से मुझे लगा कि मुझे एक बार फिर ऐसी फिल्मों में काम कर लेना चाहिए. ऐसे में जब यह फिल्म मिली, जिस की कहानी वाकई बहुत अच्छी है, तो मैं ने हां कर दी.

टिया कहती हैं कि अभी तो मुझे चाहने वालों ने मेरा नाम ‘हौरर क्वीन’ तक रख दिया है. मुझे सीरियस हौरर बहुत पसंद है. साथ ही इस फिल्म में मैं एक नए अवतार में आ रही हूं. उम्मीद है कि दर्शक मुझे पसंद करेंगे.

बदली है कौंसैप्ट 

टिया कहती हैं कि आज से 10 साल पहले जब मैं ने ‘हौंटेड 3डी’ किया था, तब सभी ने कहा था कि हौरर कोई जोनर नहीं होता और कोई बनाना नहीं चाहता, लेकिन आज यह कौंसैप्ट पूरी तरह से बदल चुका है. आज हौरर और थ्रिलर पर काफी फिल्में बन रही हैं. फिल्ममेकर करोड़ों खर्च कर ऐसी फिल्में बनाते हैं और इसे देखने वाले दर्शक भी खूब होते हैं. इन के दर्शक बहुत लौयल होते हैं और मैं खुद भी ऐसी फिल्में देखना पसंद करती हूं. चाहे बड़ी हो या छोटी मैं हौरर फिल्में अवश्य देखती हूं.

काम करना चुनौती

टिया ने हिंदी हौरर फिल्म की है. अब हौलीवुड हौरर फिल्म कर रही हैं. ऐसे में वे बहुत अंतर महसूस नहीं करतीं. वे कहती हैं कि दोनों में कोई अधिक फर्क नहीं है, क्योंकि हिंदी मेरी मातृभाषा है और बोलने में आसानी होती है, जिस से किसी भी संवाद को याद रखना आसान होता है, जबकि अंगरेजी भले ही हम कितनी भी बोल लें, लेकिन अमेरिकन फिल्म में इंग्लिश बोलने का तरीका हमेशा अलग होता है. इस ऐक्सैंट पर काम करना ही मेरे लिए सब से बड़ी चुनौती रही है. उस की ट्रैनिंग मैं ने ली है. इस के अलावा संवाद की डिलीवरी और एटिट्यूड हौरर में बहुत आवश्यक है.

अलग दर्शक

विदेशों में बनने वाली हौरर फिल्में और देश में बनाई जाने वाली ऐसी फिल्मों में अंतर की वजह के बारे में टिया कहती हैं कि ये फिल्में दर्शकों के हिसाब से बनती हैं. यहां के लोग काफी इमोशनल होते हैं. वे किसी हार्डकोर चीज को देखना पसंद नहीं करते. इस में वे रोमांस और इमोशंस को पसंद करते हैं और हिंदी सिनेमा हमेशा इमोशंस पर चली है, उसे बदला नहीं जा सकता.

वे कहती हैं कि किसी की जिंदगी में कोई समस्या है और वह उसे लड़ कर ठीक कर रहा है, ऐसी फिल्मों को दर्शकों को देखने में मजा आता है. हौलीवुड की फिल्में अच्छी इसलिए लगती हैं, क्योंकि वे अंगरेजी में बनी होती हैं, जो ग्लोबल है, उन के दर्शक यहां से अलग और अधिक होते हैं और वे हार्डकोर चीज को आसानी से दिखा पाते हैं.

सिंगर से ऐक्ट्रैस बनने का सफर

टिया कहती हैं कि सिंगर से ऐक्ट्रैस बनना मेरे लिए एक डैस्टिनी है क्योंकि मैं ‘सारेगामापा’ में आई थी. वहां मैं ने जाना कि विक्रम भट्ट का म्यूजिक लेबल भी है. मैं ने उन के लिए गानों की अलबम बनाई, जिस में मेरा फोटोशूट हुआ था. उन्होंने मेरी पिक्चर देखी क्योंकि उस दौरान वे ‘हौंटेड 3डी’ बना रहे थे. उन्हें मैं पसंद आई और मुझे उस में कास्ट किया, क्योंकि फिल्म में मेरा चरित्र पियानो बजाने वाली का ही था. इस प्रकार ऐक्टिंग ने मुझे चुना है क्योंकि तब तक तो मैं एक म्यूजिशियन ही थी. म्यूजिक ने मुझे टीवी पर ऐक्टिंग का मौका दिया. इस के अलावा मेरी संगीत की पूरी टीम यूरोप की है. मैं इंग्लिश गानों पर अधिक काम कर रही हूं. कई अलबम निकाले हैं और आगे मेरी एक इंग्लिश वीडियो अलबम ‘लव माफिया’ निकलने वाली है, जिस पर काम हो रहा है. यह एफरो हाउस, जो एक नया जोनर है जिस के गाने सोलफुल हैं, उस पर आधारित है. इस प्रकार संगीत पर काम करतेकरते ही मैं ऐक्ट्रैस बन गई.

मिली प्रेरणा

टिया आगे कहती हैं कि मेरे मातापिता दोनों सिंगर हैं. मेरी मां लखनऊ में पहले थिएटर की ऐक्ट्रैस रह चुकी हैं, उन्होंने दूरदर्शन पर काफी नाटकों में काम किया है. रेडियो पर उन का शो आरती बाजपेयी के नाम से आता था. मेरी बुआ दूरदर्शन पर न्यूज ऐंकर थीं. मेरी नानी भी गाना गाती थीं. परिवार वालों ने ही मुझे संगीत की तालिम दी है. जब मेरे पेरैंट्स संगीत की रियाज करते थे, तो मैं भी उन के साथ 3 साल की उम्र से ही संगीत सीखती थी.

परिवार का सहयोग

टिया को परिवार का सहयोग हमेशा मिला है. वे कहती हैं कि हिंदी फिल्मों में काम करना अपनेआप में बड़ी बात होती है. लोग आप को अच्छे नजरिए से देखते हैं. जब मैं लखनऊ से मुंबई आई थी, तो मां मेरे साथ आई थीं. मेरी नानी ने 10 हजार रुपए का एक इनवेलप बना कर मेरे बैग में रख दिया था. मुझे बहुत अधिक सहयोग नानी का मिला है.

ऐक्टिंग और सिंगिंग को मैनेज करना नहीं मुश्किल

टिया हंसती हुई कहती हैं कि मैं 3 साल की उम्र से ही संगीत के क्षेत्र में आ गई. मैं ने संगीत में विशारद किया है. मैं रात को 3 बजे भी उठ कर सुर में गा सकती हूं क्योंकि इतनी ट्रैनिंग मैं ने ले रखी है. मैं ने पढ़ाई के साथसाथ संगीत की ट्रैनिंग ली है. जब बच्चे बाहर खेलने जाते हैं, उस समय मेरा ध्यान पढ़ाई और संगीत पर रहा है. मैं संगीत और ऐक्टिंग को ले कर सैल्फ ऐश्योर्ड हूं. आज भी मैं सुबह उठ कर 1 घंटा रियाज करती हूं.

नहीं कोई रिग्रेट

टिया अपनी जर्नी से बहुत खुश हैं, किसी प्रकार की रिग्रेट नहीं है. वे कहती हैं कि मेरी लाइफ में मैं किसी बात से रिग्रेट नहीं करती, क्योंकि मैं ने हर गलती से कुछ न कुछ सीख ली है और आज यहां तक पहुंच पाई हूं. मैं एक कलकार हूं और काम पर अधिक फोकस्ड रह कर खुश रहती हूं. ऐसा ही मैं ने किसी स्क्रिप्ट या फिल्म को ले कर समस्या फेस किया है. मुझे थोड़ा अपने बारे में सावधान रहने की जरूरत है और खासकर महिलाओं को हमेशा ही खुद के बारे में सतर्क होना चाहिए.

रीमेक में काम करना पसंद

टिया लीजेंड अभिनेता धर्मेंद्र की बहुत बड़ी फैन हैं. बिना किसी मेकओवर के वे उस समय के हैंडसम अभिनेता रहे हैं. उन की फिल्म ‘अनपढ़’ मैं ने कई बार देखी है, जिस में अभिनेत्री माला सिन्हा हैं. यह फिल्म उस समय में एक जबरदस्त मैसेज के साथ रही, जिस में स्त्री शिक्षा के महत्त्व पर जोर दिया गया था. इस के अलावा फिल्म ‘शोले’ को कभी भी मैं देख सकती हूं.

वे कहती हैं कि फिल्म ‘अनपढ़‘ की अगर रीमेक हो, तो मैं उस में मैं माला सिन्हा की भूमिका निभाना चाहती हूं.

Tia Bajpai

Love Secrets: जानिए कितना प्यार करता है आप का पार्टनर

Love Secrets: सिमरन को अपने कालेज के साथ पढ़ने वाले लड़के से प्यार हुआ. दोनों ने काफी समय साथ बिताया, लेकिन कई बार उस की न बात करने, फोन न उठाने या मैसेज न करने को ले कर वह इतना परेशान हो उठती है कि उसे पता नहीं चल पाता है कि वह उस से वाकई प्यार करता है या नहीं क्योंकि सिमरन पिछले 2 सालों से उसे देख रही है और वह उस की चुप रहने की आदतों को जानती है, लेकिन अभी बदले रवैए से वह इतना परेशान हो जाती है कि वह जौब पर मन नहीं लगा पाती.

कई बार जब वह उसे मैसेज करती है, तो वह उसे देर से ही सही पर मैसेज का जवाब जरूर देता है, जो उसे राहत की सांस लेने पर मजबूर करता है, लेकिन उस का प्यार उस के प्रति है या नहीं यह समझना उस के लिए मुश्किल हो जाता है.

मनोवैज्ञानिक राशिदा कपाड़िया कहती हैं कि आज के यूथ का प्यार सिनेमैटिक रूप ले चुकी है, जिस में वे हकीकत से कोसों दूर होते जा रहे हैं.

मगर कुछ आदतें ऐसी होती हैं, जिस से आप अपने साथी की भावनाओं को कुछ हद तक समझ कर प्यार को आगे बढ़ा सकते हैं. मसलन :

वे अपनी नजरों को आप से दूर नहीं रख सकते

आंखों से आंखों का मिलन प्यार का पहला सिगनल होता है, जिस में आप सामने वाले के पास खुद को सुरक्षित और स्नेहयुक्त पाते हैं क्योंकि एक छोटा बच्चा केयर गिवर को देखते ही इतना खुश हो जाता है कि वह उसे उठा कर अनायास गले लगा लेती है क्योंकि दोनों की आंखों में एक मजबूत बौंडिंग होती है. वैसा प्यार में भी 2 व्यक्ति के बीच की फीलिंग्स होती है, क्योंकि आंखें एकदूसरे की भावना को बिना कुछ कहे समझा जाती है और भीड़ भरे स्थान पर भी वह आप को पहचान लेती है.

पार्टनर एकदूसरे के साथ आंखों के जरीए, बिना शब्द के संकेत साझा कर सकते हैं. ऐसे में उन की गहरी भावनाओं का पता चलना स्वाभाविक होता है.

अगर आप का पार्टनर बात करते समय आप की तरफ देखता है या आप उसे आप की तरफ एक नजर डालते हुए पाते हैं, तो इस का मतलब है कि उसे आप के साथ रहने में अच्छा लगता है. इस में यह जान लें कि आप दोनों को घंटों एकदूसरे की आंखों में देखने की कोई जरूरत नहीं होती है. एक नजर भी सकारात्मक, प्यार की पुष्टि करने वाले इमोशंस भेजने के लिए काफी हो सकता है.

आप की आदतों को सहजता से स्वीकार कर लेते हैं

जब आप का साथी आप को उसी रूप में स्वीकार कर ले, जैसे आप हैं. मसलन, बातचीत करने के तरीके, व्यवहारिक होना, हावभाव, क्रेजीनैस आदि सब वह आसानी से स्वीकार कर लेता है, तो इस से आप समझ सकते हैं कि वह आप के प्यार में है.

आप बिना किसी फिल्टर के अगर किसी भी बात को कह सकते हैं

किसी बात को कहने से पहले आप को एक बार भी न तो रिहर्सल करना पड़ता है और न ही सोचना पड़ता है, आप बिना झिझक किसी भी बात को कह सकते हैं और वह उसे बड़ी गहराई से सुनता हो और आप लेटनाइट हों या दिन में कभी भी किसी भी परिस्थिति में अपनी बात कह पाते हैं, तो निश्चित ही वह आप के प्यार में है.

समय बिताने की इच्छा रखता हो

प्रेमी जब आप के साथ समय बिताना चाहता हो, जिसे वह अच्छा महसूस करता हो, तब भी प्यार होता है.

एक शोध के अनुसार, रिश्ते में समय बिताने की चाहत, सफल दीर्घकालिक अंतरंगता का एक प्रमुख संकेत होता है. हालांकि आप दोनों काम, परिवार और अन्य प्रतिबद्धताओं में बंधे हो सकते हैं, लेकिन जो व्यक्ति वास्तव में आप की परवाह करता है, वह बचे हुए समय का उपयोग अकेले में कुछ समय बिताने के लिए अवश्य करना चाहता है.

जरूरत पड़ने पर हमेशा देता हो साथ

जरूरत पड़ने पर आप की मदद करता हो. हम सभी जितने भी व्यस्त रहते हैं, दिन में अतिरिक्त काम या जिम्मेदारियों को संभालना पसंद करते हैं. मसलन, अगर आप का साथी तकनीक से डरता है और आप तकनीक के जानकार हैं, तो आप के घर के वाईफाई नेटवर्क में कुछ गड़बड़ होने पर आप उस की मदद करेंगे.

इसी तरह, अगर आप को दवा की दुकान से कुछ बहुत जरूरी दवा लानी है और आप इतने बीमार हैं कि खुद वहां नहीं जा सकते, तो आप का साथी जो आप की परवाह करता है, आप के स्वास्थ्य के ठीक होने के लिए प्रयास करेगा और आप को जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराएगा.

भावनात्मक रूप से अंतरंग होने के लिए सैक्स जरूरी नहीं

भावनात्मक रूप से अंतरंग होने के लिए प्रेमी जोड़ों को सैक्स करने की जरूरत नहीं होती. शारीरिक निकटता दूसरे तरीके से भी दिखाया जा सकता है. मसलन, आप के कंधे पर हाथ रखना, हाथ पकड़ना, पास आ कर कुछ मजेदार बातें करना आदि कुछ भी हो सकता है क्योंकि ऐसी छोटीछोटी प्यारी जेस्चर से भी आप अपने साथी से एक गहरा जुड़ाव महसूस कर सकते हैं.

फैसले में आप को शामिल करने में न हिचकता हो

जब आप का साथी आप को अपने फैसलों में शामिल करता हो या काम से ले

कर अपनी कमाई कहां (और कैसे) निवेश करें, जैसे महत्त्वपूर्ण सवालों तक, हर चीज का फैसला खुद लेते वक्त आप से शेयर करता हो, तब आप को समझ लेना चाहिए कि आप का फ्रैंड आप के प्यार में है.

अतीत के बारे में बातें करता हो

जब वह अतीत के बारे में आप से बात करना पसंद करता हो, तो यह समझना जरूरी होता है कि वह आप के अतीत के सुखद पलों को फिर से जीने में विश्वास रखता है और ऐसा सकारात्मक और सहयोगी तरीके से करता है. इस से वह वर्तमान और भविष्य के संबंधों को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है.

अगर आप का साथी ‘याद है वह समय…’ जैसे वाक्यों का इस्तेमाल करता है और फिर आप के अतीत की कोई अच्छी कहानी सुनाता है (जो शायद आप को याद भी न हो), तो यह दर्शाता है कि आप और आप का साझा अनुभव आप के साथी के मन में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

अपने बारे में अच्छा महसूस कराता हो

जब आप का साथी अपने बारे में अच्छा महसूस कराता हो, एक साथी जो सचमुच आप की परवाह करता हो, तो आप के आत्मसम्मान और पहचान की भावना को बढ़ाता है. आप को एक मजबूत सकारात्मक वातावरण देता है, जो रिश्ते को मजबूती प्रदान करता है और हम सभी ऐसे लोगों के साथ रहना चाहते हैं, जो हमें अच्छा महसूस कराते हैं.

इस का मतलब यह नहीं है कि आप के दिन और रात हमेशा शानदार रहेंगे, जिन में आप कभी एकदूसरे से झगड़ेंगे या निराश या नाराज नहीं होंगे.

कुल मिला कर अगर आप को लगता है कि आप का साथी आप का आत्मविश्वास बढ़ाता है, तो आप न केवल साथ समय बिताना चाहेंगे, बल्कि जब आप अलग होंगे, तब भी आप खुद को अधिक सकारात्मक रूप से देखेंगे.

जब आप का शरीर और नर्वस सिस्टम रीलैक्स और राहत फील करता हो

यह सब से बड़ी साइन प्यार की हो सकती है, जब आप साथी के साथ रहने पर रीलैक्स महसूस करते हों और धीमी सांस लेते हों क्योंकि रियल लव नर्वस सिस्टम को रैगुलेट करता है. यह आप को बिना किसी बंधन के सुरक्षित महसूस कराता है और आप के इनर वर्ल्ड को घर जैसा फील कराता है.

इस प्रकार आप का साथी आप के प्यार में है या नहीं, इसे जानने के लिए आप का सकारात्मक रवैया, ट्रस्ट और धीरज रखना बहुत जरूरी है, ताकि आप का साथी आप के इस प्रयास को सराहे और आप को एक संजीदा हमसफर मिले, जिस की तलाश में आप हैं.

Love Secrets

Big Boss: अंधविश्वास से ग्रस्त एकता कपूर ने तान्या मित्तल को ऑफर किया शो

Big Boss: टीवी और फिल्म की पौपुलर प्रोड्यूसर डाइरैक्टर, बालाजी टेली फिल्म की मालकिन एकता कपूर  हर साल ‘बिग बॉस’ में आ कर अपने नए शो के लिए कलाकार चुनती हैं.

उन्होंने पिछली बार ‘नागिन’ सीरियल के लिए ‘बिग बाॅस’ प्रतियोगी प्रियंका चाहर चौधरी को शो ‘नागिन’ का किरदार निभाने का मौका दिया.

यह डर क्यों

इसी तरह इस बार भी ‘बिग बॉस 19’ में एकता कपूर अपने सीरियल के लिए कलाकारों को साइन करने के लिए उपस्थित हुईं. लेकिन इस के साथ ही एकता कपूर, जो काफी सालों से ज्योतिष विद्या के अंधविश्वास में पड़ी हुई हैं, खुद ही पिछले कई सालों में डर और टैंशन के चक्कर में ज्योतिषों पर बहुत पैसा बरबाद किया है, जिस के बाद उन्होंने अपना खुद का ज्योतिष विद्या एप ऐस्ट्रोवाणी शुरू कर रही हैं.

अपने इस ज्योतिष ऐप के प्रचार के लिए एकता ‘बिग बॉस 19’ में बतौर गेस्ट आई थीं और इस दौरान ज्योतिष विद्या पर अंधविश्वास के चलते उन्होंने एक ऐसे प्रतियोगी को अपने सीरियल में लेने की बात उजागर की जिस का ज्योतिष के अनुसार 10वें स्थान में राहु है और ऐसे लोगों का भविष्य ज्योतिष के हिसाब से बहुत ऊंचा होता है.

ऐक्टिंग जरूरी या अंधविश्वास

इसी राहु-केतु के चक्कर में एकता कपूर ने ‘बिग बॉस 19’ शो की सब से झूठ बोलने वाली, जो अपनेआप को दुनिया की सब से अमीर इंसान कहने वाली सब से फेक प्रतियोगी, जिस के झूठ से सलमान खान से ले कर घर के सारे प्रतियोगी और बाहर ‘बिग बॉस’ देखने वाले सारे दर्शक परेशान हो चुके हैं, जिस का नाम तानिया मित्तल है, अपने सीरियल में काम करने का औफर सिर्फ इसलिए दिया क्योंकि उस का राहु 10वें स्थान पर है, जो एकता कपूर के अनुसार बहुत पावरफुल और भाग्यशाली तरक्की करने वाला इंसान होता है.

लिहाजा राहु-केतु के चक्कर में एकता कपूर ने मौके पर छक्का मारते हुए तान्या मित्तल को शो में लेने का फैसला कर लिया जो 3 महीने से सब को चूना लगा रही है.

समझाए कौन

अब एकता कपूर को कौन समझाए कि अगर ज्योतिषों के कहने पर तकदीर बदलनी होती तो वह सब से पहले खुद की तकदीर बदलते.

बहरहाल, एकता कपूर के अंधविश्वास के चलते ग्वालियर की तान्या मित्तल, जिस को ऐक्टिंग का एबीसीडी भी नहीं आता इतना बड़ा मौका हाथ लग गया.

अलबत्ता, एकता का नया ज्योतिष वाला ऐप ऐस्ट्रोवानी कहां तक हिट होगा या फ्लौप, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

Big Boss

Dharmendra Deol: अंतिम यात्रा का अनोखा और दुखदाई रहा सफर

Dharmendra Deol: 89 वर्षीय धर्मेंद्र जीतेजी सब के दिलों पर राज करते रहे, सिर्फ उन के लाखोंकरोड़ों प्रशंसक ही नहीं, बल्कि बौलीवुड की महान हस्तियां, जैसे अमिताभ बच्चन धरमजी को अपना सब से अच्छा दोस्त और शाहरुख खान, सलमान खान, कौमेडियन कपिल शर्मा, कृष्णा  धरमजी को अपना फादर फिगर मानते थे.

साल के होने के बावजूद हर कोई उन से इतना प्यार करता था कि उन की मौत की खबर पर कई बड़े स्टारों को फूटफूट कर रोते देखा गया.

आखिरी दिनों में हुआ कुछ ऐसा

लेकिन उन की मौत के आखिरी दिनों में कुछ ऐसा हुआ कि देओल परिवार मीडिया से खफाखफा नजर आया, जिस के चलते धरमजी की अंतिम यात्रा गुप्त रूप से की गई और देओल हाउस से श्मशान घाट तक उन की अंतिम यात्रा एक साधारण सी एंबुलेंस में की गई, जिस में न तो कोई फूल लगे थे और न ही धर्मेंद्रजी के पार्थिव शरीर को अन्य मृत कलाकारों की तरह फूलों से सजाया गया था.

चाहने वालों से दूरी क्यों

धर्मेंद्र की शवयात्रा में 15 से 20 लोग मौजूद थे बाकी किसी को पुलिस के कड़े बंदोबस्त की वजह से आखरी दर्शन तक नसीब नहीं हुए.

इस के पीछे एक खास वजह बताई जा रही है कि देओल फैमिली नाराज है और अपने दुख में किसी को शामिल नहीं करना चाहती थी.

दरअसल, धर्मेंद्रजी के जीवित होते हुए मीडिया द्वारा उन को मृत घोषित करने की खबर चला कर गैर जिम्मेदाराना कार्य पेश किया. नामीगिरामी अखबारों और न्यूज चैनलों ने इस खबर को साझा किया था. इस के बाद सनी देओल और उन का पूरा परिवार मीडिया और पेपराजी से उखड़ाउखड़ा नजर आया.

अपने भी रहे दूर

धरमजी की अंतिम यात्रा मीडिया और आम लोगों से दूर नजर आई. इतना ही नहीं उन की प्रार्थनासभा, जोकि मुंबई स्थित ताज लैंड होटल में रखी गई थी, वहां पर भी धर्मेंद्र की दूसरी पत्नी हेमा मालिनी और उन की बेटियां कहीं नजर नहीं आईं.

खबरों के अनुसार, देओल परिवार में धरमजी की मौत के किसी भी अंतिम दर्शन में हेमा मालिनी या उन की बेटियां नजर नहीं आई थीं. ऐसे में कहना गलत न होगा कि पूरी दुनिया को प्यार बांटने वाले धरमजी के अंतिम दर्शन के लिए उन के कई चाहने वाले वंचित रह गए.

Dharmendra Deol

Nigar Shaji: सैटेलाइट इमेजिंग तकनीकों को विकसित करने में अहम भूमिका

Nigar Shaji: (स्टेम आइकन अवार्ड) निगार शाजी एक प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक और इसरो में परियोजना निदेशक हैं, जिन्हें भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल 1 का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है. 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अंतरिक्ष में एक सौर वेधशाला को स्थापित करने और जटिल वैज्ञानिक मिशनों को सफलतापूर्वक संचालित करने में अपने नेतृत्व के साथ लाखों लोगों को प्रेरित किया है.

शाजी ने भारतीय सुदूर संवेदन (रिमोट सैंसिंग), संचार और अंतरग्रहीय उपग्रह कार्यक्रमों में शानदार योगदान दिया है. वे तमिलनाडु के तेनकासी की रहने वाली हैं जो राज्य की राजधानी चेन्नई से करीब 550 किलोमीटर दूर है. निगार शाजी का बचपन प्रसिद्ध वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मैरी क्यूरी की कहानियां सुन कर बीता. विज्ञान और गणित में बेहद दिलचस्पी रखने वाले उन के पिता उन्हें ये कहानियां सुनाते थे. विज्ञान और गणित की दुनिया के बारे में उन के पिता के समझाने के अंदाज ने निगार शाजी को इस फील्ड से जोड़ दिया. उन्होंने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से इलैक्ट्रौनिक्स और संचार में बीई किया और बीआईटी रांची से इलैक्ट्रौनिक्स में मास्टर्स किया.

महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां

निगार शाजी ने 1987 में विशिष्ट अंतरिक्ष एजेंसी इसरो को जौइन किया था. उन्होंने इसरो में अपना कार्यकाल आंध्र तट के पास श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष बंदरगाह पर काम के साथ शुरू किया था. बाद में उन्हें बैंगलुरु के यू आर राव सैटेलाइट सैंटर में स्थानांतरित कर दिया गया जो उपग्रहों के विकास के लिए प्रमुख केंद्र है. इसरो के साथ कई महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक पूरा किया. शाजी इसरो में भरोसे का प्रतीक बन गईं. इस के बाद उन्हें भारत के पहले सौर मिशन की परियोजना निदेशक बनाया गया. शाजी पहले रिसोर्ससैट-2ए की सहयोगी परियोजना निदेशक भी रह चुकी हैं. शाजी सभी निचली कक्षा और ग्रहीय मिशनों के लिए प्रोग्राम डाइरैक्टर भी हैं. उन्होंने इमेज कंप्रैशन, सिस्टम इंजीनियरिंग सहित अन्य विषयों पर कई पेपर लिखे हैं.

कार्य और मिशन नेतृत्व

निगार ने रिसोर्ससैट-2 ए सैटेलाइट के लिए ऐसोसिएट परियोजना निदेशक के रूप में और बाद में आदित्य-एल 1 सौर मिशन के लिए परियोजना निदेशक के रूप में कार्य किया जो सितंबर, 2023 में सफलतापूर्वक लौंच किया गया था. उन का नेतृत्व इसरो में सभी ग्रहीय और निम्न पृथ्वी कक्षा और ग्रहीय मिशनों के लिए कार्यक्रम दिशा में फैला हुआ है. उन्होंने सैटेलाइट इमेजिंग तकनीकों को विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है और नासा और ईएसए जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग किया है

पुरस्कार और सम्मान

– टाइम्स नाऊ अमेजिंग इंडियंस अवार्ड (2023).

– ईव औफ ऐक्सीलैंस अवार्ड, तिरुचिरापल्ली रीजनल इंजीनियरिंग कालेज (2023).

रेन्ड्राप्स वूमन अचीवर अवार्ड (‘सनी लेडी’ वैज्ञानिक).

– गणतंत्र दिवस परेड और मीडिया प्लेटफार्मों पर नारी शक्ति के रूप में भारत का चेहरा के रूप में मनाया गया.

Nigar Shaji

Parvathy Thiruvothu: सिर्फ अदाकारा ही नहीं आयरन लेडी भी हैं

Parvathy Thiruvothu: पार्वती थिरुवोथु (ऐंपावरमैंट थ्रू ऐंटरटेनमैंट अवार्ड (औनस्क्रीन) जिन की अदाकारी का लोहा आज पूरी सिनेमा इंडस्ट्री मानती है. उन्होंने किरण टीवी में टैलीविजन ऐंकरिंग से अपने कैरियर की शुरुआत की और किस्सेकहानी सुनने और सुनाने की कला से ऐसे प्रभावित हुईं कि उन के अंदर की अदाकारा साउथ के पूरे भारत की चहेती ऐक्ट्रैस बन गई.

पार्वती के पिता पी. विनोद कुमार और माता टी.के. उषा कुमारी दोनों ही पेशे से वकील हैं. लेकिन उर्वशी का हमेशा से साहित्य और कला के प्रति रुझान रहा. इसलिए उन्होंने आल सेंट्स कालेज, थिरुवनंतपुरम से इंग्लिश लिटरेचर में डिगरी प्राप्त की और फिर एक ऐंकर के रूप में टेलीविजन इंडस्ट्री से कैरियर की शुरुआत की. भरतनाट्यम के प्रति कठोर समर्पण ने भी उन की कला को निखारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन की कला को नया रूप दिया.

पार्वती ने अपने अभिनय की शुरुआत मलयालम फिल्म ‘आउट औफ सिलेबस’ (2006) से की और जल्द ही ‘नोटबुक’, ‘विनोद यात्रा’ और ‘मिलाना’ जैसी फिल्मों में भावनात्मक रूप से प्रदर्शित होने वाले अपने अभिनय के लिए जानी जाने लगीं. तमिल फिल्म ‘पू’ (2008) में अपनी भूमिका के लिए उन्होंने भाषा सीखी और पूर्ण शारीरिक बदलाव किए और उन की यह सारी मेहनत रंग लाई. उन्हें इस अभिनय के लिए बहुत प्रशंसा मिली फिर तारीफों का सफर चलता चला गया.

अपनी आगे की फिल्मों में भी जैसे ‘बैंगलुरु डेज,’ ‘एन्नु निंटे मोइदीन’ और ‘चार्ली’ में अपनी उत्कृष्ट भूमिकाओं के लिए वे तारीफ बटोर आगे चलती चली गईं. ‘टेक औफ’ (2017) में समीरा के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार स्पैशल मेंशन जीता. ‘उयारे,’ ‘वायरस,’ ‘पुझु’ और ‘करीबकरीब सिंगल’ में पार्वती का काम भारतीय सिनेमा में बैंचमार्क बनाए हुए है.

रिमार्केबल वर्क

– ‘पू’ (2008)- तमिल डेब्यू, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता.

– ‘बैंगलुरु डेज’ (2014)- आरजे सारा, पहनावा पंथ क्लासिक.

– ‘एन्नु निंटेमोइदीन’ (2015)- कंचनमाला, केरल राज्य फिल्म पुरस्कार.

– ‘चार्ली’ (2015)- टेसा, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार.

– ‘टेकऔफ’ (2017)- समीरा, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विशेष उल्लेख.

– ‘करीबकरीब सिंगल’ (2017)- इरफान खान के साथ हिंदी डेब्यू.

– ‘उयारे’ (2019)- ऐसिड अटैक सर्वाइवर के रूप में समीक्षकों द्वारा प्रशंसित.

– ‘वायरस’ (2019), ‘पुझु’ (2022), ‘थांगलान’ (2024)- बहुमुखी प्रतिभा और गहराई को दर्शाती भूमिकाएं.

सम्मान एवं पुरस्कार

– राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार- विशेष उल्लेख (टेक औफ).

– सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार (एन्नु निंटे मोइदीन, चार्ली).

– दक्षिण इंडस्ट्री में 5 फिल्म फेयर पुरस्कार.

– भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनेता.

– सर्वश्रेष्ठन वोदित अभिनेत्री के लिए विजय पुरस्कार (पू).

– एकाधिक SIIMAऔर एशियानेट फिल्म पुरस्कार.

– वूमन इन सिनेमा कलैक्टिव की माननीय संस्थापक के रूप में, लैंगिक समानता पर विशेष अभिवक्ता रहीं.

अदाकार के साथ आयरन लेडी भी

पार्वती थिरुवोथु सिर्फ एक अदाकार ही नहीं बल्कि एक आयरन लेडी भी हैं. पार्वती मलयालम, तमिल, कन्नड़ और हिंदी सिनेमा में प्रगतिशील बदलाव के लिए भी जानी जाती हैं, जिस का कारण है उन का फिल्म इंडस्ट्री में लैंगिक न्याय और संरचनात्मक सुधार के लिए अपनी आवाज उठाना.

इस के लिए उन्होंने इंडस्ट्री में लैंगिक न्याय और मुद्दों को महत्त्व और संबोधित करते हुए वूमन इन सिनेमा कलैक्टिव की सहस्थापना की. अपने किरदारों को ईमानदारी से पेश कर समाज के चुनौतीपूर्ण मानदंडों को पार कर उर्वशी आज कई महत्त्वाकांक्षी कलाकारों और मीडिया में प्रतिनिधित्व चाहने वाली महिलाओं के लिए एक आदर्श बना गई हैं. वे भारतीय सिनेमा में गंभीर मुद्दे चाहे वह औन स्क्रीन या औफ स्क्रीन, दोनों ही रूप में ही संस्कृति विषयों के महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर रोशनी डालने से पीछे नहीं हटतीं.

Parvathy Thiruvothu

Urvashi: सिनेमा जगत की बहुमुखी एवं प्रभावशाली अदाकारा

Urvashi: ’ ऐंपावरमैंट आइकन अवार्ड फिल्म ‘विदरुन्ना मोट्टुकल’ (1977) से एक बाल कलाकार के रूप में शुरुआत करने वाली कविता रंजिनी, आज उर्वशी नाम के साथ एक नैशनल अवार्ड विनर और मलयालम सिनेमा की मंझ कलाकार के रूप में पूरी दुनिया में जानी जाती हैं. उर्वशी एक ऐसी अदाकार हैं जो किसी भी रोल को बड़ी सरलता और सुंदरता से पेश कर हर किसी को अपनी कला से मोहित कर लेती हैं. एक लीड कलाकार की शुरुआत 1980 में लीड ऐक्ट्रैस के रूप में उभर कर आईं उर्वशी ने मलयालम फिल्मों में धूम मचा दी और फिर उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषाओं में 700 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया. अपने शानदार कैरियर को 4 दशकों से भी अधिक समय से निभाती आ रही हैं. अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाने वाली उर्वशी ने कौमेडी से ले कर गहन विषय के कई नाटक, फिल्मों में विभिन्न प्रकार के पात्रों को सहजता से प्रस्तुत किया है. दरअसल, उर्वशी का जन्म कला से समृद्ध परिवार में हुआ था, जो कला की जड़ों से जुड़ा था. इसलिए बचपन से ही उर्वशी में कला के प्रति एक समर्पणभाव हमेशा से रहा. थिएटर और सिनेमा में मातापिता को कला की प्रस्तुति देते हुए देख कर बड़ी हुईं और आज अपनी परफौर्मैंस से वे हर तरह की भूमिका बहुत ही सहज रूप से निभा लेती हैं. उन की यह सहजता आज उन्हें मलयालम सिनेमा की एक बहुमुखी कलाकार के रूप में दर्शाती है.

सक्सैस, कमबैक और नैशनल अवार्ड

फिल्म ‘मझविल्कावडी’ (1989), ‘गौडफादर’ (1991), ‘अचुविंते अम्मा’ (2005) और ‘पार्वती परिणयम’ (1995) मेें उन्हें कुछ आलोचना का सामना करना पड़ा लेकिन व्यावसायिक सफलता भी पाई. एक छोटे ठहराव के बाद उन्होंने एक यादगार कमबैक किया. फिल्म ‘उल्लोझुक्कू’ (2024) में लीलाम्मा पात्र की भूमिका को उत्कृष्ट ढंग से पेश करने के लिए उन्हें 2025 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. उर्वशी ने अपने अभिनय से मलयालम सिनेमा को काफी समृद्ध तो किया ही, साथ ही महिलाओं के चित्रण को एक मजबूत रूपरेखा भी प्रदान की.

उन के किरदार अकसर हास्य और सहानुभूति के साथसाथ नारी के जीवन की जटिलताओं को भी दिखाते हैं, जो उन्हें सब का एक प्रिय आइकन बनाता है. एक ऐक्ट्रैस के रूप में उर्वशी महिलाओं को प्रेरणा देना का काम तो करती ही हैं, साथ ही सिनेमा क्षेत्र के बाहर भी बतौर एक महिला वे कला और समाज में महिलाओं की आवाज को प्रोत्साहित करने में प्रभावशाली भूमिका निभाती आ रही हैं. उर्वशी के इन्ही प्रयासों से प्रभावित हो गृहशोभा ने उन्हें ऐंपावरमैंट आइकन का अवार्ड दिया.

उर्वशी इस अवार्ड की असली हकदार भी थीं क्योंकि वे उन कलाकारों में से हैं, जिन का उद्देश्य अपनी कला से केवल नाम कमाना ही नहीं होता बल्कि समाज में बदलाव लाना भी होता है. आज उर्वशी की सफलता को देख कई महिलाएं कुछ कर गुजरने को प्रभावित हो रही हैं और ऐसे कई परिवार भी जो कला को केवल एक फालतू का शौक समझ अपनी बच्चियों को इस में आगे बढ़ने नहीं देते थे. वे आज उर्वशी की सफलता और कला से प्रभावित हो अपनी बच्चियों को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने को प्रोत्साहित कर रहे हैं.

उर्वशी की फिल्मों की सफलता इस बात का भी प्रमाण देती है कि महिला हर किरदार को चाहे वह हास्य विनोद का हो, ड्रामा हो, थ्रिलर या कुछ और उसे बखूबी से निभा सकती है क्योंकि अकसर सुनने को मिलता है कि कौमेडी रोल को करना औरतों के बस की बात नहीं, उन्हें तो सिर्फ रोतेधोते या रोमांटिक रोल ही सूट करते हैं. मगर उर्वशी की बेहतरीन परफौर्मैंस उन लोगों की छोटी सोच के विपरीत काम कर महिलाओं के लिए सिनेमा के हर रोल, हर अंदाज के अभिनय के द्वार खोलती है और उन्हें आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है.

अचीवमैंट्स राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

* 2005- ‘अचुविंते अम्मा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री.

* 2025- ‘उल्लोझुक्कू’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री.

केरल राज्य फिल्म पुरस्कार- कई फिल्मों में प्रदर्शन के लिए 1989-2001 तक सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (6 बार).

*अन्य पुरस्कार – सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए अनेक केरल फिल्म समीक्षक पुरस्कार.

* एशियानेट फिल्म पुरस्कार, वनिता फिल्म पुरस्कार और विभिन्न लोकप्रिय सम्मान.

Urvashi

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