Winter Health Tips : सर्दियों में रखें दिल का खास ख्याल

Winter Health Tips : सर्दी के मौसम में तापमान गिरते रहने से रक्त का गाढ़ापन बढ़ने लगता है और रक्त प्रवाह कम होने लगता है, जिस से दिल का दौरा पड़ने और कोरोनरी आर्टरी संबंधी बीमारियों के मामले भी बढ़ने लगते हैं. दिल का दौरा पड़ने के कारणों की जानकारी न होना और सर्दी के मौसम में सावधानियों की अनदेखी इन बीमारियों की बड़ी वजहें हैं.

कार्डियोवैस्क्यूलर रोगों से पीडि़त व्यक्तियों को सर्दी के मौसम में विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि उन का दिल सुरक्षित रह सके.

नियमित जांच जरूरी

सर्दियों में लोगों को दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा रहता है. बाईं धमनी से निकलने वाली रक्तधमनियां गिरते तापमान के साथ सिकुड़ने लगती हैं. परिणामस्वरूप दिल को रक्त प्रवाहित करने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ता है. इस से दिल पर अधिक दबाव पड़ने लगता है और यही दिल का दौरा पड़ने का कारण बनता है. ऐसी स्थिति में उन लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है, जिन्हें अपने दिल की स्थिति के बारे में पहले से जानकारी नहीं होती है.

कार्डियोवैस्क्यूलर के खतरे के बारे में जानकारी रखने के लिए नियमित जांच कराते रहना बहुत जरूरी है.

बढ़ जाता है खतरा

मौसम बदलने के साथ ही कोलैस्ट्रौल लैवल में भी व्यापक उतारचढ़ाव होता है, जिस कारण उच्च कोलैस्ट्रौल की स्थिति में पहुंच चुके व्यक्तियों को सर्दी के महीनों में कार्डियोवैस्क्यूलर रोग का खतरा बढ़ सकता है. उन के लिए कोलैस्ट्रौल लैवल नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है.

इस दौरान ज्यादा मेहनत वाला काम करने से बचें. लगातार काम करने के दौरान बीचबीच में आराम करते रहें ताकि दिल पर ज्यादा दबाव न पड़े. यही नहीं व्यायाम के तौरतरीकों में भी बदलाव लाते रहें.

ज्यादा ठंडे दिनों में सुबह की सैर करने से बचें. सामान्य खुराक से ज्यादा खाने से भी परहेज करें. लेकिन ध्यान रहे कि एक बार में ही ज्यादा मात्रा में भोजन कर लेने से भी दिल पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. अत: ऐसा न करें, बल्कि थोड़ेथोड़े अंतराल पर थोड़ाथोड़ा खाते रहें.

सर्दी के मौसम में कभी यह सोच कर शराब का सेवन न करें कि इस से शरीर में गरमी बनी रहेगी, बल्कि यह उलटा नुकसान करती है. शराब से शरीर में गरमी बनी रहेगी, यह सोचना गलतफहमी है.

– डा. वनिता अरोड़ा
मैक्स हौस्पिटल

Anurag Basu का संघर्षों से भरा है सफर, ऐसे हुई कैरियर की शुरुआत

Anurag Basu : शांत, धैर्यवान और हंसमुख अनुराग बसु ने फिल्म इंडस्ट्री में एक लंबा सफर तय किया है. इसमें उन्होंने एक स्टोरीटेलर के रूप में क्रीएटिवटी, अडैप्टबिलटी और अथक परिश्रम से अपने आर्टिस्टिक हुनर को सबके सामने लाने की कोशिश की है. अनुराग एक अच्छे फ़िल्म, टीवी विज्ञापन, निर्माता, निर्देशक, अभिनेता और पटकथा लेखक के रूप में जाने जाते हैं उन्होंने कई बड़ी फिल्में और वेब सीरीज बनाई है.

अनुराग बसु का जन्म झारखंड के भिलाई क्षेत्र में एक आर्टिस्टिक बंगाली परिवार में हुआ है, जहां उनकी मां दीपशखा बसु और पिता सुब्रतो बसु दोनों ही उच्च श्रेणी के थिएटर आर्टिस्ट रहे, जिसका प्रभाव अनुराग के जीवन पर पड़ा. अनुराग ने अपनी शुरुआती पढ़ाई भिलाई से पूरी की. उसके बाद उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई जबलपुर इंजीनियरिंग कौलेज से पूरा किया है. काम के दौरान उन्होंने तानी बसु से शादी किया और दो बेटियों के पिता बने.

कैरियर की शुरुआत

अनुराग का कैरियर टीवी धारावाहिकों से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने तारा, कोशिश.. एक आशा जैसी पौपुलर शोज बनाए. इसके बाद उन्होंने सांस भी कभी बहू थी, कहानी घरघर की, कसौटी जिंदगी की आदि कई धारावाहिकों के पायलट शो बनाए. इसके बाद उन्होंने खुद की कम्पनी शुरू की और कई धारावाहिकों का निर्माण किया, जिसमें मीत, मंजिले अपनी अपनी, एम आई आई टी, थ्रिलर एट 10, रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानियां आदि कई थे. टीवी की जर्नी को वे चुनौतीपूर्ण और रिवार्डिंग मानते है. उनका कहना है कि टीवी में काम करना एक बवंडर में काम करने जैसा होता है, जिसमें लिमिटेड टाइम में हाई क्वालिटी कंटैन्ट का प्रेशर बना रहता है, इससे मुझे किसी भी बदलते परिस्थिति में मुझे कुछ अच्छा सोचने की सीख मिली. साथ ही दर्शकों की पसंद को जानने का मौका भी शो के जरिए मिलता रहा. टीवी में काम करना सभी कलाकारों के लिए भी बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इससे कलाकार दर्शकों की पर्सनल लेवल से जुड़ जाता है और कलाकार के रोजरोज की कोशिश उन्हें एक अच्छा कलाकार बनाती है.

टीवी से फिल्मों का सफर

अनुराग ने टीवी धारावाहिकों के हजारों एपिसोड शूट करने के साथसाथ खुद को एक फिल्म मेकर के रूप में स्थापित किया है, जिसके लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी, क्योंकि उनकी पहचान टीवी पर हो चुकी थी, लेकिन उनकी इच्छा थी कि वे एक बड़ी फिल्म का निर्देशन करें, ऐसे में छोटे पर्दे से बड़े पर्दे पर शिफ्ट करना उनके लिए एक बड़ा कदम था, जिसे उन्होंने सोच समझकर लिया, क्योंकि वे चाहते थे कि अब उन कहनियों को कही जाए, जिसे लोगों ने सालों से नहीं देखा है और ये कहनियां हमारे आसपास घट रही है, जिसमें जुनून, ईर्ष्या और व्यभिचार जैसे विषयों को लेना आवश्यक है. इसी श्रृंखला में उन्होंने मर्डर और बर्फ़ी जैसी फिल्में बनाकर एक चर्चित निर्देशक बने. उनका मानना है कि एक निर्देशक हर फिल्म से कुछ न कुछ सीखता है और मैंने भी सीखा है.

20 सालों का साथ

अनुराग बासु की कोर टीम पिछले 20 वर्षों से साथ काम कर रही है, प्रोडक्शन डिजाइन से लेकर सिनेमेटोग्राफर सभी आजतक साथ है. वे कहते है कि मेरी पहली फिल्म मेरे सारे ग्रुप की पहली फिल्म थी, सभी ने साथ मिलकर उस फिल्म को बनाई थी और आज भी साथ फिल्म्स बनाते हैं. उन्होंने फिल्म मेकिंग को खुद की उपलब्धि नहीं, बल्कि टीम की मेहनत को माना है, एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा है कि मैँ किसी स्क्रिप्ट को लिखने के बाद उसे शूट करते वक्त आर्टिस्ट को पूरी आजादी देता हूं ताकि वे उसे अपने तरीके से दृश्य को अच्छा बनाए, इसलिए कई बार स्क्रिप्ट मेरे पास होती है, लेकिन शूटिंग के दृश्य बदल जाते है और रिजल्ट अच्छा निकल कर आता है.

बसु ने हर तरह की कहानियों को कहने की कोशिश की है, जिसमें संगीत, रोमांस, थ्रिल आदि के सहारे उन्होंने दर्शकों को हमेशा कुछ नया दिया है. वे कहते है कि एक फिल्म मेकर होने के नाते मैं हमेशा पूरे विश्व से प्रभावित रहता हूं और किसी भी जोनर की संस्कृति और वहां के अनुभव को फिल्म की कहानी के जरिए लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करता रहता हूं. फिल्म जग्गा जासूस अधिक नहीं चली, लेकिन उसमें मैंने नए स्टाइल और एनिमेशन का प्रयोग किया है, क्योंकि आर्ट एक ईवोल्यूशन है, इसमें मैं नए प्रयोग करता रहता हूं, ताकि दर्शकों को कुछ नया देखने को मिले.

रहा संघर्ष  

अनुराग के टीवी से फिल्मों के कैरियर की शुरुआत आसान नहीं था, उन्हें बहुत संघर्ष करने पड़े, क्योंकि उन्हे प्रूव करना पड़ा कि वह एक अच्छे फिल्म मेकर है, लेकिन इसके लिए किसी बड़े फिल्म मेकर के अंदर उन्हें काम करने की जरूरत थी, जिसका मौका उन्हे भट्ट कैम्प से मिला. हालांकि उनके कैरियर की शुरुआत वर्ष 2003 में तुषार कपूर और ईशा देओल स्टारर फिल्म कुछ तो है से हुआ और इस फिल्म का निर्माण एकता कपूर ने किया गया था, लेकिन यह फिल्म बौक्सऔफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी. इसके बाद बासु ने महेश भट्ट के साथ मिलकर फिल्म साया का निर्देशन किया. इस फिल्म में जॉन अब्राहम और तारा शर्मा मुख्य भूमिका में नजर आये थे, लेकिन पहली फिल्म की तरह उनकी यह फिल्म भी दर्शकों को कुछ खास पसंद नहीं आई. अनुराग कहते है कि मुझे ये प्रूव करना मुश्किल हो रहा था कि मैं एक अच्छा फिल्म मेकर हूं, लेकिन एक दिन मुकेश भट्ट ने मुझे बुलाया और 7 लाख का ऑफर निर्देशन के लिए दिया, लेकिन तुरंत उन्होंने इसे दो फिल्मों की फीस बता दी, मैँ राजी हो गया, क्योंकि कोई काम मिल नहीं रहा था और तब फिल्म मर्डर बनी. ढाई करोड़ की फिल्म ने 80 करोड़ की कमाई की और मेरा निर्देशन सफल रहा. यह मेरी पहली हिट फिल्म साबित हुई.

फिल्म हिट तो डायरेक्टर हिट   

इसके बाद अनुराग ने फिल्म गैंगस्टर और लाइफ इन ए मेट्रो जैसी फ़िल्में निर्देशित की, जिसे दर्शकों ने कुछ पसंद किया, लेकिन तभी उनके मस्तिष्क में बर्फी फिल्म की कहानी आई और बसु ने इसे रणबीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा और इलियाना डीक्रूज के साथ बनाई, जो उनके कैरियर की सबसे बड़ी हिट फिल्म फिल्म साबित हुई, क्योंकि इस फिल्म में दार्जिलिंग के एक गूंगे और बहरे व्यक्ति मर्फी “बर्फी” जौनसन के जीवन और उसके दो महिलाओं श्रुति और झिलमिल के साथ सम्बन्धों को दर्शाती है, यह फिल्म दर्शकों और आलोचकों द्वारा हर जगह सराही गयी. इस फिल्म को कई पुरस्कार भी मिले.

अनुराग बसु को हुआ था ब्लड कैंसर

अनुराग बसु को वर्ष 2004 में प्रोमाइलोसाइटिक ल्यूकेमिया नामक ब्लड कैंसर था. इस बीमारी में बोन मैरो में सफ़ेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ जाता है. अनुराग बसु कीमोथेरेपी और लगातार इलाज के बाद इस बीमारी से उबर चुके है. अब वे खुद की नियमित देखभाल से ठीक है. उस घटना के बारें में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें इस बीमारी का पता तब चला, जब उनके मुंह में बड़ेबड़े छाले निकलने लगे थे.

वह डौक्टर के पास तो गए, लेकिन वहां उनको कुछ मेडिकल टेस्ट के लिए एडमिट होने के लिए कहा गया था. अनुराग बिना टेस्ट कराए सेट पर वापस आ गए, लेकिन स्थिति ठीक न होने की वजह से उनको अस्पताल में भर्ती किया गया. इधर उनकी पत्नी दूसरी बार गर्भवती थी और डौक्टर ने उन्हे कहा कि उनके पास जीने के लिए केवल 2 सप्ताह है. अनुराग घबराये नहीं और उस परिस्थिति से निकलने की कोशिश में लगे रहे.

उनके इलाज के दौरान, टीवी और फ़िल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने रक्तदान किया था. उन्होंने कीमोथेरेपी के दौरान मास्क पहनकर फ़िल्म ‘गैंगस्टर’ की शूटिंग की थी. उन्हें परिवार, दोस्तों, और चाहने वालों का पूरा समर्थन मिला, जिससे वे इस बीमारी से उबर पाए. वे आगे कहते है कि कैंसर से लड़ाई के बाद मेरा जीवन के प्रति नजरिया ही बदल गया है.

रियलिटी शोज में जज अब और नहीं

अनुराग हंसते हुए कहते हैं कि एक घटना ने मुझे रियलिटी शोज में काम करने से रोक दिया है. मैंने कई डांस शोज जज किये है, एक दिन एक माल में मैं बच्चों सहित एक परिवार से मिला, बच्चों ने मेरे साथ पहले तो सेल्फी ली, लेकिन तभी उन बच्चों की मां ने मुझसे पूछा कि आपका डांस क्लास कहा है? उस दिन से मैंने सोच लिया है कि मैं अब डांस रियलिटी शोज की जजिंग नहीं करूंगा.

इंडियन फिल्म्स है ग्लोबल फिल्म

अनुराग मानते हैं कि इंडियन फिल्म्स ग्लोबल औडियंस को ध्यान में रख कर बनाई जाती है, लेकिन आज किसी को अधिक सफलता नहीं मिल रही है. आशा है, जिस तरह चिकन टिक्का का टेस्ट विदेशों में लोगों ने डेवलप कर लिया है, वैसे ही हमारी फिल्मों को भी वे पसंद करने लगेंगे. देखा जाय तो कोरीयन फिल्म इंडस्ट्री हमारे से काफी बाद में शुरू हुई है, लेकिन उनकी फिल्में और वेब सीरीज को पूरे विश्व में लोग पसंद कर रहे है. वे अधिक फिल्म्स बनाते भी नहीं अच्छा कमाते है, जबकि बॉलीवुड काफी फिल्में बनाकर भी उतना कमा नहीं पा रही है.

इस प्रकार अनुराग बसु की जर्नी डेली सोप ओपेरा से शुरू होकर सिनेमा और वेब सीरीज तक पहुंच चुकी है, जिसमें उनकी ग्रोथ, एडेप्टेशन, आर्टिस्टिक और  समर्पण पूरी तरह से झलकता है. उन्होंने अलगअलग कहानी के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया है और आगे भी कुछ नई कहानियों से दर्शकों का मनोरंजन करवाना चाहते है. वे कहते हैं कि मास्टरी एक जर्नी है, डेस्टिनेशन नहीं और आज भी मुझे एक नई कहानी कहने की उत्सुकता है.

Hair Care Tips : कहीं बालों के टूटने की वजह आपकी कंघी तो नहीं ?

Hair Care Tips : अकसर कई महिलाओं की शिकायत होती हैं कि उनके बाल बहुत टूटते हैं और सिर में डैन्ड्रफ सालोंसाल खत्म ही नहीं होता जिस कारण बालो की जड़ कमजोर हो जाती हैं और बाल झड़ने लगते हैं. कभी कभी तो पुरषों की भी यही शिकायत रहती है तो इस समस्या के कई ऐसे कारण हैं जिनको जानना बहुत जरूरी है.

गंदी कंघी का इस्तेमाल

कई बार हम कंघी करते समय यह ध्यान नहीं देते और गंदी कंघी से ही बालों को सवारने लगते हैं जिस कारण धूल,बाल, तेल, डैंड्रफ और स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स के अवशेष कंघी में जमा हो जाते हैं. जिससे डैंड्रफ, बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का कारण बन हो सकता है. गंदगी व कंघी में फसे पुराने बाल बालों के रोमछिद्र को ब्लौक कर देते हैं जिससे बाल झड़ने लगते हैं.

कैसे करें सफाई

हफ्ते में एक बार अपनी कंघी को ग्रम पानी में शैम्पू व पुराने टूथब्रश की मदद से साफ करें.
स्टाइलिंग और डेली ब्रशिंग के लिए हमेशा अलगअलग कंघी का इस्तेमाल करें.

डैंड्रफ के अन्य कारण

तेज गर्म पानी का प्रयोग

सर्दियों में गर्म पानी में नहाने के कारण हमारे शरीर और सिर की नमी कम होने लगती है जिस कारण त्वचा रूखी व बेजान होने के साथ साथ हमें डैंड्रफ जैसी समस्या होने लगती है.सर्दियों में ऊनी कैप व स्कार्फ पहनना भी इसका एक कारण है.

विटामिन बी कौम्प्लेक्स की कमी

शरीर में विटामिन बी2, विटामिन बी3, विटामिन बी९6, विटामिन बी9 या फ़ॉलिक एसिड की कमी होने से डैंड्रफ होने की समस्या हो जाता है

थायराइड की समस्या

थायराइड की समस्या होने पर सिर की त्वचा रूखी हो जाती है, जिससे रूसी जल्दी हो सकती है.
रोज रोज शैंपू बदलने और कैमिकल युक्त शैंपू प्रयोग करने से सिर की त्वचा पर असर पड़ता है जिससे रूसी हो जाती है. सिर में हमेशा तेल लगा कर रखना भी इसका एक कारण हैं.

Teen Age Problem : मेरे मम्मीपापा हर वक्त मुझ पर शक करते हैं… इस स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए?

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है, तो ये लेख अंत तक जरूर पढ़ें…

सवाल

Teen Age Problem : मैं 18 वर्षीय कालेज में पढ़ने वाली छात्रा हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरे मम्मी पापा हर वक्त मुझ पर शक करते हैं. हर समय मुझ पर निगरानी रखते हैं कि मैं फोन पर किस से बात कर रही हूं. बात बात में जानने की कोशिश करती हैं कि कालेज में मैं किन दोस्तों के साथ रहती हूं. मेरे कितने दोस्त लड़के हैं और वे कौन हैं? मुझे उन का यह व्यवहार परेशान करता है. मैं क्या करूं कि वे मुझ पर शक न करें?

जवाब

देखिए, एक माता पिता होने के नाते आप के बारे में जानना आप के माता पिता का हक व जिम्मेदारी भी है. आप अपनी समस्या के समाधान के लिए उन से अपनी हर बात शेयर करें, अपने दोस्तों को उन से मिलवाएं, उन से कुछ भी छिपाएं नहीं. जब ऐसा होगा तो वे आप पर विश्वास करने लगेंगे और बात बात पर आप पर निगरानी नहीं रखेंगे. दरअसल वे आप की परवाह करते हैं इसलिए आप पर निगरानी रखते हैं.

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फोन पर ‘हैलो’ सुनते ही अंजलि ने अपने पति राजेश की आवाज पहचान ली.

राजेश ने अपनी बेटी शिखा का हालचाल जानने के बाद तनाव भरे स्वर में पूछा, ‘‘तुम यहां कब लौट रही हो?’’

‘‘मेरा जवाब आप को मालूम है,’’ अंजलि की आवाज में दुख, शिकायत और गुस्से के मिलेजुले भाव उभरे.

‘‘तुम अपनी मूर्खता छोड़ दो.’’

‘‘आप ही मेरी भावनाओं को समझ कर सही कदम क्यों नहीं उठा लेते हो?’’

‘‘तुम्हारे दिमाग में घुसे बेबुनियाद शक का इलाज कर ने को मैं गलत कदम नहीं उठाऊंगा…अपने बिजनेस को चौपट नहीं करूंगा, अंजलि.’’

‘‘मेरा शक बेबुनियाद नहीं है. मैं जो कहती हूं, उसे सारी दुनिया सच मानती है.’’

‘‘तो तुम नहीं लौट रही हो?’’ राजेश चिढ़ कर बोला.

‘‘नहीं, जब तक…’’

‘‘तब मेरी चेतावनी भी ध्यान से सुनो, अंजलि,’’ उसे बीच में टोकते हुए राजेश की आवाज में धमकी के भाव उभरे, ‘‘मैं ज्यादा देर तक तुम्हारा इंतजार नहीं करूंगा. अगर तुम फौरन नहीं लौटीं तो…तो मैं कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दे दूंगा. आखिर, इनसान की सहने की भी एक सीमा…’’

अंजलि ने फोन रख कर संबंधविच्छेद कर दिया. राजेश ने पहली बार तलाक लेने की धमकी दी थी. उस की आंखों में अपनी बेबसी को महसूस करते हुए आंसू आ गए. वह चाहती भी तो आगे राजेश से वार्तालाप न कर पाती क्योंकि उस के रुंधे गले से आवाज नहीं निकलती.

शिखा अपनी एक सहेली के घर गई हुई थी. अंजलि के मातापिता अपने कमरे में आराम कर रहे थे. अपनी चिंता, दुख और शिकायत भरी नाराजगी से प्रभावित हो कर वह बिना किसी रुकावट के कुछ देर खूब रोई.

Christmas 2024 : बच्चों के लिए बनाएं बिना बेक किये ये इंस्टेंट केक

Writer- Pratibha Agnihotri

Christmas 2024 : दिसम्बर में क्रिसमस और सेंटा की बहार फिजां में घुलने लगती है और उसके साथ ही बड़े बच्चों सभी को केक का ख्याल आने लगता है परन्तु कई बार समयाभाव के कारण अथवा बेकिंग का अनुभव न होने के कारण केक बनाना मुश्किल सा हो जाता है इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको ऐसे केक बनाना बता रहे हैं जिन्हें आप बिना बेक किये घर में ही बड़ी आसानी से बना सकतीं है तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

-इंस्टेंट बिस्किट केक
-कितने लोगों के लिए 6
-बनने में लगने वाला समय 30 मिनट
-मील टाइप वेज
-सामग्री
-ब्रिटेनिया बिस्किट 20
-कॉर्नफ्लोर 1 टीस्पून
-चॉकलेटी सॉस 2 टेबलस्पून
-दूध 1/2 कप
-कोको पाउडर 1 टीस्पून चॉकलेटी सॉस और चोको चिप्स 1 टेबलस्पून

विधि

दूध में कॉर्नफ्लोर चॉकलेटी सॉस और कोको पाउडर को अच्छी तरह मिक्स कर लें. अब प्रत्येक बिस्किट को दूध में डुबोकर एक के ऊपर एक रखतीं जाएं. बचे दूध को भी बिस्किट के ऊपर ही फैला दें. 20 मिनट के लाइट फ्रिज में सेट होने रखें फिर एक तेज धारवाले चाकू से ऊपर से नीचे की तरफ काटते हुए लंबे स्लाइसेज में काटकर सर्विंग डिश में रखें ऊपर से चॉकलेटी सॉस और चिप्स डालकर सर्व करें.

-गाजर डोरा केक
-किसी गाजर 1/4 कप
-बटर 2 टेबलस्पून
-कन्डेन्स्ड मिल्क 4 टेबलस्पून
-पिसी शकर 1 टेबलस्पून
-मैदा 1 कप
-वनीला एसेंस 1/4 टीस्पून
-दूध 3/4 कप
–सामग्री (फिलिंग के लिये)
-किसी गाजर 1 कप
-बटर 1 टीस्पून
-पिसी शकर 1 टेबलस्पून
-बारीक कटी मेवा 1 टेबलस्पून

विधि

-गाजर, बटर, कन्डेन्स्ड मिल्क, मैदा, शकर को एक साथ मिलाएं अब इसमें दूध को धीरे धीरे मिलाएं. जब मिश्रण एकसार हो जाये तो वनीला एसेंस मिलाएं. एक नॉनस्टिक पैन पर चिकनाई लगाएं और तैयार मिश्रण में से 1 बड़ा चम्मच मिश्रण लेकर फैलाएं, ढककर धीमी आंच पर 2-3 मिनट तक पकाकर पलट कर दूसरी तरफ से भी पकाएं. इसी प्रकार सारे केक तैयार कर लें.

-फिलिंग तैयार करने के लिए एक पैन में बटर डालकर गाजर को नरम होने तक पकाकर शकर मिलाएं और पानी सूखने तक पकाकर गैस बंद कर दें और मेवा मिला दें.
एक केक के बीच में 1 टेबलस्पून फिलिंग फैलाएं और दूसरे केक से कवर करके सारे केक तैयार कर लें. बीच से काटकर बच्चों को खाने को दें.

Short Stories in Hindi : अनमोल तोहफा

लेखक- इश्तियाक सईद

Short Stories in Hindi : शाहिदा शेख प्रोफैसर महमूद शौकत की छात्रा रह चुकी थी. 3 साल पहले बीए की डिगरी ले कर वह घर बैठ गई थी. कुछ दिनों पहले न जाने कैसे और कब वह प्रोफैसर से आ मिली, कब दिलोदिमाग पर छाई, कब हवस बन कर रोमरोम में समा गई, उन्हें कुछ नहीं याद. यह भी याद नहीं कि पहले किस ने किस को बेपरदा किया था.

अगर याददाश्त में कुछ महफूज रखा था तो बस शाहिदा शेख की चंचलता, अल्हड़ता और उस का मादक शरीर जो उन की खाली जिंदगी और ढलती उम्र के लिए खास तोहफे की तरह था.

यही हाल शाहिदा शेख का भी था, क्योंकि दोनों ही एकदूसरे के बिना अधूरापन महसूस करते थे.

शाहिदा शेख अपने मांबाप की एकलौती औलाद थी, इसलिए एक प्रोफैसर का उन के घर आनाजाना किसी इज्जत से कम न था. उन्हें अपनी बेटी पर फख्र भी होता था कि यह इज्जत उन्हें उसी के चलते मिल रही थी. वे समझते थे कि प्रोफैसर उन की बेटी को अपनी बेटी की तरह मानते हैं.

प्रोफैसर महमूद शौकत को दिलफेंक, आशिकमिजाज या हवस का पुजारी कहा जाए, ऐसा कतई न था, बल्कि वे तो ऐसे लोगों में से थे जो हर समय गंभीरता ओढ़े रहते हैं. अलबत्ता, वे सठिया जरूर गए थे यानी उन की उम्र 60वें साल में घुस चुकी थी.

प्रोफैसर महमूद शौकत की पत्नी 10 साल पहले ही इस दुनिया से जा चुकी थीं. पत्नी की इस अचानक जुदाई से प्रोफैसर महमूद शौकत ऐसे बिखरे थे कि उन का सिमटना मुहाल हो गया था. कालेज जाना तो दूर खानेपीने तक की सुध न रहती थी. हां, कुछ होश था तो बस उन्हें अपनी बेटी का, जो जवानी की दहलीज पर थी. अब तो वह भी अपने घरबार की हो गई थी और

2 बच्चों की मां भी बन चुकी थी. बेटा कंप्यूटर इंजीनियर था और एक निजी कंपनी में मुलाजिम था. प्रोफैसर महमूद शौकत समय से पहले रिटायरमैंट ले कर खुद आराम से सुख भोग रहे थे.

इधर लगातार कई दिनों से प्रोफैसर महमूद शौकत शाहिदा शेख का दीदार न कर सके थे. इंतजार जब आंख का कांटा बन गया तो वे सीधे उस के घर जा पहुंचे. पता चला कि वह पिछले 10 दिनों से मलेरिया से पीडि़त थी. खैर, अब कुछ राहत थी लेकिन कमजोरी ऐसी कि उठनाबैठना मुहाल हो गया था.

प्रोफैसर महमूद शौकत जैसे ही शाहिदा शेख के बैडरूम में गए, उन्हें देखते ही शाहिदा की निराश आंखें चमक उठीं और बीमार मुरझाया चेहरा खिल गया.

इस बीच प्रोफैसर महमूद शौकत शाहिदा की नब्ज देखने के लिए उस पर झुके थे कि उस ने झट उन पर गलबहियां डाल दीं और अपने तपतेसुलगते होंठों को उन के होंठों में धंसा दिया.

शाहिदा शेख के ऐसे बरताव से प्रोफैसर महमूद शौकत शर्मिंदा हो उठे और खुद को उस की पकड़ से छुड़ाते हुए बोले, ‘‘प्लीज, मौके की नजाकत को समझो.’’

‘‘समझ रही हूं सर कि मम्मी हमारे बीच दीवार बनी हुई हैं. मैं तो उम्मीद कर रही हूं कि वे थोड़ी देर के लिए ही सही, किसी काम से बाहर चली जाएं और हम एकदूसरे में…’’

शाहिदा की पकड़ से छूट कर प्रोफैसर महमूद शौकत सोफे पर बैठे ही थे कि शाहिदा की मम्मी चायनमकीन लिए कमरे में आ धमकीं.

यह देख प्रोफैसर का जी धक से हो गया और चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. वे सोचने लगे कि अगर वे कुछ समय पहले आ जातीं तो…

बहरहाल, चाय की चुसकियों के दौरान उन में बातें होने लगीं. फिर शाहिदा की मम्मी अपने घराने और शाहिदा से संबंधित बातों की गठरी खोल बैठीं. बातों ही बातों में उस के ब्याह की चर्चा छेड़ दी. वे कहने लगीं, ‘‘प्रोफैसर साहब, हम पिछले 3 महीनों से शाहिदा के लिए लड़का खोज रहे हैं, पर अच्छे लड़कों का तो जैसे अकाल पड़ा है. देखिए न कोई मुनासिब लड़का हमारी शाहिदा के लिए.’’

इस से पहले कि प्रोफैसर कुछ कहते, शाहिदा झट से बोल पड़ी, ‘‘सर, अपनी ही कालोनी में देखिएगा, ताकि शादी के बाद भी मैं आप के करीब रहूं.’’

उस रात प्रोफैसर सो नहीं सके थे. शाहिदा का कहा उन के दिमाग में गूंजने लगता और वे चौंक कर उठ बैठते.

इसी उधेड़बुन में वे धीरेधीरे फ्लैशबैक में चले गए.

होटल मेघदूत के आलीशान कमरे में नरम बिस्तर पर शाहिदा शेख बिना कपड़ों के प्रोफैसर महमूद शौकत की बांहों में सिमटी कह रही थी, ‘जी तो चाहता है सर, मैं जवानी की सभी घडि़यां आप की बांहों में बिताऊं. आप ऐसे ही मेरे बदन के तारों को छेड़ते

रहें और मैं आप की मर्दानगी से मस्त होती रहूं.’

इतना सुनने के बाद प्रोफैसर ने उस के रेशमी बालों से खेलते हुए पूछा था, ‘तुम्हें ऐसा नहीं लगता कि हम जो कर रहे हैं, वह गुनाह है?’

शाहिदा ने न में सिर हिला दिया.

‘क्यों?’

‘क्योंकि, सैक्स कुदरत की देन है. इस को गुनाह कैसे कह सकते हैं. वैसे भी सर, मैं तो मानती हूं कि यह केवल हमारी शारीरिक जरूरत है. आप मर्द हैं और आप को मेरी जवानी चाहिए. मैं औरत हूं और मुझे आप की मर्दानगी की तलब है.’

‘ओह मेरी जान,’ शाहिदा की इस बात पर प्रोफैसर महमूद शौकत चहक उठे थे. साथ ही, उन के होंठ उस के होंठों पर झुकते चले गए.

शाहिदा इस अचानक हल्ले के लिए तैयार न थी, फिर भी उन की छुअन ने उस के शरीर को झनझना दिया था और उस का कोमल शरीर उन की बांहों के घेरे में फड़फड़ाने लगा था.

प्रोफैसर का यह कामुक हल्ला इतना तेज… इतना वहशियाना था कि शाहिदा का पोरपोर उधेड़े दे रहा था. शाहिदा भी अपने शरीर को ऐसे ढीला छोड़ रही थी मानो खुद को हारा हुआ मान लिया हो.

कुछ मिनट तक दोनों ऐसे ही बिस्तर पर उधड़ेउधड़े बिखरेबिखरे से रहे, फिर किसी तरह शाहिदा खुद को अपने में बटोरतेसमेटते फुसफुसाई, ‘सर…’

‘क्या…’

‘इस उम्र में भी आप में नौजवानों से कहीं ज्यादा मर्दानगी का जोश है.’

यह सुन कर प्रोफैसर महमूद शौकत हैरानी से उसे देखने लगे.

‘हां सर, मुझे तो अपने साथी लड़कों से कहीं ज्यादा सुख आप से मिलता है.’

‘लेकिन, तुम यह कैसे कह सकती हो?’ प्रोफैसर की आवाज में बौखलाहट आ गई थी.

‘आजमाया है मैं ने… 1-2 को नहीं, दसियों को.’

‘यानी तुम उन के साथ…’

‘बिलकुल, शायद पहले भी आप से कह चुकी हूं कि मेरे लिए जिंदगी मौत का नजरअंदाज किया हुआ एक पल है, तो क्यों न मैं हर पल को ज्यादा से ज्यादा भोगूं…’

यह सुन कर प्रोफैसर चौंक उठते हैं और फ्लैशबैक से वापस आ जाते हैं. वे फटीफटी आंखों से शून्य में घूरने लगते हैं और धीरेधीरे वह शून्य सिनेमा के परदे में बदल जाता है. उस में 2 धुंधली छाया निकाह कर रही होती हैं. जैसेजैसे दूल्हे के मुंह से ‘कबूल है’ की गिनती बढ़ती है, दुलहन शाहिदा का और दूल्हा प्रोफैसर का रूप धर लेता है.

उसी पल प्रोफैसर की बेटी अपने दोनों बच्चों की उंगली थामे शाहिदा के सामने आ खड़ी होती है और उन का यह सुंदर सपना इस तरह गायब हो जाता है जैसे बिजली गुल होने पर टैलीविजन स्क्रीन से चित्र.

सुबह होते ही प्रोफैसर शौकत बिना सोचेसमझे शाहिदा के घर जा पहुंचे. डोर बैल की आवाज पर शाहिदा की मम्मी ने दरवाजा खोला और अपने सामने प्रोफैसर को देख वे हैरत में डूब गईं, ‘‘प्रोफैसर साहब, आप…’’

प्रोफैसर महमूद शौकत चुपचाप निढाल कदमों से अंदर गए और खुद को सोफे पर गिराते हुए पूछा, ‘‘शेख साहब कहां हैं?’’

‘‘वे तो सो रहे हैं…’’ कहते हुए शाहिदा की मम्मी ने उन की आंखों में झांका, ‘‘अरे, आप की आंखें… लगता है, सारी रात आप जागते रहे हैं.’’

‘‘हां… मैं रातभर शाहिदा के निकाह को ले कर उलझा रहा… आप ने कहा था न कि मैं उस के लिए लड़का देखूं?’’

‘‘तो देखा आप ने?’’ मम्मी जानने के लिए उत्सुक हो गईं, ‘‘कौन है? क्या करता है? मतलब काम… फैमिली बैकग्राउंड क्या है?

‘‘अजी सुनते हो, उठो जल्दी… देखो, प्रोफैसर साहब आए हैं. हमारी शाहिदा के लिए लड़का देख रखा है इन्होंने. कितना ध्यान रखते हैं हमारी शाहिदा का.’’

‘‘महान नहीं, खुदा हैं खुदा,’’ शेख साहब ने आते हुए कहा.

‘‘खुदा तो आप हैं, एक हूर जैसी लड़की के पिता जो हैं. मगर आप दोनों मियांबीवी को एतराज न हो तो मैं शाहिदा को अपने घर… मतलब… मेरे बेटे को तो आप लोग जानते ही हैं, और…’’

‘‘बसबस, इस से बढ़ कर खुशी और क्या हो सकती है हमारे लिए,’’ मिस्टर शेख ने कहा, ‘‘हमारी शाहिदा आप के घर जाएगी तो हमें ऐसा लगेगा जैसे अपने ही घर में है, हमारे साथ.’’

फिर क्या था, आननफानन बड़े ही धूमधाम से शाहिदा प्रोफैसर के बेटे से ब्याह दी गई. वह प्रोफैसर के घर आ कर बहुत खुश थी. बेटा भी शाहिदा जैसी जीवनसाथी पा कर फूला न समाता था. दुलहनिया को ले कर हनीमून मनाने वह महाबलेश्वर चला गया.

प्रोफैसर चाहते हुए भी उसे रोक न सके और भीतर ही भीतर ऐंठ कर रह गए. खैर, दिन तो जैसेतैसे कट गया, पर रात काटे न कटती थी. वे जैसे ही आंखें मूंदते, उन्हें बेटे और बहू का वजूद आपस में ऐसे लिपटा दिखाई देता मानो दोनों एकदूसरे में समा जाना चाहते हों. ऐसे में उन्हें बेवफा महबूबा और बेटा अपना दुश्मन मालूम होने लगते. रहरह कर उन्हें ऐसा भी महसूस होता कि बेटे की मर्दानगी का जोश शाहिदा की जवानी की दीवानगी से हार रहा है.

बेटे और बहू को हनीमून पर गए

3 दिन बीत चुके थे. इस बीच प्रोफैसर की हालत पतली हो गई थी. घर में होते तो दिमाग पर शाहिदा का मादक यौवन छाया रहता या अपने ही बेटे की दुश्मनी में चुपकेचुपके सुलगते रहते. उन्हें यह तक खयाल न आता कि अब उन के और शाहिदा के बीच रिश्ते की दीवार खड़ी कर दी गई है. बेटे के संग गठबंधन ने उसे प्रेमिका से बहू बना दिया है. बहू यानी बेटी. वे अपनी इस चूक पर बस हाथ मलते थे.

इन्हीं दिनों उन का एक छात्र किसी काम के चलते उन से मिलने आया. इधरउधर की बातों के दौरान उस ने बताया कि बीकौम के बाद वह एक मैन पावर कंसलटैंसी में अकाउंटैंट के तौर पर काम कर रहा है. फिर उस ने प्रोफैसर के पूछने पर उस फर्म के काम करने के तरीके के बारे में बताया.

उस रात उन्हें काफी सुकून व बहके खयालात में ठहराव का अहसास हुआ. ऐसा महसूस होने लगा जैसे उस छात्र की मुलाकात ने उन्हें सांप के काटे का मंत्र सिखा दिया हो.

बेटा और बहू यानी प्रेमिका पूरे

20 दिन बाद हनीमून से लौटे थे. बेटा शाहिदा का साथ पा कर बेहद खुश दिखाई दे रहा था. देखने में तो शाहिदा भी खुश थी, पर उस की आंखों से खुशियों की चमक गायब थी.

प्रोफैसर की नजर ने सबकुछ पलक झपकते ही ताड़ लिया था और वे चिंता की गहराइयों में डूब गए थे.

अगले दिन चायनाश्ते के बाद प्रोफैसर महमूद शौकत ने अपने बेटे को कमरे में बुलाया और दुनियादारी, जमाने की ऊंचनीच का पाठ पढ़ाते हुए कहा, ‘‘बेटा, अब तक तुम केवल अपनी जिंदगी के जिम्मेदार थे, पर अब एक और जिंदगी तुम से जुड़ चुकी है यानी तुम एक से 2 हो चुके हो. आने वाले दिनों में 3, फिर 4 हो जाओगे.

‘‘जरूरतों और खर्चों में बढ़ोतरी लाजिमी है, जबकि आमदनी वही होगी जो तुम तनख्वाह पाते हो, इसलिए मैं ने तुम्हारे सुनहरे भविष्य के लिए, तुम्हारी मरजी जाने बिना मौजूदा नौकरी से बढि़या और 4 गुना ज्यादा तनख्वाह वाली नौकरी का जुगाड़ कर दिया है.’’

इस बीच प्रोफैसर महमूद शौकत की नजर के पीछे खड़ी शाहिदा पर जमी थी. उस की आंखों में खुशी की लहरें और होंठों पर कामुक मुसकान रेंग रही थी. उस के इस भाव से खुश होते हुए उन्होंने मेज की दराज से एक लिफाफा निकाला और उसे शहिदा की ओर बढ़ाते हुए कहा, ‘‘शाहिदा, यह मेरी ओर से तुम्हारे लिए एक छोटा सा तोहफा है.’’

‘‘शुक्रिया,’’ शाहिदा धीरे से बोली.

‘‘अगर अब तुम इस तोहफे को अपने हाथों से मेरे बेटे को दे दो तो यकीनन यह तोहफा बेशकीमती हो जाएगा.’’

वह उन की इच्छा भांप गई और एक अदा से लजाते, इठलाते हुए उस ने लिफाफा शौहर की ओर बढ़ा दिया.

बेटे को शाहिदा की इस अदा पर प्यार उमड़ आया. वह उसे चाहत भरी नजर से देखते हुए लिफाफा थाम कर ‘शुक्रिया डार्लिंग’ बोला.

लिफाफे में मोटे शब्दों में लिखा था, ‘पिता की तरफ से बेटे को अनमोल तोहफा’. उस में जो कागज था, वह

बेटे की दुबई में नौकरी का अपौंइटमैंट लैटर था. साथ में वीजा, पासपोर्ट और हवाईजहाज की टिकट भी थी. यह पढ़ते ही बेटे के हाथ कांपने लगे.

Beard Look या क्लीन शेव, जानें किसके तरफ अट्रैक्ट होती हैं लड़कियां

Beard Look : वैसे तो लड़कियां हर मामले में सिलैक्टिव होती है, लेकिन बात अगर उनके बौयफ्रैंड की हो, तो वे थोड़ी अधिक सिलैक्टिव हो जाती है, क्योंकि उन्हे हैन्डसम और फिट लड़के अधिक पसंद आते है, ऐसे में आजकल पुरुषों में दाढ़ी रखने का फैशन बढ़ता जा रहा है. क्रिकेट के मैदान से लेकर बौलीवुड के बड़े सेलिब्रिटीज इन दिनों बियर्ड फैशन फौलो कर रहे हैं, जो कुछ लड़कियों को तो प्रभावित करती है, कुछ को नहीं. उनके हिसाब से बड़ी दाढ़ी रखने वाले अधिकतर लड़के साफ सुथरे नहीं होते है, ऐसे में उनकी ढाढ़ी अगर सही से नहीं रखी नहीं गई हो, तो बहुत ही गंदे दिखते है.

इस बारें में कुछ लड़कियों से बात करने पर सबकी राय अलगअलग मिली, क्या कहती है, आज की टीनएज और वर्किंग लड़कियां… आइए जानते है.

17 वर्षीय सांझ भट्टाचार्या कहती है कि मुझे अधिक दाढ़ी रखने वाले लड़के जरा भी पसंद नहीं, जिनकी दाढ़ी कम डेन्स ट्रिम किये हुए फ्रेश लुक के साथ हो, तो पसंद आते है, क्योंकि अधिक दाढ़ी रखने वाले मुझे गंदे दिखते है. मेरे कौलेज में ऐसे कई लड़के है, जो दाढ़ी रखते हैं और अच्छे नहीं दिखते. मेरे हिसाब से कुछ स्थानों पर लड़कों का दाढ़ी रखना एक कल्चर के अंतर्गत आता है, जहां वे कैसे भी दिखते हो, उन्हे दाढ़ी रखनी पड़ती है, लेकिन इसके अलावा सभी लड़कों पर दाढ़ी सूट भी नहीं करती, अगर वे बियर्ड के शौकीन है, तो उन्हें अपने चेहरे के अनुसार ही दाढ़ी रखने चाहिए.

कम हाइट के लड़के

असल में रिसर्च के अनुसार बियर्ड से लड़कों की स्मार्टनेस के साथसाथ उनकी हाइट भी दिखती है और इंडिया में अधिकतर लड़कों की हाइट कम होती है, शार्प और लौन्ग बियर्ड से उनकी ये कमी छिप जाती है. जिनकी हाइट अच्छी होती है, वे क्लीन शैव अधिक पसंद करते है.

एक कौर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाली सुमन को तो बियर्ड वाले लड़के बिल्कुल भी पसंद नहीं, उनके हिसाब से जिन लड़कों के चेहरे अच्छे नहीं होते, वे दाढ़ी बढ़ाकर उसमें अपने चेहरे की कमी को छिपा लेते है, जो लड़के हैन्डसम होते है, वे हमेशा क्लीन शेव रखते है और वे मुझे पसंद आते है.

बियर्ड के साथ अधिक जरूरी साफसुथरा होना    

असल में लड़कियां बैक्टीरिया या गंदगी के डर से दाढ़ी वाले पुरुषों को पसंद नहीं करती हैं. रिसर्च के अनुसार, क्लीन शेव करने वाले पुरुषों को पसंद करने की वजह उनका साफसुथरा दिखना होता है. कुछ लड़कियां दाढ़ी वालें लड़कों को पसंद भी करती है, लेकिन उनके हिसाब से उन लड़कों में फिटनेस का लेवल सही होना चाहिए. सलोनी कहती है कि उन्हे दाढ़ी वाले लड़के पसंद है, लेकिन अच्छी तरह से शेव किये हुए होने चाहिए, साथ ही दाढ़ी बड़ी हो या छोटी फुल मैन्टेनेन्स होने चाहिए, क्योंकि अच्छे दिखने के बजाय वे गंदे ही दिखते हैं.

कहानी के हिसाब से लुक

अभिनेता पंकज त्रिपाठी की हेयर और बियर्ड स्टाइलिस्ट एईकाश विश्वकर्मा कहते है कि नीट एण्ड शार्प कट आज के फैशन में सबसे अधिक पोलपुलर है, मैंने अभिनेता पंकज त्रिपाठी के लुक को क्रिएट किया है, जो सबको बहुत पसंद है, अभिनेता विक्की कौशल की दाढ़ी की शेप भी लड़कों को अधिक पसंद आता है.

दरअसल फिल्मी हीरो कहानी के हिसाब से अपना लुक क्रिएट करते है, लेकिन आम जीवन में वे इसे पसंद नहीं करते, जैसा कि रणबीर कपूर के साथ कई बार हुआ है, वे रियल लाइफ में अधिकतर क्लीन शेव ही रखते है, लेकिन कई फिल्मों में उनका बियर्ड लुक रहा. माचों और स्ट्रौंग लुक को फिल्मी पर्दे पर दिखाने के लिए कलाकार अधिकतर दाढ़ी रखते है.

लड़कियों को नहीं पसंद

इसके आगे स्टाइलिस्ट कहते है कि चेहरे के अनुसार बियर्ड रखना चाहिए, ताकि देखने में हैन्डसम लगे. इसमें दाढ़ी की ग्रोथ काफी मायने रखती है, कुछ लोगों की दाढ़ी जल्दी बड़ी होती है, तो कुछ की बड़ी होने में समय लगता है, ऐसे में अगर किसी लड़के की दाढ़ी बड़ी हो गई है, तो उन्हें 15 दिन में ट्रिम और महीने में एक बार शेप करवा सकते है, लेकिन ट्रिम ग्रोथ के अनुसार ही करवाना सही होता है. बढ़ी हुई दाढ़ी कभी भी किसी लड़की को पसंद नहीं आती. अगर फिल्म पुष्पा 2 की बात करें, तो उसमें अभिनेता अल्लु अर्जुन को गांव का गरीब लड़का दिखाया गया है, जो कहानी का एक पात्र है, रियल में ऐसी दाढ़ी कभी किसी लड़की को पसंद नहीं होता. मेरे पास ऐसे कई लड़के आते है, जिन्हे फ्रेंच कट, अमेरिकन कट, इटालियन कट, टर्किश कट आदि चाहिए. कई बार वे फोटो भी साथ में लेकर आते है, क्योंकि उनके गर्लफ्रैंड को उनका लुक पसंद नहीं.

चेहरे के अनुसार करें स्टाइल

एईकाश आगे कहते है कि चेहरे के आकार के अनुसार दाढ़ी का स्टाइल ही सबको पसंद आता है, कुछ इस प्रकार है,

  • गोल चेहरे के लिए नुकीली दाढ़ी अच्छी लगती है. यह दाढ़ी गालों को कोणीय बनाती है और चेहरे को लंबा दिखाती है. वैन डाइक दाढ़ी भी गोल चेहरे के लिए अच्छी होती है.
  • लंबे चेहरे पर पूरी दाढ़ी अच्छी लगती है, लेकिन ठुड्डी पर कम लंबी होनी चाहिए. इससे चेहरा भराभरा लगेगा.
  • चौकोर चेहरे के लिए दाढ़ी किनारे से छोटी और ठुड्डी पर लंबी होनी चाहिए.
  • अंडाकार चेहरे पर हर तरह की दाढ़ी सूट करती है. हालांकि, नुकीली दाढ़ी उन्हे सूट नहीं करती.
  • बड़े चेहरे पर छोटी दाढ़ी रखनी चाहिए, जो पूरे चेहरे को कवर करे. साथ में मूंछें मोटी रखनी चाहिए.
  • छोटे चेहरे पर लंबी और बड़ी दाढ़ी नहीं रखनी चाहिए. छोटी दाढ़ी रखनी चाहिए जो पूरे चेहरे को कवर करे.

ये सही है कि कुछ लड़कियों को दाढ़ी वाले लड़के पसंद आते है, लेकिन बड़ी – बड़ी दाढ़ी वाले नहीं. समृद्धि कहती है कि मुझे दाढ़ी वाले लड़के पसंद है, लेकिन बड़ीबड़ी दाढ़ी वाले नहीं, क्योंकि आगर आपने स्टाइल किया है, तो उसे रेगुलरली ट्रिम करे और अपने चेहरे के हिसाब से दाढ़ी रखें. कुछ लड़के दाढ़ी रखकर अपना चेहरा छिपाते है, जो पसंद नहीं.

कैसे करें देखभाल

स्टाइलिस्ट कहते है कि दाढ़ी रखने के साथसाथ उसकी देखभाल करना बहुत आवश्यक होता है, सुझाव निम्न है,

नहाते वक्त दाढ़ी को साधारण पानी से साबुन लगाकर धो लें.

आजकल यंग लड़के को ग्रे बियर्ड है, तो मेकअप का सहारा लेना पड़ता है.

आर्मी, कौर्पोटरेट, क्रूज लाइन, होटल इंडस्ट्री में काम करने वालों को नियमित ट्रिम खुद से करना पड़ता है, क्योंकि रोजरोज सैलून जाना उनके लिए अधिक खर्चे वाला होता है,

धोने के बाद, दाढ़ी पर कंडीशनर लगाएं. इससे दाढ़ी सुलझती है, कंघी करना आसान होता है और दाढ़ी हाइड्रेट रहती है.

दाढ़ी को रगड़ें नहीं, क्योंकि इससे बाल उलझ सकते हैं और खराब हो सकते हैं.

दाढ़ी के नीचे की त्वचा पर दाढ़ी का तेल लगाएं. तेल की कुछ बूंदें ही दाढ़ी को स्वस्थ चमक देती हैं.

दाढ़ी पूरी तरह से साफ़ होने पर बाम लगाना और दाढ़ी को स्टाइल करना आसान होता है.

हाइड्रेटेड रहें और संतुलित आहार लें.

ये सही है कि आज की लड़कियां कोरियन ड्रामा देखना पसंद करती है, इसमें क्लीन शेव किए हुए लड़के रोमांटिक भूमिका निभाते हुए दिखते है, जो उन्हें पसंद आता है, ऐसे में कई लड़कियां ऐसी है, जो लड़कों या बौयफ्रेंड में साफसुथरे लुक को अधिक महत्व देने लगी है और ये आज की पसंदीदा उनकी चाइस भी है.

Ayushman Khurana : ‘फ्यूचर लीडर फार वन एशिया’ अवार्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने आयुष्मान खुराना

Ayushman Khurana : बौलीवुड सुपरस्टार और युवाओं के आइकौन आयुष्मान खुराना ने हाल ही में 22 वां अनफौरगेटेबल गाला में ‘फ्यूचर लीडर फार वन एशिया’ का अवार्ड जीतकर इतिहास रच दिया. यह अवीर्ड उन्हें कैरेक्टर मीडिया और गोल्डन टीवी द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम में दिया गया. खास बात यह है कि इस साल यह पुरस्कार जीतने वाले आयुष्मान पहले भारतीय हैं.

अनफौरगेटेबल गाला एशियाई और प्रशांत द्वीप समूह के सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर और कलात्मक नेताओं को सम्मानित करता है, जिन्होंने कला, मनोरंजन और संस्कृति में योगदान दिया है. हर साल 500 से अधिक API (एशियन और पैसिफिक आइलैंडर) पेशेवर और हाई-प्रोफाइल नाम बेवर्ली हिल्टन में इस विशेष रात में एकत्र होते हैं.

आयुष्मान के साथ, 22वें अनफॉरगेटेबल गाला में अन्य प्रमुख विजेताओं में शामिल थे:

जोआन चेन, प्रसिद्ध चीनी-अमेरिकी अभिनेत्री, जो नौ औस्कर विजेता फिल्मों का हिस्सा रही हैं.
हिरोयुकी सनाडा, जिन्हें “शोगुन” और “जान विक” फ्रैंचाइज़ी के लिए जाना जाता है.

आभार जताते हुए आयुष्मान ने कही दिल छूने वाली बातें:

आयुष्मान ने वीडियो संदेश के माध्यम से धन्यवाद देते हुए कहा: भारत, इसकी कहानियां, इसकी संस्कृति और इसके लोगों का जश्न मनाना मुझे एक रचनात्मक कलाकार के रूप में प्रेरित करता है. मैंने हमेशा चाहा है कि एक ऐसा अभिनेता बनूं, जो भारत का वह पक्ष दिखाए, जिसे दुनिया ने शायद कम देखा है ‘विकी डोनर’, ‘दम लगाके हईशा’, ‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’, ‘आर्टिकल 15’, ‘बधाई हो’, ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’, ‘बाला’ जैसी फिल्में मैंने इस सोच के साथ चुनी कि एक अभिनेता के रूप में मैं सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने में मदद कर सकूं. मुझे खुशी है कि ये कहानियां दुनिया भर में पसंद की गईं.

आयुष्मान ने आगे कहा:

“मैं इस मंच के लिए कैरेक्टर मीडिया और एशिया लैब्स को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिसने दक्षिण एशियाई प्रतिनिधित्व को वैश्विक स्तर पर पहचान दी. कला और सिनेमा अब केवल किसी देश या भाषा तक सीमित नहीं रहे है सिनेमा की ताकत हर जगह महसूस की जा सकती है. यह सीमाओं, संस्कृतियों और भाषाओं से परे है और हमें एक समय में एकजुट करता है. यह अवॉर्ड उन सभी भारतीय और दक्षिण एशियाई कहानीकारों को समर्पित है, जो सपने देखने की हिम्मत करते हैं और धारा के खिलाफ तैरते हैं.”

आयुष्मान का करियर और सामाजिक योगदान:

अपने अनोखे किरदारों और शानदार अभिनय के लिए मशहूर आयुष्मान खुराना ने फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग जगह बनाई है. अभिनय और गायन के अलावा, यूनिसेफ के राष्ट्रीय राजदूत के रूप में बच्चों के लिए उनका योगदान और उनकी ब्रांड एसोसिएशन्स को सामाजिक अभियानों के जरिए प्रस्तुत करना, उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है.

Wedding Fashion Tips : दूल्हे के आउटफिट को बनाना चाहते हैं खास, तो बैस्ट हैं ये औप्शंस

Wedding Fashion Tips : किसी भी शादी का मुख्य आकर्षण दूल्हा और दुलहन होते हैं. दोनों ही इस दिन सब से अलग, खास और सुंदर दिखना चाहते हैं. पहले की अपेक्षा आजकल शादी में मेहंदी, हलदी, वैडिंग और रिसैप्शन में सब की अलग और खास ड्रैस होती है. दुलहन के लिए जहां साड़ी, लहंगा, गाऊन जैसे परिधान का औप्शन होता है, वहीं दूल्हे के लिए भी औप्शंस की कमी नहीं हैं.

यदि आप भी दूल्हा बनने जा रहे हैं, तो आज हम आप को शादी की विविध रस्मों के दौरान पहनी जाने वाले औप्शंस बता रहे हैं. आप अपनी सुविधानुसार किसी भी ड्रैस का चुनाव कर सकते हैं :

ट्रैडिशनल इंडियन

पारंपरिक परिधान अपनी संस्कृति के अनुसार होते हैं. उदाहरण के लिए दक्षिण भारतीय राज्यों में दूल्हा सफेद या क्रीम रंग की सुनहरे बौर्डर वाली धोती और कुरता पहनते हैं. कुछ राज्यों में थ्रीपीस सूट जिसे पेंट, जैकेट और कोट के साथ पहना जाता है. ये परिधान सदाबहार होते हैं और काफी कुछ दूल्हे की संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहते हैं.

शेरवानी

शेरवानी एक तरह से शाही लंबा कोट होता है जो घुटनों तक होता है. इसे आमतौर पर चूड़ीदार पायजामे के साथ पहना जाता है. साटन या ब्रोकेड फैब्रिक वाली शेरवानी हैवी वर्क वाली होती है. इस पर जरी वर्क या स्टोन वर्क किया जाता है जो इसे भव्य लुक देता है. पारंपरिक शादी समरोह के लिए यह एक आदर्श परिधान है. शेरवानी आमतौर पर अनारकली पैटर्न पर होती है जो दूल्हे के लुक को राजसी और सब से अलग बनाती है.

जोधपुरी बंधगला

बंधगला सूट, जिस का मतलब है कि इस सूट में गला बंद होता है। इस की उत्पत्ति जोधपुर में होने के कारण इसे जोधपुरी बंधगला कहा जाता है. इसे रेशमी, सिल्क, ब्रोकेड अथवा अच्छी क्वालिटी के कौटन कपड़े के साथ बनाया जाता है. अकसर इस के गले और आस्तीन पर हैवी वर्क वाली कढ़ाई की जाती है. यह उन दूल्हों के लिए आदर्श है जो बोल्ड और शाही लुक चाहते हैं क्योंकि यह दूल्हे की पर्सनैलिटी को फौर्मल और ट्रैडिशनल अपील के साथसाथ बोल्ड स्टेटमैंट देता है. आजकल दूल्हे के परिवार और दोस्तों को जोधपुरी बंधगला पसंद आता है.

ट्रैडिशनल कुरता

मेहंदी और संगीत जैसे प्री वैडिंग फंक्शन के लिए पायजामा या धोती के साथ इसे पहना जाता है। यह काफी आरामदायक और स्टाइलिश होता है. आजकल इसे फैस्टिव टच देने के लिए चिकन की कढ़ाई पर सीक्वैंस वर्क के साथ बनाया जाता है. इस के साथ सिल्क या रेशमी कुरता पहनना उचित रहता है पर एकदम कैजुअल लुक के लिए आप इसे किसी भी जींस के साथ भी पेयर कर सकते हैं.

इंडोवैस्टर्न फ्यूजन

ये परिधान भारतीय और पश्चिमी संस्कृति का सम्मिश्रण होते हैं. ट्रैडिशनल ड्रैसेज को वैस्टर्न कपड़ों के साथ मिला कर ड्रैसेज को एक खास और अलग लुक दिया जाता है. मसलन, पारंपरिक कुरते को जींस या ट्राउजर्स के साथ पहन कर ट्रैडिशनल अजरख, बांधनी या पटोला स्टोल के साथ पेयर करना. इन्हें आप हलदी, मेहंदी या फेरों के समय के लिए चुन सकते हैं.

इंडियन फैब्रिक और वैस्टर्न टेलरिंग का मिक्स उस दूल्हे के लिए आदर्श है, जो अपनी जड़ों का सम्मान करते हुए भीड़ में एकदम अलग दिखना चाहता है.

टक्सीडो सूट

यह एक तरह का डिनर सूट होता है, जिसे टक्स भी कहा जाता है. टक्सीडो अमेरिका में जन्मा शब्द है। इस सूट की जैकेट और ट्राउजर दोनों की ही बनावट आम सूट से बेहद अलग होती है. आम सूट को जहां गरम फैब्रिक से बनाया जाता है, वहीं टक्सीडो जैकेट में कौलर, पौकेट, बटनों और ट्राउजर पर सैटिन की डिटेलिंग की जाती है जो इसे बेहद खास लुक देती है.

यह आजकल शादी के रिसैप्शन के लिए बहुत चालन में है. यह पारंपरिक शादी में आधुनिक ट्विस्ट लाता है। यह उन दूल्हों के लिए है जो क्लासिक और स्टेटमैंट लुक चाहते हैं. शादी वाले दिन के लिए आप आप ब्लैक या कलर्ड टक्सीडो चुन सकते हैं

रखें इन बातों का भी ध्यान :

● आप कोई भी ड्रैस का चयन करें, तो उस के फैब्रिक पर अवश्य ध्यान दें. सिल्क, ब्रोकेड और वैलवेट सर्दियों के लिए एकदम परफैक्ट फैब्रिक हैं क्योंकि यह गरम और मोटे होते हैं.

● गरमियों की शादी के लिए आप लिनेन का चयन करें। यह काफी हलका, ब्रीदेबल और आरामदायक होने के साथसाथ बहुत स्टाइलिश भी होते हैं.

● अपने आउटफिट को खरीदते समय दुलहन की ड्रैस और रंग को अवश्य ध्यान रखें ताकि आप का आउटफिट दुलहन के आउटफिट से कोऔर्डिनेटर कर सके.

● इवेंट को ध्यान में रख कर ही आउटफिट का चयन करें। मसलन मुख्य शादी के लिए शेरवानी या जोधपुरी बंधगला, प्रीवेडिंग के लिए कुरता या इंडोवेस्टर्न और रिसैप्शन के लिए टक्सीडो का चयन करें.

● आउटफिट कोई भी हो पर उस के साथ पहनी जाने वाली ऐक्सेसरीज उसे बहुत खास और स्टाइलिश बना देती हैं. पगड़ी या साफा जैसे हेडगियर आप के लुक को खास बनाते हैं। इस के साथ आप हार या ब्रोच चुन सकते हैं. मोजड़ी या जूती ट्रैडिशनल के साथ और सूट के साथ फौर्मल शूज ही पहनें.

● आप किसी भी आउटफिट का चयन करें, अपने आराम को सब से पहले प्राथमिकता दें ताकि लंबे समय तक पहनने के बाद भी आप को थकान का अनुभव न हो.

● आजकल रेंट पर भी बहुत स्टाइलिश और फैशनेबल आउटफिट बाजार में उपलब्ध हैं। खरीदने के बजाय आप इन्हें भी ट्राई कर सकते हैं। ये कम बजट में आप को स्टाइलिश लुक देते हैं.

● किसी भी आउटफिट को फाइनल करने से पहले उसे पहन कर ट्राई अवश्य करें ताकि बाद में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े.

Relationship Tips For Couples : गर्लफ्रैंड को मैंने नाराज कर दिया है, उसे मनाने के लिए क्या करूं ?

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है, तो ये लेख अंत तक जरूर पढ़ें…

सवाल

Relationship Tips For Couples : मैं एक युवती से पिछले 2 वर्ष से प्यार करता हूं, लेकिन एक महीना पहले हम एक पार्क में बैठे आपस में बातें कर रहे थे. शाम गहरा रही थी. थोड़ा अंधेरा भी था तो एकांत पा कर मैं ने उसे बांहों में ले लिया और उस के कपड़ों के अंदर हाथ फेरने लगा. शुरू में तो उस ने मना नहीं किया पर जब अंतरंग अंगों तक मेरा हाथ पहुंचा तो हटाने लगी और उठ कर चल दी. फिर उसी रात फोन पर कभी न मिलने को कह दिया. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं? एक महीने से हम मिले भी नहीं, उसे फोन करूं तो काट देती है व मिलने भी नहीं आती?

जवाब

दरअसल, प्रेम की बात जब सैक्स तक पहुंचती है तो युवती खुद को असुरक्षित महसूस करती है. युवती प्यार में सब से अधिक प्रेमी द्वारा उस की सुरक्षा, प्यारभरी बातें और बांहों का आगोश चाहती है, लेकिन आप के सीमा लांघते ही उसे लगने लगता है कि वह असुरक्षित है. आज समाज में ऐसी कई घटनाएं सामने हैं जिन में प्रेमीप्रेमिका में सैक्स के बाद दूरी बढ़ी, ब्रेकअप हुआ या फिर एकदूसरे से मनमुटाव हुआ.

आप के मामले में उस से जब तक आप प्रेममयी बातें करते रहे तब तक तो सब ठीक रहा, लेकिन जब आप उस के अंतरंग अंगों तक पहुंचे तो उस ने आप से पीछा छुड़ा लिया. हाथ रोक दिया. दरअसल, सैक्स की कामना तो उस की भी रही होगी, लेकिन वह इस धारा में नहीं बही और आप को भी बचाया. इसी कारण वह अब आप से मिलती नहीं है कि कहीं फिर कभी ऐसा न हो जाए.

आप उस से किसी मित्र के जरिए मिलें और आगे से ऐसा नहीं होगा, यह बात उसे समझाएं. सुरक्षित सार्वजनिक स्थान पर मिलें, एकांत में नहीं. जब उसे लगेगा कि वह सुरक्षित है तो जरूर सबकुछ पहले जैसा हो जाएगा.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या इस नम्बर 8588843415 पर  भेजें. 

या हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- sampadak@delhipress.biz सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

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