Best Hindi Story: रात के 12 बजे थे लेकिन समायरा का दिन हुआ था. उस की मम्मा आखिरकार सो गई थीं. ‘उफ… मम्मा भी न कितना इरिटेट करती हैं. क्या कर रही हो… किस से चैट कर रही हो? वह बंदा है या बंदी है? उस की बैकग्राउंड क्या है? वह पढ़ाई में कैसा है/कैसी है? उस का अपने कैरियर पर फोकस है या नहीं? अगर उस का कैरियर पर ध्यान नहीं है तो उस से बात करने की कोई जरूरत नहीं.
वह तुम्हारे लिए बैड इन्फ्लुएंस साबित होगा/होगी. मम्मा और उन की एंडलैस हिदायतें. जब देखो तब उपदेश ही देती रहती हैं जैसे मैं कोई छोटी बच्ची हूं. चलो, मम्मा अब गहरी नींद में सो गईं. खर्राटे ले रही हैं. अब मैं डेटिंग ऐप सेफली खोल सकती हूं. कालेज के टर्म टैस्ट्स आज ही तो खत्म हुए हैं. उफ यह पढ़ाई. तोबा है. इतने दिन हो गए, किसी के साथ डेटिंग पर नहीं गई. पिछला मैच जो मैं ने ढूंढ़ा था वह तो अचानक मेरी जिंदगी से गायब हो गया. उसे याद कर आज तक सीने में खंजर चलने लगते हैं.
समायरा डेटिंग ऐप में स्क्रौल करती जा रही थी. ‘उफ… एक भी ढंग का प्रोफाइल नहीं है. ऐसा लग रहा है इस में दुनिया के सारे के सारे बौज्म जुट गए हैं. ‘तभी एक फोटो ने उस का ध्यान ड्रा किया, ‘ओशेन औफ इमोशंस’ यानी भावनाओं का समंदर. हां, इस में कुछ दम है. खासा अट्रैक्टिव लग रहा है बंदा. इस की बड़ीबड़ी आंखें बिलकुल डिफरैंट हैं, कुछ तिलिस्मी सी जैसे अपने भीतर भावनाओं का अथाह सागर छिपाए हुई हों. जरूर इस बंदे का इमोशनल कोशैंट हाई होगा मेरी तरह… आई बेट… पहली ही चैट में मैं इस से पूछने वाली हूं,’ सोचते हुए समायरा उस के प्रोफाइल का बायो पढ़ने लगी. खासी इंटरैस्टिंग बायो थी. ‘…मैं बीसीए के आखिरी वर्ष में हूं…’ ओह तो ये जनाब मेरी तरह बीसीए के अंतिम साल में हैं.
चलो अपने बीच कोई तो कौमन ग्राउंड हुई. ‘…मैं बेहद गहराई से फील करता हूं यानी मैं जो भी कनैक्शन बनाता हूं, वह बेहद मीनिंफुल और संजीदा होता है. मुझे लोगों के दिल का वास्तविक हाल का पता लगाने में महारथ हासिल है. मुझे हलकीफुलकी चिटचैट से ऊपर उठ कर गहरी, ईमानदार गुफ्तगू करना बेहद पसंद है. मुझे तलाश है एक ऐसे पार्टनर की जो इमोशनल गहराई पसंद करती हो. ‘…मुझे हसरत है ऐसी किसी बंदी की जिस के साथ मैं गंभीर बातों के साथसाथ स्पोंटेनिय सगूफी बातचीत का लुत्फ ले सकूं.’ ‘…मैं कोई जिंदगी को कैजुअली लेने वाला इंसान नहीं.
अगर मैं आप से पूछूं कि आप का दिन कैसे बीता और आप मुझे वह बताती हो तो मैं आप के बताई गई डिटेल्स अगले ही पल भूल नहीं जाऊंगा बल्कि उसे याद रखूंगा. मुझ में इंसानों को गहराई से पढ़ने और समझने का माद्दा है.’ ‘…मेरे दोस्त कहते हैं, मैं बहुत अच्छी सलाह देता हूं. इसलिए आप मुझ पर भरोसा कर सकती हो.’ ‘…मेरी एक ऐसे साथी की तमन्ना है जो जिंदगी की रेस में मेरे साथ कदम से कदम मिला कर दौड़ सके, लेट नाइट टौक्स कर सके, मूवी मैराथन में साथसाथ हिस्सा ले सके.’ ‘…अगर आप गंभीर फीलिंग्स और जोरदार ठहाकों में मेरा साथ दे सकती हैं, टीवी सीरियल्स के इमोशनल सीन्स में मेरे साथ बालटी भरभर आंसू बहा सकती हैं तो अभी राइट स्वाइप करें और जिंदगी की उड़ान में मेरी कोपायलट बनें.’ बायो के एंड तक आतेआते मैं ओशेन औफ इमोशंस से खासी प्रभावित हो गई थी और मैं ने फौरन राइट स्वाइप कर दिया.
मेरी नजरें फोन की स्क्रीन पर जमी हुई थीं और तभी उस ने भी राइट स्वाइप किया और हम कनैक्ट हो गए. मैं बेहद ऐक्साइटेड फील कर रही थी. चलो, अब मेरी सूनी जिंदगी में कुछ तो दोस्ती और प्यार के हसीन रंग भरेंगे. फोन के कीबोर्ड पर मेरी उंगलियां तेजी से थिरकने लगीं और उस के साथ मेरी टैक्स्टिंग शुरू हो गई. उस रात हम ने ढेर सारी चैटिंग की. इमोजीस ऐक्सचेंज कीं, हम खूब हंसे. उस के साथ यों टैक्स्टिंग कर बहुत मजा आया. रात के 3 बजने को आए थे और उस ने यह कह कर मुझ से विदा ली कि अगर हम रातभर बात करते रहे तो सुबह क्लास में सोएंगे और मैं बड़ी अनिच्छा से उस से डिस्कनैक्ट हुई.
उस रात के बाद से हम कालेज के बाद के बचेखुचे टाइम में मैसेजिंग करने लगे थे. यहां तक कि कभीकभी तो क्लास में प्रोफैसर के लैक्चर देते वक्त भी आखिरी बैंच पर बैठ कर मैं उस के साथ चैट करने लगती. उस समंदर के मेरी जिंदगी में आने के बाद जैसे मेरी जिंदगी में खुशगवार सुनामी आ गई थी. वक्त के साथ अपनी दोस्ती गाड़ी होने पर मैं उसे समंदर बुलाने लगी थी. अलबत्ता उस का असली नाम सागर था. हम अपनीअपनी जिंदगी और सपनों के बारे में बात करते. एकदूसरे के साथ मजेदार मीम्स ऐक्सचेंज करते. समय के साथ हमारी फ्रैंडशिप परवान चढ़ती गई. हमारा ग्रैजुएशन पूरा हुआ. अब मेरी आगे पढ़ने की इच्छा न थी. समंदर को भी अब आगे नहीं पढ़ना था.
हम दोनों ने नौकरी के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया. संयोग से कोडर के तौर पर मोटी तनख्वाह पर मेरी नौकरी समंदर के शहर में लगी लेकिन उस को अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली थी. मैं एक बहुत काबिल कोडर थी लेकिन समंदर एक बेहद कमजोर कोडर था, जिस की वजह से उसे कोडर की नौकरी नहीं मिल रही थी. वह नौकरी के लिए डैस्पेरेट था. बिना नौकरी के उस का सर्वाइवल खतरे में था. उन्हीं दिनों एक फर्म में बहुत मामूली सैलरी पर एक जूनियर असिस्टैंट की पोस्ट निकली. मरता क्या न करता, वह उस पोस्ट पर काम करने लगा. मैं ने उस के शहर में नौकरी जौइन कर ली. अब समस्या थी, रहने की जगह का इंतजाम करने की. मैं ने एक रूम का स्टूडियो फ्लैट किराए पर ले लिया. समंदर के साथ मेरी रिलेशनशिप एक अलग मुकाम पर पहुंच गई थी. पिछले कुछ समय से दूरदूर रहते हुए भी हम एकदूसरे के दिल के बेहद करीब आ गए थे. एक दिन समंदर सुबहसुबह मेरे फ्लैट पर आया.
पूरे दिन गुफ्तगू करतेकराते, डिनर करतेकराते रात के 11 बज गए. उस दिन सुबह 10 बजे से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हड़ताल थी सो समंदर को मेरे फ्लैट में सोना पड़ा. वह मेरे ही डबलबैड पर सो गया. रात के गहराने के साथ हम दोनों के भी जवां दिलों में अरमान मचलने लगे थे और उस रात कमजोर क्षणों में हम दोनों ने अपनी रिलेशनशिप पर जिस्मानी इंटीमेसी का ठप्पा लगा दिया. हम दोनों बेहद खुश थे. उस दिन के बाद से हम दोनों के दिनरात एक अलग ही नशीली खुमारी में बीतने लगे. उस के बाद जब भी समंदर अपने बौयज पीजी में जाने की बात करता, मैं उसे रोक लेती.
मुझे उस की एक पल की दूरी भी बरदाश्त न थी. उस का भी यही हाल था और आखिरकार हम ने लिवइन करने का फैसला ले लिया. वह मेरे ही फ्लैट में शिफ्ट हो गया. मगर इंसानी वजूद को कायम रखने के लिए बस प्यार और जिस्मानी नजदीकी ही जरूरी नहीं. उस के लिए रुपए भी चाहिए होते हैं. पिछले 2 बरसों में मैं कई नौकरियां बदल चुकी थी, कोडिंग में अपनी महारथ के चलते हर बार सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी के साथ लेकिन कोडिंग में कमजोर होने की वजह से समंदर को कोडर के तौर पर एक भी अच्छी जौब नहीं मिल पा रही थी.
वह अभी तक उसी फर्म में जूनियर असिस्टैंट के तौर पर लगा हुआ था, जिस की वजह से वह मानसिक रूप से सतत परेशान रहता. मुझे हमेशा फील होता, अब वह मुझ से ईष्या करने लगा था. मानसिक रूप से डिस्टर्ब्ड रहने लगा था. धीरेधीरे उस की मानसिक परेशानी डिप्रैशन का रूप लेने लगी थी. वह निरंतर खोयाखोया अपनेआप में गुम रहता. किसी भी चीज में रुचि न लेता. आए दिन मुझ पर झल्ला जाता. मुझे जलीकटी सुनाता. एक रात मेरा उस से भयंकर झगड़ा हो गया.
मैं उस शाम बहुत थकी हुई थी. उस दिन औफिस में मेरी एक कलीग ऐब्सैंट हो गई थी, जिस की वजह से मुझ पर दोहरा वर्कलोड आ पड़ा था. किसी तरह काम खत्म कर के मैं रात के 9 बजे घर पहुंची. 10 मिनट सांस ले कर मैं ने समंदर से कहा, ’’ आज तो मेरी रोटीसब्जी बनाने की हिम्मत नहीं है. खिचड़ी चढ़ा देती हूं या फिर जोमैटो से कुछ और्डर कर दो.’’ मेरे इतना कहते ही समंदर ने तांडव मचा दिया. ऐसीऐसी बातें बोलीं कि मैं बेहद हर्ट हो गई. ‘‘यह कोई टाइम है घर आने का? तुम यों लेट आ कर यह जताती हो कि पूरा औफिस तुम्हारे कंधों पर चल रहा है. चली गई होगी किसी फ्रैंड के यहां. खुद तो बढि़या खाना खा कर आई होगी, मुझे खिचड़ी खिलाओगी. वास्तव में परले दर्जे की सैल्फिश इंसान हो तुम.’’ समंदर के ये बेबुनियाद इलजाम सुन कर मैं अदम्य गुस्से से भर कर चिल्ला पड़ी, ‘‘हा, हां, औफिस तो मेरे बाप का है न जो मुझे बिना काम के सैलरी थमा देता है.
अरे, खुद को कोई ढंग की नौकरी मिली होती तब जानते न कोडिंग का काम कितना टैक्सिंग होता है. इतनी मोटी तनख्वाह यों ही मुफ्त में नहीं थमाते देते ये कंपनी वाले. पूरा खून चूसते हैं महीना भर, फिर जा कर सैलरी देते हैं.’’ इस पर समंदर भी क्रोध से उबल पड़ा, ‘‘बड़ी ही खुदगर्ज बंदी हो सच में जो कभी भी यह जताना नहीं चूकती कि तुम मुझ से ज्यादा कमा रही हो. आखिर घमंड भी तो इसी बात का है तुम्हें. तुम्हारे घर में पड़ा हूं, तुम पर डिपैंडैंट हूं तो ताने मारे बिना बाज थोड़े ही न आओगी.’’ उस की की ये जहर बुझ बातें सुन मेरा फ्यूज उड़ गया था और मैं भी क्रोधावेश में सुबकते हुए अपना आपा खो कर चीख उठी, ‘‘पता नहीं किस मनहूस घड़ी में मैं ने तुम से रिश्ता जोड़ा. नहीं रहना मुझे तुम्हारे साथ अब.’’ मैं ने रोते कलपते खिचड़ी चढ़ाई. फिर पेट भर खा कर मैं अपने बेड पर पड़ गई. घोर गुस्से में मैं ने उसे एक बार भी खाने के लिए नहीं पूछा. सुबह से लैपटौप पर काम करकर के शिद्दत की थकान तो हो ही रही थी, सो मुझे बिस्तर पर पड़ते ही नींद आ गई. सुबह उठी तो मेरे हाथों के तोते उड़ गए थे. समंदर घर में नहीं था. वह मय अपने सामान के घर से जा चुका था. मैं ने झट से उसे फोन लगाया, लेकिन वह मुझे ब्लौक कर चुका था. उस ने मुझे फेसबुक, मैसेंजर और इंस्टाग्राम पर भी ब्लौक कर दिया था.
रात के गुस्से का ज्वार उतर चुका था. पीछे छोड़ गया था गहन पछतावे की सूखी रेत. समंदर को खो कर मैं हाथ मलती रह गई थी. अकेले फ्लैट में मेरा मन न लगता. हर वक्त उस के बोल कानों में गूंजते रहते. उस की सूरत मेरी आंखों के सामने रहती. मुझे अभी तक एहसास न हुआ था कि मैं समंदर की आदी हो गई थी. मुझे उस के साथ रहने की आदत पड़ गई थी. पिछले 2 बरसों में वह मेरे वजूद का हिस्सा बन गया था. लाख चाहती, उसे भुला दूं लेकिन उसे भुलाना मेरे बस में न था. मैं ने उसे ढूंढ़ने के लिए हर उस शख्स से कौंटैक्ट किया जो उसे जानता था लेकिन वह इस दुनिया के हुजूम में न जाने कहां गुम हो गया था कि लाख ढूंढ़ने पर भी उस का कोई सुराग न मिला. मेरा अकेलापन मुझे खाए जा रहा था.
एक पल भी ऐसा न बीतता जब मुझे वह याद न आता हो. समंदर को उस का फ्लैट छोड़े पूरा बरस बीत गया लेकिन एक दिन भी ऐसा नहीं बीता जब समायरा ने उस की याद में आंसू न बहाए हों. उसे सुकून मिलता तो बस अपने काम में. औफिस में वह अपने काम में डूब जाती. पिछले 1 बरस में वह एक फर्म में बहुत अच्छी तरह से ैट हो गई है. सालभर में 25 परसैंट हाइक के साथ उस की सैलरी बहुत ही अच्छी हो गई है. वक्त अपनी ही चाल से बीतता गया. समंदर के जाने के बाद का दूसरा साल भी ठहरतेठिठकते किसी तरह से लंगड़ाती चाल से बीता.
पिछले बरस वह डेटिंग ऐप के माध्यम से कुछ लड़कों से मिली लेकिन कोई भी लड़का उस की नजरों में नहीं ठहरा और वह किसी से भी किसी रिश्ते में नहीं जुड़ पाई. समंदर को गए 2 बरस होने के बावजूद समायरा के अंतस में उस की यादों की लौ हमेशा जलती रहती. समंदर अब उस के दिल में एक मीठी कसक के रूम में हर पल, हर छिन मौजूद रहता. उस दिन संडे था.
समायरा हलकीहलकी गुलाबी ठंड में क्विल्ट में दुबकी हुई अन्यमनस्क सी फोन पर मैसेंजर पर जा कर स्क्रौल कर रही थी कि एक बंदे का प्रोफाइल देख उसे वह कुछ जानापहचाना लगा. उस ने गौर से उस का फोटो जूम किया. वह हड्डियों का ढांचा लग रहा था लेकिन उस के लंबोतरे और तनिक झर्रीदार चेहरे पर गिट्टों सी चमकती बड़ीबड़ी लाली लिए, किसी नशे में डूबी हुई सी आंखें, धंसे हुए गाल और जटा से बाल देख कर उसे वितृष्णा नहीं हुई वरन वह मानो सम्मोहित सी उसे एकटक देखती रही.
धीमेधीमे उस उजाड़ बुझेबुझे असमय बुढ़ा गए चेहरे पर एक और मनभावन चेहरा आकार लेने लगा जिस में कि कभी उस की जान बसती थी. उस के मानसपटल में बिजली सी कौंधी और उस के जेहन में उस की पहचान की घंटियां बजने लगीं. वह मन ही मन में बुदबुदाई कि अरे, यह तो समंदर है, मेरा समंदर. वह बैठीबैठी मानो सकते में आ गई और फिर अस्फुट स्वरों में बोली, ‘‘हां, यह वही है. वही गहरी बड़ीबड़ी तिलिस्मी आंखें, हां यह मेरा समंदर ही है लेकिन, लेकिन यह इस ने क्या हाल बना रखा है? ये बुझबुझ लाल आंखें जैसे नशे में डूबी हुई हों.’’ उस ने आननफानन में अपने और समंदर के कुछ कौमन फ्रैंड्स को फोन लगाया लेकिन समंदर का कुछ पता न लग पाया.
सुबह से दोपहर होने आई थी, उस ने अपने और समंदर के हर दोस्त को फोन कर के देख लिया था लेकिन उस का पता नहीं लगना था सो नहीं लगा. पूरा सप्ताह वह सुबह अपने औफिस जाने से पहले और शाम को वहां से आने के बाद घर में हर संभव नंबर पर उस का पता लगाने के लिए फोन करती रही लेकिन सब बेकार रहा. उस दिन फिर से संडे था. वह बिस्तर में लेटी हुई समंदर के बारे में, उस के साथ बीते दिनों के बारे में सोच रही थी कि तभी उस का फोन बजा. कोई अनजान नंबर था.
उस ने झपट कर फोन उठाया, ‘‘हैलो, किस से बात करनी है?’’ ‘‘जी, मुझे समायरा से बात करनी है.’’ ‘‘जी, कहिए, मैं समायरा ही बोल रही हूं?’’ ‘‘मैं डाक्टर नमन बोल रहा हूं. मुझे अपने एक फ्रैंड से पता चला, आप सागर का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं.’’ समायरा को लगा मानो उस की धड़कन तेज हो गई हो. बोली, ‘‘जी, जी, आप ने बिलकुल सही सुना, आप जानते हैं, वह कहां है इस वक्त?’’ ‘‘जी, जी, बिलकुल जानता हूं. वी इस वक्त मेरे सामने ही है. मैं दुर्गापुरा, जयपुर में लोकेटेड सरकारी डिएडिक्शन सैंटर से बोल रहा हूं. कल देर रात उन्हें कोई भला मानुष हमारे सैंटर में छोड़ गया था.
उन्होंने ही हमें आप का नंबर दिया. क्या आप उन की रिश्तेदार हैं?’’ ‘‘जी, जी, वही सम?िए. आप अपना पूरा पता और करंट लोकेशन भेजिए. मैं वहां जल्दी से जल्दी पहुंचती हूं,’’ समायरा को लगा, उस की नसों में लहू रफ्तार से बहने लगा था. वह सैंटर उस के घर के बिलकुल पास था.
आननफानन में तैयार हो कर समायरा 10 मिनट में डिएडिक्शन सैंटर पहुंच गई. वहां के सीनियर डाक्टर नमन उस से बेहद गरमजोशी से मिले. वे उसे अस्पताल के लाउंज में ले गए जहां एक आराम कुरसी पर समंदर बेहद बेचैनी की हालत में कांपते हुए अधलेटा बैठा था. पसीनापसीना हो रहा था और फटीफटी आंखों से शून्य में ताकते हुए झर्रीदार स्किन के साथ अपनी उम्र से बहुत ज्यादा लग रहा था. उस की आंखें बंद थीं और वह कराहते हुए बारबार अपने पैर पटकते हुए अपना पेट पकड़ रहा था मानो बहुत दर्द में हो. उसे यों इस हालत में देख समायरा का कलेजा छलनी हो आया था.
वह समंदर के पास गई और उस ने उस के हाथ को सहलाया. तभी उस ने अपनी आंखें खोलीं और फटीफटी आंखों से उस की ओर देखते उए उस का हाथ झटक दिया और फिर अगले ही क्षण उस ने अपनी आंखें मूंद लीं लेकिन उस की आंखों में पहचान का कोई चिह्न नहीं आया. तभी डाक्टर नमन ने उस से कहा, ‘‘परेशान न हों, इतने दिनों से रैग्युलरली ड्रग्स लेने के बाद अब जब इसे ड्रग नहीं मिल रही तो इस की बौडी और ब्रेन बहुत शिद्दत से रिएक्ट कर रहे हैं. ये इस के विदड्राल सिमटम्स हैं. जैसेजैसे हम इस का इलाज करेंगे, ये कम होने लगेंगे. मैं इस सागर को पर्सनली जानता हूं.
जब इसे ड्रग्स एडिक्शन की शुरुआत ही हुई थी, यह खुद हमारे सैंटर नियमित रूप से आया करता था अपने एक फ्रैंड के साथ अपनी ड्रग्स की लत से मुक्ति पाने के लिए. तभी फिर एक बहुत दौलतमंद परिवार के ड्रग एडिक्ट बेटे के साथ दोस्ती होने पर यह उस के खर्च पर ड्रग्स लेने लगा और हार्ड कोर ड्रग एडिक्ट बन गया. जो इसे यहां सैंटर पर छोड़ गया, उस ने ही मुझे यह सब बताया. अब पिछले पूरे साल यह हमारे सैंटर पर नहीं आया है और अब आप देख ही रही हैं, यह बहुत बदहाली में है.’’ ‘‘डाक्टर, अगर मैं इन का ट्रीटमैंट रैग्युलरली कराऊं तो इस के नौर्मल होने के कितने परसैंट चांसेज हैं?’’ ‘‘जी समायराजी, हंड्रेड परसैंट होंगे.
अब हमारे पास सक्सैसफुल ट्रीटमैंट के हंड्रेड परसैंट औप्शंस हैं.’’ ‘‘जी बहुत अच्छा, मेरी बस एक ही रिक्वैस्ट है आप से, आप इस का बढि़या से बढि़या ट्रीटमैंट करें और हां, पैसों की बिलकुल फिक्र मत करिएगा. इस का महंगा से महंगा इलाज कराएं. मुझे बस इसे एक नौर्मल लाइफ जीते हुए देखना है.’’ ‘‘समायराजी, हमारा सैंटर सरकारी संस्था है तो आप को इन के डिएडिक्शन के लिए कुछ खर्चा नहीं करना होगा.
हमारे डिएडिक्शन प्रोग्राम में मरीज को मैडिकल, साइकोलौजिकल और सोशल सपोर्ट दी जाती है जिस से एडिक्ट इस व्यसन से नजात पा कर एक सामान्य जीवन जीने लगता है.’’ ‘‘जी, आप इस का ट्रीटमैंट जल्दी से जल्दी शुरू कर दीजिए प्लीज.’’ ‘‘जी, आप इस का रजिस्ट्रेशन करा कर आइए. उस के बाद मैं सैंटर में इस को एडमिट करने की औपचारिकता शुरू कराता हूं.’’ ‘‘ओके डाक्टर नमन, मैं अभी रजिस्ट्रेशन करा कर आती हूं.’’ समायरा रजिस्ट्रेशन करा कर आ गई और फिर डाक्टर्स और साइकिएट्रिस्ट की टीम ने उस का मैडिकल और साइकिएट्रिक आकलन किया.
इस के बाद डाक्टर नमन ने कहा, ‘‘हम सागर को अभी 14 दिनों के लिए एडमिट कर रहे हैं. इस के दौरान हम दवाइयों से उन के विदड्राल सिंटम्स को मैनेज करेंगे. इस दौरान उन की साइकोलौजिकल काउंसलिंग और थेरैपी चलेगी और हमें इस में आप का भी सहयोग चाहिए होगा. ‘‘आप को इस इलाज के दौरान बहुत सब्र से इन्हें सपोर्ट करना होगा. हम अपने सैंटर पर फैमिली काउंसलिंग सैशन रखते हैं, जिन्हें अटेंड कर आप को इन्हें कैसे सपोर्ट करना है, आप को गाइडैंस मिलेगी.’’ ‘‘जी, जी, डाक्टर, मैं जरूर अटैंड करूंगी. आप जैसा कहेंगे, मैं वैसा ही करूंगी.’’ ‘‘बस, बस, हमें आप जैसे सपोर्टिव रिश्तेदार मिल जाएं तो फिर क्या कहने? आप रोजाना यहां आती रहें और पेशैंट को इस लत को छोड़ने के लिए मोटिवेट करती रहें.’’ उस दिन के बाद से समायरा रोजाना औफिस जाने से पहले और औफिस से लौट कर आने के बाद डिएडिक्शन सैंटर पर आती रही.
धीरेधीरे डाक्टर नमन और उन की टीम के ट्रीटमैंट और समायरा की मोटिवेशनल सपोर्ट के दम पर सागर सामान्य होता चला गया. उसे आज वहां से छुट्टी मिल गई है. वक्त के साथ सागर एकदम नौर्मल हो गया था. सागर के सामान्य होने से समायरा की बेरंग जिंदगी में खुशहाली के इंद्रधनुषी रंग सज गए थे. अब उन दोनों के सामने समस्या थी उस की नौकरी की. समायरा ने अपने खर्चे पर सागर को घर के पास के कंप्यूटर सैंटर में कोडिंग के लिए जरूरी लैंग्युएजेस सीखने के लिए एडमिट करा दिया. वह खुद भी उसे प्रैक्टिकल लैवल पर लगभग नियमित रूप से कोडिंग की स्किल सिखाने उस के साथ रोजाना कंप्यूटर पर बैठती. सागर बेहद लगन से उस से कोडिंग सीखने लगा था.
जिंदगी ने डिएडिक्शन के बाद जो उसे दूसरा मौका दिया था, वह उसे व्यर्थ में जाया नहीं करना चाहता. समायरा से कोडिंग सीखते हुए उसे पूरा साल होने को आया. वह खासी अच्छी कोडिंग करने लगा है. अब सागर जगहजगह कोडर की पोस्ट के लिए अप्लाई करने लगा. आज का दिन सागर और समायरा के लिए बहुत खास है. आज अभीअभी सागर के ईमेल आईडी पर एक मेल आया है. सागर को एक प्रतिष्ठित फर्म में कोडर के तौर पर बढि़या पैकेज पर नियुक्ति मिल गई है. सागर बेइंतहा खुशी से समायरा को गोद में ले कर बुदबुदाते हुए फिरकी की तरह घूम उठा, ‘‘समायरा, तुम मेरी जिंदगी में न आती तो आज मैं इस मुकाम पर न पहुंचा होता.
मैं तुम्हारा कर्जदार हूं.’’ यह सुन कर समायरा ने उस के होंठों पर अपना हाथ रखते हुए कहा, ‘‘नहीं, कर्जदार तो मैं हूं तुम्हारी, जो तुम मेरी वीरान जिंदगी में दोबारा आए. वादा करो, अब कभी मुझे छोड़ कर नहीं जाओगे?’’ सागर ने उस के थरथराते अधरों पर अपने अधर रख उस से कहा, ‘‘नहीं, अब कभी तुम से दूर नहीं जाऊंगा. वादा, पक्का वादा.’’ समायरा और सागर दोनों इस शानदार सफलता को सैलिब्रेट करने शहर के पांचसितारा होटल आए हैं. रात के 11 बज चुके हैं.
दोनों होटल से घर लौट आए हैं. सागर ने समायरा को अपनी बांहों के घेरे में कसते हुए उस से कहा, ‘‘जिंदगी में तुम जैसा सैल्फलैस लाइफ पार्टनर बहुत मुश्किल से मिलता है. मेरा डिएडिक्शन करा के और मुझे कोडिंग सिखा कर तुम ने मुझे नई जिंदगी दी है. अब मैं तुम्हें दोबारा खोने का रिस्क कतई नहीं ले सकता. चलो, अब शादी कर लेते हैं.’’ ‘‘तुम ने तो मेरे मन की बात कर दी. मैं भी कुछ समय से इस के बारे में सोच रही थी. बोलो, कब करें?’’ ‘‘जब तुम चाहो.’’ ‘‘मैं कल ही मम्मा से इस बारे में बात करती हूं. तुम भी अपनी मां से इस बाबत बात कर लो.’’ ‘‘ओके, जैसा तुम कहें. ये बंदा तो आप के हुक्म का गुलाम है.’’ ‘‘अच्छाजी, गुलाम और आप,’’ दोनों खिलखिला उठे. बेपनाह खुशियों की कुनकुनी धूप से दोनों के चेहरे रोशन हो उठे थे.
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