मेरे पति पहले चेन स्मोकर थे, क्या उन्हें अभी भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा हो सकता है

सवाल

मेरे पति चेन स्मोकर थे लेकिन अब उन्होंने स्मोकिंग काफी कम कर दी है. क्या उन के लिए फेफड़ों के कैंसर का खतरा अभी भी है?

जवाब

स्मोकिंग लंग कैंसर का सब से प्रमुख रिस्क फैक्टर है. सिगरेट से निकलने वाले धुएं में कार्सिनोजन (कैंसर का कारण बनने वाले तत्त्व) होते हैं, जो फेफड़ों की सब से अंदरूनी परत बनाने वाली कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर देते हैं. आप के पति लगातार कई वर्षों तक धूम्रपान करते रहें इस से उन के फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंच चुका होगा. इसलिए उन के लिए फेफड़ों के कैंसर की चपेट में आने का खतरा धूम्रपान न करने वालों की तुलना में काफी अधिक है. जोखिम को कम करने के लिए उन्हें स्मोकिंग पूरी तरह छोड़ने और ऐसी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करें जिन से उन के फेफड़े स्वस्थ रहें.

-डा. कनिका शर्मा

 रैडिएशन औंकोलौजिस्ट, धर्मशिला नारायणा सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल, दिल्ली द्य

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Valentine’s Day 2024: मुंहासों के लिए वरदान है Aloe vera, जानिए कैसे करें इसका इस्तेमाल

बेदाग त्वचा कौन नहीं पाना चाहता. लेकिन त्वचा से जुड़ी समस्याओं के कारण चेहरे की रौनक चली जाती है. बात अगर स्किन प्रॉब्लम्स की करें, तो मुंहासे इन सबमें आम हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, मुंहासों की असल वजह प्रदूषण और धूल, मिट्टी है. जिससे चेहरे पर गंदगी जमा हो जाती है और कील मुंहासे पैदा हो जाते हैं. आपको जानकर हैरत होगी, कि दुनिया की 9.4 प्रतिशत आबादी मुंहासों से प्रभावित है. इसके चलते एक्ने यानि मुंहासे दुनिया की आठवी त्वचा संबंधी बड़ी समस्या बन गई है. मुंहासों से राहत पाने के लिए बेशक आप क्रीम या घरेलू उपाय करते हों, लेकिन एलोवेरा एक ऐसा प्राकृतिक नुस्खा है, जो मुंहासों से बिना किसी दुष्प्रभाव के छुटकारा दिलाता है. देखा जाए, तो मुंहासों के लिए ऐलोवरा का इस्तेमाल आज से नहीं, बल्कि सदियों से औषधि के रूप में किया जाता रहा है.  ऐसे में अगर आप बेवजह के खर्च से बचना चाहते हैं, तो मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए एलोवेरा का घरेलू उपाय करके देखिए. इसका उपयोग त्वचा को निखारने के लिए किया जाता है. इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि एलोवेरा मुंहासों के लिए क्यों अच्छा है, इसके फायदे और आप इसका उपयोग कैसे कर सकते हैं.

एलोवेरा मुंहासों के लिए क्यों अच्छा है, इसके फायदे- 

एलोवेरा मुंहासों के लिए बेहतरीन घरेलू उपचार है. दरअसल, इसमें मौजूद फैटी एसिड और शुगर के कारण इसमें एंटी इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं, जो मुंहासों से त्वचा पर आने वाली सूजन को रोकने में मदद करते हैं. आपको बता दें कि शुद्ध एलोवेरा जेल में 75 सक्रिय तत्व होते हैं, जिसमें अमीनो एसिड, सैलिसिलिक एसिड, लिग्रिन, विटामिन, मिनरल, सैपोनिन और एंजाइम शामिल हैं. जानिए इसके फायदों के बारे में भी.

– एलोवेरा कोलेजन संश्लेषण को भी बढ़ावा देता है और इससे होने वाले घावों का उपचार करने में मददगार है.

– यह यूवी जोखिम के कारण त्वचा पर आने वाली सूजन और स्किन सेंसिटिविटी को भी दूर करने में मदद करता है.

– यह आपकी त्वचा को मॉइस्चराइज करने के साथ इलास्टिन और कोलेजन को बढ़ावा देता है.

मुंहासों के लिए एलोवेरा का उपयोग कैसे करें-

मुंहासों के लिए प्योर एलोवेरा जेल-

चेहरे पर मुंहासों को कुछ ही दिनों में गायब करने के लिए एलोवेरा जेल बहुत अच्छा उपाय है. इसके लिए आप एलोवेरा की पत्ती से जेल निकालें. प्रभावित क्षेत्र पर जेल को रातभर लगा छोड़ दें. सुबह उठकर पानी से धो लें. इस प्रक्रिया को तब तक करें, जब तक की मुंहासे ठीक न हो जाएं.

एलोवेरा जेल, खीरा और गुलाबजल-

कम समय में मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए आप एलोवेरा के साथ खीरा और गुलाबजल का भी उपयोग कर सकते हैं. गुलाबजल जहां आपकी स्किन को टोन करता है, वहीं खीरा मुंहासों की वजह से आने वाली सूजन को दूर करने में कारगार है. इसका इस्तेमाल करने के लिए एक चम्मच खीरे के रस, गुलाबजल और एलोवेरा जेल मिलाएं. प्रभावित क्षेत्र पर कॉटन बॉल की मदद से इस मिश्रण को लगाएं और सूखने के बाद इसे धो लें.

एलोवेरा और बादाम का तेल-

एलोवेरा और बादाम का तेल भी आप मुंहासों को दूर करने के लिए उपयोग कर सकते हैं. इसके लिए एक चम्मच एलोवेरा जेल में 3 से 4 बूंद बादाम के तेल की मिलाएं और इसे अपने चेहरे पर लगाएं. कुछ मिनटों में इसे धो लें. लगातार ऐसा करते रहने से मुंहासों धीरे-धीरे गायब होने लगेंगे. साथ ही इससे होने वाले निशानों से भी आपको छुटकारा मिलेगा.

एलोवेरा स्प्रे-

पतले एलोवेरा घोल से त्वचा पर स्प्रे करने से त्वचा को हाइड्रेट करने में मदद मिलती है. स्प्रे बनाने के लिए एक भाग एलोवेरा में दो भाग पानी मिलाएं. अब इस मिश्रण को स्प्रे बोतल में रखें और प्रभावित क्षेत्र पर स्प्रे करें.

दालचीनी, शहद और एलोवेरा-

शहद , दालचीनी और एलोवेरा से फेस मास्क बनाना अच्छा विकल्प है. यह मुंहासों को दूर करने में मदद करता है. दरअसल, दालचीनी और शहद में एलोवेरा की तरह एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं. फेस मास्क बनाने के लिए एक छोटी कटोरी में दो बड़े चम्मच शहद, एक बड़ा चम्मच एलोवेरा और एक बड़ा चम्मच दालचीनी मिलाएं. अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगा लें और 10 मिनट के लिए छोड़ दें. 10 मिनट इस मास्क को 10 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें.

अपने स्किनकेयर रूटीन में एलोवेरा को जगह देना बहुत अच्छा विकल्प है. हां, लेकिन मुंहासों को दूर करने के लिए अकेले एलोवेरा पर निर्भर न रहें. दर्द और उपचार में सहायता के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं, लेकिन समस्या के मूल कारण का पता लगाने के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

आपका कॉन्फिडेंस ही नहीं, इंप्रेशन की बढ़ा देता है सही ड्रेसिंग स्टाइल, जानें खास बातें

“क्या बात है रिया खूब जंच रही है लगता है कुछ खास प्लानिंग है?”, हीना ने अपनी छोटी बहन को छेड़ते हुए कहा

इस पर दिया ने मुस्कुराते हुए कहा,” हां दीदी आज एक इंटरव्यू है उसमें जाना है और देख लेना मैं यह इंटरव्यू क्रैक करके ही रहूंगी.”

अपनी बहन की बात का जवाब देते हुए हिना ने कहा,”आई लव योर कॉन्फिडेंस एंड योर ड्रेसिंग सेंस! कहीं तेरा यह कॉन्फिडेंस बूस्ट करने में तेरे कपड़ों की मेहरबानी तो नहीं?”

अपनी दीदी की बात पर रिया ने मुस्कुराते हुए हामी  में सिर हिलाते हुए कहा,” यैस.. अफकोर्स!”

कहते हैं ‘फर्स्ट इंप्रेशन इज द लास्ट इंप्रेशन’ यानी आपका पहला प्रभाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता. सामने वाले पर यह पहला प्रभाव आपकी ड्रेसिंग स्टाइल से पड़ता है। इसलिए अपने ड्रेसिंग सेंस पर ध्यान देना और उसमें सुधार करना बेहद जरूरी है.

अच्छा ड्रेसिंग स्टाइल न सिर्फ आपका आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि यह आपको मानसिक और भावनात्मक दोनों तरीकों से मजबूत बनाता है। इससे आपकी सफलता की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं.

ऐसे में आपको अपनी पर्सनेलिटी की इस अहम कड़ी पर ध्यान देने की जरूरत है।

 जानिए क्या कहते हैं शोध

दुनियाभर में हुए कई अध्ययनों के अनुसार अच्छे कपड़े पहनने से आपका प्रदर्शन बढ़ता है। आप दूसरों को अच्छे से प्रभावित कर पाते हैं। अच्छे कपड़ों के प्रभाव से आप में स्मार्टनेस आती है, ऐसे में सामने वाले के बात करने का तरीका भी आपके प्रति सकारात्मक हो जाता है। इसी आधार पर लोग आपके विषय में धारणा बना लेते हैं। इन अध्ययनों से यह साफ होता है कि सही कपड़ों का चयन आपकी सफलता को कुछ आसान बनाने में मददगार होता है। यही कारण है कि इंटरव्यू से लेकर मीटिंग और फंक्शन में आपका सही ड्रेसिंग स्टाइल चुनना जरूरी है। शोध बताते हैं कि जब अपने कपड़ों को पहनकर आप अच्छा महसूस करते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस खुद-ब-खुद बढ़ जाता है और प्रदर्शन बेहतर होता है।

 कपड़े चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान  

अच्छे कपड़ों का मतलब महंगे कपड़ों से बिलकुल नहीं है। आप सही कीमत या अपने बजट के अनुसार भी अच्छे कपड़ों का चुनाव कर सकते हैं। बस इन्हें लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है—

  1. कपड़ों की फिटिंग है महत्वपूर्ण  

कपड़ों पर आपका लुक निर्भर होता है। ऐसे में इनकी फिटिंग का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अच्छे फिटिंग वाले कपड़े आपकी पर्सनेलिटी को और प्रभावी बनाते हैं। ये आपको ज्यादा एक्टिव और स्मार्ट दिखाते हैं। वहीं अगर आपके कपड़े लूज फिट के होंगे तो आपका इंप्रेशन एक थके हुए इंसान का लगेगा। इसलिए फिटिंग पर खास ध्यान दें।

2. मौसम के अनुसार चुनें कपड़े  

माना फैशन जरूरी है, लेकिन इसके चक्कर में खुद को परेशानी में डालना सही नहीं है। इसलिए कपड़े हमेशा मौसम के अनुसार चुनें। ऐसा करने पर आप न सिर्फ कंफर्टेबल महसूस करेंगे, बल्कि व्यावहारिक और फैशनेबल भी नजर आएंगे। आपके पास सर्दियों के लिए एक अच्छी जैकेट, कम सर्दियों के लिए स्वेटर और गर्मियों के लिए अच्छे कपड़े होना जरूरी है। अगर आप प्रोफेशनल हैं तो आपके पास एक अच्छा सूट और ब्लेजर होना भी जरूरी है। कई बार लोग आउटफिट दिखाने के चक्कर में गर्म कपड़े नहीं पहनते, लेकिन ऐसा करना आपकी भूल है। ऐसा करने की जगह आपको सर्दियों के कपड़ों को स्टाइलिश बनाने की जरूरत है। इससे आपकी स्मार्टनेस का भी पता चलेगा।

3. अवसर के अनुरूप चुनें पोशाक

अपने आउटफिट हमेशा अवसर के अनुसार चुनें। ऐसा नहीं करने पर आपका प्रभाव खराब हो सकता है। मीटिंग, ऑफिशियल मीट आदि के लिए आपको फॉर्मल सूट या फिर स्ट्रेट पैंट के साथ शर्ट और ब्लेजर वियर करना चाहिए। शर्ट हमेशा प्लेन और ब्लेजर हमेशा सोबर कलर का वियर करने की कोशिश करें। मीटिंग में जींस पहनने से बचें। यह बात पुरुषों और महिलाओं पर समान रूप से लागू होती है। अपनी रचनात्मकता दिखाने और इंप्रेशन बढ़ाने के लिए आप ड्रेस के अनुसार एक्सेसरीज चुनें। पुरुषों को अपनी घड़ी, जूतों, जुराब, टाई पर ध्यान देना चाहिए। वहीं महिलाओं को घड़ी, जूतों के साथ ही अपने इयररिंग्स, ब्रासलेट, लिपस्टिक, हेयर डू का भी ध्यान रखना चाहिए। इससे आपका ओवरऑल लुक प्रभावी बनेगा। आम दिनों में भी कपड़ों का चयन करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Valentine’s Special: वैलेंटाइन डे को बनाना चाहते हैं स्पेशल, तो जरूर ट्राई करें सैफरोन एप्पल फिरनी-

अगर आप डेजर्ट में कुछ हेल्दी और टेस्टी रेसिपी ट्राय करना चाहते हैं तो सैफरोन एप्पल फिरनी ट्राय करना न भूलें. सैफरोन ऐप्पल फिरनी टेस्टी के साथ-साथ हेल्दी भी होती है, जिसे आप आसानी से अपनी फैमिली और फ्रेंड्स को डेजर्ट में परोस सकते हैं.

हमें चाहिए

2 लिटर दूध

100 ग्राम चावल

5 ग्राम केसर

15 ग्राम शूगर फ्री

5 ग्राम हरी इलायची

1 किलोग्राम सेब

1 छोटा चम्मच दालचीनी.

बनाने का तरीका

चावलों को 2 घंटे भिगो कर सुखा लें. फिर मिक्सी में दरदरा पीस लें. गहरे बरतन में दूध गरम करें. उबाल आने पर इस में चावलों का आटा मिलाएं और धीमी आंच पर ढाई घंटे पकाएं. केसर, इलायची पाउडर मिला कर आधा घंटा और पकाएं. फिर आंच से उतार कर ठंडा होने दें.

सेबों को छिलका उतार कर छोटेछोटे टुकड़ों में काट लें. अब इसे आधा एमएल पानी में उबाल लें. 5 सैकंड बाद सेबों को कद्दूकस कर ठंडा होने के लिए फ्रिज में रख दें. ठंडा होने पर सैफरोन फिरनी में मिलाएं और कटोरे में डाल कर बादाम व पिस्ता से सजा कर परोसें.

Valentine’s Day 2024: कायर- क्यों श्रेया ने श्रवण को छोड़ राजीव से विवाह कर लिया?

श्रेया के आगे खड़ी महिला जैसे ही अपना बोर्डिंग पास ले कर मुड़ी श्रेया चौंक पड़ी. बोली, ‘‘अरे तन्वी तू…तो तू भी दिल्ली जा रही है… मैं अभी बोर्डिंग पास ले कर आती हूं.’’

उन की बातें सुन कर काउंटर पर खड़ी लड़की मुसकराई, ‘‘आप दोनों को साथ की सीटें दे दी हैं. हैव ए नाइस टाइम.’’ धन्यवाद कह श्रेया इंतजार करती तन्वी के पास आई.

‘‘चल आराम से बैठ कर बातें करते हैं,’’ तन्वी ने कहा. हौल में बहुत भीड़ थी. कहींकहीं एक कुरसी खाली थी. उन दोनों को असहाय से एकसाथ 2 खाली कुरसियां ढूंढ़ते देख कर खाली कुरसी के बराबर बैठा एक भद्र पुरुष उठ खड़ा हुआ. बोला, ‘‘बैठिए.’’

‘‘हाऊ शिवैलरस,’’ तन्वी बैठते हुए बोली, ‘‘लगता है शिवैलरी अभी लुप्त नहीं हुई है.’’

‘‘यह तो तुझे ही मालूम होगा श्रेया…तू ही हमेशा शिवैलरी के कसीदे पढ़ा करती थी,’’ तन्वी हंसी, ‘‘खैर, छोड़ ये सब, यह बता तू यहां कैसे?’’

‘‘क्योंकि मेरा घर यानी आशियाना यहीं है, दिल्ली तो एक शादी में जा रही हूं.’’

‘‘अजब इत्तफाक है. मैं एक शादी में यहां आई थी और अब अपने आशियाने में वापस दिल्ली जा रही हूं.’’

‘‘मगर जीजू तो सिंगापुर में सैटल्ड थे?’’

‘‘हां, सर्विस कौंट्रैक्ट खत्म होने पर वापस दिल्ली आ गए. नौकरी के लिए भले ही कहीं भी चले जाएं, दिल्ली वाले सैटल कहीं और नहीं हो सकते.’’

‘‘वैसे हूं तो मैं भी दिल्ली की, मगर अब भोपाल छेड़ कर कहीं और नहीं रह सकती.’’

‘‘लेकिन मेरी शादी के समय तो तेरा भी दिल्ली में सैटल होना पक्का ही था,’’ श्रेया ने उसांस भरी.

‘‘हां, था तो पक्का ही, मगर मैं ने ही पूरा नहीं होने दिया और उस का मुझे कोई अफसोस भी नहीं है. अफसोस है तो बस इतना कि मैं ने दिल्ली में सैटल होने का मूर्खतापूर्ण फैसला कैसे कर लिया था.’’

‘‘माना कि कई खामियां हैं दिल्ली में, लेकिन भई इतनी बुरी भी नहीं है हमारी दिल्ली कि वहां रहने की सोचने तक को बेवकूफी माना जाए,’’ तन्वी आहत स्वर में बोली.

‘‘मुझे दिल्ली से कोई शिकायत नहीं है तन्वी,’’ श्रेया खिसिया कर बोली, ‘‘दिल्ली तो मेरी भी उतनी ही है जितनी तेरी. मेरा मायका है. अत: अकसर जाती रहती हूं वहां. अफसोस है तो अपनी उस पसंद पर जिस के साथ दिल्ली में बसने जा रही थी.’’

तन्वी ने चौंक कर उस की ओर देखा. फिर कुछ हिचकते हुए बोली, ‘‘तू कहीं श्रवण की बात तो नहीं कर रही?’’

श्रेया ने उस की ओर उदास नजरों से देखा. फिर पूछा, ‘‘तुझे याद है उस का नाम?’’

‘‘नाम ही नहीं उस से जुड़े सब अफसाने भी जो तू सुनाया करती थी. उन से तो यह पक्का था कि श्रवण वाज ए जैंटलमैन, ए थौरो जैंटलमैन टु बी ऐग्जैक्ट. फिर उस ने ऐसा क्या कर दिया कि तुझे उस से प्यार करने का अफसोस हो रहा है? वैसे जितना मैं श्रवण को जानती हूं उस से मुझे यकीन है कि श्रवण ने कोई गलत काम नहीं किया होगा जैसे किसी और से प्यार या तेरे से जोरजबरदस्ती?’’

श्रेया ने मुंह बिचकाया, ‘‘अरे नहीं, ऐसा सोचने की तो उस में हिम्मत ही नहीं थी.’’

‘‘तो फिर क्या दहेज की मांग करी थी उस ने?’’

‘‘वहां तक तो बात ही नहीं पहुंची. उस से पहले ही उस का असली चेहरा दिख गया और मैं ने उस से किनारा कर लिया,’’ श्रेया ने फिर गहरी सांस खींची, ‘‘कुछ और उलटीसीधी अटकल लगाने से पहले पूरी बात सुनना चाहेगी?’’

‘‘जरूर, बशर्ते कोई ऐसी व्यक्तिगत बात न हो जिसे बताने में तुझे कोई संकोच हो.’’

‘‘संकोच वाली तो खैर कोई बात ही नहीं है, समझने की बात है जो तू ही समझ सकती है, क्योंकि तूने अभीअभी कहा कि मैं शिवैलरी के कसीदे पढ़ा करती थी…’’

इसी बीच फ्लाइट के आधा घंटा लेट होने की घोषणा हुई.

‘‘अब टुकड़ों में बात करने के बजाय श्रेया पूरी कहानी ही सुना दे.’’

‘‘मेरा श्रवण की तरफ झुकाव उस के शालीन व्यवहार से प्रभावित हो कर हुआ था. अकसर लाइबेरी में वह ऊंची शैल्फ से मेरी किताबें निकालने और रखने में बगैर कहे मदद करता था. प्यार कब और कैसे हो गया पता ही नहीं चला. चूंकि हम एक ही बिरादरी और स्तर के थे, इसलिए श्रवण का कहना था कि सही समय पर सही तरीके से घर वालों को बताएंगे तो शादी में कोई रुकावट नहीं आएगी. मगर किसी और ने चुगली कर दी तो मुश्किल होगी. हम संभल कर रहेंगे.

प्यार के जज्बे को दिल में समेटे रखना तो आसान नहीं होता. अत: मैं तुझे सब बताया करती थी. फाइनल परीक्षा के बाद श्रवण के कहने पर मैं ने उस के साथ फर्नीचर डिजाइनिंग का कोर्स जौइन किया था. साउथ इंस्टिट्यूट मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं था.

श्रवण पहले मुझे पैदल मेरे घर छोड़ने आता था. फिर वापस जा कर अपनी बाइक ले कर अपने घर जाता था. मुझे छोड़ने घर से गाड़ी आती थी. लेने भी आ सकती थी लेकिन वन वे की वजह से उसे लंबा चक्कर लगाना पड़ता. अत: मैं ने कह दिया  था कि नजदीक रहने वाले सहपाठी के साथ पैदल आ जाती हूं. यह तो बस मुझे ही पता था कि बेचारा सहपाठी मेरी वजह से डबल पैदल चलता था. मगर बाइक पर वह मुझे मेरी बदनामी के डर से नहीं बैठाता था. मैं उस की इन्हीं बातों पर मुग्ध थी.

वैसे और सब भी अनुकूल ही था. हम दोनों ने ही इंटीरियर डैकोरेशन का कोर्स किया. श्रवण के पिता फरनिशिंग का बड़ा शोरूम खोलने वाले थे, जिसे हम दोनों को संभालना था. श्रवण का कहना था कि रिजल्ट निकलने के तुरंत बाद वह अपनी भाभी से मुझे मिलवाएगा और फिर भाभी मेरे घर वालों से मिल कर कैसे क्या करना है तय कर लेंगी.

लेकिन उस से पहले ही मेरी मामी मेरे लिए अपने भानजे राजीव का रिश्ता ले कर आ गईं. राजीव आर्किटैक्ट था और ऐसी लड़की चाहता था, जो उस के व्यवसाय में हाथ बंटा सके. मामी द्वारा दिया गया मेरा विवरण राजीव को बहुत पसंद आया और उस ने मामी से तुरंत रिश्ता करवाने को कहा.

‘‘मामी का कहना था कि नवाबों के शहर भोपाल में श्रेया को अपनी कला के पारखी मिलेंगे और वह खूब तरक्की करेगी. मामी के जाने के बाद मैं ने मां से कहा कि दिल्ली जितने कलापारखी और दिलवाले कहीं और नहीं मिलेंगे. अत: मेरे लिए तो दिल्ली में रहना ही ठीक होगा. मां बोलीं कि वह स्वयं भी मुझे दिल्ली में ही ब्याहना चाहेंगी, लेकिन दिल्ली में राजीव जैसा उपयुक्त वर भी तो मिलना चाहिए. तब मैं ने उन्हें श्रवण के बारे में सब बताया. मां ने कहा कि मैं श्रवण को उन से मिलवा दूं. अगर उन्हें लड़का जंचा तो वे पापा से बात करेंगी.

‘‘दोपहर में पड़ोस में एक फंक्शन था. वहां जाने से पहले मां ने मेरे गले में सोने की चेन पहना दी थी. मुझे भी पहननी अच्छी लगी और इंस्टिट्यूट जाते हुए मैं ने चेन उतारी नहीं. शाम को जब श्रवण रोज की तरह मुझे छोड़ने आ रहा था तो मैं ने उसे सारी बात बताई और अगले दिन अपने घर आने को कहा.

‘‘कल क्यों, अभी क्यों नहीं? अगर तुम्हारी मम्मी कहेंगी तो तुम्हारे पापा से मिलने के लिए भी रुक जाऊंगा,’’ श्रवण ने उतावली से कहा.

‘‘तुम्हारी बाइक तो डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट में खड़ी है.’’

‘‘खड़ी रहने दो, तुम्हारे घर वालों से मिलने के बाद जा कर उठा लूंगा.’’

‘‘तब तक अगर कोई और ले गया तो? अभी जा कर ले आओ न.’’

‘‘ले जाने दो, अभी तो मेरे लिए तुम्हारे मम्मीपापा से मिलना ज्यादा जरूरी है.’’

सुन कर मैं भावविभोर हो गई और मैं ने देखा नहीं कि बिलकुल करीब 2 गुंडे चल रहे थे, जिन्होंने मौका लगते ही मेरे गले से चेन खींच ली. इस छीनाझपटी में मैं चिल्लाई और नीचे गिर गई. लेकिन मेरे साथ चलते श्रवण ने मुझे बचाने की कोई कोशिश नहीं करी. मेरा चिल्लाना सुन कर जब लोग इकट्ठे हुए और किसी ने मुझे सहारा दे कर उठाया तब भी वह मूकदर्शक बना देखता रहा और जब लोगों ने पूछा कि क्या मैं अकेली हूं तो मैं ने बड़ी आस से श्रवण की ओर देखा, लेकिन उस के चेहरे पर पहचान का कोई भाव नहीं था.

एक प्रौढ दंपती के कहने पर कि चलो हम तुम्हें तुम्हारे घर पहुंचा दें, श्रवण तुरंत वहां से चलता बना. अब तू ही बता, एक कायर को शिवैलरस हीरो समझ कर उस की शिवैलरी के कसीदे पढ़ने के लिए मैं भला खुद को कैसे माफ कर सकती हूं? राजीव के साथ मैं बहुत खुश हूं. पूर्णतया संतुष्ट पर जबतब खासकर जब राजीव मेरी दूरदर्शिता और बुद्धिमता की तारीफ करते हैं, तो मुझे बहुत ग्लानि होती है और यह मूर्खता मुझे बुरी तरह कचोटती है.’’

‘‘इस हादसे के बाद श्रवण ने तुझ से संपर्क नहीं किया?’’

‘‘कैसे करता क्योंकि अगले दिन से मैं ने डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट जाना ही छोड़ दिया. उस जमाने में मोबाइल तो थे नहीं और घर का नंबर उस ने कभी लिया ही नहीं था. मां के पूछने पर कि मैं अपनी पसंद के लड़के से उन्हें कब मिलवाऊंगी, मैं ने कहा कि मैं तो मजाक कर रही थी. मां ने आश्वस्त हो कर पापा को राजीव से रिश्ता पक्का करने को कह दिया. राजीव के घर वालों को शादी की बहुत जल्दी थी. अत: रिजल्ट आने से पहले ही हमारी शादी भी हो गई. आज तुझ से बात कर के दिल से एक बोझ सा हट गया तन्वी. लगता है अब आगे की जिंदगी इतमीनान से जी सकूंगी वरना सब कुछ होते हुए भी, अपनी मूर्खता की फांस हमेशा कचोटती रहती थी.’’

तभी यात्रियों को सुरक्षा जांच के लिए बुला लिया गया. प्लेन में बैठ कर श्रेया ने कहा, ‘‘मेरा तो पूरा कच्चा चिट्ठा सुन लिया पर अपने बारे में तो तूने कुछ बताया ही नहीं.’’

‘‘दिल्ली से एक अखबार निकलता है दैनिक सुप्रभात…’’

‘‘दैनिक सुप्रभात तो दशकों से हमारे घर में आता है,’’ श्रेया बीच में ही बोली, ‘‘अभी भी दिल्ली जाने पर बड़े शौक से पढ़ती हूं खासकर ‘हस्तियां’ वाला पन्ना.’’

‘‘अच्छा. सुप्रभात मेरे दादा ससुर ने आरंभ किया था. अब मैं अपने पति के साथ उसे चलाती हूं. ‘हस्तियां’ स्तंभ मेरा ही विभाग है.’’

‘‘हस्तियों की तसवीर क्यों नहीं छापते आप लोग?’’

‘‘यह तो पापा को ही मालूम होगा जिन्होंने यह स्तंभ शुरू किया था. यह बता मेरे घर कब आएगी, तुझे हस्तियों के पुराने संकलन भी दे दूंगी.’’

‘‘शादी के बाद अगर फुरसत मिली तो जरूर आऊंगी वरना अगली बार तो पक्का… मेरा भोपाल का पता ले ले. संकलन वहां भेज देना.’’

‘‘मुझे तेरा यहां का घर मालूम है, तेरे जाने से पहले वहीं भिजवा दूंगी.’’

दिल्ली आ कर श्रेया बड़ी बहन के बेटे की शादी में व्यस्त हो गई. जिस शाम को उसे वापस जाना था, उस रोज सुबह उसे तन्वी का भेजा पैकेट मिला. तभी उस का छोटा भाई भी आ गया और बोला, ‘‘हम सभी दिल्ली में हैं, आप ही भोपाल जा बसी हैं. कितना अच्छा होता दीदी अगर पापा आप के लिए भी कोई दिल्ली वाला लड़का ही देखते या आप ने ही कोई पसंद कर लिया होता. आप तो सहशिक्षा में पढ़ी थीं.’’

सुनते ही श्रेया का मुंह कसैला सा हो गया. तन्वी से बात करने के बाद दूर हुआ अवसाद जैसे फिर लौट आया. उस ने ध्यान बंटाने के लिए तन्वी का भेजा लिफाफा खोला ‘हस्तियां’ वाले पहले पृष्ठ पर ही उस की नजर अटक गई, ‘श्रवण कुमार अपने शहर के जानेमाने सफल व्यवसायी और समाजसेवी हैं. जरूरतमंदों की सहायता करना इन का कर्तव्य है. अपनी आयु और जान की परवाह किए बगैर इन्होंने जवान मनचलों से एक युवती की रक्षा की जिस में गंभीर रूप से घायल होने पर अस्पताल में भी रहना पड़ा. लेकिन अहं और अभिमान से यह सर्वथा अछूते हैं.’

हमारे प्रतिनिधि के पूछने पर कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में क्यों डाली, उन की एक आवाज पर मंदिर के पुजारी व अन्य लोग लड़नेमरने को तैयार हो जाते तो उन्होंने बड़ी सादगी से कहा, ‘‘इतना सोचने का समय ही कहां था और सच बताऊं तो यह करने के बाद मुझे बहुत शांति मिली है. कई दशक पहले एक ऐसा हादसा मेरी मित्र और सहपाठिन के साथ हुआ था. चाहते हुए भी मैं उस की मदद नहीं कर सका था. एक अनजान मूकदर्शक की तरह सब देखता रहा था. मैं नहीं चाहता था कि किसी को पता चले कि वह मेरे साथ थी और उस का नाम मेरे से जुडे़ और बेकार में उस की बदनामी हो.

‘‘मुझे चुपचाप वहां से खिसकते देख कर उस ने जिस तरह से होंठ सिकोड़े थे मैं समझ गया था कि वह कह रही थी कायर. तब मैं खुद की नजरों में ही गिर गया और सोचने लगा कि क्या मैं उसे बदनामी से बचाने के लिए चुप रहा या सच में ही मैं कायर हूं? जाहिर है उस के बाद उस ने मुझ से कभी संपर्क नहीं किया. मैं यह जानता हूं कि वह जीवन में बहुत सुखी और सफल है. सफल और संपन्न तो मैं भी हूं बस अपनी कायरता के बारे में सोच कर ही दुखी रहता था पर आज इस अनजान युवती को बचाने के बाद लग रहा है कि मैं कायर नहीं हूं…’’

श्रेया और नहीं पढ़ सकी. एक अजीब सी संतुष्टि की अनुभूति में वह यह भी भूल गई कि उसे सुकून देने को ही तन्वी ने ‘हस्तियां’ कालम के संकलन भेजे थे और एक मनगढ़ंत कहानी छापना तन्वी के लिए मुश्किल नहीं था.

Valentine’s Day 2024: एकतरफा प्यार में क्या करें

सौरभ अपने रिश्तेदार के यहां शादी में गया था. वहां बरात में आई लड़की उसे पसंद आ गई. उसे देखते ही उस के मन में प्यार की कोंपलें फूटने लगीं, हृदय हिलोरें मारने लगा और वह उस का दीवाना हो गया.

बरात के विदा होने के साथ वह लड़की भी वापस चली गई. लेकिन, सौरभ एकतरफा प्यार में पागल हो चुका था. उसे कुछ सूझ नहीं रहा था. उसे गुमसुम देख एक दिन मां ने पूछा, ‘‘क्या बात है, बेटे, आजकल तुम्हारा मन किसी काम में नहीं लग रहा है? न ठीक से खातेपीते हो और न पढ़तेलिखते हो, गुमसुम बने रहते हो?’’

‘‘नहीं मौम, ऐसी कोई बात नहीं है,’’ सौरभ ने कहा था.

बेटे के उत्तर से मां निश्चिंत हो गईं. लेकिन सौरभ उस लड़की के लिए बेताब था. उस ने अपने रिश्तेदार से उस लड़की के बारे में जानने व उस से मिलने की इच्छा व्यक्त की.

उस के रिश्तेदार ने कहा, ‘‘कहीं तुम्हें शिखा से प्यार तो नहीं हो गया? मैं पहले बता दूं कि इस बारे में सोचना भी मत क्योंकि उस की सगाई हो चुकी है और 2 महीने बाद उस की शादी है.’’

सौरभ के तो पैरोंतले जमीन खिसक गई. उस के सारे सपने टूट गए. वह इतना डिप्रैस्ड हो गया कि खुदकुशी कर मौत को गले लगा लिया.

मीना बीए फाइनल ईयर में थी. उसे अपनी ही क्लास के लड़के रोहित से प्यार हो गया. लड़के के पिता केंद्र सरकार में सेवारत हैं. इसलिए उन का ट्रांसफर होता रहता है. रोहित काफी हैंडसम और होशियार था. कुछ ही समय में वह प्रोफैसरों का भी चहेता बन गया. मीना मन ही मन उसे चाहने लगी. उस ने अपने दिल की बात न तो अपनी सहेलियों को बताई और न ही घर पर. इस बारे में रोहित से बात करने का वह साहस नहीं जुटा सकी.

खैर, उस का बीए पूर्ण हो गया और रोहित के पिता का ट्रांसफर चेन्नई हो गया. उस के चले जाने पर वह उस के खयालों में खोई रहती. वह उस के प्यार में इस कदर पागल हो गई कि खानापीना तक  छोड़ दिया. मां ने उस से उस के उखड़े मूड के बारे में पूछा तो उस ने कोई सीधा उत्तर नहीं दिया. मां ने अपनी बहू से कहा कि वह मीना से बात कर पता लगाए कि वह इतनी खोईखोई क्यों रहती है.

भाभी के समक्ष मीना खुल गई और उस ने अपने एकतरफा प्यार के बारे में बताया. भाभी ने इस संबंध में उस की मदद करने को कहा और उस लड़के से संपर्क कर बताया कि उन की ननद किस तरह उस के प्यार में पागल है.

यह सुन कर रोहित भौचक्का रह  गया. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई लड़की उसे इस तरह प्यार कर सकती है. उस ने भाभी की बात को सिरे से नकार दिया, बोला, ‘‘अब तक तो मैं आप की ननद को पहचान ही नहीं पा रहा हूं. क्योंकि क्लास में कम से कम 50 लड़कियां थीं. वैसे भी, मैं तो उर्वशी से प्यार करता हूं और वह भी मुझे चाहती है. हम दोनों ने एकसाथ जीनेमरने की कसमें खाई हैं. मैं उसे धोखा नहीं दे सकता.’’

भाभी ने अपनी ननद को इस बारे में बताया और कहा कि तुम किसी अन्य लड़के से शादी कर लो. तुम सुंदर हो, पढ़ीलिखी भी हो. तुम्हारे लिए रिश्ते की कोई कमी नहीं है.

लेकिन मीना के सिर पर तो एकतरफा प्यार का भूत सवार था. उस ने कहा, ‘‘अगर वह लड़का मेरी जिंदगी में नहीं आ सकता तो मैं किसी अन्य लड़के को अपना जीवनसाथी नहीं बनाऊंगी. मैं जीवनभर कुंआरी रह लूंगी पर किसी दूसरे लड़के से शादी नहीं करूंगी.’’

रवि अपने महल्ले की एक लड़की को चाहने लगा. दिन में कई बार उस के घर के सामने से निकलता ताकि उस की एक झलक दिख जाए. यह सिलसिला 3 महीनों तक चलता रहा. हालांकि, वह लड़की रवि को जानती तक न थी.

एक दिन वह बाजार से अकेली आ रही थी. रवि की नजर उस पर पड़ी. उस ने रास्ते में उसे रोक कर बात करनी चाही. सरेराह कोई लड़का उसे छेड़े, यह उसे नागवार लगा. रवि अपने दिल की बात उस से कहता, इस के पूर्व ही लड़की ने उस के गाल पर तमाचा दे मारा. इस अप्रत्याशित घटना से रवि हक्काबक्का रह गया. वह वहां से भाग खड़ा हुआ.

एकतरफा प्यार में पागल हुए इस प्रेमी को अपने को ठुकराए जाने पर इस कदर गुस्सा आया कि उस ने उस से बदला लेने की सोची और एक दिन उसे अकेली आते देख उस के चेहरे पर तेजाब डाल दिया. लड़की का चेहरा बुरी तरह झुलस गया, हालांकि लड़की की चीखपुकार सुन कर लोगों ने रवि को उसी समय धरदबोचा और पुलिस के हवाले कर दिया.

न्यायालय में जब जज ने उस से तेजाब फेंकने का कारण पूछा तो उस ने कहा, ‘‘यह लड़की अपनेआप को समझती क्या है? मेरे प्यार को ठुकरा कर इस ने अच्छा नहीं किया. यदि यह मेरी नहीं हो सकती तो किसी दूसरे की भी नहीं हो सकती. इसीलिए मैं ने तेजाब डाल कर बदला लिया.’’

कोर्ट ने रवि को 3 साल की सजा सुनाई.

एकतरफा प्यार करने वाले लड़के या लड़की यह क्यों नहीं समझते कि वही प्यार परवान चढ़ता है जो दोनों तरफ से हो. जब सामने वाले या सामने वाली को पता ही नहीं हो कि कोई उस के प्यार में पागल है, तो उस के स्वीकार करने या न करने का प्रश्न ही कहां उठता है.

यदि आप किसी से प्यार करते हैं या करती हैं तो उसे अपने दिल की बात बताने में संकोच या विलंब न करें. समय रहते उसे इस बारे में बताएं और यदि वह सिरे से खारिज कर दे तो अपने कदम पीछे खींच लेने में ही भलाई है. यदि वह जवाब के लिए कुछ समय चाहे तो उसे देना चाहिए.

प्यार में जबरदस्ती नहीं होती.

यदि आप का प्रस्ताव अस्वीकार हो जाता है तो इस का मतलब यह नहीं कि दुनिया खत्म हो गई. ऐसे में न तो सामने वाले से बदला लेने या सबक सिखाने के बारे में सोचना चाहिए और न ही अपनी जिंदगी की रफ्तार को रोकना चाहिए. धीरेधीरे सबकुछ सामान्य हो जाएगा.

अपने एकतरफा प्यार का इजहार करने में जहां लड़के उतावले रहते हैं वहीं लड़कियों में शर्मझिझक होने से वे इस का इजहार नहीं कर पातीं. आमतौर पर लड़कियां इस की पहल नहीं करतीं या करती भी हैं तो किसी को माध्यम बना कर.

कई बार जब आप किसी के प्रति आकर्षित होते हैं तो उस आकर्षण को ही प्यार समझने लगते हैं. लेकिन ये दोनों अलगअलग बातें हैं. आकर्षण छलावा होता है जबकि प्यार गहराई लिए होता है. प्यार भावनाओं पर आधारित होता है जबकि आकर्षण वासना पर. वासना को प्यार का नाम देना बुद्घिमानी नहीं है.

एकतरफा प्यार में मिली असफलता को धोखे का नाम नहीं दिया जा सकता, क्योंकि वह तो इस बात से अनजान है. जब आप उसे इस बारे में बताते हैं तो उस की प्रतिक्रिया क्या होगी, यह नहीं कह सकते. हो सकता है कि उस का जवाब सकारात्मक हो. यदि आप का प्यार स्वीकार हो जाता है तो आप के मन की इच्छा पूरी हो सकती है वरना सामने वाले को दोष देना ठीक नहीं. इसलिए, प्यार में इतने पागल न बनें कि अपना आपा खो दें.

आप प्यार के बदले प्यार चाहते हैं लेकिन जब प्यार एकतरफा हो तो जरूरी नहीं कि हम जो चाहें वह हमें मिले ही. यदि आप किसी फिल्म अभिनेत्री या अभिनेता को चाहने लगें या उस से एकतरफा प्यार करने लगें तो क्या यह पागलपन नहीं है? किसी का फैन या प्रशंसक होना एक बात है और उस से प्यार करना दूसरी बात. आप अपने पसंदीदा हीरो या हीराइन को सपनों में देखते रहिए, लेकिन क्या आप उन के सपनों में आते हैं?

बात अभिनेता या अभिनेत्रियों की ही नहीं है, कोई अच्छी सुंदर लड़की दिखी नहीं कि मनचले उसे अपना दिल दे बैठते हैं. उस के आगेपीछे दौड़ते हैं, उस पर फिकरे कसते हैं या छेड़छाड़ करते हैं ताकि उस का ध्यान उन की तरफ जाए और वह उन से प्यार करने लगे. लेकिन, बदले में क्या मिलता है-थप्पड़.

यदि आप ने किसी से एकतरफा प्यार किया है लेकिन वह आप का नहीं हो सका या नहीं हो सकी, तो उस की वैवाहिक जिंदगी में दखल देने का आप को कोई अधिकार नहीं है. उसे अपने हिसाब से जीने दो. माना कि एकतरफा प्यार की पीड़ा आप झेल रहे हैं लेकिन इस का मतलब यह तो नहीं कि किसी की सुखी जिंदगी में जहर घोल दें.

यौवन की दहलीज पर कदम रखते ही लड़केलड़कियों में विपरीतलिंगी को सामने देख कुछकुछ होने लगता है. उन की धड़कनें बढ़ जाती हैं. कई बार उन्हें पहली नजर में ही किसी से प्यार हो जाता है. शुरुआत एकतरफा प्यार से ही होती है. यदि सामने वाला या सामने वाली भी इस पर अपनी मुहर लगा दे तब तो ठीक, वरना एकतरफा प्यार का दर्द और जख्म इतना गहरा होता है कि वह जिंदगी तबाह भी कर सकता है.

स्वयं के साथ एक दिन: खुद को अकेला क्यों महसूस कर रही थी वह

घरऔर दफ्तर की भागतीदौड़ती जिंदगी में थोड़ा सा ठहरती हुई मैं, रिश्तों के जाल में फंसी हुई खुद से ही खुद का परिचय कराती हुई मैं, एक बेटी, एक बहू, एक पत्नी, एक मां और एक कर्मचारी की भूमिका निभाते हुए खुद को ही भूलती हुई मैं, इसलिए सोचा चलो आज खुद के साथ ही एक दिन बिताती हूं मैं, वह भी कोरोनाकाल में.

अब आप लोग सोच रहे होंगे कि कोरोनाकाल में भी अगर मुझे खुद के लिए समय नहीं मिला तो फिर उम्रभर नहीं मिलेगा.

मगर अगर सच बोलूं तो शायद कोरोनाकाल में हम लोगों की अपनी प्राइवेसी खत्म हो गई है. हम चाहें या न चाहें हम सब परिवाररूपी जाल में बंध गए हैं. घर में कोई भी एक ऐसा कोना नहीं है जहां खुद के साथ कुछ समय बिता सकूं.

सब से पहले अगर यह बात सीधी तरह किसी को बोली जाए तो अधिकतर लोगों को समझ ही नहीं आएगा कि खुद के साथ समय बिताने के लिए एक दिन की आवश्यकता ही क्या है?

आज का समय तो जब तक जरूरी न हो घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए पर क्या हर इंसान को भावनात्मक और मानसिक आजादी की आवश्यकता नहीं होती है? लोग मखौल उड़ाते हुए बोलेंगे कि यह नए जमाने की नई हवा है जिस के कारण यह फुतूर मेरे दिमाग में आया है.

कुछ लोग यह जुमला उछालेंगे कि जब कोई काम नहीं हो तो ऐसे ही खुद को पहचानने का कीड़ा दिमाग को काटता है. यह मैं इसलिए कह रही हूं क्योंकि शायद मैं भी उन लोगों में से ही हूं जो ऐसे ही प्रतिक्रिया करेगी अगर कोई मुझ से भी बोले कि आज मैं खुद के साथ समय बिताना चाहती या चाहता हूं.

ऐसे लोगों को हम स्वार्थी या बस अपने तक सीमित अथवा केवल अपनी खुशी देखने वाला और भी न जाने क्याक्या बोलते हैं. चलिए अब बात को और न खींचते हुए मैं अपने अनुभव को साझ करना चाहती हूं.

खैर, लौकडाउन खत्म हुआ और मेरा दफ्तर चालू हो गया परंतु बच्चों और पति का अभी भी घर से स्कूल और दफ्तर जारी था. छुट्टी का दिन मेरे लिए और अधिक व्यस्त होता है क्योंकि जिन कार्यों की अनदेखी मैं दफ्तर के कारण कर देती थी वे सब कार्य ठुनकते हुए कतार में सिर उठा कर खड़े रहते थे कि उन का नंबर कब आएगा? बच्चे अगर सामने से नहीं पर आंखों ही आंखों में यह जरूर जता देते हैं कि मैं हर दिन कितनी व्यस्त रहती हूं, उन को जब मेरी जरूरत होती है तो मैं दफ्तर के कार्यों में अपना सिर डाल कर बैठी रहती हूं. पति महोदय का बस यही वाक्य होता है, ‘‘तुम्हें ही सारा काम क्यों दिया जाता है? जरूर तुम ही भागभाग कर हर काम के लिए लपकती होगी.’’

‘‘अरे वर्क फ्रौम होम के लिए बात क्यों नहीं करती हो,’’ पर फिर हर माह की 5 तारीख को जब वेतन आता है तो वे ये सारी चीजें भूल जाते हैं और नारी मुक्ति या उत्थान के पुजारी बन जाते हैं.

ऐसे ही एक ठिठुरते हुए रविवार में सब के लिए खाना परोसते हुए मेरे दिमाग में यह खयाल आया क्यों न दफ्तर से छुट्टी ले ली जाए और बस लेटी रहूं. घर पर तो यह मुमकिन नहीं था. पहले तो बिना किसी कारण छुट्टी लेना किसी को हजमन ही होगा दूसरा अगर ले भी ली तो सारा समय घर के कामों में ही निकल जाना है. कहने को मेरे जीवन में बहुत सारे मित्र हैं पर ऐसा कोई नहीं है जिस के साथ मैं ये दिन साझ कर सकूं.

पर न जाने क्यों मन ने कुछ नया करने की ठानी थी, खुद के साथ समय बिताने की दिल ने की मनमानी थी.

जब से ये खयाल मन में जाग्रत हुआ तो कुछ जिंदगी में रोमांच सा आ गया, साथ ही

साथ एक अनजाना डर भी था कि कही मैं इस वायरस की चपेट में न आ जाऊं. पर फिर अंदर की औरत बोल उठीं, अरे तो रोज दफ्तर भी तो जाती हो. उस में भी तो इतना ही जोखिम है. मेरे पास भी कुछ ऐसा होना चाहिए है जो मेरा बेहद निजी हो. पूरा रविवार दुविधा में बीत गया. करूं या न करूं ऐसे सोचते हुए सांझ हो गई. मुझे कहीं घूमने नहीं जाना था न ही किसी दर्शनीय स्थल के दर्शन करने थे, कारण था कोरोना. मुझे तो अपने अंदर की औरत को पहचानना था कि क्या इस  कोरोना की आपाधापी में उस में थोड़ी सी चिनगारी अभी भी बाकी है.

दफ्तर में तो छुट्टी की सूचना दे दी थी पर अब सवाल यह था कि खुद को कहां पर ले जाऊं, क्या होटल में सेफ रहेगा या मौल के किसी कैफे में? तभी फेसबुक पर ओयो रूम दिखाई पड़े. यहां पर घंटों के हिसाब से कमरे उपलब्ध थे. किराया भी बस हजार रुपए था.

कोरोना के कारण घर से ही चैकइन करने की सुविधा थी पर फिर दिमाग में आया कि कहीं पुलिस की रेड न पड़ जाए क्योंकि ऐसे माहौल में कमरे घंटों के हिसाब से क्यों लिए जाते हैं यह सब को पता है तो ऐसे कमरों में ठहरना क्या सुरक्षित रहेगा?

इधरउधर होटल खंगाले तो कोई भी होटल 5 हजार से कम नहीं था. पति महोदय मेरी समस्या को चुटकी में ही हल कर सकते थे पर यह तो मेरी खुद के साथ की डेट थी, फिर उन से मदद कैसे ले सकती थी और अगर सच बोलूं तो मुझे अपने पति से कोई लैक्चर नहीं सुनना था.

यह बात नहीं सुननी थी कि मैं मिड ऐज क्राइसिस से गुजर रही हूं, इसलिए ऐसी

बचकानी हरकतें कर रही हूं. माह की 27 तारीख थी बहुत अधिक शाहखर्च नहीं हो सकती थी, इसलिए धड़कते दिल से एक ओयो रूम 900 रुपए में 8 घंटों के लिए बुक कर लिया.

वहां से कन्फर्मेशन में भी आ गया. फिर शाम के 5 बजे से मैं अपने मोबाइल को ले कर बेहद सजग हो गई जैसे मेरी कोई चोरीछिपी हो उस में. बेटे ने जैसे ही हमेशा की तरह मेरे मोबाइल को हाथ लगाया, मैं फट पड़ी कि मैं तुम्हारे मोबाइल को हाथ नहीं लगाती हूं तो तुम्हें क्या जरूरत पड़ी है?

बेटा खिसिया कर बोला, ‘‘मम्मी मेरे एक फ्रैंड ने मुझे ब्लौक कर रखा है या नहीं बस यही देखना चाहता था.’’

पति और घर के अन्य सदस्य मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देख रहे थे.

मैं बिना कोई उत्तर दिए रसोई में घुस गई. फिर रात को मैं ने अपने कार्ड्स और आईडी सब अपने पर्स में रख लिए. सुबह दफ्तर के समय ही घर से निकली और धड़कते दिल से कैब बुक करी. कैब ड्राइवर ने कैब उस गंतव्य की तरफ बढ़ा दी और फिर करीब आधे घंटे के बाद हम वहां पहुंच गए.

मेरे उतरते हुए कैब ड्राइवर ने पूछा, ‘‘मेम आप को यहीं जाना था न?’’

मुझे पता था वह बाहर ओयो रूम का बोर्ड देख कर पूछ रहा होगा, मैं कट कर रह गई पर ऊपर से खुद को संयत करते हुए बोली, ‘‘हां, परंतु तुम क्यों पूछ रहे हो?’’

वह कुछ न बोला पर उस के होंठों पर व्यंग्यात्मक मुसकान मुझ से छिपी न रही.

मैं अंदर पहुंची पर कोई रिसैप्शन नहीं दिखाई दिया, फिर भी मैं अंदर पहुंच गई तो एक ड्राइंगरूम दिखाई दिया, 2 बड़ेबड़े सोफे पड़े हुए थे और एक डाइनिंगटेबल भी थी. 2 लड़के सोए हुए थे, मुझे देखते हुए आंखें मलते हुए उठने वाले ही थे कि मैं तीर की गति से बाहर निकल गई.

खुद पर गुस्सा आ रहा था, एक भी ऐसा कोना नहीं है मेरा इस शहर में, शहर में ही क्यों, मेरा निजी कुछ भी नहीं है मेरे जीवन में, खुद के साथ समय बिताना भी मुश्किल हो गया था. जो फोन नंबर वहां पर अंकित था, वह मिलाया तो पता लगा कि वह नंबर आउट औफ सर्विस है. यह स्थान एक घनी आबादी में स्थित था, इसलिए सड़क पर आतेजाते लोगों में से कुछ मुझे आश्चर्य से और कुछ बेशर्मी से देख रहे थे. मैं बिना कुछ सोचे तेजतेज कदमों से बाहर निकल गई. नहीं समझ आ रहा था कि कहां जाऊं. ऐसे ही चलती रही. एक मन किया कि किसी मौल मैं चली जाऊं पर फिर वहां पर मैं क्या खुद से गुफ्तगू कर पाऊंगी. करीब 1 किलोमीटर चलतेचलते फिर से एक इमारत दिखाई दी, ओयो रूम का बोर्ड यहां भी मौजूद था. न जाने क्या सोचते हुए मैं उस इमारत की ओर बढ़ गई.

वहां पर देखा कि रिसैप्शन आरंभ में ही थी. उस पर बैठे हुए पुरुष को देख कर मैं ने बोला, ‘‘सर कमरा मिल जाएगा.’’

रिसैप्शनिस्ट बोला, ‘‘जरूर मैडम, कितने लोगों के लिए.’’

मैं ने कहा, ‘‘बस मैं.’’

उस ने आश्चर्य से मेरी तरफ देखा और फिर बोला, ‘‘मैडम कोई मेहमान या दोस्त आएगा आप से मिलने?’’

मैं बोली, ‘‘नहीं, दरअसल घर की चाबी नहीं मिल रही है.’’

न जाने क्यों एक झठ जबान पर आ गया खुद को सामान्य दिखाने के लिए. मुझे मालूम था कि अगर उसे पता चलेगा कि मैं ऐसे ही समय बिताने आई हूं, तो शायद वह मुझे पागल ही करार कर देता.

आज पहली बार मन ही मन कोरोना को धन्यवाद दिया, मास्क के पीछे मुझे बेहद सुरक्षित महसूस हो रहा था. रूम नंबर 202, रूम के अंदर घुसते ही मैं ने देखा एक छोटा सा बैड है, साफसुथरी रजाई भी रखी हुई थी. मेरे सामने ही रूम को दोबारा सैनिटाइज करा गया था. मैं ने  राहत की सांस ली और अपना मास्क निकाला और फिर दोबारा से हाथ सैनिटाइज कर लिए. टैलीविजन चलाने की कोशिश करी तो जाना मुझे तो पता ही नहीं ये नए जमाने के स्मार्ट टैलीविजन कैसे चलाते हैं. थोड़ीबहुत कोशिश करी और फिर नीचे से लड़का बुला कर टैलीविजन चलवाया गया. एक म्यूजिक चैनल औन किया तो जाना न जाने कितने वर्ष हाथों से फिसल गए. न कोई गाना पहचान पा रही थी और न ही किसी अभिनेता या अभिनेत्री को. फिर भी कुछ ?िझक के साथ रजाई ओढ़ते हुए मैं लेट गई मन में यह सोचते हुए कि न जाने कितने जोड़ों ने इसे ओढ़ कर प्रेम क्रीड़ा करी होगी. टनटन करते हुए व्हाट्सऐप के दफ्तर वाले गु्रप पर कार्यों की बौछार हो रही थी. मैं ने तुरंत डेटा बंद किया.

अंदर बैठी हुई महिला ने मुसकरा कर शुक्रिया किया. करीब आधे घंटे बाद एक असीम शांति महसूस हुई, ऐसी शांति जो कभी योगा में भी लाख कोशिशों के बाद नहीं हुई थी. लेटे हुए यह सोच रही थी कि कौनकौन से मोड़ से जिंदगी गुजर गई और मुझे पता भी नहीं चला. फिर गुसलखाने जा कर अपनेआप को निहारने लगी, घर पर न तो फुरसत थी और न ही इजाजत, जैसे ही देखना चाहती कि एकाएक एक जुमला उछाला जाता, ‘‘अब क्या देख रही हो, कौन सा 16 साल की हो?’’

जैसे सुंदर दिखना बस युवाओं का मौलिक अधिकार है. 40 वर्ष की महिला तो महिला नहीं एक मशीन है. आईना देखते हुए मेरी त्वचा ने चुगली करी कि कब से पार्लर का मुंह नहीं देखा?

शायद पहले तो फिर भी माह में 1 बार चली जाती थी पर अब तो 9 माह से भी अधिक समय हो गया था. बाल भी बेहद रूखे और बेजान लग रहे थे. ?िझकते हुए रूम से बाहर निकली तो देखा सामने ही पार्लर भी था. बिना कुछ सोचे कमरे का ताला लगाया और पार्लर चली गई. हेयरस्पा और फेशियल कराया. बहुत मजा आया.

ऐसा लगा जैसे खुद के लिए कुछ करना अंदर से असीम शांति और खुशी भर

देता है. जब 3 घंटे बाद कमरे में पहुंची तो कस कर भूख लग गई थी. इंटरकौम से खाना और्डर किया. बहुत दिनों बाद बिना किसी ग्लानि के अपनी पसंदीदा तंदूरी रोटी और बेहद तीखा कोल्हापुरी पनीर खाया. अब कोरोना का डर काफी हद तक दिमाग से निकल गया था.

जब पूरे 8 घंटे बिताने के बाद मैं घर पहुंची तो देखा चारों ओर घर में तूफान आया हुआ था. अभीअभी दोनों बच्चे लड़ाई कर के बैठे थे. पर यह क्या मुझे बिलकुल भी गुस्सा नहीं आया, गुनगुनाती हुई मैं रसोई में घुस गई और गरमगरम पोहे बनाने में जुट गई.

अंदर बैठी हुई खूबसूरत महिला फिर से दिल के दरवाजे पर दस्तख कर रही थी कि मैं अगली डेट पर कब जा रही हूं? शायद दूसरों को खुश करने से पहले खुद को खुश करना जरूरी है. इस कोरोनाकाल में मेरे अंदर जो चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ गया था वह आज काफी हद तक कम हो गया था.

एक दिन स्वयं के साथ बिता कर एक बात तो समझ आ गई कि खुद के साथ समय बिताना बेहद जरूरी है. लेकिन एक डेट के बाद यह भी समझ में अवश्य आ गया कि ऐसा कौंसैप्ट हमारे समाज में अभी प्रचिलित नहीं है. अभी यह रचना लिखते हुए भी मेरे दिमाग में यह बात आ रही है कि अगर उस दिन मुझे किसी जानपहचान वाले ने देख लिया होता तो शायद मैं भी उस के लिए एक अनसुलझी कहानी बन जाती. पर हम सब को तो मालूम है न कि हर प्रेम कहानी में थोड़ाबहुत जोखिम तो होता ही है और यह जोखिम मैं अब लेने के लिए तैयार हूं.

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: शूटिंग करते हुए सेट पर रुही को लगी चोट, देखें वीडियो

टीवी का मोस्ट पॉपुलर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ दर्शकों को बहुत पसंद आ रहा है. शो में आए दिन कई सारे ट्विस्ट देखने को मिल रहे है. टीआरपी के मामले मे ये सीरियल धूम मचा रहा है. इस सीरियल में समृद्धि शुक्ला और शहजादा धामी के साथ प्रतिक्षा होनमुखे को भी पसंद किया जा रहा है. सीरियल में प्रतिक्षा रूही का किरदार निभा रही है, जो हमेशा अरमान के आगे पीछे घूमती रहती है. एक्ट्रेस शो के सेट पर काफी मस्ती करती नजर आती रहती है लेकिन इस बीच एक्ट्रेस को चोट लगने का ममला सामने आया है. इस बात की जामकारी एक्ट्रेस ने खुद ही शेयर की है. इस वीडियो के जरिए प्रतिक्षा ने उस सीन का भी जिक्र किया, जिसमें उन्हें काफी ज्यादा चोट लगी है.

प्रतिक्षा होनमुखे पैर में लगी चोट

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ सीरियल की एक्ट्रेस प्रतिक्षा होनमुखे ने सेट से अपना एक वीडियो शेयर किया है. जिसमे अभिरा और रूही की मुंह दिखाई का सीन दिखाया गया. उस दौरान प्रतिक्षा को पैर में चोट लगने का सीन करना था, लेकिन एक्ट्रेस को असल मे चोट लग जाती है. वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रतिक्षा जैसी ही भागकर जाती है, तो उसका पैर टेबल से टकरा जाता है. हर किसी को लगता है कि एक्ट्रेस सीन की अच्छे से कर रही हैं, लेकिन बाद में सबको असल में लगी चोट का पता चलता है. इसके बाद सेट पर मौजूद सभी लोग प्रतिक्षा होनमुखे की देखरेख में लग जाते हैं. इस दौरान एक्ट्रेस का पैर पर काफी सूजन भी दिख रही है. लेकिन, सभी लोग एक्ट्रेस के साथ मस्ती-मजाक करते दिख रहे हैं. इस वीडियो के कमेंट में प्रतिक्षा को फैंस शेरनी बता रहे हैं.

 

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’12 वीं फेल’ के मनोज कुमार शर्मा बने पापा, घर आया नन्हा मेहमान

‘12वी फेल’ फेम एक्टर विक्रांत मैसी और शीतल ठाकुर के घर में गूंजी किलकारियां. इस प्यारे से जोड़े ने अपने पहले बच्चे, एक बेबी बॉय का स्वागत किया है. 7 फरवरी को, कपल ने इंस्टाग्राम पर एक प्यारे नोट के साथ इसकी घोषणा की. वहीं इस प्यारे जोड़े ने 2022 में शादी की थी.

इंस्टाग्राम पर शेयर की खुशखबरी

विक्रांत मैसी और शीतल ठाकुर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक संयुक्त पोस्ट शेयर की है. जिसमें उन्होंने अपनी खुशी व्यक्त की और एक प्यारा सा नोट लिखा. इस प्यारे नोट में लिखा है, तारीख (7 फरवरी) का उल्लेख करते हुए- “क्योंकि हम एक हो गए हैं. हम अपने बेटे के आगमन की घोषणा करते हुए खुशी और प्यार से फूले नहीं समा रहे हैं, लव शीतल और विक्रांत.

विक्रांत मैसी को स्टार्स दे रहें हैं बधाई

विक्रांत मैसी की इस पोस्ट पर यूजर्स जमकर कमेंट्स कर रहे हैं. आम लोगों के साथ-साथ स्टार्स भी विक्रांत मैसी को कमेंट कर बधाई देते हुए नजर आए. विक्रांत मैसी की पोस्ट पर कमेंट करते हुए सुनील शेट्टी ने दिल वाले इमोजी के साथ बधाई दी है. इसके अलावा मौनी रॉय, वाणी कपूर, राशि खन्ना, ’12वीं फेल’ एक्ट्रेस मेधा शंकर समेंत कई स्टार्स ने कमेंट किए.

 

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विक्रांत मैसी और शीतल ठाकुर ने 2022 में की शादी

फरवरी 2022 में शादी करने से पहले विक्रांत मैसी और शीतल ठाकुर कुछ समय से डेटिंग कर रहे थे. शादी के बाद अपने जीवन के बारे में बात करते हुए, विक्रांत ने मीडिया इंटरव्यू में बताया, “मेरी शादीशुदा जिंदगी बहुत अच्छी रही है. हां, बहुत सी चीजें हैं जो अलग हैं अब. मैं बहुत कुछ अलग महसूस करता हूं लेकिन मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त से शादी की और मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं मांग सकता था. मुझे एक नया घर मिला, और वह भी एक आशीर्वाद रहा. इसलिए जीवन अच्छा है और भगवान बहुत दयालु हैं. काम के लिहाज से , यह भी बहुत अच्छा साल रहा. मैं जिस तरह का काम कर रहा हूं और जो मैंने किया है, उससे मैं वास्तव में खुश हूं.’

 

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