क्या आप भी करते हैं फर्स्ट डेट पर ये गलतियां

डेटिंग ऐप के जरिए संपर्क में आए मीनल और आरुष आज पहली बार डेट पर मिलने वाले थे. मीनल ने अपनी बैस्ट ड्रैस पहनी और आरुष भी खुद को अच्छी तरह ग्रूम कर के वैन्यू पर पहुंचा ताकि फर्स्ट डेट पर दोनों एकदूसरे पर लास्टिंग इंप्रैशन छोड़ सकने में कामयाब रहें. फर्स्ट डेट की तैयारी कितनी उल्लसित करती है, यह बात आज का युवावर्ग भलीभांति जानता है. आज के समय में कोई बिरला ही होगा जो डेटिंग न करता हो. ठीक भी है, मिलेनियल्स का जमाना जो है. कपड़े, फुटवियर, हेयर, एक्सेसरीज से आप तो जंच गए, पर इस ओर भी ध्यान दें कि कहीं आप से कोई ऐसी भूल न हो जाए जिस से आप की पहली डेट आखिरी बन कर रह जाए. जैसा कि मीनल और आरुष के साथ हुआ. आइए, जानते हैं कुछ ऐसी बातें जिन को अवौइड करना ही आप के हित में है.

सैक्स

मीनल और आरुष ने एक औपचारिक हायहैलो के बाद कौफी और्डर की. इस से पहले कि दोनों एकदूसरे से कुछ खुल पाते, आरुष अपनी फैंटेसीज बताने लगा. अभीअभी हुई मुलाकात में इतनी आंतरिक बातें मीनल को कौंशियस करने लगीं. उस ने 2-3 बार टौपिक बदलने की नाकाम कोशिश की, पर जब आरुष अपनी पुरानी रिलेशनशिप्स में हुए सैक्स इंट्रैक्शन ही बताता रहा तो मीनल बहाने से उठी और वापस घर लौट गई.

ऐसा नहीं है कि फर्स्ट डेट पर आप सैक्स के बारे में बात नहीं कर सकते, लेकिन सिर्फ सैक्स के बारे में बात करने से पहले चेत जाएं. डेटिंग लाइफस्टाइल कोच मोहित राणे के अनुसार, बेहतर है कि आप सैक्स के बारे में तभी बात करें जब आप सैक्स करें. उस से पहले सैक्स के बारे में बातचीत होशियारी से करनी चाहिए ताकि वह प्लेफुल और फ्लर्टी लगे, न कि अश्लील. खासकर तब जब आप के डेटिंग पार्टनर ने इस विषय में अपनी विकलता दिखा दी हो. ऐसी स्थिति में फौरन बात बदल देने में ही होशियारी है.

एक्स

जब शौर्य ने ऋषिता से उस की पुरानी रिलेशनशिप्स के बारे में पूछा, तब उस ने एक कैजुअल जवाब की अपेक्षा की थी. इस विषय पर थोड़ी सी बात कर शौर्य, ऋषिता को कंफर्टेबल करना चाहता था. लेकिन, ऋषिता ने जो एक बार बोलना शुरू किया तो वह अपने पुराने बौयफ्रैंड्स के किस्सों में ही खो गई. शौर्य को जल्दी ही अपनी गलती का एहसास हो गया जिस का नतीजा यह हुआ कि यह फर्स्ट डेट उन दोनों की लास्ट डेट बन कर रह गई.

सभी का पास्ट होता है, यह बात आज का युवा अच्छी तरह सम झता है. इसलिए अपने पुराने प्रेमियों के बारे में बात करना आज उतना गलत नहीं है जितना एक जमाने में हुआ करता था. परंतु फिर भी आप अपनी डेट पर इस नए डेटिंग पार्टनर से कनैक्शन बनाने आए हैं, यह बात न भूलें. रिलेशनशिप काउंसलर अमन भौंसले कहते हैं कि पहली डेट पर अपने पुराने रिश्तों के बारे में या फिर आप कितनी बार डेट कर चुके हैं, या कितनों से कर चुके हैं जैसी बातों को अवौइड करना बेहतर है. इस से आप के डेटिंग पार्टनर को यह लग सकता है कि आप उस में इंटरैस्टेड नहीं हैं.

गिलेशिकवे

पलक का बचपन कठिनाइयों के दौर से गुजरा. अपनी हर फर्स्ट डेट पर सारी अवसादपूर्ण भावनाएं उड़ेलने के कारण वह आज भी अकेली है.

डेटिंग एक नया रिश्ता बनाने के लिए होती है, न कि अपनी भड़ास निकालने को एक नया कंधा ढूंढ़ने के लिए. फर्स्ट डेट पर अपने दुखड़े ले कर न बैठ जाएं. आज में जिएं. पुरानी बुरी यादों या गलत अनुभवों को पहली डेट पर सा झा करने, और फिर करते रहने की कोई जरूरत नहीं. आप का पार्टनर आप को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखे जो अपनी जिंदगी को संभालना जानता है. आत्मविश्वास की कमी या चिड़चिड़ा व्यक्तित्व सामने वाले को कभी आकर्षित नहीं कर सकता.

आर्थिक संबलता

डेट पर इस का अंदाजा लगाना कि सामने वाला कितना कमाता है या अपनी सैलरी का बखान करना, दोनों ही अनुचित हैं. पहले आप दोनों एकदूसरे को सम झने की कोशिश करें. आप दोनों की पसंदनापसंद, आप की ख्वाहिशें, आप का पैशन आदि रिश्ते को आगे ले जाने के लिए इन का मेल खाना आवश्यक है. कमाई, घर, गाड़ी आदि जीवन में बनते रहते हैं. यदि आप कुछ जांचना ही चाहते हैं तो उस की शिक्षा, शैक्षणिक संस्था, उस में आगे बढ़ने की ललक, लोगों और रिश्तों के प्रति उस का नजरिया परखें.

जल्दबाजी

सोना और विकास कैफे में बैठे कौफी पी रहे थे. बातचीत भी पौजिटिव चल रही थी कि तभी सोना कहने लगी, ‘‘शादी के बाद तुम्हें मेरा जौब करना बुरा तो नहीं लगेगा?’’ यह सुनते ही विकास चौंक गया. ‘‘शादी? किस की शादी?’’ कहता हुआ वह उठ खड़ा हुआ. सोना आज भी पछताती है कि फर्स्ट डेट पर इतना कुछ कहनेपूछने की गलती उस ने क्यों की.

जो समय बीत रहा है, उसी पर अपना फोकस रखें. न पीछे की सोचें और न आगे के बारे में अधिक सपने बुनें. इस समय को एंजौय करें. आगे के प्लान बनाने की जल्दबाजी दिखाने से आप का पार्टनर सचेत हो सकता है. क्या पता वह किस आशय से आप से मिलने आया है. पहली डेट को पहला कदम मान कर आराम से चलें. चाहे आप को व्यक्ति भा गया हो, फिर भी आगे मिलने या भविष्य के सुनहरे सपनों की कल्पनाओं से उसे डरा न बैठें.

यदि आप को अपना पार्टनर पसंद आ गया है तो अपनी फर्स्ट डेट को सैकंड डेट, थर्ड डेट और आगे की डेट्स में परिवर्तित करने की कोशिश करें. सोचसम झ कर आगे बढ़ें. हर बार अपने पार्टनर में कुछ नया पाने की अपेक्षा रखें. जैसे बच्चा चलना सीखता है वैसे ही फर्स्ट डेट में बेबी स्टैप्स लेना सम झदारी है. सीधे हाईजंप लगाने की गलती कभी न करें.

शादी को 3 साल हो गए हैं पर अभी तक कंसीव नहीं कर पाई हूं?

सवाल-

मैं 26 वर्षीय विवाहिता हूं. शादी को 3 साल हो गए हैं पर अभी तक कंसीव नहीं कर पाई हूं. इस के लिए अब मैं सैक्स के दौरान नीचे तकिया भी रखती हूं और पति से कहती हूं कि स्खलित होने के बाद वे देर तक उसी अवस्था में रहें. फिर भी कंसीव नहीं कर पा रही जबकि मेरे पीरियड्स रैग्युलर हैं और हम नियमित रूप से सैक्स भी करते हैं. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब-

सैक्स के दौरान इजैक्युलेशन के समय पुरुष के अंग से काफी तीव्र वेग से स्पर्म निकलते हैं और गहराई तक पहुंचते हैं. जो स्पर्म स्ट्रौंग नहीं होते वे वैजाइना से बाहर भी निकल जाते हैं, मगर इस से गर्भधारण प्रक्रिया में कोई फर्क नहीं पड़ता. यह एक आम प्रक्रिया है और इस से घबराने की भी जरूरत नहीं है. अगर पति का स्पर्म काउंट सही है, आप का पीरियड्स  रैग्युलर है तो संभव है कि आप के कंसीव न कर पाने के पीछे कोई और मैडिकल वजह हो. यह वजह आप में या फिर आप के पति दोनों में से किसी में भी हो सकती है. अच्छा यही होगा कि आप किसी स्त्रीरोग विशेषज्ञा से सलाह लें और फर्टिलिटी के बारे में बात करें. तभी आप जल्दी कंसीव कर पाएंगी.

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मां बनने का एहसास हर महिला के लिए सुखद होता है. लेकिन यदि किसी कारण से एक महिला मां के सुख से वंचित रह जाए तो उसके लिए उसे ही जिम्मेदार ठहराया जाता है. हालांकि, कंसीव न कर पाने के कई कारण होते हैं लेकिन यह एक महिला के जीवन को बेहद मुश्किल और दुखद बना देता है. दरअसल, हमारे देश में आज भी बांझपन को एक सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता है. इसका प्रकोप सबसे ज्यादा महिलाओं को झेलना पड़ता है. जब भी कोई महिला बच्चे को जन्म नहीं दे पाती है तो समाज उसे हीन भावना से देखने लगता है. इस कारण से एक महिला को लोगों की खरी-खोटी सुननी पड़ती है जिसका उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है. ऐसी महिलाएं उम्मीद करती हैं कि लोग उनकी स्थित और भावनाओं को समझेंगे. परिवार और दोस्तों से बात करके उन्हें कुछ हद तक अच्छा महसूस होता है इसलिए ऐसे समय में बाहरी लोगों से मिलने-जुलने से बचें क्योंकि गर्भवती महिला या बच्चों को देखकर आप डिप्रेशन का शिकार हो सकती हैं.

पगली: आखिर क्यूं महिमा अपने पति पर शक करती थी

विश्वासघात: आखिर कैसे लिया अमृता ने अपना बदला

एक शाम मैं सीडी पर अपनी मनपसंद फिल्म ‘बंदिनी’ देख रही थी कि अपने सामने के खाली पड़े दोमंजिले मकान के सामने ट्रक रुकने और कुछ देर बाद अपने दरवाजे पर दस्तक पड़ते ही समझ गई कि अब मैं फिल्म पूरी नहीं देख पाऊंगी. खिन्नतापूर्वक मैं ने दरवाजा खोला तो सामने ट्रक ड्राइवर को खड़े पाया. वह कह रहा था, ‘‘सामने जब रस्तोगी साहब आ जाएं तो उन्हें कह दीजिएगा, मैं कल आ कर किराया ले जाऊंगा.’’

मैं कुछ कहती, इस से पहले वह चला गया.

मैं बालकनी में ही कुरसी डाल कर बैठ गई. शाम को सामने वाले घर पर आटोरिकशा रुकते देख मैं समझ गई कि वे लोग पहुंच गए हैं.

घंटे भर में नमकीनपूरी और आलूमटर की सब्जी बना कर टिफिन में पैक कर के मैं अपने नौकर के साथ सामने वाले घर पहुंची. कालबैल बजाने पर 5 साल की बच्ची ने दरवाजा खोला. तब तक रस्तोगीजी अपनी पत्नी सहित वहीं आ पहुंचे.

मैं ने बताया कि मैं सामने के मकान में रहती हूं. मिसेज रस्तोगी ने नमस्कार किया और बताया कि उन का मेरठ से दिल्ली स्थानांतरण हुआ है. सफर से थकी हुई हैं,

घर भी व्यवस्थित करना है और बच्चे भूखे हैं, अभी तुरंत तो गैस का कनैक्शन नहीं मिलेगा. कुछ समझ में नहीं आ रहा है, क्या करूं?

मैं ने कहा, ‘‘घबराइए नहीं. मैं घर से खाना बना कर लाई हूं. नहाधो कर खाना वगैरह खा लीजिए. वैसे मेरे घर में 1 अतिरिक्त सिलेंडर है, फिलहाल उस से काम चला लीजिए. बाद में कनैक्शन मिलने पर वापस कर दीजिएगा.’’

इस तरह मेरा परिचय रस्तोगी परिवार से हुआ. उन्होंने अपने तीनों बच्चों का नाम पास के मिशनरी स्कूल में लिखवा दिया था. धीरेधीरे वे नए माहौल में एडजस्ट हो गए.

मेरे चारों बच्चे अपनी पढ़ाई में लगे रहते थे. बेटी पारुल ने मैट्रिक का इम्तहान दिया था, प्रिया आई.काम. कर रही थी. पीयूष एम.बी.ए. और अनुराग मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहा था. इस तरह सभी व्यस्त थे.

कभीकभार मैं सामने रस्तोगीजी के घर उन की पत्नी से गपशप करने पहुंच जाती, कभी वह मेरे घर आ जाती. 27 वर्षीय अमृता बहुत जिंदादिल औरत थी, हमेशा हंसती और हंसाती रहती. मैं ने घर में ही बाहर के कमरे में ब्यूटीपार्लर खोल रखा था. अमृता पार्लर के कामों में मेरी मदद भी कर देती थी.

इधर 3-4 दिनों से वह मेरे घर नहीं आ रही थी तो मैं उस के घर पहुंच गई. कालबैल बजाने पर एक अपरिचित चेहरे ने दरवाजा खोला. मैं अंदर गई. तभी किचन से ही अमृता ने आवाज लगा कर मुझे वहीं बुला लिया. मैं किचन में गई. अमृता आलूगोभी के पकौड़े  तल रही थी. उसी ने बताया कि उस की छोटी बहन रति का दाखिला उन लोगों ने यहीं कराने का फैसला किया है. कालेज के होस्टल में रहने के बजाय वह उन के साथ ही रहेगी.

अमृता का अब पार्लर या मेरे घर आना बहुत कम हो गया था. अब वह बहन, बच्चे और पति की तीमारदारी में ही लगी रहती. कभी घर आती भी तो अपनी बहन रति को फेशियल या हेयर कटिंग कराने. मैं उस से कहती, ‘‘अमृता, कभी अपनी तरफ भी ध्यान दिया करो.’’

अपने चिरपरिचित हंसोड़ अंदाज में वह कहती, ‘‘मुझे कौन सा किसी को दिखाना है. रति को कालेज जाना पड़ता है, इसे ही ब्यूटी ट्रीटमेंट दीजिए.’’

रति नाम के ही अनुरूप खूबसूरत थी, गोरी, लंबी, सुराहीदार गरदन और छरहरा बदन. उस के जिस्म पर पाश्चात्य पोशाकें भी बहुत फबती थीं.

दिन बीतते गए, मैं अपने घर और पार्लर में व्यस्त थी. अमृता का आना बिलकुल खत्म हो गया था. एक दिन मैं पारुल के साथ शौपिंग के लिए निकली हुई थी, कि मार्केट से सटे गायनोकोलोजिस्ट के क्लीनिक की सीढि़यों से उतरते अमृता को देखा. शुरू में तो मैं उसे पहचान भी नहीं पाई. कभी गदराए जिस्म वाली अमृता सिर्फ हड्डियों का ढांचा नजर आ रही थी. जब तक मैं उस तक पहुंचती, उस की टैक्सी दूर निकल गई थी.

शाम को मैं ने उस के घर जाने का निश्चय किया. मैं उस के घर गई तो मुझे देख कर उसे प्रसन्नता नहीं हुई. वह दरवाजे पर ही खड़ी रही तो मैं ने ही कहा, ‘‘क्या अंदर नहीं बुलाओगी?’’

हिचकते हुए वह दरवाजे से हट गई. मैं अंदर घुसी ही थी कि रस्तोगी और रति की सम्मिलित हंसी गूंज उठी. अमृता लगभग खींचते हुए मुझे अपने कमरे में ले आई.

मैं ने ही शुरुआत की, ‘‘सचसच बताना अमृता, क्या बात है?’’

जोर देने पर जैसे रुका हुआ बांध टूट पड़ा. उस ने कहा, ‘‘दीदी, आप ने सही कहा था, मुझे खुद पर भी ध्यान देना चाहिए था. मैं ने कभी जिस बात की कल्पना भी नहीं की थी, वह हुआ. रति और विजय में नाजायज संबंध हैं. मैं जब रति को वापस भेजने की बात करती हूं तो रति तो कुछ नहीं कहती पर विजय मुझे मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से प्रताडि़त करते हैं. कहते हैं, ‘रति नहीं जाएगी, तुम्हें जहां जाना हो जाओ.’ रति प्रत्यक्ष में कुछ नहीं कहती पर अकेले में मुझे घर से बाहर निकालने की जिद विजय से करती है.’’ मैं सुन कर स्तब्ध रह गई.

‘‘मैं तो डाक्टर के पास भी गई थी. घर में यह स्थिति है और मैं प्रैगनेंट हूं. मैं इस से छुटकारा चाहती थी, पर डाक्टर ने कहा, ‘‘तुम बहुत कमजोर हो, ऐसा नहीं हो सकता,’’

मैं ने कहा, ‘‘तुम इतनी कमजोर कैसे हो गई हो?’’

उस ने कहा, ‘‘सब समय की मार है.’’

6 महीने बीत गए. एक रात 12 बजे विजय रस्तोगी हांफता हुआ मेरे घर आया. उस ने बताया, ‘‘अमृता को ब्लीडिंग हो रही है, वह तड़प रही है. उसे हास्पिटल ले जाना है, प्लीज अपनी गाड़ी दीजिएगा.’’

यह सुनते ही हम आननफानन उसे गाड़ी पर लाद कर साथ ही अस्पताल पहुंचे. तुरंत उसे आई.सी.यू. में भरती किया गया, सीजेरियन द्वारा उस ने एक पुत्र को जन्म दिया, 4 घंटे बाद वह होश में आई तो उस ने सिर्फ मुझ से मिलना चाहा. नर्स ने सब को बाहर रोक दिया. मैं जब अंदर पहुंची तो उस ने अटकते हुए कुछ कहना चाहा और इशारे से अपने पास बुलाया. मैं पहुंची तो बगल ही में फलों के पास रखी हुई अत्याधुनिक टार्च को उठाने को कहा. उस ने इशारे से फोटो खींचने की बात जैसे ही की कि उस के प्राण पखेरू उड़ गए. मैं ने उस टार्च को अपने बैग में रख लिया.

सभी लोग रोने लगे. रति रोते हुए कह रही थी, ‘‘दीदी का पैर फिसलना उन के लिए काल हो गया. काश, उन का पैर न फिसला होता.’’ अमृता के घर मातमी माहौल था. क्रियाकर्म से निबटने के बाद मैं घर में बैठी आया हुआ ईमेल

चेक कर रही थी. उस में मुझे अमृता का मेल मिला, जिस में मुझे पता चला कि हादसे वाले दिन उस ने सेल्समैन से सिस्टेमैटिक टार्च कम वीडियोकैमरा खरीदा था, जो देखने साधारण टार्च लगता था, परंतु वह वीडियोग्राफी और रोशनी दोनों का काम करता था. वह मुझ से मिल तो नहीं सकती थी, इसलिए मुझे मेल किया था.

मैं ने उस की टार्च को उलटपुलट कर देखा, तो उस में मुझे एक कैसेट मिला. मैं ने उसे सीडी में लगाया. औन करने पर मैं यह देख कर दंग रह गई कि उस में विजय रस्तोगी और रति लातघूंसों से अमृता की पिटाई कर रहे थे. रस्तोगी की लात जोर से पेट पर पड़ने से अमृता छटपटाती हुई फर्श पर गिर कर बेहोश हो गई. पूरा फर्श खून से लाल होने लगा था. महंगी टार्च की असलियत जाने बगैर दोनों ने अमृता को फिजूलखर्ची के लिए पिटाई की थी.

मैं ने तुरंत हरिया को भेज कर अमृता के मम्मीपापा को अपने घर बुला कर उन्हें कैसेट दिखलाया, जिसे देख कर उन्होंने सिर पीट लिया. सहसा उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि रति ऐसा घृणित कार्य कर सकती है, परंतु आंखों देखी को झुठलाया नहीं जा सकता था.

रति और विजय से पूछने पर दोनों बिफर पड़े. तब अमृता के पापा ने उन्हें सीडी औन कर उन की करतूतों का कच्चा चिट्ठा उन्हें दिखा दिया. शर्म, ग्लानि और क्षोभ से रति ने कीटनाशक पी लिया. अस्पताल ले जाने के क्रम में ही रति की मौत हो गई.

अमृता के मातापिता ने तुरंत विजय के नाम केस फाइल किया और सबूत के तौर पर सीडी को पेश किया गया, जिस के आधार पर अमृता की हत्या के जुर्म में विजय रस्तोगी को जेल की सजा हो गई. बच्चों को नानानानी अपने साथ ले गए. मुझे इस बात की बेहद खुशी हुई कि अमृता को तड़पातड़पा कर मारने वाले भी अपने अंजाम को पहुंच गए.

मेरे लिप्स पर व्हाइट स्पौट्स हो रहे हैं, मैं क्या करुं?

सवाल-

मेरे लिप्स पर व्हाइट स्पौट्स हो रहे हैं. कैसे ठीक कर सकते हैं इन्हें?

जवाब-

नीबू, संतरे जैसे खट्टे फलों के जूस को पानी के साथ मिक्स कर के होंठों पर लगाने से धब्बों को कम करने में मदद मिलती है. इस जूस को आप कौटन की मदद से धब्बों पर लगा सकती हैं. इस आसान घरेलू उपचार के उपयोग से कुछ ही दिनों में धब्बे गायब होने लगते हैं. अपने आहार में लहसुन के सेवन को बढ़ाने से आप को सफेद धब्बों को कम करने में मदद मिलेगी.

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सर्दियों में आमतौर पर होंठों की नमी खत्म हो जाती है जिस से होंठ खिंचेखिंचे से लगते हैं. कई बार तो होंठ इतने ड्राई हो जाते हैं कि उन की ऊपर त्वचा निकलने के कारण उन में दर्द होने लगता है. ऐसे में होंठों की मुसकान तो गायब होती है साथ ही इस का हमारी सुंदरता पर भी असर पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि होंठों की प्रोपर केयर हो और वो तभी संभव है जब आप स्ट्रोबैरी एैक्सट्रैक्ट वाले लिप बाम का उपयोग करें.

यहां तक कि स्ट्रोबैरी एैक्सट्रैक्ट के फायदों को देखते हुए आजकल बाजार में इस से बने प्रोडक्ट्स की बड़ी रेंज उपलब्ध हैं, जिन का उपयोग कर आप अपने होंठों को ड्राई होने से बचा पाएंगे.

हिमालया स्ट्रोबैरी शाइन लिप केयर

– इस का मौइश्चर फार्मूला आप के होंठों को सौफ्ट रखने का काम करता है.

– नमी प्रदान करने के साथसाथ यह लिप्स के लिए नैचुरल ग्लोस का भी काम करता है. हिमालया स्ट्रोबैरी शाइन लिप बाम में किसी तरह के प्रिजर्वेटिव, सिलिकौंस या मिनरल औयल्स का प्रयोग नहीं किया जाता. इस में 100% प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल है.

Winter Special: सर्दियों में बनाएं यम्मी परांठा, ट्राई करें ये रेसिपी

सर्दियों के मौसम में सादा रोटी से कुछ अलग चटपटा खाने का मन करता है इसके साथ ही इन दिनों  बाजार में भांति भांति की सब्जियां भी भरपूर मात्रा में मिलतीं हैं. इन दिनों में सिंपल दाल रोटी बेस्वाद लगती है वहीं परांठा, पूरी, कचौरी और कुल्चे जैसे तले हुए खाद्य पदार्थ मन को खूब भाते हैं. आमतौर पर परांठे और कुल्चे को पंजाबियों का भोजन माना जाता है परन्तु आजकल तो देश के प्रत्येक कोने में परांठे भी लोकप्रिय हैं. इसी क्रम में हम आज आपको परांठे और कुल्चे बनाना बता रहे हैं तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

-तंदूरी कुल्चा

सामग्री   

मैदा                                     1/2 कटोरी

गेंहूं का आटा                          1/2 कटोरी

प्याज                                   2

बारीक कटी हरी मिर्च                2

बारीक कटा हरा धनिया           1/2 कटोरी

साबुत धनिया                           1/2 टीस्पून

जीरा पाउडर                            1/2 टीस्पून

सौंफ पाउडर                            1/2 टीस्पून

लाल मिर्च पाउडर                      1/4 टीस्पून

गरममसाला                             1/4 टीस्पून

तंदूरी मसाला                           1/2 टीस्पून

मक्खन                                   1 टेबलस्पून

नमक                                      स्वादानुसार

कलौंजी                                  1/2 टीस्पून

विधि

प्याज को एकदम बारीक काटकर नमक लगाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें. 30 मिनट बाद हाथ से निचोड़कर सारा पानी निकाल दें. अब सभी मसाले, हरा धनिया और कटी हरी मिर्च मिलाकर भरावन तैयार कर लें.

मैदा, नमक और गेंहूं के आटे को पानी के सहायता से गूंध लें. तैयार आटे में से 2 रोटी के बराबर लोई लेकर हथेली पर कटोरी जैसा फैलाकर तैयार 1 टेबलस्पून भरावन रखकर चारों तरफ से बंद कर दें. अब चकले पर 4-5 दाने कलौंजी के रखें और कुल्चे को अंडाकार शेप में बेल लें. ध्यान रखें कि कुल्चा बहुत हल्के हाथ से बेलें अन्यथा भरावन बाहर निकलने लगेगा. अब तवे पर 2-4 छींटे पानी के डालें और कुल्चे को रोटी की तरह सेंक लें. तैयार कुल्चे को मक्खन लगाकर मनचाही सब्जी के साथ सर्व करें.

– पालक पनीर परांठा

कितने लोगों के लिए                    6

बनने में लगने वाला समय             20 मिनट

मील टाइप                                वेज

सामग्री (परांठे के लिए)

गेंहूं का आटा                            1 कटोरी

मैदा                                        1 टेबलस्पून

पालक प्यूरी                             1/4 कटोरी

अजवाइन                                1/8 टीस्पून

नमक                                      1/4 टीस्पून

तेल                                      आवश्यकतानुसार

सामग्री (भरावन के लिए)

पनीर                                   250 ग्राम

काली मिर्च पाउडर                 1/4 टीस्पून

चाट मसाला                          1/4 टीस्पून

भुना जीरा पाउडर                  1/8 टीस्पून

बारीक कटा हरा धनिया          1 टीस्पून

बारीक कटी हरी मिर्च               4

विधि

गेंहूं के आटे में नमक, अजवाइन, मैदा, 1 टीस्पून तेल और पालक प्यूरी मिलाकर रोटी जैसा आटा लगा लें.

पनीर को किस लें और चाट मसाला, भुना जीरा, काली मिर्च, हरा धनिया और हरी मिर्च को अच्छी तरह मिला लें.

तैयार पालक के मिश्रण में से रोटी के बराबर लोई लेकर हथेली पर फैलाएं और 1 टेबलस्पून पनीर का भरावन भरकर चारों तरफ से बंद कर दें. हल्के हाथ से बेलकर गर्म तवे पर डालें और घी या तेल लगाकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें.चटनी या अचार के साथ सर्व करें.

-दही का परांठा

कितने लोगों के लिए               6

बनने में लगने वाला समय          30 मिनट

मील टाइप                             वेज

सामग्री ( परांठे के लिए)

गेहूं का आटा                         1 कप

नमक                                  स्वादानुसार

अजवाइन                            1/4 टीस्पून

सेंकने के लिए तेल अथवा घी     पर्याप्त मात्रा में

सामग्री (स्टफिंग के लिए)

ताजा दही                           500 ग्राम

बारीक कटा प्याज               1

बारीक कटी हरी मिर्च           4

बारीक कटा हरा धनिया          1 टीस्पून

चिली फ्लैक्स                       1/4 टीस्पून

नमक                                 1/4 टीस्पून

चाट मसाला                        1/4 टीस्पून

भुना जीरा पाउडर               1/4 टीस्पून

विधि

दही को मलमल के कपड़े में बांधकर रात भर के लिए छोड़ दें ताकि हंग कर्ड तैयार हो जाये. अब इसमें सभी मसाले, हरा धनिया और हरी मिर्च डालकर भरावन तैयार कर लें.

गेहूं के आटे में नमक, अजवाइन डालकर पानी की सहायता से नरम आटा गूंथ लें. रोटी के बराबर की लोई लेकर 1 टीस्पून भरावन भरें और हल्के हाथ से बेलकर परांठा तैयार कर लें. चिकनाई लगे तवे पर दोनों तरफ से घी लगाकर धीमी आंच पर सेंककर अचार या चटनी के साथ सर्व करें.

Winter Special: सर्दियों में पाना चाहती हैं ड्रैंड्रफ फ्री बाल, तो स्कैल्प पर लगाएं नीम हेयर पैक

नीम की पत्‍तियों का पेस्‍ट उनके लिये अच्‍छा होता है जिनके बालों में रूसी है और बाल तेजी से झड़ रहे होते हैं. आज हम आपको नीम के हेयर पैक बनाना सिखाएंगे जिसके साथ आप मेथी, दही, नींबू और हिना आदि का प्रयोग कर सकती हैं.

बालों के लिये मेथी का पावडर भी काफी अच्‍छा माना जाता है क्‍योंकि यह भी बालों से रूसी हटाता है. आइये देखते हैं बालों से रूसी मिटाने के लिये नीम का प्रयोग किस तहर से हेयर पैक में किया जा सकता है.

नीम और मूंग दाल हेयर पैक  सामग्री

नीम के पत्ते, गुड़हल के फूल, मूंग दाल, मेथी बीज, दही

पेस्‍ट बनाने की विधि

– मूंग की दाल और मेथी के दाने को रात भर के लिये पानी में भिगो दें और दूसरे दिन महीन पेस्‍ट बना लें.

– इस पेस्‍ट को नीम की पत्‍तियों के जूस और गुडहल के पत्‍तों के पेस्‍ट में मिला लें.

–  इस पेस्‍ट को सिर पर लगा लें और 20 मिनट तक सूखने दें, उसके बाद सिर को पानी से धो लें.

इस पेस्‍ट के गुण

– इस पेस्‍ट को लगाने से सिर से रूसी, जुएं खतम हो जाएंगे. तथा रूखे बाल मुलायम बन जाएंगे.

– मूंग दाल की वजह से सिर की रूसी भी खतम होगी और बालों की ग्रोथ भी होगी. मेथी से रूसी का खात्‍मा होगा और दही के प्रयोग से सिर की खुजलाहट खतम होगी.

बालों का झड़ना और रूसी के लिये हेयर पैक

सामग्री

नीम की पत्‍तियां, पानी

पेस्‍ट बनाने की विधि

– सिर पर बैक्‍टीरिया और फंगस होने की वजह से बालों में रूसी बढ़ जाती है.

– मुठ्ठी भर नीम की पत्‍तियां ले कर उसे 2 कप पानी में उबालें और जब पानी का रंग हरा हो जाए तब गैस बंद कर दें.

– आप इस पानी का प्रयोग बालों को शैंपू करने के बाद आखिर में कर सकते हैं. इससे बालों में मजबूती आएगी और रूसी खतम होगी.

नीम हेयर पैक

सामग्री

नीम पावडर और हिना पावडर, दही, चाय की पत्‍ती, कॉफी और नींबू का रस

पेस्‍ट बनाने की विधि

1 कप नीम पावडर और 1 कप हिना पावडर, 1 चम्‍मच दही, आधा कप चाय का पानी, आधा कप कॉफी और 12 चम्‍मच नींबू का रस मिलाएं. आप इसमें थोड़ी सी शहद भी मिक्‍स कर सकते हैं. इस पेस्‍ट को सिर पर लगाएं और 30 मिनट के बाद शैंपू कर लें और ठंडे पानी का ही उपयोग करें.

रिजल्‍ट

यह नीम हेयर पैक बालों के लिये बहुत प्रभावी है. इसे लगाने से बालों की अच्‍छी ग्रोथ होती है और रूसी का सफाया होता है. आप इसे हफ्ते में दो बार प्रयोग कर सकते हैं.

माई बैटर हाफ: शादी का रिश्ता बनाना चाहते हैं मजबूत, तो अपनाएं ये बातें

हमारे रिश्तेनाते हमारा सामर्थ्य होते हैं. इन में पतिपत्नी का रिश्ता एकदूसरे के प्रति विश्वास, प्रेम और अपनेपन पर आधारित होता है. दो अजनबी प्यार में पड़ कर विवाहित होते हैं और फिर एक तरह से उन के बीच एक अटूट प्रेम का रिश्ता पनपने लगता है. इसी से ही आगे चल कर स्नेह, प्रेम और अपनेपन की भावनाओं से रिश्तों का धागा बुना जाता है.

यह अपनापन ही हमारे मन को हमेशा से उमंग देता रहता है और यही अनुभूति पतिपत्नी के रिश्तों में भी होती है. इस रिश्ते में एक मन होता है विश्वास रखने वाला तो दूसरा मन होता है समझने वाला. कई बार पत्नी अपने पति के काम के बारे में, उस की अच्छीबुरी आदतों के बारे में, उस के स्नेहशील नेचर के बारे में बातें करती रहती है. उस का पति के प्रति प्रेम का अभिमान उस के चेहरे से साफ झलकता है, तो कई बार कामयाब पति के पीछे उस की पत्नी दृढ़ निश्चय से खड़ी रहती है. लेकिन क्या एक कामयाब पत्नी के पीछे, उस की सराहना करने के लिए पुरुष वर्ग भी आगे रहता है?

सिर्फ एक स्टैंप नहीं: समीक्षा गुप्ता

हकीकत में एक कामयाब पत्नी का पति होना गर्व की अनुभूति कराता है. ऐसा ही एक अनूठा रिश्ता है ग्वालियर की मेयर समीक्षा गुप्ता और उन के पति राजीव गुप्ता का. बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से इकोनौमिक्स में स्नातक समीक्षा मूलत: मध्य प्रदेश के राजगढ़ की हैं. शादी के बाद उन्होंने कई साल एक घरेलू महिला की तरह बिताए और अपनी भूमिका को अच्छी तरह निभाया. फिर उन की सासूमां ने उन्हें कौरपोरेटर का चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया तो वे कौरपोरेटर हुईं. यहीं से समीक्षा के नए सफर की शुरुआत हुई. लेकिन समीक्षा ने कभी अपनी जिम्मेदारियों को अनदेखा नहीं किया.

चुनाव जीतने के बाद वे एक स्टैंप न रह कर वार्ड में लोगों के रुके हुए कामों व उन की परेशानियों की तरफ ध्यान देने लगीं. ऐसा कर के ही दूसरी पारी में भी वे अपने चुनाव क्षेत्र से जीतीं. इस के बाद ग्वालियर की जनता ने उन्हें मेयर की कुरसी पर बैठाया. एक कौरपोरेटर के तौर पर उन के काम सिर्फ अपने वार्ड तक ही सीमित थे, लेकिन मेयर होते ही पूरे ग्वालियर शहर के विकास के काम धड़ल्ले से करने शुरू कर दिए.

शहर का सौंदर्यीकरण, चौड़े रास्ते, पार्क, रोड, कन्यादान जैसी योजनाओं पर उन्होंने सफलतापूर्वक काम किया. इस दौरान उन्हें लोगों का विरोध भी सहना पड़ा. पति राजीव कहते हैं, ‘‘जब समीक्षा शहर या शहर के लोगों के बारे में कोई निर्णय लेती हैं तब वे सिर्फ एक शहर की मेयर होती हैं. बाहर के काम के बारे में या किसी समस्या के बारे में वे घर पर विचारविमर्श तो करती हैं, लेकिन अंतिम निर्णय खुद ही लेती हैं.

‘‘घर आने के बाद वे 2 बेटियों की प्यारी मां होती हैं, हमारे अम्मां, बाबूजी की बहू होती हैं. हमारा परिवार संयुक्त परिवार है. वे हर एक रिश्ते का मान रखती हैं. आज समीक्षा स्त्री भू्रण हत्या के साथसाथ महिलाओं पर होने वाले अत्याचार पर काम कर रही हैं, इस का मुझे गर्व है.’’

घर की छांव: छाया नागपुरे

एफआरआर फोरेक्स में सीनियर मैनेजर के पद पर आसीन छाया के पति विजय के चेहरे पर अभिमान स्पष्ट रूप से झलकता है. इस परिवार का बेटा यशराज और बेटी ऐश्वर्या के साथ खुद विजय इन सभी की सफलता का संगम छाया के असीम स्नेह की छांव में ही हो सका, ऐसा उन्हें लगता है.

पहली मुलाकात, पहली तकरार, पहला गिफ्ट, सालगिरह आदि बातें आमतौर पर सिर्फ महिलाओं को ही याद रहती हैं, लेकिन विजय ने उन के प्यार को 26 साल किस दिन हुए, यह बात बहुत ही गौरव से बताई.

उन की जिंदगी में छाया के आने के बाद सब अच्छा ही होता गया, ऐसा बताते हैं विजय. उन्होंने बताया कि छाया ने अपनी पढ़ाई बहुत ही प्रतिकूल हालात में पूरी की है. घर में ट्यूशन पढ़ा कर बी.एससी. पूरी की. उस के बाद विजय के अनुरोध पर उन्होंने लेबर स्टडीज विषय पर एम.एस. किया.

पहली ही नौकरी में उन्हें कामगारों द्वारा की गई हड़ताल की समस्या सुलझाने के लिए सिल्व्हासा में भेजा गया. उस वक्त वे अपनी छोटी बेटी और पति को साथ ले कर गई थीं. वहां पर कामगारों ने उन के साथ अच्छा बरताव नहीं किया था. ‘एक औरत हमारी समस्याएं क्या हल करेगी.’ यही भाव उस वक्त उन के चेहरों पर थे. तब छाया ने वहां का माहौल हलका करने के लिए कहा कि मैं अपने पति और बेटी को ले कर आप के शहर आई हूं. आप का शहर कैसा है यह तो दिखाइए. यह कहने के बाद वहां का माहौल हलका हुआ और मालिक और कामगारों के बीच का तनाव कम हुआ.

विजय कहते हैं कि आज भी परिवार के सगेसंबंधी अपनी समस्याएं ले कर छाया के पास आते हैं तब छाया उन्हें ‘मैं जो कहती हूं वह करना ही चाहिए’ न कह कर उस बात के फायदे और नुकसान के विकल्प उन के सामने रखती हैं. इस से अपनी समस्याओं का हल उन्हें वहीं मिल जाता है. कभीकभी सामने वालों से डीलिंग करते वक्त उन्हें कठोर कदम भी उठाना पड़ता है. इस बारे में छाया खुद कहती हैं, ‘‘आखिर मैं ह्यूमन रिसोर्स यानी व्यक्तियों के साथ डील करती हूं. हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता.

संवाद साधने वाली: लीना

लीना प्रकाश सावंत. लीना यानी नम्र. लेकिन नाम में नम्रता होते हुए भी कहां पर नम्र होना है और कहां पर प्रतिकार करना है, इस की जानकार लीना सावंत के पति कंस्ट्रक्शन के बिजनैस में हैं. कौमर्स से स्नातक लीना नौकरीपेशा प्रकाश सावंत के साथ शादी होने के बाद जब गोवा, पूना घूम रही थीं, तो वहां भी वे समय का सदुपयोग करने के लिए छोटीमोटी नौकरी कर रही थीं.

लेकिन प्रकाश ने जब नौकरी छोड़ कर बिजनैस करने का फैसला कर लिया तब लीना ने उन की कल्पनाओं को साकार करने में मदद की और खुद भी बिजनैस में ध्यान देने लगीं. इस के बारे में प्रकाश ने कहा कि सब से पहले हमें वोडाफोन के ग्लो साइन एडवरटाइजमैंट का कौंट्रैक्ट मिला था. तब आर्थिक प्रबंधन व बाकी सभी कामों की जिम्मेदारी लीना ने स्वयं ही अपने कंधों पर ली थी. इंटरनैशनल क्रिएशन नाम की उन की कंपनी ग्लो साइन बोर्ड में टौपर कंपनी है.

आज उन के घर का इंटीरियर हो या बच्चों का कमरा, हर एक चीज उन्होंने अपनी बेहतरीन कल्पना से डिजाइन की है. आज उन का बड़ा बेटा प्रसाद यूएस में शिक्षा ले कर उन के बिजनैस में मदद कर रहा है, तो दूसरा बेटा केदार इकोल मोंडेल जैसे मशहूर स्कूल में पढ़ रहा है. बच्चों की पढ़ाई घर की जिम्मेदारियां संभालते हुए लीना आज बिजनैस में पति की खूब मदद कर रही हैं.

बदलते समय के कदमों को भांप कर 2006 में प्रकाश सावंत ने कंस्ट्रक्शन के कारोबार में कदम रखा तब लीना उन के पीछे खड़ी रहीं. आज भी कारोबार की रूपरेखा तय करते वक्त सब से पहले लीना के सुझाव ध्यान में रखे जाते हैं.

कई बार हंसीमजाक में कहा जाता है कि आप सुखी हैं या शादीशुदा हैं? लेकिन इन पतियों का उन के बैटर हाफ के बारे में झलकता हुआ प्यार, विचार और विश्वास देख कर हम कह सकते हैं कि कामयाब महिलाओं के कारण ही उन का जीवन अधिकतम समृद्ध और खुशहाल हो पाया.

Winter Special: जानें क्या है गले में खराश के कारण

गले में खराश की वजह से दर्द, खुजली, आवाज बैठना और कुछ निगलने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसा कभीकभी या फिर बारबार हो सकता है और हो सकता है कि यह लंबे समय तक रहे. लंबे समय तक गले में खराश इन्फैक्शन सहित कई कारणों से हो सकती है, इसलिए जरूरी है कि इस के कारणों का पता लगाया जाए.

लंबे समय तक गले में खराश के कारण

एलर्जी: अगर आप को ऐलर्जी हो तो आप का इम्यून सिस्टम कई चीजों के लिए ज्यादा प्रतिक्रिया करता है, ये पदार्थ ऐलर्जन कहलाते हैं.

आमतौर पर कई खा-पदार्थ, कुछ पौधे, पालतू जानवरों के रोएं, धूल और परागकण ऐलर्जन हो सकते हैं. अगर आप को परागकणों,

धूल, सिंथैटिक खुशबू, मोल्ड आदि से ऐलर्जी हो तो गले में खराश की समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है.

हवा से होने वाली ऐलर्जी के लक्षणों में शामिल हैं

– नाक बहना

– खांसी

– छींकें

– आंखों से पानी बहना.

ऐलर्जी की वजह से पोस्टनेसल ड्रिप और साइनस में सूजन गले में ऐलर्जी के कारण हो सकते हैं.

पोस्टनेसल ड्रिप: इस से ब्यूकस साइनस से आप के गले में चला जाता है. इस से गले में लगातार खराश होती रहती है.

ऐसा मौसम में बदलाव, कुछ दवाओं, मसालेदार भोजन, बलगम, ऐलर्जी, हवा में सूखापन आदि की वजह से हो सकता है.

गले में खराश के अलावा पोस्टनेसल ड्रिप के कुछ लक्षण ये हैं:

– सांस में बदबू

– निगलने में परेशानी

– खांसी जो रात में बढ़ जाए

– मतली आना.

मुंह से सांस लेना: जब आप मुंह से सांस लेते हैं, खासतौर पर नींद में, तो इस के कारण गले में खराश हो सकती है. ऐसे में जब आप सुबह सो कर उठते हैं, तो आप को ज्यादा परेशानी होती है, कुछ पीने के बाद आप बेहतर महसूस करते हैं. रात में मुंह से सांस लेने के लक्षण हैं:

– मुंह सूखना

– गले में सूखापन या खुजली महसूस होना

– आवाज बैठना

– सुबह उठने पर थकान और चिड़चिड़ापन

– सांस में बदबू

– आंखों के चारों ओर काले घेरे

– ब्रेन फोंग.

अकसर नाक में किसी तरह की रुकावट के कारण व्यक्ति मुंह से सांस लेता है, जैसे नाक में कंजैक्शन, स्पीप  एप्रिया, ऐडिनौएड्स या टौंसिल्स का बढ़ना.

ऐसिड रिफलक्स: इसे सीने में जलन भी कहा जाता है. ऐसा तब होता है जब लोअर इसोफेगियल स्फिंक्टर कमजोर हो जाए और ठीक से बंद न हो पाए. इस से पेट की सामग्री फिर से लौट कर इसोफेगस में आ जाती है, कभी भी इस तरह का ऐसिड रिफलक्स गले में खराश का कारण बन जाता है. अगर आप को रोजाना ऐसे लक्षण हों तो परेशानी बढ़ सकती है.

समय की साथ, ऐसिड इ??सोफेगस और गले की लाइनिंग को नुकसान पहुंचने लगता है. इस रिफलक्स के कुछ लक्षण हैं:

– गले में खराश

– सीने में जलन

– मुंह में खटास

– सीने में जलन और पेट में असहज महसूस करना

– निगलने में परेशानी.

टौंसिलाइटिस: अगर आप को लंबे समय तक खराश रहती है और आराम नहीं मिलता तो हो सकता है कि आप को टौंसिलाइटिस हो. अकसर टौंसिलाइटिस बच्चों में पाया जाता है, लेकिन बड़ी उम्र के लोग भी इस का शिकार हो सकते हैं. टौंसिलाइटिस बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण से हो सकता है.

टौंसिलाइटिस साल में कई बार हो सकता है, कई बार इस के इलाज के लिए ऐंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत होती है. टौंसिलाइटिस कई प्रकार का हो सकता है. इस के लक्षणों में शामिल हैं:

– निगलने में परेशानी और दर्द

– आवाज बैठना

– गले में खराश

– गले में अकड़न

– लिंफ नोड्स में सूजन के कारण जबड़े और गले में परेशानी

– टौंसिल्स पर सफेद या पीले धब्बे

– सांस में बदबू

– बुखार

– ठंड लगना

– सिर में दर्द.

मोनो: गले में खराश और टौंसिलाइटिस का एक और कारण है मोनोन्युक्लियोसिस, जो एपस्टीन बार वायरस के कारण होता है. मोनो 2 महीने तक चल सकता है. ज्यादातर मामलों में इस के लक्षण हलके होते हैं, थोड़े से इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है. मोनो के लक्षण फ्लू जैसे दिखाई देते हैं. इस के लक्षण हैं:

– गले में खराश

– टौंसिल्स में सूजन

– बुखार

– बगल और गरदन की ग्रंथियों में सूजन

– सिर में दर्द

– थकान

– मांसपेशियों में कमजोरी

– रात में पसीना आना.

मोनो से पीडि़त व्यक्ति संक्रमण के दौरान गले में खराश महसूस कर सकता है.

गोनोरिया: यह यौनसंचारी रोग है, जो बैक्टीरिया नीसेरिया गोनोरिया के कारण होता है. हो सकता है कि आप सोचें यौनसंचारी रोगों का असर सिर्फ आप के यौनांगों पर ही पड़ता है, किंतु असुरक्षित ओरल सैक्स के कारण गले में गोनोरिया इन्फैक्शन हो सकता है. ऐसे मामलों में गले में खराश और लालगी हो सकती है.

टौंसिल ऐब्सैस: पेरिटौंसिलर एब्सैस, टौंसिल्स में होने वाला गंभीर बैक्टीरियल इन्फैक्शन है, जो गले में खराश का कारण बन सकता है. अगर टौंसिलाइटिस का ठीक से इलाज न किया जाए तो ऐसा हो सकता है. टौंसिल्स के आसपास इन्फैक्शन होने से कई बार मवाद बन जाता है और इन्फैक्शन आसपास के टिशूज में भी फैल जाता है.

आप गले के पिछले हिस्से में एब्सैस देख सकते हैं. लेकिन हो सकता है कि यह आप के टौंसिल्स के पीछे छिपा हो. इस के लक्षण आमतौर पर टौंसिलाइटिस जैसे होते हैं, लेकिन ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. इन में शामिल हैं:

– गले में खराश, आमतौर पर एक साइड में ज्यादा

– गले और जबड़े में ग्रंथियों में सूजन

– खराश वाली साइड पर कान में दर्द

– 1 या दोनों टौंसिल्स में इन्फैक्शन

– मुंह को पूरा खोलने में परेशानी

– निगलने में परेशानी

– लार निगलने में परेशानी

– चेहरे या गरदन में सूजन

– सिर घुमाने या ऊपरनीचे करने में परेशानी

– सिर में दर्द

– आवाज में घरघराहट

– बुखार आना और ठंड लगना

– सांस में बदबू.

धूम्रपान: धूम्रपान या सैकंडहैंड स्मोक गले में खराश का कारण बन सकता है. यह अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, ऐंफाइसेमा को गंभीर बना सकता है. हलके मामलों में सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहने से गले में खराश हो सकती है. धूम्रपान कैंसर और गले में दर्द का कारण भी बन सकता है.

-डा. सुधा कंसल

रैसपिरेटरी स्पैश्यलिस्ट, इंद्रप्रस्थ अपोलो हौस्पिटल, दिल्ली.    

Saras Salil Cine Award: फिल्मों के हिट होने का बदल चुका है पैमाना- पल्लवी गिरि

कभी मांसल बदन वाली हीरोइनों के लिए पहचानी जाने वाली भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में अब छरहरे बदन की हीरोइनों का बोलबाला है. इन छरहरे बदन वाली हीरोइनों को दर्शक खूब प्यार भी दे रहे हैं. इसी में एक नाम है भोजपुरी हीरोइन पल्लवी गिरि का, जिन्हें हाल ही में आयोजित हुए ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ शो में बैस्ट अलबम ऐक्ट्रैस अवार्ड से नवाजा गया है.

Saras salil awards

पल्लवी गिरि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की उन गिनीचुनी हीरोइनों में शुमार हैं, जो फिल्मों के साथसाथ भोजपुरी अलबम में भी खूब पसंद की जाती हैं. यही वजह है कि वे अकसर बड़े ऐक्टरों के साथ बनने वाले अलबम में स्क्रीन शेयर करती हुई नजर आती हैं.

‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ शो में शिरकत करने आईं पल्लवी गिरि से उन के फिल्मी कैरियर को ले कर ढेर सारी बातें हुईं. पेश हैं, उसी के खास अंश :

आप के फिल्मी कैरियर पर बात करें, उस से पहले अपने खूबसरत बदन और फिट रहने का राज बताएं?

मेरे खूबसूरत बदन और फिट रहने का राज यह है कि मैं खुद को तनाव से दूर रखने की कोशिश करती हूं. मैं खुद पर स्ट्रैस को हावी नहीं होने देती हूं, क्योंकि आप की बौडी जितनी ऐक्टिव रहेगी, उतने ही आप चुस्त और दुरूस्त रहेंगे.

इस के अलावा सुबह उठने के बाद मैं सब से पहले पानी पीने पीती हूं.
इस के अलावा कार्डियो ऐक्सरसाइज, डांस, साइकिलिंग और रनिंग मेरे डेली रूटीन का हिस्सा है. डाइट में ढेर सारी हरी सब्जियां, फल और अंकुरित अनाज लेने के साथ ही नाश्ते में बादाम और अखरोट भी लेती हूं.

आप के फिल्मों की तरफ कदम कैसे बढे?

मुझे बचपन से ही डांसिंग और ऐक्टिंग का खूब शौक था, तो पहले मैं ने डांस इंस्टिट्यूट खोला और बच्चों को डांस सिखाने लगी. इस के बाद मैं ने मौडलिंग करना भी शुरू कर दिया था. चूंकि मेरे बदन की बनावट ही ऐसी थी की लोग मुझे हीरोइन और मौडल कह कर बुलाते थे, इसलिए मैं ने मौडलिंग की दुनिया में भी कदम बढ़ा दिया और इसी दौरान दौरान ‘मिस दिल्ली’ का खिताब भी जीता.

मेरे इस कामयाबी ने फिल्म मेकरों ध्यान मेरी तरफ खींचा और मुझे भोजपुरी फिल्मों के औफर आने लगे. मुझे भी लगा कि अच्छा मौका है और मैं ने फिल्मों में ऐक्टिंग की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए.

आप दर्जनों फिल्मों में अलगअलग किरदार निभा चुकी हैं फिर आप को बैस्ट अलबम ऐक्ट्रैस का अवार्ड क्यों मिला?

-यह तो फिल्म अवार्ड से जुड़ी जूरी तय करती है कि कौन बैस्ट ऐक्ट्रैस होगा और कौन बैस्ट अलबम ऐक्ट्रैस. मैं ने अपना नौमिनेशन ही बैस्ट अलबम ऐक्ट्रैस कैटेगरी के लिए किया था, क्योंकि मेरे कई अलबम ऐसे हैं, जिन्हें फिल्मों से ज्यादा प्यार मिला है. बैस्ट ऐक्ट्रैस के लिए मेरी पूरी फिल्मी लाइफ पड़ी है. मुझे जब लगेगा कि मुझे अब बैस्ट फिल्म ऐक्ट्रैस के लिए नौमिनेशन करना चाहिए, तो मैं नौमिनेशन भेजूंगी.

कागज पर शब्दों में लिखी कहानियों को पढ़ कर उसे खुद में ढाल कर ऐक्टिंग करना कितना मुश्किल है?

-आप ने सही कहा कि अगर हम फिल्म की कथा, पटकथा और संवाद को कागज में पढ़े शब्दों के जरीए पढ़ें तो उस में इमोशंस नहीं जुड़े होते हैं. लेकिन जब उसी कागज पर लिखे शब्दों को हमें संवाद के रूप में बोलते हुए ऐक्टिंग के जरीए दिखाना हो, तो वह चरित्र जिंदा हो जाता है, जिस का किरदार हम निभा रहे हैं.

ऐक्टरों का बड़ा बिजी शैड्यूल होता है. ऐसे में वे खुद को भी समय नहीं दे पाते हैं. ऐसे में क्या ऐक्टर की भी सैल्फ लाइफ होती है?

आम लोगों की तरह ऐक्टरों की भी सैल्फ लाइफ होती है, लेकिन फिल्में उन्हें छीन लेती हैं. अगर आप एक कामयाब कलाकार हैं, तो फिल्मों की मसरूफियत आप की सैल्फ लाइफ छीन लेती है, इसीलिए मैं खुद और परिवार को समय देने के लिए बीच में थोड़े दिनों का ब्रेक जरूर लेती हूं.

आप यह कैसे तय करती हैं कि जिस फिल्म या अलबम में काम कर रही हैं, वह हिट ही होगा?

आज के दौर में फिल्मों के हिट होने का पैमाना बदल चुका है, क्योंकि बीते सालों में सामान्य से विषयों पर बनने वाली फिल्में भी हिट रहीं और कमाई का रिकौर्ड तोड़ा, इसलिए हम यह तय नहीं कर सकते हैं कि दर्शक किन फिल्मों को पसंद करेंगे और किसे नकार देंगे.

आप ने सैकड़ों अलबम और दर्जनों फिल्मों में काम किया है. आप को अलबम के लिए अवार्ड मिला है. आप के सब से करीब कौन सा अलबम है?

मेरे सारे अलबम सुपरहिट रहे हैं, फिर भी रितेश पांडेय के साथ आया अलबम ‘आज जेल होई काल्ह बेल होई ने’ कामयाबी के सारे रिकौर्ड तोड़े और उसे 10 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने देखा. पवन सिंह के साथ ‘मजनुआ पिटाता’ तकरीबन 8 करोड़ लोगों ने देखा. इस के अलावा अंकुश राजा के साथ ‘हम के दुल्हिन बनालस’ हिट रहा.

आप की और विमल पांडेय की जोड़ी खूब पसंद की जा रही है. इस के पीछे कहीं प्यार और रोमांस का चक्कर तो नहीं है?

फिल्मों में ऐक्टर और ऐक्ट्रैस एकसाथ ज्यादा काम करें या एकसाथ दिखें, तो इस का मतलब यह नहीं हैं कि दोनों में प्यार और रोमांस का चक्कर ही होगा. इस के पीछे की एक वजह यह भी होता है कि इन जोड़ियों को दर्शक ज्यादा प्यार करते हैं और पसंद करते हैं, इसीलिए फिल्म बनाने वाले कुछ खास जोड़ियों के साथ फिल्में ज्यादा बनाते हैं. दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ और आम्रपाली दुबे, खेसारी और मेघाश्री, देव सिंह और अंजना सिंह, कल्लू और यामिनी जैसी तमाम जोड़ियां रही हैं, जिन्हें हम साथ देखते रहे हैं. इन सब की जोड़ियां केवल फिल्मों तक सीमित हैं. और हां, ऐक्ट्रैस को छोड़ दें, तो इन में से सभी ऐक्टर शादीशुदा भी हैं.

मेरी और विमल की जोड़ी भी केवल फिल्मी जोड़ी ही है. अभी मैं केवल फिल्मों पर फोकस कर रही हूं, इसीलिए मै सभी से गुजारिश करूंगी कि बेसिरपैर की बातों पर ध्यान न दें.

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