गोल्ड डिगर पार्टनर से दूरी ही भली

हाल ही में कानपुर में एक महिला ने अपने दूसरे पति की करोड़ों की संपत्ति हथियाने के लिए साजिश रची. रिहा गुप्ता का पहले पति से तलाक हो चुका था जिस से उस का एक बेटा है. इसके बाद 2014 में वैवाहिक वेबसाइट के जरिये रिहा की मुलाकात गोरखपुर के बिजनेसमैन अमित से हुई. अमित का भी 2013 में अपनी पहली पत्नी से तलाक हो चुका था. इन का भी एक बेटा है. रिहा और अमित की मुलाकात दोस्ती में बदली और दोनों ने 2014 में शादी का फैसला लिया. फरवरी 2021 तक तो सब कुछ ठीक रहा पर मार्च में रिहा पति को बिना बताए ढाई करोड़ रुपये कैश ले कर मायके आ गई.

इसके बाद पति से प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आठ करोड़ रुपये और मंगा लिए. साथ ही करोड़ों के जेवर भी बहाने से पति से मंगवा लिए. इसके बाद भी वह वापस ससुराल यानी तमिलनाडु नहीं आई तो उसे डराने के लिए पति ने कोर्ट से नोटिस भेज दिया.

डरने के बजाय रिहा ने उल्टा पति व सास के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस की जांच में आरोप गलत साबित हुए. इसके बाद रिहा ने अपने पहले पति से हुए बच्चे का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया और कोर्ट में लाख रुपये प्रतिमाह भरण पोषण का दावा ठोक दिया. कोर्ट की नोटिस पर अमित ने अपने स्तर पर जन्म प्रमाण पत्र की स्वास्थ्य विभाग से जांच कराई तो वह फर्जी निकल गया. इस पर उस ने जांच रिपोर्ट दायर कर दी. कोर्ट ने रिहा का यह केस भी खारिज कर दिया. साथ ही पुलिस को फर्जी प्रमाणपत्र की जांच के आदेश दे दिए.

सीधे तौर पर देखें तो रिहा जैसी महिलाओं को हम गोल्ड डिगर का नाम दे सकते हैं. एक ऐसी महिला जो अमीर पुरुषों के साथ रोमानी रिश्तों में आती हैं और उन की संपत्ति पर नजर रखती हैं. पैसों के लिए ही वे रिश्ते बनाती हैं. इस से उन्हें समाज में मनमाफिक स्थान मिलता है. वे जीवन की तमाम सुख सुविधाओं का उपयोग कर पाती हैं. ऐसी महिलाएं अमीर लोगों की तलाश में रहती हैं.

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार “गोल्ड डिगर” शब्द का इस्तेमाल उन महिलाओं के लिए किया जाता है जो समाज में अपना एक स्तर बनाए रखने के लिए किसी अमीर शख्स से शादी करती हैं.

गोल्ड डिगर शब्द पहली बार 1911 में इस्तेमाल में आया. अमेरिकी उपन्यासकार रेक्स बीच ने पहली बार अपनी किताब ‘द नेवर डू वेल’ में गोल्ड डिगर शब्द का इस्तेमाल किया था. बीसवीं सदी की शुरुआत में यह शब्द ऐसी महिलाओं के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा जो किसी के साथ रिलेशनशिप में आने से पहले सामने वाले की धन सम्पत्ति पर ज्यादा फोकस रखती थीं. 1920 के दशक में अमेरिका में पेगी हॉपकिंस जॉयस नाम की एक्ट्रेस हुईं. इन्होंने छह शादियां की थीं. पेगी के लिए गोल्ड डिगर शब्द का इस्तेमाल किया गया.

भारत में भी गोल्ड डिगर शब्द बड़ा पॉपुलर हुआ है. एक समय में रिया चक्रवर्ती और सुष्मिता सेन को भी गोल्ड डिगर कहा गया. बहुत से लोगों ने माना कि रिया ने सुशांत के साथ पैसों के लिए रिश्ता बनाया था. बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन आईपीएल के फाउंडर ललित मोदी के साथ रिलेशनशिप को लेकर चर्चा में रहीं. इन के रिलेशनशिप को लेकर भी तरह तरह की बातें हुईं. वैसे सुष्मिता के मामले में सच्चाई नजर नहीं आती. सुष्मिता की नेट वर्थ 100 करोड़ के आसपास है. मुंबई के वर्सोवा में एक आलीशान अपार्टमेंट में उनका घर है. उनके पास  बीएमडब्ल्यू और ऑडी कार  है. वह अपनी एक्टिंग से करोड़ों कमाती हैं. इसलिए हर महिला को इस नजर से देखना उचित नहीं.

ओनाती इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर द सोशियोलॉजी ऑफ लॉ ने एक आर्टिकल छापा. नाम था ‘इन डिफेन्स ऑफ द गोल्ड डिगर’. लिखने वाली थीं शैरन थॉम्प्सन. उन्होंने लिखा था, ‘ गोल्ड-डिगर शब्द की लोकप्रियता ये सुबूत नहीं देती कि कई महिलाएं पुरुषों के साथ सिर्फ आर्थिक वजहों से रिश्ते बना रही थीं. लेकिन महिलाओं और पुरुषों के बीच की आर्थिक और ढांचागत गैर-बराबरी ये ज़रूर बताती है कि इस शब्द को स्त्रियों से क्यों जोड़कर देखा गया. क्योंकि अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए महिलाओं का अमीर पुरुषों से शादी करना ज्यादा सम्भाव्य था जबकि इसके उलटे मामले बेहद कम थे. यानी एक पुरुष का अमीर महिला से पैसों के लिए शादी करना.’

वैसे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि बहुत से पुरुष गोल्ड डिगर महिलाओं का शिकार बन कर अपना सुख चैन और दौलत सब कुछ लुटा बैठते हैं. इसलिए किसी के साथ रिलेशनशिप में आने से पहले इस बात को लेकर आश्वस्त हो जाएं कि वाकई वह आप से प्यार करती हैं या यह रिश्ता आर्थिक वजह से वजूद में आया है. अगर आप यह पता लगाना चाहते हैं कि आप का पार्टनर गोल्ड डिगर है या नहीं तो कुछ बातों पर ध्यान दें;

  •  जब आप किसी को डेट करते हैं तो अपने बजट को देखते हुए अच्छी जगह ढूंढते हैं जहां आप एक दूसरे से आराम से मिल सकें और कुछ खूबसूरत लम्हे गुजार सकें. लेकिन जब आप किसी गोल्ड डिगर को डेट कर रहे होते हैं तो वह हमेशा फैंसी और महंगी जगहों पर जाने की सलाह देगी और महंगी चीजें ऑर्डर करेगी.
  •  वह हमेशा आपको पेमेंट करने देगी और धीरे धीरे वह अपने अन्य खर्चों के लिए भी आप पर डिपेंडेंट हो जाएगी.
  • गोल्ड डिगर पार्टनर अक्सर इस बात पर अधिक ध्यान देते हैं कि आप क्या काम करते हैं और कितना कमाते हैं. आप को समझना होगा कि जिस व्यक्ति में आप इंटरेस्ट दिखा रहे हैं क्या वह आप से प्यार करता है या आपके पैसों से.
  • गोल्ड डिगर पार्टनर के पास अपना कोई लक्ष्य या फिर करियर गोल नहीं होता है.  इस के अलावा वह अक्सर घुमा-फिरा कर बातें करना पसंद करते हैं. ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस महिला को आप डेट कर रहे हैं वो गोल्ड डिगर है या नहीं.
  • ऐसी महिलाएं हमेशा अपने पुरुष पार्टनर से महंगे गिफ्ट्स की फरमाइश करती हैं. उन के बैंक बैलेंस और प्रॉपर्टी की जानकारी लेने को उत्सुक रहती हैं. पैसा देख कर ही किसी को भाव देती हैं.
  • इस तरह अगर आप थोड़ा ध्यान दें तो यह पता लगा सकते हैं कि आप की पार्टनर का मकसद क्या है. जिन का मकसद पैसा महसूस हो उन से शुरुआत में ही दूर हो जाना बेहतर है.

Wedding Special: 5 वैडिंग फुटवियर आइडियाज

ईरा अवस्थी 29 साल की है. उस की ख्वाहिश है कि वह अपनी शादी में ब्यूटीफुल दिखे ताकि उसे देखते ही सभी लोग कहें सो ब्यूटीफुल, सो ऐलिगैंट जस्ट लुकिंग लाइक अ वाऊ. इस के लिए उस ने दिल्ली के एक मशहूर डिजानर से अपना लहंगा डिजाइन करवाया. लेकिन खास बात यह थी कि वह अपनी शादी में तारीफ किसी और ही चीज के लिए पा रही थी.

ईरा को उस के स्टाइलिश कूल शूज के लिए तारीफ मिल रही थी. ईरा ने अपने सौफ्ट रोज कलर के लहंगे के साथ मैचिंग शूज पहने थे, जिन पर मिरर वर्क हुआ था. ये शूज हील स्टाइल में थे. इसलिए हाइट का भी कोई इशू नहीं था. ईरा के शूज के लुक ने नैना को इतना अट्रैक्ट किया कि उस ने भी अपनी शादी में सैंडल को रिप्लेस कर के हील शूज को एड कर लिया.

नैना के ऐसा करने का कारण खुद को फैशन में अपडेट रखना है. वह नहीं चाहती कि वह किसी से भी फैशन में पीछे रहे. आखिर वह होने वाली ब्राइड है और अपने स्पैशल डे पर हर ब्राइड स्पैशल लगना चाहती है. नैना भी यही चाहती है.

ऐसे सैंडल, पंप्स, हील्स, शूज या स्नीकर्स का चुनाव करें जिन्हें कैरी करने के बाद आप कंफर्टेबल फील करें न कि अपने स्पैशल डे पर आप इरिटेटेड फील करें.

अगर आप कंफर्टेबल फील नहीं करेंगी तो आप का स्पैशल डे आप का बैड डे बन जाएगा. इसलिए आप अपने कंफर्ट के हिसाब से ही अपने वैडिंग फुटवियर को चुनें.

एक ब्राइडल के लिए कंफर्ट कितना जरूरी है यह बौलीवुड के मशहूर हीरो सुनील शेट्टी की बेटी आथिया शेट्टी से सीखा जा सकता है. उन्होंने अपनी शादी में गोटा पट्टी हील्स पहनी थीं, जो देखने में कंफर्टेबल और ब्यूटीफुल लग रही थीं. ये कई दिनों तक चर्चा का विषय भी बनी रहीं. इतना ही नहीं, महिलाओं ने इसे खासा पसंद भी किया. यही कारण था कि उन दिनों गोटा पट्टी हील्स ट्रैंड में आ गईं.

अगर आप भी ब्राइड बनने वाली हैं या आप की भी फ्रैंड, बहन, कजन या होने वाली भाभी ब्राइड बनने जा रही है तो यह आर्टिकल आप के बहुत काम का है. आज हम आप को कुछ फेमस ब्राइडल फुटवियर के बारे में बताएंगे.

  1. सितारों वाले ब्राइडल शूज

अगर आप अपने ब्राइडल लुक से सैंडल को रिमूव कर के कुछ नया ट्राई करना चाहती हैं तो सितारों वाले ब्राइडल शूज को अपना सकती हैं. ये शूज मोनोक्रोम आउटफिट पर खूब जंचते हैं. आप शादी के अन्य फंक्शन जैसे कौकटेल के लिए भी इस तरह के शूज स्टाइल कर सकती हैं. इस तरह के शूज आप को क्व3 हजार से ले कर क्व5 हजार तक में आसानी से मिल जाएंगे. अगर आप अपनी शादी में हील्स कैरी नहीं करना चाहती हैं तो ऐसे शूज आप के लिए बैस्ट औपशन रहेंगे.

ये ब्राइडल शूज और स्नीकर्स आप के ब्राइडल लुक को यूनीक बनाएंगे. शूज की ये डिजाइनें आप को फैशन ट्रैंड के साथ अप टू डेट रहना भी सिखाएंगे.

2. बोहो स्टाइल ब्राइडल शूज

इन दिनों बोहो लुक का अलग ही क्रेज है. हरकोई बोहो लुक को अपना रहा है. अगर आप कन्फ्यूज हैं कि अपनी शादी में आप किस तरह के फुटवियर पहनें तो आप बोहो शूज को ट्राई कर सकती हैं. इन में आप को कई तरह की डिजाइनें और कलर भी आसानी से मिल जाएंगे, जो आप को एक डिफरैंट लुक देंगे. अगर आप का वैडिंग फंक्शन दिन का है तो ये आप के लिए परफैक्ट रहेंगे.

शूज का कलर आप अपने लहंगे को ध्यान में रख कर चुनें. आप चाहें तो बोहो शूज को अपने अर्कौडिंग कस्टमाइज भी करवा सकती हैं. अगर आप बोहो शूज के साथ कुछ नया ऐक्सपैरिमैंट करना चाहती हैं तो आप शूज पर कुछ स्पैशल लिखवा सकती हैं जैसे पटाका दुलहन, टू बी ब्राइड. आप चाहें तो अपने हसबैंड का नाम जैसे सुमित की दुल्हनिया भी लिखवा सकती हैं.

अगर बात करें बोहो शूज की कीमत की तो मार्केट में ये 2 हजार से 8 हजार रुपये में आसानी से मिल जाते हैं. इन्हें कई औनलाइन शौपिंग साइट्स जैसे मिंतरा, अमेजन, फिल्पकार्ट, अजियो, इंडिया मार्ट, नायका से और्डर कर सकती हैं. आप को बोहो शूज कई इंस्टाग्राम स्टोर में भी देखने को मिल जाएंगे.

3. मोती वाले ब्राइडल शूज

इस तरह के शूज में हाथों से मोती और धागे का इस्तेमाल कर के ऐंब्रौयडरी वर्क किया जाता है. ये देखने में बहुत सुंदर और ऐलिगैंट लगते हैं. ये डिफरैंटडिफरैंट कलर में आते हैं. आप अपने लहंगे के कलर के हिसाब से अपने शूज ले सकती है. इन का औनलाइन प्राइज करीब 3 हजार  पांच सौ रुपये से ले कर 10 हजार तक है. आप अपने बजट और पसंद के हिसाब से अपने ब्राइडल शूज चूज कर सकती हैं.

अगर आप पैंसिल हील्स पहनने में कंफर्टेबल फील नहीं करती हैं या आप हील्स पहन कर बौर हो गई हैं तो आप इस तरह के प्लेटफौर्म बेस ब्राइडल स्नीकर्स शूज को चुन सकती हैं. हमारी राय है कि इस तरह के ब्राइडल शूज आप जरकन वर्क या फ्लोरल वर्क के आउटफिट के साथ कैरी करें.

4. गिल्टर वाली ब्राइडल हील्स और शूज

गिल्टर वाली हील्स हमेशा पसंद की जाती रही हैं. लेकिन इन दिनों ब्राइड ब्राइडल शूज पहनना ज्यादा पसंद कर रही हैं क्योंकि ये कंफर्टेबल होते हैं. लेकिन अगर आप अपने ब्राइडल फुटवियर में कंफर्ट और गिल्टर दोनों चाहती हैं तो आप गिल्टर ब्राइडल शूज ट्राई कर सकती हैं. ये कंफर्टेबल होने के साथसाथ ट्रैंडी भी होते हैं. मार्केट में इन की कीमत 2 हजार रुपये से 8 हजार तक है. इन्हें औनलाइन और औफलाइन दोनों तरह से खरीदा जा सकता है.

5. ऐंब्रौयडरी ब्राइडल जूती

लड़कियों में जूतियों का क्रेज देखते ही बनता है और इंडियन लुक के साथ तो ऐंब्रौयडरी जूती का कौंबिनेशन परफैक्ट है. बौलीवुड की फेमस ऐक्ट्रैस दीपिका पादुकोण ने भी अपनी शादी में फुटवियर के रूप में ऐंब्रौयडरी ब्राइडल जूती को ही अपनाया था. ऐंब्रौयडरी जूती बहुत ही कंफर्टेबल होती है. जिन ब्राइडल की हाइट सामान्य है वे अपने ब्राइडल लुक को ऐंब्रौयडरी जूती के साथ कंप्लीट कर सकती हैं. ये आप को ऐलिगैंट लुक देती हैं.

जूतियों की बात हो और पंजाब का नाम न आए ऐसा कैसे संभव है. पंजाब की जूतियां पूरे इंडिया में ही नहीं विदेशों में भी फेमस हैं. ऐसे में इन जूतियों का ब्राइडल कलैक्शन देखने लायक है. इन जूतियों में ऐंब्रौयडरी वर्क, मिरर वर्क, घुंघरू, सीपी वर्क, मोती वर्क, गोटा पट्टी वर्क, फुलकारी, मल्टी कलर आते हैं. अब इन जूतियों पर टैगलाइन का ट्रैंड चल रहा है जैसे कूल दुलहनिया, दूल्हादुलहन का नाम वगैरहवगैरह.

इन ब्राइडल शूज, स्नीकर्स और सैंडल्स को अपना कर आप अपने ब्राइडल लुक को इन्हांस कर के महफिल लूट सकती हैं.

ब्राइडल शूज और स्नीकर्स के कुछ फेमस ब्रैंड हैं- हाउस औफ पटौदी, नाज, हरजिंदगी, इंयासा, ड्रीमसेफ, टोयस्टेप, अनार गिरी आदि.

अगर बात करें कि ब्राइडल फुटवियर कहां से खरीदें तो आप इन्हें कई औनलाइन वैबसाइट्स जैसे ट्राइसा, कोरलहेज से खरीद सकती हैं. इन के खुद के इंस्टाग्राम पेज भी हैं.

शू बाइट से बचने के लिए आप पहले पैरों के सैंसिटिव एरिया पर बैंडेज लगा लें. इस से आप को राहत मिलेगी, साथ ही आप शू बाइट से भी बचेंगी.

Wedding Special: ब्राइडल स्किन केयर के आसान टिप्स

एक दुल्हन अपनी शादी के लुक के लिए दागमुंहासे मुक्त त्वचा और चेहरे में चमक पाने के लिए शादी से पहले उस की देखभाल करना पसंद करती है. हालांकि बाजार में दुलहनों के लिए कई फेस पैक चेहरे की देखभाल के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन यह जरूरी है कि यह स्किन केयर पैक या फेस पैक ट्रीटमैंट पूरी तरह से कैमिकल फ्री हो ताकि आप की त्वचा या फेस को कोई नुकसान न हो.

दिनभर की भागदौड़ और अनियमित शैड्यूल के कारण एक दुलहन के लिए पूरी त्वचा को अच्छा बनाए रखना थोड़ा मुश्किल है और बारबार ब्यूटीपार्लर जाना भी संभव नहीं है इसलिए कुछ  होम रेमेडीज और स्किनक्राफ्ट टिप्स काम आ सकते हैं. ये दुलहन की स्किन और फेस को चमकदार बना सकते हैं और घर पर बनाने व उपयोग में लाने आसान हैं.

यदि दुलहन 1 सप्ताह, महीना या उस से भी कम समय में चेहरे में चमक पाना चाहती है तो ये ब्राइडल उबटन एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं:

  1. ब्राइडल उबटन

हलदी उबटन और चंदन उबटन. भारतीय शादियों में हलदी का बहुत विशेष स्थान है और पूरे दिन की रस्म इस चमकीले रंग के मसाले को समर्पित होती है जो अपने ऐंटीबैक्टीरियल गुणों के लिए जानी जाती है, साथ ही इसे सौंदर्यवर्धक भी माना जाता है इसलिए दुलहन के लिए हलदी या हलदी से युक्त फेस मास्क बहुत लोकप्रिय है.

अपने चेहरे की रंगत और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए पार्लर जाने से बेहतर है कि हम अपनी त्वचा का इलाज कुछ प्राकृतिक घरेलू नुसखों से करें और इस के लिए उबटन एक बेहतरीन विकल्प है.

दुलहन की खूबसूरती और चेहरे की त्वचा की गुणवत्ता को निखारने के लिए शादी से 1-2 हफ्ते पहले से ही उबटन का इस्तेमाल शुरू दें क्योंकि इस में बहुत सारे प्राकृतिक पौष्टिक तत्त्व होते हैं जो त्वचा को गोरा, मुलायम, चमकीला, चमकदार बनाते हैं और त्वचा में कसाव लाते हैं.

2. हलदी उबटन बनाने की सामग्री

1 बड़ा चम्मच हलदी पाउडर, 3 बड़े चम्मच बेसन, 2 बड़े चम्मच दही, 2 बड़े चम्मच कच्चा दूध, 2 चम्मच गुलाब जल.

कैसे बनाएं

हलदी पाउडर और बेसन को मिलाएं. इस पाउडर को किसी एअर टाइट डब्बे में भर कर रख लें. 1 कटोरी में लगभग 1-2 चम्मच उबटन पाउडर लें. अब इस में 2 बड़े चम्मच दही, 2 बड़े चम्मच कच्चा दूध, 2 चम्मच गुलाब जल मिलाएं और पेस्ट बना कर 3-4 मिनट के लिए छोड़ दें. अब इस उबटन फेस मास्क को साफ चेहरे और गरदन पर लगाएं और 20 मिनट तक लगा रहने दें. फिर धीरेधीरे हाथों से सर्कुलर मोशन में रगड़ते हुए नौर्मल पानी से धो लें. फिर मौइस्चराइजर लगाएं.

फायदे

प्राकृतिक चीजों से तैयार फेस पैक या उबटन आप की स्किन को नैचुरली नरिश करने के साथ ही ग्लो बढ़ाने में भी मदद करता है.

ऐंटीएजिंग: घर पर तैयार इस उबटन को लगाने से बढ़ती उम्र के लक्षण जैसे फाइन लाइंस और ?ार्रियां कम दिखती हैं.

पिंपल्स करे कम: इस उबटन में मौजूद प्राकृतिक इनग्रीडिऐंट्स स्किन को साफ रखने में मदद करते हैं, जिस से चेहरे पर गंदगी नहीं जमती और पिंपल्स से आराम मिलता है.

ग्लोइंग स्किन: इस में मौजूद दूध, हलदी त्वचा को ग्लोइंग बनाने में मदद करती है.

1 महीना पहले से इस उबटन को लगाने से शादी के दिन चेहरा निखरा और खिलाखिला दिखाई देगा और आप पार्लर के खर्च से भी बच जाएंगी.

चंदन उबटन: चेहरे की त्वचा के ग्लो को बढ़ाने के लिए आप चंदन पाउडर के उबटन का उपयोग कर सकती हैं. यह उबटन आप के चेहरे पर एक खास तरह की चमक पैदा करता है जो आप को रौयल लुक देती है.

2. चंदन पाउडर का उबटन बनाने की सामग्री

2 चम्मच चंदन पाउडर, 2 चम्मच हलदी,

2 चम्मच गुलाबजल.

इन सभी चीजों को दूध के साथ मिक्स कर के उबटन बनाएं और साफ स्किन पर 20 मिनट तक लगा कर रखें. सूखने पर साफ पानी से धो कर मौइस्चराइजर लगाएं.

फायदे

चंदन में ऐंटीटैनिंग गुण होते हैं, जो स्किन को टैनिंग से बचाते हैं जिस के कारण स्किन दागधब्बे और काली होने से बच सकती है? साथ ही ऐंटीएजिंग गुण होते हैं  जो त्वचा को जवां बनाए रखते हैं. स्किन को हाइड्रेटेड रखते हैं जिस से स्किन ड्राई नहीं होती.

त्वचा में तुरंत ग्लो लाने और उसे डैमेज फ्री रखने के लिए आज के समय में भी उबटन से बेहतर दूसरा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि उबटन को बनाने में उपयोग किए जाने वाले सभी इनग्रीडिऐंट्स कैमिकल फ्री होते हैं जो त्वचा को कोमल बनाते हैं और हर्बल तरीके से ग्लो बढ़ाते हैं.

याद रहे

  •  उबटन को चेहरे के साथ ही पूरे शरीर पर भी उपयोग किया जा सकता है.
  • स्किन के ग्लो को बढ़ाने के लिए चेहरे पर अधिक मात्रा में कैमिकल युक्त पदार्थों की जगह कैमिकल फ्री प्राकृतिक चीजों का उपयोग करें.
  • यदि हारमोनल समस्याओं और तनाव के कारण आप की त्वचा सुस्त दिख रही है तो डाक्टर से परामर्श लें.

स्किनक्राफ्ट टिप्स: आप की त्वचा को खूबसूरत चमक देने में कुछ पोषक तत्त्व जरूरी होते हैं जो अहम भूमिका निभाते हैं जिन का उपयोग त्वचा की संपूर्ण देखभाल के लिए किया जा सकता है.

भरपूर पानी पीना

दुलहन की त्वचा में चमक और उसे मुलायम व कोमल बनाए रखने के लिए रोजाना 3-4 लिटर पानी पीना बेहद जरूरी है.

सोने से पहले अपना मेकअप हटा लें मेकअप हटाने से त्वचा में मौजूद अशुद्धियां साफ हो जाती हैं. रात में अपनी त्वचा को सांस लेने दें.

कैफीन से बचें: चमकती त्वचा के लिए आप को कैफीन और धूम्रपान की लत को दूर रखना चाहिए. कैफीन, नशीली दवाएं, अल्कोहल ये सभी त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं. अपनी स्किन को असमय बुढ़ापे और झुर्रियों से बचाने के लिए एक दिन में 2 कप से ज्यादा कौफी न पीएं और नशीली दवाओं का सेवन न करें.

3. ऐक्सफौलिएट करें

हफ्ते में 2 बार अपनी त्वचा को ऐक्सफौलिएट जरूर करें. अपनी त्वचा को प्राकृतिक रूप से ऐक्सफौलिएट करने के लिए बेसन, हलदी या सूखे संतरे के छिलकों का उपयोग करें.

  •  ये आप के शरीर को डिटौक्सीफाई करने में मदद करते हैं.
  • व्यायाम के कारण आने वाला पसीना टौक्सिन और इंप्यूरिटी को बाहर निकालता है.
  • पसीना स्किन को डिटौक्सीफाई करने का अच्छा विकल्प है.
  • चेहरे की चमक को बढ़ाने के लिए हैल्दी डाइट के साथसाथ योगासन करना चमकती त्वचा की कुंजी है इसलिए रोजाना सुबह उठ कर कपालभाति व अनुलोमविलोम जैसे प्राणायाम जरूर करें.

4. पर्याप्त नींद

देर रात तक जागने से भी चेहरे की चमक फीकी पड़ सकती है. अच्छी त्वचा के लिए आप को कम से कम 8 घंटे की अच्छी नींद की जरूरत होती है, सुनिश्चित करें कि आप रात को अच्छी नींद लें.

5. संतुलित आहार लें

स्वस्थ आहार आप की त्वचा को प्राकृतिक चमक देगा. प्राकृतिक चमक के लिए ताजे फल आप की त्वचा को हाइड्रेट करते हैं.

  •  अपनी त्वचा को निखारने के लिए सूखे मेवे जरूर खाएं.
  • हरा जूस, फल और सब्जियों का सेवन करें क्योंकि इन में स्वस्थ त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्त्व होते हैं.
  • उचित खानपान, त्वचा की देखभाल और व्यायाम का पालन करना चमकती त्वचा की कुंजी है.

मेरे पति का अपनी सहकर्मी से संबंध हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं शादीशुदा गृहिणी हूं. पति स्मार्ट व हैंडसम हैं और अपनी उम्र से काफी छोटे दिखते हैं. वे सरकारी महकमे में अधिकारी हैं. 2 बेटे हैं जो अपनेअपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रहे हैं. मेरी समस्या यह है कि पिछले 1 साल से पति ने मेरे साथ सैक्स नहीं किया, हालांकि हमारे में कोई विवाद नहीं है. 1-2 लोगों ने मुझे बताया है कि उन के अपनी सहकर्मी से संबंध हैं. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

जैसाकि आप ने बताया कि आप दोनों के बीच कोई विवाद नहीं है पर पति सैक्स में दिलचस्पी नहीं लेते तो आप को इस की वजह जानने की कोशिश करनी होगी. संभव है कि वे बतौर अधिकारी काम के बोझ तले दबे हों और तनाव में रहते हों या फिर उन्हें कोई अंदरूनी परेशानी हो. वक्त और मूड देख कर आप को पति से बात करनी चाहिए. रही बात उन का अपनी सहकर्मी से संबंध की, तो सुनीसुनाई बातों पर भरोसा करना दांपत्य जीवन में जहर ही घोलता है. दूसरों की कही बातों पर भरोसा न करें. वैसे भी विवाहेतर संबंध ज्यादा दिनों तक नहीं टिकते. देरसवेर इस रिश्ते पर विराम लग ही जाता है. बावजूद इस के अगर आप अपने रिश्ते में जान फूंकना चाहती हैं तो पति के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं, उन्हें भरपूर प्यार दें, कामकाज के बारे में पूछें, साथ घूमने जाएं. हां, अगर उन में किसी शारीरिक विकार के लक्षण दिखें तो डाक्टर से परामर्श लें.

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मैं 33 साल की विवाहिता हूं. पति और 2 बच्चों के साथ खुशहाल जीवन जी रही हूं. शादीसे पहले मेरी जिंदगी में एक युवक आया था, जिस से मैं प्यार करती थी, पर किन्हीं वजहों से हमारी शादी नहीं हो पाई थी. अब उस का भी अपना परिवार, पत्नी व बच्चे हैं. इधर कुछ दिनों पहले फेसबुक पर हम दोनों मिले. मोबाइल नंबरों का आदान प्रदान हुआ और अब हम घंटों बातचीत, चैटिंग करते हैं. वह मुझ से मिलना चाहता है. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

वह आप का अतीत था. अब आप दोनों के ही रास्ते अलग हैं. पति, परिवार, बच्चे व सुखद जीवन है. पुरानी यादों को ताजाकर आप दोनों की नजदीकियां दोनों ही परिवारों की खुशियों पर ग्रहण लगा सकती हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि इस रिश्ते को अब आगे न बढ़ाया जाए. हां, अगर वह एक दोस्त के नाते आप से मिलना चाहता है, तो इस में कोई बुराई नहीं. आप घर से बाहर किसी रेस्तरां, पार्क आदि में उस से मिल सकती हैं.बुनियाद दोस्ती की हो तो मिलने में हरज नहीं, बशर्ते मुलाकात मर्यादित रहे. हद न पार की जाए.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.   

शिक्षा में भेदभाव खत्म

इंगलैंड की लेबर पार्टी ने चुनावी वादा किया है कि वह बच्चों में भेदभाव खत्म करने के लिए और एक इलीट, पैंपर्ड, शानशौकत में पलने वाली पीढ़ी पर जुरमाना करने के लिए प्राइवेट फीस देने वाले स्कूलों को सेल्स टैक्स के दायरे में ला कर 20% का टैक्स लगाएगी. इंगलैंड में 2,600 प्राइवेट स्कूलों में 6 लाख 15 हजार स्टूडैंट्स हैं जो कुल ब्रिटेन के स्टूडैंट्स का 7त्न हैं. आमतौर पर जहां सरकारी स्कूल मुफ्त हैं वहां इन प्राइवेट स्कूलों में 16 हजार पौंड यानी क्व16 लाख की वार्षिक फीस होती है.

अमीर होते हुए भी ब्रिटेन में इन प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ काफी माहौल है और इसीलिए लेबर पार्टी अगले चुनावों में उसे एक खास मुद्दा बना रही है क्योंकि इन स्कूलों से निकले बच्चे इंगलैंड की असली समस्याओं से अलग रहते हैं, ऐयाशी में रहते हैं, गरीबों को कीड़ेमकोड़े सम?ाते हैं और सब से खतरनाक बात यह है कि ये लोग अपने जैसों की सहायता से पूरे शासन पर कब्जा किए रखते हैं.

यह भारत में कई गुना पैमाने पर हो रहा है. जहां ब्रिटेन में यह केवल मांबाप के पैसे को जताता है, वहीं हमारे यहां लगभग हर जाति ने अपना प्राइवेट स्कूल खोल लिया है और ऊंची जातियों की सरकार इन स्कूलों को हर सुविधा दे रही है. उन्हें सस्ते में जमीनें दी जा रही हैं, उन के हिसाब से सिलेबस बन रहा है, उन के हिसाब से पढ़ाई का स्टैंडर्ड तैयार हो रहा है और सब का मकसद है कि गरीब जातियों के लोग सरकारी स्कूलों में धकेले जाएं जहां टीचर्स को तो मोटा वेतन मिलता है पर वे पढ़ाई जानबू?ा कर नहीं कराते ताकि जन्म से वर्गव्यवस्था की सोच के अनुसार पिछले जन्मों के पापों का फल इस जन्म में बच्चे भोगते रहें और ऊंची जातियों के बच्चों के लिए लेबर सप्लाई होती रहे.

गरीब लेकिन होशियार स्टूडैंट्स अच्छे नंबर ला कर जब कालेजों में जाते हैं तो वहां सरकारी स्कूल वाले बच्चों को अलगथलग कर दिया जाता है और वे हीनभावना में ही मारे जाते हैं. अब तो सैल्फ पेइंग कालेजों की भी भरमार हो गई है और संस्कारी, सनातनी विचारों वाली सरकार उन्हें बड़े जोरशोर से पूरी तरह सपोर्ट दे रही है ताकि पीढ़ी दर पीढ़ी ऊंची जातियां पिछली पीढि़यों के पुण्यों का लाभ उठाती रहें और दानपुण्य, तीर्थ, मंदिरों को बनवा कर प्राइमरी स्कूल से मरने तक भेदभाव को कायम रख सकें. होशियार स्टूडैंट्स कालेजों में ही नहीं, जब नौकरियों में भी आ जाते हैं तो फ्रस्टेड रहते हैं और अपने पर लगे जाति के रंग, जिसे शिक्षा ने और गहरा कर दिया को धो नहीं पाते.

लेबर पार्टी इंगलैंड में सही कर रही है. प्राइवेट स्कूल प्रकृति के खिलाफ हैं. मांबाप की कमाई का फायदा छोटे बच्चों को घर में तो मिलता है पर पब्लिक स्पेस में भी मिले, यह गलत है. ऐजुकेशन बराबरी का पाठ पढ़ाए. यह वह खेल का मैदान हो जहां सब को बराबर का टेलैंट दिखाने का मौका मिलता है.

तुम ने क्यों कहा मैं सुंदर हूं- भाग 1 : क्या दो कदम ही रहा दोनों का साथ

लेखक- मनोरंजन सहाय सक्सेना

सरकारी नौकरियों में लंबे समय तक एकसाथ काम करते और सरकारी घरों में साथ रहते कुछ सहकर्मियों से पारिवारिक रिश्तों से भी ज्यादा गहरे रिश्ते बन जाते हैं, मगर रिटायरमैंट के बाद अपने शहरोंगांवों में वापसी व दूसरे कारणों के चलते मिलनाजुलना कम हो जाता है. फिर भी मिलने की इच्छा तो बनी ही रहती है. उस दिन जैसे ही मेरे एक ऐसे ही सहकर्मी मित्र का उन के पास जल्द पहुंचने का फोन आया तो मैं अपने को रोक नहीं सका.

मित्र स्टेशन पर ही मिल गए. मगर जब उन्होंने औटो वाले को अपना पता बताने की जगह एक गेस्टहाउस का पता बताया तो मैं ने आश्चर्य से उन की ओर देखा. वे मुझे इस विषय पर बात न करने का इशारा कर के दूसरी बातें करने लगे.

गेस्टहाउस पहुंच कर खाने वगैरह से फारिग होने के बाद वे बोले, ‘‘मेरे घर की जगह यहां गेस्टहाउस में रहने की कहानी जानने की तुम्हें उत्सुकता होगी. इस कहानी को सुनाने के लिए और इस का हल करने में तुम्हारी मदद व सुझाव के लिए ही तुम्हें बुलाया है, इसलिए तुम्हें तो यह बतानी ही है.’’ कुछ रुक कर उन्होंने फिर बोलना शुरू किया, ‘‘मित्र, महिलाओं की तरह उन की बीमारियां भी रहस्यपूर्ण होती हैं. हर महिला के जीवन में उम्र के पड़ाव में मीनोपौज यानी प्राकृतिक अंदरूनी शारीरिक बदलाव होता है, जो डाक्टरों के अनुसार भी कोई बीमारी तो नहीं होती, मगर इस का मनोवैज्ञानिक प्रभाव हर महिला पर अलगअलग तरह से होता है. कुछ महिलाएं इस में मनोरोगों से ग्रस्त हो जाती हैं.

‘‘इसी कारण मेरी पत्नी भी मानसिक अवसाद की शिकार हो गई, तो मेरा जीवन कई कठिनाइयों से भर गया. घरपरिवार की देखभाल में तो उन की दिलचस्पी पहले ही कम थी, अब इस स्थिति में तो उन की देखभाल में मुझे और मेरी दोनों नवयुवा बेटियों को लगे रहना पड़ने लगा जिस का असर बेटियों की पढ़ाई और मेरे सर्विस कैरियर पर पड़ रहा था.

‘‘पत्नी की देखभाल के लिए विभाग में अपने अहम पद की जिम्मेदारी के तनाव से फ्री होने के लिए जब मैं ने विभागाध्यक्ष से मेरी पोस्ंिटग किसी बेहद सामान्य कार्यवाही वाली शाखा में करने की गुजारिश की, तो उन्होंने नियुक्ति ऐसे पद पर कर दी जो सरकारी सुविधाओं को भोगते हुए नाममात्र का काम करने के लिए सृजित की गई लगती थी.’’

‘‘काम के नाम पर यहां 4-6 माह में किसी खास मुकदमे के बारे में सरकार द्वारा कार्यवाही की प्रगति की जानकारी चाहने पर केस के संबंधित पैनल वकीलों से सूचना हासिल कर भिजवा देना होता था.

‘‘मगर मुसीबत कभी अकेले नहीं आती. मेरे इस पद पर जौइन करने के 3 हफ्ते बाद ही उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार से विभिन्न न्यायालयों में सेवा से जुड़े 10 वर्ष से ज्यादा की अवधि से लंबित मामलों में कार्यवाही की जानकारी मांग ली. मैं ने सही स्थिति जानने के लिए वकीलों से मिलना शुरू किया. विभाग में ऐसे मामले बड़ी तादाद में थे, इसलिए वकील भी कई थे.

‘‘इसी सिलसिले में 3-4 दिनों में कई वकीलों से मिलने के बाद में एक महिला पैनल वकील के दफ्तर में पहुंचा. उन पर नजर डालते ही लगा कि उन्होंने अपने को एक वरिष्ठ और व्यस्त वकील दिखाने के लिए नीली किनारी की मामूली सफेद साड़ी पहन रखी है और बिना किसी साजसज्जा के गंभीरता का मुखौटा लगा रखा है. और 2-3 फाइलों के साथ कानून की कुछ मोटी किताबें सामने रख कर बैठी हुई हैं. मेरे आने का मकसद जानते ही उन्होंने एक वरिष्ठ वकील की तरह बड़े रोब से कहा, ‘देखिए, आप के विभाग के कितने केस किसकिस न्यायाधीश की बैंच में पैडिंग हैं और इस लंबे अरसे में उन में क्या कार्यवाही हुई है, इस की जानकारी आप के विभाग को होनी चाहिए. मैं वकील हूं, आप के विभाग की बाबू नहीं, जो सूचना तैयार कर के दूं.’

‘‘इस प्रसंग में वकील साहिबा के साथ अपने पूर्व अधिकारियों के व्यवहार को जानते व समझते हुए भी मैं ने उन से पूरे सम्मान के साथ कहा, ‘वकील साहिबा, माफ करें, इन मुकदमों में सरकार आप को एक तय मानदेय दे कर आप की सेवाएं प्राप्त करती है, तो आप से उन में हुई कार्यवाही कर सूचना प्राप्त करने का हक भी रखती है. वैसे, हैडऔफिस का पत्र आप को मिल गया होगा. मामला माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा मांगी गई सूचना का है. यह जिम्मेदारीभरा काम समय पर और व्यवस्था से हो जाए, इसलिए मैं आप लोगों से संपर्क कर रहा हूं, आगे आप की मरजी.’

‘‘मेरी बात सुन कर वकील साहिबा थोड़ी देर चुप रहीं, मानो कोई कानूनी नुस्खा सोच रही हों. फिर बड़े सधे लहजे में बोलीं, ‘देखिए, ज्यादातर केसेज को मेरे सीनियर सर ही देखते थे. उन का हाल  में बार कोटे से न्यायिक सेवा में चयन हो जाने से वे यहां है नहीं, इसलिए मैं फिलहाल आप की कोई मदद नहीं कर सकती.’

‘ठीक है मैडम, मैं चलता हूं और आप का यही जवाब राज्य सरकार को भिजवा दिया जाएगा.’ कह कर मैं चलने के लिए उठ खड़ा हुआ तो वकील साहिबा को कुछ डर सा लगा. सो, वे समझौते जैसे स्वर में बोलीं, ‘आप बैठिए तो, चलिए मैं आप से ही पूछती हूं कि यह काम 3 दिनों में कैसे किया जा सकता है?’

‘‘अब मेरी बारी थी, इसलिए मैं ने उन्हीं के लहजे में जवाब दिया, ‘देखिए, यह न तो मेरा औफिस है, न यहां मेरा स्टाफ काम करता है. ऐसे में मैं क्या कह सकता हूं.’ यह कह कर मैं वैसे ही खड़ा रहा तो अब तक वकील साहिबा शायद कुछ समझौता कर के हल निकालने जैसे मूड में आ गई थीं. वे बोलीं, ‘देखिए, सूचना सुप्रीम कोर्ट को भेजी जानी है, इसलिए सूचना ठोस व सही तो होनी ही चाहिए, और अपनी स्थिति मैं बता चुकी हूं, इसलिए आप कड़वाहट भूल कर कोई रास्ता बताइए.’

‘‘वकील साहिबा के यह कहने पर भी मैं पहले की तरह खड़ा ही रहा. तो वकील साहिबा कुछ ज्यादा सौफ्ट होते हुए बोलीं, ‘देखिए, कभीकभी बातचीत में अचानक कुछ कड़वाहट आ जाती है. आप उम्र में मेरे से बड़े हैं. मेरे फादर जैसे हैं, इसलिए आप ही कुछ रास्ता बताइए ना.’

‘‘देखिए, यह कोई इतना बड़ा काम नहीं है. आप अपने मुंशी से कहिए. वह हमारे विभाग के मामलों की सूची बना कर रिपोर्ट बना देगा.’

‘‘देखिए, आप मेरे फादर जैसे हैं, आप को अनुभव होगा कि मुंशी इस बेगार जैसे काम में कितनी दिलचस्पी लेगा, वैसे भी आजकल उस के भाव बढ़े हुए हैं. सीनियर सर के जाने के बाद कईर् वकील लोग उस को बुलावा भेज चुके हैं,’ कह कर उन्होंने मेरी ओर थोड़ी बेबसी से देखा. मुझे उन का दूसरी बार फादर जैसा कहना अखर चुका था. सो, मैं ने उन्हें टोकते हुए कहा, ‘मैडम वकील साहिबा, बेशक आप अभी युवा ही है और सुंदर भी हैं ही, मगर मेरी व आप की उम्र में 4-5 साल से ज्यादा फर्क नहीं होगा. आप व्यावसायिक व्यस्तता के कारण अपने ऊपर ठीक से ध्यान नहीं दे पाती हैं, नहीं तो आप…

‘‘महिला का सब से कमजोर पक्ष उस को सुंदर कहा जाना होता है. इसलिए वे मेरी बात काट कर बोलीं, ‘आप कैसे कह रहे हैं कि मेरी व आप की उम्र में सिर्फ 4-5 साल का फर्क है और आप मुझे सुंदर कह कर यों ही क्यों चिढ़ा रहे हैं.’ उन्होंने एक मुसकान के साथ कहा तो मैं ने सहजता से जवाब दिया, ‘वकील साहिबा, मैं आप की तारीफ में ही सही, मगर झूठ क्यों बोलूंगा? और रही बात आप की उम्र की, तो धौलपुर कालेज में आप मेरी पत्नी से एक साल ही जूनियर थीं बीएससी में. उन्होंने आप को बाजार वगैरह में कई बार आमनासामना होने पर पहचान कर मुझे बतलाया था. मगर आप की तरफ से कोई उत्सुकता नहीं होने पर उन्होंने भी परिचय को पुनर्जीवित करने की कोशिश नहीं की.’

‘‘अब तक वकील साहिबा अपने युवा और सुंदर होने का एहसास कराए जाने से काफी खुश हो चुकी थीं. इसलिए बोलीं, ‘अच्छा ठीक है, मगर अब आप बैठ तो जाइए, मैं चाय बना कर लाती हूं, फिर आप ही कुछ बताएं,’ कह कर वे कुरसी के पीछे का दरवाजा खोल कर अंदर चली गईं.

‘‘थोड़ी देर में वे एक ट्रे में 2 कप चाय और नाश्ता ले कर लौटीं और बोलीं, ‘आप अकेले बोर हो रहे होंगे. मगर क्या करूं, मैं तो अकेली रहती हूं, अकेली जान के लिए कौन नौकरचाकर रखे.’ उन की बात सुन कर एकदफा तो लगा कि कह दूं कि सरकारी विभागों के सेवा संबंधी मुदकमों के सहारे वकालत में इतनी आमदनी भी नहीं होती? मगर जनवरी की रात को 9 बजे के समय और गरम चाय ने रोक दिया.

‘‘चाय पीने के बाद तय हुआ कि मैं अपने कार्यालय में संबंधित शाखा के बाबूजी को उन के मुंशी की मदद करने को कह दूंगा और दोनों मिल कर सूची बना लेंगे. फिर उन की फाइलों में अंतिम तारीख को हुई कार्यवाही की फोटोकौपी करवा कर वे सूचना भिजवा देंगी.

‘‘सूचना भिजवा दी गई और कुछ दिन गुजर गए मगर कोई काम नहीं होने की वजह से मैं उन से मिला नहीं. तब उस दिन दोपहर में औफिस में उन का फोन आया. फोन पर उन्होंने मुझे शाम को उन के औफिस में आ कर मिलने की अपील की.

‘‘शाम को मैं उन के औफिस में पहुंचा तो एकाएक तो मैं उन्हें पहचान ही नहीं पाया. आज तो वे 3-4 दिनों पहले की प्रौढ़ावस्था की दहलीज पर खड़ी वरिष्ठ गंभीर वकील लग ही नहीं रही थीं. उन्होंने शायद शाम को ही शैंपू किया होगा जिस से उन के बाल चमक रहे थे, हलका मेकअप किया हुआ था और एक बेहद सुंदर रंगीन साड़ी बड़ी नफासत से पहन रखी थी जिस का आंचल वे बारबार संवार लेती थीं.

‘‘मुझे देखते ही उन के मुंह पर मुसकान फैल गई तो पता नहीं कैसे मेरे मुंह से निकल गया, ‘क्या बात है मैडम, आज तो आप,’ मगर कहतेकहते मैं रुक गया तो वे बोलीं, ‘आप रुक क्यों गए, बोलिए, पूरी बात तो बोलिए.’ अब मैं ने पूरी बात बोलना जरूरी समझते हुए बोल दिया, ‘ऐसा लगता है कि आप या तो किसी समारोह में जाने के लिए तैयार हुई हैं, या कोई विशेष व्यक्ति आने वाला है.’ मेरी बात सुन कर उन के चेहरे पर एक मुसकान उभरी, फिर थोड़ा अटकती हुई सी बोलीं, ‘आप के दोनों अंदाजे गलत हैं, इसलिए आप अपनी बात पूरी करिए.’ तो मैं ने कहा, ‘आज आप और दिनों से अलग ही दिख रही हैं.’

‘‘और दिनों से अलग से क्या मतलब है आप का,’ उन्होंने कुछ शरारत जैसे अंदाज में कहा तो मैं ने भी कह दिया, ‘आज आप पहले दिन से ज्यादा सुंदर लग रही हैं.’

‘‘मेरी बात सुन कर वे नवयुवती की तरह मुसकान के साथ बोलीं, ‘आप यों ही झूठी तारीफ कर के मुझे चने के झाड़ पर चढ़ा रहे हैं.’ तो मैं ने हिम्मत कर के बोल दिया, ‘मैं झूठ क्यों बोलूंगा? वैसे, यह काम तो वकीलों का होता है. पर हकीकत में आज आप एक गंभीर वकील नहीं, किसी कालेज की सुंदर युवा लैक्चरर लग रही हैं?’ यह सुन कर वे बेहद शरमा कर बोली थीं, ‘अच्छा, बहुत हो गई मेरी खूबसूरती की तारीफ, आप थोड़ी देर अकेले बैठिए, मैं चाय बना कर लाती हूं. चाय पी कर कुछ केसेज के बारे में बात करेंगे.’

 

बिना शर्त: भाग 2- मिन्नी के बारे में क्या जान गई थी आभा

शाम को वह मिन्नी के साथ रैस्टोरैंट में पहुंच गई थी जहां महेश उस की प्रतीक्षा कर रहा था. खाने के बाद जब वह घर वापस लौटी तो 10 बज रहे थे.

बिस्तर पर लेटते ही मिन्नी सो गई थी. पर उस की आंखों में नींद न थी. वह आज महेश के बारे में बहुतकुछ जान चुकी थी कि महेश के पापा एक व्यापारी हैं. वह अपने घरपरिवार में इकलौता है. मम्मीपापा उस की शादी के लिए बारबार कह रहे हैं. कई लड़कियों को वह नापसंद कर चुका है. उस ने मम्मीपापा से साफ कह दिया है कि वह जब भी शादी करेगा तो अपनी मरजी से करेगा.

वह सम झ नहीं पा रही थी कि महेश उस की ओर इतना आकर्षित क्यों हो रहा है. महेश युवा है, अविवाहित और सुंदर है. अच्छीखासी नौकरी है. उस के लिए लड़कियों की कमी नहीं. महेश कहीं इस दोस्ती की आड़ में उसे छलना तो नहीं चाहता? पर वह इतनी कमजोर नहीं है जो यों किसी के बहकावे में आ जाए. उस के अंदर एक मजबूत नारी है. वह कभी ऐसा कोई गलत काम नहीं करेगी जिस से आजीवन प्रायश्चित्त करना पड़े.

कमल उस का मकान मालिक था. उस का फ्लैट भी बराबर में ही था. वह एक सरकारी विभाग में कार्यरत था. परिवार के नाम पर कमल, मां और 5 वर्षीय बेटा राजू थे. कमल की पत्नी बहुत तेज व  झगड़ालू स्वभाव की थी. वह कभी भी आत्महत्या करने और कमल व मांजी को जेल पहुंचाने की धमकी भी दे देती थी. रोजाना घर में किसी न किसी बात पर क्लेश करती थी. कमल ने रोजाना के  झगड़ों से परेशान हो कर पत्नी से तलाक ले लिया था.

आभा मिन्नी को सुबह औफिस जाते समय एक महिला के घर छोड़ आती थी, जहां कुछ कामकाजी परिवार अपने छोटे बच्चों को छोड़ आते थे. शाम को औफिस से लौटते समय वह मिन्नी को वहां से ले आती थी.

एक दिन मांजी ने आभा के पास आ कर कहा था, ‘बेटी, तुम औफिस जाते समय मिन्नी को हमारे पास छोड़ जाया करो. वह राजू के साथ खेलेगी. दोनों का मन लगा रहेगा. हमारे होते हुए तुम किसी तरह की चिंता न करना, आभा.’

उस दिन के बाद वह मिन्नी को मांजी के पास छोड़ कर औफिस जाने लगी.

रविवार छुट्टी का दिन था. वह मिन्नी के साथ एक शौपिंग मौल में पहुंची. लौट कर बाहर सड़क पर खड़ी औटो की प्रतीक्षा कर रही थी, तभी एक बाइक उस के सामने रुकी, बाइक पर बैठे कमल ने कहा, ‘आभाजी, आइए बैठिए.’

वह चौंकी, ‘अरे आप? नहींनहीं, कोई बात नहीं, मैं चली जाऊंगी. थ्रीव्हीलर मिल जाएगा.’

‘क्यों, टूव्हीलर से काम नहीं चलेगा क्या? इस ओर मेरा एक मित्र रहता है. बस, उसी से मिल कर आ रहा हूं. यहां आप को देखा तो मैं सम झ गया कि आप किसी बस या औटो की प्रतीक्षा में हैं. आइए, आप जहां कहेंगी, मैं आप को छोड़ दूंगा.’

‘मु झे पलटन बाजार जाना है,’ उस ने बाइक पर बैठते हुए कहा.

‘ओके मैडम. घर पहुंच कर मां को मेरे लिए भी एक रस्क का पैकेट दे देना.’ उस ने रस्क के कई पैकेट खरीदे थे जो कमल ने देख लिए थे.

‘ठीक है,’ उस ने कहा था.

कमल उसे व मिन्नी को पलटन बाजार में छोड़ कर चला गया.

आभा कभीकभी मांजी व कमल के बारे में सोचती कि कितना अच्छा स्वभाव है दोनों का. हमेशा दूसरों की भलाई के बारे में सोचते हैं. दोनों ही बहुत मिलनसार व परोपकारी हैं.

अकसर मांजी राजू को साथ ले कर उस के पास आ जाती थीं. राजू और मिन्नी खेलते रहते. वह मांजी के साथ बातों में लगी रहती.

एक दिन मांजी ने कहा था, ‘आभा, हमारे साथ तो कुछ भी ठीक नहीं हुआ. ऐसी  झगड़ालू बहू घर में आ गई थी कि क्या बताऊं. बहू थी या जान का क्लेश. हमें तो तुम जैसी सुशील बहू चाहिए थी.’

वह कुछ नहीं बोली. बस, इधरउधर देखने लगी.

धीरेधीरे उस के व महेश के संबंधों की दूरी घटने लगी थी. महेश ने उस से कह दिया था कि वह जल्द ही उस के जीवन का हमसफर बन जाएगा. उसे भी लग रहा था कि उस ने महेश की ओर हाथ बढ़ा कर कुछ गलत नहीं किया है.

आज शाम जब वह रसोई में थी तो महेश का फोन आ गया था, ‘मैं कुछ देर बाद आ रहा हूं. कुछ जरूरी बात करनी है.’ ऐसी क्या जरूरी बात है जो महेश घर आ कर ही बताना चाहता है. उस ने जानना भी चाहा, परंतु महेश ने कह दिया था कि वहीं घर आ कर बताएगा.

एक घंटे बाद महेश उस के पास आ गया.

‘क्या लोगे? ठंडा या गरम?’ उस ने पूछा था.

‘कुछ नहीं.’

‘ऐसा कैसे हो सकता है? कोल्डडिं्रक्स ले लीजिए,’ कहते हुए वह रसोई की ओर चली गई. जब लौटी तो ट्रे में 2 गिलास कोल्डडिं्रक्स के साथ खाने का कुछ सामान था.

‘अब कहिए अपनी जरूरी बात,’ उस ने मुसकरा कर महेश की ओर देखते हुए कहा.

‘आज मम्मीपापा आए हैं दिल्ली से. मैं ने उन को सबकुछ बता दिया था. यह भी कह दिया था कि शादी करूंगा तो केवल आभा से. कल वे तुम से मिलने आ रहे हैं,’ महेश ने उस की ओर देखते हुए कहा था. उस के चेहरे पर प्रसन्नता की रेखाएं फैलने लगीं.

‘मम्मीपापा ने इस शादी की स्वीकृति तो दे दी है, परंतु एक शर्त रख दी है.’

वह चौंक उठी, ‘शर्त, कैसी शर्त?’

‘वे कहते हैं कि शादी के बाद मिन्नी किसी होस्टल में रहेगी या नानानानी के पास रहेगी.’

यह सुन कर मन ही मन तड़प उठी थी वह. उस ने कहा, ‘यह तो मम्मीपापा की शर्त है, आप का क्या कहना है?’

‘देखो आभा, मेरी बात को सम झने की कोशिश करो. मिन्नी को अच्छे स्कूल व होस्टल में भेज देंगे. हम उस से मिलते भी रहेंगे.’

‘नहीं, महेश ऐसा नहीं हो सकता. मैं मिन्नी के बिना और मिन्नी मेरे बिना नहीं रह सकती.’

‘ओह आभा, तुम सम झती क्यों नहीं.’

‘मु झे कुछ नहीं सम झना है. मैं एक मां हूं. मिन्नी मेरी बेटी है. आप ने यह कैसे कह दिया कि मिन्नी होस्टल में रह लेगी. मैं अपनी मिन्नी को अपने से दूर नहीं कर सकती.’

‘तब तो बहुत कठिन हो जाएगा, आभा. मम्मीपापा नहीं मानेंगे.’

लेखक – रमेश चंद्र छबीला

थैंक यू फौर एवरीथिंग

सुरुचि के मकान की लीज समाप्त हो चुकी थी, इसलिए वह अपने सासससुर के साथ ही रह रही थी. इस का अर्थ यह था कि उस की प्रिय सखी रूपा, जो उस से मिलने आ रही थी वह भी अब उन के साथ यहीं रहेगी. रूपा को कालेज की क्रांतिनारी सुरुचि को इस तरह संयुक्त परिवार में रहता देख कोई खास आश्चर्य नहीं हुआ. उसे लगा कि अगर सुरुचि नियमों और परंपराओं को मानेगी तो ज्यादा सुखी रहेगी. कुछ भी हो शांतनु तो सुरुचि की आंखों के सामने है और यह एक स्त्री के लिए काफी है. सुबहसवेरे शांतनु रूपा को स्टेशन लेने आ गया था. ट्रेन में नींद पूरी न होने की वजह से वह स्टेशन से घर आते वक्त शांतनु के कंधे का सहारा ले कर सो गई पर अब उसे लग रहा था कि आगे भी कहीं शांतनु के साथ अकेले समय गुजारना न पड़े. उसे रहरह कर शांतनु के साथ गुजारी वे सैकड़ों बातें याद आ रही थीं, जो कभी उस की सांसों का हिस्सा थीं.

‘‘यह सिर्फ 2 दिन की बात है, मम्मीपापा को कोई तकलीफ नहीं होगी,’’ सुरुचि ने उसे समझाते हुए घर पहुंचते ही प्यार भरी झप्पी में लेते हुए कहा, ‘‘और मुझे पता है कि तुम मेरी सहेली हो मेरी सौत नहीं, जिस के साथ मुझे अपना कमरा साझा करने में परेशानी हो,’’ और फिर दोनों खिलखिला कर हंस पड़ीं, ‘‘शांतनु के साथ तुम्हारी अच्छी पटेगी, यार.’’रूपा ने सुरुचि को पूरी बात नहीं बताई थी. कार में वह अपने को कंट्रोल नहीं कर पाई थी और शांतनु भी उस के हाथों की शरारतों का कोई प्रतिरोध नहीं कर रहा था. सुबह नाश्ते में ब्रैड पर जैम लगाते वक्त रूपा केवल यही सोच रही थी कि अगर ज्यादा लोग आसपास रहें तो अच्छा रहेगा ताकि वह शांतनु के साथ गलत न करने लगे. आखिर सुरुचि उस की सच्ची दोस्त है. वह सुरुचि को देख थोड़ा सा मुसकराई और फिर अपने पांवों को दबाने लगी. सफर ने उसे थका दिया था.

पर जल्द ही तब रूपा की भली कामनाएं हवा हो गईं जब उसे पता चला कि दोपहर में शांतनु के मातापिता तो 1 सप्ताह के लिए इंदौर जा रहे हैं. उसे तो केवल एक सच पता था कि आदमी और औरत के बीच एक शरीर का रिश्ता होता है, जो उस के और शांतनु के बीच बरसों तक रहा पर वह अब कौन सा 2 दिन में शांतनु को अपनी सहेली से छीन लेगी. आखिर इतने सालों से दोनों के विवाह बाद भी तो वह अलग रह पाई है. ‘‘अरे, तुम्हारा समय यहां बड़ी आसानी से कट जाएगा. मेरी छुट्टियां नहीं हैं तो क्या हुआ. शांतनु की तो नाइट शिफ्ट है. वह दिन में है न तुम से बातें करने के लिए,’’ सुरुचि उसे चाय का प्याला पकड़ाते हुए बोली, ‘‘मेरा प्रिय पति अपनी प्यारी पत्नी के लिए इतना तो कर ही सकता है.’’ ‘‘मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगी जिस से इस की वैवाहिक जिंदगी खराब हो,’’ रूपा स्वयं को मन ही मन समझाने लगी. उसे अपने पर पूरा भरोसा न था और बारबार याद दिलाने की कोशिश कर रही थी. ‘मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि तुम दिन भर क्या करोगी, आखिर तुम इतनी बड़ी फर्म में क्रिएटिव मैनेजर ऐसे ही नहीं बन गई,’ सुरुचि ने उसे चिढ़ाते हुए कहा.

‘‘तुम इतना मत सोचो, मैं आराम से रहूंगी.’’

सुरुचि इतनी अनभिज्ञ भी नहीं थी. उस ने अपने पति की कुचली पतलून और उस पर रूपा के दो बालों से कुछ तो अंदाजा लगा ही लिया था. जब पसर कर कार में रूपा लेट गई थी जैसा वह कई साल पहले करती थी.

‘‘तो अब अगला एजेंडा क्या है?’’ रूपा ने भौंहें उचका कर अपनी सहेली से पूछा. सुरुचि उस का हाथ पकड़ कर उसे अंदर एक छोटे कमरे में ले गई. वहां केवल एक मेज और 2 कुरसियां रखी थीं. दोनों एकदूसरे के सामने बैठ गईं. फिर सुरुचि अपनी सखी की गोद में सिर रख कर लेट गई. रूपा उस के सिर पर धीरेधीरे अपने होंठों का स्पर्श देने लगी. थोड़ी ही देर में सुरुचि ने सुबकियां भरते हुए रोना शुरू कर दिया.

‘‘क्या हुआ, तुम खुश नहीं हो कि मैं यहां आई?’’ रूपा ने उस के चेहरे को अपने हाथों में भरते हुए कहा.

‘‘तू मेरी सब से सच्ची सहेली है. तुझे यह पता है न,’’ सुरुचि यह कह बाहर चली गई. उस ने बहुत कम कहा पर पता चल गया कि वह रूपा को भी चाहती है और शांतनु को भी. शांतनु आज दिन भर उसे न दिखे रूपा यह कामना मन ही मन करने लगी. उस का इस सहेली के अलावा और कौन है? इसे धोखा देना अपनेआप को धोखा देना होगा. वह अपनी इस बहन की खुशियां यों 2 दिन में बरबाद नहीं कर सकती.

‘‘पानी गरम हो गया है, अब तुम नहा कर फ्रैश हो जाओ,’’ सुरुचि ने बाहर से आवाज लगाई, ‘‘क्या तुम सुन रही हो?’’

‘‘ह…हां, नहीं मैं जरा कुछ सोच रही थी,’’ रूपा ने उठते हुए कहा.

‘‘तुम क्या सोचती हो… यह मेरे लिए अच्छा है या बुरा कि कांच की एक प्लेट टूट गई,’’ सुरुचि ने रसोई में उसे प्लेट दिखाते हुए कहा. ‘‘पुरानी प्लेट टूट गई अच्छा हुआ. कांच तो नहीं चुभा,’’ रूपा अपने बैग से इटैलियन क्रौकरी का एक नया सैट निकालते हुए बोली, ‘‘नई प्लेट्स अब पुरानी की जगह ले लेंगी.’’ तभी कमरे का दरवाजा खुला और शांतनु अंदर आया. रूपा का चेहरा थोड़ा सा खिला पर उसे लगा कि उस की सहेली रसोई में कुछ चुपचुप सी काम कर रही है. यह कैसी अनुभूति होगी कि सब जानकर भी अनजान हो जाना और भविष्य के सहारे स्वयं को छोड़ देना. रूपा के मनमस्तिष्क में यही सब भाव आ रहे थे. तभी सुरुचि कमरे में आई और उस ने रूपा से कहा, ‘‘क्या तुम थोड़ी देर के लिए टैरेस पर चली जाओगी? मुझे शांतनु से कुछ बातें करनी हैं.’’ रूपा ने उंगलियां लहराते हुए उसे बायबाय का इशारा किया और टैरेस की ओर मुड़ गई. टैरेस पर एक आरामकुरसी रखी थी, जिस पर वह पांव फैला कर सुस्ताने लगी. थकी होने की वजह से उसे नींद आ गई और फिर जब वह अंदर आई तब सुरुचि औफिस जाने के लिए तैयार थी और शांतनु कुछ फाइल्स संभाल रहा था. बीचबीच में पतिपत्नी एकदूसरे को एक क्षण के लिए देख भी लेते थे. रूपा को लगा कि दोनों में कितना प्यार है इस आत्मीयता ने उस के दिल को छू लिया.

उसे लगा उस की सखी के पास सब कुछ है, शिक्षा, संस्कार, नौकरी, पति और प्यार. फिर अगले ही पल ‘यह प्यार इतना रहस्यमयी क्यों होता है?’ वह सोचने लगी. ‘‘हम शाम को मिलते हैं,’’ सुरुचि औफिस के लिए रवाना होते हुए बोली. दोनों गले मिलीं और एकदूसरे के गाल पर चुंबन दिया. मुख्यद्वार बंद करने के बाद रूपा ने अपने पर्स से एक अंगूठी निकाली और उसे देख अपनी असफल शादी के बारे में सोचने लगी. उस की जल्दबाजी में की शादी का पछतावा उसे सुहागरात को ही हो गया था जब उस के पति ने एक ही रात में उस से दूसरी बार प्यार करने पर अनिच्छा जाहिर की थी.

‘‘आई एम ए मैन, नोट ए मशीन,’’ उस के पति ने उसे उलाहना दिया था. कोई तो हो जो मुझे दिनरात प्यार करे, यही सोच उस ने जाति से बाहर जा कर एक पंजाबी से प्रेम विवाह किया था. पर यह शादी साल भर भी नहीं चली.

‘‘तुम्हारी पोजिशन काफी इंट्रैस्टिंग है,’’ शांतनु की इस बात ने उस के विचारों का क्रम तोड़ा. वह किचन से कोल्डड्रिंक के 2 गिलास ले आया.

‘‘तुम क्यों परेशान हो रहे हो? मैं मेहमान थोड़े ही हूं,’’ कहते हुए उस ने शांतनु का हाथ पकड़ उसे अपने पास बैठा लिया. जवाब में शांतनु केवल मुसकराया. रूपा ने आह भरते हुए कहा, ‘‘शांतनु, मुझे लगता है हमें ज्यादा समय साथ नहीं बिताना चाहिए.’’ वह फिर हंसा. इस बार हंसी में केवल एक मर्दाना दंभ था, ‘‘क्यों, तुम्हारा खुद पर नियंत्रण नहीं है क्या?’’

‘‘तुम तो मझे कालेज के दिनों से जानते हो, फिर भी…’’ कहतेकहते वह थोड़ी रुकी, फिर बेबाक अंदाज में बोली, ‘‘मुझे चूमो,’’ और फिर सरक कर शांतनु के बिलकुल नजदीक आ गई. शांतनु के हाथों का स्पर्श उसे बहुत सुखद लग रहा था, पर वह उस का आग्रह क्यों स्वीकार नहीं कर रहा, यह सोच कर वह परेशान हो रही थी. शांतनु ने जवाब में उस का हाथ अपने दोनों हाथों के बीच दबाया और कहा, ‘‘मैं ऐसे ही ज्यादा ठीक हूं.’’

‘‘पर मैं,’’ कहते हुए रूपा रुकी और फिर उस की आंखों में एकटक देखने लगी कि कितनी कशिश है इन में. वह सम्मोहित हो रही थी और फिर अतीत को याद करने लगी जब दोनों ने एक ही नाटक में साथ में मंचन किया था और प्यार व शरीर दोनों मिले थे. आज शांतनु की आंखों में प्यार था पर वासना का दूरदूर तक कोई निशान न था. ‘क्योंकि मैं ही कामोन्मादी हूं तो इस में इस बेचारे का क्या दोष? मैं ही इसे लगातार प्रलोभन दिए जा रही हूं. रूपा मन ही मन खुद को कोसने लगी. ‘‘पता है शांतनु तुम मुझे कालेज डेज में डायमंड कहते थे,’’ रूपा ने कुछ सोचते हुआ कहा.

‘‘यस, देट यू आर इवन टुडे,’’ शांतनु बोला.

‘‘हां, मैं कितनी कठोर, निष्ठुर और ठंडी जो हूं डायमंड की तरह,’’ रूपा ने व्यंग्य कसा.

‘‘अरे, तुम तो हौट हो. किस ने कहा कि तुम कोल्ड हो?’’ शांतनु ने आंखें चौड़ी कर कहा. इस बात को सुन रूपा तेजी से घूमी और उस ने शांतनु के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी जीभ से उस के मुंह को खोलने का प्रयास करने लगी. उसे पता था कि वह आग से खेल रही है पर हीरे को आग का क्या भय. पूरे कमरे में केवल उन की सांसों की ध्वनि थी. कुछ समय बाद ही शांतनु ने उसे कमर से पकड़ कर अपने से दूर कर दिया. वह उसे आश्चर्य से देखने लगा. फिर कुछ सोच कर बोला, ‘‘तुम क्या करने जा रही हो?’’

‘‘तुम्हें प्यार करने और क्या?’’ वह हंसते हुए बोली, ‘‘और अब ज्यादा बातें मत करो. यही जो पहले भी हम करते रहे थे. शांतनु थोड़ा संजीदा हो गया. उस ने रूपा को हाथ से पकड़ कर अपने करीब बैठाया. फिर धीरे से बोला, ‘‘मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता हूं.’’

‘‘कहो माई लवर बौय,’’ रूपा के स्वर में शैतानी थी.

‘‘सुरुचि ने मुझ से विनती की थी कि मैं तुम्हें प्यार करूं और तुम्हारा ध्यान रखूं. वह तुम्हें बहुत चाहती है. वह नहीं चाहती कि तुम डिप्रैशन की दवा खाखा कर एक बार फिर बीमार हो जाओ. जैसा पहले 2-3 बार हो चुकी हो.’’ यह बात सुन कर रूपा का चेहरा फक सा हो गया. उसे ऐसा लगा गोया सुरुचि उस के गाल पर तमाचा जड़, बगल में खड़ी मुसकरा रही है. उसे अपनी सखी पर प्यार और गुस्सा दोनों आए पर उस का मन ग्लानि से भर गया. ‘‘तुम मुझे कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दो,’’ उस ने टूटते स्वर में शांतनु से कहा. शांतनु कमरे से बाहर चला गया.

शाम को जब सुरुचि घर आई तो उसे पता चला कि रूपा किसी अर्जेंट मीटिंग के लिए चली गई है. उस के लिए एक नोट छोड़ गई थी जिस पर लिखा था – ‘थैंक यू फौर ऐवरीथिंग.’

उस ने बैड पर नजर दौड़ाई. बैड वैसा ही लगा जैसा वह छोड़ गई थी. उस पर वह कंघा भी वहीं पड़ा था जिसे वह जानबूझ कर रख गई थी.

वन मिनट प्लीज: क्या रोहन और रूपा का मिलन दोबारा हो पाया- भाग 3

उसी पल उस ने उठ कर अपना प्रोफाइल बनाया था. फिर वह दिनरात नौकरी की तलाश में लैपटौप पर बैठी रहती थी. उस ने फेसबुक से रोहन का भी पता लगा लिया था. वह पुणे में अपनी एडवर्टाइजिंग कंपनी चला रहा था.

अब उस का उद्देश्य था, किसी तरह से भी पुणे पहुंचना. जल्द ही उस की चाहत ने उस का साथ दिया. एच.आर. की पोस्ट के लिए पुणे की ही एक कंपनी ने उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया. उस ने अपनी प्लेसमैंट एजेंसी से पहले फोन पर इंटरव्यू करवाने का आग्रह किया, जो बहुत अच्छा हुआ था. उन्होंने औनलाइन जौइन करने का पत्र भी भेज दिया. उस ने नैट से अपना टिकट भी कर लिया था और चुपचाप अपनी पूरी तैयारी कर ली थी. उस के बाद एक दिन वह अपने पापा से बोली, ‘पापा, मैं अपने पैरों पर खड़े होने के लिए नौकरी करना चाहती हूं.’

‘क्या तुम्हारा दिमाग खराब है? हमारे घर की लड़कियां नौकरी नहीं करतीं. पहले ही तुम ने मेरी बेइज्जती कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, अब क्या चाहती हो?’ मम्मी धीरे से बोलीं थीं, ‘कर लेने दीजिए घर में पड़ेपड़े उस का मन नहीं लगता है.’

पापा नाराज हो उठे थे, ‘हांहां जाओ, कोई नया गुल खिला कर मेरे मुंह पर कालिख पोतना. तुम मांबेटी मिल कर मु  झे चैन से जीने नहीं दोगी.’ आज वह अच्छी तरह सम  झ गई थी कि यहां पर उस का साथ देने वाला कोई नहीं है. पापा की जीवनशैली और विचार उस से मेल नहीं खाते. एक रात पिता के नाम एक पत्र लिख कर वह घर से निकल कर ट्रेन में जा कर बैठ गई थी. वैसे घबराहट के कारण वह नर्वस बहुत थी, क्योंकि जीवन में पहली बार वह घर से इतनी दूर जाने के लिए निकल पड़ी थी. उस ने कंपनी के गैस्टहाउस का पता ले लिया था.

नौकरी जौइन करने के बाद वह धीरेधीरे अपने जीवन में सैट हो रही थी. उस ने आनंदी नाम से अपना फेसबुक अकाउंट बनाया था और जल्दी ही रोहन के साथ चैट करने लगी थी. दोनों आपस में फेसबुक फ्रैंड बन गए थे. छोटीमोटी बातों को वह रोहन से बात कर के सुल  झा लेती थी. एक दिन उस ने उस से पूछा था, ‘आप के किसी दोस्त से कोई गलती हो जाए तो क्या आप उसे माफ कर देंगे?

उत्तर में वह बोला था, ‘यह तो गलती पर निर्भर करता है, लेकिन आप ऐसे क्यों पूछ रही हैं?’
‘बस ऐसे ही.’

रोहन उस से मिलने के लिए बेचैन था परंतु रूपा के मन में डर था कि वह उसे माफ करेगा या नहीं? उस के मन में हर पल एक द्वंद्व रहता था कि वह किस तरह से रोहन से माफी मांगे और कैसे यह कहे कि अब वह बदल चुकी है और अपने पहले किए व्यवहार के लिए बहुत शर्मिंदा है.

एक शाम वह मौैल में कौफी पी रही थी, तभी उसे वहां रोहन दिखाई पड़ा. वह उसे अनदेखा कर के अपनी कौफी वैसे ही छोड़ कर वहां से उठ गया और वह तेजी से लगभग दौड़ती सी जा कर रोहन का रास्ता रोक का खड़ी हो गई थी.

‘रोहन.’

‘तुम यहां कैसे?’

‘मैं यहां जौब करती हूं.’

‘अच्छा, मैं जल्दी में हूं, चलता हूं, मेरी मीटिंग है.’

‘रोहन वन मिनट प्लीज.’

एक क्षण को वह ठिठका, लेकिन तुरंत ही आगे बढ़ने लगा. उस ने अधिकारपूर्वक रोहन का हाथ पकड़ लिया था, ‘रोहन प्लीज, म़ु  झे मेरी गलतियों का एहसास है,’ नजरें   झुका का वह बोली थी, ‘मु  झे माफ कर दो. अब मैं बदल गई हूं. मु  झे एक मौका और दे दो,’ उस की आंखें डबडबाई हुई थीं.

‘नहीं रूपा, तुम ने बहुत देर कर दी. अब मेरे जीवन में दूसरी लड़की ने जगह बना ली है.’
‘कौन है वह?’

‘‘आनंदी.’’

वह जोर से हंस कर रोहन से लिपट कर बोली थी, ‘मेरे बुद्धू, फेसबुक की आनंदी तो मैं ही हूं.’
उसी दिन वह रोहन के साथ उस के घर गई थी. और आज अलार्म की आवाज से वह वर्तमान में लौट आई थी. अलसाए हुए रोहन ने उसे अपनी बांहों में भर लिया, तो उस के मुंह से आदतन निकल पड़ा था, ‘‘वन मिनट प्लीज.’

बिना शर्त: भाग 1- मिन्नी के बारे में क्या जान गई थी आभा

महेश के कमरे से बाहर निकलते ही आभा के हृदय की धड़कन धीमी होने लगी. उस ने सोफे पर गरदन टिका कर आंखें बंद कर लीं.

आभा ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि महेश आज उसे ऐसा उत्तर देगा जिस से उस के विश्वास का महल रेत का घरौंदा बन कर ढह जाएगा. महेश ने उस की गुडि़या सी लाड़ली बेटी मिन्नी के बारे में ऐसा कह कर उस के सपनों को चूरचूर कर दिया. पता नहीं वह कैसे सहन कर पाई उन शब्दों को जो अभीअभी महेश कह कर गया था.

वह काफी देर तक चिंतित बैठी रही. कुछ देर बाद दूसरे कमरे में गई जहां मिन्नी सो रही थी. मिन्नी को देखते ही उस के दिल में एक हूक सी उठी और रुलाई आ गई. नहीं, वह अपनी बेटी को अपने से अलग नहीं करेगी. मासूम भोली सी मिन्नी अभी 3 वर्ष की ही तो है. वह मिन्नी के बराबर में लेट गई और उसे अपने सीने से लगा लिया.

5 वर्ष पहले उस का विवाह प्रशांत से हुआ था. परिवार के नाम पर प्रशांत व उस की मां थी, जिसे वह मांजी कहती थी.

प्रशांत एक प्राइवेट कंपनी में प्रबंधक था.

वह स्वयं एक अन्य कंपनी में काम करती थी.

2 वर्षों बाद ही उन के घरपरिवार में एक प्यारी सी बेटी का जन्म हुआ. बेटी का मिन्नी नाम रखा मांजी ने. मांजी को तो जैसे कोई खिलौना मिल गया हो. मांजी और प्रशांत मिन्नी को बहुत प्यार करते थे.

एक दिन उस के हंसते, खुशियोंभरे जीवन पर बिजली गिर पड़ी थी. औफिस से घर लौटते हुए प्रशांत की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. सुन कर उसे लगा था मानो कोई भयंकर सपना देख लिया हो. पोस्टमार्टम के बाद जब प्रशांत का शव घर पर आया तो वह एक पत्थर की प्रतिमा की तरह निर्जीव हो गई थी.

मिन्नी अभी केवल 2 वर्ष की थी. उस की हंसीखुशी, सुखचैन मानो प्रशांत के साथ ही चला गया था. जब भी वह अपना शृंगारविहीन चेहरा शीशे में देखती तो उसे रुलाई आ जाती थी. कभीकभी तो वह अकेली देर तक रोती रहती.

उस के मां व बाबूजी आते रहते थे उस के दुख को कुछ कम करने के लिए. उस ने औफिस से लंबी छुट्टी ले ली थी.

एक दिन उस के बाबूजी ने उसे सम झाते हुए कहा था, ‘देख बेटी, जो दुख तु झे मिला है उस से बढ़ कर कोई दुख हो ही नहीं सकता. अब तो इस दुख को सहन करना ही होगा. यह तेरा ही नहीं, हमारा भी दुख है.’

वह चुपचाप सुनती रही.

‘बेटी, मिन्नी अभी बहुत छोटी है. तेरी आयु भी केवल 30 साल की है. अभी तो तेरे जीवन का सफर लंबा है. हम चाहते हैं कि फिर से तु झे कोई जीवनसाथी मिल जाए.’

‘नहीं, मु झे नहीं चाहिए कोई जीवनसाथी. अब तो मैं मिन्नी के सहारे ही अपना जीवन गुजार लूंगी. मैं इसे पढ़ालिखा कर किसी योग्य बना दूंगी. अगर मेरे जीवन में जीवनसाथी का सुख होता तो प्रशांत हमें छोड़ कर जाता ही क्यों?’ उस ने कहा था.

तब मां व बाबूजी ने उसे बहुत सम झाया था, पर उस ने दूसरी शादी करने से मना कर दिया था.

4 महीने बाद कंपनी ने उस का ट्रांस्फर देहरादून कर दिया था. वह बेटी मिन्नी के साथ देहरादून पहुंच गई थी.

देहरादून में उस की एक सहेली लीना थी. लीना का 4-5 कमरों का मकान था. लीना तो कहती थी कि उसे किराए का मकान लेने की क्या जरूरत है. यहीं उस के साथ रहे, जिस से उसे अकेलेपन का भी एहसास नहीं होगा. पर वह नहीं मानी थी.

उस ने हरिद्वार रोड पर 2 कमरों का एक फ्लैट किराए पर ले लिया था.

कुछ दिनों में उसे ऐसा लगने लगा था कि एक व्यक्ति उस में कुछ ज्यादा रुचि ले रहा है. वह व्यक्ति था महेश. कंपनी का सहायक प्रबंधक. महेश उसे किसी न किसी बहाने केबिन में बुलाता और उस से औफिस के काम के बारे में बातचीत करता.

एक दिन सुबह वह सो कर भी नहीं उठी थी कि मोबाइल फोन की घंटी बजने लगी. सुबहसुबह किस का फोन आ गया.

उस ने मोबाइल स्क्रीन पर पढ़ा – महेश.

महेश ने सुबहसुबह क्यों फोन किया? आखिर क्या कहना चाहता है वह? उस ने फोन एक तरफ रख दिया. आंखें बंद कर लेटी रही. फोन की घंटी बजती रही. दूसरी बार फिर फोन की घंटी बजी, तो उस ने  झुं झला कर फोन उठा कर कहा, ‘हैलो…’

‘आभाजी, आप सोच रही होंगी कि पता नहीं क्यों सुबहसुबह डिस्टर्ब कर रहा हूं जबकि हो सकता है आप सो रही हों. पर बात ही ऐसी है कि…’

‘ऐसी क्या बात है जो आप को इतनी सुबह फोन करने की जरूरत आ पड़ी. यह सब तो आप औफिस में भी…’

‘नहीं आभाजी, औफिस खुलने में अभी 3 घंटे हैं और मैं 3 घंटे प्रतीक्षा नहीं कर सकता.’

‘अच्छा, तो कहिए.’ वह सम झ नहीं पा रही थी कि वह कौन सी बात है जिसे कहने के लिए महेश 3 घंटे भी प्रतीक्षा नहीं कर पा रहा है.

‘जन्मदिन की शुभकामनाएं आप को व बेटी मिन्नी को. आप दोनों के जन्मदिन की तारीख भी एक ही है,’ उधर से महेश का स्वर सुनाई दिया.

चौंक उठी थी वह. अरे हां, आज तो उस का व बेटी मिन्नी का जन्मदिन है. वह तो भूल गई थी पर महेश को कैसे पता चला? हो सकता है औफिस की कंप्यूटर डिजाइनर संगीता ने बता दिया हो क्योंकि उस ने संगीता को ही बताया था कि उस की व मिन्नी के जन्म की तिथि एक ही है.

‘थैंक्स सर,’ उस ने कहा था.

‘केवल थैंक्स कहने से काम नहीं चलेगा, आज शाम की दावत मेरी तरफ से होगी. जिस रैस्टोरैंट में आप कहो, वहीं चलेंगे तीनों.’

‘तीनों कौन?’

‘आप, मिन्नी और मैं.’

सुन कर वह चुप हो गई थी. सम झ नहीं पा रही थी कि क्या उत्तर दे.

‘आभाजी, प्लीज मना न करना, वरना इस बेचारे का यह छोटा सा दिल टूट जाएगा,’ बहुत ही विनम्र शब्द सुनाई दिए थे महेश के.

वह मना न कर सकी. मुसकराते हुए उस ने कहा था, ‘ओके.’

लेखक – रमेश चंद्र छबीला

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