जीडीपी में वृद्धि या आर्थिकअसमानता में

भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ही नहीं, हमारे अर्थशास्त्री भी यह कहते नहीं अघाते कि भारत दुनिया की सब से तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. इस में शायद संदेह न हो कि परसैंट यानी फीसदी में भारत तेजी से बढ़ रहा है पर यह आंकड़ा इस से समझ आ सकता है मान लीजिए एक कंपनी में एक मजदूर, जिसे 20 हजार रुपए महीना मिलता है, की वेतनवृद्धि 7 फीसदी होती है पर उस के मैनेजिंग डायरैक्टर, जिसे 14 लाख रुपए का मासिक वेतन मिलता है, की वेतनवृद्धि महज 2.5 फीसदी होती है, मजदूर से वही काम रुपयों में गिनेंगे तो मजदूर को हर माह में सिर्फ 1,400 रुपए मासिक ज्यादा मिलेंगे जबकि मैनेजिंग डायरैक्टर की आय 35 हजार रुपए बढ़ जाएगी. जो अंतर पहले 13 लाख 80 हजार रुपए का था वह बढ़ कर अब 14,13,600 रुपए का हो जाएगा.

भारत व चीन का उदाहरण सब से मौजूं है. कुल सकल उत्पादन को इंग्लिश में जीडीपी कहते हैं, वर्ष 2014 से 2015 के बीच चीन की जीडीपी भारत से 8,476 अरब डौलर से बढ़ कर 8,950 हो गई. वर्ष 1960 में दोनों देशों की जीडीपी का अंतर 22 अरब डौलर था. यह अंतर 1970 में बढ़ कर 30 अरब डौलर हो गया. वर्ष 1980 में यह अंतर किन्हीं कारणों से 5 अरब डौलर का रह गया पर वर्ष 1990 में यह अंतर 113 अरब डौलर का हो गया. वर्ष 2000 में यह अंतर 743 डौलर हो गया. और वर्ष 2010 में यह अंतर 4,412 अरब डौलर पहुंच गया. वहीं, वर्ष 2020 में भारत में ‘महान नेता’ के आगमन के बावजूद यह अंतर 12 हजार अरब डौलर का हो गया. और 2025, जबकि 5 ट्रिलियन डौलर की अर्थव्यवस्था का राग भारत में आलापा जा रहा है, में अनुमान है कि यह अंतर 18,282 अरब डौलर यानी 18 ट्रिलियन डौलर से ज्यादा का हो जाएगा.

यह है असल में ढोल की पोल. भारत तेजी से बढ़ रहा है पर यह गरीब की झोली में चंद रुपए ज्यादा आने से हो रहा है, जबकि, अमीरों को हजारों सिक्के एक्स्ट्रा मिल रहे हैं. क्या हम फालतू की बातें करना बंद करेंगे और फैक्ट्रियों के निर्माण की बात करेंगे, शायद नहीं.

बच्चे को पीटने के 9 नुकसान

मातापिता के द्वारा बच्चों को मारने का कारण कोई भी हो सकता है जैसे छोटामोटा नुकसान करना, चोट लगाना, भाईबहन को चोट पहुंचाना, बिना बताए बाहर जाना, शैतानियां करना, पढ़ाई न करना आदि. अगर आप भी अपने बच्चे पर हाथ उठाते हैं तो ये दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं:

1. आत्मविश्वास में कमी 

मारमार कर आप अपने बच्चे में आत्मविश्वास की कमी कर रहे हैं विशेषकर जब उस के दोस्तों के सामने, छोटे भाईबहनों या स्कूलकालेज में, महल्ले में सब के सामने मारते हों.

2. गलत उपाधि न दें 

बच्चा अपनेआप को वैसा ही समझ लेगा जो उसे मारते या डांटते हुए कह रहे हैं. अकसर मातापिता अपने बच्चे को अपनी कुढ़न निकलते हुए वह औरों के जैसा होशियार क्यों नहीं है या शैतानियां क्यों करता है. मारते समय गुस्से में अजीबअजीब से विशेषण, उपाधियां देते रहते हैं जैसे गधा, बुद्धू, कमजोर, फिसड्डी. ऐसे में आप उसे जो बारबार कहेंगे वह वही बन जाएगा. चाहे गुस्से में आ कर ही वह ऐसा बनने के लिए सोचे.

3. भावनात्मक रूप से आहत 

बच्चा खुद को बुरा इंसान समझ सकता है. उसे पीटने से वह न सिर्फ शारीरिक रूप से, बल्कि भावनात्मक रूप से भी आहत हो सकता है. भावनात्मक रूप से बच्चे का प्रभावित होना काफी दिक्कत भरा हो सकता है. अगर पेरैंट्स बच्चे को हर गलती पर डांटते हैं तो वह खुद को एक बुरा बच्चा समझ सकता है और जब वह बड़ा होगा, तो उसे आप के और अपने लिए कोई सम्मान नहीं होगा. वह मान लेगा कि वह एक बुरा बच्चा है और यही छवि उस के साथ भावनात्मक निशान के रूप में लंबे समय तक रहेगी.

4. बढ़ती शैतानियां 

बच्चों की बढ़ती शैतानियां और उन की कुछ हरकतें मातापिता को गुस्सा करने या मारने से नहीं रोक पातीं. कभीकभी तो बच्चे इतनी शरारतें करते हैं कि पेरैंट्स को इस का हल सिर्फ और सिर्फ पिटाई ही नजर आता है, जो बिलकुल गलत है.

5. ढीठ हो जाएगा 

आप अपने बच्चे को विद्रोही भी बना सकते हैं क्योंकि 1-2 बार मारने से वह आप से डर सकता है पर बारबार मारने से उस का आप से डर खत्म हो जाएगा. कभी उसे समझ आ सकता है कि उस की उतनी गलती नहीं थी जितना आप ने उसे मारा है तो वह आप को पलट कर जवाब देगा. वह ऐसे कार्य करेगा, जिसे आप पसंद नहीं करते. वह ढीठ बन जाएगा.

6. हीनभावना से ग्रस्त 

आप के बारबार बच्चे को मारने से बच्चा हीनभावना से ग्रस्त और नैगेटिविटी से भरा हुआ या गुस्सैल बन सकता है, जिस का खमियाजा आप को जिंदगीभर भोगना पड़ सकता है क्योंकि बच्चे अपने बचपन की  सुनहरी यादों को ताउम्र याद रखते हैं तो बुरी यादों को भी वे उतनी ही शिद्दत से याद रखते हैं.

7. दूरी आ जाती है

मारने पर बच्चा आप से दूरी बना लेगा आप से अपने दिल की बात शेयर नहीं कर पाएगा क्योंकि मार कर उस के मन में आप ने डर जो बैठा दिया है. बहुत से ऐसे अभिभावकों का उदाहरण देखने को मिलता है जो अपने बच्चों को सुधारने के लिए मारते रहे थे और अब वे उन की परछाईं से भी दूर रहते हैं सिर्फ दोस्तों का कहना मानते हैं. यदि ऐसे में दोस्तों की संगत खराब हुई तो बच्चा बिगड़ जाएगा.

8. विकास में बाधक 

मारना बच्चे के विकास में बाधक भी बन सकता है. बोया पेड़ बबूल का  अनजाने ही आप ने अपने गुस्से के बीज को उस के अंदर बो दिया है. इस तरह से वह गुस्सैल बन जाएगा. वह वही सीखेगा जो आप को करते देखेगा.

9. दब्बू बन जाएगा

बारबार मारने से बच्चा दब्बू बन जाएगा.

क्या करें

छोटीमोटी गलतियों के लिए बच्चे को प्यार से समझाएं. अपने गुस्से पर काबू रखें. किसी और बात की अपनी झल्लाहट, नाकामी, थकान, चिढ़ बच्चे को मार कर न उतारें.

तुम ने क्यों कहा मैं सुंदर हूं- भाग 2 : क्या दो कदम ही रहा दोनों का साथ

लेखक- मनोरंजन सहाय सक्सेना

इस घटना के कुछ दिनों बाद शाम को मैं औफिस से घर लौटा तो वकील साहिबा मेरे घर पर मौजूद थीं और बेटियों से खूब घुममिल कर बातचीत कर रही थीं. मेरे पहुंचने पर बेटी ने चाय बनाई तो पहले तो उन्होंने थोड़ी देर पहले ही चाय पी है का हवाला दिया, मगर मेरे साथ चाय पीने की अपील को सम्मान देते हुए चाय पीतेपीते उन्होंने बेटियों से बड़ी मोहब्बत से बात करते हुए कहा, ‘देखो बेटी, मैं और तुम्हारी मम्मी एक ही शहर से हैं और एक ही कालेज में सहपाठी रही हैं, इसलिए तुम मुझे आंटी नहीं, मौसी कह कर बुलाओगी तो मुझे अच्छा लगेगा.

‘‘अब जब भी मुझे टाइम मिलेगा, मैं तुम लोगों से मिलने आया करूंगी. तुम लोगों को कोई परेशानी तो नहीं होगी?’ कह कर उन्होंने प्यार से बेटियों की ओर देखा, तो दोनों एकसाथ बोल पड़ीं, ‘अरे मौसी, आप के आने से हमें परेशानी क्यों होगी, हमें तो अच्छा लगेगा, आप आया करिए. आप ने तो देख ही लिया, मम्मी तो अभी बातचीत करना तो दूर, ठीक से बोलने की हालत में भी नहीं हैं. वैसे भी वे दवाइयों के असर में आधी बेहोश सी सोई ही रहती हैं. हम तो घर में रहते हुए किसी अपने से बात करने को तरसते ही रहते हैं और हो सकता है कि आप के आतेजाते रहने से फिल्मों की तरह आप को देख कर मम्मी को अपना कालेज जीवन ही याद आ जाए और वे डिप्रैशन से उबर सकें.’

‘‘मनोचिकित्सक भी ऐसी किसी संभावना से इनकार तो नहीं करते हैं. अपनी बेटियों के साथ उन का संवाद सुन कर मुझे उन के एकदम घर आ जाने से उपजी आशंकापूर्ण उत्सुकता एक सुखद उम्मीद में परिणित हो गई और मुझे काफी अच्छा लगा.

‘‘इस के बाद 3-4 दिनों तक मेरा उन से मिलना नहीं हो पाया. उस दिन शाम को औफिस से घर के लिए निकल ही रहा था कि उन का फोन आया. फोन पर उन्होंने मुझे शाम को अपने औफिस में आने को कहा तो थोड़ा अजीब तो लगा मगर उन के बुलावे की अनदेखी भी नहीं कर सका.

‘‘उन के औफिस में वे आज भी बेहद सलीके से सजी हुई और किसी का इंतजार करती हुई जैसी ही मिलीं. तो मैं ने पूछ ही लिया कि वे कहीं जा रही हैं या कोई खास मेहमान आने वाला है?

‘‘मेरा सवाल सुन कर वे बोलीं, ‘आप बारबार यही अंदाजा क्यों लगाते हैं.’ यह कह कर थोड़ी देर मुझे एकटक देखती रहीं, फिर एकदम बुझे स्वर में बोलीं, ‘मेरे पास अब कोई नहीं आने वाला है. वैसे आएगा भी कौन? जो आया था, जिस ने इस मन के द्वार पर दस्तक दी थी, मैं ने तो उस की दस्तक को अनसुना ही नहीं किया था, पता नहीं किस जनून में उस के लिए मन का दरवाजा ही बंद कर दिया था. उस के बाद किसी ने मन के द्वार पर दस्तक दी ही नहीं.

‘‘आज याद करती हूं तो लगता है कि वह पल तो जीवन में वसंत जैसा मादक और उसी की खुशबू से महकता जैसा था. मगर मैं न तो उस वसंत को महसूस कर पाई थी, न उस महकते पल की खुशबू का आनंद ही महसूस कर सकी थी,’ यह कह कर वे खामोश हो गईं.

‘‘थोड़ी देर यों ही मौन पसरा रहा हमारे बीच. फिर मैं ने ही मौन भंग किया, ‘मगर आप के परिवारजन, मेरा मतलब भाई वगैरह, तो आतेजाते होंगे.’ मेरी बात सुन कर थोड़ी देर वे खामोश रहीं, फिर बोलीं, ‘मातापिता तो रहे नहीं. भाइयों के अपनेअपने घरपरिवार हैं. उन में उन की खुद की व्यस्तताएं हैं. उन के पास समय कहां है?’ कहते हुए वे काफी निराश और भावुक होने लगीं तो मैं ने उन की टेबल पर रखे पानी के गिलास को उन की ओर बढ़ाया और बोला, ‘आप थोड़ा पानी पी लीजिए.’

‘‘मेरी बात सुन कर भी वे खामोश सी ही बैठी रहीं तो मैं गिलास ले कर उन की ओर बढ़ा और उन की कुरसी की बगल में खड़ा हो कर उन्हें पानी पिलाने के लिए गिलास उन की ओर बढ़ाया. तो उन्होंने मुझे बेहद असहाय नजर से देखा तो सहानुभूति के साथ मैं ने अपना एक हाथ उन के कंधे पर रख कर गिलास उन के मुंह से लगाना चाहा. उन्होंने मेरे गिलास वाले हाथ को कस कर पकड़ लिया. तब मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ, और मैं ने सौरी बोलते हुए अपना हाथ खींचने की कोशिश की.

‘‘मगर उन्होंने तो मेरे गिलास वाले हाथ पर ही अपना सिर टिका दिया और सुबकने लगीं. मैं ने गिलास को टेबल पर रख दिया, उन के कंधे को थपथपाया. पत्नी की लंबी बीमारी के चलते काफी दिनों के बाद किसी महिला के जिस्म को छूने व सहलाने का मौका मिला था, मगर उन से परिचय होने के कम ही वक्त और अपने सरकारी पद का ध्यान रखते हुए मैं शालीनता की सीमा में ही बंधा रहा.

‘‘थोड़ी देर में उन्हें सुकून महसूस हुआ तो मैं ने कहा, ‘आई एम सौरी वकील साहिबा, मगर आप को छूने की मजबूरी हो गई थी.’ सुन कर वे बोलीं, ‘आप क्यों अफसोस जता रहे हैं, गलती मेरी थी जो मैं एकदम इस कदर भावुक हो गई.’ कह कर थोड़ी देर को चुप हो गईं, फिर बोलीं, ‘आप से एक बात कहना चाहती हूं. आप ‘मैं जवान हूं, मैं सुंदर हूं’ कह कर मेरी झूठी तारीफ कर के मुझे यों ही बांस पर मत चढ़ाया करिए.’ यह कहते हुए वे एकदम सामान्य लगने लगीं, तो मैं ने चैन की सांस ली.

‘‘उस दिन के बाद मेरा आकर्षण उन की तरफ खुद ही बढ़ने लगा. कोर्ट से लौटते समय वे अकसर मेरी बेटियों से मिलने घर आ जाती थीं. फिर घर पर साथ चाय पीते हुए किसी केस के बारे में बात करते हुए बाकी बातें फाइल देख कर सोचने के बहाने मैं लगभग रोज शाम को ही उन के घर जाने लगा.

पत्नी की मानसिक अस्वस्थता के चलते उन से शारीरिक रूप से लंबे समय से दूर रहने से उपजी खीझ से तल्ख जिंदगी में एक समवयस्क महिला के साथ कुछ पल गुजारने का अवसर मुझे खुशी का एहसास देने लगा.

‘‘दिन बीतते रहे. बातचीत में, हंसीमजाक से नजदीकी बढ़ते हुए उस दिन एक बात पर वे हंसी के साथ मेरी और झुक गईं तो मैं ने उन्हें बांहों में बांध लिया. उन्होंने एकदम तो कोई विरोध नहीं किया मगर जैसे ही उन्हें आलिंगन में कसे हुए मेरे होंठ उन्हें चूमने के लिए बढ़े, अपनी हथेली को बीच में ला कर उन्हें रोकते हुए वे बोलीं, ‘देखिए, लंबे समय से अपने घरपरिवार और अपनों से अलग रहते अकेलेपन को झेलती तल्ख जिंदगी में आप से पहली ही मुलाकात में आप के अंदर एक अभिभावक का स्वरूप देख कर आप मुझे अच्छे लगने लगे थे.

‘‘आप से बात करते हुए मुझे एक अभिभावक मित्र का एहसास होता है. आप के परिवार में आप की बेटियों से मिल कर उन के साथ बातें कर के समय बिताते मुझे एक पारिवारिक सुख की अनुभूति होती है. मेरे अंदर का मातृत्वभाव तृप्त हो जाता है. इसलिए आप से, आप के परिवार से मिले बिना रह नहीं पाती.

‘‘हमारा परिचय मजबूत होते हुए यह स्थिति भी आ जाएगी, मैं ने सोचा नहीं था. फिर भी आप अगर आज यह सब करना चाहेंगे तो शायद आप की खुशी की खातिर आप को रोकूंगी नहीं, मगर इस के बाद मैं एकदम, पूरी तरह से टूट जाऊंगी. मेरे मन में आप की बनाई हुई एक अभिभावक मित्र की छवि टूट जाएगी. आप की बेटियों से मिल कर बातें कर के मेरे मन में उमंगती मातृत्व की सुखद अनुभूति की तृप्ति की आशा टूट जाएगी. मैं पूरी तरह टूट कर बिखर जाऊंगी. क्या आप मुझे इस तरह टूट कर बिखर जाने देंगे या एक परिपक्व मित्र का अभिभावक बन सहारा दे कर एक आनंद और उल्लास से पूर्ण जीवन प्रदान करेंगे, बोलिए?’

‘‘यह कहते भावावेश में उन की आवाज कांपने लगी और आंखों से आंसू बहने लगे. मेरी चेतना ने मुझे एकदम झकझोर दिया. जिस्म की चाहत का जनून एक पल में ठंडा हो गया. अपनी बांहों से उन्हें मुक्त करते हुए मैं बोला, ‘मुझे माफ कर देना. पलभर को मैं बहक गया था. मगर अब अपने मन का द्वार बंद मत करना.’

‘यह द्वार दशकों बाद किसी के सामने अपनेआप खुला है, इसे खुला रखने का दायित्व अब हम दोनों का है. आप और मैं मिल कर निभाएंगे इस दायित्व को,’ कह कर उन्होंने मेरा हाथ कस कर थाम लिया, फिर चूम कर माथे से लगा लिया.

‘‘उस दिन के बाद उन का मेरे घरपरिवार में आना ज्यादा नियमित हो गया. एक घरेलू महिला की तरह उन की नियमित देखभाल से बच्चे भी काफी खुश रहने लगे थे. एक दिन घर पहुंचने पर मैं बेहद पसोपेश में पड़ गया. मेरी बड़ी बेटी पत्नी के कमरे के बाहर बैठी हुई थी. और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. मेरे पूछने पर बेटी ने बताया कि आज भी सेविका नहीं आई है और उसे पत्नी के गंदे डायपर बदलने में काफी दिक्कत हो रही थी. तभी अचानक मौसी आ गईं. उन्होंने मुझे परेशान देख कर मुझे कमरे के बाहर कर दिया और खुद मम्मी का डायपर बदल कर अब शायद बौडी स्पंज कर रही हैं. तभी, ‘मन्नो, दीदी के कपड़े देदे,’ की आवाज आई.

‘‘बेटी ने उन्हें कपड़े पकड़ा दिए. थोड़ी देर में वकील साहिबा बाहर निकलीं तो उन के हाथ में पत्नी के गंदे डायपर की थैली देख कर मैं शर्मिंदा हो गया और ‘अरे वकील साहिबा, आप यह क्या कर रही हैं,’ मुश्किल से कह पाया, मगर वे तो बड़े सामान्य से स्वर में, ‘पहले इन को डस्टबिन में डाल दूं, तब बातें करेंगे,’ कहती हुई डस्टबिन की तरफ बढ़ गईं.

‘‘डस्टबिन में गंदे डायपर डाल कर वाशबेसिन पर हाथ धो कर वे लौटीं और बोलीं, ‘मैं ने बच्चों को मुझे मौसी कहने के लिए यों ही नहीं कह दिया. बच्चों की मौसी ने अपनी बीमार बहन के कपड़े बदल दिए तो कुछ अनोखा थोड़े ही कर दिया,’ कहते हुए वे फिर बेटी से बोलीं, ‘अरे मन्नो, पापा को औफिस से आए इतनी देर हो गई और तू ने चाय भी नहीं बनाई. अब जल्दी से चाय तो बना ले, सब की.’

‘‘चाय पी कर वकील साहिबा चलने लगीं तो बेटी की पीठ पर हाथ रख कर बड़े स्नेह से बोलीं, ‘देखो मन्नो, आइंदा कभी भी ऐसे हालात हों तो मौसी को मदद के लिए बुलाने में देर मत करना.’

अरेंजमेंट: क्या आयुषी को दोबारा अपना पाया तरंग

आयुषी सब काम खत्म कर के लैपटौप खोल कर बैठ गई थी. आयुषी ने देखा घड़ी में 1 बज रहे थे. अभी सायशा के आने में 1 घंटा शेष था. उस ने बहुत दिनों बाद फेसबुक पर लौगइन किया था. स्क्रौल करतेकरते अचानक से एक फ्रैंड रिक्वैस्ट को देख कर आयुषी का दिल धक से रह गया. तरंग की फ्रैंड रिक्वैस्ट आई हुई थी. उस नाम पर हाथ रखते हुए भी उस की उंगलियां कांप रही थीं.

10 साल बीत गए थे. एक तरह से वह इस नाम को भूल चुकी थी. पर जब कभी भी उस की अपने पति से अनबन होती थी तो रहरह कर उसे तरंग की याद आती थी. आयुषी को लगता था कि यह तरंग का संताप है जिस की वजह से इतने सालों बाद भी उसे अपने घर में सुकून नहीं मिलता है.

बहुत देर तक वह तरंग की प्रोफाइल पिक्चर को देखती रही थी. गुलाब का फूल था और कोई जानकारी नहीं थी. इतने साल तो बीत गए हैं, अब कहां तरंग को उस की याद होगी. फिर एक मीठी सी शरारत भरी मुसकान उस के चेहरे पर आ गई. कितने अच्छे दिन थे वे. आयुषी को पता था कि तरंग उस का दीवाना था पर न जाने क्यों आयुषी कभी हिम्मत ही न जुटा पाई कि वह अपने परिवार के खिलाफ जा कर तरंग के प्यार को स्वीकार कर पाए.

न जाने क्या सोचते हुए उस ने तरंग नामक प्रोफाइल की फेसबुक रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट कर ली. फिर आयुषी
खो गई साल 2000 में…

आयुषी उन दिनों कालेज के फाइनल ईयर में थी. वह और उस की दोस्त अनुपम प्रैक्टिकल क्लास के बाद वापस घर की ओर जा रहे थे. तभी उस ने ध्यान दिया कि एक लंबा, सांवला और पतला लड़का बारबार मोटरसाइकिल से उस के इर्दगिर्द घूम रहा है. आयुषी का उस के परिवार में कहीं भी सुंदरता में नंबर न लगता था, इसलिए उस ने विचार को झटक दिया और तेजी से घर की तरफ कदम बढ़ा दिए.

पर अब यह रोज की बात हो गई थी. आयुषी के साथ उस लड़के ने कभी कोई बदतमीजी नहीं की थी. इसलिए आयुषी को समझ नहीं आ रहा था कि वह शिकायत करे भी तो क्या करे? न जाने कैसे उस लड़के को आयुषी के टाइमटेबल का पता था. जैसे ही आयुषी घर से निकलती चौराहे पर वह लड़का इंतजार करता हुआ मिल जाता था. फिर जब वह कालेज से निकलती तो वह कालेज के गेट पर भी मिलता था. यह सिलसिला चलते हुए लगभग 1 माह हो गए थे.आयुषी को भी अब उस लड़के का इंतजार रहने लगा था. फिर आयुषी की सहेली चारू ने ही बताया कि उस का नाम तरंग है और वह इंजीनियरिंग के बाद प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहा है.

पर तरंग की काफी कोशिशों के बाद भी आयुषी की उस से बात करने की कभी हिम्मत नहीं हुई थी. अपने घर के माहौल का उसे अच्छे से ज्ञान था.
पर सबकुछ जानने के बाद भी आयुषी का मन तरंग की ओर खींचने लगा था. धीरेधीरे आयुषी की खास
सहेलियों और तरंग के दोस्तों को भी यह बात पता चल गई थी. पर बड़ा अजीब सा रिश्ता था दोनों के बीच,
न कभी बातचीत हुई थी और न ही मिले थे पर फिर भी एकदूसरे को देख कर उन्हें चैन आ जाता था.

समय गुजरता गया और लगभग 1 साल के बाद 14 फरवरी, 2001 को तरंग ने बहुत मुश्किल से आयुषी को मिलने के लिए तैयार किया था. आयुषी ने बड़ी मुश्किल से अपनी बड़ी बहन का फिरोजी सूट मांगा, साथ में मोतियों की माला. उन दिनों मोबाइल का चलन आमतौर पर नहीं था, न ही कोई पिज्जा या बर्गर सैंटर होते थे. आयुषी को उस की सहेली चारू लजीज तक छोड़ कर चली गई. बाहर ही तरंग खड़ा था. दोनों अंदर बैठ गए. तरंग बारबार आयुषी का पलकें झपकाना देख रहा था. दोनों इतने डरे हुए थे कि 5 मिनट में 4 गिलास पानी पी गए थे.

तरंग ने झिझकते हुए आयुषी को एक छोटा सा ताजमहल दिया और साथ मे एक छोटा सा पर्स. फिर डोसा खाते हुए तरंग बोला,”आयुषी, मुझे पता है तुम शायद पहली बार किसी लड़के से मिलने आई हो…”

आयुषी कुछ नहीं बोल पाई थी. पर फिर धीरेधीरे दोनों मिलने लगे थे. तरंग और लड़कों की तरह कोई भी
अनुचित मांग नहीं करता था. बेहद ही सुलझा हुआ और जहीन लड़का था. हमेशा आयुषी को छोटेछोटे सरप्राइज देता रहता था. आयुषी के घर वालों को इस बात की भनक भी नहीं थी. तरंग के साथ आयुषी को यह अरैंजमैंट बहुत अच्छा लगने लगा था.

1 वर्ष बीत गया था. तरंग ने एक प्रवेश परीक्षा भी पास कर ली थी. तब तरंग ने आयुषी से कहा,”अगर तुम्हें ठीक लगे तो मैं मम्मीपापा को तुम्हारे यहां रिश्ते के लिए भेज दूं?”

आयुषी ने शरमा कर पलकें झुका ली थीं. 1 हफ्ते आयुषी के सपनों की दुनिया में बीत गए. तरंग का परिवार आया और बेइज्जत हो कर चला
गया. तरंग के परिवार के जाते ही पापामम्मी ने उसे आड़े हाथों ले लिया,”तुझे शर्म नहीं आई, ठाकुर की बेटी हो और शूद्रों की बहू बनना चाहती हो?”

आयुषी बोली,”पापा, तरंग ब्राह्मण है…”

पापा बोले,”अरे बेवकूफ लड़की, इन छोटी जातियों वालों का तो यही काम रहता है कि कैसे हमारी लड़कियों को उल्लू बनाए. खबरदार अगर आगे से उस से मिली तो. हम अपने खानदान में नीच जात का खून किसी भी कीमत पर मिलने नहीं देंगे. ”

आयुषी का तो सुबकना बंद ही नहीं हो रहा था. क्या सोचा था और क्या हो गया है. उसे तरंग पर गुस्सा आ रहा था कि क्यों तरंग ने उस से यह बात छिपाई थी?

22 फरवरी, 2002 में उस की तरंग से आखिरी मुलाकात थी. आयुषी पत्थर की तरह कठोर थी तो तरंग की आंखे गीली थीं. तरंग का परिवार पढ़ालिखा था और उसे सपने में भी भान नही था कि आज भी पढ़ाईलिखाई और काबिलियत से अधिक जातपात को महत्त्व देते हैं. आयुषी गुस्से में बोली,”तुम ने मुझ से झूठ बोला था. अगर मुझे पता होता कि तुम शूद्र तो मैं तुम से कभी न
मिलती. ”

तरंग एकदम से हतप्रभ रह गया,”आयुषी, मेरे प्यार का अपमान तो मत करो मैं और मेरा परिवार तुम्हें पलकों पर बैठा कर रखेंगे. ”

आयुषी को तरंग पसंद था पर उस के प्यार में इतनी गहराई नहीं थी कि वह अपने घर वालों के खिलाफ खड़ी हो पाती. उसे लगा अगर कुछ गलत हो गया तो वह क्या करेगी? अब तक तो यह अरैंजमैंट सही चल रहा था पर अब जब स्टैंड लेने का समय आया तो वह पीछे हट गई.

उस के बाद तरंग ने कुछ नहीं कहा पर उस की आंखों में एक दर्द था जो रहरह कर आयुषी को आज भी याद आ जाता है. बस, उसे इतना पता था कि उस के बाद तरंग दिल्ली चला गया. वे दिन और आज का दिन, आयुषी ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

डोरबेल से आयुषी की तंद्रा टूटी.
रात में फिर से आयुषी फेसबुक पर तरंग का प्रोफइल चैक कर रही थी. अचानक से मैसेंजर पर मैसेज दिखा,”कैसी हो और खुश तो हो न?”

आयुषी ने लिख दिया,”ठीक हूं…”

आयुषी का पति रोहित बेहद ही रूखा इंसान था. उस के साथ आयुषी का मन कभी भीग नहीं पाया था. रोहित के साथ आयुषी एक पत्नी थी पर कभी आयुषी नहीं बन पाई. जरूरतें पूरी हो रही थीं और जिंदगी कट
रही थी.

न जाने कैसे और कब आयुषी और तरंग रोज चैट करने लगे थे. अगर तरंग पिंग नहीं करता तो आयुषी बेचैन हो उठती थी. करीब 1 माह बाद आयुषी ने तरंग को अपना नंबर दे दिया था. धीरेधीरे रोज बातें होने लगीं. तरंग को लगा जैसे उसे सब मिल गया हो.

एक दिन तो तरंग की पत्नी शुभांगी ने बोल भी दिया,”तरंग, कहां खोएखोए रहते हो?”

तरंग एकदम से सकपका गया,”नहीं तो, ऐसा क्यों कह रही हो…?

शुभांगी से तरंग बहुत प्यार करता था. जब तरंग टूटे हुए दिल और हौसले के साथ दिल्ली आया था तो शुभांगी ने ही उसे संभाला था. पर कहते हैं न पहला प्यार भूलना बहुत मुश्किल होता है.

22 दिसंबर की वह सर्द शाम थी जब तरंग और आयुषी कनाट प्लेस में मिले थे. आयुषी कैब से पहुंच गई थी.
ब्लू जींस, ग्रे लौंग कोट में वह आज भी ऐसी ही लग रही थी जैसे पहले लगती थी. आयुषी जैसे ही कार में बैठी उस का दिल धकधक कर रहा था. तरंग ने कार में गुलाब की पंखुड़ियां बिछा रखी थीं. तरंग आयुषी से उस के घरपरिवार के बारे में पूछता रहा और आयुषी जवाब देती रही. तरंग यह सोच कर मन ही मन हंस रहा था कि आज भी आयुषी उतना ही डर रही है जितना पहले डरती थी.

धीरेधीरे आयुषी को महसूस होने लगा कि तरंग के साथ विवाह न कर के उस ने बहुत बड़ी गलती करी है.
तरंग के आने के बाद आयुषी को अब अपनी लाइफ परफैक्ट लगने लगी थी. अब रोहित की किचकिच पर
वह ध्यान नहीं देती थी. ऐसा लगने लगा था कि दोबारा से उस के जीवन मे बहार आ गई है. आयुषी को जिंदगी का यह अरैंजमैंट अच्छा लगने लगा था. रोमांटिक बातों के लिए तरंग आयुषी को स्पैशल फील कराने के लिए था, तो सामाजिक और आर्थिक जरूरतों के लिए रोहित था.

तरंग के साथ आयुषी आउटस्टैशन ट्रिप भी कर आई थी. तरंग ने आयुषी से प्यार किया था इसलिए वह
समझता था कि यह सफर अगर इतनी रफ्तार से चलता रहा तो दोनों परिवार जल जाएंगे. वह आयुषी की
बहुत इज्जत करता था इसलिए इस रिश्ते पर अब मित्रता का ब्रेक लगाना चाहता था. पर आयुषी थी कि कुछ
समझने को तैयार नहीं थी. वह इन रूमानी पलों को अपनी रुकी हुई जिंदगी की सचाई मानने लगी थी. उसे
तरंग के परिवार से कोई सरोकार नहीं था. जब भी उस का मन करता वह तरंग के साथ घूमने निकल जाती. बहुत बार तरंग ने आयुषी की जिद के कारण अपने परिवार को नाराज कर दिया था.

जब तरंग आयुषी को यह कहता तो वस मुसकरा कर कहती,”जब प्यार किया तो डरना क्या. ”

उस दिन सुबह से आयुषी का मूड खराब था. उस ने फटाफट तरंग को मैसेज किया,’लेट्स मीट फौर कौफी…’

तरंग ने कोई जवाब नहीं दिया. आयुषी ने कुछ देर सब्र किया और कुछ जवाब न आने पर फोन घुमा
दिया. जब तरंग ने फोन काट दिया तो आयुषी का खराब मूड और खराब हो गया. वह तबतक फोन मिलाती रही जब तक तरंग ने उठा नहीं लिया. तरंग के फोन उठाते ही आयुषी गुस्से में बोली,”सुबह से कोशिश कर रही
हूं. कैसे प्रेमी हो?”

तरंग ठंडे स्वर में बोला,”आयुषी, मैं पति और पिता भी हूं. शुभांगी ठीक नहीं है. ”

आयुषी को लगा कि तरंग उस के सामने अपनी पत्नी को अधिक अहमियत दे रहा है. इसलिए गुस्से में चिल्ला कर बोली,”क्यों? तुम तो बड़ेबड़े प्यार के दावे करते थे. तुम ने ही मुझे ऐप्रोच किया था, मैं ने नहीं. ”

तरंग को भी गुस्सा आ गया. बोला, “हां, गलती हो गई थी. मैं तुम से शादी करना चाहता था, पर तब तो तुम्हें मेरी जाति से समस्या थी,” यह सुन कर आयुषी फट पड़ी,”तुम ने क्या मुझे तब बताया था कि तुम ब्राह्मण नहीं हो? बताओ मैं क्या करती तब? अब जब मिले हैं तो तुम्हें तो अपनी पत्नी से फुरसत नहीं है…”

तरंग समझाते हुए बोला,”आयुषी, जब समय था तुम हिम्मत न कर पाई और अब तुम्हें लगता है यह सब ठीक है? इस में शुभांगी या रक्षित का क्या कुसूर है बोलो?”

आयुषी की ईगो बहुत अधिक हर्ट हो गई थी. तरंग की इतनी हिम्मत कि अपनी पत्नी को प्रेमिका से अधिक
अहमियत दे रहा है. बहुत रुखाई से बोली,”तरंग, ब्लौक कर दो मुझे. ”

तरंग को आयुषी का व्यवहार बेहद बचकाना लग रहा था. उसे लगा पहले आयुषी में हिम्मत नहीं थी और अब
वह जबरदस्ती बिना किसी बात के धौस जमा रही है. तरंग ने बिना कोई जवाब दिए मोबाइल बंद कर दिया था.

शाम को तरंग ने आयुषी को कौल लगाया तो आयुषी ने मोबाइल उठा कर रूखी सी आवाज में कहा,”क्या
बात है?”

तरंग ने प्यार से कहा,”आयुषी, तुम्हारी जगह मेरी जिंदगी में कोई नहीं ले सकता है. मैं बस तुम से यह कहना चाहता हूं कि एक मित्र और हितैषी की तरह मैं तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा बनना चाहता हूं. पर अगर तुम यह सोच रही हो कि मैं अपने परिवार या पत्नी को ननजरअंदाज कर के तुम्हें तरजीह दूंगा तो तुम गलत हो. जैसे रोहित और तुम्हारी बेटी को तुम्हारी जरूरत है, वैसे ही शुभांगी और मेरे बेटे को मेरी जरूरत है. ”

आयुषी बिना कुछ सोचे बोली,”अरे, कितना अच्छा अरैंजमैंट चल रहा है. हमलोग माह में एकाध बार मिल लेते थे, घूमफिर लेते थे और तुम यह अपनी बीबी का रोना ले कर बैठे हो.
अब देखो, मैं औरत हूं, मैं तो 24 घंटे उपलब्ध नहीं रह सकती हूं पर तुम तो थोड़ा कोशिश कर सकते हो न…”

तरंग को समझ आ गया था कि आयुषी के लिए वह बस एक ऐंटरटेनर, उस की फीमेल ईगो को सहलाने का एक जरीया है. तरंग बोला,”तुम्हारे लिए मैं टाइमपास और अरैंजमैंट हूं पर मुझे अब यह अरैंजमैंट सूट नहीं कर रहा है,” यह कह कर तरंग ने फोन काट दिया. उसे गुस्सा आ रहा था. पहले भी वह आयुषी के लिए टाइमपास और अरैंजमैंट था और आज भी उस की यही स्थिति थी. पर अब उसे यह अरैंजमैंट पसंद नहीं है.

सेहत बिगाड़ देगा पैक्ड फ्रूट जूस

आजकल कई घरों में देखा गया है कि नाश्ते के वक्त वहां जूस के तौर पर बाजार वाला पैक्ड जूस ही पीना पसंद किया जाता है. कभीकभार मुंह का स्वाद बदलने के लिए इसे पीना बुरा नहीं है, लेकिन इन्हें प्राकृतिक फलों की जगह देना बिलकुल भी सही नहीं है. पैक्ड उत्पादों में 100 फीसदी फलों का जूस नहीं होता. इस के अलावा पैक्ड जूस में जरूरी पौष्टिक गुण गायब होते हैं. आइए, जानते हैं इन के बारे में :

नहीं होता फाइबर

पैक्ड जूस बनाते वक्त बहुत से फलों के जूस को उबाला जाता है, ताकि उन में पाए जाने वाले बैक्टीरिया खत्म हो सकें. इसी के साथ इस में जरूरी विटामिन और प्राकृतिक तत्त्व भी खत्म हो जाते हैं. पैक्ड जूस में फाइबर या गूदा नहीं होता, क्योंकि उसे निकाल दिया जाता है.

मोटापा बढ़ता है

पैक्ड फ्रूट जूस में चीनी बहुत अधिक मात्रा में होती है जोकि कैलोरी ज्यादा बनाती है. ऐसे में वजन कम करने की सारी कोशिशें बेकार हो जाती हैं. विशेषज्ञ भी मानते हैं कि प्राकृतिक फल और सब्जियों की तुलना में पैक्ड जूस को लेने से ज्यादा वजन बढ़ता है.

आर्टिफीशियल कलर

प्राकृतिक फलों में आर्टिफिशियल कलर नहीं मिला होता, लेकिन पैक्ड फू्रट जूस में आर्टिफिशियल कलर का प्रयोग किया जाता है. जिस से वह देखने में फल के रंग के जूस का लगे. यह बाजारू रंग शरीर के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक होता है क्योंकि जब आप इन का सेवन करेंगे तो आप की जीभ पर भी  रंग दिखेगा.

पेट संबंधी समस्याएं

कुछ फलों में सौर्बिटौल जैसी शुगर मौजूद होती है, जो आसानी से पचती नहीं है. ऐसे में पैक्ड जूस के कारण पेट संबंधी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं. नाशपाती, स्वीट चेरी और सेब सरीखे कुछ फलों में ऐसी ही शुगर मौजूद होती है. ऐसे में इन फलों के पैक्ड जूस पीने से गैस, पेट में उथलपुथल और डायरिया की समस्या भी देखने में आती है. ऐसे जूस को पचाने में बच्चों को ज्यादा समस्या आती है.

डायबिटीज में नुकसानदेह

डायबिटीज के मरीजों को पैक्ड जूस बिलकुल भी नहीं पीना चाहिए. दरअसल, यह जूस रिफाइंड शुगर से बना होता है, जो डायबिटिक लोगों के लिए ठीक नहीं है. यदि इन के लैबल पर शुगरफ्री लिखा भी हो, तब भी इन के सेवन से बचना चाहिए. मीठे फल, गाजर या चुकंदर जैसे हाईशुगर वैजिटेबल्स जूस के रूप में ब्लडशुगर के स्तर को बढ़ा देते हैं.

अनियमित ब्लडशुगर

पैक्ड जूस में फलों के छिलके का सत्त नहीं होता, इसलिए शरीर को प्राकृतिक फाइबर नहीं मिल पाता. साबुत फल और सब्जियों को पचाने में शरीर में जितना समय मिलता है, उस से कहीं कम समय में शरीर जूस को जज्ब कर लेता है. इस की वजह से ब्लडशुगर का स्तर भी तुरंत बढ़ जाता है.

किसने अक्षय कुमार की फिल्म वेलकम टू द जंगल की शूटिंग की राह आसान की…

जब अक्षय कुमार की फिरोज नाड़ियादवाला द्वारा बनाई जाने वाली फिल्म ‘‘वेलकम टू द जंगल’’ विवादों में आयी और इसके निर्माण पर विराम लग गया था,तब बौलीवुड में हर किसी को आश्चर्य हुआ था. हम सभी जानते हैं कि 2007 में प्रदर्शित फिल्म ‘वेलकम’ का तीसरा सिक्वअल है ‘वेलकम टू द जंगल’. वास्तव में निर्देशक अनीस बज्मी ने निर्माता फिरोज नाडियाडवाला पर उनके  बकाया 2 करोड़ न चुकाने का अराप लगाते हुए फिल्म उद्योग की एसोसिएषन ‘एफडब्ल्यूआईसीई’ में शिकायत दर्ज कराकर फिल्म की शूटिंग रूकवा दी थी. इस घटनाक्रम पर लोगों को आश्चर्य हुआ था. क्योंकि अक्षय कुमार और अनीस बज़मी के बीच काफी घनिष्ठ संबंध हैं.‘एफडब्ल्यूआईसीई’ पर भी भाजपा समर्थकों का कब्जा है.अक्षय कुमार भी भाजपा समर्थक हैं.इसलिए लोगों को ‘दाल में काला’ होने की शंका है.

सूत्रों की माने तो 2007 में प्रदर्शित ‘वेलकम’ के अलावा 2015 में प्रदर्शित उसकी सिक्वअल ‘वेलकम बैक’ के निर्देशक अनीस बज़मी थे.पर इस बार उसी के सिक्वअल ‘वेलकम टू द जंगल’ में निर्देशन की जिम्मेदारी अनीस बज़मी की बजाय अहमद खान को दिए जाने से नाराज होकर ही अनीस बज़मी ने फिरोज नाड़ियादवाला के खिलाफ कदम उठाया था.पहले इस फिल्म में अक्षय कुमार को भी शामिल नहीं किया गया था.जबकि असफलता का दंश झेल रहे अक्षय कुमार सफलतम फिल्म ‘वेलकम’ की फ्रेंचाइजी का हिस्सा बनने को उतावले थे.मगर जैसे ही इस फिल्म से अक्षय कुमार को जोड़ा गया,वैसे ही ‘एफ डब्लूआईसीई’ भी सक्रिय हुई और अनीस बज़मी की भारत में गैर मौजूदगी के बावजूद सारा मसला सुलझ गया.सूत्र दावा कर रहे है कि सब कुछ अक्षय कुमार के इशारे पर हुआ.मगर सच सामने आएगा या नही,पता नही…

वास्तव में अनीस बज़मी निर्देशित फिल्म ‘‘वेलकम’’ 2007 में प्रदर्शित हुई थी,जिसके लेखक व निर्देशक अनीस बज़मी थे.इस फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा कई अन्य कलाकार थे. तब से अक्षय कुमार व अनीस बज़मी के बीच दोस्ताना संबंध रहे हैं.इसके बाद अनीस बज़मी के निर्देशन में अक्षय कुमार ने ‘सिंह इज किंग’,‘थैंक यू’,‘वेलकम बैक’जैसी फिल्में की.यह अलग बात है कि उसके बाद उसके बाद अक्षय कुमार ने अनीस बज़मी के निर्देशन में कोई फिल्म नही की.

बहरहाल,अब यह मसला सुलझ गया है.जिसे चले अब 11 दिसंबर से मंुबई में फिल्म ‘‘वेलकम टू द जंगल’’ की निर्देशक अहमद खान के निर्देशन में शूटिंग शुरू होगी.खुद ‘एफ डब्ल्यूआईसीई’ के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा-‘‘अब फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ की 11 दिसंबर से शूटिंग शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है.हमने अनीस बज़मी व फिरोज नाड़ियादवाला से बात करके सारे विवाद को खत्म करा दिया है.वास्तव में अनीस बज्मी को दिया गया चेक बाउंस हो जाने पर उन्होने  एसोसिएशन से संपर्क किया था.हमने बात करके मसला सुलझाया है.अब फिरोज नाडियाडवाला, एफडब्लूआईसीई’ के माध्यम से निर्देशक अनीस बज़मी को शेष राशि का भुगतान करने के लिए सहमत हो गए हैं.नाडियाडवाला ने तीन चेक के माध्यम से बकाया राशि का भुगतान करने का वादा किया है.नाडियाडवाला एसोसिएशन को चेक देंगेे और एसोसिएशन अनीस बज्मी तक पहुॅचाएगी.वैसे अनीस इन दिनों लाॅस एंजेंल्स,अमरीका में हैं.

इतना ही नहीं ‘एफडब्ल्यूआईसीई’ के अध्यक्ष बी एन तिवारी ने इस बात की भी पुष्टि की कि निर्माता फिरोज नाड़ियादवाला के खिलाफ धारा 138 के तहत दायर मामला भी वापस ले लिया जाएगा.

अहमद खान निर्देशित फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल‘ में अक्षय कुमार, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, दिशा पटानी, रवीना टंडन, लारा दत्ता, जैकलीन फर्नांडीज, परेश रावल, अरशद वारसी, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, तुशार कपूर, श्रेयस तलपड़े,कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा, दलेर मेहंदी, मीका सिंह, मुकेश तिवारी, जाकिर हुसैन, यशपाल शर्मा और सयाजी शिंदे हैं.

Wedding Special: 9 वैडिंग वर्कआउट टिप्स

शादी तय होते ही हर युवा के मन में खुशियों की लहर दौड़ पड़ती है क्योंकि उन्हें एक जीवनसाथी मिल रहा है, जो उन की हर खुशी और गम में साथ रहने वाला एक दोस्त और साथी है. इस दौरान दोनों अपनी लाइफ को ले कर एक प्लानिंग करते हैं और इस में एक कड़ी होती है फिटनैस यानी वैडिंग वर्कआउट प्लान, जो दूल्हे और दुलहन दोनों के लिए जरूरी होता है ताकि वैडिंग डे पर वे दिखें कुछ खास और अलग.

असल में वैडिंग वर्कआउट का मुख्य उद्देश्य कौन्फिडैंस पाना, उस खास दिन पर खुद को हंसीखुशी और हैल्दी रखना होता है. सही तरह से किया गया वर्कआउट प्लान, मसल्स के विकास के साथसाथ मानसिक स्थिरता भी देता है.

फिटनैस ऐक्सपर्ट संदीप रामचंद्र वालावलकर का इस बारे में कहना है कि वैडिंग वर्कआउट प्लान रिएलिटी के साथसाथ अचीव करने वाला भी होना चाहिए. इसे अधिकतर लड़का और लड़की दोनों ही प्लान करते हैं, जो अधिकतर 3 महीने का होता है, जिस में लड़के अधिकतर अपनी टमी को कम करना चाहते हैं, जबकि लड़कियां पतली दिखना चाहती हैं. फिटनैस की दिशा में यह एक सही कदम अवश्य है और इसे आगे भी ले जाना अच्छा होता है क्योंकि अगर बौडी फिट है तो आप की लाइफ भी फिट रहती है.

संदीप कहते हैं कि वर्कआउट के साथसाथ सही डाइट का होना भी इस में बड़ी भूमिका निभाता है, जिस में फैटी और जंक फूड को न कहने की जरूरत होती है. ऐसा देखा गया है कि शादी तय होते ही आज के लड़के और लड़कियां सैलिब्रेट करने के लिए होटल्स और पब का रुख करते हैं या परिवार के लोग उन्हें खास निमंत्रण के साथ खाने पर बुलाते रहते हैं. इस से उन के वर्कआउट पर असर पड़ता है, जो उन के लिए परेशानी का सबब बनता है.

वैडिंग वर्कआउट प्लान के फायदे

संदीप कहते हैं कि वैडिंग वर्कआउट प्लान से पहले लड़के और लड़की को कमिटमैंट के साथ सप्ताह में 5 दिन अच्छे रिजल्ट के लिए वर्कआउट करना जरूरी होता है, जिसे वे कई बार काम की व्यस्तता की वजह से नहीं कर पाते और उन्हें मनचाहा रिजल्ट नहीं मिल पाता. वैडिंग वर्कआउट प्लान से व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है और उस स्पैशल दिन पर वे खुश और स्वस्थ रह सकते हैं. इसलिए टारगेटेड वैडिंग वर्कआउट प्लान होना चाहिए, जो आप की खुशी को बढ़ा कर आप को मजबूत रख सकें.

इस बारे में कुछ सुझाव निम्न हैं:

  •  डेली वर्कआउट रूटीन आप के मोटिवेशन को बढ़ाता है और आप खुद में शक्ति का अनुभव कर पाते हैं, जिस से आप एक टोन्ड और मजबूत बौडी पाते हैं. इस से आप का लुक कौन्फिडैंस और ग्रेसफुल होता है और उस पार्टी में सब की निगाहें आप पर ही टिक जाती हैं.
  • शारीरिक फिटनैस के अलावा माइंड और बौडी के कनैक्शन में भी मजबूती मिलती है. लगातार वर्कआउट करने से केवल खुशी ही नहीं मिलती, बल्कि किसी भी तनाव के समय इमोशनल मैनेजमैंट करना भी आ जाता है.
  •  विवाह से पहले खुद को शेप में रखना बहुत जरूरी होता है ताकि आप अच्छा दिखने के साथसाथ अच्छा महसूस भी करें. इस के लिए आप जीवन के सब से बड़े दिन को सैलिब्रेट करने के लिए एक अच्छे वैडिंग वर्कआउट का प्लान करें. अगर आप ने जल्दी शुरू किया है तो आप को प्रोग्रेस का काफी समय मिलेगा, जिस में आत्मविश्वास और हैल्दी आदतों को अपना सकते हैं, जो आगे भी आप को एक अच्छी लाइफ लीड करने में मदद करेंगी. वर्कआउट प्लान लेने से पहले डाक्टर का परामर्श अवश्य लें ताकि आप अपनी फिटनैस के आधार पर प्लान ले सकें.
  •  फिटनैस प्लान में कार्डियो और मसल्स स्ट्रैंथ को अवश्य शामिल करें ताकि आप को रिजल्ट जल्दी मिले. इस में मेजर मसल्स गु्रप को स्ट्रैंथ देने वाले व्यायाम मसलन चैस्ट, बैक, आर्म्स, शोल्डर्स, लैग्स आदि. इस में उन ऐक्सरसाइज को चुनें जो आप की बौडी को टोन्ड कर शेप में लाती हों. इन्हें भी किसी ऐक्सपर्ट के अनुसार ही चुनें, जिस में बाइसैप्स, ट्राइसैप्स, स्क्वाट्स, प्लैक्स, पुश अप्स और पुल अप्स आदि शामिल हों.
  • वर्कआउट प्लान में कार्डियो को शामिल करना बहुत जरूरी होता है. कार्डियो ऐक्सरसाइज जैसे रनिंग, सीढि़यां चढ़ना, जौगिंग, साइकिल चलाना, तैरना आदि सभी उपयोगी व्यायाम हैं, जो कैलोरी को बर्न करने के अलावा हार्ट को भी मजबूत बनाते हैं.
  • हमेशा रिएलिस्टिक गोल्स को अपने वर्कआउट प्लान में सैट करें, अगर बात कम समय में जल्दी वजन घटाने की हो तो इसे अवौइड करें क्योंकि समय से वजन का घटना आप की सेहत के लिए अच्छा होता है. अनरियलिस्टिक गोल्स होने पर कई बार हताशा होती है, जो गलत है.
  • अगर आप को कोई वर्कआउट पार्टनर मिलता है, तो इस से आप का उत्साह बना रहता है. इस में खयाल रखें कि उस की वर्कआउट की सूची और गोल्स आप की तरह ही हों.
  • वैडिंग वर्कआउट को हमेशा सीरियसली लें, समय पर वर्कआउट करें और रैस्ट के दिन शरीर को पूरी तरह रैस्ट दें ताकि आप की मसल्स किसी भी इंजरी से ठीक हो सकें.
  • किसी भी वर्कआउट को प्लान करने से पहले डाक्टर की सलाह अवश्य लें और जानें कि आप इस वर्कआउट को कर सकती हैं या नहीं. वर्कआउट में सही पोशाक, सही उपकरण और व्यायाम से पहले सही वार्मअप करना न भूलें. अंत में अपने शरीर की सुनें और जहां जरूरत हो ब्रेक लेने की कोशिश करती रहें.

गोल्ड डिगर पार्टनर से दूरी ही भली

हाल ही में कानपुर में एक महिला ने अपने दूसरे पति की करोड़ों की संपत्ति हथियाने के लिए साजिश रची. रिहा गुप्ता का पहले पति से तलाक हो चुका था जिस से उस का एक बेटा है. इसके बाद 2014 में वैवाहिक वेबसाइट के जरिये रिहा की मुलाकात गोरखपुर के बिजनेसमैन अमित से हुई. अमित का भी 2013 में अपनी पहली पत्नी से तलाक हो चुका था. इन का भी एक बेटा है. रिहा और अमित की मुलाकात दोस्ती में बदली और दोनों ने 2014 में शादी का फैसला लिया. फरवरी 2021 तक तो सब कुछ ठीक रहा पर मार्च में रिहा पति को बिना बताए ढाई करोड़ रुपये कैश ले कर मायके आ गई.

इसके बाद पति से प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आठ करोड़ रुपये और मंगा लिए. साथ ही करोड़ों के जेवर भी बहाने से पति से मंगवा लिए. इसके बाद भी वह वापस ससुराल यानी तमिलनाडु नहीं आई तो उसे डराने के लिए पति ने कोर्ट से नोटिस भेज दिया.

डरने के बजाय रिहा ने उल्टा पति व सास के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस की जांच में आरोप गलत साबित हुए. इसके बाद रिहा ने अपने पहले पति से हुए बच्चे का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया और कोर्ट में लाख रुपये प्रतिमाह भरण पोषण का दावा ठोक दिया. कोर्ट की नोटिस पर अमित ने अपने स्तर पर जन्म प्रमाण पत्र की स्वास्थ्य विभाग से जांच कराई तो वह फर्जी निकल गया. इस पर उस ने जांच रिपोर्ट दायर कर दी. कोर्ट ने रिहा का यह केस भी खारिज कर दिया. साथ ही पुलिस को फर्जी प्रमाणपत्र की जांच के आदेश दे दिए.

सीधे तौर पर देखें तो रिहा जैसी महिलाओं को हम गोल्ड डिगर का नाम दे सकते हैं. एक ऐसी महिला जो अमीर पुरुषों के साथ रोमानी रिश्तों में आती हैं और उन की संपत्ति पर नजर रखती हैं. पैसों के लिए ही वे रिश्ते बनाती हैं. इस से उन्हें समाज में मनमाफिक स्थान मिलता है. वे जीवन की तमाम सुख सुविधाओं का उपयोग कर पाती हैं. ऐसी महिलाएं अमीर लोगों की तलाश में रहती हैं.

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार “गोल्ड डिगर” शब्द का इस्तेमाल उन महिलाओं के लिए किया जाता है जो समाज में अपना एक स्तर बनाए रखने के लिए किसी अमीर शख्स से शादी करती हैं.

गोल्ड डिगर शब्द पहली बार 1911 में इस्तेमाल में आया. अमेरिकी उपन्यासकार रेक्स बीच ने पहली बार अपनी किताब ‘द नेवर डू वेल’ में गोल्ड डिगर शब्द का इस्तेमाल किया था. बीसवीं सदी की शुरुआत में यह शब्द ऐसी महिलाओं के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा जो किसी के साथ रिलेशनशिप में आने से पहले सामने वाले की धन सम्पत्ति पर ज्यादा फोकस रखती थीं. 1920 के दशक में अमेरिका में पेगी हॉपकिंस जॉयस नाम की एक्ट्रेस हुईं. इन्होंने छह शादियां की थीं. पेगी के लिए गोल्ड डिगर शब्द का इस्तेमाल किया गया.

भारत में भी गोल्ड डिगर शब्द बड़ा पॉपुलर हुआ है. एक समय में रिया चक्रवर्ती और सुष्मिता सेन को भी गोल्ड डिगर कहा गया. बहुत से लोगों ने माना कि रिया ने सुशांत के साथ पैसों के लिए रिश्ता बनाया था. बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन आईपीएल के फाउंडर ललित मोदी के साथ रिलेशनशिप को लेकर चर्चा में रहीं. इन के रिलेशनशिप को लेकर भी तरह तरह की बातें हुईं. वैसे सुष्मिता के मामले में सच्चाई नजर नहीं आती. सुष्मिता की नेट वर्थ 100 करोड़ के आसपास है. मुंबई के वर्सोवा में एक आलीशान अपार्टमेंट में उनका घर है. उनके पास  बीएमडब्ल्यू और ऑडी कार  है. वह अपनी एक्टिंग से करोड़ों कमाती हैं. इसलिए हर महिला को इस नजर से देखना उचित नहीं.

ओनाती इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर द सोशियोलॉजी ऑफ लॉ ने एक आर्टिकल छापा. नाम था ‘इन डिफेन्स ऑफ द गोल्ड डिगर’. लिखने वाली थीं शैरन थॉम्प्सन. उन्होंने लिखा था, ‘ गोल्ड-डिगर शब्द की लोकप्रियता ये सुबूत नहीं देती कि कई महिलाएं पुरुषों के साथ सिर्फ आर्थिक वजहों से रिश्ते बना रही थीं. लेकिन महिलाओं और पुरुषों के बीच की आर्थिक और ढांचागत गैर-बराबरी ये ज़रूर बताती है कि इस शब्द को स्त्रियों से क्यों जोड़कर देखा गया. क्योंकि अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए महिलाओं का अमीर पुरुषों से शादी करना ज्यादा सम्भाव्य था जबकि इसके उलटे मामले बेहद कम थे. यानी एक पुरुष का अमीर महिला से पैसों के लिए शादी करना.’

वैसे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि बहुत से पुरुष गोल्ड डिगर महिलाओं का शिकार बन कर अपना सुख चैन और दौलत सब कुछ लुटा बैठते हैं. इसलिए किसी के साथ रिलेशनशिप में आने से पहले इस बात को लेकर आश्वस्त हो जाएं कि वाकई वह आप से प्यार करती हैं या यह रिश्ता आर्थिक वजह से वजूद में आया है. अगर आप यह पता लगाना चाहते हैं कि आप का पार्टनर गोल्ड डिगर है या नहीं तो कुछ बातों पर ध्यान दें;

  •  जब आप किसी को डेट करते हैं तो अपने बजट को देखते हुए अच्छी जगह ढूंढते हैं जहां आप एक दूसरे से आराम से मिल सकें और कुछ खूबसूरत लम्हे गुजार सकें. लेकिन जब आप किसी गोल्ड डिगर को डेट कर रहे होते हैं तो वह हमेशा फैंसी और महंगी जगहों पर जाने की सलाह देगी और महंगी चीजें ऑर्डर करेगी.
  •  वह हमेशा आपको पेमेंट करने देगी और धीरे धीरे वह अपने अन्य खर्चों के लिए भी आप पर डिपेंडेंट हो जाएगी.
  • गोल्ड डिगर पार्टनर अक्सर इस बात पर अधिक ध्यान देते हैं कि आप क्या काम करते हैं और कितना कमाते हैं. आप को समझना होगा कि जिस व्यक्ति में आप इंटरेस्ट दिखा रहे हैं क्या वह आप से प्यार करता है या आपके पैसों से.
  • गोल्ड डिगर पार्टनर के पास अपना कोई लक्ष्य या फिर करियर गोल नहीं होता है.  इस के अलावा वह अक्सर घुमा-फिरा कर बातें करना पसंद करते हैं. ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस महिला को आप डेट कर रहे हैं वो गोल्ड डिगर है या नहीं.
  • ऐसी महिलाएं हमेशा अपने पुरुष पार्टनर से महंगे गिफ्ट्स की फरमाइश करती हैं. उन के बैंक बैलेंस और प्रॉपर्टी की जानकारी लेने को उत्सुक रहती हैं. पैसा देख कर ही किसी को भाव देती हैं.
  • इस तरह अगर आप थोड़ा ध्यान दें तो यह पता लगा सकते हैं कि आप की पार्टनर का मकसद क्या है. जिन का मकसद पैसा महसूस हो उन से शुरुआत में ही दूर हो जाना बेहतर है.

Wedding Special: 5 वैडिंग फुटवियर आइडियाज

ईरा अवस्थी 29 साल की है. उस की ख्वाहिश है कि वह अपनी शादी में ब्यूटीफुल दिखे ताकि उसे देखते ही सभी लोग कहें सो ब्यूटीफुल, सो ऐलिगैंट जस्ट लुकिंग लाइक अ वाऊ. इस के लिए उस ने दिल्ली के एक मशहूर डिजानर से अपना लहंगा डिजाइन करवाया. लेकिन खास बात यह थी कि वह अपनी शादी में तारीफ किसी और ही चीज के लिए पा रही थी.

ईरा को उस के स्टाइलिश कूल शूज के लिए तारीफ मिल रही थी. ईरा ने अपने सौफ्ट रोज कलर के लहंगे के साथ मैचिंग शूज पहने थे, जिन पर मिरर वर्क हुआ था. ये शूज हील स्टाइल में थे. इसलिए हाइट का भी कोई इशू नहीं था. ईरा के शूज के लुक ने नैना को इतना अट्रैक्ट किया कि उस ने भी अपनी शादी में सैंडल को रिप्लेस कर के हील शूज को एड कर लिया.

नैना के ऐसा करने का कारण खुद को फैशन में अपडेट रखना है. वह नहीं चाहती कि वह किसी से भी फैशन में पीछे रहे. आखिर वह होने वाली ब्राइड है और अपने स्पैशल डे पर हर ब्राइड स्पैशल लगना चाहती है. नैना भी यही चाहती है.

ऐसे सैंडल, पंप्स, हील्स, शूज या स्नीकर्स का चुनाव करें जिन्हें कैरी करने के बाद आप कंफर्टेबल फील करें न कि अपने स्पैशल डे पर आप इरिटेटेड फील करें.

अगर आप कंफर्टेबल फील नहीं करेंगी तो आप का स्पैशल डे आप का बैड डे बन जाएगा. इसलिए आप अपने कंफर्ट के हिसाब से ही अपने वैडिंग फुटवियर को चुनें.

एक ब्राइडल के लिए कंफर्ट कितना जरूरी है यह बौलीवुड के मशहूर हीरो सुनील शेट्टी की बेटी आथिया शेट्टी से सीखा जा सकता है. उन्होंने अपनी शादी में गोटा पट्टी हील्स पहनी थीं, जो देखने में कंफर्टेबल और ब्यूटीफुल लग रही थीं. ये कई दिनों तक चर्चा का विषय भी बनी रहीं. इतना ही नहीं, महिलाओं ने इसे खासा पसंद भी किया. यही कारण था कि उन दिनों गोटा पट्टी हील्स ट्रैंड में आ गईं.

अगर आप भी ब्राइड बनने वाली हैं या आप की भी फ्रैंड, बहन, कजन या होने वाली भाभी ब्राइड बनने जा रही है तो यह आर्टिकल आप के बहुत काम का है. आज हम आप को कुछ फेमस ब्राइडल फुटवियर के बारे में बताएंगे.

  1. सितारों वाले ब्राइडल शूज

अगर आप अपने ब्राइडल लुक से सैंडल को रिमूव कर के कुछ नया ट्राई करना चाहती हैं तो सितारों वाले ब्राइडल शूज को अपना सकती हैं. ये शूज मोनोक्रोम आउटफिट पर खूब जंचते हैं. आप शादी के अन्य फंक्शन जैसे कौकटेल के लिए भी इस तरह के शूज स्टाइल कर सकती हैं. इस तरह के शूज आप को क्व3 हजार से ले कर क्व5 हजार तक में आसानी से मिल जाएंगे. अगर आप अपनी शादी में हील्स कैरी नहीं करना चाहती हैं तो ऐसे शूज आप के लिए बैस्ट औपशन रहेंगे.

ये ब्राइडल शूज और स्नीकर्स आप के ब्राइडल लुक को यूनीक बनाएंगे. शूज की ये डिजाइनें आप को फैशन ट्रैंड के साथ अप टू डेट रहना भी सिखाएंगे.

2. बोहो स्टाइल ब्राइडल शूज

इन दिनों बोहो लुक का अलग ही क्रेज है. हरकोई बोहो लुक को अपना रहा है. अगर आप कन्फ्यूज हैं कि अपनी शादी में आप किस तरह के फुटवियर पहनें तो आप बोहो शूज को ट्राई कर सकती हैं. इन में आप को कई तरह की डिजाइनें और कलर भी आसानी से मिल जाएंगे, जो आप को एक डिफरैंट लुक देंगे. अगर आप का वैडिंग फंक्शन दिन का है तो ये आप के लिए परफैक्ट रहेंगे.

शूज का कलर आप अपने लहंगे को ध्यान में रख कर चुनें. आप चाहें तो बोहो शूज को अपने अर्कौडिंग कस्टमाइज भी करवा सकती हैं. अगर आप बोहो शूज के साथ कुछ नया ऐक्सपैरिमैंट करना चाहती हैं तो आप शूज पर कुछ स्पैशल लिखवा सकती हैं जैसे पटाका दुलहन, टू बी ब्राइड. आप चाहें तो अपने हसबैंड का नाम जैसे सुमित की दुल्हनिया भी लिखवा सकती हैं.

अगर बात करें बोहो शूज की कीमत की तो मार्केट में ये 2 हजार से 8 हजार रुपये में आसानी से मिल जाते हैं. इन्हें कई औनलाइन शौपिंग साइट्स जैसे मिंतरा, अमेजन, फिल्पकार्ट, अजियो, इंडिया मार्ट, नायका से और्डर कर सकती हैं. आप को बोहो शूज कई इंस्टाग्राम स्टोर में भी देखने को मिल जाएंगे.

3. मोती वाले ब्राइडल शूज

इस तरह के शूज में हाथों से मोती और धागे का इस्तेमाल कर के ऐंब्रौयडरी वर्क किया जाता है. ये देखने में बहुत सुंदर और ऐलिगैंट लगते हैं. ये डिफरैंटडिफरैंट कलर में आते हैं. आप अपने लहंगे के कलर के हिसाब से अपने शूज ले सकती है. इन का औनलाइन प्राइज करीब 3 हजार  पांच सौ रुपये से ले कर 10 हजार तक है. आप अपने बजट और पसंद के हिसाब से अपने ब्राइडल शूज चूज कर सकती हैं.

अगर आप पैंसिल हील्स पहनने में कंफर्टेबल फील नहीं करती हैं या आप हील्स पहन कर बौर हो गई हैं तो आप इस तरह के प्लेटफौर्म बेस ब्राइडल स्नीकर्स शूज को चुन सकती हैं. हमारी राय है कि इस तरह के ब्राइडल शूज आप जरकन वर्क या फ्लोरल वर्क के आउटफिट के साथ कैरी करें.

4. गिल्टर वाली ब्राइडल हील्स और शूज

गिल्टर वाली हील्स हमेशा पसंद की जाती रही हैं. लेकिन इन दिनों ब्राइड ब्राइडल शूज पहनना ज्यादा पसंद कर रही हैं क्योंकि ये कंफर्टेबल होते हैं. लेकिन अगर आप अपने ब्राइडल फुटवियर में कंफर्ट और गिल्टर दोनों चाहती हैं तो आप गिल्टर ब्राइडल शूज ट्राई कर सकती हैं. ये कंफर्टेबल होने के साथसाथ ट्रैंडी भी होते हैं. मार्केट में इन की कीमत 2 हजार रुपये से 8 हजार तक है. इन्हें औनलाइन और औफलाइन दोनों तरह से खरीदा जा सकता है.

5. ऐंब्रौयडरी ब्राइडल जूती

लड़कियों में जूतियों का क्रेज देखते ही बनता है और इंडियन लुक के साथ तो ऐंब्रौयडरी जूती का कौंबिनेशन परफैक्ट है. बौलीवुड की फेमस ऐक्ट्रैस दीपिका पादुकोण ने भी अपनी शादी में फुटवियर के रूप में ऐंब्रौयडरी ब्राइडल जूती को ही अपनाया था. ऐंब्रौयडरी जूती बहुत ही कंफर्टेबल होती है. जिन ब्राइडल की हाइट सामान्य है वे अपने ब्राइडल लुक को ऐंब्रौयडरी जूती के साथ कंप्लीट कर सकती हैं. ये आप को ऐलिगैंट लुक देती हैं.

जूतियों की बात हो और पंजाब का नाम न आए ऐसा कैसे संभव है. पंजाब की जूतियां पूरे इंडिया में ही नहीं विदेशों में भी फेमस हैं. ऐसे में इन जूतियों का ब्राइडल कलैक्शन देखने लायक है. इन जूतियों में ऐंब्रौयडरी वर्क, मिरर वर्क, घुंघरू, सीपी वर्क, मोती वर्क, गोटा पट्टी वर्क, फुलकारी, मल्टी कलर आते हैं. अब इन जूतियों पर टैगलाइन का ट्रैंड चल रहा है जैसे कूल दुलहनिया, दूल्हादुलहन का नाम वगैरहवगैरह.

इन ब्राइडल शूज, स्नीकर्स और सैंडल्स को अपना कर आप अपने ब्राइडल लुक को इन्हांस कर के महफिल लूट सकती हैं.

ब्राइडल शूज और स्नीकर्स के कुछ फेमस ब्रैंड हैं- हाउस औफ पटौदी, नाज, हरजिंदगी, इंयासा, ड्रीमसेफ, टोयस्टेप, अनार गिरी आदि.

अगर बात करें कि ब्राइडल फुटवियर कहां से खरीदें तो आप इन्हें कई औनलाइन वैबसाइट्स जैसे ट्राइसा, कोरलहेज से खरीद सकती हैं. इन के खुद के इंस्टाग्राम पेज भी हैं.

शू बाइट से बचने के लिए आप पहले पैरों के सैंसिटिव एरिया पर बैंडेज लगा लें. इस से आप को राहत मिलेगी, साथ ही आप शू बाइट से भी बचेंगी.

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