फ्रिंज हेयर कट देगा आपको कौंफिडेंट लुक

आपको साठ के दशक की फिल्म “लव इन शिमला” तो याद होगी ना, जिसमें अभिनेत्री साधना की अदाकारी से लेकर उनका हिट हेयर स्टाइल ने सबके दिलों को जीत लिया था. उस फिल्म के बाद से आज तक ‘साधना कट’ हर महिला का पसंदीदा हेयरकट बन गया है. इसके अलावा आपने कई इंडोर्समेंट इवेंट्स में बौलीवुड सुंदरियों जैसे प्रियंका चोपड़ा, दीया मिर्जा, काल्कि कोचलिन, कटरीना कैफ आदि को भी इस फ्रिंज हेयर कट में देखा होगा.

फ्रिंज या बैंग हेयर स्टाइल एक ऐसा हेयर स्टाइल है जो सही मायनो में चेहरे को हाईलाइट कर आपको एक नया लुक देता है. लेकिन फ्रिंज कट को अपनाने से पहले कुछ खास बातों को ध्यान में रखना जरूरी है, आइये जानते हैं इसके बारे में –

कैसे फेस कट पर कैसी फ्रिंज कट फबेगी

ओवल फेस

ओवल फेस यानी अंडाकार चेहरा. इस तरह के चेहरे पर हर तरह का हेयर कट अच्छा लगता है. फ्रिंज के अलावा आप रेजर्ड, एंगल्ड या असीमिट्रिकल, साइड स्विफ्ट, पार्टेड या ब्लंट बैंग आदि हेयर कट भी ट्राई कर सकती हैं, ये आपको दुसरें से हटकर व एक कौंफिडेंट लुक देता है.

राउंड फेस कट के लिए

गोल पर रेजर्ड या स्ट्रेट फ्रिंज अच्छी लगेगी. यदि आपके गाल उभरे हुए हैं तो ऐसे में फ्रिंज, मांग के दोनों तरफ या साइड पर हों तो चेहरा को एक नया लुक मिलेगा जो देखने में काफी सुन्दर लगेगा.

लंबा फेस कट

लंबे चेहरे पर माथे से आती गालों तक व मांग के दोनों छोर पर बिखरी ब्लंट फ्रिंज चेहरे को अंडाकार लुक देती है.

स्क्वायर शेप

अगर आपका चेहरा स्क्वायर शेप का है तो ऐसे में साइड व सेंटर पार्टिंग के दोनों ओर व गालों तक आती इनवर्ड रोल (अंदर की ओर मुड़ी हुई) व कर्व (घुंघराली) फ्रिंज चेहरे को नया आकार देती है.

फ्रिंज वेरायटी के बारे में जाने

प्रमुख फ्रिंज वेराइटी हैं –

साइड स्विफ्ट फ्रिंज (मांग की एक तरफ से)

पार्टेड फ्रिंज (मांग के दोनों तरफ)

ब्लंट फ्रिंज (फ्रिंज को स्ट्रेटनिंग रोड से सीधा इनर रोल किया जाता है)

चौपी फ्रिंज (मांग की दोनों या एक तरफ व फ्रिंज में बालों की थिक लेयर)

असीमिट्रिकल फ्रिंज (मांग के दोनों ओर या एक तरफ बालों में रेजर कट दिया जाता है और इन्हें बाउंसी व शोर्ट कट दिया जाता है ताकि किसी तरफ से मांग निकालने पर फ्रिंज trimmed व Even दिखते हैं)

कुछ महत्त्वपूर्ण बातें और

फ्रिंज स्टाइल स्ट्रेट व बाउंसी बालों में अधिक अच्छा लगता है. बालों को वेवी व बाउंसी दिखाने के लिए फ्रिंज में बालों की थिक लेयर व क्राउन (माथे का सेंटर प्वाइंट) से लेकर फोरहेड तक फ्रिंज कटवाए, महीने में एक बार इन्हें ट्रिम जरूर करवाएं. तैलीय और कर्ली बालों में फ्रिंज कट नहीं जंचता है.

इसके अलावा ऊंचे माथे पर आईब्रो तक आती पतली व लंबी फ्रिंज, छोटे माथे पर सीधी व छोटी फ्रिंज, चौड़े माथे को छुपाने के लिए फ्रिंज थिक शार्ट लेन्थ होनी चाहिए.

प्रेग्नेंसी के बाद कम करना है वजन तो अपनाएं ये आसान तरीके

प्रेग्नेंसी के बाद वजन घटाना एक बड़ी चुनौती होती है. आमतौर पर प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं का वजन बढ़ जाता है और आपकी लाख कोशिशों के बाद भी वो अपना वजन कम नहीं कर पाती. इस खबर में हम आपको उन तरीकों के बारे में बताएंगे जिनकी मदद से आप प्रेग्नेंसी के बाद भी अपना वजन कम कर सकेंगी.

 खूब पीएं पानी

पानी पीना वजन कम करने का सबसे आसान तरीका है. अगर आप सच में अपना वजन कम करना चाहती हैं तो अभी से रोजाना 10 से 12 ग्लास पानी पीना शुरू कर दें.

टहला करें

प्रेग्नेंसी के बाद वजन कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप वौक शुरू करें. कई रिपोर्टों में भी ये बाते सामने आई है कि प्रेग्नेंसी के बाद वजन घटाने के लिए जरूरी है टहलना.

खाना और नींद रखें अच्छी

आपको बता दें कि तनाव और नींद पूरी ना होने से कई तरह के रोग हो जाते हैं. इसके अलावा आप बाहर का खाना बंद कर दें. घर का बना खाना खाएं और पर्याप्त नींद लें. स्ट्रेस ना लें. खुद को कूल रखें.

बच्चे को कराएं ब्रेस्टफीड

आपको ये जान कर हैरानी होगी पर ये सच है कि ब्रेस्टफीड कराने से महिलाओं के वजन में तेजी से गिरावट आती है. और इस बात का खुसाला कई शोधों में भी हो चुका है. ब्रेस्टफीड कराने से शरीर की 300 से 500 कैलोरी खर्च होती है. कई जानकारों का मानना है कि स्तमपान कराने से महिलाओं का अतिरिक्त वजन कम होता है.

ऐसे बनाएं स्वादिष्ट रशियन सलाद

सामग्री

– फ्रेंच बीन्स (½ कप)

– गाजर, हरे मटर और आलू (कटे और आधे उबले)

–  कैन्ड पाइनएप्पल (½ कप कटी हुई)

– क्रीम (½ कप)

– मेयोनीज़ (½ कप)

– चीनी (½ टी स्पून)

-नमक (स्वादानुसार)

– काली मिर्च(कम मात्रा में)

बनाने की विधि

– एक बड़ा प्याला लें और इसमें फ्रेंच बीन्स, गाजर, हरे मटर और आलू और पाइनएप्पल दाल दें.

– इसमें मेयोनीज़, नमक, चीनी और काली मिर्च डालकर सही तरह मिला लें.

– फिर इसमें ताजी क्रीम डालकर फिर से मिला लें.

– इसके बाद इसे कम से कम 1 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें.

लीजिए आपकी रशियन सलाद तैयार है, इसे ठंडा ही परोसें.

भैरवी: भाग 3- आखिर मल्हार और भैरवी की शादी क्यों नहीं हुई

उस समय डूबता सूरज जातेजाते दो पल को ठिठक गया था. सांझ अधिक सिंदूरी हो उठी थी और वक्त अपनी सांसें रोक कर थम गया था.

‘‘क्या सोच रही हैं मैडम? आप की चाय ठंडी हो रही है,’’ मोहना ने फिर उसे वर्तमान के कठोर धरातल पर ला पटका था, जहां न तो मोगरे से महकते बचपन की सुगंध थी और न ही गुलाब से महकते कैशोर्य की मादकता.

घड़ी की सूइयों के साथ समय अगले दिन मं प्रवेश कर चुका था. मां सुबहसुबह ही

एअरपोर्ट के लिए निकल गई थीं. दिन में मंत्री महोदय के साथ मीटिंग काफी अच्छी रही थी. मंत्री भी भैरवी के काम करने के तरीके से बहुत प्रभावित थे. वैसे भी लखनऊ जैसे शहर का जिलाधिकारी होना कोई मामूली बात नहीं थी, जिस में हर दिन उस का अलगअलग पार्टियों के नेताओं से आमनासामना होता रहता था. सभी से अच्छे संबंध बना कर रखना भैरवी को भलीभांति आता था.

दिनभर रहरह कर भैरवी को मल्हार का खयाल आता रहा, जबकि उसे यह भी ठीक तरीके से पता नहीं था कि यह वही ‘मल्हार वेद’ है अथवा नहीं. उस के मन में मल्हार के लिए कोई बेचैनी या तड़प नहीं थी, बस एक उत्सुकता भर थी कि वह अब न जाने कैसा दिखता होगा. उस ने विवाह कर लिया होगा तो उस की पत्नी भी साथ आईर् होगी. न जाने उस के परिवार में कौनकौन होगा.

आर्ट गैलरी के उद्घाटन का कार्यक्रम समाप्त होतेहोते शाम के 6 बज गए थे. मल्हार का कार्यक्रम आरंभ होने में अभी भी 1 घंटा शेष था इसलिए भैरवी ने ड्राइवर से अपनी सरकारी गाड़ी घर की ओर मोड़ने के लिए कहा. घर पहुंच कर उस ने हलके वसंती रंग की हरे बौर्डर वाली अपनी मनपसंद साड़ी निकाली.

फिर अचानक ही नन्हा सा मल्हार टपक पड़ा, ‘‘तू यह पीले रंग की फ्रौक में कितनी प्यारी लगती है. यह रंग बहुत जंचता है तुझ पर.’’

‘‘हां, मालूम है मुझे. मां कहती हैं कि सांवली रंगत पर हलके रंग ही फबते हैं. कुदरत ने मुझे सांवला रंग क्यों दिया मल्हार. मैं सोनी जैसी गोरी चिट्ठी क्यों नहीं?’’

उस समय भैरवी ने यह मासूमियत भरा प्रश्न किया था. वह नहीं जानती थी कि एक दिन यह सांवला रंग ही उस की जिंदगी बदल देगा.

ऐसा नहीं था कि अब भैरवी के जीवन में कोई कमी थी. सबकुछ तो था उस के पास. नाम, पैसा, इज्जत, शोहरत. बस नहीं था तो एक अपना कहने वाला परिवार. उस के भाईबहन और यहां तक कि मां को भी बस उस के पैसों और शोेहरत से लगाव था. इस से अधिक कुछ नहीं. उस के भतीजेभतीजियां भी रोज अपनी फरमाइशों की सूची उस के पास भेजा करते कि बूआ मुझे बैटरी वाली डौल चाहिए या बूआ मुझे लाइट वाली साइकिल.

भैरवी जब भी अपनी सहेलियों और हमउम्र औरतों को अपने पति और बच्चों के साथ देखती तो उस के कलेजे में एक हूक सी उठती. फिर वह सबकुछ भूल कर अपने काम में जुट जाती.

जब भैरवी मल्हार के कार्यक्रम वाले आयोजन स्थल पर पहुंची तो हाल खचाखच भर चुका था. भीड़ देख कर भैरवी को एक सुखद आश्चर्य भी हुआ कि आज पौप के संगीत के जमाने में भी लोग लोकसंगीत को इतना पसंद करते हैं.

आयोजकों ने आगे बढ़ कर भैरवी का स्वागत किया और उसे स्टेज के सामने सब से आगे वाली कतार में ले जा कर बैठा दिया.

भैरवी की नजरें स्टेज पर टिक गईं. स्टेज के बीचोंबीच पीले सिल्क के कुरते और सफेद पाजामे में मल्हार खड़ा था. वैसी ही पतली मूंछें और करीने से कढ़े हुए बाल. हां, उस के भी बालों में चांदी ने घर बना लिया था. उम्र के साथ मल्हार का गोरा रंग और भी निखर आया था.

भैरवी को कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्ज्वलित कर स्टेज पर आमंत्रित किया. जब भैरवी स्टेज पर चढ़ी तब मल्हार की नजरों से उस की आंखें जा मिलीं. मल्हार की आंखों में आश्चर्य व प्रसन्नता के मिलेजुले से भाव उभरे और वह बोल पड़ा, ‘‘अरे तुम… म… म… मेरा मतलब है भैरवीजी आप? यहां? मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि आप से यहां मुलाकात हो जाएगी.’’

भैरवी ने कोई उत्तर नहीं दिया, बस मुसकरा कर रह गई. दीप प्रज्ज्वलन के बाद भैरवी अपने स्थान पर आ कर बैठ गई. स्टेज से उतरते समय मल्हार की निगाहें अपनी पीठ पर चिपकी हुई सी महसूस हुई उसे. कार्यक्रम के दौरान उसे लगता रहा कि  जैसे मल्हार उसे देख कर ही गा रहा हो. मल्हार के गीतों में वह स्वयं की कल्पना उस विरहन नायिका की तरह करती रही, जिस का पति परदेश चला गया है या फिर जिस का प्रेमी या पति हरी चूडि़यां लाने का वादा कर के देश की सीमा पर शहीद हो गया है.

दर्शक भी मल्हार की जादुई आवाज में डूब कर लोकसंगीत की पावन, सुरीली, सुरम्य धारा में सराबोर होते रहे. मल्हार के हर गीत की समाप्ति पर पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा.

भैरवी का मन भी यह सोच कर गर्व की अनुभूति में डूबताउतराता रहा कि  वह उस मल्हार को बचपन से जानती है, प्रेम करती है, जिस की आवाज की सारी दुनिया दीवानी है. कार्यक्रम लगभग ढाई घंटे तक चला. कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात वहां उपस्थित पत्रकारों ने मल्हार को घेर लिया. भैरवी भी वापस घर जाने के लिए उठ खड़ी हुई, हालांकि आयोजक उस से रात्रि का भोजन कर के वापस जाने का आग्रह करते रहे. परंतु भैरवी वहां से भाग जाना चाहती थी, अपनेआप से भाग जाना चाहती थी. दरअसल, वह मल्हार का सामना नहीं करना चाहती थी. वह नहीं चाहती थी कि अतीत की जिन मृतप्राय यादों को उस ने किसी अंधेरी घुप्प कोठरी में कैद कर रखा है, वे उस कोठरी से निकल कर पुन: जीवित हो जाएं.

तभी किसी पत्रकार के शब्द उस के कानों से आ टकराए, ‘‘मल्हारजी, आप ने अभी तक विवाह क्यों नहीं किया? क्या आप को अभी तक कोईर् भी ऐसी स्त्री नहीं मिली जो आप की जीवनसंगिनी बन सके?’’

मल्हार ने तिरछी नजरों से भैरवी की ओर देखा, जैसे वे नजरें बस उड़ती हुई सी

भैरवी को छू कर निकल गई हों, फिर बोला, ‘‘संगिनी तो मिली थी, परंतु वह मेरी जीवनसंगिनी न बन सकी.’’

भैरवी तेज कदमों से हौल के बाहर चली गई और अपनी गाड़ी में बैठ गई. उस की गाड़ी घर की ओर तेजी से भाग रही थी. आसपास के मकान, पेड़पौधे, दुकानें सबकुछ पीछे छूटता जा रहा था, ठीक वैसे ही जैसी भैरवी अपने बचपन से ले कर अब तक के बिताए पलों को पीछे छोड़, आगे निकल जाना चाहती थी. उस के मन में भावनाओं का ज्वार उफन रहा था जिन में लहरों की तरह हजारों सवाल उस के दिमाग में आ रहे थे कि ओह, तो अभी तक मल्हार ने भी विवाह नहीं किया है, मैं क्यों उस के प्यार की गहराई नहीं सम?ा पाई. मैं ने क्यों बीते इतने

सालों में मल्हार की कोई खोजखबर नहीं ली. मल्हार ने भी कभी मुझे ढूंढने या मिलने का प्रयास क्यों नहीं किया. क्या हमारा प्रेम इतना उथला था. क्या अब भी साथसाथ हमारा कोई भविष्य हो सकता है. मैं क्यों आप मल्हार का सामना नहीं करना चाहती.

घर पहुंच कर भैरवी ने कपड़े बदले और अपने मनपसंद शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी की सीडी अपने लैपटौप पर लगा दी. जब भी उस का मन उद्विग्न होता तो शास्त्रीय संगीत न केवल उस के मन को शांत करता बल्कि उसे सुकून भी पहुंचाता. पंडितजी की आवाज में सुकून की संगीत लहरियां पूरे घर में गूंजने लगीं.

तभी भैरवी के इंटरकाम फोन की घंटी बजी. फोन उठाने पर उस के बंगले पर तैनात दरबान ने बताया, ‘‘मैडमजी, कोई मल्हार नाम के सज्जन आप से मिलना चाहते हैं. मैं ने उन से कहा भी कि हमारी मैडम इतनी रात गए किसी से नहीं मिलतीं परंतु वे यहां से जाने को तैयार ही नहीं हैं. कह रहे कि मैडम से बिना मिले नहीं जाऊंगा.’’

‘‘ठीक है, अंदर आने दो उन्हें,’’ कह कर भैरवी ने फोन रख दिया.

भैरवी का हृदय उसी षोडषी कन्या की तरह जोरजोर से धड़कने लगा, जो अपने घर वालों से छिप कर अपने प्रेमी से मिलने जा रही हो.

दरवाजे पर दस्तक हुई तो भैरवी ने दरवाजा खोला. मल्हार और भैरवी दोनों ने एकदूसरे को भरपूर नजरों से देखा, चुपचाप एकटक जैसे सालों के विछोह के बाद आमनेसामने होने पर दोनों की नजरें तृप्त हो जाना चाहती हों. उन पलों में समय वैसे ही ठहर गया जैसे किसी झील का ठहरा हुआ पानी.

मल्हार ने ही चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ‘‘इतने सालों बाद तुम्हें देख कर मैं कितना खुश हूं, बता नहीं सकता. मैं तो तुम से मिलने की उम्मीद ही छोड़ बैठा था. मुझे लगता था कि तुम्हारी शादी हो गई होगी और तुम अपनी गृहस्थी में मस्तमगन होगी. आज पता चला कि तुम ने भी मेरी तरह शादी नहीं की, तो डीएम साहिबा, क्या अपने घर के अंदर नहीं बुलाओगी? हम यों ही दरवाजे पर खड़ेखड़े ही बातें करेंगे?’’

‘‘रात बहुत हो चुकी है मल्हार, हम कल बात करें,’’ भैरवी ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया.

‘‘परंतु मुझे तो अभी ही तुम से ढेर सारी बातें करनी हैं. तुम्हारे साथ अपने भविष्य के सपने सजाने हैं. हम दोनों ने ही इतने सालों तक एकदूसरे का इंतजार किया है. अब हमें अपनी जिंदगी एकसाथ बिताने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए भैरवी. सीधे शब्दों में कहूं तो मैं तुम्हारे समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखना चाहता हूं, क्यों न हम जल्द से जल्द विवाह बंधन में बंध जाएं. तुम्हारा क्या खयाल है? मुझ से विवाह करोगी न?’’ मल्हार ने भैरवी की आंखों में झंकते हुए कहा.

भैरवी ने देखा, बाहर बरामदे में लगे लैंपपोस्ट की रोशनी में मल्हार की आंखें जुगनू की तरह चमक रही थीं, भोली, निश्छल सी आंखें जिन में भैरवी के लिए प्रेम छलका पड़ रहा था.

भैरवी ने अपनी नजरें झुका लीं, ‘‘उम्र के जो वसंत बीत जाएं, वे दोबारा नहीं लौटा करते मल्हार, यह सच है कि मैं ने भी तुम्हें टूट कर चाहा है. अपनी कल्पनाओं की दुनिया में न

जाने कितनी बार मैं तुम्हारी दुलहन बनी हूं और तुम मेरे प्रियतम परंतु जिस संगीत ने हम दोनों

को जोड़ा था, वह संगीत ही मेरे भीतर अब सूख चुका है. अब इस पतझड़ के मौसम में बहारें दोबारा नहीं आ पाएंगी, हो सके तो मुझे क्षमा कर देना.’’

‘‘यह क्या कह रही हो भैरवी. तुम तो ऐसी नहीं थीं. तुम इतनी निष्ठुर कैसे बन सकती हो,’’ मल्हार की आवाज भावुकता में बह कर लड़खड़ाने लगी.

‘‘निष्ठुर मैं नहीं, हमारी नियति है मल्हार. अब तुम जाओ, मुझे सोना है,’’ कह कर भैरवी ने दरवाजा बंद कर दिया और दरवाजे पर पीठ टिका कर खड़ी हो गई. उस की आंखों से गंगाजमुना बह निकली.

भैरवी के मन के भीतर समाई लड़की का मन हुआ कि वह दरवाजा खोल कर देखे कि मल्हार वहीं खड़ा है या चला गया. वह दौड़ कर मल्हार के सीने से लग जाए और कहे कि हां, मल्हार, मैं भी तुम से बहुत प्यार करती हूं. मैं भी तुम्हारे साथ जीना चाहती हूं, तुम्हारी बांहों में मरना चाहती हूं. मगर तुरंत ही उस प्रेम में पगी हुई लड़की का स्थान जिलाधिकारी भैरवी ने ले लिया.

घर में पंडित भीमसेन जोशी की आवाज में राग मल्हार गूंज रहा था और भैरवी की आंखों से आंसुओं की बरसात लगातार हो रही थी.

प्रियंका चोपड़ा को क्यों बेचने पड़े दो फ्लैट महज 6 करोड़ में

इन दिनों फिल्म कलाकारों द्वारा अपनी प्रापर्टी बेचने की खबरें काफी आ रही हैं. लोग कयास लगा रहे हैं कि इसकी वजह बौलीवुड की फिल्मों का लगातार अफसल होना है अथवा सरकार के दावों के बावजूद देश की इकोनामी में आ रही गिरावट हैं.बहरहाल,अब खबर है खुद को हौलीवुड स्टार मानने वाली अदाकारा भारतीय अभिनेत्री व 2000 की ‘मिस वल्र्ड’ विजेता ‘प्रियंका चोपड़ा ने भी दीवाली के त्यौहार के आस पास ही मुंबई के अपने दो फ्लैट महज छह करोड़ रूपए में बेच दिया.

बता दें कि यारी रोड पर ‘राज क्लासिक’ में आलीशान डुपलेक्स फ्लैट खरीदने से पहले प्रियंका चोपड़ा ने अंधेरी के लोखंडवाला इलाके में करण अपार्टमेंट नामक इमारत में दो फलैट कई वर्ष पहले खरीदे थे.इन फ्लैट का क्षेत्रफल 2300 स्क्वायर फुट है.जब प्रियंका चोपड़ा ने यारी रोड पर ‘राज क्लासिक’ के आलीशान डुपलेक्स फलैट में रहना शुरू किया,तब लोखंडवाला के फलैट में प्रियंका चोपड़ा की मां डाक्टर मधु चोपड़ा ने अपना क्लीनिक खोल लिया था.पर अब तो प्रियंका चोपड़ा अपने पति निक जोनांस के साथ ज्यादातर अमरीका में ही रहती है.

खबर है कि दिवाली से कुछ दिन पहले प्रियंका चोपड़ा ने लोखंडवाला के करण अपार्टमेंट के दोनोे फ्लैट छह करोड़ रूपए में बेच दिया.बताया जा रहा है कि यह काररवाही प्रियंका चोपड़ा की अनुपस्थिति में ‘पाॅवर आफ अटार्नी’ के बल पर डाॅक्टर मधु चोपड़ा ने ही की.यानी कि फ्लट बेचने के अग्र्रीमेंट पर डाॅक्टर मधु चोपड़ा ने ही हस्ताक्षर किए हैं. इन फ्लैट को ‘इश्कियां’ ,‘उड़ता पंजाब’ व ‘सोन चिड़िया’ जैसी फिल्मों के निर्देशक अभिषेक चैबे ने खरीदा है.इन दो फ्लैट के बेचे जाने पर प्रियंका चोपड़ा की मां ने चुप्पी साध रखी है.जब से यह खबर गर्म हुई है तब से लोग सवाल उठा रहे हैं आखिर प्रियंका चोपड़ा को इतनी क्या कड़की लग गयी कि उन्हे महज छह करोड़ के लिए अपनी मुंबई की प्रापर्टी बेचनी पड़ी? लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रियंका चोपड़ा व उनके पति रोजमर्रा का खर्च चला सकने जितनी रकम भी नहीं कमा पा रहे हैं? ज्ञातब्य है कि प्रियंका चोपड़ा ने 2018 में निक जोनास संग षादी रचायी थी.उसके बाद से वह अमरीका ही रह रही हैं.कभी कभार वह भारत आती हैं.भारत आने पर वह अपनी व्यस्तता की बातें तो बहुत करती हैं. मगर 2018 से अब तक उनका कोई खास काम सामने नजर नहीं आया.

BB 17: Elvish Yadav ने दिया हिंट, वाइल्ड कार्ड बनकर धांसू एंट्री मारेंगी Anjali Arora

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस 17 के पांच हफ्ते बीच चुके है छठा हफ्ता चल रहा है लेकिन शो में कंटेस्टेंट्स कमाल नहीं दिख रहा.  इस बार यह सीजन काफी अलग है पिछले हर सीजन में बिग बॉस के घर में टास्क होते थे. हालांकि इस बार के थीम में मेकर्स ने टास्क को नहीं जोड़ा है. इस सीजन में मेकर्स नए-नए ट्विस्ट लेकर आ रहे है फिर भी शो टीआरपी लिस्ट में कुछ खास नहीं कर रहा है. वैसे भी इस बार के कंटेस्टेंट्स दर्शकों को पसंद नहीं आ रहे. छठे हफ्ते में आ कर भी कई कंटेस्टेंट्स सोते हुए नजर आ रहे है. ऐसे में मेकर्स कई सारे वाइल्ड कार्ड की एंट्री करवा सकते है. ऐसे में अंजलि अरोड़ा का नाम भी सामने आया

बिग बॉस 17 में आएंगी अंजलि अरोड़ा

दरअसल, रियलिटी शो बिग बॉस 17 में एकसाथ पांच-छह वाइल्ड कार्ड की एंट्री होगी. ये बात एल्विश यादव ने भी अपने लेटेस्ट वीडियो में कही है. एल्विश यादव ने अपने व्लॉग में बिग बॉस 17 के वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के बारे में बात की. इस वीडियो में एल्विश यादव ने खुलासा किया कि उन्हें बिग बॉस 17 के वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स के बारे में पता चल गया है. अब शो में एक मशहूर टिक टॉक स्टार की एंट्री कंफर्म होने वाली है. एल्विश के मुताबिक, वो टिक टॉक स्टार उनका दोस्त भी हो सकता है और उनका दुश्मन भी हो सकता है. एल्विश यादव का ये वीडियो देखने के बाद लोगों का मानना है कि शो में अंजलि अरोड़ा आ सकती हैं.

हालांकि अंजलि अरोड़ा का नाम पहले भी शो के कंटेस्टेंट लिस्ट में आ चुका है. लेकिन अभी तक अंजलि अरोड़ा ने इस रिपोर्ट पर चुप्पी नहीं तोड़ी.

इन सेलेब्स का भी नाम आया

बता दें कि, बिग बॉस 17 के वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स की लिस्ट सोशल मीडिया पर छाई हुई है. जिसमें कई सेलेब्स का नाम सामने आया है. इस लिस्ट में राखी सांवत, आदिल दुर्रानी, लव कटारिया, भाविन भानुशाली, पूनम पांडे, फ्लोरा सैनी, तसनीम नेरुरकर और राघव शर्मा का नाम सामने आया है. दावा किया जा रहा है इनमें से कुछ सेलेब्स वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स बनकर आ सकते है.

कहीं आप भी तो नहीं फोमो का शिकार

फोमो यानी फियर औफ मिसिंग आउट. फोमो का आशय किसी चीज से वंचित रहने पर अफसोस होना है यानी दुनिया की दौड़ से पीछे छूट जाने की भावना. कभी आप को ऐसा महसूस होता है कि आप की जिंदगी में कोई मजा नहीं है बस गुजर रही है जैसे आप को लगता हो कि आप के दोस्त और रिश्तेदार मजेदार चीजें कर रहे हैं पर आप वैसा नहीं कर पा रहे हैं.

आप बारबार अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों के सोशल मीडिया अकाउंट को चैक करते रहते हैं ताकि उन के बारे में कुछ न कुछ पता लगता रहे और कुछ पता न लगने पर निराशा महसूस करते हैं या फिर आप बस सोशल मीडिया पर कुछ भी अपलोड करना चाहते है और लाइक्स और कमैंट्स पाने के लिए बेताब रहते हैं. यदि इन में से कोई भी लक्षण आप में है तो आप फोमो का शिकार है यानि आप को पीछे छूट जाने का डर सता रहा है.

कब महसूस होगा

क्या कभी आप के साथ ऐसा हुआ है कि आज आप का अपने दोस्तों संग पार्टी पर जाने का प्रोग्राम है और आप औफिस से समय पर घर आए भी, मगर किसी जरूरी काम की वजह से या किसी और पारिवारिक काम की वजह से पार्टी में नहीं जा पाए. ऐसे में क्या आप ने अपने काम को निबटाते हुए मन में एक अजीब सी बेचैनी महसूस की है और इस बेचैनी को दूर करने के लिए क्या आप बारबार अपना सोशल मीडिया अकाउंट स्क्राल कर उस पार्टी या ट्रिप के पोस्ट चैक करते हैं.

आप के दोस्त क्या खा रहे हैं और कैसे ऐंजौय कर रहे हैं, आप ने क्या मिस कर दिया, क्या अपने हालात की उन के ऐंजौयमैंट के साथ तुलना करते हैं? यदि हां तो आप सम?ा लीजिए कि आप फोमो का शिकार हो गए हैं.

आइए, इन कुछ उदाहरणों में से किसी भी स्थिति में यदि खुद को पाते हैं तो आप फोमो के शिकार हैं:

स्मार्ट फोन फोमो यानी दिनरात स्मार्टफोन से चिपके रहना. कुछ लोग पूरा समय अपने स्मार्ट फोन से चिपके रहते हैं. आवश्यकता न होने पर भी हर 10-15 मिनट में अपने मोबाइल को चैक करने लग जाते हैं ताकि वे हर समय अपडेट रहें और उन को अपने से  ज्यादा फिक्र स्मार्ट फोन की होती है कि कहीं मेरा फोन बंद न हो जाए या फिर सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ अपडेट करते रहना.

स्मार्ट फोन फोमो शिकार लोग इस के बिना एक पल भी नहीं रह सकते हैं. वे अपने फोन में ऐसी दुनिया बसा चुके होते हैं जो बाहरी दुनिया से बिलकुल अलग है और वे बारबार अपने दोस्तों, परिचितों एवं रिश्तेदारों के स्टेटस और उन के द्वारा की गई कोई भी ऐक्टिविटी को  देखने में ज्यादा रुचि रखते हैं.

इस समस्या का हल

कुछ समय मोबाइल से दूरी बनाएं. इस के लिए 24 घंटे के बाद या जब सभी कामों से फ्री हों, आराम कर रहे हों या किसी के औफिस के प्रतीक्षाकक्ष में बैठे हों तब भी ये सब कर सकते हैं अथवा दिनभर में एक निश्चित समय पर कुछ देर के लिए यह काम कर सकते हैं जिसे आप व्यू टाइम कह सकते हैं.

फोमो शौपिंग

अमूनन सभी लोगो को नई वस्तु खरीदने का शौक होता है लेकिन यदि आप फोमो शौपिंग के शिकार हैं तो इन लोगों का शौक अलग तरीके का होता है. जैसे ऐसे लोगों के दिमाग मे हमेशा यही चलता रहता है कि बाजार में ऐसी कौन सी वस्तु नई आई है जो किसी के पास नहीं है और उन्हें डर सताता है कि अगर वह वस्तु उन्हें न मिली तो वे दूसरे लोगों से पीछे रह जाएंगे.

महंगी वस्तुओं पर पैसे खर्च करना और बिना मतलब की चीजें खरीदना ताकि वे दुनिया से पीछे न छूट जाएं. वे उस वस्तु को किसी भी कीमत पर प्राप्त करना चाहते हैं ताकि वे दुनिया के साथ अपडेट रह सकें और सभी को सोशल व मीडिया पर शेयर करते रहें अगर आप में भी ऐसी कोई आदत है तो आप फोमो शौपिंग के शिकार हैं.

सोशल मीडिया फोमो यानी किसी भी समय सोशल मीडिया चलाते रहना. बहुत से लोगों को सोशल मीडिया का इतना शौक होता है कि वे कहीं भी हों उन का एक हाथ मोबाइल और सोशल मीडिया चलाने में बिजी रहता है. इस की वजह से कई बार लोग काफी अकेला, ईष्यालु और दुखी महसूस करते हैं. उन का ध्यान अपनी मीटिंग या काम पर कम हो कर अपने सोशल मीडिया की बारबार जांच करने में ज्यादा होता है. ऐसे लोग उस पल में न रह कर सोशल मीडिया की दुनिया में क्या हो रहा है जानने में लग जाते हैं. उन का सुबह से ले कर रात सोने तक का पूरा समय सोशल मीडिया के लिए ही होता है.

सोशल मीडिया फोमो समस्या का हल

  •  अपनी जिंदगी में होने वाली सकारात्मक बातों की लिस्ट तैयार करें.
  • ख़ुद की तुलना दूसरों से करना बंद कर दें. किसी के सोशल मीडिया पर खुश या रोमांचक फोटो को पोस्ट करने से यह गारंटी नहीं मिलती कि वह वास्तव में खुश और पूर्ण है.
  • सोशल मीडिया आप को एक काल्पनिक दुनिया में ले जाता है, जहां आप इस के साथ अपने जीवन की तुलना करना शुरू करते हैं. इस भावना से छुटकारा पाने के लिए सोशल मीडिया पर कम समय बिताएं.
  • अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा विराम लें. अपना समय आसपास के माहौल में जैसे प्रकृति, दोस्तों, परिवार के बीच बिताएं.
  • प्रकृति के करीब होने से आप का दिमाग शांत होता है और आप की चिंता को शांत करने में मदद मिलती है.
  • आप अपने घर की बालकनी और पेड़पौधों की देखभाल में भी वक्त बिता सकते हैं.

नोटिफिकेशन फोमो

स्मार्ट फोन पर रातदिन हर पल आते नोटिफिकेशन जहां हमें अपडेट रखते हैं वहीं साथ ही हमारे ध्यान को भटकाने का भी काम करते हैं और हमारी एकाग्रता को भंग करते हैं. साथ ही किसी भी काम के ऊपर कंसन्ट्रेशन होने ही नहीं देते हैं. ये अनावश्यक पुश अलर्ट परेशान कर देते हैं और हमें नोटिफिकेशन फोमो का शिकार बनाते हैं.

इस तरह के फोमो के शिकार लोगों को यह डर लगा रहता है कि कोई नोटिफिकेशन अलर्ट देखने में देर न हो जाए और हम कमैंट, लाइक या रिप्लाई करने में पीछे न छूट जाएं.

दम बिरयानी की बात ही अलग है

फेस्टिव टाइम के बाद अपनों के साथ फुरसत के लम्हे बिताने का आनंद ही और है, फिर ऐसे में अगर बेहतरीन स्वाद वाली बिरयानी लंच में मिल जाए तो दिन बन जाता है. मां भी तो ऐसा ही करती थी, पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पर बैठ कर मां के हाथों की बनी बेहतरीन बिरयानी का इंतजार करता था.

आप बिरयानी बनाएंगी तो सोचेंगी कि वो मां के हाथों का स्वाद कहां से लाएं और मसालों का संतुलन कैसे बनाएं. तो सनराइज़ का बिरयानी मसाला आपकी इस मुश्किल को आसान करेगा. इसमें है बिरयानी मसालों का ऐसा मिश्रण जो बिरयानी में जगा देगा मां के हाथों का स्वाद.

चिकन दम बिरयानी

सामग्री

1 किलोग्राम चिकन, 3 कप चावल, 2 चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, 3 प्याज कटे, 1 बड़ा टमाटर कटा, 3-4 हरीमिर्चें बीच से कटी, 2 चम्मच दही, 2 चम्मच सनराइज़ बिरयानी मसाला, थोड़ी सी हरी इलायची, तेजपत्ता, दालचीनी और लौंग, थोड़ा सा भुना प्याज, नमक स्वादानुसार, थोड़ा सा देशी घी, तेल जरूरतानुसार.

विधि

एक गहरे पैन में पानी उबाल कर उसमे चावल, 2 चम्मच नमक, लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता डालकर 80% तक पका लें. पक जाने पर स्ट्रेन कर अलग रख लें. इसी बीच चिकन, दही, थोड़ा सा सनराइज़ बिरयानी मसाला, थोड़ा सा नमक मिलाकर चिकन मैरीनेट कर लें. अब मोटी पेंदी वाले बर्तन में तेल गरम कर प्याज, हरीमिर्चें, अदरक-लहसुन का पेस्ट भूनें. भुन जाने पर चिकन इसमे अच्छी तरह मिक्स करें. अब सनराइज़ बिरयानी मसाला, नमक और टमाटर मिलाएं. सब अच्छी तरह मिक्स कर मध्यम आंच पर चलाते हुए चिकन 90% तक पका लें. पक जाने पर थोड़ा चिकन बर्तन में छोड़ कर बाकी निकाल लें. अब बचे चिकन के ऊपर चावल की लेयर लगाएं. फिर से चिकन की लेयर लगा कर चावल की लेयर से कंप्लीट करें. ऊपर से भुना प्याज और देशी घी डालें. बर्तन के किनारों पर आटे की लोई लगाकर ढक्कन को सील करें. धीमी आंच पर 30 मिनट तक बिरयानी में दम लगाएं. तैयार बिरयानी सलाद और रायते के साथ परोसें.

जब सताने लगे बेवफाई

लास एंजिल्स में छपी एक खबर के अनुसार पीटरसन नामक एक पति ने अपनी 8 माह से गर्भवती पत्नी लकी की हत्या कर दी. कई दिनों तक उस के न दिखने पर लकी के सौतेले पिता ने पुलिस में रिपोर्ट कराई. उस के तहत एक लड़की से पता चला कि पीटरसन का उस लड़की के साथ अफेयर था. वह उस लड़की के साथ शादी करना चाहता था. और वह लड़की पीटरसन को अभी तक अविवाहित सम?ा रही थी.

पीटरसन की सास रोचा कहती है कि अपनी बेटी के कत्ल के बावजूद उसे अपने दामाद से तब तक हमदर्दी थी जब तक उसे यह पता नहीं था कि पीटरसन का किसी अन्य लड़की के साथ अफेयर है. लेकिन जब से उसे पीटरसन के अपनी बेटी से बेवफाई के बारे में पता चला है उस ने अदालत में चीखचीख कर यह गुहार की कि उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए. पीटरसन के मातापिता को भी उस के शादीशुदा अफेयर के बारे में सुन कर अच्छा नहीं लगा.

राजामहाराजाओं के जमाने में पुरुषों को बेवफाई का जन्मसिद्ध अधिकार था, जबकि किसी स्त्री के ऐसा करने पर गांव, महल्ले, सगेसंबंधी कुलटा आदि कह कर सभी उस का जीना हराम कर देते थे.

रामायण की धोबन का हश्र याद होगा जिस के कारण मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने भी सारी मर्यादाओं को लांघ कर सीता को वन में छुड़वा दिया था. धोबी को उस धोबन पर शक केवल इसलिए हुआ कि वह रात को घर पर नहीं थी. भले ही बेवफाई हुई हो या न हुई हो. राम ने धोबन को बचाने की या उस की सुनने की भी कोशिश की हो, ऐसा रामायण में कहीं जिक्र नहीं है. धोबन और सीता दोनों ही अकारण घर से निकाल दी गईं.

मगर जब से स्त्री के अधिकारों की बात शुरू हुई तब से पुरुषों के इस अधिकार पर थोड़ा सा अंकुश लगा तो दूसरी तरफ स्त्रियों ने इस तरह के रिलेशंस बनाने शुरू कर दिए. अमेरिका में हुई एक रिसर्च के अनुसार 70% शादीशुदा पुरुष और 50% शादीशुदा महिलाएं विवाहेतर संबंध बनाती हैं, जिन में कुछ बन नाइट स्टैंड होते हैं यानी एक रात भर सोए और फिर भूल गए.

यहां भावनाओं का कोई मतलब नहीं. वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जो बनाए ही भावनात्मक सुरक्षा के लिए जाते हैं जोकि घनिष्ठ और लंबे समय तक चलते हैेें. बहरहाल चाहे लंबे समय के लिए हो या 1-2 घंटों के लिए ही सही बेवफाई बेवफाई होती है.

सगेसंबंधियों पर प्रभाव: हमारे देश में इस संबंध का न सिर्फ पतिपत्नी, बच्चों पर बल्कि आप के मातापिता, सगेसंबंधी, अविवाहित भाईबहनों आदि पर भी पड़ता है. उन्हें व्यर्थ सजा मिलती है.

  •   बाहर वालों के तानों की शर्मिंदगी परिवार में सभी को उठानी पड़ती है.
  • अगर बेवफाई स्त्री ने की है तो अविवाहित बहन या भतीजी की तुलना उस के साथ की जाने लगती है और शादीविवाह में कठिनाई पैदा हो जाती है.
  • बच्चों को मातापिता के बीच चल रहे मनमुटाव के साथसाथ बाहर वालों की अजीब नजरों का भी सामना करना पड़ता है जिस के काफी गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ते हैं.

बेवफाई करने वाले पर प्रभाव

  •  बेवफा व्यक्ति घर वालों और बाहर वालों की नजरों में गिर जाता है.
  • घर वालों के सहयोग की उम्मीद इस मामले में कभी नहीं कर सकते.
  • हर वक्त अनुचित रिश्ते को छिपाने के लिए नएनए झूठ बोलने पड़ेंगे.
  • इन अवैध संबंधों में अगर बच्चे भी हैं तो जायज के साथसाथ नाजायज बच्चे भी इज्जत से नहीं देखेंगे.

दूर से देखनेसुनने में भले ही लगे कि पश्चिमी देशों में इस तरह के रिश्तों पर कोई आपत्ति नहीं होती जबकि सचाई यह है कि विवाहेतर संबंध कहीं भी किसी भी समाज में उचित नहीं माने गए हैं. इस का बहुत बड़ा उदाहरण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और मोनिका लेवेंस्की के संबंध जिन की आलोचना दुनियाभर में की गई.

भले ही कितनी ही स्त्रियों के साथ क्लिंटन के संबंध रहे हों लेकिन देश और समाज में सिर उठा कर चलने के लिए उन्हें अपनी पत्नी हिलेरी क्लिंटन की ही जरूरत थी. हिलेरी क्लिंटन को भी इस जहर को पीना पड़ा पर उन्हें राष्ट्रपति पद जनता ने नहीं दिया. वे राष्ट्रपति का चुनाव हार गई थीं.

थेरैपिस्ट या काउंसलर भी विवाहेतर संबंधों के बारे में यही राय देते हैं कि अगर इन के बिना नहीं रह सकते तो तलाक ले लें.

असलियत में कोई भी बेवफा व्यक्ति न तो अपनी शादी को तोड़ना चाहता है क्योंकि सगेसंबंधी इस की इजाजत कभी नहीं देते और न ही इस विवाहेत्तर रिश्ते को खत्म करना चाहता है. दूसरा घर बसाना और सगेसंबंधियों को छोड़ना कोई आसान काम नहीं. फिर यह भी जरूरी नहीं कि जिस के साथ आप के संबंध हैं वह आप से विवाह के लिए राजी ही हो क्योंकि उस के लिए भी घर तोड़ना, सगेसंबंधियों के खिलाफ जाना आसान नहीं. इस तरह के रिश्ते आमतौर पर खतरनाक साबित होते हैं. बेवफाई खतरनाक होती है. इस समस्या का मैसेज एक वैबसाइट पर एक काउंसलर के पास आया-

डियर आंट वैबी मैं जानती हूं कि इस शर्मनाक गलती के लिए मुझे चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए, फिर भी आप की राय चाहती हूं. मैं ने अपनी 6 साल की शादीशुदा जिंदगी में पहली बार एकदूसरे पुरुष के साथ संबंध बनाए हैं और उस के प्रेम में बेहद पागल हूं. मेरे पति जोकि मुझे बेहद प्यार करने वाले, अच्छे और आदर्श पुरुष हैं, उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता. मैं जानती हूं कि जिस दिन उन्हें इस बात का पता चलेगा उन का विश्वास टूट जाएगा.

इस दूसरे पुरुष के लिए मैं अपने बेहद अच्छे पति को छोड़ने के लिए भी तैयार हूं. लेकिन यह नहीं जानती कि वह भी मुझ से शादी करेगा या नहीं. वह एक बहुत अच्छे, भरेपूरे परिवार से है और 4 बच्चों का बाप है. मेरे अपना कोई बच्चा नहीं है. मैं यह भी जानती हूं कि एक बेहद अच्छा पति होने के बावजूद किसी दूसरे शादीशुदा मर्द के चक्कर में पड़ना समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा. प्लीज, आप मुझे इस अफेयर को खत्म करने की सलाह न दें बल्कि यह बताएं कि मैं इस अफेयर को कंटीन्यू क्यों रखना चाहती हूं.

वोदका गर्ल इस अजीब समस्या का अंजाम परिवार के टूटनेबिखरने के अलावा कुछ नहीं हो सकता क्योंकि बीवी परपुरुष के साथ अपने संबंधों को खत्म नहीं करना चाहती और ऐडवाइजर को भी यही कह रही है कि इस रिश्ते को खत्म करने की सलाह न दें. यानी जानबू?ा कर आग से खेलने का शौक है मैडम को.

इन्हीं मैडम की तरह कुछ लोग पति या पत्नी की बेवफाई के बावजूद अपने पजैसिव नेचर की वजह से छोड़ना नहीं चाहते और बेवफाई से भी बाज नहीं आते यानी उन्हें दोनों हाथों में लड्डू चाहिए.

हौंगकौंग में लिऊयांग नामक एक व्यक्ति ने अपनी सास का सिर काट डाला और उसे ले कर पुलिस स्टेशन पहुंच गया. चीन के स्थानीय समाचारपत्र साउथ मौर्निंग पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस व्यक्ति ने अपनी सास की हत्या इसलिए की क्योंकि पतिपत्नी के बीच चल रही बेवफाई के कारण सास अपनी बेटी को तलाक के लिए भड़का रही थी.

बेवफा व्यक्ति अपने विवाहित जीवन के साथ विवाहेतर संबंधों को सहेजने की लाख कोशिश करे लेकिन इन सब का एक ही अंत होता है, जो कभी सुखद नहीं होता. इस तरह के संबंधों से बेवफा व्यक्ति थोड़े समय के लिए भले ही मानसिक या शारीरिक सुख प्राप्त कर ले लेकिन बोनस में जीवन भर की टैंशन भी ले लेता है.

अबौर्शन पिल खतरा भी कम नहीं

हाल के वर्षों में आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक विकास और बेहतर जीवनस्तर के साथसाथ सैक्सुअल रिलेशनशिप में भी स्वतंत्रता आई है, जिस कारण शादी से पहले प्रैगनैंसी की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. एक सर्वे के मुताबिक 15त्न पुरुषों और 4त्न महिलाओं ने शादी से पहले संबंधों को स्वीकार किया है.

भारत जैसे कंजरवेटिव देश में जहां अपनी सामाजिक और पारंपरिक पृष्ठभूमि के चलते किसी भी सामाजिक बदलाव को सिरे से नकार दिया जाता है में शादी से पहले शारीरिक संबंधों और प्रैगनैंसी को स्वीकार नहीं किया जाता. खासकर लड़कियों के लिए. सैक्सुअली ऐक्टिव होने के कारण लड़कियां शादी से पहले प्रैगनैंट हो रही हैं, जिस के चलते वे समाज और मातापिता के डर से इंस्टैंट प्रैगनैंसी रोकने के लिए ऐसी दवाइयां खा रही हैं जो उन की जान के लिए जोखिम पैदा कर रही है.

बिना किसी मैडिकल जानकारी और डाक्टर की सलाह के लड़कियां इन गोलियों को खा कर अपने स्वास्थ्य को बिगाड़ रही हैं.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अबौर्शन या गर्भपात न केवल आप को शारीरिक रूप से बल्कि भावनात्मक तौर पर भी तोड़ कर रख देता है. गर्भपात कराने वाली दवाएं आसानी से मैडिकल स्टोर्स पर मिल जाती हैं और ज्यादतर लड़कियां इन्हें बिना किसी डाक्टर की सलाह के खा लेती हैं जो बाद में उन के लिए खतरा बन जाती हैं. इन का प्रभाव उन के स्वास्थ्य से ले कर भविष्य में होने वाली प्रैगनैंसी तक पड़ता है.

कौन सी है दवाइयां

महिला रोग विशेषज्ञ के मुताबिक प्रैगनैंसी को टर्मिनेट या गर्भ को खत्म करने के लिए जिन अबौर्शन पिल्स का इस्तेमाल किया जाता है उन्हें एमटीपी किट के नाम से जाना जाता है. एमटीपी किट 2 दवाओं का मिश्रण है. मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल दवाओं से मिल कर यह बनती है. ये दवाइयां अबौर्शन के शौर्टकट के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं, इन्हें प्रैगनैंट महिलाएं बिना इन के साइड इफैक्ट के बारे में जाने आसानी से ले लेती है. इन्हें खाने के बाद सब का शरीर अलगअलग प्रतिक्रिया करता है.

ये दवाइयां महिला के शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं. यदि महिला किसी स्वास्थ्य समस्या से पहले ही लड़ रही है तो उस के लिए ये और भी मुश्किलें पैदा कर सकती हैं जैसे अगर उसे ऐनीमिया है यानी वह खून की कमी से जू?ा रही है तो डाक्टरों द्वारा अबौर्शन कराने वाली पिल्स से दूर ही रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये ऐनीमिया के रोगियों के लिए खतरनाक हो सकती हैं.

समाधान नहीं समस्या भी भी हैं पिल्स

एमटीपी किट के इस्तेमाल से नजर प्रभावित हो सकती है. ऐसे मरीज जिन्हें किडनी से जुड़ी कोई बीमारी हो उन्हें इन गोलियों का इस्तेमाल करने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. इन्हें लेने के कुछ ही समय बाद अत्यधिक मात्रा में ब्लीडिंग होती है. गर्भपात कराने वाली पिल्स लड़कियों और महिलाओं के शरीर में बन रहे प्रैगनैंसी हारमोन प्रोजेस्टेरौन के उत्पादन को बंद कर देती हैं. इस कारण भ्रूण गर्भाशय से अलग हो कर बाहर आने लगता है. गर्भाशय का संकुचन ब्लीडिंग को बढ़ा देता है. ये ब्लीडिंग कई बार अत्यधिक मात्रा में होती है जिसे डाक्टर के बिना रोक पाना मुश्किल हो जाता है. यह कुछ दिनों, हफ्तों से ले कर 1 महीने तक हो सकती है.

इन गोलियों को खाने से पेट में दर्द और ऐंठन होती है. दर्द पीरियड्स में होने वाले दर्द के समान या उस से भी कई गुना ज्यादा दर्द होता है. शरीर से भारी मात्रा में रक्त और दूसरे द्रव लगातार निकलते रहते हैं. इसलिए पेट, पैरों और शरीर के कई हिस्सों में ऐंठन हो सकती है.

जी मिचलाना, दस्त, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी परेशानियां आम हैं. लेकिन हैल्थ कंडीशन के अनुसार ये कम या ज्यादा भी हो सकते हैं. हालात ज्यादा खराब भी हो सकते हैं. कभीकभी बुखार भी आ सकता है.

कुछ मामलों मे ऐसा होता है कि गोली के असर से भ्रूण पूरी तरह बाहर नही आ पाता. ऐसे में सर्जरी तक करानी पड़ जाती है.

कभीकभी परेशानी काफी हद तक बढ़ जाती है. डाक्टरों के मुताबिक, प्रैगनैंसी के कुछ मामले ऐसे होते है जिस में भ्रूण महिला की फैलोपियन ट्यूब में ही फंस कर रह जाता है जिसे इक्टोपिक प्रैगनैंसी कहा जाता है. फैलोपियन ट्यूब महिला के शरीर में अंडाशय और गर्भाशय को आपस में जोड़ती है. ऐसा होने की स्थिति में पिल्स लिए जाने पर ब्लीडिंग के टिशू निकलते हैं, जिस की वजह से फैलोपियन ट्यूब की दीवारों को नुकसान पहुंचने और कई बार ट्यूब फटने तक का खतरा पैदा हो जाता है. इस स्थिति में बेहद दर्द और खून का रिसाव होने लगता है.

अगर तुरंत सर्जरी न कराई जाए तो जान भी जाने का खतरा रहता है. इससे बचने के लिए इक्टोपिक प्रैगनैंसी का पहले ही पता होना आवश्यक है जो अल्ट्रासाउंड से लगाया जाता है क्योंकि डाक्टर इक्टोपिक प्रैगनैंसी के लक्षण दिखने पर अबौर्शन पिल्स लेने से इनकार कर देते हैं.

क्या है कारण

भारत जैसे देश में यह समस्या गंभीर है जहां लड़कियों को घर की इज्जत का जिम्मा जबरदस्ती सौंप दिया जाता है. ऐसे में गर्भवती होने पर लड़कियां शर्म और डर के कारण बिना किसी को बताए इस तरह की पिल्स का सेवन कर लेती हैं. स्थिति की गंभीरता इसी बात से आंकी जा सकती है की शादी से पहले गर्भवती होने के बजाय उन्हें मर जाने तक की सलाह दी जाती है. घर में वे हिंसा का शिकार होती हैं और कितनी ही बार डिप्रैशन के कारण आत्महत्या तक कर लेती हैं. ऐसे में लड़कियां यदि गर्भवती हो जाती हैं तो वे बिना सोचेसमझे अपनी जान जोखिम में डालने को तैयार रहती हैं.

डाक्टर के पास जाना तो दूर वे किसी को बताना तक नही चाहतीं. ऐसे में वे अबौर्शन के ऐसे अनसेफ तरीके आजमाती हैं. आकडे़ बताते हैं भारत में रोजाना लगभग 13 महिलाएं अनसेफ अबौर्शन के कारण मृत्यु का शिकार होती हैं. लगभग हर साल करीब 6.4 मिलियन गर्भपात होते हैं. अनसेफ अबौर्शन देश में मातृ मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है जो सालाना होने वाली मौतों का 8त्न है.

कई बार अबौर्शन कराना भी महिलाओं के लिए मुश्किल हो जाता है क्योकि 80त्न महिलाएं यह तक नहीं जानतीं कि भारत में अबौर्शन लीगल है और उन्हें कोई भी इस के लिए रोक नहीं सकता और न ही अस्पतालों और अबौर्शन की सुविधा देने वाली संस्थाएं इस के लिए मना कर सकती हैं मगर अज्ञानतावश वे हौस्पिटल नहीं जातीं.

सुविधाओं का अभाव भी अनसेफ अबौर्शन के तरीके अपनाने का कारण रहा है. लगभग 70त्न पब्लिक या सार्वजनिक कहे जाने वाले क्षेत्र सुरक्षित गर्भपात की सुविधा उपलब्ध कराते हैं जबकि केवल 30त्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जो महिलाओं की पहली पहुंच हैं ये सेवाएं उपलब्ध कराते हैं और यंग लड़कियां जिन की शादी नहीं हुई है इन केंद्रों पर जाने से डरती हैं क्योंकि स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टर लड़कियों को अपने पेरैंट को लाने के लिए कहते हैं, जिस से बचने के लिए लड़कियां छिप कर अबौर्शन पिल्स का इस्तेमाल कर लेती हैं.

जबकि मैडिकल टरमिनेशन औफ प्रैगनैंसी ऐक्ट 1971 किसी भी महिला को जो माइनर नहीं है यानी बालिग है को अबौर्शन का अधिकार देता है, जिस में उसे किसी की भी परमीशन की जरूरत नहीं है बाशर्ते गर्भ 24 सप्ताह से कम का हो. तब कोई भी स्वास्थ्य केंद्र उसे इस के लिए मना नहीं कर सकता.

2022 में एक केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन की स्वायतता गरिमा और गोपनियता का अधिकार एक अविवाहित महिला को यह हक देता है कि वह विवाहित महिला के समान बच्चे को जन्म दे या नहीं. लेकिन उस के बाद भी अस्पतालों में अविवाहित महिला को किस तरह ट्रीट किया जाता है इस का अंदाजा आप लगा सकते हैं.

20 वर्षीय सुनीता बदला हुआ नाम एक विद्यार्थी है. प्रैगनैंसी का पता लगने पर अपने बायफ्रैंड के साथ हौस्पिटल जाती है. बालिग होने के बाद भी हौस्पिटल के डाक्टर और स्टाफ द्वारा उस से तरहतरह के सवाल किए जाते हैं जिन का जवाब वह अपनी निजता को गोपनिय रखने के लिए नहीं देना चाहती. जानकारी के अभाव में उसे इस तरह के सवालों का सामना करना पड़ता है.

इस तरह के क्रिमिनल ट्रायल भी लड़कियों को सेफ अबौर्शन छोड़ कर ऐसी अबौर्शन पिल्स लेने के लिए मजबूर करते हैं. लेकिन इस का जिम्मेदार कौन है?

समाज की हिस्सेदारी

समाज का दोतरफा रवैया यहां भी दिखाई देता है. जहां समाज एक तरफ पुरुषों को महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाने के

लिए खुला छोड़ देता है वहीं वह एक महिला को उसी पुरुष के कारण गर्भवती होने पर अपनाने से इनकार कर देता है. उस से उत्पन्न संतान को नाजायज औलाद कह कर त्याग देता है. उस महिला को बदचलन, चरित्रहीन और न जाने किनकिन नामों से पुकारा जाता है. लेकिन ऐसा कोई नाम उस पुरुष को दिया गया हो दिखाई नहीं देता.

हद की बात तो तब होती है जब वह पुरुष जो महिला के साथ यौन संबंध बनाने के लिए तो तैयार है लेकिन गर्भवती होने पर उसे नजरअंदाज कर देता है, उस का साथ देने से इनकार कर देता है और कितनी ही बार पुरुष को मातापिता और समाज के दबाव में आ कर ऐसा करना पड़ता है.

समाज के ठेकेदारों के मुंह से लड़के हैं गलतियां हो जाती हैं जैसी बातें तो पुरुषों के लिए आसानी से सुनी जा सकती हैं पर लड़कियों के लिए ये भाव उन के दिल से कहां नदारद हो जाते हैं, सम?ा नहीं आता. आखिर उन्हें इस स्थिति में पहुंचाने वाले तो पुरुष ही हैं. यह समाज शादी से पहले लड़की के साथ यौन संबंधों पर आपत्ति जताता है पर शादी में होने वाले रेप पर अपनी चुप्पी साधे रखता है. यहां तक कि कानून भी इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखता. दुनिया के 185 देशों में से 77 देश स्पष्ट रूप से वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में रखते हैं, जबकि केवल 34 देश ऐसे हैं जो स्पष्ट रूप से वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी से बाहर मानते हैं. भारत उन 34 देशों में से एक है.

बिनब्याही मां बनने को समाज सिरे से नकार देता है. उसे घरपरिवार पर लगे एक कलंक की तरह देखता है. इसे एक टैबू की तरह लिया जाता है. स्थिति इस हद तक गंभीर होती है कि उसे परिवार और समुदाय द्वारा आउटकास्ट कर दिया जाता है. स्कूलों तथा नौकरियों तक में उस के साथ भेदभाव किया जाता है.

2000 में आई मूवी ‘क्या कहना’ इस बात को बहुत अच्छे से दिखाती है. जहां राहुल पिया को प्रैगनैंट होने के बाद छोड़ देता है. उस के बाद पिया और उस के परिवार को समाज का क्या रवैया ?ोलना पड़ता है, फिल्म इसे बहुत ही सटीक तरीके से प्रदर्शित करती है.

23 साल बीत चुके हैं लेकिन भारतीय समाज में कुछ परिवर्तन हुआ हो ऐसा नहीं कहा जा सकता. अनसेफ अबौर्शन के कारण होने वाली मौतें इसी बात की पुष्टी करती हैं. यह तसवीर कब बदलेगी, बदलेगी भी या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता.

क्या हमें एक समाज के रूप में इस बात पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है? क्या हमें अपनी बेटियों के लिए थोड़ा संवेदनशील और सहनशील होने की जरूरत नहीं जैसे हम बेटों के लिए हैं ताकि इन मौतों का आंकड़ा कम किया जा सके?

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें