सफर का शौक: क्या सोनल के सपने हकीकत बन पाए

अपनी सहेलियों आंचल, कावेरी और वंदना के साथ सोनल कालेज के लौन में आ कर बैठी ही थी कि आंचल ने अपने बैग से एक किताब निकाली और सब को दिखाते हुए बोली, ‘‘यह जानेमाने पामिस्ट कीरो की किताब है. इसे मैं ने कुछ दिनों पहले खरीदा था. इस किताब को पढ़ कर मैं भी कीरो से कम नहीं हूं. आप में से कोई अपना हाथ दिखा कर अपना भविष्य जानना चाहता है, तो आज यह सेवा बिलकुल फ्री है.’’

सोनल की सहेलियों ने फौरन अपने हाथ आंचल के सामने बढ़ा दिए.

कावेरी और वंदना की हथेली देखने के बाद आंचल, सोनल की हथेली देख कर बोली, ‘‘तेरी लव मैरिज होगी.’’

लव मैरिज के नाम पर सोनल का अजीब सा मुंह बन गया. वह बोली, ‘‘आंचल, तेरी यह भविष्यवाणी बिलकुल झूठी निकलेगी. तू तो हमारे घर के हालात जानती ही है. मेरे मम्मीपापा मुझे कालेज भेज रहे हैं, तो यह उन की ओर से मेरे लिए बहुत बड़ी आजादी है. देख लेना, जैसे ही मेरी पढ़ाई पूरी होगी वे मेरी शादी कर देंगे.’’

‘‘लेकिन मुझे लगता है कि मेरी यह भविष्यवाणी झूठी नहीं निकलेगी. अपनी

शादी के बाद तू बहुत लंबेलंबे सफर करेगी और ये सफर मामूली न हो कर विदेश से संबंधित होंगे.’’

‘‘वाह, यह की न तू ने दिल को खुश करने वाली बात,’’ सोनल खुशी से झूमते हुए बोली. फिर एकाएक उस का चेहरा बुझ गया. वह मायूस हो कर बोली, ‘‘आंचल, तेरी यह भविष्यवाणी भी झूठी निकलेगी. मैं ने तो अभी अपने दिल्ली शहर को ही पूरी तरह से नहीं देखा है, जबकि तू मेरे विदेशों में घूमने की बात कर रही है.’’

‘‘तू दिल छोटा मत कर. तू बस यह जान ले कि तेरे विदेश घूमने को कोई रोक नहीं सकता.’’

इतने में अगले पीरियड की घंटी बज गई और वह चौकड़ी अपनी क्लास की तरफ बढ़ गई.

फाइनल परीक्षा के बाद वे सब बिछड़ गईं.सोनल ने पढ़ाई छोड़ कर घर की जिम्मेदारी संभाल ली, क्योंकि उस के मातापिता उसे आगे पढ़ाने के हक में नहीं थे. आंचल और वंदना ने आगे पढ़ने के लिए यूनिवर्सिटी जौइन कर ली, जबकि कावेरी की शादी हो गई.

वक्त गुजरता गया, सोनल आंचल की वे बातें, जो उस ने हाथ देख कर बताई थीं, खासतौर पर सफर करने वाली बात न भूली थी. दरअसल, वह ख्वाबोंखयालों की दुनिया में खोई रहने वाली लड़की थी. वह हरदम सपनों के सुनहरे तानेबाने बुनती रहती और हर पल किसी ऐसे शहजादे का इंतजार करती, जो खूब ऊंची पोस्ट पर हो और वह उस के संग हवाओं में उड़े और खूब घूमे.

एक दिन शाम को सोनल अपनी किसी सहेली से मिल कर आई तो उस की छोटी बहन पूजा ने उसे बताया, ‘‘अब आप दुलहन बनने की तैयारी शुरू कर दीजिए. पड़ोस की चाची आप के लिए बहुत अच्छा रिश्ता लाई हैं, जो मम्मीपापा को भी पसंद आ गया है.’’

यह सुनते ही सोनल उमंगों से भर उठी. लेकिन अगले ही पल जब पूजा ने बताया कि उस का होने वाला पति एक सरकारी महकमे में क्लर्क है, तो उस के अरमानों पर जैसे पानी फिर गया हो.

उसे यह रिश्ता बिलकुल पसंद नहीं आ रहा था, मगर उस के लाख रोनेपीटने पर भी उस की एक न सुनी गई. उस के मम्मीपापा इतने बेवकूफ नहीं थे कि इतने अच्छे रिश्ते को हाथ से जाने देते. फिर उस की दूसरी बहन भी शादी लायक हो रही थी. उन्हें उस की भी फिक्र थी.

सोनल विवाह के बाद अपनी ससुराल आ गई. शुरूशुरू में उसे लगा कि उस की तमाम ख्वाहिशों का गला घोट दिया गया है पर विनय उस की उम्मीदों के खिलाफ उसे बहुत प्यार करने वाला पति साबित हुआ. बिलकुल ख्वाबों के शहजादे की तरह. फर्क सिर्फ इतना था कि वह उस के साथ सैरसपाटे पर नहीं जा सकता था, क्योंकि हालात उसे इजाजत नहीं देते थे. इधर सोनल ने भी वक्त के साथ समझौता कर लिया.

एक दिन सोनल पड़ोस में रहने वाली मिसेज मेहरा से मिलने गई तो वे उसे बहुत खुश दिखाई दीं.

‘‘मिसेज मेहरा, आज आप बड़ी खुश दिखाई दे रही हैं?’’

‘‘बात ही कुछ ऐसी है सोनल,’’ मिसेज मेहरा खुशी से झूमते हुए बोलीं, ‘‘असल में मेहरा साहब औफिस के काम से पैरिस जा रहे हैं, मैं भी उन के साथ जाऊंगी. कितना मजा आएगा पैरिस घूमने में.’’

‘‘बहुतबहुत मुबारक हो,’’ सोनल ने मिसेज मेहरा को बुझे मन से बधाई दी और उन के लाख रोकने के बाद भी अपने घर आ गई.

शाम को विनय औफिस से घर लौटा, तो वह चुपचुप सी थी.

‘‘क्या बात है सोनल, बड़ी खामोश हो? आज तुम ने मुसकरा कर वैलकम डियर भी नहीं कहा.’’

विनय का इतना ही कहना था कि जो लावा सोनल के दिल में कई दिनों से उबल रहा था, वह एकदम फट पड़ा.

वह बोली, ‘‘आप कोई अच्छी जौब नहीं देख सकते क्या, जिस में घूमनेफिरने के चांस हों?’’

‘‘अरे, इतनी सी बात पर तुम खफा हो गईं,’’ विनय मुसकरा कर बोला, ‘‘असल में मैं कई दिनों से बिजी रहा, इसलिए तुम्हें कहीं घुमाने नहीं ले जा सका. नो प्रौब्लम. तुम तैयार हो जाओ. हम अभी तुम्हारे पसंदीदा हीरो शाहरुख खान की फिल्म देखने चलते हैं.’’

‘‘मुझे फिल्मविल्म देखने नहीं जाना,’’ वह गुस्से से बोली.

‘‘फिर?’’

‘‘विनय, क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम किसी सफर पर चलें. एक लंबा सा सफर… फौरेन का न सही, अपने देश का ही सही. पता है, मिसेज मेहरा अपने पति के साथ पैरिस जा रही हैं.’’

‘‘तुम भी क्या बात करती हो. अपने हालात तो तुम अच्छी तरह से जानती हो. मैं मिस्टर मेहरा की तरह ऊंची पोस्ट पर नहीं हूं. हमारे हालात ऐसे खर्चों की इजाजत नहीं देते.’’

‘‘मैं फौरेन टूर पर जाने के लिए नहीं

कह रही.’’

‘‘ऐसी बात है तो मैं कोशिश करूंगा कि कुछ रकम का इंतजाम हो जाए. फिर मैं तुम्हें पूरी दिल्ली घुमा दूंगा. उस के बाद मैं तुम्हें तुम्हारे मायके छोड़ दूंगा, वहां तुम कुछ दिन रह लेना. तुम्हारा दिल भी बहल जाएगा.’’

‘‘नहीं, मुझे दिल्ली नहीं घूमना और न ही मुझे अपने घर जाना.’’

‘‘फिर?’’

‘‘क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम कुछ दिनों के लिए शिमला और कुफरी घूम आएं?’’

‘‘होने को क्या नहीं हो सकता, लेकिन इस के लिए मुझे अलग से मेहनत कर के कुछ पैसों का इंतजाम करना पड़ेगा. अब तुम ने जब घूमने का फैसला कर ही लिया है, तो मैं तुम्हें रोकने वाला कौन होता हूं. तुम कुछ दिन इंतजार करो. 1-2 महीने मैं पार्टटाइम काम कर के पैसों का इंतजाम कर लूंगा. अब तो खुश हो जाओ,’’ कहते हुए विनय ने उस के केश बिखेर दिए.

‘‘सच, तुम कितने अच्छे हो,’’ सोनल उस के कंधे पर सिर टिका कर ख्वाबों की दुनिया में पहुंच गई.

फिर विनय बहुत व्यस्त हो गया. वह सुबह का गया देर रात को घर आता और खाना खा कर बेसुध हो कर सो जाता. सोनल भी घर के खर्चों में कमी की कोशिश करती रहती. कुछ दिनों बाद उन के आंगन में एक फूल खिला और जोड़जोड़ कर जमा की हुई सारी रकम डिलीवरी के खर्चे में खत्म हो गई और सोनल की ख्वाहिश पूरी न हो सकी.

जब कभी उन के पास इतने पैसे हो भी जाते कि वे कहीं घूमफिर आएं और अपनी इस ख्वाहिश को पूरा कर सकें, तो कोई न कोई ऐसा मसला आ खड़ा होता, जिस में जोड़ी रकम खर्च हो जाती और वे कहीं घूमने न जा पाते.

उस दिन वह अपने बेटे अरमान के साथ पास के शौपिंग मौल में गई तो उस का सामना आंचल से हो गया. उसे देखते ही कई पुरानी यादें ताजा हो गईं.

वह आंचल को अपने साथ अपने घर ले आई. बातोंबातों में उस ने उस से पूछा, ‘‘आंचल, याद है कालेज में तू ने एक बार मेरा हाथ देख कर बताया था कि शादी के बाद मैं कई सफर करूंगी. मेरी शादी को 2 साल हो गए, लेकिन मैं आज तक कहीं घूमने नहीं गई. तेरी यह भविष्यवाणी तो गलत निकली.’’

‘‘मेरी भविष्यवाणी को झूठ निकलना ही था,’’ आंचल मुसकरा कर बोली.

‘‘मतलब?’’

‘‘मतलब यही मेरी बिल्लो रानी कि उस दिन मैं ने तुम लोगों से सरासर झूठ बोला था. यह बात सच है कि मैं उन दिनों हाथों की लकीरें देख कर भविष्य बताने वाली किताब जरूर पढ़ रही थी, लेकिन वह सरासर बकवासबाजी थी. भला ऐसा भी कहीं होता है कि आदमी मेहनतमशक्कत न करे और तकदीर उसे बैठेबिठाए सब कुछ दे दे.’’

सोनल को ऐसा महसूस हुआ जैसा आंचल ने यह बात कह कर उस के माथे पर वजनी हथौड़ा दे मारा हो. कई पलों तक तो वह आंचल को फटीफटी निगाहों से देखती रही.

‘‘तो उस दिन तू ने जो कुछ कहा था वह सब अपने मन से कहा था?’’

‘‘और नहीं तो क्या. उस दिन मुझे बेवकूफ बनाने के लिए कोई नहीं मिला था, इसलिए मैं ने तुम लोगों से तुम्हारे हाथ देखने के बहाने सब कुछ झूठ बोला था.’’

बरसों से सफर के बारे में देखे गए उस के सपने ताश के महल की तरह ढह गए. उसे एकएक कर के वे तमाम बातें याद आने लगीं, जो उस ने सफर के लिए सोची थीं. विनय का पार्टटाइम जौब करना. उस का घरेलू खर्चों में कंजूसी की हद तक तंगी करना और दिनरात सफर के सपने देखना.

‘‘आंचल, तू सच में बहुत बुरी है,’’ वह शिकायत भरे स्वर में बोली, ‘‘तू नहीं जानती, तेरे इस झूठ ने मुझे कितनी तकलीफ पहुंचाई है. काश, तू ने मुझ से ऐसा झूठ न बोला होता.’’

‘‘अरे यार, तू मेरे इस झूठ को इतनी संजीदगी से लेगी, मुझे पता न था. वरना मैं ऐसा मजाक तेरे साथ कभी न करती. वैसे एक बात बता दूं कि आदमी को हाथों की लकीरों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए. यह भी हो सकता है कि तेरे लिए अचानक सफर का चांस निकल आए. अभी तू ने अपने जीवन के ज्यादा वसंत थोड़े ही देखे हैं. मेरी बात मान, जब कुदरत को तुझे घुमाना मंजूर होगा, वह अपनेआप तेरे सामने कोई न कोई रास्ता निकाल देगी. तू आज से ही सफर की ख्वाहिश अपने दिल से निकाल फेंक और अच्छी पत्नी की तरह अपने पति की खिदमत और बेटे की अच्छी परवरिश में जुट जा. क्या पता, कल को तेरा बेटा ही तुझे दुनिया भर की सैर करा दे.’’

सोनल को ऐसा महसूस हुआ जैसे उस के हृदय से बोझ हट गया हो. आंचल के जाने के बाद उसे अपनी गलती का एहसास होने लगा.

‘मैं भी कितनी पागल थी,’ वह सोचने लगी, ‘कभी न पूरी होने वाली ख्वाहिश के पीछे दौड़ती रही. खुशफहमियों के जाल में जकड़ी रही. लेकिन शुक्र है कि अब मैं उस से निकल आई हूं. विनय ने मेरी फुजूल सी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए खुद पर कितना बोझ बढ़ा लिया है.’

शाम को जैसे ही विनय के घर आने का समय हुआ, उस ने कपड़े बदले, केशों की ढीली सी चोटी बनाई, आंखों में काजल लगाया और हलकी सी लिपस्टिक लगा कर आंगन में आ गई. वहां से फूल तोड़ कर केशों में लगा लिया और गुनगुनाती हुई विनय के आने का इंतजार करने लगी.

थोड़ी देर बाद विनय घर आया तो सोनल पर निगाह पड़ते ही वह चहके बिना नहीं रह सका, ‘‘क्या बात है, आज कहां बिजली गिराने का इरादा है?’’

‘‘कहीं नहीं,’’ सोनल मुसकरा कर बोली.

‘‘इस का मतलब यह शृंगार हमारे लिए किया है?’’

‘‘नहीं तो क्या अरमान के लिए किया है,’’ वह शोखी से बोली.

‘‘हो सकता है. वह भी तुम्हें देख कर खुश हो जाए कि आज तो उस की मम्मी बहुत खूबसूरत लग रही हैं. अरे हां, वह शैतान कहां है?’’

‘‘सो रहा है. आप कपड़े बदल लीजिए. मैं आप के लिए चाय बना कर लाती हूं,’’ कहने के साथ ही सोनल किचन की तरफ बढ़ गई.

हाथमुंह धोने के बाद विनय कमरे में आया तो उस ने देखा कि सोनल शाम की चाय के साथ गरमगरम पकौड़े और चटनी सजाए बैठी है.

‘‘क्या बात है,’’ वह खुशदिली से बोला, ‘‘भई, बीवी हो तो तुम जैसी. आज तो पार्टटाइम काम करने में मजा आ जाएगा.’’

‘‘आज से आप का पार्टटाइम काम पर जाना बंद,’’ सोनल ने हिदायत देने वाले अंदाज में कहा.

‘‘क्यों?’’ विनय चौंके बिना नहीं रह सका. वह हैरत भरे स्वर में बोला, ‘‘आज यह इंकलाब कैसा? तुम्हारी तबीयत तो ठीक है?’’

‘‘मेरी तबीयत बिलकुल ठीक है.’’

‘‘फिर पार्टटाइम काम पर जाने पर यह रोक क्यों?’’

‘‘क्योंकि आज मेरी आंखें खुल गई हैं.’’

‘‘आज तुम्हें क्या हो गया है, क्या बोल रही हो तुम?’’

सोनल ने विनय को पूरी बात बताई.

‘‘ओह, तो यह बात है,’’ विनय अपने सिर को हौले से जुंबिश देते हुए बोला, ‘‘वैसे कितनी अजीब बात है. जब तुम सफर के लिए मचलती थीं, तब हमारे सामने कोई रास्ता नहीं था और जब तुम ने अपनी ख्वाहिश खत्म कर दी, तब एक रास्ता खुदबखुद हमारे सामने आ गया है.’’

‘‘क्या मतलब?’’ सोनल हैरानी से बोली.

‘‘हां सोनल, तुम्हारे लिए एक खुशखबरी है. यह खुशखबरी मैं घर आते ही तुम्हें बता देता. लेकिन आज तुम्हारी खूबसूरती में मैं ऐसा उलझा कि खुशखबरी तुम्हें सुनाना भूल गया. असल में तुम्हारे सफर के प्रति बेपनाह शौक को देखते हुए मैं ने एअरइंडिया में नौकरी के लिए आवेदन किया था. वहां मेरी जौब लग

गई है. अब हमें हर साल देशविदेश घूमने के मौके मिलेंगे.’’

‘‘सच,’’ सोनल खुशी से उछल पड़ी.

‘‘हां डियर, मैं सच कह रहा हूं.’’

मारे खुशी के सोनल विनय से लिपट गई. वर्षों बाद उस की ख्वाहिश जो पूरी होने जा रही थी.

BB 17 Weekend Ka Vaar: सलमान खान ने अंकिता लोखंडे की लगाई क्लास

सलमान खान का सबसे कंट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस 17 को लगभग 1 महीना हो चुका है, दर्शकों को शो काफी पसंद आ रहा है. दरअसल, इस शो के 1 महीने बाद सभी कॉन्टेस्ट्स खुलकर गेम खेल रहे है. बिग बॉस शो में दिखा गया है टीवी की सबसे बड़ी सितारा अंकिता लोखंडे अपने पति विक्की जैन के साथ कई मुद्दे पर बिगड़ती नजर आई है. दोनों के बीच मतभेद शो में काफी दिखा है. अंकिता विक्की जैन पर समय न देने पर आरोप लगाती रही. जिसकी वजह से उनका रिश्ता कमजोर दिखाई पड़ने लगा है. इस बीच सुपरस्टार सलमान खान आने वाले वीकेंड का वार स्पेशल एपिसोड में इस मुद्दे को उठाने वाले हैं. सामने आए प्रोमो वीडियो में सलमान खान सबसे पहले अनुराग डोभाल की क्लास लेते दिखे.

सलमान ने अंकिता को दी स्पेशल डोज

बॉलीवुड सुपरस्टार सालमान खान का रियलिटी शो बिग बॉस 17 का लेटेस्ट प्रोमो सामने आया है. इस प्रोमो में सलमान खान अनुराग डोभाल को टारगेट करने के आरोप के बाद उखड़े हुए नजर आए. इस वजह से वो कहते हैं, ‘ऐसे बहुत सारे लोग हैं इस घर में जोकि मुझे गलत समझते हैं. समझिएगा. बेशक समझिएगा. और जो आपको करना है वो करे. और मुझे इसमें कोई इंटरेस्ट नहीं हैं.’

इसके बाद वह एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे को अलग से मेडिटेशन रुम समझाते है. फिल्म स्टार उन्हें कहते हैं, ‘अंकिता ये जो आपका विक्की-विक्की चल रहा है इसमें आपका गेम उभरकर सामने नहीं आ रहा. वो अपना खुद को गेम खेल रहा है. आप अपना खुद का गेम क्यों नहीं खेल रहीं.’ इस दौरान अंकिता लोखंडे सलमान खान की बातों को ध्यान से समझते दिखती हैं. यहां देखें प्रोमो वीडियो.

खिचड़ी 2 स्टारकास्ट होगी बिग बॉस 17 की मेहमान

बिग बॉस 17 में खिचड़ी 2 फिल्म की स्टारकास्ट आएगी. प्रोमो में हंसा पारेख उर्फ सुप्रिया पाठक, अनुराग देसाई, जमनादास मथीजा भी बिग बॉस 17 के मंच पर पहुंची हैं. जिसकी इलक प्रोमो में दिखाई गई. दर्शकों वीकेंड के वार का खासी इंतजार रहता है. क्या ऑडियंस सलमान के इस करारे वीकेंड वार के लिए तैयार है.

अभिनेत्री निकिता दत्ता की संघर्ष क्या रही, पढ़ें इंटरव्यू

टीवी शो ‘एक दूजे के वास्ते’ से चर्चा में आने वाली खूबसूरत, हंसमुख और स्मार्ट अभिनेत्री निकिता दत्ता ने बहुत कम समय में अपनी मौजूदगी हिंदी मनोरंजन की दुनिया में दिखाई है. वह मिस इंडिया 2012 की फाइनलिस्ट में से एक थीं. उन्होंने बॉलीवुड में अपने कैरियर की शुरुआत फिल्म लेकर हम दीवाना दिल से किया है, जहाँ उन्होंने सहायक भूमिका निभाई है.

इसके बाद धारावाहिक ड्रीम गर्ल के साथ टीवी में अभिनय की शुरुआत की. उनकी दूसरी पोपुलर शो ‘एक दूजे के वास्ते’ को लोगों ने बहुत पसंद किया और वे घर – घर जानी गई. बिना गॉडफादर के इंडस्ट्री में टिके रहना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्हें परिवार का सहयोग हमेशा मिला, जिससे वे आगे बढ़ सकी. अभी उनकी फिल्म दंगे और मराठी फिल्म रिलीज पर है, जिसे लेकर वह बहुत उत्साहित है. उन्होंने खास गृहशोभा के साथ अपनी जर्नी और संघर्ष के बारें में बात की और बताया कि कैसे आउटसाइडर को इंडस्ट्री में टिके रहना और काम मिलना मुश्किल होता है, लेकिन वह सफल हुई कैसे, क्या कहती है निकिता, जाने उनकी कहानी.

नए प्रोजेक्ट के बारें में पूछे जाने पर निकिता कहती है कि मैं एक हिंदी फिल्म दंगे कर रही हूँ, विजय नाम्बियार की इस फिल्म में एक्टर हर्षवर्धन राणे है. इसके अलावा मराठी रोमकोम फिल्म और एक शो कर रही हूँ.

 

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मिली प्रेरणा

निकिता ने बचपन से कभी एक्टिंग के बारें में सोचा नहीं था, अभिनय में आना उसके लिए एक इत्तफाक था. वह कहती है कि बचपन से कभी ख्याल नहीं था कि मैं एक्ट्रेस बनूँगी, ये एक इत्तफाक ही था, क्योंकि परिवार में दूर – दूर तक कोई भी इस फील्ड से नहीं था. अचानक हुआ है, क्योंकि जब मैं मिस इंडिया में भाग लिया और फाइनल 20 में पहुंची थी, तो मेरे पास काफी काम आने लगे थे, तब पता चल गई थी कि मुझे कैमरे के सामने काम कर ख़ुशी मिलती है. तभी से मैंने अभिनय में आने का मन बना लिया था. बचपन से एक्ट्रेस बनने का कोई सपना नहीं था, क्योंकि मैं एक ऐसी परिवार से आती हूँ, जहाँ एकेडेमिक पर काफी ध्यान दिया जाता था, ऐसे में जब मैंने इस फील्ड में काम करना शुरू किया, तब मेरी माँ ने काफी सहयोग दिया है, उन्होंने हर प्रोजेक्ट में मेरे साथ रहने की कोशिश की है.

 

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सहयोग परिवार का

विशाखापत्तनम से मुंबई आने की सफर के बारें में निकिता कहती है कि मेरे पिता इंडिया नेवी में थे, इससे मेरा अलग – अलग जगहों पर जाना हुआ है, विशाखापत्तनम में स्कूल में थी फिर दिल्ली गई और इसके बाद मुंबई आई. कॉलेज की पढ़ाई मैंने मुंबई में किया है और तब से अभिनय की ओर ध्यान देना शुरू किया. पहली बार एक्टिंग के बारें में पेरेंट्स से कहने पर भी किसी प्रकार की बाधा नहीं आई, सभी ने मुझे पूरे दिल से सहयोग दिया. हालाँकि मेरा पूरा परिवार मिलिट्री से है, लेकिन मेरा काम इतनी आसानी से हुआ कि मुझे कोई समस्या नहीं आई, इतने समय तक इंडस्ट्री में टिके रहना भी इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि परिवार मेरे साथ थी.

ब्रेक

निकिता आगे कहती है कि पहला ब्रेक टीवी शो 2015 में मिला था, इससे पहले मैंने एंकरिंग करती थी. ये सब कुछ मेरे लिए नया था, लेकिन तीन साल टीवी शो करने के बाद मुझे एक्टिंग की काफी सारी चीजे सीखने को मिली है. असल में टीवी शो करते वक्त कलाकार को घंटों तक कैमरे के सामने रहना पड़ता है, रोज शूटिंग करनी पड़ती है, इससे कई बातें मुझे एक्टिंग की सीखने को मिली है. इसके बाद कबीर सिंह में काम मिला और मैं आगे बढती गई.

 

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संघर्ष  

निकिता कहती है कि संघर्ष हर क्षेत्र में होता है और इन सभी में मुझे संघर्ष काफी करना पड़ा है. बाहर से आने पर व्यक्ति के पास चॉइस बहुत कम होता है. यशराज या धर्मा जैसे कोई प्रोडक्शन हाउस मेरे लिए फिल्म नहीं बना रहा होता है. मेरे टाइटल के आगे किसी फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का नाम नहीं है, ऐसे में बार – बार ऑडिशन देना पड़ता है, एक संघर्ष लगातार चलता रहा है, जिससे मुझे निकलना पड़ता है. इसके अलावा कई बार ऑडिशन देकर शोर्ट लिस्ट भी हो जाता है, लेकिन कोई इन्फ़्लुएन्शियल व्यक्ति के कांटेक्ट होने पर काम उन्हें या उनके लोगों को दे दी जाती है. इतना ही नहीं, अंजान व्यक्तियों के बीच में खुद की जगह बनाना भी एक कठिन काम होता है. मेरा साथ टीवी ने दिया है, क्योंकि टीवी की कोई भी शो घर – घर पहुँचती है, इससे लोग मुझे जानने लगे थे. ये सभी चीजे मुझे मानसिक रूप से परेशान करती थी, लेकिन समय के साथ – साथ मैंने इसे अलग रखकर काम पर फोकस करना सीख लिया है. ये सही है कि संघर्ष के समय व्यक्ति को धैर्य के साथ शांति बनाकर चलना आसान नहीं होता. इसमें मुझे सबसे अधिक माँ अलका दत्ता और बड़ी बहन का साथ रहा, जिससे मैं यहाँ तक पहुँच पाई. ये क्षेत्र बहुत ही अनप्रेडिक्टेबल होता है, आज काम है, कल नहीं है. वित्तीय व्यवस्था भी बहुत अनिश्चित होता है, जिसमे टिके रहना एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन परिवार का सहयोग मुझे मानसिक शक्ति दी है.

माध्यम में है अंतर

निकिता आगे कहती है कि टीवी शो ‘एक दूजे के वास्ते’ शो को लोगों ने बहुत पसंद किया था और ये एक पोपुलर शो था. आज भी लोग मिलने पर उसी शो की जिक्र करते है, क्योंकि उन्हें मेरी भूमिका बहुत पसंद आई थी. उसके बाद कबीर सिंह ने मुझे थोड़ी पॉपुलैरिटी दी है. टीवी और फिल्म दोनों के माध्यम और काम करने के तरीके में काफी अंतर होता है, डेली सोप में लगातार काम चलता है और कहानी हर हफ्ते बदलती रहती है, क्योंकि फीडबैक दर्शकों से लाइव मिलता है. तैयारी के लिए समय नहीं मिलता. 10 सीन एक दिन में शूट करते है. जबकि फिल्म फुर्सत से बनती है. वेब सीरीज भी आजकल काफी अच्छे बन रही है. इसलिए मैंने टीवी शो छोड़कर कंटेंट वाली शो करना अधिक पसंद कर रही हूँ, क्योंकि इसमें खुद को ग्रो करने का मौका मिलता है. फिल्मे और वेब सीरीज काफी अच्छी बन रही है. इसमें अपने चरित्र पर काम करने का मौका भी मिलता है.

 

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इंटिमेट सीन्स

इंटिमेट सीन्स को करने में सहजता के बारें में पूछने पर निकिता कहती है कि ये विषय बहुत ही सब्जेक्टिव होता है, क्योंकि कहानी की जरुरत और उसे फिल्माने के तरीके को देखना पड़ता है. मैंने एक शो खाकी की है, जिसमे कोई भी इंटिमेट सीन्स नहीं है, लेकिन शो अच्छी चली. जबरदस्ती उन्होंने कुछ नहीं डाला और मुझे ऐसी सीन्स के लिए कहानी की डिमांड को देखना जरुरी होगा. किसी फिल्म का हिस्सा बनने के लिए मेरी भूमिका और फिल्म की कहानी को देखती हूँ, इसके बाद निर्माता और निर्देशक की बारी आती है.

फैशन और फ़ूड  

निकिता का कहना है कि मुझे फैशन की समझ नहीं है. आसपास के लोग मुझे फैशन और ट्रेंड बताते रहते है. मेरे लिए फैशन में कम्फर्ट का होना बहुत जरुरी होता है. फूडी मैं बहुत हूँ, मुझे हर तरह के फ़ूड पसंद है. खाने में क्या डाला गया है, उसे भी मैं जानने में उत्सुकता रखती हूँ. केवल इन्डियन कुइजिन ही नहीं, बल्कि कही पर अगर मैं जाती हूँ तो वहां का लोकल खाना मैं अवश्य ट्राई करती हूँ. अगर मुझे कभी सुपर पॉवर मिले तो मुंबई की सड़कों को ठीक करना चाहूंगी.

टैक्स दर टैक्स

केंद्र सरकार किस तरह गरीब ही नहीं, अमीर लोगों को भी नएनए कर लगा कर लूट व चूस रही है, इस का नया उदाहरण है विदेशों में जाने, बच्चों को पढ़ाने, विदेशों में इलाज कराने आदि पर भी टैक्स लगाया गया या बढ़ाया गया है. देश की सरकार की लिब्रलाइज्ड रैमिटैंस स्कीम के अंतर्गत अब विदेश में 7 लाख रुपए से अधिक खर्च करने वालों को 20 प्रतिशत टैक्स देना होगा.

यह उस पैसे पर टैक्स है जिस पर आम नागरिक देश में पहले से ही तरहतरह के टैक्स दे चुका है और 30 प्रतिशत तक का इनकम टैक्स भर चुका है.

इस तरह के टैक्स का सीधा मतलब तो यह होता है कि पैसा जैसे गैरबैंकिंग तरीकों से भेजा गया. अब लोग हवाला से पैसा और ज्यादा भेजेंगे जिस में खर्च बहुत कम होता है. यह आसान है क्योंकि भारत से बाहर बसे लगभग 3 करोड़ भारतीय काफी पैसा कमा रहे हैं और उन्हें बैंक के जरिए पैसा भारत में अपने संबंधियों को भेजना होता है. हवाला के जरिए संबंधियों के पास यह पैसा नकद में आ जाएगा और अगले साल से उन्हें इस पर टैक्स नहीं देना होगा.

विदेशों से अभी भी नीची जातियों के भारतीय कामगार, मजदूर और कुछ मामलों में ऊंची जातियों के ऊंची पोस्टों पर बैठे लोग भी भारत में अपने संबंधियों को पैसा बैंकिंग चैनल से भेजते हैं और यह रकम 120 लाख करोड़ रुपए से अधिक की होती है. जो विदेशी सामान भरभर कर खरीदा जा रहा है, जिन में प्रधानमंत्री के लिए खरीदे गए 2 विशाल हवाईजहाज, प्रत्येक 8,000 करोड़ रुपए की कीमत के शामिल हैं. भारतीय दूतावास भरभर कर पैसा खर्च कर रहे हैं. सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति पर भी खर्च विदेशी मुद्रा में किया गया था.

यही नहीं, सरकार संस्कृति प्रचार के नाम पर विदेशों में बन रहे मंदिरों पर भी आम मजदूरों के पैसे को बांट रही है लेकिन एक आम नागरिक की विदेश यात्रा, पढ़ाई, शिक्षा आदि पर टैक्स बढ़ा रही है. इन में से कुछ खर्चों में छूट है पर फिर भी विदेश जाने पर बहुत रुपए खर्च होते हैं जो अनायास होते हैं और अब विदेशी मुद्रा में खर्च करने पर ज्यादा टैक्स देना होगा.

जो सरकार वादा करती है कि वह सब का विकास चाहती है, वह असल में केवल मुट्ठीभर सरकारी आदमियों का विकास कर रही है.

लिब्रलाइज्ड रैमिटैंस स्कीम के अंतर्गत लगाया गया नया टैक्स तो एक नमूना भर है. इस तरह के हजारों टैक्स रोज लगते हैं और यदि किसी धन्ना सेठ को फायदा पहुंचाना हो तो कुछ दिनों के लिए इन्हें हटा भी दिया जाता है.

 

मेरे बौयफ्रैंड की शादी हो गई लेकिन वह दोबारा रिलेशन में आना चाहता है, कोई उपाय बताएं

सवाल

मेरा बौयफ्रैंड मुझे बहुत प्यार करता था लेकिन परिवार के दबाव के कारण उसे दूसरी जगह शादी करनी पड़ी. मैं अभी तक उस का प्यार नहीं भुला पा रही हूं. अब शादी के बाद उस ने फिर से मुझे अप्रोच करना शुरू कर दिया है. कहता है, हम अच्छे दोस्त तो रह सकते हैं न. मुझ से अपनी मैरिड लाइफ की प्रौब्लम शेयर करने लगा है. एक दिन तो घर भी आ गया जब मैं अकेली थी. मुझ से फिजिकल होने की कोशिश करने लगा. मैं भी कमजोर पड़ने लगी थी लेकिन अचानक घर की घंटी बज गई और मैं संभल गई. ठीक है कि मैं अभी भी उसे भुला नहीं पाई हूं लेकिन अब उस के साथ रिलेशन रख कर मैं उस की बीवी के साथ धोखा नहीं कर सकती. बौयफ्रैंड कहता है कि उस से बहुत बड़ी गलती हो गई शादी कर के. मेरे सामने रोता है. पुरानी बातें याद दिलाता है. तलाक लेने की बातें कहता है. समझ नहीं आ रहा मुझे कि मुझे क्या निर्णय लेना चाहिए. लाइफ उलझ रही है. मैं किसी झंझाट में पड़ना नहीं चाहती. आप ही मुझे कोई रास्ता सुझाएं.

जवाब

आप के बौयफ्रैंड में हिम्मत होती तो वह पहले ही दूसरी जगह शादी न करता, अपनी बात पर डटा रहता और आप से शादी करता. घरवाले आप दोनों की शादी के खिलाफ थे तो शादी न करने का फैसला लेता, न कि दूसरी जगह शादी कर के आप के सामने अब घडि़याली आंसू बहाता. दरअसल वह अब आप को बहका रहा है. वह आप के शरीर से खेलना चाहता है.

आप अपनी लाइफ को क्यों उलझ रही हैं. बौयफ्रैंड से साफ कह दें कि अब आप से कोई रिश्ता रखना नहीं चाहती. वह अपनी गृहस्थी पर ध्यान दें. आप के सामने आ कर अपना दुखड़ा न रोए. शादी कर ली है तो उसे निभाए. आप का ध्यान अब छोड़ दे. आप को सख्त रुख अपनाना होगा. उस से बात करना बिलकुल बंद कर दें. मोबाइल नंबर ब्लौक कर दें. सख्त हिदायत दे दें कि आप के घर आने की अब हिम्मत न करे.

आप को हम यही राय देंगे कि अब अपनी लाइफ को नए सिरे से देखने की कोशिश करें. अपनी शादी के बारे में सोचिए. अच्छा लाइफपार्टनर मिल जाएगा तो लाइफ अपनेआप सुखमय रहेगी.

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गुलाबी होंठ उड़ा दें होश, तो ऐसे बढ़ाएं उनकी खूबसूरती

चेहरे की सुंदरता में होंठों का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है. होंठों की खूबसूरती को बढ़ा कर अपने व्यक्तित्व को आप और ज्यादा आकर्षक बना सकती हैं. प्राकृतिक तौर पर किसी के होंठ पतले होते हैं, तो किसी के मोटे, किसी का चेहरा भराभरा होता है, तो उस के होंठ चेहरे के अनुपात में काफी पतले होते हैं. इन कमियों को आप लिपस्टिक के जरीए दूर कर सकती हैं. लेकिन इस के लिए आप को लिपस्टिक के रंगों का चयन अपने व्यक्तित्व के हिसाब से करना आना जरूरी है.

लिपस्टिक के रंग का चुनाव चेहरे और होंठों की बनावट, शरीर और केशों का रंग, उम्र और किस तरह की ड्रैस आप पहन रही हैं, यह देख कर करना चाहिए. अगर आप को लिपस्टिक चुनने की समझ और उसे लगाने के तौरतरीकों के बारे में जानकारी नहीं है, तो लेने के देने पड़ सकते हैं. तब यह आप की सुंदरता को बढ़ाने के बजाय बिगाड़ भी सकती है. जब आप को लिपस्टिक लगानी हो तो उस से कुछ देर पहले थोड़ी सी रुई पर क्लींजिंग मिल्क लगा उस से होंठों को साफ करें. इस के बाद होंठों की आउटलाइन बना कर लिपस्टिक लगाएं.

अगर आप के होंठ पतले हैं और उन्हें सुडौल दिखाना है, तो उन्हें बाहर की तरफ से आउटलाइन करें और अगर आप के लिप्स मोटे हैं, तो अंदर की तरफ से लाइन खींचें. लिपस्टिक लिपब्रश से लगाना ही बेहतर रहता है, क्योंकि इस से उस के फैलने का डर नहीं रहता है और लिपस्टिक लगती भी एकसार है.

होंठों की सुंदरता

लिपस्टिक की मदद से न सिर्फ होंठों की सुंदरता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि इस से होंठों को मनपसंद आकार भी दिया जा सकता है. चेहरा छोटा होने पर ऊपर के होंठ पर गहरे रंग की लिपस्टिक तथा नीचे के होंठ पर थोड़े हलके रंग की लिपस्टिक लगानी चाहिए. इसी तरह चेहरा बड़ा होने पर ऊपर के होंठ पर हलके रंग की तथा निचले होंठ पर थोड़ी गहरी लिपस्टिक लगानी चाहिए.

हलके और गहरे रंग की लिपस्टिक एकसाथ लगाने से भी चेहरे पर निखार आ जाता है. होंठों पर हलके रंग की लिपस्टिक लगा कर अतिरिक्त लिपस्टिक को टिशू पेपर से छुड़ा लें और फिर गहरे रंग की लिपस्टिक लगाने के बाद होंठों पर थोड़ी सी वैसलीन या लिपग्लौस लगा लेने से होंठों में चमक आ जाती है. इस के अलावा अगर आप रोजाना लिपस्टिक का इस्तेमाल करती हैं, तो रात को सोने से पहले होंठों पर वैसलीन लगाना न भूलें. इस के बाद सुबह उठने के बाद नियमित रूप से होंठों को अच्छी तरह साफ कर उन की घी, मलाई या जैतून के तेल से मालिश करें. 

लिपस्टिक का प्रयोग अवसर के अनुसार करना चाहिए. अगर आप औफिस जा रही हैं, तो हलके रंग की लिपस्टिक तथा किसी पार्टी में जाना हो तो गहरे रंग की लिपस्टिक का प्रयोग करें. दिन के बजाय रात में गहरे रंग की लिपस्टिक अधिक अच्छी लगती है. लेकिन अधिक गहरे रंग की लिपस्टिक लगाने से पूर्व अपनी उम्र को भी ध्यान में रखना चाहिए. गहरे रंग की लिपस्टिक एक उम्र के बाद अच्छी नहीं लगती. इस के चुनाव में पहले परिधान पर भी ध्यान दें.

लिपस्टिक हमेशा अच्छे ब्रैंड की ही इस्तेमाल करें. सौंदर्य विशेषज्ञ पी.के. तलवार कहते हैं कि सस्ते ब्रैंड की लिपस्टिक से होंठ खराब हो जाते हैं. उन पर काले निशान पड़ जाते हैं और वे अपनी प्राकृतिक रंगत खो देते हैं. इस के अलावा रात को सोने से पहले लिपस्टिक को उतारना न भूलें. इस के लिए रुई में थोड़ा सा क्लींजिंग मिल्क लगा कर उस से होंठों को धीरेधीरे साफ करें. फिर थोड़ी सी मलाई में नीबू का रस मिला कर होंठों की धीमेधीमे मालिश करें.

खुद को ऐसे रखें फिट

जिम की मैंबरशिप लेते समय तो बहुत उत्साह रहता है. 15 से 20 दिन रोजाना जिम जा कर कसरत भी बड़े मजे से करते हैं. लेकिन, धीरेधीरे रोज जिम जाना थकाने वाला हो जाता है. घर का कोई एक कोना जहां आप की कसरत के लिए थोड़ी जगह हो तो वहीं से अपना वर्कआउट शुरू कर दें.

1. सिटअप

सिटअप करने से पेट की मांसपेशियां मजबूत और टोन होती हैं. इस के साथसाथ यह एब्स एरिया को भी टोन करता है. इस से गरदन, छाती, पीठ का निचला हिस्सा और हिप फ्लैक्सर में मजबूती आती है. इसे नियमित करने से शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है. सिटअप शरीर की मुद्रा को भी सही करता है.

सिटअप कैसे करें 

-किसी स्थान पर ऐक्सरसाइज मैट को बिछा कर उस पर सीधे लेट जाएं.

-दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ कर जमीन पर रखें.

-अपने दोनों हाथों को क्रौस की स्थिति में कंधे पर रख लें, अर्थात दायां हाथ बाएं कंधे पर और बायां हाथ दाएं कंधे पर रखें.

-अब सांस छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपर के हिस्से को अपने घुटनों की ओर ले जाएं.

-अब सांस लेते हुए दोबारा नीचे की ओर आएं और फिर से लेट जाएं.

2. क्रंचेस

क्रंचेस करने से पीठ के निचले हिस्से और पीठ की मांसपेशियों में चोट आने की संभावना कम होती है. इस से शारीरिक संतुलन में विकास होता है और शरीर में लचीलापन बढ़ता है. क्रंचेस से कैलोरी अधिक मात्रा में बर्न होती है, साथ ही मांसपेशियों में मजबूती आती है.

क्रंचेस कैसे करें

-किसी ऐक्सरसाइज मैट या जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं.

-अपने दोनों घुटनों को मोड़ लें ताकि आप के पैर जमीन पर एकदम सीधे रहें.

-दोनों हाथों को गरदन या सिर के पीछे रखें और अपने कंधों को जमीन से 7-8 इंच ऊपर की तरफ उठाएं.

-ध्यान रखें कि केवल शरीर का ऊपरी हिस्सा ऊपर उठे और कमर व पीठ जमीन पर ही टिकी रहें.

-इस अवस्था में एक से दो सैकंड रहने के बाद नीचे आ जाएं.

-फिर तुरंत ही वापस उठें और इस प्रक्रिया को 8 से 10 बार दोहराएं.

3. प्लैंक्स

प्लैंक्स से आप के कोर मसल्स में मजबूती आती है और एब्स भी मजबूत होते हैं. प्लैंक्स कंधों, छाती, कमर और पैरों को भी मजबूत बनाता है व शारीरिक संतुलन बेहतर करता है.

प्लैंक्स कैसे करें –

प्लैंक्स के लिए आप पुशअप की अवस्था में आ जाएं.

-अपनी कुहनियों और कलाइयों को जमीन पर टिकाएं.

-अब अपनी पीठ को सीधा करते हुए शरीर को ऊपर उठाएं.

-गरदन से पुट्ठों तक शरीर को एक सीध में रखें.

-शरीर का पूरा भार कुहनियों, कलाइयों और पैरों के पंजों पर रखें.

-इस अवस्था में एक मिनट तक बने रहें.

-इसे 2 से 3 बार दोहराएं.

4. स्क्वैट्स

स्क्वैट्स करने से मांसपेशियों का विकास होता है. इस से फेफड़े और हृदय मजबूत होते हैं और शरीर के जोड़ों में भी फायदा होता है. इस से कैलोरी बर्न होती है, शरीर में लचीलापन आता है, हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर का संतुलन विकसित होता है.

स्क्वैट्स कैसे करें

-दोनों पैरों को फैला लें और पैरों की उंगलियों को बाहर की तरफ निकाल कर खड़े हो जाएं.

-पीठ सीधी रखें और कंधे को ढीला छोड़ें.

-अपने हाथों को कमर पर रखें या सामने सीधा फैला लें.

-पीठ को सीधा रखते हुए बैठने की मुद्रा में जाएं जैसे किसी कुरसी पर बैठते हैं.

-अपने घुटनों को पंजों के ठीक सीध में रखें और आगे की ओर न झुकें.

-इस अवस्था में एक सैकंड तक रह कर वापस सीधे खड़े हो जाएं.

-शुरुआत में इसे 10 बार दोहराएं.

5. घर को बना लें जिम

जिम की मैंबरशिप लेते समय तो बहुत उत्साह रहता है. 15 से 20 दिन रोजाना जिम जा कर कसरत भी बड़े मजे से करते हैं. लेकिन, धीरेधीरे रोज जिम जाना थकाने वाला हो जाता है. घर का कोई एक कोना जहां आप की कसरत के लिए थोड़ी जगह हो तो वहीं से अपना वर्कआउट शुरू कर दें.

घर की बालकनी या टैरेस का भी इस्तेमाल किया जा सकता है जहां आप को ऐक्सरसाइज मैट डालने की जगह आराम से मिल जाएगी.

अगर आप का बजट सही हो तो आप जिम के कुछ इक्विपमैंट भी रख सकते हैं, जैसे डंबल्स, बारबेल रौड, मल्टी बैंड, वैट लिफ्टर आदि.  इन सब से आप की पूरे बौडी की वर्कआउट हो जाती है. साथ ही, ऐक्सरसाइज करने के लिए स्पोर्ट्स शूज और वर्कआउट ड्रैस भी ले सकते हैं.

6. पर्सनल ट्रेनर भी है अच्छा

अगर आप रोजाना जिम जाने के झंझटों से बचना चाहते हैं तो  पर्सनल फिटनैस ट्रेनर भी रख सकते हैं. वे आप को ऐक्सरसाइज करने के सही तरीकों के बारे में गहराई से बताएंगे और सब से अच्छी बात कि वे आप को पूरा समय और अपना पूरा ध्यान देंगे. इस से आप को अपने हर एक फिटनैस लैवल के बारे में सही जानकारी मिलेगी, ऐक्सरसाइज सही कर रहे हैं या नहीं. कौन सी ऐक्सरसाइज को करने से कितना फायदा होगा जैसी छोटीछोटी बातें वे आप को बताएंगे जिस से कि आप बिना डर और वहम के ऐक्सरसाइज का फायदा उठा सकेंगे.

कैसे रखें जिम किट का ध्यान 

-अपनी जिम किट में इक्विपमैंट्स को पानी से बचा कर रखें. पानी से जंग लगने की संभावना रहती है.

-मल्टी बैंड का इस्तेमाल व्यायाम के अलावा किसी और काम के लिए न करें.

-वर्कआउट क्लौथ को कुछ दिनों के अंतराल पर धोना चाहिए.

-अपनी जिम किट को बच्चों की पहुंच से दूर रखें.

-भारी डंबल्स ऐसी जगह पर रखें जहां से वे गिरें नहीं.

-कुछ दिनों के अंतराल पर इक्विपमैंट के नटबोल्ट्स की जांच करते रहें ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न घटे.

-इक्विपमैंट की सफाई के लिए स्प्रे की जगह जिम वाइप्स का इस्तेमाल करें.

7. डांस भी है फायदेमंद

अगर आप अपने डेली वर्कआउट रूटीन से बोर हो गए हैं और कुछ मजेदार करना चाहते हैं तो डांस ऐक्सरसाइज शुरू कर दें. अगर आप को डांस की जानकारी है तो फिर बात ही क्या है, और अगर जानकारी नहीं है तो भी कोई परेशानी नहीं है. इस के लिए आप डांस क्लास जा सकते हैं या डांस वर्कआउट डीवीडी या औनलाइन वीडियो देख कर भी डांस, जैसे बालरूम या बैलेट, हिपहौप, एरोबिक्स कर सकते हैं. इन से आप के शरीर की लचक बढ़ेगी और साथ ही आप के मसल्स मजबूत होंगे व शारीरिक संतुलन भी बनेगा.

जिन्हें दिल की बीमारी है या हाई कोलैस्ट्रौल या डायबिटीज की समस्या है, उन के लिए भी डांस वर्कआउट बहुत फायदेमंद होता है. अगर आप की बीमारी ज्यादा गंभीर है तो पहले अपने डाक्टर से परामर्श ले लें. रोजाना 30 मिनट डांस ऐक्सरसाइज करने से 130 से 250 कैलोरी कम होती है. इतनी ही कैलोरी जौगिंग से भी बर्न होती है. अगर आप के शरीर में किसी प्रकार की कोई चोट हो या आप पहले से अस्वस्थ हों तो किसी भी नई ऐक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करने से पहले अपने डाक्टर से सलाह जरूर लें.

8. यह भी करके देखें

दिनभर औफिस में बैठे रहने या ऐसे काम करने जिन से आप का शारीरिक श्रम न के बराबर होता हो और आप के शरीर से बहुत ही कम मात्रा में कैलोरी बर्न होती हो, तो उस स्थिति में यह जरूरी है कि ऐक्सरसाइज के अलावा भी छोटीछोटी बातों का ध्यान रख कर फिजिकली ऐक्टिव रहा जाए.

-लिफ्ट की जगह सीढि़यों का प्रयोग करें.

-बाजार अगर ज्यादा दूर न हो तो गाड़ी या दूसरी सवारी के बजाय पैदल चल कर जाएं.

-औफिस के लंचटाइम में 15 मिनट का वाक कर लें.

-पूरे दिन बैठे रहने की जगह कुछ घंटे खड़े हो कर भी काम करें.

एक अध्ययन के मुताबिक, अगर आप दिन के 6 घंटे खड़े रहते हैं तो आप का कुछ वजन कम हो सकता है.

-इस के अलावा अपना काम खुद से करने की आदत डालें. इस से आप के शरीर में हरकत होती रहेगी.

-अपने साथ कुछ हैल्दी स्नैक्स रखें और जरूरत से अधिक खाने से बचें.

-पूरे दिन में पानी पीते रहें, ताकि आप के शरीर में पानी की कमी न होने पाए.

फ्लोरिंग को दें स्टाइलिश लुक

आप अपने घर में कितनी भी महंगी चीजें क्यों न रखें, जब तक घर की फ्लोरिंग सही नहीं होगी तब तक घर का इंटीरियर अच्छा नहीं लगेगा. फर्श के तौर पर टाइल्स बेहद टिकाऊ होती हैं तथा मजबूती के मामले में भी इन का मुकाबला नहीं होता. ये पानी से जल्दी खराब नहीं होतीं और साफ-सफाई में भी किसी तरह की दिक्कत नहीं होती.

टाइल्स में मैट फिनिश का चलन जोरों पर है. चमचमाती या ग्लौसी टाइल्स अब चलन से आउट हो गई हैं. कई कंपनियां आप की पसंद अनुसार भी टाइल्स बनाने लगी हैं, जिन्हें कंप्यूटर की मदद से बनाया जाता है. इन में आप अपनी पसंदीदा मोटिफ्स या परिवार के फोटो भी प्रिंट करा सकती हैं.

टाइल्स फ्लोरिंग कराते समय इस बात का ध्यान रखें कि फ्लोरिंग आप की दीवारों से मैच करे. अगर आप के घर की दीवारें लाइट कलर की हैं, तो टाइल्स डार्क कलर की लगवाएं. अगर दीवारें डार्क कलर की हैं, तो लाइट टाइल्स लगवाएं.

कहां और कैसे लगवाएं टाइल्स

घर की अलग-अलग जगहों पर टाइल्स के चयन का तरीका भी अलग-अलग होता है:

– लिविंग एरिया वह स्थान होता है जहां आप अपने मेहमानों का स्वागत करती हैं, दोस्तों से मिलती हैं, उन से बातें करती हैं. इस स्थान को खास बनाना जरूरी है. यहां आप कारपेट टाइल्स लगवा सकती हैं.

– अगर आप का घर छोटा है, तो एक ही तरह की टाइल्स लगवा सकती हैं, जो घर को अच्छा लुक देती हैं. अगर घर बड़ा है तो अलगअलग डिजाइनों की टाइल्स लगवाएं. लिविंग एरिया में पैटर्न और बौर्डर वाली टाइल्स का भी ट्रैंड इन है.

– बैडरूम में कई लोग डार्क कलर फ्लोरिंग करा लेते हैं. ऐसा करने से बचें. बैडरूम में हमेशा टाइल्स फ्लोरिंग के लिए हलके और पेस्टल शेड्स का इस्तेमाल करें.

– किचन छोटी हो तो दीवारों पर हलके रंग की टाइल्स लगवाना ही सही रहता है. बड़ी किचन में सौफ्ट कलर का इस्तेमाल करना चाहिए. इन दिनों किचन में स्टील लुक वाली टाइल्स ट्रैंड में हैं.

– बाथरूम घर में सब से ज्यादा इस्तेमाल होने वाली जगहों में से एक है. इसे सुंदर व आरामदेह बनाना बहुत जरूरी है. बाथरूम में हमेशा सौफ्ट फील वाली टाइल्स लगवाएं. ये टाइल्स नंगे पैरों को रिलैक्स फील कराती हैं. बाथरूम के लिए कई तरह की टाइल्स आती हैं. आप बौर्डर वाली, क्रिसक्रौस पैटर्न वाली टाइल्स लगवा सकती हैं.

टाइल्स कई सालों तक चलती हैं. इन्हें साफ करना भी आसान होता है. कई महिलाएं टाइल्स को साफ करने के लिए हार्ड कैमिकल का प्रयोग करती हैं. ऐसा न करें. टाइल्स को साफ करने के लिए टौयलेट क्लीनर का इस्तेमाल कर सकती हैं. सर्फ के पानी से भी टाइल्स को साफ किया जा सकता है.

नयनतारा : बेकसूर विनायक ने किस गलती का कर रहा था प्रायश्चित्त

बगुले के पंखों की तरह झक सफेद बर्फ, रुई के छोटेछोटे फाहों के रूप में गिर रही थी. यह सिलसिला परसों शुरू हुआ था और लगा था, कभी रुकेगा नहीं. लेकिन पूरे 44 घंटे बाद बर्फबारी थमी. पता नहीं रात के कितने बजे थे. आकाश में पूरा चांद मुसकरा रहा था. विनायक बिस्तर पर उठ कर बैठ गया. उस ने अपने एक हाथ से दूसरा हाथ छुआ. लेकिन पता न चल सका कि बुखार उतरा या नहीं. जब बर्फ गिरनी शुरू हुई थी तो उसे होश था. उस ने 2 गोलियां खाई थीं. लेकिन उन से कुछ हुआ नहीं था. उस ने अनुमान लगाया कि वह पूरे 2 दिनों तक अवचेतनावस्था में अपने बिस्तर में पड़ा रहा था. भूखप्यास तथा 2 दिनों तक बिस्तर में निष्क्रिय पड़े रहने से उपजी थकान ने शरीर के हर हिस्से में दर्द भर दिया था.

विनायक ने खिड़की के शीशे के पीछे मुसकरा रहे चांद के साथ आंख लड़ाने का खेल शुरू किया. 1 मिनट, 2 मिनट, फिर उस ने थक कर अपनी आंखें नीचे झुका लीं. उस ने अपनेआप से कहा, ‘इश्क करने में भला कोई चांद से जीता है, जो मैं जीतूंगा. जीतता तो यहां इतना लाचार, इस कदर तनहा क्यों पड़ा होता.’

दूनागिरि के उस उपेक्षित से बिमलजी के मकान की दूसरी मंजिल का खुलाखुला सहमासहमा सा कमरा. विनायक ने अपने अंतर में दस्तक दी, ‘दोस्त, तुम अपनी जिंदगी की किताब के तमाम पन्ने मथुरा, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल और न जाने कहांकहां के होटलों, गैस्टहाउसों में छितरा कर अब आखिरी पन्ना फाड़ कर फेंक देने के लिए यहां आ गए हो.’

खिड़की के उस पार चमक रहा चांद फिर धुंध में सिमट गया. बाहर रेशारेशा बन कर गिर रही बर्फ फिर दिखलाई पड़ने लगी. दोस्त का पैगाम… ‘लो भई विनायक, मौत आ गई,’ आ गया, ‘एक परी आएगी, तुम से तुम्हारी जिंदगी छीन कर ले जाएगी. फिर इस धरती पर तुम्हारी पहचान खत्म, नयन की याद खत्म,’ उस ने घुटनों में अपना सिर रख कर अपने सिर्फ एक ऐसे गुनाह से रिहाई पाने की कोशिश की, जो कि उस ने किया ही नहीं था.

पतझड़, पेड़ों की पातविहीन नंगी डालें, नीचे गिरे हुए अरबोंखरबों पत्ते, फिर वसंत आएगा, फिर नई कोंपलें, नए फल, नए फूल उगेंगे. मौत से जिंदगी छीन लाने का वही पुराना खेल. अब के बिछुड़े कब मिलें, कहां मिलें, मिलें भी कि न मिलें, कुछ पता नहीं. लेकिन नयन से माफी वसूलने की बात…और कमरे के भीतर भूख, प्यास, बुखार से छटपटा रहा विनायक.

‘प्रायश्चित्त…स्वीकारोक्ति से तुम अपनी की गलती से नजात पा सकते हो?’ बहुत पहले एक वृद्धा के मुख से उस ने ये शब्द सुने थे. प्रायश्चित्त वह कर रहा है, लेकिन स्वीकारोक्ति? ‘कहां पाऊं नयन को जो स्वीकारोक्ति करूं?’

रजाई की परतों में छिपी यातना से बेहोश हो रही विनायक की काया. कल, परसों, नहीं, 5 साल पहले…

अपने पिता की विनायक को कुछ याद नहीं थी. सभी कहते थे कि वह अपने पिता की हूबहू नकल है. उसे मां की याद है. मामूली बुखार से हार कर वे चल बसी थीं. घर में बड़े भाई सुधाकर, भाभी अहिल्या तथा उन की 11 साल की बेटी कालिंदी, यही उस के अपने शेष थे. कालिंदी पूरी आफत थी. सारा दिन लौन में तितलियां पकड़ने से ले कर बंगले के बाहर लगे आम, कटहल, नीबू तथा जामुन के पेड़ों की खोहों से गिलहरी, चिडि़या के बच्चे पकड़ने का काम वह पूरे उत्साह के साथ किया करती थी. इसी से विनायक ने उस का नाम नौटी यानी शरारती रख दिया था.

दूनागिरि का वह मकान…दूसरी मंजिल का कमरा. बर्फ व अंधड़ से बिजली के खंभे टूट गए थे. पानी सप्लाई की लाइनें फट चुकी थीं. बिजली नहीं, पानी नहीं. उसे निपट अकेला छोड़ कर उस के मकानमालिक बिमलजी सपरिवार नीचे लालकुंआ चले गए थे.

उस ने नीचे उतर कर उन का घर टटोला. मिट्टी के सकोरे में डबलरोटी के टुकड़े, एक बोतल में थोड़ा सा कड़वा तेल, 2 दौनों में बांध कर सहेजा हुआ पावडेढ़पाव गुड़, एक छींके पर टंगे हुए गिनती के 15 आलू और इतने ही प्याज. छींके में ही 10 ग्राम चाय का पैकेट रखा था. बिमलजी की पत्नी 45 वर्ष की अधेड़, निखरे रंग की सुंदर, सुघढ़ महिला थीं. उन्होंने एक बार दबे मन से विनायक के लिए कुछ करने की बात कही थी लेकिन बिमलजी ने यह कह कर, ‘मरने वाले के साथ खुद नहीं मरा जाता,’ उन्हें चुप करा दिया था.

चिमटे से बर्फ खोद कर उस ने स्टोव पर अपने लिए बगैर दूध वाली गुड़ की चाय बनाई. बर्फ से सख्त डबलरोटी के एक टुकड़े को चाय में डुबोडुबो कर खाया. पर लगा, कुछ भी भीतर जाने को तैयार नहीं है. उस ने पूरी मनोशक्ति लगा कर भीतर के पदार्थ को बाहर आने से रोका. विनायक को लगा कि चायरोटी के बावजूद उस की 2 दिनों की भूखी काया की प्रतिरोधक शक्ति में कोई वृद्घि नहीं हुई है. बिस्तर में घुसते ही अर्धचेतनावस्था ने उसे फिर घेर लिया.

भैया, भाभी और नौटी, जो कि छठी क्लास में फिर फेल हो गई थी, फेल होने का उसे कोई मलाल नहीं था. विनायक ने नौटी को पढ़ाने की कोशिश की, मगर नतीजा…वह खुद भी लड़की के साथ तितलियों, गिलहरियों के पीछे भागने लगा. अहिल्या कभी खीझ कर तो कभी मुसकरा कर अपना माथा पीटने लगती, ‘कमाल की लड़की जन्मी है मेरी कोख से…आज चाचा को गिलहरी के पीछे दौड़ा रही है, कल बाप को दौड़ाएगी और फिर ससुराल जा कर मेरा नाम रोशन करेगी.’

नयन…हां, नयन को ही खोज कर लाया था, विनायक. 20 साल की लंबी, सांवली, छरहरी बंगाली लड़की…सदर मुकाम खुलना…वहीं से अपने चाचा राखाल के साथ शरणार्थी बन कर वह 1981 में बंगलादेश की सीमा पार कर पहले कलकत्ता, फिर वहां से दिल्ली और अंत में दिल्ली से गाजियाबाद आई थी. राखाल, भैया की कपड़े की दुकान में काम करता था. दिनभर ग्राहक निबटाने के बाद वह रात 9 बजे पूरा हिसाबकिताब निबटा कर गुलजारी लाला के ठेके से शराब पीता हुआ अपने घर लौटता था. पैसे के लिए मुंह न फाड़ने वाला राखाल दारू वाले ऐब के अलावा बाकी सब मामलों में सीधासादा, काम से काम रखने वाला एक मुनासिब किस्म का आदमी था.

प्रथम श्रेणी में एमए करने के बाद विनायक भी सुबह 9 से 12 बजे तक दुकान में बैठता था. दुकान में ही भोजन कर के लाइब्रेरी चला जाता, जहां से पढ़ कर शाम को 5-6 बजे तक घर वापस आता. कुछ देर वह नौटी को पढ़ाता या उस के साथ खेलता. भाभी के साथ रात 9 साढ़े 9 बजे खाना खाता. फिर 2-3 घंटे पढ़ता और सो जाता.

वह अखिल भारतीय या इसी किस्म की दूसरी सेवाओं में जाना चाहता था. उस की भाभी भी यही चाहती थीं, लेकिन भैया, विनायक की बात सुन कर धमकी देने लगते थे, ‘भई, हम से अकेले यह सब नहीं होता. यदि विनायक नौकरी पर गया तो मैं दुकान बंद कर घर बैठ जाऊंगा.’

एक दिन भैया किसी पेशी में कोर्ट गए हुए थे. वह अकेला राखाल के साथ दुकान देख रहा था कि एक लड़का उस के सामने तह की हुई एक चिट्ठी फेंक कर भाग गया.

पत्र 2 लाइनों का था, ‘जुबली रेस्तरां में फौरन मिलिए. किसी के जीवनमरण का प्रश्न है. हरे रंग की साड़ी और उसी रंग के ब्लाउज में आप मुझे पहचान जाएंगे.’

विनायक शर्मीला लड़का था. लड़कियों का सामना पड़ने पर तो उस की जान ही निकल जाती थी. सोचा, जाऊं या न जाऊं? लेकिन जीवनमरण का प्रश्न. उंह, ऐसा तो झूठ भी लिखा जा सकता है. पता नहीं कौन हो,

कैसे चालचलन की हो. बात भैया के कानों तक पहुंच सकती है और उन के मुंह से भाभी के कानों तक भी. इस के बाद दुनियाभर के सवालों का सिलसिला.

रेस्तरां के केबिन में अपने सामने विनायक को बैठाते हुए उस ने कहा, ‘मेरा नाम नयन है. मैं आप को जानती हूं. मेरे बारे में आप, बस, इतना जान लें कि मैं आप की दुकान के कर्मचारी राखाल की भतीजी हूं.’

‘ओह,’ विनायक की घबराहट में थोड़ी कमी आई.

‘मेरे चाचाजी आजकल खूब शराब पीने लगे हैं. मेरी दिवंगत चाची को चाचाजी बहुत प्यार करते थे. वे कहते हैं, ‘नयन, तेरी चाची मुझे रोज रात में दिखाई देती है. जब नहीं पीता तो नहीं दिखाई देती.’ अब बताइए, मैं उन्हें कैसे रोकूं? आप और आप के भैया हमारे अन्नदाता हैं. हम आप के आश्रित हैं. एक आश्रिता की याचना समझ कर आप इस मामले में कुछ कीजिए.’

‘आप वैसे करती क्या हैं?’ समस्या का समाधान विनायक की समझ में न आ रहा था. सो, फिलहाल इस से नजात पाने के लिए उस ने वार्त्ता का रुख मोड़ा.

‘एमए कर रही हूं, अंगरेजी साहित्य में.’

‘बीए में कौन सी डिवीजन थी?’

‘प्रथम.’

विनायक को लगा कि इस समय भी नौटी बगीचे में गिलहरियों के पीछे भाग रही होगी. ‘आप क्या मेरा एक काम कर सकती हैं?’

‘हां, यदि मेरी सामर्थ्य में हुआ तो.’

‘आप मेरी नौटी को पढ़ा दिया कीजिए.’

‘नौटी, यानी?’

‘मेरी भतीजी, छठी क्लास में फेल हो गई है.’

‘पढ़ा दूंगी, 2 घंटे रोज ठीक रहेगा?’

‘बिलकुल ठीक रहेगा. क्या लेंगी?’

‘मैं ने कहा न, मैं आप लोगों की आश्रिता हूं. जैसा आप उचित समझें.’

‘8 सौ रुपए महीना ठीक रहेगा?’

‘कल से पढ़ाना शुरू कर दूंगी. लेकिन मेरा काम?’

‘यह काम मेरा नहीं, भाभी के करने का है. आप उन्हीं से कहिएगा. आप उन्हें नहीं जानतीं, वे सबकुछ कर सकती हैं. वे जितने अधिकार से मेरी बात भैया तक पहुंचाती हैं, उतने ही अधिकार से आप की बात भी पहुंचाएंगी.’

इस के बाद उचितअनुचित बहुतकुछ हो गया. पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती रहती है और प्रकृति इस घूमती धरती के वासियों को किस्मकिस्म के अनजाने खेल खिला कर हंसाती, रुलाती रहती है.

उम्मीद से जल्दी ही राखाल बाबू का निधन हो गया. भाभी नयन को अपने घर ले आईं. दारुण दुखों की बेला में वह पूस की धूप की तरह नयन के जख्मों को ठोंकती हुई बोलीं, ‘अच्छाखासा लड़का देख कर तुम्हारे हाथ पीले कर दूंगी. बस, अपनी जिम्मेदारी खत्म. तब तक यहीं रहो, मेरी छोटी बहन की तरह.’

नौटी थोड़ाबहुत पढ़ने लगी थी. नयन यदाकदा विनायक को दिखाई पड़ जाती. हालांकि दोनों एक ही घर में रह रहे थे.

एक दिन नौटी ने विनायक से कहा, ‘चाचू, अपनी तसवीर बनवाओगे?’

‘तसवीर? तू बनाएगी?’

‘मैं नहीं, नयन दीदी बनाएंगी. उन्होंने मेरी और मां की तसवीरें बनाई हैं. तुम भी बनवा लो. सच, बहुत सुंदर बनाती हैं.’

अगले दिन नौटी, विनायक को जबरदस्ती नयन के कमरे में ले गई. उस समय वह कहीं बाहर गई हुई थी. किसी लड़की के कमरे में उस की अनुपस्थिति में घुसना अच्छी बात नहीं होती, लेकिन वह गया. नौटी की जिद के आगे, हार कर गया. कमरे में चारों तरफ विभिन्न आकार की लगी पेंटिंग्स को दिखलाते हुए नौटी ने सगर्व कहा, ‘देखा चाचू, मैं कहती थी न कि हमारी नयन दीदी…’

नौटी की बात पूरा होने से पहले नयन ने कमरे में अपने पैर रखे, ‘आप?’

लज्जा, शर्म से विनायक का चेहरा काला पड़ गया, जैसे कोई चोर चोरी के माल के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया गया हो.

‘क्षमा चाहता हूं. यह नौटी उचितअनुचित कुछ नहीं समझती.’

‘इस में अनुचित क्या हुआ?’ नयन सहजता के साथ बोली, ‘आप का घर है. मेरा तो यहां अपना चौका तक नहीं है. भाभी ने सबकुछ अपने में समेट लिया है वरना मैं आप को चाय पिलाती.’

‘इतनी सारी पेंटिंग्स स्कैच, सब आप ने बनाए हैं?’

‘हां.’

‘बहुत अच्छे बने हैं.’

‘जैसे भी हैं, ये मेरे अपनों जैसे अंतरंग हैं. ये मुझ से बातें करते हैं और मैं इन से बतियाती हूं. इन की बातें, इन के सुखदुख और दर्दव्यथाएं इन के चित्रों में भर देती हूं.’

रात को खाना खाते समय भाभी ने पूछा, ‘मुन्ना, बोल तो कैसा लगा?’

‘क्या, कैसा लगा?’

‘नयन का कमरा, उस की बनाई तसवीरें और वह खुद?’

उसे लगा, एक अपराधबोध, जो दब चुका था, फिर कराह बन कर उभर रहा है. विनायक को कोई जवाब न देता पा कर भाभी फिर कहने लगीं, ‘वैसे, लड़की है अच्छी, रंग थोड़ा दबा जरूर है पर चेहरे से नजर हटाने को जी नहीं चाहता. बंगालिन है, मांसमछली जरूर खाती होगी. अपना वैष्णवों का घर है. और फिर, हम बनिए हैं और वह ब्राह्मण. ब्राह्मण माने गुरुजन. बिना मांबाप की बेटी. उसे देख कर मन न जाने कैसा हो जाता है. कौन जाने किस कुपात्र, सुपात्र के हाथ पड़े. पर मन करता है कि मैं अपने वे कंगन नयन के हाथों में पहना दूं जो कभी मांजी ने मुझे पहनाए थे.’

‘भाभी, एक अनजान लड़की का इतना मोह,’ भाभी की व्यथा देख कर विनायक को अजीब सा लगा.

‘मुन्ना, वैसे एक बात मैं तुझे बता दूं, अगर मैं अपनी पर आ जाऊं तो तेरे भैया की मुझ से बाहर जाने की हिम्मत नहीं हो सकती. दुकान उन की है, पर यह घर मेरा है.’

‘भाभी, जो होना नहीं, उस पर इतनी मायाममता क्यों, किसलिए?’

‘होना तो नहीं है,’ भाभी आंचल से आंखें पोंछने लगीं, ‘अगर हो जाता तो सच, मैं जी जाती.’

‘मतलब यह कि तुम्हारी नजर में मेरी पसंदनापसंद कुछ नहीं?’

‘तू, तू क्या है, मेरी पसंद के सामने सिर झुका लेने के अलावा क्या कोई दूसरा उपाय है तेरे पास? तू मुझ से बाहर जाएगा तो मैं मर नहीं जाऊंगी. ’

विनायक की मुट्ठियां भिंच गईं, ‘मुझे भाभी का और भाभी को नयन का इतना मोह.’

‘भाभी को नयन इतनी अच्छी लगती है,’ विनायक बिस्तर में लेटा सोचता रहा, ‘काश, मैं पृथ्वीराज चौहान की तरह उस का हरण कर भाभी के चरणों में उसे डाल कर उन को सुखी कर सकता तो…’

उस रात विनायक देररात तक सो न सका. नीचे नयन के कमरे में बत्ती जल रही थी. विनायक शराब नहीं पीता, कोई दूसरा नशा भी नहीं करता, लेकिन नयन के कमरे में जल रही बत्ती को देख कर उसे ऐसा लगा, मानो तेज शराब की आधी से ज्यादा बोतल का नशा उस पर सवार हो गया हो. उन्मादी की तरह वह एक के बाद एक सीढि़यां लांघता हुआ बिना द्वार खटखटाए नयन के कमरे में घुस गया. वह तन्मय भाव से रंगों को स्कैच में भर रही थी. विनायक को देखते ही वह सख्त लहजे में बोली, ‘घड़ी इस वक्त रात के साढ़े 12 से ज्यादा बजा रही है. और आप बिना द्वार खटखटाए चुपके से एक चोर की तरह मेरे कमरे में घुस आए. आप को शर्र्म नहीं आई?’

विनायक की सांस फूल रही थी. होश या बेहोशी में उस के मुंह से निकला, ‘वैसे, पानी मक्खन से भी कोमल होता है, परंतु उन्माद आने पर वह मजबूत दीवार तोड़ डालता है. जो रोके रुक न पा रहा हो, मेरी दशा भी कुछ ऐसे ही पानी जैसी है. मैं आप से कुछ कहना चाहता हूं, कुछ मांगना चाहता हूं…’

‘आप होश में नहीं हैं. लगता है आप ने नशा कर रखा है. आप अभी जाइए.’

विनायक संभला नहीं और लड़खड़ा गया. फिर चीख कर बोला, ‘जब आप कहती हैं तो ठीक है, समझिए मुझ पर नशा ही सवार है. मगर किस का, यह आप समय रहने पर ही जानेंगी. बाकी आज मैं आप से अपनी बात कह कर रहूंगा, फिर चाहे जो भी हो जाए. चाहे मैं मर जाऊं, चाहे आप मर जाएं. लेकिन मैं…’

‘विनायक बाबू, इस वक्त आप जाइए. मैं आप की आश्रिता हूं. जो आश्रय देता है, वह महान होता है,’ इतना कहने के बाद उस ने पूरी शक्ति के साथ विनायक को अपने कमरे से बाहर ढकेल कर दरवाजा बंद कर लिया.

अगली सुबह नयन न जाने कहां चली गई. विनायक पूरी रात सो न पाया था. सुबह 6 बजे उस की पलक झपकी थी. तभी भाभी ने उसे झकझोर कर जगाया था, ‘मुन्ना, उठ तो. देख, नयन अपने कमरे में नहीं है. न जाने कहां चली गई. उस के कपडे़, उस की अटैची भी नहीं है. बाकी सबकुछ जैसा का तैसा पड़ा है.’

कमरे के बाहर एक नया दिन जन्म ले रहा था और भीतर, जहां विनायक लेटा था, एक अंधेरा फैलता जा रहा था. विनायक बड़बड़ाया, ‘भाभी, जाओ, अपना काम देखो. नयन को भूल जाओ. वह वापस न आने के लिए ही गई है.’

‘मेरी तो कोई बुरी इच्छा नहीं थी. मैं ने तो उस का देहईमान कभी पाना नहीं चाहा था,’ विनायक हथेलियों के बीच दोनों कनपटियां दबाए सोच रहा था, ‘आश्रयदाता कहां था? मैं तो भाभी की बात उस से कहने गया था. मगर कैसे, छिछि, सोच कर लज्जा आती है. प्रायश्चित्त, हां, मैं यही करूंगा. नौकरी, चाकरी, दुकान…कुछ नहीं करना है मुझे. अब मेरी कोई मंजिल नहीं है सामने, केवल रास्ते हैं. नयन से अधिक दीनहीन, बन कर अनजानी राहों पर भटकूंगा.’

विनायक कई बार नयन के कालेज गया. किसी ने कहा कि वह पहाड़ों पर चली गई है तो किसी ने बताया कि वह एक अनजाने गांव में अज्ञातवास कर रही है. वह सबकुछ छोड़छाड़ कर स्वयं को दंड देने के लिए अनजानी राहों पर निकल पड़ा. नयन की कहानियां, कविताएं, लेख प्रकाशित होते रहते थे, उन के जरिए उस ने उस का पता जानने की कोशिश की. हर बार एक पोस्टबौक्स नंबर उसे दे दिया जाता. वह वहां यानी पोस्टऔफिस पहुंचता पर पता चलता कि वह उस जगह को छोड़ कर कहीं और चली गई है. इसी तरह कई माह बीत गए.

और अब, चारों तरफ बर्फ ही बर्फ है. बिजली नहीं, पानी नहीं, खाना नहीं. जनशून्य धरती. दूनागिरि का एकाकी प्रवास और वह, तिलतिल कर पूरी तरह चुकचुका एक निस्सहाय जीव, धीरेधीरे मनमस्तिष्क पर सैकड़ों केंचुओं की तरह रेंगरेंग कर बढ़ रही अवचेतना.

सहसा कोई खट्टी सी, मीठी सी चीज विनायक को अपने गले के नीचे उतरती महसूस हुई.

‘‘कौन, बिमलजी?’’ आप लौट जाएं?’’ विनायक कराहा.

‘‘ज्यादा बात नहीं, अच्छे बच्चे की तरह, जो दिया जा रहा है, उसे लेते जाओ.’’

‘‘तो क्या आप बिमलजी की पत्नी हैं?’’

कोई जवाब न मिला. विनायक को लगा कि वह खट्टामीठा तरल पदार्थ ऐसे ही हजारों सालों से इन्हीं हाथों से पीता चला आ रहा है. 2 हाथ धीरे से रेंग कर उस के तलुए सहलाने लगे. तब ऐसा लगा, मानो प्राण आंखों तक लौट आए हैं.

उस ने धीरे से आंखें खोली, ‘‘नयन, आप?’’

‘‘आप नहीं, तुम कहो. मैं भी तुम्हें तुम ही कहूंगी.’’

‘‘यहां कैसे पहुंची?’’

‘‘रानीखेत के पोस्टऔफिस में अपनी डाक लेने गई थी,’’ नयन ने जवाब दिया, ‘‘वहां मुझे एक अधेड़ दंपती मिले. वहां तुम्हारा जिक्र होने से जाना कि तुम उन्हीं के मकान में रह रहे थे. बिमलजी की पत्नी कह रही थीं, ‘उस गाजियाबाद के आदमी को मरने के लिए अकेला छोड़ कर हम ने अच्छा नहीं किया,’ बस, मैं सब समझ गई कि वह तुम हो. उन से पता पूछ कर यहां चली आई.’’

‘‘लेकिन मैं, मेरा दोष, क्या तुम ने मुझे…?’’

‘‘गाजियाबाद में मेरी एक सहेली है, वह मुझे तुम्हारे, तुम्हारे घर के बारे में समाचार भेजती रहती है. उसी ने बताया कि तुम अपनी भाभी के हुक्म से उस रात मेरे कमरे में भाभी की बात कहने चले आए थे.’’

मेज पर रखे गुलदस्ते में 20 दिन पुराने गुलाब के फूल रखे थे. विनायक ने उस में से एक मुरझाया फूल निकाला, ‘‘जरा घूमो, तुम्हारे जूड़े में मैं यह गुलाब तो लगा दूं.’’

‘‘खबरदार, जो मेरे बालों में फूलवूल लगाया,’’ नयन ने आंखें तरेरीं, ‘‘मुझे तुम्हारा सामान बांधना है. पिघल रही बर्फ पर ड्राइवर जीप कैसे लाया और कैसे नीचे ले जाएगा, यह वह ही जानता होगा. जूड़े में लगा फूल देख कर वह क्या सोचेगा.’’

‘‘लेकिन यह फूल, इस का मैं क्या करूं?’’

‘‘संभाल कर रखे रहो. मैं ने गाजियाबाद फोन कर दिया है. अब तक भैया, भाभी और नौटी खुनौली पहुंच चुके होंगे. वहां चल कर भाभी के सामने यह फूल मेरे जूड़े में लगाना. अगर लगा सके तो मैं तुम्हारी गुलाम, वरना तुम्हें सारी जिंदगी मेरी…’’

‘‘देख लेना, भाभी के सामने मैं यह फूल लगा ही दूंगा. लेकिन तुम मेरी गुलाम बन कर नहीं, मेरी आंखों का तारा, मेरी नयनतारा बन कर रहोगी.’’

नीचे जीपचालक हौर्न बजा रहा था.

एक प्यार का नगमा: किस गैर आदमी से बात कर रही थी नगमा

नगमा आजाद खयाल की थी और वह मायके में सब को बहुत पसंद थी, मगर मुझे और मेरे परिवार वालों को इस तरह की आजाद परिंदों की तरह उड़ान भरने जैसी बातें कम ही रास आती थीं. नगमा ने अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रैजुएशन किया था और इतनी पढ़ाई उस के मायके से ले कर मेरे घर तक में किसी ने भी नहीं की थी.

आज नगमा को छोड़ कर कोई भी औरत हमारे घर में स्कूटी चलाना नहीं जानती है. बाजार स्कूटी से जाना और घरेलू सामान को खुद जांचपरख कर खरीदना उस को बेहद पसंद हैं. खरीदारी के लिए अकसर नगमा शहर के नामी मौल में जाना पसंद करती है पर सच कहूं तो मौल है बड़ी नामुराद जगह, वहां तो आदमी जरूरत के सामान से ज्यादा फालतू का सामान खरीद ले आता है. इस सामान के साथ यह औफर है तो उस सामान के साथ वह मुफ्त में मिल रहा है. अरे साहेब, जहां आज के दौर में पानी मुफ्त नहीं मिल रहा है तो कोई
कुछ और सामान मुफ्त मिलने की उम्म्मीद भी कैसे कर सकता है भला?

मौल के अंदर ऊपर वाले फ्लोर तक जाने के लिए नगमा हमेशा ही ऐस्कलैटर का प्रयोग करती है. अब भला यह भी कोई अच्छी तकनीक है, बस पैर जोड़ कर खड़े हो जाओ और ऊपर पहुंचने का इंतजार करो. कहीं पैर आगे बढ़ाने में जरा सा भी चूक गए तो मुंह के बल गिरने से कोई रोक नहीं सकता. अरे, कम से कम बगल में ही सुंदर सी सीढ़ियां भी तो बना रखी हैं, उन को काम में लाओ तो हाथपैरों में हरकत बनी रहे.

पर नगमा को तो हर नई चीज से प्यार हो जाता था. वैसे भी खरीदारी करते समय मैं सिर्फ गाड़ी में सामान रखने और भुगतान संबंधित काम ही देखता था बाकी खरीदारी के लिए तो जिम्मेदार नगमा ही थी.

एक दिन की बात है मैं नगमा के साथ खरीदारी करने के बाद घर पंहुचा ही था कि मेरा मोबाइल बजने लगा. नया नंबर था इसलिए जान नहीं सका कि उधर से कौन था पर कुछ देर बाद पता चला कि आदिल बोल रहा था.

आदिल मेरा चचेरा भाई था जो दुबई से भारत आ रहा था और आते ही मेरे घर पर रुकेगा ऐसा बता रहा था. उस की बातें सुन कर मेरा माथा बहुत बुरी तरह ठनका था क्योंकि मैं आदिल को बिलकुल पसंद नहीं करता था, जिस का कारण यह था कि आदिल भी नगमा के साथ अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी में पढ़ता था और दोनों में काफी लगाव भी था, कुछ ज्यादा ही लगाव जिसे प्यार की संज्ञा दी सकती है और इसी कारण दोनों के परिवार वालों ने आदिल और नगमा की शादी तय कर दी थी.

दोनों का निकाह हो ही गया होता अगर आदिल ने निकाह के ठीक बाद नगमा को अपने साथ दुबई ले जाने की शर्त न रख दी होती. हालांकि मैं अपने रिश्तेदारों से यह जान चुका था कि यह शर्त उस ने जानबूझ कर इसलिए रखी है क्योंकि वह भले ही प्यार तो नगमा से करता था पर नगमा के परिवार वालों की तरफ से जो दहेज उसे दिया जा रहा था उस से वह खुश नहीं था और कहीं और रिश्ता होने पर उसे ज्यादा रकम मिलने की उम्मीद थी. उसे लालच भी था, इसलिए आदिल ने यह दोहरी चाल चली.

आदिल जानता था कि नगमा के घर वाले उसे दुबई नहीं भेजेंगे क्योंकि वह उन की इकलौती लड़की है और नगमा की अम्मी भी बीमार रहती हैं.आदिल को नगमा से निकाह तोड़ देने में कोई बड़ी बात नहीं लगी बल्कि इस में भी नगमा के सामने वह उस के अम्मी और अब्बा को ही दोष देता
रहा.

निकाह टूटने के बाद नगमा अवसाद का शिकार होने लगी तो मेरे अब्बू ने आगे बढ़ कर नगमा और मेरा निकाह करा दिया. मैं तो अब्बू की मरजी के आगे कुछ बोल न सका और वैसे भी नगमा जैसी खूबसूरत लड़की को ठुकराने का कोई मतलब ही नहीं था.

नगमा की हालत खराब हो रही थी. उस को उस हालत से निकालने में मेरा किरदार अहम रहा. मैं ने नगमा को समझाया कि जो भी हुआ है उस में उस का कोई दोष नहीं है. यह सब सिर्फ आदिल के लालच के कारण हुआ है. अगर इस में किसी को भी शर्मिंदा होने की जरूरत है तो वह आदिल है.

मेरी लाख कोशिशों के बाद नगमा के चेहरे पर ही मुसकराहट आई थी पर भला मुझे क्या पता था कि आज इतने सालों बाद आदिल फिर सामने आ कर खड़ा हो जाएगा और मेरे और नगमा के पूरे वजूद को हिला कर रख देगा.

फिर जब नगमा से इतनी ही तल्खी हो गई थी तो आज आदिल मेरे पास क्यों आ रहा है? वह नगमा से कैसे मिलेगा? क्या उसे शर्म नहीं आएगी? और फिर वह मेरी और नगमा की शादी के बारे में भी सब जानता है.

अगली सुबह ही आदिल हमारे घर पर आ गया. कई बड़ेबड़े ब्रीफकेस और बैग थे उस के साथ. हां, यह जरूर कहना पड़ेगा कि पहले से अधिक खूबसूरत हो गया था आदिल. गोरा रंग, लंबा कद, क्लीन शेव, चेहरा और आंखों पर महंगा चश्मा.

उसे देख कर मुझे जलन हो रही थी. शायद इसलिए क्योंकि आज आदिल हर तरीके से मुझ से बेहतर माली हालत में था और नगमा व आदिल के पहले के रिश्तों के बारे में मुझे पता था.

आदिल ने आते ही समां बांध दिया. अम्मीअब्बू के लिए दुबई से चश्मे का फ्रेम, मेरे लिए पेन का सैट और इत्र. हमारी बेटी फुजला के लिए गुड़िया और विदेशी खिलौने वगैरह… यह सब देख कर मैं अंदर ही अंदर जला जा रहा था रहा था.

इतने में आदिल ने एक गिफ्ट का छोटा सा डब्बा नगमा की तरफ बढ़ा दिया. नगमा ने मुझ से इशारोंइशारों में ही पूछा कि तोहफा स्वीकार करूं या नहीं? मैं ने भी आंखों से ही उसे बता दिया. नगमा ने हाथ बढ़ा कर गिफ्ट ले लिया.

आदिल की यह बात मुझे बिलकुल अच्छी नहीं लग रही थी या उस के रसूख के सामने मैं अपनेआप को कमतर महसूस कर रहा था. ड्राइंगरूम में पार्टी जैसा माहौल था. फुजला आदिल के साथ बेफिक्री से खेल रही थी और अम्मी और अब्बू को आदिल दुबई की शान और
शानोशौकत भरी जिंदगी के बारे में बारबार बता रहा था. आदिल की सारी अदाएं देख कर मैं ने भी अपने चेहरे पर एक फर्जी मुसकराहट चिपका ली गोया मुझ पर उस की इन सब बातों का कोई असर ही न हो रहा हो पर अंदर ही अंदर मैं कुढ़ रहा था. तभी आदिल ने घूमने जाने का प्लान बना लिया.

“इमामबाड़ा और चिड़ियाघर घूमे हुए काफी समय हो गया है. चलो हम सब लोग घूम कर आते हैं,” आदिल ने मुझ से भी साथ चलने को कहा.

मन में तो आया कि तुरंत ही मना कर दूं पर मुझे लगा की ऐसा कहना गलत होगा. बड़े ही भारी मन से मैं ने चलने के लिए हामी भर दी. हम सब दिनभर घूमफिर कर शाम को घर आए. मन और दिमाग पूरी तरह से थक चुका था. रास्ते में नगमा आदिल से काफी बेपरवाही से बात कर रही थी. मैं ने कनखियों से कई बार देखा भी कि नगमा आदिल की हर बात में हामी भर रही थी. रैस्टोरेंट में भी दोनों ने एकदूसरे की थाली से खाने की चीजों की अदलाबदली करी.

मेरे दिल का हाल सिर्फ मैं ही जानता था. शाम को सिरदर्द का बहाना बना कर मैं कमरे में लेट गया पर नींद आंखों से कोसों दूर थी. कारण था ड्राइंगरूम से आदिल और नगमा की हंसती हुई आवाज… कमबख्तों को इतना भी लिहाज नहीं है कि अम्मीअब्बू के सामने जरा कम बात करें पर आंखों का पानी तो बिलकुल ही मर गया है.

रात में मुझे 2 बजे नींद आई या 3 बजे मुझे कुछ नहीं पता. सुबह आंख खुली तो देखा कि नगमा किचन में व्यस्त थी. अच्छा तो मैडम अब नाश्ता भी आदिल की पसंद से ही बनाएंगी, पर कुछ भी हो अब मैं यह लैलामजनू की कहानी और नहीं सहन कर पाऊंगा. मैं आज ही आदिल से साफसाफ बात कर लेता हूं कि भाई देखो, रिश्तेदारी तो अपनी जगह है पर शादीशुदा जिंदगी अपनी जगह है. वह मेरी जिंदगी में और जहर न घोले और यहां से चला जाए. अपने मन में एक कड़ा निश्चय ले कर बिस्तर से उठा और नहाधो कर नाश्ते की टेबल पर जा बैठा. सब लोग वहां पहले से ही बैठे हुए थे. नगमा भी अपनी हर्बल चाय ले कर आ गई थी. वहां पर आदिल नहीं था. पूछने पर पता चला कि बाहर घूमने गए थे अब तक लौटे नहीं. उस का यहां न होना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

तभी मेज पर रखा हुआ नगमा का मोबाइल बज उठा. मेरी नजरों ने आंखों के कोने से देखा, स्क्रीन पर आदिल का नाम लिखा आ रहा था. मुझे ऐसा लगा कि नगमा ने मेरी नजरों से बचते हुए मोबाइल को उठा कर कान से लगा लिया हो और किचन की तरफ बात करते हुए बढ़ गई हो. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था कि आखिर नगमा ने मेरे सामने वहीं पर बात क्यों नहीं की? किसी का भी फोन होता है तो नगमा मेरे सामने ही बात कर लेती है फिर आज आदिल का फोन आने पर वह किचन में क्यों चली गई?

दिमाग में बवंडर चलने लगा. सामने प्लेट में नाश्ता पड़ा हुआ था पर मेरी आंखों को वह सब नहीं दिखाई दे रहा था. हालांकि नगमा 10 मिनट बाद ही वापस आ गई थी पर मेरे लिए यह 10 मिनट 10 साल जैसे लग रहे थे.

नगमा एकदम शांत सी लग रही थी. उस के चेहरे पर किसी भी तरह के भाव पढ़ पाने में मैं नाकाम था. क्या पूछूं और कैसे पूछूं? नगमा मेरे इस तरह से उस के फोन की जासूसी करने पर क्या कहेगी?

पर इस तरह से आदिल का नगमा के मोबाइल पर फोन आना मुझे नागवार गुजर रहा था और मैं बेचैन था कि मैं कैसे उन दोनों के बीच की बातों को जान या सुन सकूं. मुझ से नाश्ता नहीं किया गया. मैं बालकनी में जा कर टहलने लगा था और दिमाग लगा रहा था कि दोनों के बीच की बातों को कैसे जाना जाए?

अचानक से मुझे मोबाइल फोन के कौल रिकौर्डर का ध्यान आया जोकि लगभग हर मोबाइल में होता है और जिस में हर आने जाने वाली कौल रिकौर्ड हो जाती है. ऐसा सोच कर मुझे कुछ सुकून मिला. अब मैं काफी रोमांचित महसूस कर रहा था और काफी उत्तेजित भी हो रहा था. अब तो मुझे नगमा के मोबाइल की तलाश थी और वह तलाश जल्दी ही खत्म हो गई जब नगमा ने मोबाइल को नाश्ते की टेबल पर ही रख दिया और बरतन समेट कर किचन में चली गई.

मैं ने मौका ताड़ा और नगमा का मोबाइल ले सीधा अपने कमरे में घुस गया और कमरा बंद कर लिया और मोबाइल में कौल रिकौर्डर को ढूंढ़ने लगा.

शुक्र था कि इस मोबाइल में कौल रिकौर्डर था. आवाज बाहर न जाए इसलिए मैं ने कान में ईयरफोन लगा लिया और दोनों के बातचीत की रिकौर्डिंग सुनने लगा…

“हैलो… हां, हैलो नगमा. देखो फोन मत काटना. मुझे तुम से कुछ बात करनी है. मैं अपनी उस हरकत पर बहुत शर्मिंदा हूं कि मैं ने तुम से निकाह तोड़ दिया था. दरअसल, उस समय हालात ही कुछ ऐसे थे कि मुझे दुबई जाने के लिए पैसों की जरूरत थी और इसलिए मैं ने तुम से निकाह न कर के किसी दूसरी जगह निकाह किया पर उस लड़की से शादी करना मेरी बड़ी भूल साबित हुई. मैं उस से शादी कर के आज तक खुश नहीं
हो पाया हूं.”

“पर तुम आज यह सब बखेड़ा इस तरह से फोन पर क्यों बता रहे हो मुझे?” नगमा बोल रही थी.

“हा, जो गलती मैं ने कर दी थी उसे अब सुधारना चाहता हूं. मैं जानता हूं कि तुम्हारा निकाह करना भी एक समझौता ही था जो तुम ने हालात से मजबूर हो कर किया था… मैं भी दुखी और तुम भी परेशान… क्यों न हम दोनों एक नई जिंदगी की शुरुआत करें?

“मैं ने अपनी वाइफ को तलाक दे दिया है और यही मैं तुम से भी चाहता हूं कि तुम भी अपने शौहर को तलाक दे दो. मैं फुजला को भी अपना लूंगा…”आदिल कहे जा रहा था.

फोन पर थोडी देर सन्नाटा रहा. मैं नगमा का जवाब सुनने के लिए मरा जा रहा था.

“सुनो आदिल, जो हुआ जैसे भी हुआ वह सही ही था. तुम्हारे जैसे दहेज के लालची का क्या भरोसा? तुम जैसे लोग तो दहेज के लिए किसी लड़की की जान लेने से भी बाज नहीं आते और रही बात मेरे शौहर की तो उन से बेहतर शौहर मिलना तो मुमकिन ही नहीं है मेरे लिए… उन्होंने मुझे हर तरीके की आजादी दी है और मेरे हर काम में सहयोग करते हैं.

“बुरे वक्त में उन्होंने मुझे जो सहारा दिया वह किसी और के बस की बात नहीं थी.तुम ने यह बात सोच भी कैसे ली कि अब भी मैं तुम्हारी बन सकती हूं? मेरा तुम से हंसनाबोलना सिर्फ इसलिए है कि तुम मेरे शौहर के रिश्तेदार हो. तुम जैसे लोगों को बीवियां बदलने की आदत होती है जो मरते दम तक नहीं छुटती. पर मैं तुम्हे बता दूं कि मेरे शौहर मुझ से बहुत प्यार करते हैं जिस का सुबूत यह है कि मेरे और तुम्हारे बारे में जानने के बावजूद भी तुम्हारे यहां आने पर उन्होंने किसी तरह का सवाल नहीं उठाया.

“अब फोन रखो और दोबारा इस तरह करे बात करने की जुर्रत मत करना…”

फोन काटा जा चुका था. मैं ने एक लंबी सांस छोड़ी और मेरे सीने की धडकनें भी अब सामान्य हो रही थीं. मैं ने नगमा का मोबाइल नाश्ते की टेबल पर रख दिया. नगमा अब भी किचन में सफाई कर रही थी. अब्बू टीवी पर एक फिल्मी गाना देख रहे थे जिस के बोल थे,’एक प्यार का नगमा है…’

मेरी नगमा भी तो प्यार का नगमा ही ही है.

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