क्या है स्लीप टूरिज्म

कोविड अब ओवर हो चुका है, इस के बाद से लोगों ने स्वास्थ्य पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. इस में सब से जरूरी सुकून भरी नींद लेने को माना जाने लगा है और इस में विकसित हुआ है स्लीप टूरिज्म, जिस में व्यक्ति रात के 8 बजे सोने चला जाता है. वहां उसे शहर की भागदौड़ और शोरशराबे से दूर शांत जगह मिलती है. इतना ही नहीं इस पर्यटन में काम से थोड़े दिन की छुट्टी ले कर अकेले कहीं घूमने का शौक पूरा होने के साथसाथ तरोताजा होने का भी अवसर मिल जाता है.

दरअसल, यह स्लीप टूरिज्म रिलैक्स होने की एक तकनीक है, जो विदेशों में अधिक पौपुलर है. इस में शांत वातावरण होने की वजह से स्ट्रैस को कम करने में मदद मिलती है, साथ ही स्लीप क्वालिटी को बूस्ट करने का भी अवसर मिलता है क्योंकि ऐसा माना गया है कि अगर व्यक्ति की नीद पूरी होती है, तो उस का स्ट्रैस लैवल भी कम हो जाता है.

इस का क्रेज अधिकतर बड़े शहरों में रहने वालों में बड़ा है, जहां काम के प्रैशर के साथसाथ ट्रैवलिंग भी अधिक होती है. इसलिए स्लीप टूरिज्म का विकास भी तेजी से होने लगा है. अधिकतर होटल्स और रिजोर्ट्स स्लीप टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए तरहतरह के लुभावने औफर आजकल टूरिस्ट को देने लगे हैं.

महाराष्ट्र के तपोला के ओंकार रिजोर्ट के गणेश उतंकर कहते हैं कि टूरिज्म के लिए लोग हर जगह से आते हैं, लेकिन वही भीड़, वही आवाज, शोर सब होता है. वे घूमने तो जाते हैं, लेकिन उन्हें शांति नहीं मिलती है. ऐसे में आजकल लोग केवल सोने के लिए भी मेरे पास आते हैं, जिस में दिन में 2 वक्त का खाना खाने के बाद खुद को रिलैक्स करना होता है. वे अधिकतर अकेले आते हैं. इस में मूड को अच्छा बनाने के लिए वे वैली व्यू, रिवर व्यू, घने जंगल आदि को अधिक महत्त्व देते हैं क्योंकि वहां केवल एक चिडि़या की आवाज से ही उन की नींद खुलती है. वहां उन्हें पूरी शांति मिलती है.

ऐसी जगह नियमित आने वाली पुणे की लीना कहती है, ‘‘मैं हर साल यहां रिलैक्स के लिए आती हूं. यहां बहुत शांति है. व्यस्त जीवनशैली से यहां आ कर खाना खा कर मैं सिर्फ 2 घंटे सोने के बाद खुद को तरोताजा महसूस कर रही हूं. मेरी नींद इतनी गहरी थी कि मेरी सारी थकान दूर हो चुकी है.’’

40 वर्षीय विजय धूमा कहते हैं, ‘‘मुझे तपोला बहुत पसंद आता है, मुझे जब भी समय मिलता है, मैं कही शांत जगह जाता हूं.’’

आईटी सैक्टर में काम करने वाली 26 वर्षीय रोमा भी हर साल स्लीप टूरिज्म के लिए शांत जगह जाती है, जिस में उसे हिल स्टेशन पर जाना अधिक पसंद है जहां वह हर दिन 8-9 घंटे सोती है.

पुराने समय में लोग एक पेड़ के नीचे सो कर सुकून भरी नींद लेते थे. आजकल वैसा ही टूरिज्म हो चुका है क्योंकि आज किसी भी क्षेत्र में काम में मानसिक तनाव अधिक होता है और उन्हें नीद की कमी की शिकायत रहती है.

स्लीप टूरिज्म के फायदे

  •  ग्लोबलाइजेशन की वजह से रातभर जाग कर काम करने वालों के लिए स्लीप टूरिज्म फायदे का होता है.
  • अधिक तनाव लेने वालों के लिए यह एक बेहतर औप्शन है, व्यक्ति मानसिक रूप से बना मजबूत होता है.
  • सही नींद लेने से बारबार बीमार पड़ने में कमी आती है.
  • वजन बढ़ने का खतरा कम रहता है.

जाएं कहां

स्लीप टूरिज्म पर जाने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है जैसे स्लीप टूरिज्म के लिए प्रौपर हिल स्टेशन पर सही रिजोर्ट में जाएं. वहां आसपास 200 से 300 मीटर्स में कोई रिजोर्ट, होटल या किसी भी प्रकार की ऐक्टिविटीज नहीं होनी चाहिए.

रिजोर्ट के आसपास पेड़पौधे होने की जरूरत है ताकि व्यक्ति को रिलैक्स महसूस हो. महाराष्ट्र में ऐसे बहुत सारे रिजोर्ट्स हैं, जो वैली और रिवर साइड में उपस्थित हैं. वहां का वातावरण स्लीप टूरिज्म के लिए बहुत पौपुलर है. इन में महाबलेश्वर, पंचगनी, तापोला आदि ऐग्रोबेस्ड टूरिज्म हैं, जहां अधिकतर शांत वातावरण मिलता है.

अवौइड करें

  •   खुद को मोबाइल से दूर रखें या फिर साइलैंट मोड पर रखें.
  • आप की सवारी रखने की जगह थोड़ी दूर हो.
  • कम से कम तकनीकी सुविधाओं वाले स्थान पर जाएं. इस से रिलैक्सेशन अधिक होता है.
  • डाइट में पारंपरिक भोजन अधिक लें क्योकि लग्जरी फूड से नीद में कमी आती है.

ज्वाइंट फैमिली में रहने के कारण मैं परेशान हो गई हूं?

सवाल-

मैं 26 वर्षीय विवाहिता हूं. हमारा संयुक्त परिवार है. शादी से पहले ही हमें यह बता दिया गया था कि मु झे संयुक्त परिवार में रहना है. वैसे तो यहां किसी चीज की दिक्कत नहीं है पर ससुराल के अधिकतर लोग खुले विचारों के नहीं हैं, जबकि मैं काफी खुले विचार रखती हूं. इस वजह से मु झे कभीकभी उन की नाराजगी भी सहनी पड़ती है और खुलेपन की वजह से मेरी ननदें व जेठानियां मु झे अजीब नजरों से भी देखती हैं. पति को कहीं और फ्लैट लेने को नहीं कह सकती. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब-

घरपरिवार में कभीकभी कलह, वादविवाद,  झगड़ा आम बात है. मगर परिवार फेसबुक अथवा व्हाट्सऐप की तरह नहीं है जिस में आप ने सैकड़ों लोगों को जोड़ कर तो रखा है, मगर आप को कोई पसंद नहीं है तो आप उसे एक ही क्लिक में एक  झटके में बाहर कर दें.

इस बात की कतई परवाह न करें कि परिवार के कुछ सदस्य आप को किन नजरों से देखते हैं और कैसा व्यवहार करते हैं. अच्छा यही होगा कि अपनेआप को इस तरीके से व्यवस्थित करें कि आप हमेशा खूबसूरत इंसान बनी रहें. कोई कैसे देखता है यह उस पर है.

आजकल जहां ज्यादातर लोग एकल परिवारों में रहते हुए तमाम वर्जनाओं के दौर से गुजरते हैं, वहीं आज के समय में आप को संयुक्त परिवार में रहने का मौका मिला है, जिस में अगर थोड़ी सी सू झबू झ दिखाई जाए तो आगे चल कर यह आप के लिए फायदेमंद ही साबित होगा.

बेहतर यही होगा कि छोटीछोटी बातों को नजरअंदाज करें और सब को साथ ले कर चलने की कोशिश करें. धीरेधीरे ही सही पर वक्त पर घर के लोग आप को हर स्थिति में स्वीकार कर लेंगे और आप सभी की चहेती बन जाएंगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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मायूस मुसकान: आजिज का क्या था फैसला

लेखिका- रोचिका अरुण शर्मा

 

यों ही अचानक: भाग 1- अकेले पड़ गए मुकुंद की जिंदगी में सारिका को क्या जगह मिली

होता,बहुत कुछ यों ही होता है अचानक, वरना 46 साल के सीधे से बिलकुल चुपचुप रहने वाले मुकुंद प्रधान की एक प्रेम कहानी नहीं बनती और वह भी पत्नी की मृत्यु के बाद.

मुकुंद प्रधान तो ऐसे व्यक्ति हुए कि वे सरेआम किसी लड़की को चूम भी रहे हों तो लोग अपनी आंखों को गालियां देते निकल जाएंगे, लेकिन अपनी आंखों पर भरोसा कभी न करेंगे.

बच्चों के डाक्टर उम्र तो बता ही दी, कदकाठी मध्यम. देखनेभालने की बात निकल ही आती है जब प्रेम प्रसंग की बात छिड़े. तो अपने मुकुंद प्रधान यद्यपि देखने में उतने बुरे भी नहीं थे, फिर भी कमसिन स्त्रियों की नजर उन पर कम ही पड़ती. गेहुंए वर्ण का एक सामान्य सा दिखने वाला व्यक्ति, मूंछें नदारद और आंखें. शायद जबान का काम करती.

बच्चों के मैडिसिन के डाक्टर थे. आए दिन गरीब बच्चों का मुफ्त इलाज करते. रविवार अपने बेटे के साथ समय बिताते. नीलिमा यद्यपि डाक्टर साहब की आगे की जिंदगी में भले ही न हों, मगर उन्हें भुलाया भी नहीं जा सकता.

नीलिमाजी डाक्टर साहब की सिर्फ अर्द्धांगिनी ही नहीं थीं, बल्कि वे डाक्टर साहब के साथसाथ पूरी कालोनी की आंखों का तारा भी थीं. गांव की सरल सी स्त्री, सीधीसादी, सूरत भोली सी. महल्ले भर में किसी को कोई तकलीफ हो नीलिमा दौड़ी जातीं. डाक्टर साहब की तो हर वक्त सेवा में मुस्तैद.

हां डाक्टर साहब और उन की पत्नी के दिल में तब चुभन सी हो जाती जब उन के इकलौते बेटे निलय की बात छिड़ जाती. 12 साल का यह बच्चा सैरेब्रल पैलेसी का शिकार था. कमर से लाचार था निलय और चलनेफिरने में उसे बहुत तकलीफ थी. नीलिमाजी इस बच्चे के उपचार के लिए आए दिन बड़ेबड़े डाक्टरों और विशेषज्ञों के चक्कर लगातीं, घर पर भी ज्यादा वक्त उसे व्यायाम करवाती रहतीं.

दूसरे शहर से खबर आई थी कि नीलिमाजी के ननदोई की तबीयत ज्यादा खराब है  और उन्हें अस्पताल में भरती करवाया गया है. नादान और सारी स्थितियों को संभालने में अक्षम. नीलिमा दौड़ी गईं ननद के पास. 3 दिन बाद वहां स्थिति कुछ सही हुई और ननद के जेठजेठानी ने आने की खबर दी तो वे वहां से वापसी का मन बना पाईं. ननद के घर से बसस्टैंड 5 किलोमीटर था. ननद के बेटे को सुबह 5 बजे स्कूटर से उन्हें बसस्टैंड तक छोड़ने को कहा गया. 2 रातों से सोई नहीं थीं नीलिमा, और उन का बीपी भी हाई रहता था. स्कूटर के पीछे बैठी नीलिमा कब नींद से बोझिल हो सड़क पर लुढ़क गईं और किस तरह अचानक सबकुछ खत्म हो गया, कोई कुछ समझ ही नहीं पाया.

एकाएक जैसे दुनिया चलती सी रुक गई थी. डाक्टर साहब जैसे बीच समंदर में फेंक दिए गए थे. दिनोंदिन उदास, चुपचुप और खुद में ही वे सिकुड़ते चले गए. निलय बीचबीच में दहाड़ें मार कर रोता और डाक्टर साहब के चुप कराने पर भी चुप नहीं होता. 3 महीने हुए थे उन की जिंदगी वीरान हुए और करीब 6 महीने पहले वे आईर् थी, ठीक उन के घर के सामने इस मकान में. वह सारिका थी, सुदेश की नई सी दिखने वाली 7 साल पुरानी 27 वर्षीय पत्नी. इन का एक 5 साल का बेटा अंकित भी साथ था.

सुदेश के कई तरह के व्यवसाय थे. 6 महीने पहले ये लोग डाक्टर साहब के घर के सामने वाला मकान खरीद कर यहां आ बसे थे.

36 साल के सुदेश महोदय की यह दूसरी शादी है. उन की पहली शादी टिकी नहीं. पत्नी ज्यादा सहनशील नहीं थी. जैसाकि आमतौर पर भारतीय महिलाओं के असंख्य गुणों में से एक माना जाता है.

सुदेश को बिजनैस ट्रिप पर जा कर नशा करने और खूबसूरत लड़कियों को बिस्तर की संगिनी बनाने का बेहद शौक था. पहली पत्नी इन की कुछ तेज किस्म की थीं. उन की खोजी दृष्टि से सुदेश बच न पाए और बीवी ने भी इस तरह घुटघुट कर जीने से बेहतर अलग हो जाना ही ठीक समझ.

सारिका बड़े परिवार और सीमित आय वाले घर की है. पैसे वाले 2 बहनों पर इकलौते लड़के का रिश्ता आते ही 21 साल की सारिका किसी भी कीमत पर बख्शी न जा सकी, ‘हर मर्द ऐसा ही होता है,’ ‘पहली पत्नी ने बदनाम करने के लिए ऐसा कहा’ आदि तर्कों से सारिका की अनिच्छा को खारिज करते हुए उसे सुदेश को सौंप दिया गया. हां यह शादी सौंप कर मुक्त हो जाने जैसी ही थी.

जिंदगी से सम?ौता तो कर लिया था सारिका ने, लेकिन अंदर की घुटन बातबात पर फूट पड़ती. पहले से ही वह ज्यादा बात करने वालों में से थी, तिस पर अब जब जिंदगी के फैसलों के आगे उस की एक न चली तो छोटीछोटी बातों पर ही वह खाने को दौड़ती.

सुदेश 2-4 दिन घर आता और निकल जाता. सारिका महसूस करती कि बिजनैस के साथसाथ उस की निजी जिंदगी के गहराए रहस्य उस के पति को बाहर दौड़ाते रहते.

आज भी वह अकेले ही बड़बड़ाती, भुनभुनाती बच्चे को स्कूल के लिए तैयार कररही थी.

बच्चा लगातार रो रहा था. सारिका को लगा बाहर स्कूल वैन आ चुकी है. वह दौड़ती गेट पर आई, वैन तो आई नहीं थी, लेकिन वह वहीं खड़े चिल्ला पड़ी, ‘‘सुबह से दहाड़ें मार रहा लड़का. पता नहीं चुप क्यों नहीं होता?’’

पास ही सामने गेट पर डाक्टर साहब अपने मुकुंद प्रधान खड़े निलय के स्कूल की गाड़ी का इंतजार कर रहे थे. उधर आंगन में बैठा निलय आधे घंटे से रोता हुआ अभी भी मां की याद में सुबुक रहा था.

सारिका के इस तरह कहने पर डाक्टर साहब बड़े लज्जित हुए. सैरेब्रल पैलेसी का शिकार निलय अपनी भावनाओं को बड़ी मुश्किल से दबा पाता है. वैसे तो पढ़ने में बड़ा होशियार है, ज्यादा शांत बैठ कर ड्राइंग आदि करता रहता है, लेकिन स्कूल जाते वक्त उसे मां की याद बड़ी सता जाती है. वह रोक नहीं पाता खुद को. डाक्टर साहब भी थोड़ी देर सहला कर छोड़ देते हैं. जितना ही वे उसे चुप कराते हैं, उस का दुख बढ़ ही जाता.

मुकुंदजी ने सारिका की ओर पलट कर देखा. आंखों में उन की मूक दर्द सा था. सारिका की उन पर नजर पड़ी. अभी तक 6 महीने बीत चुके थे, पर कभी भी उन से बातचीत नहीं हुई थी उस की. नीलिमाजी से परिचय होतेहोते ही वे चल बसीं. फिर सारिका की उन लोगों में दिलचस्पी नहीं रही. बेटे के स्कूल जाने के बाद वह घर के कामकाज और सिलाईबुनाई में व्यस्त हो जाती.

सारिका को महसूस हुआ कि उस का कहना डाक्टर साहब ने अपने बेटे के लिए समझ है. अभी वह बहुत जल्दी में थी, निलय की स्कूल वैन आ गई थी, वह जा चुका था, लेकिन सारिका का अपने बेटे को स्कूल वैन में बैठाना टेढ़ी खीर लग रहा था. लड़का कुछ ज्यादा ही अड़ गया.

डाक्टर साहब अचानक आगे आए और बच्चे को गोद में ले लिया. उसे पता नहीं कैसे बहलायाफुसलाया, लड़का स्कूल वैन में आराम से बैठ गया. उस के जाने के बाद सारिका मुकुंदजी की ओर बढ़ आई. कहा, ‘‘मैं ने अपने बेटे के बारे में कहा था कि दहाड़ें मार रहा है.’’

‘‘कोई बात नहीं,’’ डाक्टर साहब कह कर अंदर जाने लगे तो सारिका को अपनी बात पर अफसोस हो रहा. वह उन के पीछेपीछे अंदर तक आ गई.

डाक्टर साहब ने अचानक पीछे मुड़ कर उसे देखा तो ठिठक गए.

‘‘मुकुंदजी आज चाय मैं आप को पिलाती हूं,’’ सारिका मनुहार सी करने लगी.

‘‘चाय मैं पी चुका हूं, अब टिफिन तैयार कर क्लीनिक के लिए निकलूंगा,’’ डाक्टर साहब पिघलने को तैयार नहीं थे.

फ्रिंज हेयर कट देगा आपको कौंफिडेंट लुक

आपको साठ के दशक की फिल्म “लव इन शिमला” तो याद होगी ना, जिसमें अभिनेत्री साधना की अदाकारी से लेकर उनका हिट हेयर स्टाइल ने सबके दिलों को जीत लिया था. उस फिल्म के बाद से आज तक ‘साधना कट’ हर महिला का पसंदीदा हेयरकट बन गया है. इसके अलावा आपने कई इंडोर्समेंट इवेंट्स में बौलीवुड सुंदरियों जैसे प्रियंका चोपड़ा, दीया मिर्जा, काल्कि कोचलिन, कटरीना कैफ आदि को भी इस फ्रिंज हेयर कट में देखा होगा.

फ्रिंज या बैंग हेयर स्टाइल एक ऐसा हेयर स्टाइल है जो सही मायनो में चेहरे को हाईलाइट कर आपको एक नया लुक देता है. लेकिन फ्रिंज कट को अपनाने से पहले कुछ खास बातों को ध्यान में रखना जरूरी है, आइये जानते हैं इसके बारे में –

कैसे फेस कट पर कैसी फ्रिंज कट फबेगी

ओवल फेस

ओवल फेस यानी अंडाकार चेहरा. इस तरह के चेहरे पर हर तरह का हेयर कट अच्छा लगता है. फ्रिंज के अलावा आप रेजर्ड, एंगल्ड या असीमिट्रिकल, साइड स्विफ्ट, पार्टेड या ब्लंट बैंग आदि हेयर कट भी ट्राई कर सकती हैं, ये आपको दुसरें से हटकर व एक कौंफिडेंट लुक देता है.

राउंड फेस कट के लिए

गोल पर रेजर्ड या स्ट्रेट फ्रिंज अच्छी लगेगी. यदि आपके गाल उभरे हुए हैं तो ऐसे में फ्रिंज, मांग के दोनों तरफ या साइड पर हों तो चेहरा को एक नया लुक मिलेगा जो देखने में काफी सुन्दर लगेगा.

लंबा फेस कट

लंबे चेहरे पर माथे से आती गालों तक व मांग के दोनों छोर पर बिखरी ब्लंट फ्रिंज चेहरे को अंडाकार लुक देती है.

स्क्वायर शेप

अगर आपका चेहरा स्क्वायर शेप का है तो ऐसे में साइड व सेंटर पार्टिंग के दोनों ओर व गालों तक आती इनवर्ड रोल (अंदर की ओर मुड़ी हुई) व कर्व (घुंघराली) फ्रिंज चेहरे को नया आकार देती है.

फ्रिंज वेरायटी के बारे में जाने

प्रमुख फ्रिंज वेराइटी हैं –

साइड स्विफ्ट फ्रिंज (मांग की एक तरफ से)

पार्टेड फ्रिंज (मांग के दोनों तरफ)

ब्लंट फ्रिंज (फ्रिंज को स्ट्रेटनिंग रोड से सीधा इनर रोल किया जाता है)

चौपी फ्रिंज (मांग की दोनों या एक तरफ व फ्रिंज में बालों की थिक लेयर)

असीमिट्रिकल फ्रिंज (मांग के दोनों ओर या एक तरफ बालों में रेजर कट दिया जाता है और इन्हें बाउंसी व शोर्ट कट दिया जाता है ताकि किसी तरफ से मांग निकालने पर फ्रिंज trimmed व Even दिखते हैं)

कुछ महत्त्वपूर्ण बातें और

फ्रिंज स्टाइल स्ट्रेट व बाउंसी बालों में अधिक अच्छा लगता है. बालों को वेवी व बाउंसी दिखाने के लिए फ्रिंज में बालों की थिक लेयर व क्राउन (माथे का सेंटर प्वाइंट) से लेकर फोरहेड तक फ्रिंज कटवाए, महीने में एक बार इन्हें ट्रिम जरूर करवाएं. तैलीय और कर्ली बालों में फ्रिंज कट नहीं जंचता है.

इसके अलावा ऊंचे माथे पर आईब्रो तक आती पतली व लंबी फ्रिंज, छोटे माथे पर सीधी व छोटी फ्रिंज, चौड़े माथे को छुपाने के लिए फ्रिंज थिक शार्ट लेन्थ होनी चाहिए.

प्रेग्नेंसी के बाद कम करना है वजन तो अपनाएं ये आसान तरीके

प्रेग्नेंसी के बाद वजन घटाना एक बड़ी चुनौती होती है. आमतौर पर प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं का वजन बढ़ जाता है और आपकी लाख कोशिशों के बाद भी वो अपना वजन कम नहीं कर पाती. इस खबर में हम आपको उन तरीकों के बारे में बताएंगे जिनकी मदद से आप प्रेग्नेंसी के बाद भी अपना वजन कम कर सकेंगी.

 खूब पीएं पानी

पानी पीना वजन कम करने का सबसे आसान तरीका है. अगर आप सच में अपना वजन कम करना चाहती हैं तो अभी से रोजाना 10 से 12 ग्लास पानी पीना शुरू कर दें.

टहला करें

प्रेग्नेंसी के बाद वजन कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप वौक शुरू करें. कई रिपोर्टों में भी ये बाते सामने आई है कि प्रेग्नेंसी के बाद वजन घटाने के लिए जरूरी है टहलना.

खाना और नींद रखें अच्छी

आपको बता दें कि तनाव और नींद पूरी ना होने से कई तरह के रोग हो जाते हैं. इसके अलावा आप बाहर का खाना बंद कर दें. घर का बना खाना खाएं और पर्याप्त नींद लें. स्ट्रेस ना लें. खुद को कूल रखें.

बच्चे को कराएं ब्रेस्टफीड

आपको ये जान कर हैरानी होगी पर ये सच है कि ब्रेस्टफीड कराने से महिलाओं के वजन में तेजी से गिरावट आती है. और इस बात का खुसाला कई शोधों में भी हो चुका है. ब्रेस्टफीड कराने से शरीर की 300 से 500 कैलोरी खर्च होती है. कई जानकारों का मानना है कि स्तमपान कराने से महिलाओं का अतिरिक्त वजन कम होता है.

ऐसे बनाएं स्वादिष्ट रशियन सलाद

सामग्री

– फ्रेंच बीन्स (½ कप)

– गाजर, हरे मटर और आलू (कटे और आधे उबले)

–  कैन्ड पाइनएप्पल (½ कप कटी हुई)

– क्रीम (½ कप)

– मेयोनीज़ (½ कप)

– चीनी (½ टी स्पून)

-नमक (स्वादानुसार)

– काली मिर्च(कम मात्रा में)

बनाने की विधि

– एक बड़ा प्याला लें और इसमें फ्रेंच बीन्स, गाजर, हरे मटर और आलू और पाइनएप्पल दाल दें.

– इसमें मेयोनीज़, नमक, चीनी और काली मिर्च डालकर सही तरह मिला लें.

– फिर इसमें ताजी क्रीम डालकर फिर से मिला लें.

– इसके बाद इसे कम से कम 1 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें.

लीजिए आपकी रशियन सलाद तैयार है, इसे ठंडा ही परोसें.

भैरवी: भाग 3- आखिर मल्हार और भैरवी की शादी क्यों नहीं हुई

उस समय डूबता सूरज जातेजाते दो पल को ठिठक गया था. सांझ अधिक सिंदूरी हो उठी थी और वक्त अपनी सांसें रोक कर थम गया था.

‘‘क्या सोच रही हैं मैडम? आप की चाय ठंडी हो रही है,’’ मोहना ने फिर उसे वर्तमान के कठोर धरातल पर ला पटका था, जहां न तो मोगरे से महकते बचपन की सुगंध थी और न ही गुलाब से महकते कैशोर्य की मादकता.

घड़ी की सूइयों के साथ समय अगले दिन मं प्रवेश कर चुका था. मां सुबहसुबह ही

एअरपोर्ट के लिए निकल गई थीं. दिन में मंत्री महोदय के साथ मीटिंग काफी अच्छी रही थी. मंत्री भी भैरवी के काम करने के तरीके से बहुत प्रभावित थे. वैसे भी लखनऊ जैसे शहर का जिलाधिकारी होना कोई मामूली बात नहीं थी, जिस में हर दिन उस का अलगअलग पार्टियों के नेताओं से आमनासामना होता रहता था. सभी से अच्छे संबंध बना कर रखना भैरवी को भलीभांति आता था.

दिनभर रहरह कर भैरवी को मल्हार का खयाल आता रहा, जबकि उसे यह भी ठीक तरीके से पता नहीं था कि यह वही ‘मल्हार वेद’ है अथवा नहीं. उस के मन में मल्हार के लिए कोई बेचैनी या तड़प नहीं थी, बस एक उत्सुकता भर थी कि वह अब न जाने कैसा दिखता होगा. उस ने विवाह कर लिया होगा तो उस की पत्नी भी साथ आईर् होगी. न जाने उस के परिवार में कौनकौन होगा.

आर्ट गैलरी के उद्घाटन का कार्यक्रम समाप्त होतेहोते शाम के 6 बज गए थे. मल्हार का कार्यक्रम आरंभ होने में अभी भी 1 घंटा शेष था इसलिए भैरवी ने ड्राइवर से अपनी सरकारी गाड़ी घर की ओर मोड़ने के लिए कहा. घर पहुंच कर उस ने हलके वसंती रंग की हरे बौर्डर वाली अपनी मनपसंद साड़ी निकाली.

फिर अचानक ही नन्हा सा मल्हार टपक पड़ा, ‘‘तू यह पीले रंग की फ्रौक में कितनी प्यारी लगती है. यह रंग बहुत जंचता है तुझ पर.’’

‘‘हां, मालूम है मुझे. मां कहती हैं कि सांवली रंगत पर हलके रंग ही फबते हैं. कुदरत ने मुझे सांवला रंग क्यों दिया मल्हार. मैं सोनी जैसी गोरी चिट्ठी क्यों नहीं?’’

उस समय भैरवी ने यह मासूमियत भरा प्रश्न किया था. वह नहीं जानती थी कि एक दिन यह सांवला रंग ही उस की जिंदगी बदल देगा.

ऐसा नहीं था कि अब भैरवी के जीवन में कोई कमी थी. सबकुछ तो था उस के पास. नाम, पैसा, इज्जत, शोहरत. बस नहीं था तो एक अपना कहने वाला परिवार. उस के भाईबहन और यहां तक कि मां को भी बस उस के पैसों और शोेहरत से लगाव था. इस से अधिक कुछ नहीं. उस के भतीजेभतीजियां भी रोज अपनी फरमाइशों की सूची उस के पास भेजा करते कि बूआ मुझे बैटरी वाली डौल चाहिए या बूआ मुझे लाइट वाली साइकिल.

भैरवी जब भी अपनी सहेलियों और हमउम्र औरतों को अपने पति और बच्चों के साथ देखती तो उस के कलेजे में एक हूक सी उठती. फिर वह सबकुछ भूल कर अपने काम में जुट जाती.

जब भैरवी मल्हार के कार्यक्रम वाले आयोजन स्थल पर पहुंची तो हाल खचाखच भर चुका था. भीड़ देख कर भैरवी को एक सुखद आश्चर्य भी हुआ कि आज पौप के संगीत के जमाने में भी लोग लोकसंगीत को इतना पसंद करते हैं.

आयोजकों ने आगे बढ़ कर भैरवी का स्वागत किया और उसे स्टेज के सामने सब से आगे वाली कतार में ले जा कर बैठा दिया.

भैरवी की नजरें स्टेज पर टिक गईं. स्टेज के बीचोंबीच पीले सिल्क के कुरते और सफेद पाजामे में मल्हार खड़ा था. वैसी ही पतली मूंछें और करीने से कढ़े हुए बाल. हां, उस के भी बालों में चांदी ने घर बना लिया था. उम्र के साथ मल्हार का गोरा रंग और भी निखर आया था.

भैरवी को कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्ज्वलित कर स्टेज पर आमंत्रित किया. जब भैरवी स्टेज पर चढ़ी तब मल्हार की नजरों से उस की आंखें जा मिलीं. मल्हार की आंखों में आश्चर्य व प्रसन्नता के मिलेजुले से भाव उभरे और वह बोल पड़ा, ‘‘अरे तुम… म… म… मेरा मतलब है भैरवीजी आप? यहां? मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि आप से यहां मुलाकात हो जाएगी.’’

भैरवी ने कोई उत्तर नहीं दिया, बस मुसकरा कर रह गई. दीप प्रज्ज्वलन के बाद भैरवी अपने स्थान पर आ कर बैठ गई. स्टेज से उतरते समय मल्हार की निगाहें अपनी पीठ पर चिपकी हुई सी महसूस हुई उसे. कार्यक्रम के दौरान उसे लगता रहा कि  जैसे मल्हार उसे देख कर ही गा रहा हो. मल्हार के गीतों में वह स्वयं की कल्पना उस विरहन नायिका की तरह करती रही, जिस का पति परदेश चला गया है या फिर जिस का प्रेमी या पति हरी चूडि़यां लाने का वादा कर के देश की सीमा पर शहीद हो गया है.

दर्शक भी मल्हार की जादुई आवाज में डूब कर लोकसंगीत की पावन, सुरीली, सुरम्य धारा में सराबोर होते रहे. मल्हार के हर गीत की समाप्ति पर पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा.

भैरवी का मन भी यह सोच कर गर्व की अनुभूति में डूबताउतराता रहा कि  वह उस मल्हार को बचपन से जानती है, प्रेम करती है, जिस की आवाज की सारी दुनिया दीवानी है. कार्यक्रम लगभग ढाई घंटे तक चला. कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात वहां उपस्थित पत्रकारों ने मल्हार को घेर लिया. भैरवी भी वापस घर जाने के लिए उठ खड़ी हुई, हालांकि आयोजक उस से रात्रि का भोजन कर के वापस जाने का आग्रह करते रहे. परंतु भैरवी वहां से भाग जाना चाहती थी, अपनेआप से भाग जाना चाहती थी. दरअसल, वह मल्हार का सामना नहीं करना चाहती थी. वह नहीं चाहती थी कि अतीत की जिन मृतप्राय यादों को उस ने किसी अंधेरी घुप्प कोठरी में कैद कर रखा है, वे उस कोठरी से निकल कर पुन: जीवित हो जाएं.

तभी किसी पत्रकार के शब्द उस के कानों से आ टकराए, ‘‘मल्हारजी, आप ने अभी तक विवाह क्यों नहीं किया? क्या आप को अभी तक कोईर् भी ऐसी स्त्री नहीं मिली जो आप की जीवनसंगिनी बन सके?’’

मल्हार ने तिरछी नजरों से भैरवी की ओर देखा, जैसे वे नजरें बस उड़ती हुई सी

भैरवी को छू कर निकल गई हों, फिर बोला, ‘‘संगिनी तो मिली थी, परंतु वह मेरी जीवनसंगिनी न बन सकी.’’

भैरवी तेज कदमों से हौल के बाहर चली गई और अपनी गाड़ी में बैठ गई. उस की गाड़ी घर की ओर तेजी से भाग रही थी. आसपास के मकान, पेड़पौधे, दुकानें सबकुछ पीछे छूटता जा रहा था, ठीक वैसे ही जैसी भैरवी अपने बचपन से ले कर अब तक के बिताए पलों को पीछे छोड़, आगे निकल जाना चाहती थी. उस के मन में भावनाओं का ज्वार उफन रहा था जिन में लहरों की तरह हजारों सवाल उस के दिमाग में आ रहे थे कि ओह, तो अभी तक मल्हार ने भी विवाह नहीं किया है, मैं क्यों उस के प्यार की गहराई नहीं सम?ा पाई. मैं ने क्यों बीते इतने

सालों में मल्हार की कोई खोजखबर नहीं ली. मल्हार ने भी कभी मुझे ढूंढने या मिलने का प्रयास क्यों नहीं किया. क्या हमारा प्रेम इतना उथला था. क्या अब भी साथसाथ हमारा कोई भविष्य हो सकता है. मैं क्यों आप मल्हार का सामना नहीं करना चाहती.

घर पहुंच कर भैरवी ने कपड़े बदले और अपने मनपसंद शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी की सीडी अपने लैपटौप पर लगा दी. जब भी उस का मन उद्विग्न होता तो शास्त्रीय संगीत न केवल उस के मन को शांत करता बल्कि उसे सुकून भी पहुंचाता. पंडितजी की आवाज में सुकून की संगीत लहरियां पूरे घर में गूंजने लगीं.

तभी भैरवी के इंटरकाम फोन की घंटी बजी. फोन उठाने पर उस के बंगले पर तैनात दरबान ने बताया, ‘‘मैडमजी, कोई मल्हार नाम के सज्जन आप से मिलना चाहते हैं. मैं ने उन से कहा भी कि हमारी मैडम इतनी रात गए किसी से नहीं मिलतीं परंतु वे यहां से जाने को तैयार ही नहीं हैं. कह रहे कि मैडम से बिना मिले नहीं जाऊंगा.’’

‘‘ठीक है, अंदर आने दो उन्हें,’’ कह कर भैरवी ने फोन रख दिया.

भैरवी का हृदय उसी षोडषी कन्या की तरह जोरजोर से धड़कने लगा, जो अपने घर वालों से छिप कर अपने प्रेमी से मिलने जा रही हो.

दरवाजे पर दस्तक हुई तो भैरवी ने दरवाजा खोला. मल्हार और भैरवी दोनों ने एकदूसरे को भरपूर नजरों से देखा, चुपचाप एकटक जैसे सालों के विछोह के बाद आमनेसामने होने पर दोनों की नजरें तृप्त हो जाना चाहती हों. उन पलों में समय वैसे ही ठहर गया जैसे किसी झील का ठहरा हुआ पानी.

मल्हार ने ही चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ‘‘इतने सालों बाद तुम्हें देख कर मैं कितना खुश हूं, बता नहीं सकता. मैं तो तुम से मिलने की उम्मीद ही छोड़ बैठा था. मुझे लगता था कि तुम्हारी शादी हो गई होगी और तुम अपनी गृहस्थी में मस्तमगन होगी. आज पता चला कि तुम ने भी मेरी तरह शादी नहीं की, तो डीएम साहिबा, क्या अपने घर के अंदर नहीं बुलाओगी? हम यों ही दरवाजे पर खड़ेखड़े ही बातें करेंगे?’’

‘‘रात बहुत हो चुकी है मल्हार, हम कल बात करें,’’ भैरवी ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया.

‘‘परंतु मुझे तो अभी ही तुम से ढेर सारी बातें करनी हैं. तुम्हारे साथ अपने भविष्य के सपने सजाने हैं. हम दोनों ने ही इतने सालों तक एकदूसरे का इंतजार किया है. अब हमें अपनी जिंदगी एकसाथ बिताने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए भैरवी. सीधे शब्दों में कहूं तो मैं तुम्हारे समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखना चाहता हूं, क्यों न हम जल्द से जल्द विवाह बंधन में बंध जाएं. तुम्हारा क्या खयाल है? मुझ से विवाह करोगी न?’’ मल्हार ने भैरवी की आंखों में झंकते हुए कहा.

भैरवी ने देखा, बाहर बरामदे में लगे लैंपपोस्ट की रोशनी में मल्हार की आंखें जुगनू की तरह चमक रही थीं, भोली, निश्छल सी आंखें जिन में भैरवी के लिए प्रेम छलका पड़ रहा था.

भैरवी ने अपनी नजरें झुका लीं, ‘‘उम्र के जो वसंत बीत जाएं, वे दोबारा नहीं लौटा करते मल्हार, यह सच है कि मैं ने भी तुम्हें टूट कर चाहा है. अपनी कल्पनाओं की दुनिया में न

जाने कितनी बार मैं तुम्हारी दुलहन बनी हूं और तुम मेरे प्रियतम परंतु जिस संगीत ने हम दोनों

को जोड़ा था, वह संगीत ही मेरे भीतर अब सूख चुका है. अब इस पतझड़ के मौसम में बहारें दोबारा नहीं आ पाएंगी, हो सके तो मुझे क्षमा कर देना.’’

‘‘यह क्या कह रही हो भैरवी. तुम तो ऐसी नहीं थीं. तुम इतनी निष्ठुर कैसे बन सकती हो,’’ मल्हार की आवाज भावुकता में बह कर लड़खड़ाने लगी.

‘‘निष्ठुर मैं नहीं, हमारी नियति है मल्हार. अब तुम जाओ, मुझे सोना है,’’ कह कर भैरवी ने दरवाजा बंद कर दिया और दरवाजे पर पीठ टिका कर खड़ी हो गई. उस की आंखों से गंगाजमुना बह निकली.

भैरवी के मन के भीतर समाई लड़की का मन हुआ कि वह दरवाजा खोल कर देखे कि मल्हार वहीं खड़ा है या चला गया. वह दौड़ कर मल्हार के सीने से लग जाए और कहे कि हां, मल्हार, मैं भी तुम से बहुत प्यार करती हूं. मैं भी तुम्हारे साथ जीना चाहती हूं, तुम्हारी बांहों में मरना चाहती हूं. मगर तुरंत ही उस प्रेम में पगी हुई लड़की का स्थान जिलाधिकारी भैरवी ने ले लिया.

घर में पंडित भीमसेन जोशी की आवाज में राग मल्हार गूंज रहा था और भैरवी की आंखों से आंसुओं की बरसात लगातार हो रही थी.

प्रियंका चोपड़ा को क्यों बेचने पड़े दो फ्लैट महज 6 करोड़ में

इन दिनों फिल्म कलाकारों द्वारा अपनी प्रापर्टी बेचने की खबरें काफी आ रही हैं. लोग कयास लगा रहे हैं कि इसकी वजह बौलीवुड की फिल्मों का लगातार अफसल होना है अथवा सरकार के दावों के बावजूद देश की इकोनामी में आ रही गिरावट हैं.बहरहाल,अब खबर है खुद को हौलीवुड स्टार मानने वाली अदाकारा भारतीय अभिनेत्री व 2000 की ‘मिस वल्र्ड’ विजेता ‘प्रियंका चोपड़ा ने भी दीवाली के त्यौहार के आस पास ही मुंबई के अपने दो फ्लैट महज छह करोड़ रूपए में बेच दिया.

बता दें कि यारी रोड पर ‘राज क्लासिक’ में आलीशान डुपलेक्स फ्लैट खरीदने से पहले प्रियंका चोपड़ा ने अंधेरी के लोखंडवाला इलाके में करण अपार्टमेंट नामक इमारत में दो फलैट कई वर्ष पहले खरीदे थे.इन फ्लैट का क्षेत्रफल 2300 स्क्वायर फुट है.जब प्रियंका चोपड़ा ने यारी रोड पर ‘राज क्लासिक’ के आलीशान डुपलेक्स फलैट में रहना शुरू किया,तब लोखंडवाला के फलैट में प्रियंका चोपड़ा की मां डाक्टर मधु चोपड़ा ने अपना क्लीनिक खोल लिया था.पर अब तो प्रियंका चोपड़ा अपने पति निक जोनांस के साथ ज्यादातर अमरीका में ही रहती है.

खबर है कि दिवाली से कुछ दिन पहले प्रियंका चोपड़ा ने लोखंडवाला के करण अपार्टमेंट के दोनोे फ्लैट छह करोड़ रूपए में बेच दिया.बताया जा रहा है कि यह काररवाही प्रियंका चोपड़ा की अनुपस्थिति में ‘पाॅवर आफ अटार्नी’ के बल पर डाॅक्टर मधु चोपड़ा ने ही की.यानी कि फ्लट बेचने के अग्र्रीमेंट पर डाॅक्टर मधु चोपड़ा ने ही हस्ताक्षर किए हैं. इन फ्लैट को ‘इश्कियां’ ,‘उड़ता पंजाब’ व ‘सोन चिड़िया’ जैसी फिल्मों के निर्देशक अभिषेक चैबे ने खरीदा है.इन दो फ्लैट के बेचे जाने पर प्रियंका चोपड़ा की मां ने चुप्पी साध रखी है.जब से यह खबर गर्म हुई है तब से लोग सवाल उठा रहे हैं आखिर प्रियंका चोपड़ा को इतनी क्या कड़की लग गयी कि उन्हे महज छह करोड़ के लिए अपनी मुंबई की प्रापर्टी बेचनी पड़ी? लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रियंका चोपड़ा व उनके पति रोजमर्रा का खर्च चला सकने जितनी रकम भी नहीं कमा पा रहे हैं? ज्ञातब्य है कि प्रियंका चोपड़ा ने 2018 में निक जोनास संग षादी रचायी थी.उसके बाद से वह अमरीका ही रह रही हैं.कभी कभार वह भारत आती हैं.भारत आने पर वह अपनी व्यस्तता की बातें तो बहुत करती हैं. मगर 2018 से अब तक उनका कोई खास काम सामने नजर नहीं आया.

BB 17: Elvish Yadav ने दिया हिंट, वाइल्ड कार्ड बनकर धांसू एंट्री मारेंगी Anjali Arora

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस 17 के पांच हफ्ते बीच चुके है छठा हफ्ता चल रहा है लेकिन शो में कंटेस्टेंट्स कमाल नहीं दिख रहा.  इस बार यह सीजन काफी अलग है पिछले हर सीजन में बिग बॉस के घर में टास्क होते थे. हालांकि इस बार के थीम में मेकर्स ने टास्क को नहीं जोड़ा है. इस सीजन में मेकर्स नए-नए ट्विस्ट लेकर आ रहे है फिर भी शो टीआरपी लिस्ट में कुछ खास नहीं कर रहा है. वैसे भी इस बार के कंटेस्टेंट्स दर्शकों को पसंद नहीं आ रहे. छठे हफ्ते में आ कर भी कई कंटेस्टेंट्स सोते हुए नजर आ रहे है. ऐसे में मेकर्स कई सारे वाइल्ड कार्ड की एंट्री करवा सकते है. ऐसे में अंजलि अरोड़ा का नाम भी सामने आया

बिग बॉस 17 में आएंगी अंजलि अरोड़ा

दरअसल, रियलिटी शो बिग बॉस 17 में एकसाथ पांच-छह वाइल्ड कार्ड की एंट्री होगी. ये बात एल्विश यादव ने भी अपने लेटेस्ट वीडियो में कही है. एल्विश यादव ने अपने व्लॉग में बिग बॉस 17 के वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के बारे में बात की. इस वीडियो में एल्विश यादव ने खुलासा किया कि उन्हें बिग बॉस 17 के वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स के बारे में पता चल गया है. अब शो में एक मशहूर टिक टॉक स्टार की एंट्री कंफर्म होने वाली है. एल्विश के मुताबिक, वो टिक टॉक स्टार उनका दोस्त भी हो सकता है और उनका दुश्मन भी हो सकता है. एल्विश यादव का ये वीडियो देखने के बाद लोगों का मानना है कि शो में अंजलि अरोड़ा आ सकती हैं.

हालांकि अंजलि अरोड़ा का नाम पहले भी शो के कंटेस्टेंट लिस्ट में आ चुका है. लेकिन अभी तक अंजलि अरोड़ा ने इस रिपोर्ट पर चुप्पी नहीं तोड़ी.

इन सेलेब्स का भी नाम आया

बता दें कि, बिग बॉस 17 के वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स की लिस्ट सोशल मीडिया पर छाई हुई है. जिसमें कई सेलेब्स का नाम सामने आया है. इस लिस्ट में राखी सांवत, आदिल दुर्रानी, लव कटारिया, भाविन भानुशाली, पूनम पांडे, फ्लोरा सैनी, तसनीम नेरुरकर और राघव शर्मा का नाम सामने आया है. दावा किया जा रहा है इनमें से कुछ सेलेब्स वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स बनकर आ सकते है.

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