कहीं आप भी तो नहीं फोमो का शिकार

फोमो यानी फियर औफ मिसिंग आउट. फोमो का आशय किसी चीज से वंचित रहने पर अफसोस होना है यानी दुनिया की दौड़ से पीछे छूट जाने की भावना. कभी आप को ऐसा महसूस होता है कि आप की जिंदगी में कोई मजा नहीं है बस गुजर रही है जैसे आप को लगता हो कि आप के दोस्त और रिश्तेदार मजेदार चीजें कर रहे हैं पर आप वैसा नहीं कर पा रहे हैं.

आप बारबार अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों के सोशल मीडिया अकाउंट को चैक करते रहते हैं ताकि उन के बारे में कुछ न कुछ पता लगता रहे और कुछ पता न लगने पर निराशा महसूस करते हैं या फिर आप बस सोशल मीडिया पर कुछ भी अपलोड करना चाहते है और लाइक्स और कमैंट्स पाने के लिए बेताब रहते हैं. यदि इन में से कोई भी लक्षण आप में है तो आप फोमो का शिकार है यानि आप को पीछे छूट जाने का डर सता रहा है.

कब महसूस होगा

क्या कभी आप के साथ ऐसा हुआ है कि आज आप का अपने दोस्तों संग पार्टी पर जाने का प्रोग्राम है और आप औफिस से समय पर घर आए भी, मगर किसी जरूरी काम की वजह से या किसी और पारिवारिक काम की वजह से पार्टी में नहीं जा पाए. ऐसे में क्या आप ने अपने काम को निबटाते हुए मन में एक अजीब सी बेचैनी महसूस की है और इस बेचैनी को दूर करने के लिए क्या आप बारबार अपना सोशल मीडिया अकाउंट स्क्राल कर उस पार्टी या ट्रिप के पोस्ट चैक करते हैं.

आप के दोस्त क्या खा रहे हैं और कैसे ऐंजौय कर रहे हैं, आप ने क्या मिस कर दिया, क्या अपने हालात की उन के ऐंजौयमैंट के साथ तुलना करते हैं? यदि हां तो आप सम?ा लीजिए कि आप फोमो का शिकार हो गए हैं.

आइए, इन कुछ उदाहरणों में से किसी भी स्थिति में यदि खुद को पाते हैं तो आप फोमो के शिकार हैं:

स्मार्ट फोन फोमो यानी दिनरात स्मार्टफोन से चिपके रहना. कुछ लोग पूरा समय अपने स्मार्ट फोन से चिपके रहते हैं. आवश्यकता न होने पर भी हर 10-15 मिनट में अपने मोबाइल को चैक करने लग जाते हैं ताकि वे हर समय अपडेट रहें और उन को अपने से  ज्यादा फिक्र स्मार्ट फोन की होती है कि कहीं मेरा फोन बंद न हो जाए या फिर सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ अपडेट करते रहना.

स्मार्ट फोन फोमो शिकार लोग इस के बिना एक पल भी नहीं रह सकते हैं. वे अपने फोन में ऐसी दुनिया बसा चुके होते हैं जो बाहरी दुनिया से बिलकुल अलग है और वे बारबार अपने दोस्तों, परिचितों एवं रिश्तेदारों के स्टेटस और उन के द्वारा की गई कोई भी ऐक्टिविटी को  देखने में ज्यादा रुचि रखते हैं.

इस समस्या का हल

कुछ समय मोबाइल से दूरी बनाएं. इस के लिए 24 घंटे के बाद या जब सभी कामों से फ्री हों, आराम कर रहे हों या किसी के औफिस के प्रतीक्षाकक्ष में बैठे हों तब भी ये सब कर सकते हैं अथवा दिनभर में एक निश्चित समय पर कुछ देर के लिए यह काम कर सकते हैं जिसे आप व्यू टाइम कह सकते हैं.

फोमो शौपिंग

अमूनन सभी लोगो को नई वस्तु खरीदने का शौक होता है लेकिन यदि आप फोमो शौपिंग के शिकार हैं तो इन लोगों का शौक अलग तरीके का होता है. जैसे ऐसे लोगों के दिमाग मे हमेशा यही चलता रहता है कि बाजार में ऐसी कौन सी वस्तु नई आई है जो किसी के पास नहीं है और उन्हें डर सताता है कि अगर वह वस्तु उन्हें न मिली तो वे दूसरे लोगों से पीछे रह जाएंगे.

महंगी वस्तुओं पर पैसे खर्च करना और बिना मतलब की चीजें खरीदना ताकि वे दुनिया से पीछे न छूट जाएं. वे उस वस्तु को किसी भी कीमत पर प्राप्त करना चाहते हैं ताकि वे दुनिया के साथ अपडेट रह सकें और सभी को सोशल व मीडिया पर शेयर करते रहें अगर आप में भी ऐसी कोई आदत है तो आप फोमो शौपिंग के शिकार हैं.

सोशल मीडिया फोमो यानी किसी भी समय सोशल मीडिया चलाते रहना. बहुत से लोगों को सोशल मीडिया का इतना शौक होता है कि वे कहीं भी हों उन का एक हाथ मोबाइल और सोशल मीडिया चलाने में बिजी रहता है. इस की वजह से कई बार लोग काफी अकेला, ईष्यालु और दुखी महसूस करते हैं. उन का ध्यान अपनी मीटिंग या काम पर कम हो कर अपने सोशल मीडिया की बारबार जांच करने में ज्यादा होता है. ऐसे लोग उस पल में न रह कर सोशल मीडिया की दुनिया में क्या हो रहा है जानने में लग जाते हैं. उन का सुबह से ले कर रात सोने तक का पूरा समय सोशल मीडिया के लिए ही होता है.

सोशल मीडिया फोमो समस्या का हल

  •  अपनी जिंदगी में होने वाली सकारात्मक बातों की लिस्ट तैयार करें.
  • ख़ुद की तुलना दूसरों से करना बंद कर दें. किसी के सोशल मीडिया पर खुश या रोमांचक फोटो को पोस्ट करने से यह गारंटी नहीं मिलती कि वह वास्तव में खुश और पूर्ण है.
  • सोशल मीडिया आप को एक काल्पनिक दुनिया में ले जाता है, जहां आप इस के साथ अपने जीवन की तुलना करना शुरू करते हैं. इस भावना से छुटकारा पाने के लिए सोशल मीडिया पर कम समय बिताएं.
  • अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा विराम लें. अपना समय आसपास के माहौल में जैसे प्रकृति, दोस्तों, परिवार के बीच बिताएं.
  • प्रकृति के करीब होने से आप का दिमाग शांत होता है और आप की चिंता को शांत करने में मदद मिलती है.
  • आप अपने घर की बालकनी और पेड़पौधों की देखभाल में भी वक्त बिता सकते हैं.

नोटिफिकेशन फोमो

स्मार्ट फोन पर रातदिन हर पल आते नोटिफिकेशन जहां हमें अपडेट रखते हैं वहीं साथ ही हमारे ध्यान को भटकाने का भी काम करते हैं और हमारी एकाग्रता को भंग करते हैं. साथ ही किसी भी काम के ऊपर कंसन्ट्रेशन होने ही नहीं देते हैं. ये अनावश्यक पुश अलर्ट परेशान कर देते हैं और हमें नोटिफिकेशन फोमो का शिकार बनाते हैं.

इस तरह के फोमो के शिकार लोगों को यह डर लगा रहता है कि कोई नोटिफिकेशन अलर्ट देखने में देर न हो जाए और हम कमैंट, लाइक या रिप्लाई करने में पीछे न छूट जाएं.

दम बिरयानी की बात ही अलग है

फेस्टिव टाइम के बाद अपनों के साथ फुरसत के लम्हे बिताने का आनंद ही और है, फिर ऐसे में अगर बेहतरीन स्वाद वाली बिरयानी लंच में मिल जाए तो दिन बन जाता है. मां भी तो ऐसा ही करती थी, पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पर बैठ कर मां के हाथों की बनी बेहतरीन बिरयानी का इंतजार करता था.

आप बिरयानी बनाएंगी तो सोचेंगी कि वो मां के हाथों का स्वाद कहां से लाएं और मसालों का संतुलन कैसे बनाएं. तो सनराइज़ का बिरयानी मसाला आपकी इस मुश्किल को आसान करेगा. इसमें है बिरयानी मसालों का ऐसा मिश्रण जो बिरयानी में जगा देगा मां के हाथों का स्वाद.

चिकन दम बिरयानी

सामग्री

1 किलोग्राम चिकन, 3 कप चावल, 2 चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, 3 प्याज कटे, 1 बड़ा टमाटर कटा, 3-4 हरीमिर्चें बीच से कटी, 2 चम्मच दही, 2 चम्मच सनराइज़ बिरयानी मसाला, थोड़ी सी हरी इलायची, तेजपत्ता, दालचीनी और लौंग, थोड़ा सा भुना प्याज, नमक स्वादानुसार, थोड़ा सा देशी घी, तेल जरूरतानुसार.

विधि

एक गहरे पैन में पानी उबाल कर उसमे चावल, 2 चम्मच नमक, लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता डालकर 80% तक पका लें. पक जाने पर स्ट्रेन कर अलग रख लें. इसी बीच चिकन, दही, थोड़ा सा सनराइज़ बिरयानी मसाला, थोड़ा सा नमक मिलाकर चिकन मैरीनेट कर लें. अब मोटी पेंदी वाले बर्तन में तेल गरम कर प्याज, हरीमिर्चें, अदरक-लहसुन का पेस्ट भूनें. भुन जाने पर चिकन इसमे अच्छी तरह मिक्स करें. अब सनराइज़ बिरयानी मसाला, नमक और टमाटर मिलाएं. सब अच्छी तरह मिक्स कर मध्यम आंच पर चलाते हुए चिकन 90% तक पका लें. पक जाने पर थोड़ा चिकन बर्तन में छोड़ कर बाकी निकाल लें. अब बचे चिकन के ऊपर चावल की लेयर लगाएं. फिर से चिकन की लेयर लगा कर चावल की लेयर से कंप्लीट करें. ऊपर से भुना प्याज और देशी घी डालें. बर्तन के किनारों पर आटे की लोई लगाकर ढक्कन को सील करें. धीमी आंच पर 30 मिनट तक बिरयानी में दम लगाएं. तैयार बिरयानी सलाद और रायते के साथ परोसें.

जब सताने लगे बेवफाई

लास एंजिल्स में छपी एक खबर के अनुसार पीटरसन नामक एक पति ने अपनी 8 माह से गर्भवती पत्नी लकी की हत्या कर दी. कई दिनों तक उस के न दिखने पर लकी के सौतेले पिता ने पुलिस में रिपोर्ट कराई. उस के तहत एक लड़की से पता चला कि पीटरसन का उस लड़की के साथ अफेयर था. वह उस लड़की के साथ शादी करना चाहता था. और वह लड़की पीटरसन को अभी तक अविवाहित सम?ा रही थी.

पीटरसन की सास रोचा कहती है कि अपनी बेटी के कत्ल के बावजूद उसे अपने दामाद से तब तक हमदर्दी थी जब तक उसे यह पता नहीं था कि पीटरसन का किसी अन्य लड़की के साथ अफेयर है. लेकिन जब से उसे पीटरसन के अपनी बेटी से बेवफाई के बारे में पता चला है उस ने अदालत में चीखचीख कर यह गुहार की कि उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए. पीटरसन के मातापिता को भी उस के शादीशुदा अफेयर के बारे में सुन कर अच्छा नहीं लगा.

राजामहाराजाओं के जमाने में पुरुषों को बेवफाई का जन्मसिद्ध अधिकार था, जबकि किसी स्त्री के ऐसा करने पर गांव, महल्ले, सगेसंबंधी कुलटा आदि कह कर सभी उस का जीना हराम कर देते थे.

रामायण की धोबन का हश्र याद होगा जिस के कारण मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने भी सारी मर्यादाओं को लांघ कर सीता को वन में छुड़वा दिया था. धोबी को उस धोबन पर शक केवल इसलिए हुआ कि वह रात को घर पर नहीं थी. भले ही बेवफाई हुई हो या न हुई हो. राम ने धोबन को बचाने की या उस की सुनने की भी कोशिश की हो, ऐसा रामायण में कहीं जिक्र नहीं है. धोबन और सीता दोनों ही अकारण घर से निकाल दी गईं.

मगर जब से स्त्री के अधिकारों की बात शुरू हुई तब से पुरुषों के इस अधिकार पर थोड़ा सा अंकुश लगा तो दूसरी तरफ स्त्रियों ने इस तरह के रिलेशंस बनाने शुरू कर दिए. अमेरिका में हुई एक रिसर्च के अनुसार 70% शादीशुदा पुरुष और 50% शादीशुदा महिलाएं विवाहेतर संबंध बनाती हैं, जिन में कुछ बन नाइट स्टैंड होते हैं यानी एक रात भर सोए और फिर भूल गए.

यहां भावनाओं का कोई मतलब नहीं. वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जो बनाए ही भावनात्मक सुरक्षा के लिए जाते हैं जोकि घनिष्ठ और लंबे समय तक चलते हैेें. बहरहाल चाहे लंबे समय के लिए हो या 1-2 घंटों के लिए ही सही बेवफाई बेवफाई होती है.

सगेसंबंधियों पर प्रभाव: हमारे देश में इस संबंध का न सिर्फ पतिपत्नी, बच्चों पर बल्कि आप के मातापिता, सगेसंबंधी, अविवाहित भाईबहनों आदि पर भी पड़ता है. उन्हें व्यर्थ सजा मिलती है.

  •   बाहर वालों के तानों की शर्मिंदगी परिवार में सभी को उठानी पड़ती है.
  • अगर बेवफाई स्त्री ने की है तो अविवाहित बहन या भतीजी की तुलना उस के साथ की जाने लगती है और शादीविवाह में कठिनाई पैदा हो जाती है.
  • बच्चों को मातापिता के बीच चल रहे मनमुटाव के साथसाथ बाहर वालों की अजीब नजरों का भी सामना करना पड़ता है जिस के काफी गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ते हैं.

बेवफाई करने वाले पर प्रभाव

  •  बेवफा व्यक्ति घर वालों और बाहर वालों की नजरों में गिर जाता है.
  • घर वालों के सहयोग की उम्मीद इस मामले में कभी नहीं कर सकते.
  • हर वक्त अनुचित रिश्ते को छिपाने के लिए नएनए झूठ बोलने पड़ेंगे.
  • इन अवैध संबंधों में अगर बच्चे भी हैं तो जायज के साथसाथ नाजायज बच्चे भी इज्जत से नहीं देखेंगे.

दूर से देखनेसुनने में भले ही लगे कि पश्चिमी देशों में इस तरह के रिश्तों पर कोई आपत्ति नहीं होती जबकि सचाई यह है कि विवाहेतर संबंध कहीं भी किसी भी समाज में उचित नहीं माने गए हैं. इस का बहुत बड़ा उदाहरण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और मोनिका लेवेंस्की के संबंध जिन की आलोचना दुनियाभर में की गई.

भले ही कितनी ही स्त्रियों के साथ क्लिंटन के संबंध रहे हों लेकिन देश और समाज में सिर उठा कर चलने के लिए उन्हें अपनी पत्नी हिलेरी क्लिंटन की ही जरूरत थी. हिलेरी क्लिंटन को भी इस जहर को पीना पड़ा पर उन्हें राष्ट्रपति पद जनता ने नहीं दिया. वे राष्ट्रपति का चुनाव हार गई थीं.

थेरैपिस्ट या काउंसलर भी विवाहेतर संबंधों के बारे में यही राय देते हैं कि अगर इन के बिना नहीं रह सकते तो तलाक ले लें.

असलियत में कोई भी बेवफा व्यक्ति न तो अपनी शादी को तोड़ना चाहता है क्योंकि सगेसंबंधी इस की इजाजत कभी नहीं देते और न ही इस विवाहेत्तर रिश्ते को खत्म करना चाहता है. दूसरा घर बसाना और सगेसंबंधियों को छोड़ना कोई आसान काम नहीं. फिर यह भी जरूरी नहीं कि जिस के साथ आप के संबंध हैं वह आप से विवाह के लिए राजी ही हो क्योंकि उस के लिए भी घर तोड़ना, सगेसंबंधियों के खिलाफ जाना आसान नहीं. इस तरह के रिश्ते आमतौर पर खतरनाक साबित होते हैं. बेवफाई खतरनाक होती है. इस समस्या का मैसेज एक वैबसाइट पर एक काउंसलर के पास आया-

डियर आंट वैबी मैं जानती हूं कि इस शर्मनाक गलती के लिए मुझे चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए, फिर भी आप की राय चाहती हूं. मैं ने अपनी 6 साल की शादीशुदा जिंदगी में पहली बार एकदूसरे पुरुष के साथ संबंध बनाए हैं और उस के प्रेम में बेहद पागल हूं. मेरे पति जोकि मुझे बेहद प्यार करने वाले, अच्छे और आदर्श पुरुष हैं, उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता. मैं जानती हूं कि जिस दिन उन्हें इस बात का पता चलेगा उन का विश्वास टूट जाएगा.

इस दूसरे पुरुष के लिए मैं अपने बेहद अच्छे पति को छोड़ने के लिए भी तैयार हूं. लेकिन यह नहीं जानती कि वह भी मुझ से शादी करेगा या नहीं. वह एक बहुत अच्छे, भरेपूरे परिवार से है और 4 बच्चों का बाप है. मेरे अपना कोई बच्चा नहीं है. मैं यह भी जानती हूं कि एक बेहद अच्छा पति होने के बावजूद किसी दूसरे शादीशुदा मर्द के चक्कर में पड़ना समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा. प्लीज, आप मुझे इस अफेयर को खत्म करने की सलाह न दें बल्कि यह बताएं कि मैं इस अफेयर को कंटीन्यू क्यों रखना चाहती हूं.

वोदका गर्ल इस अजीब समस्या का अंजाम परिवार के टूटनेबिखरने के अलावा कुछ नहीं हो सकता क्योंकि बीवी परपुरुष के साथ अपने संबंधों को खत्म नहीं करना चाहती और ऐडवाइजर को भी यही कह रही है कि इस रिश्ते को खत्म करने की सलाह न दें. यानी जानबू?ा कर आग से खेलने का शौक है मैडम को.

इन्हीं मैडम की तरह कुछ लोग पति या पत्नी की बेवफाई के बावजूद अपने पजैसिव नेचर की वजह से छोड़ना नहीं चाहते और बेवफाई से भी बाज नहीं आते यानी उन्हें दोनों हाथों में लड्डू चाहिए.

हौंगकौंग में लिऊयांग नामक एक व्यक्ति ने अपनी सास का सिर काट डाला और उसे ले कर पुलिस स्टेशन पहुंच गया. चीन के स्थानीय समाचारपत्र साउथ मौर्निंग पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस व्यक्ति ने अपनी सास की हत्या इसलिए की क्योंकि पतिपत्नी के बीच चल रही बेवफाई के कारण सास अपनी बेटी को तलाक के लिए भड़का रही थी.

बेवफा व्यक्ति अपने विवाहित जीवन के साथ विवाहेतर संबंधों को सहेजने की लाख कोशिश करे लेकिन इन सब का एक ही अंत होता है, जो कभी सुखद नहीं होता. इस तरह के संबंधों से बेवफा व्यक्ति थोड़े समय के लिए भले ही मानसिक या शारीरिक सुख प्राप्त कर ले लेकिन बोनस में जीवन भर की टैंशन भी ले लेता है.

अबौर्शन पिल खतरा भी कम नहीं

हाल के वर्षों में आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक विकास और बेहतर जीवनस्तर के साथसाथ सैक्सुअल रिलेशनशिप में भी स्वतंत्रता आई है, जिस कारण शादी से पहले प्रैगनैंसी की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. एक सर्वे के मुताबिक 15त्न पुरुषों और 4त्न महिलाओं ने शादी से पहले संबंधों को स्वीकार किया है.

भारत जैसे कंजरवेटिव देश में जहां अपनी सामाजिक और पारंपरिक पृष्ठभूमि के चलते किसी भी सामाजिक बदलाव को सिरे से नकार दिया जाता है में शादी से पहले शारीरिक संबंधों और प्रैगनैंसी को स्वीकार नहीं किया जाता. खासकर लड़कियों के लिए. सैक्सुअली ऐक्टिव होने के कारण लड़कियां शादी से पहले प्रैगनैंट हो रही हैं, जिस के चलते वे समाज और मातापिता के डर से इंस्टैंट प्रैगनैंसी रोकने के लिए ऐसी दवाइयां खा रही हैं जो उन की जान के लिए जोखिम पैदा कर रही है.

बिना किसी मैडिकल जानकारी और डाक्टर की सलाह के लड़कियां इन गोलियों को खा कर अपने स्वास्थ्य को बिगाड़ रही हैं.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अबौर्शन या गर्भपात न केवल आप को शारीरिक रूप से बल्कि भावनात्मक तौर पर भी तोड़ कर रख देता है. गर्भपात कराने वाली दवाएं आसानी से मैडिकल स्टोर्स पर मिल जाती हैं और ज्यादतर लड़कियां इन्हें बिना किसी डाक्टर की सलाह के खा लेती हैं जो बाद में उन के लिए खतरा बन जाती हैं. इन का प्रभाव उन के स्वास्थ्य से ले कर भविष्य में होने वाली प्रैगनैंसी तक पड़ता है.

कौन सी है दवाइयां

महिला रोग विशेषज्ञ के मुताबिक प्रैगनैंसी को टर्मिनेट या गर्भ को खत्म करने के लिए जिन अबौर्शन पिल्स का इस्तेमाल किया जाता है उन्हें एमटीपी किट के नाम से जाना जाता है. एमटीपी किट 2 दवाओं का मिश्रण है. मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल दवाओं से मिल कर यह बनती है. ये दवाइयां अबौर्शन के शौर्टकट के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं, इन्हें प्रैगनैंट महिलाएं बिना इन के साइड इफैक्ट के बारे में जाने आसानी से ले लेती है. इन्हें खाने के बाद सब का शरीर अलगअलग प्रतिक्रिया करता है.

ये दवाइयां महिला के शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं. यदि महिला किसी स्वास्थ्य समस्या से पहले ही लड़ रही है तो उस के लिए ये और भी मुश्किलें पैदा कर सकती हैं जैसे अगर उसे ऐनीमिया है यानी वह खून की कमी से जू?ा रही है तो डाक्टरों द्वारा अबौर्शन कराने वाली पिल्स से दूर ही रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये ऐनीमिया के रोगियों के लिए खतरनाक हो सकती हैं.

समाधान नहीं समस्या भी भी हैं पिल्स

एमटीपी किट के इस्तेमाल से नजर प्रभावित हो सकती है. ऐसे मरीज जिन्हें किडनी से जुड़ी कोई बीमारी हो उन्हें इन गोलियों का इस्तेमाल करने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. इन्हें लेने के कुछ ही समय बाद अत्यधिक मात्रा में ब्लीडिंग होती है. गर्भपात कराने वाली पिल्स लड़कियों और महिलाओं के शरीर में बन रहे प्रैगनैंसी हारमोन प्रोजेस्टेरौन के उत्पादन को बंद कर देती हैं. इस कारण भ्रूण गर्भाशय से अलग हो कर बाहर आने लगता है. गर्भाशय का संकुचन ब्लीडिंग को बढ़ा देता है. ये ब्लीडिंग कई बार अत्यधिक मात्रा में होती है जिसे डाक्टर के बिना रोक पाना मुश्किल हो जाता है. यह कुछ दिनों, हफ्तों से ले कर 1 महीने तक हो सकती है.

इन गोलियों को खाने से पेट में दर्द और ऐंठन होती है. दर्द पीरियड्स में होने वाले दर्द के समान या उस से भी कई गुना ज्यादा दर्द होता है. शरीर से भारी मात्रा में रक्त और दूसरे द्रव लगातार निकलते रहते हैं. इसलिए पेट, पैरों और शरीर के कई हिस्सों में ऐंठन हो सकती है.

जी मिचलाना, दस्त, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी परेशानियां आम हैं. लेकिन हैल्थ कंडीशन के अनुसार ये कम या ज्यादा भी हो सकते हैं. हालात ज्यादा खराब भी हो सकते हैं. कभीकभी बुखार भी आ सकता है.

कुछ मामलों मे ऐसा होता है कि गोली के असर से भ्रूण पूरी तरह बाहर नही आ पाता. ऐसे में सर्जरी तक करानी पड़ जाती है.

कभीकभी परेशानी काफी हद तक बढ़ जाती है. डाक्टरों के मुताबिक, प्रैगनैंसी के कुछ मामले ऐसे होते है जिस में भ्रूण महिला की फैलोपियन ट्यूब में ही फंस कर रह जाता है जिसे इक्टोपिक प्रैगनैंसी कहा जाता है. फैलोपियन ट्यूब महिला के शरीर में अंडाशय और गर्भाशय को आपस में जोड़ती है. ऐसा होने की स्थिति में पिल्स लिए जाने पर ब्लीडिंग के टिशू निकलते हैं, जिस की वजह से फैलोपियन ट्यूब की दीवारों को नुकसान पहुंचने और कई बार ट्यूब फटने तक का खतरा पैदा हो जाता है. इस स्थिति में बेहद दर्द और खून का रिसाव होने लगता है.

अगर तुरंत सर्जरी न कराई जाए तो जान भी जाने का खतरा रहता है. इससे बचने के लिए इक्टोपिक प्रैगनैंसी का पहले ही पता होना आवश्यक है जो अल्ट्रासाउंड से लगाया जाता है क्योंकि डाक्टर इक्टोपिक प्रैगनैंसी के लक्षण दिखने पर अबौर्शन पिल्स लेने से इनकार कर देते हैं.

क्या है कारण

भारत जैसे देश में यह समस्या गंभीर है जहां लड़कियों को घर की इज्जत का जिम्मा जबरदस्ती सौंप दिया जाता है. ऐसे में गर्भवती होने पर लड़कियां शर्म और डर के कारण बिना किसी को बताए इस तरह की पिल्स का सेवन कर लेती हैं. स्थिति की गंभीरता इसी बात से आंकी जा सकती है की शादी से पहले गर्भवती होने के बजाय उन्हें मर जाने तक की सलाह दी जाती है. घर में वे हिंसा का शिकार होती हैं और कितनी ही बार डिप्रैशन के कारण आत्महत्या तक कर लेती हैं. ऐसे में लड़कियां यदि गर्भवती हो जाती हैं तो वे बिना सोचेसमझे अपनी जान जोखिम में डालने को तैयार रहती हैं.

डाक्टर के पास जाना तो दूर वे किसी को बताना तक नही चाहतीं. ऐसे में वे अबौर्शन के ऐसे अनसेफ तरीके आजमाती हैं. आकडे़ बताते हैं भारत में रोजाना लगभग 13 महिलाएं अनसेफ अबौर्शन के कारण मृत्यु का शिकार होती हैं. लगभग हर साल करीब 6.4 मिलियन गर्भपात होते हैं. अनसेफ अबौर्शन देश में मातृ मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है जो सालाना होने वाली मौतों का 8त्न है.

कई बार अबौर्शन कराना भी महिलाओं के लिए मुश्किल हो जाता है क्योकि 80त्न महिलाएं यह तक नहीं जानतीं कि भारत में अबौर्शन लीगल है और उन्हें कोई भी इस के लिए रोक नहीं सकता और न ही अस्पतालों और अबौर्शन की सुविधा देने वाली संस्थाएं इस के लिए मना कर सकती हैं मगर अज्ञानतावश वे हौस्पिटल नहीं जातीं.

सुविधाओं का अभाव भी अनसेफ अबौर्शन के तरीके अपनाने का कारण रहा है. लगभग 70त्न पब्लिक या सार्वजनिक कहे जाने वाले क्षेत्र सुरक्षित गर्भपात की सुविधा उपलब्ध कराते हैं जबकि केवल 30त्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जो महिलाओं की पहली पहुंच हैं ये सेवाएं उपलब्ध कराते हैं और यंग लड़कियां जिन की शादी नहीं हुई है इन केंद्रों पर जाने से डरती हैं क्योंकि स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टर लड़कियों को अपने पेरैंट को लाने के लिए कहते हैं, जिस से बचने के लिए लड़कियां छिप कर अबौर्शन पिल्स का इस्तेमाल कर लेती हैं.

जबकि मैडिकल टरमिनेशन औफ प्रैगनैंसी ऐक्ट 1971 किसी भी महिला को जो माइनर नहीं है यानी बालिग है को अबौर्शन का अधिकार देता है, जिस में उसे किसी की भी परमीशन की जरूरत नहीं है बाशर्ते गर्भ 24 सप्ताह से कम का हो. तब कोई भी स्वास्थ्य केंद्र उसे इस के लिए मना नहीं कर सकता.

2022 में एक केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन की स्वायतता गरिमा और गोपनियता का अधिकार एक अविवाहित महिला को यह हक देता है कि वह विवाहित महिला के समान बच्चे को जन्म दे या नहीं. लेकिन उस के बाद भी अस्पतालों में अविवाहित महिला को किस तरह ट्रीट किया जाता है इस का अंदाजा आप लगा सकते हैं.

20 वर्षीय सुनीता बदला हुआ नाम एक विद्यार्थी है. प्रैगनैंसी का पता लगने पर अपने बायफ्रैंड के साथ हौस्पिटल जाती है. बालिग होने के बाद भी हौस्पिटल के डाक्टर और स्टाफ द्वारा उस से तरहतरह के सवाल किए जाते हैं जिन का जवाब वह अपनी निजता को गोपनिय रखने के लिए नहीं देना चाहती. जानकारी के अभाव में उसे इस तरह के सवालों का सामना करना पड़ता है.

इस तरह के क्रिमिनल ट्रायल भी लड़कियों को सेफ अबौर्शन छोड़ कर ऐसी अबौर्शन पिल्स लेने के लिए मजबूर करते हैं. लेकिन इस का जिम्मेदार कौन है?

समाज की हिस्सेदारी

समाज का दोतरफा रवैया यहां भी दिखाई देता है. जहां समाज एक तरफ पुरुषों को महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाने के

लिए खुला छोड़ देता है वहीं वह एक महिला को उसी पुरुष के कारण गर्भवती होने पर अपनाने से इनकार कर देता है. उस से उत्पन्न संतान को नाजायज औलाद कह कर त्याग देता है. उस महिला को बदचलन, चरित्रहीन और न जाने किनकिन नामों से पुकारा जाता है. लेकिन ऐसा कोई नाम उस पुरुष को दिया गया हो दिखाई नहीं देता.

हद की बात तो तब होती है जब वह पुरुष जो महिला के साथ यौन संबंध बनाने के लिए तो तैयार है लेकिन गर्भवती होने पर उसे नजरअंदाज कर देता है, उस का साथ देने से इनकार कर देता है और कितनी ही बार पुरुष को मातापिता और समाज के दबाव में आ कर ऐसा करना पड़ता है.

समाज के ठेकेदारों के मुंह से लड़के हैं गलतियां हो जाती हैं जैसी बातें तो पुरुषों के लिए आसानी से सुनी जा सकती हैं पर लड़कियों के लिए ये भाव उन के दिल से कहां नदारद हो जाते हैं, सम?ा नहीं आता. आखिर उन्हें इस स्थिति में पहुंचाने वाले तो पुरुष ही हैं. यह समाज शादी से पहले लड़की के साथ यौन संबंधों पर आपत्ति जताता है पर शादी में होने वाले रेप पर अपनी चुप्पी साधे रखता है. यहां तक कि कानून भी इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखता. दुनिया के 185 देशों में से 77 देश स्पष्ट रूप से वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में रखते हैं, जबकि केवल 34 देश ऐसे हैं जो स्पष्ट रूप से वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी से बाहर मानते हैं. भारत उन 34 देशों में से एक है.

बिनब्याही मां बनने को समाज सिरे से नकार देता है. उसे घरपरिवार पर लगे एक कलंक की तरह देखता है. इसे एक टैबू की तरह लिया जाता है. स्थिति इस हद तक गंभीर होती है कि उसे परिवार और समुदाय द्वारा आउटकास्ट कर दिया जाता है. स्कूलों तथा नौकरियों तक में उस के साथ भेदभाव किया जाता है.

2000 में आई मूवी ‘क्या कहना’ इस बात को बहुत अच्छे से दिखाती है. जहां राहुल पिया को प्रैगनैंट होने के बाद छोड़ देता है. उस के बाद पिया और उस के परिवार को समाज का क्या रवैया ?ोलना पड़ता है, फिल्म इसे बहुत ही सटीक तरीके से प्रदर्शित करती है.

23 साल बीत चुके हैं लेकिन भारतीय समाज में कुछ परिवर्तन हुआ हो ऐसा नहीं कहा जा सकता. अनसेफ अबौर्शन के कारण होने वाली मौतें इसी बात की पुष्टी करती हैं. यह तसवीर कब बदलेगी, बदलेगी भी या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता.

क्या हमें एक समाज के रूप में इस बात पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है? क्या हमें अपनी बेटियों के लिए थोड़ा संवेदनशील और सहनशील होने की जरूरत नहीं जैसे हम बेटों के लिए हैं ताकि इन मौतों का आंकड़ा कम किया जा सके?

कुछ दिनों से आंखों में दर्द रहता है, मैं क्या करुं?

सवाल-

मैं 24 वर्षीय युवती हूं और मेरा पूरा दिन औफिस में कंप्यूटर पर काम करते बीतता है. कुछ दिनों से मेरी आंखों में रिड़कन रहती है और कभीकभी आंखों में दर्द  होने लगता है. कृपया उचित समाधान बताएं?

जवाब-

घंटो कंप्यूटर पर काम करने वाले लोगों में ड्राई आई की समस्या आम है. दरअसल, यह समस्या कंप्यूटर स्क्रीन पर आंखें एकटक लगातार गड़ाए रखने से उपजती है. इस के फलस्वरूप पलक झपकने की कुदरती गति धीमी पड़ जाती है और आंखों की बाहरी सतह को प्राकृतिक रूप से नम रखने वाली आंसुओं की सूक्ष्म धारा टूट जाती है. नतीजतन आंखें शुष्क पड़ जाती हैं.ड्राई आई की समस्या से उबरने के लिए जरूरी है कि आप पलकें समयसमय पर झपकाती रहें. काम करते हुए बीचबीच में कुछ देर के लिए कंप्यूटर छोड़ कर कोई दूसरा काम कर लें.चाहें तो खिड़की से ही बाहर झांक लें या दूर लगी तसवीर को निहार लें. जब कभी फोन परबात कर रही हों, तो अपनी आंखें मूंद लें. इतना करने भर से आंखों की नमी लौट आएगी और उन्हें राहत मिलेगी.आंखों को नम बनाए रखने के लिए दिन में 3-4 बार आंखों में टीयरप्लस या रिफ्रैश जैल आई ड्रौप्स भी इस्तेमाल में ला सकती हैं. समस्या फिर भी जस की तस रहे तो बेहतर होगा कि किसी आंख के डाक्टर से परामर्श कर लें. 

गरमी की तपन के बाद बारिश की रिमझिम फुहारें बड़ा सुकून देती हैं. लेकिन इस मौसम में नमी और उमस बढ़ने के कारण रोगाणु और बैक्टीरिया भी बड़ी संख्या में पनपने लगते हैं. इन के कारण आंखों के संक्रमणों जैसे स्टाई, फंगल इंफेक्शन, कंजक्टिवाइटिस और दूसरी कईं समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. आंखें हमारे शरीर का बहुत ही नाजुक और महत्वपूर्ण अंग हैं, इसलिए मानसून में हमें अपनी आंखों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. जानिए इस मौसम में आंखों की कौनकौन सी समस्याएं हो जाती हैं और इन्हें स्वस्थ्य रखने और संक्रमण से बचाने के लिए क्या करें.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

भैरवी: भाग 2- आखिर मल्हार और भैरवी की शादी क्यों नहीं हुई

इसी बीच बलदेव सिंह का अचानक सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया. पिता के देहांत पर जब भैरवी गांव आई तो उसे अपनी बचपन की सहेली से पता चला कि मल्हार का परिवार गांव छोड़ कर राजस्थान चला गया है, जहां के कणकण में लोकसंगीत बसा है. मल्हार के परिवार को वहां बहुत प्रसिद्धि मिल रही है.

पिता की मृत्यु के पश्चात मां राजरानी बिलकुल टूट गई थीं और दादी ने भी खाट पकड़ ली थी. खेतों पर भी बटियादारों द्वारा कब्जा हो गया था और पैसों की तंगी के कारण घर चलाना मुश्किल हो रहा था.

भैरवी का सिविल सेवा परीक्षा का वह चौथा प्रयास था. वह दिनरात कड़ी मेहनत कर रही थी कि इस बार तो वह सिविल सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर ले. एक दिन वह लाइब्रेरी से लौट रही थी कि उसे मां की चिट्ठी मिली. चिट्ठी में लिखा था-

‘बिटिया भैरवी, शादी विवाह समय पर हो जाए तो सही रहता है. तुम न जाने क्या मन में पाले बैठी हो. बड़ी मुश्किल से तुम्हारे लिए एक रिश्ता आया है, मेरी भाभी के मायके की तरफ का. अगले रविवार को लड़के वाले आ रहे हैं. तुम भी आ जाओ. तुम्हारा विवाह हो तो आगे सोनी का भी विवाह करना है. दोनों बेटियों का विवाह कर लूं तो गंगा नहाऊं.’’

मल्हार के प्रेम में रचीबसी भैरवी इस बार मां को कुछ न कह पाई. उसे तो यह भी नहीं पता था कि इतने साल बीत जाने के बाद मल्हार उस से प्रेम करता भी है या नहीं.

उस ने अपनी सखियों से सुना भी था कि लड़के तो निर्मोही होते हैं. आज किसी से प्रेम तो कली किसी दूसरे से. दिल देने में माहिर होते हैं दिल फेंक किस्म के लड़के, मल्हार भी ऐसा ही हो, क्या पता.

रविवार का दिन था. मां के कहने पर भैरवी ने मां की ही हलकी गुलाबी साड़ी पहनी थी. गुलाबी साड़ी में उस की सांवली सी रंगत और खिल आई थी. आईने में स्वयं को देख कर इतराई थी भैरवी. सांवलासलोना सा रूप, तीखे नैननक्श और लंबी छरहरी काया.

लड़के वालों के सामने जब भैरवी चाय ले कर गई तो उस ने देखा होने वाला दूल्हा और सोनी आपस में बातें कर रहे हैं. अल्हड़ सी सोनी चिडि़या की तरह चहक रही थी, इधरउधर फुदक रही थी.

थोड़ी ही देर में परिणाम सामने था. लड़के वालों ने भैरवी के स्थान पर सोनी को पसंद कर लिया था.

लड़के की मां बोली थीं, ‘‘माफ कीजिए बहनजी, हमें तो अपने बेटे के लिए गोरी लड़की चाहिए. आप की भैरवी का तो रंग बहुत दबा हुआ है. हम सोनी के साथ अपने लड़के का रिश्ता करना चाहेंगे, भैरवी के साथ नहीं.’’

चारों तरफ सन्नाटा छा गया. समय की गति थम गई. तभी दादी ने नीरवता तोड़ते

हुए कहा, ‘‘कोई बात नहीं, आप को सोनी पसंद है तो हम सोनी का विवाह आप के लड़के से करा देंगे. सोनी भी अब विवाह लायक है ही.’’

भैरवी सोनी को दुलहन बनते देखती रही. सोनी के साथ ही उस का दुलहन बनने का सपना भी जैसे विदा हो गया.

उसी साल भैरवी का आईएएस में चयन हो गया. फिर कभी दादी या मां ने भैरवी को विवाह करने के लिए नहीं कहा.

भैरवी ने घर का पूरा बोझ अपने कंधों पर उठा लिया. उसकी आमदनी से ही घर चलने लगा. नौकरोंचाकरों की आदत भैरवी को कम उस के घर वालों को अधिक पड़ने लगी.

सभी की सुषुप्त इच्छाएं एक बार पुन: जाग उठीं. मां को महंगी साडि़यां भाने लगी और राजू और दीपू को ब्रैंडेड कपड़े और मोटरसाइकिलें. बड़ी मेहनत से भैरवी ने राजू को इंजीनियर बनाया और दीपू को विदेश पढ़ने भेजा.

आज सभी के विवाह हो चुके हैं. सभी अपनेअपने परिवारों के साथ खुश हैं. दादी को गुजरे हुए 5-6 वर्ष बीत चुके हैं. मां राजरानी भैरवी के साथ ही रहती हैं. भैरवी के बालों में चांदी ?ांकने लगी है. शरीर भी थोड़ा सा भर गया है परंतु चेहरे का लावण्य ज्यों का त्यों है.

‘‘मैडम, चाय बना दूं? क्या आप की तबीयत नहीं ठीक है? आप का चेहरा उतरा सा लग रहा है.’’ मोहना ने पूछा.

मोहना की आवाज से भैरवी अपने अतीत की पुस्तक बंद कर वर्तमान में लौट आई.

इतने सालों से साथ काम करतेकरते मोहना भी भैरवी के लिए सैके्रटरी कम और सखी ज्यादा हो गई थी.

‘‘हां, बना दो… और हां, मां के लिए कल सवेरे की दिल्ली की फ्लाइट का टिकट बुक कर दो, उन्हें मौसी के यहां किसी शादी में जाना है,’’ चाय का घूंट भरते हुए भैरवी के सामने मल्हार का चेहरा उभर आया. वही 16-17 बरस का पतली सी मूंछों वाला मल्हार, जिस की बोलती सी भूरी आंखों में डूब जाने का मन करता था भैरवी का.

‘‘सुन, यदि मैं कुछ दिन तुझ से न मिलूं तो क्या तू मुझे भूल जाएगी?’’ गंगा के कछार पर बैठे हुए एक दिन मल्हार ने उस से पूछा था.

‘‘हां बिलकुल,’’ कहते हुए वह जोर से खिलखिला पड़ी और मल्हार का मासूम सा चेहरा रोंआंसा हो आया था, ‘‘पर मैं तो तुझे जिंदगीभर नहीं भूलूंगा, ब्याह करूंगा तो सिर्फ तुझ से,’’ मल्हार ने अपनी हथेलियों में उस का चेहरा लेते हुए कहा था, ‘‘चल झूठे.’’

कहते हुए भैरवी ने शरारत से अपना मुंह बिचकाया था और फिर न जाने क्या सोच कर उस ने उचकते हुए मल्हार के कपोलों पर अपने प्रेम की नन्ही सी मुहर लगा दी थी.

Bigg Boss 17: वाइल्ड कार्ड बनकर शो में धमाका करेंगी Rakhi Sawant

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान का सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस 17 शुरु हुए 1 महीना हो चुका है. शो दिनों- दिन बोरिंग होता जा रहा है. बिग बॉस की ऑडियंस इस शो को देखने से दूर भाग रहे है क्योंकि शो में मौजूद कंटेस्टेंट्स कुछ खास कमाल करते नजर नहीं आ रहे. बिग बॉस 17 की टीआरपी भी गिरती जा रही है. मेकर्स इस सीजन की टीआरपी को धांसू बनाने के लिए घर में नए-नए ट्विस्ट लेकर आ रहे है, लेकिन कंटेस्टेंट्स की घटिया स्ट्रैटजी देखकर दर्शक भी बोर हो गए है. ऐसे में दावा किया जा रहा है कि शो में जल्द ही अब नए वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स की एंट्री हो सकती है, जिसमें राखी सावंत (Rakhi Sawant) का नाम सामने आ रहा है. कहा जा रहा है कि मेकर्स इस सीजन की टीआरपी की उठाने के लिए राखी सावंत की एंट्री घर में करवा सकते हैं.

पति आदिल दुर्रानी के साथ आएंगी राखी सांवत

टीवी का सबसे पॉपुलर रियलिटी शो बिग बॉस 17 में जल्द ही बड़ा धमाका होने वाला है. दावा किया जा रहा है कि शो के मेकर्स बिग बॉस 17 से पांच बोरिग कंटेस्टेंट्स का पत्ता साफ होने वाला है. जिसकी शुरुआत नाविद सोल से हो चुकी है. नाविद सोल का मिड वीक इविक्शन हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द ही कुछ और कंटेस्टेंट शो से बाहर होंगे, जिसके बाद घर में पांच से छह वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स की एंट्री हो सकती है. लेटेस्ट खबर के मुताबिक बिग बॉस 17 में राखी सांवत आ सकती है. दरअसल, मेकर्स राखी सांवत को अकेले लाने की प्लानिंग नहीं कर रहे वह राखी एक्स हसबैंड आदिल दुर्रानी को लेकर आएंगे, जिससे घर में काफी ज्यादा धमाके होंगे.

 

पति रितेश के संग शो में हिस्सा ले चुकी है राखी सांवत

आपको बता दें कि राखी सांवत बिग बॉस के घर में कई बार आ चुकी है. वह इस शो के फर्स्ट सीजन में आ चुकी है. इसके बाद राखी सांवत को शो में टीआरपी बढ़ाने के लिए बुलाते रहे है. राखी ने बिग बॉस 15 में अपने पति रितेश के साथ एंट्री लीं थी. उस दौरान ड्रामा क्वीन ने पहली बार दुनिया को रितेश का चेहरा दिखाया था, जिस वजह से शो की टीआरपी तेजी से ऊपर भागी थी. अब मेकर्स एक बार फिर इसी तरह की प्लानिंग कर रहे हैं.

औनलाइन गेम्स कैरियर भी फेम भी

दुनियाभर में गेमिंग इंडस्ट्री तेजी से उभर रही है. यह ऐसी फील्ड है जहां युवा, खासकर, टीनऐजर अपने कैरियर के मौके तलाश रहे हैं.

ग्लोबल गेम्स मार्केट रिपोर्ट के अनुसार, औनलाइन गेम्स से ग्लोबल मार्केट में साल खत्म होतेहोते गेमिंग इंडस्ट्री में इनकम 200 बिलियन डौलर हो जाएगी. यानी यह कितना बड़ा सैक्टर है, इस का अंदाजा लगाना कइयों को चौंका सकता है.

यूट्यूब इस समय गूगल के बाद सब से बड़ा सर्च इंजन है. यहां हर दिन लगभग 2 बिलियन यूजर्स आते हैं और इस प्लेटफौर्म पर एक बिलियन घंटे समय बिताया जाता है. गेमर्स यूट्यूब पर लाइव आ कर रिकौर्ड करते हैं और अपनी स्किल्स दिखाते हैं. यह प्लेटफौर्म गेमर्स के लिए खुद की रीच बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन चुका है.

अजय जो ‘अज्जू भाई’ के नाम से फेमस है, वह गेमिंग इंडस्ट्री में जानामाना नाम है. अहमदाबाद के रहने वाले अज्जू ने गेमिंग की शुरुआत छोटे से मोबाइल से की थी. अज्जू ने अपना कैरियर फ्रीलांसर रह कर सौफ्टवेयर डैवलपर के रूप में शुरू किया.

अजय कई पीएचपी और जावा स्क्रिप्ट प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जानता है. वर्ष 2015 में अजय ने क्लैश औफ क्लैन्स जैसे स्मार्टफोन गेम्स खेलना शुरू किया. इस के बाद गेमिंग में उन्हें पछाड़ना गेमर्स के लिए मुश्किल होता गया.

औनलाइन गेमिंग में कैरियर

देखा जाए तो औनलाइन गेमिंग में काफी कैरियर स्कोप है. कई युवा इसे, बस, एंटरटेनमैंट से ही जोड़ कर देखते हैं, लेकिन यह सिर्फ एंटरटेनमैंट ही नहीं, कैरियर के दरवाजे भी खोलता है. 10वीं या 12वीं के बाद मल्टीमीडिया या एनीमेशन कोर्स कराने वाले इंस्टिट्यूट्स में गेम डैवलपर या गेमिंग डिजाइनिंग के कोर्स हैं. इस में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री तीनों कोर्स उपलब्ध हैं.

गेमिंग डैवलपर्स अपनी क्रिएटिव सोच के हिसाब से गेम्स बनाता है, इसलिए इस फील्ड में क्रिएटिविटी जरूरी होती है. गेमिंग सौफ्टवेयर और गेमिंग थ्योरी की सम?ा होना भी जरूरी है. इस के अलावा गेमिंग के लिए स्केचिंग, इमेजिनेशन और लाइटिंग इफैक्ट्स की जानकारी भी जरूरी होती है.

उज्ज्वल चौरसिया, जिसे टैक्नो गेमर्स के नाम से भी जाना जाता है, दिल्ली का यूट्यूबर है. वह गेमिंग वर्ल्ड में काफी पौपुलर है. उज्ज्वल ने अपना गेमिंग कैरियर छोटी उम्र से शुरू कर दिया था. बचपन से ही उसे वीडियो गेम को ले कर जिज्ञासा थी.

गेमिंग में कैरियर सिर्फ खेलना नहीं. गेम प्रोड्यूसर भी कैरियर के लिए अच्छा औप्शन है. इस में डिजाइनिंग की जानकारी के अलावा 3डी मौड्यूलिंग और 2डी सौफ्टवेयर की नौलेज होनी जरूरी है. वहीं, औडियो इंजीनियर के लिए एल प्लूसप्लशस व साउंड इंजीनियरिंग के कंप्यूटर लैंग्वेज की जानकारी भी जरूरी है. वीडियो गेम प्रोड्यूसर का काम पूरे प्रोडक्शन के काम पर नजर रखना होता है.

लोकेश राज की पहचान गेमिंग वर्ल्ड में लोकेश गेमर के नाम से है. वह जेनेरा फ्री फायर गेम का मास्टर और यूट्यूबर व कंटैंट डैवलपर है. उस के दोस्त उसे डायमंड किंग के नाम से बुलाते हैं.

लोकेश भारत के सदर्न स्टेट तेलंगाना से है. छोटी उम्र में ही उस ने कामयाबी हासिल की है. लोकेश ने 2017 में यूट्यूब चैनल की शुरुआत की थी, लेकिन पहली वीडियो उस ने 2019 में अपलोड की.

गेम की दुनिया का बादशाह बनने के लिए गेम डिजाइनर अच्छा कैरियर विकल्प है. इस के लिए लेटैस्ट टैक्नोलौजी में महारत हासिल करनी होती है. गेमिंग वर्ल्ड में चीजें बहुत तेजी से बदलती हैं तो बदलती चीजों के साथ खुद को अपडेट रखना बेहद जरूरी होता है. साथ ही, दुनिया में कब क्या नया हो रहा है, यह आप को पता होना चाहिए.

इस में समय की चिंता किए बगैर काम करते रहना होता है. गेम डिजाइनिंग के साथ गेम को फनी बनाना, गेम राइटिंग और डायग्राम तैयार करना होता है. एक तरह से इन के ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं.

अमित शर्मा, जिसे अमित भाई के नाम से लोग पहचानते हैं, वैस्ट बंगाल के सिलीगुड़ी से है. उस ने अपने चैनल का नाम ‘देसी गेमर्स’ और ‘देसी आमी’ रखा है. दोनों चैनलों में मिलियनों में फौलोअर्स हैं.

अपने शुरुआती समय में वह एनिमेटेड वीडियो बनाता था. उस के बाद वह गेमिंग फील्ड में आया और इंडिया के फेमस गेमर्स में शुमार हो गया.

अगर आप कल्पनाशील हैं और अपनी कल्पनाओं को उड़ान देना चाहते हैं व अपनी चीजों को सीरियसली लेते हैं तो एनिमेशन की दुनिया में कैरियर बनाना अच्छा औप्शन है. इस के लिए 2डी कौन्सैप्ट आर्ट के माध्यम से 3डी मौडल्स और 2डी टैक्स्चर मैप तैयार करना आना चाहिए. एक एनिमेटर आमतौर पर प्रोग्रामर और सीनियर आर्टिस्ट के साथ गेम के कैरेक्टर के हर पहलू पर काम करता है.

‘कैरी मिनाटी’ को कौन नहीं जानता. यूट्यूब में भारत के अगर टौप इन्फलुएन्सर की बात की जाए तो कैरी का नाम शुरुआती 5 में आएगा. कैरी का असली नाम अजय नागर है. वह फरीदाबाद का रहने वाला है. उसे रोस्ट के रूप में पहचान मिली है. करोड़ों बार उस की वीडियोज को देखा जाता है. हालांकि उस की वीडियो में गालियां होती हैं और देखने वाले अधिकतर युवा होते हैं तो एक खराब मैसेज युवाओं को पहुंचता है.

अजय का नाम गेमर के तौर पर भी खूब चर्चित रहता है. वह यूट्यूब पर लाइव गेम अपलोड करता है. हजारों की संख्या में युवा उस की वीडियो देखते हैं.

औडियो प्रोग्रामर की डिमांड गेमिंग वर्ल्ड में बहुत ज्यादा है. दमदार आवाज से अपनी अलग पहचान बनाने वालों के लिए यह क्षेत्र बेहतरीन है. अलगअलग गेम कैरेक्टर्स की तरह आवाजें जनरेट करने की कला इस फील्ड में कैरियर को आगे बढ़ा सकती है. और, आवाज मौड्यूलेशन का काम सिर्फ गेमिंग वर्ल्ड में ही नहीं, बल्कि इस जैसी कई इंडस्ट्रीज को यह कवर करता है, खासकर सिनेमा में इस का खूब यूज होता है.

वैसे, यह फील्ड कंप्यूटर इंजीनियर के लिए बेहतरीन मानी जाती है. औडियो प्रोग्रामर को गेम में स्पैशल इफैक्ट के इस्तेमाल के लिए साउंड के बारे में अच्छी नौलेज रखना जरूरी है. इस तरह के प्रोग्रामर गेम के लिए औडियो तैयार करने के अलावा साउंड इंजीनियरिंग का भी काम करते हैं.

चारकोल फेस पैक निखारे खूबसूरती

खूबसूरती निखारने में चारकोल का इस्तेमाल इन दिनों खूब किया जाने लगा है. यही वजह है कि मेकअप किट में भी इस ने अपनी जगह बना ली है. क्लींजर, फेस मास्क, स्क्रब्स यहां तक कि नहाने के साबुन में भी इस का इस्तेमाल हो रहा है. आजकल शाइनिंग स्किन के लिए चारकोल का इस्तेमाल अब करीब हर कंपनी अपने प्रोडक्ट में करने लगी है.

आइए जानते हैं इस के फायदों के बारे में

चारकोल फेस मास्क

चारकोल फेस मास्क लगाने के बाद उस के सूखने के बाद उसे पील औफ किया जाता है. यह त्वचा पर हैल्दी ओर ग्लोइंग असर दिखाता है. चारकोल फेस मास्क लगाने से चेहरे की गंदगी, तेल और बारीक धूल साफ हो जाती है. ब्लैकहैड्स करे दूर: अगर आप ब्लैकहैड्स की समस्या से परेशान हैं, तो ब्लैकहैड्स रिमूवल स्ट्रिप इस्तेमाल करें, जिस में ऐक्टिवेटेड चारकोल हो. यह चेहरे में गहराई तक जा कर ब्लैकहैड्स को जड़ से खत्म कर देता है. यही नहीं, यह चेहरे के मुंहासों को भी खत्म करने में मदद करता है. यह न सिर्फ चेहरे को क्लीन करता है, बल्कि पोर्स को भी साफ कर के त्वचा की चमक को बरकरार रखता है. इस के इस्तेमाल से चेहरे पर गंदगी जमा नहीं होती और आप पूरा दिन फ्रैश फील करती हैं.

करता है सनस्क्रीन का काम

बदलते मौसम का सब से ज्यादा असर चेहरे पर ही पड़ता है. तेज धूप के संपर्क में आने से स्किन डल हो जाती है. ऐसे में चारकोल स्किन को हैल्दी बनाने के साथसाथ सूर्य की हानिकारक किरणों से भी त्वचा की रक्षा करता है. अगर आप सनस्क्रीन लगाना भूल भी जाती हैं, तो आप की स्किन को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचेगा.

पौल्युशन से बचाव

ऐक्टिवेटेड चारकोल की खासीयत यह है कि वह स्किन से टौक्सिन को खींच निकालता है यानी यह टौक्सिन के लिए एक मैगनेट की तरह है. रात में सोने से पहले चारकोल बेस्ड फेसवाश का इस्तेमाल चेहरे को अंदर तक क्लीन कर तरोताजा कर देगा. चारकोल फेसवाश से चेहरा साफ करने से स्किन में मौजूद गंदगी, तेल और धूल पोर्स से बाहर निकल जाएगी और स्किन साफ और हैल्दी हो जाएगी. फेयर स्किन: फेयर स्किन के लिए चारकोल का इस्तेमाल खूब किया जा रहा है. यह स्किन को अंदर तक साफ कर उसे मुलायम बनाता है. इस में ऐसे तत्त्व होते हैं, जो स्किन को हैल्दी तो बनाते ही हैं, साथ ही चेहरे की रौनक भी लौटाते हैं.

असल में चारकोल का मतलब कोयले से नहीं है. यहां बात हो रही है ऐक्टिवेटेड चारकोल की, जो लकड़ी और नारियल के शेल से बना बारीक पाउडर होता है और यह त्वचा के साथसाथ कई रोगों में भी बहुत कारगर है. हैल्दी और शाइनिंग स्किन के लिए हफ्ते में 1 बार चारकोल फेसमास्क का उपयोग करें. औयली स्किन वाली महिलाएं इस का उपयोग हफ्ते में 2 बार कर सकती हैं.

अगर स्किन ड्राई है, तो फेस मास्क लगाने के बाद, मौइश्चराइजर लगाना न भूलें. पील औफ मास्क त्वचा पर लंबे समय तक रखने पर बुरा असर हो सकता है. इस बात का ध्यान रखें कि ऐसा फेस मास्क, जिस में त्वचा की तैलीय ग्रंथियों की सक्रियता कम होती है, उसे त्वचा पर लंबे समय तक लगा कर नहीं रखना चाहिए. इस से त्वचा की जरूरी नमी खत्म हो जाती है. अगर मास्क आप रात में लगाती हैं, तो इस का असर ज्यादा अच्छा होगा.

मिनी सिंह 

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