अनुपमा तिपेश को देगी बड़ी जिम्मेदारी, देखती रह जाएगी डिंपी

टीवी सीरियल अनुपमा में इन दिनों टीआरपी लगातार गिर रही है इसी वजह से शो के मेकर्स एक नया ट्विस्ट लेकर आ गए. वहीं इस शो में एक नया किरदार की एंट्री हो चुकी है. सीरियल में अनुपमा और अनुज की जिंदगी में तिपेश की एंट्री हुई है. जो डिंपी की लाइफ एकदम बदलकर रख देगा. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर अनुपमा में हाल ही में देखने के लिए मिला था कि डिंपी को तिपेश बिल्कुल पसंद नहीं आता और वह उसे खरी खोटी सुना देती है. अपकमिंग एपिसोड में तिपेश डिंपी को जवाब देने के लिए शाह हाउस तक पहुंच जाएगा. यहां पर उसका मुकाबला अनुपमा से होगा.

अनुपमा को किस करेगा अनुज

टीवी सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अनुज अनुपमा को चैलेंज करता है, तो वह सबके सामने उसके साथ रोमांस करेगा. इसके बाद दोनों ही परिवार वालों के बीच डांस करते हैं. तभी अनुज अनुपमा को रोमांस याद दिला देता है. तभी घर की सारी लाइट्स बंद हो जाती हैं. इस मौके पर अनुज अनुपमा को किस करता है और फिर लाइट्स भी जल जाती हैं. डांस परफॉर्मेंस से बाद अनुपमा किचन में चली जाती है. तभी यहां पर खिड़की के सहारे तिपेश घर में घूसने की कोशिश करता है और दोनों ही एक दूसरे को देखकर हैरान रह जाते हैं.

अनुपमा तिपेश को डांस अकेडमी ज्वाइन करने के लिए कहेगी

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर अनुपमा में आगे देखने को मिलेगा कि अनुपमा और तिपेश किचन एरिया में बात करते है. अनुपमा को तिपेश की आदतें समर की याद दिला देती हैं. तभी तिपेश अनुपमा को बताता है कि वह डिंपी से मिलने आया था. इसके बाद अनुपमा के कहने पर तिपेश शाह हाउस का फंक्शन ज्वाइन करता है. यहां तिपेश को देखकर पाखी उझल पड़ती है और डिंपी गुस्सा हो जाती है. तभी तिपेश अनुपमा से डांस करने के लिए कहता है. दोनों शानदार डांस करते हैं. आखिर में अनुपमा तिपेश को डांस अकेडमी ज्वाइन करने का ऑफर देती है. ये बात सुन डिंपी की आंखें फटी रह जाती हैं, लेकिन तिपेश इस ऑफर पर हां बोल देता है.

दीवाली से पहले चैक लिस्ट बनाने के 7 टिप्स

दीवाली साल का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है. दीवाली पर जहां हम अपने घर को बड़े ही विविधता पूर्ण ढंग से सजाते हैं वहीं घर के लिए कुछ नए कपड़े, लाइट्स, चादरें और बर्तन आदि भी खरीदते हैं परन्तु अक्सर खरीददारी करते समय हम कुछ भी ले आते हैं और फिर घर आकर लगता है कि क्यों खरीद लाये इससे पैसे की बर्बादी तो होती ही है साथ ही घर भी अनावश्यक सामान से भर जाता है. आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप दीवाली पर अनावश्यक खर्च से काफी हद तक बच जाएंगे.

1-लाइट्स

दीवाली पर सजावट के लिए प्रयोग की गईं लाइट्स को अक्सर हम पैक करके अगली दीवाली के लिए रख देते हैं. आप इस समय सारी लाइट्स को चैक करें और जो बेकार या फ्यूज हो गईं हैं उन्हें फेक दें और एक लिस्ट नई लाने वाली लाइट्स की बनाएं और समय रहते उन्हें खरीद भी लाएं ताकि दीवाली की अनावश्यक भीड़ भाड़ से आप बच जाए.

2-आउटफिट

दीवाली पर आप और आपके परिवार के सदस्य क्या पहनने वाले हैं यह भी अभी से चैक कर लें. यदि किसी सदस्य का नया आउटफिट लाना है तो ले आएं और यदि घर में रखें आउटफिट को पहनना है तो उसकी सिलाइयाँ और हुक बटन को चेक करने के साथ साथ पहनकर भी देखें ताकि उसे आप अपने अनुसार फिट करवा सकें यदि आप नया आउटफिट नहीं खरीदना चाहतीं हैं तो मिक्स एंड मैच करके नया आउटफिट तैयार कर लें.

3-सजावट का सामान

दीवाली पर हम घर को विभिन्न फूलमालाओं, बंदनवार, झूमर और रंगोली आदि से सजाते हैं. आपने पिछले साल का जो भी सामान पैक करके रखा है उसे चैक कर लें और यदि नया लेना है तो उसे ऑनलाइन या ऑफलाइन मंगवा लें ताकि समय रहते उसे बदला जा सके.

4-उपहार

दीवाली उपहारों और मिठाइयों  के लेनदेन का अभी सही समय है कि आप अपने कामगारों और परिवार के सदस्यों या परिचितों को क्या देंगी यह सोचकर एक लिस्ट तैयार कर लें. अक्सर हमें कुछ ऐसे उपहार मिलते हैं जो हमारे पास डबल हो जाते हैं या फिर हम प्रयोग नहीं करते ऐसे सामान को एक बार चैक जरूर कर लें ताकि दीवाली पर उपयोग किया जा सके.

5-किचिन

किचिन घर का एक ऐसा स्थान होता है जहां पर हमारा अधिकांश समय व्यतीत होता है. किचिन में कुछ बर्तन और कंटेनर ऐसे होते हैं जो बेकार हो चुके हैं या जिनकी कोटिंग निकल गयी है इन्हें चिन्हित कर लीजिए. हो सके तो इन्हें रिप्लेस कर दें अन्यथा इन्हें ही पेंट आदि करके नया रूप देकर प्रयोग करने का प्रयास करें इसके साथ ही यदि आप अपनी किचिन के लिए कोई नया उपकरण लेने का प्लान बना रहीं हैं तो अभी से ही सर्चिंग प्रारम्भ कर दें ताकि अंतिम समय की भागदौड़ से आप बची रहें.

6-घर है सबसे जरूरी

पूरे घर पर नजर दौड़ाएं क्योकि बारिश के बाद के इन दिनों में घर में सीलन, जाले आदि जगह जगह पर लग जातें हैं. इन्हें हटाने के साथ साथ यदि आपको घर के किसी भी कोने में रिपेयरिंग या लाइट्स को दुरुस्त करवाने की जरूरत है तो अभी ही करवा लें क्योंकि अंतिम समय पर एक तो मजदूर नहीं मिलते और यदि मिलते भी हैं तो काम अच्छा नहीं करते.

7-पर्दे और कुशन्स

घर के लिए यदि आप नए पर्दे बनवाना चाहतीं हैं तो यही उपयुक्त समय है. आजकल रेडीमेड पर्दे उपलब्ध हैं इन्हें ऑनलाइन या ऑफलाइन बड़े आराम से खरीदा जा सकता है. यदि नए नहीं खरीदना चाहतीं तो उन्हें पुराने पर्दे के साथ मिक्स और मैच करके नया लुक दें.

मुझे आईलाइनर लगाना पसंद है, मुझे किस रंग का आईलाइनर सूट करेगा बताएं

सवाल

मेरी उम्र 25 साल है. मुझे आईलाइनर लगाने का बहुत शौक है. मुझे किस रंग का आईलाइनरसूट करेगा?

जवाब

आप की उम्र में काला ही नहीं हर रंग का आईलाइनर लगाया जा सकता है. एक लाइन काले रंग से और उस के साथ एक लाइन किसी कलरफुल रंग की लगाई जा सकती है. यह बहुत ही सुंदर लगती है. आजकल अनेक रंग के आईलाइनर पैंसिल उपलब्ध हैं जिन्हें इस्तेमाल कर के आप आसानी से आईलाइनर लगा सकती हैं. ये स्मजपू्रफ और वाटरपू्रफ होते हैं. अगर आप का हाथ सधा हुआ है तो आप लिक्विड लाइनर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं वरना आजकल कलरफुल आईलाइनर पैन भी अवेलेबल हैं जिन का इस्तेमाल करना बहुत ही आसान होता है. रात की पार्टी में आप की उम्र में ग्लिटरिंग आईलाइनर भी लगाया जा सकता है.

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कुछ साल पहले मुझे सिगरेट  पीने की गंदी लत लग गई थी. सुना है सिगरेट छोड़ने से मोटापा बढ़ जाता है. क्या यह सच है?

जवाब

सिगरेट छोड़ने सौंदर्य और सेहत दोनों के लिए अच्छा है. शुरू में थोड़ा वजन बढ़ सकता है क्योंकि सिगरेट छोड़ने के बाद मानसिक रूप से कुछ न कुछ खाते रहने की इच्छा बढ़ जाती है. ऐसे में ज्यादा खाने से मोटापा बढ़ सकता है. मगर चबाने की इच्छा हो तो मुंह में इलायची रख लें. भूख लगने पर पौपकौर्न खा सकती हैं. दिन में 1 या 2 बार चूईंगम भी चबा सकती हैं. ग्रीन सलाद व फलों का सेवन बहुत फायदा पहुंचाएगा. भूख लगने पर तलाभुना न खा कर सलाद खाएंगी तो वजन नहीं बढ़ेगा. सुंदरता व सेहत के लिए सिगरेट छोड़ना बहुत जरूरी है.

समस्याओं के समाधानऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर,

डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा 

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

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ज्यादा प्रदूषण के कारण बढ़ रही है बच्चों में मोटापे की परेशानी

हाल ही में हुई एक शोध की माने तो अधिक वायु प्रदूषण वाली जगहों पर रहने वाले बच्चे दूसरे बच्चों की अपेक्षा अधिक मोटे होते हैं. कारण है कि वो अधिक जंक फूड खाते हैं. शोधकर्ताओं का दावा है कि वायु प्रदूषण का स्तर अधिक होने के कारण बच्चे अधिक जंक फूड का सेवन करते हैं. वायु में प्रदूषण का स्तर अधिक होने के कारण बच्चों में हाई ट्रांस फैट डाइट का सेवन 34 फीसदी तक बढ़ जाता है. स्टडी में ये भी पाया गया कि ऐसे वातावरण में बच्चे घर का खाना खाने से ज्यादा बाहर का खाना पसंद करते हैं.

हालांकि बच्चों की आदत में इस बदलाव के पीछे के कारण का ठीक ठीक पता नहीं लगाया जा सका है. पर जानकारों की माने तो इसका सीधा संबंध वायु प्रदूषण से है. जानकारों का मानना है कि प्रदूषण से शरीर को खाने से मिलने वाली एनर्जी और ब्लड शुगर पर प्रभाव पड़ता है और भूख भी कम लगती है.

शोधकर्ताओं की माने को वायु प्रदूषण के स्तर में कमी कर के मोटापे के इस परेशानी को कम किया जा सकता है. अमेरिका में हुए इस शोध में करीब 3100 बच्चों को शामिल किया गया था. इन सभी बच्चों में वायु प्रदूषण से उनके रेस्पिरेटरी सिस्टम पर होने वाले प्रभाव की जांच की गई.

स्टडी में शामिल बच्चों से उनकी खान पान की आदतों के बारे में जानकारी ली गई. वो कब और क्या खाते हैं इस आधार पर इस स्टडी के निष्कर्ष पर पहुंचा गया है. आपको बता दें कि इस शोध में स्टडी में शामिल सभी लोगों के घर के आसपास में मौजूद बिजली संयंत्रों में और गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण की मात्रा की जांच की गई थी.

इस जांच में पाया गया कि प्रदूषण के  अधिक स्तर वाले क्षेत्र में रहने वाले बच्चों ने हाई ट्रांस फैट डाइट का सेवन करते हैं. स्टडी के नतीजों में शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक वायु प्रदूषण में रहने वाले बच्चे 34 फीसदी ज्यादा ट्रांस फैट डाइट का सेवन करते हैं.

Diwali Special: त्यौहार पर मीठे में शरीफे से बनाएं शुगरफ्री मिठाइयां

मीठे के बिना हर त्यौहार, हर ख़ुशी अधूरी होती है. पर्व हो या कोई अन्य खुश होने के अवसर पर  मुंह मीठा करना तो बनता ही है. त्योहारों पर सबसे बड़ी समस्या होती है कि ऐसा क्या बनाया जाए और क्या मेहमानों को खिलाया जाए जिसे आसानी से घर पर बनाया जा सके और सबको पसंद भी आये. त्योहारों पर बाजार से मिठाई लाने से बचना चाहिए क्योकि इन दिनों एक तो बाजार में बहुत मिलावट वाली मिठाइयाँ मिलतीं हैं दूसरे इनके दाम आसमान छू रहे होते हैं ऐसे में घर पर मिठाइयां बनाना ही सर्वोत्तम रहता है क्योंकि घर पर बनी मिठाईयां काफी बजट फ्रेंडली तो होती ही हैं साथ ही हाइजिनिक भी होतीं हैं. आज हम आपको शरीफे से बनने वाली 2 मिठाइयाँ बनाना बता रहे हैं जिन्हें आप बहुत आसानी से घर पर बनाकर मेहमानों को खिला सकते हैं. शरीफा इन दिनों बाजार में भरपूर मात्रा में मिल रहा है. शरीफे में अपनी ही मिठास इतनी अधिक होती है कि इससे बनने वाली मिठाइयों में मिठास के लिए किसी भी अन्य चीज को डालने की जरूरत नहीं होती इसलिए इस मिठाई को शुगर के मरीज भी सीमित मात्रा में खा सकते हैं. शरीफे में एंटीओक्सीडेंट्स, विटामिन्स, मिनरल्स, केल्शियम, पोटेशियम जैसे अनेकों पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं इस तरह मिठाइयों के रूप में हम इसे बड़ी आसानी से अपनी डाईट में शामिल कर सकते हैं तो आइये देखते हैं कि इन मिठाइयों को कैसे बनाया जाता है

1. शरीफा दलिया खीर

कितने लोगों के लिए – 6

बनने में लगने वाला समय- 30 मिनट

मील टाइप – वेज

सामग्री

शरीफे का गूदा  1 कप

गेहूं का दलिया  1/4 कप

फुल क्रीम दूध  2 लीटर

घी  1/2 टीस्पून

बारीक कटी मेवा  2 टेबलस्पून

इलायची पाउडर  1/4 टीस्पून

विधि

शरीफे के गूदे को मिक्सी में ब्लेंड करके अलग रख दें. अब एक भगौने में दूध गर्म होने के लिए गैस पर रखें. दूसरी गैस पर एक पैन में 1/4 टीस्पून घी डालकर दलिए को सुनहरा होने तक भून लें. जब दूध में 3—4 उबाल आ जायें तो भुने दलिए को उबलते दूध में डालकर चलायें और गैस को धीमा कर दें. अब इसे बीच बीच में चलाते हुए तब तक उबलने दें जब कि यह लगभग आधा न रह जाए. बचे घी को एक पैन में डालकर सभी मेवा को हल्का सुनहरा होने तक भून लें. जब खीर गाढ़ी होकर आधी रह जाए तो गैस बंद कर दें और इलायची पाउडर व भुनी मेवा मिला दें. जब खीर पूरी तरह ठंडी हो जाए तो पिसा शरीफा मिलाकर मेहमानों को सर्व करें.

2. शरीफा कलाकंदी बर्फी

कितने लोगों के लिए – 6

बनने में लगने वाला समय – 30 मिनट

मील टाइप – वेज

सामग्री   

शरीफा का गूदा  1 कप

फुल क्रीम दूध  1 लीटर

किसा पनीर  250 ग्राम

इलायची पाउडर  1/4 टीस्पून

घी  1 टीस्पून

विधि

दूध को गैस पर उबलने रखें. जब दूध उबलकर 75 प्रतिशत रह जाए तो पनीर मिलाकर मध्यम आंच पर पकाएं. जब दूध पकते पकते लगभग आधा हो जाये तो शरीफे का गूदा मिलाकर पकाएं. जब मिश्रण एकदम गाढ़ा होने लगे तो घी और इलायची पाउडर मिलाकर मिश्रण के कड़ाही छोड़ने तक पकायें और चिकनाई लगी ट्रे में जमा दें. ठंडा होने पर मनचाहे पीसेज में काटें और चांदी के वर्क से सजाकर सर्व करें.

यह कैसा प्रेम- भाग 3 : आलिया से क्यों प्यार करता था वह

मैं, बस, अनायास ही उस की बात से मुसकरा उठी थी. उस का इस तरह मुझे खुद से जोड़ लेना मेरे लिए अदभुत था. फिर भी मैं बहुत ज्यादा गंभीर नहीं थी. मैं उस के बारे में पूरा जानना चाह रही थी. इस के लिए उस के साथ समय बिताना जरूरी था. मुझे भी कोई खास काम नहीं था. इसी मंशा से मैं ने सहमति दी और हम कहीं समय बिताने के लिए निकल पड़े.

दूसरी मुलाकात में एकदूसरे से इतना सहज हो जाना और साथ समय बिताने का आग्रह स्वीकार कर लेना बेशक अविश्वसनीय था, मगर चाशनी में डूबा हुआ था जो मुझे अच्छा लग रहा था और शायद उसे भी.

हम होटल से निकल पड़े और साथसाथ चल रहे थे, बातों का सिलसिला जारी था. इस बीच कई बार उस ने मेरे विचारों को बगैर समझे ही समर्थन दिया था. शायद यह उस की जल्दीबाजी थी या मुझ पर भरोसा जताने का तरीका, यह तो मैं नहीं समझ पाई मगर इतना जरूर समझ गई थी किह मुझ से प्रभावित है, इसलिए ऐसा कर रही है. और उस का ऐसा करना कहीं न कहीं मुझे उस से जोड़ रहा था.

चलतेचलते हम किसी रैस्टोरैंट जाने के बजाय एक छोटे से चाय के खोखे में बैठ गए जो पहाड़ी पंखडंडीनुमा रास्तों के बीच बांस की खपच्चियों से बनाया गया था. आम के तख्तों से बनी बैंच पर हम दोनों बैठ गए. बेतरतीब बनाई गई बैंच हमारे बैठते ही हिलने लगी, जिस से डरने के बजाय अनायास ही हमारी हंसी छूट पड़ी और मन बचपन की तरह शरारती हो उठा. फिर हम बिलकुल सधे हुए बैठे रहे.

सर्प सी लहराती हवाओं की अपनी ही संगीतमय ठसक थी. रात की बारिश से दलदली मिटटी और हवा की शीतलता से मचलते हुए मन के कहने पर मैं ने अपनी सैंडिल उतार कर एड़ियों को मिटटी में धंसा लिया.

2 प्याले मसाला चाय और आलू का पकौड़ा उस की तरफ से और्डर किया गया था. उस ने और्डर करने से पहले मुझ से मेरी पसंद के बारे में नहीं पूछा था. शायद इसलिए क्योंकि इस के अलावा वहां कुछ ऐसा था भी नहें जिसे मंगवाया जाता.

चाय आने तक समय जरा भी नहीं खला था.

देवदार के बड़े वृक्ष और जड़ीबूटियों के छोटेछोटे पौधे, दूरदूर तक फैली हरियाली, कहींकहीं ऊंची घास की हवा से अठखेलियां और चारों ओर फैला सन्नाटा, सूखे हुए पत्तों का ढेर जिस पर हमारे पैर पड़ने से खड़खड़ाने की आवाज सुनाई दे रही थी.

ठंडी हवाएं और प्रकृति का अवर्णनीय सौंदर्य देख कर हम दोनों ही अभिभूत थे. ऐसा मुझे इसलिए लगा क्योंकि उस ने अपनी दोनों हथेलियों को जोड़ कर घुटनों के बीच में छिपा लिया था और पलकों को बंद कर वह सुकून की मुद्रा में बैठी थी. मैं उसे देख कर मुसकरा उठी थी. उस की सौम्यता मुझे छू रही थी. न जाने क्यों उस का साथ मुझे नया सा नहीं लगा, शायद हमारी जड़ें बहुत गहरी जुड़ी थीं.

मुझे मेरी कहानी मिल रही थी और उसे मेरा साथ भा रहा था. क्या वह ऐसी ही है या मुझे देख कर ऐसा जता रही है? इन सवालों के कई जवाब मेरे दिमाग में इधर से उधर दौड़ लगा रहे थे.

अभी वह बात करने की मुद्रा में नहीं थी. खोई हुई थी. यह मैं ने उस के मौन से जान लिया था. एकसाथ 2 दुनियाओं में रहना आसान नहीं होता, ऐसा कुछ खास लोगों के हिस्से में ही होता है. मैं समझ चुकी थी, वह खास है और वह मुझे खास समझती रही, यह अलग बात है.

पकौड़े एकदम गरम थे, इतने कि उस की भाप और हमारी सांसों की भाप मिल कर एक हो गए थे. स्नेह का रस सूख न जाए, इसलिए चाय की चुस्की के साथ मैं ने ही चुप्पी को तोड़ा- ‘वाह, मजा आ गया. गरमागरम चायपकौड़ा आज वैसा ही मजा दे रहा है जैसा बचपन में दिया करता था.’

वह मुसकराई, फिर खिलखिला कर जाड़े की धूप सी गुनगुनी हंसी बिखेर दी. मेरा जिस्म उस गुनगुनी धूप की गरमाहट से भर उठा. हम दोनों ने ही उस गुनगुनाहट को खूब महसूस किया था.

उस ने एक घंटा वहां बैठ कर इतने सवाल कर डाले जो हमारी गहरी दोस्ती के लिए काफी थे. जिस में मुख्यतया हमारी पसंदनापसंद, शौक और विचार शामिल थे. परिवार को ले कर भी दोचार बुनियादी सवाल किए गए थे, मगर वे सिर्फ औपचारिक तौर पर, ज्यादा रुझान तो व्यक्तित्व पर केंद्रित था.

मैं ने उस के शोध को ले कर कुछ जिज्ञासा जरूर दिखाई थी वह भी लेखनिए मांग को ले कर वरना तो लखनऊ की आलिया और जबलपुर की आराधना की मित्रता तो किसी पुराने पेड़ की जड़ों जैसी गहरी जम रही थी.

इस बीच, हम एकएक चाय पूरी शिद्दत से और डकार चुके थे, फिर से कुछ पकौड़े भी. इस दौरान वह नाटा, छोटी आंखों वाला व खूबसूरत सा नौजवान हमारी बातों का आनंद उठा रहा था. उस का सिर झुका कर बेवजह का मुसकराना इस बात की गवाही थी. वही हमारी टेबल पर चाय और पकौड़े सर्व करने आया था. जिस टेबल पर लकड़ी की गांठों के कई बड़े होल थे. बातचीत के दौरान कई बार आलिया ने उन खाली छेदों में यों ही अपनी उंगली को घुमाया था बिलकुल किसी उतावले और चुलबुले बच्चे की तरह.

इस एक घंटे की मुलाकात के बाद जब हम उठे तो उस ने मेरा हाथ अपने दोनों हाथों से कस कर पकड़ रखा था. मैं ने हौले से ढील देने की कोशिश की तो उस के हाथ का दबाव और बढ़ गया. मैं समझ गई, वह मेरा हाथ पकड़े रहना चाहती है. इसलिए मैं ने उसे वैसे ही रहने दिया. हम यों ही साथसाथ बहुत दूर तक चलते रहे. पहाड़ी रास्तों से सटे सागौन के पेड़ और ढलानों पर फिसलती सी ऊंची घास से होते हुए हम काफी दूर निकल आए थे जहां से हमें अपना होटल किसी कैनवास पर बने चित्र की तरह दिखाई दे रहा था. उस ने इशारे से मुझे होटल दिखाया और बच्चों की तरह चहक कर बोली- ‘काश, मुझे पेंटिंग आती तो यह खूबसूरत नज़ारा कैद कर लिया होता.’

मैं मुसकरा उठी और मन ही मन कहने लगी, तुम वास्तव में चित्रकार हो जिस मन में प्रेम के, भावनाओं के और जिज्ञासा के चित्र खिंचते हुए देखे हैं मैं ने. उस ने जैसे मेरे मन की गति को पढ़ लिया हो, चिरपरिचित मुसकान बिखेर दी. एक बार को मुझे लगा कि कहीं शब्द मेरे मुंह से बाहर तो नहीं निकल गए थे, निकले तो नहीं, अगर निकलते तो अच्छा होता. कई बार शाब्दिक प्रभाव चुंबक की तरह होता है, जो परस्पर खिंचाव के लिए जरूरी भी होता है.

शाम ढल चुकी थी. पूरे दिन का हिसाबकिताब न मेरे पास था और न ही उस ने रखा होगा. बस, उस एक दिन में एक जन्म की बातों का आदानप्रदान हुआ, जो आज तक किसी से नहीं हुआ.

हमारे कदम वापस होटल की तरफ बढ़ने लगे.

‘दिल आने की बात है जब कोई लग जाए प्यारा, दिल पर किस का जोर है यारो, दिल के आगे हर कोई हारा…’  चलतेचलते मुझे देख कर उस का यह गीत गुनगुनाना, फिर हौले से मुसकरा देना बड़ा ही सुखद था.

उस रात मैं देर तक जागी. जब तक नींद नहीं आई, दिमाग में वही किसी खूबसूरत एहसास की तरह छाई रही. उस से मिल कर इतना तो जान ही लिया कि उस के पास उल्लास तो है पर रास्ता नहीं. वह अपनी सात्विकता, पवित्रता का प्रमाण देना चाहती है पर क्यों? भ्रम की स्थिति बढ़ने से पहले ही संकोच की परिधि को तोड़ना होगा. आंखें बंद कर मैं दूर पहाड़ी पर बज रहे गीत को सुनने लगी थी…’अजनबी कौन हो तुम, जब से तुम्हें देखा है, सारी दुनिया मेरी आंखों में सिमट आई है…’ मीठे एहसास और मधुर संगीत मिल कर एक हो गए थे और फिर पता नहीं कब मेरी आंख लग गई थी.

अगली सुबह अंगड़ाई ले कर जब मैं उठी तो 9 बज चुका था, ‘उफफफफफ, इतना लेट’  अभी सोच ही रही थी कि घड़ी की सुईयां मुंह चिढ़ा कर कहने लगीं- और देर तक जागो…हा-हा-हा…धूप चढ़ आई है…उठिए मैडम…या चाय मंगवा दूं पहले? हा-हा-हा…’ मैं ने उसे थप्पड़ दिखाया- चुप कर, अब आगे बोली न, तो पिटेगी.

मैं उस से झगड़ कर उठ तो बैठी मगर, आलिया के व्यक्तित्व से बाहर नहीं आ पाई थी. मैं ने मन ही मन निश्चय किया कि हम चाय साथ ही पिएंगे, इंटरकौम से रूमसर्विस पर फोन किया कि ‘रूम नंबर ट्रिपल वन से मिस आलिया को मेरे रूम में भेज दें.’  उधर से जवाब सुन कर मैं सन्न रह गई. दिल को गहरा आघात लगा. रिसैप्शन से पता लगा, आज सुबह 7 बजे ही उस ने होटल से चैकआउट कर लिया है.

‘नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. आलिया, यों अचानक… नहीं, वह मुझे बताए बगैर नहीं जा सकती…’ मैं दौड़ कर रिसैप्शन पर पहुंची शायद कोई मैसेज या खत छोड़ा हो उस ने. कुछ भी नहीं. न कोई संदेश न खत. मैं टूट सी रही थी. एक अनजान लड़की मेरे सारे शरीर की ताकत को खींच कर ले गई थी. भारी कदमों से अपने रूम की तरफ लौटने लगी. उस के बाद न तो चाय का और्डर किया गया और न ही कोई दूसरा काम. सारा दिन यों ही बिस्तर पर औंधी पड़ी रही. ‘वह कौन थी? क्यों आई थी एक दिन के लिए मेरे पास? ये ऐसे तमाम सवाल थे जो भीतर ही भीतर उबल रहे थे. अव्यवस्थित मनोस्थिति, अंतर्वेदना से कराह रही थी.

यह कैसा प्रेम- भाग 4 : आलिया से क्यों प्यार करता था वह

6 दिनों बाद उस का एक खत मिला, जो होटल के ही एक कर्मचारी ने ला कर दिया. खोलने पर मालूम पड़ा कि लिखावट आसुओ से धुंधली हो गई थी.

‘दी, माफ कर देना. यों आप को बगैर बताए आ जाना मेरी कठोरता नहीं, बल्कि मजबूरी थी. दरअसल, सुबहसुबह  (नवीन, मेरे पति) के अचानक गुजर जाने की खबर से मैं इतना आहत हो गई थी कि खुद पर नियंत्रण खो बैठी और आप को बगैर बताए लखनऊ आ गई. आज उन का तीजा है. मैं भले ही उन के साथ नहीं रहती थी मगर साथ में गुजारा हुआ एक बरस आज भी मेरे साथ है जिस में कुछ मीठी यादें भी हैं. उस मिठास की चिपकन इतनी मजबूत होगी, यह आज ही जाना.

‘रिश्ता जुड़ाव का मुहताज नहीं होता, दी. वह तो अलग रह कर भी पनप सकता है. अब न तो मैं उन से नफरत कर सकती और न ही प्रेम का प्रदर्शन. शादी के बाद के कड़वे अनुभव एकाएक मुंह फाड़ कर जिंदा हुए थे, फिर अगले ही पल उन की मृतदेह को देख कर धुंधला भी गए. कमजोर मानी जाने वाली औरत का दिल बड़ा ही कठोर होता है जहां सौ जख्मों का दर्द भी परपीड़ा के एहसासभर से मर जाता है और वह चिरनिद्रा से जागी हुई अबोध सी बन जाती है.

‘नवीन अब नही हैं, उन के दिए हुए सभी आघात भी नहीं रहे, मगर मैं अभी भी हूं, एकदम खाली सी. रिश्तों से डरने लगी हूं. नए रिश्ते बन कर टूटने की चरमराहट कानों में बजने लगी है. क्या टूटना जरूरी होता है, दी. दिमाग में खून के बजाय तमाम सवाल दौड़ रहे हैं. इस बार मिलने पर आप से सारी बातें करूंगी जो मैं ने आप को पहली मुलाकात में नही बताईं. कारण था, मैं खुल कर हंसना चाहती थी. जिंदगी को जीना चाहती थी. नहीं चाहती थी कि उन पर अतीत का ग्रहण लगे. और फिर उन से दूर भाग कर ही तो वहां आई थी.

‘मैं जानती हूं दी, आप की तलहटी सोच मुझे जरूर समझेगी. आप से मेरा रिश्ता अटूट है. जो कभी नहीं टूट सकता. हम दोबारा जरूर मिलेंगे. तब तक के लिए एक अल्पविराम.

‘आप की आलिया.’

काफी देर तक वह खत यों ही मुटठी में दबा रहा. धड़कन  जैसे थम सी गई. अब वह मुझ से कब मिलेगी? मिलेगी भी या नहीं? आखिर वह मुझ से मिली ही क्यों? अब अगर न मिली तो? क्यों वह मेरी परवा करे? मैं इतना क्यों सोच रही हूं उस के बारे में? जिंदगीभर आदमी रिश्तों की गोंद से चिपका रहता है और एक ही झटके में अलग हो जाता है. फिर, मैं ने तो एक दिन ही बिताया है बस, इतना आकर्षण? इतना लगाव?  यह खिंचाव चुंबकिया था जो विज्ञान के नियमों जैसा काम कर रहा था? इन सवालों ने आंखों को भिगो दिया. टप…टप…टप…कई बूंदें मेरी गोद में आ गिरीं. उन बूंदों में किसी अजनबी रिश्ते की गरमाहट थी जिसे मैं ने भीतर तक महसूस किया.

पूरा दिन उदासी से भीगा रहा. न लिखा गया न पढ़ा. दिनभर में खत को 40 बार पढ़ डाला. हर बार शब्द कुछ और कहते और दिल कुछ और. क्या हर औरत यों ही खाली सुराही की तरह होती है, जब तक भरी है, सब प्यास बुझाते रहे और फूटने पर बाहर फेंक दी जाती है. पर संदेश? वह तो आज भी मुझ से प्यार करता है, मेरा पहला प्यार, जो ताउम्र मेरे साथ रहेगा. भले ही हम शादी नहीं कर पाए. क्या शादी करना ही प्रेम का प्रमाण है? भले ही संदेश ने मुझे अपनी पत्नी का दर्जा नहीं दिया, वह उन की पारिवारिक मजबूरी थी जहां मेरी भावनाओं को स्थान नहीं दिया गया.

संदेश को अपने परिवार के खिलाफ जाने से मैं ने ही रोका था, वरना वह तो अड़ ही गया था कि मेरे बगैर नहीं रह पाएगा. मैं जानती थी, विशाल वृक्ष को भी उस की जड़ों से अलग कर दिया जाए, तो वह ज्यादा दिन जीवित नहीं रह सकता, जबकि फूलों और खुशबू के बगैर तो जिया जा सकता है. यही सोच कर ही तो मैं ने  बेवजह उग आई खरपतवार को उस वृक्ष की जड़ों से दूर उखाड़ कर फेंक दिया और आजीवन स्वतंत्र जीवन जीने का फैसला किया था. लेकिन यह भी सच है कि संदेश के दिल में आज भी सिर्फ मैं हूं. बस, यही एहसास सांसों की उड़ान के लिए काफी है. यह अपराध तो मैं जरूर कर रही हूं. उस की अर्धांगिनी की अपराधी हूं मैं. लेकिन क्या करूं? नींव के बगैर इमारत का खड़े रहना असंभव है. अंधा प्रेम, अंधा कानून…हा हा हा…. भीगी आंखों में न जाने कौन सी हंसी थी जो मैं बेवजह हंस दी.

खत में आलिया ने अपना फोन नंबर नहीं लिखा था. मैं ने हर बार पढ़ते वक्त उसे ढूंढा था. शायद उस के घर में लैडलाइन फोन हो ही न? नहीं, नहीं. उस ने जिक्र किया था फोन का…फिर? फिर क्यों नहीं लिखा उस ने नंबर?

उम्मीदें धरातल की तरफ धंस रही थीं. खालीपन मुंह चिढ़ाने लगा था. मन के बगैर ही उपन्यास पूरा करने बैठ गई. यही तरीका था सूनेपन से छुटकारा पाने का.

सभी लिखे हुए कागजों को फाड़ दिया गया था जो टेबल के नीचे रखे डस्टबिन में भर गए थे. मैं ने सबकुछ यों ही छोड़ कर  बालकनी में पड़ी आरामकुरसी का सहारा लिया और आंख बंद कर अधलेटी पड़ी रही. चेतना वापस तब लौटी जब दरवाजे को किसी ने नौक किया. मैं ने वहीं से भीतर आने की सहमति दे दी.

‘मैडम, रिसैप्शन पर आप का फोन होल्ड पर है.’

‘किस का फोन है?’

‘यह तो मैं नही जानता, मैम.’

‘ठीक है, आप चलिए, मैं आती हूं.’

दिल में हलचल लिए मैं सारी सीढ़ियां एक ही सांस में उतर गई. झट से काउंटर पर अलग से रखा रिसीवर उठा लिया.

‘हैलो दी, मैं.’ उधर से आवाज़ आई.

‘आलिया.’ मैं उस की आव़ाज को पहचान उतावली हो गई.

‘दी, जल्दीबाजी में मैं अपना नंबर लिखना भूल गई थी, आप नोट कर लो,’

‘कैसी है आलिया?’ मैं ने उस की सुनने के बजाय सवाल दागा जो मेरी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी था.

‘आप के बगैर रह पाना असंभव है, दी. बहुतकुछ आप को बताना चाहती हूं.’

‘क्या बात है आलिया, सब ठीक तो है न?’

‘ठीक है भी और नहीं भी, एक बात पूछनी है आप से?’

‘हां, बोलो मैं सुनने के लिए बेताब हूं, आलिया.’

‘क्या मैं शादीशुदा थी और अब विधवा? एक साल नवीन के साथ रह कर 2 साल अलग बिताए थे मैं ने, बिलकुल कुंआरा जीवन. तब वहां नवीन नहीं थे. उन का परिवार भी नहीं. सिर्फ मेरी पढ़ाई और मेरी रिसर्च थी. उस वक्त कोई नहीं था मेरे साथ. नवीन का होना न होना कोई माने नहीं रखता. फिर ये यादें खुरेच कर और विधवा का ठप्पा जड़ कर समाज कौन सी जीत चाहता है?’

‘आलिया, तुम भी तो नवीन को नही भूलीं?’

‘हां, नहीं भूली, यह मेरी मरजी है, दी. लोग कौन होते हैं मेरी भावनाओं की पहरेदारी करने वाले? तब सब कहां थे जब मैं हालात से जूझ रही थी. पूरे 2 बरस किसी को परवा नहीं, न उस के घरवालों को न मेरे घरवालों को. और अब इर्दगिर्द, हर वक्त, मेरी सांसों पर भी जैसे मेरा अधिकार नहीं रहा.’

‘कूल डाउन, आलिया. समाज का अंदरूनी हिस्सा बिलकुल मानव के शरीर जैसा है. अगर चमड़ी हटा दी जाए तो अंदर खून, मांस और लोथड़ो के सिवा कुछ नहीं मिलेगा.’

‘दी, आप से मिलने को मन तड़प रहा है, कब मिलेंगे हम?’

‘कल मैं वापस जबलपुर लौट जाऊंगी. तुम रस्मोंरिवाजों से निबट कर चाहो तो कुछ दिनों के लिए आ जाना मेरे पास.’

‘ठीक है दी, समय बहुत हुआ, अब फोन रखती हूं बाय.’

बातचीत के दौरान हथेली पर नोट किया गया उस का नंबर मैं ने आते ही डायरी में उतार लिया. हाथों से सामान की पैकिंग जरूर हो रही थी मगर दिल आलिया के आसपास ही था.

सुबह 7 बजे की ट्रेन थी. इस बार अपने शहर की वापसी हर बार से अलग थी. कभी लगता भरी हुई हूं तो कभी लगता खाली सी हूं. आज मैं ही यह गाना गुनगुना उठी थी- ‘अजनबी कौन हो तुम…जब से तुम्हें देखा है…सारी दुनिया मेरी आंखों में सिमट आई है…’

सारा सामान पैक हो चुका था. अब इंतजार था तो स्टेशन जाने का जिस के लिए औटो आने ही वाला था. मैं अपने शहर को रवाना भी हो गई.

जब से इस बार जबलपुर आई थी, कुछ अलग ही थी. हम लगभग रोज ही बात करने लगे थे खाने से ले कर पढ़नेलिखने, सोने तक का पूरा चिटठा. खुशी की बात तो यह थी, इस दौरान वह उदासियों के घेरे से बाहर आने लगी थी, मुसकराने और खिलखिलाने लगी थी. कुछ अपनी चाहतों का जिक्र भी करती, कुछ मेरी भी पूछती. मैं राहत महसूस कर रही थी. फिर तो हमारी फोन पर लंबी मुलाकातें होने लगीं. उस को चहकता देख कर यकीनन मुझे वही संतुष्टि मिलती जैसे एक मां को मिलती.

Diwali Special: 8 ब्यूटी पैक से पाएं निखरी व मुलायम Skin

दिवाली का त्यौहार आने में कुछ ही समय शेष रह गए हैं. अगर आप भी इस दिवाली सुंदर व आकर्षक दिखना चाहती हैं तो यह खबर हम खास आपके लिए ही लेकर आए हैं. आज हम आपको 8 ब्यूटी पैक के बारें में बताने जा रहे हैं. इस पैक को लगाकर आप अपने चेहरे पर निखार ला सकती हैं.

1. मलाई-चंदन पाउडर

बराबर मात्रा में मलाई, चंदन पाउडर, गुलाब जल और शहद मिलाकर पेस्ट तैयार करें. अब इसे चेहरे और गले पर लगाएं. 30 मिनट के बाद धो लें. बेहतर रिजल्ट के लिए हफ्ते में 2 बार यह प्रक्रिया दोहराएं.

2. मलाई-आलिव आयल

त्वचा का रंग निखारने के लिए आलिव आयल बेहतरीन उपाय है. 1 टेबलस्पून मलाई में 10 बूंद आलिव आयल मिलाकर पेस्ट तैयार करें. अब इसे चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट बाद धो लें.

3. बेसन-हल्दी

बेसन और हल्दी, दोनों त्वचा में निखार लानेवाले पुराने, लेकिन असरदार उपाय हैं. एक चुटकी हल्दी में मलाई और बेसन मिलाएं. अब इसे चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट के बाद धो लें. चेहरा दमक उठेगा. ऐसा हफ्ते में दो बार करें.

4. राइस पाउडर-बादाम

त्वचा पर निखार लाने के लिए चावल का आटा बहुत उपयोगी है. इसके लिए चावल का आटा, बादाम पाउडर और मलाई को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद पानी से पहले चेहरा गीला करें और स्क्रब करते हुए पेस्ट निकालें. इससे जल्द ही आपको त्वचा में निखार दिखेगा.

5. मिल्क-एलोवेरा जेल

डल और पैची स्किन को रिमूव करने का सबसे आसान तरीका है ये. इसके लिए 2 टेबलस्पून दूध में 1 टीस्पून बादाम पेस्ट, 1 टीस्पून एलोवेरा जेल और 1 टीस्पून शहद मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इसे चेहरे पर लगाएं और 30 मिनट के बाद धो लें.

6. सैंडलवुड-रोज वाटर

ये तो आप भी जानती होंगी कि हर ब्यूटी क्रीम में सैंडलवुड यानी चंदन का यूज किया जाता है. कभी चंदन पाउडर तो कभी चंदन का तेल क्रीम में मिलाया जाता है. आप भी घर पर इसका यूज करके 2 टोन निखरी त्वचा पा सकती हैं. 2 टेबलस्पून चंदन पाउडर में गुलाबजल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और इसे चेहरे पर लगाएं. 15-20 मिनट बाद पानी से चेहरा धो लें. हफ्ते में दो बार ऐसा करें.

7. तुलसी-मिंट पैक

स्वास्थ्यवर्धक तुलसी और पुदीना चेहरे की खूबसूरती निखारने में भी लाभकारी हैं. बराबर मात्रा में तुलसी और पुदीना की पत्तियों को लें और पेस्ट बनाएं. इसे चेहरे पर लगाएं. 30 मिनट के बाद चेहरा धो लें.

8. केसर-मलाई

खूबसूरती निखारने के लिए केसर से बढ़िया और कुछ हो ही नहीं सकता. आमतौर पर लोग रात को सोने से पहले दूध में केसर मिलाकर पीते हैं. इससे त्वचा में निखार आता है. आप केसर और मलाई को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्ट तैयार करें और उसे चेहरे व गर्दन पर लगाएं. जल्द ही फर्क महसूस होगा.

लौटती बहारें: भाग 1- मीनू के मायके वालों में कैसे आया बदलाव

अचानक शेखर को जल्दी घर आया देख मैं चौंक गई. साहब 8 बजे से पहले कभी पहुंचते नहीं हैं. औफिस से तो 6 बजे छुट्टी हो जाती है, पर घर पहुंचने में समय लग जाता है. मगर आज एक मित्र ने गाड़ी में लिफ्ट दे दी. अत: जल्दी आ गए. बड़ा हलकाफुलका महसूस कर रहे थे.

मैं जल्दी से 2 कप चाय ले कर अम्मांजी के कमरे में पहुंची. औफिस से आ कर शेखर की हाजिरी वहीं लगती है. पापा का ब्लडप्रैशर, रवि भैया का कालेज सभी की जानकारी लेने के बाद आखिर में मेरी खोजखबर ली जाती और वह भी रात के डिनर का मैन्यू पता करने के लिए. पापाजी भी शाम की सैर से आ गए थे. उन के लिए भी चाय ले कर गई. जल्दी में पोहे की प्लेट रसोई में ही रह गई. बस अम्मां झट से बोल उठीं, ‘‘बहू इन की पोहे की प्लेट कहां है?’’

मैं कुछ जवाब देती उस से पहले ही शेखर का भाषण शुरू हो गया, ‘‘मीनू, 2 महीने हो गए हमारे घर आए पर तुम अभी तक एक भी नियमकायदा नहीं सीख पाई हो. कल अम्मां का कमरा साफ नहीं हुआ था. उस से पहले रवि के कपड़े प्रैस करना भूल गई थी.’’

अम्मां ने जले पर नमक बुरकते हुए कहा, ‘‘पराए घर की लड़कियां हैं, ससुराल को अपना घर कहां समझती हैं.’’

मैं मन मसोस कर रह गई. कुछ कहने का मौका ही नहीं दिया. मैं सुबह से ले कर देर रात तक इस घर में सब की फरमाइशें पूरी करने के लिए चक्करघिन्नी की तरह घूमती हूं, फिर भी पराया घर, पराया खून बस यही उपाधियां मिलती हैं.

मैं बोझिल कदमों से रसोई में आ कर रात के डिनर की तैयारी में जुट गई. खाना तैयार कर मैं दो घड़ी आराम करने के लिए अपने कमरे में जा रही थी तो अम्मांपापाजी को कमरे में अपने श्रवण कुमार बेटे शेखर से धीमे स्वर में बतियाते देखा तो कदम सुस्त हो गए.

ध्यान से सुनने पर पता चला शेखर 8 दिनों के लिए मुंबई टूअर पर जा रहे हैं. इसीलिए आज जल्दी घर आ गए थे. मन में टीस सी उठी कि जो खबर सब से पहले मुझे बतानी चाहिए थी, उसे अभी तक इस बात का पता ही नहीं.

अभी 2 महीने पहले ही आंखों में सपने लिए ससुराल आई थी, पर अपनापन कहीं दूरदूर तक दिखाई नहीं देता. सब ने एक बेगानेपन का नकाब सा ओढ़ रखा है. हां, रवि भैया को जब कोई काम होता है तो अपनापन दिखा कर करवा लेते हैं. शेखर के प्यार की बरसात तभी होती है जब रात को हमबिस्तर होते हैं.

मैं ने जल्दी से मसाले वाला गाउन बदल हाथमुंह धो कर साड़ी पहन ली. बाल खोल कर सुलझा रही थी कि शेखर सीटी बजाते हुए बड़े हलके मूड में कमरे में आ गए. मुझे तैयार होते देख मुसकराते हुए अपनी बांहों के घेरे में लेने लगे तो मैं ने पूछा, ‘‘आप ने जल्दी आने का कारण नहीं बताया?’’

शेखर बोले, ‘‘अरे, कुछ खास नहीं. 8 दिनों के लिए मुंबई टूअर पर जा रहा हूं.’’

मैं ने शरमाते हुए कहा, ‘‘मैं 8 दिन आप के बिना कैसे रहूंगी? मेरा मन नहीं लगेगा आप के बिना… मुझे भी साथ ले चलो न… वैसे भी शादी के बाद कहीं घूमने भी तो नहीं गए.’’

यह सुनते ही इन का सारा रोमांस काफूर हो गया. मुझे बांहों के बंधन से अलग करते हुए बोले, ‘‘मेरी गैरमौजूदगी में अम्मांपापा का खयाल रखने के बजाय घूमनेफिरने की बात कह रही हो… अम्मां सही कहती हैं कि बहुएं कभी अपनी नहीं होती… पराया खून पराया ही होता है.’’

यह सुन कर मैं ने चुप रहना ही ठीक समझा. शेखर भी अनमने से प्यारमुहब्बत का ऐपिसोड अधूरा छोड़ डिनर के लिए अम्मांपापा को बुलाने चले गए. रवि भैया भी आ पहुंचे थे. मैं पापा की पसंद के भरवां करेले और सब की पसंद की अरहर की दाल व चावल परोस कर गरमगरम रोटियां सेंकने लगी.

सब डिनर कर कुरसियां खिसका कर उठ खड़े हुए. मुझे न तो किसी ने खाना खाने के लिए कहा न कोई मेरे लिए खाना परोसने खड़ा हुआ. मैं ने भी लाजशर्म छोड़ जल्दी से हाथ धो कर अपनी थाली लगा ली. बचा खाना मेरी प्रतीक्षा में था. भूख ज्यादा लगी थी, इसलिए खाना कुछ जल्दी खा लिया.

अम्मां के कमरे के बाहर लगे वाशबेसिन में हाथ धो रही थी कि अम्मांजी की व्यंग्यात्मक आवाज कानों में पड़ी, ‘‘शेखर के पापा, देखा आप ने नई बहू वाली तो कोई बात ही नहीं है मीनू में… मैं जब आई थी तो सासननद से पूछे बिना कौर नहीं तोड़ती थी. यहां तो मामला ही अलग है.’’

यह सुन कर मन वितृष्णा से भर उठा कि यह क्या जाहिलपन है. नई बहू यह नहीं करती, पराए घर की, पराया खून बस यही सुनसुन कर कान पक गए.

अम्मां की बातों को दरकिनार कर मैं अपने कमरे में चली गई. वहां शेखर अपने कपड़े फैलाए बैठे थे. पास ही सूटकेस रखा था. समझ गई साहब जाने की तैयारी में लगे हैं. मैं बड़े प्यार से उन का हाथ पकड़ उन्हें उठाते हुए बोली, ‘‘हटिए, मैं आप का सूटकेस तैयार कर देती हूं…’’

‘‘अब आप को यह जहमत उठाने की जरूरत नहीं है,’’ शेखर ने हाथ झटकते हुए कहा, ‘‘अरे यार, कनफ्यूज न करो. तुम्हें मेरी पसंदनापसंद का कुछ पता भी है.’’

मैं चुप लगा कर बाहर बालकनी में आ कर खड़ी सड़क की रौनक देखने लगी. मन बहुत खिन्न था. पहली बार विवाह के बाद बाहर जा रहे हैं… अकेली कैसे रहूंगी… होने को भरापूरा घर है… ऐसा कोई कष्ट भी नहीं है, परंतु ससुराल में जो सब की अलगाव की भावना मुझे अंदर ही अंदर सालती थी.

मैं पेड़ से टूटी डाली की तरह एक ओर पड़ी थी. कुछ दिन पहले की ही बात है. इन की बहन नीलम जीजी आई थीं. मेरी हमउम्र भी थीं. मैं मन ही मन बहुत उत्साहित थी कि नीलम जीजी से खुल कर बातें करूंगी. इतने दिनों से लाज, संकोच ही पीछा नहीं छोड़ता था कि कहीं कुछ गलत न बोल जाऊं. नईनवेली थी. जबान खुलती ही न थी. मैं अल्पभाषी थी. मगर अब सोच लिया था कि नीलम जीजी को अपनी दहेज में मिली साडि़यों और उपहारों को दिखाऊंगी. वे कुछ लेना चाहेंगी तो उन्हें दे दूंगी. उन का उन की ससुराल में मान बढ़ेगा.

मैं ने बड़े चाव से रवि भैया से उन की खानेपीने की पसंद पूछ कर उन की पसंद का मटरपनीर, भरवां भिंडी, मेवे वाली खीर बना दी. मैं हलका सा मेकअप कर तैयार हो नीलम जीजी का बेकरारी से इंतजार करने लगी.

नीलम जीजी नन्हे राहुल को ले कर अकेली ही आई थीं. उन्हें देख कर मैं बहुत उत्साह से आगे बढ़ी और उन्हें गले लगा लिया. मुझे लगा जैसे मेरी कोई बचपन की सहेली हैं पर नीलम जीजी तुरंत मुझे स्वयं से अलग करते हुए एक औपचारिक सी मुसकान दे कर अम्मांअम्मां करते हुए कमरे में चली गईं.

मुझे ठेस सी लगी पर मैं सब कुछ भूल कर ननद की सेवा में जुट गई. मांबेटी को एकांत देने के लिए मैं रसोई में ही बनी रही.

छुट्टी का दिन था. सब घर में ही थे. अम्मां के घुटनों का दर्द बहुत बढ़ा हुआ था, इसलिए उन्होंने मुझे आदेश दिया, ‘‘बहू खाना मेरे कमरे में ही लगा दो.’’

एक अतिरिक्त टेबल रख कर मैं खाना रखने की व्यवस्था कर किचन में चली गई. किचन में जा कर मैं ने जल्दीजल्दी चपातियां बनाईं. अम्मां के कमरे में खुशनुमा महफिल जमी थी. ठहाकों की आवाजें आ रही थीं. मैं जैसे ही खाना ले कर कमरे में पहुंची सब चुप हो गए मानो कमरे में कोई अजनबी आ गया हो. हंसने वाले चुप हो गए, बोलने वालों ने बातों का रूख बदल दिया. खाना टेबल पर लगा कर मैं जल्दीजल्दी चपातियां देने लगी.

खाना खाने के बाद नीलम जीजी और रवि बरतन समेट कर रसोई में रखने आ गए. किचन से निकलते समय वे बिना मेरी ओर देखे बोले, ‘‘आप भी हमारे साथ खा लेतीं भाभी.’’

मैं कोई जवाब देती उस से पहले ही रवि व जीजी किचन से जा चुके थे. एक बार फिर महफिल जम गई. मैं शांता बाई के साथ मिल कर रसोई संभालने लगी. बड़ा मन कर रहा था कि मैं भी उन के साथ बैठूं, घर के और सदस्यों की तरह हंसीमजाक करूं, पर न मुझे किसी ने बुलाया और न ही मेरी हिम्मत हुई. शाम की चाय के बाद नीलम जीजी जाने को तैयार हो गईर्ं. रवि औटो ले आया. शेखर और पापाजी आंगन में खड़े जीजी से बतिया रहे थे. मैं भी वहीं पास जा कर खड़ी हो गई. औटो आते ही मैं लपक कर आगे बढ़ी पर जीजी सिर पर पल्ला लेते हुए ‘‘भाभी बाय’’ कह कर औटो में जा बैठीं. देखतेदेखते औटो चला गया. मैं ठगी सी वहीं खड़ी रही. अलगाव की पीड़ा ने मुझे बहुत उदास कर दिया था.

रवि की आवाज मुझे एक बार फिर वर्तमान में खींच लाई. रवि ने बताया कि आप के मायके से पापा का फोन आया है. मैं ने रवि से मोबाइल ले कर पापा से कुशलमंगल पूछा तो उन्होंने बताया कि 31 मार्च को उन का रिटायरमैंट का आयोजन है. मुझे सपरिवार आमंत्रित किया.

तब पापाजी (मेरे ससुरजी) ने, मेरे पापा से न आ पाने के लिए क्षमायाचना करते हुए मुझे भेजने की बात कही. तय हुआ कि रवि मुझे बस में बैठा देगा. वहां सहारनपुर बसअड्डा से राजू मुझे ले लेगा.

सहारनपुर अपने मायके जाने की बात सुन कर मुझे तो जैसे खुशियों के पंख लग गए. पगफेरे के बाद मैं पहली बार वहां अकेली रहने जा रही थी. मैं भी अपना सूटकेस तैयार करने के लिए उतावली हुई जा रही थी.

शेखर प्यार से छेड़ने लगे, ‘‘चलो, अब तो हमारी जुदाई का गम न झेलना पड़ेगा?’’

शेखर बहुत रोमांटिक मूड में थे. मैं भी फागुनी बयार की तरह बही जा रही थी. पूरे मन से शेखर की बांहों में समा गई. कब रात बीती पता ही नहीं चला.

पड़ोस के घर बजे शंख से नींद खुली. 5 बज गए थे. जल्दी से उठ कर नहा कर नाश्ते की तैयारी में जुट गई. इन्हें भी आज जाना था. मुझे कल सवेरे निकलना था. अत: जल्दीजल्दी काम निबटाने लगी. महीने भर का राशन आया पड़ा था. उसे जल्दीजल्दी डब्बों में भरने लगी. मैं सोच रही थी मेरे जाने के बाद किसी को सामान ढूंढ़ने में दिक्कत न हो.

तभी अम्मांजी किसी काम से किचन में आ गईं. मुझे ये सब करते देख बोलीं,

‘‘बहू, तुम यह सब रहने दो. मैं कामवाली शांता से कह कर भरवा दूंगी… तुम मां के यहां जाने

की खुशी में, सूजी में बेसन और अरहर में चना दाल मिला दोगी. यह काम तसल्ली से करने के होते हैं.’’

मेरे मन में जो खुशी नृत्य कर रही थी उसे विराम सा लगा. बिना कुछ कहे मैं उठ खड़ी हुई. मन में सोचने लगी कि अब तो यही मेरा घर है…कैसे इन सब को विश्वास दिलाऊं.

अपने कमरे में जा कर शेखर ने जो समान इधरउधर फैलाया था उसे यथास्थान रखने लगी. शेखर नहाने गए हुए थे.

अचानक दिमाग में आया कि पापा के रिटायरमैंट पर कोई उपहार देना बनता है. छोटी बहन रेनू और भाई राजू को भी बड़ी होने के नाते कुछ उपहार देना पड़ेगा. सोचा शेखर नहा कर आ जाएं तो उन से सलाह करती हूं. वैसे उन के जाने में 1 घंटा ही शेष था. वे मुझे उपहारों की शौपिंग के लिए अपना साथ तो दे नहीं पाएंगे, हां क्या देना है, इस की सलाह जरूर दे देंगे. मैं आतुरता से उन का इंतजार करने लगी.

शेखर नहा कर निकले तो बहुत जल्दीजल्दी तैयार होने लगे. उन की जल्दबाजी देख कर मुझे समझ नहीं आ रहा था अपनी बात कैसे शुरू करूं? जैसे ही वे तैयार हुए मैं ने झट से अपनी बात उन के सामने रखीं.

सुन कर झल्ला उठे. बोले, ‘‘अरे मीनू, तुम भी मेरे निकलने के समय किन पचड़ों में डाल रही हो? इस समय मैं उपहार देनेलेने की बातें सुनने के मूड में नहीं हूं. तुम जानो और तुम्हारे पापा का रिटायरमैंट,’’ कह कर अपना पल्ला झाड़ उठ खड़े हुए और अम्मां के कमरे में चले गए. जातेजाते अपना सूटकेस भी ले गए यानी वहीं से विदा हो जाएंगे.

मैं जल्दी से नाश्ता लगा कर ले गई. मेरे मन के उत्साह पर शेखर की बातों ने पानी सा डाल दिया था. मुझे लगा जाते समय शेखर मुझे कुछ रुपए अवश्य दे जाएंगे पर नाश्ता कर के हटे ही थे कि गाड़ी आ गई, ‘‘अच्छा, बाय मीनू,’’ कह कर गाड़ी में जा बैठे.

मैं देखती ही रह गई. परेशान सी खड़ी रह गई. सोचने लगी उपहारों के लिए पैसे कहां से लाऊं… जिस पर हक था वह तो अनदेखा कर चला गया. अम्मांपापाजी से रुपए मांगने में लज्जा और स्वाभिमान दीवार बन गया.

अचानक याद आया विदाई के समय कनाडा वाली बुआ ने कुछ नोट हाथ में थमाए थे, जिन्हें उस ने बिना देखे संदूक के नीचे तल में डाल दिए थे. जल्दी से कमरे में जा कर संदूक की तलाशी लेने लगी. एक साड़ी को झाड़ने पर कुछ नोट गिरे. ऐसे लगा कोई कुबेर का खजाना हाथ लग गया. लेकिन गिने तो फिर निराशा ने घेर लिया.

केवल 3000 रुपए ही थे. उन में अच्छे उपहार आना कठिन था. रवि भैया से हिम्मत कर के साथ चलने के लिए मिन्नत की तो वे मान तो गए पर बोले, ‘‘भाभी आप का बजट कितना है? उसी अनुसार दुकान पर ले चलता हूं.’’

मैं ने जब धीमी आवाज में बताया कि

3000 रुपए हैं तो रवि भैया ने व्यंग्य में मुसकरा कर कहा, ‘‘भाभी फिर तो आप पटरी वालों से ही खरीदारी कर लें.’’

मुझे कुछ पटरी वाले आवाज देने लगे तो मैं कुछ कपड़े देखने लगी. कपड़े वास्तव में कामचलाऊ थे. जींस, टौप वगैरह सभी कुछ था.

रेनू और छोटे भाई राजू के लिए सस्ते से कपड़े खरीद कर पापा और मम्मी के लिए कुछ ठीकठाक ही लेना चाहती थी. किसी तरह मां के लिए एक सस्ती सी साड़ी और पापा के लिए एक शौल ले कर घर लौट आई. औटो के पैसे रवि भैया ने ही दिए.

बिग बॉस ओटीटी विजेता एल्विश पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार

रेव पार्टी मामले में’बिग बॉस’ ओटीटी विनर एल्विश यादव और फेमस यूट्यूबर एल्विश यादव फंसते ही जा रहे. नोएडा पुलिस रेव, जहां सांप का जहर और विभिन्न दवाएं जब्त की गई थीं.

पुलिस ने कहा कि नोएडा में रेव पार्टियों में सांप और उनके जहर की आपूर्ति करने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर सोशल मीडिया सनसनी एल्विश यादव द्वारा आयोजित की गई थी.

पांचों लोगों ने पुलिस को बताया है कि ये पार्टियां दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में विभिन्न फार्महाउसों में आयोजित की गई थीं और एल्विश यादव ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम के लिए वीडियो शूट करने के लिए सांपों का इस्तेमाल किया था.

ऐसा आरोप है कि रेव पार्टियों में शामिल होने वाले लोगों ने सांप के जहर का सेवन किया था, जिसमें विदेशी नागरिकों की भी मेजबानी की गई थी.

अधिकारियों ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट या एफआईआर में एल्विश यादव सहित छह लोगों के नाम हैं। उन्होंने कहा, “छह आरोपियों में से पांच को हिरासत में ले लिया गया है, हालांकि एल्विश यादव को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है.”

पुलिस अधिकारियों ने बताया

अधिकारियों ने कहा कि आरोपियों के पास से पांच कोबरा सहित नौ सांप और सांप का जहर बरामद किया गया, उन्होंने कहा कि सांपों को वन विभाग को सौंप दिया गया है. वे क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से सांपों को पकड़ते थे और उनका जहर निकालते थे, जिसे वे कथित तौर पर ऊंची कीमत पर बेचते थे. पुलिस ने कहा, “वे पार्टियों में जहर की आपूर्ति करने के लिए मोटी रकम इकट्ठा करते थे.”

पुलिस ने दवा के रूप में सांप के जहर का उपयोग बेहद खतरनाक और संभावित रूप से जीवन के लिए खतरा माना जाता है.

 

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मेनका गांधी के NGO की टिप पर एजेंसियों ने मारी थी रेड

भाजपा नेता मेनका गांधी द्वारा संचालित एक पशु कल्याण एनजीओ, पीएफए ​​की शिकायत के बाद कल देर शाम नोएडा के सेक्टर 51 में एक रेव पार्टी पर छापा मारने के बाद नोएडा पुलिस ने गिरफ्तारियां कीं. मेनका गांधी  ने एल्विश यादव की तत्काल गिरफ्तारी का आह्वान किया है.

उन्होंने कहा, “एलविश यादव को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए. यह ग्रेड-1 अपराध है – यानी सात साल की जेल। पीएफए ​​ने जाल बिछाया और इन लोगों को पकड़ लिया। वह अपने वीडियो में सांपों की लुप्तप्राय प्रजातियों का इस्तेमाल करता है.”

आरोपों से इनकार करते हुए एल्विश यादव ने दावा किया कि सभी आरोप फर्जी हैं और वह इस जांच में पुलिस का सहयोग करने को तैयार हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो में कहा, “जब मैं सुबह उठा तो मैंने खबरें देखीं कि मुझे गिरफ्तार कर लिया गया है और मुझे नशीले पदार्थों के साथ पकड़ा गया है। ये सभी खबरें और मेरे खिलाफ आरोप फर्जी हैं.”

एल्विश यादव इस साल की शुरुआत में ‘बिग बॉस ओटीटी’ सीजन-2 जीतने के बाद प्रसिद्धि में आए. यूट्यूब पर उनके 7.51 मिलियन सब्सक्राइबर्स और इंस्टाग्राम पर 15.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं.

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