Diwali Special: पाएं फूलों जैसा सुंदर चेहरा

हर लड़की का ख्‍वाब चमकदार और स्‍पॉट लेस चेहरा पाना होता है. अगर स्‍किन स्‍वस्‍थ है तो खुद के अंदर आत्‍मविश्‍वास आता है और मूड भी बढ़िया रहता है.

ऐसा चेहरा पाने के लिये आपको किसी पार्लर जाने की जरुरत नहीं है क्‍योंकि आज हम आपको फूलों जैसा सुंदर चेहरा पाने के लिये कुछ फेस पैक बनाने की वधि बताएंगे जिसे आप घर पर ही तैयार कर सकती हैं.

त्वचा के स्वभाव के अनुसार गेंदा, गुलाब, चमेली, हिबिस्कस, लेवेंडर आदि फूलों से बने हुये फेस पैक के नियमित इस्तेमाल से स्किन बेदाग और चमकदार बनाई जा सकती है. बहुत आसान नुस्‍खा है फूल तो आपके घर पर ही मिल जाएंगे, तो बस करना सिर्फ इतना है कि उनकी पंखुडियों का या तो पेस्‍ट बना कर इस्‍तमाल करें या फिर उन्‍हें सुखा कर पावडर बना कर लगाएं.

अब आइये जानते हैं इन फूलों के फेस पैक को कैसे बनाया जाता है.

1. रोज और वीट मास्‍क

इसे बनाने के लिये 2 चम्‍मच गुलाब की पंखुडियों का पावडर, 1 चम्‍मच गेहूं का चोकर और 2 चम्‍मच दूध मिक्‍स करें. फिर इसे चेहरे और गर्दन पर लगाएं और सूखने दें. फिर इसे धो कर चेहरा पोछ लें. आपके चेहरे पर ग्‍लो आ जाएगा.

2. चमेली और दही पैक

इस पैक को लगाने से चेहरे से डेड स्‍किन निकल जाएगी और चेहरे पर ग्‍लो आएगा. इससे आप गोरी भी दिखेंगी. इसे बनाने के लिये 1 चम्‍मच दही, 1 चम्‍मच शक्‍कर और मुठ्ठीभर चमेरी के फूलों की पंखुडियां पीस लें. इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने दें फिर 15 मिनट के बाद चेहरा धो लें.

3. लैवेंडर और ओट्स पैक

लैंवेडर आपकी त्‍वचा को स्‍क्रब करेगा और ओट्स आपकी स्‍किन को गोरा करेगा. इसे बनाने के लिये 1 चम्‍मच ओट्स का पावडर तैयार करें. उबली हुई लैवेंडर की पत्‍तियों को छान कर पेस्‍ट बनाएं. इस पेस्‍ट में ओट्स पावडर मिलाएं और चेहरे तथा गर्दन में लगाएं. सूखने के बाद चेहरा धो लें.

4. गुलाब और चंदन पैक

ऑइली स्‍किन के लिये यह पैक अच्‍छा होता है. इसे लगाने से चेहरे से पिगमेंटेशन दूर होगा और चेहरा साफ बनेगा. इस पैक को बनाने के लिये 3 मध्‍यम आकार के गुलाब लें और उनकी पंखुडियों को उबाल लें. फिर इन्‍हें छान कर पीस लें और उसमें चंदन पावडर तथा दूध मिक्‍स कर के पेस्‍ट बनाएं. इस पेस्‍ट को चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं और जब यह सूख जाए तब ठंडे पानी से धो लें.

5. गुड़हल, गुलाब और मुल्तानी मिट्टी पैक

यह एक ब्राइडल पैक भी है जिसे बनाने के लिये आपको 9-10 गुलाबी की पंखुडियां, मुठ्ठीभर गुड़हल की पत्‍तियां और 1 चम्‍मच मुल्‍तानी मिट्टी और 1 चम्‍मच दही चाहिये. इन सभी चीजों का पेस्‍ट तैयार कर लें और चेहरे पर लगाएं. जब यह सूख जाए तब इसे हथेलियों पर हल्‍का पानी लगा कर चेहरे को स्‍क्रब करें. फिर चेहरे को धो लें, आपके चेहरे पर ग्‍लो आ जाएगा.

6. गेंदा और सूखा आंवला पैक

1 कप गेंदे के फूल की पंखुडियां, 1 चम्‍मच सूखा आमला पावडर, 2 चम्‍मच दही और 1-2 चम्‍मच नींबू का रस. इसे बनाने के लिये गेंदे की पंखुडियों को सुखा कर पावडर बना लें. फिर इसमें सूखे आमले का पावडर, नींबू का रस और दही मिला कर पेस्‍ट तैयार करें. इस पेस्‍ट को चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं और सूखने दें. फिर चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.

मुझे एतराज नहीं- भाग 2: क्यों शांत थी वह महिला

‘‘क्या?’’ मैं ने आश्चर्य से पूछा‘‘यह बहुत बड़ी कहानी है. अभी तुम्हें फुरसत नहीं है, सुनाऊंगी कभी.’’मैं ने कहा, ‘‘आज मु झे फुरसत ही फुरसत है. आप को समय हो और आप बताना चाहें, तो बता दें. आज पापा का खाना उन के फ्रैंड के साथ है. मैं अकेली हूं. आज मेरी छुट्टी है.’’‘‘अच्छा, तो रमा बैठो, मेरी कहानी सुन लो और यहीं खाना भी खा लेना. मेरा बेटा सुंदर काम से बाहर गया हुआ है.’’

‘‘सुनाइए आंटी.’‘‘मेरा आईएएस में सलैक्शन हो गया था. मसूरी में ट्रेनिंग चल रही थी. सुदूर दक्षिण भारत के तमिलनाडु प्रांत से आए रघुपति स्मार्ट, सुंदर और होशियार थे. हम दोनों एकदूसरे की तरफ आकर्षित हुए. दोनों के घरवालों के विरोध के बावजूद हम ने शादी करने की ठान ली. शादी भी हो गई.

‘‘थोड़े दिनों तक सब ठीकठाक रहा. मेरा बेटा भी हो गया. रघुपति के मांबाप ने बेटे से सम झौता कर लिया और मु झ से कहा कि अपने बेटे को हमारे पास छोड़ दो. हम उसे पालपोस कर बड़ा करेंगे.

‘‘मेरी इच्छा ऐसी नहीं थी. पर सब ने मु झे सम झाया, बच्चे के दादादादी उस को तुम से ज्यादा अच्छे से रखेंगे. तुम्हें नौकरी करते हुए छोटे बच्चे को साथ रखने में परेशानी होगी. मेरी नौकरी दौरे की थी, बारबार दौरे पर जाना पड़ता था.

मुझे एतराज नहीं-भाग 1 : पड़ोस मेें रहने वाली महिला इतनी शांत क्यों रहती थी‘‘हैडक्वार्टर में थी, तब भी सुबहशाम घर आनेजाने का कोई ठिकाना नहीं था. मेरे मातापिता ने भी इसे ठीक सम झा. मैं विवश थी. नौकरों के भरोसे बच्चों को पालना मुश्किल था. शुरू में सब ठीकठाक था. छुट्टी होते ही बच्चे के मोह में ससुराल जातीआती रही. बाद में मेरी ससुराल वालों को मेरा आनाजाना खलने लगा. मेरे पति रघुपति कहते, ‘सही तो है न, तुम बारबार आओगी तो बेटा उन के पास कैसे रहेगा?’ वह बात भी मैं मान गई.

‘‘जब छुट्टी होती तो वे अपने घर चले जाते. मेरी उपेक्षा करने लगे. मैं काम के बो झ में व्यस्त होती गई. जब बेटे से मिलने जाती तो वे लड़ाई झगड़ा करते. मेरा बेटा सुंदर मु झ से ज्यादा अपने दादादादी और पिता से जुड़ा था. मेरा जीना ही मुश्किल हो गया,’’ यह कहते हुए बोलीं, ‘‘चलो, चाय पीते हैं.’’

मैं ने कहा, ‘‘आंटी, मु झे तो आप के हाथ की फिल्टर कौफी पीनी है. उस की खुशबू हमारे घर तक आती है.’’

‘‘अरे, जरूरजरूर. लो, मेरा बेटा भी आ गया. वह भी इस समय कौफी पीता है. हम साथसाथ पिएंगे.’’

मु झे संकोच हुआ. वे बोलीं, ‘‘तुम आराम से बैठे. मेरा बेटा सोमू मेरे जैसा नहीं है, बहुत सोशल है.’’ हम पहले ही मिल चुके थे. उन के बेटे ने भी मु झ से बैठने का आग्रह किया. सुंदरम मु झ से पापा के बारे में पूछने लगे. बातों ही बातों में मैं ने बताया कि पापा का मन नहीं लगता. उन्होंने पूछा, ‘‘पापा को क्याक्या शौक हैं?’’

‘‘पढ़ने का, गार्डनिंग, राजनीति बहस करने का.’’‘‘अरे वाह, मेरा उन के साथ मन

लग जाएगा. मैं भी इन बातों का शौक रखता हूं.’’‘‘फिर तो आप घर जरूर आइएगा, मिल कर बातें करेंगे.’’

इतने में कौफी आ गई. हम सब ने कौफी पी, फिर मैं घर आने को हुई तो गीता आंटी बोलीं, ‘‘आगे की कहानी बाद में सुनाऊंगी, अभी खाना बनाना है.’’

अगले दिन सुंदरम आ गए. पापा मेरे बड़े बातूनी हैं. दोनों की जोड़ी जोरदार थी, खूब बातें कर रहे थे. मैं भी उन के साथ बैठ गई, बातें करने लगी?

सुंदरम पापा से बात करते पर मेरी तरफ भी देखते जाते. इस उम्र में भी मेरे अंदर एक सिहरन सी दौड़ जाती. यह कैसे है, मु झे पता नहीं. सोमसुंदरम की बातें सुनती रहूं, ऐसा लगता. मु झे आज तक किसी के लिए ऐसा नहीं महसूस हुआ. अब ऐसा क्यों लग रहा है?

पापा और सोमसुंदरम दोनों वौक पर जाते. कई बार रात में क्लबों में जाते. पापा खेल के बहुत शौकीन हैं, ऐसे ही आंटी का बेटा भी. दोनों में पटने लगी. जब दोनों जाते तब मैं आंटी के पास चली जाती. वे अपनी कहानी सुनाने लगतीं. वही धारावाहिक सीरियल जैसे मु झे सुनातीं. मु झे भी बहुत इंटरैस्ट आने लगा.

वे कहने लगीं, ‘‘मेरे पास मेरे पति का आना करीबकरीब बंद हो गया. वे आते, तो भी उन के पास शिकायतों का पिटारा ही होता. ससुराल जाती, तो कोई सीधेमुंह बात न करता. बच्चे को मेरे पास न आने देने के लिए कई बहाने बनाए जाते थे. बच्चा जैसेजैसे बड़ा होता गया, मु झ से दूर होता गया. उसे मेरे खिलाफ  झूठी बातें कह कर भड़काया जाता था. मेरे लिए जीना ही दूभर हो गया. मैं ने तय कर लिया कि ऐसी जिंदगी जीने से क्या फायदा, मैं ने तलाक देने के लिए कहा.

‘‘वे यही तो चाहते थे. पर बच्चे को देने से मना कर दिया. रघुपति ने तब तक अपना ट्रांसफर भी मेरी ससुराल में ही करवा लिया था. ‘बच्चा मेरे मांबाप के पास ही रहेगा. मैं भी यहां हूं. यह अकेली उसे कैसे रखेगी?’ कोर्ट में रघुपति ने कह दिया. सोमू ने भी अदालत में पिता के पास रहने की जिद की और जज ने उसे पिता के पास सौंपने का फैसला सुनाया.’’

उन की कहानी सुन कर मेरा जी

भर आया.वे आगे कहने लगीं, ‘‘मैं हफ्ते में एक दिन या महीने में 4 दिन बच्चे से मिल सकती थी. अब सोमू बड़ा हो गया था. वह मु झ से बात नहीं करना चाहता था. मु झे देख कर अंदर भाग जाता. कुत्ते से खेलने लगता, रोने लगता और कहता, ‘तुम गंदी हो, मत आओ. आप मेरी मम्मी नहीं हो.’ यह बात मैं सहन न कर पाती थी. जब वहां जा कर आती, मन प्रसन्न होने के बजाय बहुत दुखी होता. मु झे इस हालत में देख कर मम्मीपापा भी बहुत दुखी होते. वे कहते, ‘जब वहां जा कर दुखी होती हो तो बारबार जाने की क्या जरूरत है.’

‘‘बच्चे को देखने की इच्छा को मैं रोक नहीं पाती. किसी से मिल कर मन प्रसन्न हो, तब ही जाना चाहिए. इस बात को सम झो. मैं अपनेआप को सम झाने की बहुत कोशिश करती, पर मन है कि मानता ही नहीं. मेरे खिलाफ उन लोगों ने सोमू में जहर भर दिया था. उस जहर को निकालना मेरे वश के बाहर था.

‘‘इस बीच मेरा ट्रांसफर बहुत दूर हो गया. फिर भी कोशिश कर के आती, तो वही पुरानी बातें दोहराई जाती थीं. अंत में तंग आ कर जाना छोड़ दिया.’’

इस बीच, सोमू आ गया. बातों में हम ने ध्यान नहीं दिया. वह हमारे लिए कौफी बना कर ले आया. वह भी हमारे बीच बैठ गया. मैं संकोचवश उठने लगी. ‘‘अरे, बैठो रमा, मेरे बेटे को कोई फर्क नहीं पड़ता. वह पहले जैसा तो है नहीं.’’

मैं बोली, ‘‘बच्चों के बिना रहना तो बहुत मुश्किल है.’‘‘हां रे, तू सही कह रही है. पर कुदरत ने मु झे बच्चा दे कर भी मु झ से छीन लिया था. किसी के बच्चे होते ही नहीं हैं. मेरे होने के बावजूद नहीं जैसे हो गया. मैं ने काम में मन लगाया और तरक्की पाती चली गई. एक बार सोमू की बहुत याद आने पर मैं एक हफ्ते की छुट्टी ले कर गई. तो पता चला वे बच्चे को ले कर विदेश चले गए. मैं ने सोचा, वे वापस आ जाएंगे, पर वे फिर नहीं आए.

मुझे एतराज नहीं- भाग 3: क्यों शांत थी वह महिला

‘‘मु झे पता ही नहीं चला कि वे कहां गए. बहुत कोशिश की, पर कोई सुराग नहीं मिला‘‘मेरे मम्मीपापा मेरे पास आ गए और मैं अपनी नौकरी के साथसाथ उन का भी ध्यान रखने लगी. समय बीतता गया और एक दिन अचानक पापा को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. मम्मी उन के पीछे उन की याद में

2 साल भी नहीं रहीं. सेवानिवृत्ति के बाद यह मकान खरीद व बना कर तुम्हारे पड़ोस में आ गई. मैं ने किसी से रिश्ता नहीं रखा. मन बहुत ही विरक्त था. मम्मीपापा 2 साल में आगेपीछे जा चुके थे. मैं अकेली हो चुकी थी. यहां आ कर रहने लगी.

‘‘अचानक एक दिन मेरी एक पुरानी सहेली का फोन आया, ‘मेरा बेटा मु झे ढूंढ़ रहा है’ और उस के थोड़ी देर बाद ही मु झे मेरे सोमू का फोन आया, ‘मैं आप का बेटा सोमसुंदरम बोल रहा हूं. मैं आप के पास आना चाहता हूं.’ मेरे आश्चर्य की सीमा न रही.

‘‘जैसा तुम कह रही थीं न, वैसे ही मु झे भी लगा कि कहीं कोई धोखा तो नहीं दे रहा है. मैं ने उसे घर न बुला कर एक होटल में बुलवाया. वहां बात की. तब सारी परतें एकएक कर खुल गईं.’‘‘आंटी, अब मैं घर जाऊंगी, हालांकि, जाने की इच्छा बिलकुल नहीं है. कल धारावाहिक जारी रहेगा,’’ कह कर मैं चल दी.

घर आ कर मैं ने सारा काम किया. वह तो करना ही था. परंतु मेरा मन आंटी की कहानी में ही लगा रहा. यह तो बौलीवुड की कहानी से भी ज्यादा मजेदार थी. आंटी के साथ क्या हुआ, यह जानने के लिए उत्सुक थी और सोमू के बारे में जानने के लिए भी, या दोनों के लिए, यह तो आप डिसाइड करो. फिल्म, कहानी और उपन्यास यह सब भी मानव जीवन के ही तो प्रतिबिंब हैं. दूसरे दिन जल्दीजल्दी काम निबटा कर आंटी के घर पहुंच गई. अब सोमू घर पर है, इस की उत्सुकता ज्यादा थी. मु झे लगा, यह आग एक तरफ की नहीं है. वह भी मु झ से बात करने का मौका तलाशता है. अपनी आग को जब्त करने की मैं कोशिश करती कि इस उम्र में यह ठीक नहीं है. लेकिन मन है कि मानता ही नहीं.

‘‘आओ रमा, आओ. मैं ने अपने बेटे सोमू से कहा कि मैं अपनी कहानी रमा को सुना रही हूं. सोमू ने कहा है, ‘मम्मी, जरूर सुनाओ. लोगों को हमारी कहानी सुन कर कोई शिक्षा मिले, तो बहुत अच्छी बात है, मु झे कोई एतराज नहीं.‘‘अभी अंत बाकी है,’’ आंटी बोलीं‘‘मम्मी, आप आराम से कहानी पूरी कर लो. मैं और अंकल वौलीबौल मैच देखने जा रहे हैं. हम खाना खा कर आएंगे.’’

‘‘अरे वाह, आंटी, आज हम सैलिब्रेट करेंगे,’’ मैं तो चहक उठी, पर ऊपरी तौर से. सोमू के जाने की मु झे खुशी नहीं हो रही थी‘‘रमा, आज हमें भी खाना बनाने की जरूरत नहीं. मेरे बेटे ने हम दोनों के लिए बाहर से ही खाना और्डर कर दिया है.’प्यार और खुशी से मैं ने आंटी को गले लगा लिया.

बढि़या फिल्टर कौफी पी कर हम दोनों आराम से  झूले में बैठ गए. आंटी ने पूछा, ‘‘हम कहां पर थे?’‘‘आंटी, आप ने, धारावाहिक जैसे ही, बड़े रोचक मोड़ पर छोड़ दिया था कि होटल में आप सोमू से मिलीं.’‘‘बिलकुल, रमा. अब मेरी नहीं, बेटे की कहानी शुरू होती है. बेटा वहीं पढ़ कर एक अच्छे पद पर काम करने लगा. अच्छी सैलरी थी. देखने में सोमू बहुत सुंदर था ही, परिवार की कोई रोकटोक नहीं थी. इन बातों से आकर्षित हो कर भारत से आए और वहीं बसे एक परिवार की लड़की नीला ने इस से बात की. सोमू अपने को बहुत अकेला और बिना परिवार का महसूस तो कर ही रहा था. उस के पिता बहुत ड्रिंक करते थे, वे भी चल बसे. उस ने मेरे बारे में जानने की कोशिश की थी. पर उसे कामयाबी नहीं मिली.

‘‘नीला के प्रस्ताव ने तो उसे उस की ओर मोड़ लिया. थोड़े दिन दोनों बहुत खुश रहे. 2 प्यारेप्यारे बच्चे भी हुए. एक बेटा और एक बेटी. पर गृहस्थी की गाड़ी जैसे चलनी चाहिए वैसे न चली और नीला को दूसरे लड़के से प्यार हो गया. उस ने तलाक का निर्णय लिया. केस चला और दोनों बच्चे नीला को मिल गए. यह मेरे जैसे ही अपने जीवन में असफल हो गया. उस के बचाए रुपए भी सब नीला को देने पड़े. बहुत ही निराश हो गया.’’

‘‘यह तो बहुत बुरा हुआ आंटी.’‘‘हां.’‘‘मेरे बेटे ने मु झे ढूंढ़ने की बहुत कोशिश की. इस तलाक के कारण मु झे ढूंढ़ना बीच में छोड़ दिया था. जब तलाक का काम पूरा हुआ, तब बड़े मनोयोग से उस ने फिर से मु झे ढूंढ़ने का काम जारी रखा.‘‘बहुत मुश्किल था आंटी?’’

‘‘सही कहा. बहुत कोशिश करने के बाद किसी से उस को मेरा मोबाइल नंबर मिला. मु झे तब उस ने फोन किया. वह दिन मेरे लिए अविस्मरणीय है. मु झे तो लगा था,  मेरा कोई नहीं है. किस से मैं अपनी इस खुशी को बांटूं‘‘रमा, दुख को तो फिर भी अकेले सह सकते हैं पर खुशी को जब तक न बांटो, तो खुशी, खुशी नहीं होती. उस समय मैं ने अपनेआप को बहुत अकेला पाया.’’

‘‘मुझ से क्यों नहीं कहा आंटी?’‘‘कैसे कहती? मैं ने तो अपनी कोई बात तुम्हें नहीं बताई थी. तुम्हें ही क्या, किसी को भी नहीं बताई. मैं ने अपनी कहानी अपने मन में ही दफन कर ली थी. अब मेरे बेटे के आने पर जैसे सब बदल गया. मेरी जिंदगी बदल गई.’‘‘वाकई, यह अजूबा से कोई कम नहीं आंटी?’’

‘‘मेरा बेटा विदेश को छोड़ कर आ गया. अब यहीं रहेगा. अपना देश अपना ही होता है. दूर के ढोल सुहाने होते हैं. यही बात सही है. यह बात अब सोमू की सम झ में आ गई. उस के बच्चे जब उस की मां के कहने पर उस से नफरत करने लगे तब ही उस को यह बात सम झ में आई कि मेरी मां के साथ भी यही हुआ होगा और उसे पश्चात्ताप हुआ. ‘अब क्या होत, जब चिडि़या चुग गई खेत’ ऐसा सोचा. पर अब मेरे समय में बेटे का सुख लिखा था. मेरी कोई गलती नहीं थी. कुदरत ने मु झे ये दिन दिखाए. कुछ दिनों पहले भी मैं ने कई बार आत्महत्या करने की सोची. यदि मैं अपनी मंशा में कामयाब हो गई होती तो बेटे का प्रेम, स्नेह कैसे पाती.

‘‘जब जो होना है, किसी न किसी रूप में हो कर रहता है. हमें कर्म करते रहना चाहिए, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए. क्यों रमा, तुम मेरी कहानी सुन कर कुछ सोचने को मजबूर तो हुई होगी?’‘‘हां आंटी, मु झे इसे आत्मसात करने में समय लगेगा. क्या मैं आप की कहानी लिख सकती हूं?’’

‘‘क्यों नहीं, क्यों नहीं रमा, जरूर लिखो. मैं जानती हूं कि तुम एक लेखिका हो. लेखक जो कहता है वह सब कल्पना नहीं होती. वह जो अपने चारों ओर देखता है, सुनता है, महसूस करता है, वह तो लिखता है‘‘रमा, तुम्हें मेरा बेटा कैसा लगा?’मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया‘‘अरे रमा, तुम तो छोटी लड़की जैसी शरमा गईं.’’‘‘मम्मी, अंकल आए हैं, उन्हें आप से कुछ कहना है?’’

‘‘कहिए?’‘‘मैं जो कहने आया था, घर के दरवाजे पर आते ही वह बात आप के मुंह से ही सुन ली. अब मु झे क्या कहना.’‘‘मियांबीवी राजी, तो क्या करेगा काजी,’’ आंटी बोल कर हंस दींसब लोग ठहाका लगा कर हंसने लगे.सोमू बड़े प्रेम से मु झे देखने लगा. मैं बोल पड़ी, ‘‘आज बाहर चलते हैं, आज का डिनर बाहर.’’‘‘व्हाय नौट, श्योर,’’ सोमसुंदरम बोला.

मुझे एतराज नहीं- भाग 1: क्यों शांत थी वह महिला

मैं एक पौश कालोनी में रहती हूं. मेरे साथ मेरे वृद्ध पिता रहते हैं. मैं इस कालोनी में 15 वर्षों से रह रही हूं. पड़ोस के मकान, जिस की बाउंड्री एक ही है, में रहने वाले उसे बेच कर अपने बच्चों के पास चले गए. यहां मकान बहुत महंगे हैं. उस मकान को

60 साल की एक महिला ने खरीदा. उसे नया बनाने में बहुत पैसा खर्च किया. उसे मौडर्न बनवा लिया.

सारी सुविधाएं मुहैया करवाईं. फिर वे रहने आईं.

वे बहुत ही प्यारी व सुंदर महिला थीं. वे किसी से बात नहीं करती थीं, सिर्फ मुसकरा देती थीं. कहीं जाना हो तो अपनी बड़ी सी कार में बैठ कर चली जातीं. हमारी और उन की कामवाली बाई एक ही थी. जो थोड़ीबहुत मेरी उत्सुकता को कम करने की कोशिश करती. पूरे महल्ले वालों को उन के बारे में जानने की उत्सुकता तो थी, पर जानें कैसे?

वे कोई त्योहार नहीं मनाती थीं. नाश्ता वगैरह नहीं बनाती थीं. बाई, जिसे मैं समाचारवाहक ही कहूंगी, कहती, ‘कैसी औरत है, न वार माने न त्योहार. पूछो तो कहती है कि इन बातों में क्या रखा है. शुद्ध ताजा बनाओ और खाओ.’ वे अकसर दलिया ही बनातीं.

कभीकभी मैं सोचती कि बाई के हाथ कुछ नाश्ता भेज दूं. फिर कभी डरतेडरते भेज देती. वे महिला पहले मना करतीं, फिर ले लेतीं. मु झे बरतन लौटाते समय कोई फल रख कर दे देतीं. उन से बोलने की तो इच्छा होती पर मैं क्या, महल्ले का कोई भी उन से नहीं बोलता. मैं अपने पिता से ही कितनी बात करती. मैं सर्विस करती थी, सुबह जा कर शाम आती थी. इसीलिए मु झे ताक झांक करने की आदत नहीं है.

यदि उन के बाहर जाते समय मैं बाहर खड़ी होती तो वे मुसकरा देतीं. सब को उन के रुतबे के कारण बोलने में संकोच होता था. मैं स्वयं तो बोलती ही नहीं थी. ऐसे ही 5 साल बीत गए. इतने साल कालोनी में रहने के बावजूद उन की किसी से दोस्ती न हुई, न उन्होंने की.

एक दिन अचानक उन के घर एक बड़ी कार आ कर खड़ी हुई. उस में से एक सुंदर 40-45 साल का व्यक्ति निकला. सब ने उसे आश्चर्य से देखा. इतने सालों में उन के घर कोई नहीं आया. अब यह कौन है? महल्ले वालों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा, जब उन्होंने देखा वह उन्हीं के घर में उन के साथ ही रहने लगा. वे साथसाथ बाहर जाते. कार से जाते और कार से ही वापस आते. मैं अपनी उत्सुकता रोक न सकी. पर क्या करें. अब तो उन के घर से पकवान बनाने की खुशबू भी आने लगी. परम आश्चर्य, एक दिन बाई ने मु झे बताया कि वह उन का बेटा है. शायद चला जाए. पर वह तो गया ही नहीं.

एक दिन वही पड़ोसिन गीता आंटी घर के सामने सुंदर रंगोली बना रही हैं. क्या बच्चे, क्या बड़े, पूरा महल्ला  झांक झांक कर देख रहा था. मेरी भी कुछ सम झ में नहीं आया, कहां तो कोई त्योहार नहीं मनाती थीं. हमारे उत्तर भारत में रंगोली कोईकोई बनाता है.

उन का बेटा भी मां के रंगोली बनाने को बड़े ध्यान से देख रहा था. तो उसी समय मेरे पापा ने अपना परिचय दे कर उस युवक से बात की. युवक तो बहुत खुश हुआ. बड़ी गर्मजोशी से पापा से हाथ मिलाया. पापा ने उसे बताया कि पड़ोस में रहते हैं.

‘‘हां अंकल, मैं ने आप को देखा, संकोचवश बोल न पाया,’’ उस ने कहा.

मैं ने घर में मूंग की दाल का हलवा बनाया था, सोचा क्यों न गीता आंटी को भी दे आऊं. मैं आंटी के घर गई.

उन्होंने खुश हो कर मेरे हाथ से हलवा ले लिया. और पोंगल चावलमूंग की दाल की मीठी डिश मुझे खिला दी. मु झे बहुत आश्चर्य हुआ. मैं ने बहुत स्वाद ले कर खाई. उन्होंने मेरे पापा के लिए भी एक बरतन में डाल कर दी. फिर अपने बेटे से मेरा परिचय कराया. उस का नाम सोमसुंदरम था. वे उसे सुंदर कह कर बुलाती हैं.

मैं ने पूछा, ‘‘इतने दिनों ये कहां गए थे?’’

‘‘यह अमेरिका में रहता था. अब मेरे पास आ गया है.’’

इस तरह आंटी से मेरी दोस्ती हो गई. पर मु झे एक प्रश्न परेशान करता था. इतने दिनों से तो कहती थीं कि मेरा कोई नहीं. आज मेरा बेटा कह रही हैं. कोई इन्हें धोखा तो नहीं दे रहा है, कहीं भावना में बह कर इन्होंने इसे अपना बेटा तो नहीं माना, कोई अनहोनी हो गई तो? मेरा मन रहरह कर मु झे परेशान करता. मैं ने यह बात अपने पापा को बताई तो वे बोले, ‘‘तुम अपने काम से मतलब रखो, ज्यादा होशियार बनने की जरूरत नहीं. वह औरत आईएएस थी. अपने काम से ही मतलब रखना बेटा. उन्हें सलाह देने की जरूरत नहीं.’’

परंतु, वह लड़का बहुत ही स्मार्ट, बढि़या पर्सनैलिटी, बहुत ही हैंडसम था. कहना तो नहीं चाहिए पर मेरे दिल में पता नहीं क्यों कुछ अजीब सा होने लगा. क्या हुआ इस उम्र में. मैं ने दिल को काबू करना चाहा. पर पता नहीं क्यों मेरा दिल काबू में नहीं रहा.

मु झे लगा इन आदमियों का दिल तो होता नहीं. मु झे बहुत तकलीफ हो रही थी. मु झे लगता, बच्चे सब को बहुत अच्छे लगते हैं. कौन सी ऐसी औरत होगी जो मां न बनना चाहे. यह औरत भी 65 साल से ऊपर हो गई है. कहते तो हैं कि 60 साल में सठिया जाते हैं. यह तो 65 से ऊपर हो गई है.

पैसे वाली हैं, इसीलिए कोई इन्हें धोखा तो नहीं दे रहा, फंस जाएंगी बेचारी. मैं सोचसोच कर परेशान होती रही. पर उन के बेटे का आकर्षण मु झे उन की ओर खींचता चला गया.

वे बेटे के लिए रोज तरहतरह का खानानाश्ता बनातीं.

यह लड़का शायद दक्षिण भारत का है, सो वे वहीं के त्योहार ज्यादा मनातीं और दक्षिण भारतीय व्यंजन और नाश्ते बनातीं. मन बहुत परेशान रहने लगा. कहीं मेरी पड़ोसिन धोखा न खा जाए क्योंकि पड़़ोस में साथ रहतेरहते उन से विशेष स्नेह और अपनत्व हो गया था. उन से कैसे पूछूं. कुछ बोलूं, तो शायद बुरा मानें. कल को कुछ हो न जाए, मन बहुत व्यथित हो रहा था.

एक दिन उन के लड़के को अकेले बाहर जाते देखा, तो मैं गीता आंटी

के पास चली गई. मैं ने कहा, ‘‘आंटी, आप बहुत बड़ी हैं. सम झदार हैं. मु झे आप के पारिवारिक मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. होना भी नहीं चाहिए. पर मैं आप से बहुत ही स्नेह रखती हूं. सो, कह रही हूं, गलती हो तो माफ कर देना. मैं आप की बेटी जैसी हूं.’’

‘‘हांहां रमा, बोलो, क्यों इतनी परेशान हो रही हो? तुम मेरी बेटी ही हो,’ वे बोलीं. िझ झकते हुए मैं बोली, ‘‘यह आप का सगा बेटा है क्या?’’‘‘बिलकुल. पर मैं ने कभी किसी से कहा नहीं क्योंकि मु झे भी पता नहीं था कि वह कहां है?’’

प्यार की धूपछांव: भाग 3- जब मंदा पर दौलत का खुमार चढ़ गया

मुंबई से निकलते वक्त उस ने मंदा के लिए एक खत लिख कर छोड़ दिया था कि घर जा रही हूं किसी जरूरी काम से… सारी बातें लौट कर बताती हूं.

क्लास से लौटने पर मंदा ने जब पूर्वी का लिखा खत देखा तो पहले तो वह सोच में पड़ गई कि ऐसा कौन सा काम अचानक आ गया जो पूर्वी इस तरह अचानक चली गई. फिर अगले ही पल उस के खुरापाती दिमाग में विचार आया कि यही सही मौका है, उस के फ्रैंड सलिल को अपने प्यार के झूठे जाल में फंसा कर अपना बनाने का.

बस फिर उस का माइंड बड़ी तेजी से सलिल को अपना बनाने के लिए षड्यंत्र रचने लगा. उस ने मन ही मन सोचा यदि सलिल उस का न हुआ तो पूर्वी का भी नहीं होने देगी.

इधर पूर्वी बरेली पहुंच कर मां की देखभाल में इस तरह व्यस्त हो गई कि उसे किसी बात का होश ही नहीं रहा. वह तो हरदम मां के जल्दी से जल्दी ठीक होने के लिए प्रार्थना करने लगी और अपना फोन भी साइलैंट मोड पर कर दिया.

इस बीच सलिल ने पूर्वी को कई बार फोन करने की कोशिश की, लेकिन उस का फोन हमेशा स्विच्ड औफ ही मिला. सलिल को पूर्बी के लिए चिंता होने लगी. फिर एक दिन सलिल ने मंदा को फोन मिला कर पूर्बी के बारे में जानने की कोशिश की तो मंदा के मन की तो कली खिल गई.

ऊपर से तो मंदा ने पूर्वी के बारे में चिंता जाहिर की फिर बोली, ‘‘देखो

तो मुझे भी कुछ बता कर नहीं गई,’’ और फिर पूर्वी के द्वारा लिखी चिट सलिल को दिखाई.

फिर तुरंत कहने लगी, ‘‘मुझे तो लगता है कि उस के मां, बाबूजी ने उसे शादी करने के लिए ही बुलाया होगा. मुझ से तो कम से कम कुछ बताती.’’

पूर्वी की शादी की बात सुन कर सलिल के चेहरे का रंग उड़ने लगा तो तुरंत मंदा कहने लगी, ‘‘अरे, इतना उदास क्यों होते हो ये छोटे शहर की लड़कियां होती ही ऐसी हैं. प्यार का नाटक किसी से व शादी किसी से. चिल करो यार, इस दुनिया में एक पूर्वी ही तो नहीं है, हम भी तो प्यार करते हैं तुम से, कभी मौका तो दो मुझे अपना प्यार साबित करने का.

‘‘मेरी आज कोई क्लास नहीं है. कहीं घूमने चलते हैं, तुम्हारा मूड भी ठीक हो जाएगा या ऐसा करते हैं आज होस्टल की वार्डन छुट्टी पर हैं. तुम कुछ ड्रिंक ले कर अपना मूड ठीक कर लेना, बाद में जैसा तुम चाहोगे वैसा ही करेंगे.

सलिल ने कहा, ‘‘नहीं, फिर कभी आता हूं,’’ पूर्वी की कोई खबर न मिलने पर सलिल का मन बहुत घबरा रहा था.

तभी मंदा ने उसे अपने बैड की तरफ खींच कर बैठाया और ?ाटपट ड्रिंक बना कर ले आई जिस में उस ने कुछ नशीली चीज मिला दी थी. जब सलिल ने ड्रिंक लेने से मना किया तो बोली, ‘‘अरे, इतना क्यों सोच रहे हो, कम से कम अपनी माशूका की खुशी के लिए ही पी लो. पूर्वी जहां भी होगी खुश होगी मेरा मन कहता है.’’

ड्रिंक पीते ही कुछ देर में सलिल अपने होश खोने लगा, तो मंदा ने उसे बैड पर लिटाया फिर अपने कपड़ों को फाड़ कर रूम से बाहर निकल कर शोर मचा कर लोगों को जमा कर लिया, ‘ख्देखो इस लड़के ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की है. इस की गलत हरकत के लिए इसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, मैं तो कहती हूं इसे जेल होनी चाहिए.

आननफानन में पुलिस आई और सलिल को पकड़ कर ले गई और जेल में डाल दिया.

दूसरे दिन न्यूजपेपर में बडेबड़े अक्षरों में यह खबर छपी कि लखनऊ के रिटायर्ड डीएसपी के बेटे को किसी लड़की के साथ जबरदस्ती करने  के जुर्म में जेल में डाला.

पूर्वी की मां अब अस्पताल से घर आ चुकी थी. उन की तबीयत में काफी सुधार था. पूर्वी आज काफी हलका महसूस कर रही थी. अत: पेपर ले कर पढ़ने लगी, जैसे ही उस की नजर सलिल के जेल में होने पर पड़ी वह एकदम घबरा गई, उस ने तुरंत अपना फोन चैक किया, सलिल की ढेरों मिस्ड कौल्स थीं.

‘‘पूर्वी का मन कतई यह मानने को तैयार नहीं था कि उस का सलिल ऐसी गलत हरकत कर सकता है. इतने दिनों की मेलमुलाकात के दौरान सलिल ने कभी मर्यादा का उलंघन नहीं किया था उसे टच तक नहीं किया था.

पूर्वी ने तुरंत वापस जाने का मन बनाया. उधर सलिल के पापा भी इस खबर को पढ़ कर बहुत परेशान थे. वे भी तुरंत मुंबई पहुंचे और अपने बेटे से मिल कर सारी स्थित की जानकारी ली.

इधर पूर्वी ने भी सलिल के पापा को सारी बातें स्पष्ट रूप से बता दीं. मंदा को थाने में बुलाया गया, कुछ देर में ही उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया कि पूर्वी से जलन होने के कारण ही उस ने ऐसी गलत हरकत की. असली सजा की हकदार तो वह है, सलिल नहीं. सलिल को पुलिस ने बाइज्जत वरी कर दिया. सलिल के पापा सलिल व पूर्वी को लखनऊ ले गए. पूर्वी के मांबाबूजी को भी बहां बुला लिया और दोनों की शादी करवा दी. दोनों ही परिवार बहुत खुश थे. सलिल पूर्वी को कुछेक परेशानी का सामना करने के बाद सही मंजिल मिल गई. शायद इसी को जिंदगी कहते हैं कभी धूप तो कभी प्यार की ठंडीठंडी छांव.

प्यार की धूपछांव: भाग 2- जब मंदा पर दौलत का खुमार चढ़ गया

बतियाते हुए वे दोनों होस्टल के गलियारे तक पहुंच चुके थे, पूर्वी भी अब तक सलिल से काफी फ्रैंडली हो गई थी. इतना ही नहीं मन ही मन उसे चाहने भी लगी थी. रूम नंबर 4 आते ही पूर्वी ने रूम की घंटी बजाई, दरबाजा एक लड़की ने खोला. यह पूर्वी की रूममेट मंदाकिनी थी.

‘‘हाय मैं मंदाकिनी.’’

‘‘और मैं पूर्वी.’’

‘‘तुम मुझे मंदा कह सकती हो,’’ कह मंदा ने भेदती नजरों से सलिल की तरफ देखा जो पूर्वी का बैग अपने कंधे पर टांगे खड़ा था.

सलिल ने पूर्वी को उस का बैग थमाया और उसे बाय कहा, ‘‘सी यू टेक केयर,’’ और चला गया.

सलिल के जाते ही मंदा ने पूर्वी को घूरते हुए पूछा, ‘‘क्या यह तेरा बौयफ्रैंड था?’’

‘‘नहीं,’’ पूर्वी ने जवाब दिया.

‘‘तो फिर तेरा भाई होगा जो तेरी फिक्र कर रहा था.’’

‘‘नहीं.’’

इस बार भी पूर्वी के मुंह से नहीं शब्द सुन कर मंदा बुरी तरह ?ाल्ला गई. कहने लगी, ‘‘भाई भी नहीं है, बौयफ्रैंड भी नहीं है तो यह लड़का आखिर है कौन, जो तेरा इतना खयाल रख रहा था कि तेरा बैग लटका कर तुझे यहां तक छोड़ने आया?’’

‘‘बस फ्रैंड है मेरा?’’

‘‘सिर्फ फ्रैंड या उस से कुछ अधिक?’’

पूर्वी ने कहा, ‘‘कहा न बस फ्रैंड है मेरा,’’ मंदाकिनी के बारे में अधिक कुछ जाने बिना पूर्वी का मन उसे अधिक कुछ बताने से डर रहा था पर मंदा से अनबन भी नहीं कर सकती, रूममेट जो है उस की.

‘‘अच्छा, चल तू फ्रैश हो ले, मैं तुझे अच्छी सी चाय पिलाती हूं. मगर हां मैं तुझे रोज चाय बना कर पिलाने वाली नहीं. वो क्या है कि तू आज नईनई आई है तो तेरा वैलकम तो बनता ही है.’’

यह सुन कर पूर्वी ने कुछ राहत की सांस ली. तभी मंदा चाय बना कर ले आई. साथ ही बिस्कुट भी थे. चाय पीतेपीते दोनों ने अपनेअपने घरपरिवार के बारे में ढेर सारी बातें कीं, साथ ही पूर्वी को होस्टल के रूल्स के बारे में भी जानकारी दी. शनिवार व इतवार के अलावा होस्टल से बाहर जाना मना था या फिर कोई छुट्टी होने पर होस्टल से बाहर जा सकते. हां, होस्टल के अंदर किसी लड़के के आने की तो सख्त मनाही है, सिवा लोकल गार्जियन के.

यह सुन कर पूर्वी एकदम चौंक गई, मन ही मन सोचने लगी हाय, अब वह अपने सलिल से न जाने कब व कैसे मिल पाएगी. उस की नशीली मुसकराहट उस का दिल जो चुरा कर ले गई थी.

तभी मंदा ने चुटकी बजाते हुए उसे टोका, ‘‘कहां खो गई? ये रूल्स सुन कर डर तो नहीं गई तू? धीरेधीरे तुझे आदत हो जाएगी इन सब की.’’

दूसरे दिन क्लास में कुछेक नया लोगों से उस की पहचान हुई. रूटीन शुरू हो

गया. क्लासेज शुरू हो गईं, इन सब के बीच पूर्वी सलिल को नहीं भूल पा रही थी. जबतब उस की आंखों के सामने सलिल के गालों में डिंपल पड़ने वाला मुसकराता चेहरा सामने आ जाता.

कहते हैं न दिल को दिल से राह होती है सो फ्राइडे रात को सलिल का फोन भी आ गया, ‘‘पूर्वी कल हम मिल रहे हैं. इस जगह व इतने बजे, देखो न मत कहना तुम से मिल कर अपने दिल की बहुत सारी बातें करनी हैं, फिर घूमेंफिरेंगे मस्ती करेंगे और क्या,’’ सलिल ने एकदम फिल्मी अंदाज में आमिर खान का डायलौग दोहरा दिया, ‘‘मैं तुम्हें नियत समय पर ही होस्टल छोड़ दूंगा.’’

थोड़ी देर नानुकर करने के बाद पूर्वी ने हां कर दी क्योंकि मन ही मन वह भी तो सलिल से मिलना चाह रही थी.

होस्टल के रूल्स के अनुसार सलिल उसे उस के होस्टल नियत समय पर छोड़ गया, साथ ही अगले शनिवार दोबारा मिलने का वायदा ले गया.

शनिवार आने पर जव पूर्वी तैयार होने लगी तो मंदा ने टोका, ‘‘आज फिर कहां चली इतना सजधज कर?’’

पूर्वी कुछ कहती उस से पहले ही सलिल की गाड़ी का हौर्न उस के कानों में पड़ा. बिना कुछ बोले पूर्वी बाहर आ गई, जहां सलिल उस का इंतजार कर रहा था. उस की कार में बैठते ही सलिल ने उस की तरफ देखा और कहा, ‘‘इस पिंक सूट में तुम सचमुच बहुत ही प्यारी लग रही हो. जानती हो पिंक मेरा पसंदीदा कलर है.

‘‘पूर्वी आज डिनर हम साथ में करने वाले हैं. मैं ने यहां के सब से महंगे व फेमस रैस्टोरैंट में टेबल बुक करा दी है ताकि तुम्हें लौटने में देर नहीं हो जाए क्योंकि आज का दिन मेरे लिए बहुत खास है, पूछो क्यों?’’

पूर्वी ने प्रश्नवाचक नजरों से उस की तरफ देखा.

‘‘अरे, अब बता भी दो कि आज के दिन क्या खास है?’’ पूर्वी ने पूछा.

‘‘आज मेरा हैप्पी बर्थडे है, सोचा तुम्हारे साथ मिल कर सैलिब्रेट करते हैं.’’

उसी समय रैस्तरां का वेटर एक बड़ा सा केक ला कर उन की टेबल पर रख गया. पूर्वी ने नाराजगी दिखाते हुए कहा, ‘‘जाओ मैं बात नहीं करती तुम से. मुझे पहले बता देते तो मैं कम से कम कोई गिफ्ट ले कर तो आती तुम्हारे लिए.’’

‘‘तुम गुस्सा होती हो तो और भी खूबसूरत लगती हो. रही गिफ्ट की बात सो मेरे लिए तो तुम ही एक खूबसूरत गिफ्ट हो. मैं ने तो मां से तुम्हारे बारे में बात भी कर ली है.’’

तभी एक रैड रोज पूर्वी की तरफ बढ़ाते हुए सलिल ने कहा, ‘‘बोलो क्या तुम मेरी

लाइफपार्टनर बनना पसंद करोगी?’’

‘‘पूर्वी ने शरमा कर अपनी नजरें नीची कर लीं. इस अप्रत्याशित खुशी से उस के दिल की धड़कन तेज हो गई थी, साथ ही गाल भी सुर्ख हो गए थे.

जब पूर्वी सलिल के साथ घूम कर होस्टल लौटी तो बहुत खुश थी. वह धीमे स्वर में गुनगुना रही थी, ‘‘छोटी सी मुलाकात प्यार बन गई, प्यार बन के गले का हार बन गई…’’

मंदा के कानों में जब पूर्वी के गाने के स्वर पड़े तो चौंक गई. फिर तुरंत पूर्वी की ओर मुखातिब हो कर बोली, ‘‘अरे, तू तो बड़ी घुन्नी निकली एकदम छिपी रुस्तम. मुझे खबर तक नहीं होने दी, तू तो इश्क फरमा रही है.’’

मंदा की बात सुन कर पूर्वी हलके से मुसकरा दी. ‘‘वाह, मुंबई आते ही तुझे तेरा प्यार मिला गया,’’ मंदा के दिल में जलन की आग धधक उठी. सोचने लगी भला ऐसा क्या है इस पूर्वी में जो सलिल जैसा बांका नौजवान इस छोटे शहर की लड़की पर फिदा हो कर अपना दिल हार बैठा. एक वह है पिछले 2 साल से मुंबई में है, इश्क के नाम पर 2-3 बार दिल टूट चुका है, छुट्टियों में घर जाने का भी दिल नहीं करता. वही मां, पापा की रोज की चिकचिक सुन कर कान पक गए हैं मेरे.

मेरी भावनाओं का तो उन्हें जरा भी खयाल नहीं है कि बेटी बड़ी हो रही है. बस यह कह कर अपना पल्ला झड़ लिया है कि तुम्हें जो भी पसंद आए हमें बता देना. उस से ही तुम्हारी शादी कर देंगे. रोने को मन हुआ मंदा का. लाइट औफ कर के पूर्वी के बैड की तरफ पीठ कर के लेट गई और थोड़ी देर आंसू बहाती रही.

नींद तो आ नहीं रही थी, सो मन ही मन प्लान बनाने लगी, जो भी हो इस पूर्वी को तो कभी भी सलिल का नहीं होने देगी. इस के लिए फिर मुझे चाहे कुछ भी क्यों न करना पड़े.

पूर्वी पर सलिल का प्यार परवान चढ़ रहा था, करीब हर शनिवार को वह सलिल के साथ घूमने निकल जाती. जब लौटती तो मंदा से अपने व सलिल के बीच हुई बातें शेयर करती.

एक दिन घूम कर जब लौटी तो पूर्वी ने बताया कि सलिल ने मेरे फोटो अपने घरवालों के पास भेजे थे. उन का अप्रूवल भी आ गया है. सलिल का एमबीए पूरा होते ही उस के घर वाले हम दोनों की शादी करवा देंगे.

‘‘अरे वाह, यह तो बहुत ही खुशी की बात है, तेरी तो सच में लौटरी ही लग गई पूर्वी, सलिल जैसा वांका नौजवान तुझे जीवनसाथी के रूप में मिल गया.’’

ऊपर से तो मंदा पूर्वी से बडी खुशी जाहिर करती, परंतु अंदर से मन ही मन उस की बातें सुन कर उस की छाती पर सांप लोटने लगते. वह ईर्ष्या की आग में बुरी तरह जल रही थी.

उधर पूर्वी उस की जलन की भावनाओं से अनजान, अपनी हरेक बात उस से शेयर करती क्योंकि पूर्वी तो मंदा को अपनी सखी मानती थी.

एक दिन जब पूर्वी क्लास अटैंड कर के अपने रूम की तरफ लौट रही थी कि तभी उस के बाबूजी का फोन आया. उन का स्वर एकदम घबराया हुआ था.

पूर्वी ने पूछा, ‘‘क्या बात है, बाबूजी, मां तो ठीक हैं न?’’

बाबूजी ने बताया, ‘‘तुम्हारी मां की तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रही थी. पहले तो हम लोगों ने सोचा कि शायद तुम्हारे जाने की वजह से मन उदास है उन का, परंतु जब एक दिन चक्कर खा कर गिर पड़ी तो डाक्टर की राय लेना जरूरी हो गया. डाक्टर ने बताया कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है, तुरंत औपरैशन करना पड़ेगा क्योंकि ट्यूमर आखिरी स्टेज पर है, अत: अधिक देर करना खतरे से खाली नहीं है.’’

सारी बातें सुन पूर्वी भी एक बार तो बहुत घबरा गई फिर बाबूजी को धैर्य बंधाते हुए बोली, ‘‘मैं कल ही बरेली के लिए निकल रही हूं, आप चिंता न करें, सब ठीक हो जाएगा. आजकल विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है, बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज संभव हो गया है.

पूर्वी के घर पहुंचने तक बाबूजी मां को हौस्पिटल में एडमिट कर चुके थे और औपरैशन की डेट भी ले ली थी. कहां तो पूर्वी घर पहुंचने पर मां को अपने व सलिल के प्यार की बावत बता कर सरप्राइज देने की सोच रही थी और यहां मां को इस हाल में देख कर उस का दिल कांप उठा.

धुआं-धुआं सा: क्या था विशाखा का फैसला

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BB 17: नेटिजेंस ने अंकिता लोखंडे पर लगाया इलजाम, विक्की जैन को अपना गेम नहीं खेलने दे रही

बिग बॉस 17 के पहले वीकेंड का वार से ठीक एक रात पहले घर के अंदर हो रहा है ड्रामा! अभी कुछ दिन पहले, ऐश्वर्या शर्मा और नील भट्ट के बीच बिग बॉस द्वारा तय की गई डेट पर उन्हें रास्ता दिखाया गया था. बिग बॉस के अंदर ईशा मालवीय और अभिषेक कुमार के बीच प्यार और नफरत का रिश्ता है. वहीं अब अंकिता लोखंडे और विक्की जैन के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं और बीते एपिसोड की लड़ाई के बाद, नेटिज़ेंस ने अपना पक्ष चुन लिया है.

बिग बॉस 17 में अंकिता लोखंडे और विक्की जैन के बीच फिर हुई लड़ाई

अंकिता लोखंडे और विक्की जैन के बीच पिछले कुछ समय से झगड़े हो रहे हैं क्योंकि अंकिता खुद को अलग-थलग महसूस कर रही हैं. उन्हें लग रहा है कि विक्की उन पर ध्यान नहीं दे रहे है. अंकिता यही बात विक्की को बता रही है जो जिसे वह समझ नहीं पा रहे है. विक्की का मानना ​​है कि वह हर जगह है और सभी के साथ बातचीत कर रहे है और अंकिता भी यही कर रही है, तो वह कहीं भी गलत कैसे हो रहे है? अंकिता को विक्की के व्यवहार के साथ तालमेल बिठाने में परेशानी हो रही थी.

बिग बॉस 17 में विक्की ने अंकिता पर अपना आपा खो दिया

बिग बॉस 17 के बीते  एपिसोड में, आप सभी ने विक्की जैन को अंकिता पर अपना आपा खोते हुए देखा. जब अंकिता एक बार फिर विक्की के साथ न होने की बात शुरू करती है, तो वह अंकिता पर भड़क उठते है. वह उससे कहते है कि वह भी अपने दोस्तों और कुछ लोगों के साथ बातचीत करती है, लेकिन उसे इसके बारे में कोई शिकायत नहीं है तो, जब वह वैसा ही व्यवहार कर रहा है जैसा अंकिता कर रही है तो अंकिता को इतना बुरा क्यों लग रहा है? तब जाकर अंकिता को समझ आती है और वह विक्की से माफी मांगती
है.

बिग बॉस 17 में अंकिता और विक्की की लड़ाई पर नेटिज़न्स की प्रतिक्रिया

नेटिज़न्स का मानना ​​​​है कि, अंकिता विकी को अपना पर्सनल गेम नहीं खेलने दे रही है. दरअसल, नेटिजन्स को ये भी लग रहा है कि बिग बॉस भी विक्की को गेम खेलने की इजाजत नहीं दे रहे हैं. ऐसा देखा गया है कि बिग बॉस विक्की की शरारतों और चालाकियों का खुलासा कर रहे हैं और घर के सदस्यों के सामने उन्हें ताना मार रहे हैं. यहां प्रतिक्रियाएं देखें:

 

BB 17 Weekend ka Vaar: सलमान खान ने ईशा मालवीय पर साधा निशाना

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस 17  दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. यह शो 15 अक्टूबर से शुरू हुआ है और इसे ऑडियन्स का भरपूर प्यार मिल रहा है. शो को लगभग एक सप्ताह हो गया है और अब, शो का सबसे प्रतीक्षित एपिसोड शुरू होगा. जी हां, हम बात कर रहे हैं होस्ट सलमान खान के साथ वीकेंड का वार एपिसोड की. शो के कई दर्शक इसे सिर्फ कंटेस्टेंट्स पर सलमान खान के फैसले को देखने के लिए देखते हैं. वह हमेशा वीकेंड का वार पर अपने विचार देते हैं जिससे दर्शकों और कंटेस्टेंट्स को शो के बारे में सही दृष्टिकोण प्राप्त करने में मदद मिले.

बिग बॉस 17 का नया प्रोमो

आज शनिवार है और हम सभी सलमान खान को बिग बॉस 17 के पहले हफ्ते के बारे में अपनी राय देते हुए देखेंगे. वीकेंड का वार का प्रोमो जारी हो गया है. इस शो में हमें देखने को मिलेगा कि टाइगर श्रॉफ और कृति सेनन को अपनी अपकमिंग फिल्म गणपत का प्रोमोशन करने के लिए बिग बॉस 17 में आएंगे.

सलमान ने ईशा मालविया की खिंचाई की

बिग बॉस 17 में देखने को मिलेगा कि, सलमान खान कंटेस्टेंट्स से बात करते हुए देखते हैं. वह पहले ईशा मालविया पर भड़कते नजर आते हैं. उन्होंने ईशा को याद दिलाया कि कैसे उन्होंने ग्रैंड प्रीमियर के दौरान अभिषेक कुमार पर शारीरिक हिंसा का आरोप लगाया था और बाद में उनके साथ कमरा साझा करने के लिए भी तैयार थीं.

उन्होंने उससे पूछा कि क्या उसे पता भी था कि यह एक गंभीर आरोप है जो उसने पहले दिन ही लगाया था. सलमान ने आगे बताया कि ईशा मन्नारा चोपड़ा को सेल्फ-ओब्सेस्ड कहती हैं लेकिन फिलहाल, बिग बॉस 17 में ईशा सबसे सेल्फ-ओब्सेस्ड इंसान हैं. बिग बॉस 17 के लेटेस्ट प्रोमो पर एक नज़र डालें.

 

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‘तेजस’ की प्रोमोशन के लिए आई कंगना रनौत

कंगना रनौत भी अपनी फिल्म तेजस को प्रमोट करने के लिए वीकेंड का वार में शामिल हुईं. कंगना की सलमान से मुलाकात एक दिलचस्प कहानी होगी.

Festival Special: घर पर बनाएं स्टीम्ड आलू कोफ्ते

त्योहार नजदीक आ गए है ऐसे में आप सोच रहे हैं खाने में क्या टेस्टी और स्पेशल बनाएं तो आज ही ट्राई करे स्टीम्ड आलू कोफ्ते, दाल मसाला पूरी और चावल के शकरपारे. आइए जानते है इनकी रेसिपी के बारे में…

  1. स्टीम्ड आलू कोफ्ते

सामग्री

 1. 1 कप बेसन

 2.  3 आलू उबले

 3.  1/2 कप पनीर

 4.  2 बड़े चम्मच लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च कटी

 5.  1 प्याज कटा

 6. 2 हरीमिर्चें कटी

7.  1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी

 8.  2 छोटे चम्मच तेल

 9.  थोड़ी सी राई

10.  करीपत्ता

11.  1 हरीमिर्च

12.  नमक स्वादानुसार.

विधि

आलुओं को मैश कर इस में पनीर, लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च, हरीमिर्च, धनियापत्ती व नमक डाल कर अच्छी तरह मैश कर इस की छोटीछोटी बौल्स बनाएं. एक कटोरी में बेसन घोल लें. इस में नमक मिला लें. आलू की छोटी बौल्स को बेसन में लपेट कर 10 से 15 मिनट स्टीम करें. कड़ाही में तेल गरम कर इस में राई, करीपत्ता व हरीमिर्च का तड़का लगाएं और फिर सभी स्टीम कोफ्ते इस में मिला दें.

2.  दाल मसाला पूरी

सामग्री

1. 1/2 कटोरी मूंग छिलका दाल

 2.  1/2 कटोरी सूजी

 3.  11/2 कटोरी आटा

 4. 1/4 चम्मच हलदी

5. 1 चम्मच धनिया पाउडर

6.  1/2 चम्मच लालमिर्च पाउडर

 7.  1/2 चम्मच सौंफ पाउडर

8. थोड़ा सा हींग पाउडर

9. 2 छोटे चम्मच तेल

10.  तलने के लिए तेल

11.  नमक स्वादानुसार.

विधि

मूंग की दाल को 2 घंटों के लिए पानी में भिगो दें. फिर अच्छी तरह धो कर पीस लें. एक थाली में आटा, सूजी, सभी मसाले, नमक, तेल, पिसी मूंगदाल अच्छी तरह मिलाएं. फिर इस का आटा गूंध लें. गुंधे आटे की छोटी गोलियां बना लें. गोलियों को पतला बेल लें. कड़ाही में तेल गरम कर पूरियों को अच्छी तरह तल लें. सब्जी के साथ गरमगरम सर्व करें.

3. चावल के शकरपारे

सामग्री

1. 1 कप चावल

 2. 1 कप गुड़

 3.  1/2 कप नारियल का पाउडर

 4.  2 बड़े चम्मच बादाम और काजू के टुकड़े

5.  1 बड़ा चम्मच तिल

 6.तलने के लिए तेल.

विधि

चावलों को धो कर सुखा लें. एक कड़ाही में चावलों को धीमी आंच पर भून लें. हलका ठंडा कर मिक्सी में पाउडर बना लें. गुड़ में 1/2 कप पानी डाल कर 1/2 घंटे के लिए रख दें. गुड़ घुल जाएगा. गुड़ के पानी से चावलों का आटा, नारियल का पाउडर, बादामकाजू के टुकड़े और तेल को अच्छी तरह से मिला कर गूंध लें. चाहें तो इस की गोलियां बना कर चपटा कर तल लें. या प्लास्टिक की परत के बीच से बेल कर शकरपारे बना लें. कड़ाही में तेल गरम कर शकरपारे तल लें.

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