नशा: भाग 1- क्या रेखा अपना जीवन संवार पाई

‘‘अम्माजी, ऐसा कभी नहीं हो सकता. आप मेरी मां हैं, मैं आप की बात पर विश्वास करूंगा. किंतु लगता है आप को गलतफहमी हुई है. रेखा शराब पीने लगी है, यह कैसे मान लूं, मैं.’’

‘‘बेटा, तेरे घर में तूफान आया है. और मैं तेरी मां हूं. यदि तेरे घर को तबाह करने वाले तूफान की आहट न पा सकूं तो मुझ से बढ़ कर मूंढ़ कौन होगा. बस, मैं तो यही कहती हूं, जल्दी से जल्दी इंडिया आ जा और तूफान से होने वाली तबाही को रोक ले.’’

बेटे देवेश से बात कर के अम्माजी ने फोन रख दिया था. ‘देवेश आज यहां नहीं है, तो मेरा तो कर्तव्य है कि उस के घर के तिनके बिखरने से पहले उन्हें बचा लूं,’ सोचतेसोचते अम्माजी वहीं सोफे पर लेट गई थीं. बड़े आश्चर्य की बात है कि रेखा पीती है, वे जानती न थीं. वह तो सोसायटी के गेट पर बैठे चौकीदार ने सुबह बताया था, ‘माताजी, देवेश बाबू एक शरीफ और समझदार व्यक्ति हैं.

2 साल पहले जब वे विदेश जा रहे थे तो कहा था कि घर तुम पर छोड़ कर जा रहा हूं, मुझे यह भी याद है कि उन्होंने आप का फोन नंबर भी दिया था, कहा था कि जरूरत पड़े तो अम्माजी को सूचित कर देना. इसीलिए बता रहा हूं, मैम का देर से घर आना ठीक नहीं लगता. आप तो बुजुर्ग हैं. मैम आप की बहू हैं, कहते शर्म आती है. अच्छा हुआ जो आप आ गई हैं संभाल लेंगी.’ सुन कर अम्माजी सन्न रह गई थीं. चुपचाप फ्लैट पर आ गई थीं.

सुबह का समय था, रेखा घर में नहीं थी. ‘‘मैम तो सुबह निकल जाती हैं. देररात तक वापस आती हैं. मैं तो नौकरानी हूं, क्या कहूं? अच्छा हुआ आप आ गई हैं. अम्माजी, मैं अब यहां नहीं रहूंगी. आप ही ने मुझे यहां भेजा था, आप से ही छुट्टी चाहती हूं. बस, यह नशे की लत है ही बुरी. छोटा मुंह बड़ी बात. यदि झूठ बोलूं तो फूफी को सौ जूती मार लो…’’ नौकरानी फूफी ने भी जब चौकीदार की बात को दोहराया तो उन्हें लगा कि यहां हालात सचमुच ठीक नहीं हैं.

नौकरानी फूफी आगे बोली, ‘‘अम्माजी, बैठो, खाना तैयार है. मूली के परांठे बनाए हैं.’’ अम्माजी बड़ी अनमनी सी बोलीं, ‘‘छोड़ो फूफी, मन नहीं कर रहा. अभी तो बहू का इंतजार कर रही हूं. आज तो शनिवार है, जल्दी आ जाएगी.’’ वे सोफे पर बैठ गईं और अतीत में खो गईं.

देवेश और राकेश अम्माजी के 2 बेटे हैं. जब उन के पति की मृत्यु हुई थी तो दोनों की उम्र 12 वर्ष और 10 वर्ष थी. अम्माजी का वैसे तो नाम अल्पना है पर उन की समझदारी और सोच को देख पूरा महल्ला उन्हें अम्माजी कहता था. पति के न रहने पर उन्होंने बड़ी मुसीबतों में दिन काटे हैं. सब याद है उन्हें.

हरियाणा के छोटे से गांव में स्कूल की छोटी सी नौकरी थी. उसी में सारा गुजारा करना होता था. सो, बच्चों को भी कंजूसी से चलने की आदत थी.

अम्माजी ने दोनों बच्चों को इंजीनियर बनाया था. कितनी परेशानी से वे पढ़े थे, अम्माजी से ज्यादा कौन जानता था. फिर दोनों का विवाह भी किया था उन्होंने ही. ‘‘अम्माजी, खाना टेबल पर लगा दिया है,’’ नौकरानी की आवाज सुन कर वे वर्तमान में लौटीं.

अम्माजी 60 की होने वाली थीं. रिटायर होने के बाद देवेश के साथ रहने की सोच रही थीं. देवेश की शादी को 2 वर्ष बीते तो उसे कंपनी की तरफ से एक प्रोजैक्ट के लिए जरमनी जाना पड़ गया. 3 वर्षों का कौन्ट्रैक्ट था. पैसे भी अच्छे मिल रहे थे. ऐसे सुअवसर को देवेश छोड़ना नहीं चाहता था. देवेश के जाने के कुछ दिनों पहले रेखा ने भी एक नौकरी जौइन कर ली थी. औफिस, उस के घर से काफी दूर था.

एक दिन उस के एक सहयोगी ने कहा, ‘‘रेखा, यहीं औफिस के करीब सोसायटी फ्लैट है, चाहो तो किराए पर ले सकती हो. इतनी दूर आनंद विहार से द्वारका आनाजाना आसान नहीं है. आनंद विहार के फ्लैट सुंदर व सस्ते भी थे. कम किराए में सुंदर फ्लैट. अम्माजी, देवेश और रेखा तीनों को अच्छा लगा.

देवेश के जरमनी जाने से पहले घर बदल भी लिया था. एक रोज देवेश ने रेखा से कहा, ‘यह फ्लैट छोटा है पर गुजारे लायक है. जरमनी से लौटूंगा तो मैं काफी पैसा बचा लूंगा. 50 लाख रुपए के लगभग मेरे पास होंगे, तब मैं अपना फ्लैट खरीद लूंगा.’ ‘ठीक कहते हैं आप, दिल्ली में हमारा अपना मकान होगा. लोगों का यह सपना होता है. हमारा भी यह सपना है,’ रेखा बोली थी.

दरअसल, देवेश ने इस प्रोजैक्ट के लिए हामी भरी ही इसलिए थी. वह बरसों पहले देखा ‘अपना घर’ का सपना पूरा करना चाहता था. इसलिए एकएक पैसा इकट्ठा कर रहा था. बेशक, 3 वर्षों के लिए पत्नी से दूर होना पड़े, पर यही एक रास्ता था. यह बात रेखा भी जानती थी.

देवेश जरमनी चला गया. शुरू में रेखा को खालीपन लगता था. अकसर अम्माजी आ जाती थीं. पर उन की उम्र ढल रही थी. सो, आनाजाना आसान न था. महीनों गुजर जाते. बस, फोन पर सासबहू एकदूसरे का हाल ले लेतीं. रेखा एक समझदार लड़की है. आज तक सासबहू में तूतूमैंमैं कभी नहीं हुई. अम्माजी यहां आ कर पैर फैला कर सोती हैं. इस पर फूफी नौकरानी हमेशा कहती, ‘अच्छी बहू मिली है, अम्माजी.’ उसी फूफी के मुंह से यह सब सुन कर उन का मन खिन्न हो गया. तभी दरवाजे की घंटी बजी. अम्माजी ने समय देखा कि रात में पूरे 12 बजे थे. दिमाग घूम गया.

‘‘अरे फूफी, देखो, लगता है रेखा आ गई है.’’

‘‘हां, वही है.’’

अम्माजी को ड्राइंगरूम में बैठा देख वह सहम गई. ‘‘अम्माजी, आप?’’ उस ने खुद ही महसूस किया कि उस की आवाज लड़खड़ा रही है.

‘‘बहू, इतनी देर?’’

‘‘वह, मेरी सहेली की बेटी का जन्मदिन था. सो, लेट हो गई.’’ उस ने झूठ बोला था. अम्माजी जानती थीं. पर कुछ भी न कहा सिवा इस के, ‘‘अच्छा, हाथमुंह धो ले, मैं तेरे इंतजार में भूखी बैठी हूं.’’

वह हड़बड़ा कर बाथरूम में घुस गई थी. शावर लेते हुए वह सोचने लगी, कुछ देर पहले नशे में धुत्त थी. टैक्सी में बैठी बार वाली उस घटना पर हंस रही थी- नंदिनी और एक शराबी कैसे दोनों लिपटे हुए एकदूसरे को चूमचाट रहे थे. बाकी लोग तालियां बजा कर तमाशा देख रहे थे.

एक शराबी उस को खींच कर नाचने के डांस?फ्लोर पर ले आया. वह शर्म से पानीपानी हो गई थी. मौका ताड़ कर वह भाग कर बार से बाहर आ गई. नशा उतर रहा था, जो टैक्सी मिली, बैठ कर घर आ गई. अच्छा हुआ जो निकल आई, पता नहीं, शायद अम्माजी को शक हो गया है या उसे यों ही लग रहा है. और वह सोसायटी के गेट पर बैठा मुच्छड़ चौकीदार, गेट खोलते समय ऐसे घूर रहा था, जैसे कह रहा हो, ‘मैडमजी, आज तो बड़ी जल्दी घर लौट आईं.’

नहाधो कर वह काफी हलका महसूस कर रही थी. टेबल पर अम्माजी उस का इंतजार कर रही थीं.

‘‘बेटा, देवेश का फोन आया था. बता रहा था प्रोजैक्ट 6 महीने पहले खत्म हो रहा है. वह शायद इसी साल के दिसंबर में आएगा. और मैं भी दिसंबर में रिटायर हो कर तुम लोगों के पास रहूंगी.’’

‘देवेश जल्दी आ रहे हैं’ सुन कर रेखा के मन में खुशी की तरंग दौड़ गई. पर, अम्माजी हमारे साथ हेंगी, यह तो कभी सोचा भी न था.

‘‘अभी मैं 15 दिनों की छुट्टी ले कर आई हूं,’’ अम्माजी ने बरतन समेटते हुए सूचना दी थी. यानी 15 दिन अभी रहेंगी. उस के बाद रिटायर हो कर भी यहीं हमारे पास रहेंगी. इस का मतलब वह इन 15 दिनों तक डिं्रक से दूर रहेगी. और जब अम्मा यहां रहने आ जाएंगी तो फिर उस के पीने का क्या होगा? यही सब सोच रही थी रेखा.

वह डाइनिंग टेबल से उठ कर बिस्तर पर लेट गई और सोचने लगी, यह उसे क्या हो गया है ? उस की हर बात ड्रिंक से जुड़ी होती है. पीने के अलावा वह कुछ सोचती ही नहीं. अगर अम्माजी को पता लग गया, मैं क्लब जाती हूं, पीती हूं, तो क्या होगा? यह कैसा शौक पाल बैठी मैं?

बड़ा अजीब सा संयोग था जब दीपा ने उसे औफर दिया था, ‘तुम अकेली हो, तुम्हारे पति बाहर हैं, कैसे वक्त काटती हो?’

‘फिर क्या करूं खाली समय में?’ उस ने अचकचा कर दीपा से पूछा था.

‘अरे, मेरे साथ चलो, भूल जाओगी अकेलापन.’

‘कहां जाना होगा मुझे?’ मासूम सा प्रश्न किया रेखा ने.

‘चलोगी तो जान जाओगी,’ दीपा ने उस के साथ शाम का समय फिक्स किया था.

अनुत्तरित प्रश्न: भाग 2- ज्योति कौन-सा अपमान न भूल सकी

इस कल्पना से कि उस ने मेरे खिलाफ सब उगल दिया होगा, मेरा सर्वांग कांप उठा. ‘‘जल्दी कर, संजना आती होगी,’’ मैं ने अपनी बेकाबू धड़कनों को संभालने का प्रयास किया.

‘‘संजना जानती है ज्योति के बारे में. मैं ने उसे सब बता दिया है… सिवा इन पत्रों के,’’ जतिन नजरें झुकाए धीरे से बोला.

‘‘क्या? उसे यह सब बताने की क्या जरूरत थी, वह भी ऐसी अवस्था में?’’ मुझे जतिन पर गुस्सा आने लगा था. यह एक के बाद एक नादानियां किए जा रहा था. इसे क्या व्यावहारिकता की जरा भी समझ नहीं?

‘‘जरूरत थी मां और वह बहुत खुश है ज्योति के बारे में जान कर.’’

मुझे लगा, इस लड़के का दिमाग घूम गया है.

‘‘आप पहले पूरी बात सुन लीजिए, फिर सब समझ आ जाएगा. ज्योति ने बताया कि वह मुझ से शादी नहीं कर सकती, क्योंकि वह अपूर्ण है. एक दुर्घटना में वह अपने मातापिता के साथ अपनी प्रजनन क्षमता खो चुकी है, इसलिए वह किसी से विवाह नहीं कर सकती. आप की तरह मैं भी उस वक्त यह सुन कर जड़ रह गया था. इतनी बड़ी बात और ज्योति मुझे अब बता रही थी? अंदर से दूसरी आवाज आई, शुक्र है बता दिया. शादी के बाद पता चलता तो? तभी तीसरी आवाज आई, कहीं यह मुझे परख तो नहीं रही? मुझे असमंजस में खड़ा देख ज्योति आगे बोली कि इस स्थिति में तुम क्या, कोई भी लड़का मुझ से विवाह नहीं करेगा. मुझे तुम्हें पहले बता देना चाहिए था. पता नहीं अब तक किस गफलत में डूबी रही. खैर… अब हमारे रास्ते अलग हैं. वह जाने लगी तो मुझ से रहा नहीं गया. मैं ने आगे बढ़ कर उस का हाथ थाम लिया. नहीं ज्योति, मुझे छोड़ कर मत जाओ. मैं नहीं रह पाऊंगा. हम बच्चा गोद ले लेंगे.’’

मैं ने तमक कर जतिन को देखा, लेकिन इस वक्त उस पर मेरा रोब, खौफ, प्यार सब बेअसर था. वह ज्योति के खयालों में ही खोया हुआ था.

‘‘इस पर ज्योति का कहना था कि भावुकता में बह कर मैं न तुम्हारा जीवन बरबाद करना चाहती हूं, न अपना. आज भले ही तुम भावुकता में मेरा हाथ थाम लो, लेकिन कल लोगों के ताने, मां का विलाप तुम्हें यथार्थ के धरातल पर ला खड़ा करेगा. तब तुम्हें अपने निर्णय पर पछतावा होगा. फिर या तो तुम मेरी अवहेलना करोगे या सहानुभूति दर्शाओगे और मुझे दोनों ही मंजूर नहीं. मैं कालेज से निकल कर आगे और पढ़ना चाहती हूं. कुछ बन कर दिखाना चाहती हूं. अपनी अपूर्णता को अपनी प्रतिभा से मैं पूर्णता में बदल दूंगी. मैं ने उस से कहा था कि वह सब तुम मेरे साथ रह कर भी कर सकती हो ज्योति. लेकिन उस का कहना था कि नहीं जतिन, मुझे बैसाखियों पर चलने का शौक नहीं है.

‘‘उस समय जरूर मुझे ऐसा लगा था मां कि अति आत्मविश्वास ने इसे अंधा बना दिया है. यह अपना भलाबुरा नहीं सोच पा रही है. मैं स्वयं को अपमानित महसूस कर रहा

था. लेकिन आज सोचता हूं तो लगता है उस ने जो भी किया, एकदम सही किया था. प्यार विशुद्ध प्यार होता है. जहां उस में दया, सहानुभूति, सहारे या विवशता का भाव आ जाता है, वहां प्यार खत्म हो जाता है. हम ने अपने प्यार को वहीं लगाम दी, तो कम से कम हमारा दोस्ताना तो जीवित रहा. कालेज खत्म कर के मैं नौकरी करने लगा और वह अपने सपने पूरे करने के लिए विदेश चली गई. व्यस्तता के कारण हमारा संपर्क घटतेघटते एकदम समाप्त हो गया.

‘‘कुछ महीने पहले मेरी उस से अचानक मुलाकात हो गई. पुणे की एक कंपनी में वह मैनेजर बन कर आई है. मैं तो अकसर पुणे जाता रहता हूं. एक व्यावसायिक मीटिंग में उसे देखा तो हैरान रह गया. मीटिंग के बाद हम मिले. दोस्तों की तरह साथ में डिनर भी किया. बहुत अच्छा लगा. पता चला, उस ने अभी तक शादी नहीं की है. बस मेरे दिमाग

में संजना के विधुर भैया का खयाल आ गया. आप तो जानती ही हैं मां, कितने संपन्न और अच्छे युवक हैं राजीव भैया. 2 साल होने को आए हैं सुरेखा भाभी के देहांत को. रिश्ते बहुत आ रहे हैं उन के लिए पर नन्ही सी नैना के मोह ने उन्हें जकड़ रखा है.

‘‘कहते हैं कि विवाह कर आने वाली लड़की खुद भी तो मां बनना चाहेगी और अपना बच्चा होते ही वह नैना की अवहेलना करने लग जाएगी. मां, यदि ज्योति की शादी उन से हो जाए तो कोई समस्या ही नहीं रहेगी, क्योंकि ज्योति तो मां बन ही नहीं सकती. दोनों एकदूसरे के लिए उपयुक्त पात्र हैं. मैं ने संजना को ज्योति के बारे में बताया तो वह भी बहुत खुश हुई. मां, ज्योति की कमी उस की गृहस्थी बसाने में उस की खूबी बन जाएगी,’’ जतिन बेहद उत्साहित हो चला था.

‘‘तुम ने ज्योति से बात की?’’ मैं अब भी सशंकित थी.

‘‘हां मां. उस ने इतनी अच्छी दोस्ती निभाई तो अब उस का घर बसाना मेरा फर्ज बनता है. मैं ज्योति से मिला और उस के सामने सारी बात स्पष्ट खोल कर रख दी.’’

‘‘वह मान गई?’’ मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा था.

‘‘नहीं मां, ज्योति इतनी आसानी से मानने वालों में नहीं है मैं जानता था. वह नाराज हो गई थी कि मैं क्यों उसे अपनी जिंदगी जीने नहीं देता? लेकिन मैं ने भी कच्ची गोलियां नहीं खेली हैं. मैं ने उसे अपनी दोस्ती का वास्ता दिया. जिंदगी की व्यावहारिकता समझाई कि इतनी पहाड़ सी जिंदगी बिना किसी सहारे के नहीं बिताई जा सकती. विशेषकर जीवन के संध्याकाल में जीवनसाथी की कमी तुम्हें अवश्य खलेगी. तुम आर्थिक रूप से सक्षम हो, अपने पैरों पर खड़ी हो, जब चाहो उचित न लगने पर संबंध तोड़ सकती हो. इस रिश्ते में तो कोई दया, सहानुभूति वाली बात भी नहीं है. राजीव भैया तुम्हारा सहारा बनेंगे तो तुम उन का सहारा बनोगी. 2 अपूर्ण मिल कर पूर्ण हो जाएंगे.

‘‘तुम ने मुझे यथार्थ के धरातल पर खड़ा कर के सोचने के लिए मजबूर किया था, आज मैं तुम से उसी यथार्थ के धरातल पर खड़ा हो कर सोचने की प्रार्थना कर रहा हूं.

UP के एक गांव की छात्रा को Google ने दिया 56 लाख रुपये का ऑफर

कहते हैं अगर आपके पास प्रतिभा है तो कामयाबी आपके कदम खुद चूमेगी. ऐसी ही एक खबर आई है यूपी गोठवां गांव से, जहां आराध्या त्रिपाठी नाम की लड़की के पास टैलेंट की कमी नहीं और ये बात तब साबित हो जाती है जब Google से उसे 56 लाख रुपये की नौकरी का ऑफर मिलता है. दरअसल आराध्या ने कम उम्र से ही पढ़ाई में प्रतिभा दिखाई. वह पढ़ने लिखने में काफी तेज रही, बचपन से ही हमेशा आगे रहने की सोची. गांव में रहते हुए भी कोई कमी उनके पढ़ाई के आगे नहीं आई. सेंट जोसेफ स्कूल में अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक करने के लिए MMMUT में दाखिला लिया. आराध्या ने हर मुसीबत पार की.

एक गांव से गूगल तक का सफर आसान नहीं था, आराध्या के पिता वकील हैं और मां गृहिणी.  आराध्या ने कम उम्र से ही पढ़ाई में प्रतिभा दिखाई. सेंट जोसेफ स्कूल में अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद, वह कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बी.टेक करने के लिए एमएमएमयूटी में शामिल हो गईं. तब से उन्होंने न केवल विश्वविद्यालय में ही नहीं बल्कि पूरे तकनीकी उद्योग में अपनी पहचान बनाई है और Google में सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के रूप में  प्रतिष्ठित भूमिका प्राप्त की है. 2023 में, आराध्या ने स्केलर में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया.

कंपनी में उनका कार्यकाल इस हद तक सफल रहा, कि उनकी इंटर्नशिप पूरी होने पर, स्केलर ने उन्हें 32 लाख रुपये का पैकेज दिया, जो एक अच्छी सैलरी थी, फिर भी उन्हें जल्द ही Google से एक बड़ा ऑफर मिला. अपनी इंटर्नशिप के दौरान, आराध्या ने काम करते हुए स्केलेबल उत्पादों और लाइव प्रोडक्शन ट्रैफिक को संभालने का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने लिंक्डइन पर अपने कौशल के बारे में विस्तार से बताया है कि मेरे पास React.JS, React Redux, NextJs, टाइपस्क्रिप्ट, NodeJs, MongoDb, ExpressJS और SCSS जैसे कई टेक्नोलॉजी स्टैक पर मजबूत पकड़ और अनुभव है. लिंक्डइन पर आज कर हर कोई अपनी जॉब प्रोफाइल बनाता है, वैसे ही आराध्या ने भी बनाया. लिंक्डइन आजकल जॉब के लिए बहुत ही अच्छा साइट माना जाता है.

खबरों के मुताबिक आराध्या कहती हैं कि उन्हें डेटा स्ट्रक्चर्स और एल्गोरिदम में गहरी रुचि है और उन्होंने बहुत सारे कोडिंग प्लेटफॉर्म पर लगभग 1000+ प्रश्न हल किए हैं और उन पर मेरी अच्छी रेटिंग है. आराध्या त्रिपाठी की कहानी कड़ी मेहनत का एक उदाहरण है जिसने साबित कर दिया है कि गांव की लड़कियां भी अब पीछे नहीं रहीं. अगर आपके पास टैलेंट है और आप मेहनती हैं तो कामयाबी आपके पीछे पीछे भागेगी. दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं. जरूरत है तो मेहनत, संकल्प और लगन की.

हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है… इससे पहले भी एक खबर आई थी कि.. पटना की एक लड़की को गूगल ने एक करोड़ की नौकरी का ऑफर दिया था. एक करोड़ से अधिक के सैलरी पैकेज पर प्लेसमेंट पाने वाली लड़की का नाम संप्रीति यादव है. इस वक्त संप्रीति अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रही हैं. उन्होंने गूगल 14 फरवरी 2022 को ज्वाइन किया था. रिपोर्ट के अनुसार गूगल ने उन्हें एक करोड़ 10 लाख का पैकेज दिया था. गूगल में उनका सेलेक्शन 9 राउंड इंटरव्यू के बाद हुआ था.

अनुत्तरित प्रश्न: भाग 1- ज्योति कौन-सा अपमान न भूल सकी

ज्योति को इतने बरसों बाद एकाएक सामने देख कर मैं हैरान हो उठी. उस ने मुझे जतिन की शादी की बधाई दी.

‘‘मैं काफी समय से विदेश में थी. अभी कुछ समय पूर्व ही इंडिया लौटी हूं. जतिन की शादी की बात सुनी तो बेहद खुशी हुई. आप को बधाई देने के लिए मैं खुद को न रोक सकी, इसीलिए आप के पास चली आई. ये कुछ खत हैं, अब ये आप की अमानत हैं. आप इन का जो करना चाहें करें, मैं चलती हूं.’’

‘‘अरे, कुछ देर तो बैठो… चाय वगैरह…’’ मैं कहती ही रह गई पर वह उठ कर खड़ी हो गई.

‘‘बस, आप को भी तो कालेज जाना होगा,’’ कह कर तेज कदमों से चल दी.

उस के जाने के बाद मैं ने खतों पर सरसरी निगाह डाली तो चौंक उठी. वे जतिन द्वारा ज्योति के नाम लिखे प्रेमपत्र थे. शुरू के 1-2 पत्र पढ़ कर मैं ने सब उठा कर रख दिए. कालेज में आएदिन ऐसे प्रेमपत्र पकड़े जाते थे, इसीलिए ऐसे पत्रों में मेरी कोई रुचि नहीं रह गई थी. पर चूंकि जतिन की लिखावट थी, इसलिए मैं ने 1-2 पत्र पढ़ लिए थे. उन से

ही मुझे प्रेम की गहराई का काफी कुछ अनुमान हो गया था. आश्चर्य था तो इस बात पर कि जतिन ने कभी मुझ से इस बारे में कुछ कहा क्यों नहीं?

कालेज में भी मेरा मन नहीं लगा. बारबार ज्योति का चेहरा आंखों के आगे घूमने लगा. वह पहले से भी ज्यादा आकर्षक लगी थी. सुंदरता में आत्मविश्वास के पुट ने उस के व्यक्तित्व को एक ओज और गरिमा प्रदान कर दी थी. यह मेधावी छात्रा कभी मेरी प्रिय छात्राओं में से एक थी, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि मैं इसे नापसंद करने लगी. इसी कालेज में पढ़ने वाले अपने बेटे के संग मैं ने इसे 2-3 बार देख लिया था.

जतिन, मेरा बेटा हमेशा मेरी कमजोरी रहा है. सुधीर के निधन के बाद से तो मैं उसी के लिए जी रही हूं. अपनी प्रिय वस्तु के छिन जाने का भय मुझ पर हावी होने लगा. अपने चैंबर में ज्योति को बुला कर अकेले में मैं ने उसे डांट दिया था.

‘‘तुम कालेज में पढ़ने आती हो या अपनी खूबसूरती और प्रतिभा का प्रदर्शन कर उसे भुनाने? अपनी पढ़ाई से मतलब रखो, वरना कालेज से निकाल दी जाओगी. मैं तुम्हारा बैकग्राउंड अच्छी तरह जानती हूं. एक बार शिकायत घर चली गई तो कहीं की नहीं रहोगी. नाऊ गेट लौस्ट,’’ उस समय प्रिंसिपल के कड़क मुखौटे के पीछे मैं एक आशंकित मां का चेहरा छिपाने में सफल हो गई थी.

ज्योति ने फिर कभी मुझे शिकायत का मौका नहीं दिया. मैं आश्वस्त हो गई थी. जतिन को अवश्य मैं ने कुछ दिनों परेशान देखा था पर फिर परीक्षाएं नजदीक देख कर वह भी पढ़ाई में रम गया था. मैं ने राहत की सांस ली थी. डिग्री मिलते ही अपने रसूखों से मैं ने उस की नौकरी लगवा दी. फिर संजना जैसी सुंदर और सुशील कन्या से उस का विवाह भी करा दिया.

फिर भी जतिन ने एक बार भी ज्योति का जिक्र नहीं किया. जतिन और संजना का वैवाहिक जीवन हंसीखुशी चल रहा था. उन के विवाह को 2 वर्ष होने वाले थे. पिछली बार जतिन ने जब मुझे मेरे दादी बनने की खबर सुनाई थी तो मैं खुशी से उछल पड़ी थी. संजना पर आशीर्वाद और हिदायतों की झड़ी लगा दी थी मैं ने.

वे दोनों मेरे पास आने वाले थे. सब कुछ कितना अच्छा चल रहा था और यह बीच में ज्योति जाने कहां से टपक पड़ी. वह भी जतिन के लिखे प्रेमपत्र ले कर. क्या चाहती है यह लड़की? ब्लैकमेल करना? तो फिर पत्र मुझे क्यों दिए? हो सकता है जेरौक्स कौपी हो उस के पास. यह भी हो सकता है कि जतिन की शादी का पता चला हो तब यह किस्सा ही खत्म कर देना चाहती हो. अगर ऐसा होता तो फिर खुद ही जला देती. जतिन को भी लौटा सकती थी. नहींनहीं, वहां तो संजना है.

आखिर, उस का क्या मंतव्य हो सकता है? शायद मेरी निगाहों में खुद को बेकुसूर साबित करना चाहती हो कि आप का बेटा मुझे प्यार करता था और खत लिखता था, मेरा कोई कुसूर नहीं था.

अनुत्तरित प्रश्नों की गूंज ने मुझे बेचैन कर दिया था. कभी मन करता खतों को जला डालूं. कभी मन करता इन्हें जतिन को दिखा कर पूछूं कि इन में कितनी सचाई थी? यदि उस का प्यार सच्चा था तो उस ने उस का इस तरह गला क्यों घोंटा? मेरे सभी प्रश्नों का जवाब जतिन ही दे सकता था. फोन पर पूछना संभव नहीं था. मैं उस के आने की राह देखने लगी.

जतिन आया मगर मुझे उसे खत दिखाने और बात करने का मौका नहीं मिल रहा था, जबकि उन के लौटने के दिन नजदीक आते जा रहे थे. मुझे बहू के लिए साड़ी और कुछ सामान खरीदने थे. जतिन से कहा तो उस ने हाथ खींच लिए.

‘‘मां, यह काम मेरे बस का नहीं है. आप दोनों हो आइए. मैं तब तक अपना कुछ काम कर लेता हूं.’’

मुझे उस की बात ठीक लगी. लौटते वक्त मैं ने अचानक गाड़ी रुकवाई, ‘‘संजना बेटी, मुझे यहीं उतार दो. मैं रिकशा कर के घर चली जाती हूं और खाने वगैरह की तैयारी कर लेती हूं. तुम तब तक नत्थू की दुकान से अपनी पसंद की मिठाई, नमकीन बंधवा लाओ और हां, थोड़े फल भी ले आना.’’

संजना ने मुझे उतार कर गाड़ी घुमा ली. मैं घर पहुंची तो जतिन चौंक पड़ा, ‘‘क्या हुआ मां, तुम अकेली कैसे आईं? तबीयत तो ठीक है न? संजना कहां है?’’

‘‘आ रही है नुक्कड़ से मिठाई ले कर. मुझे तुम से अकेले में कुछ जरूरी बात करनी थी,’’ कह कर मैं जल्दीजल्दी जा कर अपनी अलमारी से कपड़ों की तरह के नीचे दबे खत ले आई और जतिन के सामने रख दिए. पत्र देख कर वह सकपका गया.

‘‘ये आप के पास कैसे आए?’’ उस ने साहस कर के पूछा.

‘‘जाहिर सी बात है, ज्योति दे कर गई है. बहुत प्यार करते थे न तुम उस से? प्रेमपत्र लिखने का साहस था, शादी करने का नहीं? मुझ से कहने का भी नहीं?’’

‘‘ऐसी बात नहीं थी मां. मैं तो उसी से शादी करना चाहता था…’’

‘‘फिर?’’ पूछते हुए मैं मन ही मन कांप उठी. कहीं ज्योति ने डांट और धमकी की बात जतिन को तो नहीं बता दी थी? उस वक्त मुझे कहां पता था कि मेरा अपना ही सिक्का खोटा है.

‘‘वैसे मां ज्योेति कैसी लगती है तुम्हें?’’ जतिन अब तक सामान्य हो चला था पर अब चौंकने की बारी मेरी थी.

‘‘क्या मतलब है तुम्हारा? कैसी ऊलजलूल बातें कर रहे हो तुम?’’ मैं गुस्से से बोली.

‘‘ओह मां, आप गलत समझ रही हैं. खैर, आप का भी दोष नहीं है. मैं आप को शुरू से सारी बातें बताता हूं. मैं कालेज के दिनों से ही ज्योति को पसंद करने लगा था. लेकिन वह मेरे बारे में क्या सोचती है, यह नहीं जान पाया.

मैं ने उसे खत लिखे पर उस ने कोई जवाब नहीं दिया. मुझे उस की आंखों में अपने लिए प्यार नजर आता था, लेकिन न जाने क्यों वह मुझ से कतराती थी. फिर मुझे समझ आया वह आप से यानी अपनी प्रिंसिपल से खौफ खाती थी, इसलिए उन के बेटे से प्यार करने की जुर्रत नहीं कर पा रही थी. मैं अकेले में उस से मिला. समझाया कि मां से डरने की जरूरत नहीं है. हम वक्त आने पर अपने प्यार का इजहार करेंगे और वे शादी के लिए मान जाएंगी. वह कुछ आश्वस्त हुई थी, पर फिर न जाने क्या हुआ, उस ने अचानक मुझ से मिलना बंद कर दिया. सामने भी पड़ जाती तो कतरा कर निकल जाती. मैं परेशान हो उठा. आखिर एक दिन मैं ने उसे पकड़ लिया…’’

अंतिम पड़ाव का सुख: क्या गलत थी रेखा की सोच

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बिग बॉस 17: मुनव्वर से ईशा की नजदीकियों से नाराज हुए अभिषेक

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस 17 दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. बिग बॉस का आज का  एपिसोड काफी दिलचस्प था. कल बिग बॉस ने अभिषेक कुमार को उनके आक्रामक व्यवहार के लिए सजा दी. घर वालों से कहा गया कि वे उनसे अकेले में बातचीत न करें. उनकी एक्स गर्लफ्रेंड ईशा मालवीय ने अभिषेक को कंपनी देने की कोशिश की, लेकिन वह नाराज हो गए.

ईशा मालवीय और मुनव्वर फारुकी की नजदीकियों से भड़के अभिषेक कुमार

दरअसल, बिग बॉस के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए, ईशा अभिषेक के कमरे में गईं और उनसे बात करने की कोशिश की क्योंकि वह परेशान दिख रहे थे. अभिषेक ने खुलकर बताया कि उन्हें कौन सी बात परेशान कर रही थी. उन्होंने बताया कि मुनव्वर शारीरिक रूप से ईशा के करीब बैठा था और उसके पैर को टच कर रहा था. अभिषेक ने फारुकी द्वारा ईशा का हाथ पकड़ने पर नाराजगी भी जताई. बातचीत के दौरान अभिषेक ने अपना आपा खो दिया और ईशा का हाथ पकड़ लिया. अभिषेक को नाराज छोड़कर ईशा कमरे से बाहर चली गईं.

 

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अभिषेक कुमार दिल रूम में घुस गए और ईशा मालवीय पर जमकर बरसे

इसके बाद, अभिषेक मक्कन नंबर 1- दिल रूम में घुस गए और ईशा पर भड़क गए और उससे कहते कि घर में किसी और के पास उसकी तरह उसे परेशान करने की क्षमता नहीं है. उसने ईशा से उसे परेशान न करने के लिए कहा. बाद में ईशा ने अभिषेक से कहा कि वह घर के अन्य सदस्यों के सामने हंगामा न करें. विक्की ने उनके बीच चीजों को सुलझाने की कोशिश की.

बिग बॉस में हुआ फेरबदल

बिग बॉस सभी को लिविंग रूम में इकट्ठा करते है और अलग-अलग कमरों से घर के सदस्यों के फेरबदल की घोषणा करने के लिए कहते हैं. उन्होंने अभिषेक को दिल रूम में रखा और मन्नारा चोपड़ा और मुनव्वर फारुकी को दिमाग रूम में रखा. फेरबदल के बाद, दिल रूम में अंकिता लोखंडे, विक्की जैन, ऐश्वर्या शर्मा, नील भट्ट, अभिषेक कुमार और ईशा मालवीय जैसी हस्तियां शामिल हैं.

Diwali Special: इस त्योहार पर बनाएं ब्रोकन व्हीट पैन केक

त्योहार नजदीक आ गए है ऐसे में आप सोच रहे हैं खाने में क्या टेस्टी और स्पेशल बनाएं तो घर ही ट्राई करे ब्रोकन व्हीट पैन केक, कोकोनट डैजर्ट और चीजी डिनर बन. आइए आपको बताते है इनकी रेसिपी.

  1. ब्रोकन व्हीट पैन केक

सामग्री

1. 1 कप दलिया

 2. 1 प्याज बारीक कटा

 3.  1 टमाटर बारीक कटा

 4.  2 बड़े चम्मच लाल,

 5. पीली व हरी शिमलामिर्च कटी

  6. 1/2 कप लौकी घिसी

  7.  1/2 कप पनीर कसा

 8.  1-2 हरीमिर्चें कटी

 9.  थोड़ी सी धनियापत्ती कटी

 10.  3 बड़े चम्मच तेल

11.  नमक स्वादानुसार.

विधि

दलिए को अच्छी तरह धो कर पानी डाल कर 1 घंटा भिगोए रखें. फिर मिक्सी में पेस्ट बना लें. एक बाउल में निकाल कर इस में सारी सब्जियां, स्वादानुसार नमक, हरीमिर्चें व धनियापत्ती मिला लें. तवा गरम कर चम्मच से दलिए के मिश्रण को गरम तवे पर फैलाएं. दोनों तरफ से तेल लगा कर सेंक लें. पैन केक चटनी के साथ गरमगरम परोसें.

2. कोकोनट डैजर्ट

सामग्री

1. 1 कप कोकोनट दूध

 2.  1/2 कप मिल्क

 3.  2 बड़े चम्मच चीनी

 4.   1/4 कप क्रीम

 5.  1/4 कप बादाम का पेस्ट

 6.  थोड़ा सा कंडैंस्ड मिल्क.

विधि

एक कड़ाही में कोकोनट दूध, कंडैंस्ड मिल्क, बादाम का पेस्ट, चीनी और मलाई को गाढ़ा करें. गाढ़ा होने पर मोल्ड में डाल कर फ्रीजर में जमा लें. जमने पर मोल्ड से निकाल कर कटे बादाम डाल कर सर्व करें.

3.  चीजी डिनर बन

सामग्री

1.  3-4 बर्गर बन

 2.  2 प्याज कटे

3.  2 टमाटर कटे

 4.  100 ग्राम पीला कद्दू कटा

 5.  2 बड़े चम्मच लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च कटी

 6.  50 ग्राम पनीर

7.  1/2 चम्मच कालीमिर्च पाउडर

 8.  1 गाजर कटी

9.  10 बींस कटी

10. 1 बड़ा चम्मच टोमैटो सौस

11.  2 बड़े चम्मच मक्खन

12. 50 ग्राम मोजरेला चीज

 13.  नमक स्वादानुसार.

विधि

सारी सब्जियों को धो कर बारीक काट लें. कड़ाही में मक्खन गरम कर इस में प्याज भूनें. फिर इस में कटी लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च, गाजर, कद्दू व बींस डाल कर भूनें. इस में नमक और टमाटर डाल 2-3 मिनट भूनें. अब पनीर के टुकड़े डाल कर 1-2 मिनट ढक कर पकाएं. बर्गर बन बीच से काट लें. इस में सब्जी का मिश्रण भरें. ऊपर से मोजरेला चीज डाल गरम ओवन में चीज पिघलने तक बेक करें और फिर गरमगरम सर्व करें.

Same sex marriage को कानूनी मान्यता नहीं, LGBT समुदाय को झटका

समलैंगिक विवाह को लेकर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया है. याचिकाकर्ताओं ने शादी को कानूनी मान्यता दिए जाने की मांग की थी,  लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मान्यता नहीं दी. याचिका दाखिल करने वालों में सेम सेक्स कपल्स, सामाजिक कार्यकर्ता और कुछ संगठन शामिल थे. आपको बता दें कि सेम सेक्स मैरिज को कानूनी मान्यता देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को सुनवाई पूरी कर ली थी लेकिन फैसला सुरक्षित रख लिया था. 18 समलैंगिक जोड़ों की तरफ से कोर्ट में याचिका दायर की गई थी और याचिका में समलैंगिक विवाह की कानूनी और सोशल स्टेटस के साथ अपने रिलेशनशिप को मान्यता देने की मांग की थी. याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एसके कौल, एसआर भट्ट, हेमा कोहली और पीएस नरसिम्हा शामिल थे. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि शादी का अधिकार सिर्फ वैधानिक अधिकार है संवैधानिक अधिकार नहीं.

LGBT कम्युनिटी समेत DU के छात्रों ने तो ‘गे प्राइड मार्च’निकाला,  सेम सेक्स मैरिज मुद्दे पर कोर्ट के फैसले को लेकर जमकर प्रदर्शन किया. इस रैली का उद्देश्य विवाह समानता की मांग करना और सेम सेक्स मैरिज पर कोर्ट के फैसले पर नाराजगी व्यक्त करना था. जिसका जमकर विरोध किया गया.

सेम सेक्स मैरिज पर क्या बोले औवैसी ?

सेम सैक्स मैरिज को लेकर राजनीतिक बयानों की भी कमी नहीं रही, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी राय दी. औवैसी ने ट्वीट कर कहा- कि सुप्रीम कोर्ट संसदीय सर्वोच्चता के सिद्धांत को बरकरार रखा है. यह तय करना अदालतों पर निर्भर नहीं है कि कौन किस कानून के तहत शादी करेगा. मेरा विश्वास और मेरी अंतरात्मा कहती है कि शादी केवल एक पुरुष और एक महिला के बीच होती है. यह 377 के मामले की तरह गैर-अपराधीकरण का सवाल नहीं है, यह विवाह की मान्यता के बारे में है. यह सही है कि सरकार इसे किसी एक और सभी पर लागू नहीं कर सकती.

सेम सेक्स मैरिज पर बॉलीवुड की प्रतिक्रिया

समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कई बॉलीवुड हस्तियों ने जताई निराशा. अभिनेत्री भूमि पेडनेकर और सेलिना जेटली ने भी विरोध जताया. भूमि पेडनेकर ने फिल्म बधाई हो में लेस्बियन का किरदार निभाया था. भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया. लिखा सबके लिए समानता क्योंकि प्यार तो प्यार है. भूमि पहले भी समलैंगिकता का समर्थन कर चुकी हैं. फिल्म निर्माता ओनिर ने भी कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई. सोशल मीडिया के जरिए कहा- CIS- लिंग वाली दुनिया बेहतर इंसान बनने में विफल रही. ऐसी ही कई और भी हस्तियां हैं जो कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं.

किन देशों में कानूनी तौर पर स्वीकृति ?

कई खबरों और रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहां सेम सैक्स मैरिज को कानूनी मान्यता दी गई है. कुल 34 देश में क्यूबा, एंडोरा, स्लोवेनिया, चिली, स्विट्जरलैंड, कोस्टा रिका, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, इक्वेडोर, ताइवान, बेल्जियम, डेनमार्क, ब्रिटेन,  फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन, मेक्सिको, लक्समबर्ग, माल्टा, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, कनाडा, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड कोलंबिया, ब्राजील, और उरुग्वे का नाम शामिल है. इन देशों में दुनिया की 17 फीसदी आबादी रहती है. तीन ऐसे देश हैं जहां पिछले साल ही समलैंगिक विवाह को मान्यता दी गई है. इन देशों में स्लोवेनिया , एंडोरा, और क्यूबा शामिल हैं.

10 ऐसे देश हैं जहां कोर्ट ने मान्यता दी है, इसके अलावा 22 ऐसे देश हैं जहां कानून बनाकर स्वीकृति मिली है. एक रिपोर्ट के मुताबिक सेम सैक्स मैरिज को सबसे पहले नीदरलैंड ने 2001 में वैध माना था, लेकिन कुछ देश ऐसे हैं जहां समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं हैं और तो और ऐसा करने पर सजा का प्रावधान है. ऐसे देशों की संख्या कुल 64 है. यहां पर समलैंगिक विवाह को अपराध माना जाता है और सजा में मौत की सजा भी शामिल है. इनमें जापान जैसे देश भी शामिल हैं.

किन देशों में सेम सेक्स मैरिज अवैध?

आजतक में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मॉरिटानिया, ईरान, सोमालिया और उत्तरी नाइजीरिया के कुछ हिस्सों में सेम सेक्स मैरिज को लेकर बहुत सख्ती है. इन देशों में शरिया अदालतों में मौत की सजा तक का प्रावधान है… तो वहीं अफ्रीकी देश युगांडा में समलैंगिका विवाह का दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास और फांसी की सजा तक देने का प्रावधान है. 30 अन्य अफ्रीकी देशों में भी समलैंगिक विवाह पर बैन है. 71 देश ऐसे हैं, जहां जेल की सजा का प्रावधान है.

पीड़ा से संपन्नता तक

‘‘नई-नई दवाओं के आ जाने से बचने की संभावना में काफी सुधार हुआ है. मरीजों के पास अब कई विकल्प हैं. पहले जब मरीज मेरे पास कैंसर के कुछ खास स्टेज में आते थे तो उनके बचने की संभावना काफी कम होती थी, मैं पेलिएटिव केयर से शुरूआत किया करता था. लेकिन अब मैं उनसे कह सकता हूं कि इसके लिए दवा उपलब्ध है, जिससे मदद मिल सकती है.’’

-डॉ. चिराग देसाई

कंसल्टेंट ऑन्कोलॉजिस्ट एवं डायरेक्टर,

हीमेटो ऑन्कोलॉजिस्ट क्लीनिक,

वेदांता, अहमदाबाद

ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी जंग है जिसका सामना कोई भी नहीं करना चाहता. इसके बावजूद ना जाने कितने लोगों को रोजाना इस समस्या का सामना करना पड़ता है. ब्रेस्ट कैंसर से जंग लड़ने वाले मरीजों को कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियों से गुजरना पड़ता है. कैंसर रिसर्च में हुई प्रगति ने इस बीमारी की बेहतर समझ, जांच की उन्नत तकनीक और इलाज के बेहतरीन विकल्पों के साथ उपचार की राह में क्रांति ला दी है. इस क्षेत्र में हुई प्रगति ने ना केवल ब्रेस्ट कैंसर से लड़ने की क्षमता को मजबूत किया है और अनगिनत लोगों तथा उनके परिवारों को उम्मीद दी है, बल्कि उन्हें एक बेहतर जिंदगी जीने की ताकत भी दी है.

डॉ. चिराग देसाई, कंसल्टेंट ऑन्कोलॉजिस्ट एवं डायरेक्टर, हीमेटो ऑन्कोलॉजी क्लीनिक, वेदांता, अहमदाबाद का कहना है, ‘‘नई-नई दवाओं के आ जाने से बचने की संभावना में काफी सुधार हुआ है. मरीजों के पास अब कई विकल्प हैं. पहले जब मरीज मेरे पास कैंसर के कुछ खास स्टेज में आते थे तो उनके बचने की संभावना काफी कम होती थी, मैं पेलिएटिव केयर से शुरूआत किया करता था. लेकिन अब मैं उनसे कह सकता हूं कि इसके लिए दवा उपलब्ध है, जिससे मदद मिल सकती है.’’

अहमदाबाद की 69 वर्षीय स्त्रीरोग विशेषज्ञ, डॉ. प्रतिभा वी कंसगरा के लिए यह निदान, योद्धा के रूप में उनके सफर की शुरूआत थी. उन्हें अप्रैल 2019 में मैटास्टैटिक ब्रेस्ट कैंसर (स्तन के अलावा अन्य अंगों तक रोग का फैल जाना) होने का पता चला था. उन्हें काफी गहन कीमोथेरैपी से होकर गुजरना पड़ा और उनका रोग कम हो गया. हालांकि, जुलाई 2022 में सामान्य चेकअप के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि उनका कैंसर लौट आया है. वह कहती हैं, ‘‘यह विचार कि ‘मैं ही क्यों?’ कभी भी दिमाग में नहीं आया, क्योंकि मेरी बेटी भी कैंसर से जूझ रही थी और मुझे उसके साथ होना था,’’ दुर्भाग्य से इस बीमारी के कारण उन्होंने अपनी बेटी खो दी.

इलाज के उन्नत विकल्पों ने मरीजों के सर्वाइवल की संभावना बढ़ा दी है, इसके बारे में बताते हुए, डॉ. देसाई कहते हैं, ‘‘जब डॉ. प्रतिभा का कैंसर वापस लौटता नजर आया तो हमने उन्हें ट्रैस्टुजुमैब और पर्टुजुमैब के साथ कीमोथैरेपी दी. कीमोथेरैपी के छह सेशन के बाद, उनकी बीमारी पूरी तरह खत्म होती नजर आई. भले ही हमें अब उनके शरीर में यह रोग कहीं नहीं मिला, फिर भी हमने उस हिस्से को ही हटा दिया जहां कैंसर पनप रहा था, क्योंकि इस उपचार में बहुआयामी तरीकों की जरूरत होती है.’’

डॉ. देसाई के विचारों से सहमत,

डॉ. प्रतिभा कहती हैं, ‘‘पीएचईएसजीओ ने ना केवल मेरा समय बचाया, बल्कि साइड-इफेक्ट के लिहाज से भी इलाज की मेरी यात्रा को आसान बना दिया. इसके साथ ही वार्ड में लंबे समय तक भर्ती रहने की मेरी तकलीफ को भी कम कर दिया.’’

डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर को हराने के लिए नियमित रूप से चेक-अप करवाना जरूरी है. यह बात हैदराबाद की रहने वाली, 50 वर्षीय मरीज माधवी वरलवार के मामले में साफ नजर आती है. माधवी को जनवरी 2021 को कान का दर्द होना शुरू हुआ, जिसके साथ उन्हें रोज बुखार भी रहने लगा. उनके फिजिशियन को लगा कि उन्हें मलेरिया हो गया है. वह कहती हैं, ‘‘कई ब्लड टेस्ट किए गए, जिनमें गड़बडि़यां नजर आ रही थीं. कुछ और टेस्ट कराने के बाद मैटास्टैटिक ब्रेस्ट कैंसर का पता चला.’’

शारीरिक चुनौतियों के अलावा, मरीज भावनात्मक रूप से भी परेशान होने लगता है. निदान से लेकर उपचार तक की अनिश्चितताएं, संभावित साइड-इफेक्ट और उसके परिणाम, को लेकर डर हमेशा बना रहता है. काफी मरीजों को मास्टेक्टॉमी (स्तन को हटाना) से गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी शारीरिक बनावट बदल जाती है और यह भावनात्मक रूप से उन पर प्रभाव डालती है.

उपचार की इस यात्रा में समय बेहद महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. चिकित्सा परिसरों में घंटों, अन्य प्रकार के कैंसर मरीजों के साथ बिताना, ज्यादा कठिन और पीड़ादायक हो सकता है.

जामनगर की हितेश्वरीबा जडेजा के लिए, इलाज के दौरान समय और डर दोनों ही चीजें मौजूद थीं. उनके 2 बेटे और 1 बेटी है और कम उम्र ही उन्हें अपने मैटास्टैटिक कैंसर के बारे में पता चला था. उन्हें अपने स्तनों में दर्द महसूस होता था और वह सोचती थीं कि प्रसव के बाद स्तनपान कराने से शायद ऐसा हो रहा है. उनकी एक भाभी हैं जो स्त्रीरोग विशेषज्ञा हैं, उन्होंने कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी, जिससे उन्हें कैंसर होने का पता चला. वह कहती हैं, ‘‘मेरे पास सोचने का वक्त नहीं था. मु?ो अपने बच्चों के लिए हिम्मत रखनी थी.’’

कीमोथेरैपी का सफर

इन तीनों महिलाओं को कीमोथेरैपी के गहन सेशन और रेडिएशन थैरेपी से होकर गुरजना पड़ा. पीएचईएसजीओ जैसे नवीन समाधानों का पता चलने से पहले तक उन्होंने लगातार दु:ख सहा और संघर्ष करती रहीं.

माधवी बताती हैं, ‘‘जब मुझे कैंसर होने का पता चला था, तो पीएचईएसजीओ यहां उपलब्ध नहीं था. यूएस में रहने वाली मेरी बेटी ने मुझे इसके बारे में बताया था. जब यह भारत में लॉन्च हुआ तो मैंने अपने डॉक्टर से इस बारे में बात की. पीएचईएसजीओ की वजह से मेरे साइड इफेक्ट कम हो गए और मेरी जिंदगी बेहतर हो गई. आईवी इंजेक्शन से काफी दर्द होता है और कई बार नर्स को नसें भी नहीं मिलतीं. लेकिन, पीएचईएसजीओ कम पीड़ादायक है.’’

डॉ. देसाई कहते हैं, ‘‘कीमोथैरेपी में कीमोथैरेपी पोर्ट नाम का एक छोटा-सा इप्लांट किया जाने वाला डिवाइस मरीज की त्वचा के अंदर लगा दिया जाता है. लेकिन, पीएचईएसजीओ में सर्जरी की प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. किसी भी प्रकार की सर्जिकल प्रक्रिया से ना गुजरने की वजह से भी पीएचईएसजीओ एक आसान विकल्प है.’’

डॉ. प्रतिभा भी कहती हैं कि जब उनका पीएचईएसजीओ शुरू हुआ तो उनकी हालत में काफी सुधार आ गया. वह बताती हैं, ‘‘इससे काफी समय की बचत हुई. पहले मैं काफी कमजोर थी, थकान महसूस होती थी, बाल ?ाड़ने लगे थे और पाचन से जुड़ी बहुत ही गंभीर समस्याएं हो रही थीं. पीएचईएसजीओ के बाद, ये सारे साइड इफेक्ट कम हो गए.’’

माधवी कहती हैं, ‘‘टारगेट थैरेपी के साथ-साथ, कीमोथेरैपी के मेरे सात सेशन हुए. हर सेशन में लगभग 8 से 9 घंटे का समय लगता था और मेरे परिवार को मेरे साथ इंतजार करना पड़ता था. शुक्र है कि मेरे खानपान पर बहुत सारी पाबंदियां नहीं लगाई गई थीं और मुझे शक्कर कम करने के लिए कहा गया था. हर सेशन के बाद, मैं पूरी तरह पस्त हो जाती थी. मेरा पूरा स्वाद चला जाता था. मेरे लिए चबाना और निगलना काफी मुश्किल था. इसलिए, मेरी मां मेरे लिए सिर्फ रागी बॉल्स बनाया करती थीं.’’

इसके अलावा, कीमोथेरैपी से कई साइड इफेक्ट भी होते हैं, जैसे त्वचा संवेदनशील हो जाती है और शरीर का तापमान घटता-बढ़ता रहता है. हितेश्वरीबा का कहना है, ‘‘मैं कुछ भी टाइट नहीं पहन पाती थी, तो फिर मैंने ढीले-ढाले कॉटन के कपड़े पहनना शुरू किया. मैंने अपने फुटवियर में बदलाव करके कुशन वाले सैंडल्स पहनने शुरू किए. जब पहली बार मेरी बीमारी का पता चला तो कीमोथेरैपी के मेरे 4 सेशन हुए थे. स्तन हटाने के बाद, 2021 में कैंसर फिर लौट आया. मुझे कीमोथेरैपी के बहुत ही गहन सेशन से होकर गुजरना पड़ा, क्योंकि वह काफी फैल चुका था. मुझे कई साइड इफेक्ट भी हुए, जैसे गर्भाशय में काफी ब्लीडिंग हुई और बाल झड़ गए. मुझे अपना गर्भाशय भी निकलवाना पड़ा था.’’

हाल के वर्षों में एडवांस चरण वाले ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए बायोलॉजिकल थेरैपीज के रूप में काफी नए तरह के अणुओं को अनुमति मिलते हुए देखा गया है. ऐसा पाया गया कि इन थेरैपीज से इलाज का प्रभाव बढ़ सकता है और बचने की संभावना बढ़ सकती है. पिछले कुछ सालों में इन सारी महिलाओं को पीएचईएसजीओ जैसा उन्नत उपचार दिया गया.

उम्मीदों की कहानी

अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आईं इन तीनों महिलाओं की कहानी एक-दूसरे से जुदा हैं, लेकिन जीने की चाह इन तीनों को एक सूत्र में बांधती है. इनकी कहानियां हम सबके अंदर छिपे उस अद्भुत साहस का सबूत है और उनकी हिम्मत हम सबके लिए उम्मीद की एक किरण है.

हितेश्वरीबा एक मुस्कान लिए कहती हैं, ‘‘धीरे-धीरे मैंने बाहर जाना शुरू कर दिया है. कई बार मैं बच्चों को स्कूल छोड़ने जाती हूं. मेरे दोस्त बहुत अच्छे हैं और अक्सर मु?ासे मिलने आते हैं,’’ वहीं, डॉ. प्रतिभा जानती हैं कि उन्हें अपनी लड़ाई जारी रखनी होगी. वह कहती हैं, ‘‘मेरे पति, जो खुद भी एक डॉक्टर हैं, इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि मैं सही दवाई, सही समय पर लूं और एक हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करूं.’’

नियमित चेक-अप के महत्त्व पर जोर देते हुए, माधवी कहती हैं कि 30 की उम्र के बाद हर महिला को हर साल ब्रेस्ट कैंसर की जांच करवानी चाहिए. वे सपोर्ट ग्रुप और फोरम का भी समर्थन करती हैं. माधवी कहती हैं, ‘‘डॉक्टर्स पर काफी बो?ा है, क्योंकि उन्हें कई सारे मरीजों को देखना होता है. इसलिए, मरीजों के लिए ऐसे सपोर्ट ग्रुप होने चाहिए जो उन्हें दिलासा दे सके, साइड इफेक्ट के बारे में बता सके और उन्हें भरोसा दिला सके कि चीजें बेहतर हो जाएंगी. जब मेरी कीमोथेरैपी शुरू हुई थी तो मेरी स्किन काफी संवेदनशील हो गई थी और डॉक्टर ने बताया है कि यह उसका एक आम साइड इफेक्ट है. इसलिए, मरीजों को अपनी चिंताओं के बारे में बात करने के लिए फोरम में जाना चाहिए. इससे डर को कम करने और आत्मविश्वास लाने में मदद मिल सकती है.’’

इतना ही नहीं, डॉ. देसाई भी नियमित चेक-अप के महत्त्व पर जोर देते हैं. वह कहते हैं, ‘‘सेहतमंद रहने के लिए एक अच्छी लाइफस्टाइल, नियमित एक्सरसाइज और अच्छा भोजन जरूरी है. इसके अलावा, महिलाओं को नियमित चेक-अप करवाना चाहिए, ताकि कुछ बीमारियों का पता शुरूआती स्टेज में ही चल जाए.’’

इन साहसी महिलाओं का सफर हमें याद दिलाता है कि इंसानी जज्बा मुश्किल तूफानों से उबर सकता है. ये हमें सिखाती हैं कि हम अपनी अंदर की ताकत को जगा सकते हैं, दूसरों के प्यार और साथ पर भरोसा कर सकते हैं और एक योद्धा के रूप में और भी बेहतर इंसान के रूप में उभर सकते हैं. इसके अलावा, चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति ने उम्मीद की किरण दिखाई और जीने का एक नया जज्बा जगाया है.

Festival Special: प्यार का एहसास दिलाते उपहार

किसी को उपहार देने से आप के और उपहार पाने वाले के बीच एक बंधन बनता है. यह देने और लेने वाले के बीच के रिश्ते को मजबूत बनाता है. एक नए रिश्ते की शुरुआत या पुराने को मजबूत बनाने के लिए उपहार अकसर प्यार, आभार और खुशी की अभिव्यक्ति होता है.

अकसर हमें गिफ्ट चुनने में समस्या आती है क्योंकि सामने वाले की पसंद को समझना आसान नहीं होता. ऐसे में आप इन कुछ खास उपहारों के बारे में सोच सकते हैं:

यदि शादी तय हो गई है तो पार्टनर को स्पैशल फील कराने के लिए कैसे उपहार चुनें यह सवाल अकसर पुरुषों के मन में उठता है यानी लड़कियां क्या पसंद करती हैं इस बारे में विचार करना जरूरी है.

आइए, जानते हैं कि आप भावी जीवनसंगिनी/गर्लफ्रैंड/ दूर रह रही बहन आदि को फैस्टिवल्स के मौके पर किस तरह के उपहार दे सकते हैं:

  1. पर्स

लड़कियों को तरहतरह के पर्स या बैग का भी खूब शौक होता है. ऐसे में उन्हें एक प्यारा सा बैग या पर्स गिफ्ट करना अच्छा विकल्प हो सकता है. आजकल कई तरह के स्टाइलिश बैग्स मार्केट व औनलाइन उपलब्ध हैं. एक ट्रैंडी और फैशनेबल पर्स चुनिए जो सुंदर दिखने के साथसाथ उपयोगी भी हो.

2. रूम डिफ्यूजर

पूरे दिन की थकान के बाद जब कमरे में आते ही भीनीभीनी खुशबू मिलेगी तो किसी की भी थकान दूर हो सकती है. ऐसे में इस एहसास के लिए आप अपनी पार्टनर को डिफ्यूजर गिफ्ट में दे सकते हैं. उस की पसंद की खुशबू वाला ऐसैंशियल औयल और डिफ्यूजर का कौंबिनेशन एक बेहतरीन गिफ्ट हो सकता है. यह अरोमा थेरैपी की तरह काम कर के थकान के साथसाथ मूड को भी अच्छा कर सकता है.

3. कस्टम नेम रिंग

गर्लफ्रैंड को क्या गिफ्ट दें इस का एक बेहतरीन औप्शन है कस्टम नेम रिंग. यह आजकल चलन में तो है ही व प्यार जताने का एक अच्छा तरीका भी है. रिंग में आप अपनी पार्टनर के नाम के साथ अपने नाम का पहला अक्षर लिखवा कर उसे सरप्राइज दे सकते हैं. इसे दे कर गर्लफ्रैंड के दिल में आप अपना प्यार और ज्यादा बढ़ा सकते हैं.

4. ज्वैलरी केस

कई लड़कियां ज्वैलरी की शौकीन होती हैं. थोड़ीबहुत ज्वैलरी तो हर लड़की के पास होती है. ऐसे में अगर आप की पार्टनर भी ज्वैलरी रखती है तो उसे और्गेनाइज रखने के लिए ज्वैलरी बौक्स अच्छा विकल्प हो सकता है. आजकल कई तरह के डिजाइनर ज्वैलरी केस मार्केट व औनलाइन उपलब्ध हैं.

5. फैशनेबल ज्वैलरी

कुछ लड़कियों को फैशनेबल ज्वैलरी का शौक होता है. वे हमेशा ज्वैलरी कैरी करती हैं. अगर आप की गर्लफ्रैंड भी ??ऐसी है तो आप उसे फैशनेबल ज्वैलरी में चेन, ब्रेसलेट, रिंग या फिर इयररिंग गिफ्ट कर सकते हैं. इसे देख कर वह आप को और भी ज्यादा प्यार करने लगेगी.

6. पर्सनलाइज फोटो फ्रेम

यह आजकल काफी चलन में है. इस में आप अपनी पार्टनर की कोई अच्छी सी तसवीर लगा सकते हैं. सब से खास बात तो यह है कि आप कहीं भी रहते हों इसे औनलाइन कस्टमाइज करा सकते हैं और वह भी बड़ी आसानी से और कस्टमाइज होने के बाद यह आप की गर्लफ्रैंड तक पहुंच जाएगा. पर्सनलाइज फोटो फ्रेम दे कर आप उसे अपने करीब होने का एहसास करा सकते हैं.

7. थ्री डी लैंप

पार्टनर के लिए गिफ्ट के रूप में तो थ्री डी लैंप एक अच्छा औप्शन हो सकता है. मार्केट में इस के कई सारे डिजाइन उपलब्ध हैं. इस लैंप के जरीए आप उस से दूर हो कर भी उसे रोमांटिक एहसास करा सकते हैं. रात को सारी लाइट्स बंद करने के बाद इस की रोशनी बिलकुल आप दोनों के रिश्ते की तरह जगमगाएगी और चारों तरफ चमक बिखेरेगी. यह वाकई में आप की गर्लफ्रैंड के लिए एक खूबसूरत तोहफा होगा.

8. सैल्फ केयर ग्रूमिंग किट

जब आप किसी से प्यार करते हैं, तो उस का खयाल रखना भी आप की जिम्मेदारी होती है. ऐसे में उस की सेहत के साथसाथ उस की स्किन का ध्यान रखना भी जरूरी है खासकर जब बात लड़कियों की हो, तो आप उसे सैल्फ केयर किट दे सकते हैं. इस में आप उस की स्किन के अनुसार स्किन केयर प्रोडक्ट जैसे मौइस्चराइजर, टोनर, फेस वाश, क्लींजर और अन्य प्रोडक्ट्स चुन कर एक कौंबो कस्टमाइज गिफ्ट पैक करवा सकते हैं.

9. टैडीबियर

लड़कियों का नेचर सौफ्ट होता है इसलिए  उन्हें सौफ्ट टौएज बेहद पसंद आते हैं. हालांकि टैडीबियर बेहद सामान्य गिफ्ट है लेकिन यह भी सच है कि यह हरकिसी को पसंद आता है. अगर आप अपनी गर्लफ्रैंड को टैडीबियर गिफ्ट करते हैं तो वह बेहद खुश हो जाएगी.

10. ड्रैस

जूते और बैग की तरह ही लड़कियों को कपड़ों का भी खूब शौक होता है. ऐसे में अगर आप अपनी गर्लफ्रैंड को कुछ स्पैशल फील कराना चाहते हैं, तो आप उसे एक अच्छी सी ड्रैस गिफ्ट कर सकते है. आप चाहें तो उस के लिए कैजुअल ड्रैस, टौप, टीशर्ट, जींस, पाजामा, श्रग भी गिफ्ट में ले सकते हैं. जब भी वह आप की दी हुई ड्रैस पहनेगी तो आप को जरूर याद करेगी.

11. रीडिंग मैटीरियल

अगर आप की गर्लफ्रैंड को पढ़ने का शौक है तो आप उसे कुछ पढ़ने वाला मैटीरियल देने की सोच सकते हैं. आप उसे उस की पसंद की किताबें या मैगजीन गिफ्ट के तौर पर दे सकते हैं. इन पत्रिकाओं में महिलाओं और लड़कियों के काम की बहुत सी चीजें होती हैं और इन्हें वर्षों सहेजा जा सकता है.

12. घड़ी

एक वक्त था जब घड़ी सिर्फ टाइम देखने के लिए लोग पहनते थे लेकिन आजकल यह एक स्टाइल स्टेटमैंट बन चुका है. अगर आप की गर्लफ्रैंड को भी घड़ी पहनने का शौक है, तो उस के लिए यह एक अच्छा गिफ्ट औप्शन हो सकता है. अभी के वक्त में कई तरह की डिजाइनर घडि़यां जैस ब्रेसलेट डिजाइन, बैंगल डिजाइन के साथसाथ ड्रैस की मैचिंग बैल्ट वाली घडि़यां भी मार्केट व औनलाइन उपलब्ध हैं. इस से एक फायदा यह होगा कि वह आप के गिफ्ट का इस्तेमाल रोज करेगी और जब इसे पहनेगी तब आप को हमेशा याद करेगी.

12. मेकअप ट्रैवल बैग

ज्वैलरी की तरह ही लड़कियां मेकअप करना भी पसंद करती हैं. थोड़ाबहुत मेकअप का सामान हर लड़की अपने पास रखती है. यही वजह है कि वह जहां भी जाती है अपने साथ अपना मेकअप पाउच जरूर कैरी करती है. ऐसे में अगर आप अपनी गर्लफ्रैंड को मेकअप ट्रैवल बैग गिफ्ट करते हैं तो वह इसे देख कर बेहद खुश हो जाएगी. आजकल मेकअप पाउच कई आकारों व डिजाइनों में उपलब्ध हैं. इसे आसानी से यात्रा के दौरान बैग में रखा जा सकता है. इसे आप आसानी से किसी औनलाइन साइट या मार्केट से भी खरीद सकते हैं.

13. परफ्यूम

परफ्यूम भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. आप अपनी गर्लफ्रैंड की पसंद का परफ्यूम उसे गिफ्ट के तौर पर दे सकते हैं. उसे यह गिफ्ट देते वक्त आप कह सकते हैं कि इस परफ्यूम की भीनीभीनी खुशबू से आप उसे पहचान सकते हैं. वहीं उसे भी इस परफ्यूम से आप की याद आती रहेगी.

14. बैंगल बौक्स

लड़कियों को मेकअप बौक्स या ज्वैलरी बौक्स का शौक तो होता ही है, इस के अलावा अगर आप उन्हें बैंगल बौक्स गिफ्ट करते हैं तो वह भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. आजकल कई तरह के डिजाइनर बैंगल बौक्स मार्केट में उपलब्ध हैं. कुछ तो ऐसे होते हैं जिन्हें यात्रा के दौरान भी आसानी से बैग में कैरी किया जा सकता है.

15. मोबाइल

आज का जमाना मोबाइल फोन का है और यह प्यार करने वाले पार्टनर के बीच दूरियों को कम करने का जरीया भी है. गर्लफ्रैंड से फोन पर बातें न हों तो दिन पूरा ही नहीं होता है. ऐसे में अगर आप का बजट थोड़ा ज्यादा है तो मोबाइल गिफ्ट करना एक अच्छा औप्शन हो सकता है.

16. गौगल्स

गौगल्स चाहे लड़का हो या लड़की हर किसी की जरूरत है. बात करें लड़कियों की तो वे इस के कई सारे कलैक्शन रखना पसंद करती हैं. ऐसे में गौगल्स एक अच्छा गिफ्ट हो सकता है. यह किफायती होने के साथसाथ स्पैशल भी है. आप गर्लफ्रैंड की पसंद की डिजाइन का सनग्लास गिफ्ट कर सकते हैं.

17. दुपट्टा

दुपट्टा भारतीय परंपरा को दर्शाने के साथसाथ आजकल स्टाइल स्टेटमैंट भी बन चुका है. ऐसे में गर्लफ्रैंड को गिफ्ट देने के लिए दुपट्टा भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. आजकल आप को ऐसे कई दुपट्टे मिल जाएंगे जो सभी परिधानों पर सूट करते हैं खासकर मल्टी कलर, बांधनी दुपट्टे खूबसूरत लगते हैं और सब पर चलते हैं.

18. गिटार

कुछ लड़कियों को म्यूजिकल इंस्ट्रूमैंट्स का शौक होता है जिन में गिटार खास है. अगर आप की गर्लफ्रैंड को भी गिटार का शौक है या फिर वह काफी समय से गिटार सीखने की सोच रही है तो आप उसे यह गिफ्ट कर सकते हैं. आप चाहें तो अपनी गर्लफ्रैंड की पसंद के अनुसार उसे अन्य म्यूजिक इंस्ट्रूमैंट भी गिफ्ट में दे सकते हैं.

19. मेकअप किट

हर लड़की थोड़ाबहुत तो मेकअप करती ही है. ऐसे में अगर आप अपनी गर्लफ्रैंड को खुश करना चाहते हैं, तो मेकअप किट गिफ्ट कर सकते हैं. अगर आप की गर्लफ्रैंड को लाइट मेकअप पसंद है तो आप इस में उस की पसंद की लिपस्टिक, नेलपौलिश, काजल भी एड कर सकते हैं. यह उन के लिए बहुत उपयोगी गिफ्ट हो सकता है.

20. कस्टमाइज नैकलैस

यह वाकई में एक प्यारभरा तोहफा हो सकता है. यह अनोखा नैकलैस न सिर्फ आप की गर्लफ्रैंड को स्पैशल महसूस कराएगा, बल्कि गले में होने के कारण उसे हमेशा आप की याद भी दिलाएगा. आप उस के नाम का या फिर आप दोनों के नाम के पहले अक्षर का नैकलैस बनवा कर उसे यह स्पैशल गिफ्ट दे सकते हैं.

21. फिटनैस बैंड या स्मार्ट वाच

आजकल की बिजी जिंदगी में हरकोई अपनी फिटनैस का खास खयाल रखता है. इस में लड़कियां भी पीछे नहीं हैं. ऐसे में अगर आप की पार्टनर भी फिटनैस फ्रीक है तो आप उसे फिटनैस बैंड या स्मार्ट वाच गिफ्ट में दे सकते हैं. ऐसे में फिटनैस बैंड या स्मार्ट वाच में टाइम देखने के साथसाथ हृदय गति, औक्सीजन और फुट स्टैप्स का भी ध्यान रखा जा सकता है. साथ ही मोबाइल से कनैक्ट करने से कौल और मैसेज की सुविधा भी घड़ी में ही मिल जाती है. ऐसे में इस दौर में फिटनैस बैंड गर्लफ्रैंड को देने के लिए अच्छा तोहफा हो सकता है.

22. होम डैकोर

लड़कियों को घर सजाने का खूब शौक होता है. वे आए दिन होम या डैस्क डैकोर के लिए चीजें खरीदती रहती हैं. ऐसे में अगर आप की गर्लफ्रैंड को भी होम डैकोर से जुड़ी दिलचस्पी है तो आप उसे घर सजाने की चीजें गिफ्ट में दे सकते हैं. खूबसूरत कैंडल स्टैंड, फोटो फ्रेम, डैस्क और्गेनाइजर, कुशन, लाइट्स आप अपनी गर्लफ्रैंड के लिए गिफ्ट के तौर पर ले सकते हैं.

23. चौकलेट्स

रिश्ते की मिठास को बरकरार रखने के लिए आप अपनी गर्लफ्रैंड को उस की पसंद की चौकलेट गिफ्ट कर सकते हैं. आप चाहें तो इन उपहारों में कोई उपहार चुन कर चौकलेट के साथ उसे गिफ्ट कर सकते हैं. गिफ्ट को और स्पैशल बनाने के लिए आप खुद बनाया हुआ हैंडमेड कार्ड भी उन्हें बतौर गिफ्ट दे सकते हैं.

 अपने पति/भावी पार्टनर या बौयफ्रैंड के लिए कैसा हो उपहार

लड़कों को गैजेट्स बहुत पसंद आते हैं. इस दीवाली आप उन्हें मोबाइल हैंडसैट, कंप्यूटर सौफ्टवेयर, जीपीएस सिस्टम, एमपी 3 प्लेयर, हैडफोन आदि दे कर खुश कर सकती हैं. अगर वे किचन में भी थोड़ी दिलचस्पी रखते हैं तो उन्हें कोई आधुनिक उपकरण दे सकती हैं.

अगर फोटोग्राफी का बहुत शौक है तो कैमरा गिफ्ट कर सकती हैं. अधिकांश पुरुषों को घडि़यों का बहुत शौक होता है. इन में अलगअलग डिजाइन उपलब्ध हैं. अपने बजट और पसंद के अनुसार आप अपने पार्टनर के लिए मनचाही घड़ी ले सकती हैं.

पार्टनर के लिए अच्छे ब्रैंड के टीशर्ट और गौगल्स उपहार दे सकती हैं. कोई अच्छी पेंटिंग, पैन सैट या अपने हाथ की बनी मिठाइयां गिफ्ट कर सकती हैं. परफ्यूम भी दे सकती हैं. अगर आप के पार्टनर को कैश, कार्ड, आई कार्ड आदि संभालने में समस्या होती है, तो आप उन्हें एक वौलेट गिफ्ट कर सकती हैं. लड़कों के लिए गिफ्ट में वौलेट एक बहुत अच्छा विकल्प हो सकता है. ये कई रंगों और डिजाइनों में उपलब्ध हैं. आप अपनी पसंदानुसार चुनाव कर सकती हैं.

लड़कों के लिए गिफ्ट में गू्रमिंग किट ली जा जा सकती है. इस किट में बाल, चेहरे और दाड़ी के लिए वाश के साथ मौइस्चराइजर भी दिया गया है, जो रूखी त्वचा को नम रखने में मदद करेगा.

बौयफ्रैंड के लिए बर्थडे गिफ्ट में सनग्लासेज लिया जा सकता है. यह एक कूल गिफ्ट होगा, जिस का उपयोग आप के पार्टनर यात्रा के दौरान कर सकते हैं. इन्हें आप अपने बजट के अनुसार, अलगअलग डिजाइन और कलर में ले सकती हैं.

अपने बौयफ्रैंड को एक जैंटलमैन लुक देने के लिए आप उन्हें एक खूबसूरत सी टाई गिफ्ट कर सकती हैं. इस कौंबो में आप को टाई के साथ पौकेट स्क्वायर और कफलिंक भी मिलेंगे, जो उन के लुक को पूरा करेंगे. लड़कों के लिए गिफ्ट के रूप में यह एक सस्ता और सुंदर विकल्प हो सकता है.

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