अंतिम पड़ाव का सुख- भाग 2: क्या गलत थी रेखा की सोच

घर पहुंच कर उस ने अपनी भाभी से मेरा परिचय कराया. उस का नाम लता था. वह भी सुंदर थी, साथ ही सलीकेदार व्यवहार के कारण कुछ ही क्षणों में मुझ से घुलमिल गई.

मैं पूछना तो नहीं चाहती थी, पर रहा न गया. इसीलिए उस की भाभी से पूछ बैठी, ‘मौसीजी कहां हैं?’

‘वे बाजार गई हुई हैं,’ लता मुसकराती हुई बोली.

इतने में दरवाजे की घंटी बजी. लता एक झटके के साथ खुशीखुशी उठ खड़ी हुई. ‘शायद वे आ गए’ इतना कह कर वह दरवाजा खोलने चली गई.

‘रेखा, तुम?’ अपना नाम सुन कर सामने देखा.

‘सुधीर, तुम?’ सामने सुधीर को देख हैरान हो गई.

‘ये मेरे भैया हैं,’ सुमन परिचय कराते हुए बोली, ‘और सुधीर भैया, ये शीबा की बड़ी बहन हैं.’

‘तो तुम मेरी पड़ोसिन हो?’ सुधीर लता को ब्रीफकेस थमाते हुए बोला.

‘मैं नहीं, तुम मेरे पड़ोसी हो, क्योंकि बाद में तुम आए

हो. हम तो पहले से ही यहां रहते हैं.’

‘पर मैं ने सुना था, तुम्हारी शादी हो गईर् है और विदेश चली गई हो,’ सुधीर सोफे पर बैठता हुआ बोला.

‘जी हां, आप ने ठीक सुना. अभी महीनेभर से पीहर आईर् हुई हूं. पर, तुम्हें मेरे बारे में कैसे मालूम?’

‘भई, हम तो सभी दोस्तों के बारे में खबर रखते हैं. स्वार्थी तो लड़कियां होती हैं. जहां अपना सुख देखती हैं, वहीं चली जाती हैं. यहां तक कि मांबाप को भी छोड़ देती हैं.’

‘अच्छाअच्छा, अब चुप हो. लड़कियों की अपनी मजबूरियां होती हैं.’

‘हां भई, सारी मजबूरियां तो औरतों की ही होती हैं.’

‘बाप रे, आप लोगों ने तो लड़ना शुरू कर दिया,’ लता बोली, ‘आप लोग एकदूसरे को कैसे जानते हैं?’

‘हम दोनों एक ही कालेज में पढ़े हुए हैं,’ सुधीर उत्तर देते हुए बोला.

इतने में एक शख्स के आने से सुमन बोली, ‘दीदी, आप बातें करिए, मेरे तो टीचर आ गए. मैं पढ़ने जा रही हूं.’

मैं ने सिर हिला कर उसे स्वीकृति दे दी. फिर लता की ओर मुखातिब होते हुए बोली, ‘जानती हो, हम बिना झगड़े एक दिन भी नहीं बिता पाते थे.’

‘तुम्हारा अन्न जो हजम नहीं होता था,’ सुधीर हंसते हुए बोला.

‘पर तुम यहां कैसे?’

‘तुम तो जानती ही हो, मैं होस्टल में रह कर यहां पढ़ाई कर रहा था. बीकौम के बाद मैं ने सीए करना शुरू कर दिया. साथ ही एक बैंक में नौकरी भी

मिल गई. बस, मैं ने सब को यहीं बुलवा लिया. हमारी शादी को भी अभी 6 महीने ही हुए हैं. अब मुझे क्या मालूम था कि मैं तुम्हारे ही पड़ोस में रह रहा हूं.’

‘लता, मालूम है, सब सुधीर को ‘मां का भक्त’ कह कर पुकारते थे,’ मैं

उस की ओर देखते हुए बोली, ‘यह हमेशा कहता था कि मां जैसी ही पत्नी मुझे मिले.’

‘पर मैं तो उन जैसी नहीं हूं,’ लता ने व्यंग्यात्मक स्वर में कहा.

मुझे अपने ऊपर ही गुस्सा आया कि उस की मां के बारे में क्यों वार्त्तालाप छेड़ दिया.

लेकिन सुधीर ने बात संभालते हुए कहा, ‘तुम ने मेरी मां को देखा है?’

‘हां, एक दिन छत पर देखा था,’ मैं सामान्य स्वर में बोली.

‘तो यह उन की तरह ही सुंदर है कि नहीं.’

‘हां, है तो,’ मैं ने कहा.

लता अपनी तारीफ सुन शरमा गई.

‘इसे भी मां ने ही पसंद किया था, वरना तुम तो जानती ही हो, मेरी पसंद कैसी है,’ सुधीर हंसते हुए बोला.

‘हांहां, जानती हूं. तुम्हारी पसंद एकदम घटिया है.’

‘घटिया है, तभी तो तुम मेरी दोस्त बनीं,’ सुधीर ने चुटकी लेते हुए कहा.

‘क्या मतलब?’ मैं चीखते हुए बोली.

‘भई, आप लोग तो बहुत झगड़ते हैं. अब आराम से बैठ कर बातें करिए, मैं नाश्ता ले कर आती हूं,’ कहते हुए लता रसोई की तरफ चल दी.

लता के जाने के बाद सुधीर नम्रतापूर्वक बोला, ‘तुम लता की बातों का बुरा मत मानना. वह बहुत अच्छी है, पर कभीकभी अपना विवेक खो बैठती है. लेकिन इस में इस का कोई कुसूर नहीं है. परिस्थितियां ही कुछ ऐसी हो गई हैं कि…’

‘क्या बात है, सुधीर, तुम रुक क्यों गए?’

‘तुम ने मां के बारे में कभी कुछ सुना है?’ सुधीर हौले से बोला.

‘हां, सुना तो है,’ मैं नजरें नीची करती हुई बोली, ‘पर विश्वास नहीं हो रहा. तुम तो उन की बहुत तारीफ करते रहते थे कि कितने कष्टों से तुम्हें पालापोसा है.’

‘हां, यह सच है. हम दोनों भाईबहन छोटे थे, तभी पिताजी का देहांत हो गया. सभी रिश्तेदार पुनर्विवाह के लिए मां पर जोर देते, पर उन्होंने दृढ़तापूर्वक इनकार कर दिया था. सिलाई कर कर उन्होंने हमें पालापोसा. हमें अच्छी शिक्षा भी दिलाई. हम उन का सम्मान भी बहुत करते हैं, पर इन दिनों…’ कहते हुए सुधीर का गला रुंध गया.

‘वह व्यक्ति क्या करता है?’ मैं सीधे सुधीर से पूछ बैठी. कालेज के जमाने में हम काफी गहरे दोस्त थे, कोई बात एकदूसरे से छिपाते न थे.

‘व्यापारी है. यहीं अगले मोड़ पर उस की दुकान है. उस को देखता हूं तो खून खौल उठता है. जी तो चाहता है, उस का खून कर दूं, पर परिवार की तरफ देख मन मसोस कर रह जाता हूं,’ वह गुस्से से बोला.

‘उस के बच्चे भी होंगे?’

‘हां, एक है. पर वह भी जापान में बस गया है. वहीं उस ने शादी कर ली है.’

‘क्या मां के व्यवहार में भी कुछ बदलाव हुआ है?’

‘नहींनहीं, उन का व्यवहार हमारे प्रति पहले जैसा ही है. बदलाव तो हमारे दिलों में हुआ है. यों तो लता भी उन का काफी सम्मान करती है. उन दोनों में कभी अनबन भी नहीं हुई. हम ने शर्म व संकोच के कारण मां से कभी कुछ नहीं कहा, पर यह दिल ही जानता है कि हमारे अंदर क्या बीत रही है.’

कुछ पलों के लिए खामोशी छा गई. फिर मैं बोली, ‘तुम मां की शादी उस व्यक्ति से क्यों नहीं कर देते?’

‘क्या?’ सुधीर सोफे से उछल कर खड़ा हो गया.

‘तुम इतने हैरानपरेशान क्यों हो रहे हो? शांति से बात तो सुनो.’

‘शांति से बात सुनूं?’ सुधीर सिर हिलाते हुए बोला, ‘रेखा, तुम्हारा सिर फिर गया है. अमेरिका जा कर तुम पागल हो गई हो.’

‘इस में पागल होने की क्या बात है?’

‘और नहीं तो क्या? यह भारत है, तुम जानती हो न. यहां पश्चिमी सभ्यता की कोई जरूरत नहीं है.’

‘क्या हुआ, आप इतनी जोर से क्यों बोले?’ लता रसोई से आते हुए सुधीर से बोली.

‘रेखा की बात सुनो,’ सुधीर हाथ उचकाते हुए बोला, ‘कहती है, मां की शादी कर दो.’

‘क्या?’ अब उछलने की बारी लता की थी?

मैं सिर पकड़े थोड़ी देर बैठी रही. जब दोनों चुप हो गए तो मैं बोली, ‘अब थोड़े शांत हुए हो तो मैं कुछ बोलूं?’

‘कुछ क्या, तुम बहुत कुछ बोल सकती हो.’

‘अनुपमा’ एक्ट्रेस रुपाली गांगुली ने शेयर किया कास्टिंग काउच एक्सपीरिंयस

घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली ‘अनुपमा’ एक्ट्रेस रुपाली गांगुली इन दिनों काफी सुर्खियों में है. वे अपने सीरियल की वजह से लाइमलाइट में नहीं है बल्कि अपने इंटरव्यू की वजह से चर्चा का विषय बन गई है. रुपाली गांगुली ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कास्टिंग काउच एक्सपीरिंयस शेयर किया है. रुपाली ने बताया कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी कास्टिंग काउच की वजह से बना लीं थी.

सबसे स्ट्रेसफुल दिन थे वो- रुपाली

टीवी एक्ट्रेस रुपाली गांगुली ने मीडिया इंटरव्यू में बताया कि मेरे लिए वे दिन सबसे ज्यादा कठिन थे जब मैं घर में बैठी हुई थी. मैने 6.5 साल होममेकर का काम किया था. सबके जागने से पहले उठती थी. वो बात अलग थी कि किसी ने मुझे जल्दी उठने के लिए नहीं कहा था. मेरे पति तो मुझे बहुत पैम्पर करते है. लेकिन हमारी परवरिश ही ऐसी हुई थी. वे दिन मेरे जिंदगी के सबसे हेक्टिक और मेहनत वाले दिन थे. अब ये सारे काम मेरे पति करते है. आज वो होममेकर है, मैं बहुत ही गर्व महसूस करती हूं.

इस वजह से बनाई फिल्म इंडस्ट्री से दूरी

रुपाली ने आगे कहा, उस समय फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच था. हो सकता है कि कुछ लोग को इसका सामना नहीं करना पड़ा हो, लेकिन मेरे जैसे लोगों को इसका सामना करना पड़ा है. हालांकि, हमने ये विकल्प न चुनने का फैसला किया और फिल्म इंडस्ट्री का दूरी बनाने का फैसला कर लिया. हां, दूरी बनाने के बाद जब काम नहीं था तब छोटापन महसूस होता था, लेकिन आज मुझे गर्व महसूस होता है. ‘अनुपमा’ की वजह से मैनें जो मुकाम हासिल किया है मैनें हमेशा उसका सपना देखा था.

BB 17: अंकिता लोखंडे और ऐश्वर्या शर्मा की हुई भंयकर लड़ाई

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस 17 दर्शकों को बेहद पसंद आ रहा है. जबसे बिग बॉस 17 का आगज हो गया तभी से शो में लड़ाई झगड़े शुरु हो गए है. सलमान के शो में 17 कंटेस्टेंट्स ने एंट्री ली. वहीं इस शो में टीवी के दो स्टार कपल भी मौजूद है. नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा ने शानदार एंट्री की है. विकी जैन और और अंकिता लोखंडे भी शो में नजर आ रहे हैं.

कहा जा रहा था कि ये दोनों स्टार कपल बिग बॉस के घर में साथ मिलकर खेलेंगे. सोशल मीडिया पर इसका का अंदाजा पहले ही लगा लिया गया था, लेकिन शो में ऐसा दिख नहीं रहा. वहीं अब बिग बॉस के घर में अंकिता और ऐश्वर्या की लड़ाई भी हो गई, जिसे देख घर के सभी कंटेस्टेंट्स हैरान हैं.

अंकिता लोखंडे और ऐश्वर्या शर्मा की लड़ाई

दरअसल, जियो सिनेमा पर बिग बॉस 17 का लाइव दिखाया जा रहा है. इसी शो में बीते दिन ऐश्वर्या शर्मा और अंकिता लोखंडे के बीच भयानक लड़ाई देखने को मिली है. 24 घंटे लाइव में देखने को मिला कि अंकिता को ऐश्वर्या के बात करने के तरीके से परेशानी है और यही बात वह ऐश्वर्या शर्मा के मुंह पर बोल देती है. इस दौरान नील भट्ट भी बोलते हैं कि हमें लगा कि तुम दोनों (विक्की और अंकिता) हमारे साथ बात ही नहीं करना चाहते हो.

इस दौरान ऐश्वर्या शर्मा भी बोल देती हैं कि मुझे कभी फील ही नहीं हुआ है कि तुम मेरे साथ इनट्रैक्ट करना चाहती हो. इस बहसबाजी में ऐश्वर्या शर्मा अंकिता लोखंडे को इनसिक्योर भी बोल देती हैं, जिस वजह से ऐश्वर्या थोड़ा भड़क जाती है. हालांकि, दोनों की लड़ाई शांत हो जाती है और दोनों बाद में गले भी मिलती हैं.

 

अंकिता और नील- ऐश्वर्या को बिग बॉस ने दी थेरपी

बिग बॉस 17 के बीते एपिसोड में देखने को मिला कि बिग बॉस थेरेपी के लिए अंकिता लोखंडे को बुलाते है, उनको खेल का रास्ता दिखाते है. इसी के साथ में बीते एपिसोड में बिग बॉस ने नील और ऐश्वर्या को रास्ता दिखाया. माना गया था कि ये तीनों शो में धमाल करेंगे लेकिन अंकिता और नील- ऐश्वर्या को बिग बॉस में ठंडे पड गए. इसी वजह से बिग बॉस दे चुके है इन तीनों को थेरेपी.

Festival Special: फेस्टिवल में इन 7 फूड्स से बनाएं दूरी, नहीं पड़ेंगे बीमार

त्यौहारों के आते ही हमारा सेट रूटीन गड़बड़ाने लगता है और हम वो सब खाते हैं जो हमारे पेट और पाचन तंत्र पर दवाब बढ़ा देता हे. स्वाद के चक्कर में हम सेहत भूल जाते हैं. क्योंकि अपने मन-पसंद पकवानों का मजा लेने की भी पूरी छूट होती है. मगर नियंत्रण न रखा जाये, तो यह छूट  त्योहार के मजे को फीका भी कर सकती है. त्यौहारों के दौरान फिट रह कर ही सही मायने में इसका लुत्फ उठाया जा सकता है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और रोजाना 30 मिनट टहलना आपको फिट रखने के लिए कारगर उपाय है. त्योहारों के इस दौर में खाए जाने वाले अधिकतर व्यंजन अत्यधिक चीनी, चिकनाई और मैदा युक्त होते हैं. ऐसे में खानपान में सावधानी बरतना अनिवार्य है. यह बोलना जितना आसान है, उस पर अमल कर पाना उतना ही कठिन. विशेषकर उन लोगों को लिए जिन्हें डायबिटीज या फिर हाई ब्लड प्रेशर हो या जो लोग वजन कम करने की कोशिश कर रहे हों. आइए किन छोटे छोटे प्रयासों से हम त्‍यौहार में भी रख सकते हैं सेहत का ख्‍याल और त्‍यौहार पर रह सकते हैं फिट.

1. कोल्ड ड्रिंक्स

डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और वजन नियंत्रण केलिए कोल्ड ड्रिंक्स और कौफी नुकसानदेह होती है. न इन्हें पिएं और न ही दूसरों को पिलाएं. कोल्ड ड्रिंक्स की जगह आप नीबू पानी, नारियल पानी, जलजीरा जैसे पेय पदार्थों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

2. मीठा नमकीन

मीठे पकवान बनाने के लिए लो फैट युक्त दूध और शुगर फ्री का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से हम कुछ कैलोरीज तो कम कर सकते हैं परन्तु फिर भी हमें मात्रा पर ध्यान देना चाहिए. त्यौहार के अलावा अन्य दिनों में व्यंजनों को बनाने के लिए आप कम घी-तेल का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही त्योहार के दौरान भी घी-तेल का कम ही इस्तेमाल करें.

3. कैफीन प्रोडक्ट से बचें

त्योहारों के समय चाय, कौफी आदि का सेवन कम करें और जरूरी हो तो ग्रीन टी आदि का सेवन अधिक करें इनमें कैफीन कम मात्रा में होता है. नींबू, चीनी, नमक और पानी वाले इन ड्रिंक्स को आप आसानी से तैयार भी कर सकते हैं. इसे आपका पाचन तंत्र प्रभावित नहीं होता है.

4. फाइबर युक्त खाद्य इस्तेमाल करें

इन दिनों शौपिंग और लोगों से मिलने-मिलाने के दौरान घर से हमेशा पौष्टिक नाश्ता करके निकलें. इसके लिए फाइबर युक्त खाद्य सर्वोत्म हैं. इससे आपके शरीर में जरूरी प्रोटीन की पूर्ती होती है और पाचन चही रहता है. दही और फल आपकी ऊर्जा बढ़ाएंगे.

5. पकवान से बचें

त्योहार के समय में साधारण खाने के बजाए आप पकवान अधिक बनाते हैं. ऐसे में आप आटे में जौ, बाजरे के आटे को गेहूं के आटे के साथ मिक्स कर लें. ये हेल्दी भी होगा और आपको फिट भी रखेगा. इससे आपका स्वास्थ ठीक रहेगा, बल्कि लम्बे समय तक अपने बाल और त्वचा को चमकदार भी बने रहेंगे.

6. तैलीय पदार्थों के सेवन से बचें

त्योहार के दौरान घर में नमकीन, मठरी, शक्करपारे, चकली, कचौडियां आदि बनना आम होता है. डायबिटिक व ब्लड प्रेशर के मरीजों को ज्यादा तली-भुनी चीजों का सेवन न करने की सलाह दी जाती है. सामान्य रूप से भी इसका अधिक इस्तेमाल अच्छा नहीं है तो कम से कम ही खायें. बेहतर होगा इन चीजों को सोयाबीन या मूंगफली के तेल जैसे हल्के तेल में बनायें.

7. डेयरी प्रोडेक्ट का इस्तेमाल कम करें

जीहां त्योहारों में डेयरी उत्पादों जैसे देसी घी, मक्खन और दूध का इस्तेमाल बहुतायत में होले लगता है. इससे आपके पेट और पाचन तंत्र पर दवाब बढ़ जाता है बेहतर होगा इसका इस्तेमाल करें. फैट निकले दही और फैट फ्री औयल ही प्रयोग करें. डेयरी उत्पादों में कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जो सेहत के लिए ठीक नहीं है.

अनुभा दावर, मेकअप एंड फिटनेस एक्सपर्ट

Diwali Special: दिवाली पर यूं दिखें खास

त्यौहारो में अच्छा दिखने की चाहत भला किसको नहीं होती. यही तो वह खास दिन होता है जब महिलाओ और लड़कियों को सजने सवरने का मौका मिलता है. अभी दिवाली का त्यौहार आ रहा है. इस दिन अगर आप खूबसूरत व आकर्षक दिखना चाहती हैं तो ट्रेडिशनल मेकअप को ही चुने. आज हम आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताएंगे जिसकी मदद से आप घर पर ही आसानी से तैयार हो पायेंगी.

चेहरे का मेकअप

चेहरे का मेकअप सबसे अहम होता है. इसे सही तरह से करना बेहद जरुरी है. अपने चेहरे के मेकअप के होने के बाद ही आप अपने आंखों और होंठो का मेकअप कर सकती हैं. चेहरे पर मेकअप करने से पहले अच्छे से चेहरा धो ले. फिर कंसीलर की मदद से चेहरे के दाग धब्बे छुपाये. इसके बाद त्वचा के रंग से मेल खाता हुआ फाउंडेशन की एक परत चेहरे पर बेस के रूप में लगायें.

फाउंडेशन के ऊपर त्वचा के रंग से मेल खाता हुआ पाउडर लगाएं. इसे स्पंज या कौटन की मदद से लगाये ताकि यह चेहरे पर अच्छी तरह से एक सामान लगे. चेहरे के मेकअप के अनुसार अब चेहरे के टी-जोन यानी माथा-नाक, ठोड़ी और गालों पर ब्लशर लगायें. गालो के लिए पिंक और ब्राउन रंग का इस्तेमाल करे, और माथे और नाक पर लाइट गोल्डन रंग का इस्तेमाल किया जा सकता है.

आंखों के लिए मेकअप

अपनी आंखों को सुन्दर लुक देने के लिए आइलाइनर लगाये. आइलाइनर के लिए शिमरिंग ब्लैक या ब्लू दोनों बेहतर विकल्प है. पलकों को घनी व खूबसूरत बनाने के लिए आइलैशेज का प्रयोग किया जा सकता है. आइलैशज के ऊपर मस्कारा लगाएं. आंखों की पलकों पर अपने लीबाज से मैच करता हुआ आइशैडो लगाये. अगर आपको कलर्स के चयन में दिक्कत हो रही हो तो आप अपने कपड़ो के अनुसार गोल्डन या सिल्वर में से एक रंग चुन सकती हैं. अपने लुक को कंप्लीट करने के लिए काजल लगाना ना भूले.

लिपस्टिक से बनाये होंठ खूबसूरत

होंठो की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए लिपस्टिक का इस्तेमाल जरूर करें. लेकिन अक्सर देखा गया है की लिपस्टिक चुनने को लेकर महिलाये बहुत कंफ्यूज रहती है. कई बार तो लिपस्टिक का जो रंग उनकी दोस्त पर अच्छा लगता है, उन्हें लगता हे की वही रंग उनपर भी अच्छा लगेगा. जरूरी नहीं कि जो शेड सब पर अच्छा लगता है वो आपके ऊपर भी अच्छा लगे. इस बात का ख्याल रहे की हर किसी का स्किन टोन अलग होता है, इसलिए अपनी त्वचा के रंग के हिसाब से ही लिपस्टिक चुनें.

गोरे रंग वाले कोरल या डार्क रेड कलर का चयन करे, डार्क स्किन वाले बरगंडी और ब्राउन टोन के साथ रेड कलर भी लगा सकते है. अगर आपको आरेंज कलर पसंद है, तो उसे भी लगाया जा सकता है, यह आपके होंठो को नेचुरल लुक देता है.

बालो के लिए हेयर स्टाइल

पहले लड़कियां और महिलाये अपने बालो को खुला छोड़ना पसंद करती थी. लेकिन आजकल बालो का जुड़ा बनाने या फिर चोटी बनाने का ज्यादा प्रचलन है. अगर आपको अलग तरह की चोटी करना या जुड़ा बनाना नहीं आता है तो आप बना बनाया जुड़ा भी ले सकती है. मार्केट में आपको बालो के लिए कई एक्सेसरीज मिल जाएगी. जिस से आपके लुक में चार चांद लग जायेंगे.

Diwali Special: घर को ऐसे दें नया लुक

दीवाली सेलिब्रेशन के आने से पहले हर घर में सफाई, कलरिंग और डेकोरेशन होना शुरू हो जाता है, जिसके लिए हम कईं तरह की नई-नई ट्राय करते हैं. इसीलिए आज हम आपको दीवाली से पहले घर को कैसे रेनोवेट करें और कैसे नया लुक दें. इसके लिए कुछ नई टिप्स बताएगें, जिसे आप इस दीवाली ट्राय कर सकते हैं.

1. दीवारों को बनाएं वाटरप्रूफ

दीवारों में सीलन होने की एक मुख्य वजह है पेंट की खराब क्वालिटी, इसलिए दीवारों पर पेंट के लिए वाटरप्रूफ पेंट का इस्तेमाल करें. अपने पेंटर से कहें कि मौइश्चर मीटर का इस्तेमाल करे. इसके बाद दीवार में मौजूद छोटे-छोटे छेदों को पुट्टी से भर दें. पेंट से पहले किसी वाटर-रेसिस्टेंट प्रौडक्ट का इस्तेमाल करें.

2. स्टोन का ऐसे करें इस्तेमाल

अगर आप दीवार पर ईंट लगाने की जगह इंडियन स्टोन्स को चुनती हैं, तो इसके कई फायदे हैं. ईंटों के बीच में कुछ स्टोन्स लगा देने से दीवारों का लुक काफी आकर्षक हो जाता है. इससे आप दीवारों में होने वाली सीलन से बचती हैं और पेंट की झंझट भी कम हो जाती है.

3. दरवाजों में लगाएं कांच

कबर्ड में लकड़ी के दरवाजों की जगह कांच ट्राई कीजिए. इससे आपको बार-बार लकड़ी के दरवाजे पौलिश नहीं करवाने पड़ेंगे. कांच की वजह से कमरे को एक नया लुक भी मिलेगा और आपका घर खूबसूरत दिखेगा.

4. फैब्रिक्स का रखें ख्याल

घर में मौजूद फैब्रिक्स के साथ भी आप एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं. पर्दे, सोफा कवर, डाइनिंग चेयर्स के कवर, टीवी कवर, फ्रिज कवर, सबके साथ एक्सपेरिमेंट कर के देखिए. सारे पुराने फैब्रिक्स और शेड्स को बदल दें. घर बिल्कुल नया सा लगेगा.

5. लाइटिंग करें कुछ ऐसे

फैब्रिक्स के साथ-साथ घर में नयापन लाने के लिए घर की लाइटिंग्स को भी बदल सकती हैं. किसी अच्छे इंटीरियर डिजाइनर से सलाह लेकर अपने घर के नक्शे और दीवारों के अनुसार लाइट्स लगवाएं.

ग्लोइंग स्किन के लिए कोई उपाय बताएं?

सवाल-

मेरी त्वचा सांवली है और साथ ही औयली भी है, जिस की वजह से चेहरे पर रौनक नहीं दिखती. कृपया त्वचा की रंगत निखारने का कोई उपाय बताएं?

जवाब-

किसी का गोरा या काला होना जीन्स पर निर्भर करता है. फिर भी घरेलू उपायों से चेहरे की रंगत को थोड़ा निखारा जा सकता है. आप बेसन में दही व शहद मिला कर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं. पेस्ट के सूखने के बाद उसे पानी से मसाज करते हुए धो लें. बेसन जहां चेहरे के औयल को कम करेगा, वहीं शहद रैशेज होने से बचाव करेगा. इस के अलावा आप बादाम के पाउडर में मिल्क पाउडर और रोजवाटर मिला कर पैक बना कर चेहरे पर लगाएं. सूखने पर कच्चे दूध की सहायता से धो लें. यह पैक भी आप के चेहरे की रंगत को निखारने में मदद करेगा.

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सुंदर दिखने के लिए महिलाएं हमेशा से ही कुछ न कुछ नया इस्तेमाल करती रहती हैं. आज की दौड़ती- भागती जिंदगी में अक्सर महिलाएं अपने चेहरा का ध्यान नहीं रख पातीं, जिस कारण उनके चेहरे पर डस्ट जमने लगती है.

डस्ट को हटाने के लिए रोज-रोज फेशियल, ब्लीच नहीं किया जा सकता, लेकिन अब एक चीज है जिसके जरिए आप एकदम परफेक्‍ट दिख सकती हैं और वह है ‘स्क्रबिंग’. चेहरे की साफ-सफाई के लिए स्क्रबिंग एक बेहद अच्छा उपाय है. स्क्रबिंग से चेहरे की बेजान परत को आसानी से हटाया जा सकता है, साथ ही इससे स्किन में लचीलापन भी आता है.

अक्सर हम चेहरे की साफ-सफाई के लिए क्लिंजिंग, टोनिंग और मॉइश्‍चराइजर का प्रयोग करते हैं, लेकिन स्क्रबिंग के बिना चेहरे की साफ-सफाई अधूरी मानी गई हैं. चेहरे पर होने वाले पिंपल, ब्लैक हेड्स को भी स्क्रबिंग के जरिए हटाया जा सकता है.

मार्केट में अब बने बनाए स्क्रब मिलते है, जिनके प्रयोग से आप अपने चेहरे पर निखार ला सकती है. स्क्रबिंग को चेहरे पर अप्लाई करते समय ध्यान रखें कि इसे तब तक न उतारा जाए जब तक कि यह अच्छी तरह से सूख न जाए.

यदि आप चाहे तो अपने घर पर खुद भी स्क्रबिंग कर सकती है.

स्क्रबिंग के लिए आपको पहले पेस्ट बनाना होगा. इसके लिए एक छोटा चम्मच संतरे के छिल्के का पाउडर, एक छोटा चम्मच पिसा हुआ जौ का आटा, एक चम्मच पिसा हुआ दरदरा बादाम, एक छोटा चम्मच मसूर की दाल का दरदरा पाउडर, एक छोटा चम्मच चावल के दरदरे पाउडर को आपस में मिला लें. अब कोई सब्जी या फल को इस पेस्ट में मिला लें और चेहरे पर लगाएं. यदि आपकी स्किन ऑयली है तो स्क्रब में शहद मिला लें, उसके बाद इसे चेहरे पर अप्लाई करें.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Diwali Special: फैमिली के लिए बनाएं कस्टर्ड कसाटा

इस दीवाली आप कस्टर्ड कसाटा जरूर ट्राई करें. यह स्वादिष्ट होने के साथ साथ खाने में भी लाजवाब है.

सामग्री

1/3 कप कस्टर्ड पाउडर

1/3 कप चीनी

1/3 कप पानी

3 सफेद ब्रैड किनारे कटी हुई

3 कप दूध

2 बड़े चम्मच काजू

पिस्ता व बादाम कटे हुए

2 बड़े चम्मच टूटीफ्रूटी

विधि

दूध में ब्रैड भिगो अच्छी तरह मैश कर लें. कस्टर्ड पाउडर, चीनी और पानी मिला कर घोल तैयार करें. एक नौनस्टिक पैन में आंच पर अच्छी तरह घोटें. गाढ़ा बन जाए. तब इसे निकाल लें.

अब दूधब्रैड वाला मिश्रण आंच पर घोटें. थोड़ा सा गाढ़ा हो जाए तो उसे भी निकाल लें. कस्टर्ड पाउडर वाले मिश्रण को ब्रैड वाले मिश्रण में मिला कर चर्न करें ताकि एकसार हो जाए.

ठंडा करें फिर एक ऐल्यूमिनियम के बरतन जिस में आइसक्रीम जमाते हैं उस में ड्राईफू्रट और टूटीफ्रूटी डाल कर फ्रीजर में रख दें. 6-7 घंटों में कस्टर्ड कसाटा तैयार हो जाएगा.

तोहफा: भाग 3- रजत ने सुनयना के साथ कौन-सा खेल खेला

वहां पहुंच कर रजत एक सोफे में धंस गया उस ने सुनयना को अपनी गोद में ले कर उसे अपनी बांहों में भींच लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा. फिर बोला, ‘‘अगर तुम राजी हो जाओ तो यह घर हमारा ‘लव नैस्ट’ बन सकता है. हम दोनों यहां एक कबूतरकबूतरी की तरह गुटरगूं करेंगे.’’

सुनयना ने रजत की गिरफ्त से अपनेआप को छुड़ाने की कोशिश की तो रजत ने उसे और कस लिया, ‘‘क्यों न तुम मेरे साथ रशिया चली चलो. वहीं हनीमून मनाएंगे,’’

‘‘बगैर शादी के हनीमून?’’

‘‘फिर वही शादी की रट. तुम पर तो शादी का भूत सवार है. मैं तो सुनसुन कर बोर हो गया.’’

‘‘रजत तुम इस विषय में मेरे विचार भलीभांति जानते हो. मैं मध्यवर्गीय लड़की हूं. मेरी कुछ मान्यताएं हैं. मैं लीक से हट कर कुछ करना नहीं चाहती. मेरे मातापिता के दिए कुछ संस्कार हैं जिन्हें मैं नकार नहीं सकती. हम जिस समाज में रहते हैं उन के नियमों को मैं नजरअंदाज नहीं कर सकती. मु?ो लोकलाज का भय है, लोगों के कहने की चिंता है.’’

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि तुम्हें मुझ से ज्यादा औरों की परवाह है.’’

‘‘तुम मेरी बातों का गलत मतलब क्यों लगाते हो? तुम अच्छी तरह जानते हो कि मैं तुम्हें अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती हूं.’’

‘‘सच?’’

‘‘हां, चाहो तो आजमा कर देखो.’’

‘‘तुम सचमुच मुझ से बेइंतहा प्यार करती हो?’’

‘‘कहा तो. अब तुम्हें कैसे यकीन दिलाऊं. कहो तो अपना कलेजा चीर कर दिखा दूं, चाहो तो इस 8वीं मंजिल से कूद जाऊं.’’

‘‘ओ नो. तुम अपनी जान दे दोगी तो मेरा क्या होगा? तुम्हारा यह सुंदर शरीर बेजान हो जाएगा तो मैं कैसे जियूंगा?’’

‘‘तुम मेरा शरीर चाहते हो न? ठीक है, आज मैं अपनेआप को तुम्हें सौंपती हूं.’’

‘‘अरे…’’

‘‘हां रजत यह एक नारी की सब से बड़ी कुरबानी है. उस की अस्मत उस की सब से बड़ी पूंजी है. शादी के बाद वह अपना तनमन अपने पति को अर्पण करती है. उस की हो कर रहती है. मैं आज अपने उसूलों को ताक पर रख कर, आदर्शों को भुला कर, बिना फेरों के, बिना किसी शर्त अपनेआप को तुम्हारे हवाले करती हूं.’’

‘‘अरे सुनयना यह तुम्हें आज क्या हो गया है?’’

‘‘बस मैं ने तय कर लिया है. चलो उठो, तुम्हारा बैडरूम कहां है, वहां चलते हैं,’’ कह कर वह उठ खड़ी हुई और रजत का हाथ पकड़ कर खींचने लगी.

‘‘सुनयना तनिक रुको. मेरी बात सुनो. मैं सैक्स का भूखा नहीं हूं. मुझे लड़कियों की कमी नहीं है. मेरे पैसों की खनक से लड़कियां मेरी ओर खुदबखुद खिंची चली आती हैं और मेरे एक इशारे पर मेरे सामने बिछने को तैयार हो जाती हैं. अगर तुम सचमुच मुझ से प्यार करती हो तो तुम्हें कुछ और करना होगा.’’

‘‘बोलो मुझे क्या करना होगा?’’ सुनयना ने अधीर हो कर कहा.

‘‘जो कहूंगा वह करोगी?’’

‘‘कह तो दिया.’’

‘‘हूं जरा सोचने दो…हां सोच लिया. तुम मेरे दोस्त की हमबिस्तर बनोगी?’’

सुनयना स्तंभित हुई. वह अवाक रजत की ओर ताकने लगी.

‘‘रजत यह कैसा मजाक है?’’ उस ने कुढ़ कर कहा.

‘‘मजाक नहीं मैं बिलकुल सीरियस हूं.’’

‘‘लेकिन यह कैसी अजीब मांग है तुम्हारी. मैं तुम्हारी प्रेमिका हूं, तुम मुझे अपने दोस्त को सौंप रहे हो. मुझे अपने दोस्त की बांहों में देख कर तुम्हें बुरा नहीं लगेगा, जलन नहीं होगी?’’

‘‘नहीं, क्योंकि तुम मेरी रजामंदी से ही यह कदम उठाओगी.’’

‘‘और उस के बाद क्या तुम तुझे स्वीकार कर लोगे?’’

‘‘अवश्य.’’

‘‘क्या तुम्हें ऐसा नहीं लगेगा कि मैं अब पाकसाफ, अनछुई नहीं हूं, मेरा कौमार्य भंग हो चुका है?’’

रजत हंसने लगा, ‘‘डार्लिंग, तुम किस जमाने की बात कर रही हो पाकसाफ , अनछुई, दूध की धुली. आज के जमाने में इन घिसेपिटे शब्दों का कोई अर्थ नहीं. हमें जमाने के साथ चलना चाहिए.’’

‘‘तो तुम्हारे कहने के अनुसार आधुनिक होने का मतलब है बेशर्मी से इस के और उस के साथ जिस्मानी सबंध बनाना. फिर इंसान में और पशुओं में फर्क ही क्या रहा?’’

‘‘अब तुम से कौन माथापच्ची करे,’’ रजत ने झुंझला कर कहा, ‘‘तुम तो बाल की खाल निकालती हो.’’

‘‘ठीक है, उस दोस्त का नाम तो बताओ,सुनयना ने थोड़ी देर बाद कहा.

‘‘हां अब आईं तुम लाइन पर,’’ रजत कुटिलता से मुसकराया, ‘‘मेरे दोस्त का नाम है मोहित. तुम जानती हो उसे. हमारे कालेज में ही पढ़ता था और मेरा जिगरी दोस्त है वह. मरीन ड्राइव पर रहता है और आयकर विभाग में काम करता है. अगले हफ्ते उस का जन्मदिन है और मैं चाहता हूं कि तुम मेरी ओर से उस का तोहफा बन कर जाओ.’’

‘‘तोहफा?’’ उस की आंखें बरसने लगीं, ‘‘रजत, क्या तुम्हें मुझ में और एक बेजान वस्तु में कोई फर्क नहीं लगता? मैं एक हाड़मांस से बना जीव हूं. तुम मेरे सामने इतना घिनौना प्रस्ताव रख मेरे अहं को चोट पहुंचा रहे हो. मुझ पर तरस खाओ प्लीज, मेरा इतना कड़ा इम्तिहान न लो,’’ कह कर वह गिड़गिड़ाई लेकिन रजत ने उस की बातें अनसुनी कर दीं.

घर पहुंच कर वह उधेड़बुन में पड़ गई. रजन ने अपने प्रस्ताव से एक अजीब समस्या खड़ी कर दी थी. अब वह क्या करे? क्या रजत का कहना मान ले? वह रजत को समझ नहीं पा रही थी. शादी का मतलब होता है एकदूसरे के प्रति वफादार हो कर रहना. यहां रजत उसे अपने दोस्त की बांहों में ठेल रहा था. शादी के बाद यदि वह उस से कहेगा कि डार्लिंग आज मेरे दोस्तों का मनोरंजन कर दो, तो वह क्या करेगी?

अंतिम पड़ाव का सुख- भाग 1: क्या गलत थी रेखा की सोच

सुधीर का पत्र न जाने मैं ने कितनी बार पढ़ा होगा. हर बार एक सुखद सुकून का एहसास हो रहा था. फिर अपने वतन से आए पत्र की महक कुछ अलग ही होती है.

भारत से दूर अमेरिका में बसे मुझे करीब 3 साल हो गए. पत्र पढ़ने के बाद मुझे एक साल पहले की घटना याद आ गई जब मैं विवाह के बाद पहली बार भारत अपने पीहर गई थी. सप्ताहभर तो लोगों से मिलनाजुलना ही चलता रहा. रिश्तेदार मुझ से मिलने आते, पर मुझे सादे लिबास में देख कर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहते, ‘अरे, तुम तो पहले जैसी ही हो.’

तमाम रिश्तेदारों को आश्चर्य होता कि विदेश जाने के बाद भी मुझ में फर्क क्यों नहीं आया. मैं उन की बातों पर हंस पड़ती, क्या विदेश जाने से अपनी सभ्यता को कोई भूल जाता है. जहां जन्म हुआ हो, वहां के संस्कार तो कभी मिट ही नहीं सकते. अपनी मिट्टी

की महक मेरे मन में इतनी अधिक समाई हुई थी कि अमेरिका में रहते

हुए भी कभी भारत को पलभर भी न भुला पाई.

जब मेलमुलाकातों का सिलसिला कुछ कम हुआ तो एक शाम मैं छत पर टहलने चली गई. हर घर को मैं बड़े गौर से देख रही थी, कहीं कुछ बदलाव नहीं हुआ था. तभी मैं सामने के घर से एक अपरिचित महिला को कपड़े उतारते हुए देखने लगी. इतने में मां भी छत पर आ गईं. मैं उस महिला को देखती हुई उन से पूछ बैठी, ‘सुरेशजी के घर में मेहमान आए हैं क्या?’

‘अब तुम तो 2 साल बाद लौटी हो. तुम्हें इधर की क्या खबर?’ मां कपड़े उतारती हुई बोलीं, ‘सुरेशजी तो सालभर पहले ही यह मकान खाली कर चुके हैं. नए लोग आ बसे हैं. इन की लड़की सुमन हर रोज शीबा के पास आती है. शीबा की अच्छी दोस्ती है. रोज शाम को दोनों मिलती हैं. कभी वह आ जाती है तो कभी शीबा उस के घर चली जाती है,’ फिर वे मेरी ओर देख कर बोलीं, ‘अब नीचे चलो, मैं चाय बना देती हूं.’

‘थोड़ी देर में आती हूं,’ कहते हुए मैं छत पर टहलने लगी.

शीबा मेरी छोटी बहन का नाम है, उसी ने मेरा सुमन से परिचय कराया था. मेरी दृष्टि उस औरत पर ही टिकी रही. उस की उम्र 37-38 वर्ष के करीब होगी, पर सुंदरता अभी भी लाजवाब थी. देखने में अपनी उम्र से वह काफी छोटी लग रही थी. मैं तो उस की लड़की को नजर में रख कर अनुमान लगा रही थी कि जब उस की बेटी बीए में पढ़ रही है तो उस की उम्र यही होनी चाहिए. शायद यह औरत विधवा थी, तभी तो न माथे पर बिंदिया थी, न मांग में सिंदूर और न ही गले में मंगलसूत्र.

तभी पक्षियों का एक झुंड मेरे ऊपर से गुजरा. सुबह के थकेहारे पक्षी अपनेअपने घोंसलों की ओर जा रहे थे. आसमान साफ नजर आ रहा था. तभी मैं ने देखा, एक विमान धुएं की लकीर छोड़ता उड़ा जा रहा है. बच्चे अपनीअपनी पतंगों को वापस खींच रहे थे. सूर्य भी धीरेधीरे डूबता जा रहा था.

मां की आवाज सुन कर मैं सीढि़यां उतरने लगी. नीचे हाल में शीबा और सुमन टीवी देखते हुए पकौड़े खा रही थीं. मैं सुमन की ओर देखते हुए बोली, ‘तुम्हारी मां बहुत खूबसूरत हैं.’

‘हां, हैं, तो,’ सुमन ने बोझिल स्वर में कहा.

थोड़ी देर सुमन बैठी रही. शीबा की बातों का भी वह अनमने ढंग से उत्तर देती रही. कुछ क्षणों के बाद वह शीबा से बोली, ‘मैं घर जा रही हूं.’

शीबा ने उसे रोकने की कोशिश न की. उस के जाने के बाद मैं शीबा से पूछ बैठी, ‘क्या बात है, सुमन बुझीबुझी सी क्यों हो गई?’

‘तुम ने उस का मूड जो खराब कर दिया,’ शीबा ने उत्तर दिया.

‘मैं ने क्या कहा? मैं ने तो उस की मां की तारीफ ही की थी.’

‘तभी तो…’

‘क्या मतलब? अपनी मां की तारीफ से भी कोईर् नाराज होता है क्या?’

‘तुम अगर मां को कुछ नहीं बताओ तो मैं उस की मां के बारे में कुछ बताऊं,’ शीबा मेरे पास आ कर फुसफुसाते हुए बोली.

‘हांहां, बोलो,’ मैं अपनी जिज्ञासा रोक नहीं पा रही थी.

‘दरअसल, उस की मां का किसी से चक्कर है,’ शीबा हौले से बोली, ‘तुम मां को मत बताना, वरना वे मुझे सुमन से मिलने नहीं देंगी.’

‘मैं कुछ नहीं बताऊंगी. बेफिक्र रहो. पर यह बेसिरपैर की बातें मेरे सामने मत किया करो,’ मैं नाराज होते हुए बोली.

‘मैं सच कह रही हूं. सुमन ने खुद मुझे बताया था.’

‘अच्छा, क्या बताया था?’

‘यही कि उस की मां जब मंदिर जाती हैं तो 2 घंटे तक वापस नहीं आतीं और एक अधेड़ व्यक्ति से बातें करती रहती हैं.’

‘तुम ने कभी देखा है?’

‘मैं ने तो नहीं देखा, पर वही बता रही थी.’

‘और कौनकौन हैं उस के घर में?’

‘एक भाई है, जिस की शादी हो चुकी है. सब इसी घर में साथ रहते हैं.’

फिर मैं ने और अधिक बात बढ़ाना उचित न समझा. सोचा, हर घर में कुछ न कुछ घटित होता ही रहता है.

समय यों ही गुजरता गया. सुमन रोज आती थी. वह घर के सदस्य जैसी थी. मैं ने फिर कभी उस की मां का जिक्र उस के सामने नहीं छेड़ा. थोड़े ही दिनों में वह मुझ से भी काफी घुलमिल गई. मेरे वापस जाने में एक सप्ताह बाकी था. एक दिन मैं ने सोचा कि कुछ खरीदारी कर लूं. मैं शीबा से बोली, ‘चलो, आज बाजार चलते हैं. मुझे कुछ सामान खरीदना है.’

शीबा टैलीविजन देखने में मग्न थी. वह बोली, ‘दीदी, अभी बहुत बढि़या आर्ट फिल्म आ रही है. तुम सुमन को साथ ले जाओ.’

‘जब तुम ही चलने को तैयार नहीं हो तो सुमन कैसे जाएगी. वह भी तो फिल्म देखेगी,’ मैं नाराज होते हुए बोली.

‘नहीं दीदी, मैं चलती हूं,’ सुमन बोली, ‘मुझे आर्ट फिल्में पसंद नहीं. इन में सिर्फ समस्याएं दिखाई जाती हैं, जिन्हें सभी जानते हैं. कोई समाधान बताए तो बात बने.’

शीबा उस की पीठ पर एक मुक्का जमाते हुए बोली, ‘तुझे अच्छी नहीं लगतीं तो ज्यादा बुराई मत कर.’

हम दोनों 4 बजे तक खरीदारी करती रहीं. जब हम लौट रही थीं तो सुमन बोली, ‘दीदी, मेरे घर चलो न.’

‘अभी?’ मैं घड़ी देखते हुए बोली, ‘कल चलूंगी.’

‘नहीं, अभी चलिए न,’ वह जिद सी करती हुई बोली.

‘अच्छा, चलो,’ मैं उस के साथ चल पड़ी.

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