मां बनने पर सैक्स से दूरी क्यों

सुमन को लग रहा था कि उस की जिंदगी अब खत्म हो चुकी है. जिस आदमी से शादी करने के लिए उस ने अपने पूरे खानदान से लड़ाई मोल ली, जिस के लिए उस ने अपना शानदार कैरियर छोड़ दिया. अपना शहर छोड़ दिया, आज किसी और के साथ जिस्मानी संबंध बनाए बैठा है.

इस खुलासे ने सुमन को तोड़ कर रख दिया. अपनी दोस्त तसनीम से फोन पर अपना दुख सुना कर सुमन बहुत रोई. तसनीम सुमन की बचपन की दोस्त है. दोनों एकदूसरे से तमाम बातें शेयर करती हैं. सुमन और जगदीश ने जब परिवार वालों की मरजी के खिलाफ कोर्ट मैरिज की, तब भी गवाह के तौर पर तसनीम साथ खड़ी थी और जब सुमन ने उसे बताया कि जगदीश के संबंध किसी दूसरी औरत से हैं तो वह सहसा यकीन नहीं कर पाई.

एक बच्चे का बाप बनने के बाद जगदीश सुमन को धोखा कैसे दे सकता है? वह तो सुमन से बहुत प्यार करता है और अपने बच्चे पर तो जान छिड़कता है.

तसनीम ने सुमन से डिटेल में पूरी बात जाननी चाही तो सुमन ने बताया कि जगदीश के औफिस बैग की चोर पौकेट में उसे कंडोम का पैकेट मिला है, जबकि उन दोनों के बीच शादी के बाद कभी इस का इस्तेमाल नहीं हुआ.

दरअसल, सुमन को सब्जी वाले को खुले पैसे देने थे और उस के पास खुले पैसे नहीं थे. सुमन ने यह सोच कर जगदीश का बैग खंगाला कि किसी पौकेट से चेंज मिल जाए तो उस के हाथ कंडोम का पैकेट लग गया, जिसे देख कर उस के होश उड़ गए.

सुमन ने जगदीश के सामने वह पैकेट रख कर जवाब मांगा तो वह घबरा गया. उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. एकाएक चोरी पकड़े जाने से जगदीश हड़बड़ा उठा और तेजी घर से बाहर निकल गया. देर रात जब लौटा तो सुमन उस पर फट पड़ी. बात बहुत बढ़ गई तो जगदीश ने भी उस से कह दिया कि जब घर में खाना न मिले तो आदमी कहीं तो भूख शांत करेगा.

आखिर सुमन के सामने बात पूरी तरह साफ हो गई कि जगदीश का किसी अन्य औरत से संबंध है. कई दिन से दोनों के बीच बातचीत बंद है. रिश्ते में दरार पड़ गई है. जगदीश अपने 6 माह के बच्चे से भी अब उस तरह नहीं खेलता जैसे पहले खेलता था. सुमन जब रोरो के थक गई तब उस ने अपना दर्द तसनीम को बताया.

गलती किस की

तसनीम और उस के पति हारून ने जगदीश को अपने घर बुला कर बात की तो जो वजह सामने आई उस में सुमन की गलती ज्यादा लगी. दरअसल, प्रैगनैंट होने के बाद से ले कर डिलिवरी तक सुमन और जगदीश अपने होने वाले बच्चे को ले कर बहुत खुश और उत्साहित थे. दोनों ने उस के लिए खूब शौपिंग भी की थी. पूरी प्रैगनैंसी में जगदीश ने सुमन का भरपूर खयाल रखा.

इस बीच जगदीश ने कभी सुमन से सहवास की मांग नहीं की. मगर बच्चे के 6 महीने का होने के बाद भी सुमन पति से दूर ही रहती है. कभी थकान का बहाना तो कभी बच्चे की देखभाल का. वह जगदीश के साथ संबंध बनाने को तैयार ही नहीं है. आखिर जगदीश अपनी इच्छाओं को कब तक मारता. वह तंग आ कर एक सैक्स वर्कर के घर जाने लगा. इन्फैक्शन वगैरह से बचने के लिए उस ने कंडोम रखना शुरू कर दिया.

जब तसनीम ने सुमन से उस की सैक्स लाइफ के बारे में पूछा तो वह बोली, ‘‘बेबी होने के बाद मेरा मन ही नहीं होता. अजीब वितृष्णा सी हो गई है. एक तो बच्चा सारी रात जगाता है. फिर दिन में घर का काम और बच्चे का काम उसे इतना थका देता है कि मुझे ऊपर से सैक्स बहुत बो?ा दिखाई देता है.’’

तसनीम ने जब जगदीश की जरूरत उसे सम?ाई तो सुमन को भी इस बात का एहसास हुआ कि गलती उस की भी है. डेढ़ साल से ऊपर हो गया मगर एक बिस्तर पर होते हुए भी दोनों एकदूसरे से कितनी दूर हो गए हैं.

अनेक कारण हैं

सुमन जैसी कहानी कई महिलाओं की है. बच्चा होने के बाद बहुत सारी महिलाओं से सैक्स ड्राइव मंद पड़ जाती है. वैसे तो डाक्टर्स गर्भावस्था के दौरान भी सैक्स से नहीं रोकते हैं जब तक महिला को कोई मैडिकल परेशानी न हो. नौर्मल डिलिवरी के 2 महीने बाद स्त्री का शरीर सहवास के लिए तैयार हो जाता है, मगर अनेक महिलाएं बच्चा होने के बाद सैक्स से दूर हो जाती हैं और उन के पति अपनी शारीरिक जरूरत पूरी करने के लिए बाहर भटकने लगते हैं.

आखिर बच्चा होने के बाद औरत सैक्स के लिए उस तरह क्यों तैयार नहीं हो पाती है जैसे पहले होती थी. इस के अनेक कारण हैं. गाइनोकोलौजिस्ट डा. नीना बहल कहती हैं, ‘‘डिलिवरी के बाद औरत के शरीर में बहुत बदलाव आते हैं. नौर्मल डिलिवरी हो या सिजेरियन, मां के शरीर में खून और ताकत की काफी क्षति होती है. फिर इस समय महिलाओं को हारमोनल बदलाव के कारण डिप्रैशन भी महसूस होता है. इस की वजह से नई मांओं में सैक्स ड्राइव कम हो जाती है. आमतौर पर यह देखने को मिलता है कि शिशु को जन्म देने के बाद अधिकतर महिलाओं की सैक्स में इच्छा बिलकुल नहीं होती है.

जिन के 1-2 बच्चे हो चुके होते हैं वे जिंदगी की दूसरी जरूरतों जैसे बच्चों की परवरिश, उन की पढ़ाई, उन्हें स्कूल से लाना ले जाना, उन के खाने, कपड़े का ध्यान रखना आदि में ज्यादा इन्वौल्व हो जाती हैं क्योंकि उन के पति इन कामों में उन की कोई मदद नहीं करते हैं. वे सोचते हैं कि बच्चा पैदा करने और पालने की जिम्मेदारी सिर्फ पत्नी की है. ऐसे में पत्नी पति को वक्त नहीं दे पाती है.’’

शारीरिक बदलाव और समय की कमी के अलावा भी कई कारण हैं जो महिलाओं में सैक्स के प्रति अरुचि पैदा करते हैं जैसे:

  1. थकान

दिनभर और रात में भी बारबार जाग कर शिशु की देखभाल में लगे रहने की वजह से अकसर मांओं को हर वक्त शारीरिक और मानसिक थकान बनी रहती है. डिलिवरी के बाद महिलाएं अपनी जिंदगी में बाकी चीजों पर ध्यान नहीं देती हैं और सारा समय अपने नवजात की देखभाल में लगी रहती हैं. इस से मांओं की यौनइच्छा में कमी आती है. पति को यह बात सम?ानी चाहिए कि उस की पत्नी ही सिर्फ मां नहीं बनी है बल्कि वह भी बाप बना है तो बच्चे के प्रति उस की भी कुछ जिम्मेदारी बनती है. अगर बच्चे की थोड़ी देर पति भी देखभाल कर ले तो पत्नी को रिलैक्स होने के लिए कुछ समय मिल जाएगा.

2. डिप्रैशन

कई महिलाएं डिलिवरी के बाद डिप्रैशन का शिकार हो जाती हैं. प्रसव के बाद स्ट्रैस, ऐंग्जाइटी और थकान सब मिल कर महिला के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं. इस से महिला की यौनइच्छा में कमी आती है. डिलिवरी के बाद शरीर में आए बदलावों, हारमोन, शिशु की जिम्मेदारी और पति के साथ रिश्ते में थोड़ी दूरी आने की वजह से मानसिक स्ट्रैस तो बढ़ ही जाता है, कभीकभी यह गहरे अवसाद का रूप भी ले लेता है. इस का सीधा असर सैक्स लाइफ पर पड़ता है. औरत में सैक्स की इच्छा तभी होती है जब उस का मन हलका और उमंग से भरा हो, शरीर में ऊर्जा महसूस हो और अपने पति से उसे प्रेम हो.

3. हारमोनल बदलाव और ब्रैस्ट फीडिंग

डिलिवरी के बाद हारमोनल लैवल में बहुत बड़ा बदलाव आता है. ऐस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरौन जैसे हारमोन तेजी से गिरते हैं जिस से नैचुरल लूब्रिकेशन की प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है. इस से महिलाओं की यौनइच्छा में कमी आती है. ब्रैस्ट फीडिंग कराने वाली माताओं की यौनइच्छा में कमी आना आम बात है. ब्रैस्ट फीडिंग ऐस्ट्रोजन हारमोन बनाने को प्रभावित करता है और इस से महिलाओं में सैक्स के प्रति अरुचि पैदा होती है.

4. मोटापे की चिंता

प्रैगनैंसी के दौरान हर महिला का कम या ज्यादा वजन बढ़ता ही है. शरीर और लुक में आए इस बदलाव को देख कर अकसर महिलाएं टैंशन में रहती हैं. ऐसे मोठे थुलथुल शरीर को पति के सामने खोलने में उन्हें हिचकिचाहट होती है. वे इस चिंता में रहती हैं कि किस तरह जल्दी से जल्दी बढ़े वजन को घटा कर पहले जैसी शेप में आ जाएं. बढ़े वजन के कारण उन के मन में असुरक्षा और बौडी इमेज को ले कर चिंता घर कर लेती है. इस तरह के स्ट्रैस में होने पर भी सैक्स की इच्छा में कमी आती है.

अपनी सैक्स ड्राइव कम होने के संबंध में आप किसी ऐक्सपर्ट या फिर किसी सहेली की सलाह ले सकती हैं. इस बात का ध्यान रखें कि शिशु को जन्म देना एक खास एहसास है और इस के बाद आने वाले बदलावों में कोई बुरी बात नहीं है इसलिए अपने वेट या किसी और बौडी चेंज को ले कर चिंता करने की जरूरत नहीं है.

5. एकदूसरे को समझें

अगर महिलाएं खुद पर थोड़ा ध्यान दें, तो वे अपनी सैक्स लाइफ को फिर से पहले की तरह ऐंजौय कर सकती हैं. हारमोनल चेंज के कारण उत्पन्न अवसाद के लिए डाक्टर की सलाह पर दवा ली जा सकती है ताकि बदलाव पर कंट्रोल हो सके. इस के अलावा अपने पार्टनर से बात कर अपनी फीलिंग्स के बारे में बताएं. बच्चे की देखभाल में पति की भी मदद लें. पति को एहसास अवश्य कराएं कि बच्चे को पालना उनकी भी जिम्मेदारी है.

रात में बच्चे के रोने पर हर बार आप ही जागें यह जरूरी नहीं. आप का पार्टनर भी उठ कर बच्चे को सुला सकता है. इस से पति को आप की थकान का एहसास भी हो सकेगा.

इस तरह मिलजुल कर बच्चे की देखभाल करने से दोनों के बीच निकटता आएगी. आप एकदूसरे की फीलिंग्स से भी रूबरू होंगे और आप की सैक्स लाइफ पुन: पटरी पर लौट आएगी.

कोई उचित रास्ता: स्वार्थी रज्जी क्या अपनी गृहस्थी संभाल पाई?

‘‘मैं बहुत परेशान हूं, सोम. कोई मुझ से प्यार नहीं करता. मैं कभी किसी का बुरा नहीं करती, फिर भी मेरे साथ सदा बुरा ही होता है. मैं किसी का कभी अनिष्ट नहीं चाहती, सदा अपने काम से काम रखती हूं, फिर भी समय आने पर कोई मेरा साथ नहीं देता. कोई मुझ से यह नहीं पूछता कि मुझे क्या चाहिए, मुझे कोई तकलीफ तो नहीं. मैं पूरा दिन उदास रहूं, तब चुप रहूं, तब भी मुझ से कोई नहीं पूछता कि मैं चुप क्यों हूं.’’

आज रज्जी अपनी हालत पर रो रही है तो जरा सा अच्छा भी लग रहा है मुझे. कुछ महसूस होगा तभी तो बदल पाएगी स्वयं को. अपने पांव में कांटा चुभेगा तभी तो किसी दूसरे का दर्द समझ में आएगा.

मेरी छोटी बहन रज्जी. बड़ी प्यारी, बड़ी लाड़ली. बचपन से आज तक लाड़प्यार में पलीबढ़ी. कभी किसी ने कुछ नहीं कहा, स्याह करे या सफेद करे. अकसर बेटी की गलती किसी और के सिर पर डाल कर मांबाप उसे बचा लिया करते थे. कभी शीशे का कीमती गिलास टूट जाता या अचार का मर्तबान, मां मुझे जिम्मेदार ठहरा कर सारा गुस्सा निकाल लिया करतीं. एक बार तो मैं 4 दिन से घर पर भी नहीं था, टूर पर गया था. पीछे रज्जी ने टेपरिकौर्डर तोड़ दिया. जैसे ही मैं वापस आया, रज्जी ने चीखनाचिल्लाना शुरू कर दिया. तब पहली बार मेरे पिता भी हैरान रह गए थे.

‘‘यह लड़का तो 4 दिन से घर पर भी नहीं था. अभी 2 घंटे पहले आया और मैं इसे अपने साथ ले गया. बेचारे का बैग भी बरामदे में पड़ा है. यह कब आया और कब इस ने टेपरिकौर्डर तोड़ा. 4 दिन से मैं ने तो तेरे टेपरिकौर्डर की आवाज तक नहीं सुनी. तू क्या इंतजार कर रही थी कि कब सोम आए और कब तू इस पर इलजाम लगाए.’’

बीए फाइनल में थी तब रज्जी. इतनी भी बच्ची नहीं थी कि सहीगलत का ज्ञान तक न हो. कोई नई बात नहीं थी यह मेरे लिए, फिर भी पहली बार पिता का सहारा सुखद लगा था. मुझे कोई सजा-ए-मौत नहीं मिल जाती, फिर भी सवाल सत्यअसत्य का था. बिना कुछ किए इतने साल मैं ने रज्जी की करनी की सजा भोगी थी. उस दफा जब पिताजी ने मेरी वकालत की तब आंखें भर आई थीं मेरी. हैरानपरेशान रह गए थे पिताजी.

‘‘यह बेटी को कैसे पाल रही हो, कृष्णा. कल क्या होगा इस का जब यह पराए घर जाएगी?’’

स्तब्ध रह गया था मैं. अकसर मां को बेटा अधिक प्रिय होता है लेकिन मेरी मां ने हाथ ही झाड़ दिए थे.

‘‘चले ही तो जाना है इसे पराए घर. क्यों कोस रहे हो?’’

‘‘सवाल कोसने का नहीं है. सवाल इस बात का है कि जराजरा सी बात का दोष किसी दूसरे पर डाल देना कहां तक उचित है. अगर कुछ टूटफूट गया भी है तो उस की जिम्मेदारी लेने में कैसा डर? यहां क्या फांसी का फंदा लटका है जिस में रज्जी को कोई लटका डालेगा. कोई गलती हो जाए तो उसे मानने की आदत होनी चाहिए इंसान में. किसी और में भी आक्रोश पनपता है जब उसे बिना बात अपमान सहना पड़ता है.’’

‘‘कोई बात नहीं. भाई है सोम रज्जी का. गाली सुन कर कमजोर नहीं हो जाएगा.’’

‘‘खबरदार, आइंदा ऐसा नहीं होगा. मेरा बच्चा तुम्हारी बेटी की वजह से बेइज्जती नहीं कराएगा.’’

पुरानी बात है यह. तब इसी बात पर हमारा परिवार बंट सा गया था. तेरी बच्ची, मेरा बच्चा. पिताजी देर तक आहत रहे थे. नाराज रहे थे मां पर. क्योंकि मां का लाड़प्यार रज्जी को पहले दरजे की स्वार्थी और ढीठ बना रहा था.

‘‘समझ में नहीं आता सुकेश भी क्यों मेरी जराजरा सी बात पर तुनके से रहते हैं.’’

रज्जी अपने पति की बेरुखी का गिला मुझ से कर रही है. वह इंसान जो बेहद ईमानदार और सच्चा है. मैं अकसर मां से कहता भी रहता हूं. रज्जी को 24 कैरेट सोना मिला है. शुद्ध पासा सोना. और यह भी सच है कि मेरी बहन उस इंसान के लायक ही नहीं है जो निरंतर उस पासे सोने में खोट मिलाने का असफल प्रयास करती रहती है. लगता है उस इंसान की हिम्मत अब जवाब दे गई होगी जो उस ने रज्जी को वापस हमारे घर भेज दिया है.

‘‘इतना झूठ और इतनी दोगली बातें मेरी समझ से भी परे हैं. हैरान हूं मैं कि यह लड़की इतना झूठ बोल कैसे लेती है. दम नहीं घुटता इस का.’’

शर्म आ रही थी मुझे. कैसे उस सज्जन पुरुष से यह कहूं कि मुझ से क्या आशा करते हो. मैं तो खुद अपनी मां और बहन की दोगली नीतियों का भुक्तभोगी हूं.

‘‘आप ने इसे कैसे पाला है? क्या जरा भी ईमानदारी नहीं रोपी इस में?’’

लगभग रोने जैसी हालत थी सुकेश की उस पल. मैं उसे समझाबुझा कर घर से बाहर ले गया था. उस का मन पढ़ना चाहता था, विचित्र मनोस्थिति हो गई थी.

‘‘मैं तो डिप्रैशन का शिकार होता जा रहा हूं, सोम. मैं समझ नहीं पा रहा हूं इस लड़की को. हंसताखेलता हमारा परिवार इस के आने से छिन्नभिन्न हो गया है. कैसी बातें सिखाई हैं आप ने इसे. आप इसे समझाबुझा कर जरा सी तो इंसानियत सिखाइए. आप इसे सुधारने की कोशिश कीजिए वरना ऐसा न हो कि एक दिन मैं इस की जान ले लूं या अपनी…’’

सांस मेरी भी तो घुटती रही है आज तक. मेरी बहन है रज्जी. जब अपने खून की वजह से मैं सदा हैरानपरेशान रहा हूं तो सुकेश तो अलग खून है. अलग परवरिश. उस के लिए तो रज्जी एक सजा के सिवा और क्या होगी. हर साल राखी बांध कर रज्जी बहन होने की रस्म अदा करती रही है मगर मैं आज तक समझ नहीं पाया कि जरूरत पड़ने पर मैं इस लड़की की कैसे रक्षा कर पाऊंगा और इस ने मेरे सुख की कितनी कामना की होगी.

मेरी मां का वह मोह है जिस के चलते उन्हें रज्जी की बड़ी से बड़ी गलती भी कभी नजर नहीं आती. मेरे पिता मेरी मां को सही दिशा में लातेलाते हार गए और जिस पल उन्होंने अंतिम सांस ली थी उस पल मेरे कंधों पर इन दोनों की जिम्मेदारी डालतेडालते नजरों में एक असहाय भाव था, वही भाव जो सदा उन के होंठों पर भी रहा था कि पता नहीं कैसे तुम इन दोनों को सह पाओगे.

‘‘तू फिकर मत कर रज्जी, मैं मरी नहीं हूं अभी. सुकेश और उस के घर वालों को छठी का दूध न याद करा दिया तो मेरा नाम नहीं. रो मत बेटी.’’

स्तब्ध रह गया मैं. यह क्या कह रही हैं मां. रज्जी की भूलों पर परदा डाल कर सारा दोष सुकेश और उस के परिवार पर.

‘‘मेरी फूल जैसी बच्ची को रुला रहे हैं न वे लोग. उन की सात पुश्तों को न रुला दिया तो…’’

‘‘क्या करोगी तुम?’’ सहसा मैं ने सवाल किया.

चुप रह गई थीं मां. शायद इस धमकी के बाद उन्हें उम्मीद होगी कि मैं साथ चलने का आश्वासन दूंगा. मेरे सवाल की उन्हें आशा भी नहीं होगी.

‘‘और किस के पास जाओगी? क्या पुलिस में जा कर रिपोर्ट करोगी? क्या इलजाम लगाओगी सुकेश पर? यही कि वह अपनी पत्नी से ईमानदारी की आस रखता है. सच बोलने को कहता है और कहता है घर में राजनीति का खेल न खेले. रज्जी के सात खून भी माफ और सामने वाला सिर्फ इसलिए दोषी कि उस ने सांस जरा खुल कर ले ली थी या बात करते हुए उसे छींक आ गई थी.’’

मुंह खुला का खुला रह गया रज्जी और मां का.

‘‘जिस भंवर में आज रज्जी है उस की तैयारी तो तुम बचपन से कर रही हो. पिताजी इसी दिन से डर कर सदा तुम्हें समझाते रहे कि इसे इस तरह न पालो कि इस का भविष्य ही अंधकारमय हो जाए. मां, यह घर तुम्हारा है, यहां तुम्हारा राजपाट चल सकता है. तुम रज्जी को गलतसही जो चाहे सिखाओ मगर वह घर तुम्हारा नहीं है जहां रज्जी को सारी उम्र रहना है. इंसान भूखा रह कर जी सकता है, आधी रोटी से भी पेट भर सकता है मगर हर पल झूठ नहीं पचा सकता.

‘‘राजनीति एक गंदा खेल है जिस में कोई भी शरीफ आदमी जाना नहीं चाहता क्योंकि वह चैन से जीना चाहता है. इसी तरह सुकेश और उस का परिवार सीधासादा, साफसुथरा जीवन जीना चाहता है जिसे रज्जी ने राजनीति का अखाड़ा बना दिया है. जबजब गृहस्थी में दांवपेंच और झूठ का समावेश हुआ है तबतब घर उजड़ा है. रज्जी का घर बचाना चाहती हो तो इसे जलेबियां पकाना मत सिखाओ. गोलमोल बातें रिश्तों को सिर्फ उलझाती हैं.’’

मैं नहीं जानता कि मेरी बातों का असर था या अपना घर टूट जाने का डर, रज्जी स्वयं ही अपने घर वापस चली गई. रज्जी जैसा इंसान अपने अधिकार के प्रति बड़ा जागरूक होता है. पहले दरजे का स्वार्थी चरित्र जिस की नजर अपने अधिकार के साथसाथ दूसरे की चीज पर भी रहती है. सुकेश का फोन आया मेरे पास. पता चला रज्जी ने सब से माफी मांग ली है और भविष्य में कभी झूठ बोल कर घर में अशांति नहीं फैलाएगी, ऐसा वादा भी किया है. पता नहीं क्यों मुझे विश्वास नहीं हो रहा रज्जी पर. मेरी चाहत तो यही है कि मेरी बहन सदा सुखी रहे लेकिन भरोसा रत्ती भर भी नहीं है उस पर.

कुछ दिन आराम से बीत गए. सब शांत था, सब सुखी थे लेकिन दबी आग एक दिन विकराल रूप में सामने चली आएगी, यह किसी ने नहीं सोचा होगा, परंतु मुझे कुछकुछ अंदेशा अवश्य हो रहा था. पता चला सुकेश ने डिप्रैशन में कुछ खा लिया है. पतिपत्नी में फिर से कोई तनाव था. जब तक हम अस्पताल पहुंचते बहुत देर हो चुकी थी. सुकेश बेजान कफन में लिपटा सामने था.

आत्महत्या का केस था जिस वजह से पोस्टमार्टम जरूरी था. रज्जी ने विलाप करते हुए जो कहानी सब को सुनाई उस से तो सुकेश के मातापिता और ननद हक्केबक्के रह गए. रज्जी ने बताया कि उस की ननद चरित्रहीन है जिस की शरम में उस का पति जहर खा कर मर गया. बेटा तो गया ही गया बच्ची का मानसम्मान भी रज्जी ने धूल में मिला दिया. जीतेजी मर गया वह परिवार. मेरी मां ने भी दिल खोल कर रज्जी की ननद को कोसा.

शोक के साथसाथ बदहवास था सुकेश का परिवार. सत्य क्या होगा मैं समझ सकता हूं. बुरा हो मेरी मां का, मेरी बहन का जिन्हें झूठ बोलने से जरा भी डर नहीं लगता. मरने वाले की मिट्टी का इस से बड़ा अपमान, इस से बड़ा मजाक क्या होगा जिस की आत्महत्या का रंग उस की निर्दोष बहन के चेहरे पर कालिख बन कर पुत गया.

ऐसा क्या किया सुकेश ने? आत्महत्या क्यों की? मारना ही था तो रज्जी को मार डालता. सुकेश का दाहसंस्कार हुआ और उसी चिता में मेरा, मेरी मां और बहन के साथ जन्मजात रिश्ता भी जल कर राख हो गया. अच्छा नहीं किया रज्जी ने. अपना घर तो जलाया, अपनी ननद का भविष्य भी पाताल में धकेल दिया. श्मशान भूमि में खड़ा मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि कहां जाऊं? मेरा घर कहां है? क्या वह मेरा घर है जहां मेरी विधवा मां, विधवा बहन रहती है जिन के साथ हर किसी की सहानुभूति है या कहीं और जहां मैं अकेला रह कर चैन से जीना चाहता हूं?

सच्चा भय था मेरे पिता की आंख में जब उन की मृत्यु हुई थी. सच है, मैं इन दोनों के साथ नहीं जी सकता. नहीं रह पाऊंगा अब मैं इन दोनों के साथ. किसी के हंसतेखेलते परिवार से उन का जवान बेटा छीन कर उस के परिवार का तमाशा बना दिया, कौन सजा देगा इन दोनों को? किसी भी परिवार के अंदर की कहानी भला कानून कैसे जान सकता है जो इन्हें कोई सजा मिले. सजा तो मिलनी चाहिए इन्हें, किसी का सहारा छीना है न इन्होंने, अब इन का भी सहारा छिन जाए तो पता चले आग का लगना, घर का जलना किसे कहते हैं.

सुकेश की पीड़ा मेरी पीड़ा बन कर मेरा भीतरबाहर सब जला रही है. मैं उस से आंखें कैसे मिलाऊं? क्या होगा उस की बहन का, क्या होगा उस के मांबाप का?

औफिस के काम के बहाने मैं कितने ही दिन अपने घर नहीं गया. अपने अभिन्न मित्र के घर पर रहने लगा जो मेरी सारी की सारी समस्या समझता था. कुछ दिन बीत गए. मेरे घर हो कर आया था वह.

‘‘सुकेश के मातापिता का गुजारा तो उन की पैंशन से हो जाएगा लेकिन तुम्हारी मां का क्या होगा? अब तो रज्जी भी वापस आ गई है. सुकेश के घर वालों ने उसे वापस नहीं लिया. शहरभर में उन की बेटी की बदनामी हो रही है और तुम सचाई से मुंह छिपाए मेरे घर पर रह रहे हो?’’

‘‘सचाई क्या है, यह सारा शहर जानता है. सचाई तो वही है जो रज्जी ने सब को दिखाई है. मेरी मां जो कह रही हैं, दुनिया तो उसी को सच कह रही है. मैं किस सचाई से मुंह छिपाए बैठा हूं, क्या तुम नहीं जानते हो? सुकेश की बहन बदनाम हो गई मेरे परिवार की वजह से. मैं तो इस सचाई से नजरें नहीं मिला रहा. वह सीधीसादी सी मासूम लड़की सिर्फ इस दोष की सजा भोग रही है कि रज्जी उस की भाभी है. क्या कुसूर है उस का? सिर्फ यही कि वह सुकेश की बहन है.’’

‘‘एक बार दोनों परिवारों से मिलो तो, सोम. दोनों की सुनो तो सही.’’

‘‘अपने परिवार की तो कब से सुन रहा हूं. बचपन से मैं ने भी वही भोगा है जो सुकेश और उस का परिवार भोग रहा है. अपनी मां और अपनी बहन की नसनस जानता हूं मैं. सुकेश ने इतना बड़ा कदम क्यों उठा लिया, वह उस के परिवार से ज्यादा कौन जानता है? मेरी तो वे सूरत भी देखना नहीं चाहेंगे. तुम सुकेश के मित्र बन कर वहां जाओ, पता तो चले क्या हुआ. मेरा एक और काम कर दो, मेरे भाई.’’

मान गया वह. औफिस के बाद वह सुकेश के घर से होता आया. मेरी तरह वह भी बेहद बेचैन था. बोला, ‘‘रज्जी को तो राजनीति में होना चाहिए था, कहां आप लोगों ने उस की शादी कर दी.’’

सांस रोक कर मैं ने उस की बात सुनी. वह आगे बोला, ‘‘कुछ दिन से सब ठीक चल रहा था. बड़े प्यार से रज्जी ने सब के मन में जगह बना ली थी. सीधासादा परिवार उस की सारी आदतें भुला कर उस पर पूर्ण विश्वास करने लगा था. सुकेश की बहन का सारा गहना उस ने अपने लौकर में रखवा लिया था. सुकेश की मां ने भी अपनी सारी जमापूंजी बहू को यानी रज्जी को दे दी ताकि वह ठीक से संभाल सके.

‘‘कुछ दिन पहले उन्हें किसी शादी में जाना था. ननद, भाभी लौकर से गहने निकालने गईं. वापसी पर ननद किसी काम से अपने कालेज चली गई. कुछ विद्यार्थी एक्स्ट्रा क्लास के लिए आने वाले थे. लगभग 3 घंटे बाद जब वह घर आई तो हैरान रह गई, क्योंकि रज्जी ने घर वालों को बताया कि गहने उस के पास हैं ही नहीं. घर में बवाल उठा. सारा का सारा इलजाम उस की ननद पर कि वही सारे के सारे गहने समेट कर किसी के साथ भाग जाने वाली है. तनाव इतना बढ़ गया कि सुकेश ने कुछ खा लिया.’’

‘‘कालेज में प्राध्यापिका है वह. पढ़ीलिखी सुलझी हुई लड़की. उसे भला भागने की क्या जरूरत थी. भागना तो रज्जी को था सब समेट कर. कुछ ऐसा होगा, इस का अंदेशा था मुझे लेकिन सुकेश आत्महत्या कर लेगा, यह नहीं सोचा था. सुकेश रज्जी की वजह से डिप्रैशन में रहने लगा था कुछ समय से. सच पूछो तो इंसान डिप्रैशन में जाता ही तब है जब उस के अपने उस के साथ धोखा करते हैं या उसे समझने की कोशिश नहीं करते. बाहर वालों की गालियां भी खा कर इंसान इतना विचलित नहीं होता जितना अपनों की बोलियां उसे परेशान करती हैं. परिवार में एक स्वस्थ माहौल की जगह लागलपेट और हेराफेरी चले तो इंसान डिप्रैशन में ही तो जाएगा. ऐसा इंसान आखिर करेगा भी तो क्या?’’

‘‘अब क्या करेगा तू, सोम?’’

समझ नहीं पा रहा हूं, क्या करूं? पर इतना सच है कि मैं रज्जी और मां के साथ नहीं रह पाऊंगा. मेरा जीवन एक दोराहे पर आ कर रुक गया है. दोराहा भी नहीं कह सकता. एक चौराहा समझो. मां और रज्जी के साथ रहना भी नहीं चाहता, सुकेश का परिवार मेरी सूरत से भी नफरत करेगा, आत्महत्या को कायरता समझता हूं और चौथा रास्ता है घर से दूर का तबादला ले कर इन दोनों को ही पीठ दिखा दूं. क्या करूं? पीठ ही दिखाना ठीक रहेगा. लड़ नहीं सकता.

कुछ रिश्ते इस तरह के होते हैं जिन से लड़ा नहीं जा सकता, जिन से न हारा जाता है न ही जीतने में खुशी या संताप होता है. इन से दूर चला जाऊं तो क्या पता इन्हें सुकेश के मांबाप की पीड़ा का जरा सा एहसास हो. क्या करूं, मैं समझ नहीं पा रहा, कोई भी रास्ता साफसाफ नजर नहीं आता. क्या आप बताएंगे मुझे कोई उचित रास्ता?

मौनसून की सीलन से बचने के लिए ट्राय करें ये 7 टिप्स

मौनसून में घर का ख्याल सबसे जरूरी होता है, क्योंकि बीमारियों की शुरूआत घर से ही होती है. बारिश से घर में नमी हो जाती है, जिससे फर्नीचर, सोफा के कवर, ज्वैलरी, गैजेट्स और इलेक्ट्रौनिक सामान का खराब होने का खतरा रहता है. पर थोड़ी सावधानी रखकर आप अपने घर के सामान को सीलन से बचा सकते हैं. इसीलिए आज हम आपको बारिश के मौसम में कैसे अपने घर की अलग-अलग चीजों की सुरक्षा करें इसके बारे में टिप्स के बारे में बताएंगे…

1. कपड़े और अलमारी का ख्याल है सबसे जरूरी

बारिश के मौसम में कपड़ों को पूरी तरह से सुखाना एक आम समस्या है, जो ज्यादातर घरों के लोग झेलते हैं. अगर कपड़े अच्छी तरह से नहीं सूखते हैं तो उनसे अजीब तरह की बदबू आती है, जो अगली धुलाई तक नहीं जाती. अपनी अलमारी को नमी मुक्त रखने के लिए उसमें कपूर की गोलियां रखें, जो नमी सोखती हैं.

बारिश में आप अपनी अलमारी साफ नहीं रखते हैं तो उसमें फफूंद लग सकता है, जिससे अलमारी से तेज बदबू आने लगती है. दाग-धब्बे हमेशा साफ करते रहें. अलमारी में कपड़े तभी रखें, जब वे अच्छी तरह से सूख जाएं.

2. मौनसून में दीमक से बचाएं लकड़ी के फर्नीचर

कीड़े-मकोड़े और दीमक बारिश के दिनों में बड़ी समस्या होते हैं. कपूर की गोलियों, लौंग और नीम की पत्तियों के जरिए आप इन्हें दूर रख सकते हैं. अगर आप इस मौसम में नया फर्नीचर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो फफूंद और दीमक रोधी फर्नीचर ही लें.

अगर आप कुछ दिनों के लिए घर से बाहर जा रहे हैं तो फर्नीचर को प्लास्टिक के कवर से ढक दें, ताकि उनमें नमी न लगे. फर्नीचर को साफ रखना भी बेहद जरूरी है. तापमान में होने वाले बदलावों और नमी से उनकी सुरक्षा करने के लिए आप ग्लिसरीन और मिट्टी के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर लकड़ियां पानी से फूल जाती हैं तो एसिटोन का इस्तेमाल करें. यह पानी जल्दी सोख लेता है. लकड़ी की चीजों को पोंछने के लिए सूखे कपड़े का प्रयोग सुनिश्चित करें

3. जूते-चप्पल की रैक में लगाएं बल्ब

समय-समय पर जूते-चप्पलों की अलमारी की सफाई करते रहें. जूते-चप्पल बड़ी मात्रा में नमी सोखते हैं और इन्हें गीला पहनने पर पैरों में संक्रमण होने का खतरा रहता है. अलमारी में कम पावर का बल्ब लगाएं, ताकि उससे निकलने वाली गर्मी जूते-चप्पलों से नमी सोखती रहे.

4. पर्दे और कालीन को रखें क्लीन

बारिश के मौसम में कालीन का इस्तेमाल न करें. उन्हें मोड़कर अलमारी में रख दें. हालांकि अगर आपको वाकई कालीन के इस्तेमाल की जरूरत महसूस होती है तो उन्हें सूखा रखने कोशिश करें. कालीन पर चलने से पहले पैर अच्छे से पोंछ लें.

अगर आपकी कालीन पर धूल-मिट्टी लग जाए तो उसे ब्रश से अच्छे से झाड़ें और धोएं. परदों को मोड़कर डोरी से बांध दें. गीला होने पर उनसे तेज बदबू आ सकती है. साथ ही यह बीमारियों को भी दावत दे सकता है. पर्दों पर धूल-मिट्टी जम जाती है, इसलिए समय-समय पर उन्हें धुलते रहें. धूप निकलने पर पर्दे, कालीन और रग को बाहर जरूर सुखाएं

5. अच्छी क्वौलिटी के चमड़े के सोफा कवर लगाएं

सोफे पर अच्छी क्वालिटी के चमड़े के कवर लगवाएं. 15 दिन में एक बार कवर को अच्छी तरह से साफ करें. उन्हें सूखे-मुलायम कपड़े से पोंछें. कवर चमकाने के लिए मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करें. रूई का एक टुकड़ा लें और मॉश्चराइजर में डुबोकर कवर को अच्छी तरह से पोंछें. चमड़े के कवर में फफूंद न लगे, इसके लिए साल में दो से तीन बार उन्हें डेटौल और पानी से धोएं

6. मौनसून में रखें ज्वैलरी का ख्याल

नकद और सोने, चांदी व अन्य धातु की वस्तुओं को रूई में लपेटकर साफ पन्नी में रखें. मानसून में चांदी के गहने अक्सर काले पड़ जाते हैं. उनकी चमक बनाए रखने के लिए बटर पेपर का इस्तेमाल करें. बाद में उसे एब्रेसिव लिक्विड से भी साफ कर सकते हैं.

7. होम गैजेट्स का रखें ध्यान

मोबाइल फोन्स, कैमरा और आई-पॉड को बारिश से बचाने के लिए प्लास्टिक की पन्नी या कवर का इस्तेमाल करें. म्यूजिक सिस्टम, स्पीकर, कंप्यूटर और लैपटॉप को इस्तेमाल के बाद प्लास्टिक से ढक दें. घर को संक्रमण मुक्त रखने के लिए नियमित रूप से सफाई करते रहें. घड़ों, बाल्टी और कूलर का पानी समय-समय पर बदलते रहें.

नीली आंखों के गहरे रहस्य: भाग-3

मीठी मेरी बांहों में थी. उस ने कोई विरोध नहीं किया. मैं जैसे ही और आगे बढ़ने लगा तो उस ने रोक दिया, ‘‘प्लीज सर, आज नहीं, फिर कभी जब आप चाहें,’’ कहती हुई उस ने खुद को अलग कर लिया और मैं हड़बड़ा कर संभल गया.

‘‘अच्छा, अब मैं चलता हूं, दिल्ली पहुंचते ही अपनी मां की तबीयत के बारे में फोन पर जरूर बताती रहना. अगर तुम कहो तो मैं सुबह तुम्हारे साथ दिल्ली चलूं,’’ अपनापन और आत्मीयता दर्शाते हुए मैं ने कहा.

‘‘नहीं सर, मैं सबकुछ मैनेज कर लूंगी. एंजियोप्लास्टी के बाद मैं किसी तरह पैसों का जुगाड़ कर के गहने छुड़ा लूंगी. मैं नहीं चाहती कि मम्मी को गहनों के बारे में कुछ पता चले.’’

मैं उस के घर से निकला तो घर पहुंचतेपहुंचते 11 बज चुके थे. साधना हैरानपरेशान थी. मुझे देखते ही उस की सांस में सांस आई, ‘‘मेरी तो जान ही निकल गई थी और ऊपर से आप का मोबाइल स्विच औफ…’’

‘‘और फिर जमाना भी ठीक नहीं है,’’ उस के आगे कुछ और बोलने से पहले मैं ने कहा तो वह मुसकरा पड़ी.

‘‘हां, सच ही तो कहती हूं कि जमाना ठीक नहीं है. चलो, अब जल्दी से चेंज करो, मैं खाना गरम करती हूं,’’ कहती हुई वह रसोई में चली गई.

उस ने खाना लगा दिया. लेकिन मेरा मन खाने में नहीं, बल्कि उस नीली आंखों वाली में लगा था. आज कितना अच्छा मौका हाथ से फिसल गया. मुझे कोफ्त हुई. चलो, फिर कभी सही. उस ने औफर तो कर ही दिया है, सोच कर मन में गुदगुदी सी हो गई.

दूसरे दिन बैंक गया. मन खुशगवार था. शाम को ही उस का फोन आ गया, ‘‘सर, मम्मी की एंजियोप्लास्टी हो गई है. वे अब ठीक हैं. 2 दिन यहीं रहना पड़ेगा, तीसरे दिन आ जाएंगे.’’

इन 2 दिनों फोन पर हमारी नियमित बातें होती रहीं. ऐसा लगा जैसे हमारा परिचय पुराना है.

जब वे लोग अलीगढ़ वापस आए तो मैं उस की मां को देखने उस के घर गया. मां को देखने का तो मात्र बहाना था.

उस की मां ने मेरा आभार प्रकट किया, ‘‘आनंदजी, आप ने 3 लाख रुपए हमें वक्तजरूरत पर उधार दे कर बहुत बड़ा उपकार किया है. हम जल्दी से जल्दी आप के रुपए लौटा देंगे.’’

‘‘अरे नहींनहीं, इतनी भी कोई जल्दी नहीं है. जब व्यवस्था बन जाए तब दे देना,’’ मैं ने सांत्वना दी.

उस रोज पहली बार मैं ने उस के घर में चाय पी. दूसरे दिन भी उस से फोन पर हलकीफुलकी औपचारिक बातें हुईं.

तीसरे दिन सुबह ही उस का फोन आया, ‘‘सर, आज मैं बहुत खुश हूं.’’

‘‘क्या कोई लौटरी खुल गई है?’’ मैं ने चुटकी ली.

‘‘हां सर, हमारे समय की लौटरी खुल गई है.’’

‘‘साफसाफ बताओ, आखिर माजरा क्या है?’’

‘‘सर, फोन पर नहीं बता सकती. आज शाम 6 बजे आप मुझ से सैंटर पौइंट के कौफीहाउस में मिलो.’’

मुझे दाल में कुछ काला नजर आया, ‘‘घर पर क्यों नहीं?’’

‘‘सर, खबर ही कुछ ऐसी है. मम्मी की अभी एंजियोप्लास्टी हुई है. सुन कर वे खुशी बरदाश्त नहीं कर सकेंगी. मैं नहीं चाहती कि उन्हें कुछ भी तकलीफ हो.’’ उस का जवाब सुन कर मैं संतुष्ट हो गया.

बैंक की ड्यूटी करने के बाद मैं सीधे सैंटर पौइंट के कौफीहाउस पहुंच गया. वह मेरा इंतजार कर रही थी. खुशी उस के चेहरे से साफ झलक रही थी. सच में, जब इंसान अंदर से खुश होता है तो उस के चेहरे का नूर बढ़ जाता है. वह पहले से अधिक हसीन और जवान नजर आ रही थी. उसे देख कर लगा, शायद आज मेरी हसरत पूरी हो जाएगी.

‘‘सर, प्लीज बैठिए,’’ कहती हुई उस ने 2 कप कौफी का और्डर कर दिया.

‘‘क्या बात है मीठी, आज तो तुम कोयल की तरह चहक रही हो?’’ मैं ने शरारती लहजे में कहा.

‘‘आज खुशी ही ऐसी मिली है कि मैं कोयल की तरह चहक रही हूं और मोरनी की तरह नाच रही हूं.’’

‘‘बताओ तो सही. या यों ही चहकती रहोगी?’’

‘‘सर, कल पापा का फोन आया था.’’

‘‘क्या?’’ मैं अचानक चौंक पड़ा, ‘‘लेकिन उन्होंने तो तुम दोनों से रिश्ता ही खत्म कर लिया था.’’

‘‘हां, यह सच है लेकिन पापा मुझ से बहुत प्यार करते हैं. जब मैं पैदा हुई थी, उन की तरह मेरी भी नीली आंखें थीं. मम्मी को बताए बगैर हम बापबेटी फोन पर बात करते रहते थे. मैं ने उन्हें मम्मी की तबीयत के विषय में नहीं बताया था लेकिन कल उन्होंने बेचैनीभरे स्वर में पूछा, ‘मीठी, ममता कैसी है? सपने में मैं ने उसे बहुत तकलीफ में देखा है’.

‘‘मैं कुछ छिपा न सकी और उन्हें सबकुछ सचसच बता दिया. उन्होंने तुरंत अपने किसी भारतीय मित्र से कह कर मेरे अकाउंट में 3 लाख रुपए डलवा दिए और बोले, ‘मीठी, मैं तुम दोनों का गुनाहगार हूं, तुम से माफी मांगता हूं. मेरे और सेरेना के बीच कुछ अच्छा नहीं चल रहा. मुझे तुम दोनों की बहुत याद आती है. सेरेना से तलाक ले कर मैं तुरंत भारत आ जाऊंगा. फिर हम सब साथ रहेंगे पहले की तरह. मैं ने पैसा भी खूब कमा लिया है.’’

वह अपने पर्स में से नोटों की गड्डियां निकाल कर मुझे देती हुई बोली, ‘‘ये पूरे 3 लाख रुपए हैं. आप मेरे गहने ले आइए.’’

नोटों की गड्डियां मेरे हाथों में थीं. समस्या यह थी कि मैं इन्हें रखूं कहां? मुझे उलझन में देख कर वह बोली, ‘‘मैं काउंटर से एक कैरी बैग ले कर आती हूं.’’

उस के जाते ही मैं ने तुरंत नोटों की गड्डियों को अच्छी तरह उलटपलट कर देखा और खुद को आश्वस्त कर लिया कि वे असली ही हैं और पूरे 3 लाख हैं.

रुपए ले कर ज्वैलर के यहां जाने लगा तो सोचा, यहां से उस की दुकान दूर है, रात का समय है, कल लंचटाइम में उस को पैसा दे आऊंगा और गहने ले कर, बैंक के बाद शाम को मीठी के घर दे आऊंगा. पैसों के विषय में साधना से कह दूंगा कि एक परिचित के हैं. बैंक में जमा कराने आए थे लेकिन देरी की वजह से जमा न हो सके. कल जमा कर दूंगा.

घर पहुंचतेपहुंचते रात हो गई थी. साधना गुस्से में बैठी थी. मैं जानता था कि देर से आने की वजह से यह गुस्सा है. मैं ने उसे मनाने के उद्देश्य से कहा, ‘‘मानता हूं जमाना ठीक नहीं है लेकिन एक पार्टी के साथ मीटिंग में इतना व्यस्त हो गया कि तुम्हें फोन भी न कर सका.’’

‘‘आप की पार्टी तो बहुत खूबसूरत होती हैं.’’

‘‘तुम्हारे कहने का मतलब क्या है?’’ मैं थोड़ा सकपका गया.

‘‘ईमानदार बैंक मैनेजर साहब, मेरे कहने का मतलब यह है कि आप ने एक लड़की को लोन दिलाने के एवज में रिश्वत ली है.’’

‘‘तुम्हारा दिमाग तो नहीं खराब हो गया है. मैं ने कोई रिश्वतविश्वत नहीं ली है.’’

‘‘तो फिर इस कैरीबैग में क्या है?’’

‘‘इस में तो एक परिचित के पैसे हैं. कल बैंक में जमा करने हैं. आज वे देर से आए थे.’’

‘‘अब आप एक झूठ छिपाने के लिए और झूठ मत बोलो. वह बेचारी तो आत्मनिर्भर बनने के लिए अपना ब्यूटीपार्लर खोलना चाहती थी, इसलिए आप के बैंक से लोन लेना चाहती थी. और आप ने उस का लोन पास करवाने के लिए रिश्वत ली. उस वक्त कहां सैर करने चले गए थे आप के गांधीवादी विचार?’’

‘‘तुम से किस ने कहा?’’

‘‘मैं ने खुद अपनी आंखों से देखा सैंटर पौइंट के कौफीहाउस में.’’

यह सुन कर मेरे होश उड़ गए. साधना गुस्से की वजह से सोफे पर लेट गई. उस ने खाना तो दूर, चायपानी तक को न पूछा. मैं सिर पकड़ कर बैठा था, आखिर साधना को खबर किस ने की? तभी व्हाट्सऐप पर एक वीडियो आया जिस में मेरी और मीठी की वही प्रणयदृश्य वाली क्लिपिंग थी जो उस के घर पर क्षणिक आवेश में हुआ था. अभी मैं यह देख ही रहा था कि व्हाट्सऐप पर वे फोटो भी आ गए जिन में मीठी मुझे नोटों की गड्डियां दे रही है.

मैं सन्न रह गया. तो यह सब करतूत मीठी की है. गुस्से में उसे फोन लगाने लगा लेकिन उस से पहले ही एक अंजान नंबर से फोन आया, ‘‘सर, आप ने व्हाट्सऐप पर वीडियो और फोटो तो देख लिए हैं. इन्हें डिलीट करने के लिए सिर्फ 25 लाख रुपए आप मेरे अकाउंट में डाल दीजिए. अपना अकाउंट नंबर आप को मैसेज कर दूंगी,’’ कह कर फोन काट दिया.

यह आवाज तो मीठी की नहीं थी लेकिन मुझे विश्वास था कि यह करतूत उसी की है. मुझे खुद पर गुस्सा आया. इतनी सावधानी, सतर्कता और चतुराई बरतने के बावजूद मैं उस फ्रौड लड़की के जाल में फंस गया. इधर, साधना की नजरों में भी गिर गया. ‘न घर का न घाट का’ जैसी स्थिति हो गई मेरी. मैं फूटफूट कर रो पड़ा.

रोता देख कर शायद साधना को मुझ पर तरस आ गया, आ कर बोली, ‘‘मैं कहती थी न, जमाना ठीक नहीं है. यह सुन कर आप हंसते थे लेकिन पता नहीं क्यों आप को इस तरह रोता देख कर मुझे ऐसा लग रहा है कि आप बेकुसूर हो, आप को फंसाया गया है. प्लीज, मुझे सबकुछ साफसाफ बताओ.’’

‘‘साधना, तुम्हें कैसे पता चला कि मैं सैंटर पौइंट के कौफीहाउस में हूं.’’

‘‘शाम को 4 बजे के लगभग एक लड़की का फोन आया था. उसी ने बताया और मुझे कौफीहाउस पहुंचने को कहा था. लेकिन मुझे आप पर पूरा भरोसा था कि आप ऐसा कर ही नहीं सकते, जरूर वह लड़की झूठ बोल रही है. फिर मन में लगा, कभीकभी जब हम किसी पर अपने से ज्यादा भरोसा करते हैं तो वही उस के भरोसे को तोड़ भी देता है. इसलिए सोचा, जाने में क्या हर्ज है?’’

‘‘साधना, मैं अपनी एक क्षणिक कमजोरी की वजह से बुरी तरह फंस गया हूं,’’ कहता हुआ उस से लिपट कर फफकफफक कर रो पड़ा. पहली बार बैंक में मीठी से मिलने से ले कर कौफीहाऊस तक के पूरे घटनाक्रम को मैं ने साफसाफ बता दिया.

‘‘अब वह चालाक लड़की मुझे ब्लैकमेल कर के 25 लाख रुपए अपने अकाउंट में डालने को कह रही है. उस के खिलाफ पुलिस में भी रिपोर्ट नहीं कर सकता क्योंकि उस के पास अंतरंग क्षणों का वीडियो और उस से नोटों की गड्डियां लेते हुए फोटो हैं. मैं क्या करूं, मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा.’’

‘‘लगता है यह सब पूर्व नियोजित ढंग से रची हुई साजिश है जिस में वह लड़की अकेली नहीं, कोई और भी शामिल है,’’ पूरी कहानी सुनने के बाद साधना बोली.

‘‘हां, लग तो ऐसा ही रहा है लेकिन अब मैं क्या करूं? उसे फोन लगाता हूं तो स्विचऔफ जाता है.’’

‘‘आप कुछ मत करो, शांत बैठो.’’

‘‘तुम पागल हो गई हो? अगर उस के अकाउंट में पैसा न डाला तो वह वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाएंगे. वह सिरफिरी लड़की जोनल औफिस में मेरे खिलाफ शिकायत भी कर देगी क्योंकि उस के पास सुबूत हैं. नौकरी से तो हाथ धोना ही पड़ेगा, साथ ही जेल की हवा और बदनामी अलग. हमारी बेटी से शादी कौन करेगा? जब वह वीडियो  मेरी बेटी देखेगी तो मैं कहां मुंह छिपाऊंगा?’’ मैं रोंआसा हो उठा.

‘‘वह ऐसा कुछ नहीं करेगी. 25 लाख रुपए की रकम कोई मामूली नहीं होती. उस को आप की बदनामी से ज्यादा रकम प्यारी है. अकाउंट में पैसा न आने पर वह आप से संपर्क जरूर करेगी.’’

‘‘साधना, यह बहुत बड़ा रिस्क है.’’

‘‘रिस्क तो लेना ही पड़ेगा. मान लो उस के अकाउंट में पैसा डाल दिया और उस ने वह सबकुछ डिलीट न किया तो? और आगे भी ब्लैकमेल करती रही तब?’’

साधना बात तो ठीक कह रही थी. मैं ने बैंक से 2 दिनों की छुट्टी ले ली और सांस थामे मीठी के फोन का इंतजार करने लगा.

साधना की भविष्यवाणी सच साबित हुई. दूसरे दिन रात को उस का फोन आ गया, ‘‘सर, आप ने मेरा काम नहीं किया?’’

स्पीकर औन था. ‘‘मीठी, तुम ने मेरे साथ इतना बड़ा धोखा क्यों किया?’’

‘‘सर, क्या कह रहे हैं आप? मैं ने धोखा किया है आप के साथ? यह तो आप सरासर झूठ बोल रहे हैं. आप ने ही तो मेरा लोन पास करवाने के लिए पैसे की मांग की थी और इस के लिए आप ने मुझे सैंटर पौइंट के कौफीहाऊस में बुलाया था और मैं ने आप को पैसा भी दे दिया लेकिन आप ने मेरा काम नहीं किया.’’

‘‘प्लीज मुझे 2 दिनों का समय दो,’’ कह कर मैं ने फोन काट दिया.

अधूरे प्यार की टीस: भाग 3-क्यों बिखर गई सीमा की गृहस्थी

कुछ देर बाद जब रवि ने उन के कमरे में कदम रखा तब राकेशजी के चेहरे पर तनाव के भाव साफ नजर आ रहे थे.

‘‘इतनी टेंशन में किसलिए नजर आ रहे हो, पापा?’’ रवि ने माथे में बल डाल कर सवाल पूछा.

‘‘तुम्हारी मम्मी का फोन आया था,’’ राकेशजी का स्वर नाराजगी से भरा था.

‘‘ऐसा क्या कह दिया उन्होंने जो आप इतने नाखुश दिख रहे हो?’’

‘‘मकान तुम्हारे नाम करने और मेरे अकाउंट में तुम्हारा नाम लिखवाने की बात कह रही थी.’’

‘‘क्या आप को उन के ये दोनों सुझाव पसंद नहीं आए हैं?’’

‘‘तुम्हारी मां का बात करने का ढंग कभी ठीक नहीं रहा, रवि.’’

‘‘पापा, मां ने मेरे साथ इन दोनों बातों की चर्चा चलने से पहले की थी. इस मामले में मैं आप को अपनी राय बताऊं?’’

‘‘बताओ.’’

‘‘पापा, अगर आप अपना मकान अंजु आंटी और नीरज को देना चाहते हैं तो मेरी तरफ से ऐसा कर सकते हैं. मैं अच्छाखासा कमा रहा हूं और मौम की भी यहां वापस लौटने में बिलकुल दिलचस्पी नहीं है.’’

‘‘क्या तुम को लगता है कि अंजु की इस मकान को लेने में कोई दिलचस्पी होगी?’’ कुछ देर खामोश रहने के बाद राकेशजी ने गंभीर लहजे में बेटे से सवाल किया.

‘‘क्यों नहीं होगी, डैड? इस वक्त हमारे मकान की कीमत 70-80 लाख तो होगी. इतनी बड़ी रकम मुफ्त में किसी को मिल रही हो तो कोई क्यों छोड़ेगा?’’

‘‘मुझे यह और समझा दो कि मैं इतनी बड़ी रकम मुफ्त में अंजु को क्यों दूं?’’

‘‘पापा, आप मुझे अब बच्चा मत समझो. अपनी मिस्टे्रस को कोई इनसान क्यों गिफ्ट और कैश आदि देता है.’’

‘‘क्यों देता है?’’

‘‘रिलेशनशिप को बनाए रखने के लिए, डैड. अगर वह ऐसा न करे तो क्या उस की मिस्टे्रस उसे छोड़ क र किसी दूसरे की नहीं हो जाएगी.’’

‘‘अंजु मेरी मिस्टे्रस कभी नहीं रही है, रवि,’’ राकेशजी ने गहरी सांस छोड़ कर जवाब दिया, ‘‘पर इस तथ्य को तुम मांबेटा कभी सच नहीं मानोगे. मकान उस के नाम करने की बात उठा कर मैं उसे अपमानित करने की नासमझी कभी नहीं दिखाऊंगा. नीरज की पढ़ाई पर मैं ने जो खर्च किया, अब नौकरी लगने के बाद वह उस कर्जे को चुकाने की बात दसियों बार मुझ से कह…’’

‘‘पापा, मक्कार लोगों के ऐसे झूठे आश्वासनों को मुझे मत सुनाओ, प्लीज,’’ रवि ने उन्हें चिढ़े लहजे में टोक दिया, ‘‘अंजु आंटी बहुत चालाक और चरित्रहीन औरत हैं. उन्होंने आप को अपने रूपजाल में फंसा कर मम्मी, रिया और मुझ से दूर कर…’’

‘‘तुम आज मेरे मन में सालों से दबी कुछ बातें ध्यान से सुन लो, रवि,’’ इस बार राकेशजी ने उसे सख्त लहजे में टोक दिया, ‘‘मैं ने अपने परिवार के प्रति अपनी सारी जिम्मेदारियां बड़ी ईमानदारी से पूरी की हैं पर ऐसा करने के बदले में तुम्हारी मां से मुझे हमेशा अपमान की पीड़ा और अवहेलना के जख्म ही मिले.

‘‘रिया और तुम भी अपनी मां के बहकावे में आ कर हमेशा मेरे खिलाफ रहे. तुम दोनों को भी उस ने अपनी तरह स्वार्थी और रूखा बना दिया. तुम कल्पना भी नहीं कर सकते कि तुम सब के गलत और अन्यायपूर्ण व्यवहार के चलते मैं ने रातरात भर जाग कर कितने आंसू बहाए हैं.’’

‘‘पापा, अंजु आंटी के साथ अपने अवैध प्रेम संबंध को सही ठहराने के लिए हमें गलत साबित करने की आप की कोशिश बिलकुल बेमानी है,’’ रवि का चेहरा गुस्से से लाल हो उठा था.

‘‘मेरा हर एक शब्द सच है, रवि,’’ राकेशजी जज्बाती हो कर ऊंची आवाज में बोलने लगे, ‘‘तुम तीनों मतलबी इनसानों ने मुझे कभी अपना नहीं समझा. दूसरी तरफ अंजु और नीरज ने मेरे एहसानों का बदला मुझे हमेशा भरपूर मानसम्मान दे कर चुकाया है. इन दोनों ने मेरे दिल को बुरी तरह टूटने से…मुझे अवसाद का मरीज बनने से बचाए रखा.

‘‘जब तुम दोनों छोटे थे तब हजारों बार मैं ने तुम्हारी मां को तलाक देने की बात सोची होगी पर तुम दोनों बच्चों के हित को ध्यान में रख कर मैं अपनेआप को रातदिन की मानसिक यंत्रणा से सदा के लिए मुक्ति दिलाने वाला यह निर्णय कभी नहीं ले पाया.

‘‘आज मैं अपने अतीत पर नजर डालता हूं तो तुम्हारी क्रूर मां से तलाक न लेने का फैसला करने की पीड़ा बड़े जोर से मेरे मन को दुखाती है. तुम दोनों बच्चों के मोह में मुझे नहीं फंसना था…भविष्य में झांक कर मुझे तुम सब के स्वार्थीपन की झलक देख लेनी चाहिए थी…मुझे तलाक ले कर रातदिन के कलह, लड़ाईझगड़ों और तनाव से मुक्त हो जाना चाहिए था.

‘‘उस स्थिति में अंजु और नीरज की देखभाल करना मेरी सिर्फ जिम्मेदारी न रह कर मेरे जीवन में भरपूर खुशियां भरने का अहम कारण बन जाता. आज नीरज की आंखों में मुझे अपने लिए मानसम्मान के साथसाथ प्यार भी नजर आता. अंजु को वैधव्य की नीरसता और अकेलेपन से छुटकारा मिलता और वह मेरे जीवन में प्रेम की न जाने कितनी मिठास भर…’’

राकेशजी आगे नहीं बोल सके क्योंकि अचानक छाती में तेज दर्द उठने के कारण उन की सांसें उखड़ गई थीं.

रवि को यह अंदाजा लगाने में देर नहीं लगी कि उस के पिता को फिर से दिल का दौरा पड़ा था. वह डाक्टर को बुलाने के लिए कमरे से बाहर की तरफ भागता हुआ चला गया.

राकेशजी ने अपने दिल में दबी जो भी बातें अपने बेटे रवि से कही थीं, उन्हें बाहर गलियारे में दरवाजे के पास खड़ी अंजु ने भी सुना था. रवि को घबराए अंदाज में डाक्टर के कक्ष की तरफ जाते देख वह डरी सी राकेशजी के कमरे में प्रवेश कर गई.

राकेशजी के चेहरे पर गहन पीड़ा के भाव देख कर वह रो पड़ी. उन्हें सांस लेने में कम कष्ट हो, इसलिए आगे बढ़ कर उन की छाती मसलने लगी थी.

‘‘सब ठीक हो जाएगा…आप हिम्मत रखो…अभी डाक्टर आ कर सब संभाल लेंगे…’’ अंजु रोंआसी आवाज में बारबार उन का हौसला बढ़ाने लगी.

राकेशजी ने अंजु का हाथ पकड़ कर अपने हाथों में ले लिया और अटकती आवाज में कठिनाई से बोले, ‘‘तुम्हारी और अपनी जिंदगी को खुशहाल बनाने से मैं जो चूक गया, उस का मुझे बहुत अफसोस है…नीरज का और अपना ध्यान रखना…अलविदा, माई ल…ल…’’

जिम्मेदारियों व उत्तरदायित्वों के समक्ष अपने दिल की खुशियों व मन की इच्छाओं की सदा बलि चढ़ाने वाले राकेशजी, अंजु के लिए अपने दिल का प्रेम दर्शाने वाला ‘लव’ शब्द इस पल भी अधूरा छोड़ कर इस दुनिया से सदा के लिए विदा हो गए थे.

BB OTT 2: मनीषा रानी के कैरक्टर पर बेबिका ने उठाई उंगली तो भिड़ गया अभिषेक

सलमान खान के कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस ओटीटी 2 के हालिया एपिसोड में बेबीका धुर्वे और मनीषा रानी के बीच गंदी लड़ाई देखने को मिली. उनके बीच ये लड़ाई एक टास्क के दौरान हुआ जब बेबीका ने मनीषा को बहुत उल्टी-सीधी बात की और फिर उन्होंने मनीषा को धक्का भी दिया. जानिए क्या है पूरा मसला

बेबीका धुर्वे-मनीषा रानी के बीच लड़ाई

वीकेंड वार के बाद सोमवार को बिग बॉस ओटीटी 2 में एक मजेदार टास्क हुआ. ऐंजल और डेविल का मुकाबला हुआ. इस टास्क के लिए घर के सदस्यों को दो हिस्सों में बांटा गया था. शो मे देखा जा सकता है बेबीका और जिया का टार्गेट मनीषा रानी थीं. बेबीका, मनीषा को बार-बार उल्टा-सीधा बोल रही थीं और उनके कैरेक्टर पर उंगली उठा रही थी.

बेबीका ने कहा कि मनीषा की नजर मर्दों के अलावा कहीं ओर घूमती ही नहीं है. बेबीका ने यहां तक कहा- “मनीषा को मर्दों के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता है. इस पर ही उन्होंने पूरा करियर बनाया है और वही बात मुंह पर मल दो तो मैडम को चुभता है. इस टास्क के दौरान बेबीका मनीषा को धक्का देती है जिसके चलते वह रोने लगती है. इसके बाद अभिषेक मनीषा के लिए, बेबीका से भिड़ जाते है.

अभिषेक मल्हान और बेबीका धुर्वे के बीच हुआ युद्ध

कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस ओटीटी 2 एक बार फिर से बेबीका धुर्वे और अभिषेक मल्हान के बीच छिड़ा युद्ध. लड़ाई के दौरान बेबीका ने अभिषेक से कहा चीप, जिसपर अभिषेक भड़क गया. फिर दोनों के बीच तू तू मैं मैं शुरु हो गया जिससे घर वाले भी परेशान दिखे.

मनीषा रानी ने बेबीका के माता-पिता से मांगी माफी

वहीं शो में देखा गया था कि मनीषा रानी कैमरे के सामने में आकर बेबीका के माता-पिता से माफी मांगती नजर आती है. मनीषा ने कैमरे के सामने रोते-रोते सॉरी अंकल आंटी कहते हुए बेबीका के माता-पिता से माफी मांगी.

‘सिंघम’ एक्टर जयंत सावरकर का 87 साल की उम्र में निधन

मराठी और हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाने वाले अनुभवी एक्टर जयंत सावरकर का उम्र संबंधी समस्याओं के कारण सोमवार सुबह अस्पताल में निधन हो गया, उनके बेटे कौस्तुभ सावरकर ने उनके निधन पर पुष्टि की.  जयंत सावरकर 87 साल के थे.

जयंत सावरकर का फिल्मी करियर

मराठी, हिंदी फिल्मों, थिएटर और टेलीविजन में सावरकर का करियर छह दशकों तक फैला रहा, उन्होंने हरिओम विठला, गडबड गोंधल, 66 सदाशिव और बकाल, जबकि युगपुरुष, वास्तव और सिंघम जैसी फिल्मों में अभिनय किया हैं.

वेंटिलेटर पर थे एक्टर

लगभग 10-15 दिन पहले उन्हें ब्लड प्रेशर के कारण ठाणे एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बीती रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, और उम्र संबंधी समस्याओं के कारण सुबह 11 बजे के आसपास उनका निधन हो गया.

 

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फिल्मी करियर की शुरुआत

सावरकर ने मराठी थिएटर में एक बैकस्टेज कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया और उन्हें फेमस नाटककार विजय तेंदुलकर के स्टेज प्रोडक्शन मानुस नवाचे बेट में अभिनय करने का मौका मिला. वहीं इस समय उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है. अंतिम संस्कार मंगलवार सुबह होगा.

अजय देवगन के साथ स्क्रीन शेयर की

सिंघम में जयंत सावरकर ने अजय देवगन के साथ स्क्रीन शेयर की थी. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर काफी धमाल मचाया था. वहीं मराठी सीरीज की बात करें तो एक्टर ने वेब सीरीज ‘समांतर’ में एक ज्योतिषी का किरदार निभाया था जिसे दर्शकों द्वारा काफी पंसद किया जाता है. जयंत सावरकर को आज भी इस किरदार के लिए भी पहचाना जाता है. ये सीरीज साल 2020 में रिलीज हुई थी.

महाराष्ट्र सरकार ने दिया अवॉर्ड

जयंत सावरकर मराठी फिल्म के मशहूर कलाकर है. एक्टर के सम्मान में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें अवॉर्ड से नवाजा. सावरकर को महाराष्ट्र सरकार ने नटवर्य प्रभाकर पणशीकर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया था.

Beauty Tips: जानें चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने के ये 7 तरीके

चेहरा हमारे हमारे व्यक्तित्व का आईना होता है. यही वजह है कि हर इंसान के चेहरे की चमक और खूबसूरती बहुत मायने रखती है. आजकल सभी लोग अपने चेहरे पर प्राकृतिक ग्लो के लिए कई उपाय ढूंढ़ते रहते है. चहरे पर चमक पाने के लिए बाजार में कई प्रोडक्ट उपलब्ध है लेकिन उनमें मौजूद कैमिकल आपकी त्वचा को खराब कर सकते है. आज हम आपको इस लेख के जरिए होम मेड फेस ग्लो टिप्स बताने जा रहे हैं, जो आपको नेचुरल लुक देगा.

  1. हाइड्रेशन

अपनी त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए पूरे दिन खूब पानी पियें. हाइड्रेटेड त्वचा कोमल और चमकदार दिखती है, जिससे आपको प्राकृतिक चमक मिलती है.

2. स्वस्थ आहार

फलों, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन करें. उच्च एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे कि जामुन, पालक और नट्स का सेवन करें. यह आपकी त्वचा को नुकसान से बचाने और एक स्वस्थ चमक को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं.

3. त्वचा की देखभाल

एक अच्छी त्वचा की देखभाल के लिए दिनचर्या को ठीक करें. प्रतिदिन अपने चेहरे पर क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग जरुर करें. इसे साफ और पोषित रखने के लिए अपनी त्वचा के हिसाब से  नेचुरल प्रोडक्ट का उपयोग करें.

4. एक्सफोलिएशन

मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने और छिद्रों को खोलने के लिए नियमित रूप से अपनी त्वचा को एक्सफोलिएट करें. यह आपकी त्वचा की देखभाल बेहतर ढंग से करने में मदद करेगा और आपको चिकनी, अधिक चमकदार रंगत देगी.

5. धूप से सुरक्षा

उचित एसपीएफ वाले सनस्क्रीन का उपयोग करके अपनी त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों से बचाएं. सनस्क्रीन समय से पहले बुढ़ापा रोकने में मदद करता है और आपकी त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखता है.

6. फेशियल मसाज

रक्‍तसंचार में सुधार और आपकी त्वचा को एक स्वस्थ चमक देने के लिए फेशियल मसाज सबसे बेस्ट है. धीरे-धीरे अपने चेहरे पर गोलाकार गति में मालिश करें. आप मसाज के लिए फेशियल रोलर या अपनी उंगलियों का उपयोग कर सकते हैं.

7. प्राकृतिक मेकअप

अपने फेस के लिए प्राकृतिक मेकअप लुक चुनें जो भारी न होकर आपकी विशेषताओं को निखारे. ग्लोइंग स्किन के लिए अपने चेहरे पर हल्के फाउंडेशन या टिंटेड मॉइस्चराइज़र, हल्के ब्लश और हल्के हाइलाइटर का उपयोग करें.

मुझे औस्टियोआर्थ्राइटिस डायग्नोज हुआ है, क्या इससे मेरे घुटनों पर असर होगा?

सवाल-

मेरी उम्र 35 साल है. मुझे औस्टियोआर्थ्राइटिस डायग्नोज हुआ है. क्या आगे चल कर मेरे घुटने खराब हो सकते हैं?

जवाब-

औस्टियोआर्थ्राइटिस में जोड़ों के कार्टिलेज क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. जब ऐसा होता है तो हड्यों के बीच कुशन न रहने से वे आपस में टकराती हैं, जिस से जोड़ों में दर्द होना, सूजन आ जाना, कड़ापन और मूवमैंट प्रभावित होना जैसी समस्याएं हो जाती हैं. औस्टियोआर्थ्राइटिस के कारण घुटनों के जोड़ों के खराब होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कई उपाय हैं, जिन के द्वारा आप औस्टियोआर्थ्राइटिस के कारण होने वाली जटिलताओं को कम कर सकते हैं. कैल्सियम और विटामिन डी से भरपूर भोजन का सेवन करें. वजन न बढ़ने दें. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. रोज कम से कम 1 मील पैदल चलें. इस से बोन मांस बढ़ता है.

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दिल्ली-एनसीआर में आर्थराइटिस की एक बड़ी वजह अंडरग्राउंड वौटर या बोरवेल के पानी का इस्तेमाल भी है. डाक्टरों का कहना है कि अंडरग्राउंड वौटर में फ्लोराइड की अधिक मात्रा से लोगों की हड्डियों के जौइंट खराब हो रहे हैं. उन्हें आर्थराइटिस और ओस्टियो आर्थराइटिस जैसी बीमारी हो रही है. देश के जिन इलाकों में अंडरग्राउंड वौटर में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है, उनमें दिल्ली भी शामिल है.

इंडियन कार्टिलेज सोसायटी और आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. राजू वैश्य ने बताया कि दिल्ली के वेस्ट, नौर्थ-वेस्ट, ईस्ट, नौर्थ ईस्ट और साउथ वेस्ट जोन में इस बीमारी के मरीज ज्यादा हैं. आए दिन लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि फ्लोराइड युक्त पानी लगातार पीने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. जोड़ों में कड़ापन आ जाता है. इसके बाद आर्थराइटिस और ओस्टियो आर्थराइटिस जैसी समस्याएं हो जाती हैं. गंभीर स्थिति में हाथ-पैर की हड्डियां टेड़ी हो जाती हैं. जब कोई ज्यादा फ्लोराइड वाला पानी लगातार पीता है तो उसे फ्लोरोसिस होने का खतरा भी होता है. जिन एरिया में पाइपलाइन की सप्लाई नहीं है, वहां बोरवेल का पानी खूब इस्तेमाल हो रहा है.

वेंकटेश्वर हास्पिटल के आर्थोपेडिक सर्जन डाक्टर आर.के. पांडेय का भी यही मानना है. उन्होंने बताया कि जो लोग लगातार बोरवेल का पानी पीते हैं, उनमें आर्थराइटिस का खतरा काफी होता है. जब खून में फ्लोराइड का लेवल बढ़ता है तो वह जाइंट को खराब करने लगता है. डाक्टर वैश्य ने कहा कि फ्लोरोसिस कई तरह के होते हैं. अस्थि फ्लोरोसिस हड्डियों पर असर करता है. यह युवा और बुजुर्ग दोनों को हो सकता है. इसमें गर्दन, कूल्हे, बांह और घुटनों के जौइंट में दर्द होता है. हड्डियों का लचीलापन खत्म हो जाता है. इसे शुरुआती दौर में पहचान पाना मुश्किल है.

मां नहीं बनें बच्चे की दोस्त

दुनिया का सब से खूबसूरत और मजबूत रिश्ता मां और बच्चे का होता है. मां अपनी संतान के लिए जान भी दे सकती है. बच्चा भी मां के सब से ज्यादा करीब होता है और इमोशनली कनैक्टेड होता है. मां ही होती है जो बच्चे को अच्छी तरह सम?ाती है. कोई भी बच्चा अपनी हर समस्या सब से पहले अपनी मां के साथ शेयर करना चाहता है. मां और बच्चे का यह रिश्ता बेहद खूबसूरत और अनोखा होता है पर कभीकभी कुछ माताएं अनजाने में अपनी संतान के प्रति ऐसा व्यवहार रखने लगती हैं जिस की वजह से बच्चा न सिर्फ मानसिक तौर पर मां से दूर हो जाता है बल्कि दोनों के बीच भावनात्मक लगाव भी कम हो जाता है. ऐसे में मां को इन बातों पर जरूर ध्यान देना चाहिए:

अपने एक बच्चे को ज्यादा प्यार देना

अगर किसी महिला के 2 या 2 से अधिक बच्चे हैं और उस का ध्यान केवल एक ही पर रहता है या फिर एक को ज्यादा मानती है और दूसरों को समानरूप से प्यार नहीं दे पाती है तो यह एक बहुत बड़ी गलती है. ऐसा कर के वह न सिर्फ अपनी उस संतान को स्वयं से बल्कि अपने भाईबहनों से भी दूर करती जाती है. बच्चे भावुक होते हैं. जब उन्हें मां के द्वारा इग्नोर किया जाता है या डांटफटकार मिलती है तो उन के भीतर हीनभावना का विकास हो जाता है जो उन के भविष्य के लिए सही नहीं होता है. इसलिए मां को चाहिए कि अपने सभी बच्चों को हमेशा बराबर प्यार दे.

हर बार बच्चे को दोष देना

मातापिता भी इंसान हैं और इस नाते गलतियां कर सकते हैं. मगर कई घरों में मांबाप हमेशा खुद को सही मानते हैं और बच्चे को ही दोषी मान कर डांटने लगते हैं. अगर आप भी हर बात पर खुद को सही और अपनी संतान को गलत ठहराने की कोशिश करते हैं तो यह आप दोनों के रिश्ते के लिए सही नहीं है. इस से बच्चे के मन में आप के प्रति विद्रोह की भावना घर कर जाती है जो आगे चल कर उसे विकृत मानसिकता का इंसान बना सकती है. मां खासतौर पर ममता और प्यार की प्रतिमूर्ति होती है और कोई भी बात प्यार से समझ सकती है. इसलिए अपने बच्चे के प्रति कभी कठोर रुख न अपनाएं बल्कि उसे प्यार से डील करें.

दोस्त की भूमिका

एक मां को अपने बच्चे के लिए कभीकभी दोस्त की भूमिका भी निभानी चाहिए. उस के साथ बातें कर के उस के मन की हालत सम?ानी चाहिए. इस से दोनों के बीच रिश्ता गहरा होता है. मगर साथ में यह भी पता होना चाहिए कि कब अपनी संतान का दोस्त बन कर व्यवहार करना है और कब एक मां के रोल को निभाना है क्योंकि अगर हर समय दोस्ती ही दर्शाई तो उस का व्यवहार आप के लिए बदल सकता है.

बच्चे के जज्बात समझें

अगर आप हमेशा अपनी बात ऊपर रखती हैं और चिड़चिड़ी रहती हैं तो आप का बच्चा आप से खुल कर बात नहीं कर सकेगा. अगर आप का बच्चा किसी बात पर आप से नाराज है तो उसे मनाने का प्रयास जरूर करें. अगर आप उसे दुखी ही छोड़ देती हैं तो यह आप के लिए सही नहीं है. आप उसे सम?ाएं फिर प्यार से गले लगा लें. इस से बच्चा आप से और भी गहराई से जुड़ जाएगा.

पौजिटिव अप्रोच

आप के बच्चे का ओवरऔल व्यवहार कैसा है या वह कितनी सकारात्मक सोच वाला तमीजदार बच्चा है यह काफी हद तक मां का बच्चे के प्रति सकारात्मक रवेए और परवरिश की देन होती है. कुछ शोध बताते हैं कि जिन बच्चों का अपनी मां के साथ पौजिटिव बौंड होता है वे अपनी युवास्था में भी संतुलित व्यक्तित्व वाले और सही निर्णय लेने में सक्षम होते हैं. मां के साथ अच्छे रिश्ते को जीने वाले ज्यादातर बच्चे हिंसा या क्रोध से दूर रहते हैं.

मां के साथ मजबूत रिश्ता

बच्चे जैसा माहौल घर में देखते हैं वैसा ही वो अपने जीवन में अपनाते भी हैं. कुछ नए शोध बताते हैं कि जिन बच्चों की अपनी मां के साथ स्ट्रौंग रिलेशनशिप होती है वे हमेशा अपनी मां की फीलिंग्स की कद्र करते हैं. अगर उन की मां और उन के पापा के बीच किन्हीं बातों को ले कर ?ागड़े होते हैं या उन के पापा हिंसक व्यवहार करते हैं तो ऐसे बच्चे को अपनी मां की भावनाओं की बेहतर सम?ा होती है.

बच्चे बनते हैं इमोशनली स्ट्रौंग

एक बच्चे का सब से ज्यादा लगाव अपनी मां से होता है. वह केवल भोजन के लिए ही अपनी मां पर निर्भर नहीं होता है बल्कि उस का इमोशनल अटैचमैंट भी होता है. इसी वजह से मां से बच्चे का संवाद उस के मानसिक और भावनात्मक व्यवहार को प्रभावित करता है.

जब बच्चे को घर में अच्छा माहौल, मां की सपोर्ट और भरपूर प्यार मिलता है तो वह खुद को सुरक्षित महसूस करने लगता है और उस में जीवन के प्रति पौजिटिव थिंकिंग पैदा होती है. जिस घर में मां बच्चे के साथ बातें कर के उस की हर परेशानी का हल निकालती रहती है और बच्चे का हौसला बढ़ाती है तो ऐसे बच्चे इमोशनली स्ट्रौंग बनते हैं.

अमेरिका की इलिनोइस यूनिवर्सिटी की स्टडी के अनुसार जब बच्चा अपनी मां के साथ खेलता है तो उस दौरान मां और बच्चा दोनों एकदूसरे के संकेतों का सहज रूप से जवाब दे रहे होते हैं. यह सकारात्मक बातचीत बच्चे के हैल्दी सोशल और इमोशनल डैवलपमैंट में हैल्प करती है.

बच्चे को प्यार से समझएं

मां और बच्चे का रिश्ता बहुत मजबूत होता है. लेकिन समय के साथ हर रिश्ते में कुछ बदलाव होते हैं. उन बदलावों को अपना कर ही आप आगे बढ़ सकते हैं. इसलिए एक उम्र के

बाद बच्चे के साथ हमेशा एक दोस्त की तरह रहें ताकि वह अपनी बात आप से बिना किसी डर के शेयर कर पा सके. जब आप के बच्चे से कोई गलती हो जाए तो गुस्से से डांटने के बजाय उसे प्यार से समझाएं. इस से वह आप की बातों को अच्छे से समझेगा और आप के बीच का रिश्ता मजबूत होगा.

बच्चे को समय दें

आज के समय में ज्यादातर महिलाएं जौब करती हैं. ऐसे में घर और काम के बीच समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है. अत: वह बच्चे को पूरा समय नहीं दे पाती. अगर आप के साथ भी ऐसा है तो परेशान न हों. बस यह कोशिश करें कि घर में आप के पास जितना भी समय है बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं. याद रखें सही से बात न हो पाने के कारण रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं, साथ ही बच्चों के भटकने का खतरा भी रहता है. इसलिए आप जब घर में हों तो फोन में लगे रहने के बजाय अधिक से अधिक समय बच्चे से बातें करें, उस के साथ ऐंजौय करें, खाना बनाएं या कुछ और बच्चे को कुछ नया सिखाएं.

हमेशा अपने बच्चे के बर्थडे के दिन उसे सब से पहले विश करें. इस से आप के बच्चे को इस बात का एहसास रहेगा कि उस की आप की जिंदगी में बहुत अहमियत है. इस दिन अपने बच्चे के लिए कुछ स्पैशल करें. उस की पसंद की चीज खरीद कर दें. उस की मनपसंद जगह पर घूमने जाएं. पूरे परिवार के साथ पिकनिक का प्रोग्राम भी बना सकती हैं.

बच्चों को सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल ऐसे सिखाएं

आजकल के बच्चे यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफौर्म्स का काफी उपयोग करते हैं और इन साइट्स को देख कर बहुत कुछ सीखते हैं. ऐसे में मातापिता के लिए महत्त्वपूर्ण है कि वे अपने बच्चों को इन वैबसाइट्स का सही इस्तेमाल सिखाएं और उन की हाई क्वालिटी कंटैंट चुनने में मदद करें.

इस संदर्भ में सीनियर साइकोलौजिस्ट डा. ज्योति कपूर, फाउंडर मनस्थली, गुरुग्राम कुछ सुझाव दे रही हैं जो आप की अपने बच्चे को गाइड करने में सहायता कर सकते हैं:

डिसिप्लिन और लिमिटेशन मैंटेन रखें

बच्चों को सोशल मीडिया और यूट्यूब का उचित और सीमित इस्तेमाल करने की सीख दें. उन्हें एक समयसीमा दें और बताएं कि वे इतने समय तक ही यूट्यूब या सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते हैं. उन्हें इस बात का एहसास दिलाएं कि इन सब में ज्यादा समय लगाना हानिकारक हो सकता है. उन के लिए दूसरी गतिविधियों में भी समय बिताना जरूरी है.

  1. कंटैंट की क्वालिटी चैक करें

बच्चों को यह समझाएं कि सभी कंटैंट बराबर नहीं होते हैं और उन्हें हमेशा अच्छे स्टैंडर्ड और वैल्यूज का ध्यान रखना चाहिए. उन्हें इस बात के लिए प्रोत्साहित करें कि वे किसी भी वीडियो, चैनल या पेज की औथैंटिसिटी जरूर वैरीफाई करें, साथ ही वे उन्हीं चीजों पर फोकस करें जो उन की जानकारी के लिए जरूरी हों.

2. सामाजिक विषयों पर देखे गए कंटैंट पर बातचीत करें

अपने बच्चों के साथ उन के देखे गए सोशल कंटैंट के बारे में चर्चा करें. उन से उन के देखे गए वीडियो, पेज के बारे में प्रश्न करें और उन की सोच और विचारों को प्रोत्साहित करें. ऐसा करना उन्हें समझने का और अपनी बात रखने का अवसर देगा और उन्हें अच्छी और बुरी सामग्री के बीच अंतर महसूस होगा.

3. सतर्कता और सुरक्षा के बारे में बात करें

बच्चों को सोशल मीडिया और यूट्यूब पर सुरक्षित रहने के बारे में जागरूक करें. उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा करने की सीख दें. अनजान लोगों के साथ बातचीत न करने और किसी भी अनुचित कंटैंट की रिपोर्ट करने का तरीका सिखाएं.

4. संवाद

बच्चों के साथ प्यार से पेश आएं और उन के साथ संवाद बनाए रखें. उन की रुचियों और उन के द्वारा देखे गए कंटैंट पर चर्चा करें. यह उन्हें बताएगा कि आप उन की सोच, रुचियों और इंटरनैट पर देखे जाने वाले कंटैंट को महत्त्व देती हैं. इस से वे कुछ भी देखने के बाद खुद ही आप को बताएंगे और आप हमेशा उन पर नजर रख सकेंगी या उस कंटैंट में दिखाई गई अच्छी बातें उन्हें समझ सकेंगी

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