Monsoon Special: मौनसून में रखें अपनी ज्वैलरी का खास ख्याल

अपनी खूबसूरती में चार चांद लगाने वाली ज्‍वेलरी का अगर आप अच्‍छी तरह से ध्‍यान नहीं रखती हैं तो इनका रंग फीका पड़ने लगता है और इनकी चमक भी खो जाती है. ध्‍यान नहीं रखने पर ज्‍वेलरी का रंग फीका पड़ने लगता है और ये आसानी से टूट भी सकती हैं. आज हम आपको बता रहे हैं कि किस तरह आप अपनी ज्‍वेलरी की देखभाल कर उसकी चमक को बनाए रख सकती हैं.

ज्‍वेलरी को रखें साफ

ज्‍वेलरी की चमक को बनाए रखने के लिए उसे अच्‍छी तरह से साफ करके और सुखाकर रखें. गले का हार हो, अंगूठी, ब्रेसलेट, ईयर रिंग या फिर कोई भी ज्‍वेलरी आइटम हो, आपको उसे किसी क्रीम, लोशन, परफ्यूम और आयल या पानी से साफ करके ही रखना चाहिए. ज्‍वेलरी को पहनने से पहले उस पर क्रीम या परफ्यूम लगाना ना भूलें. सभी ज्‍वेलरी को अलग-अलग बॉक्‍स में रखें ताकि उनका रंग एक-दूसरे की वजह से खराब ना हो. आप चाहें तो एक बड़े से बॉक्‍स में अलग-अलग ज्‍वेलरी के छोटे बाक्‍स भी रख सकती हैं.

ध्‍यान से रखें

अपनी फैशन ज्‍वेलरी को किसी सुरक्षित जगह पर ही रखें. गले के हार को उसके हूक्‍स में डालकर रखें और कोई भी ज्‍वेलरी एक-दूसरे के साथ चिपके ना. कोई भी कीमती ज्‍वेलरी तो बिलकुल भी एक-दूसरे से स्‍पर्श नहीं करनी चाहिए वरना उस पर जंग लग सकती है.

पहनने के बाद जरूर करें साफ

कभी-कभी ज्‍वेलरी पहनने के बाद अंगूठी, ईयर रिंग और गले का हार पहनने के बाद उस पर साबुन, तेल या परफ्यूम लग जाता है. इसकी वजह से ज्‍वेलरी पर कालापन आ सकता है या उनकी चमक जा सकती है. इससे बचने के लिए ज्‍वेलरी पहनने के बाद उसे साफ करना बिलकुल ना भूलें.

ज्‍वेलरी पहनकर सोने की गलती ना करें

सोने से पहले हमेशा अपनी ज्‍वेलरी उतार दें. अगर आप सोने से पहले ज्‍वेलरी नहीं उतारती हैं तो आपकी ये लापरवाही ज्‍वेलरी को खराब भी कर सकती है. इस वजह से ज्‍वेलरी के टूटने का खतरा भी बना रहता है. वहीं ज्‍वेलरी पहनकर सोन पर आपकी त्‍वचा भी स्‍क्रैच पड़ सकते हैं.

Monsoon Special: बारिश में स्किन एलर्जी

ऐलर्जी दूर करने के उपाय

– एक ठंडे, गीले कपड़े को प्रभावित हिस्से पर लपेट दें.

– अपनी स्किन पर ठंडी क्रीम लगाएं. शरीर पर मौइस्चराइजर या बौडी लोशन लगाएं.

– खुजली से छुटकारा पाने के लिए खुजली दूर करने वाली क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है.

– कुनकुने पानी से स्नान करने से भी राहत मिलती है.

– उन पदार्थों से परहेज करें जो स्किन में समस्या पैदा करते हैं. वैसे आभूषण न पहनें जिन से प्रौब्लम होती है.

– खुजली होने पर सिंथैटिक कपड़े पहनने के बजाय सूती कपड़ों का उपयोग करें.

– ऐलर्जी की दवा का सेवन कर के भी आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं.

24 साल की अंजलि वर्मा काफी बिंदास स्वभाव की लड़की है. उसे घूमनाफिरना, शौपिंग करना और खूबसूरत दिखना बहुत पसंद है. गरमी के मौसम में भी वह एक से बढ़ कर एक ड्रैसेज खरीदती है और पूरे मेकअप में निकलती है. मगर पिछले कुछ दिनों से उसे घमौरियों की समस्या होने लगी है.

पिछले संडे जब वह अपनी सहेली की बर्थडे पार्टी में पहुंची तो सब उसे देख कर चौंक उठे. स्टाइलिश वनपीस ड्रैस और खुले बालों में वह बहुत सुंदर लग रही थी. मगर शाम होतेहोते उसे पीठ और गले के निचले हिस्से में खुजली शुरू हो गई. यह खुजली बढ़ती ही गई और छोटे लाललाल दाने निकल आए. तब उस की सहेली ने उसे ऐलर्जी की दवा दी और उसे नहाने भेजा. नहाने के बाद उसे अपने कौटन के कपड़े पहनने को दिए, साथ ही प्रभावित हिस्सों में ऐलोवेरा जैल भी लगा दिया. धीरेधीरे उस की प्रौब्लम कम हो गई.

दरअसल, गरमी के दिनों में स्किन संबंधी रोगों जैसे घमौरियां आदि की संभावना बढ़ जाती है. लापरवाही बरतने से यह रोग गंभीर भी हो सकता है. स्किन पर लाल रंग के दाने और उन में खुजली का होना आमतौर पर घमौरियों के लक्षण हैं. इस स्थिति में शरीर में या तो पसीने वाली जगहों पर या सिंथैटिक कपड़े से ढकी जगह पर छोटेछोटे लाल चकत्ते हो जाते हैं जिन में खुजली होने लगती है.

यह अधिक गरमी या टाइट कपड़े पहनने के कारण भी होता है. इस से बचने के लिए जितना हो सके धूप से बचें. बाहर निकलना ही हो तो कैप लगा कर और अंब्रेला ले कर तथा शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लगा लें. पौलिएस्टर या नायलोन के कपड़ों की जगह सूती, ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें.

यदि हमारी स्किन किसी विशेष चीज के प्रति संवेदनशील है तो ऐसे में स्किन पर उस चीज के प्रभाव से दाने, मुंहासे या लाल चकत्ते निकल सकते हैं. स्किन ऐलर्जी के बहुत से कारण हो सकते हैं:

– कुछ लोगों को खास तरह के खाने से ऐलर्जी होती है. कोई चीज खाने भर से उन्हें खुजली की समस्या हो सकती है.

– कुछ लोगों को किसी दवा के साइड इफैक्ट के कारण भी खुजली या ऐलर्जी हो सकती है.

– कैमिकल वाले सौंदर्यप्रसाधनों के इस्तेमाल से भी खुजली हो सकती है. कैमिकल युक्त हेयर डाई या हेयर कलर के इस्तेमाल से अकसर खुजली की समस्या हो जाती है. इसी तरह किसी को फाउंडेशन से तो किसी को किसी खास फेस क्रीम से भी ऐसी प्रौब्लम हो जाती है.

– कुछ महिलाओं की स्किन जेवरों के प्रति संवेदनशील होती है. ऐसी महिलाएं यदि धातु से बनी कोई जेवर पहनती हैं तो उन्हें स्किन पर खुजली हो सकती है. गरमियों में जेवर जब पसीने के संपर्क में आते हैं तो ऐसे में स्किन पर ऐलर्जी हो जाती है.

– कुछ लोगों को सिंथैटिक कपड़ों से भी ऐलर्जी होती है.

– पालतू जानवर को छूने या हार्ड साबुन के ज्यादा प्रयोग से भी खुजली शुरू हो सकती है. इस से स्किन पर लाली या दाने आ जाते हैं. छाले भी हो सकते हैं.

– किडनी या थायराइड की समस्या से भी खुजली हो सकती है.

– सूखी स्किन की प्रौब्लम भी इस की एक वजह है. बहुत अधिक गरम या ठंडे मौसम में ऐसा संभव है. ऐसे में एक अच्छा मौइस्चराइजर नियमित रूप से लगाना जरूरी है.

– किसी तरह के कीड़े के काटने पर भी स्किन पर खुजली या कोई और प्रौब्लम पैदा हो सकती है.

– फंगल इन्फैक्शन भी खुजली का कारण हो सकता है.

– डायबिटीज के कारण भी ऐसी समस्या हो सकती है.

– सर्दियों में अकसर लोग ऊनी कपड़े पहनती हैं जिस के कारण स्किन पर खुजली जैसी समस्या पैदा हो सकती है.

– किडनी खराब होने पर खुजली की समस्या हो जाती है.

– पित्ती या चिकन पौक्स के कारण भी स्किन पर खुजली या खराश होनी शुरू हो जाती है.

– कुछ लोगों को परफ्यूम से ऐलर्जी होती है. ऐसे लोग जब परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं तो उन की स्किन पर लाल चकत्ते हो जाते हैं.

स्किन ऐलर्जी के प्रकार

फंगल इन्फैक्शन: फंगल इन्फैक्शन एक प्रकार की स्किन ऐलर्जी है जो फंगस के द्वारा होती है. इसे माइकोसिस भी कहते हैं. फंगल इन्फैक्शन चेहरे, हाथों की स्किन या शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है. इस ऐलर्जी में स्किन पर एक प्रकार का खुरदरापन सा होने लगता है और खुजली भी होती है. यह इन्फैक्शन शरीर के ऐसी जगहों की स्किन पर ज्यादा होता है जहां थोड़ी नमी होती है जैसेकि पैरों की उंगलियों के बीच, एडि़यों, नाखूनों, जननांग, स्तन इत्यादि.

लाइकेन प्लेनस: यह भी एक प्रकार का स्किन इन्फैक्शन या स्किन ऐलर्जी है जो 30 साल से अधिक के व्यक्तियों में देखने को मिलती है. यह एक तरह से खुजली वाले लाल चकत्ते होते हैं जो शरीर के किसी भी भाग पर हो सकते हैं लेकिन कलाइयों, पैरों के निचले भाग, पीठ, गरदन इत्यादि में इस ऐलर्जी के होने की ज्यादा संभावना बनी रहती है. यह ऐलर्जी जेनेटिक होती है.

ऐक्जिमा: ऐक्जिमा एक ऐसी बीमारी है जिस में स्किन में तेज खुजली होती है और स्किन रूखी हो जाती है. कुछ लोगों में यह समस्या इतनी तकलीफदेह हो जाती है कि उन्हें इस का लंबा ट्रीटमैंट कराना पड़ता है. मौसम बदलने के साथ ही यह दिक्कत और बढ़ जाती है. कुछ लोगों को इतनी तेज खुजली होती है कि स्किन से खून तक आने लगता है. यह बड़े लोगों तथा बच्चों दोनों को ही हो सकती है.

पित्ती: यह एक प्रकार की स्किन ऐलर्जी है जिस में स्किन पर बड़ेबड़े लाल चकत्ते उभर आते हैं. स्किन पर बने इन लाल चकत्तों में बहुत ज्यादा खुजली होती है. जितना ज्यादा उस जगह को खुजलाते हैं यह ऐलर्जी और तेजी से बढ़ने लगती है. यह कुछ दिनों में अपनेआप भी ठीक हो जाती है.

स्किन ऐलर्जी के लिए घरेलू उपाय

टी ट्री औयल: स्किन ऐलर्जी में टी ट्री औयल काफी हैल्पफुल होता है. इस में ऐंटीमाइक्रोबियल और ऐंटीइनफ्लैमेटरी प्रौपर्टीज होती हैं जो कई तरह की स्किन ऐलर्जी से छुटकारा दिलाती हैं. स्किन में होने वाली रैडनैस और खुजली से छुटकारा पाने के लिए टी ट्री औयल एक बेहतर औप्शन है.

तुलसी: तुलसी ऐंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है जो आप की स्किन को संक्रमण से बचाने का काम करती है. इस के अलावा इस में ऐंटीइनफ्लैमेटरी गुण होते हैं जो स्किन ऐलर्जी से जुड़ी रैडनैस, सूजन और खुजली में आराम दिलाते हैं. साथ ही तुलसी ऐंटीऐलर्जिक भी होती है. तुलसी के पत्तों को धो कर इस का पेस्ट बना लें. अब इसे प्रभावित जगह पर लगाएं और 20 से 30 मिनट बाद धो लें.

सेब का सिरका: सेब के सिरके में ऐंटीइनफ्लैमेटरी और ऐंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. इन गुणों की मदद से इसे स्किन पर लगाने से ऐलर्जी से आराम मिलता है और स्किन पर संक्रमण बढ़ता नहीं है.

आप पानी को गरम कर के उस में सेब का सिरका मिला लें. अब रुई की मदद से इस मिश्रण को प्रभावित जगह पर लगाएं. 15 से 20 मिनट लगा रहने के बाद धो लें.

ऐलोवेरा: ऐलोवेरा जैल को हीलिंग गुणों के लिए जाना जाता है. इस में मौजूद ऐंटीइनफ्लैमेटरी गुण खुजली और लाल चकत्तों से राहत दिलाने में मदद करते हैं.

ताजा ऐलोवेरा जैल को प्रभावित जगह पर लगाएं और 30 मिनट लगा रहने दें. सूखने पर धो लें.

नारियल तेल: नारियल तेल मौइस्चराइजिंग गुणों से भरपूर होता है. इस में ऐनाल्जेसिक और ऐंटीइनफ्लैमेटरी गुण मौजूद होते हैं, इसलिए यह स्किन की ऐलर्जी के कारण होने वाली रैडनैस और खुजली से छुटकारा दिलाने में मदद करता है. इसे इस्तेमाल करने के लिए नारियल के तेल की कुछ बूंदों को हथेली पर ले कर प्रभावित स्किन पर लगाएं. 20 से 30 मिनट बाद स्किन को सादे पानी से धोएं और फिर तौलिए से सुखा लें.

नीम: नीम में ऐंटीइनफ्लैमेटरी और ऐंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. यह स्किन ऐलर्जी के इलाज में असरदार माना जाता है. नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें और स्किन पर लगा कर 20 से 30 मिनट के लिए छोड़ दें. सूखने पर पानी से धो लें.

यूटीआई: क्या करें क्या नहीं

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन (यूटीआई) एक आम बीमारी है. इस बीमारी से दुनियाभर के लाखों लोग ग्रस्त हैं. यह बीमारी तब होती है जब बैक्टीरिया मूत्रपथ में प्रवेश करते हैं. इस से असहज लक्षण और संभावित मुश्किलें होती हैं. यूटीआई का इलाज संभव है. लेकिन रोकथाम इस बीमारी में बहुत महत्त्वपूर्ण है. यूटीआई को प्रभावी ढंग से रोकने और मैनेज करने के लिए क्या करें और क्या न करें के बारे में जानना जरूरी है.

यूटीआई की रोकथाम के लिए क्या करें

  1. हाइड्रेट रहें

यूटीआई को रोकने का सब से सरल और सब से प्रभावी तरीकों में से एक है पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड रहना. खूब पानी पीने से मूत्रपथ से बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद मिलती है और मूत्र पतला हो जाता है जिस से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है. अगर आप शारीरिक गतिविधि करते हैं या गरम जलवायु में रहते हैं तो प्रतिदिन कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने जरूर पीएं.

2. अच्छी साफसफाई रखें

को रोकने के लिए अच्छी साफसफाई करनी चाहिए. शौचालय का उपयोग करते समय गुदा क्षेत्र से बैक्टीरिया को मूत्रमार्ग तक पहुंचने से रोकने के लिए हमेशा आगे से पीछे की ओर पोंछना चाहिए. इस के अलावा प्राइवेट पार्ट को साफ और बैक्टीरिया से मुक्त रखने के लिए नियमित रूप से नहाएं.

3. ब्लैडर को नियमित रूप से खाली करें

बैक्टीरिया को जमा होने से रोकने के लिए ब्लैडर (मूत्राशय) को नियमित रूप से खाली करना जरूरी है. लंबे समय तक यूरिन न रोके रहें क्योंकि इस से बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है.  पेशाब महसूस होने पर पेशाब करें और हर बार मूत्राशय को पूरी तरह से खाली करें.

सैक्सुअल इंटरकोर्स से पहले और बाद में पेशाब करें: सैक्स करने से पहले और सैक्स करने के बाद पेशाब करने से बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद मिलती है. ऐसा करने से सैक्स के दौरान मूत्रमार्ग में बैक्टीरिया प्रवेश नहीं कर सकते हैं. महिलाओं को खासकर ऐसा करना चाहिए. उन का मूत्रमार्ग छोटा होता है और उस में बैक्टीरिया के जाने की संभावना ज्यादा होती है. इस के अलावा सुरक्षित सैक्स करने से यूटीआई के खतरे को और कम किया जा सकता है.

4. ब्रीथेबल अंडरगार्मैंट्स पहने

ब्रीथेबल कपड़ों से बने अंडरवियर पहनें जैसे कौटन से बने कपड़े. इन से प्राइवेट पार्ट (जननांगों) में हवा जा पाती है और जननांग क्षेत्र सूखा रहता है. टाइट फिटिंग कपड़ों और सिंथैटिक मैटीरियल से बने कपड़े न पहनें क्योंकि इन में नमी रह जाती है और बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं.

 यूटीआई रोकथाम के लिए क्या न करें

पेशाब ज्यादा देर तक न रोकें: लंबे समय तक पेशाब को रोकने से यूरीनरी स्टैसिस (मूत्र संबंधी ठहराव) हो सकता है, मतलब मूत्र मूत्राशय में स्थिर रह सकता है, जिस से बैक्टीरिया पनपने में मदद मिलती है. जब आप को पेशाब करने की इच्छा महसूस हो तो अपने मूत्राशय को खाली करने की आदत बना लें और टौयलेट जाने में देरी न करें.

बहुत ज्यादा हार्श पर्सनल हाइजीन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें: प्राइवेट पार्ट में हार्श साबुन, सुगंधित प्रोडक्ट्स का उपयोग करने से बचें.  ये प्रोडक्ट्स बैक्टीरिया के प्राकृतिक संतुलन को बाधित कर सकते हैं और मूत्रमार्ग में परेशानी पैदा कर सकते हैं, जिस से यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे प्रोडक्ट्स के बजाय हलके, खुशबू से मुक्त क्लींजर चुनें और बहुत ज्यादा धुलाई या स्क्रबिंग न करें.

इरिटेटिंग गर्भनिरोधक उपायों का प्रयोग न करें: कुछ गर्भनिरोधक जैसेकि स्पर्मिसाइड (शुक्राणुनाशक) या डायाफाम का उपयोग करने से यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाता है. अगर आप यूटीआई से ग्रस्त हैं तो वैकल्पिक गर्भनिरोधक विकल्पों पर विचार करें या आप के लिए जो गर्भनिरोधक सब से सही हो, उस के बारे में डाक्टर से कंसल्ट करें:

सैक्स के बाद पेशाब न रोकें: सैक्स के बाद पेशाब करने में देरी नहीं करनी चाहिए. सैक्स के दौरान मूत्रपथ में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया को तुरंत बाहर निकालना जरूरी होता है. सैक्स के 30 मिनट के अंदर पेशाब करने से यूटीआई का खतरा काफी कम हो सकता है.

ऐंटीबायोटिक का सेवन ज्यादा न करें:यूटीआई के इलाज के लिए ऐंटीबायोटिक्स जरूरी हैं, लेकिन इन का बहुत ज्यादा और अनावश्यक सेवन ऐंटीबायोटिक रिजिस्टैंस पैदा कर सकता

है.  खुद से दवा न करें और सही डायग्नोसिस तथा इलाज के लिए हमेशा डाक्टर से कंसल्ट

करें. डाक्टर संक्रमण पैदा करने वाले खास बैक्टीरिया के आधार पर सब से उपयुक्त ऐंटीबायोटिक लिखेंगे.

यह याद रखना बहुत जरूरी है कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है. इन सब दिशानिर्देशों का पालन कर के आप यूटीआई को होने से रोक सकते हैं. अगर आप दर्द, बारबार पेशाब आना या धुंधला पेशाब जैसे लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो उचित डायग्नोसिस और इलाज के लिए तुरंत डाक्टर से सलाह लेनी जरूरी है. उचित देखभाल और ध्यान से आप अपने मूत्रपथ की रक्षा कर सकते हैं और संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं.

ब्रा कोई गुप्त चीज नही

ढीले और लटकी ब्रैस्ट देखने में भद्दी लगती है. अकसर ऐसा बड़ी उम्र में होता है. लेकिन कई बार ऐसा छोटी उम्र में भी देखने को मिलता है. इस की वजह है ब्रा न पहनना. ढीली और लटकी ब्रैस्ट बिलकुल अट्रैक्टिव नहीं होती है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि ब्रा को दिनभर पहने रहना आसान नहीं होता है.

ब्रा से जुड़ा अपना ऐक्सपीरियंस बताते हुए 24 साल की रचना यादव कहती है, ‘‘मु?ो शुरूशुरू में ब्रा पहनना बिलकुल पसंद नहीं था. लेकिन धीरेधीरे यह मेरी आदत में शामिल हो गया. टीनऐज में जब मां मु?ो ब्रा पहनने को कहती थीं तो मु?ो बहुत गुस्सा आता था क्योंकि मैं कपड़े का एक और बो?ा अपने शरीर पर लादना नहीं चाहती थी. लेकिन मु?ा से कहा गया कि मैं अब बड़ी हो रही हूं. मेरी बौडी में तरहतरह के बदलाव हो रहे हैं और इन में लड़की की छाती बहुत महत्त्वपूर्ण होती है. इन बदलाव में मेरी ब्रैस्ट उभरने लगेगी. इसलिए मु?ो ब्रा पहननी चाहिए.

‘‘मगर ब्रा पहनना आसान नहीं था. सब से ज्यादा मुश्किल इसे पूरा दिन पहने रखना था. ब्रा पहनने के बाद मु?ो अपनी बौडी बंधीबंधी सी लगने लगी. लेकिन फिर यह धीरेधीरे मेरी हैबिट में आ गया. अब ब्रा न पहनूं तो अजीब सा लगता है. ऐसा लगता है जैसे कुछ खाली सा हो.’’

खुद की चौइस होनी चाहिए

कंफर्ट की बात पर रचना कहती है, ‘‘शुरूशुरू में यह बिलकुल कंफर्टेबल नहीं था. सांस लेने में दिक्कत होती थी. अकसर ब्रा की स्ट्रैप से निशान पड़ जाते थे. गरमी के मौसम में ये दिक्कतें और बढ़ जाती थीं जैसे पसीने आना, ब्रैस्ट और उस के आसपास खुजली होना.

इतना ही नहीं कई बार ब्रा से रैशेज भी पड़ जाते थे. इन सब के बावजूद ब्रा पहनने से ब्रैस्ट सही पोजीशन में रहती है. वह कसी रहती है. लटकती नहीं है. इतना ही नहीं अलगअलग ऐक्टिविटीज करते समय यह उछलते भी नहीं है, जिस की वजह से यह भद्दी नहीं लगती है. इसे पहनने से मैं कौन्फिडैंट फील करती हूं. मैं ब्रा पहनने के पक्ष में हूं. लेकिन हां मैं इसे पूरा दिन पहनने के पक्ष में नहीं हूं. इसलिए मैं इसे रात को उतार कर सोना पसंद करती हूं.’’

नई दिल्ली के एक बुक स्टोर में जौब कर ने वाली प्रीति तिवारी कहती है, ‘‘पूरा दिन ब्रा पहने रहना अनकंफर्टेबल होता है. जब मैं ने पहली बार ब्रा पहनी थी तो मु?ो ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी ब्रैस्ट को जकड़ लिया हो. मु?ो लगा जैसे मैं अब सांस नहीं ले पाऊंगी. मैं बस इसे उतार कर फेंकना चाहती थी. लेकिन कई दिनों तक इसे पहनने के बाद मु?ो धीरेधीरे इस की आदत पड़ गई.

‘‘ब्रा से होने वाली परेशानी को मैं इस गंदी सोसाइटी के आगे भूल गई थी. मैं बिना ब्रा के बाहर जाने में बिलकुल कंफर्टेबल नहीं हूं. लेकिन यह भी सच है कि घर आते ही मैं इसे उतार देती हूं. इसे उतारने पर ही मु?ो राहत मिलती है. मैं फ्री फील करती हूं. मैं सम?ाती हूं ब्रा पहनना न पहनना लड़की की अपनी चौइस होनी चाहिए न कि सोसाइटी का डर, जिस की वजह सी उसे ब्रा पहननी पड़ रही है.’’

मगर सवाल यह है कि इतनी प्रौब्लम्स होने के बाद भी लड़कियों और महिलाओं को ब्रा क्यों पहननी पड़ती है? इस के उत्तर में निधि धावरिया कहती है, ‘‘महिलाओं पर पितृसत्तात्मक सोच का बो?ा है जो उन्हें बातबात पर यह बताती है कि आप के लिए क्या सही है और क्या नहीं. अगर कोई महिला सभ्य तरीके से कपड़े पहनने के पितृसत्तात्मक तरीकों को मानने से इनकार कर देती है, तो उसे फूहड़ कहा जाता है. इन्होंने आदमीऔरत की बनावट के आधार पर न सिर्फ उन के अधिकारों को बांटा है बल्कि उन के कपड़े भी बांट दिए हैं. पुरुषवादी समाज ने हमेशा ही महिलाओं को अपने अंदर रखने की कोशिश की है.

‘‘वे चाहते हैं कि महिलाएं बस उन का कहना मानें. लेकिन इस के उलट महिलाएं पुरुषों की इस रूढि़वादी सोच का हिस्सा नहीं बनना चाहती हैं. वे चाहती हैं कि ब्रा पहननी है या नहीं इस का फैसला वे खुद करें न कि यह दकियानूसी बातें करने वाला पुरुषवर्ग.’’

ब्रा पर थोपी पुरुषवादी सोच

उत्तर प्रदेश से दिल्ली आ कर बसने वाली 26 वर्षीय मानवी राय कहती है, ‘‘गांवों में ब्रा को ‘बौडी’ कहते हैं. कई शहरी लड़कियां इसे ‘बी’ कह कर बुलाती हैं. हमारे गांव में ब्रा बोलने भर से तूफान मच जाता था. लेकिन अब लड़कियां अपनी आजादी को ले कर ज्यादा जागरूक हो गई हैं. वे सम?ा गई हैं कि ब्रा उन पर थोपी गई एक पुरुषवादी सोच है. इसीलिए अब कई महिलाएं ब्रा का विरोध करने लगी हैं. आज दुनियाभर में कई ऐसी महिलाएं है जिन्होंने ब्रा को ‘नो’ कह कर उसे न पहनने से इनकार कर दिया.’’

कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं जो ब्रा पहनना पसंद नहीं करती हैं. 2017 में साउथ कोरिया की मौडल और ऐक्ट्रैस सूली ने एक फैमनिस्ट कैंपेन शुरू किया, जिसे ‘नो ब्रा मूवमैंट’ नाम दिया गया. उन्होंने अपने सोशल अकाउंट पर बिना ब्रा के टौप पहने पिक्चर अपलोड की. इस का परिणाम यह रहा कि महिलाएं वर्किंग और पब्लिक प्लेस पर विदाउट ब्रा घूमने लगीं. इस मुहिम ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था. महिलाएं हैशटैग नो ब्रा लिख कर बिना ब्रा के कपड़े पहन कर अपनी तसवीरें सोशल मीडिया पर शेयर करने लगीं.

नैशनल नो ब्रा डे

ऐसा ही एक ग्रुप महिलाओं का है, जिसे ‘फैन’ के नाम से जानते हैं जो अपने विरोध के अनोखे तरीकों के लिए जाना जाता है. यह गु्रप अपनी छाती को ढकता नहीं था. इसलिए यह चर्चा का विषय था. इसी की तरह 1960 में ‘ब्रा बर्निंग’ नाम का मूवमैंट आया. इस में महिलाएं अपना विरोध जताने के लिए ब्रा को जलाया करती थी. वहीं कुछ महिलाएं ब्रा न जला कर उन्हें कूड़ेदान में फेंक देती थीं. यह उन का विरोध जताने का एक अनोखा तरीका था. भारत में हर साल 13 अक्तूबर को ‘नैशनल नो ब्रा डे’ मनाया जाता है. यह ब्रैस्ट कैंसर के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है.

ब्रा न पहनने का पक्ष लेने वाली कोलकाता की 22 साल की विनिता मुखर्जी की भी कुछ ऐसी ही राय है. वह कहती है, ‘‘हम खुद के शरीर के साथ अनकंफर्टेबल फील करेंगे तो दूसरों को भी ऐसा एहसास होगा. पहले मु?ो बिना ब्रा के पब्लिक प्लेस पर जाने में प्रौब्लम होती थी लेकिन धीरेधीरे मैं कंफर्टेबल हो गई. लेकिन मैं यही कहूंगी कि लड़कियां और महिलाएं खुद फैसला करें कि उन्हें ब्रा पहननी है या नहीं.

विदाउट ब्रा घर से बाहर जाने पर महिलाओं की सोच मिलीजुली है. दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में ब्यूटीपार्लर चलाने वाली 32 वर्षीय वीणा दुबे कहती है, ‘‘वैसे तो ब्रा हमारी बौडी पर एक ऐक्ट्रा कपड़ा ही है, लेकिन हमारी सोसाइटी ने हमारे माइंड में यह फिट कर दिया है कि महिलाओं को बिना ब्रा के बाहर नहीं निकलना चाहिए. यह उन के सभ्य दिखने के लिए बहुत जरूरी है. इन लोगों ने ब्रा को हमारी आदत बना दिया है. इसलिए हम अब खुद को बिना ब्रा के देख कर अनकंफर्टेबल फील करते हैं.’’

वीणा की ही तरह मुंबई की रहने वाली योगा इंस्ट्रक्टर सूर्यंका मिश्रा कहती है, ‘‘विदआउट ब्रा के घर से बाहर निकलने के बारे में मु?ो सोच कर ही अजीब सा लगता है. ब्रा ब्रैस्ट को सपौर्ट करती है. अगर ब्रा नहीं पहनेंगी तो ब्रैस्ट लटकने लगेगी. ब्रा न पहनने से कम उम्र की महिलाएं भी ज्यादा उम्र की लगने लगती है. वहीं ब्रा के पहनने के बाद कपड़ों की फीटिंग भी अच्छी आती है. टौप के नीचे ब्रा पहनी लड़की विदाउट ब्रा पहने लड़की से ज्यादा अटैक्ट्रिव लगती है. लेकिन फिर भी ब्रा पहनना आप की अपनी चौइस है.’’

कई बार टीनऐज में लड़कियों को ब्रा के बारे में नौलेज नहीं होता है. इसलिए वे ब्रा नहीं पहन पातीं. यही कारण है कि उन की ब्रैस्ट लटकने लगतर है. ऐसा अकसर स्लम एरिया में देखने को मिलता है.

ब्रा का इतिहास

अगर इतिहास उठा कर देखा जाए तो ऐसा नहीं है कि महिलाओं ने हमेशा ही ब्रा पहनी है या कहें अपनी छाती को ढका है. ब्रा कैसे अस्तित्व में आई इस के लिए यह जानना जरूरी है कि ब्रा शब्द है क्या. असल में ब्रा फ्रैंच शब्द ‘ब्रासिएर’ का छोटा रूप है, जिस का शाब्दिक अर्थ होता है शरीर का ऊपरी हिस्सा.

अगर बात करें दुनिया की पहली मौडर्न ब्रा कहां बनी थी, तो इस का जवाब है फ्रांस में. 1869 में फ्रांस की हर्मिनी कैडोल ने एक जैकेटनुमा पोशाक को 2 टुकड़ों में काट कर अंडरगार्मैंट्स बनाए थे. बाद में इस के ऊपर का हिस्सा ब्रा की तरह पहना और बेचा जाने लगा.

रोमन औरतें स्तनों को छिपाने के लिए छाती वाले हिस्से के चारों तरफ एक कपड़ा बांध लेती थीं. वहीं ग्रीक औरतों की बात करें तो वे एक बैल्ट के जरीए ब्रैस्ट को उभारने की कोशिश करती थीं. ये सब ब्रा के शुरुआती रूप थे. वहीं आज जैसी ब्रा आज हम दुकानों में देखते हैं वैसी अमेरिका में 1930 में बननी शुरू हुई थीं.

महिलाएं हमेशा से ब्रा पहनती नहीं आई हैं. उन्हें ब्रा का तोहफा या कहें बेहूदा तोहफा देने के पीछे पुरुषों की साजिश थी. वे महिलाओं को हमेशा आकर्षण की वस्तु मानते आए हैं. वहीं ब्रा एक सैक्सुअली कपड़ा है. अगर महिला ब्रा पहनेंगी तो वह सैक्सी लगेगी और पुरुष उसे भोगने के लिए उत्सुक होंगे.

दूसरा कारण है बिजनैस. ब्रा के बिना भी काम चल सकता है. लेकिन अपने व्यापार का क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापारियों ने ब्रा को ईजाद किया. इस के बाद धीरेधीरे अलगअलग  तरह की ब्रा बना कर अपने बिजनैस को बढ़ाते चले गए.

नहीं पहनना कितना कंफर्टेबल होता है

अगर बात कंफर्ट की की जाए तो पूरा दिन ब्रा पहनना बिलकुल कंफर्टेबल नहीं होता है. इसलिए घर पर अकेले रहने वाली लड़कियां

और महिलाएं ब्रा नहीं पहनती हैं. लगभग हर लड़की और महिला रात को सोने से पहले ब्रा उतार देती है.

पूरी दुनिया जब कोविड की चपेट में थी तब ब्रा की बिक्री में गिरावट देखी गई. कोविड-19 के समय में वर्क फ्रौम होम चल रहा था. ऐसे में ज्यादातर महिलाएं घर पर ही थीं. वर्क फ्रौम होम करने वाली महिलाएं कंफर्टेबल फील करने के लिए घर पर ब्रा पहनना अवौइड करती थीं.

33 साल की रागिनी खन्ना पेशे से टीचर है. वह बताती है, ‘‘कोविड के समय स्कूलकालेज सब बंद थे. लेकिन देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों की पढ़ाई में कोई रुकावट न हो इसलिए सरकार ने औनलाइन क्लासेज शुरू कीं. इस समय सभी टीचर्स ने बच्चों को औनलाइन पढ़ाया. वह बताती है मेरी जब औनलाइन क्लास होती थी तो मैं ब्रा पहनती थी. लेकिन क्लास खत्म होते ही मैं ब्रा उतार देती थी. बिना ब्रा के रहना मु?ो ज्यादा कंफर्टेबल फील कराता था.

‘‘पूरा दिन ब्रा पहनना बिलकुल कंफर्टेबल नहीं होता है. ऐसे लगता है जैसे किसी ने सांसें रोक ली हों. वहीं अगर विदाउट ब्रा रहें तो फ्रीफ्री सा फील होता है. बौडी एकदम रिलैक्स लगती है. ऐसा लगता है जैसे कोई बो?ा हट गया हो. मगर ब्रा पहनने के क्या फायदे और नुकसान हैं यह जानना बहुत जरूरी है.’’

दिल्ली के बतरा हौस्पिटल की एमबीबीएस डाक्टर श्रुति गुप्ता कहती हैं, ‘‘ब्रैस्ट ह्यूमन फीमेल बौडी का महत्त्वपूर्ण पार्ट होता है. फीमेल बौडी में ब्रैस्ट अट्रैक्शन का मुख्य केंद्र होती है. बिना ब्रा के रहने से स्तन कैंसर होने की संभावना को कम किया जा सकता है.

‘‘ब्रा ब्रैस्ट डैवलपमैंट में हैल्प करती हैं. इसे न पहनने से ब्रैस्ट डैवलपमैंट में प्रौब्लम आती है. जो लड़कियां या महिलाएं ब्रा नहीं पहनती हैं उन की ब्रैस्ट लटकने लगती है. इतना ही नहीं ब्रा न पहनने से ब्रा का साइज बढ़ जाता है. लेकिन यह भी सच है कि 12 घंटे से ज्यादा देर तक ब्रा पहनना हानिकारक होता है. रात को ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है. इसलिए रात को ब्रा उतार कर सोना चाहिए.’’

आप खुद करें फैसला

मोनिका गुप्ता कहती है, ‘‘एक सही ब्रा आप की ड्रैस में चार चांद लगा देती है. कई ड्रैसेज ऐसी होती हैं जिन के लिए अलगअलग तरह की ब्रा चाहिए होती है. बिना ब्रा के वह ड्रैस उतनी खास नहीं लगेगी जितनी ब्रा के साथ. ऐसे में ब्रा को अवौइड करना सही नहीं होगा.

ब्रा ही तो है

तुम्हारी ब्रा का स्ट्रैप दिख रहा है, इसे ठीक करो. तुम अपनी ब्रा को बाहर बालकनी में मत सुखाया करो. कोई देख लेगा तो क्या कहेगा. तुम अपनी ब्रा को अपनी अलमारी में छिपा कर क्यों नहीं रखती हो. इस तरह की बातें हर लड़की ने अपनी लाइफ में कभी न कभी जरूर सुनी होंगी. सवाल यह है कि यह सिर्फ एक कपड़ा है न कि कोई गुप्त चीज.

नहाने जाते वक्त भी महिलाएं अपने अंडरगारमैंट्स को कपड़ों में छिपा कर ले जाती हैं. यही नहीं ब्रा को सुखाते समय इसे दूसरे कपड़ों के नीचे छिपा कर रखती हैं ताकि वह किसी को दिखाई न दे सके.

वक्त के साथसाथ बड़ेबड़े बदलाव तो हुए, लेकिन आज भी समाज में ब्रा को देखना एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है. अगर किसी लड़की या महिला की ब्रा स्ट्रैप दिखाई देती है तो लोग उसे अजीब तरीके से देखते हैं. टिप्पणियां करने लगते हैं. उसे बिना संस्कार वाली लड़की सम?ा जाता है. इस सोच को बदलना बहुत जरूरी है. ब्रा की स्ट्रैप दिखना कोई बड़ी बात नहीं है. यह बहुत ही सामान्य है. बिलकुल वैसे ही जैसे पुरुषों की बनियान की स्टैप दिखाई देती है.

शारदा मैम: भाग 2- आखिर कार्तिक को किसने ब्लैकमेल किया ?

दूसरे दिन कार्तिक सुबह लेट उठा. रात को नींद नहीं आई ठीक से. बाबूजी मौर्निंग वाक पर गए हुए थे. अपार्टमैंट के नजदीक गार्डन था. बाबूजी वहीं जाया करते थे. कभीकभी मां भी चली जाती थी. बाबूजी गार्डन से आए तो कार्तिक नहा कर रैडी हो चुका था. मां नाश्ते की तैयारी कर रही थी. बाबूजी ने आते ही खुशी के मारे कार्तिक को बुलाया.

कार्तिक बोला, ‘‘बाबूजी क्या हुआ बड़े खुश हैं?’’

‘‘हां, बात ही कुछ ऐसी है खुशी की. दीपा तुम भी किचन से बाहर आओ.’’

‘‘क्या हुआ?’’ दीपा किचन से बाहर आतेआते बोली.

‘‘गार्डन में गांव से फोन आया था. अपने पड़ोसी हैं रमेशजी उन की लड़की वाराणसी में रह कर पढ़ाई कर रही है तनुजा. उस के रिश्ते के लिए उन्होंने कहा. अगर तनुजाकार्तिक एकदूसरे को पसंद कर लेते हैं तो दोनों की शादी की जा सकती है,’’ बाबूजी की खुशी साफ चेहरे पर झलक रही थी.

‘‘यह तो बहुत बड़ी शुभ खबर है,’’ दीपा बोली.

‘‘मगर मां पहले भी एक जगह रिश्ता टूट चुका है. फिर टूट जाएगा,’’ कार्तिक टैंशन में था.

‘‘ऐसे कैसे टूट जाएगा? बारबार क्यों टूटेगा,’’ अब बाबूजी भी टैंशन में थे.

‘‘मैं बस बता रहा था कि कहीं यह रिश्ता भी टूट गया तो?’’ कार्तिक बोला.

‘‘ऐसा कुछ नहीं होता है. तुम टैंशन फ्री रहो,’’ मां बोली, ‘‘चलो नाश्ता करो मैं टेबल पर नाश्ता लगाती हूं,’’ मां ने भी खुशी के मारे हलवा भी बना लिया था.

कार्तिक सोच रहा था, इस बार भी शारदा मैम तक बात जाएगी और वह पहले रिश्ते की तरह रिश्ता तुड़वा देगी. पहले भी उस ने ऐसा ही किया था. लड़की वालों को बता दिया था कि कार्तिक आवारा और लफंगा है. शराबी और बिगडैल है. लड़की वालों ने बिना सोचेसमझे रिश्ता तोड़ दिया. शारदा मैम ने उन को यह भी बोला कि एक बार उस से भी जबरदस्ती करने की कोशिश की थी. आप की लड़की की जिंदगी बरबाद हो जाएगी. ये सब बातें उस लड़की ने बताईं जिस के साथ रिश्ता होने वाला था. अपनी जीत पर खुश हुई थी शारदा मैम. देखती हूं शादी कैसे होती है?

‘‘मां,’’ कार्तिक ने दीपा को आवाज लगाई.

‘‘बोल,’’ दीपा बोली.

‘‘मां जब तक बात पक्की नहीं होती है तब तक तुम किसी को मत बोलना प्लीज,’’ कार्तिक बोला.

‘‘अरे, खुशी की खबर है. अपने जो पड़ोसी हैं उन्हें तो बताएंगे न. जब बात पक्की करेंगे तो घर में कुछ लोग होने चाहिए. गांव से अब कोई नहीं आ पाएगा. शादी में आएंगे सब,’’ दीपा ने बताया.

मां को कौन समझए कार्तिक टैंशन में था.

दूसरे ही दिन रमेशजी का फोन आ गया कि वे हफ्तेभर बाद आ रहे हैं. यदि

तनुजाकार्तिक एकदूसरे को पसंद कर लेते हैं तो बात पक्की कर देंगे.

मांबाबूजी खुशी के मारे तैयारी में जुट गए. मां ने अपने पड़ोसियों को न्योता दे दिया, खबर भी कर दी कि हफ्तेभर बाद लड़की वाले बात पक्की करने आ रहे हैं.

‘‘कार्तिक डार्लिंग बात ही पक्की हो रही है शादी नहीं,’’ मां के खबर देने के बाद ही शारदा मैम के मोबाइल से मैसेज आ गया, ‘‘हमारा प्रेम तो अमर है. हम कैसे दूर हो सकते हैं?’

जब कार्तिक ने मैसेज का जवाब नहीं दिया तो सीधी कार्तिक के घर आ गई. दीपा उस से बड़ी प्रभावित थी उन की फराटेदार अंगरेजी से. वे मुंबई की लोकल थी. इसलिए कहीं भी आनाजाना होता तो दीपा शारदा मैम के साथ ही जाती थी.

‘‘कोई हैल्प की जरूरत हो तो बताना प्लीज,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘जी जरूर बताएंगे आप को,’’ दीपा बोली.

‘‘कार्तिक बेटा नर्वस क्यों हो?’’ शारदा मैम ने कार्तिक के गालों को सहला दिया.

‘‘बेटा, छि:… छि:… कितनी घटिया औरत है,’’ कार्तिक ने मन में कहा.

आखिरकार वह दिन आ गया जब तनुजा के परिवार वाले आए. बुधवार के दिन वे सवेरे पहुंच गए थे. 4 कमरों का बड़ा फ्लैट था. इसलिए किसी को कोई परेशानी नहीं हुई रुकने की.

तनुजा ने तो कार्तिक को देखते ही फैसला ले लिया कि कार्तिक से शादी के लिए हां कर देगी. लगभग 23 वर्षीय तनुजा देखने में सुंदर थी, साथ ही कार्तिक के मातापिता के स्वभाव से भी परिचित थी. वाराणसी में पड़ोसी थे दोनों, इसलिए तालमेल बैठाने में कोई परेशानी नहीं आएगी.

सफर की थकान के कारण कार्तिक की मां ने नाश्ता तनुजा के परिवार वालों को रूम में ही पहुंचा दिया. तय हुआ कि दोपहर के खाने के पहले बात पक्की करने की रस्म पूरी कर ली जाए. तनुजा के परिवार वालों ने भी तैयारी पूरी कर ली थी मिठाई, ड्राईफ्रूट, कपड़े आदि सब तैयार थे. तनुजा ने पिंक कलर की साड़ी के साथ मोतियों का सैट पहना था. जब वह तैयार हो कर बाहर आई तो कार्तिक देखता रह गया कि कितनी प्यारी लग रही है तनुजा.

‘‘क्या देख रहे हो कार्तिक?’’ तनुजा बोली.

‘‘कुछ नहीं,’’ कह कर कार्तिक भी मुसकरा दिया. पड़ोसी आ गए थे. पड़ोसियों में शारदा मैम भी आ चुकी थीं. भड़कीली साड़ी के साथ गहरा मेकअप किए.

‘‘हाय कार्तिक… कैसे हो बेटे?’’ कहतेकहते उस ने कार्तिक को गले लगाया फिर तनुजा से बोलीं.

‘‘कैसे लग रहे हैं हम दोनों?’’

‘‘मतलब?’’ तनुजा समझ नहीं पाई.

‘‘अरे यार, कार्तिक भी बेटे जैसा है मेरे, मांबेटे की जोड़ी कैसी लग रही है?’’ शारदा मैम बोली.

कार्तिक एकदम से दूर हटा और बोला, ‘‘मैं किचन में देखता हूं, कुछ काम हो मां को.’’

‘‘अरे मैं हूं,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘मैं देख लूंगी डियर,’’ कह कर उस ने कार्तिक के गानों को सहला दिया,’’ बड़े प्यारे, हैंडसम लग रहे हो, हमें भूल मत जाना, पुराने दोस्तों को,’’ कहती हुई किचन में चली गई.

तनुजा कुछ समझ नहीं पा रही थी. वह उस के व्यवहार को ले कर चुप रही.

दोनों परिवार खुश थे. कार्तिक ने तनुजा ने रिश्ते के लिए हां कर दी थी. मुंह मीठा कराने के साथ ही शगुन के साथ दोनों परिवार वाले आशीर्वाद देने लगे थे. पड़ोसी भी खुश थे.

‘‘चलो अब लंच की तैयारी की जाए. टेबल पर सजा दिया जाए खाना,’’ कहती हुई दीपा किचन में चली गई. हाथ बंटाने के लिए तनुजा की मम्मी भी किचन में आ गई. पीछेपीछे शारदा मैम भी आ गईं.

दीपा ने कहा, ‘‘शारदा मैम से हमारे अच्छे संबंध हैं.’’

‘‘अच्छा लगा आप से मिल कर,’’ तनुजा की मम्मी बोली.

‘‘रियली,’’ शारदा मैम इतराईं.

‘‘अरे, कार्तिक.’’

‘‘जी मैम,’’ किचन में आता हुआ कार्तिक बोला,

‘‘देखो मुंबई के तौरतरीके सब सिखा देना तनुजा को, रहना यहीं है मुंबई में,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘वह खुद ही सीख लेगी, मैम, स्मार्ट है, ऐजुकेटेड है तनूजा.’’

‘‘अच्छाजी, हम से ज्यादा स्मार्ट नहीं,’’ कह कर शारदा मैम ने बाईं आंख दबाई.

तनुजा को अजीब सा लग रहा था.

‘‘तनुजा अपना मोबाइल नंबर दो न प्लीज, अभी जो पिक है वह भेजूंगी,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘मैं पिक भेज दूंगा तनुजा को,’’ कार्तिक बोला.

‘‘अरे, तुम कहां आ रहे हो लेडीज में,’’ तुम बाहर जाओ शारदा मैम बोली. फिर तनुजा से मोबाइल नंबर ले लिया.

उस का सपना: भाग 2-किस धोखे में जी रही थी तृप्ति?

अगले ही दिन उस ने कंपनी को अपना इस्तीफा सौंप दिया और ग्रूमिंग इंस्टिट्यूट जौइन कर लिया. वहां उसे पहले बेसिक जानकारी दी गई और बताया गया कि आगे उस की चालढाल, खानेपीने का तरीका और बात करने का स्टाइल भी सिखाया जाएगा. उस की ड्रैसिंग सैंस, हेयरस्टाइल, मेकअप और बौड़ी फिटनैस पर भी डिटेल से बात होगी.

ग्रूमिंग इंस्टिट्यूट जौइन करने के बाद तृप्ति अब और भी ज्यादा बिजी रहने लगी थी. अब उस के आने जाने का समय निश्चित नहीं रहता था. किसी दिन ग्रूमिंग क्लास बहुत देर तक चलते और कभीकभी वह बहुत जल्दी भी फ्री हो जाती और घर आ जाती. एक दिन वैसे ही वह जल्दी फ्री हो गई और घर आ रही थी.

अभी वह लिफ्ट से दूर ही थी कि उस ने देखा अमित एक लड़की के साथ निकल रहा है. वह चौंक पड़ी. उस के दिमाग में सवाल कौंधा कि यह लड़की कौन है जिसे अमित अपने घर ले कर आया है. वह लड़की दिखने में बहुत खूबसूरत नहीं थी, लेकिन एक अजीब सा आकर्षण था उस में. वह तृप्ति की तरह दुबलीपतली नहीं बल्कि सुडौल बौडी की लड़की थी.

इस घटना के बाद एक दिन और तृप्ति ने अमित को उसी लड़की के साथ एक मौल में देखा. यह देख कर वह अंदर से थोड़ी परेशान हो गई. कहीं न कहीं वह लड़की अमित के काफी क्लोज है, यह बात तृप्ति को समझ आने लगी. अब वह अमित पर नजर रखने लगी. वह यह भी ध्यान देने लगी कि अमित आजकल हर समय किसी से फोन में लगा रहता है या फिर उस की व्हाट्सऐप पर बातें होती रहती हैं. कई बार वह इयरफोन लगा कर बिजी रहता.

एक दिन अमित नहाने गया हुआ था. तब तृप्ति ने उस का फोन चैक करने की कोशिश की मगर अमित का फोन लौक था. इसलिए उसे कुछ पता नहीं चल सका. ऐसे ही एक दिन जब अमित वाशरूम में था तभी उस का मोबाइल बजा. तृप्ति जल्दी से मोबाइल के पास गई तो देखा कि स्क्रीन पर काजल नाम ब्लिंक कर रहा है. उस ने फोन रिसीव कर लिया.

सामने से मीठी सी आवाज आई, ‘‘हैलो डियर, क्या बात है आज तुम ने बड़ी देर में फोन उठाया? अब यह बताओ कि कब मिल रहे हैं?’’

यह सुन कर तृप्ति के दिलोदिमाग में हलचल सी मच गई. लेकिन उस ने इसे जाहिर नहीं होने दिया और चुपचाप फोन काट कर अपने काम में लग गई. मोबाइल फिर से बजा और तब तृप्ति ने कौल रिसीव कर के लड़की से कहा, ‘‘अभी अमित बिजी है. वैसे तुम हो कौन?’’

काजल बोली, ‘‘मैं काजल हूं उस के औफिस में काम करती हूं और वह मेरा दोस्त है.’’

काजल ने व्हाट्सऐप कौल किया था और तृप्ति को उस का फेस नजर आ रहा था. यह चेहरा उसी लड़की का था जिसे उस ने अपने घर से निकलते हुए देखा था. तृप्ति सम?ा रही थी कि दाल में कुछ काला जरूर है. फिर दिल के एक कोने से आवाज आई कि हो सकता है वह औफिस कुलीग के सिवा कुछ न हो. मगर मन का एक कोना जिरह कर रहा था. उसे महसूस हुआ जरूर अमित इस लड़की के प्यार में है तभी आजकल वह करीब आने के लिए फोर्स नहीं करता. तृप्ति अब हर समय अमित का मोबाइल और उस का दिल टटोलने की कोशिश करती.

एक दिन तृप्ति ने अमित से पूछा, ‘‘यह काजल कौन है?’’

तब अमित ने बताया, ‘‘मेरी कुलीग है. मुझ से भी ज्यादा इनकम है उस की और जानती

हो उस का ऐटीट्यूड मुझे बहुत पसंद है.’’

‘‘अच्छा, और क्याक्या पसंद है?’’

‘‘तुम्हारी आंखें, तुम्हारा चेहरा.’’

‘‘मैं अपनी नहीं काजल की बात कर रही हूं.’’

‘‘अरे यार तुम भी न ज्यादा सोचने लग जाती हो. तुम्हें पसंद करने के बाद किसी और को पसंद करने का समय किस के पास है,’’ कह कर उस ने तृप्ति को अपनी तरफ खींच लिया.

तृप्ति पूरे मन से अमित की आंखों में खो गई. इन आंखों में उसे अपने लिए प्यार नजर आया. कोई धोखा कोई दगाबाजी नजर नहीं आ रही थी. मगर तृप्ति को एक बड़ा धक्का तब लगा जब अमित उस का बर्थडे ही भूल गया. उस दिन सुबह से ही वह प्लान बना रही थी कि अमित के साथ कहीं बाहर जाएगी. उसने अपना बर्थडे याद तो नहीं दिलाया मगर अमित से यह जरूर कहा कि आज जल्दी आ जाए. तृप्ति खुद भी जिम नहीं गई और देर तक तैयार होती रही. उसे पूरा यकीन था कि हर साल की तरह अमित उसे सरप्राइज देगा. मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ. उलटा वह रात में बहुत देर से आया.

तृप्ति कपड़े बदल चुकी थी और मुंह फुला कर बैठी हुई थी. तभी अमित आया और आते ही वह मोबाइल में लग गया. फिर जल्द ही सोने भी चला गया. तब वह पूरी रात जागती रही और सोचती रही कि उस से गलती कहां हुई है. वह तो अमित के सपनों को पूरा करने की कोशिश में लगी हुई है और इसी वजह से अपने रिश्ते पर या किसी और चीज पर भी ध्यान नहीं दे पा रही है.

अपनी जौब भी उसे छोड़नी पड़ी ताकि अमित खुश रहे. मगर वह तो अपनी ही दुनिया में मग्न हो चुका था. तृप्ति का मन बहुत खालीखाली सा हो गया. वह सोचने लगी कि क्या सचमुच अमित पहले की तरह उसे अब प्यार नहीं करता.

तृप्ति ने खुद को मिरर में देखा. न तो पहले जैसी रौनक उस के चेहरे पर थी और न बदन पर. अब वह स्लिमट्रिम तृप्ति बन चुकी थी. शरीर में हड्डियां ज्यादा दिख रही थीं और मांस कम हो गया था. इस दौरान उस ने कम से कम 10 किलोग्राम वजन घटा लिया था. उसे खुद ही अपना यह रूप अच्छा नहीं लग रहा था, जबकि एक मौडल बनने के लिए उसे यह सब करना पड़ा था. अमित के सपने को पूरा करने के लिए वह तनमन से जुटी हुई थी. पर अब उसे अपने अंदर कुछ टूटा हुआ सा महसूस होने लगा था.

अगले दिन तृप्ति ने अमित से कोई बात नहीं की और सुबहसुबह मौर्निंग वाक के लिए घर से निकल गई. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. वह अपने जीवन में आए इस मोड़ पर विचार करना चाहती थी कि उसे अब क्या करना चाहिए. वह तब तक घर वापस नहीं लौटी जब तक कि अमित के औफिस जाने का समय नहीं हो गया. जब उसे लगा कि अमित जा चुका होगा तो वह वापस घर पहुंची. आज न तो वह ग्रूमिंग क्लास के लिए गई और न ही जिम.

तृप्ति ने बहुत सोचा फिर उसे लगा चलो एक बार अंतिम कोशिश की जाए. इसलिए वह शाम को बहुत खूबसूरत और हौट सी ड्रैस पहन कर और अच्छी तरह सजसंवर कर अमित के आने का इंतजार करने लगी. अमित आया तो वह अपनी अदाओं के तीर चलती हुई उस के करीब आई. तृप्ति ने उस के लिए पहले ही खाना बना कर रखा था. वह खाना परोसने लगी.

मगर अमित ने साफ मना कर दिया, ‘‘नहीं यार आज बाहर से खा कर आया हूं.’’

Monsoon Special: मौनसून में ऐसे करें घर की देखभाल

मानसून में घर की, खासकर लकड़ी के फर्नीचर और दरवाजे-खिड़कियों की देखभाल बहुत जरूरी होती है, वरना मानसून के बाद उनका आकार और रंग, दोनों खराब हो सकता है. अगर आप अपना घर बारिश के लिए तैयार नहीं रखती हैं तो यह मौसम भारी मुसीबत का कारण बन सकता है. बारिश का मतलब है नमी, बदबू मारते कपड़े, अलमारियों में फंगल इंफेक्शन और भी बहुत कुछ. इसलिए इस खूबसूरत मौसम का मजा आप ले सकें, इसके लिए आपको थोड़ी-सी तैयारी करनी होगी…

फर्नीचर की देखभाल करें

मौसम की नमी लकड़ी की गुणवत्ता और शेप पर बहुत बुरा असर डालती है. इसमें फंगस जमा हो सकती है. इस मौसम में हल्के गीले कपड़े की बजाय साफ-नरम और सूखे कपड़े से फर्नीचर साफ करें. लेमिनेटेड फर्नीचर जैसे स्टडी डेस्क, अलमारी, शटर या डोर को साफ करने के लिए साबुन और पानी का इस्तेमाल करें. इस बात का खास खयाल रखें कि अलमारी में रखने से पहले कपड़े पूरी तरह से सूख चुके हों. अलमारी में थोड़ी-बहुत सूखी नीम की पत्तियां भी डाल दें.

1. कारपेट्स और रग्स साफ रखें

मानसून कारपेट्स और रग्स पर बहुत ही बुरा असर डालता है. बारिश में खिड़कियां खुली न रखें, उनसे नमी अंदर आकर कारपेट्स में समा जाएगी. नम कारपेट्स फंगस का बहुत बड़ा घर होते हैं. इसी तरह से कारपेट पर गीले फुटवियर ले जाने से भी बचें. बेहतर होगा कि पंखा चलाए रखें. कारपेट्स को नियमित रूप से वैक्यूम क्लीन करती रहें. वैसे अच्छा यही होगा कि इस मौसम में भारी कारपेट्स उठा कर रख दें. आप ईकोफ्रेंडली कारपेट्स भी इस्तेमाल कर सकती हैं. इनकी ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती.

2. सीलन आने से रोकें

बारिश के दिनों में अक्सर दीवारों और छतों पर सीलन आ जाती है. अगर दीवार या छत पर हल्की सी भी दरार है, खिड़कियां सही नहीं हैं तो घर की दीवारें बुरी तरह से प्रभावित होती हैं. इससे पेंट भी पपड़ी के रूप में उतर सकता है. इन दिनों जो पेंट्स लगाए जाते हैं, वे भी नमी को आसानी से पकड़ लेते हैं और फिर पपड़ी के रूप में उतर जाते हैं. आरसीसी की छत में भी पानी घुस सकता है. इसलिए बारिश आने से पहले ही पूरे घर की दीवारों को चेक करें और सारे पाइपों और नालियों की सफाई करवा लें.

3. सोफों की सफाई

बारिश के मौसम सोफों को वैक्यूम क्लीन करना न भूलें. वैक्यूमिंग करते समय क्लीनर को गर्म हवा वाले मोड पर रखें. सोफे के कोनों में नेफ्थलीन की गोलियां डाल दें.

4. ऐसा भी करें

रसोई के सारे केबिनेट्स को खाली करके अच्छी तरह साफ करें. खाना खुला न छोड़ें. फ्रिज को भी अच्छी तरह साफ करके देख लें, जो खाद्य सामग्री पुरानी हो गई है, उसे फेंक दें. पेड़-पौधों की कटाई करें. बारिश में पेड़-पौधे जल्दी बढ़ते हैं, इसलिए इन्हें ट्रिम कर दें.

बारिश के मौसम में दीमक बहुत तेजी से बढ़ती है. इसलिए पूरे घर के खिड़की-दरवाजे चेक करें कि कहीं कोई दीमक तो नहीं लगी हुई. इस मौसम में घर में कोई तोड़-फोड़ या रिनोवेशन न करवाएं.

बारिश से पहले गद्दों को निकालकर धूप दिखा दें. इससे बारिश में कोई कीड़े बिस्तरों में नहीं लगेंगे.

नमी को पूरी तरह से नियंत्रित करने की कोशिश करें. इलेक्ट्रिकल गैजेट्स को लेकर विशेष सावधानी बरतें. उन्हें सिलिकॉन पाउच में रखें.

Monsoon Special: बारिश में पैरों की देखभाल है जरूरी

मानसून का मौसम आ गया और ये पानी वाले मौसम के आते ही आप में से कई महिलाएं इस बात को लेकर जरूर चिंतित होंगी कि पैरों को कैसे खूबसूरत बनाए रखा जाए, क्योंकि इस मौसम में बारिश के कारण पैरो में कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं. इसलिए पैरों की देखभाल इस मौसम में अधिक करनी पड़ती है.

आइये जानते है कि कैसे मानसून सीजन में पैरों को सुन्दर बनाएं रखा जा सकता है…

1. तलवों के दर्दरहित, चिकने और खूबसूरत होने से आपके सुंदर भी दिखते हैं और आपको आराम भी देते हैं. और इस वजह से आपके चेहरे की त्वचा पर भी स्वाभाविक आभा छलकती है. पैरों की देखभाल करने से शरीर भी स्वस्थ बना रहता है.

2. बहुत सी महिलाएं खासतौर पर घरेलू महिलाएं, अपने पैरों के तलवों को नजरअंदाज कर देती हैं. वे पूरा दिन घर पर नंगे पांव चलती रहती हैं तो उनके तलवे गंदे और फटे हुए ही रहेंगे. यदि पैरों के तलवे गंदे या कटे फटे होगें तो चेहरे की सुंदरता की चमक भी फीकी पड़ जाती है.

3. जब तलवे की नियमित रूप से सफाई व मालिश नहीं की जाती तो शरीर की त्वचा को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन और खून भी नहीं मिलता, जिससे आपके चेहरे पर लालिमा कम हो जाती है. यहां हम आपको बता देना चाहते हैं कि तलवों की सफाई से रक्त संचार बढ़ता है और ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में मिलती है, जिससे रंगत लालिमा युक्त होती है और आपकी मोहकता में वृद्धि करती है.

4. आप कोशिश करें की कम से कम नहाते समय तो तलवो को अच्छे से साफ करें. आप तलवों को किसी ब्रश या प्यूमिक स्टोन से भी साफ़ कर सकती हैं. नहाने के बाद तलवों की नारियल तेल या सरसों के तेल से मालिश करना न भूले, इससे आपके शरीर में रक्त संचार अच्छे से हो जाता है.

5. यहां हम कह सकते कि यदि आप अपने तलवों की अच्छे से देखभाल करती हैं, तो उनमे कोई समस्या नहीं आयेगी और साथ ही आपका पूरा शरीर भी स्वस्थ बना रहेगा.

Sangeeta Bijlani bday: 63 साल की हुई Salman Khan की एक्स गर्लफ्रेंड

बॉलीवुड की मशहूर अदाकरा संगीता बिजलानी ने 9 जुलाई को अपना बर्थडे सेलिब्रट किया. संगीता बिजलानी 63 साल की हो गई है. अपना बर्थडे खास बनाने के लिए संगीता ने मीडिया पैपराजी और सैलून के स्टाफ के साथ मिलकर अपना बर्थडे मनाया. एक्ट्रेस ने पैपराजी और क्रोमा सैलून के स्टाफ के साथ केक कट किया.

बर्थडे पर बेहद खूबसूरत लग रही संगीता

बर्थडे के मौके पर बॉलीवुड अभिनेत्री संगीता बिजलानी काफी खूबसूरत लग रही है. संगीता बिजलानी ने अपने बर्थडे पर नेवी ब्लू कलर की वन पीस पहन रखा है. वन पीस में बहुत खूबसूरत लग रही है. इसके साथ ही संगीता ने वाइट कलर के स्नीकर्स पेयर कर रखें है साथ ही साइड लाइट ग्रीन बैग कैरी किया हुआ है. वकाई संगीता बिजलानी काफी यंग लग रही है. खुले बालो में कहर ढा रही है.

 

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सलमान खान के साथ रहा रिश्ता

लोकप्रिय अभिनेत्री संगीता बिजलानी ने ‘त्रिदेव’, ‘योद्धा’ और कई अन्य फिल्मों में दिखाई दीं, बॉलीवुड दिवा ने जुहू में केक काटकर पपराजी के साथ अपना खास दिन मनाया. दरअसल, संगीता कथित तौर पर सलमान खान एक समय के साथ रिश्ते में थी. अक्सर खबरे आती थी दोनों ही जल्द शादी करने वाले है. लेकिन सलमान ने तय तारीख से कुछ दिन पहले ही शादी से इनकार कर दिया था. मीडिया खबरो के मुताबिक संगीता ने सलमान को किसी और के साथ देख लिया था, जिसके बाद संगीता ने सलमान से रिश्ता तोड़ दिया था.

 

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पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन से शादी की

सलमान से रिश्ता टूटने के बाद संगीता बिजलानी ने भारत के  तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन के साथ रिलेशन मे आ गई थी.लेकिन अजहरुद्दीन पहले से शादीशुदा थे और संगीता से शादी करने के लिए उन्होंने पत्नी नौरीन से तलाक ले लिया. इसके बाद 1996 में दोनों ने शादी कर ली. शादी के 14 साल बाद दोनों आपसी सहमति से तलाक ले लिया था.

क्या बेटी और पति अनुज को छोड़कर अपना सपना चुनेगी अनुपमा!

अनुपमा’ सीरियल जबसे टेलीकस्ट हुआ है तभी से ये शो सभी दर्शकों का चाहेता शो में बन गया है. ‘अनुपमा’ शुरुआत से ही टीआरपी में आगे रहा है. शो मेकर्स भी आए दिन ट्विस्ट और टर्न्स लेकर आते ही रहते है. ‘अनुपमा’ देखने वाले हर दर्शक का यही सवाल है क्या अनुपमा अमेरिका जाएगी.

‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कि गुरु मां का मैसेज पाकर अनुपमा डांस एकेडमी पहुंच जाएगी. वहां मलती देवी अनुपमा से कहेगी जब आसमान अपनी ओर बुलाता है तो जमीन अपनी ओर खींचती है. अब फैसला तुम्हें करना है तुम्हें आगे बढ़ना है या पीछे हटना है. वहीं अनुपमा गुरु मां से वदा करेगी कि  कुछ भी हो जाए वह अमेरिका जाएगी.

छोटी की तबियत बिगड़ी

कपाड़िया हाउस में छोटी अनु की तबियत और बिगड़ने लगी. दर्द में छटपटाती छोटी अनु कहेगी उसकी मां चली गई है अब उसकी मम्मी भी छोड़कर जी रही है. अनुज छोटी अनु की हिम्मत बांधता है.

नकुल अनुपमा से पूछेगा सवाल

शाह हाउस में डिंपल की वजह से चिक-चिक होगी. उधर समर किसी को बिना बताए मुंबई चला जाता है. जिसके बाद बनराज और बा गुस्सा करेंगी. वहीं गुरुकुल में जब अनुपमा और नकुल अमेरिका जाने की तैयारियां कर रहे होते है तो गुरु मां अनुपमा की बेचैनी का अंदाजा लगा लेती है. आगे शो में नकुल अनुपमा से पूछता है जैसे अभी हालात है उसे देखते हुए अगर वो अमेरिका चली जाएगी भा तो वहां कैसी रहेगी? वहां उसे छोटी की फ्रिक रहेगी.

छोटी अनु को होश में लाएगी अनुपमा

टीवी सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने के मिलेगा कि पाखी अनुपमा को अनु की हालत बताती है, जिसके बाद वह कपाड़िया हाउस भागी चली आ जाती है. दूसरी तरफ शाह हाउस में भी अनु की खराब तबीयत के बारे में जानकर सब उठ जाते हैं. तब हर कोई अनुपमा के अमेरिका जाने पर राय देता है. इस दौरान डिंपी सबको सुना का बोलती है. कपाड़िया हाउस में भी अनुपमा छोटी अनु को उठाने की कोशिश करती है. वह अपनी बेटी को उठाने के लिए लोरी गाती है.

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