मैं हेयर फॉल से बहुत परेशान हूं, मुझे कोई उपाय बताएं?

सवाल

मेरी उम्र 35 साल है और मेरे बाल बहुत ज्यादा गिर रहे हैं. कोई उपाय बताएं?

जवाब

हेयर लौस के कई फैक्टर हैं जिन में मेन फैक्टर आप की डाइट से जुड़ा है. आप डाइट में किन चीजों को शामिल करती हैं इस पर सब से ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. बालों के लिए सब से ज्यादा जरूरी होता है प्रोटीन. अगर आप के  शरीर में प्रोटीन की कमी है तो अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स और दालों को शामिल करें. हैल्दी हेयर्स के लिए बादाम, फूलगोभी, मशरूम, अंडे में मिलने वाला बायोटिन एक जरूरी विटामिन है. बालों का ?ाड़ने से रोकने के लिए इस विटामिन को डाइट में शामिल करना आप के लिए फायदेमंद हो सकता है. भुने चने, मटर, राजमा, छोले और काजू को डेली डाइट में शामिल कर के आप बालों के लिए भी काफी फायदेमंद आयरन पा सकती हैं. इसी आयरन की कमी से बालों के ?ाड़ने और बेजान होने की समस्या बढ़ सकती है. विटामिन ए और सी ऐसे विटामिन हैं जो बालों की ग्रोथ और शाइनिंग के लिए बेहद असरदार हैं. इसलिए आप को विटामिन ए के लिए गाजर, शकरकंद, कद्दू, पालक, दूध या दही को डाइट में शामिल करने की जरूरत है. वहीं विटामिन सी के लिए आंवला, नीबू, अमरूद या स्ट्राबेरी को शामिल करें.

आप चैक करें कि आप के बालों में डैंड्रफ तो नहीं है. अगर है तो उस को दूर करने के लिए बालों में ऐंटीडैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल करें और जब भी शैंपू करें अपनी कंघी, तकिए के गिलाफ और तौलिए को धोएं और किसी ऐंटीसैप्टिक लोशन में डाल कर रखें. धूप में सुखाएं और फिर इस्तेमाल करें.

बालों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए 1 टेबल स्पून ऐलोवेरा जैल में 1 छोटा चम्मच विनेगर, 1/2 चम्मच रैड ओनियन सीड औयल मिला लें. इन तीनों को मिक्स कर के बालों की रूट्स में लगाएं. 1/2 घंटा इंतजार करें और उस के बाद सिर धो लें. बालों के ?ाड़ने के दूसरे फैक्टर्स में टैंशन भी एक फैक्टर है जिस से आप के बाल टूटने लगते हैं. इसलिए टैंशन कम करने के लिए नियमित मैडिटेशन करें.

-समस्याओं के समाधान

ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर, डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा द्य

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Monsoon special: स्किन के लिए नेचुरल सन स्क्रीन

सन स्क्रीन का प्रयोग करना हमारी स्किन के लिए कितना जरूरी होता है यह तो बताने की जरुरत नहीं है. सूर्य की यूवी किरणें हमारी स्किन को समय से पहले बूढ़ा कर सकती हैं और सन बर्न के कारण हमारी स्किन पर बहुत सारे दाग धब्बे और पिग्मेंटेशन भी हो सकती है. इस स्थिति से बचने के लिए आपको एसपीएफ 50 से ऊपर के ही किसी सन स्क्रीन का प्रयोग करना चाहिए. अगर आपके पास घर में सन स्क्रीन नहीं है तो आप कुछ प्राकृतिक विकल्पों को भी सन स्क्रीन की तरह प्रयोग कर सकते हैं और उनसे भी आपको सूर्य से सुरक्षा मिलेगी. आइए जानते हैं इन ऑप्शन के बारे में.

1. जिंक ऑक्साइड 

जिंक ऑक्साइड एक ऐसा प्राकृतिक मिनरल होता है जो सूर्य की दोनों प्रकार की यूवी किरणों यूवी ए और यूवी बी से आपकी स्किन की सुरक्षा करता है. ऐसे प्रोडक्ट्स को खरीदें जिनमें नॉन नैनो जिंक ऑक्साइड होता है. इसका मतलब है की इसके तत्व इतने बड़े होंगे की आपकी स्किन द्वारा आसानी से एब्जॉर्ब किए जा सकेंगे.

 2. रेड रास्पबेरी सीड ऑयल

इस ऑयल में प्राकृतिक 25 से 50 एसपीएफ होता है.  इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है जो सूर्य से आपकी स्किन की सुरक्षा करने में मदद करते हैं. हालांकि ट्रेडिशनल सन स्क्रीन के मुकाबले इसमें कम मात्रा में एसपीएफ मौजूद होता है. आप इसे अन्य सन प्रोटेक्शन के तरीकों के साथ मिला कर प्रयोग कर सकते हैं.

3. कैरट सीड ऑयल

इसमें नेचुरल एंटी ऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं और एसपीएफ 30 भी मौजूद होता है. यह सूर्य से आपकी स्किन को बचा सकता है और इसे अकेले प्रयोग करने की बजाए आप इसे अन्य सन प्रोटेक्शन के तरीकों के साथ अलग से प्रयोग कर सकते हैं.

4. नारियल का तेल 

नारियल के तेल में लगभग 4 से 6 का नेचुरल एसपीएफ होता है जो आपकी सूर्य से कुछ हद तक रक्षा कर सकता है. इस को आप पूरी तरह से एक सन स्क्रीन के जैसे प्रयोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि इससे आपको पूरा लाभ नहीं मिलेगा बल्कि आप इसे एक मॉश्चराइजर के रूप में सन स्क्रीन लगाने से पहले प्रयोग कर सकते हैं.

 क्या यह सारे सन स्क्रीन स्किन को सूर्य से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं?

यह सारे सन स्क्रीन केमिकल से भरपूर सन स्क्रीन का एक प्राकृतिक विकल्प हैं. इनमें सन स्क्रीन के जितनी सूर्य से सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता नहीं होती है इसलिए इनका प्रयोग सन स्क्रीन के रूप में केवल इमरजेंसी में ही किया जाना चाहिए जब कभी आपका सन स्क्रीन खत्म हो गया हो और आपको बाहर निकलना हो तो आप इनका प्रयोग कुछ समय के लिए कर सकते हैं.

इनका प्रयोग अकेले करना आपकी स्किन को पूरी तरह से सूर्य से सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाएगा क्योंकि इनमें इतना ज्यादा मात्रा में एसपीएफ मौजूद नहीं होता है इसलिए आपको इनका प्रयोग असली सन स्क्रीन के साथ मिला कर ही करना चाहिए या उसे प्रयोग करने से पहले आप एक मॉश्चराइजर की तरह इन इग्रेडिएंट्स का प्रयोग कर सकते हैं.

अगर आप स्विमिंग या अन्य किसी ऐसी गतिवधि करते समय इस तरह के सन स्क्रीन का प्रयोग करते हैं तो इन्हें बार बार प्रयोग करना अनिवार्य है क्योंकि इनका असर बहुत जल्दी ही खत्म हो जाता है.

अगर आप ऐसे प्राकृतिक सन स्क्रीन का प्रयोग करते हैं तो आपको इन्हें जल्दी जल्दी और बार बार प्रयोग करना होगा. इसके साथ ही आपको इसकी अच्छी खासी मात्रा का प्रयोग करना होगा तभी आपको लाभ मिल सकेगा.

धर्म के नाम पर पाखंड का बोलबाला

आज जब पूरे विश्व में विज्ञान के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं, वैज्ञानिक चांद और मंगल पर बस्तियां बसाने की कोशिश में प्रयासरत हैं, वहीं हमारा देश सांप्रदायिक विद्वेश और पाखंड में उलझता चला जा रहा है.

धर्म के नाम पर तर्क शास्त्र और शास्त्रार्थ की परंपरा को समाप्त कर दिया है और दिनोंदिन पाखंड में दिखावा बढ़ता जा रहा है जिस की वजह से पाखंड महंगा होता जा रहा है. हमारा मीडिया और सोशल साइट्स पाखंड और अंधविश्वास को बढ़ाने में अपना भरपूर सहयोग कर रही हैं.

गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं, हज करने से व्यक्ति पवित्र हो जाता है तो ईसाइयों के लिए पवित्र जल बहुत महत्त्वपूर्ण है. वैसे ही सिखों के लिए पवित्र सरोवर और गुरु ग्रंथ साहिब और मुसलमानों के लिए कुरान. इन ग्रंथों के अपमान के नाम पर हत्या और दंगे आएदिन की बात है. यह पाखंड नहीं तो क्या है? साथ में हज या अन्य किसी भी दूरदराज स्थान की तीर्थयात्राएं सामान्य वर्ग के लिए बहुत महंगी होती हैं. वर्तमान सरकार भी तीर्थयात्राओं को आसान व सुविधापूर्ण बनाने के लिए काफी प्रयासरत दिखाई पड़ रही है. आजकल चारों तरफ विशाल मंदिरों, मसजिदों का जाल फैलता चला जा रहा है.

ठगने का धंधा

आज के युग में लोग इतने भयभीत रहने लगे हैं कि हनुमान, शिव एवं शनि मंदिरों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. स्कूल और अस्पतालों के स्थान पर मंदिर और मसजिदों की संख्या तथा उन का पुनर्निर्माण धूमधाम एवं भव्य होता जा रहा है. प्रत्येक समाज का अपना अलग त्योहार एवं तीर्थ हो चला है. ज्योतिषी लोगों को उन का भविष्य बताने और दुखों को दूर करने वाले टोटके बता कर समाज में पाखंड और अंधविश्वास फैला कर अपनी रोजीरोटी चलाने का धंधा कर रहे हैं. विभिन्न टीवी चैनल दिनरात जनता को पाखंड के जाल में फंसाने के लिए तरहतरह के उपाय बता कर ठगने का धंधा कर रहे हैं और हमारा सरकारी तंत्र आंखकान बंद कर बैठा है.

हिंदू धर्म में दान करने की महिमा का बारबार वर्णन किया गया है इसलिए लोगों के मन  में पाखंड करने की इच्छा तो परिवार में बचपन से ही कूटकूट कर भर दी जाती हैं. दान का महिमामंडन करते हुए कहा है-

‘हस्तस्य भूषणं दानं सत्यं कंठस्य भूषणं,

श्रोत्रस्य भूषणं शास्त्रं भूषणै: किं प्रयोजनम्.’

हाथ का आभूषण दान है, कंठ का सत्य है और कान का आभूषण शास्त्र है, फिर अन्य किसी आभूषण की क्या आवश्यकता है?

हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का बहुत महत्त्व है. संस्कार का तात्पर्य उन धार्मिक कृत्यों से है जो किसी समुदाय का योग्य सदस्य बना कर उस के मनमस्तिष्क को पवित्र करें परंतु वर्तमान में लोग एकदूसरे का अनुकरण करते हुए भेड़चाल चलते ज्यादा दिखाई दे रहे हैं.

पाखंड पर विश्वास क्यों

हिमाचल प्रदेश के फौजी परिवार की रिया  बैंगलुरु में आईटी कंपनी में काम करती थी और वहीं पर सहकर्मी अक्षर को पसंद करने लगी थी. दोनों ने 2-3 साल लिव इन में रहने के बाद जब शादी कर लेने का निर्णय कर लिया तो अक्षर के घर वालों ने जन्मकुंडली में काल सर्प योग बता कर उस की पूजा करवाने को कहा तो पढ़ीलिखी रिया और उस के मातापिता ने साफ मना कर दिया कि वे इस तरह के पाखंड की बातों पर विश्वास नहीं करते. अक्षर के दबाव में बु?ो मन से मांबाप शादी के लिए राजी हो गए. पंडितजी के बताए हुए शुभ मुहूर्त में दोनों की शादी धूमधाम से हो गई.

रिया ने अक्षर के लिए सरप्राइज प्लान कर के हनीमून पैकेज ले कर कश्मीर की वादियों की बुकिंग करवा रखी थी. अक्षर के पेरैंट्स उत्तर प्रदेश के उन्नाव के रहने वाले थे. काल सर्प योग के डर से उन लोगों ने अक्षर को अपना निर्णय सुना दिया कि नासिक के त्रयंबकेश्वर मंदिर में काल सर्प योग की पूजा के बाद ही हनीमून संभव है. उस की आंखों में आंसू बह निकले थे, लेकिन  अक्षर एक तरफ मांबाप को खुश करने के लिए नासिक की ट्रेन के टिकट और पूजा के लिए पंडित औनलाइन खोजता रहा तो दूसरी तरफ रिया के सामने कान पकड़ कर गिड़गिड़ाता रहा. वह अपने हनीमून पीरियड में परिवार के साथ सर्पों की पूजा कर रही थी. डरे हुए पेरैंट्स चांदी, तांबे और सोने का सर्प बनवा कर अपने साथ लाए थे.

बाद में पछताना पड़ता है

काल सर्प योग की शांति पूजा 3 घंटे में समाप्त हो गई, पूजा का खर्च तो क्व7 हजार था  परंतु पंडित को खुश करने के लिए पेरैंट्स उन के लिए कपड़ा, दक्षिणा आदि देने के बाद पंडित ने सम?ा लिया कि शिकार पूरी तरह उन के कब्जे में है, तो उंगलियों पर गिनती करते हुए रिया के साथ शादी को अक्षर के जीवन के लिए खतरा बताते हुए महामृत्युंजय की पूजा के लिए संकल्प करवा कर क्व25 हजार और ले लिए. रिया भोले पेरैंट्स को लुटते देखती रही और मन ही मन उस घड़ी को कोसती रही जब अक्षर से उस की मुलाकात हुई थी. अक्षर मिट्टी का माधो सा खड़ा सब देखता रहा.

हनीमून का सपना सपना ही बना रह गया. दोनों के संबंध में ऐसी गांठ पड़ गई, जिसे सुल?ाना आसान नहीं था और वह आज तक रिया पूजा की याद कर के गुस्से से भर उठती है.

उन की कीमती छुट्टियां और बुकिंग के रुपए बरबाद हो गए इस मूर्खता के पाखंड के कारण. अक्षर की बेचारगी देख वह अपने निर्णय पर बारबार पछता रही थी.

पूजा के नाम पर नाटक

मध्य प्रदेश के भिंड की रहने वाली संजना और आरव की शादी धूमधाम से हुई. दोनों संपन्न और दकियानूसी परिवार थे. अरेंज्ड मैरिज थी. संजना फिजियोथेरैपिस्ट थी और आरव सीए दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई थी. दोनों वर्किंग थे और खुश थे. संजना प्रैगनैंट हो गई तो आरव की मां की हिदायतों ने उसे परेशान कर के रख दिया. बेटा हुआ तो तुरंत पंडित से औनलाइन संपर्क शुरू हुआ और पंडित ने बता दिया कि बच्चा मूल नक्षत्र में पैदा हुआ है और पिता के स्वास्थ्य के लिए भारी है. संयोगवश आरव की गाड़ी किसी बाइक से टकरा गई.

अब तो भिंड से मूल शांति के लिए पंडितजी ने जो लंबी लिस्ट लिखवाई कि आरव ने उसे देखते ही हाथ जोड़ दिए. लेकिन संजना की मां तुरंत आ गईं और जबरदस्ती उसे पूजा करवाने के लिए मजबूर कर दिया. फिर तो उसे नन्हे को ले कर भिंड आना पड़ा और पूजा के नाम पर ऐसा नाटक हुआ कि पूछो मत. वह और आरव दोनों ही चुपचाप 27 कुंओं का जल, 7 जगह की मिट्टी, 7 तरह का अनाज, सोने की मूल नक्षत्र की मूर्ति और जाने क्याक्या. नाई के लिए कपड़े, पंडितजी के लिए सिल्क का धोतीकुरता व सोने की

अंगूठी नन्हे बच्चे के बराबर तोल कर अन्न दान, 27 ब्राह्मणों का भोजन, उन की दक्षिणा, नातेरिश्तेदारों के लिए गिफ्ट और दावत.

मूल शांति के नाम पर कुल मिला कर लाखों का खर्च किया गया ऊपर से आरव का क्लोजिंग ईयर का टाइम चल रहा था, इसलिए उन दिनों छुट्टी लेने की वजह से उस की प्रमौशन अलग से रुक गई.

आजकल यहांवहां भागवत् कथा का धूमधाम से आयोजन देखा जा सकता है- इन दिनों संगीतमय भागवत् का बहुत प्रचलन दिखाई दे रहा है, जिस का न्यूनतम खर्च क्व2-3 लाख तक आ जाता है. यदि कोई नामी कथा वाचक है तो केवल उस की फीस ही लाखों में होती है.

कमाई पर ध्यान

मेरे पड़ोस में सार्वजनिक भागवत् कथा का आयोजन हुआ, जिस में कहने के लिए कथावाचक ने कोई फीस नहीं ली परंतु उन के संगीत बजाने वाले 7-8 लोगों की टीम को क्व1 हजार प्रतिदिन देना तय हुआ. टैंट वाले ने क्व40 हजार लिए संगीत के उपकरणों के लिए भी क्व20 हजार लगे. अन्य संसाधन जुटाने में क्व15-20 हजार लगे.

रोज के फूलफल, मिष्ठान्न आदि पर

क्व1 हजार प्रतिदिन लगते रहे. लोग भक्तिभाव से भरपूर चढ़ावा चढ़ाते रहे. आरती में हजारों रुपए आ जाते.

भीड़ बढ़ती गई और साथ में चढ़ावे की रकम भी. वह सब चढ़ावा कथावाचक समेटते रहे. उन के कर्मचारी पूरे समय दान का डब्बा ले कर भीड़ में चक्कर लगाते रहते. डब्बे पर ताला लगा कर रखा था जिसे वह चुपचाप खोलते और समेट कर अंदर कर लेते. कोई क्व500 देता तो तुरंत माइक पर नाम अनाउंस करते. इस तरह कथा कम होती बस कमाई पर ज्यादा ध्यान रहता .

अंत में भंडारे के आयोजन पर लगभग

50 हजार रुपये का खर्च आया. इस के अतिरिक्त कार्यक्रम के दौरान प्रतिदिन की पूजा, विभिन्न कथा प्रसंगों के लिए कभी साड़ी, कभी चावल, कभी सोनाचांदी का दान, कभी कलश स्थापना और पूजा आदि का खर्च भी प्रति परिवार 15 से 20 रुपये हजार अलग से हुआ. जो मुख्य जजमान बना उस का व्यक्तिगत खर्च 20 से 25 हजार रुपये हुआ. अभी कथावाचक के लिए वस्त्र और दक्षिणा के साथ कुछ सोने की अंगूठियों का खर्च नहीं जोड़ा गया है.

यहांवहां पूछताछ करने पर एक प्रमुख कथावाचक ने भागवत् सुनाने की केवल अपनी  फीस 25 लाख रुपये बताई थी. सोचिए कि पाखंड दिनोंदिन कितना महंगा होता जा रहा है .

कथा के नाम पर फूहड़ डांस

मेरे एक परिचित ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उन के परिवार ने भागवत् कथा के आयोजन के लिए गांव की जमीन बेच दी और वहां से मिले रुपयों में से लगभग 15 से 20 लाख रुपये का खर्च इस भागवत् कथा के आयोजन पर किया क्योंकि समाज में उन्हें अपना नाम करना था. कथा का तो नाम था वहां पर फिल्मी धुन पर भजन के नाम पर उलटेसीधे गाने गाए जाते थे और फूहड़ डांस होता रहता था.

कभी कृष्णराधा की झंकी तो कभी गरीब सुदामा तो कभी नंद बाबा और बाल कृष्ण के जन्म की झंकी लोगों के आकर्षण का केंद्रबिंदु बन गई थी. भीड़ और चढ़ावा दोनों भलीभांति बढ़ते जा रहे थे और साथ में कथावाचक की कथा के बजाय झंकियों पर ज्यादा जोर होता चला गया था. कुल मिला कर कथावाचक का ध्यान पैसे की उगाही में लगा रहता था. आज कृष्ण जन्म उत्सव, तो कल गिरिराजजी की पूजा तो परसों रुक्मिणी विवाह के लिए साड़ी और सुहाग का सामान. इस तरह से रोज एक नया नाटक होता रहता.

बाद में मालूम हुआ कि धंधे से अनापशनाप पैसे इन धार्मिक कार्यों, आयोजनों में लगाने और साथ में अपना शोरूम अपने विश्वस्त लोगों पर छोड़ देने से उन्हें भारी नुकसान हो गया. कोठी भी बिक गई और बेटे ने बुढ़ापे में वृद्धाश्रम में रहने के लिए भेज दिया. सारे धर्मकर्म धरे रह गए.

पूजा भी ठेके की तरह हो गई

उत्तर प्रदेश के रहने वाले आयुष एवं पूर्वी ने मुंबई में 3 करोड़ रुपये में अपना फ्लैट खरीदा तो उन की मां ने गृहप्रवेश की पूजा को जरूरी बताया. इस के अतिरिक्त सभी लोगों ने वास्तु पूजा और गृहप्रवेश की पूजा करने को आवश्यक बताया तो दोनों ने औनलाइन पंडित और पूजा के विषय में जानने के लिए सर्च करना शुरू किया. दोनों ही पूजन सामग्री की लिस्ट देख कर ही आश्चर्यचकित हो गए थे.

उन लोगों ने गूगल पर नंबर देख कर यहांवहां फोन मिलाए तो मालूम हुआ. गृह प्रवेश और वास्तु पूजा और ग्रह शांति पूजा के नाम पर 25 हजार रुपये से शुरू हो कर लाखों वाले पंडित उपलब्ध हो रहे थे. उन लोगों ने अंतत: गायत्री परिवार के पंडित जो 11 हजार रुपये में पूजा कर रहे थे उन्हें बुलाया, लेकिन पूजा कर के उन के मन को शांति कम अशांति एवं पैसे और समय की बरबादी ज्यादा लगी. पंडितजी ने 11 हजार रुपये के बजाय लगभग 20 हजार रुपये खर्च करवा दिए. वे सोचने लगे कि इस से तो कोई नया सामान ले लेते, जो उन के काम आता.

महानगर में पूजा भी ठेके की तरह हो गई है. जिस स्तर की पूजा करवानी है, उसी स्तर के पुजारी उपलब्ध हैं, सस्ते वाले गायत्री परिवार के 11 हजार रुपये से शुरू हो कर 51 हजार रुपये या लाखों में किया जा सकता है. अब पंडितजी पूजन सामग्री अपने साथ भी ले कर आते हैं जिस का मूल्य वे अपने कौंट्रैक्ट में ले लेते हैं. पूजा के नाम पर लोग अपने खर्च में कटौती कर के जी खोल कर पूजा और धार्मिक कार्यों पर खर्च करते हैं. इस के लिए चाहे उधार ले कर करना पड़े, लेकिन ऐसे आयोजन अवश्य करते हैं क्योंकि उन की सोच होती है कि उन्हें पूजा कर के सीधा स्वर्ग का टिकट मिलने वाला होता है.

20 से 25 हजार रुपये तो साधारण पूजा में लगने ही हैं. पंडित के कपड़े और दक्षिणा उस के स्तर के अनुसार होनी चाहिए. आप का समय चाहे कितना कीमती है 7-8 घंटे तो लगने ही हैं. ज्यादा ताम?ाम वाला करना है तो 1 से 3 दिन तक लग सकते हैं.

पूरी निगाह चढ़ावे पर

आजकल समाज में सुंदरकांड और माता की चौकी का जगहजगह आयोजन देखा जाता है. ये लोग भी एक कौंट्रैक्ट जैसा तय कर लेते हैं जिस की शुरुआत 21 हजार रुपये से होती है. यदि बहुत साधारण स्तर का है तो 11 हजार रुपये में भी राजी हो जाते हैं, लेकिन इन की पूरी निगाह चढ़ावे पर होती है. बातबात पर रुपए की मांग करते हैं और फलमिठाई और चढ़ावे, आरती के सारे रुपए समेट कर रख लेते हैं. इस में भी 7-8 लोगों की टीम होती है जो अपने संगीत उपकरण अपने साथ ले कर आते हैं जैसे ढोलक मजीरा, हारमोनियम, कैसियो, तबला आदि आप से डैक या लाउडस्पीकर लगवाने की फरमाइश करते हैं.

कानफोड़ू आवाज में फिल्मी धुन पर सुंदरकांड हो या माता के भजन गाते हैं. मैं ने स्वयं देखा कि  एक आयोजन में एक बच्चे को शेर का मुखौटा पहना दिया और दूसरे बच्चे का दुर्गा माता का स्वरूप बना कर उस पर बैठा दिया और चारों तरफ शोर मच गया माता प्रकट हो गईं कह कर लोग अपना सिर नवा कर दुर्गा माता की जयजयकार करने लगे. उन पर रुपयों की बौछार शुरू हो गई. बहुत हास्यास्पद दृश्य उपस्थित कर दिया गया था. संयोजक ने बताया कि माता की चौकी करवाने के लिए प्रसाद, चढ़ावा, टैंट आदि के बाद खाना करने में लगभग 50 हजार रुपये खर्च हो गए.

इस तरह के दृश्य बना कर लोगों के मन में भक्तिभाव जगा कर अघिक से अधिक धन उगाही करना उन का मुख्य उद्देश्य होता है. सभी उपस्थित भक्तिभाव से प्रसन्न मन से उन पर रुपयों की बौछार करने लग जाते हैं .

नीरजा की बेटी बुखार से तप रही थी. डाक्टर से उन की अपौइंटमैंट थी. रास्ते में ट्रैफिक जाम की वजह से रुकना पड़ा. डीजे की कानफोड़ू आवाज उन्हें विचलित कर रही थी. बीमार बच्ची के कानों को उन्होंने जोर से बंद किया. शोर के कारण उन का दिल जोरजोर से धड़कने लगा. संगीत संगीत न हो कर विध्वंसक सुर में बदल गया. उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था. 15-20 लड़के समूह में डीजे के साथ नाच रहे थे. एक ठेले पर माता की ज्योत को ले जाया जा रहा था. पता लगा कि नशे में झूमतेनाचते ये लड़के वैष्णव माता के दरबार में जा रहे हैं. यह कैसा पाखंड जो बढ़ता

जा रहा है? वहां पर भक्ति और आस्था का

तो नामोनिशान नहीं था. था तो केवल पाखंड

का दिखावा.

शिकारी आएगा जाल में फंसाएगा

भारत ही एक ऐसा विचित्र देश है, जहां धर्म के नाम पर पाखंड का इतना बोलबाला है. यहां हर गली कूचे में स्कूल और अस्पताल के स्थान पर मंदिर या मसजिद मिल जाएगी. हमारे देश मे सब को आजादी है कि वह अपने तरीके से अपने धर्म का प्रचारप्रसार कर सकता है. धर्म के नाम पर बढ़ते पाखंड के दिखावे पर रोक लगना आवश्यक है. आज यहांवहां बड़ेबड़े धार्मिक आयोजन बहुत बड़े स्तर पर आयोजित किए जाते हैं, जिन में दिखावे के लिए पैसे को पानी की तरह बहाया जाता है और इन साधूसंतों और अन्य धर्मगुरुओं ने अपना एक नैटवर्क बना लिया है जहां देश की भोली जनता यहां तक कि युवा पीढ़ी भी तात्कालिक लाभ पाने के लिए उन के जाल में फंस जाती हैं.

यह भी देखने में आ रहा है कि युवा पीढ़ी धार्मिक कार्यक्रमों को भी मौजमस्ती में ढालती जा रही है. पाखंड दिखावे के कारण दिनोंदिन महंगा होता जा रहा है. जब तक डीजे को तेज आवाज में नहीं बजाएंगे, धार्मिक यात्राएं, बड़ेबड़े यज्ञ, हवन  के आयोजन नहीं किए जाएंगे, हजारों लोगों के भंडारे का आयोजन कर के भीड़ नहीं इकट्ठी करेंगे, डीजे की आवाज पर बरातियों की तरह नाचेंगे नहीं, तब तक भगवान को कैसे पता लगेगा कि उन के मन में कितनी श्रद्धा है और वहे भगवान के कितने बड़े भक्त हैं.

जितना बड़ा मंदिर, जितना ज्यादा दिखावा, जितना ज्यादा खर्च, समाज में उतना बड़ा नाम. यह आज के पाखंड  का स्वरूप है. वर्तमान सरकार भी अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए जनता की धार्मिक भावनाओं का सहारा ले कर मंदिरों के पुनर्निर्माण और अन्य सुविधाओं पर पैसा खर्च कर रही है.

आज पूजापाखंड पर मंदिरों की यात्राओं के आयोजन, फूलफल प्रसाद पर पैसे खर्च करने के स्थान पर शिक्षा के लिए स्कूलों की व्यवस्था और अस्पतालों पर यदि पैसे खर्च किए जाए तो आम जनता ज्यादा लाभांवित होगी और देश की स्थिति अधिक सुधर सकती है.

आज धर्म के सही अर्थ को समझने की आवश्यकता है. एक स्वर और एक आवाज में धर्म की सच्ची राह सब को विशेष कर युवा पीढ़ी को दिखाना बहुत जरूरी हो गया है. शोरशराबे, पाखंड और दिखावे को छोड़ कर सच्ची भावना के साथ, लोकहित की कामना को ले कर धर्म के मार्ग पर चलना ही सच्चा मानव धर्म है.

Sunrise Masala: बनाओ ऐसी मटन करी जो हर दावत को बना दे स्पेशल

चाहे वो कोलकाता का मटन रेज़ाला हो या फिर बिहारी मटन करी, नाम सुनने भर से मुंह में पानी आ जाता है. घर में कोई खास मेहमान आया हो, फैमिली के साथ घर पर छोटी सी शाही दावत करनी हो या दोस्तों के साथ डिनर, मटन तो लगभग हर नॉनवेज पसंद करने वालों की दावत की शान है. यह बात भी सच कि मटन का स्वाद उसकी क्वालिटी के साथ-साथ उसे बनाने के तरीके और मसालों के सही संतुलन पर निर्भर करता है. कई लोग सोचते हैं कि ज्यादा मसाले डालने से इसका स्वाद बढ़ता है तो कई सोचते हैं कि जितने कम मसाले उतना बेहतर मटन का जायका.

जबकि मटन बनाने के लिए मसालों के सही मिश्रण और संतुलन का होना बेहद जरूरी है. लेकिन अब टेंशन की कोई बात नहीं क्योंकि सनराइज़ मीट मसाला आपकी मटन गे्रवी को न सिर्फ जायकेदार बनाएगा बल्कि आप इसकी मदद से झटपट मटन

डिश भी तैयार कर लेंगी. सनराइज़ मीट मसाले में है मसालों का सही मिश्रण जो आपको घर की बनी मटन करी की याद दिला देगा.

स्पेशल मटन करी

सामग्री

  1. 1 किलोग्राम मटन
  2. 1 कप प्याज की प्यूरी
  3. 1 कप टमाटर की प्यूरी
  4. 1/2 चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट
  5. 1 सनराइज़ मीट मसाला
  6. नमक स्वादानुसार.

स्पेशल मटन करी कैसे घर पर बनाए, देखें पूरी रेसिपी की विधि

सबसे पहले मटन को 1/2 चम्मच अदरक लहसुन पेस्ट, 1/2 चम्मच सनराइज़ मीट मसाला से मैरीनेट कर कुछ देर के लिए रख दें. उसके बाद कड़ाही में तेल गर्म कर ओनियन प्यूरी को सुनहरा होने तक भूनें. अब टमाटर की प्यूरी भी मिला दें और कुछ देर भून कर मैरीनेट किया हुआ मटन इसमें मिला कर अच्छी तरह मिक्स करेें. इसा के साथ आप अब नमक और पानी मिला कर मटन अच्छी तरह पका लें. आखिरी में प्याज और धनियापत्ती से गार्निश कर परोसें. जायकेदार मटन करी खा कर लोग उंगलियां चट जाएंगे

Monsoon special: क्यों जरूरी है Menstrual हाइजीन

13  बरस की मासूम उम्र में मासिकधर्म का शुरू होना बच्चियों के जीवन की अनूठी घटना है. खेलनेकूदने और पढ़ने के बीच महीने के 5 दिन दर्द, तनाव, शर्म और कई बातों से अनभिज्ञता के बीच बिताने वाली बच्चियां अकसर मासिकधर्म के दौरान स्वच्छता का पूरा ध्यान नहीं रख पाती हैं, जिस के कारण वे अनेक बीमारियों का शिकार हो जाती हैं.

यद्यपि मासिकधर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन अभी भी भारतीय समाज में मासिकधर्म को अपवित्र या गंदा माना जाता है. इसे कई गलत धारणाओं और प्रथाओं से जोड़ दिया गया है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं.

दुनियाभर में लाखों महिलाओं और लड़कियों को पीरियड्स होने के कारण स्टिग्मा झेलना पड़ता है. मासिकधर्म के दौरान महिलाओं पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं. उन के साथ भेदभाव किया जाता है. उन्हें गंदे वातावरण और स्वच्छता का पालन नहीं करने के लिए मजबूर किया जाता है. कुछ घरों में उन के किचन में आने या खाना बनाने अथवा खाने को छूने पर रोक होती है. यह भ्रांति फैली हुई है कि पीरियड्स के दौरान अगर महिला अचारचटनी को हाथ लगा दे तो वह सड़ जाता है. पीरियड्स के दौरान लड़कियों को नहाने से रोका जाता है. महिला शादीशुदा है तो कई घरों में वह पति के साथ एक बिस्तर पर नहीं सो सकती. नीचे चटाई आदि बिछा कर सोती है.

सुरक्षा से खिलवाड़

गांवदेहातों में कई जगह आज भी पीरियड्स आने पर महिला को 5 दिन घर के बाहर छोटी सी कुटिया में रहने के लिए मजबूर किया जाता है, जहां वह मासिकस्राव को सोखने के लिए पुराने कपड़े और सूखी घास के पैड बना कर इस्तेमाल करती है. 5 दिन वह किसी से मिल नहीं सकती है. जमीन पर सोती है. स्वयं अपना खाना बनाती है. उसे स्नान करने की मनाही होती है.

सोचिए यदि वह बीमार हो, उसे बुखार आ रहा हो, तो अकेले उस कुटिया में 5 दिन बिताना क्या उस की जान से खेलना नहीं होगा? उसे कुटिया में अकेला पा कर कोई भी उस की अस्मत से खेल सकता है. जमीन पर सोने की स्थिति में कोई जहरीला कीड़ा, सांप आदि उसे काट सकता है. यह उस की सुरक्षा से खुला खिलवाड़ है.

पिछड़े इलाकों में और शहरी इलाकों में भी गरीब तबके में लड़कियां मासिकधर्म आने पर फटेपुराने, गंदे कपड़े आदि ही पैड के तौर पर इस्तेमाल करती हैं. उन्हीं को धोती, सुखाती और फिर इस्तेमाल करती हैं. यह गंभीर बीमारियों को न्योता देने के सिवा कुछ नहीं.

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

शहरों में और महानगरों तक में अपने घर में काम करने वाली बाई से पूछ लीजिए कि पीरियड्स आने पर किस कंपनी का सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करती हो? जवाब मिलेगा इतना पैसा कहां जो हर महीने पैड खरीदें. हम तो कपड़ा आदि इस्तेमाल करते हैं.

अगर मां समझदार नहीं है, उसे स्वच्छता का ज्ञान नहीं है तो अमीर परिवारों की बेटियां भी पीरियड्स के दौरान गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाती हैं. ये सभी बातें मैंस्ट्रुअल हाइजीन के हिसाब से स्वास्थ्य केलिए बहुत हानिकारक है. गरमी और बरसात के मौसम में तो स्वच्छता का खयाल रखना और अधिक जरूरी हो जाता है.

ऐसे समय में अगर सफाईस्वच्छता नहीं रखी गई तो जीवाणु, संक्रमण, खुजली, जलन आदि का खतरा अधिक हो सकता है. योनि में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया निश्चित पीएच संतुलन बनाए रखते हैं. मगर गरमी, उमस के कारण होने वाले संक्रमण और हानिकारक बैक्टीरिया के विकास से यह बैलेंस बिगड़ जाता है और महिलाएं गंभीर यूरिनरी इन्फैक्शन का शिकार हो जाती हैं.

भावनात्मक सपोर्ट की जरूरत

जब मौसम गरम और उमस भरा होता है, तो अधिकांश महिलाओं को मासिकधर्म में बदलाव का अनुभव हो सकता है. पीरियड्स मौसमी बदलाव से संबंधित होते हैं. गरमी के कारण पीरियड्स लंबे समय तक या अधिक बार हो सकते हैं. टीनऐज गर्ल और पेरी मेनोपौज वूमन को अधिक परेशानी हो सकती है क्योंकि इस दौरान हारमोन अस्थिर होते हैं.

मेनोपौज के करीब आ रही महिलाओं को अकसर फाइब्रौयड्स की शिकायत हो जाती है जिस की वजह से बहुत ज्यादा रक्तस्राव होता है और दर्द भी बरदाश्त से बाहर होता है. ऐसे में उन्हें घर वालों की भावनात्मक सपोर्ट और इलाज की जरूरत होती है. लेकिन मासिकधर्म को अपवित्र दशा मानने वाले घरों में महिलाओं को सारा दर्द अकेले ही सहना पड़ता है.

मैंस्ट्रुअल हाइजीन के लिए जरूरी टिप्स

  1. हाइड्रेटेड रहें

शरीर से विशैले पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर के पीएच संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिदिन कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना जरूरी है. ताजे जामुन खाएं और स्वादिष्ठ हर्बल पानी भी जरूर पीएं.

2. सूती अंडरगार्मैंट्स पहनें

गरमी के मौसम में कौटन अंडरगार्मैंट्स खासकर कौटन पैंटी पहनें. कौटन सूती कपड़े में हवा आसानी से आ और जा सकती है. यह स्किन को साफ और सूखा रखने में मदद करता है. इस दौरान आर्टिफिशियल धागों से तैयार कपड़े और अंडरगार्मैंट्स नहीं पहनने चाहिए जिन में अधिक पसीना आए. इस से गुप्तांगों में बैड बैक्टीरिया बढ़ता है. स्किन में खारिशखुजली और जलन हो सकती है.

3. साफ और कौटन तौलिए का इस्तेमाल

कौटन तौलिए का उपयोग करें. कभी भी दूसरे लोगों का इस्तेमाल किया हुआ तौलिया इस्तेमाल न करें. पतले तौलिए का उपयोग करें. इसे साफ करना और सुखाना आसान होता है. अपना यूज किया हुआ तौलिया किसी और के साथ सामन करें. बेहतर स्वच्छता के लिए अपने तौलिए को हर दिन साफ करें.

4. प्राइवेट पार्ट्स की सफाई

नहाते समय अपने प्राइवेट पार्ट्स को रोजाना साफ और ताजे पानी से धोएं. गरम पानी का प्रयोग न करें. किसी भी प्रकार के सुगंधित साबुन का प्रयोग न करें. योनि के पीएच बैलेंस को बनाए रखने के लिए रासायनिक मुक्त, साबुन मुक्त सफाई का चयन करें. जिम, तैराकी या कोई खेल खेलने के बाद हमेशा अपने इंटिमेट रीजन को धो लेना चाहिए. उसे थपथपा कर सुखा भी लेना चाहिए.

5. ऐंटीबैक्टीरियल सैनिटरी नैपकिन

पीरियड के दौरान कंफर्टेबल ऐंटीबैक्टीरियल सैनिटरी नैपकिन का उपयोग करना चाहिए. पीरियड्स हाइजीन के लिए हर 3-4 घंटे पर पैड बदल लेना चाहिए. अच्छी क्वालिटी की पीरियड्स पैंटी का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि बैक्टीरिया ग्रो न करे. इंटिमेट एरिया के बालों को भी शेव करें वरना यहां बैक्टीरिया पनप सकते हैं.  इस से यीस्ट इन्फैक्शन और यूटीआई से बचाव हो सकता है.

6. पीरियड्स में स्नान जरूर करें

यह सिर्फ एक भ्रांति है कि पीरियड्स के दौरान नहाना नहीं चाहिए. असल में पीरियड्स के दौरान स्नान करना पूरी तरह से सुरक्षित है. इस से थकान और दर्द के स्तर में बहुत कमी आती है. इस से मूड भी बेहतर होता है. कुनकुने पानी से स्नान पीरियड्स क्रैंप्स को कम करता है. पीरियड्स साइकिल के दौरान किसी भी दिन बालों को धोना भी पूरी तरह से सुरक्षित है.

अनजाने पल: भाग 2- क्यों सावित्री से दूर होना चाहता था आनंद

एक दिन मैं ने छुट्टी ले ली. घर में उस की पसंद की खीर बनाई और आलू की टिकियां. ये दोनों चीजें उसे बहुत अच्छी लगती थीं. वह स्कूल से घर आई. मैं बड़े प्यार से उसे मेज के पास ले गई. उस ने मेज पर रखी चीजें एकएक कर खोलीं, फिर बंद कर दीं. मैं खुशीखुशी उस की प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगी. जब वह कुछ न बोली तो मैं ने ही कहा, ‘चल नीलू, आज मैं तुझे स्वयं हाथ से खिलाती हूं.’

‘क्यों? आज मुझ से इतनी हमदर्दी क्यों?’ उस के शब्द शूल की तरह मेरे हृदय को भेद गए?

‘बेटी, कैसी बात करती है. मैं ने तेरी पसंद की चीजें बनाई हैं. देख…खीर, आलू की गरमगरम टिकिया.’

‘मुझे भूख नहीं है.’

‘क्या हुआ, मुझ से नाराज है?’

‘अगर तुम मुझे हर रोज इस प्रकार खाना खिलाओगी तो मैं आज खाने को तैयार हूं.’

मैं चुप हो गई, क्या जवाब देती. आखिर उसी ने चुप्पी तोड़ी, ‘बोलो, जवाब दो. क्या हर रोज घर पर रह सकती हो?’

‘तब तो मुझे नौकरी छोड़नी पड़ेगी. और नौकरी छोड़ दूं तो हम तुम्हें वह सुख और आराम नहीं दे पाएंगे, जो तुम्हें आज मिल रहा है. देखो, तुम्हारे पास टीवी है, एसी है, कितने खिलौने हैं, अच्छे स्कूल में पढ़ती हो, क्या ये सब तुम्हें खोना अच्छा लगेगा?’

‘लेकिन पिताजी तो कहते हैं कि तुम्हें नौकरी करने की जरूरत नहीं है.’

‘वे तो यों ही कहते हैं. तुम जब बड़ी हो जाओगी, तभी ये बातें समझ पाओगी.’

‘क्या पता. लेकिन मुझे कुछ अच्छा नहीं लगता. तुम्हारा हर रोज देर से आना, फिर रात को तुम्हारा और पिताजी का झगड़ा…’ यह कहतेकहते उस की आंखों से आंसू झरने लगे.

मैं ने बच्ची को आलिंगन में भींच लिया. फिर कहा, ‘कहो तो तुम्हें होस्टल भेज दें. वहां तुम्हें खूब सारी सहेलियां मिलेंगी. खूब मजा आएगा.’

उस ने कुछ जवाब नहीं दिया. उस रात मैं ने आनंद से इस बात का जिक्र किया. मुझे तो आश्चर्य होता था कि उस व्यक्ति से मैं ने शादी कैसे की? वह कितना बदल गया गया था. कठोर हृदयहीन और अहंकारी. उस ने गुस्से से लगभग चीखते हुए कहा, ‘कैसी मां हो. बच्ची को अपने से अलग करना चाहती हो?’

मैं बोली, ‘मैं उसे अलग कहां कर रही हूं. आजकल तो सभी बच्चों को होस्टल भेजते हैं. एक साल में मेरा काम हो जाएगा. फिर पिं्रसिपल बन जाने पर कालेज के कैंपस में ही घर मिल जाएगा. नीलू को फिर घर ले आएंगे.’

आनंद ने तपाक से उत्तर दिया, ‘औरों की बात छोड़ो. सोसाइटी में झूठी शान बघारने के लिए लोग बच्चों को होस्टल भेजते हैं. हमें इस की जरूरत नहीं है. और यह खयाल दिल में फिर कभी मत लाना कि मैं कालेज कैंपस में तुम्हारे साथ रहूंगा.’

मैं दंग रह गई. थोड़ी देर बाद पूछा, ‘आप वहां क्यों नहीं रहेंगे? हमारी बच्ची की देखभाल भी वहां ढंग से हो जाएगी. मैं भी उसे ज्यादा समय दे पाऊंगी.’

‘क्या तुम सोचती हो कि मैं तुम्हारे टुकड़ों पर पलूंगा. मैं मर्द हूं. याद नहीं है, मैं ने तुम्हारे पिताजी से क्या कहा था?’

‘भला उसे मैं भूल सकती हूं. तुम ने पिताजी से कितने आक्रोश में कहा था कि मैं चाहे मिट जाऊं, परंतु दूसरों के टुकड़ों पर नहीं पल सकता. मेरे बाजुओं की ताकत पर भरोसा हो तो अपनी लड़की का हाथ मेरे हाथ में दें. अपनी खुद्दारी पर बहुत गर्व था न तुम्हें?’

‘था नहीं, आज भी है.’

‘लेकिन हम, तुम अलग तो नहीं हैं न.’

‘स्त्रीपुरुष का अस्तित्व अलग है और अलग ही रहेगा.’

‘तो तुम ने मुझे नौकरी करने के लिए मजबूर क्यों किया?’

‘अब भी मैं तुम्हें नौकरी करने से नहीं रोकता. बस, यही कहता हूं कि घर और बच्ची का ध्यान रखो. पीएचडी वगैरह की आवश्यकता नहीं है. तुम्हारी जितनी तनख्वाह है, उतनी ही काफी है. महत्त्वाकांक्षाओं का कभी अंत नहीं होता.’

‘लेकिन मेरे इतने दिनों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा. मुझे नहीं लगता कि बच्ची को होस्टल भेजने और तुम्हारी इस लैक्चरबाजी में कोई संबंध है.’

‘है, तभी तो कह रहा हूं. मेरी बेटी होस्टल नहीं जाएगी. तुम पीएचडी छोड़ कर उस की परवरिश करो, नहीं तो मैं उसे अपनी बहन के पास जयपुर

भेज दूंगा. फिर अपना तबादला भी वहीं करा लूंगा.’

‘नीलिमा केवल तुम्हारी बेटी नहीं है, उस पर मेरा भी उतना ही अधिकार है, जितना कि तुम्हारा. उस के संबंध में मुझे भी निर्णय लेने का पूरा अधिकार है.’

‘इस निर्णय की हकदार तुम तभी बन सकती हो, जब उस का भला चाहो. मां हो कर अगर अपनी प्रतिष्ठा, यश और पदवी के लिए तुम उसे होस्टल भेजने पर उतारू हो जाओ तो ऐसे में तुम उस हक से वंचित हो जाती हो.’

मेरे क्रोध का पारावार न रहा. मैं भी बहुतकुछ बोल गई. आनंद ने भी बहुतकुछ कहा. बात बढ़ती ही चली गई. इतने में नीलिमा दौड़ती हुई आई और लगभग चीखती हुई बोली, ‘बंद करो यह झगड़ा. नहीं रहना मुझे अब इस घर में. मैं आंटी के पास जयपुर जाऊंगी.’

मेरा कलेजा मुंह को आ गया. ऐसा लगा, जैसे किसी ने छाती पर गोली दाग दी हो. मैं एकदम से पलट कर अपने कमरे में चली गई. मन में विचार उठा, ‘क्या अपनी पहचान बनाना गुनाह है? क्या मैं ने कोई गलती की है? मुझे पीएचडी नहीं करनी चाहिए क्या?’

मन ने झकझोरा, ‘नहीं, गलती मर्दों की है. पति का अहं मेरी पदोन्नति स्वीकार नहीं कर पाता. वह आखिर शाखा अधिकारी है और अगर मैं पिं्रसिपल बन गई तो उस को समाज में वह इज्जत नहीं मिलेगी, जो मुझे मिलेगी. वह मुझ से जलता है. मैं हार मानने से रही. नीलिमा अभी बच्ची है. एक दिन वह मां का प्यार जरूर महसूस करेगी,’ विचारों के सागर में गोते लगातेलगाते कब आंख लग गई, पता ही न चला.

सुबह उठी तो कुछ अजीब सी मायूसी ने घेर लिया. आनंद को नजदीक न पा कर जल्दी से उठ कर ड्राइंगरूम में पहुंची. घर की निस्तब्धता भयानक लगने लगी.

‘नीलिमा,’ मैं ने आवाज दी. लेकिन मेरी आवाज गूंजती हुई कानों में टकराने लगी. दिल धड़कने लगा. सहसा मेज पर रखी हुई चिट्ठी ने ध्यान आकर्षित किया. धड़कते दिल से उठा कर उसे पढ़ने लगी. उस में लिखा था, ‘मैं नीलिमा को ले कर जयपुर जा रहा हूं, उस की मरजी से ही यह सब हो रहा है. कभी हमारे लिए वक्त निकाल सको तो जयपुर पहुंच जाना. आनंद.’

इस के बाद बहुतकुछ हो गया. नीलिमा ने मुझे समझने या समझाने का मौका ही नहीं दिया. इतने समय बाद उसे देख कर पुराने जख्म हरे हो गए. मैं सोचने लगी, ‘आनंद अस्पताल में क्या कर रहा है? कैसी विचित्र परिस्थिति है, कैसा अजीब संगम. क्या कहूंगी आनंद से, क्या वह मुझे पहचानेगा? क्या मुझे उस से मिलना चाहिए? कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूं.

मैं जब विकास से मिली तो बड़ी परेशानी में थी. उस ने देखते ही कहा, ‘‘क्या हुआ. एक तो देर से आई हो… फिर इतनी घबराहट. सबकुछ ठीक तो है न. कोई बुरी खबर है क्या?’’

मैं ने मुसकराते हुए अपने विचारों को झटकने का प्रयास किया. हम होटल के अंदर गए. मन में विचारों का बवंडर उठ रहा था, ‘क्या विकास को सबकुछ बता दूं, क्या वह समझ पाएगा? आनंद से मिलने कैसे जाऊं? विकास से क्या कहूं?’ कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था.

अचानक मेरे कंधे पर हाथ रख कर विकास ने ही कहा, ‘सवि, मैं कुछकुछ समझ रहा हूं. समस्या क्या है, साफसाफ कहो?’

मेरी आंखों में आंसू आ गए. मैं ने विकास को सबकुछ बता दिया. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘इतनी सी बात के लिए परेशान हो. गोष्ठी खत्म होने के बाद उस से जा कर मिल लो. मैं भी साथ चलूंगा.’

उस ने इतनी आसानी से कह दिया, पर मैं अपने को संभाल नहीं पा रही थी. भोजन के दौरान स्मृतिपटल पर चलचित्र की तरह बीते दिन फिर से उभर आए.

Bigg Boss फेम सना खान बनीं मां, बेटे को दिया जन्म

बिग बॉस फेम एक्ट्रेस सना खान एक्टिंग दुनिया को अलविदा कह दिया है. धर्म के रास्ते पर एक्टिंग करियर से किनारा कर लिया है. एक्ट्रेस सना खान ने साल 2020 में धर्म के रास्ते पर चलने के लिए ग्लैमर दुनिया को अलविदा कहकर सबको चौंका दिया था.

इसके बाद सना खान ने बिजनेसमैन मुफ्ती अनस सैयद से शादी रचा ली. सना और मुफ्ती अनस के निकाह की तस्वीरों ने खूब वायरल हुई थी. दरअसल दोनों की लव स्टोरी की शुरुआत साल 2017 में हुई. वहीं सना खान मुफ्ती अनस से पहली बार मुलाकात मक्का में हुई थीं.  फिर दोनों में दोस्ती हुई और धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. सना ने साल 2020 में अनस से गुजरात में गुपचुप तरीके से निकाह कर लिया था.

 

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दरअसल, सना खान और अनस सईद के घर में नन्हा मेंहमान आया है. सना और अनस के घर में किलकारियां गूंज उठी है. सना खाना मां बन गई है, उन्होंने बेटे को जन्म दिया है. सना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है.

 

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सना ने पोस्ट किया वीडियो

पूर्व अभिनेत्री और उनके पति अनस सैय्यद ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर अपने बेटे के आगमन की घोषणा की. सना खान खुशखबरी देते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा कि “अल्लाह हमें हमारे बच्चे के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ संस्करण बनाए. अल्लाह की अमानत है बेहतरीन बनाना है. जज़ाकअल्लाह खैर सभी को आपके प्यार और दुआ के लिए जिसने हमारे दिलों और आत्माओं को बनाया है.” हमारी इस खूबसूरत यात्रा पर खुश हूं,”

उन्होंने अपने पोस्ट के साथ एक छोटा वीडियो भी अटेच किया, जिसमें लिखा था, ”अल्लाह ताला ने मुकद्दर में लिखा, फिर उसको पूरा किया और आसां किया, और जब अल्लाह देता है तो खुश” और मुसर्रा के साथ देता है. तो अल्लाह ताला ने हमें बेटा दिया.”

सना की पोस्ट पर उनके फैंस के प्यार की बाढ़ आ गई

सना ने खुशखबरी इंस्टाग्राम पर शेयर किया है ऐसे में उनके फैंस काफी प्यार दे रहे है. सना खान के इस पोस्ट पर फैंस के कमेंट्स की बाढ़ आ गई है. फैंस सना खान को बधाइयां दे रहे हैं. सना के इस पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “माशाल्लाह बहुत मुबारक. अल्लाह लंबी उम्र दे, सेहत दे, नेक और इमान वाला बनाए आपकी औलाद को.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “बहुत- बहुत मुबारक हो, सना और अनस भाई.

अभिनेत्री हुमा कुरैशी से जानें मानसून में उनकी खास पसंद, पढ़ें इंटरव्यू

मॉडलिंग से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री हुमा कुरैशी दिल्ली की है. स्पष्टभाषी और खुबसूरत हुमा को अभिनय पसंद होने की वजह से उन्होंने दिल्ली में पढाई पूरी कर थिएटर ज्वाइन किया और कई डॉक्युमेंट्री में काम किया.

एक विज्ञापन की शूटिंग के लिए वह मुंबई आई. उस दौरान निर्देशक अनुराग कश्यप ने उसके अभिनय की बारीकियों को देखकर फिल्म ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ के लिए साइन किया. फिल्म हिट हुई और हुमा को पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़ा. इसके बाद फिल्म ‘एक थी डायन, डी-डे, बदलापुर, डेढ़ इश्कियां, हाई वे, जॉली एल एल बी आदि के अलावा उन्होंने वेब सीरीज भी की है.

हुमा ने हॉलीवुड फिल्म ‘आर्मी ऑफ़ द डेड’ भी किया है. हुमा जितनी साहसी और स्पष्टभाषी दिखती है, रियल लाइफ में बहुत इमोशनल और सादगी भरी है. उनकी फिल्म ‘तरला’ रिलीज पर है, उनसे हुई बातचीत के अंश इस प्रकार है.

 

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सवाल – इस फिल्म को करने की खास वजह क्या रही?

जवाब – कहानी अच्छी तरह से लिखी गई है, एक प्रेरणादायक कहानी, जो एक मास्टर शेफ की है, उन्होंने रेसिपी बुक भी लिखी है और एक महिला होकर इतनी कामयाबी पाई है. उनकी कहानी सबको पता होनी चाहिए.

सवाल – किस तरह की तैयारिया की है?

जवाब – खाने की मैंने अधिक प्रैक्टिस नहीं की है, क्योंकि मैं खाना बना सकती हूँ, फ़ूड स्टाइलिस्ट ने ही सबकुछ किया है, लेकिन इसमें खाने को अधिक महत्व नहीं दिया गया है. इसमें घर का खाना जो माँ के हाथ का बना होता है, जिसमे फैंसी तरीके से सजावट नहीं होती, पर उसका स्वाद बहुत अलग होता है. उसे दिखाने की कोशिश की गई है.

सवाल – बायोपिक में किसी व्यक्ति को दर्शाते हुए उस व्यक्ति की बारीकियों को पर्दे पर उतारने की जरुरत होती है, नहीं तो कंट्रोवर्सी होती है, आपने इस बात का कितना ख्याल रखा?

जवाब – ये सही है कि बायोपिक में मेहनत अधिक करनी पड़ती है, इसमें मैंने तरला दलाल की बहुत सारी इंटरव्यू देखी, वह जिस तरीके से बात करती थी, उसे अडॉप्ट किया, मसलन वह गुजराती थी, पर मराठी लहजे में बात करती थी, बहुत सारे शब्द अंग्रेजी में बोलती थी. उनके बात करने का तरीका ‘लेडी नेक्स्ट डोर’ की तरह था, जो बहुत सुंदर था.

सवाल – तरला दलाल की कहानी आज की महिलाओं के लिए कितना सही है?

जवाब – आज भी तरला की कहानी प्रासंगिक है, क्योंकि आज भी किसी लड़की को पहले शादी करने की सलाह दी जाती है, बाद में उन्हें जो करना है, उसे करने को कह दिया जाता है, जिसे शादी के बाद करना आसान नहीं होता, पर तरला ने उसे कर दिखाया.

सवाल – परिवार का सहयोग किसी महिला की कामयाबी में कितना जरुरी होता है?

जवाब – तरला दलाल का जीने का तरीका संजीदगी से भरा हुआ करता था. वह एक सॉफ्ट स्पोकेन महिला थी. उस ज़माने घर से निकल कर काम करना, पति और परिवार का ध्यान रखना आदि सब करना आसान नहीं था. उस समय की वह मार्गदर्शन करने वाली पहली महिला है और उन्होंने बता दिया कि परिवार के साथ भी बहुत कुछ किया जा सकता है, जो आज की महिलाये भी कर सकती है. इसे बहुत ही प्यार भरी तरीके से उन्होंने किया है, जिसे सबको जानना आवश्यक है. मेरे यहाँ तक पहुँचने में भी मेरे परिवार का बहुत बड़ा सहयोग है, मेरे पेरेंट्स, मेरा भाई सबका सहयोग रहा है, अकेले इंसान कुछ भी नहीं कर पाता.

 

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सवाल – दिल्ली से मुंबई आना और एक्टिंग के कैरियर को स्टाब्लिश करना कितना मुश्किल रहा?

जवाब – दिल्ली से मुंबई आने के बाद मैंने विज्ञापनों में काम करना शुरू कर दिया था, एक एड में मेरे साथ अभिनेता आमिरखान थे, जिसे अनुराग कश्यप डायरेक्ट कर रहे थे, इसके बाद अनुराग कश्यप ने मुझे गैंग्स ऑफ़ वासेपुर में काम करने का ऑफर दिया, जो 2012 में रिलीज हुई, ये एक छोटी सी मेरी शुरूआती जर्नी रही, जिसके बाद लोगों ने मुझे फिल्मों में काम करते हुए देखा और आगे काम मिलता गया.

सवाल – आपने इंडस्ट्री में करीब 10 साल बिता चुकी है और बॉलीवुड, हॉलीवुड और साउथ की फिल्मों में काम किया है, आप इस जर्नी को कैसे देखती है?

जवाब – ये सही है कि मैंने एक सपना देखा है और अब वह धीरे-धीरे पूरा हो रहा है. मैंने हमेशा से अभिनेत्री बनना चाहती थी, लेकिन कैसे होगा पता नहीं था. समय के साथ-साथ मैं आगे बढ़ती गयी. मैं चंचल दिल की लड़की हूँ और अपने काम से अधिक संतुष्ट नहीं रहती. मैं कलाकार के रूप में हर नयी किरदार को एक्स्प्लोर करना पसंद करती हूँ.

सवाल – किसी फिल्म को चुनते समय किस बात का ख़ास ध्यान रखती है?

जवाब – कहानी अच्छी हो, अच्छी तरह से लिखी हुई हो, अच्छे लोगों के साथ फिल्म बन रही हो और जो फिल्म बना रहे है, वे इमानदारी से फिल्म को पूरा करें. कहानी और स्क्रिप्ट अच्छी हो और मुझे एक्साइट करती हो, तो जोनर कोई भी हो, उसे करने में मजा आता है.

सवाल – इंडस्ट्री की कोई ऐसी फ्रेंड जिससे आप मिलना-जुलना पसंद करती है?

जवाब – मेरा इंडस्ट्री में कोई फ्रेंड नहीं है, मैं अकेले रहती हूँ. सुबह शूटिंग पर जाती हूँ, इसके ख़त्म होने के बाद सीधे घर आती हूँ. खाना खाती हूँ और सो जाती हूँ.

सवाल – मानसून में आप खुद को फिट कैसे रखती है?

जवाब – हर मौसम में समय पर खाना और समय से सोना ये दो चीज मैं नियमित करती हूँ, इसके अलावा वर्कआउट और योगा भी करती हूँ. मानसून में पकौड़े खाना पसंद है, जो किसी दूसरे मौसम में अच्छा नहीं लगता.

सवाल – ऐसी कोई फ़ूड जिसे आप खुद को खाने से रोक न सकें?

जवाब – चाट

सवाल – कोई ऐसी व्यंजन जिसे आप अच्छा बना लेती है?

जवाब – कीमा अच्छा बना लेती हूँ, जिसे सभी पसंद करते है.

सवाल – कोई सुपर पॉवर मिलने पर क्या बदलना चाहती है?

जवाब – मैं लोगों की थॉट्स पढ़ना चाहती हूँ.

मेरी अंडरआर्म्स से बदबू आती है, Odor से छुटकारा पाने के लिए मैं अब क्या करूं?

सवाल

मेरी अंडरआर्म्स से बदबू आती है और यह बदबू कई बार सब के बीच में शर्मिंदा कर देती है. क्या इस का कारण जरूरत से ज्यादा पसीना हैक्या आप इस बदबू से छुटकारा पाने के लिए नुसखे बता सकती हैं?

जबाव

दरअसलबदबूदार अंडरआर्म्स भले ही एक आम समस्या हो लेकिन यह आप के आत्मविश्वास को कम कर देती है. भले ही डियोड्रैंट या रोलऔन गरमियों में बदबूदार अंडरआर्म्स के लिए एक त्वरित समाधान है. लेकिन इस का असर खत्म होते ही यह समस्या फिर से होने लगती है. जब शरीर से पसीना निकलता है तो हमारी त्वचा की सतह पर रहने वाले बैक्टीरिया प्रोटीन को तोड़ देते हैं और कुछ खास ऐसिड यौगिक निकलते हैं जिन से शरीर के कुछ हिस्सों से तीखी गंध आने लगती है. यह एक ऐसी समस्या है जो आसानी से कुछ घरेलू नुसखों द्वारा दूर की जा सकती है.

आप भले ही इस समस्या से कई सालों से परेशान हों लेकिन इन नुसखों से आप कुछ ही दिनों में अंडरआर्म्स से बदबू की समस्या को दूर कर सकती हैं. अंडरआर्म्स की बदबू से छुटकारा पाने के लिए बेकिंग सोडा प्रभावी रूप से काम करता है. इस के लिए 2 बड़े चम्मच बेकिंग सोडा लें और उस में 1 चम्मच नीबू का रस मिलाएं. दोनों सामग्री को मिला कर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को अंडरआर्म्स पर 10 मिनट तक सर्कुलर मोशन में घुमाते हुए मसाज करें. इसे अंडरआर्म्स में थोड़ी देर के लिए लगाए रखें और हलका सूखने पर पानी से धो लें इस के अलावा

1 कप ऐप्पल साइडर विनेगर में 1/2 कप पानी मिलाएं. इसे एक स्प्रे बोतल में भर कर रोज रात को सोने से पहले अपनी अंडरआर्म्स पर लगाएं. सुबह इसे कुनकुने पानी से धो लें. इस प्रक्रिया को 15 दिनों तक नियमित रूप से दोहराएं. ऐसा करने से अंडरआर्म्स की बदबू पूरी तरह से दूर हो जाएगी.

समस्याओं के समाधान

ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडरडाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा 

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभाई-8रानी झांसी मार्गनई दिल्ली-110055.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

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