अपने अपने सच: भाग 1- पहचान बनाने के लिए क्या फैसला लिया स्वर्णा की मां ने?

नगर के दैनिक अखबार ‘बदलती दुनिया’ का मैं रविवासरीय संस्करण तैयार करता हूं. नववर्ष विशेषांक के लिए मैं ने अखबार में अनेक बार विज्ञापन दे कर अच्छी कहानियों और लेखों को आमंत्रित किया था. खासतौर से नई पीढ़ी से अपेक्षा की थी कि वे इस बदलते समय और बदलती दुनिया में नई सदी में क्या आशाआकांक्षाएं रखते हैं, उन की चाहतें क्या हैं, उन के सपने क्या हैं आदि पर अपनी बात खुल कर कहें. चाहें तो उन का नाम गुप्त भी रखा जा सकता है.

‘‘जी, मेरा नाम स्वर्णा है…’’ 16-17 साल की एक युवा होती, सुंदर सांचे में ढली, तीखे नाकनक्श वाली लड़की मेरी मेज के सामने आ खड़ी हुई.

‘‘कहिए?’’ मेज पर फैली ढेरों रचनाओं पर से नजरें हटा कर मैं उस की ओर देखने लगा.

‘‘अपनी कहानी ‘बदलती दुनिया’ को नववर्ष विशेषांक में छपने के लिए देने आई हूं,’’ कहते हुए उस ने अपने कंधे पर लटके बैग से एक लिफाफा निकाला और मेरी ओर बढ़ा दिया.

‘‘बैठें, प्लीज,’’ मैं ने सामने रखी कुरसी की तरफ इशारा किया. वह लड़की बैठ गई पर उस के चेहरे पर असमंजस बना रहा. वह बैठी तो भी मेरी ओर देखती रही. लिफाफे से निकाल कर कहानी पर एक सरसरी नजर डाली. गनीमत थी कि कहानी पृष्ठ के एक ओर ही लिखी गई थी वरना उसे वापस दे कर एक तरफ लिखने को कहना पड़ता.

संपादक होने के नाते कहानी को ले कर मेरी कुछ अपनी मान्यताएं हैं. पता नहीं इस लड़की ने उन बातों का खयाल कहानी में रखा है या नहीं. मेरी समझ से कहानी आदमी के भीतर रहने वाले आदमी को सामने लाने वाली होनी चाहिए. यदि कोई कहानी ऐसा नहीं करती तो मात्र घटनात्मक कहानी पाठकों का मनोरंजन तो कर सकती है पर मनुष्य को समझने में उस की मदद नहीं कर सकती.

‘‘अखबार में प्रकाशित विज्ञापन में कहानी के कुछ निश्चित विषय दिए गए थे. क्या मैं पूछ सकता हूं कि आप की यह कहानी किस विषय पर है?’’ मैं ने उस लड़की से जानने के लिए सवाल किया.

‘‘यह कहानी अपनी उम्र की लड़कियों पर मैं ने केंद्रित की है. इस उम्र में हमें तमाम आकर्षण, इच्छा, आकांक्षाएं, चाहतें घेरे रहती हैं और इन सब में सब से प्रमुख होती है किसी का प्यार पाने की आकांक्षा. इस कहानी में मेरी उम्र की एक लड़की है, जो अपने पिता की आयु के व्यक्ति को प्यार करने लगती है…हालांकि उस व्यक्ति की लड़की उस की सहेली है, उस के साथ पढ़ती है…उस की पत्नी जीवित है, पर…’’ कहतेकहते रुक कर वह मेरी ओर प्रतिक्रिया के लिए देखने लगी.

‘‘आप को नहीं लगता कि ऐसा प्यार जिस में आयु का भारी अंतर हो, जिस का प्रेमी पहले से ही विवाहित और एक किशोर उम्र की लड़की का पिता हो, बहुत बेतुका और हास्यास्पद होता है?’’ मैं मुसकराया. असल में मैं लेखिका के दिल व दिमाग को टटोलना चाहता था. समझना चाहता हूं कि इस उम्र की लड़कियां ऐसे बेसिरपैर के प्यार में पड़ कर क्यों अपना सर्वस्व गंवाती हैं.

‘‘सर, मेरा खयाल है…’’ वह अनजान लड़की बोली, ‘‘प्यार में न कुछ बेतुका होता है, न हास्यास्पद. छिपछिप कर किया गया प्यार तो सचमुच सब से अधिक आनंददायक होता है…उस में जो थ्रिल, जो धुकधुकी, जो अनिश्चितता होती है उस के बराबर तो संसार का कोई आनंद नहीं हो सकता.

‘‘मेरा खयाल है कि लोग गलत सोचते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ आदमी की प्यार पाने की भूख और आकांक्षा कम हो जाती है. सच तो यह है कि उम्र से प्यार का कुछ लेनादेना नहीं है. वह किसी भी उम्र में, किसी भी वक्त और किसी भी व्यक्ति से हो सकता है. प्रेम कोई गणित का सवाल नहीं होता, जहां 2+2 मिल कर 4 ही होंगे. प्यार कोई उपभोक्ता सामग्री नहीं है कि बाजार गए और किलो 2 किलो खरीद कर ले आए…’’

वह लड़की जिस समझदारी और तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बात कह रही थी, मुझे अच्छा लगा.

अच्छा इसलिए लग रहा था कि आज की पीढ़ी एकदम नकारा, नाकाबिल और सबकुछ कुछ समय में ही हासिल कर लेने के लिए उचितअनुचित, नैतिक- अनैतिक जैसे पचड़ों में नहीं पड़ती. वह जो चाहती है उसे हासिल करने के लिए कुछ भी कर गुजरती है.

‘‘ठीक है, अगर आप की कहानी अच्छी हुई तो जरूर छापूंगा,’’ मैं ने बात खत्म कर उसे जाने का संकेत दिया. असल में मेज पर बहुत काम बाकी था और विशेषांक निकालने में वक्त बहुत कम बचा था.

‘‘एक निवेदन मानें तो करूं आप से,’’ वह सकुचाती हुई कुरसी से उठी.

‘‘कहिए?’’ मैं प्रश्नवाचक नजरों से उस की ओर देखने लगा.

‘‘कहानी के साथ मैं ने अपना असली नाम नहीं लिखा है. असल में मैं नहीं चाहती कि लोग पढ़ कर जान जाएं कि यह कहानी मैं ने लिखी है. आप इस कहानी को यदि ठीक पाएं और छापने का फैसला करें तो कृपया मेरा पता भी न छापें. पते से भी लोग समझ सकते हैं कि मेरी लिखी कहानी है,’’ इस के बाद कुछ हिचक के साथ सिर झुका कर वह बोली, ‘‘सर, यह मेरी आपबीती है…एक प्रकार से सत्यकथा…आत्मकथा नहीं कहूंगी क्योंकि इस में जीवन की बहुत सी बातें मैं ने नहीं कहीं जबकि लेखक आत्मकथा में शायद सबकुछ लिखते हों…’’

‘‘ठीक है, पर एक समस्या आएगी…’’ मैं ने कुछ सोच कर कहा, ‘‘यदि इस कहानी में कोई हिस्सा मुझे उचित न लगा, उसे संशोधित करना चाहा या आप से ही उसे ठीक कराना चाहा तो संपर्क कैसे हो सकेगा? कहानी में आप ने पता दिया है पर फोन नंबर आदि कुछ नहीं है…हो सकता है, आप तक जाने का मेरे पास समय न हो या मैं एक लड़की से मिलने जाना ही न चाहूं… खासकर उस लड़की से जिस से मेरा कोई खास परिचय अभी नहीं हुआ है…’’

मुसकरा दी वह, ‘‘आप, बहुत चालाक हैं. इसी बहाने आप मुझ से संपर्क बनाए रखना चाहेंगे…’’ उस की मुसकान एकदम गुलाब के फूल का खिलना प्रतीत हुई.

‘‘सही पकड़ा आप ने,’’ मैं ढीठता से हंस दिया, ‘‘असल में मैं चाहूंगा कि भले ही आप के नकली नाम से कहानियां जाएं पर अकसर हमारे अखबार में रविवासरीय अंक में आप जैसी अच्छी लेखिका की कहानियां जाती रहें…इस के लिए आप से संपर्क रखना जरूरी है और मुझे निश्चित ही आप के यहां, आप के घर पर, आप से मिलने में असुविधा होगी…यह छोटा और कस्बाई शहर है…बात का बतंगड़ बनते यहां देर नहीं लगेगी…’’

‘‘धन्यवाद. एक लड़की के लिए आप इतने संवेदनशील हैं कि उस के बदनाम होने से आप को कष्ट होगा…’’ वह बेबाकी से हंस दी. बहुत प्यारी हंसी थी उस की. कुछ पल तक अपलक ताकता रहा उस की ओर. उस ने अपना मोबाइल नंबर नोट करा दिया और असली नाम भी बता दिया.

प्रिया : मां

बेटी स्वर्णा को ले कर मैं यहां से दूर, दिल्ली या उस जैसे किसी भी महानगर जाना चाहती हूं. स्वर्णा के पिता यानी मेरे पति लोचन ने तो मुझे बहुत पहले छोड़ दिया था. वे अपनी नई पत्नी के साथ मेरठ में रहते हैं. जब उन्हें मेरा कोई खयाल नहीं है, न मेरी बेटी स्वर्णा का तो मैं ही उन के पीछे क्यों विधवाओं जैसी जिंदगी गुजारूं? हालांकि मेरी सास यहीं रहेंगी. अपना पुश्तैनी घर वे छोड़ कर कहीं नहीं जाएंगी. पति लोचन अपनी मां के लिए हर महीने खर्च भेजते रहते हैं जबकि मेरा और मेरी बेटी का कभी हालचाल भी नहीं पूछते.

गनीमत रही कि मैं एक प्रशिक्षित नर्स थी. पति के छोड़ कर चले जाने के बाद मैं ने फिर से अस्पताल में नौकरी शुरू कर दी, जिस से मेरी रोजीरोटी चलती रही. मेरी सास मानती हैं कि लोचन मेरे खराब स्वभाव के कारण ही मुझे छोड़ कर गया है जबकि मैं समझती हूं, लोचन जैसे आदमी से कोई भी समझदार औरत हरगिज नहीं निभा सकती.

सास कहती हैं कि औरत को जीवन चलाने के लिए कम और गम दोनों खाने चाहिए. उन का खयाल है कि मैं बहुत जिद्दी, बददिमाग और बदजबान औरत हूं. सिर्फ सुंदर होना ही औरत का कोई खास गुण नहीं होता, उसे मधुरभाषी, कोमलहृदया, व्यवहारकुशल और पति- समर्पिता भी होना चाहिए. उन की नजरों में मेरा पढ़ालिखा और नौकरी करने योग्य होना ऐसा अवगुण है जिस के चलते ही मैं ने उन के बेटे के साथ निभाव नहीं किया है.

सच सिर्फ मैं जानती हूं. असल में मैं ने शादी से पहले बड़े अस्पतालों में नौकरी की थी. एक से एक सुंदर डाक्टरों के संपर्क में रही हूं. उन की निजी जिंदगी को नजदीक से देखा व जाना है. उन में अपने काम के प्रति कितनी लगन है, कितनी मेहनत करते हैं वे चार पैसे कमाने के लिए. काबिल डाक्टर 4-5 अस्पतालों के संपर्क में रहते हैं. हर जगह मरीजों को देखते हैं. कहीं औपरेशन कर रहे हैं, कहीं सलाहकार बने हुए हैं, अपना अस्पताल भी चला रहे हैं और सुबहशाम अपने घर भी मरीजों को वक्त दे रहे हैं. आगे और आगे बढ़ने के लिए निरंतर नई किताबें पढ़ना, सेमिनारों में जाना, बड़े और कुशल डाक्टरों के संपर्क में रहना…

एक हमारे पति लोचन हैं, जिस मामूली नौकरी में एक बार लग गए, बस लग गए. बैल की तरह सिर झुकाए चुपचाप उसी जुए को खींचे जा रहे हैं. उन में कुछ नया करने का कोई हौसला नहीं, उत्साह नहीं, निष्प्राण जिंदगी जीने का क्या मतलब हुआ? जीवन में तनिक भी जोखिम उठाने की कोशिश नहीं करते. कोई नया कोर्स, नया कामधंधा करने का भी मन नहीं बनाते.

आरामतलब इतने कि घर आते ही कपड़े बदलेंगे, तहमत पहन बिस्तर पर पड़ जाएंगे. पता नहीं कितनी नींद आती है उन्हें. तुरंत सो जाएंगे. न टीवी देखना, न घर के किसी अन्य काम में मदद करना. बाजार भी जाऊं तो मैं, घर का सामान भी लाऊं तो मैं.

इन बातों से ही मुझे चिढ़ होती थी. झगड़े भी इन्हीं बातों को ले कर होते थे. मेरे मुंह से निकल जाता था, ‘आप जैसा आलसी दुनिया में दूसरा आदमी नहीं होगा.’

‘आलसी ही क्यों, निखट्टू भी कह दो…नाकारा और मूरख भी कह दो,’ वे उबल पड़ते.

सास बीच में आ जातीं, ‘ऐसी औरत मैं ने आज तक नहीं देखी जो घर में आते ही अपने आदमी को फाड़ खाने के लिए दौड़ती है बदजात…’

‘आप बीच में मत बोलिए, मांजी,’ मैं कुपित होती, ‘मैं ऐसे आदमी को बहुत दिन नहीं झेल सकती. आज हर आदमी दूसरों के हक छीनने लगा है, दूसरों के पेट पर लात मार कर अपने लिए चीजें हासिल कर रहा है…पर ये महाशय हैं कीड़े- मकोड़ों की तरह इस दड़बे में पड़े जी रहे हैं.’

रोजरोज की इस चकचक का भी कोई नतीजा नहीं निकला. उन की आदतें नहीं बदलीं. घर में वैसे ही अभाव बने रहे. आखिर मैं ने एक अस्पताल में नर्स की नौकरी शुरू कर दी. नौकरी शुरू की तो उन्हें अपना अपमान लगने लगा. वे रोज सुनाने लगे कि कमाने की धौंस जमाना चाहती है. आखिर, क्लेश यहां तक बढ़ा कि वे घर छोड़ कर चले गए.

घर छोड़ने का उन्हें बहाना भी मिल गया, दफ्तर की नौकरी में उन का दूसरी जगह तबादला हो गया. मां से बोले, ‘यह औरत तो तुम्हें रोटी देगी नहीं…मैं हर महीने तुम्हें पैसे भेजता रहूंगा. इस के भरोसे रहीं तो भूखी मरोगी.’

बाद में पता चला कि तबादला तो एक बहाना था. दरअसल, उन्हें अपने साथ काम करने वाली एक नवयौवना पसंद आ गई थी. दोनों में इश्क कुछ इतना गहरा हुआ कि वे साथ रहने की योजना बना कर मेरठ जा बसे. मैं चाहती तो उन का जीना हराम कर देती. सरकारी नौकरी थी. बिना पहली पत्नी को तलाक दिए वे दूसरी शादी कैसे कर सकते थे? पर मुझे खुद ऐसे गैरजिम्मेदार आदमी से छुटकारा चाहिए था.

मुझे तो आश्चर्य इस बात का था कि ऐसे बेकार आदमी को भी कोई नवेली लड़की घास डाल रही थी. क्या आदमियों का इतना टोटा है कि ऐसे आलसी पर भी वह लट्टू हो गई.

Monsoon Special: अपने घर को मानसून के लिए तैयार करने के 13 टिप्स

मानसून अपनी आमद की दस्तक लगभग पूरे देश में दस्तक दे चुका है. बारिश के मौसम में हवा में नमी रहती है जिससे कीड़े मकौड़े और कोकरोच भी घरों में अपनी जगह बना लेते हैं. बारिश से जहाँ एक तरफ गर्मी से राहत मिलती है वहीं घर को यदि बारिश के लिए तैयार न किया जाये तो चीजों के खराब होने की सम्भावना तो हो ही जाती है साथ ही अक्सर अनचाही मुसीबतों का भी सामना करना पड़ जाता है. आज हम आपको बारिश के लिए अपने घर को इस तैयार करने के कुछ टिप्स बता रहे हैं-

-मानसून के इन 2 माह में किचिन में प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न दाल, मसालों, शकर, नमक आदि को पर्याप्त मात्रा में स्टोर कर लें, यदि आप वर्ष भर का राशन एक साथ खरीदतीं हैं तो भी दो माह के लिए राशन अलग निकालकर एयर टाईट जार में भरकर रखें ताकि बारिश की नमी खाद्य पदार्थ में प्रवेश न कर सके.

  • दाल चावल के डिब्बो में तेजपात, साबुत लाल मिर्च आदि रखें ताकि इनमें घुन न लगें साथ ही नमक में कुछ दाने चावल के डालें ये नमी को सोख लेंगे, शकर में दो चार लौंग डालने से चीटियाँ नहीं होंगी.
  • किचिन में प्रयोग किये जाने वाले टावेल और कपड़ों को भी धोकर रख लें क्योंकि बारिश में नमी के कारण कपड़े आसानी से सूखते नहीं हैं जिससे उनमें कीटाणु पनपने की सम्भावना हो जाती है, यदि हो सके तो घर के पुराने और अनुपयोगी कपड़ों को छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर यूज एंड थ्रो की तरह इस्तेमाल करें.
  • घर के सभी कारपेट और रग्स  को धूप दिखाकर, या फिर वेक्यूम क्लीनर से अच्छी तरह साफ़ करके सूती चादर में लपेटकर रख दें.
  • छाते और रेनकोट को निकालकर चेक कर लें ताकि समय रहते उन्हें सुधरवाया जा सके. इन्हें रखने की व्यवस्था भी घर के बाहरी कमरे या फिर घर के बाहर ही करें ताकि बारिश में आपका पूरा घर गंदा न हो.
  • बारिश के लिए वाटर प्रूफ जूते चप्पल निकाल लें साथ ही चमड़े और कपड़े के जूते चप्पलों को अच्छी तरह साफ करके प्लास्टिक के जिप बेग में रख दें ताकि ये नमी के प्रभाव में आने से बचे रहें.
  • मूंगफली, ड्राईफ्रूट्स, साबुत मसालों को अधिक मात्रा में खरीदकर जिप बेग में रख लें क्योंकि बारिश के तुरंत बाद बाजार में ये खाद्य वस्तुएं नमी और फफूंद वाली मिलतीं हैं.
  • बाथरूम, सिंक और वाश बेसिन में फिनायल की गोलियां डाल दें ताकि उनमें कीड़े मकोड़े न पनप सकें.
  • घर के सदस्यों के उपयोग के लिए हल्के तौलिये और चादरें निकाल लें ताकि ये आसानी से सूख सकें साथ ही घर के सभी सदस्यों के लिए कम से कम तीन जोड़ी अंडरगारमेंट की व्यवस्था अवश्य कर लें ताकि इमरजेंसी में इनका उपयोग किया जा सके.
  • बनारसी, जरी वर्क और शिफोन जैसे महंगे फेब्रिक के सूट और साड़ियों को सूती कपड़े में लपेटकर साड़ी या सूट कवर में रखें, साथ ही बारिश में पहनने के लिए हल्के और सिंथेटिक कपड़ों को निकाल लें ताकि वे जल्दी सूख जायें.
  • गर्मियों में बालकनी या छत पर लगाये गए ग्रीन नेट को हटवा कर छत की साफ़ सफाई करवाएं ताकि बारिश का पानी सुगमता से निकल सके.
  • स्नेक प्लांट, एग्लोनिमा, मनी प्लांट, सिंगोंनियम, पाम और सक्लेंट जैसे पौधे जिन्हें बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है, उन्हें एक बार के बारिश के पानी के बाद घर के अंदर रख लें अन्यथा वे अधिक पानी से सड़ने लगेंगे.
  • कुछ अतिरिक्त डोरमेट बाजार से लाकर रखें ताकि मुख्य द्वार पर उन्हें एक के बाद बिछा सकें ताकि बाहर से आने वाले जूते चप्पलों से घर को गीला होने से बचाया जा सके.

किसी से नहीं कहना: भाग 1- उर्वशी के साथ उसके टीचर ने क्या किया?

मध्यवर्ग के विवेक और विनीता अपनी इकलौती बेटी उर्वशी और वृद्ध मातापिता के साथ बहुत ही सुकून के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. परिवार छोटा ही था, घर में जरूरत की सभी सुखसुविधाएं उपलब्ध थीं. ज्यादा की लालसा उन के मन में बिलकुल नहीं थी. यदि कोई चाहत थी तो केवल इतनी कि अपनी बेटी को खूब पढ़ालिखा कर बहुत ही अच्छा भविष्य दे पाएं.

उर्वशी भी अपने मातापिता की इस चाह पर खरा उतरने की पूरी कोशिश कर रही थी. 10 वर्ष की उर्वशी पढ़ने में होशियार होने के साथ ही खेलकूद में भी बहुत अच्छी थी और जीत भी हासिल करती थी. वह स्कूल में सभी टीचर्स की चहेती बन गई थी.

विनीता अपनी बेटी की पढ़ाई की तरफ बहुत ध्यान देती थी. उसे रोज पढ़ाना उस की दिनचर्या का सब से महत्त्वपूर्ण कार्य था. विवेक औफिस से आने के बाद उसे खेलने बगीचे में ले जाते थे. रात को अपने दादादादी के साथ कहानियां सुन कर उस के दिन का अंत होता था. इस तरह से उस की इतने अच्छे संस्कारों के बीच परवरिश हो रही थी.

उर्वशी 5वीं कक्षा में थी, वह प्रतिदिन बस से ही स्कूल आतीजाती थी. विनीता रोज उसे बस में बैठाने और लेने आती थी. यदि किसी दिन बस आने में थोड़ी भी देर हो जाए तो विनीता बस के ड्राइवर को फोन लगा देती थी.

बस से उतरते ही उर्वशी अपनी मां को समझती, ‘‘अरे मम्मी कभीकभी किसी बच्चों की मांएं आने में देर कर देती हैं, इसलिए देर हो जाती है. जब तक बच्चों की मांएं नहीं आतीं तब तक छोटे बच्चों को बस से नीचे भी नहीं उतरने देते. आप क्यों चिंता करती हो? हमारी बस में और स्कूल में सब लोग बहुत अच्छे हैं.’’

‘‘अच्छा मेरी मां मैं समझ गई.’’

उर्वशी के स्कूल में हफ्ते में 2 दिन खेलकूद का पीरियड होता था. इस पीरियड का बच्चे बहुत ही बेसब्री से इंतजार करते थे. उर्वशी को भी इंतजार रहता था. वह बहुत तेज दौड़ती थी. खेलकूद के टीचर महेश सर जिन की उम्र लगभग 26-27 वर्ष होगी, हमेशा उर्वशी की तरफ सब से ज्यादा ध्यान देते थे और उस की पीठ थपथपाना, उस की तारीफ करना सर की आदत में शामिल हो चुका था. छोटी उर्वशी भी उन के साथ बहुत घुलमिल गई थी.

महेश की नीयत इस बच्ची के लिए खराब हो चुकी थी. हवस दिनबदिन उस के ऊपर हावी होती जा रही थी. अब वह मौके की तलाश में था कि किस तरह अपनी हवस को शांत करे. चंचल और सुंदर उर्वशी को अपना शिकार बना कर स्वयं कैसे बच निकलना है, यह पूरी योजना एक षड्यंत्र के तहत महेश के मनमस्तिष्क में चल रही थी.

एक दिन उर्वशी को अपने पास बुला कर उस ने कहा, ‘‘उर्वशी बेटा अभी एक इंटर स्कूल कंपीटिशन होने वाला है और तुम तो कितना तेज दौड़ती हो. मैं ने उस के लिए तुम्हारा नाम लिखवा दिया है. अब तुम्हें और ज्यादा प्रैक्टिस करनी होगी. तुम यह बात अपने घर पर बता देना.’’

उर्वशी सर के मुंह से यह सुन कर बहुत खुश हो गई, ‘‘जी सर मैं बहुत मेहनत करूंगी और जीतूंगी भी. मैं आज ही मम्मीपापा को यह बता दूंगी. मेरे घर में सब बहुत खुश हो जाएंगे. सर हमें कब जाना है?’’

‘‘वह मैं तुम्हें बता दूंगा और यह बात अपनी क्लास में अभी किसी को भी मत बताना वरना सब ईर्ष्या करने लगेंगे.’’

‘‘ठीक है सर, मैं किसी को भी नहीं बताऊंगी… हम जीतने के बाद ही सब को बताएंगे.’’

‘‘हां बिलकुल,’’ महेश ने उत्तर दिया.

‘‘उर्वशी लो चौकलेट खाओगी?’’

‘‘नहीं सर मेरी मम्मी ने कहा है, किसी से भी खाने की कोई चीज नहीं लेना.’’

‘‘अरे लेकिन मैं तो तुम्हारा सर हूं, मुझ से लेने के लिए तुम्हारी मम्मी कभी मना नहीं करेंगी. अच्छा बोलो, तुम्हें क्या पसंद है, मैं तुम्हारे लिए वही चीज ले कर आऊंगा?’’

‘‘नहीं सर मुझे कुछ नहीं चाहिए,’’ उर्वशी इतना कह कर वहां से चली गई.

उर्वशी ने अपने घर जा कर जब इंटर स्कूल कंपीटिशन की बात बताई तो घर में सभी लोग बहुत खुश गए.

अब महेश की बेचैनी बढ़ने लगी थी, वह जल्दीसेजल्दी अपनी कामेच्छा पूरी करना चाहता था.

बुधवार को खेलकूद के पीरियड के दौरान महेश ने उर्वशी को बुला कर कहा, ‘‘उर्वशी, शनिवार को कंपीटिशन है. तुम सुबह 9 बजे स्कूल यूनिफौर्म पहन कर तैयार रहना. मेरे साथ2 बच्चे और भी होंगे, जो हमारे साथ ही चलेंगे.’’

‘‘जी सर,’’ कह कर उर्वशी जाने लगी.

तभी महेश ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘बेटा जीतना है, अपने सर की इच्छा पूरी करोगी न?’’

‘‘जी सर मैं बहुत तेज दौड़ूंगी.’’

उर्वशी ने घर पहुंच कर अपनी मम्मी से कहा, ‘‘मम्मी शनिवार को मेरी रेस है, मुझे यूनिफौर्म पहन कर जाना है, सुबह 9 बजे सर आएंगे और खेलकूद खत्म होने पर सर ही मुझे वापस भी छोड़ देंगे.’’

‘‘ठीक है उर्वशी बेटा, तुम हिम्मत से दौड़ना, डरना नहीं.’’

‘‘हां मम्मी.’’

आज शनिवार का दिन था, सुबह 9 बजे महेश कार में 2 बच्चों को बैठा कर उर्वशी को लेने उस के घर आ गया. उर्वशी के मम्मीपापा उसे नीचे ले कर खड़े महेश का इंतजार कर रहे थे. महेश ने कार में बैठेबैठे ही विवेक और विनीता को गुडमौर्निंग कहा.

वे कुछ पूछते उस से पहले ही महेश ने कहा, ‘‘उर्वशी बेटा जल्दी चलो देर हो रही है.’’

‘‘जी सर,’’ कह कर उर्वशी कार में बैठ गई.

तभी विनीता बोली, ‘‘सर ध्यान रखना उर्वशी का.’’

‘‘जी मैडम, आप चिंता न करें, मैं खुद उर्वशी को वापस छोड़ने भी आ जाऊंगा,’’ कह कर महेश ने कार चला दी.

कुछ दूर जा कर उस ने उन दोनों बच्चों को जो उस की पहचान के थे, उतार दिया.

इन बच्चों को वह यों ही घुमाने के लिए ले आया था ताकि उर्वशी के मातापिता ऐसा समझें कि दूसरे बच्चे भी साथ हैं.

अब कार में महेश और उर्वशी ही थे. उर्वशी ने पूछा, ‘‘सर वे दोनों बच्चे कहां गए?’’

‘‘उर्वशी, पहले कह रहे थे कि हमें भी चलना है खेलकूद देखने पर फिर पता नहीं क्यों कहने लगे हमें नहीं चलना, इसीलिए उन्हें छोड़ दिया.’’

महेश ने कार को काफी तेज रफ्तार से चला कर एक सुनसान रास्ते पर डाल दिया. नन्ही उर्वशी महेश के मन में चल रहे पाप से अनजान थी. इतना सोचनेसमझने की उस में बुद्धि ही नहीं थी. वह तो बाहर की तरफ देख कर खुश हो रही थी. उसे महेश सर पर विश्वास था, इसलिए डर का एहसास नहीं था. कुछ दूर जा कर महेश ने झडि़यों के बीच अपनी कार को रोक दिया.

यह देख उर्वशी ने कहा, ‘‘क्या हो गया सर? यहां तो जंगल जैसा दिख रहा है, हम यहां क्यों आए हैं?’’

‘‘उर्वशी लगता है, कार खराब हो गई है, तुम पीछे की सीट पर बैठ जाओ, मैं कार ठीक करता हूं.’’

उर्वशी बात मान कर पीछे की सीट पर जा कर बैठ गई. महेश इसी मौके की तलाश में था. वह भी जल्दी से पीछे आ कर बैठ गया.

महेश ने कहा, ‘‘उर्वशी, तुम मुझे बहुत प्यारी लगती हो, आओ मेरे पास आओ, मेरी गोदी में आ कर बैठ जाओ.’’

‘‘नहीं सर मुझे गोदी में नहीं बैठना,’’ उर्वशी ने जवाब दिया.

‘‘क्यों उर्वशी, क्या तुम अपने सर से प्यार नहीं करती? आ जाओ, मैं तुम्हें आज एक नया खेल सिखाऊंगा.’’

‘‘नहीं मैं गोदी में नहीं आऊंगी, मेरी मम्मी मना करती हैं.’’

उर्वशी के इनकार करने पर महेश उसे जबरदस्ती अपनी बांहों में भरने लगा.

उर्वशी चिल्लाई, ‘‘सर, मेरी मम्मी मना करती हैं… आप ने मुझे किस क्यों किया?’’

‘‘उर्वशी वह तो तुम्हारी मम्मा गंदे लोगों के लिए बोलती हैं, मैं तो तुम्हारा सर हूं न.’’ इतना कहतेकहते महेश आवेश में आ गया, छोटी सी उर्वशी और कुछ भी न कर सके, इसलिए अपने हाथों से उस के मुंह को बंद कर दिया. 6 फुट के ऊंचे पूरे जवान ने नन्ही सी बच्ची के कमजोर शरीर को अपने आगोश में भर लिया और जी भर कर उस के कमसिन नाजुक शरीर के साथ मनमानी कर अपनी महीनों की हवस को शांत करने लगा. उर्वशी दर्द से कराहती रही, छटपटाती रही, लेकिन कुछ कर नहीं पाई और कुछ कह भी नहीं पाई.

Monsoon Special: आंखों की सुरक्षा है जरुरी

अगर मौनसून में आंखों का ठीक प्रकार से ध्यान न रखा जाए तो उन में कई समस्याएं हो जाती हैं. मसलन, आंखों का सूजना, लाल होना, आंखों का संक्रमण भी हो सकता है. कंजक्टिवाइटिस, आई स्टाई, ड्राई आईज के साथसाथ कौर्नियल अल्सर होने का भी खतरा बढ़ जाता है.

मौनसून में होने वाली आंखों की प्रमुख समस्याएं हैं:

  1. कंजक्टिवाइटिस: कंजक्टिवाइटिस में आंखों के कंजक्टाइवा में सूजन आ जाती है. उन में जलन महसूस होती है. आंखों से पानी जैसा पदार्थ निकलने लगता है.

कारण: फंगस या वायरस का संक्रमण, हवा में मौजूद धूल या परागकण, मेकअप प्रोडक्ट्स.

उपचार: अगर आप कंजक्टिवाइटिस के शिकार हो जाएं तो हमेशा अपनी आंखों को ठंडा रखने के लिए गहरे रंग के ग्लासेज पहनें. अपनी आंखों को साफ रखें. दिन में कम से कम 3-4 बार ठंडे पानी के आंखों को छींटे दें. ठंडे पानी से आंखें धोने से रोगाणु निकल जाते हैं. अपनी निजी चीजें जैसे टौवेल, रूमाल आदि किसी से साझा न करें. अगर पूरी सावधानी बरतने के बाद भी आंखें संक्रमण की चपेट में आ जाएं तो स्विमिंग के लिए न जाएं. कंजक्टिवाइटिस को ठीक होने में कुछ दिन लगते हैं. बेहतर है कि किसी अच्छे नेत्ररोग विशेषज्ञ को दिखाया जाए और उचित उपचार कराया जाए.

2. कौर्नियल अल्सर: आंखों की पुतलियों के ऊपर जो पतली झिल्ली या परत होती है उसे कौर्निया कहते हैं. जब इस पर खुला फफोला हो जाता है, तो उसे कौर्नियल अल्सर कहते हैं. कौर्नियल अल्सर होने पर आंखों में बहुत दर्द होता है, पस निकलने लगता है, धुंधला दिखाई देने लगता है.

कारण: बैक्टीरिया, फंगस या वायरस का संक्रमण.

उपचार: यह आंखों से संबंधित एक गंभीर समस्या है. इस में डाक्टर से मिल कर तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है.

3. ड्राई आईज: इस में आंखें लगातार आंसुओं का निर्माण करती हैं ताकि उन में नमी बनी रहे और ठीक प्रकार से दिखाई दे. इस के कारण अंतत: आंसुओं का प्रवाह असंतुलित हो जाता है, जिस के कारण आंखें ड्राई हो जाती हैं. ड्राई आईज की समस्या हर मौसम में होती है, लेकिन बरसात में यह समस्या अधिक बढ़ जाती है.

कारण: हवा, धूल और ठंडी हवा के संपर्क में अधिक रहना.

उपचार: इस का सब से बेहतर उपचार डाक्टर द्वारा सुझाए आई ड्रौप्स का इस्तेमाल करना है. अगर समस्या तब भी बनी रहे तो तुरंत किसी अच्छे नेत्ररोग विशेषज्ञ को दिखाएं.

4. आई स्टाई: आई स्टाई को सामान्य बोलचाल की भाषा में आंख में फुंसी होना कहते हैं. यह मौनसून में आंखों में होने वाली एक प्रमुख समस्या है. यह समस्या पलकों पर एक छोटे उभार के रूप में होती है. आमतौर पर यह समस्या आंखों को गंदे हाथों से रगड़ने से होती है या फिर नाक के बाद तुरंत आंखों को छूने से भी होती है. कुछ बैक्टीरिया जो नाक में पाए जाते हैं वे भी आई स्टाई का कारण बनते हैं.

कारण: मौनसून में बैक्टीरिया का संक्रमण.

उपचार: आईड्रौप्स और दूसरी दवाएं

मौनसून में आंखों की सुरक्षा

  1. आंखों को छूने से पहले हमेशा अपने हाथ धोएं.
  2. जब भी बाहर जाएं अपने साथ ऐंटीबैक्टीरियल लोशन जरूर रखें.
  3.  अगर कौंटैक्ट लैंस लगाते हैं, तो किसी के भी साथ अपना लैंस सौल्यूशन साझा न करें.
  4. नाखून छोटे रखें, क्योंकि बड़े नाखूनों में धूल जमा हो जाती है, जो फिर जब आंखें सीधे हाथों के संपर्क में आती हैं, तो धूल उन में जा सकती है.
  5.  ऐक्सपाइरी डेट के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें.
  6. आंखों के संक्रमण के दौरान मेकअप प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें.
  7.  इस दौरान कौंटैक्ट लैंस न लगाएं.
  8.  धूल भरी आंधी, बारिश और तेज हवाओं से आंखों को सुरक्षित रखने के लिए ग्लासेज का इस्तेमाल करें.

Bigg Boss Ott 2: आकांक्षा पुरी-जद हदीद ने किया फ्रेंच किस, जद ने उठाए उनके किसिंग स्किल पर सवाल

Bigg Boss Ott 2 सीजन का अगाज तो हो चुका है. कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो होने की वजह से इस शो की खासी पॉपुलैरिटी है. बिग बॉस ओटीटी 2 फैंस के बीच धमाल मचा रहा है. शो सिर्फ जियो सिनेमा पर स्ट्रीम हो रहा है, इसके बावजूद दर्शकों का शो के भर-भरकर प्यार मिल रहा है.

वैसे तो बिग बॉस के कार्य आसान नहीं हैं और उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है. हालाँकि, आकांक्षा पुरी और जद हदीद ने अपनी टीम को हार से बचाने की चुनौती ली, और उन्होंने टास्क जीतने के लिए कड़ी मेहनत की.

गुरुवार को, टास्कमास्टर ने एक नए कार्य की घोषणा की, जिसमें घर को दो टीमों, टीम ए और टीम बी में विभाजित किया गया. प्रत्येक टीम को अन्य टीम के सदस्यों को कठिन कार्य देने होंगे, और उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि टीम के अन्य सदस्य इसमें विफल रहे. उन्हें डेयर दिया जाए.

टीम ए में पूजा भट्ट, फलक नाज़, अविनाश सचदेव, साइरस ब्रोचा और बेबिका धुर्वे शामिल हैं। टीम बी में अभिषेक मल्हान, आकांक्षा पुरी, मनीषा रानी, ​​जद हदीद और जिया शंकर हैं.

टीम ए ने आकांक्षा और जद को किस करने के लिए कहा तो उन्हें लगा कि वो मना कर देंगे. हालाँकि, जब आकांक्षा और जद ने कुछ सेकंड के लिए होंठ मिलाए और हिम्मत पूरी की तो सभी घरवाले दंग रह गए.

 

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जद हदीद ने कहा- आकांक्षा पुरी को Bad Kisser

जद और आकांक्षा के किस करने के तुरंत बाद, जद ने आकांक्षा के किसिंग स्किल का मज़ाक उड़ाते हुए लाइव फीड कैमरे पर कैद किया गया और यहां तक ​​कि उन्हें ‘खराब किसर’ भी कहा गया.

जद हदीद हुए ट्रोल

बीबी हाउस का ये वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया और नेटिज़न्स ने आकांक्षा पुरी का मजाक उड़ाने के लिए जद को ट्रोल किया. एक इंटरनेट यूजर ने लिखा, “ठरकी इंसान है ये जद लाइन मारता रहता है और बेशक आकांक्षा पुरी असहज महसूस कर रही थी है इस डेयर के लिए उन्होंने ये किया. मुंह पर अच्छा बोलकर पीछे बुरा कर रहा ये ठरकी.” एक अन्य नेटीजन ने लिखा, “जद खराब किसर है..आकांक्षा नहीं. मुंह धो कर आता पहले.” एक इंटरनेट यूजर ने लिखा, “मुझे जद से नफरत है. वह सबसे बड़ा पाखंडी है!” एक अन्य इंटरनेट यूजर ने लिखा, “और वह बार-बार आकांक्षा से कह रहा है कि वह एक अच्छी किसर है. भाई उस पल को खत्म कर देना चाहिए अब इस विषय को क्यों जारी रखें? शर्मनाक.”

जद ने कहा- 15 साल बाद की फ्रेंच किस

टास्क के कॉम्पटीशन के बाद जद ने कहा कि उन्होंने 15 साल बाद फ्रेंच किस किया है और वह ये कहकर खुद को सही ठहराने की कोशिश कर रहे थे कि आकांक्षा बुरी किसर नहीं हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें समझ नहीं आ रहा है.

Anupmaa: शाह परिवार ने दी शानदार बिदाई, बीबी की याद में तड़पा अनुज

अनुपमा धारावाहिक जबसे स्टार प्लास पर टेलीकस्ट हुआ है तभी से टीआरपी की लिस्ट में धूम मचा रहा है. इस सीरियल को धांसू बनाने के लिए मेकर्स आए दिन नया ट्विस्ट लेकर आते ही रहते हैं. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर इस सीरियल में अनुपमा के अमेरिका जाने से पहले शो में बवाल होने लगता है. जहां एक तरफ माया ड्रामा करती है वहीं अनुज अमेरिका जाने की सोचता है.

अनुपमा शाह परिवार से रोते हुए विदा लेगी

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि बा के साथ-साथ घर का हर सदस्य अनुपमा को गिफ्ट देता है. वनराज भी अनुपमा को घूंघरू देता है, जिसे देख अनुपमा हैरान रह जाती है. अनुपमा भी हर किसी के लिए चिट्ठी लिखकर लाती है, जिसमें उसकी दिल की बात लिखी होती है. वहीं जाते समय बा के साथ-साथ घर का हर सदस्य अनुपमा को नम आंखों से विदा करता है.

 

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अंकुश छोटी अनु को समझाता है

‘अनुपमा’ सीरियल में आगे देखने को मिलेगा कि अंकुश छोटी अनु को समझाता है वह अनुपमा को मुस्करातो हुए विदा करें. अंकुश अनु से कहेगा कि जब वह जा रही थी तो अनुपमा ने उसे अच्छे से विदा किया था. ऐसे में छोटी अनु को भी मुस्कुराते हुए अपनी मां को भेजना चाहिए. माया अंकुश और अनु की सारी बातें सुन लेती. माया का फिर पारा सांतवे आसमान पर पहुंच जाता है.

अनुपमा के इंतजार में तड़पेगा अनुज

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं होता. शो में आगे देखने को मिलेगा कि अनुज अनुपमा के आने का इंतजार करता है. वह बार-बार घड़ी देखेगा और कहेगा कि यह एक घंटा आज 26 साल के इंतजार से भी ज्यादा लंबा लग रहा है. अनुज की बेचैनी अनुपमा के लिए ये देखकर माया के तन-बदन में आग लगा देगी. अनुपमा की एंट्री से पहले ही कपाड़िया हाउस की लाइट्स जलने-बुझने लगेगी. यहां तक कि अनुपमा के लिए रखा गिफ्ट भी गिर जाएगा.

औकात: भाग 2- जब तन्वी के सामने आई पति की असलियत

उस दिन कमर दर्द की वजह से तन्वी की तबीयत कुछ ढीली थी. सो औफिस से लौट कर उस ने पदम से कहा, ‘‘पदम, आज मेरी कमर बहुत दुख रही है. आज जरा खाना बाहर से मंगवा लेते हैं.’’

‘‘यह क्या मजाक है तन्वी? यह रोजरोज तुम खाना नहीं बनाने के बहाने बना कर बैठ जाती हो. मैं आए दिन होटलों का खाना नहीं खा सकता. चलो, उठो और खाना बनाओ.’’

पदम की बातें सुन कर तन्वी को बहुत जोर से गुस्सा आ गया और वह झंझलाते हुए बोली, ‘‘तुम्हें क्या लगता है, मैं खाना बनाने से बचने के लिए बहाना बना रही हूं? मेरी कमर में असहनीय दर्द हो रहा है. मैं ने आज बैंक में कैसे ड्यूटी दी है, मैं ही जानती हूं. और हां, ये रोज रोज की चिकचिक मुझे बिलकुल पसंद नहीं. मैं बाहर

से खाना मंगा रही हूं. तुम मुझ पर यों अपनी मरजी नहीं थोप सकते. मैं तुम्हारी कोई जरखरीद गुलाम नहीं.’’

मगर पदम एक बेहद निरंकुश स्वाभाव का रोबीला इंसान था जो अपनी पत्नी से हर वक्त हुक्मउदूली की अपेक्षा रखता था. सो तन्वी के खाना बनाने से इनकार पर वह बुरी तरह से

भड़क गया और उस पर गुस्से में बरसने लगा, ‘‘अपनी ड्यूटी की धौंस तो दो मत. तुम्हारे जैसे 10 क्लर्क मेरे अंडर काम करते हैं. हो क्या तुम? आखिर तुम्हारी औकात क्या है? तुम लोगों का काम कोई काम है? मेरे ऊपर पूरी ब्रांच की जिम्मेदारी है. मुझे पूरे स्टाफ से काम लेना होता है. एक दिन भी मेरी तरह मैनेजरी करनी पड़े तो नानी याद आ जाए.’’

दोनों में खूब बहस हुई और आखिरकार तन्वी को रात का खाना बनाना ही पड़ा.

वक्त के साथ दोनों के मतभेद गहराने लगे. आए दिन पदम उस से उल?ाता और घर में कलहकलेश करता. उसे नीचा दिखाता. बातबात पर अपने ऊंचे पद का रोब गांठता और उस की नौकरी का मजाक उड़ाता. बेबस तन्वी को यह सबकुछ झेलना पड़ता. उसे समझ न आता कि क्या करे.

उस दिन छुट्टी का दिन था. पिछले कई दिनों से तन्वी पदम के साथ ऊनी कपड़ों की

शौपिंग के लिए बाजार जाने का प्रोग्राम बना रही थी. सो उस ने पदम से कहा, ‘‘मेरे ऊनी कपड़ों का स्टौक एकदम खत्म हो गया है. आज शाम को बाहर चलते हैं.’’

इस पर पदम ने उसी समय अपने एक घनिष्ठ मित्र के परिवार को घर पर डिनर के

लिए यह कहते हुए इन्वाइट कर लिया कि वह फ्रैंड बहुत दिनों से उस के घर डिनर पर आने

के लिए पीछे पड़ा हुआ है. उस ने तन्वी से कहा कि वह उसे अगले संडे शौपिंग पर जरूर ले जाएगा.

जाहिर है, पदम की इस बात से तन्वी बहुत आहत हुई और वह उस पर यों अचानक बिना किसी प्लानिंग के उस के दोस्त को घर पर आमंत्रित करने पर बहुत ?ाल्लाई. उस दिन उस

ने बहुत ?ांकते खाना बनाया और मेहमानों को अटैंड किया.

आगंतुकों के जाने के बाद मन का असंतोष आंखों की राह बह निकला.

रोतेसुबकते उस ने पदम को खूब सुनाया

कि उसे उस की बिलकुल परवाह नहीं और वह एक बेहद इंसैंसिटिव हसबैंड साबित हो रहा है, जिस के साथ हंसीखुशी जिंदगी बिताना लगभग असंभव है. उस दिन उस ने पदम को पहली बार चेतावनी दी कि यदि उस ने उस के प्रति अपना रवैया नहीं बदला तो मजबूरन उसे उस से अलग हो कर जिंदगी बिताने के बारे में सोचना पड़ेगा, लेकिन पौरुषवादी तानाशाह स्वाभाव वाले पदम पर इस बात का कोई असर नहीं हुआ.

अगले संडे शौपिंग पर जाने पर एक मौल में गरम कपड़ों की शौपिंग करते वक्त उन में मामूली सी ?ाड़प हुई और दोनों के मध्य उस मामूली सी बहस ने देखतेदेखते उग्र रूप धारण कर लिया, जिस की परिणति पदम के तन्वी को मौल में अकेला छोड़ कर आने में हुई. रात के 9 बजे तन्वी बड़ी मुश्किल से अकेली घर पहुंची.

इस बार तन्वी की सहनशक्ति जवाब दे

गई और उस ने भी पदम को कस कर खरीखोटी सुनाई.

रात का 1 बज रहा था, लेकिन आज उस की आंखों में नींद नहीं थी. आज पदम के इस

रवैये ने उस के जेहन में खतरे की घंटी बजा दी. वह बैड पर करवटें बदल रही थी. पछता रही थी क्यों उस ने पदम जैसे बड़बोले, बातबात पर रोब जमाने वाले इंसान को अपनी शौपिंग में शामिल किया? उस के स्वाभाव को जानतेबूझते उसे अपना लाइफपार्टनर बनाया. इस से तो अच्छा होता सजल के शादी से इनकार करने पर वह कुंआरी ही रह जाती.

आज तन्वी को सजल के साथ बीता वक्त शिद्दत से याद आ रहा था. कितना केयरिंग था वह. उस की हर ख्वाहिश को पूरा करने में

जीजान लगा देता था. उस ने कभी उसे भूल कर भी अपमानित नहीं किया. सदैव उस का मान किया. उस की कद्र की. पदम की तरह कभी

उसे नीचा नहीं दिखाया और न कभी उस पर पदम की तरह रोब जमाया. सजल के बारे में सोचतेविचारते कब उस की आंख लग गई, उसे पता न चला.

पदम के साथ इस रोजरोज की अशांति से तन्वी बेहद परेशान रहने लगी. आए दिन के ?ागड़े उस की मानसिक शांति भंग करने लगे और इस का प्रभाव उस के स्वास्थ्य पर पड़ने लगा. वह अवसाद से घिरने लगी.

एक दिन तो हद ही हो गई. वे दोनों बैंक के किसी बड़े फंक्शन में गए हुए थे. खानेपीने का दौर चल रहा था. उन के बैंक के एक उच्च पदाधिकारी बहुत शौकीन मिजाज इंसान थे. पदम और बैंक के कुछ अन्य उच्च पदाधिकारियों के साथ पैग पर पैग चढ़ाए जा रहे थे. तभी उन की नजर एक कोने में बैठी तन्वी पर पड़ी. सुरुचिपूर्ण सोबर सजधज में वह बेहद खूबसूरत और कमनीय लग रही थी. अपनी रंगीनमिजाजी से मजबूर उन्होंने तन्वी से पूछा, ‘‘मैडम आप का परिचय?’’

‘‘जी मैं बैंक में कार्यरत हूं.’’

‘‘ओह, तब तो आप अपनी ही बिरादरी

की हैं.’’

अपने बौस को तन्वी से बात करते देख पदम दौड़ादौड़ा उन के पास गया और उस ने पत्नी का परिचय उन से कराया, ‘‘सर, यह मेरी वाइफ है.’’

‘‘ओह, ये आप की बैटरहाफ हैं? आई मस्ट से, यू आर इंडीड वैरी लकी तो हैव सच अ ब्यूटीफुल वाइफ यंग मैन.’’

फिर तन्वी की ओर मुखातिब होते हुए उन्होंने उस से कहा, ‘‘आप यहां अकेली कोने में बैठीबैठी क्या कर रही हैं… आइए हमारे साथ बैठिए. ड्रिंक्स बगैरा लीजिए. कुछ अपनी कहिए, कुछ हमारी सुनिए.’’

 

Monsoon Special: बारिश के मौसम में अपनी त्वचा की देखभाल कैसे करें?

मानसून के मौसम में अपनी त्वचा की देखभाल करना महत्वपूर्ण है. मानसून के मौसम में त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में आपकी मदद के लिए यहां कुछ टिप्स दिए गए हैं जिन्हें आप फॉलो कर सकते है.

  1. अपना चेहरा नियमित रूप से साफ करें

फेस पर मौजूद तेल, गंदगी और पसीने को हटाने के लिए किसी सौम्य क्लींजर से दिन में दो बार अपना चेहरा धोएं. ऐसे क्लीन्ज़र का इस्तेमाल करें जो आपकी त्वचा के प्रकार के अनुरूप हो और ड्राई न हो.

2. एक्सफोलिएट करें

त्वचा की मृत कोशिकाओं से छुटकारा पाने और रोमछिद्रों हटाने के लिए सप्ताह में एक या दो बार हल्के एक्सफोलिएटर का उपयोग करें. यह ब्रेकआउट को रोकने और आपकी त्वचा को ताज़ा रखने में मदद करेगा.

3. पर्याप्त रूप से मॉइस्चराइज़ करें 

बरसात के मौसम में नमी अधिक होती है, भले ही नमी हो, फिर भी अपनी त्वचा को मॉइस्चराइज़ करना न छोड़ें. एक हल्का, तेल-मुक्त मॉइस्चराइज़र चुनें जो आपकी त्वचा को चिकना महसूस कराए बिना हाइड्रेशन प्रदान करें. उन जगहों पर मॉइस्चराइज़र अप्लाई करें जो जल्दी ड्राई हो जाते हैं, जैसे गाल और कोहनी.

4. सनस्क्रीन है जरूरी

Monsoon सीजन में अक्सर बादल छाए रहते है, बादल वाले दिनों में भी सनस्क्रीन लगाना न भूलें. सूरज की हानिकारक किरणें बादलों के माध्यम से प्रवेश कर सकती हैं और आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं. कम से कम 30 एसपीएफ वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें और इसे अपने शरीर के सभी खुले जगहों पर लगाएं.

5. अत्यधिक ऑयली स्किन को नियंत्रित करें

यदि आपकी त्वचा ऑयली है, तो आप मौनसून के दौरान ऑयली स्किन में वृद्धि देख सकते हैं. अपनी त्वचा को पूरे दिन जवां बनाए रखने के लिए तेल सोखने वाले फेस वाइप्स या ब्लॉटिंग पेपर का उपयोग करें. अधिक, ऑयली-आधारित ब्यूटी प्रोडक्ट्स से बचें और इसके बजाय वाटर-बेस्ड या पाउडर-बेस्ड उत्पादों का चयन करें.

6. अपना चेहरा छूने से बचें

आपके हाथ विभिन्न सतहों के संपर्क में आते हैं और उनमें कीटाणु और बैक्टीरिया हो सकते हैं. इन सूक्ष्मजीवों के स्थानांतरण को रोकने के लिए अपने चेहरे को बार-बार छूने से बचें, जिससे ब्रेकआउट या इंफेक्शन हो सकता है.

एक डाली के फूल: किसके आने से बदली हमशक्ल ज्योति और नलिनी की जिंदगी?

Monsoon Special: मौनसून में रखें डाइजेशन का खास ख्याल

बरसात का मौसम दस्तक दे चुका है. बदलते मौसम के प्रभाव से बौडी इफेक्टअप्रभावित हुए बिना नहीं रहता. मौसम में बदलाव के साथ इम्यून सिस्टम और डाइजेशन में बदलाव होने लगता है. इस दौरान अपच से लेकर फूड पौइजनिंग, डायरिया जैसी कई हेल्थ प्रौब्लम का सामना करना पड़ता है. बरसात में सेहतमंद रहने के लिए विशेष सावधानियां रखनी चाहिए.

हेल्थ पाचन प्रणाली वही है, जो खाना को पचाए, पोषक पदार्थों को बौडी में अवशोषित करे और अवांछित पदार्थों को बौडी से बाहर निकाले. तभी बौडी की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है.

हमारे पेट में मौजूद पाचक एंजाइम्स और एसिड खाए गए खाना को तोड़ते हैं. तभी पोषक पदार्थ बौडी में अवशोषित हो पाते हैं जो खाना पेट में पूरी तरह नहीं पचता है वह बौडी के लिए बेकार होता है. खाने के अच्छी तरह पचने की शुरुआत मुंह से होती है. जी हां, सही ढ़ंग से चबाया गया खाना ही अच्छे से पच पाता है, क्योंकि इससे खाना छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट कर लार में मिल जाता है. फिर पेट में ये छोटे-छोटे लार मिले टुकड़े अच्छी तरह टूट जाते हैं और बौडी को पोषण देने के लिए छोटी आंत में पहुंचते हैं.

अत: आपको न केवल सही खाना चुनना होगा, उसे अच्छी तरह चबाना भी होगा और आप का पाचनतंत्र भी इस काबिल होना चाहिए कि वह उसे अच्छी तरह तोड़ कर पोषक पदार्थों को अवशोषित कर सके. अगर हम जल्दीजल्दी में खाना निगलते हैं, हम खाने के साथ पानी भी पीते हैं तो ऐसा करना खाना को पेट में ठीक से टूटने नहीं देगा. ऐसे में बेहतर यही है कि खाना खाने से कम से कम 30 मिनट पहले व 30 मिनट बाद में ही पानी पीएं.

1. डाइजेशन धीमा होना

मौनसून में जठराग्नि मंद पड़ जाती है, जिससे डाइजेशन प्रोसेस प्रभावित होती है. बरसात के पानी और कीचड़ से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहते हैं जिससे शारीरिक सक्रियता कम हो हो जाती है. यह भी पाचनतंत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है. इससे बचने के लिए हल्के संतुलित और पोषक खाना का सेवन करें. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. अगर बारिश के कारण आप टहलने नहीं जा पा रहे हैं या जिम जाने में परेशानी हो रही है तो घर पर ही वर्कआउट करें.

2. मौनसून में इनडाइजेशन होना आम बात

बरसात में डाइजेशन एंजाइमों की कार्य प्रणाली प्रभावित होती है. इससे भी खाना ठीक प्रकार से नहीं पचता. बरसात में औयली, मसालेदार खाना और कैफीन का सेवन भी बढ़ जाता है. इससे भी इनडाइजेशन की प्रौब्लम हो जाती है. नम मौसम में सूक्ष्म जीव ज्यादा मात्रा में पनपते हैं. इनसे होने वाले संक्रमण से भी अपच की प्रौब्लम अधिक होती है.

 3. खराब पानी से होने वाली बिमारी है डायरिया

डायरिया एक खराब पानी से होने वाली बिमारी है. यह दूषित खाद्य पदार्थों और जल पीने से होता है. वैसे तो यह किसी को कभी भी हो सकता है, लेकिन बरसात में इसके मामले काफी बढ़ जाते हैं. दस्त लगना इस का सब से प्रमुख लक्षण है. पेट में दर्द और मरोड़, बुखार, मल में रक्त आना, पेट फूलना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं. फूड पौइजनिंग के कारण भी डायरिया हो जाता है.

4. मौनसून में फूड पौइजनिंग में रखें खास ध्यान

फूड पौइजनिंग तब होती है जब हम ऐसे खाना का सेवन करते हैं जो बैक्टीरिया, वाइरस, दूसरे रोगाणुओं या विषैले तत्त्वों से संक्रमित होता है. बरसात के मौसम में आर्द्रता और कम टैम्प्रेचर के कारण रोगाणुओं को पनपने के लिए उपयुक्त वातावरण मिल जाता है. इसके अलावा बरसात में कीचड़ और कचरे के कारण जगह-जगह गंदगी फैल जाती है, इस से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि बरसात में फूड पौइजनिंग के मामले भी बढ़ जाते हैं. इस मौसम में बाहर का खाना खाने या फिर अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन से भी फूड पौइजनिंग की आशंका बढ़ जाती है.

5. खानपान का रखें खास ध्यान

बरसात में डाइजेशन को दुरुस्त रखने और बीमारियों से बचने के लिए इन बातों का खयाल रखें:

– संतुलित, पोषक और सुपाच्य खाना कासेवन करें.

– कच्चे खा-पदार्थ नमी को बहुत शीघ्रता से अवशोषित कर लेते हैं, इसलिए ये बैक्टीरिया के पनपने के लिए आदर्श स्थान होते हैं. अत: बेहतर यही रहेगा कि कच्ची सब्जियां इत्यादि न खाएं. सलाद के रूप में भी नहीं. इस मौसम में फफूंद जल्दी पनपती है, इसलिए ब्रैड, पाव आदि खाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उनमें कहीं फफूंद तो नहीं लगी है.

– सड़क किनारे के ढाबों पर न खाएं, क्योंकि इस तरह के खाना से संक्रमण का खतरा अधिक होता है.

– ऐसा खाना खाएं, जिससे ऐसिडिटी कम से कम हो.

– बारिश के मौसम में मांस, मछली, मीट खाने से फूड पौइजनिंग की आशंका बढ़ जाती है. इस मौसम में कच्चा अंडा और मशरूम खाने सेभी बचें.

– बरसात में तला खाना खाने को मन तो बहुत करता है लेकिन उस से दूर रहना ही बेहतर है, क्योंकि इस से पाचन क्षमता कम होती है. कम मसाले और तेल वाला खाना पाचन प्रौब्लमओं से बचाता है.

– अधिक नमक वाले खा-पदार्थ जैसे अचार, सौस आदि न खाएं या फिर कम खाएं, क्योंकि ये बौडी में पानी को रोकते हैं जिस से पेट फूलता है.

– फलों और सब्जियों के जूस का भी कम मात्रा में सेवन करें.

– ओवर ईटिंग से बचें. तभी खाएं जब भूख महसूस करें.

– ठंडे और कच्चे खाना के बजाय गरम खाना जैसे सूप, पका खाना खाएं.

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